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  • पायलटों के लिए सालाना डोप टेस्ट अनिवार्य करने पर विचार, सरकार ने विमानन सुरक्षा नियमों के विस्तार के संकेत दिए

    पायलटों के लिए सालाना डोप टेस्ट अनिवार्य करने पर विचार, सरकार ने विमानन सुरक्षा नियमों के विस्तार के संकेत दिए


    नई दिल्ली ।
    केंद्र सरकार देश में विमानन सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए सभी पायलटों के वार्षिक डोप टेस्ट को अनिवार्य बनाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने मंगलवार को बताया कि वर्तमान नियमों के तहत पूरे पायलट नेटवर्क में केवल 10 प्रतिशत पायलटों का सालाना डोप टेस्ट अनिवार्य है। सरकार अब इस दायरे को बढ़ाने के संभावित प्रभावों का आकलन कर रही है।

    मंत्री के अनुसार, नागर विमानन महानिदेशालय सभी पक्षकारों के साथ इस विषय पर विचार कर रहा है कि प्रत्येक पायलट का साल में कम से कम एक बार डोप टेस्ट कराया जाए। अंतिम निर्णय से पहले प्रस्ताव के सुरक्षा संबंधी लाभों और विमानन संचालन पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन किया जाएगा।

    राम मोहन नायडू ने स्पष्ट किया कि नियमों में संभावित बदलाव पर चल रही चर्चा इस महीने हुई एयर इंडिया की एक उड़ान घटना की जांच से अलग है। सरकार का उद्देश्य विमानन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों को मजबूत करना है और इसके लिए मौजूदा प्रक्रियाओं की समीक्षा की जा रही है।

    यह प्रस्ताव एयर इंडिया की फुकेत से दिल्ली जा रही उड़ान एआई2379 से जुड़ी घटना के बाद सामने आया है। 4 अगस्त को उड़ान के दौरान विमान की ऊंचाई हाइड्रोलिक प्रणाली में खराबी के कारण करीब 300 फीट कम हो गई थी। हालांकि बाद में विमान स्थिर हो गया और दिल्ली में सुरक्षित रूप से उतर गया। घटना में केबिन क्रू के सदस्यों समेत कम से कम 17 लोग घायल हुए थे।

    घटना के बाद पायलटों की ड्रग स्क्रीनिंग व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे। पायलट-इन-कमांड का कन्फर्मेटरी ड्रग टेस्ट मारिजुआना के लिए पॉजिटिव आने के बाद निगरानी को लेकर चर्चा तेज हुई। इसके बाद एयर इंडिया ने अपने पायलटों की ड्रग स्क्रीनिंग का दायरा बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू की।

    बढ़ी हुई जांच के दौरान दो अन्य पायलट शुरुआती ड्रग टेस्ट में फेल पाए गए। कन्फर्मेटरी टेस्ट के परिणाम आने तक दोनों को एहतियात के तौर पर उड़ान ड्यूटी से हटा दिया गया। एयरलाइन की विस्तारित जांच प्रक्रिया के तहत अब तक करीब 400 पायलटों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है।

    घटना से जुड़ी तकनीकी जांच भी जारी है। एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो विमान के फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और अन्य प्रणालियों की जांच कर रहा है। नागर विमानन मंत्री ने संकेत दिया कि घटना को लेकर शुरुआती रिपोर्ट जल्द सामने आ सकती है। जांच के निष्कर्षों से घटना के तकनीकी और संचालन संबंधी पहलुओं को समझने में मदद मिलेगी।

    इस बीच फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने पायलटों की ड्रग जांच के लिए वैकल्पिक तकनीक पर विचार करने का सुझाव दिया है। संगठन ने लार या ओरल-फ्लूइड आधारित परीक्षण की संभावनाओं पर ध्यान देने की अपील की है। ऐसे तरीके कुछ देशों में इस्तेमाल किए जाते हैं और इन्हें लेकर नियामकीय स्तर पर चर्चा की जा रही है।

    वार्षिक डोप टेस्ट का दायरा बढ़ाने का निर्णय लागू होने पर पायलटों की नियमित निगरानी व्यवस्था में बड़ा बदलाव हो सकता है। हालांकि सरकार अंतिम फैसला सुरक्षा लाभ, परिचालन प्रभाव और परीक्षण व्यवस्था की व्यावहारिक जरूरतों को ध्यान में रखकर करेगी। विमानन क्षेत्र में यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए नियमों को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

  • विमान चालकों के लिए कड़े होंगे नियम, गांजा कांड के बाद सरकार और एयर इंडिया ने बढ़ाई सख्ती

    विमान चालकों के लिए कड़े होंगे नियम, गांजा कांड के बाद सरकार और एयर इंडिया ने बढ़ाई सख्ती

    नई दिल्ली । हजारों फीट की ऊंचाई पर यात्रियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नागरिक उड्डयन मंत्रालय और नागर विमानन महानिदेशालय ने बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में घटित एक गंभीर विमान दुर्घटना के बाद सरकार ने सभी एयरलाइंस के फ्लाइट क्रू और विमान चालकों के मादक पदार्थ परीक्षण को और अधिक सख्त करने का निर्णय लिया है। इसके तहत अब आकस्मिक ड्रग टेस्ट के दायरे को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत से अधिक करने की योजना बनाई जा रही है।

    यह प्रशासनिक पहल फुकेत से नई दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान संख्या एआई 2379 में हुई एक गंभीर घटना के बाद सामने आई है। उड़ान के दौरान विमान में अचानक तेज हलचल हुई और वह हवा में लगभग 300 फीट नीचे आ गया। इस हादसे में तीन शिशुओं सहित 137 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों में से कई लोग घायल हो गए थे। जांच के दौरान मुख्य विमान चालक के शरीर में भांग या गांजे जैसे वर्जित नशीले पदार्थ की पुष्टि हुई थी।

    विमानन सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर मामले को देखते हुए विमान सेवा कंपनी एयर इंडिया ने अपने सभी पायलटों की अनिवार्य जांच शुरू करने का निर्णय लिया है। कंपनी के उड़ान परिचालन विभाग ने सभी पायलटों को निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि वर्जित दवाओं और मादक पदार्थों के सेवन की जांच अब शत-प्रतिशत चालकों के लिए लागू होगी। यह प्रक्रिया कंपनी की गुरुग्राम अकादमी, फ्लाइट ब्रीफिंग सेंटर और संबंधित एयरलाइंस कार्यालयों में संचालित की जा रही है।

    विमानन नियामक डीजीसीए द्वारा सितंबर 2021 में मादक पदार्थों की जांच से संबंधित नियम जारी किए गए थे, जिन्हें जनवरी 2022 से प्रभावी रूप से लागू किया गया था। वर्तमान नियमों में औचक जांच का प्रावधान है, लेकिन हालिया सुरक्षा चूक को देखते हुए केंद्र सरकार नियमों को अधिक कठोर बनाने पर विचार कर रही है। नए प्रस्ताव के तहत परीक्षणों की आवृत्ति और जांच का दायरा काफी हद तक बढ़ा दिया जाएगा।

    मध्य प्रदेश सहित देश भर के प्रमुख हवाई अड्डों पर परिचालन करने वाले उड़ानों में भी यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। नागरिक उड्डयन क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि क्रू सदस्यों के नियमित और आकस्मिक परीक्षण से उड़ानों की सुरक्षा व्यवस्था अधिक मजबूत होगी और इस प्रकार की लापरवाही पर पूर्ण विराम लग सकेगा।

    विमानन मंत्रालय और संबंधित एयरलाइंस का मानना है कि यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। जांच की नई व्यवस्था से न केवल एयरलाइंस के अनुशासन में सुधार होगा, बल्कि उड़ानों के दौरान यात्रियों का विश्वास भी पुनः मजबूत होगा। सरकार आने वाले दिनों में इस संबंध में नई मानक संचालन प्रक्रिया जारी कर सकती है।

  • फुकेट-दिल्ली फ्लाइट के कैप्टन के डोप टेस्ट ने बढ़ाई चिंता, 300 फीट नीचे आने के बाद जांच में नया मोड़

    फुकेट-दिल्ली फ्लाइट के कैप्टन के डोप टेस्ट ने बढ़ाई चिंता, 300 फीट नीचे आने के बाद जांच में नया मोड़


    नई दिल्ली । 
    फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की एक फ्लाइट में हुई तेज टर्बुलेंस की घटना की जांच के बीच मामले में नया पहलू सामने आया है। 4 अगस्त को हुई इस घटना के बाद विमान के कैप्टन का साइकोएक्टिव पदार्थों के सेवन को लेकर पोस्ट-फ्लाइट स्क्रीनिंग टेस्ट किया गया था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक टेस्ट में कैप्टन के पॉजिटिव पाए जाने की बात सामने आई है। हालांकि एयरलाइन ने इस नतीजे की पुष्टि या खंडन नहीं किया है।

    एयर इंडिया के मुताबिक संबंधित फ्लाइट के क्रू सदस्यों का तय नियमों के तहत फ्लाइट के बाद स्क्रीनिंग टेस्ट किया गया था। एयरलाइन का कहना है कि इन टेस्ट के नतीजे उसके साथ साझा नहीं किए गए हैं। इसलिए कंपनी फिलहाल किसी निष्कर्ष पर टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं है। एयरलाइन ने यह भी कहा है कि जरूरत पड़ने पर वह संबंधित अधिकारियों की जांच में पूरा सहयोग जारी रखेगी।

    यह वही एयरबस A320 विमान था, जिसमें कुल 145 लोग सवार थे। यात्रा के दौरान ओडिशा के पास विमान को तेज एयर टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा। झटकों के दौरान विमान अचानक करीब 300 फीट नीचे की ओर चला गया। घटना के बाद यात्रियों में अफरा-तफरी की स्थिति बनी और कई लोगों को चोटें आईं।

    दिल्ली पहुंचने के बाद 13 यात्रियों और चार क्रू सदस्यों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। घटना के बाद विमान की उड़ान, टर्बुलेंस की प्रकृति और क्रू द्वारा स्थिति को संभालने के तरीके समेत कई पहलुओं पर सवाल उठे। अब कैप्टन के कथित पॉजिटिव डोप टेस्ट ने जांच के दायरे में एक और महत्वपूर्ण पहलू जोड़ दिया है।

    नागरिक उड्डयन महानिदेशालय इस पूरे मामले की जांच कर रहा है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि टर्बुलेंस किस वजह से हुआ और क्या मौसम संबंधी परिस्थितियां इसकी वजह थीं। इसके अलावा विमान पर टर्बुलेंस के संभावित तकनीकी प्रभाव की भी जांच की जा रही है। इसमें यह भी देखा जा रहा है कि झटकों के कारण किसी हाइड्रोलिक सिस्टम पर असर पड़ा था या नहीं।

    जांच का एक अहम हिस्सा यह भी है कि टर्बुलेंस के बाद विमान को दिल्ली तक ले जाना उचित निर्णय था या उसे किसी नजदीकी हवाई अड्डे पर उतारा जाना चाहिए था। वाराणसी और लखनऊ जैसे वैकल्पिक हवाई अड्डों पर विमान को डायवर्ट किए जाने की संभावना पर भी जांच में विचार किया जा रहा है।

    नियमों के तहत जांच पूरी होने तक संबंधित फ्लाइट क्रू को उड़ान ड्यूटी से हटाया जाता है। इस मामले में भी पायलट फिलहाल उड़ान नहीं भर रहे हैं। साइकोएक्टिव पदार्थों से जुड़े डोप टेस्ट के नियमों के अनुसार पहली बार पॉजिटिव पाए जाने वाले क्रू सदस्य को नशामुक्ति और पुनर्वास प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। इसके बाद निगेटिव टेस्ट रिपोर्ट मिलने पर ही सक्रिय ड्यूटी पर लौटने की अनुमति मिल सकती है।

    अगर उड़ान ड्यूटी पर लौटने के बाद वही व्यक्ति दूसरी बार ऐसे पदार्थों के लिए पॉजिटिव पाया जाता है, तो उसके लाइसेंस को तीन साल के लिए निलंबित किया जा सकता है। तीसरी बार पॉजिटिव पाए जाने की स्थिति में फ्लाइंग लाइसेंस रद्द किए जाने का प्रावधान है।

    अंतरराष्ट्रीय विमानन मानकों के अनुसार किसी भी लाइसेंसधारी पायलट को ऐसे साइकोएक्टिव पदार्थों के प्रभाव में उड़ान संचालन नहीं करना चाहिए, जिनसे सुरक्षित और जिम्मेदारी के साथ विमान उड़ाने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। अब इस मामले में टर्बुलेंस की वजह, विमान की तकनीकी स्थिति और कैप्टन के कथित डोप टेस्ट समेत सभी पहलुओं की जांच के बाद ही पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।

  • घरेलू एविएशन सेक्टर में सुस्ती, जून में यात्री घटे, IndiGo रही सबसे मजबूत, DGCA रिपोर्ट में सामने आए नए आंकड़े

    घरेलू एविएशन सेक्टर में सुस्ती, जून में यात्री घटे, IndiGo रही सबसे मजबूत, DGCA रिपोर्ट में सामने आए नए आंकड़े

    नई दिल्ली । देश के घरेलू विमानन क्षेत्र में जून 2026 के दौरान यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, जून में घरेलू एयरलाइंस ने लगभग 1.35 करोड़ यात्रियों को सेवाएं दीं, जबकि मई में यह आंकड़ा 1.53 करोड़ था। इस प्रकार एक महीने के भीतर यात्री संख्या में करीब 12 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। हालांकि पिछले वर्ष जून के मुकाबले यह गिरावट बेहद सीमित रही, जिससे संकेत मिलता है कि घरेलू विमानन बाजार अभी भी स्थिर गति से आगे बढ़ रहा है।

    विमानन क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि जून, जुलाई और अगस्त का समय आमतौर पर घरेलू एयरलाइंस के लिए अपेक्षाकृत धीमा रहता है। गर्मी की छुट्टियां समाप्त होने और व्यावसायिक यात्राओं में कमी आने के कारण इस अवधि में यात्रियों की संख्या स्वाभाविक रूप से घटती है। इसके बावजूद एयरलाइंस परिचालन क्षमता और सेवा गुणवत्ता बनाए रखने पर लगातार ध्यान दे रही हैं।

    जून के आंकड़ों में सबसे बड़ी बढ़त देश की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo को मिली है। कंपनी की बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 66.3 प्रतिशत पहुंच गई, जो मई में 64.9 प्रतिशत थी। इससे स्पष्ट है कि प्रतिस्पर्धी माहौल के बावजूद कंपनी ने यात्रियों का भरोसा बनाए रखा और अपने नेटवर्क का प्रभावी संचालन जारी रखा। दूसरी ओर एयर इंडिया समूह की बाजार हिस्सेदारी घटकर 23.9 प्रतिशत रह गई, जो पिछले महीने 25.6 प्रतिशत थी। अकासा एयर ने भी बेहतर प्रदर्शन करते हुए अपनी हिस्सेदारी 6.4 प्रतिशत तक पहुंचा दी, जबकि स्पाइसजेट की हिस्सेदारी घटकर 1.9 प्रतिशत रह गई।

    DGCA की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से जून 2026 के बीच घरेलू एयरलाइंस से यात्रा करने वाले यात्रियों की कुल संख्या 864.04 लाख रही। पिछले वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 851.74 लाख था। इस प्रकार वार्षिक आधार पर 1.44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो यह दर्शाती है कि लंबी अवधि में घरेलू विमानन क्षेत्र में मांग बनी हुई है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और ईंधन की कीमतों में वृद्धि के कारण कुछ एयरलाइंस ने अस्थायी रूप से अपने नेटवर्क में कटौती की थी, जिसका असर जून के परिचालन पर भी दिखाई दिया।

    समय पर उड़ानों के संचालन के मामले में भी IndiGo सबसे आगे रही। जून में कंपनी का ऑन-टाइम परफॉर्मेंस (OTP) 89.4 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसके बाद एयर इंडिया समूह 85.9 प्रतिशत, अकासा एयर 82.7 प्रतिशत, अलायंस एयर 74.7 प्रतिशत और स्पाइसजेट 33.5 प्रतिशत के साथ क्रमशः अगले स्थानों पर रहे। यह मूल्यांकन देश के प्रमुख हवाई अड्डों पर निर्धारित मानकों के आधार पर किया गया।

    रिपोर्ट में यात्रियों को हुई असुविधाओं से जुड़े आंकड़े भी सामने आए हैं। जून के दौरान कुल उड़ान रद्द होने की दर 0.63 प्रतिशत रही। उड़ानें रद्द होने से प्रभावित 43,968 यात्रियों के मुआवजे और आवश्यक सुविधाओं पर एयरलाइंस ने लगभग 61.98 लाख रुपये खर्च किए। वहीं, उड़ानों में देरी से प्रभावित 1.10 लाख से अधिक यात्रियों की सहायता के लिए लगभग 2.85 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसके अलावा 1,847 यात्रियों को विभिन्न कारणों से बोर्डिंग नहीं मिल सकी, जिनके मुआवजे और सुविधाओं पर एयरलाइंस ने 64.84 लाख रुपये व्यय किए। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि यात्री सुविधा और परिचालन गुणवत्ता को लेकर विमानन कंपनियों पर लगातार निगरानी बनी हुई है।

  • फ्लाइट कैंसिल पड़ी भारी पूर्व कुलपति ने एयरलाइन पर ठोका 50 लाख का दावा

    फ्लाइट कैंसिल पड़ी भारी पूर्व कुलपति ने एयरलाइन पर ठोका 50 लाख का दावा


    भोपाल । भोपाल में एयरलाइन सेवाओं को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है जहां फ्लाई ओला एयरलाइंस पर सेवा में कमी और यात्रियों को परेशान करने के आरोप में 50 लाख रुपये का दावा ठोका गया है। यह दावा कमलाकर सिंह द्वारा उपभोक्ता आयोग में दायर किया गया है जिससे एयरलाइन सेक्टर में हलचल मच गई है।

    पूर्व कुलपति कमलाकर सिंह ने एयरलाइन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी यात्रा के दौरान न केवल लापरवाही बरती गई बल्कि उन्हें मानसिक रूप से भी काफी परेशान किया गया। इस मामले की सुनवाई अब 21 अप्रैल को उपभोक्ता आयोग में तय की गई है जहां दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी।

    शिकायत के अनुसार कमलाकर सिंह ने 22 मार्च को रीवा से भोपाल के लिए टिकट बुक कराया था और 26 मार्च की उड़ान के लिए उनका टिकट कन्फर्म था। तय समय पर वे रीवा एयरपोर्ट पहुंच गए लेकिन उन्हें लंबे समय तक इंतजार कराया गया। बाद में एयरलाइन की ओर से तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए फ्लाइट रद्द कर दी गई।

    सबसे गंभीर बात यह रही कि एयरलाइन ने यात्रियों को समय रहते कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई। इससे यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। कमलाकर सिंह को मजबूरी में निजी वाहन से करीब 10 से 12 घंटे का लंबा और थकाऊ सफर तय कर भोपाल पहुंचना पड़ा।

    इस दौरान उन्हें न केवल शारीरिक कष्ट झेलना पड़ा बल्कि आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि एयरलाइन ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के दिशा निर्देशों का भी पालन नहीं किया जो यात्रियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं।

    उपभोक्ता आयोग में दायर इस मामले में सेवा में कमी के साथ साथ मानसिक उत्पीड़न को भी आधार बनाया गया है। यदि आयोग इस मामले में शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला देता है तो यह एयरलाइंस कंपनियों के लिए एक बड़ा संदेश होगा कि यात्रियों की सुविधाओं और अधिकारों की अनदेखी करना महंगा पड़ सकता है।

    यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या एयरलाइंस कंपनियां यात्रियों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभा रही हैं या नहीं। अब सभी की नजर 21 अप्रैल को होने वाली सुनवाई पर टिकी हुई है जहां इस पूरे विवाद पर महत्वपूर्ण फैसला आ सकता है।

  • अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच एयरलाइन्स को मिली राहत, DGCA की नई गाइडलाइन जारी!

    अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच एयरलाइन्स को मिली राहत, DGCA की नई गाइडलाइन जारी!


    नई दिल्ली। ईरान युद्ध के कारण मिडिल ईस्ट के कई देशों का एयरस्पेस बंद होने के चलते लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। इस स्थिति में नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने पायलटों के ड्यूटी समय (FDTL) नियमों में अस्थायी राहत देने का फैसला किया है।

    नागर विमानन मंत्रालय के संयुक्त सचिव असंगबा चुबा आओ ने बताया कि लंबी उड़ानों के कारण एयरलाइंस को नियमों का पालन करने में दिक्कत हो रही थी। इसलिए दो पायलट वाली लंबी उड़ानों के लिए फ्लाइट टाइम (FT) को 1 घंटे 30 मिनट बढ़ाकर 11 घंटे 30 मिनट और फ्लाइट ड्यूटी पीरियड (FDP) को 1 घंटे 45 मिनट बढ़ाकर 11 घंटे 45 मिनट कर दिया गया है।

    DGCA ने कहा कि इससे पायलटों को सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी आराम का ध्यान रखा जाएगा और नियमों का उल्लंघन नहीं होगा। पिछले साल लागू किए गए नियमों के तहत पायलटों को 48 घंटे लगातार आराम देना अनिवार्य है, जो पहले 36 घंटे था।

    साथ ही, रेगुलेटर ने एयरलाइंस पर निगरानी बढ़ा दी है। इसमें पायलट रोस्टर, क्रू की उपलब्धता, बैकअप व्यवस्था और सिस्टम की मजबूती पर खास ध्यान दिया जाएगा। DGCA अधिकारी हर दो महीने में एयरलाइंस का निरीक्षण करेंगे और साप्ताहिक तथा पखवाड़े के आधार पर निगरानी जारी रहेगी।

    DGCA का कहना है कि यह राहत अस्थायी है और केवल मिडिल ईस्ट के संघर्ष वाले एयरस्पेस को बायपास करने वाली लंबी उड़ानों पर लागू होगी।

  • डीजीसीए ने एयर इंडिया को पश्चिम एशिया संकट के बीच लंबी उड़ानों के लिए दी अस्थायी छूट

    डीजीसीए ने एयर इंडिया को पश्चिम एशिया संकट के बीच लंबी उड़ानों के लिए दी अस्थायी छूट


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट के बीच विमानन सुरक्षा निगरानी संस्था नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने हवाई क्षेत्र प्रतिबंधों से एयर इंडिया को लंबी दूरी की उड़ानों के लिए अस्थायी छूट दी है।

    आधिकारिक सूत्रों ने रविवार को दी जानकारी में बताया कि पश्चिम एशिया में हवाई क्षेत्र पर लगे प्रतिबंधों के कारण एयर इंडिया यूरोप और अमेरिका जाने के लिए लंबा मार्ग अपनाकर उड़ानें संचालित कर रही है। विमानन नियामक डीजीसीए ने पायलटों के उड़ान और कार्य समय-सीमा में अस्थायी ढील दी है, जो 30 अप्रैल तक लागू रहेगी।

    डीजीसीए ने इस छूट के तहत लंबी दूरी की उड़ानों में दो पायलटों के लिए उड़ान समय 11 घंटे 30 मिनट और कार्य अवधि 11 घंटे 45 मिनट तक बढ़ा दी है। इसके साथ ही, पायलटों के समय-सारणी में 30 मिनट की अतिरिक्त सुविधा की जरूरत को भी छूट दी गई है। सूत्रों ने बताया कि एयर इंडिया की जेद्दा उड़ान में कार्य अवधि 11 घंटे 55 मिनट है, जो अनुमत सीमा से 10 मिनट अधिक है।

    डीजीसीए ने स्पष्ट किया है कि उड़ान समय वह अवधि है जब विमान उड़ान भरने के लिए जमीन से उठकर सुरक्षित लैंडिंग तक चलता है। कार्य अवधि तब शुरू होती है जब पायलट अपनी ड्यूटी पर रिपोर्ट करता है और तब खत्म होती है जब वह अंतिम उड़ान के इंजन बंद होने के बाद अपनी ड्यूटी समाप्त करता है। पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण कई एयरलाइंस ने अपनी उड़ानों में कटौती की है। डीजीसीए ने कहा कि यह छूट पायलटों की सुरक्षा और थकान को ध्यान में रखकर दी गई है, ताकि लंबा मार्ग अपनाने के बावजूद उड़ान संचालन सुरक्षित रूप से किया जा सके।

  • अजित पवार के बेटे ने वीडियो शेयर कर VSR वेंचर्स की उड़ानों पर रोक की मांग की

    अजित पवार के बेटे ने वीडियो शेयर कर VSR वेंचर्स की उड़ानों पर रोक की मांग की


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री और एनसीपी नेता Ajit Pawar के बेटे जय पवार ने 28 जनवरी 2026 को हुए विमान हादसे के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर VSR वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड की उड़ानों को तुरंत रोकने की मांग की है। इस हादसे में उनके पिता का निधन हुआ था, जिसे लेकर जय पवार ने गंभीर सुरक्षा और लापरवाही के आरोप लगाए हैं।

    वीडियो में कंपनी के मालिक रोहित सिंह मुख्य पायलट सीट पर उड़ान के दौरान सोते हुए दिखाई दे रहे हैं। जय पवार ने लिखा कि “मैंने अपने पिता को खो दिया है… यह पीड़ा जिंदगी भर मेरे साथ रहेगी। ऐसे लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती।” उन्होंने DGCA (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन) से अपील की है कि VSR की सभी उड़ानों को ग्राउंड किया जाए और रोहित सिंह के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

    DGCA की जांच के मुताबिक, 28 जनवरी को बारामती में VSR वेंचर्स के Learjet 45 (VT-SSK) विमान के क्रैश के बाद स्पेशल सेफ्टी ऑडिट कराया गया। ऑडिट में एयरवर्दीनेस, एयर सेफ्टी और फ्लाइट ऑपरेशन के नियमों के कई उल्लंघन सामने आए। इसके बाद DGCA ने चार एयरक्राफ्ट  को तुरंत ग्राउंड कर दिया।

    जय पवार ने इंस्टाग्राम पोस्ट में कहा कि महाराष्ट्र में हुए इस हादसे की पूरी और पारदर्शी जांच होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके। उन्होंने VSR वेंचर्स की उड़ानों पर तत्काल रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जोरदार मांग की।

    यह मामला न केवल पवार परिवार के लिए बल्कि देश की नागरिक हवाई सुरक्षा के लिए भी गंभीर चिंता का विषय बन गया है। DGCA ने नियमों का उल्लंघन सामने आने के बाद सख्त कदम उठाए हैं और जांच जारी है।

  • फ्लाइट टिकट बुकिंग में हुई गलती? टेंशन छोड़िए! 48 घंटे का 'लुक-इन' पीरियड शुरू, रिफंड के लिए अब नहीं करना होगा हफ्तों इंतजार

    फ्लाइट टिकट बुकिंग में हुई गलती? टेंशन छोड़िए! 48 घंटे का 'लुक-इन' पीरियड शुरू, रिफंड के लिए अब नहीं करना होगा हफ्तों इंतजार


    नई दिल्ली। हवाई सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। अक्सर फ्लाइट टिकट कैंसिल करने या उसमें मामूली बदलाव करने पर एयरलाइंस कंपनियां भारी-भरकम पेनाल्टी वसूलती थीं, जिससे यात्रियों की जेब पर तगड़ी मार पड़ती थी। यात्रियों की इन्हीं शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय DGCA ने नियमों में बड़े बदलाव किए हैं। अब नए ‘नागरिक उड्डयन जरूरतों’CAR के तहत यात्रियों को 48 घंटे का “लुक-इन ऑप्शन” दिया जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आप टिकट बुक करने के 48 घंटे के भीतर उसे कैंसिल करते हैं या उसमें बदलावमॉडिफाई करते हैं, तो एयरलाइन आपसे कोई पेनाल्टी नहीं वसूल पाएगी।

    DGCA द्वारा जारी इन संशोधित नियमों में नाम की गलती सुधारने को लेकर भी विशेष ध्यान दिया गया है। अक्सर बुकिंग के समय नाम में टाइपिंग की गलती हो जाती थी, जिसे ठीक कराने के लिए यात्रियों को मोटी फीस देनी पड़ती थी। अब नए नियमों के मुताबिक, यदि टिकट सीधे एयरलाइन की वेबसाइट से बुक किया गया है, तो यात्री 24 घंटे के भीतर अपने नाम में सुधार मुफ्त में करा सकेंगे। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ‘लुक-इन’ की सुविधा उन टिकटों पर लागू नहीं होगी जो यात्रा की तारीख से बहुत करीबघरेलू के लिए 7 दिन और अंतरराष्ट्रीय के लिए 15 दिन पहले बुक किए गए हैं।

    रिफंड की प्रक्रिया को लेकर भी नियामक ने सख्त रुख अपनाया है। अब एयरलाइनों को हर हाल में 14 कार्य दिवसोंWorking Days के भीतर रिफंड की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। अक्सर देखा जाता था कि ट्रैवल एजेंट या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से बुक किए गए टिकटों का रिफंड हफ्तों तक अटका रहता था, लेकिन अब इसकी सीधी जिम्मेदारी एयरलाइन की तय की गई है। इसके अलावा, मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में भी यात्रियों को राहत दी गई है; यदि परिवार का कोई सदस्य अस्पताल में भर्ती होता है, तो एयरलाइन को रिफंड या क्रेडिट शेल का विकल्प देना होगा।

    इन बदलावों की पृष्ठभूमि दिसंबर 2025 में हुई भारी शिकायतों से जुड़ी है। आंकड़ों के अनुसार, अकेले दिसंबर 2025 में 29,000 से अधिक शिकायतें मिली थीं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा रिफंड में देरी से जुड़ा था। साल 2025 में भारतीय एयरलाइनों ने रिकॉर्ड 16.69 करोड़ से अधिक यात्रियों को सफर कराया है। बढ़ते बाजार और यात्रियों की परेशानियों को देखते हुए DGCA के ये नए नियम विमानन क्षेत्र में पारदर्शिता और उपभोक्ता संतुष्टि की दिशा में एक बड़ा कदम माने जा रहे हैं।

  • अजित पवार प्लेन क्रैश के बाद DGCA की बड़ी कार्रवाई, VSR के चार विमानों पर अनिश्चितकालीन रोक

    अजित पवार प्लेन क्रैश के बाद DGCA की बड़ी कार्रवाई, VSR के चार विमानों पर अनिश्चितकालीन रोक

    नई दिल्ली। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने विशेष सुरक्षा ऑडिट के बाद VSR वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के चार विमानों को तत्काल प्रभाव से ग्राउंड (उड़ान पर रोक) करने का आदेश दिया है। जांच में हवाई योग्यता, उड़ान संचालन और मेंटेनेंस प्रक्रियाओं में कई गंभीर उल्लंघन सामने आए हैं।

    बारामती हादसे के बाद शुरू हुई सख्त जांच
    यह कार्रवाई बारामती में 28 जनवरी को हुए विमान हादसे के बाद की गई। इस दुर्घटना में महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार समेत पांच लोगों की मौत हो गई थी।
    हादसा दूसरी लैंडिंग की कोशिश के दौरान खराब दृश्यता में हुआ बताया गया था। यह कंपनी से जुड़ा पिछले कुछ वर्षों का तीसरा बड़ा हादसा माना जा रहा है, जिससे विमानन सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे।

    चार विमानों पर अनिश्चितकालीन रोक
    DGCA ने जिन विमानों को ग्राउंड किया है, वे कंपनी के नॉन-शेड्यूल ऑपरेशन (चार्टर) बेड़े का हिस्सा थे। नियामक ने स्पष्ट किया है कि जब तक सभी एयरवर्थनेस (Airworthiness) मानकों की पूरी तरह बहाली नहीं हो जाती, तब तक ये विमान उड़ान नहीं भर सकेंगे। कंपनी को कमी रिपोर्ट (Deficiency Report) जारी कर रूट-कॉज एनालिसिस जमा करने का निर्देश दिया गया है।

    ऑडिट में क्या-क्या मिला?
    4 से 16 फरवरी के बीच DGCA की टीम ने विस्तृत सुरक्षा ऑडिट किया।

    जांच में सामने आया कि—

    अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया जा रहा था
    रखरखाव प्रणाली में गंभीर खामियां थीं
    सुरक्षा मानकों की निगरानी कमजोर थी
    संचालन और दस्तावेजी अनुपालन में अनियमितताएं पाई गईं
    इन निष्कर्षों के बाद नियामक ने सख्त कार्रवाई को जरूरी बताया, ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाएं रोकी जा सकें।

    विमान दुर्घटना जांच अलग से जारी
    हादसे की तकनीकी जांच विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) द्वारा की जा रही है, जबकि DGCA ने नियामकीय और संचालन संबंधी जिम्मेदारियों की पड़ताल की।

    अब नॉन-शेड्यूल उड़ानों पर कड़े नियम
    हालिया घटनाओं को देखते हुए DGCA ने गैर-निर्धारित (NSOP) उड़ानों के लिए नए सुरक्षा नियम भी लागू करने की घोषणा की है।

    अब ऑपरेटरों को—
    विमानों का रखरखाव इतिहास सार्वजनिक करना होगा
    विमान की उम्र और स्वामित्व परिवर्तन की जानकारी देनी होगी
    सुरक्षा रैंकिंग जारी करनी होगी
    वरिष्ठ प्रबंधन की जवाबदेही तय होगी

    DGCA ने स्पष्ट कहा है कि सुरक्षा चूक का दोष केवल पायलट पर नहीं डाला जा सकता; कंपनी का नेतृत्व भी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार माना जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने पर पायलट का लाइसेंस पांच वर्ष तक निलंबित किया जा सकता है।

    संदेश साफ: बारामती हादसे के बाद भारत का एविएशन रेगुलेटर चार्टर और नॉन-शेड्यूल उड़ानों की निगरानी को लेकर ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति की ओर बढ़ रहा है।