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  • एयर इंडिया की एयरबस ने बिना अनुमति भरी उड़ान, DGCA ने ठोका एक करोड़ का जुर्माना

    एयर इंडिया की एयरबस ने बिना अनुमति भरी उड़ान, DGCA ने ठोका एक करोड़ का जुर्माना


    नई दिल्ली।
    एयर इंडिया (Air India) पर डीजीसीए (DGCA) ने एक करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। जानकारी के मुताबिक एयर इंडिया (Air India) की एयरबस (Airbus) ने बिना जरूरी परमिशन के उड़ान भरी। ऐसा एक या दो नहीं, बल्कि आठ बार हुआ। डीजीसीए ने इसको बहुत गंभीर किस्म का उल्लंघन माना है। साथ ही लापरवाही के लिए टॉप लेवल मैनेजमेंट को जिम्मेदार ठहराया है। डीजीसीए ने जुर्माना लगाते हुए अपने आदेश में लिखा है कि एयरबस ए320 विमान ने कई सेक्टर्स में उड़ान भरी। इसमें नई दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई और हैदराबाद की कनेक्टिंग फ्लाइट्स भी शामिल हैं।

    ऐसा पिछले साल 24 से 25 नवंबर के बीच हुआ। इन उड़ानों के लिए एयर इंडिया ने अनिवार्य एयरवर्दीनेस रिव्यू सर्टिफिकेट (ARC) नहीं लिया था। एआरसी एक बेहद अहम सर्टिफिकेट है जो सालाना तौर पर डीजीसीए द्वारा जारी किया जाता है। इसके लिए विमान को सभी जरूरी सुरक्षा मानकों को पूरा करना होता है। बिना एआरसी के उड़ान भरना उड़ान के सुरक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है।


    डीजीसीए ने माना बेहद गंभीर

    डीजीसीए ने एयर इंडिया के इस उल्लंघन को बेहद गंभीर माना है। एक खबर के मुताबिक इसे एयरलाइन की कैजुअल अप्रोच बताया गया है। जानकारी के मुताबिक डीजीसीए ने कहाकि इस तरह के उल्लंघन को लेकर हम बहुत कड़ी कार्रवाई करते हैं। इसलिए जितनी ज्यादा संभव हो सकती थी, उतनी पेनाल्टी लगाई गई है। जब किसी संस्था पर जुर्माना लगाया जाता है तो जिम्मेदार मैनेजर को नोटिस दी जाती है। डीजीसीए ने शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय की है, और एयर इंडिया के सीईओ कैम्पबेल विल्सन को इस चूक के लिए जिम्मेदार ठहराया है।


    एयर इंडिया ने क्या कहा

    डीजीसीए के आदेश का जवाब देते हुए, एयर इंडिया के एक प्रवक्ता ने एक बयान में कहाकि एयर इंडिया ने 2025 में स्वेच्छा से रिपोर्ट किए गए एक घटना से संबंधित डीजीसीए आदेश की प्राप्ति को स्वीकार किया है। सभी पहचाने गए गैप्स को तब से संतोषजनक रूप से संबोधित किया गया है, साथ ही प्राधिकरण के साथ साझा किया गया है। एयर इंडिया अपने संचालन की निष्पक्षता और सुरक्षा के उच्चतम मानकों को बनाए रखने की प्रतिबद्धता में अडिग है।

  • फ्लाइट कैंसिलेशन और देरी के बाद एयरलाइन पर सवाल, DGCA की कार्रवाई पर यात्रियों की राय मिली-जुली

    फ्लाइट कैंसिलेशन और देरी के बाद एयरलाइन पर सवाल, DGCA की कार्रवाई पर यात्रियों की राय मिली-जुली


    नई दिल्ली। दिसंबर 2025 की शुरुआत में इंडिगो एयरलाइंस द्वारा बड़े पैमाने पर फ्लाइट कैंसिलेशन और लेटलतीफी ने देशभर के हवाई यात्रियों को भारी असुविधा में डाल दिया। 3 से 5 दिसंबर के बीच नए संचालन नियमों के कारण इंडिगो की 2,507 उड़ानें रद्द कर दी गईं, जबकि 1,852 फ्लाइट्स देरी से संचालित हुईं। इन घटनाओं से करीब 3 लाख से अधिक  यात्री प्रभावित हुए।
    DGCA ने एयरलाइन पर कुल ₹22.20 करोड़ का जुर्माना लगाया। इसमें मूल जुर्माना ₹1.80 करोड़ और फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन FDTLनियमों का 68 दिनों तक पालन न करने पर प्रतिदिन ₹30 लाख के हिसाब से अतिरिक्त ₹20.40 करोड़ की पेनाल्टी शामिल थी।

    हालांकि लोकलसर्कल्स के ताजा सर्वे में यह सामने आया है कि देश के 292 जिलों से 31,000 से अधिक हवाई यात्रियों ने हिस्सा लिया। इसमें 61% यात्रियों का मानना था कि यह जुर्माना भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है और एयरलाइन की जवाबदेही तय नहीं करता। वहीं 21% यात्रियों ने DGCA की कार्रवाई को सही ठहराया, जबकि 18% ने कोई स्पष्ट राय नहीं दी।

    सर्वे में यात्रियों ने केवल फ्लाइट रद्द होने तक की परेशानी ही नहीं बताई, बल्कि एयरलाइन के व्यवहार पर भी सवाल उठाए। कई यात्रियों का आरोप था कि फ्लाइट कैंसिल होने के बाद उन्हें नियमों के तहत मिलने वाला कैश रिफंड नहीं दिया गया, बल्कि ट्रैवल वाउचर थमाए गए। यात्रियों का कहना है कि वाउचर उनकी तत्काल जरूरतों को पूरा नहीं करते और सभी के लिए उपयोगी नहीं हैं।इंडिगो एयरलाइंस ने कहा कि वह DGCA के सभी निर्देशों का पालन करेगी और हालिया घटनाओं के बाद आंतरिक स्तर पर संचालन, सिस्टम और प्रक्रियाओं की विस्तृत समीक्षा की जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचा जा सके।

    एविएशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि केवल आर्थिक जुर्माने से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। जब तक यात्रियों के अधिकारों को सख्ती से लागू नहीं किया जाता और नियामक निगरानी मजबूत नहीं होती, तब तक ऐसी घटनाएं दोहराई जा सकती हैं।यह मामला एयरलाइन संचालन और नियामक जवाबदेही के बीच संतुलन की जरूरत को रेखांकित करता है, साथ ही हवाई यात्रियों के अधिकारों और सुरक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में सुधार की मांग को भी उजागर करता है।

  • इंडिगो पर बड़ा एक्शन… DGCA ने लगाया 22.2 करोड़ का जुर्माना, अब शेयरों पर निवेशकों की नजर

    इंडिगो पर बड़ा एक्शन… DGCA ने लगाया 22.2 करोड़ का जुर्माना, अब शेयरों पर निवेशकों की नजर


    नई दिल्ली।
    बीते दिसंबर महीने में इंडिगो एयरलाइन (Indigo Airlines) की ओर से की गई मनमानी पर अब सरकार ने बड़ा एक्शन (Big Action) लिया है। दरअसल, डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने दिसंबर में बड़े पैमाने पर हुई दिक्कतों के लिए इंडिगो एयरलाइन पर ₹22.2 करोड़ का जुर्माना लगाया है। इस खबर के बाद अब सोमवार को इंडिगो के शेयर (Share) पर निवेशकों (Investors) की नजर रहेगी। बता दें कि डीजीसीए ने 68 दिनों के लिए हर दिन ₹3 लाख का जुर्माना और इसके अलावा ₹1.80 करोड़ का एक बार का सिस्टमैटिक पेनल्टी लगाया है। इस तरह, इंडिगो पर लगाया गया कुल जुर्माना ₹22.2 करोड़ हो गया है।


    परफॉर्मेंस

    इंडिगो के शेयर की बात करें तो बीएसई पर 4738.70 रुपये पर है। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शेयर में मामूली तेजी आई थी। अब सोमवार को शेयर का कैसा परफॉर्मेंस रहेगा, ये तो आने वाला वक्त बताएगा लेकिन सरकार की कार्रवाई से निवेशक सहमे हुए हैं। शेयर के 52 हफ्ते का हाई 6,225.05 रुपये है। वहीं, शेयर के 52 हफ्ते का लो 3,946.40 रुपये है।


    इंडिगो पर सरकार की कार्रवाई

    दरअसल, डीजीसीए ने दिसंबर के पहले सप्ताह में इंडिगो संकट की उड़ानों में व्यवधान की जांच के लिए गठित समिति की रिपोर्ट के आधार पर उस पर 22.20 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही एक अधिकारी को कार्यमुक्त करने का निर्देश दिया है। नियामक ने एयरलाइन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) को भी इस मामले में आगाह किया है। बता दें कि 3 से 5 दिसंबर के बीच इंडिगो की 2,507 उड़ानें रद्द रही थीं और 1,852 उड़ानों में देरी हुई थी। इसके बाद भी कई दिन तक बड़े पैमाने पर व्यवधान था लेकिन डीजीसीए ने अपनी कार्रवाई के लिए सिर्फ इन्हीं तीन दिनों को आधार बनाया है। जांच समिति ने 26 दिसंबर को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।

    नियामक ने इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स को आगाह करके छोड़ दिया है जबकि मुख्य परिचालन अधिकारी इसिडर पोरक्रस को विंटर शिड्यूल और फ्लाइट ड्यूटी से संबंधित नये नियमों के असर के आकलन में विफल रहने के लिए चेतावनी जारी की है। इसके साथ ही कंपनी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (ऑपरेशन्स कंट्रोल सेंटर) जैसन हर्टर को मौजूदा जिम्मेदारियों से मुक्त करने और कोई भी जिम्मेदारी का पद न देने का आदेश दिया गया है। इंडिगो से 50 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जमा कराने के लिए भी कहा गया है। कंपनी जैसे-जैसे डीजीसीए के निर्देशों के अनुरूप लक्ष्यों को हासिल करती जाएगी, बैंक गारंटी की राशि उसे वापस मिलती जाएगी।

  • भोपाल एयरपोर्ट पर नया आईएलएस सिस्टम: उड़ानें अब समय पर, यात्रियों को मिली राहत

    भोपाल एयरपोर्ट पर नया आईएलएस सिस्टम: उड़ानें अब समय पर, यात्रियों को मिली राहत


    भोपाल । भोपाल राजा भोज एयरपोर्ट पर अब यात्रियों को मौसम के खराब होने और कोहरे के कारण होने वाली उड़ान देरी से राहत मिल गई है। एयरपोर्ट पर अत्याधुनिक कैटेगरी-2 इंस्टूमेंट लैंडिंग सिस्टम आईएलएस की स्थापना के साथ अब उड़ानों की टाइमिंग पर ब्रेक लग गया है। पहले जहां मौसम खराब होने और घने कोहरे के कारण उड़ानों को डायवर्ट करना पड़ता था, वहीं अब इस नए सिस्टम की मदद से ऐसी घटनाओं में काफी कमी आई है। पिछले दिसंबर-जनवरी के महीने में भोपाल एयरपोर्ट पर उड़ानें लेट होने और डायवर्ट होने की समस्या आम थी, लेकिन अब नए सिस्टम के चलते एक भी उड़ान डायवर्ट नहीं हुई है।
    आईएलएस सिस्टम की स्थापना का काम तीन साल से चल रहा था, जिसमें मौसम उपकरणों के अपग्रेडेशन के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। रनवे से लगी कुछ ज़मीन सेना की थी, जिसके कारण इस उपकरण की स्थापना में रुकावट आ रही थी। हालांकि, इस समस्या का समाधान होते ही एयरपोर्ट अथॉरिटी ने इस अत्याधुनिक सिस्टम की स्थापना पूरी की। अब जब दृश्यता 350 मीटर तक घट जाती है, तब भी विमान इस सिस्टम की मदद से सुरक्षित लैंड कर सकते हैं।
    नए सिस्टम की स्थापना से न केवल उड़ान की देरी में कमी आई है, बल्कि यात्रियों को भी राहत मिली है। इस अपग्रेडेशन को नागर विमानन महानिदेशालय डीजीसीए से औपचारिक अनुमति मिलने के बाद पूरी तरह से लागू किया गया है। अब यह सिस्टम अपनी पूरी क्षमता से काम कर रहा है और यह सुनिश्चित कर रहा है कि कोहरे और खराब मौसम के बावजूद उड़ानें समय पर चल सकें।
    एयरपोर्ट अथॉरिटी के मुताबिक, इस अपग्रेडेशन से यात्रा की सुरक्षा और सुविधा दोनों बढ़ी हैं। पिछले कुछ समय से एयरपोर्ट पर यात्रियों की संख्या में भी वृद्धि हो रही है, और यह नया सिस्टम उनके लिए एक बड़ी राहत साबित हो रहा है। अब भोपाल एयरपोर्ट देश के उन चुनिंदा एयरपोर्ट्स में शामिल हो गया है, जहां अत्याधुनिक कैटेगरी-2 आईएलएस सिस्टम की स्थापना की गई है। यह एयरपोर्ट इस प्रणाली के साथ प्रदेश का पहला और देश का तीसरा एयरपोर्ट बन चुका है, जिसने अपने उड़ान संचालन को और भी सुरक्षित और प्रभावी बना लिया है।

  • हवाई यात्रा के दौरान पावर बैंक व लिथियम बैटरी डिवाइसेस पर रोक, DGCA ने कड़े किए नियम

    हवाई यात्रा के दौरान पावर बैंक व लिथियम बैटरी डिवाइसेस पर रोक, DGCA ने कड़े किए नियम


    नई दिल्ली।
    अगर आप भी फ्लाइट (Flights) से सफर करते हैं, तो यह खबर आपके लिए है। दरअसल, भारत ने फ्लाइट (Flights) में पावर बैंक (Power Bank) और लिथियम बैटरी वाली डिवाइसेस (Lithium batteries Devices) को लेकर कड़े नियम लागू किए हैं। डीजीसीए ने फ्लाइट के दौरान फोन या अन्य चीजों को चार्ज करने वाले पावर बैंक के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। दुनियाभर में पावर बैंक से आग लगने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिसके बाद यह कड़ा कदम उठाया गया है।

    डीजीसीए ने इसको लेकर पिछले साल नवंबर में एक एडइवाजरी जारी की थी। इसमें कहा गया था कि पावर बैंक और स्पेयर बैटरी सिर्फ हैंड लगेज में ले जाने की इजाजत होगी। उसे ओवरहेड कपार्टमेंट में नहीं रख सकते हैं। इसके पीछे आग लगने की वजह बताई गई थी और कहा गया था कि आग लगने पर उसे कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है।

    लिथियम बैटरी से आग बहुत तेजी से पकड़ती है, क्योंकि इस बैटरी में एनर्जी बहुत अधिक होती है। इस आग को कंट्रोल करना भी मुश्किल हो जाता है। एविएशन सेफ्टी एक्सपर्ट्स का कहना है कि एयरक्राफ्ट के केबिन के अंदर छोटी सी बैटरी में लगी आग भी तेजी से फैल सकती है, इसलिए बचाव बहुत जरूरी है।

    डीजीसीए के सर्कुलर में कहा गया है, “अलग-अलग रिचार्जेबल डिवाइस में लिथियम बैटरी के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से हवाई जहाज से लिथियम बैटरी ले जाने में बढ़ोतरी हुई है। पावर बैंक, पोर्टेबल चार्जर और लिथियम बैटरी वाले ऐसे ही डिवाइस आग लगने का कारण बन सकते हैं और जहाज में आग लगा सकते हैं।” आगे कहा गया है, “ओवरहेड स्टोरेज डिब्बे में या कैरी-ऑन बैगेज के अंदर रखी लिथियम बैटरी छिपी हो सकती हैं, उन तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है, या यात्री या क्रू मेंबर उन पर आसानी से नजर नहीं रख सकते। इससे धुआं या आग लगने का पता चलने और उस पर कार्रवाई करने में देरी हो सकती है, जिससे फ्लाइट की सुरक्षा के लिए खतरा बढ़ सकता है।”

    मौजूदा एविएशन सेफ्टी गाइडलाइंस के अनुसार, पावर बैंक सिर्फ केबिन बैगेज में ले जाने की इजाजत है, चेक-इन लगेज में नहीं। हालांकि, यात्रियों को फ्लाइट के दौरान पावर बैंक से डिवाइस चार्ज करने की इजाजत नहीं है। एयरलाइंस ने अब यात्रियों को इस पाबंदी के बारे में बताने के लिए बोर्डिंग अनाउंसमेंट और इनफ्लाइट ब्रीफिंग के जरिए याद दिलाना शुरू कर दिया है।

  • फ्लाइट कैंसिलेशन से इंडिगो को झटका, नवंबर में घटा मार्केट शेयर; एअर इंडिया और स्पाइसजेट को फायदा

    फ्लाइट कैंसिलेशन से इंडिगो को झटका, नवंबर में घटा मार्केट शेयर; एअर इंडिया और स्पाइसजेट को फायदा


    नई दिल्ली।देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के लिए नवंबर 2025 चुनौतियों से भरा रहा। लगातार फ्लाइट कैंसिलेशन और देरी के कारण कंपनी का घरेलू मार्केट शेयर घटकर 63.6% पर आ गया जो अक्टूबर में 65.6% था। इस गिरावट के चलते एयरलाइन उद्योग में प्रतिस्पर्धा और बढ़ गई है जबकि एअर इंडिया और स्पाइसजेट जैसी एयरलाइंस ने इस अवसर का लाभ उठाया।

    नागर विमानन महानिदेशालय DGCA द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, इंडिगो की मार्केट हिस्सेदारी में लगभग 2% की गिरावट दर्ज की गई। इस दौरान टाटा समूह की एअर इंडिया का संयुक्त मार्केट शेयर अक्टूबर के 25.7% से बढ़कर नवंबर में 26.7% पहुंच गया। वहीं, आर्थिक संकट से उबरने की कोशिश कर रही स्पाइसजेट की हिस्सेदारी 2.6% से बढ़कर 3.7% हो गई।नवंबर और दिसंबर की शुरुआत में इंडिगो को बड़े पैमाने पर ऑपरेशनल समस्याओं का सामना करना पड़ा। DGCA द्वारा पायलटों की ड्यूटी और आराम से जुड़े नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिट FDTL नियम लागू किए गए थे। इंडिगो इन नए नियमों के अनुसार समय पर अपने क्रू रोस्टर और संसाधनों का प्रबंधन नहीं कर सकी। इसका नतीजा यह हुआ कि नवंबर के अंतिम सप्ताह और दिसंबर के पहले हफ्ते में लगभग 5,000 उड़ानें या तो रद्द हुईं या तय समय से देरी से संचालित हुईं।

    लगातार उड़ान बाधित होने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा और एयरलाइन की विश्वसनीयता पर असर पड़ा। हालात बिगड़ने के बाद DGCA ने सख्त कदम उठाते हुए इंडिगो को अपने विंटर शेड्यूल में 10% कटौती करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंप दी है जिसमें एयरलाइन की योजना और प्रबंधन से जुड़ी खामियों का उल्लेख होने की संभावना है।विशेषज्ञों का मानना है कि इंडिगो के पास मजबूत नेटवर्क और बेड़े की क्षमता है, लेकिन नियामकीय बदलावों के अनुरूप तेजी से ढलना अब उसकी प्राथमिक चुनौती होगी। लगातार फ्लाइट कैंसिलेशन और देरी से यात्रियों में असंतोष बढ़ा है। नवंबर में घरेलू उड़ानों में 1.53 करोड़ यात्रियों ने सफर किया जो पिछले साल की तुलना में करीब 7% अधिक था। इसी अवधि में कुल 1,196 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें आधे से अधिक उड़ान में देरी और कैंसिलेशन से संबंधित थीं, जबकि बैगेज और रिफंड की शिकायतें भी प्रमुख रही।

    इंडिगो के लिए यह समय रणनीतिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच ग्राहकों की संतुष्टि बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है। दूसरी ओर, एअर इंडिया और स्पाइसजेट जैसी एयरलाइंस के लिए यह अवसर है कि वे अपनी सेवाओं को बेहतर करके मार्केट में स्थायी बढ़त हासिल कर सकें। एअर इंडिया ने पिछले महीनों में अपने बेड़े और मार्ग नेटवर्क का विस्तार किया है, जबकि स्पाइसजेट ने नए रूट और प्रतिस्पर्धी कीमतें पेश कर अपनी स्थिति मजबूत की है विश्लेषकों का कहना है कि इंडिगो को भविष्य में नियामक बदलावों और ऑपरेशनल चुनौतियों से निपटने के लिए नई रणनीति अपनानी होगी। यात्रियों का भरोसा और समय पर उड़ान संचालन कंपनी की दीर्घकालिक सफलता के लिए अहम होंगे। एयरलाइन उद्योग में यह संकेत देता है कि बड़े ऑपरेटरों को भी समय-समय पर अपने प्रबंधन और संसाधन प्रबंधन में सुधार करना होगा, ताकि मार्केट में उनका प्रभुत्व बरकरार रहे।

  • इंडिगो ऑपरेशन संकट: DGCA ने 4 निरीक्षकों को सस्पेंड किया, एयरलाइन पर कड़ी निगरानी शुरू

    इंडिगो ऑपरेशन संकट: DGCA ने 4 निरीक्षकों को सस्पेंड किया, एयरलाइन पर कड़ी निगरानी शुरू


    नई दिल्ली। इंडिगो एयरलाइन में बढ़ती अव्यवस्था और लगातार उड़ान रद्द होने के बाद नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने बड़ा कदम उठाते हुए चार फ्लाइट ऑपरेशन इंस्पेक्टरों को तत्काल सस्पेंड कर दिया है। इन अधिकारियों पर सुरक्षा मानकों और परिचालन नियमों का उल्लंघन करने का आरोप है। खासकर 5 दिसंबर को एक ही दिन में इंडिगो ने 1,600 से ज्यादा फ्लाइट रद्द की थीं, जिससे हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा और एयरलाइन के परिचालन में गंभीर संकट आ गया।

    सुरक्षा मानकों की अनदेखी, DGCA ने कड़ी कार्रवाई की
    DGCA के अधिकारियों ने बताया कि जिन चार निरीक्षकों को सस्पेंड किया गया है, वे सुरक्षा और परिचालन नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार थे। जांच में यह सामने आया कि इंडिगो ने पायलट और क्रू मेंबर्स की ड्यूटी टाइम लिमिट का पालन नहीं किया, जिसके कारण उड़ान सेवाएं बाधित हुईं और यात्रियों को भारी असुविधा हुई। इसके साथ ही टूरिज्म सेक्टर को भी करोड़ों का नुकसान हुआ।

    मुख्यालय से सख्त निगरानी की शुरुआत
    इंडिगो में आई इस परिचालन संकट के बाद DGCA ने एयरलाइन के मुख्यालय से रियल-टाइम निगरानी शुरू कर दी है। अधिकारियों को हर दिन विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है, ताकि उड़ान संचालन, रिफंड प्रक्रिया, मुआवजे की स्थिति और यात्रियों की शिकायतों का सही समय पर निवारण किया जा सके। इस कदम का उद्देश्य यात्रियों को होने वाली असुविधा को कम करना और एयरलाइन को नियमों के तहत सुरक्षित और समयबद्ध संचालन सुनिश्चित करना है।

    सीईओ को DGCA के सामने पेश होने का आदेश
    इस संकट के बीच DGCA ने इंडिगो के सीईओ, पीटर एल्बर्स को शुक्रवार को तलब किया है। इसका उद्देश्य एयरलाइन के संचालन में आई गड़बड़ियों की जड़ तक पहुंचना और जिम्मेदारी तय करना है। DGCA ने इंडिगो में उत्पन्न समस्याओं के समाधान के लिए एक चार सदस्यीय पैनल भी गठित किया है, जो उच्च स्तर पर जांच करेगा और सुधारात्मक कदम सुझाएगा।

    देशभर में तेज़ निरीक्षण, 24 घंटे में रिपोर्ट की मांग
    इंडिगो के संचालन में आए संकट के बाद DGCA ने देशभर के 11 प्रमुख घरेलू हवाई अड्डों पर निरीक्षण शुरू किया है। इन अधिकारियों को अगले 2-3 दिनों में अपनी रिपोर्ट DGCA मुख्यालय में सौंपनी होगी। साथ ही, इंडिगो के कॉरपोरेट कार्यालय में भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है, ताकि रद्द उड़ानों के रिफंड, समय पर उड़ान संचालन और यात्रियों को मुआवजे की प्रक्रिया को सख्ती से सुनिश्चित किया जा सके।

    स्थिति अब सुधार की ओर, लेकिन DGCA की निगरानी जारी
    इंडिगो की उड़ान सेवाओं में 5 दिसंबर के बाद भारी व्यवधान आया था, लेकिन अब एयरलाइन का कहना है कि स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। हालांकि, DGCA ने एयरलाइन पर कड़ी निगरानी बनाए रखी है और सुनिश्चित किया है कि आगे से ऐसे परिचालन संकट न आएं।

  • एयरलाइंस पर आरोप: देर से सूचना देकर मुनाफा, नियमों की उड़ाई धज्जियाँ"

    एयरलाइंस पर आरोप: देर से सूचना देकर मुनाफा, नियमों की उड़ाई धज्जियाँ"


    नई दिल्‍ली । एयरपोर्ट पहुंचने पर आपको अचानक जानकारी दी जाती है कि आपकी फ्लाइट पूर्व निर्धारित समय से देरी से उड़ान भरेगी तो समझ लें कि विमान कंपनी आपके साथ ही नहीं, बल्कि नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के नियमों से भी खिलावाड़ कर रही है।
    इस मनमानी के पीछे कंपनियां मुनाफे और पैसा बचाने का खेल खेलती हैं। बीते कुछ दिनों में इंडिगो समेत अन्य विमानन कंपनियों ने उड़ान सेवा देरी से शुरू होने पर यात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं से बचने और कमाई बढ़ाने के लिए उड़ान सेवा रद्द होने और देरी से उड़ान भरने की तय समय पर जानकारी नहीं दी है। कई विमानन कंपनियों पर आरोप है कि वह डीजीसीए के नियमों से बचने के लिए गलत व देरी से जानकारी दे रही हैं। विमानन कंपनियां रिफंड, भोजन व होटल की लागत से बचने के लिए यात्रियों को योजनाबद्ध तरीके से देरी से जानकारी देने का तरीका अपना रही हैं। विमानन कंपनियां एक योजनाबद्ध तरीका अपनाकर यात्रियों को फंसाती हैं, जिससे उन्हें 100 फीसदी रिफंड या अन्य सुविधाएं न देनी पड़ें। बीते सात दिनों में इंडिगो से जुड़े यात्रियों ने शिकायत की है कि उन्हें समय पर फ्लाइट के देरी से उड़ान भरने की जानकारी दी गई।

    कंपनियों द्वारा अपनाए जा रहे तरीके
    – ऐप और पोर्टल पर फ्लाइट को ऑनटाइम दिखाया जाता है, जिससे यात्री समय पर एयरपोर्ट पहुंचे और एयरलाइन को खाने-पीने की व्यवस्था नहीं करनी पड़े
    – एयरपोर्ट पहुंचने पर तय समय से चंद मिनट पहले बताया जाता है कि उड़ान 2 घंटे की देरी। उड़ान में दो घंटे की देरी पर खाने-पीने की सुविधा देनी होती है, लेकिन कंपनियां इससे बचना चाहती हैं
    – दो घंटे के बाद फिर बताया जाता है कि अभी फ्लाइट दो घंटों ओर देरी से उड़ान भरेगी
    – चार घंटे के बाद फ्लाइट को रद्द किया जाता है। ऐसी स्थिति में कई यात्री खुद टिकट कैंसिल कर देते हैं। यात्रियों द्वारा कैंसिल कराए जाने वाले टिकट पर कंपनी शुल्क काटती है

    यात्रियों के लिए अनिवार्य सुविधाएं
    – 2 घंटे तक देरी:- पीने का पानी
    – 2 से 4 घंटे की देरी:- चाय/कॉफी व हल्का नाश्ता
    – 4 घंटे से अधिक की देरी:- भोजन
    – ओवरनाइट डिले:- होटल व ट्रांसफर की सुविधा
    – 6 घंटे से ज्यादा की अपेक्षित देरी:- वैकल्पिक फ्लाइट का विकल्प या पूरा रिफंड

    यह है नियम
    अगर विमानन कंपनी अपनी तरफ से विमान सेवा रद्द होने पर टिकट रद्द करेगी तो उसे 100 फीसदी रिफंड देना पड़ता है। इसके साथ ही होटल खाने का पूरा खर्च उठाना पड़ता है, जिसका बोझ कंपनी पर पड़ता है। अगर यात्री खुद टिकट रद्द करता है तो कंपनी उससे टिकट रद्द करने का शुल्क काटती है।

    उड़ान में देरी से जुड़े नियम जानने जरूरी
    इस वर्ष मार्च में नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने लोकसभा में उड़ान सेवा देरी से शुरू होने पर यात्रियों को विमानन कंपनियों द्वारा दी जाने वाली अनिवार्य सुविधाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार देरी से उड़ान सेवा संचालित होने के मामले में आवश्यक कार्रवाई करती है। साथ ही, जानकारी दी कि कितने देरी में यात्रियों को क्या सुविधाएं देनी अनिवार्य हैं।

  • IndiGo पर DGCA का बड़ा एक्शन: रोजाना 110 उड़ानें प्रभावित, सरकार ने एयरलाइन को चेताया

    IndiGo पर DGCA का बड़ा एक्शन: रोजाना 110 उड़ानें प्रभावित, सरकार ने एयरलाइन को चेताया


    नई दिल्ली। देश की प्रमुख एयरलाइन IndiGo पर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने बड़ा एक्शन लिया है। हाल के हज़ारों फ्लाइट रद्द होने और यात्रियों की परेशानी के कारण सरकार ने एयरलाइन के शीतकालीन उड़ान कार्यक्रम में 5% कटौती का आदेश दिया है। इसका मतलब है कि इंडिगो से रोजाना करीब 110 उड़ानें छीन ली जाएंगी, जिन्हें अन्य एयरलाइंस को आवंटित किया जाएगा।

    DGCA का कदम और पृष्ठभूमि
    नागरिक उड्डयन मंत्री के. राम मोहन नायडू ने कहा, “हम इंडिगो के मार्गों में कटौती करेंगे। फिलहाल वे 2,200 उड़ानें चला रहे हैं, अब 5% कम होंगी।” यह कार्रवाई 5 दिसंबर को इंडिगो की 100 से अधिक उड़ानों के प्रभावित होने के बाद हुई। DGCA ने एयरलाइन को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

    विवरण संख्या/राशि
    प्रतिदिन वर्तमान उड़ानें 2,200
    आदेशित कटौती (%) 5%
    रोजाना छीनी जाने वाली उड़ानें (अनुमानित) 110
    रद्द PNR के लिए मुआवजा ₹745 करोड़

    यात्रियों की भरपाई:
    सरकार ने बताया कि 1 से 8 दिसंबर तक रद्द किए गए 7,30,655 PNR के लिए ₹745 करोड़ का मुआवजा दिया जा चुका है। खोए हुए 9,000 बैगों में से 6,000 लौटाए जा चुके हैं और बाकी बैग जल्द ही यात्रियों तक पहुंचेंगे।

    IndiGo की प्रतिक्रिया:
    एयरलाइन ने कहा कि उड़ानें रद्द होने के पीछे तकनीकी खराबियां, खराब मौसम, हवाई यातायात की भीड़ और क्रू ड्यूटी लिमिटेशन जैसी बाहरी वजहें हैं। इंडिगो ने स्थिति सामान्य करने के लिए 15 दिनों का समय मांगा है।

    सरकार ने चेताया है कि यदि एयरलाइन ने रवैया नहीं सुधारा तो एक्शन और कड़ा किया जाएगा। यह कदम स्पष्ट संदेश देता है कि यात्रियों की असुविधा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

  • इंडिगो का ऑपरेशनल क्रैश, 550 से ज़्यादा उड़ानें रद्द, DGCA की फटकार के बाद एयरलाइन ने यात्रियों से मांगी सार्वजनिक माफ़ी

    इंडिगो का ऑपरेशनल क्रैश, 550 से ज़्यादा उड़ानें रद्द, DGCA की फटकार के बाद एयरलाइन ने यात्रियों से मांगी सार्वजनिक माफ़ी


    नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी विमानन कंपनी इंडिगो (IndiGo) इस समय अपने सबसे बड़े परिचालन संकट से जूझ रही है। गुरुवार को एयरलाइन ने देशभर में 550 से अधिक उड़ानें रद्द कर दीं, जिससे हजारों यात्रियों को एयरपोर्ट पर लंबी कतारों और भयानक अनिश्चितता का सामना करना पड़ा। इस गंभीर स्थिति पर नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने कड़ी फटकार लगाई है, जिसके बाद इंडिगो ने यात्रियों और हितधारकों से आधिकारिक तौर पर माफी मांगी है।

    नवंबर में 1200 से अधिक रद्द, स्टाफ की कमी मुख्य वजह
    इंडिगो, जो सामान्य दिनों में लगभग 2,300 उड़ानें संचालित करती है, नवंबर महीने से ही गहरे संकट में है।नवंबर में एयरलाइन को कुल 1,232 उड़ानें रद्द करनी पड़ी थींडीजीसीए की जांच के बाद, इंडिगो ने कबूल किया कि 1,232 रद्द उड़ानों में से 755 उड़ानें अकेले स्टाफ की कमी के कारण रद्द हुईं। इसके अलावा, एटीसी फेलियर (92), एयरपोर्ट प्रतिबंध (258), और अन्य कारणों से भी परिचालन बाधित हुआ।

    DGCA की सख्ती और ‘सेवा गुणवत्ता’ पर सवाल
    प्रदर्शन में आई इस भारी गिरावट के बाद डीजीसीए ने न केवल जांच के आदेश दिए, बल्कि एयरलाइन प्रबंधन को सेवा गुणवत्ता में सुधार के लिए कड़े कदम उठाने की चेतावनी दी। डीजीसीए ने अधिक क्रू भर्ती करने, बेहतर योजना और निगरानी की सलाह दी है।

    सीईओ का ईमेल लीक: ‘हम वादा पूरा नहीं कर सके’
    बड़े पैमाने पर रद्दीकरण के कारण यात्रियों की नाराजगी सोशल मीडिया पर खुलकर सामने आई। इस बीच, इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्ट ने कर्मचारियों को ईमेल भेजकर स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उनका ईमेल वायरल हो गया, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया।
    हम रोजाना 3.8 लाख यात्रियों की सेवा करते हैं और चाहते हैं कि हर ग्राहक को अच्छा अनुभव मिले। पिछले दिनों हम यह वादा पूरा नहीं कर सके और हमने सार्वजनिक रूप से इसके लिए माफी मांगी है।सीईओ ने परिचालन संकट के लिए मामूली तकनीकी खामियों, शेड्यूल बदलाव, खराब मौसम, एविएशन सिस्टम में भीड़भाड़ और नई FDTL नॉर्म्स (Flight Duty Time Limitations Norms) के प्रभाव को मुख्य कारण बताया।

    संकट से उबरने की ‘युद्धस्तर पर’ कवायद
    इंडिगो ने अब बयान जारी कर यात्रियों को आश्वस्त किया है कि वे MoCA, DGCA और एयरपोर्ट ऑपरेटरों के साथ समन्वय करके युद्धस्तर पर काम कर रहे हैं ताकि परिचालन सामान्य हो सके। एयरलाइन ने कहा है कि वह डीजीसीए के निर्देशों का पालन करेगी और स्टाफ तथा प्रबंधन की कमी से जुड़ी समस्याओं को शीघ्र सुलझाएगी।इंडिगो ने यात्रियों से अपनी उड़ान की स्थिति लगातार जांचने और एयरपोर्ट पर समय से पहले पहुंचने की अपील की है।