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  • MP में 20-22 जून के बीच दस्‍तक दे सकता है मानसून, अगले 4 दिन रहेगा आंधी-बारिश का दौर

    MP में 20-22 जून के बीच दस्‍तक दे सकता है मानसून, अगले 4 दिन रहेगा आंधी-बारिश का दौर

    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून के आगमन को लेकर मौसम विभाग ने नया अनुमान जारी किया है। इस बार प्रदेश में मानसून सामान्य समय से 5 से 7 दिन की देरी से पहुंच सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक 20 से 22 जून के बीच होने की संभावना है। वहीं, मानसून आने से पहले प्रदेशभर में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का दौर जारी रहेगा।

    धार-खरगोन में रेड अलर्ट

    मौसम विभाग ने सोमवार को धार और खरगोन जिलों के लिए ओलावृष्टि और तेज बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, बैतूल, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा में आंधी, गरज-चमक, बारिश और ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार अगले चार दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम का यही मिजाज बना रहेगा।

    नौतपा की तपिश पर बारिश भारी
    नौतपा के सातवें दिन भी प्रदेश में कई स्थानों पर बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिला। लगातार बदलते मौसम के कारण तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। रविवार को प्रदेश का सर्वाधिक तापमान शाजापुर में 41.4 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि पचमढ़ी सबसे ठंडा रहा, जहां अधिकतम तापमान 34.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    बड़े शहरों में तापमान में गिरावट
    प्रदेश के प्रमुख शहरों में भी गर्मी का असर कम हुआ है-
    इंदौर – 36.3 डिग्री सेल्सियस
    जबलपुर – 36.4 डिग्री सेल्सियस
    ग्वालियर – 37.5 डिग्री सेल्सियस
    उज्जैन – 37.5 डिग्री सेल्सियस
    भोपाल – 38 डिग्री सेल्सियस

    शाजापुर, राजगढ़ और नरसिंहपुर को छोड़ अधिकांश जिलों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा।

    मई में गर्मी भी रिकॉर्ड, बारिश भी ज्यादा
    मई माह में प्रदेश ने दो तरह के मौसम का अनुभव किया। महीने की शुरुआत आंधी और बारिश से हुई, जबकि 18 मई के बाद भीषण गर्मी का दौर शुरू हो गया। इस दौरान खजुराहो में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया। 25 मई से शुरू हुए नौतपा के दौरान भी प्रदेश का कोई न कोई जिला आंधी और बारिश से प्रभावित रहा। महीने के अंतिम दिनों में कई जिलों में ओलावृष्टि भी हुई।

    औसत से अधिक हुई मई की बारिश
    मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार मई महीने में प्रदेश में करीब सवा इंच बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य तौर पर इस अवधि में लगभग पौन इंच वर्षा होती है। यानी इस बार औसत से करीब 56 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है। हालांकि जून में वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना जताई गई है। अनुमान है कि इस बार प्रदेश में मानसूनी बारिश दीर्घकालिक औसत का करीब 90 प्रतिशत रह सकती है।

    अगले चार दिन कैसा रहेगा मौसम?
    मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 1 से 4 जून तक प्रदेश के अधिकांश जिलों में आंधी, बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां जारी रहेंगी। कई क्षेत्रों में ओलावृष्टि भी हो सकती है। लगातार बारिश के कारण दिन और रात के तापमान में और गिरावट आने की संभावना है।

  • MP: धार भोजशाला परिसर के नीचे दबी है हनुमान प्रतिमा….! जाने क्या उठी नई मांग?

    MP: धार भोजशाला परिसर के नीचे दबी है हनुमान प्रतिमा….! जाने क्या उठी नई मांग?


    धार।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के धार (Dhar) स्थित भोजशाला परिसर (Bhojshala Complex) में श्रद्धालुओं के निःशुल्क प्रवेश की मांग को लेकर एक याचिकाकर्ता ने बुधवार को ASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) को आवेदन भेजा। वहीं, दूसरे याचिकाकर्ता ने अलग अर्जी में दावा किया कि इस मध्यकालीन स्मारक की जमीन के नीचे भगवान हनुमान और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां दबी हो सकती हैं। ये ताजा आवेदन उन दो याचिकाकर्ताओं ने भेजे हैं, जिनकी ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करने के बाद मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (Madhya Pradesh High Court) की इंदौर पीठ ने इस ASI संरक्षित परिसर को 15 मई को वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर घोषित किया था।

    सामाजिक संगठन ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ से जुड़े याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने ASI को भेजे आवेदन में कहा कि श्रद्धालुओं को उपासना के अधिकार के तहत भोजशाला में निःशुल्क प्रवेश दिया जाना चाहिए। आवेदन में कहा गया कि ASI द्वारा श्रद्धालुओं से वर्तमान में लिया जा रहा एक रुपए का प्रवेश शुल्क बंद किया जाए क्योंकि इस वसूली से उच्च न्यायालय के आदेश की ‘अवहेलना’ हो रही है।


    भोजशाला में लगे इस्लामी प्रतीकों को हटाने की मांग

    आवेदन में भोजशाला परिसर की दक्षिण-पूर्व दिशा में स्थित बंद कमरे को तत्काल खोलने की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ता का दावा है कि यह कमरा मूल मंदिर परिसर का हिस्सा है। आवेदन में यह भी कहा गया है कि चूंकि उच्च न्यायालय ने भोजशाला को वाग्देवी मंदिर घोषित कर दिया है, इसलिए परिसर में ‘अनाधिकृत रूप से लगाए गए’ इस्लामी प्रतीकों को हटाया जाना चाहिए।


    मुस्लिम प्रतीकों को किसी अन्य कमरे में रखने की मांग

    भोजशाला मामले के एक अन्य याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी ने भी केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय और ASI को भेजे अलग आवेदन में ऐसी ही मांग की और कहा कि इस्लामी प्रतीकों को मुस्लिम समुदाय के किसी भवन में सुरक्षित तौर पर रखा जाना चाहिए।


    याचिकाकर्ता का दावा- भोजशाला में दबी है हनुमान जी की मूर्ति

    तिवारी ने अपने आवेदन में दावा किया कि धार के लोगों की मान्यता है कि भोजशाला परिसर की जमीन के नीचे भगवान हनुमान और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे में सच का पता लगाने के लिए वैज्ञानिक तरीके से खुदाई करके इन मूर्तियों को बाहर निकाला जाना चाहिए और इन्हें परिसर में धार्मिक विधि-विधान के साथ स्थापित किया जाना चाहिए।


    पिछले शुक्रवार को आया था भोजशाला को लेकर ऐतिहासिक फैसला

    उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने 15 मई को अपने फैसले में भोजशाला परिसर की धार्मिक प्रकृति वाग्देवी (सरस्वती) मंदिर के रूप में निर्धारित की थी। साथ ही अदालत ने ASI के सात अप्रैल 2003 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया था जिसमें मुस्लिम समुदाय को हर शुक्रवार इस परिसर में नमाज अदा करने की इजाजत दी गई थी। इस आदेश में हिंदुओं को केवल मंगलवार को स्मारक में पूजा-अर्चना की अनुमति दी गई थी।

  • भोजशाला मामले पर हाईकोर्ट का फैसला आज, इंदौर-धार में हाई अलर्ट

    भोजशाला मामले पर हाईकोर्ट का फैसला आज, इंदौर-धार में हाई अलर्ट


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के बहुचर्चित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद पर आज हाईकोर्ट की इंदौर बेंच का अहम फैसला आ सकता है। वर्षों से चल रहे इस संवेदनशील मामले में कोर्ट ने सुनवाई पूरी करने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रखा था, जिसके चलते पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर बढ़ा दिया गया है।

    फैसले को देखते हुए इंदौर और धार जिले में प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। खास बात यह है कि आज शुक्रवार का दिन है और इसी दिन भोजशाला परिसर में जुमे की नमाज अदा की जाती है, जिससे स्थिति की संवेदनशीलता और बढ़ गई है। प्रशासन ने दोनों समुदायों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की अफवाहों से दूर रहने की अपील की है।

    धार शहर में करीब 1200 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को 12 लेयर में बांटा गया है, जिसमें रिजर्व पुलिस फोर्स और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को भी शामिल किया गया है। पुलिस कंट्रोल रूम से लगातार निगरानी की जा रही है और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त बल तैनात है।

    भोजशाला परिसर और आसपास के क्षेत्रों में कलेक्टर और एसपी ने खुद सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण किया है। सोशल मीडिया पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी तरह की भड़काऊ पोस्ट या अफवाह को फैलने से रोका जा सके।

    यह विवाद 2022 में दायर याचिकाओं के बाद और अधिक चर्चा में आया था, जिसमें भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर अदालत में मांगें रखी गई थीं। हिंदू पक्ष ने इसे मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर बताते हुए नियमित पूजा का अधिकार मांगा है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे लंबे समय से उपयोग में रही मस्जिद बताता है।

    भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने भी इस मामले में 98 दिन का वैज्ञानिक सर्वे किया था, जिसकी रिपोर्ट को लेकर दोनों पक्षों में अलग-अलग दावे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पहले कुछ व्यवस्थाओं को लेकर अनुमति दी थी, जिसके बाद यह मामला और संवेदनशील हो गया।

    फिलहाल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था सर्वोपरि है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सभी सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह तैयार हैं।

  • MP: धार की ऐतिहासिक भोजशाला में हिन्दुओं को मिले पूजा का अधिकार…. HC में हिन्दू पक्ष ने रखे तर्क

    MP: धार की ऐतिहासिक भोजशाला में हिन्दुओं को मिले पूजा का अधिकार…. HC में हिन्दू पक्ष ने रखे तर्क


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) की इंदौर पीठ (Indore Bench) के सामने शुक्रवार को धार की ऐतिहासिक भोजशाला (Historical Bhojshala) को लेकर एक अहम दलील पेश की गई. हिंदू याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को इस परिसर के मूल धार्मिक स्वरूप को बहाल करने का निर्देश दिया जाए और वहां केवल हिंदुओं को पूजा की अनुमति मिले।

    ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ के वकील विष्णु शंकर जैन ने जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच के सामने ASI के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को कानून का उल्लंघन बताया।

    अभी हिंदुओं को मंगलवार को पूजा और मुस्लिमों को शुक्रवार को नमाज की अनुमति है. जैन ने कहा कि ‘प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम 1958’ के तहत किसी भी स्मारक का उपयोग उसके मूल स्वरूप के विपरीत नहीं किया जा सकता. उनके अनुसार, यह व्यवस्था हिंदुओं के मौलिक अधिकारों का हनन है।


    मंदिर बनाम मस्जिद

    याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी के वकील मनीष गुप्ता ने परिसर की बनावट पर बड़े सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि इस ढांचे में न तो कोई मीनार है और न ही वजूखाना, जो एक पारंपरिक मस्जिद की पहचान होते हैं. उन्होंने इस दावे को भी खारिज कर दिया कि भोजशाला एक जैन मंदिर था; उन्होंने कहा कि यह स्मारक असल में एक सरस्वती मंदिर है, जिसकी स्थापना 1034 ईस्वी में परमार वंश के राजा भोज ने की थी।


    मुस्लिम पक्ष और 1991 के कानून की दलील

    मुस्लिम पक्ष ने अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए ‘पूजा स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम 1991’ का सहारा लिया. 15 अगस्त 1947 को यह परिसर एक मस्जिद के रूप में अस्तित्व में था, इसलिए कानूनन इसके स्वरूप में बदलाव नहीं किया जा सकता। विष्णु शंकर जैन ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि भोजशाला एक ASI संरक्षित स्मारक है, इसलिए 1991 का अधिनियम इस पर लागू नहीं होता।

    हाई कोर्ट इस परिसर के धार्मिक स्वरूप से जुड़ी कुल पांच याचिकाओं और एक रिट अपील पर एक साथ सुनवाई कर रहा है. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 11 मई की तारीख तय की है।

  • मध्‍य प्रदेश के धार भोजशाला विवाद पर 6 अप्रैल से रोजाना होगी हाईकोर्ट में सुनवाई

    मध्‍य प्रदेश के धार भोजशाला विवाद पर 6 अप्रैल से रोजाना होगी हाईकोर्ट में सुनवाई


    भोपाल । मध्‍य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला विवाद मामले की उच्च न्यायालय में 6 अप्रैल से रोजाना सुनवाई होगी। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच आगामी सोमवार को दोपहर 2.30 बजे से सभी याचिकाओं को एक साथ सुनवाई करेगी।

    मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान कहा कि पहले याचिकाकर्ताओं के तर्क सुने जाएंगे, उसके बाद आपत्ति जताने वाले पक्ष को दलील रखने का मौका मिलेगा। इस दौरान हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से वकील विष्णु शंकर जैन और विनय जोशी मौजूद रहे, जबकि मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी की ओर से एडवोकेट सलमान खुर्शीद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।

    गौरतलब है कि बुधवार को उच्‍चतम न्‍यायालय ने स्पष्ट किया था कि इस विवाद का अंतिम निर्णय अब उच्‍च न्‍यायालय ही करेगी। उच्‍च न्‍यायालय भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की सर्वे रिपोर्ट, वीडियोग्राफी और पक्षकारों की आपत्तियों पर अंतिम सुनवाई करेगी। एएसआई की सर्वे रिपोर्ट सभी पक्षों को उपलब्ध कराई जा चुकी है और कई पक्षों ने इस पर आपत्तियां दर्ज कराई हैं।

    बता दें कि उच्‍च न्‍यायालय में पहले ही एएसआई सर्वे रिपोर्ट पेश की जा चुकी है। एएसआई की रिपोर्ट में परिसर के ऐतिहासिक स्वरूप, स्थापत्य और शिलालेखों से जुड़े कई तथ्य सामने आए हैं। 10वीं से 13वीं शताब्दी के दौरान राजा भोज और राजा अर्जुन वर्मन द्वारा कराए गए निर्माण और सांस्कृतिक कार्यों के प्रमाण मिले हैं। रिपोर्ट के अनुसार, परिसर में कुल 106 स्तंभ मिले हैं जिन पर विभिन्न प्रकार की नक्काशी है। इसके अलावा 32 शिलालेख पाए गए हैं। इनमें राजा भोज के समय के शिलालेख और अर्जुन वर्मन के राजगुरु मदन द्वारा रचित ‘पारिजलमंजरी नाटिका’ और ‘विजयश्री’ नाटक के पहले दो अंकों का उल्लेख है।

    कुछ शिलालेखों में 14वीं शताब्दी में मालवा में मुसलमानों के आगमन और मुस्लिम शासन की स्थापना का जिक्र भी है। 1389 ईस्वी में दिलावर खान (मूल नाम हुसैन) को दिल्ली से मालवा प्रांत का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। उन्होंने धार में स्वतंत्रता की घोषणा कर 1401 ईस्वी में शाही उपाधि धारण की। इन ऐतिहासिक और कानूनी तथ्यों को लेकर उच्‍च न्‍यायालय में अब विस्तृत बहस की संभावना है। मुस्लिम पक्ष एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर आपत्तियां रखेगा और सभी याचिकाओं पर एक साथ दलीलें सुनी जाएंगी।

  • भोजशाला विवाद पर RSS का रुख साफ-“अदालत का हर फैसला मंजूर”

    भोजशाला विवाद पर RSS का रुख साफ-“अदालत का हर फैसला मंजूर”


    धार।
     मध्य प्रदेश के भोजशाला परिसर को लेकर जारी कानूनी विवाद पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने संतुलित रुख अपनाया है। संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में अदालत का जो भी फैसला आएगा, उसे पूरी तरह स्वीकार किया जाएगा।

    संघ नेता ने क्या कहा
    मालवा प्रांत के प्रमुख प्रकाश शास्त्री ने इंदौर में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि इस विवाद में संघ ने अलग से कोई पक्ष नहीं रखा है और सभी तथ्य पहले ही अदालत के सामने प्रस्तुत किए जा चुके हैं।

    उन्होंने कहा, “मामला अभी मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए इस पर सार्वजनिक टिप्पणी करना उचित नहीं है। अदालत जो भी निर्णय देगी, हम उसे स्वीकार करेंगे।”

    ASI रिपोर्ट से बढ़ी चर्चा
    यह बयान ऐसे समय आया है जब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की 2000 से अधिक पन्नों की सर्वे रिपोर्ट चर्चा में है। रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि भोजशाला परिसर में मस्जिद से पहले परमारकालीन एक विशाल संरचना मौजूद थी और मौजूदा ढांचे में प्राचीन मंदिरों के अवशेषों का उपयोग किया गया।

    धार्मिक दावा और विवाद

    भोजशाला को हिंदू पक्ष देवी वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में देखता रहा है। इसी को लेकर लंबे समय से कानूनी और सामाजिक विवाद जारी है।


    संघ के इस बयान को विवाद के बीच संयमित और न्यायिक प्रक्रिया में भरोसा जताने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। अब सभी की नजर अदालत के अंतिम फैसले पर टिकी है।

  • धार भोजशाला विवाद: हाईकोर्ट करेगा निरीक्षण, ASI रिपोर्ट में 12वीं–20वीं सदी के शिलालेख मिले, 2 अप्रैल को निर्णायक सुनवाई

    धार भोजशाला विवाद: हाईकोर्ट करेगा निरीक्षण, ASI रिपोर्ट में 12वीं–20वीं सदी के शिलालेख मिले, 2 अप्रैल को निर्णायक सुनवाई


    भोपाल। मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला मामले में हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सोमवार को सुनवाई की। इस दौरान बेंच ने कहा कि अगली सुनवाई 2 अप्रैल को होगी और सुनवाई से पहले जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी भोजशाला का निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण से पहले याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनी जाएंगी, उसके बाद पक्षकारों की सुनवाई होगी। मुस्लिम पक्ष ने एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर आपत्ति जताई है।

    सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन, राज्य की ओर से एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह और अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन वीडियो कांफ्रेंसिंग से उपस्थित रहे। वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा मेनन के साथ हिंदू फ्रंट की ओर से याचिकाकर्ता आशीष गोयल और अधिवक्ता विनय जोशी भी अदालत में मौजूद रहे।

    भोजशाला मामले में कई याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें काजी जकुल्लाह, अंतर सिंह, मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी (धार) के अब्दुल समद खान, कुलदीप तिवारी और हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री शामिल हैं। 23 फरवरी को हाईकोर्ट ने सभी पक्षकारों को एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर अपनी आपत्तियां और सुझाव दो हफ्ते के भीतर दाखिल करने के निर्देश दिए थे।

    भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने हाईकोर्ट के आदेश पर 22 मार्च 2024 से लगभग 100 दिन तक परिसर और उससे 50 मीटर की परिधि में सर्वेक्षण, जांच और सीमित उत्खनन किया। टीम में पुरातत्वविद्, अभिलेखविद् और रसायनविद् समेत अन्य विशेषज्ञ शामिल थे। पहले ही रिपोर्ट की प्रतियां याचिकाकर्ताओं को उपलब्ध कराई जा चुकी हैं।

    एचएसआई रिपोर्ट में 12वीं से 20वीं सदी तक के शिलालेखों के प्रमाण मिले हैं। इनमें संस्कृत-प्राकृत शिलालेख, नागरी लिपि और अरबी-फारसी लेख शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार भोजशाला परिसर में 56 अरबी-फारसी शिलालेख मिले, जिनमें दुआएं, नाम और धार्मिक वाक्य लिखे हैं। साथ ही 12वीं–16वीं सदी के संस्कृत-प्राकृत शिलालेख मिले, जिनमें पारिजातमंजरी-नाटिका और अवनिकर्मसातम जैसे उल्लेख हैं। कुछ पत्थरों पर लिखावट मिटाकर दोबारा इस्तेमाल के संकेत भी देखे गए।

    रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि भोजशाला परिसर अलग-अलग कालखंडों में धार्मिक, शैक्षिक और सामाजिक कार्यों के लिए उपयोग में रहा। ब्रिटिश काल से अब तक इसके संरक्षण के प्रयासों का भी जिक्र किया गया है। कोर्ट ने सभी पक्षों को निर्देशित किया है कि वे 98 दिन तक चली वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट पर अपनी लिखित आपत्तियां और सुझाव अगली सुनवाई से पहले दाखिल करें।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार इस मामले की सुनवाई जल्द से जल्द पूरी की जानी है। ट्रांसफर के कारण पहले जबलपुर प्रिंसिपल बेंच में चली सुनवाई अब फिर से इंदौर खंडपीठ पर आ गई है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से अधिवक्ता विनय जोशी ने कहा कि दो सप्ताह के भीतर एएसआई रिपोर्ट पर आपत्तियां पेश कर दी जाएंगी।

    मुख्य बिंदु: 2 अप्रैल को अगली सुनवाई होगी, जस्टिस भोजशाला का निरीक्षण करेंगे, मुस्लिम पक्ष ने रिपोर्ट पर आपत्ति जताई, ASI ने 100 दिन तक सर्वे किया, 12वीं से 20वीं सदी के शिलालेख मिले।

  • भोपाल में हाईवोल्टेज ड्रामा: ई-रिक्शा रोकने पर पत्नी ने निगली चूहामार दवा, बेकाबू पति ने पुलिस की बाइकें तोड़ीं!

    भोपाल में हाईवोल्टेज ड्रामा: ई-रिक्शा रोकने पर पत्नी ने निगली चूहामार दवा, बेकाबू पति ने पुलिस की बाइकें तोड़ीं!


    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में गुरुवार दोपहर उस वक्त कोहराम मच गया जब एक ई-रिक्शा चालक की पत्नी ने पुलिस की कथित बदसलूकी से तंग आकर सरेराह जहर खा लिया। घटना पुराने पुलिस कंट्रोल रूम तिराहे की है जहाँ नवल कुशवाह नामक युवक अपनी पत्नी पूजा के साथ जा रहा था। आरोप है कि वहां तैनात दो पुलिसकर्मियों ने सिग्नल तोड़ने का हवाला देते हुए रिक्शा रोका और नवल के साथ अभद्रता की। विवाद इतना बढ़ा कि पुलिसकर्मियों ने जब थाने चलने की धमकी दी तो घबराहट और गुस्से में आकर पूजा ने अपने पर्स में रखी चूहामार दवा निगल ली।

    पत्नी की बिगड़ती हालत देख नवल का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। उसने बीच सड़क पर रिक्शा खड़ा कर जाम लगा दिया और उन पुलिसकर्मियों पर टूट पड़ा। हालात बिगड़ते देख दोनों जवान अपनी जान बचाकर पुराने कंट्रोल रूम के भीतर जा छिपे। बदहवास नवल ने वहीं ट्रैफिक चौकी के बाहर खड़ी पुलिस की बाइकों को पलट दिया और उनमें तोड़फोड़ शुरू कर दी। करीब 10 मिनट तक चले इस ड्रामे के दौरान पूजा रिक्शे में तड़पती रही” लेकिन नवल अड़ा रहा कि जब तक दोषी पुलिसकर्मी बाहर नहीं आते” वह अस्पताल नहीं जाएगा। अंततः” साथी पुलिसकर्मियों की समझाइश के बाद वह पत्नी को लेकर जेपी अस्पताल रवाना हुआ” जहाँ उसकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। हालांकि” पुलिस प्रशासन का दावा है कि विवाद के बाद घर जाकर दंपति में झगड़ा हुआ और जहर घर पर खाया गया” जो कि घटनाक्रम को नया मोड़ दे रहा है।

    दूसरी ओर मध्य प्रदेश के ही धार जिले से भी प्रशासन पर जनता के आक्रोश की एक बड़ी खबर सामने आई है। यहाँ एक चूना पत्थर खदान के सर्वे के लिए पहुँची प्रशासनिक टीम पर ग्रामीणों ने जानलेवा हमला कर दिया। देखते ही देखते भीड़ उग्र हो गई और तहसीलदार सहित पुलिस की गाड़ियों पर पत्थरों की बारिश कर दी। नौ थानों की पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद ग्रामीणों ने सरकारी वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया और तहसीलदार की गाड़ी पलटने की कोशिश की। पत्थरबाजी के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं” जो सरकारी अमले और आम जनता के बीच बढ़ते टकराव की गवाह दे रहे हैं।

  • MP में मौसम लेगा करवट, उज्जैन संभाग में बारिश के आसार, भोपाल-इंदौर में छाएंगे बादल

    MP में मौसम लेगा करवट, उज्जैन संभाग में बारिश के आसार, भोपाल-इंदौर में छाएंगे बादल


    भोपाल। फरवरी के मध्य में एमपी के मौसम में नया बदलाव देखने को मिलेगा। वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) की सक्रियता के कारण 18 और 19 फरवरी को ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और नीमच सहित उज्जैन संभाग में बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने इन जिलों में अलर्ट जारी किया है। वहीं, भोपाल और इंदौर में बादल छाए रह सकते हैं।

    रविवार को प्रदेश में मौसम का मिला-जुला असर देखने को मिला। खंडवा और खरगोन में दिन का तापमान 34 डिग्री के पार पहुंच गया, जबकि दतिया, धार, गुना, ग्वालियर, इंदौर, रायसेन, रतलाम, उज्जैन, दमोह, जबलपुर, खजुराहो, मंडला, नरसिंहपुर, सागर, सतना और उमरिया में पारा 30 डिग्री या उससे अधिक रहा।

    शनिवार-रविवार की रात ठंड का असर भी महसूस किया गया। कटनी का करौंदी सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 8.6 डिग्री दर्ज किया गया। पचमढ़ी में 9.2 डिग्री, कल्याणपुर में 9.4 डिग्री और रीवा में 9.6 डिग्री रहा। प्रमुख शहरों में इंदौर 11.5 डिग्री, ग्वालियर 11.7 डिग्री, भोपाल 13 डिग्री, उज्जैन 13.5 डिग्री और जबलपुर 14.3 डिग्री के साथ सबसे ठंडे शहर रहे।

    फरवरी में यह तीसरी बार होगा जब एमपी बारिश की चपेट में आएगा। फरवरी की शुरुआत में ही प्रदेश में दो बार ओले, बारिश और आंधी का दौर देखा गया था, जिससे फसलों को नुकसान पहुंचा था। इसके बाद सरकार ने प्रभावित फसलों का सर्वे भी कराया था।

    मौसम विभाग के अनुसार, न्यूनतम तापमान में अगले दो दिन 2 से 3 डिग्री की बढ़ोतरी होगी। उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करने वाला नया सिस्टम 16 फरवरी से सक्रिय होगा, जिसका असर एमपी में भी दिखेगा। पहाड़ी राज्यों में बारिश और बर्फबारी के कारण प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्के बादल छाए रहेंगे।

    अगले दो दिन का मौसम का हाल
    16 फरवरी – दिन में गर्मी बढ़ेगी, रात के तापमान में भी हल्की बढ़ोतरी।
    17 फरवरी – कुछ जिलों में सुबह के समय हल्का कोहरा रहेगा, इस दिन बारिश का अलर्ट नहीं है।

    अभी प्रदेश में हल्की सर्दी का दौर जारी है, रात और सुबह के समय ठंड रहेगी। ज्यादातर शहरों में रात का तापमान 10 डिग्री से ऊपर ही रहेगा, जबकि दिन के समय पारा 30 डिग्री तक पहुंच सकता है।

  • मुख्य सचिव अनुराग जैन का कलेक्टरों को कड़ा संदेश: “समझो कि सब कुछ पता चल जाता है, करप्शन से दूर रहो”

    मुख्य सचिव अनुराग जैन का कलेक्टरों को कड़ा संदेश: “समझो कि सब कुछ पता चल जाता है, करप्शन से दूर रहो”



    नई दिल्ली। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कई जिलों में कलेक्टरों के खिलाफ मिल रही शिकायतों पर नाराजगी जताई है और स्पष्ट किया है कि अधिकारियों को यह नहीं समझना चाहिए कि उनकी गतिविधियां छुपी रहती हैं। उन्होंने कहा कि “किसके यहां क्या पक रहा है, सब मालूम है”, इसलिए सभी अधिकारियों को करप्शन से दूर रहकर सरकार की प्राथमिकताओं और जनता के हितों के अनुरूप काम करना चाहिए।
    सीएस जैन ने यह भी कहा कि कुछ जिलों की शिकायतें उनके और मुख्यमंत्री के पास भी पहुंची हैं, इसलिए बेहतर यही होगा कि अधिकारी जल्द ही अपनी कार्यशैली सुधारें।

    यह चेतावनी उन्होंने सात और आठ अक्टूबर को हुई दो दिवसीय कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस की दूसरी समीक्षा बैठक में दी। इस बैठक में सीएस जैन ने कॉन्फ्रेंस के 85 बिंदुओं की जिलावार समीक्षा की और टॉप थ्री तथा बॉटम थ्री जिलों की जानकारी साझा करते हुए कमजोर प्रदर्शन वाले जिलों को सुधारने का निर्देश दिया। बैठक में पुलिस और अन्य विभागों के साथ मिलकर महिला सुरक्षा के प्रति जागरूकता के लिए किए गए कार्यों की भी समीक्षा की गई।

    साथ ही नाबालिग बालिकाओं के गुम होने पर उनकी तलाश के लिए चलाए जा रहे मुस्कान अभियान की प्रगति भी ली गई, जिसमें बताया गया कि अब तक 1900 से अधिक बालिकाओं को बरामद किया गया है। जन जागरूकता अभियान में टीकमगढ़, धार और सिंगरौली टॉप थ्री जिलों में शामिल रहे, जबकि पन्ना, मुरैना और भिंड बॉटम थ्री जिलों में रहे।

    कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस की तारीखों को लेकर भी चर्चा हुई, क्योंकि इसे आयोजित करने के लिए कई बार तारीख बदलती रही। सीएस अनुराग जैन ने पिछले माह 31 दिसंबर को बैठक की तारीख तय की थी, फिर इसे 5 जनवरी कर दिया गया। फिर भी कॉन्फ्रेंस समय पर नहीं हो सकी और 15 जनवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बैठक करने का निर्णय लिया गया, लेकिन प्रशासनिक कारणों से यह भी संभव नहीं हो पाया। अंततः यह बैठक चौथी बार तय तारीख पर ही हो सकी।