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  • मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पीथमपुर में दो बड़े उद्योगों का किया उद्घाटन, धार में निवेश और रोजगार को मिलेगी नई गति

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पीथमपुर में दो बड़े उद्योगों का किया उद्घाटन, धार में निवेश और रोजगार को मिलेगी नई गति

    मध्य प्रदेश: के धार जिले के पीथमपुर में औद्योगिक विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की मौजूदगी में एडवांस ऑप्टिकल फाइबर और बैटरी मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स का उद्घाटन किया गया। इन दोनों औद्योगिक इकाइयों के शुरू होने से प्रदेश में निवेश को बढ़ावा मिलने के साथ बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। सरकार के अनुसार, इन उद्योगों से 30 हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की संभावना है।

    पीथमपुर लंबे समय से मध्य प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल रहा है और अब यहां नई तकनीक से जुड़े उद्योगों के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। ऑप्टिकल फाइबर निर्माण से दूरसंचार और डिजिटल कनेक्टिविटी से जुड़े क्षेत्र को मजबूती मिलने की उम्मीद है, जबकि बैटरी मैन्युफैक्चरिंग प्लांट ऊर्जा भंडारण और आधुनिक औद्योगिक जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों क्षेत्रों में भविष्य में मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए इन संयंत्रों की शुरुआत को औद्योगिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।

    उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि नए उद्योगों की स्थापना से मध्य प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे। उन्होंने औद्योगिक निवेश को प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे राज्य के विकास के साथ देश की आर्थिक प्रगति को भी गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए किए गए समझौतों को अब जमीन पर उतारने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने धार जिले के औद्योगिक बदलाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बीते एक महीने के दौरान वह दूसरी बार इस क्षेत्र में आए हैं और इससे पहले भी कई उद्योगों का लोकार्पण किया गया था। उनके मुताबिक, पिछले समय में किए गए कई समझौते अब वास्तविक औद्योगिक परियोजनाओं में बदल रहे हैं। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां भी तेज हो रही हैं।

    धार जिले को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह क्षेत्र कभी पिछड़ेपन के लिए जाना जाता था, लेकिन अब औद्योगिक विकास की वजह से इसकी तस्वीर बदल रही है। जनजातीय बहुल धार और पीथमपुर क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ने वाले इलाकों में शामिल हो रहे हैं। औद्योगिक इकाइयों की स्थापना से स्थानीय कारोबार, परिवहन, निर्माण, सेवा और अन्य सहायक क्षेत्रों में भी गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।

    ऑप्टिकल फाइबर और बैटरी निर्माण जैसे क्षेत्रों में निवेश को राज्य के औद्योगिक विस्तार के साथ तकनीकी क्षमता बढ़ाने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे स्थानीय युवाओं को नए प्रकार के कौशल और रोजगार के अवसर मिल सकते हैं। साथ ही उद्योगों के आसपास सहायक इकाइयों और सेवा क्षेत्र के विस्तार की संभावना भी बनेगी।

    सरकार का जोर प्रदेश में बड़े निवेश को प्रोत्साहित करने के साथ रोजगार आधारित औद्योगिक विकास पर है। पीथमपुर में शुरू हुए दोनों प्लांट इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माने जा रहे हैं। आने वाले समय में इन परियोजनाओं से उत्पादन बढ़ने और रोजगार के अवसरों में विस्तार होने की उम्मीद है। इससे धार जिले की औद्योगिक पहचान और मजबूत होने के साथ मध्य प्रदेश के आर्थिक विकास को भी नई गति मिल सकती है।

  • सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भोजशाला के समीप तय स्थल पर अदा हुई जुमे की नमाज, सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम

    सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भोजशाला के समीप तय स्थल पर अदा हुई जुमे की नमाज, सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम


    धार। मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर के पीछे बाउंड्रीवॉल से सटी खसरा नंबर 612 की भूमि पर शुक्रवार को मुस्लिम समाज के लोगों ने जुमे की नमाज अदा की। यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और जिला प्रशासन व मुस्लिम पक्ष के बीच बनी सहमति के बाद की गई।

    नमाज से पहले प्रशासन ने बारिश के कारण गीली जमीन पर तिरपाल बिछवाए और पूरे क्षेत्र की बैरिकेडिंग कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की। मौके पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार मौजूद रहे।

    निजी जमीन बताकर हिंदू पक्ष ने जताई आपत्ति
    नमाज शुरू होने से पहले स्थानीय हिंदू समाज के कुछ लोगों ने संबंधित भूमि को निजी बताते हुए वहां नमाज की अनुमति का विरोध किया। उनका कहना था कि वे लंबे समय से इस जमीन पर खेती करते आ रहे हैं और यदि आवश्यकता पड़ी तो अपने अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायालय का रुख करेंगे।

    सूचना मिलने पर एसडीएम राजकुमार हलदर मौके पर पहुंचे और प्रदर्शन कर रहे लोगों से चर्चा कर आश्वासन दिया कि उनकी आपत्तियों पर नियमानुसार सुनवाई की जाएगी। इसके बाद स्थिति सामान्य हो गई।

    मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट के आदेश का पालन करने की बात कही
    कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी के प्रतिनिधि अब्दुल समद ने बताया कि खसरा नंबर 611 और 612 से कमाल मौला मस्जिद सीधे दिखाई देती है, इसलिए इस स्थान पर नमाज पढ़ने पर सहमति बनी। उन्होंने कहा कि यदि अगले शुक्रवार तक अदालत का कोई नया अंतरिम या अंतिम आदेश आता है, तो उसका पूरी तरह पालन किया जाएगा।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बनी व्यवस्था
    गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद से जुड़े अपने अंतरिम आदेश को स्पष्ट करते हुए मुस्लिम समाज के लिए भोजशाला के समीप दरगाह परिसर की निर्धारित भूमि पर प्रत्येक शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे के बीच नमाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश राज्य सरकार को दिए थे।

    आदेश के बाद धार कलेक्टर राजीव रंजन मीणा और एसपी सचिन शर्मा ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ स्थल का निरीक्षण किया। देर शाम मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों और जिला प्रशासन के बीच हुई बैठक में खसरा नंबर 611 और 612 की भूमि पर नमाज अदा कराने को लेकर सहमति बनी।
    आदेश के बाद धार कलेक्टर राजीव रंजन मीणा और एसपी सचिन शर्मा ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ स्थल का निरीक्षण किया। देर शाम मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों और जिला प्रशासन के बीच हुई बैठक में खसरा नंबर 611 और 612 की भूमि पर नमाज अदा कराने को लेकर सहमति बनी।

    100 से अधिक नमाजी पहुंचे
    शुक्रवार दोपहर करीब डेढ़ बजे से निर्धारित स्थल पर नमाजी पहुंचने लगे। शुरुआत में 10 से 15 लोग मौजूद थे, लेकिन धीरे-धीरे संख्या बढ़कर 100 से अधिक हो गई। इस दौरान कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी के पदाधिकारी और याचिकाकर्ता भी उपस्थित रहे। पूरे आयोजन के दौरान शहर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा।

  • MP: धार में भोजशाला परिसर के सटी जमीन पर आज होगी जुमे की नमाज…. SC ने तय की जगह

    MP: धार में भोजशाला परिसर के सटी जमीन पर आज होगी जुमे की नमाज…. SC ने तय की जगह


    धार।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के धार स्थित भोजशाला (Bhojshala)-कमाल मौला मस्जिद (Kamal Maula Mosque) विवाद में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार की नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के साथ कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी है।


    भोजशाला विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने क्या निर्देश दिया?

    सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले दिए गए अंतरिम आदेश को स्पष्ट करते हुए मुस्लिम समाज के लोगों के लिए नमाज अदा करने का स्थान तय कर दिया। अब शुक्रवार को जुमे की नमाज भोजशाला परिसर से सटी दरगाह की जमीन पर अदा की जाएगी। यहां हर शुक्रवार दोपहर के समय दो घंटे तक नमाज पढ़ी जा सकेगी।


    मुस्लिम पक्ष की शिकायत पर कोर्ट ने क्या कहा?

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने यह निर्देश मुस्लिम पक्ष की उस शिकायत पर दिया, जिसमें कहा गया था कि प्रशासन भोजशाला के निकट स्थित वैकल्पिक स्थलों पर नमाज की अनुमति नहीं दे रहा है। केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने कहा कि राज्य किसी भी पक्ष के अधिकारों की प्रतिस्पर्धा में नहीं पड़ना चाहता और उसकी प्राथमिकता केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। इस पर न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि धार्मिक अधिकारों की रक्षा करना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना, दोनों राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी हैं।


    प्रशासन ने क्या तैयारियां की हैं?

    जिला प्रशासन ने तय स्थान पर सफाई और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा। शुक्रवार को एएसपी, सीएसपी, डीएसपी और एसडीओपी स्तर के अधिकारियों सहित करीब 350 पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे। नगर के संवेदनशील इलाकों में पुलिस की मोबाइल बाइक टीमें लगातार गश्त करेंगी।

  • भोजशाला विवाद: चालीस पीर वाले प्रस्ताव पर आपत्ति के बाद प्रशासन ने तलाशे दो नए स्थान, सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई अहम

    भोजशाला विवाद: चालीस पीर वाले प्रस्ताव पर आपत्ति के बाद प्रशासन ने तलाशे दो नए स्थान, सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई अहम


    धार । धार स्थित भोजशाला परिसर में जुम्मे की नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान तय करने को लेकर प्रशासन ने अपनी कवायद तेज कर दी है। मुस्लिम समाज की ओर से पहले प्रस्तावित स्थान पर आपत्ति दर्ज कराए जाने के बाद अब जिला प्रशासन ने नए विकल्पों की तलाश शुरू कर दी है। इसी क्रम में सोमवार को अधिकारियों ने डिसलरी रोड क्षेत्र में दो अलग-अलग भूखंडों का निरीक्षण किया, जिन्हें संभावित वैकल्पिक स्थल के रूप में देखा जा रहा है।

    प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार डिसलरी रोड स्थित सर्वे नंबर 509 और सर्वे नंबर 639 की लगभग एक-एक एकड़ जमीन का निरीक्षण किया गया है। इन स्थानों को इसलिए देखा जा रहा है ताकि भविष्य में जुम्मे की नमाज के लिए एक उपयुक्त और व्यवस्थित वैकल्पिक व्यवस्था की जा सके। दोनों स्थल भोजशाला परिसर से लगभग 500 मीटर की दूरी पर बताए जा रहे हैं।

    इससे पहले चालीस पीर के समीप प्रस्तावित स्थान को लेकर मुस्लिम समाज ने आपत्ति जताई थी। इसके बाद मामला न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंच गया और अब इस संबंध में दायर याचिका पर 29 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। माना जा रहा है कि शीर्ष अदालत के निर्देशों के बाद ही जुम्मे की नमाज के लिए अंतिम वैकल्पिक स्थान तय किया जाएगा।

    कमाल मौलाना सोसायटी के सदर अब्दुल समद का कहना है कि प्रशासन द्वारा जिन नए स्थानों का निरीक्षण किया गया है, उनकी जानकारी अभी समाज को औपचारिक रूप से नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए अदालत के निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।

    वहीं जिला प्रशासन का कहना है कि संभावित विकल्पों का निरीक्षण केवल वैकल्पिक व्यवस्था की तैयारियों के तहत किया गया है। अधिकारियों के अनुसार डिसलरी रोड स्थित सर्वे नंबर 509 और 639 की जमीन का मौके पर जाकर निरीक्षण किया गया है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर प्रशासन के पास उपयुक्त विकल्प उपलब्ध रहे।

    अब पूरे मामले में 29 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई अहम मानी जा रही है। अदालत के निर्देशों के बाद ही आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया और जुम्मे की नमाज के लिए अंतिम स्थान को लेकर निर्णय लिया जाएगा।

  • बलराम कृषि महोत्सव में किसानों को मिला आधुनिक खेती का संदेश, प्राकृतिक कृषि, सोलर पंप और नवाचार से समृद्ध मध्यप्रदेश बनाने का आह्वान

    बलराम कृषि महोत्सव में किसानों को मिला आधुनिक खेती का संदेश, प्राकृतिक कृषि, सोलर पंप और नवाचार से समृद्ध मध्यप्रदेश बनाने का आह्वान

     प्रदेश में कृषि को अधिक लाभकारी, आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने किसानों को नई तकनीकों और प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बदलते समय में खेती को केवल पारंपरिक तरीकों तक सीमित रखने के बजाय वैज्ञानिक तकनीकों, प्राकृतिक कृषि पद्धतियों और कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन को अपनाना आवश्यक है। इससे किसानों की आय में स्थायी वृद्धि होगी और प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि समृद्ध और आत्मनिर्भर कृषि ही विकसित मध्यप्रदेश की मजबूत नींव है।

    मुख्यमंत्री ने धार जिले में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कृषक कल्याण वर्ष-2026 के तहत किसानों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कृषि क्षेत्र में नवाचार, आधुनिक तकनीकों और शासकीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दे रही है। किसानों को इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाकर अपनी उत्पादन क्षमता और आय दोनों में वृद्धि करनी चाहिए।

    उन्होंने प्राकृतिक खेती को भविष्य की आवश्यकता बताते हुए कहा कि इससे खेती की लागत कम होती है, मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है और पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलता है। साथ ही कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन के माध्यम से किसान अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री कुसुम-बी योजना के अंतर्गत सोलर पंपों की स्थापना को भी किसानों के लिए लाभकारी बताते हुए ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम बताया।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने समान नागरिक संहिता को लेकर भी सरकार की मंशा स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में इस विषय पर व्यापक जनसंवाद किया गया है तथा विभिन्न राजनीतिक दलों, धार्मिक और सामाजिक समुदायों के प्रतिनिधियों से विचार-विमर्श के बाद आगामी विधानसभा के वर्षाकालीन सत्र में आवश्यक विधायी प्रक्रिया पूरी करने की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा। उनका कहना था कि सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान कानून लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाएंगे।

    बलराम कृषि महोत्सव का उद्देश्य किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीकों, कृषि यंत्रीकरण, प्राकृतिक खेती, मूल्य संवर्धन और विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी पहुंचाना रहा। महोत्सव में कृषि आधारित और देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं। इसके साथ ही नशा मुक्ति अभियान के तहत किसानों और नागरिकों को नशामुक्त समाज के निर्माण का संदेश दिया गया।

    महोत्सव में कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केन्द्र, प्राकृतिक खेती, बलराम तालाब, सूक्ष्म सिंचाई, जल संरक्षण, श्रीअन्न, पशुपालन विभाग, मत्स्य विभाग, इफको, कृभको तथा अन्य कृषि सहयोगी संस्थाओं द्वारा प्रदर्शनी लगाई गई। किसानों ने इन प्रदर्शनों का अवलोकन कर नई तकनीकों, उन्नत कृषि पद्धतियों और सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। इससे उन्हें खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने के नए विकल्पों की जानकारी मिली।

    जिलेभर से लगभग दो हजार किसानों ने इस महोत्सव में भाग लिया। किसान उत्पादक संगठनों, कृषि संगठनों के प्रतिनिधियों, कृषि आदान विक्रेताओं तथा कृषि एवं संबद्ध विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। आयोजन किसानों के लिए वैज्ञानिक कृषि, आधुनिक नवाचार, प्राकृतिक खेती और सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त करने का प्रभावी मंच साबित हुआ। इस अवसर पर जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी कार्यक्रम में भाग लेकर किसानों से संवाद किया और कृषि विकास से जुड़े विभिन्न प्रयासों की जानकारी साझा की।

  • भोजशाला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की अहम पहल, मध्य प्रदेश सरकार को अंतरिम व्यवस्था बनाने का निर्देश, सभी पक्षों के अधिकारों के संतुलन पर जोर

    भोजशाला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की अहम पहल, मध्य प्रदेश सरकार को अंतरिम व्यवस्था बनाने का निर्देश, सभी पक्षों के अधिकारों के संतुलन पर जोर

    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण अंतरिम निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने राज्य सरकार से ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है, जिससे अंतिम निर्णय आने तक किसी भी पक्ष को असुविधा न हो और धार्मिक गतिविधियां शांतिपूर्ण ढंग से संचालित हो सकें। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था केवल अंतरिम प्रकृति की होगी और इससे किसी भी पक्ष के कानूनी अधिकारों या दावों पर कोई अंतिम प्रभाव नहीं पड़ेगा।

    सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत ने कहा कि संवेदनशील मामलों में शांति, सामाजिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार को निर्देश दिया गया कि वह ऐसी व्यावहारिक व्यवस्था तैयार करे, जिससे सभी संबंधित पक्षों की आवश्यकताओं का संतुलित समाधान हो सके। अदालत ने यह भी कहा कि अंतरिम व्यवस्था को अंतिम निर्णय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

    भोजशाला परिसर को लेकर लंबे समय से दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे हैं। एक पक्ष इसे मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि दूसरा पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में मान्यता देने की मांग करता है। इसी विवाद से संबंधित विभिन्न याचिकाओं पर न्यायिक प्रक्रिया जारी है और मामला अभी अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा में है।

    सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से यह दलील दी गई कि पूर्व की व्यवस्था में बदलाव के कारण धार्मिक गतिविधियों पर प्रभाव पड़ा है। वहीं दूसरे पक्ष ने अपने ऐतिहासिक और धार्मिक दावों को दोहराते हुए संबंधित दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर अपना पक्ष अदालत के समक्ष रखा। दोनों पक्षों ने विस्तृत कानूनी तर्क प्रस्तुत किए, जिन पर अदालत ने गंभीरता से विचार किया।

    कार्यवाही के दौरान सर्वोच्च अदालत ने सभी पक्षों के वरिष्ठ अधिवक्ताओं को भी संयम बरतने की सलाह दी। अदालत ने कहा कि यह अत्यंत संवेदनशील विषय है और बहस के दौरान प्रयुक्त भाषा तथा शब्दों का चयन अत्यधिक सावधानी के साथ किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की अनावश्यक विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।

    अदालत ने संकेत दिया कि इस मामले की अंतिम सुनवाई विस्तृत रूप से की जाएगी। इसके लिए दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिवक्ताओं की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त तिथि निर्धारित की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर पूरे दिन सुनवाई कर सभी पक्षों के तर्कों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विस्तार से विचार किया जाएगा।

    इस बीच मध्य प्रदेश सरकार पर अंतरिम व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने की जिम्मेदारी रहेगी। अदालत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतिम न्यायिक निर्णय आने तक परिसर में शांति, कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द बना रहे तथा किसी भी समुदाय के अधिकारों पर अनावश्यक प्रभाव न पड़े।

    भोजशाला विवाद देश के प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक मामलों में शामिल रहा है। सर्वोच्च अदालत के ताजा निर्देशों के बाद अब सभी की निगाहें राज्य सरकार द्वारा बनाई जाने वाली अंतरिम व्यवस्था और आगामी विस्तृत सुनवाई पर टिकी हैं। अंतिम फैसला आने तक न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार सभी पक्षों के दावों और अधिकारों पर विधिक परीक्षण जारी रहेगा।

  • MP में 20-22 जून के बीच दस्‍तक दे सकता है मानसून, अगले 4 दिन रहेगा आंधी-बारिश का दौर

    MP में 20-22 जून के बीच दस्‍तक दे सकता है मानसून, अगले 4 दिन रहेगा आंधी-बारिश का दौर

    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून के आगमन को लेकर मौसम विभाग ने नया अनुमान जारी किया है। इस बार प्रदेश में मानसून सामान्य समय से 5 से 7 दिन की देरी से पहुंच सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक 20 से 22 जून के बीच होने की संभावना है। वहीं, मानसून आने से पहले प्रदेशभर में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का दौर जारी रहेगा।

    धार-खरगोन में रेड अलर्ट

    मौसम विभाग ने सोमवार को धार और खरगोन जिलों के लिए ओलावृष्टि और तेज बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, बैतूल, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा में आंधी, गरज-चमक, बारिश और ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार अगले चार दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम का यही मिजाज बना रहेगा।

    नौतपा की तपिश पर बारिश भारी
    नौतपा के सातवें दिन भी प्रदेश में कई स्थानों पर बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिला। लगातार बदलते मौसम के कारण तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। रविवार को प्रदेश का सर्वाधिक तापमान शाजापुर में 41.4 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि पचमढ़ी सबसे ठंडा रहा, जहां अधिकतम तापमान 34.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    बड़े शहरों में तापमान में गिरावट
    प्रदेश के प्रमुख शहरों में भी गर्मी का असर कम हुआ है-
    इंदौर – 36.3 डिग्री सेल्सियस
    जबलपुर – 36.4 डिग्री सेल्सियस
    ग्वालियर – 37.5 डिग्री सेल्सियस
    उज्जैन – 37.5 डिग्री सेल्सियस
    भोपाल – 38 डिग्री सेल्सियस

    शाजापुर, राजगढ़ और नरसिंहपुर को छोड़ अधिकांश जिलों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा।

    मई में गर्मी भी रिकॉर्ड, बारिश भी ज्यादा
    मई माह में प्रदेश ने दो तरह के मौसम का अनुभव किया। महीने की शुरुआत आंधी और बारिश से हुई, जबकि 18 मई के बाद भीषण गर्मी का दौर शुरू हो गया। इस दौरान खजुराहो में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया। 25 मई से शुरू हुए नौतपा के दौरान भी प्रदेश का कोई न कोई जिला आंधी और बारिश से प्रभावित रहा। महीने के अंतिम दिनों में कई जिलों में ओलावृष्टि भी हुई।

    औसत से अधिक हुई मई की बारिश
    मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार मई महीने में प्रदेश में करीब सवा इंच बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य तौर पर इस अवधि में लगभग पौन इंच वर्षा होती है। यानी इस बार औसत से करीब 56 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है। हालांकि जून में वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना जताई गई है। अनुमान है कि इस बार प्रदेश में मानसूनी बारिश दीर्घकालिक औसत का करीब 90 प्रतिशत रह सकती है।

    अगले चार दिन कैसा रहेगा मौसम?
    मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 1 से 4 जून तक प्रदेश के अधिकांश जिलों में आंधी, बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां जारी रहेंगी। कई क्षेत्रों में ओलावृष्टि भी हो सकती है। लगातार बारिश के कारण दिन और रात के तापमान में और गिरावट आने की संभावना है।

  • MP: धार भोजशाला परिसर के नीचे दबी है हनुमान प्रतिमा….! जाने क्या उठी नई मांग?

    MP: धार भोजशाला परिसर के नीचे दबी है हनुमान प्रतिमा….! जाने क्या उठी नई मांग?


    धार।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के धार (Dhar) स्थित भोजशाला परिसर (Bhojshala Complex) में श्रद्धालुओं के निःशुल्क प्रवेश की मांग को लेकर एक याचिकाकर्ता ने बुधवार को ASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) को आवेदन भेजा। वहीं, दूसरे याचिकाकर्ता ने अलग अर्जी में दावा किया कि इस मध्यकालीन स्मारक की जमीन के नीचे भगवान हनुमान और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां दबी हो सकती हैं। ये ताजा आवेदन उन दो याचिकाकर्ताओं ने भेजे हैं, जिनकी ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करने के बाद मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (Madhya Pradesh High Court) की इंदौर पीठ ने इस ASI संरक्षित परिसर को 15 मई को वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर घोषित किया था।

    सामाजिक संगठन ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ से जुड़े याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने ASI को भेजे आवेदन में कहा कि श्रद्धालुओं को उपासना के अधिकार के तहत भोजशाला में निःशुल्क प्रवेश दिया जाना चाहिए। आवेदन में कहा गया कि ASI द्वारा श्रद्धालुओं से वर्तमान में लिया जा रहा एक रुपए का प्रवेश शुल्क बंद किया जाए क्योंकि इस वसूली से उच्च न्यायालय के आदेश की ‘अवहेलना’ हो रही है।


    भोजशाला में लगे इस्लामी प्रतीकों को हटाने की मांग

    आवेदन में भोजशाला परिसर की दक्षिण-पूर्व दिशा में स्थित बंद कमरे को तत्काल खोलने की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ता का दावा है कि यह कमरा मूल मंदिर परिसर का हिस्सा है। आवेदन में यह भी कहा गया है कि चूंकि उच्च न्यायालय ने भोजशाला को वाग्देवी मंदिर घोषित कर दिया है, इसलिए परिसर में ‘अनाधिकृत रूप से लगाए गए’ इस्लामी प्रतीकों को हटाया जाना चाहिए।


    मुस्लिम प्रतीकों को किसी अन्य कमरे में रखने की मांग

    भोजशाला मामले के एक अन्य याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी ने भी केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय और ASI को भेजे अलग आवेदन में ऐसी ही मांग की और कहा कि इस्लामी प्रतीकों को मुस्लिम समुदाय के किसी भवन में सुरक्षित तौर पर रखा जाना चाहिए।


    याचिकाकर्ता का दावा- भोजशाला में दबी है हनुमान जी की मूर्ति

    तिवारी ने अपने आवेदन में दावा किया कि धार के लोगों की मान्यता है कि भोजशाला परिसर की जमीन के नीचे भगवान हनुमान और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे में सच का पता लगाने के लिए वैज्ञानिक तरीके से खुदाई करके इन मूर्तियों को बाहर निकाला जाना चाहिए और इन्हें परिसर में धार्मिक विधि-विधान के साथ स्थापित किया जाना चाहिए।


    पिछले शुक्रवार को आया था भोजशाला को लेकर ऐतिहासिक फैसला

    उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने 15 मई को अपने फैसले में भोजशाला परिसर की धार्मिक प्रकृति वाग्देवी (सरस्वती) मंदिर के रूप में निर्धारित की थी। साथ ही अदालत ने ASI के सात अप्रैल 2003 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया था जिसमें मुस्लिम समुदाय को हर शुक्रवार इस परिसर में नमाज अदा करने की इजाजत दी गई थी। इस आदेश में हिंदुओं को केवल मंगलवार को स्मारक में पूजा-अर्चना की अनुमति दी गई थी।

  • भोजशाला मामले पर हाईकोर्ट का फैसला आज, इंदौर-धार में हाई अलर्ट

    भोजशाला मामले पर हाईकोर्ट का फैसला आज, इंदौर-धार में हाई अलर्ट


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के बहुचर्चित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद पर आज हाईकोर्ट की इंदौर बेंच का अहम फैसला आ सकता है। वर्षों से चल रहे इस संवेदनशील मामले में कोर्ट ने सुनवाई पूरी करने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रखा था, जिसके चलते पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर बढ़ा दिया गया है।

    फैसले को देखते हुए इंदौर और धार जिले में प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। खास बात यह है कि आज शुक्रवार का दिन है और इसी दिन भोजशाला परिसर में जुमे की नमाज अदा की जाती है, जिससे स्थिति की संवेदनशीलता और बढ़ गई है। प्रशासन ने दोनों समुदायों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की अफवाहों से दूर रहने की अपील की है।

    धार शहर में करीब 1200 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को 12 लेयर में बांटा गया है, जिसमें रिजर्व पुलिस फोर्स और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को भी शामिल किया गया है। पुलिस कंट्रोल रूम से लगातार निगरानी की जा रही है और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त बल तैनात है।

    भोजशाला परिसर और आसपास के क्षेत्रों में कलेक्टर और एसपी ने खुद सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण किया है। सोशल मीडिया पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी तरह की भड़काऊ पोस्ट या अफवाह को फैलने से रोका जा सके।

    यह विवाद 2022 में दायर याचिकाओं के बाद और अधिक चर्चा में आया था, जिसमें भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर अदालत में मांगें रखी गई थीं। हिंदू पक्ष ने इसे मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर बताते हुए नियमित पूजा का अधिकार मांगा है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे लंबे समय से उपयोग में रही मस्जिद बताता है।

    भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने भी इस मामले में 98 दिन का वैज्ञानिक सर्वे किया था, जिसकी रिपोर्ट को लेकर दोनों पक्षों में अलग-अलग दावे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पहले कुछ व्यवस्थाओं को लेकर अनुमति दी थी, जिसके बाद यह मामला और संवेदनशील हो गया।

    फिलहाल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था सर्वोपरि है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सभी सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह तैयार हैं।

  • MP: धार की ऐतिहासिक भोजशाला में हिन्दुओं को मिले पूजा का अधिकार…. HC में हिन्दू पक्ष ने रखे तर्क

    MP: धार की ऐतिहासिक भोजशाला में हिन्दुओं को मिले पूजा का अधिकार…. HC में हिन्दू पक्ष ने रखे तर्क


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) की इंदौर पीठ (Indore Bench) के सामने शुक्रवार को धार की ऐतिहासिक भोजशाला (Historical Bhojshala) को लेकर एक अहम दलील पेश की गई. हिंदू याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को इस परिसर के मूल धार्मिक स्वरूप को बहाल करने का निर्देश दिया जाए और वहां केवल हिंदुओं को पूजा की अनुमति मिले।

    ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ के वकील विष्णु शंकर जैन ने जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच के सामने ASI के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को कानून का उल्लंघन बताया।

    अभी हिंदुओं को मंगलवार को पूजा और मुस्लिमों को शुक्रवार को नमाज की अनुमति है. जैन ने कहा कि ‘प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम 1958’ के तहत किसी भी स्मारक का उपयोग उसके मूल स्वरूप के विपरीत नहीं किया जा सकता. उनके अनुसार, यह व्यवस्था हिंदुओं के मौलिक अधिकारों का हनन है।


    मंदिर बनाम मस्जिद

    याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी के वकील मनीष गुप्ता ने परिसर की बनावट पर बड़े सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि इस ढांचे में न तो कोई मीनार है और न ही वजूखाना, जो एक पारंपरिक मस्जिद की पहचान होते हैं. उन्होंने इस दावे को भी खारिज कर दिया कि भोजशाला एक जैन मंदिर था; उन्होंने कहा कि यह स्मारक असल में एक सरस्वती मंदिर है, जिसकी स्थापना 1034 ईस्वी में परमार वंश के राजा भोज ने की थी।


    मुस्लिम पक्ष और 1991 के कानून की दलील

    मुस्लिम पक्ष ने अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए ‘पूजा स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम 1991’ का सहारा लिया. 15 अगस्त 1947 को यह परिसर एक मस्जिद के रूप में अस्तित्व में था, इसलिए कानूनन इसके स्वरूप में बदलाव नहीं किया जा सकता। विष्णु शंकर जैन ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि भोजशाला एक ASI संरक्षित स्मारक है, इसलिए 1991 का अधिनियम इस पर लागू नहीं होता।

    हाई कोर्ट इस परिसर के धार्मिक स्वरूप से जुड़ी कुल पांच याचिकाओं और एक रिट अपील पर एक साथ सुनवाई कर रहा है. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 11 मई की तारीख तय की है।