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  • रोज सुबह पीएं मेथी का पानी: कोलेस्ट्रॉल घटाए, वजन नियंत्रित करे और मेटाबॉलिज्म बढ़ाए

    रोज सुबह पीएं मेथी का पानी: कोलेस्ट्रॉल घटाए, वजन नियंत्रित करे और मेटाबॉलिज्म बढ़ाए


    नई दिल्ली । आयुर्वेद में मेथी को औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और गलत खान-पान के कारण कोलेस्ट्रॉल की समस्या तेजी से बढ़ रही है। जब खून में कोलेस्ट्रॉल नॉर्मल से ज्यादा हो जाता है तो यह नसों में जमा होकर ब्लॉकेज और दिल पर अतिरिक्त दबाव का कारण बनता है।

    यूपी के अलीगढ़ आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पीयूष माहेश्वरी के अनुसार मेथी के दानों में फाइबर और स्टेरोइडल सैपोनिन्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। सुबह खाली पेट मेथी का पानी पीने से खून में मौजूद बैड कोलेस्ट्रॉल धीरे-धीरे कम होता है। यह नसों की दीवारों पर जमा फैट को पिघलाकर शरीर से बाहर निकालता है जिससे ब्लड फ्लो बेहतर होता है और दिल पर पड़ने वाला दबाव कम होता है।

    इसका सेवन आसान है। रात को एक गिलास पानी में एक चम्मच मेथी दाना भिगो दें। सुबह दाने चबाकर खाएं और पानी पी लें। इस सरल उपाय से नसों में जमा कोलेस्ट्रॉल कम होने लगता है और दिल की सेहत बेहतर रहती है।

    डॉ. माहेश्वरी बताते हैं कि डायबिटीज के मरीजों के लिए मेथी का पानी वरदान है। इसमें मौजूद घुलनशील फाइबर ब्लड में शुगर के अवशोषण की गति धीमी करता है और इंसुलिन के उत्पादन में मदद करता है। नियमित सेवन से फास्टिंग शुगर लेवल नियंत्रित रहता है और मेटाबॉलिक रेट बढ़ता है।

    पाचन के लिए भी मेथी का पानी लाभकारी है। यह गैस एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याओं में राहत देता है आंतों को साफ़ करता है और शरीर से टॉक्सिन्स निकालता है। मेटाबॉलिज्म को तेज करके यह अतिरिक्त चर्बी को बर्न करने में मदद करता है। पेट लंबे समय तक भरा महसूस होने से ओवरईटिंग और अनावश्यक कैलोरी का सेवन भी कम होता है।

    मेथी की तासीर गर्म होती है जो वात दोष को संतुलित करती है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो जोड़ों और हड्डियों की सूजन कम करने में मदद करते हैं। आयुर्वेद में इसे हार्ट डायबिटीज पाचन और वजन कंट्रोल के लिए शक्तिशाली औषधि माना गया है।

    रोज सुबह खाली पेट मेथी का पानी पीने से नसों में जमा गंदे कोलेस्ट्रॉल कम होता है ब्लड फ्लो बेहतर होता है मेटाबॉलिज्म बूस्ट होता है वजन नियंत्रित रहता है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। यह दिल पाचन और संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए एक सरल लेकिन असरदार आयुर्वेदिक उपाय है।

  • आज ही बदलें जीवनशैली, स्वास्थ्य और इम्यूनिटी के लिए जरूरी कदम

    आज ही बदलें जीवनशैली, स्वास्थ्य और इम्यूनिटी के लिए जरूरी कदम


    नई दिल्ली।सर्दियों में ठंड और आलस के कारण लोग अक्सर लंबे समय तक बिस्तर या कुर्सी पर रहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आज की जीवनशैली में मस्तिष्क का इस्तेमाल तो बढ़ गया है लेकिन शारीरिक गतिविधियां कम हो गई हैं। यह असंतुलन धीरे-धीरे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।आयुर्वेद में भी कम शारीरिक गतिविधि को स्वास्थ्य के लिए चेतावनी माना गया है। चरक संहिता में कहा गया है व्यायामात लभते स्वास्थ्यं दीर्घायुष्यं बलं सुखम्। यानी व्यायाम से लंबी उम्र ताकत और खुशहाली मिलती है।

    कम गतिविधि से होने वाले प्रमुख स्वास्थ्य खतरे
    मोटापा और मधुमेहलंबे समय तक बैठे रहने से वसा का जमाव बढ़ता है और मेटाबॉलिज्म कमजोर होता है जिससे मोटापा और डायबिटीज़ की संभावना बढ़ जाती है।

    गठिया और जोड़ों में दर्द
    लगातार एक ही पोज़चर में रहने से हड्डियों और मांसपेशियों में जकड़न होती है जो जोड़ों के दर्द का कारण बनती है।

    हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग
    चलने और व्यायाम से रक्त संचार और ऑक्सीजन वितरण बेहतर होता है। कम गतिविधि से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है जिससे दिल से जुड़े रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है।

    मानसिक स्वास्थ्य पर असर
    डिप्रेशन चिंता और पाचन विकार की समस्या बढ़ सकती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर हो जाती है।विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रोज़ाना थोड़ी शारीरिक गतिविधि जैसे सुबह की वॉक हल्का व्यायाम या स्ट्रेचिंग को जीवनशैली में शामिल किया जाए। इससे न केवल बीमारियों का जोखिम कम होता है बल्कि मानसिक और शारीरिक संतुलन भी बना रहता है।

  • विशाल रिसर्च में खुलासा: टाइप-2 डायबिटीज़ की दवा बीटा सेल्स पर करती असर, बीमारी बिगाड़ सकती है!

    विशाल रिसर्च में खुलासा: टाइप-2 डायबिटीज़ की दवा बीटा सेल्स पर करती असर, बीमारी बिगाड़ सकती है!

    नई दिल्ली। डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए जो दवाएं सालों से दी जा रही हैं, वही बीमारी को धीरे-धीरे और गंभीर बना सकती हैं। स्पेन की यूनिवर्सिटी ऑफ बार्सिलोना की एक नई स्टडी में टाइप 2 डायबिटीज के इलाज में इस्तेमाल होने वाली सल्फोनिल्यूरिया कैटेगरी की दवाओं को लेकर चौंकाने वाली चेतावनी दी गई है। रिसर्च के मुताबिक, ये दवाएं शुरुआत में ब्लड शुगर कंट्रोल करती हैं, लेकिन लंबे समय में उल्टा असर डाल सकती हैं।

    डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है। खासतौर पर टाइप 2 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता। इंसुलिन अग्न्याशय की बीटा कोशिकाएं बनाती हैं, जो ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में अहम भूमिका निभाती हैं। लेकिन हालिया रिसर्च बताती है कि इन्हीं बीटा कोशिकाओं पर कुछ दवाओं का नकारात्मक असर पड़ सकता है।

    क्या कहती है रिसर्च?
    जर्नल Diabetes, Obesity and Metabolism में प्रकाशित इस स्टडी के अनुसार, सल्फोनिल्यूरिया दवाएं जैसे ग्लिबेनक्लामाइड बीटा कोशिकाओं को ज्यादा इंसुलिन रिलीज करने के लिए मजबूर करती हैं। स्टडी के लीड प्रोफेसर एडुआर्ड मोंटान्या ने बताया कि ये दवाएं कई दशकों से टाइप 2 डायबिटीज में दी जा रही हैं और कई देशों में जेनरिक रूप में आसानी से उपलब्ध हैं। हालांकि, लंबे समय तक इनके इस्तेमाल से बीटा कोशिकाओं की सेहत और उनकी पहचान पर बुरा असर पड़ सकता है।

    बीटा कोशिकाएं क्यों हो रही हैं कमजोर?
    रिसर्च में सामने आया कि ये कोशिकाएं मरती नहीं हैं, बल्कि अपनी पहचान खोने लगती हैं। लंबे समय तक ग्लिबेनक्लामाइड लेने से उन जीन की एक्टिविटी कम हो जाती है जो इंसुलिन बनाने के लिए जरूरी हैं। इसके अलावा, दवाएं कोशिकाओं के अंदर मौजूद एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम में तनाव पैदा करती हैं, जिससे बीटा कोशिकाएं सही तरह से काम नहीं कर पातीं।

    दवा क्यों हो जाती है बेअसर?
    विशेषज्ञों के मुताबिक, कई मरीजों में देखा गया है कि जो दवाएं शुरुआत में असरदार होती हैं, वही कुछ साल बाद कम प्रभावी हो जाती हैं। इसकी वजह बीटा कोशिकाओं की पहचान का धीरे-धीरे खत्म होना है। इससे ब्लड शुगर कंट्रोल कमजोर पड़ने लगता है और शुगर लेवल फिर बढ़ने लगता है। अच्छी बात यह है कि यह स्थिति स्थायी नहीं होती और सही इलाज से कोशिकाओं की क्षमता दोबारा लौट सकती है।

    मरीजों के लिए क्या है चेतावनी?
    डॉक्टरों का कहना है कि मरीज बिना सलाह के दवा बंद न करें। हालांकि यह स्टडी बताती है कि लंबे समय तक सल्फोनिल्यूरिया दवाओं के इस्तेमाल से समय के साथ डोज बढ़ाने या नई दवाएं जोड़ने की जरूरत क्यों पड़ती है। इसलिए डायबिटीज के इलाज में नियमित जांच और सही मेडिकल गाइडेंस बेहद जरूरी है।

  • पपीता खाने के 7 अद्भुत फायदे: जानें सुबह के नाश्ते में क्यों शामिल करें पपीता

    पपीता खाने के 7 अद्भुत फायदे: जानें सुबह के नाश्ते में क्यों शामिल करें पपीता


    नई दिल्ली । पपीता एक पोषक तत्वों से भरपूर फल है जो न केवल शरीर को मजबूती प्रदान करता है, बल्कि कई बीमारियों से भी बचाव करता है। विशेष रूप से सुबह नाश्ते में पपीता खाने से शरीर को जबरदस्त फायदे हो सकते हैं। अगर आप अपनी सेहत का ख्याल रखना चाहते हैं, तो पपीता को नाश्ते में शामिल करना एक बेहतरीन आदत साबित हो सकता है। आइए जानते हैं नाश्ते में पपीता खाने के सात अद्भुत फायदे।

    पाचन तंत्र को दुरुस्त रखें

    पपीते में पाया जाने वाला एंजाइम पपेन पाचन को बेहतर बनाता है। यह कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है। सुबह नाश्ते में पपीता खाने से पेट साफ और हल्का महसूस होता है।

    इम्यूनिटी को बढ़ावा

    पपीता विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। नियमित रूप से पपीता खाने से सर्दी-खांसी और वायरल संक्रमण का खतरा कम होता है।

    वजन घटाने में सहायक

    अगर आप वजन घटाने की योजना बना रहे हैं, तो पपीता आपके लिए आदर्श है। इसमें कम कैलोरी और ज्यादा फाइबर होता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और ओवरईटिंग से बचाव होता है।

    दिल को स्वस्थ रखे

    पपीता खराब कोलेस्ट्रॉल LDL को कम करता है। इसमें पोटैशियम, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो दिल के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हैं और हार्ट डिजीज का खतरा कम करते हैं।

    त्वचा को बनाए चमकदार

    पपीता आपकी त्वचा के लिए एक प्राकृतिक ब्यूटी ट्रीटमेंट है। इसमें मौजूद विटामिन A, C और E त्वचा को जवां और चमकदार बनाए रखते हैं, साथ ही यह दाग-धब्बों को भी दूर करने में मदद करता है।

    आंखों की रोशनी में सुधार

    पपीते में बीटा-कैरोटीन और विटामिन A होते हैं, जो आंखों की रोशनी के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। यह उम्र के साथ होने वाली आंखों की समस्याओं को भी रोकता है।

    डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद

    पपीता मीठा होने के बावजूद इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिससे यह ब्लड शुगर लेवल को संतुलित रखने में मदद करता है। सही मात्रा में सेवन करने से डायबिटीज के मरीजों के लिए यह फायदेमंद हो सकता है।

    पपीता खाने का तरीका

    सुबह नाश्ते में ताजा पपीता खाएं। आप चाहें तो इसके ऊपर कुछ बूंदें नींबू की डाल सकते हैं लेकिन नमक या चीनी मिलाने से बचें। पीता सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है खासकर जब इसे सुबह नाश्ते में शामिल किया जाए। यह न केवल पाचन और इम्यूनिटी को मजबूत करता है, बल्कि दिल और त्वचा की सेहत के लिए भी लाभकारी है। रोजाना इस फल को अपनी डाइट में शामिल करें और इससे होने वाले फायदों का अनुभव करें।