इस सप्ताह की सबसे महत्वपूर्ण गतिविधि 30 और 31 अक्टूबर को अमेरिका के अटलांटा में आयोजित जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक रही। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने वैश्विक संघर्षों, ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े मुद्दों पर भारत का पक्ष रखा।
जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया के सामने मौजूद चुनौतियों का समाधान सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीति और बातचीत के माध्यम से तलाशा जाना चाहिए। उन्होंने युद्धों के व्यापक आर्थिक प्रभावों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, किसी क्षेत्र में होने वाला संघर्ष केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि खाद्य आपूर्ति, ऊर्जा और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को प्रभावित करता है। इसका असर विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के विकासशील देशों पर पड़ता है।
अटलांटा में ही क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक भी हुई। इसमें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक समन्वय से जुड़े विषयों पर चर्चा की। इस बैठक को आगामी क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन की तैयारियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना गया।
जी-20 बैठक के दौरान जयशंकर ने कई देशों के प्रतिनिधियों के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय मुलाकातें कीं। 30 अक्टूबर को उन्होंने यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास से बातचीत की। इस दौरान यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ।
कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के साथ हुई मुलाकात में दोनों देशों के बीच सहयोग की प्रगति की समीक्षा की गई। वहीं, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग के साथ भी बातचीत हुई। इन संपर्कों में ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और भारत के बीच प्रौद्योगिकी एवं नवाचार साझेदारी को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया।
जयशंकर ने अर्जेंटीना, ब्राजील, मैक्सिको और जर्मनी के विदेश मंत्रियों से भी मुलाकात की। अर्जेंटीना के साथ व्यापार, महत्वपूर्ण खनिज, रक्षा और परमाणु सहयोग जैसे विषय चर्चा में रहे। मैक्सिको के साथ बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों को और गति देने पर जोर दिया गया। इन बैठकों के जरिए भारत ने विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक और रणनीतिक सहयोग के अवसर तलाशे।
इससे पहले 25 से 28 अक्टूबर तक लिकटेंस्टीन के वंशानुगत राजकुमार एलोइस अपनी पत्नी राजकुमारी सोफी के साथ भारत की राजकीय यात्रा पर आए थे। इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद हाउस में उनसे मुलाकात की। बातचीत में व्यापार, निवेश, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के बीच हुए समझौते के तहत आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाना भी प्रमुख विषय रहा।
यूरोप के साथ संबंधों को लेकर ऑस्ट्रिया की विदेश मंत्री बीट माइनल-राइजिंगर की भारत यात्रा भी महत्वपूर्ण रही। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ उनकी बातचीत में व्यापार, प्रौद्योगिकी और यूरोपीय देशों के साथ सहयोग बढ़ाने से जुड़े मुद्दे शामिल रहे। इसके साथ ही खाड़ी देशों के साथ भारत के बढ़ते संपर्क भी व्यापक कूटनीतिक गतिविधियों का हिस्सा रहे।
पूरे सप्ताह की गतिविधियों से भारत की विदेश नीति की तीन प्रमुख प्राथमिकताएं सामने आईं। पहली, अमेरिका, यूरोप और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख साझेदारों के साथ रणनीतिक संवाद बनाए रखना। दूसरी, व्यापार, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में सहयोग के नए रास्ते तलाशना। तीसरी, रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्षों के बीच बातचीत तथा कूटनीतिक समाधान को बढ़ावा देना।
इस तरह अक्टूबर का अंतिम सप्ताह भारत के लिए केवल बैठकों और यात्राओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक मंचों पर अपनी प्राथमिकताएं रखने और विभिन्न देशों के साथ साझेदारी को आगे बढ़ाने का अवसर भी बना।









