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  • दिवाली पर घर में बनाएं शाही सोहन हलवा, देसी घी और मेवों से तैयार होगी स्वादिष्ट पारंपरिक मिठाई

    दिवाली पर घर में बनाएं शाही सोहन हलवा, देसी घी और मेवों से तैयार होगी स्वादिष्ट पारंपरिक मिठाई

    नई दिल्ली ।दिवाली का त्योहार मिठाइयों के बिना अधूरा माना जाता है। इस मौके पर घरों में मेहमानों के स्वागत के लिए तरह-तरह के पकवान और मिठाइयां तैयार की जाती हैं। आमतौर पर लोग बाजार से मिठाइयां खरीदते हैं, लेकिन इस बार त्योहार पर कुछ अलग बनाने की योजना है तो घर पर पारंपरिक सोहन हलवा तैयार कर सकते हैं। देसी घी, चीनी, गेहूं के आटे और ढेर सारे मेवों से बनने वाली यह मिठाई स्वाद के साथ त्योहार की मिठास भी बढ़ा सकती है।

    सोहन हलवा उत्तर भारत की प्रसिद्ध पारंपरिक मिठाइयों में शामिल है। इसकी खास पहचान गाढ़ी बनावट, हल्के खिंचाव और घी की खुशबू से होती है। इसमें काजू, बादाम और पिस्ता जैसे मेवे मिलाने से इसका स्वाद और बेहतर हो जाता है। इसे तैयार करने में थोड़ा समय और लगातार मेहनत की जरूरत होती है, लेकिन सही तरीके से बनाने पर हलवा अच्छी तरह जमता है और इसे मनचाहे आकार में काटकर परोसा जा सकता है।

    इसे बनाने के लिए 4 बड़े चम्मच अंकुरित गेहूं का आटा, 4 बड़े चम्मच मैदा, एक कप चीनी, एक कप देसी घी और एक कप पानी की जरूरत होगी। इसके अलावा आधा छोटा चम्मच इलायची पाउडर, 2 बड़े चम्मच बारीक कटे काजू, 2 बड़े चम्मच बादाम और एक बड़ा चम्मच पिस्ता लेना होगा।

    हलवा बनाने की शुरुआत सांचे तैयार करने से करें। इसके लिए छोटी स्टील की कटोरियों या किसी चौड़े सांचे में थोड़ा देसी घी लगाकर चिकना कर लें। अब इनके तले में कटे हुए काजू, बादाम और पिस्ता फैला दें। इससे हलवा जमने के बाद ऊपर की तरफ मेवे दिखाई देंगे और मिठाई आकर्षक लगेगी।

    इसके बाद एक बर्तन में अंकुरित गेहूं का आटा और मैदा डालें। इसमें धीरे-धीरे पानी मिलाकर अच्छी तरह फेंटें। ध्यान रखें कि घोल में किसी तरह की गांठ न रहे। अब इसे कुछ देर के लिए अलग रख दें।

    अगले चरण में भारी तले वाली कड़ाही में चीनी और पानी डालकर गर्म करें। चीनी पूरी तरह घुल जाने के बाद तैयार आटे का घोल धीरे-धीरे चाशनी में मिलाएं। इस दौरान मिश्रण को लगातार चलाते रहना जरूरी है, ताकि वह कड़ाही के तले में चिपके नहीं और उसमें गांठें न बनें।

    जब मिश्रण गाढ़ा होने लगे तो इसमें थोड़ा-थोड़ा करके देसी घी डालें। हर बार घी डालने के बाद मिश्रण को अच्छी तरह चलाएं। इसे मध्यम से धीमी आंच पर पकाते रहें। सोहन हलवे की सही बनावट पाने के लिए इस प्रक्रिया में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। लगातार चलाने से मिश्रण समान रूप से पकता है।

    जब हलवा गाढ़ा होकर कड़ाही के किनारों को छोड़ने लगे और उसमें चमक दिखाई देने लगे, तब इलायची पाउडर मिला दें। इसके बाद गैस बंद कर दें। तैयार मिश्रण को तुरंत घी लगे सांचों में डालें और ऊपर से बचे हुए मेवे सजा दें।

    हलवे को कमरे के तापमान पर करीब 3 से 4 घंटे तक जमने दें। अच्छी तरह सेट होने के बाद इसे सांचे से निकालकर मनचाहे आकार में काट लें। इस तरह घर पर तैयार सोहन हलवा मेहमानों को परोसने के लिए तैयार हो जाएगा।

    हलवा बनाते समय कुछ सावधानियां रखना भी जरूरी है। हमेशा भारी तले वाली कड़ाही का इस्तेमाल करें और आटे के घोल को अच्छी तरह फेंटें। घी एक साथ डालने के बजाय थोड़ी-थोड़ी मात्रा में मिलाएं। पकाते समय मिश्रण लगातार चलाते रहें। तैयार हलवे को सांचे में डालने में देरी न करें, क्योंकि ठंडा होने पर यह जल्दी जमने लगता है। पूरी तरह ठंडा और सेट होने के बाद ही इसके टुकड़े काटें।

    तैयार सोहन हलवे को एयरटाइट डिब्बे में रखकर सुरक्षित रखा जा सकता है। दिवाली से पहले इसे तैयार करने से त्योहार के दिन मिठाई बनाने की भागदौड़ कम होगी और घर आए मेहमानों को पारंपरिक स्वाद वाली मिठाई परोसने का मौका मिलेगा।

  • दीपावली के बाद तमिलनाडु सरकार का बड़ा फैसला, 9 नवंबर को छुट्टी और कोयंबेडु मंडी भी रहेगी बंद

    दीपावली के बाद तमिलनाडु सरकार का बड़ा फैसला, 9 नवंबर को छुट्टी और कोयंबेडु मंडी भी रहेगी बंद

    नई दिल्ली ।तमिलनाडु सरकार ने दीपावली के बाद राज्य के लोगों को राहत देते हुए 9 नवंबर को अतिरिक्त सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। यह छुट्टी सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और शैक्षणिक संस्थानों में लागू होगी। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य त्योहार मनाने के लिए अपने गृहनगर जाने वाले लोगों को वापस लौटने के लिए अतिरिक्त समय देना है। इसी दिन चेन्नई की प्रमुख कोयंबेडु सब्जी मंडी भी बंद रहेगी। ऐसे में सरकारी कर्मचारियों, विद्यार्थियों और सब्जी कारोबार से जुड़े लोगों को अपनी योजनाएं पहले से तय करनी होंगी।

    इस वर्ष दीपावली 8 नवंबर को रविवार के दिन मनाई जाएगी। त्योहार के अगले दिन सोमवार, 9 नवंबर को सरकारी छुट्टी मिलने से लोगों को परिवार के साथ समय बिताने का अतिरिक्त अवसर मिलेगा। खासकर वे लोग जो नौकरी, पढ़ाई या अन्य कारणों से दूसरे शहरों में रहते हैं और दीपावली मनाने के लिए अपने पैतृक शहर या गांव जाते हैं, उन्हें वापसी की तैयारी के लिए एक दिन और मिल सकेगा।

    सरकार के आदेश के मुताबिक, 9 नवंबर का अवकाश पूरे तमिलनाडु में लागू रहेगा। इसके दायरे में सभी सरकारी कार्यालय, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, स्कूल, कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं। इसका मतलब है कि इन संस्थानों में सोमवार को नियमित कामकाज और शैक्षणिक गतिविधियां संचालित नहीं होंगी। छुट्टी का लाभ सरकारी कर्मचारियों के साथ विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को भी मिलेगा।

    हालांकि, अतिरिक्त अवकाश के कारण सरकारी कामकाज के निर्धारित दिनों में बदलाव किया गया है। 9 नवंबर की छुट्टी की भरपाई के लिए 28 नवंबर को कार्यदिवस घोषित किया गया है। यह तारीख शनिवार को पड़ रही है। इसलिए संबंधित सरकारी कार्यालयों और संस्थानों को इस संशोधित कार्यक्रम के अनुसार काम करना होगा। निर्धारित व्यवस्था के तहत 9 नवंबर को बंद रहने वाले संस्थानों में 28 नवंबर को सामान्य कामकाज किया जाएगा।

    इस फैसले से त्योहार के बाद एक साथ यात्रा करने वाले परिवारों को भी सुविधा मिलने की उम्मीद है। रविवार को दीपावली मनाने के तुरंत बाद सोमवार को काम या पढ़ाई के लिए लौटने की बाध्यता नहीं रहेगी। लोग अपनी यात्रा को सुविधानुसार आगे बढ़ा सकेंगे। सरकार ने अवकाश के साथ उसकी भरपाई की तारीख भी तय कर दी है, जिससे संस्थानों के कामकाजी कार्यक्रम में संतुलन बनाए रखा जा सके।

    दूसरी ओर, चेन्नई स्थित कोयंबेडु सब्जी मंडी भी 9 नवंबर को एक दिन के लिए बंद रहेगी। यह फैसला बाजार से जुड़े व्यापारी संगठनों की बैठक में लिया गया है। एकीकृत बाजार संघ महासंघ के अध्यक्ष जीटी राजशेखरन की अध्यक्षता में हुई सलाहकार बैठक में इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई।

    बैठक में तय किया गया कि दीपावली तक बाजार की सभी सब्जी दुकानें सामान्य रूप से खुली रहेंगी। इससे त्योहार से पहले ग्राहकों को आवश्यक सब्जियां खरीदने और व्यापारियों को अपना कारोबार संचालित करने का अवसर मिलेगा। बाजार में खरीदारी करने वाले लोगों को 9 नवंबर की बंदी को ध्यान में रखते हुए अपनी जरूरत का सामान पहले ही खरीदना होगा।

    व्यापारी संघ के निर्णय के अनुसार, कोयंबेडु सब्जी मंडी मंगलवार, 10 नवंबर से दोबारा सामान्य रूप से खुल जाएगी। यह बंदी केवल दीपावली के अगले दिन के लिए निर्धारित की गई है। इस तरह 9 नवंबर को तमिलनाडु में सरकारी संस्थानों के साथ चेन्नई की प्रमुख सब्जी मंडी भी बंद रहेगी, जबकि अगले दिन से बाजार का कारोबार नियमित रूप से शुरू हो जाएगा।

  • दिवाली पर मां लक्ष्मी के साथ क्यों होती है गणेश जी की पूजा, जानिए धन-संपत्ति और बुद्धि से जुड़ी पौराणिक मान्यता

    दिवाली पर मां लक्ष्मी के साथ क्यों होती है गणेश जी की पूजा, जानिए धन-संपत्ति और बुद्धि से जुड़ी पौराणिक मान्यता


    नई दिल्ली ।दिवाली हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह पर्व हर साल कार्तिक महीने की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। साल 2026 में दिवाली 8 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन घरों और दुकानों को दीपों से सजाया जाता है और सुख-समृद्धि की कामना के साथ विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। दिवाली के अवसर पर मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दोनों देवी-देवताओं की एक साथ आराधना करने के पीछे विशेष महत्व और पौराणिक कथा जुड़ी हुई है।

    हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी को धन, वैभव और समृद्धि की देवी माना जाता है। वहीं, भगवान गणेश बुद्धि, विवेक और शुभ कार्यों के आरंभ के देवता के रूप में पूजे जाते हैं। मान्यता है कि जीवन में केवल धन का होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका सही इस्तेमाल करने के लिए समझदारी और विवेक भी जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति के पास पर्याप्त धन हो, लेकिन उसे सही तरीके से खर्च करने और संभालने की बुद्धि न हो तो वह संपत्ति उसके लिए लाभकारी नहीं रह सकती। इसी विचार को ध्यान में रखते हुए दिवाली पर लक्ष्मीजी के साथ गणेशजी की पूजा की जाती है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां लक्ष्मी की आराधना से धन-संपत्ति और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है, जबकि भगवान गणेश की पूजा से बुद्धि, विवेक और जीवन की बाधाओं से मुक्ति का आशीर्वाद मांगा जाता है। दोनों की संयुक्त पूजा का संदेश है कि व्यक्ति के जीवन में आर्थिक संपन्नता के साथ सही निर्णय लेने की क्षमता भी होनी चाहिए। धन और सद्बुद्धि का संतुलन ही सुखी एवं समृद्ध जीवन का आधार माना जाता है।

    मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की एक साथ पूजा करने के पीछे एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है। कथा के अनुसार, एक बार मां लक्ष्मी को अपने धन और वैभव पर अभिमान हो गया था। तब भगवान विष्णु ने उन्हें समझाया कि संसार में भले ही हर कोई उनकी कृपा प्राप्त करना चाहता हो, लेकिन मातृत्व के बिना उनका जीवन अधूरा है। भगवान विष्णु की यह बात सुनकर मां लक्ष्मी दुखी हो गईं।

    मां लक्ष्मी को उदास देखकर माता पार्वती ने अपने पुत्र भगवान गणेश को उनकी गोद में बैठा दिया। इससे लक्ष्मीजी बेहद प्रसन्न हुईं और उन्होंने गणेशजी को अपना पुत्र स्वीकार कर लिया। इसके बाद उन्होंने वरदान दिया कि जो भी भक्त उनकी पूजा करेगा, उसे भगवान गणेश की आराधना भी करनी होगी। तभी उसे दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होगा। इसी पौराणिक मान्यता को दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की संयुक्त पूजा की एक प्रमुख वजह माना जाता है।

    भगवान गणेश से जुड़ी रिद्धि-सिद्धि और शुभ-लाभ की मान्यताएं भी इस परंपरा को विशेष बनाती हैं। धार्मिक कथाओं में रिद्धि और सिद्धि को गणेशजी की पत्नियां बताया गया है। रिद्धि को समृद्धि और संपन्नता का प्रतीक माना जाता है, जबकि सिद्धि सफलता और उपलब्धियों से जुड़ी हैं। वहीं, शुभ और लाभ को रिद्धि-सिद्धि का पुत्र माना जाता है। शुभ का अर्थ मंगल और कल्याण से है, जबकि लाभ उन्नति और तरक्की का प्रतीक है।

    इसी कारण दिवाली के अवसर पर कई लोग अपने घरों, दुकानों और पूजा स्थलों के प्रवेश द्वार पर शुभ-लाभ लिखते हैं। धार्मिक विश्वास है कि इससे घर में सकारात्मकता, सुख और समृद्धि बनी रहती है। इस तरह दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की पूजा केवल धन प्राप्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन में संपन्नता के साथ बुद्धि, विवेक, सफलता और मंगल की कामना का भी प्रतीक मानी जाती है।

  • दिवाली पर पुराने पर्दों को फेंकने की बजाय अपनाएं ये 5 तरीके, कम खर्च में चमकेगा आपका घर

    दिवाली पर पुराने पर्दों को फेंकने की बजाय अपनाएं ये 5 तरीके, कम खर्च में चमकेगा आपका घर


    नई दिल्ली ।
    दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही घरों में साफ-सफाई और सजावट की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इस दौरान लोग घर को आकर्षक बनाने के लिए नई लाइट्स, कुशन कवर, फूलों और सजावटी सामान की खरीदारी करते हैं। हालांकि, घर को नया और खूबसूरत लुक देने के लिए हर बार बाजार से महंगी चीजें खरीदना जरूरी नहीं है। घर में रखे पुराने पर्दों का इस्तेमाल करके भी कई आकर्षक सजावटी सामान तैयार किए जा सकते हैं। थोड़ी रचनात्मकता और मेहनत से पुराने कपड़ों को उपयोगी होम डेकोर आइटम में बदला जा सकता है।

    पुराने पर्दों से सजावट करने का एक आसान तरीका नए कुशन कवर तैयार करना है। अगर आपके पास मोटे या खूबसूरत प्रिंट वाले पर्दे हैं, तो उनके अच्छे हिस्से का इस्तेमाल सोफा और बेड के कुशन कवर बनाने में कर सकते हैं। इसके लिए कपड़े को कुशन के आकार के अनुसार काटकर किनारों पर सिलाई करनी होगी। तैयार कवर को अधिक आकर्षक बनाने के लिए पुराने बटन, लेस और रंगीन धागों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे घर के बैठने वाले हिस्से को नया अंदाज मिलेगा।

    डाइनिंग टेबल की सजावट के लिए पुराने पर्दों से टेबल रनर भी बनाया जा सकता है। यदि पर्दे का कपड़ा मजबूत और अच्छी स्थिति में है, तो उसे टेबल की लंबाई के अनुसार काटकर चारों तरफ सिलाई कर दें। इसके बाद इसे टेबल के बीच में बिछाया जा सकता है। इसके ऊपर फूलदान, सजावटी कटोरी या एलईडी कैंडल रखने से डाइनिंग एरिया आकर्षक दिखाई देगा। दिवाली पर मेहमानों के स्वागत के लिए यह एक अच्छा और कम खर्च वाला विकल्प हो सकता है।

    घर के मुख्य दरवाजे और अंदरूनी दरवाजों को सजाने के लिए पुराने पर्दों से डोर हैंगिंग तैयार की जा सकती है। इसके लिए कपड़े की लंबी-लंबी पट्टियां काटकर लकड़ी की छड़ी या गोल रिंग पर बांध दें। इसके निचले हिस्से में रंगीन धागे, छोटे लटकन और मोती लगाकर इसे सजाया जा सकता है। तैयार डेकोरेशन को दरवाजे या खाली दीवार पर टांगकर घर की सजावट में इस्तेमाल किया जा सकता है।

    पूजा घर को सजाने के लिए भी पुराने पर्दे उपयोगी साबित हो सकते हैं। अगर पर्दे का कपड़ा सिल्क, वेलवेट या आकर्षक डिजाइन वाला है, तो उससे पूजा की चौकी के लिए सुंदर आसन बनाया जा सकता है। इसके अलावा कपड़े को मंदिर के पीछे बैकड्रॉप के रूप में भी लगाया जा सकता है। किनारों पर लेस लगाकर इसे और आकर्षक बनाया जा सकता है। हालांकि, पूजा स्थल पर कपड़े का इस्तेमाल करते समय उसे दीये, अगरबत्ती और मोमबत्तियों से सुरक्षित दूरी पर रखना जरूरी है।

    दिवाली पर मिठाई और उपहार देने के लिए पुराने पर्दों से कपड़े के गिफ्ट बैग भी बनाए जा सकते हैं। इसके लिए कपड़े को जरूरत के अनुसार काटकर तीन तरफ से सिलाई करें और ऊपर दो पट्टियां लगाकर हैंडल तैयार कर लें। इन बैग को लेस, बटन या कपड़े से बने छोटे फूलों से सजाया जा सकता है। इनका इस्तेमाल त्योहार के दौरान गिफ्ट देने के साथ भविष्य में भी किया जा सकता है।

    पुराने पर्दों को सजावटी सामान में बदलने से पहले उनकी अच्छी तरह सफाई करना जरूरी है। कपड़े को धोकर पूरी तरह सुखा लें और छेद, फंगस या खराब हिस्सों का इस्तेमाल करने से बचें। सिलाई से पहले सही नाप लेना भी जरूरी है, ताकि कपड़ा बेकार न हो। बचे हुए छोटे टुकड़ों से रिबन, कपड़े के फूल और सजावटी पैच भी बनाए जा सकते हैं।

    इस तरह पुराने पर्दों का दोबारा इस्तेमाल करके दिवाली पर घर की सजावट को नया रूप दिया जा सकता है। इससे बेकार पड़े कपड़े उपयोग में आएंगे और नई सजावटी चीजें खरीदने का खर्च भी कम होगा।

  • दिवाली से पहले घर के इन 5 हिस्सों की जरूर करें सफाई, वास्तु मान्यताओं के अनुसार मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए हैं खास

    दिवाली से पहले घर के इन 5 हिस्सों की जरूर करें सफाई, वास्तु मान्यताओं के अनुसार मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए हैं खास

    नई दिल्ली । दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही घरों में साफ-सफाई और सजावट की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। हिंदू धर्म में दीपावली को मां लक्ष्मी के स्वागत और सुख-समृद्धि का पर्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, साफ-सुथरे और व्यवस्थित घर में मां लक्ष्मी का वास होता है। यही वजह है कि लोग त्योहार से पहले घर के हर हिस्से की सफाई करते हैं। वास्तु शास्त्र में भी घर को स्वच्छ रखने पर जोर दिया गया है। मान्यता है कि गंदगी और अनुपयोगी सामान जमा रहने से घर का वातावरण प्रभावित हो सकता है।

    दिवाली की सफाई के दौरान कुछ ऐसी जगहें होती हैं, जिन पर अक्सर लोगों का ध्यान नहीं जाता। घर के इन हिस्सों की अनदेखी करने से धूल-मिट्टी और कबाड़ जमा होता रहता है। वास्तु से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, त्योहार से पहले इन पांच स्थानों को साफ और व्यवस्थित रखना शुभ माना जाता है।

    मुख्य दरवाजे की सफाई जरूरी
    घर का मुख्य दरवाजा वास्तु शास्त्र में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। मान्यता है कि इसी रास्ते से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है। इसलिए दिवाली से पहले दरवाजे और उसके आसपास की अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए। वहां जमा धूल-मिट्टी, जाले और गंदगी को हटाना जरूरी है। दरवाजे के पास पुराने जूते-चप्पल, टूटे गमले और बेकार सामान जमा नहीं रखना चाहिए। सफाई के बाद मुख्य द्वार पर रंगोली बनाई जा सकती है और दीपक जलाकर सजावट की जा सकती है।

    पूजा घर को भी करें साफ

    दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व है। ऐसे में घर के मंदिर की सफाई को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पूजा स्थल में रखी देवी-देवताओं की मूर्तियों और तस्वीरों को साफ करें। पूजा के बर्तन भी अच्छी तरह धोकर व्यवस्थित रखें। वहां रखे पुराने फूल, माला और इस्तेमाल की जा चुकी पूजन सामग्री को हटा दें। मंदिर में साफ कपड़ा बिछाकर दीपक, धूपबत्ती और पूजा में इस्तेमाल होने वाली अन्य वस्तुएं सही जगह पर रखें। धार्मिक मान्यता है कि स्वच्छ पूजा स्थल पर पूजा करने से मन को शांति मिलती है।

    ईशान कोण से हटाएं अनुपयोगी सामान
    वास्तु शास्त्र में घर की उत्तर-पूर्व दिशा को ईशान कोण कहा जाता है। इसे पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियों के लिए शुभ माना जाता है। दिवाली से पहले इस हिस्से की विशेष सफाई करनी चाहिए। यहां रखे पुराने डिब्बे, बेकार सामान और कबाड़ को हटा देना चाहिए। कोशिश करें कि यह स्थान खाली, साफ और व्यवस्थित रहे। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, ईशान कोण में गंदगी और अव्यवस्था रहने से घर की सकारात्मकता प्रभावित हो सकती है।

    अलमारी और तिजोरी के आसपास रखें सफाई
    दिवाली पर मां लक्ष्मी के साथ भगवान कुबेर की पूजा भी की जाती है। इसलिए घर में धन रखने वाली जगह की सफाई पर भी ध्यान देना चाहिए। अलमारी और तिजोरी में रखे पुराने कागज, अनुपयोगी रसीदें और फालतू सामान बाहर निकाल दें। इसके बाद तिजोरी और अलमारी को साफ कपड़े से पोंछें। पैसे और जरूरी दस्तावेजों को व्यवस्थित तरीके से रखें। वास्तु से जुड़ी मान्यताओं में धन रखने के स्थान को साफ-सुथरा बनाए रखना शुभ माना गया है।

    छत, बालकनी और स्टोर रूम को न भूलें
    दिवाली की सफाई में छत, बालकनी और स्टोर रूम अक्सर छूट जाते हैं। इन जगहों पर पुराने डिब्बे, टूटे-फूटे सामान और कबाड़ जमा हो सकता है। त्योहार से पहले इन सभी हिस्सों की अच्छी तरह सफाई करें। बालकनी में रखे पौधों की सूखी पत्तियां हटा दें और गमलों को व्यवस्थित करें। छत पर जमा कचरा और बेकार सामान भी साफ कर दें। स्टोर रूम में लंबे समय से रखी अनुपयोगी वस्तुओं को अलग करना बेहतर रहता है।

    दिवाली की तैयारियों में इन पांच जगहों की सफाई करने से घर अधिक व्यवस्थित और स्वच्छ दिखाई देता है। साथ ही सजावट और पूजा की व्यवस्था करना भी आसान हो जाता है। धार्मिक और वास्तु मान्यताओं के अनुसार, साफ-सुथरा घर मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए शुभ माना जाता है। इसलिए त्योहार की तैयारी करते समय केवल दिखाई देने वाली जगहों पर ही नहीं, बल्कि घर के उन कोनों पर भी ध्यान देना चाहिए, जहां आमतौर पर सफाई नहीं हो पाती।

  • धनतेरस से भाई दूज तक अपनाएं ये 5 वास्तु उपाय, दिवाली पर घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता बनाए रखने में मिलेगी मदद

    धनतेरस से भाई दूज तक अपनाएं ये 5 वास्तु उपाय, दिवाली पर घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता बनाए रखने में मिलेगी मदद

    नई दिल्ली । दिवाली का त्योहार रोशनी, खुशियों और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर लोग अपने घरों की साफ-सफाई करने के साथ ही दीपक, रंगोली और फूलों से सजावट करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपावली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। वहीं, वास्तु शास्त्र में भी धनतेरस से लेकर भाई दूज तक कुछ विशेष बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इन उपायों को अपनाने से घर का वातावरण साफ-सुथरा, सकारात्मक और खुशनुमा बना रहता है।

    इस वर्ष दिवाली 8 नवंबर 2026, रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाएगी। दीपावली से पहले धनतेरस, छोटी दिवाली और अन्य पर्वों की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। ऐसे में घर की व्यवस्था और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है। वास्तु से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, पांच दिवसीय दीपावली पर्व के अलग-अलग दिनों में कुछ खास उपाय अपनाए जा सकते हैं।

    धनतेरस से दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव की शुरुआत होती है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा की जाती है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर घर के मुख्य द्वार को साफ-सुथरा रखना शुभ माना जाता है। मुख्य दरवाजे को फूलों या तोरण से सजाया जा सकता है। इससे घर का प्रवेश स्थान सुंदर और व्यवस्थित दिखाई देता है।

    इस दिन सोने-चांदी के आभूषण, बर्तन और अन्य उपयोगी वस्तुएं खरीदने की परंपरा भी है। खरीदारी के बाद नए सामान को साफ जगह पर रखना चाहिए। घर में धन रखने वाली तिजोरी और अलमारी को भी व्यवस्थित करना चाहिए। वास्तु मान्यताओं में इसे घर में समृद्धि का वातावरण बनाए रखने से जोड़कर देखा जाता है।

    छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी पर घर की सफाई का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन घर के कोनों, खिड़कियों और दरवाजों के आसपास जमा धूल-मिट्टी को साफ करना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर का उत्तर-पूर्व दिशा वाला हिस्सा, जिसे ईशान कोण कहा जाता है, साफ और व्यवस्थित रखना शुभ माना जाता है। शाम के समय घर में दीपक जलाने और मुख्य द्वार पर रंगोली बनाने की भी परंपरा है। घर में अनावश्यक सामान और कबाड़ जमा नहीं होने देना चाहिए।

    दिवाली के दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। पूजा से पहले घर के पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए। इसके बाद देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित कर दीपक, फूल, मिठाई और अन्य पूजन सामग्री तैयार रखनी चाहिए। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, घर के उत्तर-पूर्व दिशा में पूजा स्थल होना शुभ माना जाता है। हालांकि, पूजा की व्यवस्था करते समय घर में उपलब्ध जगह और परिवार की परंपराओं का ध्यान रखना भी जरूरी है।

    शाम को पूजा के बाद घर के मुख्य द्वार, खिड़कियों और बालकनी में दीपक जलाकर रोशनी की जाती है। धन रखने वाली अलमारी और तिजोरी को भी व्यवस्थित रखना चाहिए। घर में पर्याप्त रोशनी और साफ-सफाई का ध्यान रखने से त्योहार का माहौल बेहतर बनता है।

    दिवाली के बाद गोवर्धन पूजा मनाई जाती है। इस दिन भगवान कृष्ण और गोवर्धन पर्वत की पूजा करने की परंपरा है। कई घरों में अन्नकूट तैयार कर भगवान को भोग लगाया जाता है। वास्तु से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, इस दिन रसोई की सफाई करनी चाहिए और अनाज तथा खाद्य सामग्री को व्यवस्थित रखना चाहिए। भोजन बनाते समय स्वच्छता का ध्यान रखने के साथ घर में लगे तुलसी सहित अन्य पौधों की देखभाल भी करनी चाहिए।

    भाई दूज दीपावली पर्व का अंतिम महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस दिन बहनें भाइयों को तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। परिवार के सदस्य एक साथ समय बिताते हैं और खुशियां साझा करते हैं। इस दिन घर को साफ-सुथरा रखने और परिवार के बीच प्रेमपूर्ण वातावरण बनाए रखने पर जोर दिया जाता है। भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम, सम्मान और विश्वास इस पर्व का मुख्य संदेश है।

    दिवाली की सजावट के दौरान टूटे-फूटे और अनुपयोगी सामान को हटा देना चाहिए। पूजा स्थल को साफ रखें और दीपक ऐसी जगह जलाएं, जहां आग लगने का खतरा न हो। बिजली की झालरों और सजावटी लाइटों के तारों की भी जांच कर लेनी चाहिए। इन सावधानियों और पारंपरिक उपायों के साथ त्योहार की तैयारियां अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाई जा सकती हैं।

  • दिवाली से पहले राहुल गांधी की रैली पर व्यापारियों की चिंता, दिल्ली के 20 बड़े बाजारों में पोस्टर अभियान शुरू

    दिवाली से पहले राहुल गांधी की रैली पर व्यापारियों की चिंता, दिल्ली के 20 बड़े बाजारों में पोस्टर अभियान शुरू


    नई दिल्ली । दिवाली से पहले दिल्ली के व्यापारिक संगठनों ने रामलीला मैदान में प्रस्तावित राजनीतिक रैली को लेकर चिंता जताई है। व्यापारियों का कहना है कि त्योहार के सबसे महत्वपूर्ण कारोबारी समय में बड़ी संख्या में लोगों और वाहनों के पहुंचने से राजधानी के प्रमुख बाजारों में यातायात प्रभावित हो सकता है। इसका असर दुकानों तक ग्राहकों की पहुंच और खरीदारी पर पड़ने की आशंका है। इसी मुद्दे को लेकर व्यापारियों ने राहुल गांधी से अपील की है कि दिवाली के दौरान बाजारों का कारोबार प्रभावित होने की स्थिति पैदा न हो।

    चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने इस संबंध में रामलीला मैदान के आसपास स्थित प्रमुख बाजारों में पोस्टर अभियान शुरू करने की घोषणा की है। संगठन के चेयरमैन बृजेश गोयल के मुताबिक, पोस्टरों के माध्यम से राहुल गांधी तक व्यापारियों की चिंता पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। अभियान का संदेश है कि जिस तरह मोहब्बत और आपसी विश्वास की बात की जाती है, उसी तरह व्यापारियों की दुकानें भी ग्राहकों के साथ भरोसे और संबंधों के आधार पर चलती हैं। ऐसे में दिवाली जैसे बड़े त्योहार के दौरान उनके कारोबार को प्रभावित नहीं होना चाहिए।

    बृजेश गोयल ने कहा कि राहुल गांधी अपनी राजनीतिक गतिविधियों में मोहब्बत की दुकान का संदेश देते रहे हैं, लेकिन प्रस्तावित रैली के कारण दिल्ली के करीब 300 साल पुराने बाजारों का कारोबार प्रभावित होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि इन बाजारों में अलग-अलग तरह की दुकानें हैं, जिनसे हजारों परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। चांदनी चौक की परांठे वाली दुकानें, खारी बावली के मसालों का कारोबार, सदर बाजार में चूड़ी-बिंदी की दुकानें और चांदनी चौक में लहंगों का व्यापार इसकी प्रमुख पहचान हैं।

    इसके अलावा दरियागंज में एसी का कारोबार, चावड़ी बाजार में सैनिटरी सामान की दुकानें और करोल बाग में कुल्फी की दुकानें भी स्थानीय व्यापारिक गतिविधियों का हिस्सा हैं। संगठन का कहना है कि इन दुकानों का कारोबार केवल बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि इनके माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार और परिवारों को नियमित आय मिलती है।

    CTI ने रामलीला मैदान से लगभग पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले 20 प्रमुख थोक और खुदरा बाजारों में पोस्टर अभियान चलाने की बात कही है। इनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, खारी बावली, भागीरथ पैलेस, नया बाजार, चावड़ी बाजार, कश्मीरी गेट, दरियागंज, कनॉट प्लेस, करोल बाग, नबी करीम, पहाड़गंज, अजमेरी गेट, लाहौरी गेट, जनपथ, पालिका बाजार, बल्लीमारान और किनारी बाजार शामिल हैं।

    व्यापारियों की चिंता का एक प्रमुख कारण रैली में संभावित रूप से जुटने वाली बड़ी भीड़ और वाहनों की संख्या है। बृजेश गोयल के अनुसार, रैली में करीब 10 लाख लोगों और 20 हजार वाहनों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। यदि इतनी बड़ी संख्या में लोग और गाड़ियां आसपास के इलाकों में पहुंचती हैं, तो बाजारों में आवागमन प्रभावित हो सकता है। इससे ग्राहकों को दुकानों तक पहुंचने में परेशानी होने और व्यापारियों को दुकानें बंद करने की नौबत आने की आशंका है।

    उन्होंने यह भी कहा कि रामलीला मैदान में लगभग 100 बसों की पार्किंग तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। ऐसे में इतनी बड़ी रैली के दौरान यातायात और पार्किंग प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। संगठन ने दावा किया है कि दिवाली से ठीक पहले होने वाले इस आयोजन के कारण दिल्ली का लगभग 10 हजार से 12 हजार करोड़ रुपये तक का त्योहारों का कारोबार प्रभावित हो सकता है।

    CTI के मुताबिक, इस संभावित व्यवधान का असर करीब 20 लाख व्यापारियों और उनसे जुड़े लगभग 75 लाख लोगों की आजीविका पर पड़ सकता है। संगठन ने धनतेरस और दिवाली से पहले बाजारों में सामान्य कारोबार बनाए रखने की मांग उठाई है। व्यापारियों का कहना है कि त्योहार के दौरान बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही और व्यापारिक गतिविधियां सुचारु रहना जरूरी है।

  • नवंबर में 16 दिन बंद रहेंगे बैंक, दिवाली से गुरु नानक जयंती तक जानिए किस तारीख को कहां मिलेगी छुट्टी

    नवंबर में 16 दिन बंद रहेंगे बैंक, दिवाली से गुरु नानक जयंती तक जानिए किस तारीख को कहां मिलेगी छुट्टी

    नई दिल्ली । नवंबर 2026 में बैंकिंग से जुड़े कामकाज की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए छुट्टियों की जानकारी महत्वपूर्ण है। इस महीने दिवाली, गोवर्धन पूजा, छठ पूजा, गुरु नानक जयंती और अन्य क्षेत्रीय त्योहारों के कारण देश के अलग-अलग हिस्सों में बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। इसके अलावा रविवार और महीने के दूसरे तथा चौथे शनिवार को भी नियमित अवकाश रहेगा। उपलब्ध छुट्टी कैलेंडर के अनुसार नवंबर में कुल 16 दिन बैंक बंद रहने का प्रावधान है। हालांकि, इन सभी दिनों में देशभर के बैंक एक साथ बंद नहीं रहेंगे। त्योहारों की छुट्टियां संबंधित राज्यों और शहरों के आधार पर लागू होंगी।

    नवंबर में कुल सात दिन रविवार और शनिवार के नियमित अवकाश के कारण बैंक शाखाओं में कामकाज नहीं होगा। इसके अलावा नौ तारीखों पर अलग-अलग राज्यों में त्योहारों और स्थानीय आयोजनों के कारण बैंक बंद रहेंगे। इसलिए ग्राहकों को अपने शहर के अनुसार छुट्टियों की जानकारी रखना जरूरी है। खासतौर पर चेक जमा करने, बैंक ड्राफ्ट बनवाने, नकद लेनदेन और अन्य शाखा आधारित कामों के लिए पहले से योजना बनाना उपयोगी रहेगा।

    महीने की शुरुआत में 9 नवंबर को दिवाली, लक्ष्मी पूजा, गोवर्धन पूजा और विश्वकर्मा दिवस के अवसर पर अगरतला, भोपाल, चंडीगढ़, गंगटोक, इंफाल, जयपुर, कानपुर और लखनऊ समेत कई शहरों में बैंक बंद रहेंगे। इसके अगले दिन यानी 10 नवंबर को अहमदाबाद, बेलापुर, बेंगलुरु, देहरादून, गंगटोक, मुंबई और नागपुर में दिवाली से जुड़े आयोजनों तथा विक्रम संवत नववर्ष के कारण बैंक शाखाओं में छुट्टी रहेगी।

    11 नवंबर को भाई दूज, लक्ष्मी पूजा और चित्रगुप्त जयंती के चलते गंगटोक, इंफाल, कानपुर, कोलकाता, लखनऊ और शिमला में बैंक बंद रहेंगे। वहीं, 13 नवंबर को मेघालय के शिलांग में वांगला उत्सव के कारण बैंकिंग सेवाएं शाखाओं में उपलब्ध नहीं रहेंगी।

    16 नवंबर को छठ पूजा के अवसर पर बिहार की राजधानी पटना और झारखंड की राजधानी रांची में बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। छठ पूजा बिहार और आसपास के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण पर्व है, जिसके चलते संबंधित शहरों में बैंकिंग कामकाज प्रभावित रहेगा। इसके बाद 20 नवंबर को उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में इगास-बग्वाल के अवसर पर छुट्टी रहेगी।

    23 नवंबर को मेघालय के शिलांग में सेंग कुट स्नेम के कारण बैंक बंद रहेंगे। वहीं, 24 नवंबर को गुरु नानक जयंती, कार्तिक पूर्णिमा और राहस पूर्णिमा के अवसर पर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों के विभिन्न शहरों में बैंक शाखाओं में अवकाश रहेगा। महीने के अंतिम सप्ताह में 27 नवंबर को कर्नाटक के बेंगलुरु में कनकदास जयंती के कारण बैंक बंद रहेंगे।

    त्योहारों के अलावा नवंबर में पांच रविवार पड़ रहे हैं। ये रविवार 1, 8, 15, 22 और 29 नवंबर को होंगे। इन सभी दिनों में देशभर की बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। इसके अतिरिक्त 14 नवंबर को दूसरा शनिवार और 28 नवंबर को चौथा शनिवार होने के कारण भी नियमित बैंकिंग कामकाज नहीं होगा।

    हालांकि, बैंक शाखाओं में छुट्टी होने का मतलब यह नहीं है कि ग्राहकों की सभी बैंकिंग सेवाएं बंद हो जाएंगी। मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग, यूपीआई और एटीएम जैसी सुविधाएं सामान्य रूप से उपलब्ध रहने की संभावना है। ग्राहक इन माध्यमों से पैसे ट्रांसफर करने, बैलेंस चेक करने और नकद निकालने जैसे काम कर सकेंगे।

    दूसरी ओर, चेक क्लियरेंस, बैंक दस्तावेजों से जुड़े काम और शाखा में जाकर किए जाने वाले लेनदेन छुट्टियों के कारण प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में नवंबर में किसी जरूरी वित्तीय काम की योजना बना रहे ग्राहकों को अपने शहर की छुट्टियों की सूची देखकर पहले ही बैंकिंग संबंधी औपचारिकताएं पूरी कर लेनी चाहिए।

  • धनतेरस-दिवाली से पहले सोने-चांदी के भाव में उतार-चढ़ाव, जानिए 24 से 14 कैरेट तक के ताजा रेट..

    धनतेरस-दिवाली से पहले सोने-चांदी के भाव में उतार-चढ़ाव, जानिए 24 से 14 कैरेट तक के ताजा रेट..

    नई दिल्ली ।धनतेरस और दिवाली से पहले सोना-चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए बाजार में कीमतों का उतार-चढ़ाव अहम बना हुआ है। घरेलू सर्राफा बाजार से लेकर वायदा कारोबार तक दोनों कीमती धातुओं के भाव में बदलाव देखने को मिल रहा है। ऐसे में त्योहारों के लिए आभूषण खरीदने या सोने-चांदी में निवेश करने की योजना बना रहे लोगों की नजर ताजा दरों पर है। बाजार में कीमतों की दिशा अंतरराष्ट्रीय घटनाओं, डॉलर की मजबूती और रुपये की स्थिति से प्रभावित हो रही है।

    गुरुवार, 29 अक्टूबर को कारोबार शुरू होने से पहले मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर 24 कैरेट सोने का वायदा भाव 105 रुपये यानी 0.07 प्रतिशत गिरकर 1,43,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। पिछले कारोबारी सत्र में यह 1,43,705 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। वहीं, बुलियन बाजार के उपलब्ध आंकड़ों में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,44,000 रुपये प्रति 10 ग्राम बताई गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,054 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

    दिल्ली के सर्राफा बाजार में बुधवार को सोने की कीमतों में 700 रुपये की तेजी दर्ज की गई। इसके बाद 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला 24 कैरेट सोना सभी करों सहित 1,46,500 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। खुदरा बाजार के एक अन्य मूल्य आकलन के अनुसार, 24 कैरेट सोने का भाव 1,44,100 रुपये प्रति 10 ग्राम, 22 कैरेट का 1,32,100 रुपये और 18 कैरेट का 1,08,110 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया।

    इंडियन बुलियन ज्वैलर्स एसोसिएशन के 28 अक्टूबर 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, 999 शुद्धता वाले 24 कैरेट सोने की दर 1,42,707 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। 916 शुद्धता वाले 22 कैरेट सोने का भाव 1,30,720 रुपये और 750 शुद्धता वाले 18 कैरेट सोने की कीमत 1,07,030 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। वहीं, 585 शुद्धता वाले 14 कैरेट सोने का भाव 83,484 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। इन दरों में अलग-अलग बाजारों, करों और आभूषणों पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्क के कारण अंतर हो सकता है।

    चांदी की कीमतों में भी मिला-जुला रुख दिखाई दिया। गुरुवार को बाजार खुलने से पहले एमसीएक्स पर चांदी का वायदा भाव 125 रुपये यानी 0.06 प्रतिशत बढ़कर 1,94,450 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया। पिछले सत्र में यह 1,94,325 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। बुलियन बाजार के आंकड़ों में चांदी की कीमत 1,94,990 रुपये प्रति किलोग्राम बताई गई। वहीं, 28 अक्टूबर तक के उपलब्ध आंकड़ों में 999 शुद्धता वाली चांदी का भाव 1,93,442 रुपये प्रति किलोग्राम था।

    दिल्ली के सर्राफा बाजार में बुधवार को चांदी 1.98 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही। दूसरी ओर, खुदरा बाजार के कुछ आकलनों में इसका भाव 2.20 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक बताया गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी में गिरावट दर्ज की गई और यह 1.23 प्रतिशत टूटकर 53.75 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करती नजर आई। अलग-अलग समय और बाजारों के आंकड़ों के कारण चांदी की कीमतों में अंतर दिखाई दे रहा है।

    घरेलू बाजार पर रुपये की कमजोरी का भी असर पड़ रहा है। बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 21 पैसे गिरकर 95.28 प्रति डॉलर पर आ गया। डॉलर की मजबूती और सऊदी अरब की रास तनुरा तेल रिफाइनरी पर हूती विद्रोहियों के हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने रुपये पर दबाव बढ़ाया। रुपये के कमजोर होने से सोने का आयात महंगा पड़ सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में नरमी के बावजूद घरेलू कीमतों को सहारा मिल सकता है।

    बाजार विशेषज्ञों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व और फेडरल ओपन मार्केट कमेटी के नीतिगत फैसलों पर भी है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के जिंस मामलों के वरिष्ठ विश्लेषक सौमिल गांधी के अनुसार, महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले से पहले वैश्विक बाजार सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। मिराए एसेट शेयरखान के प्रवीण सिंह ने कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को बाजार के लिए महत्वपूर्ण बताया है।

    मांग के मामले में भी भारत और चीन के खरीदारों का रुख अलग दिखाई दे रहा है। उपलब्ध बाजार आकलन के अनुसार, चीन में कुछ परिवार कीमतों में नरमी का लाभ उठाकर खरीदारी कर रहे हैं, जबकि भारत में कई खरीदार त्योहारों से पहले और गिरावट की उम्मीद में इंतजार कर रहे हैं। धनतेरस और दिवाली पर खरीदारी करने वालों के लिए कैरेट, शुद्धता और स्थानीय भाव की तुलना करना महत्वपूर्ण है। आभूषण खरीदते समय सोने की कीमत के साथ मेकिंग चार्ज और लागू करों को भी ध्यान में रखना चाहिए।

  • केबीसी के दीपावली स्पेशल में आएंगे रामायण के सितारे, अमिताभ बच्चन ने पटाखों को लेकर सुनाया मजेदार किस्सा

    केबीसी के दीपावली स्पेशल में आएंगे रामायण के सितारे, अमिताभ बच्चन ने पटाखों को लेकर सुनाया मजेदार किस्सा

    नई दिल्ली । अमिताभ बच्चन के लोकप्रिय क्विज शो कौन बनेगा करोड़पति में इस बार दीपावली का उत्सव खास अंदाज में देखने को मिलेगा। फिल्म रामायण के सितारे रणबीर कपूर, साई पल्लवी और रवि दुबे शो के दीपावली स्पेशल एपिसोड में शामिल होंगे। इस दौरान त्योहार की खुशियों के साथ हंसी-मजाक और रामायण से जुड़ी भक्ति की झलक भी देखने को मिलेगी। शो के दौरान अमिताभ बच्चन ने दीपावली से जुड़ा एक मजेदार किस्सा सुनाया, जिसे सुनकर सेट पर मौजूद कलाकार हंस पड़े।

    अमिताभ बच्चन ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए पटाखों से जुड़ी एक बात साझा की। उन्होंने कहा कि दीपावली पर पड़ोस में अगर किसी के यहां बम फूटता था, तो उनका पटाखा उससे ज्यादा तेज होना चाहिए। उनकी इस बात पर रणबीर कपूर, रवि दुबे और साई पल्लवी सहित वहां मौजूद लोगों की हंसी छूट गई। त्योहार के दौरान पटाखों को लेकर बच्चों में होने वाली होड़ का यह किस्सा कार्यक्रम के हल्के-फुल्के माहौल का हिस्सा बना।

    दीपावली स्पेशल एपिसोड का प्रोमो भी दर्शकों के बीच चर्चा में है। इसमें रणबीर कपूर दीपावली, रामायण की कहानी और परिवार के साथ त्योहार मनाने के महत्व का जिक्र करते दिखाई देते हैं। उन्होंने दर्शकों को शो के इस विशेष आयोजन में शामिल होने का आमंत्रण देते हुए कहा कि दीपावली का त्योहार, रामायण की कहानी और अपनों के साथ जश्न से बढ़कर खास क्या हो सकता है।

    प्रोमो में धार्मिक आस्था से जुड़े दृश्य भी शामिल हैं। अमिताभ बच्चन पवनपुत्र हनुमान के सामने झुककर आशीर्वाद लेते दिखाई देते हैं। इसके अलावा वह दर्शकों के साथ मिलकर ‘बोलिए सिया पति रामचंद्र की जय’ का जयकारा लगाते नजर आते हैं। इस तरह कार्यक्रम में मनोरंजन के साथ रामायण से जुड़ी आस्था और भक्ति को भी जगह दी गई है।

    कौन बनेगा करोड़पति का यह दीपावली स्पेशल एपिसोड 29 और 30 अक्टूबर 2026 को सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन पर प्रसारित होगा। दर्शकों को इन दोनों एपिसोड में रामायण के कलाकारों के साथ अमिताभ बच्चन की बातचीत और त्योहार से जुड़े खास पल देखने को मिलेंगे।

    नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही फिल्म रामायण में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी माता सीता, यश रावण, सनी देओल हनुमान और रवि दुबे लक्ष्मण की भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म का निर्माण नमित मल्होत्रा के प्राइम फोकस स्टूडियोज ने किया है। इसकी कहानी रामायण पर आधारित है और फिल्म को दो भागों में बनाया जा रहा है।

    फिल्म की अन्य प्रमुख भूमिकाओं में काजल अग्रवाल, रकुल प्रीत सिंह, विवेक ओबेरॉय, कुणाल कपूर, आदिनाथ कोठारे, अरुण गोविल, इंदिरा कृष्णन और लारा दत्ता भी नजर आएंगे। फिल्म का पहला भाग 5 नवंबर 2026 को रिलीज होने वाला है, जबकि दूसरे भाग को दीपावली 2027 के दौरान रिलीज किए जाने की उम्मीद है।

    केबीसी के दीपावली स्पेशल में रामायण के कलाकारों की मौजूदगी ऐसे समय में हो रही है, जब फिल्म का पहला भाग रिलीज होने की तैयारी में है। अमिताभ बच्चन का पटाखों से जुड़ा किस्सा और प्रोमो में दिखाई गई भक्ति की झलक इस विशेष कार्यक्रम को मनोरंजन और त्योहार के माहौल से जोड़ती है।