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  • दिवाली से पहले सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट, जानिए किन वजहों से टूटा भाव और कब लौट सकती है तेजी

    दिवाली से पहले सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट, जानिए किन वजहों से टूटा भाव और कब लौट सकती है तेजी


    नई दिल्ली ।
    दिवाली और त्योहारी सीजन से पहले सोने की कीमतों में आई बड़ी गिरावट ने खरीदारों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार से लेकर भारत के वायदा और खुदरा बाजार तक सोने के भाव में कमजोरी दर्ज की गई है। महंगे कच्चे तेल, मजबूत अमेरिकी डॉलर और ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता ने कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ाया है। हालांकि, कीमतों में आई इस नरमी को त्योहारों और शादी के सीजन के लिए खरीदारी के संभावित अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर इस सप्ताह सोने का वायदा भाव करीब 3.50 प्रतिशत गिर गया। खुदरा बाजार में भी कीमतों में उल्लेखनीय कमी आई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट सोने का भाव पहले 1,46,426 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो 23 अक्टूबर तक घटकर 1,41,630 रुपये रह गया। इस तरह एक सप्ताह में इसकी कीमत 4,796 रुपये प्रति 10 ग्राम कम हो गई।

    इसी अवधि में 22 कैरेट सोने के दाम भी नीचे आए। इसका भाव 1,34,207 रुपये प्रति 10 ग्राम से गिरकर 1,29,566 रुपये रह गया। यानी 22 कैरेट सोना 4,641 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हुआ। कीमतों में इस गिरावट से उन ग्राहकों को राहत मिल सकती है, जो दिवाली या आगामी शादी समारोहों के लिए आभूषण खरीदने की योजना बना रहे हैं।

    वैश्विक बाजार में भी सोने की स्थिति कमजोर बनी हुई है। शुक्रवार को इसकी कीमत करीब तीन महीने के निचले स्तर तक पहुंच गई। पूरे सप्ताह अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में लगभग चार प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो जून के बाद इसका सबसे कमजोर साप्ताहिक प्रदर्शन बताया गया है। इस गिरावट के बाद निवेशकों की नजर 4,000 डॉलर प्रति औंस के महत्वपूर्ण स्तर पर टिकी है। यह स्थिति अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 27 और 28 अक्टूबर को होने वाली नीतिगत बैठक से ठीक पहले बनी है।

    सोने की कीमतों में गिरावट की एक प्रमुख वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। सऊदी अरब में हूती हमलों के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ी, जिससे ब्रेंट क्रूड पांच महीने से अधिक के उच्च स्तर पर पहुंच गया। महंगा तेल महंगाई को बढ़ा सकता है। ऐसी स्थिति में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रख सकते हैं, जिससे सोने जैसी बिना ब्याज वाली संपत्तियों की मांग प्रभावित होती है।

    अमेरिका में उपभोक्ता और उत्पादक महंगाई के आंकड़े भी बाजार की चिंता बढ़ाने वाले रहे हैं। कारोबारियों को आगामी बैठक में फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में बदलाव नहीं होने की उम्मीद है, लेकिन साल के अंत में मौद्रिक नीति सख्त रहने की आशंका बनी हुई है। डॉलर इंडेक्स में कुछ नरमी के बावजूद इसका स्तर करीब 101.5 बना हुआ है। फरवरी के अंत में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के समय से सोने में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट का भी उल्लेख किया गया है।

    तकनीकी संकेतों के मुताबिक, निकट अवधि में सोने पर दबाव बना रह सकता है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 4,000 डॉलर प्रति औंस के नीचे टिकती है, तो 3,950 डॉलर तक गिरावट की आशंका जताई गई है। दूसरी ओर, 3,950 से 4,000 डॉलर का दायरा संभावित खरीदारी और समर्थन का क्षेत्र माना जा रहा है। चांदी के लिए 50 से 55 डॉलर के स्तर को अहम समर्थन बताया गया है। कुछ विशेषज्ञों ने आने वाले हफ्तों में 10 से 15 प्रतिशत तक सुधार की संभावना जताई है, जबकि सोने में तेजी का रुझान मजबूत होने के लिए 4,200 डॉलर के ऊपर टिकना महत्वपूर्ण माना गया है।

    दिवाली के दौरान सोने और आभूषणों की मांग मजबूत रहने की उम्मीद है। भारतीय खरीदार सोने को निवेश और पारंपरिक खरीदारी, दोनों के लिहाज से महत्व देते हैं। बाजार में हल्के वजन के आभूषणों और पुराने सोने के बदले नए आभूषण खरीदने की योजनाओं की मांग भी बढ़ रही है। ग्राहक अब डिजाइन के साथ शुद्धता, प्रामाणिकता और पारदर्शिता पर भी ध्यान दे रहे हैं। हालांकि, दिवाली से पहले कीमतों में दोबारा उछाल आएगा या गिरावट जारी रहेगी, यह वैश्विक बाजार, डॉलर की चाल और अमेरिकी मौद्रिक नीति के संकेतों पर निर्भर करेगा।

  • नवंबर 2026 में दिवाली, धनतेरस, छठ पूजा और देव दीपावली समेत जानें सभी प्रमुख व्रत-त्योहारों की तारीखें

    नवंबर 2026 में दिवाली, धनतेरस, छठ पूजा और देव दीपावली समेत जानें सभी प्रमुख व्रत-त्योहारों की तारीखें

    नई दिल्ली । नवंबर 2026 का महीना धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से खास रहने वाला है। इस दौरान धनतेरस, दिवाली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज और छठ पूजा जैसे प्रमुख त्योहार मनाए जाएंगे। इसके अलावा देवउठनी एकादशी, तुलसी विवाह, कार्तिक पूर्णिमा और गुरु नानक जयंती जैसे महत्वपूर्ण पर्व भी इसी महीने पड़ेंगे। व्रत और त्योहारों की तारीखों की जानकारी पहले से होने पर लोग अपनी धार्मिक तैयारियां और पूजा-पाठ की योजनाएं व्यवस्थित कर सकते हैं। नवंबर के कैलेंडर में महीने की शुरुआत से लेकर अंतिम सप्ताह तक कई महत्वपूर्ण तिथियां शामिल हैं।

    महीने की शुरुआत 1 नवंबर को अहोई अष्टमी, राधा कुंड स्नान और कालाष्टमी के साथ होगी। इसके बाद 5 नवंबर को रमा एकादशी, कृष्ण पद्मनाभ द्वादशी और गोवत्स द्वादशी मनाई जाएगी। 6 नवंबर को धनतेरस, धनत्रयोदशी, यम दीपम और शुक्र प्रदोष व्रत पड़ेंगे। धनतेरस को दीपावली पर्व की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है।

    धनतेरस की तिथि को लेकर दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार, कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 9 बजकर 30 मिनट पर शुरू होकर 7 नवंबर को सुबह 11 बजकर 45 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर धनतेरस 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इसके अगले दिन 7 नवंबर को काली चौदस, हनुमान पूजा और मासिक शिवरात्रि के पर्व पड़ेंगे।

    8 नवंबर, रविवार को दिवाली मनाई जाएगी। इस अवसर पर घरों में दीप जलाने और माता लक्ष्मी तथा भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा है। पंचांग के अनुसार, कार्तिक अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह लगभग 11 बजकर 28 मिनट पर शुरू होकर 9 नवंबर को दोपहर लगभग 12 बजकर 32 मिनट पर समाप्त होगी। 8 नवंबर को नरक चतुर्दशी, काली पूजा, केदार गौरी व्रत और कमला जयंती भी सूची में शामिल हैं। 9 नवंबर को अन्वाधान और कार्तिक अमावस्या के पर्व बताए गए हैं।

    10 नवंबर को गोवर्धन पूजा, अन्नकूट, बलि प्रतिपदा और गुजराती नववर्ष मनाया जाएगा। इसके अगले दिन 11 नवंबर को भाई दूज, यम द्वितीया, चित्रगुप्त पूजा और चंद्र दर्शन होंगे। 13 नवंबर से छठ पर्व की शुरुआत होगी। इसी दिन नागुला चविथी और लाभ चतुर्थी भी पड़ेंगे। 14 नवंबर को लाभ पंचमी और 15 नवंबर को छठ पूजा का दूसरा दिन तथा स्कंद षष्ठी मनाई जाएगी।

    महीने के मध्य में 16 नवंबर को वृश्चिक संक्रांति और जैन अष्टाह्निका का प्रारंभ होगा। 17 नवंबर को गोपाष्टमी, मंडला पूजा प्रारंभ और मासिक दुर्गाष्टमी पड़ेंगे। 18 नवंबर को अक्षय नवमी, आंवला नवमी और जगद्धात्री पूजा मनाई जाएगी।

    20 नवंबर को देवउठनी एकादशी, देवोत्थान एकादशी, प्रबोधिनी एकादशी और भीष्म पंचक का प्रारंभ होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योग निद्रा से जागते हैं और चातुर्मास का समापन होता है। 21 नवंबर को तुलसी विवाह, योगेश्वर द्वादशी, गुरुवायुर एकादशी और वैष्णव देवोत्थान एकादशी मनाई जाएगी। 22 नवंबर को विश्वेश्वर व्रत और रवि प्रदोष व्रत पड़ेंगे।

    23 नवंबर को बैकुंठ चतुर्दशी, मणिकर्णिका स्नान और कार्तिक चौमासी चौदस मनाई जाएगी। 24 नवंबर को देव दीपावली, गुरु नानक जयंती, कार्तिक पूर्णिमा और पुष्कर स्नान के पर्व पड़ेंगे। इसी दिन भीष्म पंचक का समापन भी होगा। 25 नवंबर को मार्गशीर्ष मास का प्रारंभ, रोहिणी व्रत और इष्टि होंगे। महीने के अंतिम प्रमुख व्रतों में 27 नवंबर को गणाधिप संकष्टी और मार्गशीर्ष गणेश चतुर्थी शामिल हैं।

  • शिवपुरी में कार्बाइड गन पर पूरी तरह प्रतिबंध, बेचने और चलाने वालों के खिलाफ दर्ज होगी एफआईआर

    शिवपुरी में कार्बाइड गन पर पूरी तरह प्रतिबंध, बेचने और चलाने वालों के खिलाफ दर्ज होगी एफआईआर

    शिवपुरी जिले: में दीपावली से पहले लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कार्बाइड गन के निर्माण, बिक्री, भंडारण और इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। लोहे, स्टील और पीवीसी पाइप में कैल्शियम कार्बाइड भरकर तेज धमाका करने वाली इन देसी गनों को बच्चों के लिए खतरनाक माना गया है। प्रशासन ने इनके इस्तेमाल से होने वाली संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए यह कदम उठाया है। प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

    जिले में कार्बाइड गन की कीमत लगभग 150 से 300 रुपये बताई जा रही है। कम कीमत के कारण बच्चे इन्हें खिलौना समझकर खरीद सकते हैं और इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि, इन उपकरणों से होने वाला तेज धमाका गंभीर चोटों का कारण बन सकता है। इनमें कैल्शियम कार्बाइड का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे पाइप के भीतर गैस बनती है और उसे प्रज्वलित करने पर जोरदार आवाज के साथ विस्फोट जैसा प्रभाव पैदा होता है।

    ऐसी गनों से निकलने वाली चिंगारी, पाइप के टुकड़े और तेज धमाके के कारण आंखों, चेहरे और कानों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। अन्य जिलों में इनके इस्तेमाल के दौरान आंखों में गंभीर चोट लगने, चेहरा झुलसने और कान के पर्दे प्रभावित होने जैसी घटनाएं सामने आने की जानकारी दी गई है। इसी तरह की दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए शिवपुरी प्रशासन ने त्योहार से पहले इनकी बिक्री और उपयोग रोकने का निर्णय लिया है।

    कलेक्टर अर्पित वर्मा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। इसके अनुसार शिवपुरी जिले की सीमा में कोई भी व्यक्ति, दुकानदार या संस्था प्रतिबंधित कार्बाइड गन और तेज आवाज वाले अवैध पटाखों का निर्माण, भंडारण, खरीद-बिक्री या प्रदर्शन नहीं कर सकेगा। यह आदेश त्योहारों तक प्रभावी रहेगा।

    प्रशासन ने आदेश का पालन सुनिश्चित करने के लिए जिले के सभी अनुविभागीय दंडाधिकारियों, तहसीलदारों और थाना प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार जांच करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को विशेष रूप से पटाखा बाजारों और हार्डवेयर की दुकानों पर निगरानी रखने को कहा गया है। इन दुकानों से पाइप और कार्बाइड जैसी सामग्री उपलब्ध होने की आशंका के कारण जांच को महत्वपूर्ण माना गया है।

    आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति या दुकानदार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंधित गन बनाने, बेचने, रखने या चलाने के मामलों में नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। जांच के दौरान संबंधित अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में प्रतिबंध का पालन सुनिश्चित करना होगा।

    प्रशासन ने आम नागरिकों से भी सहयोग करने की अपील की है। यदि किसी बाजार, दुकान या अन्य स्थान पर कार्बाइड गन की बिक्री होती दिखाई दे अथवा कोई व्यक्ति इसका इस्तेमाल करता मिले, तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस या कंट्रोल रूम को देने को कहा गया है। समय पर सूचना मिलने से खतरनाक गतिविधियों को रोकने और संभावित दुर्घटनाओं से बचने में मदद मिल सकती है।

    दीपावली के दौरान पटाखों और अन्य विस्फोटक सामग्री के इस्तेमाल के बीच यह प्रतिबंध बच्चों और आम लोगों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। प्रशासन का उद्देश्य जिले में कार्बाइड गन के इस्तेमाल पर रोक लगाकर आंखों, चेहरे और कानों को होने वाली संभावित चोटों का जोखिम कम करना तथा त्योहार के दौरान किसी बड़ी दुर्घटना को रोकना है।

  • दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों से बाजारों का कारोबार प्रभावित, त्योहारों की बिक्री पर संकट; व्यापारियों ने अमित शाह को लिखा पत्र

    दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों से बाजारों का कारोबार प्रभावित, त्योहारों की बिक्री पर संकट; व्यापारियों ने अमित शाह को लिखा पत्र

    नई दिल्ली । दिल्ली में जारी विरोध प्रदर्शनों का असर राजधानी के बाजारों और व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ने की चिंता बढ़ गई है। व्यापारियों का कहना है कि प्रदर्शन के कारण कई इलाकों में दुकानों को बंद रखना पड़ रहा है और बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है। इसका असर ऐसे समय में दिखाई दे रहा है, जब दशहरा और दिवाली जैसे प्रमुख त्योहारों के कारण कारोबार में तेजी आने की उम्मीद रहती है। इस स्थिति को लेकर विभिन्न व्यापारी संगठनों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर अपनी समस्याएं बताई हैं और बाजारों में सामान्य गतिविधियां बनाए रखने की मांग की है।

    राजधानी में केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन जारी हैं। व्यापारियों के अनुसार, इन प्रदर्शनों के कारण कई बाजारों में लोग खरीदारी के लिए आने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि जब सड़कों पर प्रदर्शन होते हैं और लोगों को आवाजाही में परेशानी या असुरक्षा की आशंका रहती है, तो बाजारों में ग्राहकों की संख्या घट जाती है। इससे दुकानदारों की बिक्री प्रभावित होती है और त्योहारों के दौरान होने वाली कमाई पर भी असर पड़ सकता है।

    दिल्ली इलेक्ट्रिकल ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय शर्मा ने कहा कि दशहरा और दिवाली का समय बिजली की सजावटी लाइटों, झूमरों और घरों को सजाने वाले सामान के कारोबार के लिए महत्वपूर्ण होता है। इन त्योहारों के दौरान लोग घरों और प्रतिष्ठानों की सजावट के लिए बड़ी संख्या में सामान खरीदते हैं। ऐसे में बाजारों में मांग बढ़ने से व्यापारियों को साल के इस हिस्से में बेहतर कारोबार की उम्मीद रहती है। हालांकि, मौजूदा प्रदर्शनों के कारण उन्हें बिक्री प्रभावित होने की चिंता सता रही है।

    अजय शर्मा ने सरकार और प्रदर्शन कर रहे लोगों से अपील की कि फिलहाल विरोध प्रदर्शनों को टालने पर विचार किया जाए, ताकि व्यापारिक गतिविधियां बाधित न हों। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनों के कारण लोग सड़कों पर निकलने से डर रहे हैं। उनके मुताबिक, अपनी मांगों और मुद्दों को लेकर बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए, जिससे विरोध भी दर्ज हो सके और आम लोगों तथा कारोबारियों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

    व्यापारी संगठनों ने यह भी चिंता जताई है कि कारोबार में गिरावट का असर केवल दुकानदारों तक सीमित नहीं रहेगा। बाजारों में बिक्री कम होने पर सरकार को मिलने वाले कर राजस्व पर भी प्रभाव पड़ सकता है। व्यापारियों का तर्क है कि त्योहारों के दौरान खरीदारी में कमी आने से व्यापारिक गतिविधियां कमजोर हो सकती हैं, जिसका असर संबंधित कारोबार और उससे जुड़े लोगों की आय पर पड़ेगा।

    फोटो मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय कुमार सेठी ने कहा कि देश में त्योहारों का कारोबारी मौसम 15 अगस्त के बाद शुरू हो जाता है। रक्षाबंधन से लेकर दिवाली के बाद तक बाजारों में आम तौर पर खरीदारी और बिक्री का स्तर बेहतर रहता है। उन्होंने बताया कि व्यापारियों की सालभर की कमाई का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा इन चार महीनों में आता है। ऐसे में इस अवधि के दौरान कारोबार प्रभावित होने से उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है।

    सेठी ने प्रदर्शनों के तरीके पर भी सवाल उठाए और इन गतिविधियों को अराजकता बताते हुए आरोप लगाया कि इनके जरिए देश की स्थिरता को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क पर भी भारत के लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने की मंशा रखने का आरोप लगाया और अपनी बात रखते हुए नेपाल तथा श्रीलंका में हुए घटनाक्रमों से तुलना की। ये आरोप उनके निजी बयान के रूप में सामने आए हैं।

    सेठी ने सरकार से मांग की कि मध्य दिल्ली के प्रमुख व्यापारिक इलाकों में प्रदर्शनों की अनुमति देने के मामले में विशेष ध्यान रखा जाए। व्यापारियों का कहना है कि विरोध और अपनी मांगें रखने के अधिकार के साथ बाजारों की सामान्य गतिविधियों को बनाए रखना भी जरूरी है। उनका आग्रह है कि ऐसी व्यवस्था हो, जिससे त्योहारों के दौरान ग्राहक बाजारों तक पहुंच सकें और व्यापारियों को लगातार कारोबार प्रभावित होने की स्थिति का सामना न करना पड़े।

  • दिवाली 2026 पर पटाखे खरीदना होगा महंगा, कच्चे माल की कीमतों और सप्लाई में देरी से 20% तक बढ़ सकते हैं दाम

    दिवाली 2026 पर पटाखे खरीदना होगा महंगा, कच्चे माल की कीमतों और सप्लाई में देरी से 20% तक बढ़ सकते हैं दाम

    नई दिल्ली । दिवाली का त्योहार नजदीक आने के साथ ही पटाखों की खरीदारी की तैयारियां शुरू हो गई हैं। हालांकि, इस बार आतिशबाजी के लिए लोगों को पहले के मुकाबले ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी, जरूरी सामग्री की आपूर्ति में देरी और पटाखा फैक्ट्रियों में सुरक्षा जांच के कारण बाजार में पटाखों के दाम 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ने की आशंका है। इसका सीधा असर त्योहार के लिए खरीदारी करने वाले ग्राहकों के बजट पर पड़ सकता है।

    भारत में पटाखा उत्पादन का प्रमुख केंद्र तमिलनाडु का शिवकाशी है। यहां बड़ी मात्रा में पटाखे तैयार किए जाते हैं और देश के अलग-अलग हिस्सों में उनकी आपूर्ति होती है। इस साल पटाखे बनाने में इस्तेमाल होने वाले रसायनों और अन्य जरूरी सामग्रियों की कीमतें बढ़ने से निर्माताओं की उत्पादन लागत पर दबाव पड़ा है। कारोबार से जुड़े लोगों के मुताबिक, बढ़ती लागत के कारण कंपनियों को अपने उत्पादों की कीमतों में बदलाव करना पड़ सकता है।

    पटाखों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले सल्फर की कीमतों में भी उल्लेखनीय उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। इसकी कीमत एक समय 75 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 140 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थी। बाद में कीमत में कुछ गिरावट आई और यह लगभग 100 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई। इसके बावजूद सल्फर की कीमत पहले के स्तर से अधिक बनी हुई है। इसके अलावा एल्युमिनियम, सोडियम नाइट्रेट और अन्य आवश्यक सामग्रियों की कीमतों में भी करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी बताई गई है।

    कच्चे माल की महंगाई के साथ-साथ आपूर्ति में देरी भी पटाखा निर्माताओं के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। खाड़ी क्षेत्र में शिपिंग से जुड़ी बाधाओं के चलते सल्फर और चिपकाने वाले पदार्थों की आपूर्ति प्रभावित हुई है। जरूरी सामग्री समय पर नहीं पहुंचने से उत्पादन की प्रक्रिया में देरी होती है। इससे निर्माताओं को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है। कारोबारियों का अनुमान है कि इन परिस्थितियों के कारण पटाखे बनाने की लागत में लगभग 15 प्रतिशत तक इजाफा हो सकता है।

    पटाखा उद्योग पर सुरक्षा नियमों के पालन का दबाव भी बढ़ा है। पिछले 10 महीनों के दौरान पटाखा फैक्ट्रियों में हुए 24 हादसों में 41 लोगों की मौत हुई और 39 लोग घायल हुए। इन घटनाओं के बाद 700 से अधिक इकाइयों का निरीक्षण किए जाने की जानकारी सामने आई है। प्रशासन की ओर से फैक्ट्रियों में सुरक्षा व्यवस्था की जांच तेज की गई है। अधिकारियों का कहना है कि खतरनाक सामग्री से जुड़े कारोबार में निर्धारित सुरक्षा नियमों का पालन करना जरूरी है।

    बाजार में उपलब्ध पटाखों की कीमतों से भी ग्राहकों के खर्च का अंदाजा लगाया जा सकता है। अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में 10 बड़े अनार वाले पटाखों के पैकेट की कीमत करीब 55 रुपये बताई गई थी। वहीं, 10 स्पेशल ग्राउंड स्पिनर के पैकेट की कीमत लगभग 80 रुपये और पांच दो-आवाज वाले रॉकेट की कीमत करीब 70 रुपये थी। ये कीमतें उस समय की बताई गई हैं और त्योहार के दौरान इनमें बदलाव हो सकता है।

    दिवाली के नजदीक आने पर पटाखों की मांग बढ़ने से कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है। ऐसे में कच्चे माल की बढ़ी लागत, आपूर्ति में देरी और सुरक्षा संबंधी जांच का असर बाजार पर दिखाई दे सकता है। हालांकि, वास्तविक कीमतें अलग-अलग उत्पादों और बाजारों के अनुसार बदल सकती हैं। ग्राहकों को इस बार पटाखों की खरीदारी के लिए पहले से अधिक बजट रखने की जरूरत पड़ सकती है।

  • दिवाली शॉपिंग पर AU स्मॉल फाइनेंस बैंक का बड़ा ऑफर, ट्रैवल पर 10 हजार और इलेक्ट्रॉनिक्स पर 7,500 रुपये तक बचत

    दिवाली शॉपिंग पर AU स्मॉल फाइनेंस बैंक का बड़ा ऑफर, ट्रैवल पर 10 हजार और इलेक्ट्रॉनिक्स पर 7,500 रुपये तक बचत

    नई दिल्ली । दिवाली के त्योहारी सीजन में खरीदारी, घूमने-फिरने और मनोरंजन पर खर्च करने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए AU स्मॉल फाइनेंस बैंक ने विशेष ऑफर पेश किए हैं। बैंक का ‘AU हार्ट टू कार्ट शॉपिंग फेस्टिवल 2026’ ग्राहकों को अलग-अलग श्रेणियों में बचत का अवसर दे रहा है। यह इस अभियान का आठवां संस्करण है, जिसकी शुरुआत नवरात्र के दौरान हुई थी। ग्राहक 10 नवंबर 2026 तक इन ऑफर का लाभ उठा सकते हैं।

    इस फेस्टिवल में यात्रा की बुकिंग से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स, खाने-पीने की चीजों, किराना सामान और फिल्मों तक के लिए छूट शामिल है। बैंक के AU क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड से भुगतान करने वाले ग्राहकों के साथ AU 0101 मोबाइल ऐप के जरिए यूपीआई भुगतान करने वालों के लिए भी ऑफर रखे गए हैं। हालांकि, अलग-अलग सुविधाओं का लाभ संबंधित नियमों और पात्रता पर निर्भर करेगा।

    यात्रा की योजना बना रहे ग्राहकों को इस अभियान के तहत सबसे अधिक बचत का अवसर मिल सकता है। यात्रा, मेकमाईट्रिप, इक्सिगो, पेटीएम फ्लाइट्स और ईजमाईट्रिप जैसे प्लेटफॉर्म पर टिकट या अन्य यात्रा सेवाओं की बुकिंग करने पर 10,000 रुपये तक की बचत का मौका है। दिवाली की छुट्टियों में बाहर जाने की तैयारी कर रहे लोग बुकिंग से पहले संबंधित प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध ऑफर की जानकारी ले सकते हैं। वास्तविक छूट बुकिंग की श्रेणी और लागू शर्तों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

    इलेक्ट्रॉनिक्स की खरीदारी करने वालों के लिए भी बैंक ने विशेष लाभ रखे हैं। त्योहारी सीजन में टीवी, फ्रिज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने की योजना बना रहे ग्राहक क्रोमा, रिलायंस डिजिटल और विजय सेल्स जैसे खुदरा प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध ऑफर देख सकते हैं। इन प्लेटफॉर्म पर पात्र खरीदारी के माध्यम से 7,500 रुपये तक की बचत का अवसर दिया गया है। हालांकि, प्रत्येक खरीदारी पर इतनी छूट मिलना जरूरी नहीं है।

    रोजमर्रा के खर्च में बचत के लिए फूड और ग्रोसरी को भी अभियान में शामिल किया गया है। स्विगी, जोमैटो और ईजीडाइनर पर खाने-पीने से जुड़े खर्च में 500 रुपये तक की बचत का मौका है। वहीं, बिगबास्केट और ब्लिंकिट पर किराना सामान खरीदने वाले ग्राहकों को 1,000 रुपये तक की बचत मिल सकती है। इन ऑफर के तहत मिलने वाला लाभ भुगतान के तरीके और संबंधित प्लेटफॉर्म की शर्तों पर निर्भर करेगा।

    मनोरंजन के लिए भी इस फेस्टिव अभियान में विकल्प दिए गए हैं। फिल्म देखने या अन्य मनोरंजन गतिविधियों के लिए बुकमायशो, पीवीआर आइनॉक्स और डिस्ट्रिक्ट बाय जोमैटो जैसे प्लेटफॉर्म पर ऑफर उपलब्ध हैं। इस श्रेणी में ग्राहकों को 3,000 रुपये तक की बचत का अवसर मिल सकता है। इससे त्योहारों के दौरान मनोरंजन पर खर्च करने वालों को भी फायदा उठाने का मौका मिलेगा।

    बैंक के इस अभियान में कार्ड और यूपीआई भुगतान के अलावा कुछ बैंकिंग तथा लोन सेवाओं से जुड़े लाभ भी शामिल हैं। ग्राहकों को ध्यान रखना चाहिए कि सभी ऑफर एक जैसे नहीं हैं। कहीं न्यूनतम खरीदारी की शर्त हो सकती है, तो कहीं विशेष कार्ड, भुगतान माध्यम या अन्य पात्रता जरूरी हो सकती है। इसलिए खरीदारी या बुकिंग करने से पहले संबंधित प्लेटफॉर्म पर ऑफर की पूरी जानकारी और नियम पढ़ना जरूरी है। फेस्टिवल की अंतिम तारीख 10 नवंबर 2026 है, इसलिए ग्राहक इस अवधि के भीतर पात्र ऑफर का लाभ ले सकते हैं।

  • कार्तिक मास 27 अक्टूबर से होगा शुरू, दिवाली से पहले मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए जानें पूजा और नियमों का महत्व

    कार्तिक मास 27 अक्टूबर से होगा शुरू, दिवाली से पहले मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए जानें पूजा और नियमों का महत्व

    नई दिल्ली: हिंदू धर्म में कार्तिक मास को बेहद शुभ और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस महीने में भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी, सूर्य देव और चंद्रमा की विशेष पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक मास में सुबह सूर्योदय से पहले स्नान करना, तुलसी की पूजा करना और दीपक जलाना विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इन परंपराओं का पालन करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और जीवन में सौभाग्य बढ़ता है। इस साल कार्तिक मास 27 अक्टूबर से शुरू होकर 24 नवंबर तक चलेगा। दिवाली समेत कई प्रमुख त्योहारों के नजदीक होने के कारण इस अवधि को पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियों के लिए विशेष माना जा रहा है।

    कार्तिक मास शुरू होने से पहले आश्विन मास के शेष दिनों को भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। सर्वपितृ अमावस्या के बाद आश्विन शुक्ल पक्ष की शुरुआत होती है। इसी पक्ष में शारदीय नवरात्र मनाए जाते हैं, जो मां दुर्गा की आराधना को समर्पित हैं। नवरात्र के नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा की पूजा करते हैं और इसके बाद दशहरा मनाया जाता है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, नवरात्र से ही खानपान और दैनिक दिनचर्या में कुछ बदलाव किए जा सकते हैं। इस दौरान घर की साफ-सफाई, सुबह जल्दी उठने और नियमित पूजा करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इन परंपराओं को अपनाने का उद्देश्य धार्मिक अनुशासन बनाए रखना और त्योहारों की तैयारी करना है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्र और कार्तिक मास के दौरान सात्विक भोजन को प्राथमिकता देना चाहिए। इस अवधि में लहसुन, प्याज, मांसाहार और शराब जैसी तामसिक मानी जाने वाली चीजों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। कुछ धार्मिक परंपराओं में बैंगन और मूली का सेवन करने से भी बचने की मान्यता है। कार्तिक मास में विशेष रूप से मछली नहीं खाने की परंपरा का उल्लेख मिलता है। मान्यता के अनुसार, इस महीने भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार का स्मरण किया जाता है, इसलिए मछली के सेवन से परहेज करने की सलाह दी जाती है। हालांकि, ये नियम धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित हैं, जिनका पालन श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार करते हैं।

    इस महीने में सुबह जल्दी उठकर स्नान करने और पूजा-पाठ करने का विशेष महत्व बताया गया है। श्रद्धालु स्नान के बाद मां दुर्गा और अन्य देवी-देवताओं की आराधना कर सकते हैं। शाम के समय तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाने की परंपरा भी प्रचलित है। धार्मिक मान्यता है कि तुलसी पूजन से घर में शुभता आती है। इसके साथ ही घर के मुख्य द्वार पर शाम को दीपक जलाने को भी शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि दीपदान से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। दिवाली से पहले घर की साफ-सफाई करने के साथ-साथ नवरात्र के दौरान भी घर को स्वच्छ रखने पर जोर दिया जाता है।

    कार्तिक मास में पूजा-पाठ के अलावा मंत्र जाप और ध्यान करने की परंपरा भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नियमित मंत्र जाप से मन एकाग्र होता है और ध्यान करने से मानसिक शांति प्राप्त करने में सहायता मिल सकती है। श्रद्धालु अपनी दिनचर्या में कुछ समय इन गतिविधियों के लिए निर्धारित कर सकते हैं। सुबह जल्दी उठना, स्वच्छता बनाए रखना, सात्विक भोजन करना और शाम को दीपक जलाना इस अवधि की प्रमुख परंपराओं में शामिल हैं। दिवाली से पहले मां लक्ष्मी की पूजा की तैयारियां भी शुरू हो जाती हैं। कार्तिक मास में इन धार्मिक परंपराओं का पालन करने वाले श्रद्धालु इसे भक्ति, संयम और सकारात्मकता बढ़ाने का अवसर मानते हैं। हालांकि, मां लक्ष्मी की कृपा और सुख-समृद्धि से जुड़ी मान्यताएं धार्मिक आस्था का हिस्सा हैं।

  • दशहरा-दिवाली पर चीनी की कीमतें नियंत्रण में रखने की तैयारी, सरकार और उद्योग ने पर्याप्त आपूर्ति का दिया भरोसा

    दशहरा-दिवाली पर चीनी की कीमतें नियंत्रण में रखने की तैयारी, सरकार और उद्योग ने पर्याप्त आपूर्ति का दिया भरोसा


    नई दिल्ली ।दशहरा और दिवाली समेत आगामी त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर चीनी उपलब्ध कराने के लिए सरकार और चीनी उद्योग मिलकर काम कर रहे हैं। त्योहारों के दौरान चीनी की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रण में रखने पर जोर दिया जा रहा है।

    इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा कि त्योहारी मौसम में उपभोक्ताओं को उचित दर पर चीनी उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि दशहरा और इसके बाद दिवाली सहित कई प्रमुख त्योहार आने वाले हैं, ऐसे में मांग में संभावित बढ़ोतरी के बावजूद चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर नजर रखना जरूरी है।

    उन्होंने बताया कि घरेलू बाजार में फिलहाल चीनी की आपूर्ति पर्याप्त बनी हुई है। खुदरा कीमतों में भी नरमी की शुरुआत हो चुकी है और आने वाले सप्ताहों में इसमें और कमी आने की संभावना जताई गई है।

    चीनी की कीमतों में कमी का असर खुदरा बाजार में पूरी तरह दिखाई देने में कुछ समय लग सकता है। इसका कारण एक्स-मिल कीमतों और उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाली खुदरा कीमतों के बीच रहने वाला अंतर है। मिल स्तर पर कीमत कम होने के बाद इसका लाभ आपूर्ति श्रृंखला के अलग-अलग चरणों से गुजरते हुए धीरे-धीरे खुदरा बाजार तक पहुंचता है।

    बताया गया है कि एक्स-मिल चीनी की कीमतों में करीब 25 से 30 प्रतिशत तक की कमी आ चुकी है। पूरे देश में एक्स-मिल कीमत का औसत वर्तमान में करीब 4,450 रुपये प्रति क्विंटल बताया गया है।

    एक्स-मिल कीमत वह दर होती है जिस पर चीनी मिल से निकलते समय चीनी की बिक्री की जाती है। इसके बाद परिवहन, भंडारण, थोक कारोबार और खुदरा स्तर से गुजरने के कारण अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचने वाली कीमत अलग हो सकती है।

    त्योहारी सीजन में चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने के कारण चीनी की जरूरत भी अधिक होती है। ऐसे में सरकार और उद्योग के सामने पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रखने के साथ कीमतों को स्थिर बनाए रखने की चुनौती रहती है।

    चीनी उद्योग की ओर से कहा गया है कि मौजूदा स्थिति में घरेलू बाजार में आपूर्ति को लेकर कोई बड़ी कमी नहीं है। एक्स-मिल स्तर पर कीमतों में आई गिरावट का असर आने वाले समय में खुदरा बाजार पर भी दिखाई देने की उम्मीद है।

    बाजार में कम लागत के अनुरूप कीमतों में बदलाव होने के साथ उपभोक्ताओं को इसका लाभ मिलने की संभावना है। हालांकि, मिल स्तर से खुदरा बाजार तक कीमतों में बदलाव पहुंचने में कुछ समय लग सकता है।

    त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने के बावजूद सरकार और उद्योग का लक्ष्य चीनी की उपलब्धता बनाए रखना और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त कीमत का दबाव नहीं पड़ने देना है। मौजूदा एक्स-मिल कीमतों में आई गिरावट के आधार पर आने वाले समय में खुदरा चीनी की कीमतों में भी नरमी की उम्मीद जताई गई है।

    इससे दशहरा और दिवाली के दौरान चीनी की बढ़ती मांग के बीच उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावना है। सरकार और उद्योग की ओर से आपूर्ति तथा कीमतों पर लगातार नजर रखने की बात कही गई है।

  • सूरत कोर्ट ने 7 साल की बच्ची की जैन साध्वी दीक्षा पर लगाई रोक

    सूरत कोर्ट ने 7 साल की बच्ची की जैन साध्वी दीक्षा पर लगाई रोक


    सूरत । गुजरात जिले की फैमिली कोर्ट ने 7 साल की एक बच्ची को जैन साध्वी बनने की दीक्षा लेने से रोक दिया है। यह फैसला बच्ची के पिता की याचिका पर लिया गया जिसमें उन्होंने दावा किया कि उनकी अलग रह रही पत्नी उनकी मर्जी के खिलाफ बच्ची को दीक्षा दिलाना चाहती थी। अदालत ने मां से हलफनामा देने को कहा है कि वह बच्ची को साध्वी बनने की दीक्षा में शामिल न होने दे।

    सूरत फैमिली कोर्ट की जज एसवी मंसूरी ने आदेश दिया कि 8 फरवरी 2026 को मुंबई में होने वाले दीक्षा समारोह पर फिलहाल रोक रहेगी। याचिकाकर्ता पिता के वकील समाप्ति मेहता ने बताया कि अदालत ने अंतरिम रोक लगाने की मांग मान ली है। अदालत ने मां से लिखित में जवाब मांगा है जिसमें उन्हें स्पष्ट करना होगा कि वह बच्ची को दीक्षा समारोह में शामिल नहीं होने देंगी। अगली सुनवाई 2 जनवरी को होगी।

    सुनवाई के दौरान यह जानकारी सामने आई कि मां ने यह विवाद लगभग एक साल पहले उत्पन्न होने के बाद पति का घर छोड़ दिया था। महिला अपने माता-पिता के साथ रहने लगी साथ ही उसने अपनी बेटी और बेटे को भी साथ रखा। पिता ने 10 दिसंबर को कोर्ट में याचिका दायर की जिसमें उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी उनकी मर्जी के खिलाफ बच्ची को साध्वी बनाने का निर्णय ले रही है।

    पिता ने अदालत को बताया कि उन्होंने 2012 में शादी की थी और उनके दो बच्चे हैं। 2024 से पति-पत्नी अलग रह रहे हैं। पिता ने याचिका में कहा कि बच्ची के साध्वी बनने के मुद्दे पर दोनों ने पहले सहमति बनाई थी कि जब बच्ची बालिग हो जाएगी तभी वह साध्वी बनने का निर्णय लेगी। इसके बावजूद पत्नी चाहती थी कि बच्ची फरवरी 2026 में मुंबई में बड़े समारोह में साध्वी बने।

    पिता ने अपने बयान में यह भी कहा कि उनकी पत्नी केवल तभी घर वापस आएगी जब वह बच्ची की दीक्षा के लिए रजामंद होगी। पिता ने अदालत से यह भी कहा कि वह गार्जियंस एंड वार्ड्स एक्ट 1890 के तहत बच्ची के हितों की रक्षा के लिए उसका कानूनी अभिभावक बनाना चाहते हैं।

    अदालत ने पिता की याचिका पर मां को नोटिस जारी किया और 22 दिसंबर तक जवाब मांगा। जज मंसूरी ने स्पष्ट किया कि बच्ची की उम्र देखते हुए और उसके भविष्य के हित को ध्यान में रखते हुए दीक्षा पर रोक आवश्यक है। अदालत का यह निर्णय बच्चों के अधिकारों और उनकी इच्छाओं का सम्मान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    जैन समुदाय में दीक्षा एक धार्मिक प्रक्रिया है लेकिन इस मामले ने दिखाया कि कम उम्र के बच्चों को ऐसे बड़े निर्णय लेने के लिए मजबूर करना कानूनी और सामाजिक दृष्टि से विवादास्पद हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी धार्मिक अनुष्ठान में बच्चों की भागीदारी तभी होनी चाहिए जब वे पूरी तरह से अपनी मर्जी से निर्णय ले सकें।

    अदालत का यह निर्णय न केवल इस परिवार के लिए बल्कि समाज के लिए भी एक संदेश है कि बच्चों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। फिलहाल बच्ची को साध्वी बनने की प्रक्रिया से रोक दिया गया है और मां से हलफनामा लेने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। अगली सुनवाई 2 जनवरी 2026 को होगी जिसमें अदालत पूरी स्थिति की समीक्षा करेगी।