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  • INDIA ब्लॉक में बढ़ा सियासी तनाव: थलापति विजय की TVK को समर्थन पर चिदंबरम का बड़ा दावा, DMK को पहले ही दी थी जानकारी

    INDIA ब्लॉक में बढ़ा सियासी तनाव: थलापति विजय की TVK को समर्थन पर चिदंबरम का बड़ा दावा, DMK को पहले ही दी थी जानकारी

    नई दिल्ली । तमिलनाडु की राजनीति में थलापति विजय की पार्टी टीवीके को लेकर बने नए राजनीतिक समीकरणों के बीच INDIA ब्लॉक के भीतर मतभेद गहराते दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने दावा किया है कि उनकी पार्टी ने टीवीके को समर्थन देने के फैसले की जानकारी पहले ही DMK और अन्य सहयोगी दलों को दे दी थी।

    चिदंबरम ने एक मीडिया बातचीत में कहा कि कांग्रेस ने अपने गठबंधन सहयोगियों को विश्वास में लेकर ही यह निर्णय लिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीपीआई, वीसीके और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग जैसे दलों को भी इस फैसले की जानकारी दी गई थी। उनके अनुसार, केवल घोषणा के समय में एक दिन का अंतर था, लेकिन निर्णय की जानकारी पहले साझा कर दी गई थी।

    उन्होंने कहा कि पार्टी का उद्देश्य राजनीतिक अस्थिरता को रोकना और किसी भी स्थिति में दोबारा चुनाव की संभावना को टालना था। चिदंबरम के अनुसार, गठबंधन के भीतर भी यह व्यापक सहमति थी कि यदि टीवीके बहुमत से थोड़ा पीछे रह जाती है, तो ऐसी स्थिति में समर्थन देकर स्थिर सरकार बनाने की कोशिश की जाए।

    वहीं, DMK ने कांग्रेस के इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी के युवा संगठन ने इस निर्णय को गठबंधन के साथ विश्वासघात करार दिया है। DMK नेताओं का कहना है कि कांग्रेस ने बिना पूरी सहमति के यह समर्थन देकर गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़ा किया है।

    इस विवाद के बाद INDIA ब्लॉक के भीतर राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है। तमिलनाडु में पहले से ही गठबंधन की राजनीति जटिल मानी जाती है, और अब टीवीके को समर्थन देने के फैसले ने इसे और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

    चुनावी नतीजों के अनुसार, अभिनेता-राजनेता थलापति विजय के नेतृत्व वाली टीवीके ने 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सामने आई, लेकिन वह बहुमत के लिए आवश्यक 118 सीटों से पीछे रह गई। इसके बाद उसे सरकार गठन के लिए अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता पड़ी।

    कांग्रेस ने अपने पांच विधायकों के समर्थन की घोषणा कर टीवीके को समर्थन दिया, जिससे उसके सरकार बनाने की संभावनाएं मजबूत हुईं। इसके बाद वीसीके, भाकपा और माकपा जैसे दलों ने भी समर्थन दिया, जिनके पास सीमित संख्या में विधायक थे। इन समर्थन के बाद टीवीके बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने में सफल रही और सरकार गठन का दावा पेश कर सकी।

    हालांकि, इस राजनीतिक कदम ने INDIA ब्लॉक के भीतर मतभेदों को उजागर कर दिया है। DMK का आरोप है कि इस तरह का निर्णय गठबंधन की सामूहिक रणनीति के खिलाफ है और इससे मतदाताओं के विश्वास पर असर पड़ा है।

    चिदंबरम का दावा है कि यह निर्णय राजनीतिक स्थिरता को ध्यान में रखकर लिया गया था, जबकि विरोधी दल इसे गठबंधन अनुशासन के खिलाफ मान रहे हैं। इस मुद्दे ने तमिलनाडु की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और INDIA ब्लॉक के भीतर भविष्य की एकता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

    फिलहाल, इस विवाद पर दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं और आने वाले दिनों में यह मामला और राजनीतिक चर्चा का विषय बन सकता है।

  • तमिलनाडु की राजनीति में बढ़ी नई खींचतान, गठबंधन टूटने के बाद कांग्रेस पर उदयनिधि स्टालिन का तीखा हमला चर्चा में

    तमिलनाडु की राजनीति में बढ़ी नई खींचतान, गठबंधन टूटने के बाद कांग्रेस पर उदयनिधि स्टालिन का तीखा हमला चर्चा में


    नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति में चुनावी नतीजों के बाद सियासी समीकरण तेजी से बदलते दिखाई दे रहे हैं। हालिया घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है और लंबे समय से साथ दिखाई देने वाले राजनीतिक रिश्तों में अब तनाव साफ नजर आने लगा है। चुनाव परिणामों के बाद गठबंधन की राजनीति ने नया मोड़ ले लिया है, जिसके चलते पुराने सहयोगियों के बीच दूरी बढ़ती दिखाई दे रही है। इसी बदलते माहौल के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है और नेताओं के बीच तीखे आरोप-प्रत्यारोप चर्चा का केंद्र बन गए हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी नतीजों के बाद अक्सर नए समीकरण बनते और पुराने समीकरण बदलते हैं, लेकिन इस बार स्थिति अधिक संवेदनशील दिखाई दे रही है। सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक दलों के बीच बने नए समीकरणों ने कई पुराने सहयोगियों को असहज स्थिति में ला दिया है। यही कारण है कि अब राजनीतिक मंचों से दिए जा रहे बयान भी अधिक आक्रामक और सीधे नजर आ रहे हैं।

    हालिया राजनीतिक घटनाक्रम में एक प्रमुख नेता द्वारा कांग्रेस पर की गई तीखी टिप्पणी ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। उनके बयान ने केवल गठबंधन की राजनीति पर सवाल नहीं खड़े किए, बल्कि चुनावी हार और जीत के पीछे की रणनीतियों को लेकर भी नई बहस शुरू कर दी है। उनके बयान के बाद राज्य की राजनीति में नए विवाद की शुरुआत मानी जा रही है।

    राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि चुनावों के बाद बने नए गठबंधन और समर्थन के समीकरणों ने कई दलों की रणनीति को प्रभावित किया है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जब लंबे समय तक साथ रहे दल अलग रास्ता चुनते हैं तो उसका असर केवल सत्ता तक सीमित नहीं रहता बल्कि संगठन और कार्यकर्ताओं के स्तर पर भी दिखाई देता है। यही कारण है कि हाल के घटनाक्रमों के बाद कार्यकर्ताओं और नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी लगातार सामने आ रही हैं।

    राजनीति में भरोसा और सहयोग दो ऐसे तत्व माने जाते हैं जिनके आधार पर गठबंधन लंबे समय तक टिकते हैं। लेकिन जब परिस्थितियां बदलती हैं तो राजनीतिक दल अपने हितों और भविष्य की रणनीतियों के अनुसार नए फैसले लेने लगते हैं। ऐसे बदलाव कई बार राजनीतिक रिश्तों में तनाव पैदा कर देते हैं। तमिलनाडु की मौजूदा स्थिति को भी इसी नजरिए से देखा जा रहा है, जहां चुनावी परिणामों के बाद सियासी समीकरणों में तेजी से परिवर्तन दिखाई दे रहा है।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में राज्य की राजनीति और अधिक दिलचस्प हो सकती है। नए गठबंधन, बदलते समर्थन और राजनीतिक बयानबाजी आने वाले दिनों में राजनीतिक माहौल को और प्रभावित कर सकती है। फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि चुनाव खत्म होने के बाद भी राजनीतिक संघर्ष थमा नहीं है बल्कि अब यह नए चरण में प्रवेश करता दिखाई दे रहा है। तमिलनाडु की राजनीति में आने वाले समय में कई नए मोड़ देखने को मिल सकते हैं, जिन पर पूरे देश की नजर बनी रहने की संभावना है।

  • संसद में दो-तिहाई बहुमत की तैयारी! डीएमके को NDA में लाने की रणनीति पर तेज हुई हलचल

    संसद में दो-तिहाई बहुमत की तैयारी! डीएमके को NDA में लाने की रणनीति पर तेज हुई हलचल


    नई दिल्ली । तमिलनाडु की राजनीति में हाल ही में हुए बड़े बदलाव का असर अब राष्ट्रीय राजनीति पर भी साफ दिखाई देने लगा है। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद जहां राजनीतिक समीकरण तेजी से बदले हैं, वहीं केंद्र की राजनीति में भी नए गठबंधन और रणनीतियों की चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी की नजर अब द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) पर टिक गई है, जिसे संसद में दो-तिहाई बहुमत के लक्ष्य से जोड़कर देखा जा रहा है।

    तमिलनाडु में नई सरकार बनने के बाद कांग्रेस और डीएमके के बीच वर्षों पुराना राजनीतिक रिश्ता कमजोर पड़ता नजर आया। बदले राजनीतिक माहौल में कांग्रेस ने नई सत्ता के साथ जाने का फैसला किया, जिससे डीएमके को बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। इसके बाद डीएमके ने विपक्षी गठबंधन से दूरी बनानी शुरू कर दी, जिसने राष्ट्रीय राजनीति में नई अटकलों को जन्म दे दिया।

    राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, बीजेपी अब डीएमके को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के करीब लाने की संभावनाओं पर काम कर रही है। हालांकि औपचारिक गठबंधन को लेकर अभी कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं, लेकिन संसद में मुद्दों के आधार पर समर्थन हासिल करने की रणनीति पर चर्चा तेज बताई जा रही है। माना जा रहा है कि बीजेपी का मुख्य फोकस डीएमके के लोकसभा और राज्यसभा सांसदों के समर्थन पर है, जिससे बड़े संवैधानिक विधेयकों को पारित कराने में मदद मिल सकती है।

    संसद में कई महत्वपूर्ण विधेयकों और संवैधानिक संशोधनों के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। ऐसे में केंद्र सरकार की कोशिश है कि भविष्य में “वन नेशन-वन इलेक्शन”, परिसीमन और न्यायिक सुधार जैसे बड़े प्रस्तावों को बिना किसी बड़ी बाधा के पारित कराया जा सके। इसी वजह से राजनीतिक रणनीतिकार उन दलों के समर्थन की संभावनाएं तलाश रहे हैं, जो औपचारिक रूप से गठबंधन का हिस्सा न होते हुए भी मुद्दों के आधार पर सहयोग दे सकते हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डीएमके और बीजेपी की विचारधाराएं कई मुद्दों पर अलग रही हैं, खासकर सनातन धर्म और सांस्कृतिक राजनीति को लेकर। इसके बावजूद वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियां दोनों पक्षों को व्यावहारिक राजनीति की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकती हैं। यह भी याद दिलाया जा रहा है कि अतीत में डीएमके राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का हिस्सा रह चुकी है, इसलिए भविष्य में किसी प्रकार के सहयोग की संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता।

    बीजेपी की रणनीति केवल प्रत्यक्ष गठबंधन तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि पर्दे के पीछे समर्थन जुटाने पर भी जोर दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि यदि डीएमके के सांसद संसद में कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार का समर्थन करते हैं, तो केंद्र सरकार को अपने बड़े राजनीतिक और संवैधानिक एजेंडे को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण ताकत मिल सकती है।

    तमिलनाडु की राजनीति में आए इस बदलाव ने राष्ट्रीय स्तर पर नए समीकरणों की संभावनाओं को जन्म दिया है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि यह केवल राजनीतिक चर्चा बनकर रह जाती है या फिर भारतीय राजनीति में एक नया गठबंधन अध्याय शुरू होता है।

  • तमिलनाडु में फंसा पेंच… विजय के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए AIADMK-DMK मिला सकते हैं हाथ!

    तमिलनाडु में फंसा पेंच… विजय के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए AIADMK-DMK मिला सकते हैं हाथ!


    चेन्नई।
    तमिलनाडु (Tamil Nadu) में सरकार बनाने को लेकर पेंच फंसता ही जा रहा है। किसी भी दल या गठबंधन के पास बहुमत नहीं होने के कारण अभी तक सरकार बनाने का रास्ता साफ नहीं हुआ है। इस बीच दक्षिण भारत (South India) के इस राज्य की राजनीति में एक ऐसा घटनाक्रम देखने को मिल रहा है, जिसकी कल्पना पिछले 50 वर्षों में किसी ने नहीं की थी। अभिनेता से नेता बने विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए राज्य के दो सबसे बड़े कट्टर प्रतिद्वंद्वी डीएमके (DMK) और एआईएडीएमके (AIADMK) हाथ मिला सकते हैं। दोनों को साथ लाने में भाजपा (BJP) बड़ी भूमिका निभा सकती है।

    एक रिपोर्ट के अनुसार, डीएमके के उदयनिधि स्टालिन गुट को डर है कि विजय का उदय पूर्व मुख्यमंत्री एम.जी. रामचंद्रन (MGR) के दौर की याद दिला सकता है। एमजीआर ने अपने जीवनकाल में डीएमके को कभी सत्ता में नहीं आने दिया था। वहीं, जयललिता के निधन के बाद लगातार चार चुनाव हार चुकी AIADMK अपनी राजनीतिक वजूद बचाने के लिए इस गठबंधन पर विचार कर रही है।

    सूत्रों का कहना है कि भाजपा इस गठबंधन को पर्दे के पीछे से समर्थन दे रही है ताकि कांग्रेस को सत्ता से दूर रखा जा सके। आपको बता दें कि अभी तक सिर्फ कांग्रेस ने ही अपने पांच विधायकों के साथ ऐक्टर विजय को समर्थन देने का ऐलान किया है।


    क्या है प्रस्तावित फॉर्मूला?

    योजना के मुताबिक, ई. पलानीस्वामी (EPS) मुख्यमंत्री बनेंगे और DMK बाहर से समर्थन देगी। हालांकि पार्टी प्रमुख एम.के. स्टालिन और पुराने नेता इस अजीब प्रयोग से डरे हुए हैं। उन्हें डर है कि इस बेमेल गठबंधन से समर्थकों के बीच भारी आक्रोश पैदा हो सकता है।


    विजय ने दी इस्तीफे की चेतावनी

    जैसे ही इस संभावित गठबंधन की खबरें फैलीं, विजय की पार्टी टीवीके ने बड़ा दांव चल दिया है। टीवीके ने घोषणा की है कि यदि DMK-AIADMK गठबंधन सरकार बनाने का दावा पेश करता है, तो उनके सभी 108 विधायक सामूहिक इस्तीफा दे देंगे। यह कदम जनता और प्रशंसकों को सड़कों पर उतारने की एक सोची-समझी रणनीति मानी जा रही है।


    किसके पास कितनी सीटें

    आपको बता दें कि इस विधानसभा चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों का समर्थन चाहिए। फिलहाल विजय की पार्टी टीवीके के पास सबसे अधिक 108 सीटें हैं। वहीं डीएमकी गठबंधन के पास 74 विधायक हैं। इनमें डीएमके 59, कांग्रेस पांच और अन्य की 10 सीटें हैं। एआईएडीएमके गठबंधन के पास यहां 53 सीटें हैं। वहीं, अन्य की संख्या 6 है।


    गवर्नर ने नहीं दिया सरकार बनाने का न्योता

    108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद राज्यपाल आर.वी. अर्लेकर ने विजय को सरकार बनाने का न्यौता देने से इनकार कर दिया है। राज्यपाल का कहना है कि विजय पहले 118 विधायकों का समर्थन पत्र दिखाएं। कई दलों ने राज्यपाल की इस मांग की आलोचना की है। उनका तर्क है कि बहुमत सदन के पटल पर साबित किया जाना चाहिए, न कि राजभवन में। मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 10 मई को समाप्त हो रहा है, जिससे राज्य में संवैधानिक संकट गहरा गया है।

    इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए वामपंथी दलों और वीसीके की सहमति जरूरी है। विजय ने पहले ही इन पार्टियों से संपर्क साधा है, लेकिन वे फिलहाल वेट एंड वॉच की स्थिति में हैं।

  • तमिलनाडु में सत्ता संग्राम तेज: विजय ने पेश किया सरकार बनाने का दावा, कांग्रेस ने DMK छोड़ TVK को दिया समर्थन

    तमिलनाडु में सत्ता संग्राम तेज: विजय ने पेश किया सरकार बनाने का दावा, कांग्रेस ने DMK छोड़ TVK को दिया समर्थन


    नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है, जहां विजय ने चुनाव नतीजों के बाद सरकार गठन की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है। तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के प्रमुख विजय का यह कदम राज्य की सियासत को नए मोड़ पर ले गया है।

    इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बड़ा फैसला लेते हुए दशकों पुराना गठबंधन द्रविड़ मुनेत्र कड़गम से तोड़ दिया और विजय की पार्टी को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बड़ा फैसला लेते हुए दशकों पुराना गठबंधन द्रविड़ मुनेत्र कड़गम से तोड़ दिया और विजय की पार्टी को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। कांग्रेस नेताओं ने टीवीके प्रमुख से मुलाकात कर औपचारिक रूप से समर्थन पत्र भी सौंपा, जिसके बाद पार्टी मुख्यालय में जश्न का माहौल देखने को मिला।

    कांग्रेस के इस फैसले को तमिलनाडु की राजनीति में गेमचेंजर माना जा रहा है। पार्टी के प्रभारी गिरीश चोडानकर ने कहा कि विजय के समर्थन मांगने के बाद यह निर्णय लिया गया और शीर्ष नेतृत्व ने भी इसे मंजूरी दी है। कांग्रेस को उम्मीद है कि राज्यपाल विजय को जल्द ही सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं।

    हालांकि, आंकड़ों पर नजर डालें तो अभी भी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है। टीवीके ने चुनाव में 108 सीटें जीती हैं, जबकि कांग्रेस के 5 विधायक हैं। इस तरह दोनों का कुल आंकड़ा 113 तक पहुंचता है, जो बहुमत से अभी भी 5 सीट कम है। ऐसे में विजय को सरकार बनाने के लिए अन्य दलों या निर्दलीय विधायकों का समर्थन जुटाना होगा।

    तमिलनाडु की सियासत में यह घटनाक्रम बेहद अहम माना जा रहा है, जहां एक तरफ नए समीकरण बन रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुराने गठबंधन टूटते नजर आ रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या विजय बहुमत का आंकड़ा हासिल कर पाते हैं या राज्य में राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ेगी।

  • पुडुचेरी में डबल इंजन सरकार का जश्न, पीएम मोदी ने किया 2,700 करोड़ परियोजनाओं का उद्घाटन

    पुडुचेरी में डबल इंजन सरकार का जश्न, पीएम मोदी ने किया 2,700 करोड़ परियोजनाओं का उद्घाटन


    पुडुचेरी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को पुडुचेरी में आयोजित जनसभा में कांग्रेस और तमिलनाडु में सत्तारूढ़ डीएमके पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि पुडुचेरी की विकास यात्रा में कांग्रेस और डीएमके दोनों ही बड़े स्पीड ब्रेकर साबित हुए हैं। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि अब डबल इंजन सरकार के कामों का जश्न मनाने का समय है और विकास को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का अवसर है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने मौके पर 2,700 करोड़ रुपए से अधिक की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने समावेशी प्रगति सुनिश्चित करने के लिए शहरी और ग्रामीण दोनों अवसंरचना विकास पर विशेष ध्यान दिया है।

    डीएमके और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पहले के दौर में पुडुचेरी के लोग भारी कष्ट झेलते रहे। उन्होंने याद दिलाया कि उस समय राजनीतिक अस्थिरता, भ्रष्टाचार और अपराध आम बात थी। राशन की दुकानों में चावल नहीं मिलता था, सैलरी देर से मिलती थी, और सड़कों पर गुंडों और ड्रग माफिया का राज था। प्रधानमंत्री ने कहा, “कांग्रेस ने पुडुचेरी को दिल्ली में बैठे एक परिवार का एटीएम बना दिया था। डीएमके की बात करें तो तमिलनाडु में हो रहे घोटालों की लंबी सूची देखी जा सकती है।”

    पीएम मोदी ने यह भी कहा कि कांग्रेस और डीएमके अब भी सत्ता की भूखी हैं, लेकिन पुडुचेरी के लोग इसे दोबारा नहीं चाहेंगे। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार ने पुडुचेरी में विकास और कल्याण के कामों को तेज गति से आगे बढ़ाया है।

    प्रधानमंत्री ने पुडुचेरी के पर्यटन क्षेत्र को इसकी ताकत बताते हुए कहा कि यह वीकेंड डेस्टिनेशन के रूप में पहले से ही हजारों पर्यटकों को आकर्षित करता है। ट्रेनें और उड़ानें हमेशा भरी रहती हैं। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक पर्यटन, इको-टूरिज्म और स्वास्थ्य पर्यटन में निवेश से पुडुचेरी नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगा।

    स्वास्थ्य सेवा को लेकर पीएम मोदी ने जोर देते हुए कहा कि जब तक मानव संसाधन स्वस्थ रहेगा, तब तक राष्ट्र की प्रगति संभव है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं सभी के लिए सुलभ, उपलब्ध और किफायती होनी चाहिए। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि पुडुचेरी के किसी भी नागरिक को इलाज के लिए लंबी दूरी की यात्रा करने की जरूरत न पड़े।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि पुडुचेरी मेडिकल टूरिज्म हब बन सकता है। वर्तमान में यहां नौ मेडिकल कॉलेज हैं, और केंद्र सरकार की नीतियां इसे वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य पर्यटन केंद्र बनाने में सहायक होंगी।

    पीएम मोदी के संबोधन में डबल इंजन सरकार की उपलब्धियों को उजागर किया गया और कांग्रेस-डीएमके शासनकाल की कमियों का उदाहरण देते हुए विकास और कल्याण पर जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने पुडुचेरीवासियों से कहा कि अब भ्रष्टाचार और अस्थिरता के दौर में लौटने का समय नहीं है, बल्कि विकास और नई परियोजनाओं का लाभ उठाने का समय है।

  • तमिलनाडु विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की 45 सीट की मांग, DMK केवल 25 सीट देने को तैयार

    तमिलनाडु विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की 45 सीट की मांग, DMK केवल 25 सीट देने को तैयार


    नई दिल्ली। आगामी तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने अपनी सहयोगी द्रविड़ मुनेत्र कषगम DMK से 45 सीटों की मांग की है जबकि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की पार्टी इस बार भी पिछले चुनाव की तरह केवल 25 सीट देने को तैयार है। इस साल अप्रैल मई में राज्य में चुनाव होने की संभावना है।

    कांग्रेस ने बढ़ाई मांग
    कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और अन्य नेताओं ने सीट बंटवारे को लेकर स्टालिन से चर्चा की लेकिन अभी तक कोई सहमति नहीं बनी है। कांग्रेस का तर्क है कि 2021 के चुनाव परिणामों की समीक्षा के आधार पर उन्हें अधिक सीटें मिलनी चाहिए।

    स्रोतों के अनुसार पिछले चुनाव में DMK ने कुल 234 सीटों में से 173 पर चुनाव लड़ा जिसमें 133 जीत और 40 हार मिली। अधिकांश हार AIADMK और बीजेपी से हुई थी।

    कांग्रेस का मानना है कि अगर उन्हें अधिक सीटें दी जाएं तो पिछली बार हारी हुई कम से कम 20 सीटें जीती जा सकती हैं। पार्टी के सूत्रों ने कहा कि 45 सीट की मांग का उद्देश्य जीत की संभावनाओं में सुधार गठबंधन को मजबूत करना और 2026 से पहले संतुलित सीट-बंटवारे का फॉर्मूला सुनिश्चित करना है।

    बातचीत का दौर जारी

    रविवार को चेन्नई में स्टालिन और वेणुगोपाल के बीच बैठक हुई जिसमें दोनों दलों के वरिष्ठ नेता भी शामिल थे। इसके अलावा इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग IUML के कादर मोहिदीन ने प्रतिनिधिमंडल के साथ DMK नेताओं से मुलाकात की।
  • विधानसभा चुनावों से पहले DMK से तकरार और TVK से इकरार? 32 पर कांग्रेस नहीं तैयार

    विधानसभा चुनावों से पहले DMK से तकरार और TVK से इकरार? 32 पर कांग्रेस नहीं तैयार


    चैन्‍नई।
    तमिलनाडु में इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले वहां सियासी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री एम के स्टालिन की अगुवाई वाली सत्ताधारी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने सहयोगी पार्टी कांग्रेस को 234 सदस्यों वाली विधानसभा में मात्र 32 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऑफर दिया है। इससे कांग्रेस नाराज हो गई है। कांग्रेस नेता अब अन्य विकल्पों की तलाश में जुट गए हैं। इंडिया टुडे की रिपोर्ट में कहा गया है कि तमिलनाडु कांग्रेस के कुछ नेता शीर्ष नेतृत्व खासकर राहुल गांधी से आगामी विधानसभा चुनावों के लिए अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके से गठबंधन की संभानवाएं तलाशने का अनुरोध करने की तैयारी में हैं।

    यह स्थिति सीएम स्टालिन के लिए टेंशन दे सकती है।

    दरअसल, कांग्रेस पार्टी ने अपने आंतरिक सर्वे के हिसाब से 40 सीटों का टारगेट सेट किया था लेकिन DMK ने उसे महज 32 सीटें ऑफर की हैं। अब ऐसी तनातनी के बाद कांग्रेस 38 सीटों तक पहुंच पाई है लेकिन स्टालिन की पार्टी टस से मस नहीं हो रही। लिहाजा, कांग्रेस ने दूसरे विकल्पों की तलाश तेज कर दी है। इसी कड़ी में कांग्रेस के कुछ नेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) से संभावित गठबंधन का मुद्दा पार्टी नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी के सामने रखने की तैयारी में हैं।
    सत्ता में हिस्सेदारी की भी मांग

    कांग्रेस सांसद माणिक्कम टैगोर ने सोमवार को साफ कहा कि पार्टी सिर्फ सीटों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि अगर गठबंधन सत्ता में आता है तो सरकार में हिस्सेदारी भी चाहती है। उनके इस बयान को पार्टी कार्यकर्ताओं के दबाव और चुनाव से पहले रणनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

    TVK ने कांग्रेस को बताया ‘स्वाभाविक सहयोगी’

    टैगोर का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी TVK ने कांग्रेस को अपना ‘प्राकृतिक सहयोगी’ बताया है। इससे तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज़ हो गई है। TVK के प्रवक्ता फेलिक्स जेराल्ड ने कहा कि विजय और राहुल गांधी के बीच दोस्ताना संबंध हैं और कांग्रेस के साथ गठबंधन की संभावना काफ़ी अधिक है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि तमिलनाडु कांग्रेस के अंदरूनी हितों के कारण बातचीत में देरी हो सकती है।

    फैसला विजय करेंगे

    इस बीच TVK नेता निर्मल कुमार ने कहा कि गठबंधन को लेकर अंतिम फैसला पार्टी प्रमुख विजय ही करेंगे। उन्होंने कहा, “हमारे नेता सभी से सलाह-मशविरा कर गठबंधन को लेकर घोषणा करेंगे। चुनाव में अभी करीब दो महीने का समय है।” कुल मिलाकर, डीएमके के साथ सीट बंटवारे को लेकर असमंजस, सत्ता में हिस्सेदारी की मांग और TVK के साथ संभावित गठबंधन,इन सबने तमिलनाडु की राजनीति को चुनाव से पहले और दिलचस्प बना दिया है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि कांग्रेस किस रास्ते पर आगे बढ़ती है।