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  • होर्मुज पर अमेरिका का ‘टोटल कंट्रोल’! ट्रंप बोले- ईरान सिर्फ हार टाल रहा, बातचीत की जरूरत नहीं

    होर्मुज पर अमेरिका का ‘टोटल कंट्रोल’! ट्रंप बोले- ईरान सिर्फ हार टाल रहा, बातचीत की जरूरत नहीं


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच एक महीने की शांति के बाद फिर सैन्य तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका का लगभग पूरा नियंत्रण है और ईरान की अर्थव्यवस्था बिखर रही है। उनका यह बयान अमेरिकी हवाई हमलों के कुछ घंटे बाद आया, जिसके बाद दोनों देशों के बीच जवाबी हमले और तेज हो गए हैं।

    ट्रंप बोले- बातचीत के लिए मजबूर नहीं कर रहे

    ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में एबीसी न्यूज की उस रिपोर्ट को खारिज किया, जिसमें दावा किया गया था कि अमेरिका ईरान को बातचीत के लिए मजबूर करने की कोशिश कर रहा है। ट्रंप ने कहा कि उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि ईरान किसी समझौते पर हस्ताक्षर करता है या नहीं। उनके मुताबिक, मौजूदा स्थिति ही अमेरिका के लिए बेहतर है, क्योंकि होर्मुज पर अमेरिकी नियंत्रण है और ईरान की अर्थव्यवस्था लगातार कमजोर हो रही है।

    उन्होंने कहा कि घटनाक्रम एक तय नतीजे की ओर बढ़ रहा है। साथ ही ट्रंप ने ईरान की जनता से अपनी सरकार के खिलाफ खड़े होने की अपील भी की।

    ईरान हर बार खारिज करता रहा है दावा

    फरवरी में टकराव शुरू होने के बाद से ट्रंप कई बार होर्मुज पर अमेरिकी नियंत्रण का दावा कर चुके हैं। हालांकि, ईरान लगातार इन दावों को खारिज करता रहा है। मंगलवार को अमेरिका ने ईरान के ठिकानों पर भारी हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन, बहरीन और इराक में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया।

    इससे पहले सप्ताहांत में जुलाई के बाद पहली बार दोनों पक्षों के बीच गोलीबारी हुई थी। सोमवार को होर्मुज से निकल रहे दो तेल टैंकरों पर हमले की खबर भी सामने आई। इसके बाद कच्चे तेल की कीमत करीब 4 डॉलर प्रति बैरल बढ़कर पांच सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई।

    होर्मुज पर ईरान की पकड़ का दावा

    होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है। ईरान ने इसे जहाजों के लिए बंद कर रखा है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का कहना है कि अमेरिकी हमलों के बाद जलमार्ग पर उसकी पकड़ और मजबूत होगी।

    ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उसके तेल निर्यात को रोकने की कोशिश की गई तो वह दूसरे देशों को भी ऐसा करने की अनुमति नहीं देगा।

    ट्रंप ने युद्धविराम की संभावना भी नकारी

    ट्रंप ने नए युद्धविराम की संभावना को भी खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि ईरान को समझौते के लिए पहले ही कई मौके दिए जा चुके हैं और अब किसी नए समझौते की जरूरत नहीं है।

    महीनों से जारी तनाव के बीच जून में हुआ समझौता भी ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सका। होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को दोनों देशों के बीच टकराव का सबसे बड़ा मुद्दा माना जा रहा है। ऐसे में ट्रंप के ताजा बयान के बाद अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव और बढ़ने की आशंका है।

  • ईरान युद्ध के बीच मिली धमकी से डरे डोनाल्ड ट्रंप के छोटे बेटे बैरन, घर से निकलना छोड़ा

    ईरान युद्ध के बीच मिली धमकी से डरे डोनाल्ड ट्रंप के छोटे बेटे बैरन, घर से निकलना छोड़ा


    वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) इन दिनों ईरान (Iran) के साथ युद्ध में उलझे हुए हैं। इस युद्ध की वजह से उनके परिवार पर भी खतरा मंडरा रहा है। पिछले दो सालों में ट्रंप के ऊपर भी तीन जानलेवा हमले हो चुके हैं। वहीं, हाल ही में उनके छोटे बेटे बैरन ट्रंप (Younger son Barron Trump) को लेकर भी ईरान की तरफ से धमकी दी गई थी। अब ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि दुनिया में सबसे शक्तिशाली माने जाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति के बेटे ने डर के मारे घर से निकलना छोड़ दिया है।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की तरफ से धमकी आने के बाद बैरन की सुरक्षा को बढ़ा दिया गया है। हालांकि, इसके बाद भी सुरक्षा दृष्टि से 20 साल के बैरन ने ज्यादातर समय अपने घर पर रहना ही शुरू कर दिया है। पिछली गर्मियां उन्होंने अपने पिता के न्यूजर्सी स्थित गोल्फ क्लब में ही गुजारी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप के करीबी एक शख्स ने की बैरन पिछले काफी समय से बहुत कम ही घर से बाहर जाते हैं। सूत्रों ने कहा, “वह बाहर नहीं जाते हैं। उन्हें एकांत पसंद है। वह ज्यादा किसी से मिलना-जुलना भी पसंद नहीं करते हैं।”


    चार्ली क्रिक की हत्या के बाद परेशान बैरन ट्रंप?

    सूत्रों के मुताबिक, बैरन अमेरिकी इन्फ्लुएंसर और ट्रंप के कट्टर समर्थक माने जाने वाले चार्ली क्रिक की हत्या के बाद से ही बाहर जाना कम कर चुके थे। लेकिन हाल ही में ईरान से आई धमकी ने उन्हें और भी ज्यादा एकांत प्रिय बना दिया है। खबर के मुताबिक क्रिक की हत्या की जानकारी मिलने के बाद बैरन ने अपने पिता डोनाल्ड ट्रंप को फोन किया और कहा, “यही होता है, जब आप अपने घर से बाहर जाते हैं।”


    ईरान ने दी थी बैरन की हत्या की धमकी

    ईरान के साथ युद्ध में उलझे डोनाल्ड ट्रंप के परिवार को कई बार हत्या की धमकी मिल चुकी हैं। हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप के बेटे को भी इसी तरह की धमकी मिली थीं। ईरान के सरकारी मीडिया चैनल से इस बात का ऐलान किया गया था कि जो कोई भी बैरन तक पहुंचेगा उसे 10 मिलियन डॉलर का इनाम दिया जाएगा। इसके बाद आईआरजीसी की तरफ से भी एक वीडियो पोस्ट किया गया था, जिसका शीर्षक था ‘व्हेयर टू किल बैरन ट्रंप’ इसमें कहा गया था कि ईरान के पास इस बात की पूरी जानकारी है कि बैरन ट्रंप कब, कहां और क्या करते हैं।


    ट्रंप पर भी हो चुके हैं हमले

    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी कई बार निशाना बनाया जा चुका है। सबसे पहले चुनावी प्रचार के दौरान उनके ऊपर हमला किया गया था। इसमें गोली सीधा उनके कान को छूती हुई निकल गई थी। इस हमले के बाद ट्रंप की पॉपुलैरिटी भी तेजी के साथ बढ़ी थी। इस हमले के कुछ समय के बाद ही ट्रंप के गोल्फ कोर्स के बाहर गोलीबारी हुई थी। इसमें संदिग्ध की गिरफ्तारी हुई थी। इसके बाद एक होटल के कार्यक्रम के दौरान भी एक संदिग्ध ने घुसने की कोशिश की थी। इसमें भी ट्रंप बाल-बाल बचे थे।

  • डोनाल्ड ट्रंप और किंम जोंग उन के बीच इसी साल नवंबर में होने वाली है बड़ी मीटिंग

    डोनाल्ड ट्रंप और किंम जोंग उन के बीच इसी साल नवंबर में होने वाली है बड़ी मीटिंग


    नई दिल्ली।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) और नॉर्थ कोरिया के नेता किम जोंग उन (North Korean leader Kim Jong Un) के बीच एक बार फिर आमने-सामने मुलाकात की तैयारी चल रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप अपने अधिकारियों से इस साल नवंबर में किम के साथ बैठक कराने को लेकर चर्चा कर रहे हैं. यह मुलाकात ट्रंप की एशिया यात्रा के दौरान चीन के शेनझेन में होने वाली एशिया-पैसिफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन (Asia-Pacific Economic Cooperation) यानी APEC बैठक के आसपास हो सकती है।

    ट्रंप और किम की संभावित मुलाकात ऐसे वक्त हो रही है, जब कोरियाई प्रायद्वीप में अमेरिका, दक्षिण कोरिया और नॉर्थ कोरिया के बीच सैन्य तनाव एक बार फिर चर्चा में है. खास बात यह है कि ट्रंप ने हाल ही में दक्षिण कोरिया के साथ होने वाली संयुक्त सैन्य ड्रिल को सीमित करने का निर्देश दिया है।

    ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि ये सैन्य अभ्यास महंगे हैं और नॉर्थ कोरिया के लिए एक गलत और दुश्मनी के संकेत भेजते हैं. उन्होंने दक्षिण कोरिया की तरफ से ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल की जंग में मदद नहीं करने पर भी नाराजगी जताई।


    ट्रंप ने बताया किम जोंग उन मिलने को तैयार, दिया रिस्पॉन्स

    राष्ट्रपति ट्रंप ने सोमवार को यह भी दावा किया कि किम जोंग उन ने उनके हालिया संपर्क का जवाब दिया है. जब उनसे पूछा गया कि किम ने उनकी बातचीत की अपील का जवाब क्यों नहीं दिया, तो ट्रंप ने कहा, “आपको कैसे पता कि उसने जवाब नहीं दिया?” इसके बाद उन्होंने कहा, “हां, उसने जवाब दिया है.”

    राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बातचीत को “बहुत सकारात्मक” बताया, हालांकि उन्होंने इसकी कोई जानकारी साझा नहीं की. नॉर्थ कोरिया की तरफ से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई. उधर, दक्षिण कोरिया ने साफ किया है कि अमेरिका के साथ सैन्य अभ्यास का मकसद नॉर्थ कोरिया पर हमला करना नहीं है.

    पहले कब-कब मिले ट्रंप-किम?
    अगर ट्रंप और किम जोंग उन की प्रस्तावित मुलाकात होती है, तो यह ट्रंप के पहले कार्यकाल के बाद दोनों नेताओं की पहली आमने-सामने बैठक होगी. इससे पहले दोनों नेताओं के बीच तीन अहम मुलाकातें हो चुकी हैं:

    – जून 2018, सिंगापुर समिट: ट्रंप और किम की यह पहली ऐतिहासिक मुलाकात थी. किसी मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति और नॉर्थ कोरिया के नेता के बीच पहली बार आमने-सामने बातचीत हुई. दोनों देशों ने कोरियाई प्रायद्वीप के परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में काम करने पर सहमति जताई.

    – फरवरी 2019, हनोई समिट: दोनों नेताओं की दूसरी औपचारिक बैठक वियतनाम के हनोई में हुई. हालांकि, परमाणु निरस्त्रीकरण और नॉर्थ कोरिया पर लगे प्रतिबंधों में राहत को लेकर दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन सकी और बैठक बिना किसी समझौते के खत्म हो गई.

    – जून 2019, DMZ मुलाकात: ट्रंप और किम ने कोरियाई सीमा पर स्थित डिमिलिटराइज्ड जोन यानी DMZ में अचानक मुलाकात की. इस दौरान ट्रंप नॉर्थ कोरिया की सीमा में कुछ कदम अंदर जाने वाले पहले मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति बने. यह मुलाकात काफी प्रतीकात्मक रही और दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत कूटनीति की एक और मिसाल बनी.

  • गाजा सीजफायर पर ट्रंप का बड़ा दांव: दामाद जेरेड कुशनर ने हमास नेता से मिस्र में की सीधी बातचीत

    गाजा सीजफायर पर ट्रंप का बड़ा दांव: दामाद जेरेड कुशनर ने हमास नेता से मिस्र में की सीधी बातचीत


    नई दिल्ली । गाजा में लंबे समय से अटकी सीजफायर डील को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका ने अपनी कूटनीतिक कोशिश तेज कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद और अमेरिकी वार्ताकार जेरेड कुशनर ने रविवार को मिस्र में हमास के प्रमुख खलील अल हय्या से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच यह बैठक दो घंटे से ज्यादा समय तक चली। बातचीत में मिस्र कतर और तुर्किये के अधिकारी भी मौजूद रहे। इस मुलाकात को गाजा में युद्धविराम की कोशिशों के लिहाज से अहम माना जा रहा है क्योंकि लंबे समय से इजरायल और हमास के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति नहीं बन पा रही है।

    कुशनर की हमास नेता से मुलाकात अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के 15 सूत्रीय गाजा रोडमैप को आगे बढ़ाने की कोशिश का हिस्सा है। इस प्रस्ताव में गाजा में युद्धविराम के साथ हमास के हथियार छोड़ने इजरायली सेना की गाजा से वापसी और युद्ध प्रभावित क्षेत्र के पुनर्निर्माण जैसे मुद्दे शामिल हैं। हमास ने इस योजना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई है लेकिन इजरायल ने अब तक इसे स्वीकार नहीं किया है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कहना है कि जब तक हमास पूरी तरह निरस्त्र नहीं हो जाता तब तक इजरायली सेना गाजा से पीछे नहीं हटेगी।

    मिस्र में हुई बातचीत के दौरान हमास ने अपनी शर्त भी स्पष्ट कर दी। हमास का कहना है कि किसी भी योजना को लागू करने से पहले इजरायल को गाजा में सैन्य हमले रोकने होंगे और अपनी सेना को तथाकथित येलो लाइन तक पीछे हटाना होगा। इसके बाद 14 दिनों की बातचीत शुरू हो सकती है जिसमें युद्धविराम योजना को लागू करने की समयसीमा और दूसरे जरूरी मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। दूसरी ओर इजरायल की सबसे बड़ी शर्त हमास का पूर्ण निरस्त्रीकरण है। यही मुद्दा दोनों पक्षों के बीच समझौते की राह में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक बना हुआ है।

    कुशनर की भूमिका इस समय इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वह ट्रंप प्रशासन की ओर से बातचीत को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। हमास के साथ मुलाकात के बाद उनकी इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी मुलाकात प्रस्तावित है। इस बैठक में पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस के निदेशक निकोलाय म्लादेनोव भी शामिल होंगे। इसका उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच मौजूद मतभेदों को कम करना और प्रस्तावित रोडमैप को आगे बढ़ाने की संभावनाएं तलाशना है।

    अमेरिकी प्रयासों के बीच कई मुस्लिम और अरब देशों ने भी इजरायल से ट्रंप की योजना को स्वीकार करने की अपील की है। सऊदी अरब संयुक्त अरब अमीरात जॉर्डन पाकिस्तान इंडोनेशिया मिस्र कतर और तुर्किये समेत कई देशों ने गाजा में संघर्ष खत्म करने के लिए प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख अपनाने की मांग की है।

    हालांकि जमीन पर हालात अब भी चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। गाजा के बड़े हिस्से पर इजरायली सेना के नियंत्रण और हमास के हथियार छोड़ने के मुद्दे को लेकर गतिरोध जारी है। ऐसे समय में कुशनर की हमास नेता से सीधी मुलाकात को अमेरिका की ओर से दोनों पक्षों पर दबाव बढ़ाने और बातचीत को किसी संभावित समझौते तक पहुंचाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। अब निगाहें कुशनर की नेतन्याहू के साथ होने वाली बातचीत और उसके बाद सामने आने वाले रुख पर टिकी हैं। अगर दोनों पक्ष अपनी प्रमुख शर्तों में कुछ लचीलापन दिखाते हैं तो गाजा में लंबे समय से लंबित सीजफायर समझौते की दिशा में आगे बढ़ने की उम्मीद बन सकती है।

  • ईरान युद्ध के बीच ट्रंप ने पश्चिमी प्रशांत से हटाया एयरक्राफ्ट कैरियर, चीन खुश

    ईरान युद्ध के बीच ट्रंप ने पश्चिमी प्रशांत से हटाया एयरक्राफ्ट कैरियर, चीन खुश


    नई दिल्ली। ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान के बीच अमेरिका ने पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र से अपना आखिरी विमानवाहक पोत यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन हटा लिया है। इसे मिडिल ईस्ट में लंबे समय से तैनात यूएसएस अब्राहम लिंकन की जगह भेजा जा रहा है। अमेरिका के इस फैसले से जापान और फिलीपींस जैसे सहयोगियों की चिंता बढ़ी है, जबकि चीन को पश्चिमी प्रशांत में अपनी सैन्य मौजूदगी और प्रभाव बढ़ाने का मौका मिल गया है।

    मिडिल ईस्ट में बढ़ा अमेरिकी नौसेना पर दबाव

    यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन को मिडिल ईस्ट भेजने का मुख्य उद्देश्य यूएसएस अब्राहम लिंकन को राहत देना है। लिंकन की वापसी मई में तय थी, लेकिन ईरान के खिलाफ अमेरिकी अभियानों के कारण उसकी तैनाती बढ़ा दी गई। यह पोत 240 से ज्यादा दिन लगातार समुद्र में रह चुका है। लंबी तैनाती के कारण अमेरिकी नौसैनिकों के तनाव और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

    प्रशांत से अमेरिकी पोत हटने पर सहयोगी चिंतित

    पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी विमानवाहक पोत की गैरमौजूदगी से जापान और फिलीपींस जैसे सहयोगियों में बेचैनी बढ़ी है। रणनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका का यह कदम उसके उस रुख से अलग दिखाई देता है, जिसमें वह एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए रखने की बात करता रहा है। हालांकि, अमेरिकी नौसेना आने वाले महीनों में किसी अन्य विमानवाहक पोत को इस क्षेत्र में तैनात कर सकती है।

    चीन को मिला ताकत दिखाने का मौका

    अमेरिकी पोत के हटने से चीन को पश्चिमी प्रशांत में अपना प्रभाव बढ़ाने का अवसर मिला है। विशेषज्ञों के अनुसार, बीजिंग यह संदेश देने की कोशिश कर सकता है कि इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी कमजोर हो रही है और वॉशिंगटन अपने सहयोगियों को पहले जैसी सुरक्षा गारंटी देने की स्थिति में नहीं है।

    इसी बीच चीन ने इंडोनेशिया के साथ नौसैनिक अभ्यास किया है। दक्षिण चीन सागर में स्कारबोरो शोल के पास भी चीनी सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं। जापान के आसपास भी चीनी नौसेना की गतिविधियों को लेकर तनाव बना हुआ है।

    लगातार तैनाती से अमेरिकी नौसेना पर बढ़ रहा दबाव

    अमेरिकी नौसेना के पास कुल 11 विमानवाहक पोत हैं और सामान्य तौर पर इनमें से दो या तीन ही एक समय में तैनात रहते हैं। लगातार लंबी तैनाती के कारण जहाजों के रखरखाव और मरम्मत पर भी दबाव बढ़ रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सीमित शिपयार्ड क्षमता के कारण आने वाले समय में यह चुनौती और गंभीर हो सकती है।

    बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर की उपयोगिता पर भी सवाल

    आधुनिक युद्ध में ड्रोन और लंबी दूरी की मिसाइलों के बढ़ते इस्तेमाल ने बड़े विमानवाहक पोतों की सुरक्षा और उपयोगिता पर भी सवाल खड़े किए हैं। कुछ रक्षा विशेषज्ञ छोटे युद्धपोतों और पनडुब्बियों के इस्तेमाल को बढ़ाने की वकालत कर रहे हैं। अमेरिकी नौसेना के संचालन प्रमुख भी बड़े विमानवाहक पोतों पर अत्यधिक निर्भरता कम करने और छोटे युद्धपोतों के इस्तेमाल की जरूरत जता चुके हैं।

  • डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा ऐलान, बोले- ईरान को हराकर होर्मुज को करेंगे अमेरिका में शामिल

    डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा ऐलान, बोले- ईरान को हराकर होर्मुज को करेंगे अमेरिका में शामिल


    वाशिंगटन।
    ईरान (Iran) के साथ जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने बड़ा ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा कि जल्द ही वह होर्मुज को अमेरिका का हिस्सा घोषित कर देंगे। उन्होंने कहा, ईरान को हराने के बाद होर्मुज (Hormuz) को अमेरिका में शामिल कर लिया जाएगा। वह न्यूयॉर्क में एक रैली को संबोधित कर रहे थे। ट्रंप ने यह नहीं बताया कि अंतरराष्ट्रीय कानून के अंतरगत यह कैसे संभव होगा।


    ईरान ने दिया जवाब

    एक दिन पहले ही डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि होर्मुज पर उनका पूरा नियंत्रण स्थापित हो गया है। उन्होंने अमेरिकी नाकेबंदी को स्टील की दीवार बताया था। वहीं ईरान के उप विदेश मंत्री काजिम घारिबाबादी ने कहा था कि होर्मुज ईरान के ही नियंत्रण में था और आगे भी रहेगा। उन्होंने कहा कि ईरान ही फैसला लेगा कि होर्मुज को कब खोला जाएगा। इसके अलावा जब तक अमेरिका अपनी हार नहीं मान लेता है, होर्मुज में नाकेबंदी जारी रहेगी।

    उन्होंने कहा, सबको वास्तविकता स्वीकार कर लेनी चाहिए। अमेरिका को करारी हार मिली है। होर्मुज हमेशा से ईरानियों का ही था और ईरान का ही रहेगा। ईरान के आदेश पर ही होर्मुज खुलेगा या बंद होगा। अगर इस वास्तविकता को आप नहीं स्वीकार करते तो फिर आप भ्रम में जी रहे हैं। वॉशिंगटन और तेहरान के बीच इस तनाव को लेकर इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की परेशानी बढ़ गई है। डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि नाकेबंदी का मतलब है कि बिना उनकी इजाजत के एक भी जहाज नहीं गुजर सकता।


    विमान वाहक पोतों में पुरानी तकनीक पर क्यों जोर दे रहे ट्रंप

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नौसेना को अपने भावी विमान वाहक जंगी पोतों से अत्याधुनिक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रणाली को हटाकर पुरानी स्टीम (भाप) आधारित कैटापुल्ट तकनीक पर लौटने का निर्देश दिया है। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों और अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस फैसले से जहाजों की निर्माण लागत घटने के बजाय काफी बढ़ सकती है।

    यह आदेश वर्तमान में निर्माणाधीन ‘डोरिस मिलर’ सहित भविष्य के फोर्ड-क्लास विमान वाहकों पर लागू होगा। ट्रंप चाहते हैं कि इन जहाजों में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एयरक्राफ्ट लॉन्च सिस्टम और एडवांस वेपन्स एलिवेटर्स की जगह स्टीम-संचालित कैटापुल्ट और हाइड्रोलिक सिस्टम लगाये जायें। फैसले की व्याख्या करते हुए एक ज्ञापन में ट्रंप ने कहा कि युद्ध मंत्रालय को नौसैनिक बल संरचना के विस्तार के साथ समुद्री औद्योगिक आधार में क्षमता और प्रतिस्पर्धा दोनों को बहाल करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह दृष्टिकोण स्थापित और भरोसेमंद तकनीक पर निर्भर करता है और घरेलू पोत निर्माण उद्योग में निवेश को बढ़ावा देता है।

    गौरतलब है कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रणाली के खिलाफ ट्रंप का रुख नया नहीं है। अपने पहले कार्यकाल से ही वे अमेरिकी नौसेना के सबसे बड़े विमान वाहक ‘यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड’ में इस्तेमाल हो रहे इस सिस्टम की आलोचना करते रहे हैं और इसे अत्यधिक जटिल व अत्यधिक महंगा बताते आए हैं। हालांकि, रक्षा उद्योग इस फैसले से असहमत नजर आ रहा है। ‘डोरिस मिलर’ के लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रणाली के निर्माण का 1.2 अरब डॉलर का ठेका रखने वाली कैलिफोर्निया की कंपनी ‘जनरल एटॉमिक्स’ ने इसका कड़ा विरोध किया है। कंपनी ने कहा कि निर्माण कार्य लगभग आधा पूरा हो चुका है और इस मोड़ पर दिशा बदलने से लागत, समय-सारणी और एकीकरण में गंभीर समस्याएं पैदा होंगी, जिससे अमेरिका की तकनीकी श्रेष्ठता पर भी असर पड़ सकता है।

  • कैरोलीन लेविट छोड़ेंगी व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी का पद, ट्रंप ने किया ऐलान

    कैरोलीन लेविट छोड़ेंगी व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी का पद, ट्रंप ने किया ऐलान


    वॉशिंगटन। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट अगस्त के अंत में अपने पद से इस्तीफा देंगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को सोशल मीडिया के जरिए उनके फैसले की जानकारी दी। ट्रंप के मुताबिक, लेविट परिवार को ज्यादा समय देने के लिए यह जिम्मेदारी छोड़ रही हैं। हालांकि, वह रिपब्लिकन पार्टी में उनकी शीर्ष सलाहकार के तौर पर काम करती रहेंगी।

    लेविट ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर अपने फैसले को ‘कड़वा-मीठा’ अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि पिछले करीब डेढ़ साल तक व्हाइट हाउस प्रेस सचिव के तौर पर काम करना उनके जीवन के सबसे बड़े सम्मान और रोमांच में से एक रहा है।

    ‘बच्चों को वह समय नहीं दे पा रही थी, जिसके वे हकदार हैं’

    लेविट ने अपनी बेटी के जन्म के बाद दोबारा काम पर लौटने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक बच्चे का स्वागत करने के साथ दुनिया के सबसे demanding पदों में से एक की जिम्मेदारी संभालना सम्मानजनक होने के साथ बेहद चुनौतीपूर्ण भी था।

    उन्होंने कहा कि व्हाइट हाउस प्रेस सचिव की जिम्मेदारियों के लिए लगातार समय, ऊर्जा और ध्यान देना पड़ता है। ऐसे में वह अपने दोनों बच्चों को वह समय और ध्यान नहीं दे पा रही थीं, जिसके वे हकदार हैं। इसी वजह से उन्होंने यह कठिन फैसला लिया।

    ट्रंप बोले- भरोसेमंद सहयोगियों में से एक

    राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने Truth Social अकाउंट पर लेविट के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कैरोलीन उनकी सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में से एक रही हैं और परिवार को प्राथमिकता देने के उनके फैसले का वह पूरी तरह सम्मान करते हैं।

    ट्रंप ने 2018 से लेकर 2024 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान तक लेविट के योगदान की तारीफ की और उन्हें इतिहास की बेहतरीन प्रेस सचिवों में से एक बताया।

    व्हाइट हाउस छोड़ने के बाद भी ट्रंप की सलाहकार रहेंगी

    ट्रंप ने कहा कि व्हाइट हाउस छोड़ने के बाद भी लेविट उनकी शीर्ष बाहरी सलाहकार बनी रहेंगी। आगामी मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की जीत के लिए वह पार्टी के भीतर प्रभावशाली भूमिका निभाएंगी।

    लेविट ने भी कहा कि डेमोक्रेटिक पार्टी के खिलाफ उनकी राजनीतिक लड़ाई एक नए चरण में प्रवेश कर रही है, लेकिन यह खत्म नहीं हुई है।

    सबसे कम उम्र की व्हाइट हाउस प्रेस सचिव बनी थीं

    कैरोलीन लेविट 2024 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान में ट्रंप के साथ जुड़ी थीं। चुनाव जीतने के बाद उन्होंने ट्रांजिशन टीम की प्रवक्ता के तौर पर काम किया। इसके बाद ट्रंप ने उन्हें व्हाइट हाउस प्रेस सचिव नियुक्त किया।

    इस नियुक्ति के साथ लेविट इस पद पर पहुंचने वाली सबसे कम उम्र की व्यक्ति बनी थीं। उन्होंने अपनी भूमिका के दौरान पति, परिवार, चीफ ऑफ स्टाफ सूसी विल्स और पूरे ट्रंप परिवार का समर्थन के लिए आभार जताया।

  • अमेरिका ईरान से क्यों मांग रहा मुआवजा? ट्रंप ने रखी लंबी सूची, शांति वार्ता पर भी डाला नया दबाव

    अमेरिका ईरान से क्यों मांग रहा मुआवजा? ट्रंप ने रखी लंबी सूची, शांति वार्ता पर भी डाला नया दबाव


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब मुआवजे का मुद्दा उठाकर विवाद को एक नया मोड़ दे दिया है। ट्रंप ने कहा है कि यदि ईरान पिछले कुछ महीनों में हुए नुकसान के लिए मुआवजे की मांग कर सकता है तो अमेरिका भी उससे मुआवजा मांग सकता है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए साफ संकेत दिया कि भविष्य में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली बातचीत में यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया जाएगा। उनके इस रुख से दोनों देशों के बीच पहले से जारी तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    ट्रंप ने अपनी पोस्ट में कहा कि उन्हें यह विचार दिलचस्प लगा कि ईरान हालिया संघर्ष में हुए नुकसान की भरपाई की मांग कर रहा है। इसी आधार पर उन्होंने अमेरिका की ओर से भी ईरान से मुआवजा मांगने की बात कही। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि ईरान से जुड़े संघर्षों में कई अमेरिकी नागरिकों और सैन्यकर्मियों की जान गई है जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए हैं। ट्रंप का कहना है कि ऐसे पीड़ित परिवारों को मुआवजा मिलना चाहिए।

    अपने बयान में ट्रंप ने पुराने हमलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने यमन के बंदरगाह पर अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत यूएसएस कोल पर हुए घातक हमले का हवाला दिया। अक्टूबर 2000 में हुए इस हमले में 17 अमेरिकी नाविकों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे। इस हमले की जिम्मेदारी अलकायदा पर डाली गई थी। ट्रंप ने इसके अलावा जनरल कासिम सुलेमानी से जुड़े घटनाक्रम और दूसरे संघर्षों में मारे गए लोगों का भी जिक्र किया।

    ट्रंप ने कहा कि पिछले कई दशकों के दौरान विरोध प्रदर्शनों और विभिन्न संघर्षों में मारे गए लोगों के परिवारों को भी मुआवजे की सूची में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने पिछले पांच महीनों में मारे गए हजारों लोगों के परिजनों के लिए भी नुकसान की भरपाई की बात कही। हालांकि इन दावों और मुआवजे की संभावित प्रक्रिया को लेकर अभी विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उन्होंने अपने प्रतिनिधियों को इस मुद्दे को भविष्य की बातचीत में शामिल करने के निर्देश दे दिए हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने और संभावित समझौते को लेकर बातचीत की कोशिशें चल रही हैं। ट्रंप ने इससे पहले संकेत दिया था कि वह सैन्य कार्रवाई बढ़ाने के बजाय ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखने को प्राथमिकता दे सकते हैं।

    दूसरी ओर ईरान भी अमेरिका के सामने अपनी कई शर्तें रख रहा है। ईरान की ओर से खाड़ी क्षेत्र में जारी नाकाबंदी हटाने के साथ युद्ध के दौरान हुए नुकसान की भरपाई आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और विदेशों में फंसी संपत्तियों को जारी करने जैसी मांगें उठाई गई हैं। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट रखा है और अमेरिका से क्षेत्रीय मामलों में हस्तक्षेप कम करने की मांग की है।

    ट्रंप ने यह भी संकेत दिया है कि अमेरिका फिलहाल ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ने का इंतजार कर रहा है। उनका मानना है कि महंगाई और कमजोर होती आर्थिक स्थिति ईरानी नेतृत्व को समझौते की दिशा में आगे बढ़ने के लिए मजबूर कर सकती है। ऐसे में दोनों देशों के बीच बातचीत भले ही जारी रहने के संकेत दे रही हो लेकिन मुआवजे युद्ध के नुकसान और होर्मुज जैसे मुद्दों ने समझौते की राह को और मुश्किल बना दिया है। आने वाले दिनों में ट्रंप का यह नया रुख अमेरिका ईरान संबंधों और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी असर डाल सकता है।

  • ट्रंप की नई डिमांड से मचा तेल बाजार में हड़कंप, क्रूड के दाम में अचानक जोरदार तेजी

    ट्रंप की नई डिमांड से मचा तेल बाजार में हड़कंप, क्रूड के दाम में अचानक जोरदार तेजी


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के सामने रखी गई नई मांग के बाद सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेज उछाल देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 5 फीसदी की तेजी के साथ 87 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। वहीं अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 4.50 फीसदी से ज्यादा चढ़कर करीब 82 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता नजर आया। कच्चे तेल के साथ प्राकृतिक गैस की कीमतों में भी तेजी दर्ज की गई। इस अचानक बढ़ी कीमत ने दुनियाभर के बाजारों में एक बार फिर महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

    दरअसल अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ समय से बातचीत और तनाव दोनों का दौर जारी है। युद्ध भले ही फिलहाल थमा हुआ माना जा रहा हो लेकिन दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी है। इसी बीच ट्रंप ने ईरान के सामने एक नई मांग रख दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान से उन लोगों के लिए मुआवजे की मांग की है जिन्होंने ईरान से जुड़े संघर्षों में अपनी जान गंवाई है या गंभीर रूप से घायल हुए हैं। ट्रंप का कहना है कि भविष्य में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली बातचीत में इस मुद्दे को भी शामिल किया जाएगा।

    ट्रंप की इस मांग ने बाजार की चिंताओं को बढ़ा दिया है। निवेशकों को आशंका है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव दोबारा बढ़ सकता है। यही वजह है कि कच्चे तेल की कीमतों पर इसका तत्काल असर देखने को मिला। तेल बाजार में सबसे ज्यादा चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और दुनिया की कुल तेल जरूरत का करीब 20 फीसदी हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव बढ़ने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा पैदा हो सकता है।

    ईरान और अमेरिका के बीच विवाद का असर केवल तेल बाजार तक सीमित नहीं रहता। कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी होने पर पेट्रोल डीजल परिवहन और औद्योगिक उत्पादन की लागत बढ़ सकती है। इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ने की आशंका रहती है। तेल महंगा होने पर विमानन से लेकर माल ढुलाई तक कई क्षेत्रों का खर्च बढ़ सकता है और इसका दबाव आम उपभोक्ताओं पर भी दिखाई दे सकता है।

    मध्य पूर्व में तनाव के बीच निवेशक लगातार अमेरिका और ईरान से आने वाले बयानों और घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। यदि दोनों देशों के बीच बातचीत का रास्ता खुलता है और तनाव कम होता है तो कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है। लेकिन अगर टकराव दोबारा बढ़ता है या होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति को लेकर कोई गंभीर समस्या सामने आती है तो कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।

    फिलहाल ट्रंप की नई मांग ने तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत किस दिशा में जाती है और होर्मुज क्षेत्र की स्थिति कैसी रहती है इस पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। यही घटनाक्रम तय करेगा कि कच्चे तेल की कीमतों में मौजूदा तेजी आगे जारी रहती है या बाजार को राहत मिलती है।

  • अमेरिका-ईरान के बीच फिर गहराया तनाव, नए सैन्य हमले के संकेत, व्हाइट हाउस ने तेहरान को दी चेतावनी

    अमेरिका-ईरान के बीच फिर गहराया तनाव, नए सैन्य हमले के संकेत, व्हाइट हाउस ने तेहरान को दी चेतावनी


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव गहराता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि ईरान के खिलाफ नए सैन्य हमले किए जा सकते हैं। व्हाइट हाउस का आरोप है कि तेहरान ने युद्धविराम समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया और क्षेत्र में आक्रामक गतिविधियां जारी रखीं।

    व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि अमेरिका चाहता है कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा पूरी तरह खोले और पिछले महीने हुए सीजफायर समझौते का सम्मान करे। उन्होंने आरोप लगाया कि समझौते पर हस्ताक्षर के बावजूद ईरान ने उस पर अमल नहीं किया, व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाया और अमेरिकी सैनिकों की जान ली। उनके अनुसार, ऐसे कदम आतंकवादी गतिविधियों जैसे हैं और अमेरिका इसका जवाब देगा।

    हालांकि बीती रात ईरान पर कोई अमेरिकी हमला नहीं हुआ, लेकिन ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में दो और तेल टैंकरों को निशाना बनाया। वहीं कुवैत ने भी अपने हवाई क्षेत्र में घुसे ड्रोन को मार गिराने की जानकारी दी।

    ‘ईरान को कीमत चुकानी होगी’
    कैरोलिन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ऐसी गतिविधियों को नजरअंदाज नहीं करेंगे। उनका कहना था कि जब तक ईरान अमेरिका की शर्तों के अनुसार बातचीत के लिए तैयार नहीं होता, तब तक उसे अपने कदमों की कीमत चुकानी पड़ेगी।

    ट्रंप बोले- जोरदार कार्रवाई करेंगे
    मैरीलैंड स्थित कैंप डेविड में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने भी ईरान पर सख्त कार्रवाई के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर “बहुत जोरदार हमला” करेगा और अंततः ईरान को पीछे हटना पड़ेगा। ट्रंप ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल जीत हासिल करना है।

    भारत-पाकिस्तान का भी किया जिक्र
    बातचीत के दौरान ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान तनाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने एक बार फिर दावा किया कि उन्होंने दोनों देशों के बीच संघर्ष रुकवाने में भूमिका निभाई और टैरिफ का हवाला देकर संभावित परमाणु टकराव टालने की बात कही। हालांकि भारत सरकार पहले भी ट्रंप के इस दावे को स्पष्ट रूप से खारिज कर चुकी है।