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  • अमेरिका-ईरान के बीच फिर गहराया तनाव, नए सैन्य हमले के संकेत, व्हाइट हाउस ने तेहरान को दी चेतावनी

    अमेरिका-ईरान के बीच फिर गहराया तनाव, नए सैन्य हमले के संकेत, व्हाइट हाउस ने तेहरान को दी चेतावनी


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव गहराता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि ईरान के खिलाफ नए सैन्य हमले किए जा सकते हैं। व्हाइट हाउस का आरोप है कि तेहरान ने युद्धविराम समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया और क्षेत्र में आक्रामक गतिविधियां जारी रखीं।

    व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि अमेरिका चाहता है कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा पूरी तरह खोले और पिछले महीने हुए सीजफायर समझौते का सम्मान करे। उन्होंने आरोप लगाया कि समझौते पर हस्ताक्षर के बावजूद ईरान ने उस पर अमल नहीं किया, व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाया और अमेरिकी सैनिकों की जान ली। उनके अनुसार, ऐसे कदम आतंकवादी गतिविधियों जैसे हैं और अमेरिका इसका जवाब देगा।

    हालांकि बीती रात ईरान पर कोई अमेरिकी हमला नहीं हुआ, लेकिन ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में दो और तेल टैंकरों को निशाना बनाया। वहीं कुवैत ने भी अपने हवाई क्षेत्र में घुसे ड्रोन को मार गिराने की जानकारी दी।

    ‘ईरान को कीमत चुकानी होगी’
    कैरोलिन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ऐसी गतिविधियों को नजरअंदाज नहीं करेंगे। उनका कहना था कि जब तक ईरान अमेरिका की शर्तों के अनुसार बातचीत के लिए तैयार नहीं होता, तब तक उसे अपने कदमों की कीमत चुकानी पड़ेगी।

    ट्रंप बोले- जोरदार कार्रवाई करेंगे
    मैरीलैंड स्थित कैंप डेविड में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने भी ईरान पर सख्त कार्रवाई के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर “बहुत जोरदार हमला” करेगा और अंततः ईरान को पीछे हटना पड़ेगा। ट्रंप ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल जीत हासिल करना है।

    भारत-पाकिस्तान का भी किया जिक्र
    बातचीत के दौरान ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान तनाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने एक बार फिर दावा किया कि उन्होंने दोनों देशों के बीच संघर्ष रुकवाने में भूमिका निभाई और टैरिफ का हवाला देकर संभावित परमाणु टकराव टालने की बात कही। हालांकि भारत सरकार पहले भी ट्रंप के इस दावे को स्पष्ट रूप से खारिज कर चुकी है।

  • ट्रंप का दावा: गाजा से चरणबद्ध तरीके से हटेगी इजरायली सेना, हमास के निरस्त्रीकरण पर हुआ समझौता

    ट्रंप का दावा: गाजा से चरणबद्ध तरीके से हटेगी इजरायली सेना, हमास के निरस्त्रीकरण पर हुआ समझौता


    नई दिल्ली । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा संघर्ष को लेकर बड़ा दावा करते हुए कहा है कि ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की मध्यस्थता में हमास और गाजा में सक्रिय अन्य सशस्त्र संगठनों के पूर्ण निरस्त्रीकरण पर एक “ऐतिहासिक समझौता” हुआ है। ट्रंप के अनुसार, इस प्रक्रिया के पूरा होने के साथ ही इजरायल अपनी सेना को गाजा से चरणबद्ध तरीके से वापस बुलाएगा।

    निरस्त्रीकरण के साथ होगी सेना की वापसी
    ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि जैसे-जैसे हमास और अन्य हथियारबंद संगठनों का निरस्त्रीकरण पूरा होगा, इजरायली सेना गाजा से पीछे हटेगी। इसके बाद गाजा की सुरक्षा की जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय स्टेबलाइजेशन फोर्स और नई फिलिस्तीनी पुलिस संभालेगी। उनका कहना है कि इससे इजरायल की सुरक्षा मजबूत होगी और गाजा का इस्तेमाल भविष्य में किसी आतंकी हमले के लिए नहीं हो सकेगा।

    नई फिलिस्तीनी सरकार बनाने की योजना
    ट्रंप के मुताबिक, समझौते के तहत गाजा में नई फिलिस्तीनी सरकार का गठन किया जाएगा, जो ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के साथ मिलकर प्रशासन, पुनर्निर्माण और सामान्य जनजीवन बहाल करने का काम करेगी। उन्होंने इसे अपने 20-सूत्रीय शांति योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया और कहा कि इसका उद्देश्य क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करना है।

    मध्यस्थ देशों की सराहना
    अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस समझौते में मिस्र, कतर और तुर्किये की मध्यस्थता की सराहना की। हालांकि, ट्रंप के दावों पर हमास की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    हिंसा अब भी जारी
    समझौते के दावे के बीच गाजा में हिंसा थमने के संकेत नहीं मिले हैं। फिलिस्तीनी स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, गुरुवार को इजरायली हवाई हमलों में कम से कम छह लोगों की मौत हुई, जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं।

    व्हाइट हाउस ने भी किया समर्थन
    व्हाइट हाउस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि ‘बोर्ड ऑफ पीस’ ने गाजा में हमास और अन्य सशस्त्र समूहों के पूर्ण निरस्त्रीकरण पर ऐतिहासिक समझौता कराया है। इसे क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।

    क्या है ‘बोर्ड ऑफ पीस’?
    ट्रंप के अनुसार, ‘बोर्ड ऑफ पीस’ वर्ष 2026 में गठित एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जिसे गाजा में युद्ध के बाद पुनर्निर्माण, प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ट्रंप इस संस्था के संस्थापक अध्यक्ष हैं। उनका दावा है कि यह पहल गाजा में नई शासन व्यवस्था स्थापित करने और भविष्य में 7 अक्टूबर जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की दिशा में अहम साबित होगी।

  • जॉर्डन मिसाइल हमले के बाद अमेरिका का पलटवार, ईरान पर फिर शुरू हुई एयरस्ट्राइक

    जॉर्डन मिसाइल हमले के बाद अमेरिका का पलटवार, ईरान पर फिर शुरू हुई एयरस्ट्राइक


    नई दिल्ली। जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे को निशाना बनाने की कथित कोशिश के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ एक बार फिर हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, गुरुवार रात ईरान के भीतर कई सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की गई, जिससे कुछ समय के लिए रुका सैन्य अभियान दोबारा शुरू हो गया।

    रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने पुष्टि की कि ईरान के भीतर कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। इससे पहले इस सप्ताह ईरान की ओर से जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने का दावा किया गया था।

    मिसाइल हमले के जवाब में सैन्य कार्रवाई
    अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ईरान से दागी गई सभी मिसाइलों को बीच रास्ते में ही निष्क्रिय कर दिया गया और किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ। अमेरिकी सेना ने इसे मध्य-पूर्व में तैनात अपने सैनिकों पर हमला करने की कोशिश बताया। CENTCOM ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि गुरुवार रात (अमेरिकी समयानुसार) ईरान के खिलाफ जवाबी हवाई अभियान शुरू किया गया। सेना का कहना है कि यह कार्रवाई अमेरिकी ठिकानों पर कथित मिसाइल हमले के जवाब में की गई है।

    ट्रंप ने दी थी कड़ी चेतावनी
    एयरस्ट्राइक शुरू होने से कुछ घंटे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया था कि अमेरिकी सैनिकों पर किसी भी हमले का कड़ा जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा था कि यदि अमेरिकी हितों को निशाना बनाया गया तो जिम्मेदार पक्ष को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

    इराक में भी संयुक्त अभियान
    इस बीच अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के खिलाफ संयुक्त हवाई अभियान भी चलाया। पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF) के अनुसार, इन हमलों में कम से कम 20 लोगों की मौत हुई है।

    अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना है कि कार्रवाई के दौरान पूर्वी इराक में मिलिशिया के हथियार भंडार और लॉजिस्टिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिका का आरोप है कि पिछले तीन दिनों में उसके सैन्य ठिकानों और सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर 30 से अधिक ड्रोन हमलों के पीछे ईरान समर्थित इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का हाथ है।

    कूटनीतिक प्रयासों के बीच बढ़ा तनाव
    हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थों के जरिए अप्रत्यक्ष बातचीत की खबरें भी सामने आई थीं। इसी वजह से अमेरिका ने पिछले सप्ताह अपने हवाई अभियान को अस्थायी रूप से रोक दिया था, ताकि कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं का आकलन किया जा सके। हालांकि, जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर कथित मिसाइल हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव फिर बढ़ गया और अमेरिका ने दोबारा सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी।

    नेतन्याहू से मुलाकात के बाद तेज हुई रणनीति
    अमेरिका की ताजा कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में व्हाइट हाउस में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं के बीच ईरान को लेकर व्यापक चर्चा हुई थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बैठक में कूटनीति, आर्थिक प्रतिबंध और सैन्य विकल्पों सहित कई संभावित रणनीतियों पर विचार किया गया।

  • परमाणु शक्ति में अमेरिका की बड़ी छलांग ट्रंप बोले दुनिया को अगली पीढ़ी की न्यूक्लियर तकनीक में करेंगे लीड

    परमाणु शक्ति में अमेरिका की बड़ी छलांग ट्रंप बोले दुनिया को अगली पीढ़ी की न्यूक्लियर तकनीक में करेंगे लीड


    नई दिल्ली। अमेरिका ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक नई और महत्वाकांक्षी शुरुआत का ऐलान किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि निजी निवेश से विकसित चार एडवांस्ड न्यूक्लियर रिएक्टर सरकार के सहयोग से संचालित कार्यक्रम के तहत महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। ट्रंप ने इसे केवल वैज्ञानिक सफलता नहीं बल्कि अमेरिकी परमाणु उद्योग के पुनर्जागरण की शुरुआत बताया और दावा किया कि देश अब अगली पीढ़ी की न्यूक्लियर तकनीक में पूरी दुनिया का नेतृत्व करने के लिए तैयार है।

    व्हाइट हाउस में आयोजित विशेष कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारियों और न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी कंपनियों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में ट्रंप ने कहा कि कई दशकों की धीमी प्रगति के बाद अमेरिका अब फिर से परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका केवल अपने उद्योग का पुनर्निर्माण नहीं कर रहा बल्कि भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था की दिशा भी तय कर रहा है। उनके अनुसार देश में इनोवेशन और तकनीकी विकास की नई लहर शुरू हो चुकी है।

    राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि पिछले वर्ष जारी किए गए चार कार्यकारी आदेशों का उद्देश्य नागरिक परमाणु क्षेत्र को नई गति देना था और सरकार ने तय लक्ष्य से भी आगे बढ़कर उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने ऊर्जा सचिव क्रिस राइट को एडवांस्ड रिएक्टरों के लिए विशेष पायलट कार्यक्रम शुरू करने और आधुनिक तकनीक वाले रिएक्टरों को सुरक्षित रूप से संचालित करने का निर्देश दिया था। ट्रंप ने कहा कि इतनी कम अवधि में जो परिणाम मिले हैं उन्हें किसी चमत्कार से कम नहीं कहा जा सकता।

    उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका में चार दशक से अधिक समय बाद पहली बार निजी निवेश से विकसित एडवांस्ड न्यूक्लियर रिएक्टर इस स्तर तक पहुंचे हैं। ट्रंप ने पुरानी नियामक प्रक्रिया की आलोचना करते हुए कहा कि पहले किसी रिएक्टर डिजाइन को मंजूरी मिलने में कई वर्ष लग जाते थे जिससे परियोजनाएं वर्षों तक अटकी रहती थीं। उनका कहना था कि नई नीति के कारण यह प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और प्रभावी हुई है।

    ऑफिस ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी पॉलिसी के निदेशक माइकल क्रैट्सियोस ने कहा कि अमेरिका ने केवल पुराना रिकॉर्ड नहीं तोड़ा बल्कि एक साथ चार परियोजनाओं को आगे बढ़ाकर नया इतिहास रच दिया है। उन्होंने बताया कि निजी निवेश से विकसित किसी नए रिएक्टर डिजाइन ने अंतिम बार 1974 में नियंत्रित परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया हासिल की थी और अब 50 वर्ष से अधिक समय बाद अमेरिका ने इस उपलब्धि को नई ऊंचाई पर पहुंचाया है। उनके अनुसार यह संकेत है कि अमेरिका एक बार फिर पारंपरिक और अत्याधुनिक दोनों तरह की परमाणु तकनीक में वैश्विक नेतृत्व की ओर लौट रहा है।

    कार्यक्रम में मौजूद न्यूक्लियर कंपनियों के अधिकारियों ने भी ट्रंप प्रशासन की नीतियों की सराहना की। एंटारेस न्यूक्लियर के प्रतिनिधि ने बताया कि उनकी कंपनी के रिएक्टर भविष्य में अमेरिकी सैन्य ठिकानों अंतरिक्ष अभियानों और उन्नत रक्षा प्रणालियों को विश्वसनीय ऊर्जा उपलब्ध कराने में सक्षम होंगे। कंपनी ने 2028 से पहले सैन्य ठिकानों पर अपने रिएक्टर तैनात करने की योजना भी साझा की।

    एक अन्य कंपनी के अधिकारी ने कहा कि अमेरिका अब केवल योजनाओं और प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं है बल्कि वास्तविक निर्माण और उत्पादन पर तेजी से काम कर रहा है। एक तीसरे अधिकारी ने इसे परमाणु ऊर्जा के इतिहास का निर्णायक मोड़ बताते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में यही समय नई ऊर्जा क्रांति की शुरुआत के रूप में याद किया जाएगा। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी का रिएक्टर 4 जुलाई की रात पहली बार नियंत्रित परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया तक पहुंचा और अब कंपनी डेटा सेंटरों के लिए अत्याधुनिक न्यूक्लियर ऊर्जा समाधान विकसित करने पर काम कर रही है। इसके लिए इस वर्ष एक बिलियन डॉलर का निवेश जुटाने और विशाल विनिर्माण इकाई स्थापित करने की योजना बनाई गई है।

    ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने कहा कि सरकार की नई ऊर्जा रणनीति के कारण अमेरिका आज सुरक्षित और प्रतिस्पर्धी ऊर्जा व्यवस्था की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वहीं आंतरिक मामलों के सचिव डग बर्गम ने कहा कि सरकारी सब्सिडी के बजाय निजी निवेश और नवाचार पर आधारित मॉडल ही भविष्य की ऊर्जा अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत बनेगा। उनका कहना था कि नियमों को सरल बनाकर और उद्यमियों को अवसर देकर अमेरिका एक बार फिर दुनिया की अग्रणी ऊर्जा शक्ति बनने की दिशा में बढ़ रहा है।

  • व्हाइट हाउस डिनर में प्रेस की आजादी पर जोर ट्रंप से कहा लोकतंत्र बचाना है तो सवालों से नहीं भागिए

    व्हाइट हाउस डिनर में प्रेस की आजादी पर जोर ट्रंप से कहा लोकतंत्र बचाना है तो सवालों से नहीं भागिए


    नई दिल्ली। व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन के वार्षिक डिनर में इस बार सबसे प्रमुख मुद्दा प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतंत्र की मजबूती रहा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी में एसोसिएशन के नेताओं ने स्पष्ट संदेश दिया कि लोकतंत्र तभी मजबूत रह सकता है जब मीडिया बिना किसी डर और दबाव के अपना काम करता रहे। कार्यक्रम के दौरान कहा गया कि पत्रकारों से असहमति या उनकी आलोचना लोकतांत्रिक व्यवस्था का सामान्य हिस्सा है लेकिन स्वतंत्र प्रेस को कमजोर करने का कोई भी प्रयास संविधान की भावना और लोकतांत्रिक व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।

    एसोसिएशन की निवर्तमान अध्यक्ष वेइजिया जियांग ने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिकी इतिहास में राष्ट्रपति और पत्रकारों के रिश्ते हमेशा आसान नहीं रहे हैं। कई बार तीखी बहस और असहमति देखने को मिली है लेकिन इन सबके बावजूद दोनों की जिम्मेदारी जनता के हित में काम करना है। उन्होंने कहा कि पत्रकार सवाल पूछते हैं और सरकार जवाब देती है। इसी संवाद से लोकतंत्र मजबूत होता है और जनता तक सही जानकारी पहुंचती है। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप को संबोधित करते हुए कहा कि सवाल पूछना और जवाब देना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा है तथा इसे किसी टकराव के रूप में नहीं बल्कि जवाबदेही के रूप में देखा जाना चाहिए।

    जियांग ने राष्ट्रपति ट्रंप के कारोबारी अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि सौदे की भाषा में बात की जाए तो फर्स्ट अमेंडमेंट कोई ऐसा विषय नहीं है जिस पर समझौता किया जा सके। यह अमेरिकी लोकतंत्र की स्थायी और संवैधानिक व्यवस्था है जिसे किसी भी परिस्थिति में कमजोर नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि प्रेस की आलोचना और प्रेस को कमजोर करने की कोशिश के बीच बहुत बड़ा अंतर है। आलोचना व्यवस्था को बेहतर बनाती है जबकि स्वतंत्र मीडिया को कमजोर करने की कोशिश लोकतंत्र की बुनियाद पर चोट करती है।

    इस वर्ष का समारोह विशेष महत्व रखता था क्योंकि निर्धारित समय पर आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम अप्रैल में राष्ट्रपति ट्रंप पर हुए हमले के बाद स्थगित कर दिया गया था। अपने संबोधन में जियांग ने उस घटना को याद करते हुए कहा कि हिंसा ने पत्रकारों का मनोबल तोड़ने के बजाय उनकी जिम्मेदारी और संकल्प को और मजबूत किया। उन्होंने बताया कि संकट की उस घड़ी में भी रिपोर्टर फोटोग्राफर और टीवी क्रू लगातार घटनास्थल से तथ्य जुटाने और लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने में लगे रहे। उनका कहना था कि यही स्वतंत्र पत्रकारिता की असली पहचान है।

    उन्होंने उस कठिन समय के अनुभव साझा करते हुए बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी टीम लगातार हालात की समीक्षा कर रही थी और जनता तक सही सूचना पहुंचाने के सर्वोत्तम तरीके पर चर्चा कर रही थी। जियांग ने कहा कि यही जिम्मेदारी पत्रकारों की भी होती है और यही कारण है कि सरकार और मीडिया दोनों का अंतिम उद्देश्य नागरिकों तक विश्वसनीय और सटीक जानकारी पहुंचाना होना चाहिए।

    कार्यक्रम में एसोसिएशन की नवनिर्वाचित अध्यक्ष जैकी हेनरिक ने भी स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता के प्रति संगठन की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि संस्था बिना किसी डर और पक्षपात के तथ्यों की खोज और सत्य को सामने लाने का कार्य जारी रखेगी। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल होने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह परंपरा लोकतंत्र में स्वतंत्र मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका को सम्मान देने का अवसर है।

    समारोह के दौरान अप्रैल में हुए हमले में बहादुरी दिखाने वाले सीक्रेट सर्विस अधिकारी विक्टर गोंजालेज को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही उत्कृष्ट रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों फोटोग्राफरों और मीडिया संस्थानों को भी सम्मान प्रदान किया गया। पूरे कार्यक्रम का केंद्रीय संदेश यही रहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए स्वतंत्र प्रेस केवल एक अधिकार नहीं बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला है।

  • गोलीबारी के बाद पहली बार कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर में पहुंचे ट्रंप, बोले- राजनीतिक हिंसा के आगे कभी नहीं झुकेंगे

    गोलीबारी के बाद पहली बार कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर में पहुंचे ट्रंप, बोले- राजनीतिक हिंसा के आगे कभी नहीं झुकेंगे


    वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर में पहली पूर्ण उपस्थिति दर्ज कराते हुए राजनीतिक हिंसा के खिलाफ कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत संवाद और बहस है, न कि हिंसा। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वह अगले वर्ष भी इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम में शामिल होंगे और किसी भी प्रकार की राजनीतिक हिंसा उन्हें या लोकतांत्रिक संस्थाओं को डरा नहीं सकती।

    ट्रंप का यह संबोधन ऐसे समय आया, जब इसी वर्ष अप्रैल में आयोजित होने वाले व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन (WHCA) डिनर के दौरान गोलीबारी की घटना हुई थी। हमले के बाद कार्यक्रम को स्थगित करना पड़ा था। राष्ट्रपति ने उस घटना को याद करते हुए कहा कि यह केवल किसी व्यक्ति पर नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और स्वतंत्र प्रेस पर हमला था।

    उन्होंने समारोह में मौजूद सैकड़ों पत्रकारों, प्रशासनिक अधिकारियों और अतिथियों से कहा कि राजनीतिक मतभेदों का समाधान कभी भी गोलियों से नहीं हो सकता। उनके शब्दों में, “हम राजनीतिक हिंसा के सामने झुकने वाले नहीं हैं। हम अपने मतभेदों को खुली और मजबूत बहस के जरिए सुलझाते हैं।” उनके इस बयान पर सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

    ट्रंप ने हमले के दौरान घायल हुए सीक्रेट सर्विस अधिकारी विक्टर गोंजालेज की विशेष रूप से सराहना की। उन्होंने बताया कि घायल होने के बावजूद गोंजालेज अस्पताल जाने की बजाय अपनी जिम्मेदारी निभाने पर अड़े रहे। राष्ट्रपति ने सीक्रेट सर्विस, मेट्रोपॉलिटन पुलिस और सभी सुरक्षा एजेंसियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनकी सतर्कता की वजह से बड़ा हादसा टल गया। समारोह में मौजूद लोगों ने भी सुरक्षा अधिकारियों के सम्मान में खड़े होकर तालियां बजाईं।

    अपने भाषण में ट्रंप ने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी स्वीकार किया कि गोलीबारी के बाद उन्हें अपना पहले से तैयार किया गया “ज्यादा आक्रामक” भाषण बदलना पड़ा। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि वह भाषण शायद अब कभी नहीं दिया जाएगा, हालांकि उन्होंने कार्यक्रम के दौरान राजनीतिक विरोधियों और मीडिया पर हल्के-फुल्के व्यंग्य भी किए।

    राष्ट्रपति ने व्हाइट हाउस प्रेस कोर की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि अधिकांश पत्रकार अपना काम पूरी निष्ठा से करते हैं। उन्होंने व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट के बारे में मजाक करते हुए कहा कि उनके पास सबसे कठिन जिम्मेदारियों में से एक है, क्योंकि उन्हें हर दिन पत्रकारों के कठिन सवालों का सामना करना पड़ता है।

    ट्रंप ने व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन की मौजूदा अध्यक्ष वेइजिया जियांग की भी प्रशंसा की और कहा कि कठिन परिस्थितियों में साथ काम करने से दोनों के बीच आपसी सम्मान बढ़ा है। साथ ही उन्होंने नई अध्यक्ष जैकी हेनरिक को शुभकामनाएं देते हुए उन्हें एक बेहद सख्त लेकिन सक्षम पत्रकार बताया।

    कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने भविष्य में व्हाइट हाउस परिसर में बन रहे नए बॉलरूम में कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर आयोजित करने का सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य तय समय से पहले और बजट के भीतर पूरा हो रहा है। अपने संबोधन के अंत में ट्रंप ने अमेरिका के भविष्य को लेकर भरोसा जताते हुए कहा कि देश एक बड़े परिवर्तन के दौर में प्रवेश कर रहा है और यह “अमेरिका का स्वर्ण युग” साबित होगा।

  • टैरिफ को लेकर ट्रंप का पलटवार, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बदली चाल, 19.2 ट्रिलियन डॉलर निवेश का दावा

    टैरिफ को लेकर ट्रंप का पलटवार, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बदली चाल, 19.2 ट्रिलियन डॉलर निवेश का दावा


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपनी टैरिफ नीति का जोरदार बचाव करते हुए दावा किया है कि उनकी सरकार की व्यापारिक रणनीति के कारण अमेरिका में 19.2 ट्रिलियन डॉलर का रिकॉर्ड निवेश आया है। व्हाइट हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि हालिया कानूनी चुनौतियों के बावजूद उनकी सरकार टैरिफ नीति को जारी रखेगी और इसके लिए आवश्यक कानूनी बदलाव भी कर चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद प्रशासन ने अपनी रणनीति बदली है लेकिन आर्थिक एजेंडा पहले की तरह ही मजबूत बना हुआ है।

    ट्रंप ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उनकी सरकार ने टैरिफ लागू करने के लिए दूसरी कानूनी व्यवस्थाओं का सहारा लिया है जिनका इस्तेमाल पहले भी विभिन्न अमेरिकी प्रशासन कर चुके हैं। उनके मुताबिक अदालत ने केवल प्रक्रिया बदलने की बात कही थी और सरकार ने उसी दिशा में कदम उठाया। उन्होंने विश्वास जताया कि नई कानूनी व्यवस्था के तहत लागू किए गए टैरिफ न्यायिक जांच में भी टिकेंगे।

    राष्ट्रपति ने दावा किया कि टैरिफ नीति का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि दुनिया भर की कंपनियां अब अमेरिका में निवेश और उत्पादन बढ़ाने के लिए आगे आ रही हैं। उनके अनुसार देश में 19.2 ट्रिलियन डॉलर का निवेश प्रस्तावित या शुरू हो चुका है जो अमेरिकी इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा निवेश है। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल पर निशाना साधते हुए कहा कि चार वर्षों में निवेश एक ट्रिलियन डॉलर से भी कम रहा जबकि उनकी सरकार ने केवल एक वर्ष में रिकॉर्ड निवेश आकर्षित किया है।

    ट्रंप ने कहा कि यदि टैरिफ लागू नहीं किए गए होते तो अमेरिकी उद्योगों को भारी नुकसान उठाना पड़ता। उनका मानना है कि आयात शुल्क ने विदेशी कंपनियों को अमेरिका में फैक्ट्री लगाने और स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़े हैं बल्कि संघीय राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

    मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप से हाल में शुरू की गई एक व्यापारिक जांच में बाल मजदूरी को आधार बनाए जाने पर भी सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधियों ने दुनिया के कई देशों की समीक्षा की और बाल मजदूरी भी उन कारणों में शामिल थी जिनके आधार पर कुछ व्यापारिक फैसले लिए गए। हालांकि उन्होंने इस विषय पर अधिक विस्तार से टिप्पणी नहीं की।

    राष्ट्रपति ने अपनी आर्थिक नीति को ऊर्जा उत्पादन घरेलू विनिर्माण और औद्योगिक विकास से जोड़ते हुए कहा कि टैरिफ केवल व्यापारिक हथियार नहीं बल्कि अमेरिका को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का माध्यम हैं। उन्होंने दोहराया कि उनकी सरकार का लक्ष्य उत्पादन को अमेरिका वापस लाना और देश की औद्योगिक क्षमता को मजबूत करना है।

    इस बीच ट्रंप की टैरिफ नीति पर दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की नजर बनी हुई है। यूरोपीय संघ चीन और कई एशियाई व्यापारिक साझेदार अमेरिकी व्यापारिक कदमों और उनसे जुड़े कानूनी विवादों पर लगातार नजर रख रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इन टैरिफ नीतियों का असर वैश्विक व्यापार सप्लाई चेन और महंगाई पर भी दिखाई दे सकता है। ऐसे में ट्रंप की बदली हुई कानूनी रणनीति और उनके बड़े आर्थिक दावों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है।

  • ट्रंप का मास्टरप्लान! सऊदी परमाणु समझौते के बदले इजरायल से दोस्ती की शर्त, मध्य पूर्व की राजनीति में हलचल

    ट्रंप का मास्टरप्लान! सऊदी परमाणु समझौते के बदले इजरायल से दोस्ती की शर्त, मध्य पूर्व की राजनीति में हलचल


    नई दिल्ली। अमेरिका ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि सऊदी अरब के साथ प्रस्तावित नागरिक परमाणु समझौता केवल ऊर्जा सहयोग तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि इसके साथ इजरायल के साथ रिश्तों को सामान्य बनाने की बड़ी कूटनीतिक शर्त भी जुड़ी हुई है। व्हाइट हाउस ने संकेत दिए हैं कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्य पूर्व नीति का सबसे अहम उद्देश्य सऊदी अरब को अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल कराना और इजरायल के साथ उसके संबंधों को औपचारिक रूप से सामान्य बनाना है। इस बयान ने एक बार फिर पश्चिम एशिया की बदलती भू-राजनीतिक तस्वीर को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।

    व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने सऊदी नेतृत्व के सामने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि इजरायल के साथ संबंध सामान्य करना उनकी प्राथमिक अपेक्षाओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि यह केवल वर्तमान कार्यकाल की नीति नहीं बल्कि लंबे समय से ट्रंप प्रशासन की रणनीतिक सोच का हिस्सा रही है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि परमाणु समझौता पहले होगा या इजरायल से रिश्तों का सामान्यीकरण लेकिन इतना जरूर कहा कि दोनों मुद्दे एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

    मिलर ने ट्रंप की सऊदी अरब के साथ वर्षों पुरानी कूटनीतिक भागीदारी का जिक्र करते हुए कहा कि 2017 में रियाद में दिए गए ऐतिहासिक भाषण के बाद से ही अमेरिका ने सऊदी अरब को क्षेत्रीय स्थिरता का मजबूत साझेदार बनाने की दिशा में लगातार काम किया है। उनके अनुसार राष्ट्रपति ट्रंप सऊदी नेतृत्व की रणनीतिक सोच और भविष्य की योजनाओं को अच्छी तरह समझते हैं और उन्हें भरोसा है कि आने वाले समय में यह साझेदारी मध्य पूर्व में ऐतिहासिक बदलाव का कारण बनेगी।

    व्हाइट हाउस का मानना है कि यदि सऊदी अरब इजरायल के साथ औपचारिक संबंध स्थापित करता है तो इससे पूरे क्षेत्र में स्थिरता बढ़ेगी और अब्राहम अकॉर्ड्स को नई मजबूती मिलेगी। ट्रंप के पहले कार्यकाल में संयुक्त अरब अमीरात बहरीन मोरक्को और सूडान ने इजरायल के साथ संबंध सामान्य किए थे। अब अमेरिकी प्रशासन चाहता है कि सऊदी अरब भी इस पहल का हिस्सा बने क्योंकि उसे क्षेत्र का सबसे प्रभावशाली अरब देश माना जाता है।

    इस दौरान स्टीफन मिलर ने निकारागुआ की राजनीति पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां की सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है और समाजवादी शासन चुनावी प्रक्रिया का उपयोग सत्ता हासिल करने के बाद राजनीतिक स्वतंत्रताओं को सीमित करने के लिए करता है। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो पहले ही इस मुद्दे पर अमेरिकी नीति स्पष्ट कर चुके हैं।

    मिलर ने यह भी दावा किया कि ट्रंप प्रशासन की व्यापक रणनीति पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिका के प्रभाव को मजबूत करने और सहयोगी देशों के साथ रिश्तों को नई दिशा देने पर केंद्रित है। उनके अनुसार कई देशों की सरकारें अमेरिका की सुरक्षा और समृद्धि आधारित नीति के साथ खड़ी हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब के साथ नागरिक परमाणु समझौते और इजरायल से संबंध सामान्य करने की अमेरिकी कोशिशें आने वाले समय में मध्य पूर्व की राजनीति को नई दिशा दे सकती हैं। यदि यह पहल सफल होती है तो क्षेत्रीय कूटनीति में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

  • EU पर ट्रंप का बड़ा वार, व्यापारिक नीतियों की जांच के आदेश, बोले- 'अमेरिका यूरोप की गुल्लक नहीं'

    EU पर ट्रंप का बड़ा वार, व्यापारिक नीतियों की जांच के आदेश, बोले- 'अमेरिका यूरोप की गुल्लक नहीं'


    वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय संघ (EU) की व्यापारिक नीतियों की औपचारिक जांच शुरू करने का ऐलान किया है। ट्रंप का आरोप है कि यूरोपीय संघ ने गूगल, एप्पल, मेटा और अमेजन जैसी अमेरिकी टेक कंपनियों पर अरबों डॉलर के जुर्माने लगाकर उनके साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया है।

    यह फैसला ऐसे समय आया है, जब एक दिन पहले ही यूरोपीय संघ ने डिजिटल प्रतिस्पर्धा (एंटीट्रस्ट) नियमों के उल्लंघन के मामले में गूगल पर 89 करोड़ यूरो (करीब एक अरब डॉलर) का जुर्माना लगाया था। ईयू का आरोप है कि गूगल ने अपने प्ले स्टोर और सर्च इंजन के जरिए अपनी सेवाओं और ऐप्स को प्राथमिकता देकर निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को प्रभावित किया।

    ‘अमेरिका किसी का गुल्लक नहीं’
    डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जारी एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने पहले भी यूरोपीय संघ को अमेरिकी कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाने को लेकर चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा, “अमेरिका यूरोप की गुल्लक नहीं है। हम अपनी कंपनियों को लूटने नहीं देंगे।”

    ट्रंप ने आरोप लगाया कि यूरोपीय संघ का रवैया “अवैध और अनैतिक” है और इसके लिए उसे बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी कंपनियों से वसूले गए जुर्माने अंततः वापस लिए जाएंगे।

    टैरिफ बढ़ाने के भी दिए संकेत
    अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिए कि उनकी सरकार जल्द ही यूरोपीय संघ से आयात होने वाले उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाने की दिशा में भी कदम उठा सकती है। उनका कहना है कि अमेरिकी कारोबारों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक सभी विकल्पों पर विचार किया जाएगा।

    पहले भी बढ़ाए जा चुके हैं आयात शुल्क
    ट्रंप की यह घोषणा ऐसे समय हुई है, जब व्हाइट हाउस हाल ही में 60 से अधिक देशों से आने वाले आयातित उत्पादों पर दोहरे अंकों वाले नए टैरिफ लागू करने का ऐलान कर चुका है। अमेरिका का आरोप है कि कई देश जबरन श्रम (Forced Labour) से बने उत्पादों पर प्रतिबंधों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं कर रहे हैं।

    ये नए शुल्क पहले से लागू अस्थायी 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ की जगह लेंगे। ट्रंप प्रशासन इन कदमों को ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 के तहत आगे बढ़ा रहा है, जो अमेरिका को किसी देश की कथित अनुचित या भेदभावपूर्ण व्यापारिक नीतियों के जवाब में आयात शुल्क और अन्य व्यापारिक प्रतिबंध लगाने का अधिकार देती है।

  • जंग के साए में कूटनीति, ट्रंप के दूत से मुलाकात को लेकर ईरानी विदेश मंत्री ने किए चौंकाने वाले दावे

    जंग के साए में कूटनीति, ट्रंप के दूत से मुलाकात को लेकर ईरानी विदेश मंत्री ने किए चौंकाने वाले दावे


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका के साथ हुई बातचीत को लेकर बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के साथ वार्ता ऐसे माहौल में हुई जहां किसी भी समय बमबारी शुरू होने का खतरा बना हुआ था। अराघची के इस बयान ने यह संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद भले जारी रहा हो लेकिन जमीन पर हालात बेहद तनावपूर्ण और अस्थिर बने हुए थे।

    एक साक्षात्कार में अराघची ने कहा कि उन्होंने बातचीत के दौरान विटकॉफ से सवाल किया था कि क्या वह कभी ऐसी वार्ता का हिस्सा बने हैं जहां हर पल हवाई हमले की आशंका बनी रहती हो। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह बातचीत किस स्थान या किस दौर की थी लेकिन उनके बयान से उस समय की गंभीर स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। ईरानी विदेश मंत्री का कहना था कि युद्ध जैसे माहौल में भी बातचीत का रास्ता खुला रखना आसान नहीं होता।

    अराघची ने यह भी दोहराया कि ईरान किसी भी तरह के दबाव के सामने झुकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि तेहरान अपने राष्ट्रीय हितों और परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता केवल दबाव या धमकी के आधार पर नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की स्थिति की तुलना वेनेजुएला से नहीं की जा सकती और उनका देश बाहरी दबाव में अपने फैसले नहीं बदलेगा।

    रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच पिछले कई महीनों से अलग-अलग स्तर पर बातचीत होती रही है। औपचारिक बैठकों के अलावा दोनों पक्षों के बीच सीधे संदेशों के जरिए भी संपर्क बनाए रखने की कोशिश की गई ताकि तनाव को कम किया जा सके। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी और क्षेत्रीय घटनाक्रम ने हालात को और अधिक जटिल बना दिया है।

    इसी बीच क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। अमेरिका ने हाल के दिनों में ईरान से जुड़े कई रणनीतिक ठिकानों पर हवाई कार्रवाई की है। अमेरिकी सेना का कहना है कि यह कार्रवाई अपने सैनिकों पर हुए हमलों के जवाब में की गई। दूसरी ओर ईरान ने भी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों और सैन्य हितों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है। कुवैत बहरीन और जॉर्डन जैसे देशों ने संभावित मिसाइल और ड्रोन हमलों को देखते हुए अपनी वायु रक्षा प्रणाली को हाई अलर्ट पर रखा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती तनातनी अंतरराष्ट्रीय बाजार और तेल आपूर्ति के लिए भी चिंता का विषय बनी हुई है।

    हालांकि कूटनीतिक संपर्क अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं लेकिन मौजूदा हालात यह संकेत देते हैं कि बातचीत और सैन्य टकराव समानांतर रूप से चल रहे हैं। ऐसे में पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या आने वाले दिनों में दोनों देश तनाव कम करने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाते हैं या फिर यह संकट और गहरा होता है।