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  • यूनुस की भविष्यवाणी पड़ी उलटी, कहा था भारतीय कंपनियां बांग्लादेश आएंगी, अब खुद की मिलों पर गहराया संकट

    यूनुस की भविष्यवाणी पड़ी उलटी, कहा था भारतीय कंपनियां बांग्लादेश आएंगी, अब खुद की मिलों पर गहराया संकट


    नई दिल्ली। भारत को लेकर बांग्लादेश में हालिया घटनाक्रम लगातार सुर्खियों में है। इसी बीच अंतरिम सरकार के प्रमुख और नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री मोहम्मद यूनुस की एक पुरानी टिप्पणी फिर चर्चा में आ गई है। वर्ष 2025 में यूनुस अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए भारी टैरिफ को लेकर उत्साहित नजर आए थे। तब उन्होंने दावा किया था कि ऊंचे टैरिफ और ज्यादा लागत के चलते भारतीय उद्योग, खासकर टेक्सटाइल सेक्टर, भारत छोड़कर बांग्लादेश में निवेश करेंगे।

    अमेरिकी पत्रकार मेहदी हसन को दिए एक इंटरव्यू में यूनुस ने कहा था कि अमेरिका के भारी टैरिफ के कारण भारतीय कंपनियां भारत में उत्पादन करना छोड़ेंगी और बांग्लादेश में फैक्ट्रियां लगाएंगी, क्योंकि वहां लागत कम है और टैरिफ भी अपेक्षाकृत कम हैं। हालांकि मौजूदा हालात उनकी इस भविष्यवाणी से बिल्कुल उलट दिखाई दे रहे हैं।

    खुद का टेक्सटाइल सेक्टर संकट में

    जनवरी 2026 के अंत तक बांग्लादेश का कपड़ा उद्योग गंभीर संकट में फंस गया है। जहां एक ओर भारत पर अमेरिकी टैरिफ को लेकर बयानबाजी की जा रही थी, वहीं दूसरी ओर देश की घरेलू टेक्सटाइल मिलें बंद होने की स्थिति में पहुंच गई हैं। बांग्लादेश टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन BTMA ने ऐलान किया है कि 1 फरवरी 2026 से देशभर की टेक्सटाइल मिलें अनिश्चितकाल के लिए बंद की जाएंगी।

    BTMA अध्यक्ष शौकत अजीज रसेल के अनुसार मिल मालिक बैंक कर्ज चुकाने की स्थिति में नहीं हैं। उद्योग की पूंजी 50 प्रतिशत से अधिक घट चुकी है और कई यूनिट पहले ही ताले लगा चुकी हैं। उद्योग का आरोप है कि भारत से आयातित सस्ते सूत ने स्थानीय बाजार को नुकसान पहुंचाया है। करीब 12 हजार करोड़ टका का तैयार माल गोदामों में बिना बिके पड़ा है। वहीं गैस की कमी और बढ़ती कीमतों के चलते उत्पादन क्षमता भी 50 प्रतिशत तक गिर गई है। संगठन ने सरकार से 10 से 30 काउंट के सूत पर ड्यूटी-फ्री आयात सुविधा खत्म करने और गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।

    भारत–EU समझौता बढ़ाएगा दबाव

    भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है। यह समझौता बांग्लादेश के गारमेंट निर्यात के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। अभी LDC श्रेणी में होने के कारण बांग्लादेश को EU बाजार में ड्यूटी-फ्री पहुंच मिलती है, जबकि भारत को करीब 12 प्रतिशत शुल्क देना पड़ता है।

    समझौता लागू होने के बाद भारत को भी शून्य टैरिफ का लाभ मिलेगा। भारत के पास कपास और सूत जैसे कच्चे माल की मजबूत उपलब्धता है, जिससे उसके उत्पाद सस्ते और बेहतर गुणवत्ता वाले हो सकते हैं। वहीं बांग्लादेश 2026-27 तक LDC सूची से बाहर हो जाएगा, जिससे उसका ड्यूटी-फ्री लाभ समाप्त हो जाएगा। ऐसे में यूरोपीय बाजार में भारत से प्रतिस्पर्धा करना उसके लिए बेहद कठिन होगा। फिलहाल EU में हर तीसरा व्यक्ति बांग्लादेशी डेनिम पहनता है, लेकिन इस डील के बाद भारत इस बाजार का बड़ा हिस्सा अपने कब्जे में कर सकता है।

    कुल मिलाकर, जहां मोहम्मद यूनुस भारतीय कंपनियों के बांग्लादेश आने की उम्मीद जता रहे थे, वहीं जमीनी सच्चाई यह है कि बांग्लादेश का अपना टेक्सटाइल आधार और बैकवर्ड लिंकेज तेजी से कमजोर पड़ता नजर आ रहा है।

  • क्यूबा पर ट्रंप का कड़ा वार, तेल सप्लाई करने वालों पर अमेरिकी ने की टैरिफ की तैयारी

    क्यूबा पर ट्रंप का कड़ा वार, तेल सप्लाई करने वालों पर अमेरिकी ने की टैरिफ की तैयारी


    नई दिल्ली । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के बाद अब क्यूबा को निशाने पर लेते हुए सख्त रुख अपनाया है। गुरुवार को उन्होंने एक ऐसे आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत क्यूबा को तेल देने वाले देशों से अमेरिका आने वाले उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाया जा सकता है। इस फैसले को क्यूबा पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की नई रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि इससे पहले से जूझ रहे क्यूबा के ऊर्जा संकट की स्थिति और गंभीर हो सकती है।
    क्या है ट्रंप की मंशा?
    सूत्रों के मुताबिक ट्रंप प्रशासन का यह कदम सीधे तौर पर मेक्सिको को चेतावनी देने जैसा है। क्यूबा को लंबे समय से तेल सप्लाई करने वाला मेक्सिको अब अमेरिका की सख्त निगरानी में है। माना जा रहा है कि यह आदेश उन देशों पर दबाव बनाने के लिए है, जो क्यूबा के साथ ऊर्जा व्यापार जारी रखे हुए हैं।

    मेक्सिको-क्यूबा संबंधों पर असर की आशंका

    ट्रंप के फैसले के बाद अटकलें तेज हैं कि अमेरिकी दबाव के चलते मेक्सिको क्यूबा को तेल आपूर्ति में कटौती कर सकता है। यदि ऐसा होता है, तो दोनों देशों के बीच राजनीतिक और आर्थिक रिश्तों में तनाव बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

    क्यूबा में और गहराएगा संकट?

    अमेरिका के प्रतिबंधों के चलते क्यूबा पहले ही गंभीर आर्थिक और ऊर्जा संकट से गुजर रहा है और उसे विदेशी सहयोग पर निर्भर रहना पड़ रहा है। अब तक वह मेक्सिको, वेनेजुएला और रूस जैसे देशों से तेल मंगाता रहा है। इससे पहले ट्रंप यह भी साफ कर चुके हैं कि वेनेजुएला का तेल अब क्यूबा नहीं पहुंचेगा। ऐसे में नए अमेरिकी आदेश ने क्यूबा की सरकार के सामने चुनौतियां और बढ़ा दी हैं।

    मेक्सिको से क्यूबा को कितनी तेल सप्लाई होती है?

    मेक्सिको की सरकारी तेल कंपनी पेमेक्स  के मुताबिक, जनवरी से सितंबर 2025 के बीच क्यूबा को रोजाना करीब 20 हजार बैरल तेल की आपूर्ति की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह सप्लाई प्रभावित होती है, तो क्यूबा को बड़े आर्थिक और ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है।

  • मिनियापोलिस में ICE फायरिंग: एक की मौत, ट्रंप और राज्य सरकार के बीच तनाव बढ़ा

    मिनियापोलिस में ICE फायरिंग: एक की मौत, ट्रंप और राज्य सरकार के बीच तनाव बढ़ा


    वॉशिंगटन। अमेरिका के मिनेसोटा राज्य के मिनियापोलिस में ICE एजेंट की गोलीबारी से एक शख्स की मौत हो गई, जिससे इलाके में तनाव बढ़ गया है। इस घटना के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मिनेसोटा के गवर्नर टिम वॉल्ज़ के बीच विवाद तेज हो गया।

    ट्रंप ने मिनेसोटा के गवर्नर और मिनियापोलिस के मेयर जैकब फ्रे पर आरोप लगाया कि वे विद्रोह भड़का रहे हैं। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि नेता अपनी “घमंडी और अहंकारी बयानबाजी” से हिंसा बढ़ा रहे हैं और उन्हें लोगों के पैसे और सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए। ट्रंप ने ICE एजेंट पर हमला करने वाले व्यक्ति की फिंगर की तस्वीरें भी साझा कीं।राष्ट्रपति ने सवाल उठाया कि स्थानीय पुलिस को ICE अधिकारियों की सुरक्षा के लिए क्यों तैनात नहीं किया गया और दावा किया कि मृतक हथियारबंद था। ट्रंप ने कहा कि ICE एजेंट्स को आत्मरक्षा में कार्रवाई करनी पड़ी और उन्हें अपना काम करने दिया जाना चाहिए।

    वहीं, गवर्नर टिम वॉल्ज़ ने संघीय कार्रवाई की निंदा की और अधिकारियों को मिनेसोटा से तुरंत बाहर निकालने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह अभियान गलत है और राष्ट्रपति को इसे तुरंत रोकना चाहिए।घटना मिनियापोलिस के दक्षिणी हिस्से में हुई, और स्थानीय अधिकारी जांच में जुटे हैं। लोगों से शांति बनाए रखने और प्रभावित इलाके से दूर रहने की अपील की गई है।

    यह घटना ICE के बड़े पैमाने पर चलाए जा रहे एंटी-इमिग्रेशन ऑपरेशन के दौरान हुई। इससे पहले 7 जनवरी को 37 वर्षीय रेनी गुड नामक महिला की ICE फायरिंग में मौत हो गई थी, जिससे अमेरिका में भारी विरोध हुआ था। रेनी गुड तीन बच्चों की मां थीं, और DHS का दावा था कि वह एजेंट पर हमला कर रही थी। उस समय राष्ट्रपति ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ICE एजेंट का बचाव किया था

  • कनाडा को एक साल में ही निगल जाएगा चीन बोर्ड ऑफ पीस से हटाने के बाद ट्रंप की कड़ी चेतावनी

    कनाडा को एक साल में ही निगल जाएगा चीन बोर्ड ऑफ पीस से हटाने के बाद ट्रंप की कड़ी चेतावनी


    नई दिल्ली।अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बयान को लेकर वैश्विक सुर्खियों में आ गए हैं ताजा बयान में उन्होंने कनाडा को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उसने अमेरिका के बजाय चीन के साथ नजदीकी बढ़ाई तो वह एक साल के भीतर ही उसे निगल जाएगा

    ट्रंप ने यह बयान उस समय दिया जब कनाडा ने अमेरिका के प्रस्तावित गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम का विरोध किया यह सिस्टम इजरायल के आयरन डोम से प्रेरित बताया जा रहा है और ग्रीनलैंड के ऊपर तैनात किए जाने की योजना है अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना है कि यह सिस्टम न केवल अमेरिका बल्कि कनाडा की सुरक्षा के लिए भी जरूरी हैडोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा कि कनाडा ग्रीनलैंड के ऊपर बनने वाले गोल्डन डोम के खिलाफ है जबकि यह सिस्टम कनाडा को भी सुरक्षा प्रदान करेगा इसके बजाय कनाडा ने चीन के साथ व्यापार बढ़ाने के समर्थन में रुख अपनाया है जो आने वाले एक साल में ही उसे खत्म कर देगा

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि वह चाहते हैं कि गोल्डन डोम ग्रीनलैंड को पूरी तरह कवर करे उनका तर्क है कि आर्कटिक क्षेत्र पर नियंत्रण से अमेरिका को रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने में मदद मिलेगीइससे पहले दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा था कि कनाडा को अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका का आभारी होना चाहिए उन्होंने यह भी कहा था कि कनाडा अमेरिका की वजह से ही जीवित है

    हालांकि कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ट्रंप के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया कार्नी ने कहा कि कनाडा और अमेरिका के बीच मजबूत साझेदारी जरूर है लेकिन कनाडा की प्रगति का श्रेय अमेरिका को नहीं दिया जा सकता उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी दबदबे पर आधारित वैश्विक व्यवस्था टूटने की कगार पर हैकार्नी के इस बयान के बाद ट्रंप ने कड़ा कदम उठाते हुए उन्हें अपने बोर्ड ऑफ पीस से बाहर कर दिया यह बोर्ड दुनिया में शांति स्थापित करने के उद्देश्य से ट्रंप द्वारा शुरू किया गया था

    बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के लिए ट्रंप ने दुनिया के लगभग साठ देशों को आमंत्रण भेजा था इजरायली मीडिया के अनुसार इनमें से पच्चीस देशों ने इस न्योते को स्वीकार कर लिया है बोर्ड में शामिल देशों में इजरायल सऊदी अरब संयुक्त अरब अमीरात पाकिस्तान कतर तुर्किए मिस्र इंडोनेशिया अर्जेंटीना और मंगोलिया समेत कई देश शामिल हैंट्रंप का यह बयान और कदम एक बार फिर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के बीच बढ़ते मतभेदों को उजागर करता है

  • अमेरिका ने भारत पर टैरिफ घटाने का संकेत, वित्त मंत्री बेसेंट ने कहा-रूसी तेल खरीद घटने से बड़ी जीत

    अमेरिका ने भारत पर टैरिफ घटाने का संकेत, वित्त मंत्री बेसेंट ने कहा-रूसी तेल खरीद घटने से बड़ी जीत


    नई दिल्ली। अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि ट्रम्प सरकार भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ में से आधा हटाने पर विचार कर सकती है, क्योंकि भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद काफी कम कर दी है। बेसेंट ने यह दावा किया कि 25% टैरिफ ने भारत की रूसी तेल खरीद घटाने में असर दिखाया है और अब राहत देने का रास्ता खुल सकता है। उन्होंने इसे अमेरिका की बड़ी जीत बताया और कहा कि टैरिफ अभी भी लागू हैं,
    लेकिन धीरे-धीरे इन्हें हटाने की संभावना है।

    अमेरिका ने अगस्त 2025 में भारत पर दो बार 25-25% टैरिफ लगाए थेपहला व्यापार घाटे के आधार पर और दूसरा रूस से तेल खरीदने के कारण। बेसेंट ने यह भी आरोप लगाया कि यूरोपीय देश भारत पर टैरिफ इसलिए नहीं लगा रहे क्योंकि वे भारत के साथ बड़े व्यापार समझौते के लिए इच्छुक हैं, जबकि यूरोप खुद रिफाइंड तेल खरीदकर रूस की मदद कर रहा है।

    बेसेंट 500% टैरिफ के प्रस्ताव पर भी बोले
    बेसेंट ने कहा कि रूसी तेल खरीदने पर 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव सीनेटर ग्राहम ने रखा है, लेकिन ट्रम्प को इसकी जरूरत नहीं है।

    राष्ट्रपति के पास पहले से ही IEEPA कानून के तहत राष्ट्रीय आपात स्थिति का हवाला देकर अन्य देशों पर भारी आर्थिक प्रतिबंध लगाने का अधिकार है।

    भारत ने रूस से तेल खरीद घटाई, पर पूरी तरह नहीं रोकी
    अमेरिकी दावों के बावजूद भारत सरकार का कहना है कि रूस से तेल खरीद अभी भी जारी है और भारत अपनी ऊर्जा नीति अपने हितों के आधार पर तय करता है। हालिया आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2025 में भारत की रूस से तेल खरीद में गिरावट आई और वह तीसरे नंबर पर खिसक गया। वहीं तुर्की दूसरे सबसे बड़े खरीदार बन गया।

    चीन अभी भी रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार है।

    भारत की खरीद में गिरावट का कारण
    रूस ने अब तेल की छूट घटा दी है और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत भी कम हो गई है, जिससे भारत के लिए रूस से तेल खरीदना पहले जैसा लाभकारी नहीं रहा। इसके अलावा शिपिंग, बीमा और भुगतान में दिक्कतें भी बढ़ीं। इसी वजह से भारत सऊदी, UAE और अमेरिका जैसे स्थिर सप्लायर्स से भी तेल खरीद बढ़ा रहा है।

    अमेरिका-भारत व्यापार वार्ता और टैरिफ में नरमी
    अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते की बातचीत चल रही है, ऐसे में टैरिफ घटाने के संकेत दोनों देशों के रिश्तों में नरमी की तरफ माना जा रहा है।
    अमेरिका के टैरिफ में राहत के संकेत से भारत-यूएस संबंधों में सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं, लेकिन रूस से तेल खरीद पर भारत की नीति अभी भी अपने हितों पर आधारित है।

  • ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का न्योता इन देशों ने ठुकराया, भारत कर रहा विचार

    ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का न्योता इन देशों ने ठुकराया, भारत कर रहा विचार


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस Board of Peace में शामिल होने के लिए कई देशों को आमंत्रित किया गया, लेकिन कुछ प्रमुख देशों ने इसे ठुकरा दिया है। वहीं, कई देशों ने अभी तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है जिसमें भारत भी शामिल है। खबर है कि भारत इस पहल के संवेदनशील पहलुओं पर विचार कर रहा है और अंतिम फैसला अभी नहीं लिया गया है।अमेरिका ने गाजा पट्टी में इजरायल और हमास के बीच हुए युद्धविराम समझौते के दूसरे चरण के तहत यह बोर्ड गठित किया है। इसमें विश्व के कई नेताओं को शामिल होने का न्योता दिया गया है।

    बोर्ड में शामिल नहीं हो रहे प्रमुख देश:
    फ्रांस, नॉर्वे, स्वीडन ने ट्रंप के न्योते को ठुकराया। वहीं, ब्रिटेन, चीन, क्रोएशिया, इटली, यूरोपीय यूनियन की कार्यकारी शाखा, पराग्वे, रूस, सिंगापुर, स्लोवेनिया, तुर्किये और यूक्रेन ने अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है।

    न्योता स्वीकार करने वाले देश:
    अर्जेंटीना, आर्मीनिया, अजरबैजान, बहरीन, बेलारूस, मिस्र, हंगरी, कजाखस्तान, कोसोवो, मोरक्को, संयुक्त अरब अमीरात, वियतनाम और पाकिस्तान ने न्योता स्वीकार कर लिया है। वाइट हाउस के अनुसार, बोर्ड में कुल 30 देशों को शामिल किया जा सकता है, जबकि 50 देशों को न्योता भेजा गया था।भारत के इस कदम पर ध्यान दुनिया भर की नजरें बनी हुई हैं। कहा जा रहा है कि भारत बोर्ड के कुछ बिंदुओं पर विचार कर रहा है और जल्द ही अपनी स्थिति साफ करेगा।

  • ग्रीनलैंड विवाद पर रूस का कड़ा बयान, ट्रंप ने नोबेल यू-टर्न लिया; जानें आज की बड़ी खबरें

    ग्रीनलैंड विवाद पर रूस का कड़ा बयान, ट्रंप ने नोबेल यू-टर्न लिया; जानें आज की बड़ी खबरें


    नई दिल्ली। आज की टॉप खबरों में ग्रीनलैंड विवादट्रंप का नोबेल यू-टर्न और ठगी के मामले शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू राजनीति में उठापटक के बीच लोगों की नजरें इन घटनाओं पर टिक गई हैं।

    डेनमार्क का हिस्सा नहीं ग्रीनलैंडरूस का बयान

    ग्रीनलैंड विवाद ने वैश्विक राजनीति में नया तनाव पैदा कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार ग्रीनलैंड को खरीदने या नियंत्रण में लेने की बात कही और यूरोपीय संघ व डेनमार्क पर टैरिफ युद्ध की धमकी दी। अब रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने बयान देकर इस मुद्दे को और गरमा दिया। लावरोव ने कहा कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वाभाविक हिस्सा नहीं है और इसे लेकर रूस की अपनी स्थिति स्पष्ट है।

    मुझे नोबेल की कोई परवाह नहींट्रंप का यू-टर्न
    अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कई बार शांति नोबेल पुरस्कार की इच्छा जाहिर की थीलेकिन अब उन्होंने पूरी तरह पलटी ले ली है। उन्होंने कहा कि उन्हें नोबेल पुरस्कार की कोई परवाह नहीं है। यह बयान उस चिट्ठी के लीक होने के बाद आयाजो उन्होंने नॉर्वे के प्रधानमंत्री को लिखी थी। इसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि दुनिया में शांति की चिंता उनके लिए कोई बड़ी बात नहीं हैक्योंकि उन्हें शांति का नोबेल पुरस्कार तो मिला ही नहीं।

    जामिया प्रोफेसर पर हमलाआदिवासी युवक घायल
    दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इसमें एक एसोसिएट प्रोफेसर ने अनुसूचित जनजाति के एक कर्मचारी को जमकर पीटामुंह भी तोड़ दिया और जातिसूचक गालियां दीं। इस मामले में पुलिस को मेडिकल रिपोर्ट और अन्य सबूतों के साथ लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है।

    एलन मस्क के नाम पर ठगीशिमला का शख्स हुआ लाखों का शिकार

    हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से ठगी का मामला सामने आया है। ठगों ने एलन मस्क के नाम का इस्तेमाल कर शख्स को फंसाया और लाखों रुपये ठग लिए। ठगी के चक्कर में पीड़ित को टेस्ला कारनकद राशि और 2.3 करोड़ रुपये के सोने का लालच दिया गया।

    दिल्ली-NCR में GRAP-4 हटायास्टेज-3 प्रतिबंध जारी
    दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण के लिए लागू GRAP-4 प्रतिबंध हटा दिए गए हैं। वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण यह फैसला लिया गया है। हालांकि स्टेज-1स्टेज-2 और स्टेज-3 के तहत लगाए गए कुछ प्रतिबंध अभी भी जारी रहेंगे।आज की इन खबरों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और घरेलू मुद्दों पर लोगों की निगाहें टिकाए रखीं। रूस और अमेरिका की बयानबाजीशिक्षा संस्थानों में हिंसा और ठगी जैसे मामले लगातार चर्चा में बने हुए हैं

  • डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के बीच लाइव टीवी पर रोने लगीं ग्रीनलैंड की वित्त मंत्री

    डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के बीच लाइव टीवी पर रोने लगीं ग्रीनलैंड की वित्त मंत्री

    वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे को धमकियों के बीच हाल ही में ग्रीनलैंड की वित्त मंत्री बेहद भावुक हो गईं। बीते कुछ दिनों में तीव्र दबाव का जिक्र करते हुए लाइव टेलीकास्ट के दौरान एक कार्यक्रम में उनकी आंखों में आंसू आ गए। इस दौरान उन्होंने कहा कि बीते कुछ दिन उनके देश के लिए बेहद मुश्किल रहे हैं। वहीं ट्रंप लगातार अपनी बात पर अड़े हुए हैं और वाइट हाउस ने गुरुवार को भी एक बयान में कहा है कि ग्रीनलैंड को हासिल करना अमेरिका के लिए बेहद जरूरी है।
    ग्रीनलैंड की वित्त मंत्री विवियन मोट्जफेल्ड्ट एक चैनल के साथ इंटरव्यू में इस पर बात कर रही थी।मोट्जफेल्ड्ट ने बातचीत के बाद KNR को बताया, “हम अपने स्तर पर बहुत कड़ी मेहनत कर रहे हैं। मैं आमतौर पर ये शब्द कहना पसंद नहीं करती, लेकिन मैं कहूंगी कि हम बहुत मजबूत हैं। हम अपनी पूरी कोशिश कर रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ दिन, स्वाभाविक रूप से…”
    क्या बोलीं मोट्जफेल्ड्ट?

    इसके बाद मोट्जफेल्ड्ट भावुक हो गईं। उन्होंने किसी तरह अपने आंसू रोके और कहा, “ओह, मैं बहुत भावुक हो रही हूं। मैं दुखी हूं। पिछले कुछ दिन कठिन रहे हैं। हम पर बहुत दबाव है।”

    उन्होंने आगे कहा कि ग्रीनलैंड की सरकार मजबूत है और देश खुद को को सुरक्षित रखने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा रहा है।
    ट्रंप अड़े

    इससे पहले वाइट ने गुरुवार को कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ के लिए अतिआवश्यक मानते हैं और इसे हासिल करने के लिए बेहद उत्सुक हैं। वाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने एक बयान में कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी प्राथमिकता बिल्कुल स्पष्ट कर दी है। वह चाहते हैं कि अमेरिका ग्रीनलैंड को हासिल करे। उनका मानना है कि ऐसा करना हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के सर्वोत्तम हित में है।”
    बैठक रही बेनतीजा

    उनकी इस टिप्पणी से पहले ही अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अधिकारियों के बीच हुई सीधी बातचीत हुई थी।

    डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने कहा कि बुधवार को वॉशिंगटन में ग्रीनलैंड के उनके समकक्ष, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ हुई चर्चा मुख्य मतभेदों को सुलझाए बिना समाप्त हो गई। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ‘एक मौलिक असहमति’ बनी हुई है। रासमुसेन ने कहा कि हम अमेरिका की स्थिति को बदलने में कामयाब नहीं हुए।
  • ईरान में विरोध प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय तनाव: खामेनेई ने चेताया, रजा पहलवी ने ट्रंप से संपर्क किया

    ईरान में विरोध प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय तनाव: खामेनेई ने चेताया, रजा पहलवी ने ट्रंप से संपर्क किया

    नई दिल्ली। ईरान में महंगाई और आर्थिक तंगी के खिलाफ शुरू हुआ प्रदर्शन अब सीधे तौर पर सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई की सत्ता को चुनौती देने वाला रूप ले चुका है। देश के 31 प्रांतों और 111 शहरों-कस्बों में विरोध प्रदर्शन फैल चुके हैं। हिंसक झड़पों में अब तक कम से कम 62 लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 2,300 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है।

    सुप्रीम लीडर खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को विदेशी ताकतों और विरोधी संगठनों से प्रेरित बताते हुए कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने चेताया कि कोई भी विदेशी दबाव ईरान की सत्ता को नहीं झुका पाएगा। खामेनेई ने आरोप लगाया कि आंदोलन विदेशी एजेंडों के तहत देश में उथल-पुथल और संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहा है।

    सड़कों पर नारे और इंटरनेट बंदी

    ईरान के कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने “आजादी-आजादी” के नारे लगाए। ऐसे में सरकार को इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय कॉल सेवाएं पूरी तरह बंद करनी पड़ी। सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी कि कानून तोड़ने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    खामेनेई का अमेरिका को चेतावनी संदेश

    सुप्रीम लीडर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी चेताया कि इतिहास में तानाशाहों का पतन तय रहा है और ट्रंप इससे अलग नहीं होंगे। उनका जोर था कि ईरान किसी भी विदेशी दबाव में नहीं झुकेगा और देश की सुरक्षा और एकता बनाए रखी जाएगी।

    रजा पहलवी का अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप का आह्वान

    वहीं, निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि लाखों ईरानी प्रदर्शनकारियों को हिंसा का सामना करना पड़ रहा है और संचार सेवाएं ठप हैं। रजा पहलवी ने खामेनेई पर आम जनता पर बर्बरता करने का आरोप लगाया और लोगों से एकजुट होकर प्रदर्शन जारी रखने की अपील की।

    उन्होंने चेताया कि समय तेजी से निकल रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तत्काल कदम उठाना होगा, ताकि देश में जारी हिंसा और दमन को रोका जा सके।

  • ईरान में गुस्सा: ‘ट्रंप के हाथ ईरानियों के खून से सने’, विरोध प्रदर्शन तेज

    ईरान में गुस्सा: ‘ट्रंप के हाथ ईरानियों के खून से सने’, विरोध प्रदर्शन तेज

    ईरान | ईरान में महंगाई और आर्थिक संकट के खिलाफ शुरू हुआ प्रदर्शन अब सीधे सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की सत्ता को चुनौती देने वाले आंदोलन में बदल गया है। विरोध प्रदर्शन में हजारों लोग सड़कों पर उतरकर ईरान के निर्वासित विपक्षी नेता रजा पहलवी के समर्थन में नारे लगा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने देश की सत्ता क्राउन प्रिंस रजा पहलवी को सौंपने की मांग की।

    सरकारी बयान और अमेरिका-इजरायल पर आरोप

    ईरान के सरकारी टीवी ने पहली बार विरोध प्रदर्शनों को दिखाया और दावा किया कि अमेरिका और इजरायल के ‘आतंकवादी एजेंटों’ ने माहौल बिगाड़ा है। आयतुल्ला अली खामेनेई ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि कुछ दंगाई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने के लिए तोड़फोड़ कर रहे थे। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान विदेशियों के भाड़े के सैनिकों को बर्दाश्त नहीं करेगा।

    खामेनेई का विरोधकारियों और अमेरिका पर बयान

    खामेनेई ने कहा, “लाखों कुर्बानियों के बाद हम सत्ता में आए हैं और इतनी आसानी से झुकने वाले नहीं हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के हाथ हजारों ईरानियों के खून से सने हैं। ईरान के युवाओं को एकता बनाए रखनी होगी।” उन्होंने जून 2025 में ईरान के परमाणु संयंत्रों पर अमेरिकी हमले का भी जिक्र किया। इस दौरान भीड़ ने अमेरिका मुर्दाबाद के नारे लगाए।

    रजा पहलवी का आह्वान और हिंसा की झलक

    निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने सोशल मीडिया पोस्ट में ईरान के लोगों से आह्वान किया कि वे सड़कों पर उतरें, क्योंकि पूरी दुनिया की निगाहें ईरान पर हैं। सरकारी टीवी पर मेट्रो स्टेशनों और बैंकों में आग, जलती हुई बसें और कारें दिखाई गईं। ईरानी मीडिया ने पीपुल्स मुजाहिदीन ऑर्गनाइजेशन (एमकेओ) पर इस अशांति का आरोप लगाया, जो 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद अलग हुआ एक विपक्षी गुट है।

    इंटरनेट और संचार बाधित

    गुरुवार, 8 जनवरी 2026 की रात ईरान सरकार ने इंटरनेट और टेलीफोन लाइनें काट दीं। इंटरनेट कंपनियों क्लाउडफ्लेयर और नेटब्लॉक्स ने इसे रिपोर्ट किया और कहा कि इसका कारण ईरान सरकार का हस्तक्षेप था। इससे पूरे देश में विरोध प्रदर्शन की जानकारी और संचार बाधित हो गया।

    परिस्थितियों का अंतरराष्ट्रीय असर

    महंगाई विरोध से शुरू हुए आंदोलन का असर राजनीतिक अस्थिरता और सरकार की जवाबदेही पर पड़ रहा है। खामेनेई और अमेरिका-इजरायल के बीच आरोप-प्रत्यारोप, देश में इंटरनेट ब्लैकआउट और रजा पहलवी का आह्वान ईरान की आंतरिक स्थिति को और नाजुक बना रहे हैं। विरोध प्रदर्शन ने केवल आर्थिक मुद्दों को नहीं, बल्कि राजनीतिक और सुरक्षा के गंभीर पहलुओं को भी उजागर किया है।