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  • छिंदवाड़ा में बंगाली समाज की अनोखी दुर्गा पूजा, पांच दिन होती है आराधना; चार महीने पहले पहुंचते हैं मूर्तिकार

    छिंदवाड़ा में बंगाली समाज की अनोखी दुर्गा पूजा, पांच दिन होती है आराधना; चार महीने पहले पहुंचते हैं मूर्तिकार

    नई दिल्ली ।शारदीय नवरात्रि के दौरान आम तौर पर मां दुर्गा की आराधना नौ दिनों तक की जाती है, लेकिन छिंदवाड़ा के मोहन नगर में बंगाली समाज की पूजा परंपरा इससे अलग है। यहां बंगाली पंचांग के अनुसार मां दुर्गा की स्थापना पंचमी के दिन की जाती है और पांच दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना होती है। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से हो रही है, जबकि बंगाली समाज 16 अक्टूबर को मां दुर्गा की स्थापना करेगा और 21 अक्टूबर को विसर्जन किया जाएगा।

    मोहन नगर में बंगाली समाज की ओर से दुर्गा पूजा का आयोजन पिछले करीब 40 वर्षों से किया जा रहा है। इस दौरान विशेष रूप से तैयार किए गए दुर्गा पंडाल में एक साथ मां दुर्गा के साथ लक्ष्मी, सरस्वती, कार्तिक और गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। इसके अलावा महिषासुर की मूर्ति भी स्थापित की जाती है। बंगाली समाज में दुर्गा पूजा के लिए अलग विधि-विधान का पालन किया जाता है और इसी परंपरा के अनुसार पांच दिनों तक मां की आराधना की जाती है।

    इस बार बंगाली पंचांग के अनुसार 16 अक्टूबर को मां दुर्गा की स्थापना होगी। पूजा का समापन 21 अक्टूबर को प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ होगा। इस तरह यहां नवरात्रि के पूरे नौ दिनों के बजाय पंचमी से शुरू होकर पांच दिनों तक दुर्गा पूजा की विशेष परंपरा निभाई जाएगी। पूजा के दौरान अलग-अलग धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं और कई कार्यक्रम सुबह के समय आयोजित किए जाएंगे।

    बंगाली समाज की पूजा में अष्टमी और नवमी का भी विशेष महत्व है। दोनों तिथियों को मिलाकर एक विशेष पूजा की जाती है, जिसे संधी पूजा कहा जाता है। बंगाली दुर्गा पूजा की परंपरा में इसका खास महत्व माना जाता है। पांच दिनों की इस पूजा व्यवस्था में धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन बंगाली पंचांग और परंपरागत विधि-विधान के अनुसार किया जाता है।

    दुर्गा पूजा के लिए मूर्तियां तैयार करने का काम भी कई महीने पहले शुरू हो जाता है। पश्चिम बंगाल से आने वाले मूर्तिकार छिंदवाड़ा में करीब चार महीने पहले पहुंचते हैं। यहां वे बंगाली समाज की ओर से दिए गए ऑर्डर के अनुसार दुर्गा और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं तैयार करते हैं। मूर्तियों को पूजा के लिए निर्धारित समय तक पूरी तरह तैयार करने के लिए यह प्रक्रिया कई महीनों तक चलती है।

    मूर्तिकार अपने साथ पश्चिम बंगाल से मूर्ति बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली विशेष मिट्टी भी लेकर आते हैं। इसके अलावा मां दुर्गा की प्रतिमा के कपड़े और सजावट में इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी बंगाल से ही लाई जाती है। छिंदवाड़ा पहुंचने के बाद मूर्तिकार इन सामग्रियों के साथ चार महीने तक प्रतिमाओं को तैयार करने और उन्हें सजाने का काम करते हैं। पूजा के लिए प्रतिमाओं की तैयारी और सजावट की यह प्रक्रिया पिछले करीब 40 वर्षों से इसी तरह चल रही है।

    छिंदवाड़ा के मोहन नगर में बंगाली समाज की यह दुर्गा पूजा स्थानीय स्तर पर अपनी अलग धार्मिक परंपरा के लिए जानी जाती है। यहां स्थापना का समय, पूजा की अवधि, प्रतिमाओं की संख्या और संधी पूजा जैसी परंपराएं बंगाली पंचांग के अनुसार तय होती हैं। इस वर्ष भी समाज इसी परंपरा के अनुसार 16 अक्टूबर को मां दुर्गा की स्थापना कर पांच दिनों तक पूजा-अर्चना करेगा और 21 अक्टूबर को प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा।

  • अंक ज्योतिष का दावा, गुप्त नवरात्रि में मूलांक 2, 7 और 9 के जातक विशेष पूजा और मंत्रों से पा सकते हैं सकारात्मक परिणाम

    अंक ज्योतिष का दावा, गुप्त नवरात्रि में मूलांक 2, 7 और 9 के जातक विशेष पूजा और मंत्रों से पा सकते हैं सकारात्मक परिणाम

    नई दिल्ली । आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि को सनातन परंपरा में साधना, उपासना और आध्यात्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष महत्व दिया जाता है। इसी अवधि को लेकर अंक ज्योतिष में भी कुछ विशेष मान्यताएं प्रचलित हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस समय मूलांक 2, 7 और 9 वाले लोगों के लिए कुछ विशेष उपाय लाभकारी माने जाते हैं। कहा जाता है कि इन उपायों को श्रद्धा और विधि-विधान से करने पर आर्थिक चुनौतियों में राहत, मानसिक शांति तथा कार्यक्षेत्र में सकारात्मक बदलाव के योग बन सकते हैं। हालांकि यह सभी बातें धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।

    अंक ज्योतिष में व्यक्ति की जन्मतिथि के अंकों के योग से प्राप्त एकल अंक को मूलांक कहा जाता है। यदि किसी व्यक्ति का जन्म 2, 11, 20 या 29 तारीख को हुआ है तो उसका मूलांक 2 माना जाता है। इसी प्रकार 7, 16 या 25 तारीख को जन्म लेने वालों का मूलांक 7 तथा 9, 18 या 27 तारीख को जन्म लेने वालों का मूलांक 9 होता है। प्रत्येक मूलांक का संबंध किसी विशेष ग्रह से माना जाता है और उसी आधार पर अलग-अलग उपाय बताए जाते हैं।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार मूलांक 2 का संबंध चंद्रमा से माना जाता है। ऐसे लोगों को गुप्त नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की आराधना करने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि शाम के समय घी का दीपक जलाकर माता को मखाने और चिरौंजी से बनी सफेद खीर का भोग लगाने तथा सफेद पुष्प अर्पित करने से मानसिक तनाव कम होने और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होने का भाव प्रबल होता है। पूजा के दौरान “ॐ दुं दुर्गायै नमः” अथवा “ॐ चमं चन्द्रमसे नमः” मंत्र का जाप भी शुभ माना गया है।

    मूलांक 7 का संबंध केतु ग्रह से जोड़ा जाता है। अंक ज्योतिष के अनुसार इस मूलांक के लोगों के लिए गुप्त नवरात्रि की रात्रि में कपूर और दो साबुत लौंग का विशेष उपाय करने की परंपरा बताई जाती है। मान्यता है कि इसे श्रद्धा के साथ करते हुए माता दुर्गा से आर्थिक स्थिरता और कर्ज से मुक्ति की प्रार्थना की जाए। साथ ही “ॐ कें केतवे नमः” मंत्र का मानसिक जाप भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इससे नकारात्मक प्रभावों में कमी और आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत मिल सकते हैं।

    वहीं मूलांक 9 का स्वामी ग्रह मंगल माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस मूलांक के लोग गुप्त नवरात्रि में घी का दीपक जलाकर नौ बताशों पर दो-दो साबुत लौंग रखकर माता दुर्गा को अर्पित कर सकते हैं। इसके साथ लाल गुड़हल या लाल गुलाब का फूल चढ़ाने की भी परंपरा बताई गई है। पूजा के दौरान “ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः” अथवा “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” मंत्र का जाप शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और कार्यों में आने वाली बाधाएं कम हो सकती हैं।

    धार्मिक परंपराओं में गुप्त नवरात्रि को साधना और आत्मिक उन्नति का विशेष अवसर माना जाता है। अंक ज्योतिष के इन उपायों का उद्देश्य व्यक्ति में सकारात्मक सोच, श्रद्धा और आत्मविश्वास का संचार करना माना जाता है। हालांकि इन उपायों के परिणाम व्यक्ति की आस्था और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित होते हैं तथा इन्हें किसी वैज्ञानिक या प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। श्रद्धा, सकारात्मक प्रयास और निरंतर कर्म ही जीवन में स्थायी सफलता और आर्थिक प्रगति के प्रमुख आधार माने जाते हैं।