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  • शिवपुरी में नवदुर्गा सांस्कृतिक समारोह मंडल का भव्य विसर्जन समारोह, आकर्षक झांकियों और बच्चों की प्रस्तुतियों ने जीता दिल

    शिवपुरी में नवदुर्गा सांस्कृतिक समारोह मंडल का भव्य विसर्जन समारोह, आकर्षक झांकियों और बच्चों की प्रस्तुतियों ने जीता दिल


    शिवपुरी: में श्री नवदुर्गा सांस्कृतिक समारोह मंडल की ओर से नवरात्रि के समापन पर देवी प्रतिमा विसर्जन समारोह भव्य रूप से आयोजित किया गया। माधव चौक चौराहे पर सजाए गए मंच से विभिन्न स्थानों से आईं देवी प्रतिमाओं की झांकियों और आकर्षक विमानों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम में बच्चों की नृत्य प्रस्तुतियों, डांडिया, गरबा, योग प्रदर्शन और बाहर से आए कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। चल झांकियों का भी भव्य प्रदर्शन किया गया। समारोह में बड़ी संख्या में शहरवासियों ने भाग लेकर धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन का आनंद लिया।

    कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आईटीबीपी शिवपुरी के डीआईजी राजीव लोचन शुक्ला उपस्थित रहे, जबकि अध्यक्षता शिवपुरी के डीएफओ सुधांशु यादव ने की। समारोह की शुरुआत अतिथियों और समिति के सदस्यों द्वारा माता की आरती तथा भगवान श्रीगणेश की वंदना के साथ हुई। इसके बाद समिति अध्यक्ष तरुण अग्रवाल ने स्वागत भाषण दिया। आयोजन में पहुंचे अतिथियों का समिति के सदस्यों ने स्वागत किया।

    समारोह में महामंडलेश्वर पुरुषोत्तम दास जी महाराज, प्रहलाद भारती, मंशापूर्णी माता मंदिर की महंत मंजू दीक्षित, सनातन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगवती प्रसाद शुक्ल, राजू बाथम, डीपीसी दफेदार सिंह और महेंद्र सिंह वशिष्ठ विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। समिति के संरक्षकों रामविलास गुप्ता, अमन गोयल, राजेश कोचेटा और हरज्ञान प्रजापति सहित अन्य सदस्यों का भी स्वागत किया गया।

    आयोजन में सहयोग देने वाले प्रायोजकों को सम्मानित किया गया। इनमें सुमत गुप्ता, पुरुषोत्तम दास गर्ग, विनायक सेठ, उमा देवी शर्मा और सुषमा पांडेय शामिल रहे। हम फाउंडेशन की ओर से साधना गुप्ता, साधना शर्मा और अर्चना माहेश्वरी का भी सम्मान किया गया। विशेष सहयोगी के रूप में पटेल एंड संस के भूपेंद्र रावत का योगदान रहा।

    माधव चौक पर बनाए गए मंच से गुजरने वाले सभी विमान, झांकी मंडलों और समाजसेवी संस्थाओं का नवदुर्गा मंडल की ओर से शॉल, श्रीफल और माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। देवी के स्वागत के लिए विभिन्न समितियों ने शहर के अलग-अलग स्थानों पर निःशुल्क हलवा-चना, शरबत, खिचड़ी और सब्जी-पूड़ी का वितरण किया। इस दौरान शहरवासियों ने प्रसादी ग्रहण की और आयोजन में सहभागिता की।

    सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने मंच पर नृत्य और योग की प्रस्तुतियां दीं। डांडिया और गरबा कार्यक्रम में भी प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। नृत्य प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में प्रियंका व्यास, नेत्रा जोशी, टीना गुप्ता और दीपा बंसल शामिल रहीं। बाहर से आए कलाकारों ने भी विशेष प्रस्तुतियां दीं। मंच पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से धार्मिक उत्सव का माहौल बना रहा।

    कार्यक्रम के संचालन में मणिका शर्मा, वरुण राजौरिया, शिखा मंगल और भोपाल की एंकर नम्रता शुक्ला की भूमिका रही। आयोजन को सफल बनाने में अध्यक्ष तरुण अग्रवाल, संयोजक संदीप वशिष्ठ, स्वागत अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र गुप्ता, सह स्वागत अध्यक्ष बृजेश शर्मा, उपाध्यक्ष रामलखन मुढ़ौतिया और वरुण राजौरिया सहित समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने योगदान दिया। सचिव अरुण शर्मा, सह सचिव हर्षित मंगल, कोषाध्यक्ष हृदेश गोयल, सह कोषाध्यक्ष रवि पाराशर, मंच प्रभारी संकेत शुक्ला और सह मंच प्रभारी देवेंद्र जैन खतौरा सहित अन्य सदस्य भी आयोजन की व्यवस्थाओं में शामिल रहे।

    कार्यक्रम संयोजक संदीप वशिष्ठ ने जिला पुलिस प्रशासन, नगरपालिका, विद्युत विभाग और शहर की धर्मप्रेमी जनता के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने शहरवासियों को दशहरा पर्व की शुभकामनाएं भी दीं। आयोजन के अंत में माता की महाआरती की गई और भावपूर्ण विदाई के साथ विसर्जन समारोह संपन्न हुआ।

    मुख्य समारोह से पहले नवदुर्गा सांस्कृतिक समारोह मंडल ने क्षत्रिय समाज की बाइक रैली और दशहरा मिलन चल समारोह का स्वागत किया था। दोपहर में खटीक समाज की काली माता रैली तथा शाम को पंजाबी परिषद और श्री नरसिंह मंदिर उत्सव समिति की ओर से निकाली गई राम बारात का भी स्वागत किया गया।

  • शिवपुरी की महारानी मां काली आज पालकी में निकलेंगी, हजारों भक्तों के साथ गणेश कुंड में होगा विसर्जन

    शिवपुरी की महारानी मां काली आज पालकी में निकलेंगी, हजारों भक्तों के साथ गणेश कुंड में होगा विसर्जन


    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी शहर में मंगलवार, 20 अक्टूबर को दशहरे के अवसर पर धार्मिक उत्सव और प्रतिमा विसर्जन की गतिविधियां तेज रहेंगी। खटीक मोहल्ले में विराजमान मां काली की प्रतिमा को श्रद्धालु पालकी में बैठाकर भव्य शोभायात्रा के साथ विसर्जन स्थल गणेश कुंड तक ले जाएंगे। शिवपुरी की महारानी के नाम से प्रसिद्ध मां काली की इस यात्रा में हजारों भक्तों के शामिल होने की संभावना है। यात्रा का निर्धारित समय दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक रखा गया है। इस दौरान यात्रा मार्ग को वाहनों के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र बनाया जाएगा।

    खटीक समाज द्वारा प्रतिवर्ष शारदीय नवरात्रि में खटीक मोहल्ले में मां काली की प्रतिमा स्थापित की जाती है। नवरात्रि के समापन पर दशहरे के दिन प्रतिमा को पालकी में विराजमान कर विसर्जन के लिए ले जाने की परंपरा है। इस शोभायात्रा की खास पहचान पालकी में मां काली की प्रतिमा का नगर भ्रमण और श्रद्धालुओं की बड़ी भागीदारी है। प्रतिमा की पालकी लगभग 2 किलोमीटर की दूरी करीब 30 से 35 मिनट में तय करती है। यात्रा को देखने और मां के दर्शन करने के लिए सड़क के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग एकत्र होते हैं।

    इस बार तिथियों के क्रम में बदलाव के कारण महाअष्टमी, महानवमी और दशहरे के आयोजन को लेकर अलग-अलग मान्यताएं देखने को मिलीं। शारदीय नवरात्रि में अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 28 मिनट के बाद शुरू हुई और 19 अक्टूबर को सुबह लगभग 10 बजकर 52 मिनट तक रही। इसके बाद नवमी तिथि शुरू हो गई। इसी कारण 19 अक्टूबर को महाअष्टमी और महानवमी दोनों पर्व मनाए गए, जबकि 20 अक्टूबर को दशहरा मनाया जा रहा है। कुछ श्रद्धालुओं ने नवरात्रि के नौ दिनों के अनुसार पूजा-अर्चना और विसर्जन का कार्यक्रम पहले ही पूरा कर लिया था। इसके चलते सोमवार को भी शहर के विभिन्न क्षेत्रों से प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया।

    मंगलवार को शिवपुरी में मां काली के साथ अन्य देवी प्रतिमाओं की विसर्जन यात्राएं भी निकाली जाएंगी। शहर में आधा सैकड़ा से अधिक शोभायात्राएं निकलने की संभावना है। माधव चौक पर स्थापित वैष्णो देवी की झांकी का चल समारोह भी दशहरे के दिन निकाला जाएगा। यह शोभायात्रा शाम को शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरेगी। इसके अलावा क्षत्रिय समाज का चल समारोह भी आयोजित होगा। प्रतिमाओं की शोभायात्राओं के चलते शहर में देर रात तक धार्मिक गतिविधियां जारी रहने की संभावना है।

    श्रद्धालुओं की भीड़ और शोभायात्राओं को व्यवस्थित रखने के लिए जिला प्रशासन तथा पुलिस ने यातायात प्रबंध किए हैं। मां काली की यात्रा के दौरान दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक संबंधित मार्ग पर वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित रहेगा। शाम 6 बजे से माधव चौक के चारों ओर के रास्ते कार्यक्रम समाप्त होने तक बंद रहेंगे। फिजिकल रोड से माधव चौक की ओर और गुरुद्वारा की तरफ से कोर्ट रोड पर अनावश्यक वाहनों का प्रवेश रोका जाएगा। लक्ष्मी निवास से सब्जी मंडी और हंस बिल्डिंग की ओर जाने वाला मार्ग शाम 7 बजे से अंतिम झांकी निकलने तक बंद रहेगा।

    यातायात प्रभारी रणवीर सिंह यादव ने बताया कि व्यवस्था बिगाड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। माधव चौक पर वन-वे व्यवस्था लागू रहेगी। सुरवाया तिराहे पर मंगलवार रात 7 बजे से बुधवार सुबह 10 बजे तक हाईवे से शहर में भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन का उद्देश्य अमोला में विसर्जन के दौरान संभावित हादसों को रोकना है। भीड़ कम होने के बाद मार्गों को चरणबद्ध तरीके से खोला जाएगा। श्रद्धालुओं और वाहन चालकों से निर्धारित यातायात व्यवस्था का पालन करने की अपेक्षा की गई है।

  • शिवपुरी में तीन जगह होगा रावण दहन, 70 फीट के पुतले के साथ पहली बार जलेगा मेघनाद

    शिवपुरी में तीन जगह होगा रावण दहन, 70 फीट के पुतले के साथ पहली बार जलेगा मेघनाद


    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी शहर में मंगलवार, 20 अक्टूबर को विजयादशमी का पर्व तीन प्रमुख स्थानों पर रावण दहन के साथ मनाया जाएगा। इस बार शहर में धार्मिक आयोजनों के साथ एक खास आकर्षण भी रहेगा। गांधी पार्क में 70 फीट ऊंचे रावण के पुतले के साथ पहली बार मेघनाद का पुतला भी जलाया जाएगा। वहीं, सिद्धेश्वर मंदिर मैदान में 73 साल पुरानी परंपरा के तहत रावण दहन होगा। झांसी रोड स्थित काली माता मंदिर परिसर में भी दशहरे के आयोजन की तैयारियां पूरी की जा रही हैं।

    शहर के सिद्धेश्वर मंदिर मैदान, गांधी पार्क और काली माता मंदिर परिसर में अलग-अलग समय पर रावण दहन किया जाएगा। इन आयोजनों में राम-रावण युद्ध का मंचन, धार्मिक चल समारोह और शस्त्र पूजन जैसे कार्यक्रम भी शामिल हैं। आयोजक विजयादशमी के अवसर पर होने वाले कार्यक्रमों की तैयारियों में जुटे हैं।

    सिद्धेश्वर मंदिर मैदान में पंजाबी परिषद की ओर से शाम 7:30 बजे रावण दहन किया जाएगा। परिषद पिछले 73 वर्षों से इस आयोजन की परंपरा निभाती आ रही है। इस बार यहां 45 फीट ऊंचा रावण का पुतला बनाया गया है, जबकि पिछले वर्ष पुतले की ऊंचाई 51 फीट थी। पुतला तैयार करने की जिम्मेदारी इस बार भी आजाद खान ने संभाली है। रावण दहन से पहले मैदान में राम और रावण के बीच युद्ध का मंचन किया जाएगा। इसके बाद पुतले का दहन होगा।

    इस आयोजन से पहले आनंदपुर कुटिया जल मंदिर से भगवान राम की बारात और चल समारोह निकाला जाएगा। यह यात्रा हंस बिल्डिंग, ओरिएंटल बैंक, धर्मशाला रोड, मिर्ची बाजार और गोयल मेडिकल के सामने से होते हुए माधव चौक पहुंचेगी। इसके बाद चल समारोह सिद्धेश्वर मंदिर मैदान की ओर बढ़ेगा। धार्मिक उद्घोषों के बीच श्रद्धालु इस आयोजन में भाग लेंगे।

    गांधी पार्क में मानव वेलफेयर सोसायटी की ओर से रात 8 बजे रावण दहन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यहां 70 फीट ऊंचा रावण का पुतला तैयार किया गया है। इस बार आयोजन की विशेषता यह है कि रावण के साथ मेघनाद का पुतला भी जलाया जाएगा। शिवपुरी के इस आयोजन में पहली बार दोनों पुतलों का दहन होगा। कार्यक्रम में भगवान राम की भूमिका निभाने वाले कलाकार दोनों पुतलों का दहन करेंगे।

    इसी समय झांसी रोड स्थित काली माता मंदिर परिसर में नरसिंह मंदिर दशहरा समिति की ओर से रावण दहन किया जाएगा। समिति ने यहां 40 फीट ऊंचा पुतला तैयार कराया है। पिछले साल भी पुतले की ऊंचाई 40 फीट ही थी। इस परिसर में रावण दहन के साथ पथ संचलन और पुलिस शस्त्र पूजन का कार्यक्रम भी रखा गया है। समिति ने नागरिकों, समाजसेवियों और धर्मप्रेमियों से आयोजन में शामिल होने की अपील की है।

    शहर के इन तीन प्रमुख स्थानों के अलावा शिवपुरी जिले के अन्य कस्बों और क्षेत्रों में भी विजयादशमी मनाई जाएगी। विभिन्न स्थानों पर रावण दहन और धार्मिक कार्यक्रमों के जरिए बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाएगा। इस बार सिद्धेश्वर मैदान की पुरानी परंपरा और गांधी पार्क में पहली बार मेघनाद दहन शिवपुरी के दशहरा आयोजनों के प्रमुख आकर्षण रहेंगे।

  • दशहरा 2026 आज, विजयादशमी पर जानें पर्व का महत्व, शुभ मुहूर्त और अपनों को बधाई देने के खास संदेश

    दशहरा 2026 आज, विजयादशमी पर जानें पर्व का महत्व, शुभ मुहूर्त और अपनों को बधाई देने के खास संदेश

    नई दिल्ली । दशहरा और विजयादशमी का पर्व मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को मनाया जा रहा है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर देशभर में लोग भगवान श्रीराम की पूजा-अर्चना करते हैं और रावण दहन के माध्यम से बुराइयों के अंत का संदेश देते हैं। दशहरा केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा पर्व नहीं है, बल्कि यह सत्य, साहस, सदाचार और सकारात्मक सोच के साथ जीवन जीने की प्रेरणा भी देता है।

    विजयादशमी के अवसर पर परिवार, दोस्तों और प्रियजनों को शुभकामनाएं देने की परंपरा भी खास महत्व रखती है। लोग इस दिन संदेशों, प्रेरणादायक विचारों और सामाजिक माध्यमों पर साझा किए जाने वाले स्टेटस के जरिए एक-दूसरे को पर्व की बधाई देते हैं। शुभकामना संदेशों में सुख, शांति, समृद्धि, सफलता और खुशहाली की कामना प्रमुख रूप से शामिल रहती है।

    दशहरा हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इसी दिन भगवान श्रीराम ने लंका के राजा रावण का वध किया था। इस घटना को अधर्म पर धर्म की विजय के रूप में याद किया जाता है। वहीं, कुछ परंपराओं में विजयादशमी को देवी दुर्गा की महिषासुर पर विजय से भी जोड़कर देखा जाता है। इस तरह यह पर्व अलग-अलग धार्मिक मान्यताओं के माध्यम से शक्ति, धर्म और सत्य की स्थापना का संदेश देता है।

    दशहरे पर रावण दहन की परंपरा इस पर्व का प्रमुख आकर्षण है। रावण के दस सिरों को प्रतीकात्मक रूप से मनुष्य के भीतर मौजूद नकारात्मक प्रवृत्तियों से जोड़ा जाता है। इनमें अहंकार, क्रोध, लोभ, मोह, ईर्ष्या, घृणा, भय और वासना जैसी बुराइयां शामिल हैं। रावण दहन के जरिए लोगों को यह संदेश दिया जाता है कि जीवन में केवल बाहरी बुराइयों का विरोध करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपनी गलत आदतों और नकारात्मक विचारों को दूर करने का प्रयास भी जरूरी है।

    20 अक्टूबर को दशहरा पूजा के लिए बताए गए प्रमुख शुभ समय में विजय मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 59 मिनट से 2 बजकर 45 मिनट तक निर्धारित बताया गया है। वहीं, प्रदोष काल शाम 5 बजकर 47 मिनट से शुरू होगा। इसी समय को ध्यान में रखते हुए रावण दहन शाम 5 बजकर 47 मिनट के बाद करने का उल्लेख है। हालांकि, पूजा और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए स्थानीय पंचांग तथा क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित माना जाता है।

    दशहरे पर भेजे जाने वाले शुभकामना संदेशों में भगवान श्रीराम की कृपा, परिवार की खुशहाली और जीवन में सफलता की कामना की जाती है। लोग अपने प्रियजनों को संदेश भेजकर उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बने रहने की प्रार्थना करते हैं। कुछ संदेश जीवन की चुनौतियों का सामना करने, कठिन परिस्थितियों में साहस बनाए रखने और सत्य का साथ देने की प्रेरणा देते हैं।

    प्रेरणादायक विचारों में यह संदेश प्रमुख है कि बुराई चाहे कितनी भी प्रभावशाली क्यों न दिखाई दे, अंततः अच्छाई का महत्व बना रहता है। विजयादशमी लोगों को अपने व्यवहार में प्रेम, सद्भाव और सकारात्मकता अपनाने की सीख भी देती है। इस अवसर पर अहंकार और नफरत छोड़कर आपसी सम्मान तथा विश्वास को मजबूत करने का संकल्प लिया जा सकता है।

    WhatsApp स्टेटस के जरिए भी लोग दशहरा की शुभकामनाएं साझा करते हैं। जय श्रीराम, सत्य की जीत और असत्य के अंत जैसे संदेश इस अवसर पर विशेष रूप से प्रासंगिक रहते हैं। इन संदेशों का उद्देश्य पर्व की भावना को अपनों तक पहुंचाना और जीवन में अच्छे विचारों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है।

    दशहरा 2026 का पर्व धार्मिक आस्था के साथ आत्ममंथन का अवसर भी प्रदान करता है। भगवान श्रीराम की विजय और रावण दहन की परंपरा लोगों को याद दिलाती है कि सत्य, संयम और सदाचार का रास्ता जीवन में महत्वपूर्ण है। विजयादशमी पर एक-दूसरे को शुभकामनाएं देने के साथ अपनी बुराइयों को दूर करने और सकारात्मक बदलाव की शुरुआत करने का संकल्प इस त्योहार के संदेश को सार्थक बना सकता है।

  • दशहरे पर सोने की कीमतों में गिरावट, 24 कैरेट का भाव 1.48 लाख रुपये के करीब, जानें अपने शहर के रेट

    दशहरे पर सोने की कीमतों में गिरावट, 24 कैरेट का भाव 1.48 लाख रुपये के करीब, जानें अपने शहर के रेट

    नई दिल्ली । दशहरे के अवसर पर मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को देश के सर्राफा बाजार बंद हैं। ऐसे में सोने की खरीदारी करने वाले लोगों को पिछले कारोबारी सत्र के भाव और उपलब्ध शहरवार दरों के आधार पर कीमतों का अंदाजा लगाना होगा। सोने की कीमतों में हाल के दिनों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। घरेलू वायदा बाजार में गिरावट दर्ज की गई, जबकि दिल्ली के सर्राफा बाजार में पिछले कारोबारी दिन सोने की कीमतों में तेजी आई थी। अलग-अलग शहरों में 24, 22 और 18 कैरेट सोने के भाव में भी अंतर देखने को मिल रहा है।

    उपलब्ध दरों के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत दिल्ली और लखनऊ जैसे शहरों में 1,48,190 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है। मुंबई और कोलकाता में इसका भाव 1,48,040 रुपये प्रति 10 ग्राम है। इंदौर, भोपाल, पटना और अहमदाबाद में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,48,090 रुपये प्रति 10 ग्राम बताई गई है। ये दरें शहरवार उपलब्ध कीमतों पर आधारित हैं। स्थानीय दुकानों पर कर, मेकिंग चार्ज और अन्य शुल्क के कारण अंतिम कीमत अलग हो सकती है।

    22 कैरेट सोने की बात करें तो दिल्ली, लखनऊ, कानपुर, जयपुर, चंडीगढ़ और कई अन्य शहरों में इसकी कीमत 1,35,850 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है। मुंबई, कोलकाता, पुणे और बेंगलुरु में 22 कैरेट सोने का भाव 1,35,700 रुपये प्रति 10 ग्राम है। वहीं, इंदौर, भोपाल, पटना और अहमदाबाद में इसकी कीमत 1,35,750 रुपये प्रति 10 ग्राम बताई गई है। आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों के लिए 22 कैरेट सोना महत्वपूर्ण विकल्प होता है, क्योंकि इसका इस्तेमाल सामान्य तौर पर गहने बनाने में किया जाता है।

    18 कैरेट सोने की कीमत भी शहर के अनुसार अलग-अलग है। दिल्ली में इसका भाव 1,11,180 रुपये प्रति 10 ग्राम है, जबकि मुंबई और कोलकाता में यह 1,11,030 रुपये दर्ज किया गया है। इंदौर, भोपाल और पटना में 18 कैरेट सोने की कीमत 1,11,080 रुपये प्रति 10 ग्राम बताई गई है। चेन्नई में इसका भाव 1,11,550 रुपये प्रति 10 ग्राम है। खरीदारी से पहले स्थानीय सर्राफा कारोबारी से ताजा दर की पुष्टि करना जरूरी है।

    वायदा बाजार में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने का भाव 618 रुपये यानी 0.42 प्रतिशत गिरकर करीब 1,47,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। इससे पहले यह 1,47,918 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। हालांकि, पिछले सोमवार के कारोबार के अन्य आंकड़ों में दिसंबर आपूर्ति वाले सोने के वायदा अनुबंध में 436 रुपये की तेजी दर्ज की गई थी और इसका भाव 1,48,354 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था। अलग-अलग समय के आंकड़ों में यह अंतर बाजार के उतार-चढ़ाव को दर्शाता है।

    दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोमवार को 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 400 रुपये बढ़कर 1,50,300 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई थी। इससे पहले इसका भाव 1,49,900 रुपये था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमतों में बदलाव दर्ज किया गया। उपलब्ध आंकड़ों में हाजिर सोने का भाव करीब 4,175.57 डॉलर प्रति औंस और एक अन्य कारोबारी अपडेट में 4,145 डॉलर प्रति औंस बताया गया।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, त्योहारी मौसम में खुदरा मांग बढ़ने से घरेलू सोने की कीमतों को समर्थन मिल सकता है। दिवाली और शादी-विवाह के मौसम में आभूषणों की खरीदारी बढ़ने की संभावना रहती है। हालांकि, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से जुड़े फैसले, कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिकी बॉण्ड प्रतिफल जैसे कारक अंतरराष्ट्रीय बाजार की दिशा प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए दशहरे के दिन खरीदारी की योजना बना रहे लोगों को बाजार खुलने पर ताजा भाव की जानकारी लेनी चाहिए।

  • दशहरे पर एनएसई और बीएसई बंद, एमसीएक्स में शाम से शुरू होगा कारोबार, जानें निवेशकों के लिए पूरा शेड्यूल

    दशहरे पर एनएसई और बीएसई बंद, एमसीएक्स में शाम से शुरू होगा कारोबार, जानें निवेशकों के लिए पूरा शेड्यूल

    नई दिल्ली । दशहरा यानी विजयादशमी के अवसर पर मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार बंद है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) ने इस दिन को अपने वार्षिक अवकाश कैलेंडर में शामिल किया है। इसके चलते निवेशक आज शेयरों की खरीद-बिक्री नहीं कर सकेंगे। इक्विटी बाजार के साथ डेरिवेटिव्स और अन्य संबंधित कारोबारी खंडों में भी गतिविधियां स्थगित रहेंगी।

    शेयर बाजार में यह अवकाश ऐसे समय आया है, जब पिछले कारोबारी दिन यानी सोमवार को प्रमुख सूचकांकों में तेज गिरावट दर्ज की गई थी। निजी बैंकिंग शेयरों में कमजोरी, कंपनियों के उम्मीद से कमजोर तिमाही नतीजों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बाजार पर दबाव बनाया। सोमवार को निफ्टी 50 में करीब 257.20 अंकों की गिरावट आई और यह 22,888.95 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, सेंसेक्स 876.37 अंक टूटकर 73,852.90 पर आ गया।

    सोमवार की बिकवाली का असर बाजार के अधिकांश क्षेत्रीय सूचकांकों पर देखने को मिला। हालांकि, निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स ने इस रुझान से अलग प्रदर्शन किया और 2.41 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की। इसके बाद दशहरा अवकाश के कारण निवेशकों को घरेलू शेयर बाजार में अगली कारोबारी गतिविधियों के लिए एक दिन इंतजार करना होगा।

    एनएसई और बीएसई में आज केवल सामान्य शेयर कारोबार ही नहीं, बल्कि फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफएंडओ) में भी ट्रेडिंग बंद है। सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग (एसएलबी), करेंसी डेरिवेटिव्स और इंटरेस्ट रेट डेरिवेटिव्स सेगमेंट में भी कोई कारोबारी सत्र नहीं होगा। इन सभी गतिविधियों के लिए नियमित कारोबार दोबारा शुरू होने का इंतजार करना पड़ेगा।

    हालांकि, कमोडिटी बाजार में कारोबार करने वाले निवेशकों के लिए शाम को ट्रेडिंग का अवसर उपलब्ध रहेगा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) में सुबह का सत्र बंद रहेगा। इस एक्सचेंज पर सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक कारोबार नहीं होगा, लेकिन शाम 5 बजे से ट्रेडिंग दोबारा शुरू हो जाएगी। इस तरह सोना, चांदी, कच्चे तेल और अन्य कमोडिटी से जुड़े वायदा अनुबंधों में निवेशक शाम के सत्र के दौरान कारोबार कर सकेंगे।

    एमसीएक्स का शाम का सत्र रात 11:30 बजे तक या कुछ अनुबंधों के लिए रात 11:55 बजे तक चल सकता है। वास्तविक कारोबारी समय संबंधित अनुबंध और एक्सचेंज के निर्धारित कार्यक्रम पर निर्भर करेगा। इसलिए कमोडिटी बाजार में सक्रिय निवेशकों के लिए ट्रेडिंग से पहले अपने संबंधित अनुबंध का समय देखना जरूरी है।

    घरेलू शेयर बाजार बंद रहने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोना, चांदी और कच्चे तेल जैसी कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे में एमसीएक्स का शाम का सत्र वैश्विक बाजारों में होने वाले बदलावों के अनुसार कारोबार करने का अवसर देता है। हालांकि, निवेशकों को बाजार की परिस्थितियों और संबंधित अनुबंधों की शर्तों को ध्यान में रखकर ही निर्णय लेना चाहिए।

    दशहरा अवकाश के बाद एनएसई और बीएसई में नियमित कारोबार बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 से शुरू होगा। इसके बाद निवेशक सामान्य कारोबारी समय के अनुसार शेयरों की खरीद-बिक्री कर सकेंगे।

    वर्ष 2026 में दशहरे के बाद शेयर बाजार के प्रमुख अवकाशों में 10 नवंबर को दिवाली बलिप्रतिपदा, 24 नवंबर को प्रकाश पर्व श्री गुरु नानक देव जी और 25 दिसंबर को क्रिसमस शामिल हैं। एमसीएक्स में दिवाली बलिप्रतिपदा और गुरु नानक जयंती पर सुबह का सत्र बंद रहने, जबकि शाम का सत्र चालू रहने का कार्यक्रम है। क्रिसमस के दिन कमोडिटी एक्सचेंज पर पूरे दिन कारोबार बंद रहेगा।

  • दशहरे पर अक्षरधाम मंदिर में 108 यज्ञकुंडों के साथ विश्व शांति महायज्ञ, हजारों श्रद्धालुओं ने लिया हिस्सा

    दशहरे पर अक्षरधाम मंदिर में 108 यज्ञकुंडों के साथ विश्व शांति महायज्ञ, हजारों श्रद्धालुओं ने लिया हिस्सा

    नई दिल्ली । विजयदशमी के पावन अवसर पर दिल्ली स्थित स्वामिनारायण अक्षरधाम मंदिर में विश्व शांति महायज्ञ का भव्य आयोजन किया गया। इस धार्मिक अनुष्ठान में देश-विदेश के विभिन्न मंदिरों से आए 30 संतों और महंतों ने हिस्सा लिया। संतों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विश्व में शांति, सद्भाव और भाईचारे की स्थापना के लिए प्रार्थना की। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु यजमान के रूप में शामिल हुए और मंगलमय भविष्य की कामना के साथ धार्मिक संकल्प लिए।

    महायज्ञ के आयोजन को लेकर अक्षरधाम मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया था। परिसर में रंगोली बनाई गई और ध्वज-पताकाएं लगाई गईं। उत्सव के वातावरण में सुबह छह बजे संतों ने वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ यज्ञ का शुभारंभ किया। वैदिक परंपराओं के अनुसार, अनुष्ठान के दौरान 108 यज्ञकुंडों में पवित्र आहुतियां अर्पित की गईं। धार्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। महिलाओं और बच्चों की भी उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

    विश्व शांति महायज्ञ का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके माध्यम से पूरी दुनिया में शांति और सौहार्द का संदेश दिया गया। श्रद्धालुओं ने प्रार्थना की कि विभिन्न देशों और क्षेत्रों में जारी युद्ध, हिंसा तथा अशांति की परिस्थितियां समाप्त हों। लोगों के बीच आपसी विश्वास बढ़े और समाज में प्रेम, सहयोग तथा भाईचारे की भावना मजबूत हो।

    इस आयोजन की परंपरा बीएपीएस स्वामिनारायण संस्था के प्रमुख महंतस्वामी महाराज से जुड़ी है। उनके द्वारा विश्व शांति यज्ञ की शुरुआत किए जाने के बाद से हर साल दशहरे के अवसर पर अक्षरधाम परिसर में इस महायज्ञ का आयोजन किया जाता रहा है। इस वार्षिक परंपरा के जरिए विजयदशमी के धार्मिक महत्व को व्यापक सामाजिक और वैश्विक संदेश के साथ जोड़ा जाता है।

    कार्यक्रम के दौरान महंतस्वामी महाराज के संदेश को भी दोहराया गया। संदेश में कामना की गई कि दुनिया में जहां भी युद्ध, हिंसा और अराजकता की स्थिति है, उसका जल्द अंत हो। सभी लोग प्रेम, सद्भाव और भाईचारे के साथ जीवन व्यतीत करें। साथ ही प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में श्रद्धा, भक्ति और निष्ठा की भावना विकसित हो। इस उद्देश्य के लिए भगवान स्वामिनारायण के चरणों में प्रार्थना की गई।

    विजयदशमी को परंपरागत रूप से बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। इसी भावना के अनुरूप महायज्ञ में शामिल श्रद्धालुओं ने व्यक्तिगत कल्याण के साथ-साथ संपूर्ण विश्व की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। लोगों ने समाज में एकता, सहिष्णुता और परस्पर सम्मान बढ़ाने का संकल्प भी लिया।

    अनुष्ठान के दौरान उपस्थित लोगों को अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा दी गई। श्रद्धालुओं ने नकारात्मकता, अहंकार और घृणा जैसी भावनाओं को त्यागकर सकारात्मक सोच अपनाने का संकल्प लिया। आयोजन के जरिए यह संदेश दिया गया कि शांति की स्थापना के लिए व्यक्तिगत आचरण और सामाजिक व्यवहार में प्रेम तथा सद्भाव को महत्व देना आवश्यक है।

    अक्षरधाम में आयोजित इस महायज्ञ ने विजयदशमी के अवसर पर धार्मिक आस्था के साथ वैश्विक कल्याण की भावना को प्रमुखता दी। वैदिक मंत्रोच्चार, सामूहिक आहुतियों और श्रद्धालुओं की भागीदारी के बीच विश्व शांति की कामना की गई। आयोजन का केंद्रीय संदेश यही रहा कि युद्ध और हिंसा से मुक्त दुनिया के निर्माण के लिए प्रेम, एकता और भाईचारे की भावना को मजबूत किया जाना चाहिए।

  • महाराष्ट्र के सांगोला गांव में दशहरे पर नहीं जलता रावण, 350 साल से ग्राम देवता मानकर होती है पूजा

    महाराष्ट्र के सांगोला गांव में दशहरे पर नहीं जलता रावण, 350 साल से ग्राम देवता मानकर होती है पूजा


    नई दिल्ली ।
    देशभर में दशहरे के अवसर पर रावण के पुतले का दहन करके बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है, लेकिन महाराष्ट्र के अकोला जिले में स्थित सांगोला गांव की परंपरा इससे बिल्कुल अलग है। यहां विजयादशमी के दिन रावण का पुतला जलाने के बजाय दस सिरों वाले दशानन की पूजा की जाती है। पातुर तहसील के इस गांव में ग्रामीण रावण को अपना ग्राम देवता और रक्षक मानते हैं। उनकी मान्यता है कि रावण की आराधना से गांव में सुख-समृद्धि बनी रहती है। करीब 350 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में आज भी गांव के लोग उत्साह और श्रद्धा के साथ शामिल होते हैं।

    सांगोला में दशहरे के दिन विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस दौरान गांव के लोग एकत्र होकर अपनी पुरानी धार्मिक परंपरा निभाते हैं। यहां रावण की प्रतिमा की पूजा केवल दशहरे तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे साल नियमित रूप से उसकी आराधना की जाती है। महिलाएं भी इस परंपरा में श्रद्धापूर्वक भाग लेती हैं। देश के कई हिस्सों में जहां दशहरा रावण दहन के साथ मनाया जाता है, वहीं सांगोला में उसकी पूजा गांव की विशिष्ट पहचान बन चुकी है।

    स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, रावण की पूजा की शुरुआत लगभग 350 साल पहले हुई थी। बताया जाता है कि उस समय गांव में एक ऋषि महाराज रहते थे, जिन्हें ग्रामीण श्रद्धा की दृष्टि से देखते थे। मान्यता है कि अपने अंतिम समय में ऋषि महाराज ने ऐसी प्रतिमा स्थापित करने की इच्छा जताई थी, जिसमें दस बिंदु या चिह्न हों। हालांकि, प्रतिमा बनाने वाले मूर्तिकार ने दस मुखों वाली प्रतिमा तैयार कर दी। यह प्रतिमा रावण के स्वरूप जैसी दिखाई देती थी।

    ग्रामीणों के अनुसार, जब इस प्रतिमा को बैलगाड़ी से गांव लाया जा रहा था, तब बैलगाड़ी गांव की सीमा पार नहीं कर सकी। इस घटना को ग्रामीणों ने दैवी संकेत के रूप में देखा। इसके बाद प्रतिमा को उसी स्थान पर स्थापित कर दिया गया। इसी घटना को सांगोला में रावण को ग्राम देवता मानकर पूजा करने की परंपरा की शुरुआत से जोड़कर देखा जाता है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती यह लोकमान्यता आज भी गांव के धार्मिक जीवन का हिस्सा है।

    रावण के भक्त ज्ञानेश्वर महाराज धाकरे के अनुसार, गांव में दशानन की पूजा उसके चरित्र के प्रत्येक पहलू का समर्थन करने के उद्देश्य से नहीं की जाती। उनके मुताबिक, रावण की भगवान शिव के प्रति भक्ति, आराधना और साधना के सम्मान में उसकी पूजा होती है। उनका कहना है कि रावण सोने की लंका का राजा था और गांव के लोग उसकी आराधना करते हुए अपने गांव को भी सुखी तथा समृद्ध मानते हैं। ग्रामीण इस खुशहाली को रावण महाराज की कृपा से जोड़ते हैं।

    सांगोला के निवासियों का विश्वास है कि रावण महाराज की पूजा से गांव में सुख-समृद्धि बनी रहती है और संकटों से रक्षा होती है। इसी आस्था के कारण दशहरे पर होने वाला पूजन पूरे गांव के लिए विशेष महत्व रखता है। महिलाओं सहित ग्रामीणों की सामूहिक भागीदारी इस परंपरा को जीवंत बनाए हुए है। करीब साढ़े तीन सदियों से चली आ रही यह मान्यता दिखाती है कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों में दशहरे से जुड़ी धार्मिक परंपराएं स्थानीय इतिहास, लोकविश्वास और समुदाय की आस्था के अनुसार अलग-अलग रूप लेती हैं।

  • आज दशहरे पर देश में इन 7 जगह नहीं होगा रावण दहन…. कहीं दामाद तो कहीं पूर्वज के रूप में पूजे जाएंगे दशानन…

    आज दशहरे पर देश में इन 7 जगह नहीं होगा रावण दहन…. कहीं दामाद तो कहीं पूर्वज के रूप में पूजे जाएंगे दशानन…


    नई दिल्ली।
    आज देशभर में विजयादशमी (Vijayadashami) यानी दशहरा (Dussehra) मनाया जा रहा है. इस दिन देश के विभिन्न हिस्सों में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं. लेकिन भारत में कुछ जगह ऐसी भी हैं, जहां रावण दहन (Burning Ravana) नहीं किया जाता, बल्कि दशानन की पूजा (Worship) होती है. इसके पीछे स्थानीय इतिहास, धार्मिक आस्था और पीढ़ियों से चली आ रही मान्यताएं हैं. आइए जानते हैं कि रावण की पूजा देश में कहां-कहां होती है।


    1. बिसरख गांव (उत्तर प्रदेश)

    उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में स्थित बिसरख गांव का नाम रावण से जोड़ा जाता है. स्थानीय परंपरा के अनुसार, यह रावण के पिता ऋषि विश्रवा से संबंधित स्थान है. इसी वजह से गांव के लोग रावण को विशेष सम्मान देते हैं. यहां दशहरे के दिन रावण का पुतला जलाने के बजाए उसकी पूजा-अर्चना की जाती है. गांव में रावण का एक मंदिर भी है, जहां श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार पूजा करते हैं।


    2. मंदसौर (मध्य प्रदेश)

    मध्य प्रदेश का मंदसौर भी उन खास जगहों में से एक है, जहां रावण की पूजा होती है.मान्यता है कि रावण की पत्नी मंदोदरी इसी क्षेत्र की रहने वाली थीं. इसी वजह से मंदसौर को रावण का ससुराल कहा जाता है. स्थानीय परंपरा में दामाद को सम्मान देने की वजह से रावण की पूजा होती है. यही कारण है कि यहां के कुछ इलाकों में विजयादशमी पर रावण का पुतला जलाने के बजाय उसकी पूजा करते हैं।


    3. रावनग्राम (मध्य प्रदेश)

    मध्य प्रदेश के विदिशा से करीब 50 किलोमीटर दूर रावनग्राम में भी रावण के पुतले का दहन नहीं होता है. यहां भी रावण को पूजने की परंपरा है. स्थानीय लोगों की आस्था में रावण का विशेष स्थान है. इस गांव में उसकी विशाल प्रतिमा स्थापित होने की बात भी कही जाती है. रावनग्राम की परंपरा बताती है कि अलग-अलग क्षेत्रों में रामायण के पात्रों को लेकर धार्मिक मान्यताएं एक जैसी नहीं हैं।


    4. कानपुर (उत्तर प्रदेश)

    उत्तर प्रदेश के कानपुर में स्थित दशानन मंदिर रावण की पूजा के लिए प्रसिद्ध है. बताया जाता है कि इस मंदिर का इतिहास करीब 135 साल पुराना है. यहां मंदिर के कपाट सालभर खुले नहीं रहते, बल्कि दशहरे के दिन श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोले जाते हैं. शेष दिनों में रावण की प्रतिमा ढकी रहती है. विजयादशमी पर भक्त मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और तेल के दीपक जलाते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धालु रावण से बुद्धि, ज्ञान और शक्ति की कामना करते हैं।


    5. जोधपुर (राजस्थान)

    राजस्थान के जोधपुर में भी कुछ समुदाय रावण को अपने पूर्वज के रूप में देखते हैं. इनकी मान्यताओं में रावण का संबंध वंश परंपरा से जुड़ा हुआ है. इसी कारण दशहरे के अवसर पर ये लोग रावण का पुतला जलाने के बजाय उसकी पूजा करते हैं. यहां रावण को लेकर प्रचलित आस्था मुख्यधारा में दिखाई देने वाली रावण दहन की परंपरा से अलग है. यह स्थानीय समुदायों की धार्मिक मान्यताओं और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा मानी जाती है।


    6. काकिनाडा (आंध्र प्रदेश)

    आंध्र प्रदेश के काकिनाडा में रावण को समर्पित एक मंदिर है. यहां उसे एक पराक्रमी शासक और भगवान शिव के परम भक्त के रूप में देखा जाता है. मंदिर में रावण के साथ भगवान शिव की पूजा किए जाने की परंपरा भी बताई गई है. स्थानीय मान्यताओं में रावण की शिवभक्ति और उसके सामर्थ्य को महत्व दिया जाता है. इस वजह से यहां रावण को देखने का नजरिया उन स्थानों से अलग है, जहां विजयादशमी पर उसके पुतले का दहन किया जाता है।


    7. कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश)

    हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में भी रावण को लेकर अलग धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं. यहां कुछ स्थानों पर रावण को भगवान शिव का बड़ा उपासक मानकर सम्मान दिया जाता है. मान्यता है कि रावण ने कठोर तपस्या से शिवजी को प्रसन्न किया था और उनकी कृपा प्राप्त की थी. कुछ स्थानीय परंपराओं में यह भी माना जाता है कि रावण को मोक्ष मिला था. इसी आस्था के चलते यहां कुछ लोग दशहरे पर रावण का दहन करने के बजाय उसकी पूजा-अर्चना करते हैं।

  • देशभर में आज दशहरे की धूम…. शाम को जलेंगे रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले

    देशभर में आज दशहरे की धूम…. शाम को जलेंगे रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले


    नई दिल्ली।
    बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देने वाला विजयादशमी (दशहरा) (Vijayadashami- Dussehra 2026) का पर्व इस साल आज यानी 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में दशहरे (Dussehra 2026) को धर्म की स्थापना, साहस और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण (Ravana) का अंत किया था। वहीं, देवी दुर्गा (Goddess Durga) ने महिषासुर का वध करके देवताओं और संसार को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। इन घटनाओं की स्मृति में दशहरा देशभर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन भी किया जाता है।

    पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ विजयादशमी पर दान-पुण्य का भी विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन जरूरतमंदों की सहायता करने और उपयोगी वस्तुएं दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। ज्योतिषीय परंपराओं में राशि के अनुसार दान करने का भी उल्लेख मिलता है। यदि आप दशहरे पर दान करने की योजना बना रहे हैं, तो अपनी राशि के मुताबिक इन वस्तुओं का चुनाव कर सकते हैं।


    राशि के अनुसार दशहरे पर क्या दान करें?

    – मेष राशि: मेष राशि के जातक विजयादशमी पर गेहूं और गुड़ का दान कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं में इन वस्तुओं का दान शुभ माना जाता है।

    – वृषभ राशि: इस राशि के लोगों के लिए चावल और आटे का दान करना अच्छा माना जाता है। जरूरतमंद परिवारों को ये खाद्य सामग्री दी जा सकती है।

    – मिथुन राशि: मिथुन राशि वाले साबुत मूंग और हरी सब्जियों का दान कर सकते हैं। इससे जरूरतमंद लोगों को भोजन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

    – कर्क राशि: कर्क राशि के जातक दूध और दही का दान कर सकते हैं। दान करते समय इनकी स्वच्छता और गुणवत्ता का ध्यान रखें।

    – सिंह राशि: सिंह राशि वालों के लिए गुड़, मूंगफली और सेब का दान करना शुभ माना जाता है।

    – कन्या राशि: कन्या राशि के जातक हरे रंग के कपड़े और चूड़ियां दान कर सकते हैं। इन्हें जरूरतमंद महिलाओं को देना एक अच्छा विकल्प है।

    – तुला राशि: तुला राशि वाले सफेद वस्त्र और अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार धन का दान कर सकते हैं।

    – वृश्चिक राशि: इस राशि के लोगों के लिए सेब और कपड़ों का दान करना अच्छा माना जाता है।

    – धनु राशि: धनु राशि के जातक पीले रंग के वस्त्र और अनाज जरूरतमंदों को दान कर सकते हैं।

    – मकर राशि: मकर राशि वाले कपड़े, खाद्यान्न और धन का दान कर जरूरतमंदों की सहायता कर सकते हैं।

    – कुंभ राशि: कुंभ राशि के जातक नीले रंग के वस्त्र या जरूरतमंद लोगों को जूते-चप्पल दान कर सकते हैं।

    – मीन राशि: मीन राशि के लोग दशहरे पर खिचड़ी बनाकर जरूरतमंदों को भोजन करा सकते हैं।

    विजयादशमी पर दान करते समय अपनी आर्थिक स्थिति और सामने वाले व्यक्ति की जरूरत को प्राथमिकता दें। दान का उद्देश्य केवल धार्मिक परंपरा निभाना नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की सहायता करना भी होना चाहिए। भोजन, कपड़े, अनाज या दैनिक उपयोग की वस्तुएं अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान की जा सकती हैं। किसी भी तरह के दिखावे से बचें और सेवा भाव के साथ दान करें।