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  • दशहरे पर MP के 25 जिलों में बारिश-आंधी का अलर्ट, 50 किमी की रफ्तार से चल सकती हैं हवाएं

    दशहरे पर MP के 25 जिलों में बारिश-आंधी का अलर्ट, 50 किमी की रफ्तार से चल सकती हैं हवाएं


    भोपाल। मध्यप्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी बारिश का दौर थम नहीं रहा है। दशहरे के दिन मंगलवार को प्रदेश के आधे हिस्से में आंधी और बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के मुताबिक, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, नर्मदापुरम और सागर संभाग के 25 जिलों में बारिश हो सकती है। मौसम के इस मिजाज से दशहरा आयोजनों पर भी असर पड़ने की आशंका है।

    बारिश की संभावना को देखते हुए भोपाल में कलाकारों ने रावण के पुतलों को बरसाती से ढक दिया है। इससे पहले 2022 में बारिश के कारण रावण के पुतले ठीक से नहीं जल पाए थे। उस समय उन्हें जलाने के लिए केरोसिन और पेट्रोल का इस्तेमाल करना पड़ा था। इस बार आयोजक पहले से ही एहतियात बरत रहे हैं।

    इन 25 जिलों में बारिश की संभावना

    मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के दौरान भोपाल, इंदौर, उज्जैन, आलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, बैतूल, देवास, शाजापुर, आगर-मालवा, राजगढ़, रायसेन, सागर, विदिशा, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में बारिश का अनुमान जताया है।

    मौसम में बदलाव की वजह चक्रवाती परिसंचरण (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) और ट्रफ को बताया गया है। इनके प्रभाव से प्रदेश में अगले चार दिन, यानी 23 अक्टूबर तक, कहीं-कहीं बारिश का दौर जारी रह सकता है। इस दौरान 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की भी संभावना है।

    दूसरी ओर, प्रदेश के पूर्वी हिस्से में मौसम अपेक्षाकृत साफ रह सकता है। जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग के जिलों में धूप निकलने के आसार हैं।

    कई जिलों में रात का तापमान 20 डिग्री से नीचे

    बारिश के बीच प्रदेश के कई इलाकों में रात का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे बना हुआ है। बीती रात छिंदवाड़ा में न्यूनतम तापमान 17.4 डिग्री, कटनी के करौंदी में 17.8 डिग्री, आलीराजपुर और गुना में 18 डिग्री, अमरकंटक में 18.4 डिग्री तथा नीमच के मरुखेड़ा में 18.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    वहीं, दिन में कुछ जिलों में गर्मी का असर बना हुआ है। खंडवा, उज्जैन, खरगोन, रतलाम, राजगढ़ और रायसेन में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया।

    गुना में एक दिन में साढ़े चार इंच बारिश

    प्रदेश में पिछले चार दिनों से आंधी और बारिश का सिलसिला जारी है। गुना में एक ही दिन में करीब साढ़े चार इंच बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा इंदौर, शाजापुर, सीहोर, मंदसौर, उज्जैन, आगर-मालवा, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, बैतूल और छिंदवाड़ा में भी बारिश हुई।

    इंदौर में सोमवार को दिनभर रुक-रुककर पानी गिरता रहा। प्रदेश के दूसरे जिलों में भी इसी तरह का मौसम बना रहा। बीते सप्ताह पूर्वी और पश्चिमी मध्यप्रदेश के कई हिस्सों में आंधी-बारिश का असर देखा गया, जबकि पिछले चार दिनों में कुछ इलाकों में तेज बारिश भी हुई।

    3 अक्टूबर को लौट चुका है मानसून, फिर भी जारी बारिश


    मध्यप्रदेश से मानसून की विदाई 3 अक्टूबर को ही हो चुकी है। इस बार एक ही दिन में पूरे प्रदेश से मानसून लौट गया था। इसके बावजूद चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ जैसे मौसमी सिस्टम सक्रिय होने के कारण बारिश जारी है।

  • दशहरा 2026 कब मनाया जाएगा, 20 या 21 अक्टूबर? जानें विजयादशमी की सही तारीख, दिल्ली में पूजा का शुभ मुहूर्त और रावण दहन का समय

    दशहरा 2026 कब मनाया जाएगा, 20 या 21 अक्टूबर? जानें विजयादशमी की सही तारीख, दिल्ली में पूजा का शुभ मुहूर्त और रावण दहन का समय


    नई दिल्ली ।
    दशहरा यानी विजयादशमी हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक माना जाता है। साल 2026 में दशहरे की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस बना हुआ है। कुछ लोग 20 अक्टूबर को त्योहार मनाने की तैयारी कर रहे हैं, जबकि कुछ स्थानों पर 21 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी। इसकी वजह आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि का दो दिनों तक रहना है। उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में दशहरा 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा, जबकि पश्चिम बंगाल में स्थानीय धार्मिक परंपराओं के अनुसार 21 अक्टूबर को विजयादशमी का उत्सव होगा।

    हिंदू पंचांग के अनुसार, नई दिल्ली में दशमी तिथि 20 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट पर शुरू होगी और 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर समाप्त होगी। इसी वजह से अलग-अलग क्षेत्रों में त्योहार मनाने की तारीख में अंतर देखने को मिल रहा है। दिल्ली और उत्तर भारत के कई हिस्सों में 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी। वहीं, पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा की परंपराओं के अनुसार 21 अक्टूबर को मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा। इस अवसर पर सिंदूर खेला जैसी पारंपरिक रस्में भी निभाई जाती हैं।

    विजयादशमी 2026 का शुभ मुहूर्त
    दशहरे के दिन विजय मुहूर्त में पूजा करना शुभ माना जाता है। इस दौरान लोग अपनी धार्मिक परंपराओं के अनुसार भगवान श्रीराम, मां दुर्गा और शस्त्रों की पूजा करते हैं। नई दिल्ली में 20 अक्टूबर को विजय मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 59 मिनट से 2 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में पूजा और अन्य शुभ कार्य किए जा सकते हैं।

    वहीं, अपराह्न पूजा का समय दोपहर 1 बजकर 19 मिनट से 3 बजकर 37 मिनट तक बताया गया है। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय, सूर्यास्त और स्थानीय पंचांग के आधार पर मुहूर्त में अंतर हो सकता है। इसलिए पूजा करने से पहले अपने क्षेत्र के पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।

    दशहरे पर रावण दहन कब होगा?
    उत्तर भारत में दशहरे के अवसर पर 20 अक्टूबर की शाम को रामलीला के समापन के बाद रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाएगा। इस परंपरा को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। आमतौर पर रावण दहन सूर्यास्त के बाद किया जाता है, लेकिन इसके लिए पूरे देश में एक समान समय निर्धारित नहीं है।

    अलग-अलग शहरों में रामलीला समितियां और स्थानीय आयोजक अपने कार्यक्रम के अनुसार रावण दहन का समय तय करते हैं। ऐसे में आयोजन में शामिल होने वाले लोगों को अपने शहर की रामलीला या संबंधित समिति से समय की जानकारी लेनी चाहिए।

    क्यों मनाया जाता है दशहरा?

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी के दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था और माता सीता को उसकी कैद से मुक्त कराया था। इसी विजय की स्मृति में दशहरे पर रावण दहन की परंपरा निभाई जाती है। यह पर्व लोगों को सत्य, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

    दशहरे का संबंध मां दुर्गा और महिषासुर के युद्ध से भी है। मान्यता है कि मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कर उसके अत्याचारों से संसार को मुक्ति दिलाई थी। इसी कारण विजयादशमी को शक्ति, साहस और अन्याय पर विजय का प्रतीक भी माना जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इस पर्व को स्थानीय रीति-रिवाजों और धार्मिक परंपराओं के अनुसार मनाया जाता है।

    शस्त्र पूजन और शमी पूजा का महत्व

    दशहरे पर शस्त्र पूजन और शमी वृक्ष की पूजा करने की परंपरा भी प्रचलित है। कई जगहों पर लोग अपने वाहनों, औजारों, मशीनों और कामकाज में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की पूजा करते हैं। व्यापारी वर्ग इस दिन बही-खातों और कारोबार से जुड़ी वस्तुओं का पूजन करता है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार, विजयादशमी पर शुभ कार्यों की शुरुआत करना सफलता और समृद्धि की कामना से जुड़ा है। हालांकि, पूजा की विधि, मुहूर्त और त्योहार मनाने के तरीके अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचलित परंपराओं के अनुसार बदल सकते हैं। इसलिए दशहरे की तैयारी करते समय स्थानीय पंचांग और क्षेत्रीय रीति-रिवाजों का ध्यान रखना चाहिए।

  • दशहरे पर इंदौर-उज्जैन समेत MP के पश्चिमी हिस्से में बारिश के आसार, 15 जिलों में अलर्ट

    दशहरे पर इंदौर-उज्जैन समेत MP के पश्चिमी हिस्से में बारिश के आसार, 15 जिलों में अलर्ट


    भोपाल। मध्यप्रदेश में दशहरे के दिन बारिश उत्सव के रंग में खलल डाल सकती है। मौसम विभाग ने 20 अक्टूबर को इंदौर, उज्जैन, रतलाम समेत पश्चिमी मध्यप्रदेश के कई जिलों में आंधी-बारिश की संभावना जताई है। इस दौरान हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। सोमवार को भी प्रदेश के 15 जिलों में बारिश का अनुमान है। इनमें भोपाल, उज्जैन, आगर-मालवा, राजगढ़, शाजापुर, देवास, सीहोर, विदिशा, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर और दमोह शामिल हैं।

    मौसम विभाग के अनुसार, 20, 21 और 22 अक्टूबर को पश्चिमी मध्यप्रदेश में बारिश का दौर जारी रह सकता है। वहीं, पूर्वी हिस्से में मौसम अपेक्षाकृत साफ रहने और धूप निकलने की संभावना है।

    दशहरे पर इन जिलों में बारिश के आसार

    दशहरे के दिन इंदौर, उज्जैन, रतलाम, झाबुआ, आलीराजपुर, बड़वानी, धार, खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा, देवास, शाजापुर, हरदा और बैतूल में बारिश हो सकती है। इन इलाकों में गरज-चमक के साथ तेज हवा चलने की आशंका भी है। ऐसे में दशहरा आयोजन, रावण दहन और खुले मैदानों में होने वाले कार्यक्रमों के दौरान मौसम पर नजर रखना जरूरी होगा।

    रविवार को तेज बारिश से पंडालों में भरा पानी

    रविवार को इंदौर, सीहोर और शाजापुर सहित कई इलाकों में तेज बारिश हुई। सीहोर में बारिश और हवा के कारण माता के पंडालों के टेंट उड़ गए। महू में गरबा और माता की स्थापना के लिए तैयार किए गए पंडालों में पानी भर गया। बारिश के कारण रावण के पुतले भी भीग गए।

    गुना शहर में रविवार शाम अचानक मौसम बदला और आधे घंटे से अधिक समय तक तेज बारिश हुई। बेमौसम बरसात से शहर की प्रमुख सड़कों पर पानी भर गया, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

    ट्रफ और चक्रवाती परिसंचरण से बदला मौसम

    मौसम विभाग के मुताबिक, पश्चिमी मध्यप्रदेश के ऊपर से एक ट्रफ गुजर रही है। इसके साथ ही चक्रवाती परिसंचरण यानी साइक्लोनिक सर्कुलेशन का प्रभाव भी बना हुआ है। इन मौसमी प्रणालियों के कारण प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में आंधी और बारिश की गतिविधियां बढ़ी हैं। अगले चार दिन तक इस क्षेत्र में रुक-रुककर बारिश होने की संभावना है।

    3 अक्टूबर को लौट चुका है मानसून, फिर भी बारिश

    मध्यप्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई 3 अक्टूबर को हो चुकी है, लेकिन सक्रिय मौसमी प्रणालियों के कारण बारिश का सिलसिला फिर शुरू हो गया है। बीते एक सप्ताह से पूर्वी और पश्चिमी, दोनों हिस्सों के कई जिलों में आंधी-बारिश दर्ज की गई है। पिछले चार दिनों में कुछ इलाकों में तेज बारिश भी हुई है।

    मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, अक्टूबर में गर्मी, बारिश और रात के तापमान में गिरावट का मिला-जुला असर सामान्य तौर पर देखने को मिलता है। इस बार भी यही स्थिति बन रही है। महीने की शुरुआत में मौसम साफ होने और दिन में धूप निकलने के साथ रातों में ठंडक महसूस की गई, जबकि अब कई जिलों में फिर बारिश हो रही है। इस साल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिन तक सक्रिय रहा।

  • दिल्ली में दशहरे पर 30 फुट का कॉकरोच पुतला जलाने की तैयारी, विवाद के बीच आयोजकों ने बताई वजह

    दिल्ली में दशहरे पर 30 फुट का कॉकरोच पुतला जलाने की तैयारी, विवाद के बीच आयोजकों ने बताई वजह

    नई दिल्ली ।दिल्ली के पीतमपुरा में इस बार दशहरे पर रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों के साथ 30 फुट ऊंचा कॉकरोच का पुतला भी जलाया जाएगा। इस फैसले को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। कुछ लोगों ने धार्मिक आयोजन में कॉकरोच के पुतले को शामिल करने की प्रासंगिकता पर सवाल उठाए हैं, जबकि आयोजकों ने इसे स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाने की पहल बताया है। उनका कहना है कि इस कदम का उद्देश्य किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं है।

    पीतमपुरा में वार्षिक रामलीला का आयोजन करने वाली श्री केशव रामलीला समिति ने कॉकरोच को गंदगी का प्रतीक बताया है। समिति के अनुसार, दशहरे के मौके पर इस पुतले का दहन करने के जरिए लोगों को साफ-सफाई के महत्व के बारे में संदेश दिया जाएगा। आयोजकों ने इस पहल को स्वच्छ भारत और स्वच्छ दिल्ली अभियानों से जोड़ते हुए कहा कि इसका उद्देश्य लोगों को अपने आसपास स्वच्छ वातावरण बनाए रखने के लिए प्रेरित करना है।

    समिति के अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के विधायक अशोक गोयल ने इस फैसले के पीछे किसी राजनीतिक मकसद से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि पुतला दहन का उद्देश्य बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देने के साथ स्वच्छता की अहमियत को भी सामने लाना है। उनके मुताबिक, कॉकरोच के पुतले को रावण की सेना में शामिल असुरों के बीच दिखाया जाएगा। आयोजकों का मानना है कि इस प्रतीक के माध्यम से सफाई से जुड़ा संदेश लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।

    हालांकि, इस फैसले पर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोगों ने सवाल उठाया है कि दशहरा जैसे पारंपरिक धार्मिक उत्सव में समसामयिक मुद्दों को शामिल करना कितना उचित है। उनका कहना है कि त्योहार का मूल संदेश बुराई पर अच्छाई की जीत है और आयोजन में किसी नए प्रतीक को शामिल करने से धार्मिक परंपरा के अर्थ को लेकर बहस पैदा हो सकती है।

    एक सोशल मीडिया यूजर ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और इस परंपरा को मौजूदा राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का मंच नहीं बनाया जाना चाहिए। उसने यह भी कहा कि त्योहारों का उद्देश्य लोगों को एकजुट करना होना चाहिए, न कि उनके बीच राजनीतिक मतभेदों को बढ़ाना।

    कुछ अन्य लोगों ने भी इस पहल पर आपत्ति जताई। एक यूजर ने आशंका जताई कि रावण की तुलना कॉकरोच से करने से धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं। एक अन्य यूजर ने आरोप लगाया कि धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल अपने हितों के लिए किया जा रहा है। इन प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट है कि कॉकरोच के पुतले को लेकर चर्चा केवल स्वच्छता के संदेश तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें धार्मिक परंपरा और सार्वजनिक आयोजनों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं।

    यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब कॉकरोच जनता पार्टी नाम से पहचाने जाने वाला समूह भी विरोध प्रदर्शनों में शामिल रहा है। इस समूह ने शुरुआत में पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ प्रदर्शन किया था। बाद में यह मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे प्रदर्शनों में भी शामिल हो गया। हालांकि, समिति ने अपने फैसले को इन घटनाक्रमों से जोड़ने से इनकार किया है।

    इस पहल पर पर्यावरण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। एक सोशल मीडिया यूजर ने दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या का उल्लेख करते हुए पूछा कि जब शहर पहले से प्रदूषण से जूझ रहा है, तो इतने बड़े पुतले को जलाने की जरूरत क्यों है। इस तरह आयोजन को लेकर स्वच्छता के संदेश, धार्मिक भावनाओं और पर्यावरण संबंधी चिंताओं पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

  • शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से, हाथी पर मां दुर्गा का आगमन और 10 दिनों तक पूजा का कारण जानें

    शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से, हाथी पर मां दुर्गा का आगमन और 10 दिनों तक पूजा का कारण जानें

    नई दिल्ली । शारदीय नवरात्रि का पर्व इस साल 11 अक्टूबर 2026, रविवार से शुरू होगा। देशभर में इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाएगी। भक्त व्रत और साधना के साथ माता रानी से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करेंगे। इस बार नवरात्रि को लेकर खास बात यह है कि पर्व सामान्य नौ दिनों के बजाय 10 दिनों तक चलेगा। तिथियों में वृद्धि होने के कारण नवरात्रि की अवधि एक दिन बढ़ गई है और इसका समापन 20 अक्टूबर को विजयादशमी तथा दशहरा के साथ होगा।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि की शुरुआत जिस वार से होती है, उसके आधार पर मां दुर्गा के वाहन के आगमन की मान्यता जुड़ी होती है। इस बार नवरात्रि रविवार से शुरू हो रही है, इसलिए मां दुर्गा के हाथी पर आगमन की मान्यता है। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में हाथी को स्थिरता, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। माता के हाथी पर आने को अच्छी वर्षा और धन-धान्य में वृद्धि का संकेत भी माना जाता है।

    नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना की जाएगी। इस दिन मां शैलपुत्री की पूजा होगी। घटस्थापना का मुहूर्त सुबह 6 बजकर 19 मिनट से 10 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक बताया गया है। भक्त इस दौरान विधि-विधान से कलश स्थापना कर नवरात्रि की पूजा की शुरुआत कर सकते हैं।

    इस बार 10 दिनों तक नवरात्रि चलने का कारण तिथियों में वृद्धि है। पंचांग के अनुसार सप्तमी तिथि दो दिन रहने के कारण पर्व की अवधि एक दिन बढ़ गई है। हालांकि नवरात्रि के धार्मिक आधार में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की ही पूजा की जाएगी। यानी पूजा के क्रम में नौ देवियों की आराधना ही रहेगी, लेकिन तिथियों की गणना के कारण नवरात्रि का पूरा पर्व 10 कैलेंडर दिनों में संपन्न होगा।

    11 अक्टूबर को प्रतिपदा के दिन मां शैलपुत्री की पूजा और घटस्थापना होगी। 12 अक्टूबर को द्वितीया पर मां ब्रह्मचारिणी, 13 अक्टूबर को तृतीया पर मां चंद्रघंटा और 14 अक्टूबर को चतुर्थी पर मां कूष्मांडा की आराधना होगी। 15 अक्टूबर को पंचमी के दिन मां स्कंदमाता और 16 अक्टूबर को षष्ठी पर मां कात्यायनी की पूजा की जाएगी।

    17 अक्टूबर को सप्तमी तिथि पर मां कालरात्रि की पूजा होगी। 18 अक्टूबर को महानिशा पूजा और दुर्गा अष्टमी होगी, जबकि सप्तमी तिथि भी जारी रहेगी। 19 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी तिथि का संयोग रहेगा तथा इस दिन कन्या पूजन किया जाएगा। इसके बाद 20 अक्टूबर को नवमी तिथि के बाद विजयादशमी और दशहरा मनाया जाएगा।

    शारदीय नवरात्रि को शक्ति की उपासना का प्रमुख पर्व माना जाता है। इन दिनों भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा के साथ व्रत और साधना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवी की आराधना से नकारात्मकता दूर होती है और जीवन में सुख, शांति, समृद्धि तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। नवरात्रि का समय आत्मसंयम, श्रद्धा और आध्यात्मिक साधना के लिए भी विशेष माना जाता है। इस बार 10 दिनों तक चलने वाला यह पर्व 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ संपन्न होगा।

  • दशहरा-दिवाली पर चीनी की कीमतें नियंत्रण में रखने की तैयारी, सरकार और उद्योग ने पर्याप्त आपूर्ति का दिया भरोसा

    दशहरा-दिवाली पर चीनी की कीमतें नियंत्रण में रखने की तैयारी, सरकार और उद्योग ने पर्याप्त आपूर्ति का दिया भरोसा


    नई दिल्ली ।दशहरा और दिवाली समेत आगामी त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर चीनी उपलब्ध कराने के लिए सरकार और चीनी उद्योग मिलकर काम कर रहे हैं। त्योहारों के दौरान चीनी की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रण में रखने पर जोर दिया जा रहा है।

    इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा कि त्योहारी मौसम में उपभोक्ताओं को उचित दर पर चीनी उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि दशहरा और इसके बाद दिवाली सहित कई प्रमुख त्योहार आने वाले हैं, ऐसे में मांग में संभावित बढ़ोतरी के बावजूद चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर नजर रखना जरूरी है।

    उन्होंने बताया कि घरेलू बाजार में फिलहाल चीनी की आपूर्ति पर्याप्त बनी हुई है। खुदरा कीमतों में भी नरमी की शुरुआत हो चुकी है और आने वाले सप्ताहों में इसमें और कमी आने की संभावना जताई गई है।

    चीनी की कीमतों में कमी का असर खुदरा बाजार में पूरी तरह दिखाई देने में कुछ समय लग सकता है। इसका कारण एक्स-मिल कीमतों और उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाली खुदरा कीमतों के बीच रहने वाला अंतर है। मिल स्तर पर कीमत कम होने के बाद इसका लाभ आपूर्ति श्रृंखला के अलग-अलग चरणों से गुजरते हुए धीरे-धीरे खुदरा बाजार तक पहुंचता है।

    बताया गया है कि एक्स-मिल चीनी की कीमतों में करीब 25 से 30 प्रतिशत तक की कमी आ चुकी है। पूरे देश में एक्स-मिल कीमत का औसत वर्तमान में करीब 4,450 रुपये प्रति क्विंटल बताया गया है।

    एक्स-मिल कीमत वह दर होती है जिस पर चीनी मिल से निकलते समय चीनी की बिक्री की जाती है। इसके बाद परिवहन, भंडारण, थोक कारोबार और खुदरा स्तर से गुजरने के कारण अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचने वाली कीमत अलग हो सकती है।

    त्योहारी सीजन में चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने के कारण चीनी की जरूरत भी अधिक होती है। ऐसे में सरकार और उद्योग के सामने पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रखने के साथ कीमतों को स्थिर बनाए रखने की चुनौती रहती है।

    चीनी उद्योग की ओर से कहा गया है कि मौजूदा स्थिति में घरेलू बाजार में आपूर्ति को लेकर कोई बड़ी कमी नहीं है। एक्स-मिल स्तर पर कीमतों में आई गिरावट का असर आने वाले समय में खुदरा बाजार पर भी दिखाई देने की उम्मीद है।

    बाजार में कम लागत के अनुरूप कीमतों में बदलाव होने के साथ उपभोक्ताओं को इसका लाभ मिलने की संभावना है। हालांकि, मिल स्तर से खुदरा बाजार तक कीमतों में बदलाव पहुंचने में कुछ समय लग सकता है।

    त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने के बावजूद सरकार और उद्योग का लक्ष्य चीनी की उपलब्धता बनाए रखना और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त कीमत का दबाव नहीं पड़ने देना है। मौजूदा एक्स-मिल कीमतों में आई गिरावट के आधार पर आने वाले समय में खुदरा चीनी की कीमतों में भी नरमी की उम्मीद जताई गई है।

    इससे दशहरा और दिवाली के दौरान चीनी की बढ़ती मांग के बीच उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावना है। सरकार और उद्योग की ओर से आपूर्ति तथा कीमतों पर लगातार नजर रखने की बात कही गई है।

  • मोक्ष के द्वार खोलेंगी ये 5 डुबकियां नोट करें साल 2026 में गंगा स्नान के महायोग

    मोक्ष के द्वार खोलेंगी ये 5 डुबकियां नोट करें साल 2026 में गंगा स्नान के महायोग


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में पवित्र नदियों में स्नान करना न केवल शरीर के शुद्धिकरण का तरीका है बल्कि यह आत्मा के उद्धार का मार्ग भी माना जाता है। शास्त्रों में उल्लेख है कि विशेष तिथियों पर इन नदियों के जल में अमृत’ तत्व का संचार होता है और उस समय स्नान करने से व्यक्ति को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है। साल 2026 में भी कुछ ऐसे खास अवसर आ रहे हैं जब गंगा यमुना और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से अधिक पुण्य प्राप्त होता है। आइए जानते हैं उन पांच प्रमुख तिथियों के बारे में जब गंगा स्नान से आपके जीवन के सभी कष्ट दूर हो सकते हैं और मोक्ष के द्वार खुल सकते हैं।

    मकर संक्रांति 14 जनवरी 2026

    साल का पहला बड़ा स्नान सूर्य के उत्तरायण होने पर होता है। इस दिन विशेष रूप से प्रयागराज और हरिद्वार में गंगा स्नान का महत्व है। मान्यता है कि मकर संक्रांति पर तिल का दान और गंगा स्नान करने से अक्षय पुण्य मिलता है और व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं। इस दिन विशेष रूप से गंगा में स्नान करके दान-पुण्य करने से जीवन में सुख-शांति का वास होता है।

    मौनी अमावस्या 18 जनवरी 2026

    माघ महीने की यह अमावस्या वर्ष की सबसे बड़ी अमावस्या मानी जाती है। इस दिन खासकर मौन रहकर जप और गंगा स्नान करने से मुनि पद की प्राप्ति होती है। इस तिथि को पितृ दोष से मुक्ति और आत्म-चिंतन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। यह दिन आपके जीवन की समस्याओं को हल करने और आत्मा के शुद्धिकरण के लिए बेहद शुभ है।

    माघी पूर्णिमा 1 फरवरी 2026

    माघी पूर्णिमा पर गंगा में स्नान करना विशेष फलदायी माना जाता है। इस दिन स्नान करने से भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है और माघ स्नान के संकल्प से भक्त अपने व्रत का समापन करते हैं। यह समय स्वर्ग लोक की प्राप्ति के लिए अनुकूल होता है। माघी पूर्णिमा के दिन किए गए दान और पुण्य का फल लंबी अवधि तक मिलता है।
    गंगा दशहरा 25 मई 2026 गंगा दशहरा वह पर्व है जब मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण की कथा सुनाई जाती है। इस दिन विशेष रूप से गंगा स्नान करने से व्यक्ति के दस प्रकार के पाप कायिक वाचिक और मानसिक का नाश होता है।

    गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान करने से न केवल शारीरिक शुद्धता मिलती है बल्कि यह पवित्रता भी प्रदान करता है जिससे जीवन में एक नवीनीकरण और आंतरिक शांति का अहसास होता है।कार्तिक पूर्णिमा 24 नवंबर 2026 कार्तिक पूर्णिमा को ‘देव दीपावली’ और ‘त्रिपुरी पूर्णिमा’ भी कहा जाता है। इस दिन पवित्र गंगा में स्नान और दीपदान करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु की कृपा से घर में लक्ष्मी का स्थाई वास होता है। साथ ही इस दिन का स्नान व्यक्ति के पापों को नष्ट करता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।

    दान का महत्व

    इन विशेष तिथियों पर गंगा स्नान के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार अनाज वस्त्र तिल या अन्य सामग्री का दान जरूर करें। शास्त्रों के अनुसार बिना दान के स्नान का पुण्य फल स्थिर नहीं माना जाता है। दान से स्नान के पुण्य में वृद्धि होती है और यह आपके जीवन में समृद्धि और शांति का कारण बनता है।इन प्रमुख तिथियों पर गंगा स्नान के साथ-साथ दान-पुण्य करने से न केवल आत्मा का शुद्धिकरण होता है बल्कि जीवन की सारी बाधाएं दूर होती हैं। इन अवसरों का सही लाभ उठाकर आप अपने जीवन को पुण्य और मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर कर सकते हैं।