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  • वेनेजुएला भूकंप संकट में भारत की बड़ी मानवीय पहल, ‘ऑपरेशन एमिस्टेड’ के तहत राहत और चिकित्सा सहायता से हजारों जिंदगियों को संबल

    वेनेजुएला भूकंप संकट में भारत की बड़ी मानवीय पहल, ‘ऑपरेशन एमिस्टेड’ के तहत राहत और चिकित्सा सहायता से हजारों जिंदगियों को संबल

    नई दिल्ली । उत्तरी वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के बाद उत्पन्न गंभीर मानवीय संकट के बीच भारत ने तेजी से राहत अभियान शुरू करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग की मिसाल पेश की है। 7.5 तीव्रता के इस भूकंप से व्यापक तबाही हुई है, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की मौत और लापता होने की स्थिति ने संकट को और गहरा दिया है। इसी पृष्ठभूमि में भारत सरकार ने ‘ऑपरेशन एमिस्टेड’ के तहत आपात राहत और चिकित्सा सहायता भेजी है।

    भारतीय वायुसेना के दो C-17 ग्लोबमास्टर विमान राहत सामग्री लेकर वेनेजुएला पहुंचे हैं। यह सामग्री कोटे डी आइवर के अबिदजान के रास्ते प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचाई गई है। इस अभियान का उद्देश्य आपदा प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत राहत पहुंचाकर जीवन बचाने और चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करना है।

    इस राहत मिशन में विदेश मंत्रालय द्वारा लगभग 6 टन आवश्यक दवाइयां और आपातकालीन मेडिकल सामग्री भेजी गई है। इसके साथ ही एक विशेष भारतीय फील्ड अस्पताल टीम भी तैनात की गई है, जिसमें कुल 41 सदस्य शामिल हैं। इस टीम में मेडिकल अफसर, पैरामेडिकल स्टाफ और विशेषज्ञ डॉक्टर शामिल हैं, जो गंभीर रूप से घायल लोगों के उपचार, ट्रॉमा केयर और आपात सर्जरी जैसी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।

    भारत की इस मानवीय पहल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा अत्याधुनिक ‘भीष्म क्यूब’ तकनीक है, जिसे आपदा क्षेत्रों में तेजी से चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए विकसित किया गया है। इस मिशन के तहत दो भीष्म क्यूब वेनेजुएला भेजे गए हैं, जो एक कॉम्पैक्ट और मोबाइल अस्पताल प्रणाली के रूप में कार्य करते हैं। यह तकनीक कम समय में स्थापित होकर बड़े पैमाने पर मरीजों को उपचार सुविधा देने में सक्षम है।

    भीष्म क्यूब की क्षमता के अनुसार यह एक साथ बड़ी संख्या में मरीजों को ट्रॉमा केयर, इमरजेंसी सर्जरी और आईसीयू स्तर की चिकित्सा सुविधा प्रदान कर सकता है। इसमें पोर्टेबल वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम और आधुनिक डायग्नोस्टिक उपकरण शामिल हैं, जिससे आपदा के समय तुरंत चिकित्सा सहायता सुनिश्चित की जा सकती है।

    वेनेजुएला में भूकंप के बाद स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है। कई शहरों और कस्बों में इमारतें ढह गई हैं और राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी है। मलबे के नीचे फंसे लोगों को निकालने के लिए स्थानीय प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां संयुक्त रूप से प्रयास कर रही हैं।

    इस आपदा में भारी जनहानि और व्यापक विस्थापन की स्थिति ने मानवीय संकट को और गंभीर बना दिया है। ऐसे समय में भारत की त्वरित सहायता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है, जो आपदा प्रबंधन और वैश्विक सहयोग की दिशा में एक मजबूत संदेश देता है।

    भारत का यह राहत अभियान न केवल चिकित्सा सहायता तक सीमित है, बल्कि यह आपदा प्रभावित लोगों के जीवन को बचाने और पुनर्वास प्रयासों को गति देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ‘ऑपरेशन एमिस्टेड’ के माध्यम से भारत ने एक बार फिर वैश्विक मानवीय सहयोग में अपनी सक्रिय भूमिका को रेखांकित किया है।

  • भूकंप के झटकों से उबर नहीं पा रहा बेनेजुएला… आज भी आया 5.6 तीव्रता का भूकंप, अब तक 1430 मौतें

    भूकंप के झटकों से उबर नहीं पा रहा बेनेजुएला… आज भी आया 5.6 तीव्रता का भूकंप, अब तक 1430 मौतें


    कराकस।
    वेनेजुएला (Venezuela) भूकंप (Earthquake) के झटकों से उबरता नहीं दिख रहा. बीते बुधवार को आए दो विनाशकारी भूकंप (Two devastating Earthquakes) के झटकों के बाद अब भी वेनेजुएला में भूकंप के झटके आ रहे हैं. शनिवार के बाद अब आज रविवार को भी वेनेजुएला में भूकंप के झटके महसूस किए गए. इससे लोग दहशत में आ गए. इधर बुधवार को आए दो विनाशकारी भूंकप के कारण वेनेजुएला में हजारों लोगों की मौत होने की बात कही जा रही है. आधिकारिक रूप से अभी तक 1430 लोगों की मौत का आंकड़ा सामने आया है. हजारों लोग घायल है. हजारों लापता बताए जा रहे हैं. रेस्क्यू ऑपरेशन अभी भी जारी है।

    नेशनल असेंबली के अध्यक्ष जॉर्ज रोड्रिग्ज ने शनिवार को बताया कि बुधवार को आए भूकंप से अभी तक 1,430 लोग मारे गए और 3,238 लोग घायल हुए>


    आज वेनेजुएला में 5.6 तीव्रता का भूकंप आया

    रविवार सुबह वेनेजुएला में 5.6 की तीव्रता का भूकंप आया. शुरुआती जानकारी के अनुसार 5.6 तीव्रता का यह भूकंप वेनेजुएला के एल लिमोन से लगभग 30 किमी दूर उत्तर पूर्व में आया. स्थानीय समय 3 बजकर 20 मिनट पर भूंकप आया है. इससे पहले शनिवार सुबह वेनेजुएला में 4.1 तीव्रता का भूकंप आया था।

    वेनेजुएला की भूकंप अनुसंधान संस्था (फनविसिस) ने बताया कि देश के मध्य हिस्से में 4.1 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया. यह भूकंप ऐसे समय आया है जब लोग इस हफ्ते की शुरुआत में आए दो बड़े और विनाशकारी भूकंपों के बाद पहले से ही डरे हुए हैं।

    बुधवार को आए दो शक्तिशाली भूकंपों के बाद इस शहर को आपदा प्रभावित क्षेत्र घोषित किया गया था, क्योंकि यहां काफी नुकसान हुआ था. अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को आया भूकंप जमीन से सिर्फ पांच किलोमीटर नीचे था. इतनी कम गहराई वाले भूकंप अक्सर ज्यादा तेज महसूस होते हैं और इमारतों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है।

    काराकस और आसपास के इलाकों के लोगों ने भी झटके महसूस किए. कई लोग डर के कारण इमारतों से बाहर निकल आए, क्योंकि उन्हें और नुकसान होने या इमारतें गिरने का डर था. यह भूकंप बुधवार को आए दो बड़े भूकंपों के कुछ ही दिन बाद आया, जिनसे कई जगह भारी तबाही हुई थी. कई इमारतें गिर गईं, भूस्खलन हुआ और लोगों की मौत भी हुई.

  • 2004 की सुनामी से लेकर चिली तक, दुनिया के सबसे शक्तिशाली भूकंपों की कहानी

    2004 की सुनामी से लेकर चिली तक, दुनिया के सबसे शक्तिशाली भूकंपों की कहानी


    नई दिल्ली । प्रकृति की सबसे विनाशकारी घटनाओं में भूकंप का नाम सबसे ऊपर आता है। कुछ सेकंड या मिनट तक आने वाले ये झटके शहरों को मलबे में बदल सकते हैं और लाखों लोगों की जिंदगी पर स्थायी असर छोड़ सकते हैं। हाल ही में वेनेजुएला में आए शक्तिशाली भूकंपों ने एक बार फिर दुनिया को याद दिलाया है कि प्रकृति के सामने इंसानी तकनीक और विकास कितने सीमित हैं।

    हालांकि वेनेजुएला में आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के भूकंप बेहद शक्तिशाली थे, लेकिन इतिहास में दर्ज सबसे बड़े भूकंपों की सूची में इनका स्थान नहीं है। आइए जानते हैं दुनिया के कुछ सबसे शक्तिशाली और विनाशकारी भूकंपों के बारे में

    1960 का ग्रेट चिली भूकंप: अब तक का सबसे शक्तिशाली झटका
    दुनिया का सबसे शक्तिशाली दर्ज भूकंप 22 मई 1960 को चिली के बायोबियो क्षेत्र में आया था। इसकी तीव्रता 9.5 मापी गई थी। “ग्रेट चिली अर्थक्वेक” के नाम से प्रसिद्ध इस आपदा ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई। भूकंप के साथ आई सुनामी ने प्रशांत महासागर के कई देशों को प्रभावित किया और करीब 1,655 लोगों की मौत हुई।

    1964 का अलास्का भूकंप

    27 मार्च 1964 को अमेरिका के अलास्का में 9.2 तीव्रता का भूकंप आया, जो लगभग चार मिनट तक महसूस किया गया। यह उत्तरी अमेरिका के इतिहास का सबसे शक्तिशाली भूकंप माना जाता है। भूकंप और उसके बाद आई सुनामी से करीब 130 लोगों की जान चली गई।

    2004 की सुनामी: 2.8 लाख से ज्यादा मौतें

    26 दिसंबर 2004 को इंडोनेशिया के सुमात्रा तट के पास समुद्र के भीतर 9.1 तीव्रता का भूकंप आया। इसके बाद उत्पन्न सुनामी ने भारत, श्रीलंका, थाईलैंड और इंडोनेशिया समेत कई देशों के तटीय इलाकों में भारी तबाही मचाई। यह आधुनिक इतिहास की सबसे घातक प्राकृतिक आपदाओं में से एक थी, जिसमें 2.8 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई।

    जापान का तोहोकू भूकंप
    11 मार्च 2011 को जापान के तोहोकू क्षेत्र में 9.1 तीव्रता का भूकंप आया। इसके बाद आई विशाल सुनामी ने जापान के पूर्वी तट को बुरी तरह प्रभावित किया। इस आपदा में 15 हजार से अधिक लोगों की जान गई और फुकुशिमा परमाणु संयंत्र दुर्घटना जैसी गंभीर स्थिति भी पैदा हुई।

    रूस का कामचटका क्षेत्र
    रूस के कामचटका क्षेत्र में 1952 में 9.0 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप दर्ज किया गया था। इस आपदा में हजारों लोगों के प्रभावित होने की खबरें सामने आईं। वहीं हाल के वर्षों में भी इस क्षेत्र में बड़े भूकंप दर्ज किए गए हैं, जो इसे दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में शामिल करते हैं।

    भारत का सबसे बड़ा भूकंप
    भारत में दर्ज सबसे शक्तिशाली भूकंप 15 अगस्त 1950 को अरुणाचल प्रदेश और असम क्षेत्र में आया था। इसकी तीव्रता 8.6 मापी गई थी। इस भूकंप ने पूर्वोत्तर भारत में भारी तबाही मचाई और सैकड़ों लोगों की जान चली गई।

    अन्य बड़े भूकंप

    1906 में इक्वाडोर के एस्मेराल्डास क्षेत्र में 8.8 तीव्रता का भूकंप, लगभग 1,500 मौतें।

    2010 में चिली के बायोबियो क्षेत्र में 8.8 तीव्रता का भूकंप, 500 से अधिक लोगों की मौत।

    1965 में अलास्का में 8.7 तीव्रता का भूकंप, हालांकि इसमें बड़े पैमाने पर जनहानि नहीं हुई।

    क्यों आते हैं इतने बड़े भूकंप?

    भूकंप पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियों के कारण आते हैं। जब ये प्लेटें आपस में टकराती, खिसकती या दबाव बनाती हैं, तब ऊर्जा अचानक मुक्त होती है और धरती कांप उठती है। प्रशांत महासागर के आसपास स्थित “रिंग ऑफ फायर” दुनिया का सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्र माना जाता है, जहां अधिकांश बड़े भूकंप आते हैं।
  • MP: बैतूल के मुलताई और पाढुर्णा में महसूस किए गए 3.9 तीव्रता के भूकंप के झटके, दहशत में आए लोग

    MP: बैतूल के मुलताई और पाढुर्णा में महसूस किए गए 3.9 तीव्रता के भूकंप के झटके, दहशत में आए लोग


    बैतूल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बैतूल जिले (Betul district) में शनिवार रात को भूकम्प (Earthquake) के हल्के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल (Richter scale) पर जिनकी तीव्रता 3.9 मापी गई। इस बारे में नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) की तरफ से दी गई जानकारी में बताया गया कि, ये झटके रात 9 बजकर 31 मिनट व 2 सेकंड पर दर्ज किए गए। इस दौरान बैतूल के अलावा मुलताई (Multai), पांढुर्णा (Pandhurna) और आसपास के अन्य क्षेत्रों में धरती में कंपन महसूस किया गया। भूकंप के कारण कुछ देर के लिए लोगों में हल्की दहशत का माहौल बन गया।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार भूकंप का केंद्र बैतूल जिले में मुलताई के मानीखापा गांव के पास स्थित था। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, यह केंद्र पचमढ़ी से लगभग 68 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण पूर्व दिशा में जमीन से करीब 10 किलोमीटर नीचे की तरफ था। हालांकि खबर लिखे जाने तक प्राप्त जानकारी के अनुसार इन झटकों की वजह से जिले में किसी तरह के नुकसान की कोई खबर नहीं थी।

    भूकंप की तीव्रता 3.9 रिक्टर स्केल होने के बाद भी केंद्र की गहराई कम होने के कारण धरती पर कंपन ज्यादा महसूस हुआ। इस दौरान मुलताई और पांढुर्णा सहित कई इलाकों में तो लोग डर की वजह से काफी देर तक घरों के बाहर खड़े रहे। इसके बाद लोगों ने एक-दूसरे को फोन कर जानकारी ली और सुरक्षा को लेकर उनका हालचाल जाना। हालांकि राहत की बात यह रही कि खबर लिखे जाने तक किसी प्रकार की जनहानि या बड़े नुकसान की कोई सूचना सामने नहीं आई थी।

    उधर प्रशासन ने भी भूकंप को लेकर लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और सतर्क रहने की अपील की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कई दिनों से क्षेत्र में हल्के कंपन महसूस हो रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, मुख्य भूकंप के बाद आफ्टरशॉक्स की संभावना बनी रहती है। इसलिए प्रशासन ने लोगों को जर्जर भवनों से दूर रहने और सावधानी बरतने की सलाह दी है।


    उत्तराखंड के उत्तरकाशी में भी महसूस हुए भूकंप के झटके

    मध्य प्रदेश के अलावा उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद मुख्यालय क्षेत्र में भी शनिवार देर रात भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। भूकंप के कारण कुछ देर के लिए लोगों में हल्की दहशत का माहौल बन गया, हालांकि किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। जिला आपदा कंट्रोल रूम से मिली जानकारी के अनुसार रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 2.4 मापी गई। भूकंप का केंद्र जिला मुख्यालय से उत्तर-पूर्व दिशा में करीब चार किलोमीटर दूर जमीन से पांच किलोमीटर नीचे स्थित था।

    प्रशासन के मुताबिक भूकंप के झटके केवल जिला मुख्यालय क्षेत्र तक सीमित रहे और जनपद की अन्य तहसीलों में इन्हें महसूस नहीं किया गया। राहत की बात यह रही कि कहीं से भी किसी प्रकार की क्षति की सूचना सामने नहीं आई है। जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

  • J&K के डोडा क्षेत्र में सुबह-सुबह कांपी धरती, आया 4.6 तीव्रता का भूकंप

    J&K के डोडा क्षेत्र में सुबह-सुबह कांपी धरती, आया 4.6 तीव्रता का भूकंप


    जम्मू।
    जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के डोडा (Doda) क्षेत्र में रविवार की सुबह भूकंप (Earthquake) के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4.6 मापी गई। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (National Centre for Seismolog) के अनुसार, यह भूकंप सुबह 4 बजकर 32 मिनट पर आया। फिलहाल किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है।


    महाराष्ट्र के हिंगोली में भूकंप के झटके

    इससे पहले शनिवार सुबह महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र के हिंगोली जिले में 4.7 तीव्रता का भूकंप आया था। इसके झटके नांदेड और परभणी जिलों के कुछ हिस्सों में भी महसूस किए गए। अधिकारियों के अनुसार अभी तक किसी तरह के जान-माल के नुकसान की तत्काल सूचना नहीं है। हालांकि, पांगरा शिंदे गांव में कुछ घरों और सामुदायिक भवनों में दरारें आने की खबर है। हिंगोली के कलेक्टर राहुल गुप्ता ने बताया कि भूकंप सुबह 8 बजकर 45 मिनट पर दर्ज किया गया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, इसका केंद्र जमीन से करीब 10 किलोमीटर की गहराई पर हिंगोली जिले के वसमत तालुका के शिरली गांव के पास था।


    क्यों आता है भूकंप?

    पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती रहती हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती हैं और डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।


    जानें क्या है भूंकप के केंद्र और तीव्रता का मतलब?

    भूकंप का केंद्र उस स्थान को कहते हैं जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। इस स्थान पर भूकंप का कंपन ज्यादा होता है। कंपन की आवृत्ति ज्यों-ज्यों दूर होती जाती हैं, इसका प्रभाव कम होता जाता है। फिर भी यदि रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है। लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंपीय आवृत्ति ऊपर की तरफ है या दायरे में। यदि कंपन की आवृत्ति ऊपर को है तो कम क्षेत्र प्रभावित होगा।


    कैसे मापा जाता है भूकंप की तिव्रता और क्या है मापने का पैमाना?

    भूंकप की जांच रिक्टर स्केल से होती है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। रिक्टर स्केल पर भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। भूकंप को इसके केंद्र यानी एपीसेंटर से मापा जाता है। भूकंप के दौरान धरती के भीतर से जो ऊर्जा निकलती है, उसकी तीव्रता को इससे मापा जाता है। इसी तीव्रता से भूकंप के झटके की भयावहता का अंदाजा होता है।

  • विश्व में उभर सकते हैं युद्ध, आपदाएं और नई बीमारियां: ज्योतिषाचार्य पं. गौतम ने रुद्र बीसी के शेष वर्षों को लेकर दी चेतावनी

    विश्व में उभर सकते हैं युद्ध, आपदाएं और नई बीमारियां: ज्योतिषाचार्य पं. गौतम ने रुद्र बीसी के शेष वर्षों को लेकर दी चेतावनी


    नई दिल्ली। ज्योतिषाचार्य पं. गौतम ने रुद्र बीसी के शेष वर्षों को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उनके अनुसार, आगामी वर्षों में विश्व स्तर पर कई संकट और अप्रत्याशित घटनाएं घटित हो सकती हैं। पं. गौतम का कहना है कि युद्ध, प्राकृतिक आपदाएं और नई बीमारियों का खतरा हमेशा बना रहेगा, और इसे केवल भविष्यवाणी के रूप में ही नहीं, बल्कि सतर्क रहने के लिए एक संकेत के तौर पर देखा जाना चाहिए।

    विशेष रूप से भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्रों में भूकंप जैसी घटनाओं की आशंका जताई गई है। इसके अलावा, मौसम संबंधी आपदाओं, महामारी और असामान्य प्राकृतिक घटनाओं की संभावना भी बनी रहेगी। ज्योतिषाचार्य ने जोर देकर कहा कि इस चेतावनी का उद्देश्य भय फैलाना नहीं है, बल्कि समाज को संभावित परिस्थितियों के प्रति सचेत करना है।

    पं. गौतम ने सभी लोगों से अपील की है कि वे व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर तैयार रहें। उन्होंने बताया कि यदि सही समय पर सतर्कता और तैयारी रखी जाए, तो इन संभावित आपदाओं का प्रभाव काफी हद तक कम किया जा सकता है।

  • सिक्किम में सुबह भूकंप के झटकेलोग घरों से बाहर निकले

    सिक्किम में सुबह भूकंप के झटकेलोग घरों से बाहर निकले


    नई दिल्ली । आज सुबहसिक्किम के सोरेंग शहर में 3.9 तीव्रता का भूकंप आया। यह भूकंप 5:58 बजे के आसपास महसूस हुआ और स्थानीय लोग तुरंत घरों से बाहर निकल आए। भूकंप के झटके महसूस होने के बादवहां के निवासी दहशत में थेहालांकि राहत की बात यह है कि अब तक किसी प्रकार के जान-माल का नुकसान होने की खबर नहीं आई है।

    भूकंप का केंद्र जमीन के नीचे 5 किलोमीटर की गहराई पर थाजिससे इसे बड़ी तीव्रता का भूकंप नहीं माना गया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने सोशल मीडिया पर इस घटना की जानकारी दी और बताया कि भूकंप का असर सीमित था।

    सिक्किम में भूकंप की घटनाएं कभी-कभी होती रही हैंलेकिन इस बार तीव्रता बहुत कम थीजिससे कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। हालांकिभूकंप के बाद सतर्कता बनाए रखना हमेशा जरूरी होता हैऔर लोगों को अपनी सुरक्षा के लिए सावधानी बरतनी चाहिए। वर्तमान में स्थानीय प्रशासन ने कोई विशेष कदम नहीं उठाए हैंक्योंकि नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है।

  • भूकंप के झटकों से हिला जापान…. 7.6 रही तीव्रता, सुनामी का अलर्ट जारी….

    भूकंप के झटकों से हिला जापान…. 7.6 रही तीव्रता, सुनामी का अलर्ट जारी….


    टोक्यो।
    जापान (Japan) में सोमवार रात धरती डोल उठी। यहां तेज भूकंप के झटके महसूस किए गए। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के मुताबिक, रिक्टर स्केल (Richter scale) पर भूकंप (Earthquake) की तीव्रता 7.6 मापी गई है. इसके तुरंत बाद उत्तर-पूर्वी तट पर 3 मीटर (10 फीट) तक ऊंची सुनामी आने की चेतावनी (Tsunami warning) जारी की गई है. प्रशासन ने तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को तुरंत ऊंचे स्थानों पर जाने के लिए कहा है. यह चेतावनी होक्काइडो, आओमोरी और इवाते प्रान्तों के लिए जारी की गई है, जहां खतरा सबसे ज्यादा है. भूकंप का केंद्र तट से दूर बताया जा रहा है, लेकिन इसके झटके इतने तेज थे कि लोग घरों से बाहर निकल आए।

    रात के अंधेरे में 10 फीट ऊंची लहरों का खौफ: भूकंप के झटके रात करीब 11:15 बजे महसूस किए गए. इतनी रात गए आए भूकंप ने लोगों को दहशत में डाल दिया. जेएमए ने साफ कहा है कि समुद्र में हलचल तेज है और 10 फीट तक ऊंची लहरें तट से टकरा सकती हैं. जापान के उत्तर और पूर्व के एक बड़े हिस्से में झटके महसूस किए गए. एजेंसी ने लोगों से अपील की है कि वे समुद्र तट से दूर रहें और सुरक्षित ठिकानों पर शरण लें।

    होक्काइडो और आओमोरी में रेड अलर्ट: सुनामी की चेतावनी के बाद होक्काइडो, आओमोरी और इवाते प्रान्तों में सायरन बजने लगे हैं. स्थानीय प्रशासन ने इमरजेंसी सेवाओं को अलर्ट मोड पर डाल दिया है. 7.6 की तीव्रता वाला भूकंप बेहद खतरनाक माना जाता है. इससे इमारतों को नुकसान पहुंचने की भी आशंका है. फिलहाल नुकसान की विस्तृत जानकारी का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।