Tag: Earthquake

  • जम्मू- कश्मीर के बारामूला जिले में महसूस किए गए भूकंप के झटके…. तीव्रता 3.6 दर्ज

    जम्मू- कश्मीर के बारामूला जिले में महसूस किए गए भूकंप के झटके…. तीव्रता 3.6 दर्ज


    श्रीनगर।
    जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के बारामूला जिले (Baramulla district) में सोमवार तड़के भूकंप (Earthquake) के हल्के झटके महसूस किए गए. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, भूकंप की तीव्रता (Earthquake Intensity 3.6) रिक्टर स्केल (Richter scale) पर 3.6 दर्ज की गई. यह भूकंप रात करीब 2 बजे आया और इसका केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर की गहराई में था.

    भूकंप के झटके बारामूला के अलावा कश्मीर घाटी के कई अन्य इलाकों में भी महसूस किए गए. अचानक आए झटकों से लोगों में कुछ देर के लिए दहशत फैल गई. एहतियात के तौर पर कई लोग अपने घरों और इमारतों से बाहर निकल आए. हालांकि, किसी तरह के जान-माल के नुकसान या किसी के घायल होने की सूचना नहीं मिली।

    राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भूकंप की जानकारी दी. इसी साल फरवरी में भी बारामूला जिले में 4.6 तीव्रता का भूकंप आया था. उस समय पट्टन क्षेत्र भूकंप का केंद्र था और घाटी के कई हिस्सों में झटके महसूस किए गए थे. कश्मीर भूकंपीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है. यह इलाका उच्च भूकंपीय जोन में स्थित है, जहां टेक्टोनिक प्लेटों की लगातार गतिविधियों के कारण समय-समय पर भूकंप के झटके महसूस होते रहते हैं।

    इससे पहले 9 जुलाई को सुबह-सुबह महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए थे. नांदेड़, हिंगोली और परभणी जिलों में भूकंप के झटके महसूस किए गए. झटके हल्की तीव्रता के थे, लेकिन लोग दाहशत में अपने घरों से बाहर निकल आए.

    गत 27 जून को अफगानिस्तान के हिंदूकुश क्षेत्र में 6.2 तीव्रता का भूकंप आया था. भूकंप का केंद्र पूर्वोत्तर अफगानिस्तान में कालाफगान से करीब 81 किलोमीटर दूर, 36.442° उत्तरी अक्षांश और 70.672° पूर्वी देशांतर पर और धरती की सतह से 215 किलोमीटर की गहराई में था. भूकंप का केंद्र धरती की सतह से अत्यधिक गहराई में होने के कारण इसके झटके पाकिस्तान, भारत के उत्तरी हिस्से, चीन, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान और तुर्कमेनिस्तान समेत कई देशों में महसूस किए गए थे।

  • भूकंप से तबाह वेनेजुएला में मानवीय संकट गहराया, हजारों जानें गईं, अंतरराष्ट्रीय सहायता के सहारे पुनर्वास की चुनौती शुरू

    भूकंप से तबाह वेनेजुएला में मानवीय संकट गहराया, हजारों जानें गईं, अंतरराष्ट्रीय सहायता के सहारे पुनर्वास की चुनौती शुरू

    नई दिल्ली । वेनेजुएला में 24 जून को आए भीषण भूकंप के बाद हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो सके हैं। ताजा आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 4,118 हो गई है। हजारों लोग अब भी प्रभावित हैं और सबसे ज्यादा नुकसान वाले इलाकों में राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। प्रशासन का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में मलबा हटाने, लापता लोगों की तलाश और जरूरी सेवाओं को बहाल करने का कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है।

    सरकारी जानकारी के अनुसार, इस आपदा में 16,740 लोग घायल हुए हैं, जबकि अब तक 6,462 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। राहत एजेंसियां लगातार प्रभावित इलाकों में पहुंचकर लोगों को चिकित्सा सहायता, भोजन, स्वच्छ पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने में जुटी हुई हैं। प्रशासन का कहना है कि दूरदराज के कई क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए विशेष बचाव दलों की मदद ली जा रही है।

    भूकंप के कारण बड़ी संख्या में मकान क्षतिग्रस्त या पूरी तरह नष्ट हो गए हैं। इसके चलते 17,907 लोग बेघर हो चुके हैं, जबकि लगभग 86,794 परिवारों को विभिन्न प्रकार की राहत सहायता उपलब्ध कराई गई है। फिलहाल 17,266 लोग देशभर में बनाए गए 89 अस्थायी राहत शिविरों में रह रहे हैं, जहां उनके लिए भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं और जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। सरकार का कहना है कि पुनर्वास की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाई जाएगी।

    राहत एवं बचाव कार्य को तेज करने के लिए पूरे देश में बड़े पैमाने पर संसाधन लगाए गए हैं। हजारों सरकारी कर्मचारी, स्वयंसेवक और अंतरराष्ट्रीय बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में लगातार काम कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, देशभर में 30,000 से अधिक कर्मियों, लगभग 29,843 स्वयंसेवकों और 3,454 अंतरराष्ट्रीय बचावकर्मियों की सहायता से अभियान संचालित किया जा रहा है। इसके साथ ही भूकंप के बाद अब तक 1,171 से अधिक झटके दर्ज किए जा चुके हैं, जिससे कई इलाकों में लोगों के बीच चिंता और सतर्कता बनी हुई है।

    इस बीच कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने आपदा के बाद विभिन्न देशों से मिली मानवीय सहायता के लिए आभार व्यक्त किया है। उन्होंने राजधानी काराकास में राहत सामग्री संग्रह केंद्र का निरीक्षण किया, जहां दो हजार टन से अधिक अंतरराष्ट्रीय सहायता सामग्री को प्रभावित लोगों तक पहुंचाने के लिए व्यवस्थित किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि सभी सहयोगी देशों की सहायता का पारदर्शी तरीके से उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा ताकि जरूरतमंद लोगों तक समय पर राहत पहुंच सके।

    सरकार ने कहा है कि इस कठिन समय में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सहयोग ने राहत कार्यों को मजबूती प्रदान की है। प्रशासन का ध्यान अब केवल तत्काल राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण, बुनियादी ढांचे की बहाली और विस्थापित परिवारों के स्थायी पुनर्वास पर भी केंद्रित है। अधिकारियों का मानना है कि पुनर्निर्माण की प्रक्रिया लंबी होगी, लेकिन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से प्रभावित क्षेत्रों को फिर से सामान्य स्थिति में लाने का प्रयास जारी रहेगा।

    भूकंप में जान गंवाने वाले लोगों की स्मृति में सरकार पहले ही सात दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा कर चुकी है। प्रशासन ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए भरोसा दिलाया है कि राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण का कार्य पूरी गंभीरता के साथ जारी रहेगा, ताकि प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द सामान्य जीवन की ओर लौटने में सहायता मिल सके।

  • Venezuela: भूकंप में मृतकों की संख्या 2200 के पार, अब भी रेस्क्यू जारी, मेक्सिको से आई मशहूर बचाव टीम

    Venezuela: भूकंप में मृतकों की संख्या 2200 के पार, अब भी रेस्क्यू जारी, मेक्सिको से आई मशहूर बचाव टीम


    मेक्सिको सिटी।
    वेनेजुएला (Venezuela) में आए विनाशकारी भूकंप (Earthquakes) ने भारी तबाही मचाई है। इस आपदा में मृतकों की संख्या 2,200 के पार पहुंच गई है, जबकि 11,000 से ज्यादा लोग घायल हैं। इस मुश्किल घड़ी में मेक्सिको (Mexico) की मशहूर बचाव टीम ‘टोपोस’ (Topos Azteca) मदद के लिए वेनेजुएला पहुंच रही है। यह टीम मलबे में दबे लोगों को निकालने में माहिर मानी जाती है।


    तबाही का मंजर और बढ़ती चुनौतियां

    भूकंप के करीब एक हफ्ते बाद भी वेनेजुएला में हालात बेहद खराब हैं। सबसे ज्यादा असर ला गुआरा राज्य में हुआ है, जहां कई बहुमंजिला इमारतें और घर जमींदोज हो गए हैं। अंतरराष्ट्रीय बचाव टीमें दिन-रात मलबे में दबे लोगों की तलाश कर रही हैं। हालांकि, समय बीतने के साथ अब जीवित बचे लोगों के मिलने की उम्मीद कम होती जा रही है। मेक्सिको से रवाना हुए 39 वर्षीय स्वयंसेवक जर्मन बेलो अपने साथ बचाव उपकरणों के अलावा बड़ी संख्या में ‘बॉडी बैग’ भी ले जा रहे हैं, ताकि मृतकों के शवों को सम्मान के साथ निकाला जा सके।


    कौन हैं ये ‘टोपोस’ और कैसे करते हैं काम?

    ‘टोपोस’ मेक्सिको का एक नागरिक बचाव संगठन है। इसकी शुरुआत 1985 में मेक्सिको सिटी में आए भीषण भूकंप के बाद हुई थी। स्पेनिश भाषा में ‘टोपोस’ का मतलब ‘छछूंदर’ (Moles) होता है। इस टीम को यह नाम इसलिए मिला क्योंकि इसके सदस्य मलबे के बीच बनी बेहद संकरी जगहों और छेदों में रेंगकर घुस जाते हैं। ये लोग थर्मल कैमरे और संवेदनशील माइक्रोफोन जैसे आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं ताकि मलबे के नीचे दबी हल्की सी आहट या शरीर की गर्मी को पहचाना जा सके।


    खामोशी का संकेत और बचाव का तरीका

    बचाव कार्य के दौरान यह टीम एक खास तकनीक अपनाती है। जब कोई बचावकर्मी हवा में मुट्ठी बंद करके हाथ उठाता है, तो इसका मतलब होता है ‘बिल्कुल खामोश हो जाएं’। यह संकेत मिलते ही वहां मौजूद अन्य लोग चुप हो जाते हैं। इस सन्नाटे में बचावकर्मी मलबे के नीचे कान लगाकर सुनते हैं कि कहीं से कोई आवाज या खटखटाहट तो नहीं आ रही। इसके बाद फावड़े और हथौड़ों की मदद से धीरे-धीरे मलबा हटाया जाता है ताकि मलबे के और ज्यादा गिरने का खतरा न रहे।


    उम्मीद की एक आखिरी किरण

    मेक्सिको सिटी के एयरपोर्ट पर एक भावुक पल देखने को मिला। जब वेनेजुएला के एक इंजीनियर डिएगो बेजरानो को पता चला कि जर्मन बेलो और उनकी टीम उनके देश जा रही है, तो वह रो पड़े। डिएगो का परिवार अभी भी वेनेजुएला की राजधानी कराकस में है। बेलो ने उन्हें गले लगाकर तसल्ली दी। बेलो पेशे से एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं और अपनी छोटी सी वर्कशॉप चलाते हैं, लेकिन आपदा के समय वह सब छोड़कर लोगों की जान बचाने निकल पड़ते हैं। उनका कहना है कि किसी दुखी इंसान को उम्मीद देना ही उनका सबसे बड़ा इनाम है।

  • Earthquake : पड़ोसी देश चीन के सिचुआन प्रांत में आया भूकंप… 5.5 रही तीव्रता

    Earthquake : पड़ोसी देश चीन के सिचुआन प्रांत में आया भूकंप… 5.5 रही तीव्रता


    बीजिंग।
    वेनेजुएला (Venezuela) में भूकंप (Earthquake) की तबाही से दुनिया अब तक गमगीन है. वेनेजुएला के बाद जापान और अमेरिका में भूकंप आया. भारत और अफगानिस्तान में भी भूकंप के झटके महसूस हुए. अब भूकंप की आहट भारत के पड़ोस में सुनाई दी है. जी हां, भारत के पड़ोस यानी चीन (China) में भूकंप आया है. दक्षिण-पश्चिम चीन (Southwest China) के सिचुआन प्रांत (Sichuan Province) में 5.5 तीव्रता का तेज भूकंप आया है. स्थानीय समयानुसार देर रात भूकंप के झटके महसूस किए गए. इससे स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई।

    दरअसल, दक्षिण-पश्चिम चीन के सिचुआन प्रांत के यिबिन शहर में देर रात 5.5 तीव्रता का जोरदार भूकंप आया. इस भूकंप के झटके चेंगदू और चोंगकिंग जैसे बड़े क्षेत्रीय केंद्रों तक महसूस किए गए. इस भूकंप से लोगों में खौफ का माहौल है. आधी रात को लोग अपने घरों से बाहर की ओर भागते दिखे. भूकंप का केंद्र गाओक्सियन काउंटी में जमीन से महज 6 किलोमीटर की गहराई पर था।

    अभी तक की जानकारी के मुताबिक, इस भूकंप से केंद्र के पास की कुछ इमारतों की दीवारों को मामूली नुकसान पहुंचा है और आपातकालीन टीमें नुकसान का आकलन कर रही हैं. अभी किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है. बता दें इससे दो दिन पहले यानी शनिवार को अफगानिस्तान में 6.2 तीव्रता का भूकंप आया था. इस भूकंप के कारण दिल्ली-एनसीआर के अलावा जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा तथा चंडीगढ़ सहित उत्तर भारत के कई हिस्सों में तेज झटके महसूस किए गए थे।


    संडे को जापान में भूकंप

    इसके बाद रविवार को जापान के उत्तर-पूर्वी हिस्से में 6.1 तीव्रता का भूकंप आया था. इवाते प्रांत के तट के पास रविवार को स्थानीय समयानुसार सुबह सात बजकर 25 मिनट पर भूकंप आया. इसका केंद्र करीब 40 किलोमीटर (25 मील) की गहराई में था. भूकंप के झटके आओमोरी प्रांत और आसपास के अन्य क्षेत्रों में भी महसूस किए गए. राहत की बात यह थी कि इसमें किसी जानमाल के नुकसान की खबर नहीं आई।


    वेनेजुएला में भूकंप की तबाही

    वहीं, वेनेज़ुएला में आए भूकंप के झटकों से मरने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. वेनेजुएला में अब तक 1500 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. अधिकारियों के अनुसार, परिवारों ने कम से कम 68,900 लोगों के लापता होने की जानकारी दी. इस सबके बीच लोगों में हताशा बढ़ती जा रही है. वेनेज़ुएला के सबसे बुरी तरह प्रभावित राज्यों में से एक, ला ग्वायरा में, अपने प्रियजनों और पड़ोसियों की तलाश कर रहे लोग फावड़ों, भारी मशीनों, रस्सियों और अपने हाथों का इस्तेमाल करके कंक्रीट के ढेर को हटाने की कोशिश करते दिखे।

  • वेनेजुएला भूकंप संकट में भारत की बड़ी मानवीय पहल, ‘ऑपरेशन एमिस्टेड’ के तहत राहत और चिकित्सा सहायता से हजारों जिंदगियों को संबल

    वेनेजुएला भूकंप संकट में भारत की बड़ी मानवीय पहल, ‘ऑपरेशन एमिस्टेड’ के तहत राहत और चिकित्सा सहायता से हजारों जिंदगियों को संबल

    नई दिल्ली । उत्तरी वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के बाद उत्पन्न गंभीर मानवीय संकट के बीच भारत ने तेजी से राहत अभियान शुरू करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग की मिसाल पेश की है। 7.5 तीव्रता के इस भूकंप से व्यापक तबाही हुई है, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की मौत और लापता होने की स्थिति ने संकट को और गहरा दिया है। इसी पृष्ठभूमि में भारत सरकार ने ‘ऑपरेशन एमिस्टेड’ के तहत आपात राहत और चिकित्सा सहायता भेजी है।

    भारतीय वायुसेना के दो C-17 ग्लोबमास्टर विमान राहत सामग्री लेकर वेनेजुएला पहुंचे हैं। यह सामग्री कोटे डी आइवर के अबिदजान के रास्ते प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचाई गई है। इस अभियान का उद्देश्य आपदा प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत राहत पहुंचाकर जीवन बचाने और चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करना है।

    इस राहत मिशन में विदेश मंत्रालय द्वारा लगभग 6 टन आवश्यक दवाइयां और आपातकालीन मेडिकल सामग्री भेजी गई है। इसके साथ ही एक विशेष भारतीय फील्ड अस्पताल टीम भी तैनात की गई है, जिसमें कुल 41 सदस्य शामिल हैं। इस टीम में मेडिकल अफसर, पैरामेडिकल स्टाफ और विशेषज्ञ डॉक्टर शामिल हैं, जो गंभीर रूप से घायल लोगों के उपचार, ट्रॉमा केयर और आपात सर्जरी जैसी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।

    भारत की इस मानवीय पहल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा अत्याधुनिक ‘भीष्म क्यूब’ तकनीक है, जिसे आपदा क्षेत्रों में तेजी से चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए विकसित किया गया है। इस मिशन के तहत दो भीष्म क्यूब वेनेजुएला भेजे गए हैं, जो एक कॉम्पैक्ट और मोबाइल अस्पताल प्रणाली के रूप में कार्य करते हैं। यह तकनीक कम समय में स्थापित होकर बड़े पैमाने पर मरीजों को उपचार सुविधा देने में सक्षम है।

    भीष्म क्यूब की क्षमता के अनुसार यह एक साथ बड़ी संख्या में मरीजों को ट्रॉमा केयर, इमरजेंसी सर्जरी और आईसीयू स्तर की चिकित्सा सुविधा प्रदान कर सकता है। इसमें पोर्टेबल वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम और आधुनिक डायग्नोस्टिक उपकरण शामिल हैं, जिससे आपदा के समय तुरंत चिकित्सा सहायता सुनिश्चित की जा सकती है।

    वेनेजुएला में भूकंप के बाद स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है। कई शहरों और कस्बों में इमारतें ढह गई हैं और राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी है। मलबे के नीचे फंसे लोगों को निकालने के लिए स्थानीय प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां संयुक्त रूप से प्रयास कर रही हैं।

    इस आपदा में भारी जनहानि और व्यापक विस्थापन की स्थिति ने मानवीय संकट को और गंभीर बना दिया है। ऐसे समय में भारत की त्वरित सहायता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है, जो आपदा प्रबंधन और वैश्विक सहयोग की दिशा में एक मजबूत संदेश देता है।

    भारत का यह राहत अभियान न केवल चिकित्सा सहायता तक सीमित है, बल्कि यह आपदा प्रभावित लोगों के जीवन को बचाने और पुनर्वास प्रयासों को गति देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ‘ऑपरेशन एमिस्टेड’ के माध्यम से भारत ने एक बार फिर वैश्विक मानवीय सहयोग में अपनी सक्रिय भूमिका को रेखांकित किया है।

  • भूकंप के झटकों से उबर नहीं पा रहा बेनेजुएला… आज भी आया 5.6 तीव्रता का भूकंप, अब तक 1430 मौतें

    भूकंप के झटकों से उबर नहीं पा रहा बेनेजुएला… आज भी आया 5.6 तीव्रता का भूकंप, अब तक 1430 मौतें


    कराकस।
    वेनेजुएला (Venezuela) भूकंप (Earthquake) के झटकों से उबरता नहीं दिख रहा. बीते बुधवार को आए दो विनाशकारी भूकंप (Two devastating Earthquakes) के झटकों के बाद अब भी वेनेजुएला में भूकंप के झटके आ रहे हैं. शनिवार के बाद अब आज रविवार को भी वेनेजुएला में भूकंप के झटके महसूस किए गए. इससे लोग दहशत में आ गए. इधर बुधवार को आए दो विनाशकारी भूंकप के कारण वेनेजुएला में हजारों लोगों की मौत होने की बात कही जा रही है. आधिकारिक रूप से अभी तक 1430 लोगों की मौत का आंकड़ा सामने आया है. हजारों लोग घायल है. हजारों लापता बताए जा रहे हैं. रेस्क्यू ऑपरेशन अभी भी जारी है।

    नेशनल असेंबली के अध्यक्ष जॉर्ज रोड्रिग्ज ने शनिवार को बताया कि बुधवार को आए भूकंप से अभी तक 1,430 लोग मारे गए और 3,238 लोग घायल हुए>


    आज वेनेजुएला में 5.6 तीव्रता का भूकंप आया

    रविवार सुबह वेनेजुएला में 5.6 की तीव्रता का भूकंप आया. शुरुआती जानकारी के अनुसार 5.6 तीव्रता का यह भूकंप वेनेजुएला के एल लिमोन से लगभग 30 किमी दूर उत्तर पूर्व में आया. स्थानीय समय 3 बजकर 20 मिनट पर भूंकप आया है. इससे पहले शनिवार सुबह वेनेजुएला में 4.1 तीव्रता का भूकंप आया था।

    वेनेजुएला की भूकंप अनुसंधान संस्था (फनविसिस) ने बताया कि देश के मध्य हिस्से में 4.1 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया. यह भूकंप ऐसे समय आया है जब लोग इस हफ्ते की शुरुआत में आए दो बड़े और विनाशकारी भूकंपों के बाद पहले से ही डरे हुए हैं।

    बुधवार को आए दो शक्तिशाली भूकंपों के बाद इस शहर को आपदा प्रभावित क्षेत्र घोषित किया गया था, क्योंकि यहां काफी नुकसान हुआ था. अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को आया भूकंप जमीन से सिर्फ पांच किलोमीटर नीचे था. इतनी कम गहराई वाले भूकंप अक्सर ज्यादा तेज महसूस होते हैं और इमारतों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है।

    काराकस और आसपास के इलाकों के लोगों ने भी झटके महसूस किए. कई लोग डर के कारण इमारतों से बाहर निकल आए, क्योंकि उन्हें और नुकसान होने या इमारतें गिरने का डर था. यह भूकंप बुधवार को आए दो बड़े भूकंपों के कुछ ही दिन बाद आया, जिनसे कई जगह भारी तबाही हुई थी. कई इमारतें गिर गईं, भूस्खलन हुआ और लोगों की मौत भी हुई.

  • 2004 की सुनामी से लेकर चिली तक, दुनिया के सबसे शक्तिशाली भूकंपों की कहानी

    2004 की सुनामी से लेकर चिली तक, दुनिया के सबसे शक्तिशाली भूकंपों की कहानी


    नई दिल्ली । प्रकृति की सबसे विनाशकारी घटनाओं में भूकंप का नाम सबसे ऊपर आता है। कुछ सेकंड या मिनट तक आने वाले ये झटके शहरों को मलबे में बदल सकते हैं और लाखों लोगों की जिंदगी पर स्थायी असर छोड़ सकते हैं। हाल ही में वेनेजुएला में आए शक्तिशाली भूकंपों ने एक बार फिर दुनिया को याद दिलाया है कि प्रकृति के सामने इंसानी तकनीक और विकास कितने सीमित हैं।

    हालांकि वेनेजुएला में आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के भूकंप बेहद शक्तिशाली थे, लेकिन इतिहास में दर्ज सबसे बड़े भूकंपों की सूची में इनका स्थान नहीं है। आइए जानते हैं दुनिया के कुछ सबसे शक्तिशाली और विनाशकारी भूकंपों के बारे में

    1960 का ग्रेट चिली भूकंप: अब तक का सबसे शक्तिशाली झटका
    दुनिया का सबसे शक्तिशाली दर्ज भूकंप 22 मई 1960 को चिली के बायोबियो क्षेत्र में आया था। इसकी तीव्रता 9.5 मापी गई थी। “ग्रेट चिली अर्थक्वेक” के नाम से प्रसिद्ध इस आपदा ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई। भूकंप के साथ आई सुनामी ने प्रशांत महासागर के कई देशों को प्रभावित किया और करीब 1,655 लोगों की मौत हुई।

    1964 का अलास्का भूकंप

    27 मार्च 1964 को अमेरिका के अलास्का में 9.2 तीव्रता का भूकंप आया, जो लगभग चार मिनट तक महसूस किया गया। यह उत्तरी अमेरिका के इतिहास का सबसे शक्तिशाली भूकंप माना जाता है। भूकंप और उसके बाद आई सुनामी से करीब 130 लोगों की जान चली गई।

    2004 की सुनामी: 2.8 लाख से ज्यादा मौतें

    26 दिसंबर 2004 को इंडोनेशिया के सुमात्रा तट के पास समुद्र के भीतर 9.1 तीव्रता का भूकंप आया। इसके बाद उत्पन्न सुनामी ने भारत, श्रीलंका, थाईलैंड और इंडोनेशिया समेत कई देशों के तटीय इलाकों में भारी तबाही मचाई। यह आधुनिक इतिहास की सबसे घातक प्राकृतिक आपदाओं में से एक थी, जिसमें 2.8 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई।

    जापान का तोहोकू भूकंप
    11 मार्च 2011 को जापान के तोहोकू क्षेत्र में 9.1 तीव्रता का भूकंप आया। इसके बाद आई विशाल सुनामी ने जापान के पूर्वी तट को बुरी तरह प्रभावित किया। इस आपदा में 15 हजार से अधिक लोगों की जान गई और फुकुशिमा परमाणु संयंत्र दुर्घटना जैसी गंभीर स्थिति भी पैदा हुई।

    रूस का कामचटका क्षेत्र
    रूस के कामचटका क्षेत्र में 1952 में 9.0 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप दर्ज किया गया था। इस आपदा में हजारों लोगों के प्रभावित होने की खबरें सामने आईं। वहीं हाल के वर्षों में भी इस क्षेत्र में बड़े भूकंप दर्ज किए गए हैं, जो इसे दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में शामिल करते हैं।

    भारत का सबसे बड़ा भूकंप
    भारत में दर्ज सबसे शक्तिशाली भूकंप 15 अगस्त 1950 को अरुणाचल प्रदेश और असम क्षेत्र में आया था। इसकी तीव्रता 8.6 मापी गई थी। इस भूकंप ने पूर्वोत्तर भारत में भारी तबाही मचाई और सैकड़ों लोगों की जान चली गई।

    अन्य बड़े भूकंप

    1906 में इक्वाडोर के एस्मेराल्डास क्षेत्र में 8.8 तीव्रता का भूकंप, लगभग 1,500 मौतें।

    2010 में चिली के बायोबियो क्षेत्र में 8.8 तीव्रता का भूकंप, 500 से अधिक लोगों की मौत।

    1965 में अलास्का में 8.7 तीव्रता का भूकंप, हालांकि इसमें बड़े पैमाने पर जनहानि नहीं हुई।

    क्यों आते हैं इतने बड़े भूकंप?

    भूकंप पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियों के कारण आते हैं। जब ये प्लेटें आपस में टकराती, खिसकती या दबाव बनाती हैं, तब ऊर्जा अचानक मुक्त होती है और धरती कांप उठती है। प्रशांत महासागर के आसपास स्थित “रिंग ऑफ फायर” दुनिया का सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्र माना जाता है, जहां अधिकांश बड़े भूकंप आते हैं।
  • MP: बैतूल के मुलताई और पाढुर्णा में महसूस किए गए 3.9 तीव्रता के भूकंप के झटके, दहशत में आए लोग

    MP: बैतूल के मुलताई और पाढुर्णा में महसूस किए गए 3.9 तीव्रता के भूकंप के झटके, दहशत में आए लोग


    बैतूल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बैतूल जिले (Betul district) में शनिवार रात को भूकम्प (Earthquake) के हल्के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल (Richter scale) पर जिनकी तीव्रता 3.9 मापी गई। इस बारे में नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) की तरफ से दी गई जानकारी में बताया गया कि, ये झटके रात 9 बजकर 31 मिनट व 2 सेकंड पर दर्ज किए गए। इस दौरान बैतूल के अलावा मुलताई (Multai), पांढुर्णा (Pandhurna) और आसपास के अन्य क्षेत्रों में धरती में कंपन महसूस किया गया। भूकंप के कारण कुछ देर के लिए लोगों में हल्की दहशत का माहौल बन गया।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार भूकंप का केंद्र बैतूल जिले में मुलताई के मानीखापा गांव के पास स्थित था। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, यह केंद्र पचमढ़ी से लगभग 68 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण पूर्व दिशा में जमीन से करीब 10 किलोमीटर नीचे की तरफ था। हालांकि खबर लिखे जाने तक प्राप्त जानकारी के अनुसार इन झटकों की वजह से जिले में किसी तरह के नुकसान की कोई खबर नहीं थी।

    भूकंप की तीव्रता 3.9 रिक्टर स्केल होने के बाद भी केंद्र की गहराई कम होने के कारण धरती पर कंपन ज्यादा महसूस हुआ। इस दौरान मुलताई और पांढुर्णा सहित कई इलाकों में तो लोग डर की वजह से काफी देर तक घरों के बाहर खड़े रहे। इसके बाद लोगों ने एक-दूसरे को फोन कर जानकारी ली और सुरक्षा को लेकर उनका हालचाल जाना। हालांकि राहत की बात यह रही कि खबर लिखे जाने तक किसी प्रकार की जनहानि या बड़े नुकसान की कोई सूचना सामने नहीं आई थी।

    उधर प्रशासन ने भी भूकंप को लेकर लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और सतर्क रहने की अपील की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कई दिनों से क्षेत्र में हल्के कंपन महसूस हो रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, मुख्य भूकंप के बाद आफ्टरशॉक्स की संभावना बनी रहती है। इसलिए प्रशासन ने लोगों को जर्जर भवनों से दूर रहने और सावधानी बरतने की सलाह दी है।


    उत्तराखंड के उत्तरकाशी में भी महसूस हुए भूकंप के झटके

    मध्य प्रदेश के अलावा उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद मुख्यालय क्षेत्र में भी शनिवार देर रात भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। भूकंप के कारण कुछ देर के लिए लोगों में हल्की दहशत का माहौल बन गया, हालांकि किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। जिला आपदा कंट्रोल रूम से मिली जानकारी के अनुसार रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 2.4 मापी गई। भूकंप का केंद्र जिला मुख्यालय से उत्तर-पूर्व दिशा में करीब चार किलोमीटर दूर जमीन से पांच किलोमीटर नीचे स्थित था।

    प्रशासन के मुताबिक भूकंप के झटके केवल जिला मुख्यालय क्षेत्र तक सीमित रहे और जनपद की अन्य तहसीलों में इन्हें महसूस नहीं किया गया। राहत की बात यह रही कि कहीं से भी किसी प्रकार की क्षति की सूचना सामने नहीं आई है। जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

  • J&K के डोडा क्षेत्र में सुबह-सुबह कांपी धरती, आया 4.6 तीव्रता का भूकंप

    J&K के डोडा क्षेत्र में सुबह-सुबह कांपी धरती, आया 4.6 तीव्रता का भूकंप


    जम्मू।
    जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के डोडा (Doda) क्षेत्र में रविवार की सुबह भूकंप (Earthquake) के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4.6 मापी गई। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (National Centre for Seismolog) के अनुसार, यह भूकंप सुबह 4 बजकर 32 मिनट पर आया। फिलहाल किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है।


    महाराष्ट्र के हिंगोली में भूकंप के झटके

    इससे पहले शनिवार सुबह महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र के हिंगोली जिले में 4.7 तीव्रता का भूकंप आया था। इसके झटके नांदेड और परभणी जिलों के कुछ हिस्सों में भी महसूस किए गए। अधिकारियों के अनुसार अभी तक किसी तरह के जान-माल के नुकसान की तत्काल सूचना नहीं है। हालांकि, पांगरा शिंदे गांव में कुछ घरों और सामुदायिक भवनों में दरारें आने की खबर है। हिंगोली के कलेक्टर राहुल गुप्ता ने बताया कि भूकंप सुबह 8 बजकर 45 मिनट पर दर्ज किया गया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, इसका केंद्र जमीन से करीब 10 किलोमीटर की गहराई पर हिंगोली जिले के वसमत तालुका के शिरली गांव के पास था।


    क्यों आता है भूकंप?

    पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती रहती हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती हैं और डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।


    जानें क्या है भूंकप के केंद्र और तीव्रता का मतलब?

    भूकंप का केंद्र उस स्थान को कहते हैं जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। इस स्थान पर भूकंप का कंपन ज्यादा होता है। कंपन की आवृत्ति ज्यों-ज्यों दूर होती जाती हैं, इसका प्रभाव कम होता जाता है। फिर भी यदि रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है। लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंपीय आवृत्ति ऊपर की तरफ है या दायरे में। यदि कंपन की आवृत्ति ऊपर को है तो कम क्षेत्र प्रभावित होगा।


    कैसे मापा जाता है भूकंप की तिव्रता और क्या है मापने का पैमाना?

    भूंकप की जांच रिक्टर स्केल से होती है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। रिक्टर स्केल पर भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। भूकंप को इसके केंद्र यानी एपीसेंटर से मापा जाता है। भूकंप के दौरान धरती के भीतर से जो ऊर्जा निकलती है, उसकी तीव्रता को इससे मापा जाता है। इसी तीव्रता से भूकंप के झटके की भयावहता का अंदाजा होता है।

  • विश्व में उभर सकते हैं युद्ध, आपदाएं और नई बीमारियां: ज्योतिषाचार्य पं. गौतम ने रुद्र बीसी के शेष वर्षों को लेकर दी चेतावनी

    विश्व में उभर सकते हैं युद्ध, आपदाएं और नई बीमारियां: ज्योतिषाचार्य पं. गौतम ने रुद्र बीसी के शेष वर्षों को लेकर दी चेतावनी


    नई दिल्ली। ज्योतिषाचार्य पं. गौतम ने रुद्र बीसी के शेष वर्षों को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उनके अनुसार, आगामी वर्षों में विश्व स्तर पर कई संकट और अप्रत्याशित घटनाएं घटित हो सकती हैं। पं. गौतम का कहना है कि युद्ध, प्राकृतिक आपदाएं और नई बीमारियों का खतरा हमेशा बना रहेगा, और इसे केवल भविष्यवाणी के रूप में ही नहीं, बल्कि सतर्क रहने के लिए एक संकेत के तौर पर देखा जाना चाहिए।

    विशेष रूप से भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्रों में भूकंप जैसी घटनाओं की आशंका जताई गई है। इसके अलावा, मौसम संबंधी आपदाओं, महामारी और असामान्य प्राकृतिक घटनाओं की संभावना भी बनी रहेगी। ज्योतिषाचार्य ने जोर देकर कहा कि इस चेतावनी का उद्देश्य भय फैलाना नहीं है, बल्कि समाज को संभावित परिस्थितियों के प्रति सचेत करना है।

    पं. गौतम ने सभी लोगों से अपील की है कि वे व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर तैयार रहें। उन्होंने बताया कि यदि सही समय पर सतर्कता और तैयारी रखी जाए, तो इन संभावित आपदाओं का प्रभाव काफी हद तक कम किया जा सकता है।