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  • ईडी ने TMC के 440 करोड़ रुपये किए फ्रीज….पार्टी बोली- राजनीति से प्रेरित कार्रवाई

    ईडी ने TMC के 440 करोड़ रुपये किए फ्रीज….पार्टी बोली- राजनीति से प्रेरित कार्रवाई


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल चुनाव (West Bengal Elections) में हार के साथ सत्ता गंवाने के बाद अपने नेताओं की बगावत (Rebellion) झेल रही ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) अब एक नई मुश्किल में घिर गई है. प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) यानी ईडी ने टीएमसी के बैंक खातों में जमा 440 करोड़ रुपये धनराशि फ्रीज कर दी है. ईडी ने इस कार्रवाई के पीछे एविएशन कंपनी केयरवेल और उससे जुड़ी एक कंपनी के खाते में 2023 से 2026 के बीच 160 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए जाने को वजह बताया है।

    ईडी अब वित्तीय लेनदेन में धोखाधड़ी के एंगल से जांच की बात कह रही है. वहीं, ईडी के इस एक्शन को टीएमसी ने राजनीति से प्रेरित, मनमानी और अवैध बताया है. टीएमसी ने ईडी के इस एक्शन को लेकर बयान जारी कर कहा है कि खातों में जमा धनराशि की पूरी जानकारी पार्टी चुनाव आयोग और आयकर विभाग को पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराती रही है।

    टीएमसी की ओर से कहा गया है कि पार्टी ने चंदे से संबंधित जानकारी समय-समय पर चुनाव आयोग् और आयकर विभाग को दी है. हर साल पार्टियों के चंदे से जुड़ी जानकारियां चुनाव आयोग की वेबसाइट पर सार्वजनिक भी की जाती है. टीएमसी ने दावा कहा है कि इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी जानकारियां केंद्र सरकार के पास भी पहले से ही उपलब्ध हैं. ये बॉन्ड भारतीय स्टेट बैंक की ओर से जारी किए गए थे और बाद में इनका विवरण सुप्रीम कोर्ट को भी दिया गया था।

    टीएमसी ने केंद्र सरकार पर राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों के उपयोग का आरोप लगाया और कहा कि यह लोकतांत्रिक संस्थाओं और निष्पक्ष राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के लिए लेवल प्लेइंग फील्ड के सिद्धांत पर गंभीर हमला है. गौरतलब है कि ईडी ने यह कार्रवाई ऐसे समय की है, जब टीएमसी में पार्टी के नाम-निशान पर कब्जे की जंग छिड़ी हुई है।

    ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले गुट ने पार्टी संगठन, इसके नाम और निशान पर दावा किया है. बागी गुट ने नेतृत्व की लड़ाई पर फैसला होने तक बैंकों से पार्टी खाते से लेनदेन रोकने की भी अपील की थी. अब ईडी ने ही जमा धनराशि फ्रीज कर दी है।

  • TMC के पार्टी फंड में 440 करोड़ पर ED की बड़ी कार्रवाई! हेलीकॉप्टर और चार्टर विमान खरीद में गड़बड़ी का दावा

    TMC के पार्टी फंड में 440 करोड़ पर ED की बड़ी कार्रवाई! हेलीकॉप्टर और चार्टर विमान खरीद में गड़बड़ी का दावा


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की सियासत में एक बार फिर प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई ने हलचल मचा दी है। प्रवर्तन निदेशालय ने तृणमूल कांग्रेस के पार्टी फंड से जुड़े कथित वित्तीय लेनदेन में बड़ी अनियमितताओं का दावा करते हुए पार्टी के तीन बैंक खातों में जमा 440.42 करोड़ रुपए को फ्रीज करने का आदेश दिया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि पार्टी के आधिकारिक खाते से करोड़ों रुपए एक चार्टर विमान कंपनी को ट्रांसफर किए गए जिनका इस्तेमाल हेलीकॉप्टर और लग्जरी विमान खरीदने में किया गया। इसके बाद उन्हीं विमानों और हेलीकॉप्टरों को पार्टी की ओर से किराए पर लिया गया और इसके लिए अलग से भुगतान भी किया गया। ईडी को आशंका है कि इस पूरी प्रक्रिया के जरिए पार्टी फंड के दुरुपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग को अंजाम दिया गया।

    मामले की जांच के दौरान ईडी ने कोलकाता और आसपास के पांच अलग अलग ठिकानों पर छापेमारी की। इनमें चार्टर विमान कंपनी के कार्यालय उसके मालिक का आवास न्यू टाउन स्थित एक परिसर एक ट्रस्ट का दफ्तर और एक चार्टर्ड अकाउंटेंट का कार्यालय शामिल है। कार्रवाई के दौरान एजेंसी ने कई अहम दस्तावेज डिजिटल रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं जिनकी जांच की जा रही है।

    जांच एजेंसी के अनुसार वर्ष 2023 से 2026 के बीच तृणमूल कांग्रेस के बैंक खातों से केयरवेल एविएशन नामक चार्टर विमान कंपनी के खाते में करीब 160 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए। इसके बाद इस कंपनी ने करीब 82.96 करोड़ रुपए एक अन्य नई कंपनी को भेजे। ईडी का दावा है कि करीब 112 करोड़ रुपए की राशि का उपयोग एक एम्ब्रेयर लेगेसी जेट 600 विमान और एक अगस्ता वेस्टलैंड 109 एसपी हेलीकॉप्टर खरीदने में किया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि हेलीकॉप्टर की खरीद के लिए वर्ष 2023 में केमैन आइलैंड्स की एक विदेशी कंपनी से कर्ज भी लिया गया था।

    सूत्रों के मुताबिक यह चार्टर कंपनी तृणमूल कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं की हवाई यात्रा की व्यवस्था करती थी। जांच एजेंसी फिलहाल यह पता लगाने में जुटी है कि विमान और हेलीकॉप्टर खरीद में इस्तेमाल हुई राशि का वास्तविक स्रोत क्या था और इन संसाधनों का उपयोग किन परिस्थितियों में किया गया। इसी वजह से पूरे लेनदेन की फॉरेंसिक जांच भी कराई जा रही है।

    इस मामले की शुरुआत भी बेहद दिलचस्प तरीके से हुई। जून महीने में पार्टी के एक विधायक ने साइबर धोखाधड़ी से जुड़े संदिग्ध बैंक खातों की शिकायत दर्ज कराई थी। बाद में पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष ने भी आंतरिक विवाद का हवाला देते हुए पार्टी के बैंक खातों को फ्रीज करने की मांग की। स्थानीय पुलिस की प्रारंभिक जांच में करोड़ों रुपए के संदिग्ध ट्रांजैक्शन सामने आने के बाद मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका के आधार पर मामला ईडी के पास पहुंचा।

    दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस ने ईडी की पूरी कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताते हुए सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। पार्टी का कहना है कि जांच एजेंसी विपक्षी दलों को निशाना बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। फिलहाल ईडी 150 करोड़ रुपए से अधिक के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और उससे जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

  • ईडी की बड़ी कार्रवाई, पीएमएलए के तहत टीएमसी के 440 करोड़ रुपये के बैंक फंड पर रोक, वित्तीय लेन-देन की जांच तेज

    ईडी की बड़ी कार्रवाई, पीएमएलए के तहत टीएमसी के 440 करोड़ रुपये के बैंक फंड पर रोक, वित्तीय लेन-देन की जांच तेज

    नई दिल्ली । प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत चल रही जांच के दौरान तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से जुड़े तीन बैंक खातों में जमा लगभग 440.42 करोड़ रुपये की राशि के लेन-देन पर रोक लगाने की कार्रवाई की है। एजेंसी का कहना है कि यह कदम कथित वित्तीय अनियमितताओं और धन के प्रवाह की जांच के तहत उठाया गया है। समाचार लिखे जाने तक इस कार्रवाई पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

    ईडी के अनुसार, यह कार्रवाई पीएमएलए की धारा 17(1-ए) के तहत की गई है। एजेंसी का कहना है कि जांच के दौरान मिले प्रारंभिक तथ्यों के आधार पर संबंधित बैंक खातों में मौजूद राशि के लेन-देन को फिलहाल प्रतिबंधित किया गया है ताकि जांच प्रक्रिया प्रभावित न हो। अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में वित्तीय दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और विभिन्न कंपनियों के बीच हुए लेन-देन की विस्तृत जांच जारी है।

    जांच के क्रम में ईडी ने कोलकाता स्थित कई परिसरों पर तलाशी अभियान भी चलाया। इनमें केयरवेल समूह से जुड़े कार्यालय भी शामिल बताए गए हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि अप्रैल 2023 से जून 2026 के बीच टीएमसी के बैंक खातों से लगभग 160 करोड़ रुपये केयरवेल एविएशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और उससे संबंधित एक अन्य कंपनी को स्थानांतरित किए गए। एजेंसी इन लेन-देन की प्रकृति, उद्देश्य और वैधानिक प्रक्रिया की जांच कर रही है।

    ईडी के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया है कि संबंधित कंपनी ने लगभग 82.96 करोड़ रुपये एक नवगठित कंपनी को हस्तांतरित किए। एजेंसी का दावा है कि इस नई कंपनी के खातों में बड़ी मात्रा में धनराशि पहुंची, जिसके उपयोग की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध दस्तावेजों और बैंकिंग रिकॉर्ड के आधार पर धन के पूरे प्रवाह को समझने का प्रयास किया जा रहा है।

    प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि जांच के दौरान प्राप्त जानकारी के अनुसार करीब 112 करोड़ रुपये का उपयोग एक बिजनेस जेट और एक हेलीकॉप्टर की खरीद में किया गया। एजेंसी का दावा है कि बाद में इन विमानन परिसंपत्तियों का उपयोग किराये की सेवाओं के माध्यम से किया गया। हालांकि इन आरोपों की न्यायिक स्तर पर अभी पुष्टि होना बाकी है और मामले की जांच जारी है।

    कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि पीएमएलए के तहत की जाने वाली ऐसी कार्रवाई जांच के प्रारंभिक चरण का हिस्सा होती है और इसका उद्देश्य संदिग्ध वित्तीय संपत्तियों तथा लेन-देन को सुरक्षित रखना होता है। अंतिम निष्कर्ष अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों, जांच रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होता है। इसलिए किसी भी पक्ष की कानूनी जिम्मेदारी का निर्धारण न्यायालय के अंतिम निर्णय के आधार पर ही माना जाएगा।

    यह मामला एक बार फिर राजनीतिक दलों की वित्तीय पारदर्शिता और चुनावी वित्तपोषण से जुड़े मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ले आया है। आने वाले दिनों में ईडी की जांच, संबंधित पक्षों के जवाब और न्यायिक प्रक्रिया इस मामले की आगे की दिशा तय करेंगे। फिलहाल एजेंसी वित्तीय रिकॉर्ड, बैंकिंग लेन-देन और संबंधित संस्थाओं की भूमिका की विस्तृत जांच में जुटी हुई है, जबकि सभी आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।

  • ED ने अनिल अंबानी ग्रुप के दो पूर्व अधिकारियों को किया गिरफ्तार

    ED ने अनिल अंबानी ग्रुप के दो पूर्व अधिकारियों को किया गिरफ्तार


    मुंबई।
    प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate- ED) ने शुक्रवार अनिल अंबानी (Anil Ambani) के करीबी और रिलायंस ग्रुप (Reliance Group) के पूर्व ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के वाइस-चेयरमैन सतीश सेठ (Satish Seth) को मुंबई में गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के बाद उन्हें एक स्थानीय अदालत में पेश किया गया है, जहां से ईडी को ट्रांजिट रिमांड मिल गई है. अब उन्हें दिल्ली लाया जा रहा है.

    एक रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को मुंबई में रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप (RAAG) के दो पूर्व अधिकारियों को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया।

    उन्होंने बताया कि गिरफ्तार के बाद सतीश को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 48 घंटे की ट्रांजिट रिमांड पर भेज दिया गया है. चूंकि ये मामले दिल्ली में दर्ज है तो जांच एजेंसी की टीम रिमांड अवधि में सतीश को दिल्ली लाकर अदालत में पेश करेगी और आगे की पूछताछ-जांच के लिए हिरासत की मांग करेगी।

    केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस साल मार्च महीने में ही सतीश सेठ और गौतम दोशी के खिलाफ मामला दर्ज किया था. सीबीआई की टीम ने इस जांच के हिस्से के रूप में दोनों अधिकारियों के परिसरों और ठिकानों पर छापेमारी भी की थी. सीबीआई की इसी शिकायत को आधार बनाकर ईडी ने दोनों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत अपनी जांच शुरू की है।

    सीबीआई के अनुसार, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) कुल 11 बैंकों के उस कंसोर्टियम (समूह) का एक प्रमुख सदस्य था, जिसने रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड को कुल 735 करोड़ रुपये की टर्म लोन सुविधा मंजूर की थी. इसी स्वीकृत लोन में से 114.98 करोड़ रुपये की राशि में भारी धोखाधड़ी और वित्तीय हेरफेर करने का गंभीर आरोप इन दोनों अधिकारियों पर लगा है।

    बता दें कि सतीश सेठ को लंबे समय तक अनिल अंबानी का बेहद करीबी और भरोसेमंद सहयोगी माना जाता रहा है जो रिलायंस ग्रुप के ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के वाइस-चेयरमैन के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं. अब प्रवर्तन निदेशालय इस पूरे बैंक लोन फ्रॉड मामले में सतीश सेठ और गौतम दोशी दोनों की वास्तविक भूमिकाओं की गहराई से जांच कर रहा है।

  • AAP मंत्री संजीव अरोड़ा मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार, ED की बड़ी कार्रवाई से पंजाब की राजनीति में हलचल

    AAP मंत्री संजीव अरोड़ा मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार, ED की बड़ी कार्रवाई से पंजाब की राजनीति में हलचल



    नई दिल्ली। पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार में मंत्री संजीव अरोड़ा को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार कर लिया है। शनिवार सुबह ED की टीम ने चंडीगढ़ सेक्टर-2 स्थित उनके सरकारी आवास पर छापेमारी की, जिसके बाद लगभग 10 घंटे लंबी पूछताछ की गई और शाम करीब 5 बजे उन्हें दिल्ली ले जाया गया।

    ED के अनुसार यह मामला करीब 157.12 करोड़ रुपये के कथित फर्जी मोबाइल एक्सपोर्ट, शेल कंपनियों और GST इनपुट क्रेडिट धोखाधड़ी से जुड़ा है। जांच एजेंसी का आरोप है कि अरोड़ा से जुड़ी कंपनियों ने फर्जी खरीद-बिक्री और निर्यात दिखाकर अवैध तरीके से धन की हेराफेरी की और विदेशी कंपनियों के जरिए पैसे की राउंड ट्रिपिंग की गई।

    ED ने हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड और उनसे जुड़ी संस्थाओं के बैंक खाते, डीमैट होल्डिंग्स और कई अचल संपत्तियों को भी अस्थायी रूप से जब्त किया है। यह कार्रवाई 17 अप्रैल को की गई छापेमारी और दस्तावेजों की जांच के बाद सामने आए तथ्यों के आधार पर की गई है।

    एजेंसी का दावा है कि 157 करोड़ रुपये के घोषित एक्सपोर्ट में से बड़ी राशि UAE की दो कंपनियों के जरिए घूमाकर वापस भारत लाई गई, जिससे FEMA और GST नियमों के उल्लंघन का संदेह गहराया है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और ED ने आगे की पूछताछ दिल्ली में करने की बात कही है।

    इधर गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया और कहा कि ED का इस्तेमाल पार्टी को तोड़ने के लिए किया जा रहा है। वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव बनाने के लिए की गई है।

    आप सांसद राघव चड्ढा ने भी इस मामले को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला और इसे राजनीतिक साजिश करार दिया। वहीं भाजपा की ओर से कहा गया है कि जांच एजेंसी अपना काम कर रही है और कानून से कोई ऊपर नहीं है।

    फिलहाल संजीव अरोड़ा ED की हिरासत में हैं और मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। यह मामला पंजाब की राजनीति में बड़ा विवाद बन गया है और आने वाले दिनों में इसके और राजनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं।

  • ईडी ने अनिल अंबानी समूह की कंपनियों की 581.65 करोड़ रुपये की संपत्तियों को जब्त किया

    ईडी ने अनिल अंबानी समूह की कंपनियों की 581.65 करोड़ रुपये की संपत्तियों को जब्त किया

    Anil Ambani group

    नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अनिल अंबानी के रिलायंस समूह की दो कंपनियों आरएचएफएल और आरसीएफएल की 581.65 करोड़ रुपये की संपत्तियों को जब्त किया है। यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत रिलायंस पावर लिमिटेड के मामले में की गई है।

    ईडी ने गुरुवार को जारी एक बयान में बताया कि उसने रिलायंस समूह के अध्यक्ष अनिल अंबानी की दो कंपनियों रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) की 581.65 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत रिलायंस पावर लिमिटेड के मामले में की है, जिसमें देश के कई राज्यों में जमीन के टुकड़ों के रूप में 31 अचल प्रॉपर्टीज को अटैच किया गया है।

    केंद्रीय जांच एजेंसी ने कहा कि ईडी ने 11 मार्च, 2026 को रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) के मामले में गोवा, केरल, कर्नाटक, पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और राजस्थान में जमीन के टुकड़ों के रूप में 31 अचल संपत्ति को प्रोविजनल तौर पर अटैच किया गया है, जिनकी कीमत 581.65 करोड़ रुपये है।

    ईडी के मुताबिक यह अटैचमेंट विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत रिलायंस पावर लिमिटेड (आर-पावर) के मामले में 6 मार्च, 2026 को किए गए सर्च ऑपरेशन के बाद किया गया है। इस ताजा कार्रवाई के बाद रिलायंस अनिल अंबानी समूह की कुल कुर्क संपत्ति 16,310 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

  • मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED की बड़ी कार्रवाई… अनिल अंबानी के मुम्बई स्थित घर 'अबोड' को किया जब्त

    मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED की बड़ी कार्रवाई… अनिल अंबानी के मुम्बई स्थित घर 'अबोड' को किया जब्त


    मुम्बई।
    प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate- ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी कानून (Anti-Money Laundering Laws – PMLA) के तहत बड़ी कार्रवाई की है। रिपोर्ट के अनुसार, ईडी ने अनिल अंबानी (Anil Ambani) के मुंबई स्थित घर ‘अबोड’ को जब्त कर लिया है। जब्त घर की कीमत 3,716 करोड़ रुपये बताई जा रही है। ईडी के अनुसार, अनिल अंबानी और उनके ग्रप की कंपनियों के खिलाफ अब तक कुल अटैचमेंट की कार्रवाई 15000 करोड़ से अधिक हो चुकी है। बता दें कि 23 फरवरी को बॉम्बे उच्च न्यायालय ने उद्योगपति अनिल अंबानी को झटका देते हुए एकल न्यायाधीश पीठ के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उनके एवं रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के बैंक खातों को ‘धोखाधड़ी’ वाला वर्गीकृत करने की कार्यवाही पर रोक लगाई गई थी।

    यह आदेश मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम ए अंखड की खंडपीठ ने बैंक ऑफ बड़ौदा, आईडीबीआई बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक और ऑडिटर बीडीओ इंडिया एलएलपी की याचिका पर पारित किया। पीठ ने ‘उल्टे’ और ‘गैर-कानूनी’ अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया और अंबानी की इसके अभियान पर रोक लगाने के निवेदन को भी ठुकरा दिया।

    पीठ ने कहा, “जैसा कि हम पहले ही सुन चुके हैं कि 24 दिसंबर, 2025 का अंतरिम फैसला गैर-कानूनी है और इस प्रक्रिया में गड़बड़ी है इसलिए अगले कुछ सप्ताह के लिए इस आदेश के लागू होने पर रोक लगाने का निवेदन गैर-कानूनी आदेश को जारी रखने और गैर-कानूनी काम को जारी रखने के बराबर होगी। इसलिए अनिल अंबानी की तरफ से इस फैसले के लागू होने पर रोक लगाने के निवेदन को खारिज किया जाता है।”

    दिसंबर 2025 में जब अनिल अंबानी के खिलाफ मामला विचाराधीन था, न्यायमूर्ति मिलिंद एन जाधव की एकल न्यायाधीश पीठ ने उनको कुछ समय के लिए राहत दी। इस आदेश ने तीनों बैंकों की सभी कार्रवाइयों पर रोक लगा दी और उन्हें कारण बताओ नोटिस और धोखाधड़ी आदेश पर आगे बढ़ने से रोक दिया, जिससे उन्हें दो-जजों की पीठ के सामने अपील करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

  • टीना अंबानी ने 40 हजार करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस ED के सामने पेश होने से किया इन्कार

    टीना अंबानी ने 40 हजार करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस ED के सामने पेश होने से किया इन्कार


    मुम्बई।
    बिजनेसमैन अनिल अंबानी (Businessman Anil Ambani) की पत्नी टीना अंबानी (Tina Ambani) ने आज प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सामने पेश होने से इनकार कर दिया है। ईडी लगभग 40,000 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामलों (Money laundering cases) की जांच कर रही है। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय जांच एजेंसी इस मामले में टीना अंबानी को नया समन जारी करेगी। प्रवर्तन निदेशालय ने अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (ADAG) और उससे जुड़ी संस्थाओं से जुड़े 40,000 करोड़ रुपये के कथित बैंकिंग और कॉर्पोरेट घोटाले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।

    एक खबर में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि SIT का नेतृत्व संघीय जांच एजेंसी की मुख्यालय जांच इकाई (HIU) में अतिरिक्त निदेशक स्तर के अधिकारी कर रहे हैं और इसमें आधा दर्जन अन्य जांचकर्ता शामिल हैं। यह कदम सुप्रीम कोर्ट द्वारा ADAG के खिलाफ मामलों की समीक्षा करने के बाद उठाया गया है। पिछले सप्ताह, सर्वोच्च न्यायालय ने ईडी को एक SIT गठित करने का निर्देश दिया था जो मामले में निष्पक्ष, स्वतंत्र, त्वरित और निष्पक्ष जांच करेगी। अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को कथित सांठगांठ, मिलीभगत और साजिश की जांच करने और अपनी जांच को तार्किक निष्कर्ष तक ले जाने के लिए कहा था।

    ईडी पिछले साल से अनिल अंबानी और उनकी रिलायंस समूह की कंपनियों की जांच कर रहा है। अब तक एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत तीन प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIRs) दर्ज की हैं। इसके अलावा, 12,000 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क भी की गई है। अनिल अंबानी से पिछले साल उनकी समूह की कंपनियों के कथित बैंक ऋण अनियमितताओं के लिए ईडी द्वारा पूछताछ की गई थी। कंपनी के एक पूर्व शीर्ष कार्यकारी और RCOM के पूर्व अध्यक्ष, पुनीत गर्ग को हाल ही में एजेंसी द्वारा गिरफ्तार किया गया है। अनिल अंबानी समूह की कंपनियों ने अतीत में किसी भी गलत काम से इनकार किया है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी पर बैंकिंग घोटाले की जांच में CBI-ED को 10 दिन में रिपोर्ट देने का आदेश

    सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी पर बैंकिंग घोटाले की जांच में CBI-ED को 10 दिन में रिपोर्ट देने का आदेश


    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी और उनके ग्रुप पर लगे ₹1.5 लाख करोड़ के कथित बैंकिंग और कॉरपोरेट फ्रॉड के आरोपों को गंभीरता से लिया है। शुक्रवार को पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन पर सुनवाई के दौरान अदालत ने CBI और प्रवर्तन निदेशालय से कहा कि वे 10 दिन के भीतर सीलबंद लिफाफे में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें। यह मामला देश के सबसे बड़े कॉरपोरेट धोखाधड़ी के आरोपों में से एक माना जा रहा है।याचिका पूर्व नौकरशाह ई.ए.एस. सरमा की ओर से दायर की गई है। इसमें आरोप लगाया गया है कि 2007-08 से अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप ने सार्वजनिक बैंकों और वित्तीय संस्थानों से लिए गए कर्ज का गलत इस्तेमाल किया और रकम को समूह की अन्य इकाइयों में डायवर्ट किया।

    सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि मामले में पहले भी नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन अब बॉम्बे हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि नोटिस अनिल अंबानी तक विधिवत पहुंचें। अदालत ने जांच एजेंसियों से अब तक की कार्रवाई का पूरा ब्यौरा मांगा है।याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा कॉरपोरेट फ्रॉड है। उन्होंने आरोप लगाया कि CBI और ED की मौजूदा जांच केवल फ्रॉड के सीमित हिस्से तक सीमित है, जबकि बैंकों के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की जांच नहीं की जा रही। भूषण ने बताया कि लोन अप्रूवल प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी हुई और फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स में भी हेरफेर किया गया।

    ED अब तक इस मामले में ₹10,117 करोड़ की संपत्तियां जब्त कर चुकी है। इसमें मुंबई के पाली हिल स्थित अनिल अंबानी का आवास, रिलायंस समूह की कंपनियों के बैंक बैलेंस, फिक्स्ड डिपॉजिट और अनलिस्टेड निवेश शामिल हैं। एजेंसी का दावा है कि रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस में फंड का गलत इस्तेमाल हुआ जिससे यस बैंक को करीब ₹2,700 करोड़ का नुकसान हुआ।

    सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जांच एजेंसियों की ओर से समय मांगा है। अब सभी की निगाहें 10 दिन बाद दाखिल होने वाली रिपोर्ट पर हैं जिसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट आगे की कार्रवाई तय करेगा। यह मामला न केवल कॉर्पोरेट गवर्नेंस बल्कि बैंकिंग निगरानी व्यवस्था पर भी अहम सवाल खड़ा कर रहा है।

  • ईडी का महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप केस में बड़ा एक्शन… 92 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क

    ईडी का महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप केस में बड़ा एक्शन… 92 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क


    रायपुर।
    प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) (Enforcement Directorate – ED) ने बुधवार को बताया उसने छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में कार्रवाई को अंजाम देते हुए अवैध ‘महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी’ (‘Mahadev Online Betting’) ऐप के मुख्य प्रवर्तकों में से एक सौरभ चंद्राकर (Saurabh Chandrakar) सहित विभिन्न आरोपियों की लगभग 92 करोड़ रुपए की संपत्तियों को कुर्क किया है। जिसमें चल और अचल दोनों तरह की संपत्तियां शामिल हैं। इस कार्रवाई के दौरान ईडी ने PMLA के तहत एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए परफेक्ट प्लान इन्वेस्टमेंट LLC और एक्जिम जनरल ट्रेडिंग- GZCO के नाम पर रखी गई 74.28 करोड़ रुपए से अधिक की बैंक जमा राशि को जब्त किया।


    दोनों कंपनियों से बड़े पैमाने पर बनाई अपराध की आय

    इस बारे में एक बयान जारी करते हुए ईडी ने बताया कि, ये दोनों कंपनियां सौरभ चंद्राकर, अनिल कुमार अग्रवाल और विकास छपारिया की हैं, जिनका इस्तेमाल अपराध की आय (PoC) को छिपाने और बेदाग निवेश के रूप में दिखाने के लिए किया जाता था। इसके अलावा ईडी ने बताया कि साथ ही Skyexchange.com के मालिक हरि शंकर टिबरेवाल के करीबी सहयोगी गगन गुप्ता की भी 17.5 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की गई है। इन जब्त की गई संपत्तियों में गगन गुप्ता के परिवार के सदस्यों के नाम पर रखी गई महंगी रियल एस्टेट और लिक्विड एसेट्स भी शामिल हैं, जिन्हें कैश से खरीदना पाया गया।


    अपराध की आय को बेनामी खातों के जरिए निकाला गया

    ईडी की जांच में पता चला है कि महादेव ऑनलाइन बुक, Skyexchange.com आदि जैसे अवैध सट्टेबाजी ऐप्स ने भारी मात्रा में नगदी उत्पन्न की, जिसे बेनामी बैंक खातों के एक जटिल जाल के माध्यम से निकाला गया। यह भी पता चला है कि सौरभ चंद्राकर और अन्य ने महादेव ऑनलाइन बुक एप्लिकेशन नामक एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से जनता को धोखा दिया।


    सारे ग्राहक खो देते थे लगाए गई पूरी रकम

    इस दौरान इन अवैध सट्टेबाजी खेलों के ऐप्स/वेबसाइटों को इस तरह से तैयार किया गया था कि सभी ग्राहक अंततः पैसे खो देते थे। जिसके चलते इनके संचालकों के पास हजारों करोड़ रुपए का फंड इकट्ठा हो गया और पहले से तय प्रॉफिट-शेयरिंग तरीके से बांटा गया। इसके अलावा, बैंक अकाउंट खोलने के लिए जाली या चोरी किए गए KYC का भी इस्तेमाल किया गया और अवैध सट्टेबाजी से मिले पैसे को उनके सोर्स को छिपाने के लिए लेयरिंग की गई। इन सभी ट्रांजैक्शन का न तो हिसाब रखा गया और न ही उन्हें टैक्स नेट में लाया गया।


    FPI के नाम पर वापस भारत आया अपराध की कमाई का पैसा

    जांच में पता चला कि इन अवैध सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म से कमाए गए पैसे को हवाला चैनलों, ट्रेड-बेस्ड मनी लॉन्ड्रिंग ट्रांजैक्शन और क्रिप्टो-एसेट्स के इस्तेमाल से भारत के बाहर ट्रांसफर किया गया और बाद में विदेशी FPIs के नाम पर भारतीय स्टॉक मार्केट में वापस लाकर इन्वेस्ट किया गया। ED द्वारा की गई जांच में एक सोफिस्टिकेटेड कैशबैक स्कीम का भी पता चला, जिसमें ये FPI एंटिटी भारतीय लिस्टेड कंपनियों में भारी इन्वेस्ट करती थीं और बदले में, इन कंपनियों के प्रमोटरों को इन्वेस्टमेंट का 30% से 40% कैश में वापस देना होता था।


    गगन गुप्ता ने दो कंपनियों से लिया 98 करोड़ का फायदा

    जांच के दौरान एक आरोपी गगन गुप्ता को सालासर टेक्नो इंजीनियरिंग लिमिटेड और टाइगर लॉजिस्टिक लिमिटेड जैसी एंटिटी से जुड़े ऐसे ट्रांजैक्शन से कम से कम 98 करोड़ रुपए का लाभ मिलना पाया गया। बता दें कि अब तक इस मामले की जांच के दौरान ED ने 175 से ज़्यादा जगहों पर तलाशी ली है। साथ ही जांच के दौरान लगभग 2,600 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्ति जब्त, फ्रीज या अटैच भी की है। इसके अलावा, ED ने इस मामले में 13 लोगों को गिरफ्तार किया है, और अब तक दायर की गई पांच प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट में 74 लोगों को आरोपी बनाया गया है। महादेव ऐप का प्रचार सौरभ चंद्राकर और उसके सहयोगी रवि उप्पल ने किया था। ये दोनों छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं। उनका विदेश से प्रत्यर्पण कराने की कोशिश की जा रही है। उनके संयुक्त अरब अमीरात में होने का पता चला था।