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  • 90% से कम ई-अटेंडेंस तो नहीं होगा तबादला: नई नीति के तहत वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश

    90% से कम ई-अटेंडेंस तो नहीं होगा तबादला: नई नीति के तहत वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश


    मध्यप्रदेश । नई तबादला नीति के तहत शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसी क्रम में शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि केवल उन्हीं शिक्षकों को ट्रांसफर का लाभ मिलेगा, जिनकी ऑनलाइन ई-अटेंडेंस 90 प्रतिशत या उससे अधिक होगी।

    विभाग ने इस बार पात्रता तय करने के लिए अप्रैल 2026 तक के ई-अटेंडेंस आंकड़ों को आधार बनाया है। मई और जून में ग्रीष्मकालीन अवकाश होने के कारण इन महीनों की उपस्थिति को शामिल नहीं किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य उपस्थिति व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।

    नई व्यवस्था के तहत यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन शिक्षकों की संविलियन सेवा अवधि तीन वर्ष पूर्ण नहीं हुई है, उन्हें भी स्थानांतरण प्रक्रिया से बाहर रखा जाएगा। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि केवल पात्र और निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले शिक्षक ही ट्रांसफर के लिए आवेदन कर सकें।

    शिवपुरी जिला शिक्षा अधिकारी विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि 90 प्रतिशत से कम ई-अटेंडेंस वाले शिक्षकों की सूची तैयार कर पोर्टल पर अपडेट की जा रही है। विभाग द्वारा सभी आंकड़ों का मिलान किया जा रहा है ताकि किसी प्रकार की त्रुटि न रहे।

    अधिकारियों का कहना है कि नई नीति का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन और उपस्थिति को मजबूत करना है। इससे स्कूलों में शिक्षण कार्य की निरंतरता बनी रहेगी और अनियमितताओं पर भी रोक लगेगी।

  • उन्नाव में शिक्षिका का दर्दनाक कदम: VIDEO बनाकर बोलीं- ये सुसाइड नहीं, मेरा मर्डर है, फिर खा लिया जहर

    उन्नाव में शिक्षिका का दर्दनाक कदम: VIDEO बनाकर बोलीं- ये सुसाइड नहीं, मेरा मर्डर है, फिर खा लिया जहर


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के उन्नाव से एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां प्राथमिक विद्यालय में तैनात 40 वर्षीय शिक्षिका नाजिया सुल्ताना ने कथित मानसिक उत्पीड़न से परेशान होकर जहर खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की। गंभीर हालत में उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। घटना से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।

    आत्महत्या का प्रयास करने से पहले नाजिया सुल्ताना ने करीब एक मिनट का वीडियो रिकॉर्ड किया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में वह रोते हुए शिक्षामित्र पुष्कर वाजपेयी पर गंभीर आरोप लगाती नजर आ रही हैं। नाजिया ने कहा कि पिछले दो से ढाई साल से उन्हें लगातार मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा था और पिछले कई महीनों से उनकी जिंदगी बेहद मुश्किल हो गई थी।

    वीडियो में नाजिया कहती हैं, “मैं आज खुदकुशी कर रही हूं और इसका जिम्मेदार शिक्षामित्र पुष्कर वाजपेयी है। इन्होंने मेरी जिंदगी दुश्वार कर दी है। अब मुझसे बर्दाश्त नहीं होता। ये सुसाइड नहीं, मेरा मर्डर है।” शिक्षिका की भावुक अपील ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

    यह मामला सिकंदरपुर कर्ण ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय बदरका प्रथम का बताया जा रहा है, जहां नाजिया और शिक्षामित्र पुष्कर वाजपेयी दोनों तैनात हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक दोनों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। हालांकि विवाद की असली वजह अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है।

    घटना की जानकारी मिलते ही बेसिक शिक्षा अधिकारी शैलेश पांडेय अस्पताल पहुंचे और शिक्षिका का हालचाल लिया। उन्होंने कहा कि स्कूल में तैनात शिक्षिका और शिक्षामित्र के बीच मतभेद की बात सामने आई है। पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराई जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे कार्रवाई होगी।

    वहीं पुलिस ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है। अचलगंज थाने के अधिकारियों का कहना है कि अभी तक परिवार की ओर से कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई है, लेकिन वायरल वीडियो और अन्य तथ्यों के आधार पर जांच की जा रही है।

    इस घटना ने एक बार फिर कार्यस्थल पर मानसिक उत्पीड़न और तनाव जैसे गंभीर मुद्दों को सामने ला दिया है। सोशल मीडिया पर लोग शिक्षिका को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं, जबकि शिक्षा विभाग पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी लंबी अवधि तक विवाद चलने के बावजूद समाधान क्यों नहीं निकाला गया।

  • उज्जैन शिक्षा विभाग में ‘लड्डू-मिठाई’ कोड से उगाही का खुलासा, WhatsApp चैटिंग वायरल

    उज्जैन शिक्षा विभाग में ‘लड्डू-मिठाई’ कोड से उगाही का खुलासा, WhatsApp चैटिंग वायरल

    उज्जैन के जिला शिक्षा केंद्र में इंजीनियरों से कथित उगाही और वित्तीय अनियमितताओं का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि यहां कुछ इंजीनियरों के बीच WhatsApp ग्रुप में “लड्डू” और “मिठाई” जैसे कोड वर्ड का इस्तेमाल कर पैसों की मांग और लेन-देन की बातचीत की जा रही थी।

    जानकारी के मुताबिक, जिला शिक्षा केंद्र उज्जैन के अंतर्गत कार्यरत इंजीनियरों के ग्रुप में कई ऐसे मैसेज सामने आए हैं, जिनमें मान्यता की फाइलों को आगे बढ़ाने, डीपीसी निर्देशों और अन्य कार्यों के नाम पर रकम की मांग की बात की गई है।

    WhatsApp चैटिंग में क्या सामने आया?

    वायरल चैट्स में कथित तौर पर-

    • “भोपाल मिठाई भेजने” के नाम पर पैसे मांगने की बात
    • “लड्डू के लिए शेयर कलेक्ट” जैसे कोड वर्ड का उपयोग
    • UPI स्कैनर भेजकर ऑनलाइन भुगतान की मांग
    • एक दिन में 200 से ज्यादा फाइलों के निपटारे का दावा

    इन मैसेजों ने विभागीय कामकाज और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    इंजीनियरों का पक्ष

    कुछ इंजीनियरों ने इन आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि “लड्डू” या “मिठाई” के नाम पर किसी तरह की वसूली नहीं की गई है और न ही ऐसा कोई निर्देश दिया गया था। वहीं, मामले में शामिल नामों पर स्पष्टीकरण देने की बात भी कही गई है।

    प्रशासन की प्रतिक्रिया

    जिला परियोजना समन्वयक (DPC) ने मामले पर हैरानी जताते हुए कहा है कि अगर किसी ने उनके नाम का दुरुपयोग कर पैसे मांगे हैं, तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    जांच के संकेत

    मामले के सामने आने के बाद अब विभागीय स्तर पर जांच की संभावना बढ़ गई है। चैटिंग और वित्तीय लेन-देन से जुड़े सबूतों की जांच की जा सकती है।

    उज्जैन में सामने आया यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब निगाहें इस पर हैं कि जांच में क्या सच सामने आता है और क्या कार्रवाई होती है।

  • TET परीक्षा पर नए आदेश जल्द, कौन शिक्षक देंगे एग्जाम तय करेगा विभाग

    TET परीक्षा पर नए आदेश जल्द, कौन शिक्षक देंगे एग्जाम तय करेगा विभाग


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) को लेकर बड़ा फैसला जल्द सामने आ सकता है। स्कूल शिक्षा विभाग नए सिरे से आदेश जारी करने की तैयारी में है, जिसमें यह स्पष्ट किया जाएगा कि किन शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य होगा और किन्हें छूट या सरलीकरण मिलेगा। इस संबंध में लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं।

    नए आदेश में तय होगी अनिवार्यता और छूट
    आयुक्त ने कहा कि प्रस्तावित आदेश में यह बिंदु स्पष्ट रूप से शामिल किया जाएगा कि किन श्रेणी के शिक्षकों को परीक्षा देना जरूरी होगा। साथ ही नियमों के तहत कुछ शिक्षकों को राहत देने के प्रावधानों को भी परिभाषित किया जाएगा, जिससे भ्रम की स्थिति खत्म हो सके।

    सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका की तैयारी
    मामले को लेकर विभाग शासकीय अधिवक्ता से कानूनी राय ले रहा है। राय मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने पर निर्णय लिया जाएगा। इससे पहले कोर्ट ने सख्त निर्देश देते हुए सेवा में बने रहने और प्रमोशन के लिए TET पास करना अनिवार्य कर दिया था।

    बैठक में कई अहम प्रशासनिक निर्णय
    सोमवार को आयोजित बैठक में शिक्षक संगठनों और अधिकारियों के साथ चर्चा के दौरान कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इनमें लंबित वेतनवृद्धि और समयमान वेतनमान से जुड़े मामलों को जल्द निपटाने पर सहमति बनी।

    प्रशिक्षण और मार्गदर्शन कार्यक्रम की तैयारी
    यदि न्यायालय के निर्देश यथावत रहते हैं, तो TET में शामिल होने वाले शिक्षकों के लिए तहसील और विकासखंड स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसमें सिलेबस आधारित मार्गदर्शन दिया जाएगा ताकि शिक्षक परीक्षा की बेहतर तैयारी कर सकें।

    DPI स्तर पर परामर्श बैठक का निर्णय
    लंबित समस्याओं के समाधान के लिए डीपीआई स्तर पर एक परामर्शदात्री बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें विभिन्न शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसका उद्देश्य सभी पक्षों को साथ लेकर समाधान निकालना है।

    शिक्षक संगठनों में असंतोष
    हालांकि इस बैठक को लेकर कुछ शिक्षक संगठनों ने असंतोष जताया है। उनका कहना है कि सभी प्रभावित संगठनों को शामिल नहीं किया गया, जिससे लिए गए निर्णयों की वैधता पर सवाल उठते हैं। कुछ संगठनों ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे अधिकृत प्रतिनिधिमंडल के साथ ही चर्चा को मान्यता देंगे।

    क्या है TET परीक्षा?
    TET यानी Teacher Eligibility Test एक राष्ट्रीय स्तर की पात्रता परीक्षा है, जिसे राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद द्वारा 2010 में अनिवार्य किया गया था। यह परीक्षा कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षकों की योग्यता निर्धारित करती है और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत इसकी वैधानिकता तय की गई है।

    सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
    1 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि जिन शिक्षकों की सेवा अवधि 5 वर्ष से अधिक शेष है, उन्हें TET पास करना अनिवार्य होगा। अन्यथा उन्हें सेवा छोड़नी पड़ सकती है या अनिवार्य सेवानिवृत्ति का सामना करना पड़ सकता है।

  • शिक्षा व्यवस्था से लेकर अपराध तक जबलपुर में कई मोर्चों पर कार्रवाई और धोखाधड़ी के मामले उजागर

    शिक्षा व्यवस्था से लेकर अपराध तक जबलपुर में कई मोर्चों पर कार्रवाई और धोखाधड़ी के मामले उजागर

    जबलपुर में एक साथ कई अलग अलग घटनाओं ने प्रशासन और आम लोगों को सतर्क कर दिया है जहां एक ओर शिक्षा विभाग ने मूल्यांकन कार्य में लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों पर सख्त रुख अपनाया है वहीं दूसरी ओर ठगी और धोखाधड़ी के मामले भी सामने आए हैं

    शिक्षा विभाग की ओर से 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन कार्य में लापरवाही बरतने पर 400 से अधिक प्राचार्यों और शिक्षकों को नोटिस जारी किया गया है जिला शिक्षा अधिकारी ने उन शिक्षकों से जवाब मांगा है जो निर्धारित समय पर मूल्यांकन केंद्रों पर उपस्थित नहीं हुए 22 फरवरी से शुरू हुए इस कार्य में करीब 441 शिक्षक अनुपस्थित पाए गए जिनमें पीएम श्री और मॉडल स्कूलों के शिक्षक भी शामिल हैं यदि इन नोटिसों का संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता है तो निलंबन की कार्रवाई की जा सकती है इस सख्ती से शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन बनाए रखने का संदेश दिया गया है

    दूसरी ओर शहर में धोखाधड़ी के मामलों ने भी चिंता बढ़ा दी है कोतवाली थाना क्षेत्र में एक ज्वेलर्स पर 35 लाख रुपये की ठगी का आरोप सामने आया है आरोपी ने चांदी में मुनाफे का झांसा देकर निवेश के नाम पर यह रकम ली पीड़ित मनोज पांडे की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है इस मामले में आरोपी विनोद सोनी के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है

    इसी तरह संजीवनी नगर थाना क्षेत्र में एक और गंभीर मामला सामने आया है जहां एक सहकर्मी युवती को शादी का झांसा देकर आरोपी ने उससे 17 लाख रुपये ऐंठ लिए पीड़िता के अनुसार आरोपी ने न केवल पैसे लिए बल्कि शादी के नाम पर शारीरिक संबंध भी बनाए बाद में शादी से इनकार कर दिया और जब पीड़िता ने पैसे वापस मांगे तो आरोपी ने उसे ब्लॉक कर दिया इतना ही नहीं दिए गए चेक भी बाउंस करा दिए गए जिससे मामला और गंभीर हो गया

    इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शहर में एक तरफ जहां शिक्षा व्यवस्था को लेकर सख्ती बरती जा रही है वहीं दूसरी तरफ धोखाधड़ी और अपराध के मामलों पर भी पुलिस सक्रिय हो गई है प्रशासन अब ऐसे मामलों पर लगातार निगरानी रख रहा है ताकि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सके और आम जनता को सुरक्षित माहौल मिल सके

  • भोपाल में पालक महासंघ का हल्ला बोल: निजी स्कूलों की मनमानी फीस के खिलाफ DEO कार्यालय का घेराव

    भोपाल में पालक महासंघ का हल्ला बोल: निजी स्कूलों की मनमानी फीस के खिलाफ DEO कार्यालय का घेराव

    भोपाल ।राजधानी भोपाल में निजी स्कूलों द्वारा मनमाने ढंग से फीस और अन्य शुल्क वसूले जाने के खिलाफ अभिभावकों का गुस्सा सड़कों पर नजर आया। पालक महासंघ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में अभिभावकों ने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए घेराव किया और निजी स्कूल संचालकों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि निजी स्कूल फीस, बस शुल्क, किताबों और अन्य मदों में लगातार मनमानी वसूली कर रहे हैं, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।

    प्रदर्शन के दौरान पालक महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में शिक्षा माफिया सक्रिय है और निजी स्कूल संचालकों के दबाव में प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा। उनका आरोप है कि अभिभावक लंबे समय से शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से स्कूलों के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया।

    प्रदर्शन के दौरान अभिभावकों ने DEO कार्यालय का घेराव करते हुए जोरदार नारेबाजी की और शिक्षा विभाग के खिलाफ नाराजगी जताई। पालक महासंघ के प्रतिनिधियों ने बताया कि वे अपनी मांगों को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपने पहुंचे थे, लेकिन अधिकारी ने ज्ञापन लेने से इनकार कर दिया और कार्यालय छोड़कर चले गए। इस घटना से प्रदर्शनकारियों में और अधिक आक्रोश फैल गया और उन्होंने इसे अभिभावकों की समस्याओं के प्रति प्रशासन की उदासीनता बताया।

    अभिभावकों का कहना है कि निजी स्कूल हर साल फीस में मनमानी बढ़ोतरी कर देते हैं, जबकि बस शुल्क और किताबों के नाम पर भी भारी रकम वसूली जाती है। इससे खासकर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। कई अभिभावकों ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई जारी रखना भी उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है।

    पालक महासंघ ने सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की है कि निजी स्कूलों की फीस वृद्धि पर तुरंत रोक लगाई जाए और फीस, बस चार्ज तथा किताबों की कीमतों के लिए एक पारदर्शी और तय ढांचा बनाया जाए। इसके अलावा उन्होंने शिक्षा माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और दोषी स्कूलों पर भारी जुर्माना लगाने की मांग भी उठाई है।

    प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग की कि जिला शिक्षा अधिकारी और संबंधित अधिकारियों पर किसी तरह का दबाव डालने वाले लोगों की जांच की जाए और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। पालक महासंघ ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा।

  • छत्तीसगढ़ में 10वीं बोर्ड परीक्षा की शुरुआत, 3.21 लाख विद्यार्थियों ने दी पहली परीक्षा

    छत्तीसगढ़ में 10वीं बोर्ड परीक्षा की शुरुआत, 3.21 लाख विद्यार्थियों ने दी पहली परीक्षा


    रायपुर । छत्तीसगढ़ प्रदेश में आज से 10वीं बोर्ड परीक्षाओं का आगाज़ हो गया। प्रदेशभर के 6,839 स्कूलों में पंजीकृत 3,21,571 विद्यार्थियों ने पहले दिन हिन्दी विषय की परीक्षा दी। परीक्षा सुबह 9 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक आयोजित की गई। इस वर्ष राज्य में 2,510 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां सुरक्षा और गोपनीयता के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

    राजधानी रायपुर के जे एन पांडेय स्कूल में परीक्षार्थियों का पारंपरिक रूप से तिलक लगाकर स्वागत किया गया, जिससे छात्रों का उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ा। परीक्षा केंद्र में व्यवस्थाओं की जानकारी लेते हुए अधिकारियों ने बताया कि प्रत्येक केंद्र पर पर्याप्त परीक्षा पर्यवेक्षक, सुरक्षा कर्मी और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

    छात्रों ने परीक्षा केंद्र से बाहर निकलते समय बताया कि प्रश्नपत्र अपेक्षाकृत सरल और स्पष्ट था। कई विद्यार्थियों ने कहा कि पेपर अच्छा होने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और बोर्ड परीक्षा का डर पहले दिन काफी हद तक कम हो गया। परीक्षार्थियों ने यह भी बताया कि प्रश्नपत्र में हल करने योग्य प्रश्नों की संख्या अधिक थी, जिससे समय प्रबंधन आसान रहा।

    अभिभावकों ने भी इस अवसर पर बच्चों को उत्साहित किया। कुछ अभिभावकों ने कहा कि परीक्षा के लिए बच्चों की तैयारी अच्छी रही और सुरक्षित और सुव्यवस्थित परीक्षा केंद्र से उनकी चिंता काफी कम हुई। शिक्षक और स्कूल प्रशासन ने भी विद्यार्थियों को मानसिक रूप से तैयार किया और उन्हें परीक्षा के दौरान शांत रहने की सलाह दी।

    परीक्षा अधिकारियों ने बताया कि परीक्षा केंद्रों में कड़ाई से निगरानी रखी जा रही है। कैमरा और अन्य निगरानी उपायों के माध्यम से परीक्षा में किसी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अलावा, कोविड-19 के दृष्टिगत स्वास्थ्य मानकों का भी पालन सुनिश्चित किया गया है।

    प्रदेश में 10वीं बोर्ड परीक्षा का यह पहला दिन छात्रों के लिए उत्साह और चुनौती दोनों लेकर आया। स्कूलों में शिक्षक और अधिकारियों का सहयोग, परीक्षा केंद्र की सुव्यवस्था और पारंपरिक स्वागत से विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ा। इसके साथ ही छात्रों ने आत्मविश्वास और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ बोर्ड परीक्षा की शुरुआत की।

    छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग ने सभी छात्रों को आगामी परीक्षाओं के लिए प्रेरित किया है और कहा है कि पूरी तैयारी और ध्यान से परीक्षा देना महत्वपूर्ण है। प्रदेशभर में अगले हफ्तों तक विभिन्न विषयों की परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी, जिससे विद्यार्थियों को समय पर परिणाम मिलने की उम्मीद है।

  • तेलंगाना सरकार ने रमजान में मुस्लिम कर्मचारियों को विशेष छुट्टी देने का फैसला लिया

    तेलंगाना सरकार ने रमजान में मुस्लिम कर्मचारियों को विशेष छुट्टी देने का फैसला लिया


    नई दिल्ली । तेलंगाना सरकार ने रमजान के पवित्र महीने में राज्य के मुस्लिम कर्मचारियों को विशेष छूट देने का निर्णय लिया है। मुख्य सचिव के. रामकृष्ण राव की ओर से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि राज्य में कार्यरत सभी मुस्लिम कर्मचारी शिक्षक अनुबंधित और आउटसोर्सिंग स्टाफ बोर्डों निगमों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में कार्यरत लोग रमजान के दौरान अपने कार्यालय या स्कूल से शाम 4 बजे छुट्टी ले सकते हैं। यह समय सामान्य कार्य अवधि से एक घंटा पहले है ताकि उपवास तोड़ने और नमाज अदा करने जैसी धार्मिक प्रथाओं को आसानी से पूरा किया जा सके। यह आदेश 19 फरवरी से 20 मार्च 2026 तक प्रभावी रहेगा हालांकि सेवा की आवश्यकताओं या आपातकालीन परिस्थितियों में कर्मचारियों को निर्धारित समय से अधिक ड्यूटी करनी पड़ सकती है।

    सरकार का यह कदम धार्मिक संवेदनशीलता और समावेशी नीति को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। फैसले का दायरा व्यापक है और इसमें केवल सरकारी कार्यालय ही नहीं बल्कि शैक्षणिक संस्थान भी शामिल हैं। स्कूल शिक्षा विभाग के निदेशक ने रमजान के दौरान विशेष समय-सारिणी को मंजूरी दी है। 19 फरवरी से 20 मार्च तक सभी उर्दू माध्यम के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूल समानांतर माध्यम स्कूलों के उर्दू खंड और डाइट कॉलेज सुबह 8 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक संचालित होंगे। कम हुए शिक्षण घंटों की भरपाई के लिए उच्च प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों को एक अतिरिक्त कार्य दिवस चलाना होगा जबकि प्राथमिक स्कूलों में दैनिक समय को 30 मिनट बढ़ाया जाएगा।

    नोटिफिकेशन के अनुसार क्षेत्रीय और जिला शिक्षा अधिकारी इस संशोधित समय-सारिणी और मुआवजा व्यवस्था के सख्त क्रियान्वयन के जिम्मेदार होंगे। यह व्यवस्था पिछले वर्षों की प्रथाओं के अनुरूप है और शिक्षा की निरंतरता सुनिश्चित करती है। आदेश का मुख्य उद्देश्य रमजान के दौरान उपवास रखने वाले मुस्लिम कर्मचारियों को उनकी धार्मिक जिम्मेदारियों को निर्वहन करने में मदद करना है। सरकार ने यह भी निर्देश दिए हैं कि यह छूट एकसमान रूप से लागू हो और केवल आपात स्थिति में ही अपवाद बनाया जाए।

    यह फैसला मुस्लिम समुदाय की भावनाओं का सम्मान करते हुए राज्य में सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देता है। पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में भी समान व्यवस्था लागू है जहां 18 फरवरी से 19 मार्च तक यह सुविधा दी जा रही है। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ने इसे धार्मिक प्रथाओं के पालन में सहायक बताया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का कदम न केवल धार्मिक स्वतंत्रता को प्रोत्साहित करता है बल्कि कार्य-जीवन संतुलन में भी मददगार है।

    कुल मिलाकर तेलंगाना सरकार का यह निर्णय मुस्लिम कर्मचारियों को रमजान की रौनक में भाग लेने का अवसर देता है बिना कार्यालय या स्कूल की कार्यक्षमता पर नकारात्मक असर डाले। सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि यह विशेष छूट केवल रमजान तक सीमित है और अन्य समुदायों की परंपराओं के लिए आवश्यकतानुसार विचार किया जा सकता है। यह कदम राज्य की बहुलतावादी संस्कृति को मजबूत करने और सामाजिक समावेशिता को बढ़ावा देने की दिशा में सकारात्मक प्रयास माना जा रहा है।

  • MP में 12वीं बोर्ड परीक्षा शुरू, 7 लाख छात्रों ने पहले दिन अंग्रेजी परीक्षा दी 3856 केंद्रों पर सख्त निगरानी

    MP में 12वीं बोर्ड परीक्षा शुरू, 7 लाख छात्रों ने पहले दिन अंग्रेजी परीक्षा दी 3856 केंद्रों पर सख्त निगरानी

    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में 12वीं बोर्ड परीक्षाएं सोमवार से शुरू हो गईं। पहले दिन यानी सोमवार को 12वीं के छात्रों ने अंग्रेजी का पेपर दिया। इस साल लगभग 7 लाख विद्यार्थी 12वीं की फाइनल परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। प्रदेशभर में कुल 3856 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। भोपाल में 104 केंद्रों पर 2600 के करीब छात्र परीक्षा दे चुके हैं। परीक्षा सुबह 9 से 12 बजे तक आयोजित की जा रही है।

    परीक्षा को शांतिपूर्ण नकलमुक्त और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रशासन और शिक्षा विभाग ने महीनों पहले से तैयारियां शुरू कर दी थीं। नकल रोकने के लिए इस बार फ्लाइंग स्क्वॉड सीसीटीवी निगरानी और थानों से प्रश्न-पत्र निकालने तक वीडियोग्राफी की व्यवस्था की गई है।

    परीक्षा खत्म होने के बाद कई विद्यार्थियों ने पेपर को आसान और सामान्य स्तर का बताया। जलज शर्मा ने कहा कि आज का एग्जाम बहुत अच्छा रहा जबकि उन्नति ने बताया कि पेपर वैसा ही आया जैसा उन्होंने सोचा था। वंश ठाकुर ने भी कहा कि पेपर आसान था और उम्मीद के अनुसार ही रहा।

    प्रदेश में इस बार 10वीं और 12वीं की परीक्षा में कुल 16 लाख से ज्यादा छात्र शामिल हो रहे हैं। इनमें 9 लाख 7 हजार विद्यार्थी 10वीं की परीक्षा देंगे जबकि लगभग 7 लाख छात्र 12वीं बोर्ड परीक्षा में बैठ रहे हैं।

    सभी जिलों में चार-चार फ्लाइंग स्क्वॉड गठित किए गए हैं। इनमें से दो स्क्वॉड विकासखंड स्तर पर और दो जिला स्तर पर काम करेंगे। हर स्क्वॉड में तीन सदस्य होंगे जो पुलिस या प्रशासनिक अधिकारी होंगे ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

    नकल रोकने के लिए संवेदनशील केंद्रों पर तीसरी आंख यानी सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था की गई है। इन कैमरों की निगरानी भोपाल स्थित बोर्ड कार्यालय से सीधे की जाएगी। इसके अलावा प्रश्न-पत्र निकालने के दौरान थानों से वीडियोग्राफी अनिवार्य की गई है और सुरक्षा गार्ड्स की तैनाती भी की गई है।

    माध्यमिक शिक्षा मंडल ने स्कूलों को सख्त निर्देश दिए हैं कि नोटिस बोर्ड मॉर्निंग असेंबली और अभिभावक व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए परीक्षा संबंधी सूचना तुरंत साझा करें। शिक्षकों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं कि कोई भी छात्र पुरानी तारीखों के भरोसे परीक्षा से वंचित न रहे।

    इसके अलावा बोर्ड ने हर जिले में पांच-पांच परीक्षा केंद्रों को विशेष मॉनिटरिंग के लिए चुना है। इन केंद्रों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी सीधे भोपाल स्थित बोर्ड कार्यालय से की जाएगी। औचक निरीक्षण के लिए उड़नदस्ते भी सक्रिय रहेंगे जिनमें शिक्षा विभाग के साथ प्रशासनिक अधिकारी शामिल होंगे।

  • बोर्ड परीक्षा में लापरवाही पर जीरो टॉलरेंस: कलेक्टर ने दिए सख्त निर्देश, नकल पर कड़ी नजर, छात्रों की सुविधा और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता

    बोर्ड परीक्षा में लापरवाही पर जीरो टॉलरेंस: कलेक्टर ने दिए सख्त निर्देश, नकल पर कड़ी नजर, छात्रों की सुविधा और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता



    भिंड। जिले में आगामी 10वीं एवं 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। इसी क्रम में कलेक्टर भिंड की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में केंद्राध्यक्ष एवं सहायक केंद्राध्यक्षों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

    बैठक में कलेक्टर ने दो टूक शब्दों में कहा कि बोर्ड परीक्षा विद्यार्थियों के जीवन का अहम पड़ाव होती है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों की सुविधा, परीक्षा की पारदर्शिता और नकलमुक्त वातावरण प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    कलेक्टर ने माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल द्वारा आयोजित 10वीं एवं 12वीं की परीक्षाओं की व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर बैठने की समुचित व्यवस्था, निर्बाध बिजली, स्वच्छ पेयजल एवं शौचालय की व्यवस्था अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई भी केंद्र नहीं होना चाहिए, जहां विद्यार्थियों को किसी प्रकार की परेशानी हो।

    नकल पर सख्ती दिखाते हुए कलेक्टर ने कहा कि नकल चाहे किसी भी रूप में हो, उसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके लिए केंद्राध्यक्षों को स्वयं सतर्क रहने और परीक्षा ड्यूटी में लगे समस्त स्टाफ को पूरी तरह अलर्ट रखने के निर्देश दिए गए। प्रश्न पत्र वितरण से लेकर उत्तर पुस्तिकाओं के संकलन तक प्रत्येक चरण में कड़ी निगरानी रखने के आदेश दिए गए।

    उन्होंने उत्तर पुस्तिकाओं की सीलिंग और अनसीलिंग प्रक्रिया को पूर्णतः पारदर्शी रखने पर विशेष जोर दिया। साथ ही जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया कि केंद्राध्यक्षों की सूची का पुनः परीक्षण कर केवल योग्य, अनुभवी और जिम्मेदार अधिकारियों को ही यह दायित्व सौंपा जाए।

    कलेक्टर ने सहायक केंद्राध्यक्षों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि वे मुख्य केंद्राध्यक्ष के साथ बेहतर समन्वय बनाकर कार्य करें। परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल फोन एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

    उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी परीक्षा केंद्र से यदि लापरवाही या अनियमितता की शिकायत प्राप्त होती है, तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी, परीक्षा प्रभारी सहित अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।