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  • 38 शिक्षकों पर गिरी गाज, डीईओ ने किया निलंबित, देखें लिस्ट

    38 शिक्षकों पर गिरी गाज, डीईओ ने किया निलंबित, देखें लिस्ट


    कांकेर । कांकेर जिले में शिक्षा विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए 38 शिक्षकों को निलंबित कर दिया है। इनमें से 29 महिला शिक्षक भी शामिल हैं। यह कार्रवाई युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के तहत की गई है, जिसके तहत अतिशेष शिक्षक थे, जिन्हें नई पदस्थापना पर ज्वाइनिंग करने के लिए कहा गया था। हालांकि इन शिक्षकों ने निर्धारित समय सीमा तक ज्वाइनिंग नहीं की, जिसके बाद विभाग ने यह कठोर कदम उठाया।

    युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया और निलंबन की वजह

    शिक्षा विभाग ने स्कूलों में शिक्षकों के समांतर समन्वय को सुनिश्चित करने के लिए युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया शुरू की थी। इसके तहत कई शिक्षक अतिशेष के रूप में सामने आए। विभाग ने इन अतिशेष शिक्षकों को जुलाई 2025 तक नई पदस्थापना पर ज्वाइनिंग करने का निर्देश दिया था। हालांकि, जनवरी 2026 तक जिले के 39 शिक्षकों ने नई पदस्थापना पर ज्वाइनिंग नहीं की, जिसके कारण शिक्षा विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए इन शिक्षकों को निलंबित कर दिया है। निलंबन की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि विभाग ने ज्वाइनिंग न करने को गंभीर उल्लंघन मानते हुए इसे अनुशासनहीनता के तौर पर लिया है।

    डीईओ की कार्रवाई

    कांकेर जिले के जिला शिक्षा अधिकारी ने इस मामले में कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि यह कदम उन शिक्षकों के खिलाफ उठाया गया है जिन्होंने विभागीय निर्देशों का पालन नहीं किया। डीईओ ने कहा यह कार्रवाई पूरी तरह से नियमों के तहत की गई है और संबंधित अधिकारियों द्वारा समय-समय पर शिक्षकों को जानकारी दी गई थी। इन शिक्षकों के लिए अब कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

    निलंबित शिक्षकों की सूची

    निलंबन की सूची में 38 शिक्षकों के नाम शामिल हैं, जिनमें 29 महिला शिक्षक भी हैं। इन शिक्षकों के खिलाफ यह कार्रवाई उन्हें बार-बार चेतावनी देने के बावजूद ज्वाइनिंग न करने पर की गई है। यह कार्रवाई विभाग के अनुशासन और कार्यवाही की सख्त नीति को दर्शाती है।

    सम्बंधित अधिकारी और कदम

    सरकारी शिक्षा विभाग ने न केवल इन शिक्षकों को निलंबित किया है बल्कि साथ ही यह भी सुनिश्चित किया है कि भविष्य में ऐसी स्थितियां उत्पन्न न हों। विभाग ने इस निलंबन को एक संदेश के तौर पर लिया है, ताकि भविष्य में अन्य शिक्षक अपने दायित्वों का पालन करें और शिक्षा व्यवस्था में स्थिरता बनी रहे। यह कदम शिक्षा विभाग द्वारा युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए उठाया गया है। शिक्षकों के कार्यों की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने और विभागीय नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई करने से यह स्पष्ट है कि शिक्षा विभाग ने अपनी कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी और जिम्मेदार बनाने की दिशा में मजबूत कदम उठाए हैं।

  • मध्य प्रदेश: सरकारी स्कूलों में 19 जनवरी को होगी पीटीएम, अभिभावकों को दिखायी जाएंगी प्रीबोर्ड परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाएं

    मध्य प्रदेश: सरकारी स्कूलों में 19 जनवरी को होगी पीटीएम, अभिभावकों को दिखायी जाएंगी प्रीबोर्ड परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाएं


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 19 जनवरी को होने वाली पैरेंट्स-टीचर मीटिंग ,पीटीएम में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। इस दिन छात्रों के अभिभावकों को उनके बच्चों की प्रीबोर्ड परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाएं भी दिखाई जाएंगी ताकि वे अपने बच्चों के प्रदर्शन का जायजा ले सकें और आगामी बोर्ड परीक्षा की तैयारी में सुधार कर सकें।इस साल, 10वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों की प्रीबोर्ड परीक्षाएं 13 जनवरी तक चल रही हैं, और इनके मूल्यांकन के बाद छात्रों को अपनी उत्तर पुस्तिका दिखाई जाएगी।
    इसके बाद 19 जनवरी को आयोजित होने वाली पीटीएम के दौरान अभिभावकों को भी उनके बच्चों की उत्तरपुस्तिका दिखायी जाएगी। इस कदम से अभिभावकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि उनके बच्चे की तैयारी किस स्तर पर है और उन्हें किन क्षेत्रों में और सुधार की आवश्यकता है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार पिछले कुछ महीनों में त्रैमासिक और अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं के दौरान छात्रों के प्रदर्शन को देखा गया था। इसके आधार पर विभाग ने कमजोर प्रदर्शन करने वाले छात्रों की पहचान की और उन्हें विशेष ध्यान और मार्गदर्शन देने का निर्णय लिया।

    प्रीबोर्ड परीक्षा के बाद का योजनाबद्ध तरीका

    प्रीबोर्ड परीक्षा के बाद छात्रों को अगले विषय की तैयारी के लिए अतिरिक्त कक्षाएं दी जा रही हैं। शिक्षक उन्हें यह भी बता रहे हैं कि बोर्ड परीक्षा में प्रश्न किस प्रकार के आ सकते हैं और उत्तर को लिखने के उचित तरीके क्या होंगे। इस प्रक्रिया से छात्रों को आत्मविश्वास मिलेगा और वे परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने में सक्षम होंगे। शिक्षा विभाग का उद्देश्य यह है कि छात्र बिना किसी भ्रम के परीक्षा की तैयारी करें और उन्हें सही दिशा में मार्गदर्शन मिले। इसके अलावा, विभाग ने छात्रों को मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार करने के लिए प्रेरणा और प्रोत्साहन देने के कई कार्यक्रमों की योजना बनाई है।
  • ग्वालियर निजी स्कूलों पर फीस स्ट्रक्चर अपलोड न करने पर होगी कार्रवाई

    ग्वालियर निजी स्कूलों पर फीस स्ट्रक्चर अपलोड न करने पर होगी कार्रवाई


    ग्वालियर । ग्वालियर के निजी स्कूलों में फीस को लेकर हो रही मनमानी पर लगाम लगाने के लिए शिक्षा विभाग ने एक सख्त कदम उठाया है। अब सभी प्राइवेट स्कूलों को फीस स्ट्रक्चर पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य है और इस जानकारी की हार्ड कॉपी जिला शिक्षा विभाग में भी जमा करानी होगी। 31 दिसंबर तक सभी स्कूलों को यह काम पूरा करना था लेकिन अब भी कई स्कूलों ने समय सीमा का पालन नहीं किया है। शिक्षा विभाग ने कहा कि जिन स्कूलों ने यह जानकारी अपलोड नहीं की उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

    इस बार विभाग ने एक बड़ा बदलाव किया है। पहले केवल पोर्टल पर जानकारी अपलोड करना आवश्यक था लेकिन अब पहली बार यह आदेश दिया गया है कि हर स्कूल को पोर्टल के साथ-साथ हार्ड कॉपी भी जमा करनी होगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि कोई भी स्कूल अपनी फीस संरचना को छुपाने या उसे बदलने की कोशिश न कर सके। सभी प्राइवेट स्कूलों को विभाग के पोर्टल पर फीस संरचना 31 दिसंबर तक अपलोड करना था। अब विभाग तीन-चार दिन के भीतर इन आंकड़ों का मिलान करेगा। जिन स्कूलों ने यह जानकारी अपलोड नहीं की है या हार्ड कॉपी जमा नहीं की है उन्हें नोटिस जारी किया जाएगा और संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    इस वर्ष कई स्कूलों ने पोर्टल पर फीस जानकारी तो अपलोड की लेकिन हार्ड कॉपी जमा करने में लापरवाही बरती। अब विभाग ने यह सुनिश्चित किया है कि हर स्कूल को पूर्ण जानकारी देनी होगी। शिक्षा विभाग ने यह भी बताया कि जिन स्कूलों के अपने पोर्टल हैं उन्हें भी अपनी फीस संरचना वहां दिखानी होगी ताकि अभिभावकों को सही और स्पष्ट जानकारी मिल सके। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक यह कदम बच्चों के अभिभावकों को सही जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया गया है। इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि स्कूलों द्वारा फीस की अवैध वृद्धि नहीं की जा सके और पारदर्शिता बनी रहे।

  • बीएलओ की अचानक मौत के 72 घंटे में पत्नी को मिली नौकरी, शिक्षा विभाग ने दिखाई संवेदनशीलता

    बीएलओ की अचानक मौत के 72 घंटे में पत्नी को मिली नौकरी, शिक्षा विभाग ने दिखाई संवेदनशीलता


    हाथरस ।
    उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के सिकंदराराऊ क्षेत्र में एक अनूठी और संवेदनशील पहल देखी गई जब एक बीएलओ बूथ लेवल अधिकारी की अचानक हुई मौत के बाद प्रशासन ने सिर्फ 72 घंटे में उनकी पत्नी को नौकरी दे दी। यह कदम प्रशासन की तत्परता और संवेदनशीलता को दर्शाता है जिसने न केवल विधवा के परिवार की सहायता की बल्कि सरकारी सेवा में उनके जीवन को स्थिरता भी प्रदान की।

    क्या हुआ था

    सिकंदराराऊ के मोहल्ला ब्राह्मणपुरी मटकोटा निवासी कमलकांत शर्मा नावली लालपुर स्थित संविलियन विद्यालय में सहायक अध्यापक थे। इसके साथ ही उन्हें एसआईआर सामाजिक आर्थिक और जातिगत जनगणना कार्य के तहत बीएलओ बूथ लेवल अधिकारी के रूप में भी तैनात किया गया था। 2 दिसंबर को जब वे अपनी ड्यूटी पर जाने के लिए घर से निकलने की तैयारी कर रहे थे, तो अचानक उन्हें चक्कर आ गया और वे गिर पड़े। उन्हें तुरंत अलीगढ़ के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां इलाज के दौरान उनकी दुखद मौत हो गई।

    प्रशासन की तत्परता

    कमलकांत शर्मा की असामयिक मृत्यु के बाद उनके परिवार के सामने आर्थिक संकट आ गया। प्रशासन ने इस दुखद स्थिति को समझा और तुरंत कदम उठाए। सिर्फ 72 घंटे के भीतर, बेसिक शिक्षा विभाग ने उनकी पत्नी को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में उच्च प्राथमिक विद्यालय सिकंदराराऊ में नौकरी प्रदान की। यह नियुक्ति उनकी पत्नी को सहायक शिक्षक के तौर पर दी गई जिससे उन्हें परिवार का पालन-पोषण करने में मदद मिल सके। इस फैसले ने न केवल एक परिवार को सहारा दिया, बल्कि यह भी सिद्ध कर दिया कि प्रशासनिक प्रणाली जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाती है विशेषकर ऐसी स्थितियों में जब किसी कर्मचारी के परिवार को अचानक संकट का सामना करना पड़े।

    शिक्षा विभाग का योगदान

    बेसिक शिक्षा विभाग ने इस संवेदनशील मामले में त्वरित कार्रवाई की। उन्होंने कमलकांत शर्मा की पत्नी को सरकारी सेवा में नियुक्त किया, जिससे उन्हें सरकारी नौकरी का लाभ मिला और परिवार को एक स्थिर आय का स्रोत प्राप्त हुआ। यह कदम निश्चित रूप से अन्य अधिकारियों के लिए एक आदर्श बन सकता है, जो अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए इस तरह के संवेदनशील मामलों में तत्परता से काम करने की प्रेरणा देता है।

    भविष्य में और क्या किया जा सकता है

    इस मामले से यह भी स्पष्ट होता है कि सरकारी विभागों को ऐसे मामलों में और अधिक संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए। जहां एक तरफ परिवार को सरकारी नौकरी देने का कदम सराहनीय है वहीं दूसरी तरफ अन्य प्रशासनिक सहायता, जैसे वित्तीय मदद और शिक्षा की व्यवस्था, भी उन्हें दी जा सकती है ताकि परिवार को पूरी तरह से सशक्त किया जा सके। यह कदम एक मिसाल पेश करता है कि किस तरह से सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उनके परिवार को समर्थन देने के लिए प्रशासन को जल्दी और संवेदनशीलता से कदम उठाना चाहिए।

    सिकंदराराऊ में बीएलओ कमलकांत शर्मा की असामयिक मौत के बाद प्रशासन द्वारा उनकी पत्नी को 72 घंटे के भीतर नौकरी देने का कदम निश्चित ही सराहनीय है। यह प्रशासन की संवेदनशीलता और तत्परता का परिचायक है। सरकारी विभागों द्वारा इस तरह की त्वरित और प्रभावी कार्रवाई से यह संदेश जाता है कि मुश्किल समय में प्रशासन अपने कर्मचारियों के परिवारों के साथ खड़ा होता है।