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  • शिवपुरी में बंद मकान से पुराना मीटर हटाने पर विवाद, वकील और रहवासियों के विरोध के बाद लौटे बिजलीकर्मी

    शिवपुरी में बंद मकान से पुराना मीटर हटाने पर विवाद, वकील और रहवासियों के विरोध के बाद लौटे बिजलीकर्मी


    मध्य प्रदेश।
    के शिवपुरी शहर की तारकेश्वरी कॉलोनी में स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया को लेकर विवाद सामने आया है। बिजली कंपनी के ठेकेदार के कर्मचारी एक बंद मकान में पुराना मीटर हटाकर नया स्मार्ट मीटर लगाने पहुंचे थे। इस दौरान मकान मालिक की गैरमौजूदगी में पुराना मीटर निकाल दिया गया। जानकारी मिलने पर मकान मालिक एडवोकेट कैलाश जैन मौके पर पहुंचे और इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई। इसके बाद कॉलोनी के अन्य रहवासी भी एकत्रित हो गए और कर्मचारियों से सवाल करने लगे। विरोध बढ़ने पर कर्मचारियों को पुराना मीटर दोबारा लगाकर लौटना पड़ा।

    यह घटना सोमवार दोपहर की बताई गई है। बिजली कंपनी के ठेकेदार की टीम तारकेश्वरी कॉलोनी में पुराने बिजली मीटरों को बदलकर स्मार्ट मीटर लगाने का काम कर रही थी। इसी दौरान कर्मचारी एडवोकेट कैलाश जैन के ताला लगे मकान पर पहुंचे। मकान मालिक उस समय वहां मौजूद नहीं थे। कर्मचारियों ने पुराना मीटर निकाल दिया, लेकिन स्मार्ट मीटर लगाने की कार्रवाई आगे बढ़ने से पहले ही विवाद खड़ा हो गया।

    कैलाश जैन को जब अपने मकान का मीटर हटाए जाने की जानकारी मिली, तो वे मौके पर पहुंचे। उन्होंने सवाल उठाया कि मकान बंद होने और मालिक की गैरमौजूदगी में मीटर हटाने की कार्रवाई किस अनुमति के आधार पर की गई। उनकी आपत्ति के बाद वहां बहस शुरू हो गई। कुछ ही देर में आसपास रहने वाले लोग भी मौके पर पहुंच गए और बिजली कंपनी के कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने लगे।

    रहवासियों का कहना था कि स्मार्ट मीटर लगाने से पहले उपभोक्ता को इसकी जानकारी दी जानी चाहिए। यदि किसी मकान में कोई मौजूद नहीं है, तो वहां मीटर बदलने की प्रक्रिया किस तरह पूरी की जाएगी, इस बारे में स्पष्टता जरूरी है। लोगों ने मांग की कि संबंधित ठेकेदार और बिजली कंपनी के जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति स्पष्ट करें। उनका कहना था कि उपभोक्ताओं की आपत्तियों को सुने बिना ऐसी कार्रवाई करने से विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है।

    मौके पर काफी देर तक बहस और विरोध जारी रहा। हालांकि, संबंधित अधिकारियों के मौके पर पहुंचने की मांग के बावजूद कोई जिम्मेदार अधिकारी वहां नहीं आया। स्थिति को देखते हुए कर्मचारियों ने स्मार्ट मीटर लगाने की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई। उन्होंने पुराने मीटर को फिर से लगा दिया और वहां से रवाना हो गए। इस तरह जिस मकान में नया स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी, वहां विरोध के बाद पुराना मीटर ही बहाल करना पड़ा।

    शहर में स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया को लेकर उपभोक्ताओं की ओर से पहले भी सवाल उठाए जाते रहे हैं। स्थानीय रहवासियों की चिंता है कि मीटर बदलने के दौरान उन्हें पर्याप्त जानकारी दी जाए और उनकी आपत्तियों का समाधान किया जाए। प्रक्रिया के संबंध में स्पष्ट संवाद नहीं होने पर उपभोक्ताओं और कर्मचारियों के बीच असमंजस पैदा होने की आशंका बनी रहती है।

    इस मामले में बिजली कंपनी के महाप्रबंधक सुमित अग्रवाल ने बताया कि वरिष्ठ कार्यालय से सभी उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगाने के निर्देश मिले हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मीटर लगाने के दौरान उपभोक्ता की सहमति लेना जरूरी है। यदि किसी उपभोक्ता को स्मार्ट मीटर को लेकर परेशानी है, तो उसकी संतुष्टि के लिए स्मार्ट मीटर के साथ चेक मीटर भी लगाया जा सकता है। जो उपभोक्ता सहमत नहीं हैं, उनके मामलों में आगे मिलने वाले निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

    तारकेश्वरी कॉलोनी की घटना के बाद स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया और उपभोक्ताओं की सहमति को लेकर सवाल उठे हैं। फिलहाल संबंधित मकान में पुराना मीटर दोबारा लगा दिया गया है। हालांकि, इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होगी, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।

  • यूपी में विद्युत सखियों ने जमा कराए 3,720 करोड़ रुपये के बिजली बिल, कमीशन से कमाए 47 करोड़ रुपये

    यूपी में विद्युत सखियों ने जमा कराए 3,720 करोड़ रुपये के बिजली बिल, कमीशन से कमाए 47 करोड़ रुपये

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में विद्युत सखी योजना ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता का माध्यम बन रही है। इस योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने अब तक 3,720 करोड़ रुपये से अधिक के बिजली बिल जमा कराए हैं। इसके बदले उन्हें 47 करोड़ रुपये से ज्यादा कमीशन मिला है। इन महिलाओं ने करीब 1.80 करोड़ उपभोक्ताओं के बिजली बिलों के भुगतान में भूमिका निभाई है।

    उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के समन्वय से संचालित इस योजना में अब तक 31 हजार से अधिक महिलाओं का पंजीकरण किया जा चुका है। इनमें 16 हजार से ज्यादा महिलाएं सक्रिय रूप से बिजली बिल जमा कराने का काम कर रही हैं। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आय अर्जित करने का अवसर उपलब्ध कराने के साथ उपभोक्ताओं के लिए बिजली बिल भुगतान की सुविधा बढ़ाना है।

    योजना के माध्यम से महिलाएं अपने गांव और आसपास के इलाकों में रहकर ही काम कर सकती हैं। उन्हें रोजगार के लिए शहरों की ओर जाने की आवश्यकता नहीं होती। घरेलू जिम्मेदारियों के साथ आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी का अवसर मिलने से महिलाएं परिवार की आमदनी में योगदान दे पा रही हैं। यह व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।

    विद्युत सखियों के काम से बिजली उपभोक्ताओं को भी सुविधा मिल रही है। ग्रामीणों को बिल जमा कराने के लिए दूर स्थित बिजली कार्यालयों या भुगतान केंद्रों तक जाने की जरूरत कम होती है। गांव में ही भुगतान की सुविधा मिलने से उनके समय और आने-जाने के खर्च की बचत हो सकती है। इस तरह योजना महिलाओं की आमदनी बढ़ाने के साथ ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए सेवा को अधिक सुलभ बनाने का प्रयास करती है।

    विद्युत सखियों को काम शुरू करने से पहले प्रशिक्षण दिया जाता है और डिजिटल भुगतान प्रणाली से जोड़ा जाता है। वे ई-वॉलेट के माध्यम से उपभोक्ताओं के बिजली बिल जमा करती हैं। इस काम के बदले उन्हें निर्धारित दर के अनुसार कमीशन मिलता है। योजना के तहत 2,000 रुपये तक का बिजली बिल जमा कराने पर 20 रुपये तक कमीशन दिया जाता है।

    डिजिटल भुगतान व्यवस्था से ग्रामीण क्षेत्रों में इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन को बढ़ावा देने में भी मदद मिल रही है। विद्युत सखियां उपभोक्ताओं और बिजली विभाग के बीच एक संपर्क माध्यम के रूप में काम करती हैं। इससे ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर बिल भुगतान की सुविधा मिलती है, जबकि बिजली विभाग को राजस्व संग्रह के लिए अतिरिक्त माध्यम उपलब्ध होता है।

    राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार के मुताबिक, प्रदेश में 16 हजार से अधिक सक्रिय विद्युत सखियां ग्रामीण उपभोक्ताओं तक बिजली बिल भुगतान की सुविधा पहुंचा रही हैं। इस पहल से महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और समाज में उनकी भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

    विद्युत सखी योजना महिला सशक्तीकरण, ग्रामीण रोजगार और जनसेवा को एक साथ जोड़ती है। अब तक 3,720 करोड़ रुपये से अधिक के बिजली बिल जमा कराने और 47 करोड़ रुपये से ज्यादा कमीशन अर्जित करने के आंकड़े इस योजना के दायरे को दर्शाते हैं। पंजीकृत महिलाओं में से 16 हजार से अधिक के सक्रिय होने के साथ यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में बिल भुगतान की सुविधा और महिलाओं के लिए आय के अवसर उपलब्ध करा रही है।

  • अदाणी पावर के मुनाफे में 141.5% की छलांग, दूसरी तिमाही में कमाई बढ़कर 7,019 करोड़ रुपये के पार

    अदाणी पावर के मुनाफे में 141.5% की छलांग, दूसरी तिमाही में कमाई बढ़कर 7,019 करोड़ रुपये के पार

    नई दिल्ली । अदाणी पावर ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है। कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 141.5 प्रतिशत बढ़कर 7,019.32 करोड़ रुपये हो गया। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी ने 2,906.46 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया था। कंपनी की आय और परिचालन से जुड़े प्रमुख आंकड़ों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। नतीजे ऐसे समय आए हैं, जब देश में बिजली की मांग और अधिकतम बिजली खपत में वृद्धि देखने को मिली है।

    दूसरी तिमाही में कंपनी का कुल राजस्व 39.4 प्रतिशत बढ़कर 19,950.60 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 14,307.79 करोड़ रुपये था। इस दौरान ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले की कमाई यानी ईबीआईटीडीए 45.7 प्रतिशत बढ़कर 8,743.22 करोड़ रुपये रही। वहीं, परिचालन से प्राप्त राजस्व 29.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 17,014.06 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। निरंतर परिचालन से ईबीआईटीडीए में 18.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 6,320.97 करोड़ रुपये रहा।

    चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में भी कंपनी ने बेहतर प्रदर्शन किया। अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच अदाणी पावर का शुद्ध लाभ लगभग दोगुना होकर 11,885.92 करोड़ रुपये हो गया। इसी अवधि में कुल राजस्व 36 प्रतिशत बढ़कर 39,272.90 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शेरसिंह बी. ख्यालिया ने कहा कि कंपनी लाभप्रदता और परियोजनाओं को लागू करने के मामले में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही है। उनके मुताबिक, भारत की दीर्घकालिक बिजली जरूरतों को पूरा करने में घरेलू कोयला आधारित बिजली उत्पादन की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है।

    कंपनी के अनुसार, वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में भारत की बिजली मांग 11.5 प्रतिशत बढ़कर 502 अरब यूनिट हो गई। कुल बिजली आपूर्ति में कोयला और लिग्नाइट आधारित उत्पादन की हिस्सेदारी 66 प्रतिशत रही। इसी दौरान देश की अधिकतम बिजली मांग 18 प्रतिशत बढ़कर 270 गीगावाट तक पहुंच गई। बिजली की बढ़ती जरूरतों का असर कंपनी की बिक्री पर भी दिखाई दिया।

    अदाणी पावर की बिजली बिक्री दूसरी तिमाही में बढ़कर 26.4 अरब यूनिट हो गई, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 23.7 अरब यूनिट थी। कंपनी का प्लांट लोड फैक्टर यानी पीएलएफ 62.8 प्रतिशत से बढ़कर 70.1 प्रतिशत हो गया। पीएलएफ से पता चलता है कि किसी बिजली संयंत्र की उपलब्ध उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल किस स्तर पर किया गया। कंपनी की कुल परिचालन क्षमता 18,150 मेगावाट रही।

    दीर्घकालिक बिजली खरीद समझौतों के तहत बिक्री 29.7 प्रतिशत बढ़कर 23.4 अरब यूनिट हो गई। इस श्रेणी में प्रति यूनिट प्राप्त टैरिफ भी 12.7 प्रतिशत बढ़कर 6.4 रुपये रहा। इसके विपरीत, अल्पकालिक और मर्चेंट बाजार में प्रति यूनिट प्राप्ति 33.1 प्रतिशत बढ़कर 7.2 रुपये हो गई, लेकिन इस श्रेणी में बिक्री की मात्रा 43 प्रतिशत घट गई। कंपनी के मुताबिक, अतिरिक्त खुली क्षमता को मध्यम अवधि के बिजली आपूर्ति अनुबंधों में स्थानांतरित किए जाने के कारण ऐसा हुआ।

    कंपनी का मानना है कि बिजली की बढ़ती मांग, औद्योगिक गतिविधियों और शहरीकरण से आने वाली तिमाहियों में क्षेत्र को समर्थन मिल सकता है। हालांकि, भविष्य का प्रदर्शन बिजली की मांग, उत्पादन, बिक्री और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

  • मध्य प्रदेश में बिजली संकट गहराया, किसानों को 10 घंटे के वादे के बदले सिर्फ 2 घंटे आपूर्ति का आरोप

    मध्य प्रदेश में बिजली संकट गहराया, किसानों को 10 घंटे के वादे के बदले सिर्फ 2 घंटे आपूर्ति का आरोप

    मध्य प्रदेश: में बिजली की मांग बढ़ने और उत्पादन प्रभावित होने के बीच बिजली आपूर्ति का मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। प्रदेश में खेती और सिंचाई के लिए बिजली की जरूरत बढ़ी है। इसी बीच कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि किसानों को निर्धारित समय के अनुसार बिजली नहीं मिल रही है। पार्टी का कहना है कि कई क्षेत्रों में किसानों को प्रतिदिन मुश्किल से दो घंटे बिजली मिल पा रही है, जबकि खेती और सिंचाई के लिए 10 घंटे बिजली देने का वादा किया गया था।

    प्रदेश में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सरकार ने पंजाब और उत्तर प्रदेश से बिजली मांगी है। बिजली उत्पादन पर असर पड़ने और बोवनी में देरी के कारण मांग बढ़ने की बात सामने आई है। ऐसे हालात में बिजली की उपलब्धता और नियमित आपूर्ति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। किसानों के साथ घरेलू उपभोक्ता भी बिजली कटौती से प्रभावित हो रहे हैं।

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बिजली संकट को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि किसान गंभीर बिजली संकट का सामना कर रहे हैं। खेती के काम और सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। किसानों को जरूरत के मुताबिक बिजली उपलब्ध नहीं होने पर खेतों में सिंचाई का काम प्रभावित हो रहा है। इससे कृषि कार्यों को समय पर पूरा करने में भी परेशानी आ सकती है।

    पटवारी ने यह भी कहा कि बिजली की समस्या केवल किसानों तक सीमित नहीं है। आम लोगों को भी अघोषित बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश के कई इलाकों में 10-10 घंटे तक बिजली गुल रहने की शिकायतें सामने आने का दावा किया गया है। इस वजह से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के घरेलू उपभोक्ताओं की रोजमर्रा की जरूरतें प्रभावित हो रही हैं।

    बिजली की अनियमित आपूर्ति से ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई के अलावा पेयजल व्यवस्था पर भी असर पड़ने की बात कही गई है। बार-बार बिजली जाने से छोटे दुकानदारों और कारोबारियों को भी कामकाज में परेशानी होती है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली की नियमित उपलब्धता जरूरी है, लेकिन लंबे समय तक आपूर्ति बाधित रहने से दैनिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।

    किसानों के लिए सिंचाई के समय बिजली उपलब्ध होना महत्वपूर्ण है। यदि जरूरत के अनुसार बिजली नहीं मिलती, तो फसलों की बढ़वार और उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इससे किसानों की आमदनी और आर्थिक स्थिति पर भी दबाव पड़ सकता है। खेती की बढ़ती लागत और अन्य चुनौतियों के बीच बिजली की कमी किसानों के लिए अतिरिक्त परेशानी बन सकती है।

    कांग्रेस ने सरकार से सवाल किया है कि किसानों को तय समय के मुताबिक बिजली क्यों नहीं मिल रही है और घरेलू उपभोक्ताओं को अघोषित कटौती से राहत कब मिलेगी। पार्टी ने नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। साथ ही, बिजली कटौती होने पर उसकी पूर्व सूचना देने और कटौती के कारणों की जानकारी सार्वजनिक करने की जरूरत पर जोर दिया है।

    बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच बने अंतर को दूर करना सरकार के सामने चुनौती है। ऐसे में किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने और घरेलू उपभोक्ताओं की परेशानी कम करने का मुद्दा अहम बना हुआ है। फिलहाल, बिजली संकट को लेकर कांग्रेस ने सरकार से जवाब मांगा है और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।

  • ग्वालियर के 400 कमरों वाले जय विलास पैलेस के बिजली बिलों पर सवाल, कई कनेक्शनों में सालभर शून्य या बेहद कम खपत दर्ज

    ग्वालियर के 400 कमरों वाले जय विलास पैलेस के बिजली बिलों पर सवाल, कई कनेक्शनों में सालभर शून्य या बेहद कम खपत दर्ज

    मध्य प्रदेश । के ग्वालियर स्थित जय विलास पैलेस के बिजली बिलों और खपत के आंकड़ों को लेकर सवाल उठे हैं। करीब 80 एकड़ में फैले इस महल में लगभग 400 कमरे हैं और बिजली कंपनी के कुल 21 कनेक्शन बताए गए हैं। इन कनेक्शनों के बिलों की पड़ताल में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें पिछले 12 महीनों के दौरान बिजली की खपत शून्य या बेहद कम दर्ज की गई। अधिकांश कनेक्शनों पर पुराने मीटर लगे होने की जानकारी भी सामने आई है। महल के रानी महल वाले हिस्से में ज्योतिरादित्य सिंधिया का परिवार रहता है।

    उपलब्ध बिजली बिलों के अनुसार, रानी महल वाले हिस्से में लगे स्मार्ट मीटर पर पिछले 12 महीनों में कुल 360.389 यूनिट बिजली खपत दर्ज की गई। वहीं, महादजी चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम पर दर्ज घरेलू कनेक्शन में अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026 तक सभी 12 महीनों में शून्य यूनिट खपत दिखाई गई। इस दौरान इस कनेक्शन पर कुल 1006 रुपये का बिल जारी हुआ, जिसमें अन्य शुल्क शामिल बताए गए हैं। बिलों में नियमित रीडिंग दर्ज होने की बात भी कही गई है।

    एक अन्य कनेक्शन चीफ सेक्रेटरी टू श्रीमंत हिज हाईनेस महाराजा के नाम पर दर्ज है। यह कनेक्शन 31 जुलाई 2015 को लगाया गया था और इस पर एक किलोवाट का विद्युत भार स्वीकृत है। नवंबर 2025 से अक्टूबर 2026 तक इसमें 2016 यूनिट बिजली की खपत दर्ज की गई। इस कनेक्शन पर 14,777 रुपये बकाया बताए गए, जिनमें पिछले महीनों की 14,686 रुपये की बिल राशि शामिल थी। बिल जमा करने की अंतिम तारीख 14 अक्टूबर 2026 दर्ज थी।

    पैलेस गार्डन स्थित एक व्यावसायिक कनेक्शन में अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026 के बीच केवल पांच यूनिट बिजली खपत दर्ज की गई। यह कनेक्शन एक जुलाई 1980 को लगाया गया था और इस पर तीन किलोवाट का विद्युत भार स्वीकृत है। इसी तरह, वसुंधरा राजे चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम पर दर्ज कनेक्शन में एक साल के दौरान 2764 यूनिट खपत सामने आई। इस कनेक्शन पर 24,687 रुपये का पिछला बिल बकाया बताया गया था। अगस्त 2026 के बिल की राशि 471 रुपये दर्ज थी।

    मन्नू महल पैलेस के नाम पर दर्ज घरेलू कनेक्शन में अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026 तक शून्य यूनिट खपत दिखाई गई। जूनियर महारानी स्वीट हाउस के पते पर दर्ज एक अन्य कनेक्शन में भी 12 महीनों तक बिजली खपत शून्य रही, जबकि इस अवधि में कुल 1322 रुपये का बिल आया। द महारानी स्वीट हाउस के नाम पर दर्ज कनेक्शन में भी पूरे साल शून्य यूनिट खपत दर्ज की गई और बिल की कुल राशि 1388 रुपये बताई गई।

    पैलेस परिसर के अन्य कनेक्शनों में भी बहुत कम खपत के आंकड़े सामने आए। एमपी सिंह सेक्रेटरी के नाम पर दर्ज दो कनेक्शनों में एक साल के दौरान दो-दो यूनिट बिजली खपत दर्ज की गई। इन पर क्रमशः 957 रुपये और 1180 रुपये का बिल बताया गया। वहीं, हिरनवन कोठी के पीआरओ के नाम पर दर्ज कनेक्शन में नवंबर 2025 से अक्टूबर 2026 तक केवल एक यूनिट बिजली खपत दर्ज हुई। इस कनेक्शन की सालाना बिल राशि 6700 रुपये बताई गई। इन आंकड़ों के साथ कई कनेक्शनों पर पुराने मीटर लगे होने की जानकारी भी दी गई है।

    जय विलास पैलेस परिसर के एक हिस्से में स्थित उषा किरण पैलेस होटल का बिजली कनेक्शन अलग है। होटल का संचालन ताज समूह के अधीन होता है और यहां 50 कमरे बताए गए हैं। होटल के पास 400 किलोवोल्ट एम्पियर क्षमता का अलग उच्च तनाव वाला कनेक्शन है। अगस्त महीने का इसका बिजली बिल 18 लाख 11 हजार 67 रुपये बताया गया है। यह बिल होटल के पृथक कनेक्शन का है, इसलिए इसे महल के अन्य घरेलू और व्यावसायिक कनेक्शनों से अलग रखा गया है।

    बिजली कंपनी के उपमहाप्रबंधक गगनदेव शर्मा ने कहा कि होटल का बिल हर महीने जारी होता है और उसका कनेक्शन अलग है। उन्होंने यह भी कहा कि जय विलास पैलेस के घरेलू तथा व्यावसायिक कनेक्शनों पर बिल कम आने या खपत कम दर्ज होने के मामले की जांच कराई जा सकती है। हालांकि, आगे की कार्रवाई के बारे में दोबारा पूछे जाने पर कोई जानकारी नहीं दी गई। महल के प्रबंधक मयंक मधुकर और ज्योतिरादित्य सिंधिया के जनसंपर्क अधिकारी अनिल मिश्रा से भी पक्ष मांगा गया, लेकिन उन्होंने जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। बिजली कंपनी के महाप्रबंधक से भी लिखित जवाब मांगा गया, पर प्रतिक्रिया नहीं मिली।

  • कोयला आपूर्ति में तेजी से बिजलीघरों का भंडार स्थिर, अक्टूबर में दैनिक सप्लाई बढ़कर 2.49 मिलियन टन पहुंची

    कोयला आपूर्ति में तेजी से बिजलीघरों का भंडार स्थिर, अक्टूबर में दैनिक सप्लाई बढ़कर 2.49 मिलियन टन पहुंची


    नई दिल्ली । देश के कोयला आधारित बिजलीघरों में कोयले का भंडार अक्टूबर में लगातार 18 मिलियन टन से अधिक बना हुआ है। 29 सितंबर 2026 से शुरू हुई यह स्थिति 10 अक्टूबर तक कायम रही। अक्टूबर के शुरुआती दिनों में कोयले की आपूर्ति मजबूत होने से बिजलीघरों के भंडार में कमी आने की रफ्तार भी धीमी हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बिजली की मांग के लिए कोयले की खपत और आपूर्ति के बीच अंतर पहले की तुलना में कम हुआ है।

    29 सितंबर 2026 को देश के बिजलीघरों में कोयले का कुल भंडार 18.932 मिलियन टन दर्ज किया गया था। 10 अक्टूबर को यह 18.205 मिलियन टन रहा। इस अवधि में भंडार में कुछ कमी आई, लेकिन इसका स्तर 18 मिलियन टन से ऊपर बना रहा। संबंधित आंकड़े बताते हैं कि कोयले की दैनिक आपूर्ति बिजलीघरों की खपत के करीब पहुंची है। इससे ताप बिजलीघरों के लिए ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिल रही है।

    अक्टूबर के दौरान कुछ दिनों में कोयले के भंडार में बढ़ोतरी भी दर्ज की गई। 2 अक्टूबर को स्टॉक में 0.024 मिलियन टन की वृद्धि हुई, जबकि 10 अक्टूबर को इसमें 0.017 मिलियन टन का इजाफा हुआ। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई, जब सितंबर के मुकाबले अक्टूबर में कोयले के भंडार में कमी आने की गति काफी धीमी हो गई।

    आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2026 में पूरे महीने बिजलीघरों का कोयला भंडार लगभग 7.28 मिलियन टन घट गया था। इस दौरान औसतन प्रतिदिन 0.24 मिलियन टन कोयले की कमी दर्ज की गई। इसके विपरीत, अक्टूबर के पहले 10 दिनों में कुल भंडार में लगभग 0.56 मिलियन टन की गिरावट आई। इस अवधि में औसत दैनिक कमी घटकर 0.06 मिलियन टन रह गई। दोनों अवधियों के आंकड़ों में अंतर कोयला आपूर्ति की स्थिति में सुधार का संकेत देता है।

    कोयले की ढुलाई में तेजी को इस सुधार का प्रमुख कारण बताया गया है। 1 से 10 अक्टूबर 2026 के बीच बिजली क्षेत्र के लिए प्रतिदिन औसतन 469 रेक कोयला लोड किया गया। सितंबर में यह औसत 426 रेक प्रतिदिन था। इस तरह अक्टूबर में रेक लोडिंग में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई। महीने के शुरुआती 10 दिनों में प्रतिदिन लोड किए गए रेक की संख्या 447 से 482 के बीच रही।

    ढुलाई बढ़ने के साथ बिजली क्षेत्र को मिलने वाली वास्तविक कोयला आपूर्ति में भी इजाफा हुआ। अक्टूबर में यह आपूर्ति बढ़कर 2.49 मिलियन टन प्रतिदिन हो गई, जबकि सितंबर में औसत आपूर्ति 2.21 मिलियन टन प्रतिदिन थी। अक्टूबर के 10 दिनों में से नौ दिन बिजली क्षेत्र को तय योजना से अधिक कोयला मिला। इससे बिजलीघरों की ईंधन जरूरतों को पूरा करने में आपूर्ति की भूमिका मजबूत हुई है।

    कम भंडार वाले बिजलीघरों की स्थिति पर भी निगरानी रखी जा रही है। जरूरत के अनुसार विभिन्न संयंत्रों के बीच कोयले का पुनर्वितरण किया जा रहा है, ताकि बिजली उत्पादन प्रभावित न हो। कोयले की ढुलाई और आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए कोल इंडिया लिमिटेड, एससीसीएल, रेलवे और बिजली क्षेत्र की कंपनियां मिलकर काम कर रही हैं। कोयला परिवहन में भारतीय रेलवे के प्रयासों और पेशेवर प्रतिबद्धता की भी सराहना की गई है।

  • भोपाल में बिजली के पोल से करंट लगने पर भाजपा युवा मोर्चा के जिला महामंत्री दिव्यऋषि तिवारी की मौत, महिला भी झुलसी

    भोपाल में बिजली के पोल से करंट लगने पर भाजपा युवा मोर्चा के जिला महामंत्री दिव्यऋषि तिवारी की मौत, महिला भी झुलसी

    मध्य प्रदेश: की राजधानी भोपाल के एमपी नगर इलाके में रविवार रात बिजली के पोल में करंट उतरने से भाजपा युवा मोर्चा के जिला महामंत्री दिव्यऋषि तिवारी की मौत हो गई। हादसा रात करीब 9 बजे हुआ। दिव्यऋषि इलाके में शॉपिंग करने पहुंचे थे। सड़क पार करने के दौरान यह दुर्घटना हुई, जिसमें एक महिला भी करंट की चपेट में आ गई।

    प्रत्यक्षदर्शी हेड कॉन्स्टेबल जगदीश दांगी के मुताबिक, दिव्यऋषि सड़क के दूसरी तरफ जाने के लिए डिवाइडर पर चढ़े थे। सड़क पार करते समय उन्होंने सहारा लेने के लिए किनारे लगे बिजली के पोल को एक हाथ से पकड़ लिया। इसी दौरान पोल में करंट होने के कारण उन्हें जोरदार बिजली का झटका लगा।

    बताया गया कि दिव्यऋषि दूसरे हाथ से दीवार पकड़ने की कोशिश कर रहे थे, तभी यह हादसा हुआ। बिजली का झटका लगते ही वह मौके पर गिर पड़े। इसी दौरान वहां मौजूद एक महिला भी करंट की चपेट में आ गई। घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों और पुलिसकर्मियों ने दोनों को संभालने और मदद पहुंचाने की कोशिश की।

    हादसे के समय मौके पर मौजूद ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने दिव्यऋषि को बचाने के लिए तत्काल प्रयास शुरू किए। उन्हें सीपीआर दिया गया, ताकि उनकी जान बचाई जा सके। इसके बाद उन्हें उपचार के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), भोपाल ले जाया गया। हालांकि, अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    घटना के बाद एमपी नगर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने दिव्यऋषि की मौत के संबंध में मर्ग कायम किया है। हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए बिजली के पोल, उससे जुड़े बिजली कनेक्शन और आसपास चल रहे निर्माण कार्य की स्थिति की जांच की जा रही है।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, संबंधित पोल मेट्रो प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य के दौरान लगाया गया था। पोल के पास बिजली का तार खुला होने की बात भी सामने आई है। ऐसे में पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पोल में करंट किस वजह से पहुंचा और वहां बिजली के तार खुले होने की स्थिति क्यों बनी हुई थी।

    जांच में यह भी देखा जा रहा है कि निर्माण कार्य के दौरान लगाए गए पोल और उससे जुड़े बिजली के कनेक्शन की स्थिति क्या थी। फिलहाल पुलिस हादसे से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है। दुर्घटना में घायल महिला की स्थिति के बारे में उपलब्ध जानकारी में कोई विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।

    इस घटना में भाजपा युवा मोर्चा के जिला महामंत्री दिव्यऋषि तिवारी की जान चली गई। सड़क पार करने के लिए पोल का सहारा लेने के दौरान हुए इस हादसे ने बिजली के पोल में करंट आने और खुले तारों से जुड़े सुरक्षा संबंधी सवाल खड़े किए हैं। पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि दुर्घटना के लिए किन परिस्थितियों की भूमिका रही।

  • बिजली संकट से जूझता एमपी अब सरप्लस राज्य, 32 हजार मेगावॉट क्षमता के बीच ग्रीन एनर्जी पर बड़ा जोर

    बिजली संकट से जूझता एमपी अब सरप्लस राज्य, 32 हजार मेगावॉट क्षमता के बीच ग्रीन एनर्जी पर बड़ा जोर

    मध्यप्रदेश: अब बिजली के मामले में सरप्लस राज्य बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी लगातार नए आयाम स्थापित किए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य प्रदेशवासियों को सस्ती दरों पर पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराना है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 22 सितंबर को भोपाल में आयोजित नवीकरणीय ऊर्जा एवं ऊर्जा भंडारण की किफायती विद्युत खरीद विषयक कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित किया और एसोसिएशन की पुस्तक का विमोचन भी किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा समय में बिजली हर क्षेत्र की अनिवार्य जरूरत बन चुकी है। राज्य सरकार बढ़ती खपत को ध्यान में रखते हुए बिजली उत्पादन, वितरण और संधारण की क्षमता पर लगातार काम कर रही है। नई तकनीक के साथ बिजली उत्पादन की नई इकाइयां भी शुरू की गई हैं।

    उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने बिजली संकट और लंबे समय तक पावर कट का दौर देखा है, लेकिन अब स्थिति काफी बदल गई है। प्रदेश नवीकरणीय ऊर्जा के उत्पादन में लगातार अपनी क्षमता बढ़ा रहा है और अपने ही पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

    मुख्यमंत्री के अनुसार, मध्यप्रदेश की बिजली उत्पादन क्षमता राज्य गठन से लेकर वर्ष 2002-03 तक लगभग 5 हजार मेगावॉट थी। वर्तमान में यह क्षमता बढ़कर करीब 32 हजार मेगावॉट हो चुकी है। इसमें लगभग 30 प्रतिशत हिस्सेदारी ग्रीन एनर्जी की है।

    नीमच-मंदसौर क्षेत्र में 2 हजार मेगावॉट क्षमता की परियोजना का भी उल्लेख किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतनी बड़ी परियोजनाओं को सामान्य तौर पर पूरा होने में चार से छह वर्ष तक लग सकते हैं, लेकिन मध्यप्रदेश में इसे करीब दो से ढाई वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

    प्रदेश में पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के साथ सौर, पवन और पंप स्टोरेज के माध्यम से बिजली उत्पादन पर भी जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब पानी से ही नहीं, बल्कि पानी के ऊपर भी बिजली उत्पादन की दिशा में काम हो रहा है।

    ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के मुरैना में स्थापित सोलर इलेक्ट्रिसिटी स्टोरेज परियोजना से करीब 2.70 रुपये प्रति यूनिट की दर पर बिजली उपलब्ध होने की बात कही गई। सरकार का कहना है कि ऊर्जा क्षेत्र की योजनाओं को तेज गति से लागू करने के कारण उत्पादन क्षमता में लगातार वृद्धि हुई है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में लगभग 42 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश चौबीसों घंटे अक्षय ऊर्जा उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बिजली कंपनियों को अपनी क्षमता बढ़ाने के साथ घाटा कम करने पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

    कार्यशाला में ऊर्जा भंडारण और किफायती विद्युत खरीद से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि कार्यशाला में होने वाला मंथन बिजली कंपनियों की कार्यप्रणाली और भविष्य की ऊर्जा योजनाओं के लिए उपयोगी साबित होगा।

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने वर्चुअल संबोधन में कहा कि कार्यशाला से विद्युत वितरण कंपनियों को अधिक सक्षम और मजबूत बनाने के लिए उपयोगी निष्कर्ष सामने आएंगे। सरकार का जोर बिजली की बढ़ती जरूरत के साथ उत्पादन और वितरण व्यवस्था को मजबूत करने पर है।

  • रायसेन में खेत में मिले चाचा-भतीजे के शव, फूल लेने गए थे दोनों, बिजली के तारों की चपेट में आने की आशंका

    रायसेन में खेत में मिले चाचा-भतीजे के शव, फूल लेने गए थे दोनों, बिजली के तारों की चपेट में आने की आशंका

    मध्य प्रदेश। के रायसेन जिले के सुल्तानगंज थाना क्षेत्र में एक खेत से चाचा-भतीजे के शव मिलने का मामला सामने आया है। दोनों मंगलवार को फूल लेने के लिए घर से खेत की ओर गए थे, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटे। इसके बाद परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की और पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मोबाइल लोकेशन के आधार पर खोजबीन की, जिसके बाद दोनों के शव गांव के पास नदी किनारे स्थित एक खेत में मिले।

    मामला बेरखेड़ी राजाराम गांव का है। यहां रहने वाले 45 वर्षीय अशोक अहिरवार मंगलवार दोपहर अपने 16 वर्षीय भतीजे संजय अहिरवार के साथ फूल लेने खेत की ओर गए थे। काफी समय बीतने के बाद भी दोनों घर नहीं पहुंचे तो परिवार के लोगों को चिंता हुई। उन्होंने गांव और आसपास के इलाकों में दोनों की तलाश की। परिजनों ने उनके मोबाइल फोन पर संपर्क करने का भी प्रयास किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

    इसके बाद परिवार ने घटना की जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने दोनों के मोबाइल नंबरों की लोकेशन के आधार पर तलाश शुरू की। खोजबीन के दौरान पुलिस टीम गांव के नजदीक नदी किनारे ग्राम चौकीदार नर्मदा चढ़ार के खेत तक पहुंची। वहां चाचा और भतीजे के शव खेत में पड़े मिले। दोनों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने से इलाके में भी लोगों की भीड़ जुट गई।

    घटनास्थल पर शवों की स्थिति को देखते हुए करंट लगने की आशंका सामने आई है। परिजनों का कहना है कि मृतक अशोक के हाथ में बिजली का तार लिपटा हुआ मिला था। परिवार ने आरोप लगाया कि खेत में जंगली जानवरों से फसल की सुरक्षा के लिए बिजली प्रवाहित तार लगाए गए थे। परिजनों को आशंका है कि इन्हीं तारों की चपेट में आने से दोनों की मौत हुई।

    हालांकि, पुलिस ने अभी मौत की वजह को लेकर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है और घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।

    घटना की जानकारी मिलने के बाद सुल्तानगंज के तहसीलदार देवेंद्र शुक्ला भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का जायजा लिया और मृतकों के परिजनों से मुलाकात की। अधिकारियों ने परिवार के सदस्यों के बयान भी दर्ज किए और नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई तथा हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया।

    सुल्तानगंज थाना प्रभारी दिनेश सिंह रघुवंशी के अनुसार, मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस घटनास्थल पर मिले साक्ष्यों और परिस्थितियों की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर दोनों की मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि खेत में बिजली का तार किस उद्देश्य से लगाया गया था और वह किस तरह सक्रिय था। परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों की भी जांच की जा रही है। चाचा-भतीजे की एक साथ मौत से परिवार में शोक का माहौल है।

  • गणेश उत्सव से पहले बिजली कंपनी की तैयारी, 167 से अधिक विसर्जन स्थलों पर 2,958 फ्लडलाइट्स से होगी रोशनी

    गणेश उत्सव से पहले बिजली कंपनी की तैयारी, 167 से अधिक विसर्जन स्थलों पर 2,958 फ्लडलाइट्स से होगी रोशनी

    नई दिल्ली ।मुंबई में आगामी गणेश उत्सव को देखते हुए गणेश पंडालों के लिए अस्थायी बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इसके तहत पंडालों को घरेलू दर पर अस्थायी बिजली कनेक्शन देने की सुविधा मिलेगी। आवेदन जमा करने के 48 घंटे के भीतर कनेक्शन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है, ताकि उत्सव के दौरान पंडालों में बिजली आपूर्ति को लेकर परेशानी न हो।

    गणेश उत्सव के दौरान शहरभर में बड़ी संख्या में पंडाल लगाए जाते हैं, जहां रोशनी और अन्य व्यवस्थाओं के लिए बिजली की जरूरत होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए बिजली आपूर्ति से जुड़ी तैयारियां की गई हैं। पंडाल आयोजक अस्थायी बिजली कनेक्शन के लिए ‘न्यू कनेक्शन’ सेक्शन के जरिए आवेदन कर सकते हैं।

    बिजली कंपनी के प्रवक्ता के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य गणेश पंडालों को भरोसेमंद अस्थायी बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराना है, ताकि उत्सव के दौरान बिजली व्यवस्था निर्बाध बनी रहे। कंपनी ने बताया कि पिछले वर्ष पूरे मुंबई में 1,000 से अधिक गणेश पंडालों को निर्बाध बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराई गई थी।

    इस वर्ष कनेक्शन की मंजूरी की प्रक्रिया को तेज करने और पूरे उत्सव के दौरान भरोसेमंद बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं। बिजली से जुड़ी किसी भी समस्या का तेजी से समाधान करने के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीम को रणनीतिक रूप से तैनात किया जाएगा।

    पंडालों में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आयोजकों से बिजली की वायरिंग के लिए केवल अधिकृत और लाइसेंस प्राप्त इलेक्ट्रिकल कॉन्ट्रैक्टर का इस्तेमाल करने की अपील की गई है। आयोजकों को यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि पंडाल स्थल पर बिजली की वायरिंग पूरी तरह तैयार हो और मीटर केबिन में केवल अधिकृत कर्मचारियों को ही प्रवेश मिले।

    सुरक्षा व्यवस्था के तहत कनेक्शन में मानक वायर और स्विच का इस्तेमाल करने, आपात स्थिति के लिए एक सिंगल आइसोलेशन पॉइंट रखने और तारों को मानक इंसुलेशन टेप से सुरक्षित करने के निर्देश दिए गए हैं। मीटर केबिन और स्विच तक पहुंचने का रास्ता भी साफ रखने को कहा गया है।

    इसके अलावा पंडाल आयोजकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कनेक्टेड लोड स्वीकृत लोड से अधिक न हो। मीटर केबिन के पास स्पष्ट संचालन निर्देशों वाला फायर एक्सटिंग्विशर और डेंजर बोर्ड रखने के साथ उचित अर्थिंग सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया है।

    पंडालों में अनधिकृत एक्सटेंशन या सीधे बिजली कनेक्शन का इस्तेमाल नहीं करने तथा वायरिंग में अनावश्यक जोड़ से बचने की हिदायत दी गई है। मीटर केबिन के प्रवेश द्वार तक पहुंच भी बाधित नहीं होनी चाहिए।

    सुरक्षा निर्देशों के तहत आम लोगों को फ्लडलाइट्स, पेडेस्टल्स, पंखों या इंसुलेटेड वायरिंग जॉइंट्स तक पहुंचने की अनुमति नहीं देने को कहा गया है। इसके साथ ही स्वीकृत सीमा से अधिक बिजली का इस्तेमाल न करने की अपील की गई है।

    गणेश मूर्ति विसर्जन के दौरान रोशनी की व्यवस्था के लिए 167 से अधिक विसर्जन स्थलों पर 2,958 फ्लडलाइट्स लगाए जाने की भी जानकारी दी गई है। इस तरह गणेश पंडालों के अस्थायी बिजली कनेक्शन के साथ विसर्जन स्थलों पर प्रकाश व्यवस्था की भी तैयारी की गई है।