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  • भारत की बिजली मांग एक दशक में दोगुनी, पीक डिमांड 270.8 गीगावाट पहुंची; स्थापित क्षमता बढ़कर 552 गीगावाट हुई

    भारत की बिजली मांग एक दशक में दोगुनी, पीक डिमांड 270.8 गीगावाट पहुंची; स्थापित क्षमता बढ़कर 552 गीगावाट हुई

    नई दिल्ली । भारत के बिजली क्षेत्र में पिछले एक दशक के दौरान तेजी से विस्तार हुआ है। बढ़ती आर्थिक गतिविधियों, औद्योगिक विस्तार, शहरीकरण और घरेलू स्तर पर बिजली की बढ़ती खपत के बीच देश की अधिकतम बिजली मांग करीब दोगुनी हो गई है। सरकार के अनुसार, इस बढ़ती जरूरत को पूरा करने के लिए बिजली उत्पादन क्षमता के साथ-साथ ट्रांसमिशन नेटवर्क और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी बड़े स्तर पर विस्तार किया गया है।

    वर्ष 2013-14 में भारत की अधिकतम बिजली मांग 135.9 गीगावाट थी। यह मांग 21 मई 2026 को बढ़कर 270.8 गीगावाट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। सरकार के मुताबिक, बिजली मांग में यह वृद्धि देश में बढ़ती आर्थिक गतिविधियों, शहरीकरण, उद्योगों के विस्तार और घरों में बिजली के लगातार बढ़ते उपयोग से जुड़ी है।

    बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए देश की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मार्च 2014 में भारत की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 249 गीगावाट थी। जुलाई 2026 तक यह बढ़कर 552 गीगावाट हो गई। इस दौरान जोड़ी गई क्षमता ने मौजूदा बिजली जरूरतों को पूरा करने के साथ भविष्य की मांग के लिए बिजली व्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दिया है।

    उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ बिजली के पारेषण ढांचे का भी विस्तार किया गया। अप्रैल 2014 में देश के ट्रांसमिशन नेटवर्क की लंबाई 2,91,336 सर्किट किलोमीटर थी। जुलाई 2026 तक यह बढ़कर 5,10,594 सर्किट किलोमीटर हो गई। नेटवर्क के विस्तार से राष्ट्रीय ग्रिड को अधिक एकीकृत बनाने और अलग-अलग क्षेत्रों के बीच बिजली के प्रवाह को सुगम करने में मदद मिली है। इससे बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने में भी योगदान मिला है।

    भारत ने पारंपरिक बिजली ढांचे के विस्तार के साथ स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया है। अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी की रिन्यूएबल एनर्जी स्टैटिस्टिक्स 2026 रिपोर्ट के अनुसार, स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के मामले में भारत चीन और अमेरिका के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है।

    31 मार्च 2026 तक भारत की कुल गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित बिजली क्षमता 283.46 गीगावाट थी। इसमें 274.68 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा और 8.78 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता शामिल थी। वित्त वर्ष 2025-26 में देश ने 55.3 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता जोड़ी। यह अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक इजाफा बताया गया है और पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग दोगुना है।

    ऊर्जा क्षेत्र में भारत ने जलवायु लक्ष्यों के संदर्भ में भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जून 2025 में देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। इस तरह भारत ने पेरिस समझौते के तहत वर्ष 2030 के लिए निर्धारित इस लक्ष्य को तय समय सीमा से पांच वर्ष पहले ही हासिल कर लिया।

  • हवा-सूरज के बाद अब समुद्र की लहरों से बिजली बनाने की तैयारी, बनाई खास डिवाइस

    हवा-सूरज के बाद अब समुद्र की लहरों से बिजली बनाने की तैयारी, बनाई खास डिवाइस


    नई दिल्ली।
    बिजली (Electricity) बनाने के लिए आपने सोलर पैनल (Solar panel) और विंड टर्बाइन (Wind turbine) के बारे में तो सुना ही होगा. लेकिन अब समुद्र की लहरों (Ocean Waves) से भी बिजली बनाने की कोशिश हो रही है. इसके लिए खास तरह की डिवाइस बनाई गई है, जिसे Wave Energy Converter यानी WEC कहा जाता है. ये डिवाइस समुद्र की लहरों की मूवमेंट को बिजली में बदलने का काम करती है. चीन में इस टेक्नोलॉजी पर काम हो रहा है।


    जानिए समुद्र की लहरों से कैसे बनती है बिजली?

    आसान भाषा में समझें तो समुद्र की लहरें जब ऊपर-नीचे होती हैं तो उनमें काफी एनर्जी होती है. WEC इसी एनर्जी को पकड़ने का काम करता है. डिवाइस का कुछ हिस्सा लहरों के साथ मूव करता है और इस मूवमेंट को मैकेनिकल या हाइड्रोलिक सिस्टम के जरिए बिजली बनाने वाले जनरेटर तक पहुंचाया जाता है।

    कुछ डिवाइस में लहरों से टर्बाइन घूमती है. वहीं कुछ डिवाइस पानी की लहरों के साथ ऊपर-नीचे या आगे-पीछे होने वाली बॉडी का इस्तेमाल करती हैं. यानी WEC का डिजाइन अलग हो सकता है, लेकिन मकसद एक ही है समुद्र की लहरों की एनर्जी को बिजली में बदलना.


    चीन ने बनाया बड़ा वेव एनर्जी कन्वर्टर

    चीन में WEC को लेकर काफी काम हुआ है. इनमें नानकुन नाम का बड़ा डिवाइस भी शामिल है. इसका वजन करीब 6,000 टन बताया गया है और यह एक दिन में 24,000 kWh तक बिजली पैदा करने की कैपिसिटी रखता है. इसे करीब 3,500 घरों की रोजाना बिजली खपत के बराबर बताया गया है. यही वजह है कि वेव एनर्जी को लेकर एक बार फिर चर्चा बढ़ी है. अब तक सोलर और विंड एनर्जी पर ज्यादा फोकस रहा है, लेकिन समुद्र की लहरों में भी काफी एनर्जी मौजूद है।


    सोलर और विंड से कैसे अलग?

    सोलर पैनल को बिजली बनाने के लिए सूरज की रोशनी चाहिए, जबकि विंड टर्बाइन हवा पर निर्भर करती है. WEC समुद्र की लहरों की मूवमेंट का इस्तेमाल करता है. समुद्र का पानी हवा से ज्यादा भारी होता है, इसलिए लहरों में काफी एनर्जी मौजूद हो सकती है. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि वेव एनर्जी को आसानी से बिजली में बदला जा सकता है. इसके लिए सही जगह, सही डिजाइन और मजबूत सिस्टम की जरूरत होती है।

    चीन में बनी वेव एनर्जी कन्वर्टर टेक्नोलॉजी में लगातार एडवांस बनाया जा रहा है, अगर ये टेक्नोलॉजी बड़े लेवल पर सक्सेस होती है तो आने वाले समय में समुद्र भी क्लीन एनर्जी का एक बड़ा सोर्स बन सकता है. यानी सक्सेस में बिजली के लिए सिर्फ सूरज और हवा ही नहीं, समुद्र की लहरों पर भी नजर होगी।

  • हेलमेट न पहनने पर छह हजार रुपये का चालान कटने से आक्रोशित बिजली कर्मियों ने सरकारी बकाये को आधार बनाकर पुलिस परिसरों की बत्ती गुल की

    हेलमेट न पहनने पर छह हजार रुपये का चालान कटने से आक्रोशित बिजली कर्मियों ने सरकारी बकाये को आधार बनाकर पुलिस परिसरों की बत्ती गुल की

    नई दिल्ली । राजधानी के सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्र में यातायात पुलिस और विद्युत विभाग के कर्मियों के बीच हुआ विवाद अचानक एक बड़े प्रशासनिक संकट में बदल गया। समेसी उपकेंद्र में कार्यरत संविदा कर्मचारियों का वाहन जांच के दौरान अनुपालन न करने पर छह हजार रुपये का चालान काट दिया गया था। इस कार्रवाई से नाराज विद्युत कर्मचारियों ने विभागीय बकाये के दस्तावेजों की तुरंत समीक्षा की और प्रक्रियागत नियमों का हवाला देते हुए संबंधित पुलिस परिसरों की बिजली आपूर्ति पूरी तरह बंद कर दी। इस अचानक हुई कार्रवाई से स्थानीय पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया और कई घंटों तक थाने तथा आसपास की चौकियों में कामकाज बुरी तरह प्रभावित रहा।

    प्राप्त विवरण के अनुसार विद्युत उपकेंद्र पर तैनात कर्मचारी शाम के समय उच्च तनाव लाइन की नियमित गश्त के लिए निकले थे। इसी दौरान मार्ग पर चलाए जा रहे जांच अभियान के तहत ड्यूटी पर तैनात उपनिरीक्षक ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी के चलते वाहन चालक कर्मचारी का भारी जुर्माना जमा करने का चालान जारी कर दिया। कर्मचारियों ने विभागीय परिचय पत्र देने का प्रयास किया लेकिन नियमों का हवाला देते हुए चालान की प्रति सौंप दी गई। इस घटनाक्रम के तुरंत बाद कर्मचारियों ने दफ्तर पहुंचकर राजस्व बकाये की सूची निकाली जिसमें स्थानीय थाने और दो पुलिस बूथों पर लाखों रुपये का बिजली बिल लंबित पाया गया।

    विभाग के पुराने बकाये के आंकड़ों का आधार बनाकर शाम के समय ही नगराम थाने के साथ-साथ दो प्रमुख पुलिस चौकियों का बिजली कनेक्शन काट दिया गया। थाने पर साढ़े तीन लाख रुपये से अधिक और दोनों चौकियों पर डेढ़-डेढ़ लाख रुपये का राजस्व बिल बकाया दर्ज था। अचानक बिजली जाने और बैकअप व्यवस्था सीमित होने के कारण पुलिस परिसरों में अंधेरा छा गया। विभागीय कार्यों के निष्पादन में आ रही परेशानियों को देखते हुए पुलिस के उच्च अधिकारियों को तत्काल पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया गया। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए संबंधित उपनिरीक्षक को फटकार लगाई गई और जारी किए गए चालान को नियमानुसार वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की गई।

    बिजली आपूर्ति बंद होने के बाद संबंधित कर्मियों ने अपने संपर्क माध्यम बंद कर दिए थे, जिससे संवाद स्थापित करने में अधिकारियों को काफी समय लगा। प्रशासनिक स्तर पर वार्ता के बाद विद्युत उपकेंद्र से दूसरी तकनीकी टीम को मौके पर भेजा गया, जिसने देर रात करीब साढ़े नौ बजे आपूर्ति बहाल कराई। लखनऊ में अंतर-विभागीय बकाये और चालान को लेकर इस तरह का तनाव पहले भी कई मौकों पर देखा गया है, जहां यातायात दंडात्मक कार्रवाई के जवाब में विद्युत बकाये पर तत्काल कनेक्शन काटने जैसे कदम उठाए गए। अधिकारियों ने पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाने और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के निर्देश जारी किए हैं।

  • संतकबीरनगर में दर्दनाक हादसा, खेत में करंट लगने से 22 वर्षीय युवक की मौत

    संतकबीरनगर में दर्दनाक हादसा, खेत में करंट लगने से 22 वर्षीय युवक की मौत


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक हादसे में 22 वर्षीय युवक की करंट लगने से मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में मातम छा गया, जबकि पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार, यह घटना खलीलाबाद कोतवाली क्षेत्र के निखरकपार गांव की है। गांव निवासी विनोद ने पुलिस को दी सूचना में बताया कि उनका छोटा भाई मुकेश शुक्रवार सुबह करीब आठ बजे घर से लगभग 300 मीटर दूर स्थित अपने खेत को देखने गया था।

    बताया जा रहा है कि खेत के पास लगे बिजली के पोल में किसी कारणवश करंट उतर आया था। जैसे ही मुकेश पोल के संपर्क में आया, वह तेज करंट की चपेट में आ गया और गंभीर रूप से झुलस गया।

    घटना की जानकारी मिलते ही परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक युवक की हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी। सूचना मिलने पर पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की।

    प्रारंभिक जांच में बिजली के पोल में करंट उतरने की बात सामने आई है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। वहीं स्थानीय लोगों ने बिजली व्यवस्था की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों से ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।