Tag: Elon Musk

  • भारत में स्टारलिंक को लेकर विवाद, अमेरिका में 36.6 करोड़ डॉलर के चुनावी चंदे पर घिरे एलन मस्क

    भारत में स्टारलिंक को लेकर विवाद, अमेरिका में 36.6 करोड़ डॉलर के चुनावी चंदे पर घिरे एलन मस्क


    नई दिल्‍ली । दुनिया के सबसे अमीर कारोबारियों में शामिल एलन मस्क भारत के सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में अपनी कंपनी स्टारलिंक की जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी बीच अमेरिका में उनके भारी राजनीतिक चंदे को लेकर बहस तेज हो गई है। अमेरिकी सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने आरोप लगाया है कि मस्क रिपब्लिकन पार्टी को चुनावी बढ़त दिलाने के लिए करोड़ों डॉलर खर्च कर रहे हैं, जिससे राजनीति में अरबपतियों के बढ़ते प्रभाव पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, मस्क ने 2026 के अमेरिकी चुनाव चक्र में करीब 36.6 करोड़ डॉलर का राजनीतिक चंदा दिया है। इसमें जुलाई के बाद से कम से कम 27.6 करोड़ डॉलर शामिल हैं। सैंडर्स का आरोप है कि इतनी बड़ी रकम खर्च करके मस्क रिपब्लिकन पार्टी को कांग्रेस में अपना नियंत्रण बनाए रखने में मदद करना चाहते हैं।

    ट्रंप की जीत के लिए 29 करोड़ डॉलर खर्च करने का दावा

    बर्नी सैंडर्स के मुताबिक, एलन मस्क ने 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की जीत के लिए करीब 29 करोड़ डॉलर खर्च किए थे। सैंडर्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दावा किया कि ट्रंप की जीत के बाद मस्क की संपत्ति में 696 अरब डॉलर का इजाफा हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि मस्क अब दुनिया के पहले खरबपति बन गए हैं।

    हालांकि, ये आंकड़े और संपत्ति में बढ़ोतरी को लेकर सैंडर्स के दावे हैं। उनकी आलोचना का मुख्य आधार यह है कि बेहद अमीर कारोबारी चुनावी अभियानों में भारी रकम लगाकर राजनीतिक व्यवस्था पर असाधारण प्रभाव हासिल कर सकते हैं।

    सैंडर्स ने आरोप लगाया कि मस्क 3 नवंबर को होने वाले 2026 के मध्यावधि चुनाव में भी रिपब्लिकन उम्मीदवारों की मदद के लिए बड़ी रकम खर्च कर रहे हैं। उन्होंने अपनी पोस्ट में नारा दिया, ‘मस्क को रोको, कुलीनतंत्र को रोको।’ उनका कहना है कि लोकतंत्र में राजनीतिक फैसलों पर कुछ अमीर लोगों का प्रभाव बढ़ना चिंता का विषय है।

    रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में कहां खर्च हुआ पैसा?

    मस्क के राजनीतिक चंदे का बड़ा हिस्सा उन संगठनों को मिला है, जो अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में रिपब्लिकन उम्मीदवारों का समर्थन करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, उनके योगदान का ब्योरा इस प्रकार है।

    सीनेट लीडरशिप फंड: रिपब्लिकन सीनेट उम्मीदवारों के समर्थन में काम करने वाले इस संगठन को करीब 15.8 करोड़ डॉलर दिए गए।
    अमेरिका पीएसी: मस्क के अपने राजनीतिक संगठन को लगभग 7.6 करोड़ डॉलर का योगदान मिला।
    कांग्रेसनल लीडरशिप फंड: प्रतिनिधि सभा के चुनावों में रिपब्लिकन उम्मीदवारों का समर्थन करने वाले इस संगठन को करीब 2 करोड़ डॉलर दिए गए।

    इन संगठनों के माध्यम से राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार, विज्ञापन तथा मतदाताओं तक पहुंच बनाने में मदद मिलती है। बड़ी रकम के योगदान से चुनावी अभियानों को संसाधन मिलते हैं, हालांकि इससे किसी उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित नहीं होती।

    मध्यावधि चुनाव में ट्रंप के प्रभाव की परीक्षा

    अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को होने वाले मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राजनीतिक प्रभाव के लिहाज से अहम माने जा रहे हैं। इन चुनावों में प्रतिनिधि सभा और सीनेट की सीटों के लिए मुकाबला होगा। रिपब्लिकन पार्टी कांग्रेस में अपना बहुमत बनाए रखने की कोशिश करेगी, जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी दोनों सदनों में नियंत्रण हासिल करना चाहती है।

    ऐसे में मस्क की ओर से रिपब्लिकन समर्थक संगठनों को दिए गए बड़े चंदे पर बहस तेज हो गई है। आलोचकों का तर्क है कि चुनावी अभियानों में अरबपतियों की बड़ी वित्तीय हिस्सेदारी से राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और नीतिगत फैसलों पर उनके प्रभाव को लेकर असमानता बढ़ सकती है।

    क्या है कुलीनतंत्र, जिस पर सैंडर्स ने उठाए सवाल?

    कुलीनतंत्र यानी ओलिगार्की ऐसी व्यवस्था को कहा जाता है, जिसमें राजनीतिक शक्ति कुछ चुनिंदा अमीर या प्रभावशाली लोगों के हाथों में केंद्रित हो जाती है। बर्नी सैंडर्स लंबे समय से इस विचार की आलोचना करते रहे हैं कि अरबपतियों की विशाल संपत्ति उन्हें चुनावों और सरकारी नीतियों को प्रभावित करने की असाधारण क्षमता देती है।

    चुनावी अभियानों में बड़ी रकम खर्च करने वाले दानदाता विज्ञापन, प्रचार और मतदाताओं तक पहुंच बनाने के प्रयासों को वित्तीय मदद दे सकते हैं। इससे उनके समर्थन वाले उम्मीदवारों और मुद्दों को अधिक दृश्यता मिल सकती है। हालांकि, राजनीतिक चंदा देना अपने आप में किसी उम्मीदवार या दल पर नियंत्रण साबित नहीं करता।

    भारत में स्टारलिंक की एंट्री को लेकर भी चर्चा

    अमेरिका में राजनीतिक चंदे पर उठे सवालों के बीच भारत में एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक की कारोबारी योजनाएं भी चर्चा में हैं। कंपनी भारतीय सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में सेवाएं शुरू करना चाहती है और इसके लिए जरूरी नियामकीय प्रक्रियाओं से गुजर रही है।

    भारत में दूरसंचार और सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा, नियमों और बाजार में कंपनियों की भूमिका को लेकर बहस होती रही है। वहीं, अमेरिका में मस्क के राजनीतिक योगदान को लेकर सैंडर्स की आलोचना ने अरबपतियों के चुनावी प्रभाव पर नई चर्चा छेड़ दी है।

    दोनों मामलों का संदर्भ अलग है, लेकिन इनके केंद्र में बड़ी कंपनियों और अत्यधिक संपत्ति वाले कारोबारियों की भूमिका है। जहां भारत में स्टारलिंक की कारोबारी योजनाओं के लिए नियामकीय मंजूरी अहम है, वहीं अमेरिका में मस्क के चुनावी चंदे ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बड़े दानदाताओं के प्रभाव को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

  • स्टारलिंक विवाद में कमल हासन की एंट्री, मस्क को सुनाई खरी-खरी, कंगना रनौत बोलीं- तीखा और सटीक जवाब

    स्टारलिंक विवाद में कमल हासन की एंट्री, मस्क को सुनाई खरी-खरी, कंगना रनौत बोलीं- तीखा और सटीक जवाब


    नई दिल्ली । भारत में स्टारलिंक की लॉन्चिंग और लाइसेंसिंग प्रक्रिया को लेकर छिड़ी बहस अब राजनीतिक और मनोरंजन जगत तक पहुंच गई है। दुनिया के चर्चित अरबपति एलन मस्क की ओर से भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा को मंजूरी मिलने में देरी पर सवाल उठाए जाने के बाद अभिनेता और राज्यसभा सांसद कमल हासन ने उन्हें दोटूक जवाब दिया है। हासन ने भारत की नियामक स्वतंत्रता का समर्थन करते हुए साफ कहा कि किसी भी देश की नीतियां किसी अरबपति के दबाव में तय नहीं होनी चाहिए। उनकी इस टिप्पणी को अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत का भी समर्थन मिला है। कंगना ने हासन की बातों की तारीफ करते हुए उनके जवाब को तीखा सटीक और व्यंग्यात्मक बताया।
    कंगना रनौत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कमल हासन की पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि यह बात चुभने वाली है और किसी भी अरबपति को भारत या अमेरिका जैसे देशों की नीतियां तय नहीं करनी चाहिए। कंगना ने हासन की बातों से सहमति जताते हुए कहा कि उन्होंने अपनी बात बेहद प्रभावशाली तरीके से रखी है। इस प्रतिक्रिया के बाद स्टारलिंक लाइसेंसिंग विवाद में कंगना की एंट्री ने चर्चा को और तेज कर दिया है। आमतौर पर राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखने वाली कंगना ने इस बार भारत के नीतिगत अधिकारों के समर्थन में कमल हासन का साथ दिया है।
    कमल हासन ने अपने बयान में भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और राष्ट्रीय स्वायत्तता पर जोर दिया। उन्होंने एलन मस्क को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी अरबपति को किसी देश की नीति तय करने का अधिकार नहीं होना चाहिए फिर चाहे वह भारत हो या अमेरिका। हासन के मुताबिक भारत एक लोकतंत्र है और कोई कॉलोनी नहीं है। देश अपने भविष्य से जुड़े फैसले खुद लेने में सक्षम है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत दुनिया के लिए अपने दरवाजे खुले रखता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि विदेशी कारोबारी हित या दूसरे देशों के दोहरे मापदंड भारत की नीतियों को प्रभावित करें।
    हासन ने सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के मामले में प्रतिस्पर्धा और किफायती कनेक्टिविटी की जरूरत पर भी जोर दिया। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का स्वागत किया जाना चाहिए लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। भारत जैसे बड़े देश में दूरदराज के इलाकों तक इंटरनेट पहुंचाना महत्वपूर्ण है जहां पारंपरिक ब्रॉडबैंड सेवाओं का विस्तार सीमित है। ऐसे में नई तकनीक और कंपनियां लोगों के लिए बेहतर विकल्प उपलब्ध करा सकती हैं। हालांकि इसके लिए निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन करना भी जरूरी है।
    दरअसल एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक भारत में अपनी सेवाएं शुरू करने के लिए नियामकीय मंजूरी की प्रक्रिया से गुजर रही है। मस्क ने लाइसेंस मिलने में हो रही देरी पर सवाल उठाए थे और दूसरे देशों में सेवा को मिली मंजूरी का हवाला दिया था। भारत में किसी भी दूरसंचार सेवा को शुरू करने के लिए संबंधित नियमों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी शर्तों को पूरा करना आवश्यक है। स्टारलिंक लो अर्थ ऑर्बिट में मौजूद उपग्रहों के जरिए इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराती है और इसका उद्देश्य उन क्षेत्रों तक भी इंटरनेट पहुंचाना है जहां सामान्य नेटवर्क का विस्तार मुश्किल है।
    इस पूरे विवाद ने एक बार फिर तकनीकी निवेश विदेशी कंपनियों की भूमिका राष्ट्रीय सुरक्षा और देश की नीतिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन की बहस को सामने ला दिया है। कमल हासन के बयान और कंगना रनौत के समर्थन के बाद यह मुद्दा केवल इंटरनेट सेवा तक सीमित नहीं रहा बल्कि इस बात पर भी चर्चा शुरू हो गई है कि वैश्विक कंपनियों के लिए बाजार खोलते समय राष्ट्रीय हितों की रक्षा कैसे की जाए।
  • एलन मस्क ने राहुल गांधी को कहा थैंक्यू, स्टारलिंक लाइसेंस पर उठाए सवाल; भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा को लेकर बढ़ी चर्चा

    एलन मस्क ने राहुल गांधी को कहा थैंक्यू, स्टारलिंक लाइसेंस पर उठाए सवाल; भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा को लेकर बढ़ी चर्चा

    नई दिल्ली: अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के बीच भारत में स्टारलिंक की सेवाओं को लेकर सोशल मीडिया पर बातचीत हुई है। राहुल गांधी के जवाब पर मस्क ने प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें धन्यवाद कहा और मामले को चिंताजनक बताया। मस्क ने इससे पहले सवाल उठाया था कि उनकी कंपनी स्टारलिंक को 165 से अधिक देशों में लाइसेंस मिल चुका है और वह पिछले पांच वर्षों से भारत सरकार के कानूनों तथा आवश्यकताओं का पालन करने की बात कह रही है, इसके बावजूद भारत में उसे अब तक लाइसेंस क्यों नहीं मिला है। राहुल गांधी ने जवाब में लिखा था कि एलन मस्क का भारत में स्वागत है और दूसरे व्यक्ति से मिलने पर उन्हें इस मामले के बारे में और जानकारी मिलेगी। हालांकि, राहुल गांधी ने अपने संदेश में किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया। इस बातचीत के बाद भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत और कंपनियों के लिए लागू नियमों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    मस्क ने राहुल गांधी के संदेश के जवाब में कहा कि यह स्थिति वास्तव में चिंताजनक है। इससे पहले भी वह भारत में स्टारलिंक की सेवाओं को लेकर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ प्रभावशाली समूह भारतीय बाजार में अपनी एकाधिकार वाली स्थिति बनाए रखने के लिए उनकी कंपनी को रोक रहे हैं। मस्क ने इस कथित रोक को भारतीय लोगों के हितों के खिलाफ बताया था। हालांकि, भारत सरकार ने इन आरोपों पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि देश में दूरसंचार सेवाओं के लिए निष्पक्ष और बिना भेदभाव वाली नियामकीय व्यवस्था लागू है। स्टारलिंक, स्पेसएक्स की उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवा है, जो सैटेलाइट के माध्यम से इंटरनेट उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रही है। कंपनी भारतीय बाजार में सेवाएं शुरू करने के लिए जरूरी प्रक्रियाएं पूरी कर रही है। इस बीच लाइसेंस, स्पेक्ट्रम आवंटन और सुरक्षा संबंधी मंजूरियों को लेकर अलग-अलग पक्षों के बयान सामने आए हैं।

    स्टारलिंक की ओर से भारतीय बाजार में प्रवेश की तैयारियों को लेकर भी जानकारी दी गई है। कंपनी की अधिकारी लॉरेन ड्रेयर ने कहा था कि भारत में सेवा शुरू करने के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे की तैयारी में निवेश किया गया है। कंपनी भारत में अपनी उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराने के लिए तैयार होने की बात कह चुकी है। हालांकि, सेवा शुरू करने के लिए केवल लाइसेंस मिलना पर्याप्त नहीं है। संबंधित कंपनियों को स्पेक्ट्रम आवंटन और सुरक्षा मंजूरी जैसी आवश्यक प्रक्रियाएं भी पूरी करनी होंगी। भारत में उपग्रह संचार सेवाओं के क्षेत्र में स्टारलिंक के अलावा जियो सैटकॉम और यूटेलसैट वनवेब भी मौजूद हैं। इन कंपनियों को देश में सेवाएं शुरू करने के लिए लाइसेंस दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद व्यावसायिक स्तर पर सेवा शुरू करने से पहले निर्धारित नियामकीय और सुरक्षा शर्तों का पालन करना जरूरी है। इसी वजह से लाइसेंस मिलने और सेवाओं के वास्तविक संचालन के बीच अंतर बना हुआ है।

    भारत सरकार ने मस्क के आरोपों के जवाब में कहा है कि देश में सैटेलाइट संचार समेत सभी दूरसंचार सेवाओं के लिए निष्पक्ष व्यवस्था लागू है। सरकार के अनुसार, नियामकीय नियमों या उन्हें लागू करने की प्रक्रिया को अनुचित बताना सही नहीं है। दूरसंचार सेवाओं के लिए निर्धारित लाइसेंस शर्तों के तहत प्रत्येक उपग्रह संचार कंपनी को सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं के पालन की पुष्टि करनी होती है। इन शर्तों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सेवाएं निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित हों। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियम किसी एक कंपनी को ध्यान में रखकर नहीं बनाए गए हैं, बल्कि सभी संबंधित कंपनियों पर लागू होते हैं।

    संचार राज्यमंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने भी इस मामले पर जानकारी देते हुए कहा कि सैटेलाइट संचार सेवाओं से जुड़े सुरक्षा मुद्दों पर गृह मंत्रालय विचार कर रहा है। आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद कंपनियों को सेवाएं शुरू करने की अनुमति दी जाएगी। उन्होंने बताया कि दूरसंचार विभाग ने सैटेलाइट संचार कंपनियों को लाइसेंस देने के साथ अस्थायी स्पेक्ट्रम भी आवंटित किया है। उनके अनुसार, इस प्रक्रिया का संबंध किसी एक कंपनी से नहीं है। ऐसे में स्टारलिंक की भारत में शुरुआत का मामला कंपनी की तैयारियों के साथ सुरक्षा मंजूरी और अन्य नियामकीय आवश्यकताओं पर भी निर्भर करता है।

  • आस्था और धर्म पर जावेद अख्तर का बड़ा सवाल, एलन मस्क के उदाहरण से समझाया क्यों नहीं मानते सभी धर्म समान

    आस्था और धर्म पर जावेद अख्तर का बड़ा सवाल, एलन मस्क के उदाहरण से समझाया क्यों नहीं मानते सभी धर्म समान


    नई दिल्ली। मशहूर लेखक और गीतकार जावेद अख्तर अपनी बेबाक राय के लिए पहचाने जाते हैं। वह अक्सर उन मुद्दों पर खुलकर बात करते हैं जिन पर लोग बिना ज्यादा सवाल किए विश्वास करते हैं। हाल ही में एक बातचीत में उन्होंने धर्म आस्था भगवान और नास्तिकता को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में धर्म और आस्था इंसान को मानसिक सहारा दे सकते हैं लेकिन किसी चीज से सुकून मिलना इस बात का प्रमाण नहीं हो सकता कि वह चीज सच भी है।

    जावेद अख्तर के मुताबिक जब इंसान किसी परेशानी में होता है तो उसे किसी बड़ी शक्ति पर भरोसा करने से भावनात्मक राहत मिल सकती है। उसे लगता है कि कोई ऐसी ताकत मौजूद है जो उसकी देखभाल कर रही है और उसकी मुश्किल दूर कर देगी। उनका सवाल यह है कि केवल इस भरोसे से उस विश्वास को वास्तविक कैसे मान लिया जाए। उनके अनुसार मानसिक शांति और किसी चीज के सच होने के बीच अंतर समझना जरूरी है।

    अपनी बात समझाने के लिए जावेद अख्तर ने कारोबारी एलन मस्क का उदाहरण दिया। उन्होंने एक काल्पनिक स्थिति के जरिए समझाया कि अगर कोई व्यक्ति पूरे विश्वास के साथ यह मान ले कि एलन मस्क उसका भाई है और अगले महीने उसे अरबों रुपये मिलने वाले हैं तो इस सोच से उसे खुशी और सुरक्षा का एहसास हो सकता है। वह लगातार इसी उम्मीद में रह सकता है कि अगले महीने पैसा जरूर आएगा। लेकिन केवल विश्वास करने से यह साबित नहीं हो जाता कि एलन मस्क वास्तव में उसका भाई है या उसे पैसे मिलने वाले हैं। जावेद अख्तर ने इसी उदाहरण के जरिए आस्था और वास्तविकता के बीच अंतर को समझाने की कोशिश की।

    उन्होंने धर्म को लेकर भी एक सवाल उठाया। जावेद अख्तर ने कहा कि दुनिया में बड़ी संख्या में लोग उसी धर्म को मानते हैं जिसमें उनका जन्म हुआ होता है। उन्होंने दावा किया कि करीब 99 फीसदी लोग उसी धर्म में मरते हैं जिसमें उन्होंने जन्म लिया था। उनके मुताबिक यह सवाल खड़ा करता है कि क्या लोगों ने अपने धार्मिक विश्वासों को खुद तर्क और विचार के आधार पर चुना है या फिर उन्हें बचपन से परिवार और समाज के जरिए ये मान्यताएं मिली हैं।

    जावेद अख्तर ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति की बात को सिर्फ इसलिए सही नहीं मान लेना चाहिए क्योंकि हम उस व्यक्ति पर विश्वास करते हैं। उनके अनुसार इंसान समय के साथ अपनी राय बदल सकता है इसलिए जरूरी है कि किसी व्यक्ति की पहचान के बजाय उसके विचार और तर्क को परखा जाए। उनका नजरिया यह है कि कौन बात कह रहा है इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि कही गई बात के पीछे कितना मजबूत तर्क मौजूद है।

    धर्मों की समानता को लेकर भी जावेद अख्तर ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि दुनिया के सभी धर्मों को सिर्फ इसलिए एक जैसा नहीं कहा जा सकता क्योंकि उनमें इंसान को बेहतर बनने की सीख मिलती है। उनके मुताबिक अलग अलग धर्मों की मान्यताएं विचार और सिद्धांत अलग हो सकते हैं। इसलिए सभी धर्म बिल्कुल एक ही बात कहते हैं ऐसा कहना सही नहीं है।

    जावेद अख्तर लंबे समय से धर्म तर्क और आस्था जैसे विषयों पर अपनी राय सार्वजनिक रूप से रखते रहे हैं। उनके विचारों से जहां कुछ लोग सहमत नजर आते हैं वहीं कई बार उनके बयानों को लेकर असहमति भी सामने आती है। इस बार भी उनका बयान सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चा में बहस का विषय बना हुआ है।

  • इलॉन मस्क और शिवॉन जिलिस का ब्रेकअप, चार बच्चों की मां ने कहा- एक हफ्ते में प्यार से अलगाव तक पहुंचना मुश्किल था

    इलॉन मस्क और शिवॉन जिलिस का ब्रेकअप, चार बच्चों की मां ने कहा- एक हफ्ते में प्यार से अलगाव तक पहुंचना मुश्किल था


    नई दिल्ली:
    इलॉन मस्क और न्यूरालिंक की एग्जीक्यूटिव शिवॉन जिलिस के रिश्ते के खत्म होने की खबर सामने आई है। जिलिस ने 2 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि मस्क ने अचानक रिश्ता खत्म कर दिया। उनके मुताबिक, ब्रेकअप से पहले उन्हें इसकी कोई चेतावनी नहीं मिली थी। जिलिस ने कहा कि उनके लिए एक हफ्ते के भीतर प्यार से अलगाव तक पहुंचना बेहद मुश्किल था। उन्होंने यह भी बताया कि वह इस ब्रेकअप से दुखी हैं, लेकिन अब भी मस्क की परवाह करती हैं। जिलिस ने उम्मीद जताई कि दोनों आगे अच्छे दोस्त बने रहेंगे और अपने बच्चों की मिलकर परवरिश करेंगे।

    मस्क और शिवॉन जिलिस चार बच्चों के माता-पिता हैं। उनके जुड़वां बच्चों स्ट्राइडर और एज्योर का जन्म नवंबर 2021 में हुआ था। इसके बाद 2024 में उनकी बेटी अर्काडिया का जन्म हुआ। फरवरी 2025 में जिलिस ने बेटे सेल्डन लाइकर्गस के जन्म की घोषणा की थी। इसे मस्क का 14वां ज्ञात बच्चा बताया गया था। जिलिस की मां पंजाबी मूल की हैं, जबकि उनके पिता कनाडाई हैं। इसी वजह से उन्हें भारतीय मूल से भी जोड़ा जाता है। मस्क और जिलिस के रिश्ते और उनके बच्चों को लेकर पहले भी चर्चा होती रही है।

    इलॉन मस्क की निजी जिंदगी में इससे पहले भी कई रिश्ते और शादियां चर्चा में रही हैं। उनकी पहली शादी जस्टिन विल्सन से हुई थी। दोनों के छह बच्चे हुए थे, जिनमें एक बेटे की शैशवावस्था में मृत्यु हो गई थी। इसके बाद मस्क ने अभिनेत्री तालुलाह रिले से दो बार शादी की। उनके चर्चित रिश्तों में अभिनेत्री एम्बर हर्ड और ग्राइम्स के नाम भी शामिल रहे हैं। मस्क की निजी जिंदगी और परिवार से जुड़े मामलों को लेकर समय-समय पर सार्वजनिक रूप से चर्चा होती रही है।

    शिवॉन जिलिस ने अपने बयान में रिश्ते के अचानक खत्म होने और उसके भावनात्मक असर का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक हफ्ते के भीतर प्यार से अलगाव तक पहुंचना उनके लिए मुश्किल था। हालांकि, उन्होंने मस्क के प्रति अपनी परवाह कायम रहने की बात कही और भविष्य में दोनों के अच्छे दोस्त बने रहने की उम्मीद जताई। साथ ही, उन्होंने बच्चों की परवरिश मिलकर करने की बात भी कही है। इससे दोनों के बीच भविष्य में सह-पालन की भूमिका जारी रहने की बात सामने आती है।

    इलॉन मस्क लंबे समय से दुनिया में घटती जन्मदर को लेकर अपनी राय सार्वजनिक रूप से रखते रहे हैं। वह अधिक बच्चे पैदा करने की जरूरत की बात कहते रहे हैं और कम जन्मदर को सभ्यता के लिए संभावित खतरा बता चुके हैं। मस्क और जिलिस के चार बच्चे हैं। अब उनके रिश्ते के खत्म होने की जानकारी के बाद दोनों के परिवार और बच्चों से जुड़ी जिम्मेदारियों को लेकर जिलिस के बयान पर भी चर्चा हो रही है।

  • SpaceX का कमाल: NASA के 4 अंतरिक्ष यात्री रिकॉर्ड 8 घंटे में पहुंचे ISS, जेसिका के हाथों में थी दल की कमान

    SpaceX का कमाल: NASA के 4 अंतरिक्ष यात्री रिकॉर्ड 8 घंटे में पहुंचे ISS, जेसिका के हाथों में थी दल की कमान


    वॉशिंगटन। नासा के चार अंतरिक्ष यात्रियों ने गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) तक पहुंचने में करीब आठ घंटे का समय लिया। यह किसी अमेरिकी मिशन के लिए ISS तक पहुंचने का अब तक का सबसे कम समय बताया गया है। एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्सूल से पहुंचे इस दल की कमान नासा की अंतरिक्ष यात्री जेसिका वॉटकिन्स के हाथों में है। दल में कनाडा का एक अंतरिक्ष यात्री भी शामिल है।

    स्पेसएक्स ने नासा के इस दल को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए रवाना किया था। मिशन के प्रक्षेपण में करीब तीन सप्ताह की देरी हुई थी, क्योंकि ड्रैगन कैप्सूल की ईंधन प्रणाली में रिसाव को ठीक किया जा रहा था। गुरुवार सुबह घने बादलों के कारण काउंटडाउन पर भी मौसम का असर पड़ने की आशंका थी, लेकिन बाद में आसमान साफ होने के बाद सुरक्षित प्रक्षेपण किया गया।

    छह महीने ISS में रहेंगे अंतरिक्ष यात्री

    चारों अंतरिक्ष यात्रियों का अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर प्रवास करीब छह महीने का होगा। हालांकि, पृथ्वी से ISS तक पहुंचने में उन्हें केवल आठ घंटे लगे, जो किसी अमेरिकी मिशन के लिए सबसे तेज यात्रा है।

    यह स्पेसएक्स के साथ-साथ नासा समेत अमेरिकी अंतरिक्ष अभियानों के लिए भी उल्लेखनीय उपलब्धि है। अंतरिक्ष यात्रियों के प्रक्षेपण के समय अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की कक्षीय स्थिति अनुकूल होने के कारण इतनी कम अवधि में वहां पहुंचना संभव हुआ।

    जेसिका वॉटकिन्स ने रचा इतिहास

    केप कैनावेरल स्पेस फोर्स स्टेशन से देर सुबह हुए प्रक्षेपण के साथ जेसिका वॉटकिन्स ने एक और उपलब्धि अपने नाम की। वह पृथ्वी की कक्षा में किसी अंतरिक्ष दल का नेतृत्व करने वाली पहली अश्वेत महिला बन गईं।

    भूविज्ञानी जेसिका वॉटकिन्स करीब एक दशक पहले नासा के मंगल मिशन क्यूरियोसिटी रोवर के साथ भी काम कर चुकी हैं। वर्ष 2022 में लंबे अंतरिक्ष प्रवास के बाद वह दूसरी बार अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंची हैं। प्रक्षेपण के बाद वॉटकिन्स ने रेडियो संदेश में कहा, “इस शानदार सफर के लिए धन्यवाद।”

    तीन सदस्य पहली बार अंतरिक्ष में

    मिशन के बाकी तीन सदस्य पहली बार अंतरिक्ष यात्रा कर रहे हैं। इनमें नासा के ल्यूक डेलानी शामिल हैं, जो पहले अमेरिकी मरीन में सेवा दे चुके हैं। कनाडा के जोशुआ कुट्रिक रॉयल कैनेडियन एयर फोर्स में कर्नल हैं, जबकि रूस के सर्गेई टेटेर्यातनिकोव पहले पनडुब्बी में सेवा दे चुके हैं।

    यह दल उन चार अंतरिक्ष यात्रियों की जगह लेगा, जो फरवरी से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर रहकर वैज्ञानिक और अन्य प्रयोग कर रहे हैं।

    स्पेसएक्स का नासा के लिए 13वां क्रू मिशन

    यह नासा के लिए स्पेसएक्स की ओर से भेजा गया 13वां चालक दल मिशन है। हालांकि, वर्ष 2020 की परीक्षण उड़ान को इस संख्या में शामिल नहीं किया गया है। चारों अंतरिक्ष यात्रियों के इस दल को ‘क्रू-13’ नाम दिया गया है।

    स्पेसएक्स और नासा की साझेदारी के तहत नियमित रूप से अंतरिक्ष यात्रियों को ISS तक पहुंचाया जा रहा है। इस मिशन में कम समय में स्टेशन तक पहुंचना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

    अंतरिक्ष में रहते पिता बनने वाले चौथे कनाडाई पुरुष

    कनाडाई अंतरिक्ष यात्री जोशुआ कुट्रिक के लिए यह मिशन व्यक्तिगत तौर पर भी खास है। वह पृथ्वी की कक्षा में रहते हुए पिता बनने वाले चौथे पुरुष अंतरिक्ष यात्री होंगे।

    कुट्रिक की पत्नी हीदर नवंबर के अंत में अपने तीसरे बच्चे को जन्म देने वाली हैं। कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा है कि बच्चे के जन्म के समय पूरे परिवार को हर संभव सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।

    इस तरह ‘क्रू-13’ का मिशन वैज्ञानिक और तकनीकी उपलब्धियों के साथ एक खास व्यक्तिगत घटना का भी गवाह बनने जा रहा है। छह महीने के प्रवास के दौरान दल अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर विभिन्न प्रयोगों और गतिविधियों में हिस्सा लेगा।

  • X न्यूज का नंबर-1 सोर्स, एलन मस्क का बड़ा दावा, बोले- दुनिया के सभी अखबारों से ज्यादा है मासिक रीडरशिप

    X न्यूज का नंबर-1 सोर्स, एलन मस्क का बड़ा दावा, बोले- दुनिया के सभी अखबारों से ज्यादा है मासिक रीडरशिप


    नई दिल्ली। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X को लेकर अमेरिकी बिजनेसमैन एलन मस्क ने बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि X दुनिया में खबरों का नंबर-1 सोर्स बन चुका है। मस्क के मुताबिक, हर महीने X को पढ़ने वाले लोगों की संख्या दुनिया के सभी अखबारों की कुल सर्कुलेशन से भी अधिक है। उन्होंने यह बात X पर एक पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए कही।

    मस्क ने अपने पोस्ट में कहा कि X धरती पर खबरों का नंबर-1 सोर्स है। उन्होंने यह भी दावा किया कि प्लेटफॉर्म की मासिक रीडरशिप दुनिया भर के सभी अखबारों की संयुक्त सर्कुलेशन से ज्यादा है। मस्क के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर X की न्यूज भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    यूरोप में भी X की बढ़ती लोकप्रियता का दावा

    मस्क ने जिस पोस्ट को रीपोस्ट किया, उसमें यूरोप में X के बढ़ते प्रभाव का जिक्र किया गया था। पोस्ट के मुताबिक, यूरोप के लगभग सभी देशों में X न्यूज ऐप्स के बीच नंबर-1 स्थान पर है। इसमें दावा किया गया कि यूरोपीय देशों के लोग खबरों और सूचनाओं के लिए अब X का इस्तेमाल पहले से ज्यादा कर रहे हैं।

    रीपोस्ट की गई पोस्ट में यह भी कहा गया कि यूरोप ने कई वर्षों तक X की आलोचना की, लेकिन इसके बावजूद प्लेटफॉर्म अब वहां खबरों के प्रमुख माध्यमों में शामिल हो रहा है। पोस्ट में लोगों के X की तरफ बढ़ते रुझान का भी दावा किया गया।

    फिलहाल मस्क का दावा, आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी

    इन दावों को लेकर यह ध्यान रखना जरूरी है कि संबंधित आंकड़े X पर साझा की गई पोस्ट में दिए गए हैं। मस्क ने इन्हीं दावों को रीपोस्ट करते हुए अपनी टिप्पणी की है। इसलिए फिलहाल इन्हें मस्क और संबंधित पोस्ट में किए गए दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

    एलन मस्क लंबे समय से X को महज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के बजाय खबरों, सूचनाओं और विचारों के बड़े मंच के रूप में पेश करते रहे हैं। प्लेटफॉर्म पर दुनिया भर के यूजर सीधे पोस्ट कर सकते हैं और न्यूज रिपोर्ट, वीडियो तथा किसी घटना से जुड़ी जानकारी तेजी से सामने आती है।

    मस्क के ताजा बयान ने एक बार फिर पारंपरिक मीडिया और सोशल मीडिया के बीच बदलते न्यूज कंजम्पशन पैटर्न पर बहस छेड़ दी है। X पर सूचनाएं तेजी से पहुंचती हैं, लेकिन वहां सामने आने वाली हर जानकारी की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना जरूरी है।

  • रिटायरमेंट से लौटेंगे जॉन सीना? WWE दिग्गज बोले- एलन मस्क ही बदल सकते हैं मेरा फैसला

    रिटायरमेंट से लौटेंगे जॉन सीना? WWE दिग्गज बोले- एलन मस्क ही बदल सकते हैं मेरा फैसला


    नई दिल्ली । WWE के इतिहास के सबसे लोकप्रिय सुपरस्टार्स में शामिल जॉन सीना एक बार फिर सुर्खियों में हैं। भले ही वह आधिकारिक तौर पर इन-रिंग करियर को अलविदा कह चुके हों, लेकिन उनके एक हालिया बयान ने रेसलिंग फैंस के बीच नई उम्मीद जगा दी है। सीना ने मजाकिया अंदाज में कहा है कि यदि कोई व्यक्ति उन्हें रिटायरमेंट से वापस आने के लिए मना सकता है, तो वह दुनिया के सबसे अमीर उद्योगपति एलन मस्क हैं।

    पिछले वर्ष अपने विदाई दौरे के बाद जॉन सीना ने WWE रिंग को अलविदा कह दिया था। उनके अंतिम मुकाबले में उन्हें गुंथर के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था। यह मुकाबला इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि सीना ने अपने करियर के आखिरी मैच में टैप आउट किया था। हालांकि रिंग से दूरी बनाने के बावजूद वह WWE से पूरी तरह अलग नहीं हुए हैं और रेसलमेनिया 42 तथा बैकलैश 2026 जैसे बड़े आयोजनों में विशेष भूमिकाओं में नजर आ चुके हैं।

    हाल ही में सैन एंटोनियो में आयोजित स्पेसकॉन कार्यक्रम के दौरान जब एक प्रशंसक ने उनसे पूछा कि क्या वह भविष्य में WWE में वापसी कर सकते हैं, तो सीना ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि वह किसी भी चीज की सौ प्रतिशत गारंटी नहीं दे सकते। लेकिन फिलहाल अगर कोई उन्हें अपना फैसला बदलने के लिए मना सकता है तो वह एलन मस्क हैं। उन्होंने मजाक में कहा कि इसके लिए मस्क को अपनी अपार संपत्ति का बड़ा हिस्सा खर्च करना पड़ेगा। जब तक ऐसा नहीं होता, वह खुद को पूरी तरह रिटायर्ड मानते हैं।

    सीना के इस बयान ने सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा बटोरी है। कई फैंस इसे मजाक के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ प्रशंसकों को अब भी उम्मीद है कि WWE का यह दिग्गज किसी खास अवसर पर रिंग में वापसी कर सकता है।

    इस दौरान जॉन सीना ने अपने रिटायरमेंट टूर को लेकर भी बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि यह विचार पूरी तरह उनका अपना था। सबसे पहले उन्होंने ही WWE अधिकारियों के सामने विदाई दौरे का प्रस्ताव रखा था। कंपनी को इस योजना को अंतिम रूप देने और लागू करने में लगभग डेढ़ साल का समय लगा। सीना का मानना था कि उनके लंबे और सफल करियर का समापन एक यादगार तरीके से होना चाहिए और इसी सोच के साथ उन्होंने यह योजना बनाई।

    उन्होंने ‘द जॉन सीना क्लासिक’ टूर्नामेंट को लेकर भी दिलचस्प जानकारी साझा की। सीना ने बताया कि इस टूर्नामेंट का विचार भी उनका ही था। इसे लेकर WWE के चीफ कंटेंट ऑफिसर ट्रिपल एच के साथ कई दौर की चर्चा हुई। पिछले कई महीनों से इसकी रूपरेखा तैयार की जा रही है और अब इसे आगे बढ़ाने की दिशा में काम हो रहा है।

    फिलहाल जॉन सीना भले ही रिंग से दूर हों, लेकिन WWE यूनिवर्स में उनकी लोकप्रियता आज भी बरकरार है। उनके बयान और भविष्य की योजनाओं को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि रिटायरमेंट के बाद भी जॉन सीना WWE की सबसे चर्चित हस्तियों में शामिल हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या भविष्य में कोई ऐसा अवसर आता है जब फैंस उन्हें एक बार फिर रिंग में मुकाबला करते हुए देख सकेंगे।

  • दुनिया के पहले खरबपति बनने के बाद एलन मस्क को बड़ा वित्तीय झटका लगा है।

    दुनिया के पहले खरबपति बनने के बाद एलन मस्क को बड़ा वित्तीय झटका लगा है।

    नई दिल्ली। दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी और तकनीकी उद्यमी एलन मस्क को खरबपति बनने के कुछ ही समय बाद बड़ा झटका लगा है। उनकी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी कंपनी SpaceX के शेयरों में आई गिरावट के चलते महज 24 घंटे के भीतर उनकी संपत्ति में लगभग 56.4 अरब डॉलर यानी करीब 53,298 करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई। यह रकम भारत के कई बड़े उद्योगपतियों की कुल संपत्ति के बराबर मानी जा रही है।

    हाल ही में SpaceX ने अपने शेयर बाजार सफर के दौरान जबरदस्त प्रदर्शन किया था। कंपनी के शेयर लगातार तीन कारोबारी सत्रों में करीब 50 प्रतिशत तक उछले थे, जिससे कंपनी का बाजार पूंजीकरण रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। इसी तेजी के दम पर एलन मस्क की कुल संपत्ति भी नए शिखर पर पहुंची और वह दुनिया के पहले खरबपति के रूप में चर्चा में आ गए। लेकिन बाजार में मुनाफावसूली शुरू होते ही तस्वीर बदल गई।

    बुधवार को SpaceX के शेयर कारोबार के दौरान शुरुआती बढ़त के बावजूद दबाव में आ गए और अंततः लगभग 5 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। शेयरों में इस कमजोरी का सीधा असर कंपनी के मूल्यांकन और एलन मस्क की व्यक्तिगत संपत्ति पर पड़ा। हालांकि गिरावट के बाद भी SpaceX का बाजार मूल्य लगभग 2.5 ट्रिलियन डॉलर के आसपास बना हुआ है, जो इसे दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल रखता है।

    शेयरों में आई गिरावट के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे बिकवाली का दबाव बढ़ गया। इसके अलावा अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों को लेकर दिए गए संकेतों ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। फेड ने फिलहाल ब्याज दरों को स्थिर रखा है, लेकिन भविष्य में दरों में बढ़ोतरी की संभावना जताई है। इसके बाद अमेरिकी शेयर बाजारों में व्यापक बिकवाली देखने को मिली।

    इस माहौल का असर टेक्नोलॉजी और हाई-वैल्यूएशन कंपनियों पर सबसे अधिक पड़ा। SpaceX भी इससे अछूती नहीं रही। S&P 500 और Nasdaq जैसे प्रमुख सूचकांकों में भी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों का रुझान जोखिम वाले शेयरों से हटता दिखाई दिया। यही वजह रही कि SpaceX के शेयरों में तेजी पर अचानक ब्रेक लग गया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में SpaceX के शेयरों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। कंपनी के सीमित फ्री-फ्लोट के कारण शेयरों में छोटी खरीद-बिक्री भी बड़े मूल्य परिवर्तन का कारण बन रही है। साथ ही भविष्य में लॉक-इन अवधि समाप्त होने के बाद शुरुआती निवेशकों द्वारा शेयर बेचने की संभावना भी बाजार पर दबाव बना सकती है।

    हालांकि इस गिरावट के बावजूद एलन मस्क की कुल संपत्ति अभी भी लगभग 1.26 खरब डॉलर के आसपास बनी हुई है। इस वर्ष उनकी संपत्ति में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है और वह अब भी दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति बने हुए हैं। निवेशकों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि SpaceX आने वाले दिनों में अपनी तेजी को दोबारा हासिल कर पाती है या नहीं।

  • मस्क की दौलत में उछाल, दुनिया के हर इंसान को बांटे तो मिल सकते हैं 10 हजार रुपये, बने पहले ट्रिलियनेयर

    मस्क की दौलत में उछाल, दुनिया के हर इंसान को बांटे तो मिल सकते हैं 10 हजार रुपये, बने पहले ट्रिलियनेयर


    नई दिल्ली। दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी एलन मस्क ने एक नया इतिहास रच दिया है। स्पेसएक्स के शेयर बाजार में शानदार प्रदर्शन के बाद उनकी कुल संपत्ति 1.1 ट्रिलियन डॉलर (करीब 92 लाख करोड़ रुपये) से अधिक पहुंच गई है। इसके साथ ही वह दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर बन गए हैं। उनकी संपत्ति इतनी विशाल है कि यदि इसे दुनिया की पूरी आबादी में बराबर बांट दिया जाए तो हर व्यक्ति को लगभग 122 डॉलर यानी करीब 10,300 रुपये मिल सकते हैं।

    फोर्ब्स की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को स्पेसएक्स के मूल्य में आई बड़ी तेजी के बाद एलन मस्क की कुल संपत्ति 1.1 ट्रिलियन डॉलर के स्तर को पार कर गई। यह उपलब्धि उन्हें वैश्विक स्तर पर सबसे अलग और प्रभावशाली आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करती है।

    एक ट्रिलियन डॉलर की राशि का अनुमान लगाना आम इंसान के लिए आसान नहीं है। यह रकम 1 बिलियन डॉलर से एक हजार गुना और 1 मिलियन डॉलर से दस लाख गुना अधिक होती है। यही वजह है कि मस्क की संपत्ति को दुनिया की सबसे बड़ी व्यक्तिगत संपत्तियों में गिना जा रहा है।

    अगर एक ट्रिलियन डॉलर की नकदी को नोटों के रूप में एक सीधी लाइन में बिछाया जाए तो इसकी लंबाई करीब 9.7 करोड़ मील (15.6 करोड़ किलोमीटर) तक पहुंच जाएगी। यह दूरी पृथ्वी और सूर्य के बीच की लगभग 9.3 करोड़ मील की दूरी से भी ज्यादा है। वहीं, नासा के आंकड़ों के अनुसार, इतनी लंबी कतार से पृथ्वी और चंद्रमा के बीच 200 से अधिक चक्कर लगाए जा सकते हैं।

    यूएस सेंसस ब्यूरो के अनुसार वर्तमान में दुनिया की आबादी लगभग 8.2 बिलियन है। यदि मस्क की एक ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति को सभी लोगों में समान रूप से बांटा जाए तो प्रत्येक व्यक्ति के हिस्से में करीब 122 अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 10,300 रुपये आएंगे।

    इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के 2026 के आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण अफ्रीका की पूरी अर्थव्यवस्था का आकार करीब 480 बिलियन डॉलर है। यह वही देश है जहां एलन मस्क का जन्म हुआ था। उनकी कुल संपत्ति दक्षिण अफ्रीका के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) से दोगुने से भी अधिक है। दुनिया में केवल 21 देशों की अर्थव्यवस्था ही ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर सकी है।

    फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ सेंट लुइस के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में एक घर की औसत कीमत करीब 4,03,200 डॉलर है। इस हिसाब से मस्क की संपत्ति से अमेरिका में लगभग 25 लाख घर खरीदे जा सकते हैं। यह संख्या कई देशों की आवासीय जरूरतों के बराबर मानी जा सकती है।

    वहीं, AAA के अनुसार अमेरिका और इजरायल-ईरान संघर्ष के कारण तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत 4.11 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है। इस दर पर एक ट्रिलियन डॉलर से 243 अरब गैलन से ज्यादा ईंधन खरीदा जा सकता है, जो पिछले वर्ष अमेरिका में उपभोग किए गए कुल 137 अरब गैलन ईंधन से कहीं अधिक है।

    फोर्ब्स की सूची के अनुसार दुनिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति गूगल के सह-संस्थापक लैरी पेज हैं, जिनकी कुल संपत्ति 295 बिलियन डॉलर है। वह मस्क से 705 बिलियन डॉलर पीछे हैं। दिलचस्प बात यह है कि लैरी पेज, सर्गेई ब्रिन (272 बिलियन डॉलर), जेफ बेजोस (247 बिलियन डॉलर) और लैरी एलिसन (228 बिलियन डॉलर) की संयुक्त संपत्ति भी मस्क की कुल दौलत के बराबर ही पहुंचती है।