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  • बड़े पैमाने पर नए पीएनजी कनेक्शनों से गैस नेटवर्क का तेजी से विस्तार और ऊर्जा बदलाव को बढ़ावा

    बड़े पैमाने पर नए पीएनजी कनेक्शनों से गैस नेटवर्क का तेजी से विस्तार और ऊर्जा बदलाव को बढ़ावा

    नई दिल्ली: वैश्विक तनावों और आपूर्ति संबंधी आशंकाओं के बीच देश में घरेलू एलपीजी आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है और वितरण प्रणाली बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से काम कर रही है। सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार देशभर में गैस की उपलब्धता स्थिर है और उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर की डिलीवरी सुनिश्चित की जा रही है। किसी भी क्षेत्र में गैस की कमी या एजेंसियों पर आपूर्ति रुकने जैसी स्थिति सामने नहीं आई है, जिससे उपभोक्ताओं में भरोसा बना हुआ है।

    आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार एलपीजी की ऑनलाइन बुकिंग के मुकाबले डिलीवरी दर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और यह अब लगभग पूर्ण स्तर के करीब पहुंच चुकी है। डिजिटल सत्यापन प्रणाली के उपयोग से डिलीवरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुरक्षित हुई है, जिससे गैस के गलत इस्तेमाल और कालाबाजारी पर प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ है। इससे उपभोक्ताओं को सीधे और समय पर सेवा मिल रही है और आपूर्ति श्रृंखला अधिक मजबूत हुई है।

    सरकार ने पाइप्ड नेचुरल गैस कनेक्शन के विस्तार पर भी तेजी से काम किया है और लाखों नए कनेक्शनों को सक्रिय किया गया है। इसके साथ ही बड़ी संख्या में उपभोक्ता पारंपरिक एलपीजी से पाइप्ड गैस की ओर स्थानांतरित हो रहे हैं, जिससे शहरी गैस वितरण नेटवर्क का विस्तार और मजबूत हो रहा है। यह बदलाव ऊर्जा क्षेत्र में संरचनात्मक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    घरेलू और व्यावसायिक गैस आपूर्ति में प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को विशेष रूप से सुरक्षित रखा गया है। अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और आवश्यक सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्रों में भी मांग के अनुसार आपूर्ति बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है ताकि उत्पादन और सेवाओं पर कोई असर न पड़े।

    सरकार ने छोटे उपभोक्ताओं और प्रवासी श्रमिकों के लिए भी विशेष व्यवस्था की है जिसके तहत छोटे सिलेंडरों की उपलब्धता बढ़ाई गई है। इससे उन वर्गों को राहत मिली है जो सीमित संसाधनों में दैनिक उपयोग के लिए एलपीजी पर निर्भर हैं। साथ ही डिजिटल बुकिंग प्रणाली को बढ़ावा देकर वितरण को अधिक सहज और संपर्क रहित बनाया गया है।

    इस अवधि में एलपीजी की खपत और बिक्री के आंकड़ों में भी वृद्धि दर्ज की गई है जो यह दर्शाता है कि मांग के बावजूद आपूर्ति व्यवस्था मजबूत बनी हुई है। सरकार का दावा है कि बढ़ती मांग को देखते हुए उत्पादन और वितरण क्षमता दोनों को लगातार बढ़ाया जा रहा है ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कमी न हो।

    इसके साथ ही बाजार में जमाखोरी और अवैध वितरण पर सख्त निगरानी रखी जा रही है और कई स्तरों पर कार्रवाई की जा रही है। निरीक्षण और छापेमारी की गतिविधियों से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि उपभोक्ताओं तक उचित दर पर गैस पहुंचे और किसी प्रकार की अनियमितता न हो।

    ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सरकार ने वैकल्पिक ईंधन विकल्पों को भी बढ़ावा दिया है जिससे एलपीजी पर दबाव कम किया जा सके। साथ ही कोयला और अन्य पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों की आपूर्ति बढ़ाकर समग्र ऊर्जा संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा कदमों से देश की ऊर्जा आपूर्ति प्रणाली अधिक स्थिर और लचीली हुई है जिससे किसी भी वैश्विक संकट का असर घरेलू उपभोक्ताओं पर सीमित रह जाता है।

  • रूस पर ब्रिटेन का बड़ा दावा, यूरोप की केबल-पाइपलाइनों को निशाना बनाने की कोशिश का लगाया आरोप

    रूस पर ब्रिटेन का बड़ा दावा, यूरोप की केबल-पाइपलाइनों को निशाना बनाने की कोशिश का लगाया आरोप


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच अब यूरोप में रूस को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ब्रिटेन ने आरोप लगाया है कि रूसी पनडुब्बियों ने समुद्र के नीचे बिछी महत्वपूर्ण केबल्स और पाइपलाइनों को निशाना बनाने की कोशिश की जिसे ब्रिटिश और नॉर्वेजियन सेनाओं ने संयुक्त अभियान के जरिए विफल कर दिया।

    रूस की कथित गतिविधियों पर ब्रिटेन की नजर

    ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन हीली ने दावा किया कि रूस की यह गतिविधि लंबे समय से चल रही थी और इसमें युद्धपोत सैन्य विमान और कई पनडुब्बियां शामिल थीं। उनके अनुसार यह अभियान करीब दो महीने तक चला जिसे निगरानी और रणनीतिक जवाबी कार्रवाई के जरिए रोका गया।

    समुद्री सुरक्षा को लेकर बड़ा अभियान

    ब्रिटिश रॉयल नेवी ने नॉर्वे के साथ मिलकर एक संयुक्त सैन्य अभियान चलाया जिसमें रूसी अटैक और जासूसी पनडुब्बियों की गतिविधियों पर नजर रखी गई। ब्रिटेन का कहना है कि जैसे ही उनकी निगरानी बढ़ाई गई रूसी इकाइयां पीछे हट गईं और मिशन छोड़ दिया।

    कठोर परिणाम की चेतावनी
    ब्रिटिश रक्षा मंत्री ने रूस को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि समुद्र के नीचे मौजूद महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाने की किसी भी कोशिश के गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिटेन लगातार इस क्षेत्र में रूस की हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए है।

    रणनीतिक महत्व की केबल्स और पाइपलाइन
    ब्रिटेन के अनुसार जिन समुद्री केबल्स और पाइपलाइनों की सुरक्षा की जा रही है वे वैश्विक संचार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। दावा किया गया है कि दुनिया का बड़ा डेटा ट्रैफिक इन्हीं केबल्स से होकर गुजरता है जिससे इनकी सुरक्षा रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील बन जाती है।

    रूस-नाटो तनाव के बीच बढ़ती टकराहट

    यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। दूसरी ओर अमेरिका में राजनीतिक हलकों में भी नाटो की भूमिका और यूरोपीय देशों की सुरक्षा जिम्मेदारी को लेकर बहस तेज है जिससे वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ता दिख रहा है।

  • सरकार का बयान: भारत के पास 60 दिन का कच्चे तेल भंडार, एलपीजी की एक महीने की पूरी व्यवस्था

    सरकार का बयान: भारत के पास 60 दिन का कच्चे तेल भंडार, एलपीजी की एक महीने की पूरी व्यवस्था


    नई दिल्ली: सरकार ने गुरुवार को स्पष्ट कर दिया कि भारत में पेट्रोल, डीजल और ऑटोमोबाइल की दुकानें पूरी तरह से सुरक्षित और नियंत्रण में हैं। कोयला एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि देश में कहीं भी पौधों की कमी नहीं है और हर नागरिक के लिए लगभग दो महीने तक का अवशेष सुरक्षित है। मिनिस्ट्री ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर अफवाहों से नफरत न करें, क्योंकि उनका मकसद सिर्फ डर और भ्रम फैलाना है।

    कच्चे तेल का भंडार और प्रमुख तैयारी

    मंत्रालय के अनुसार, भारत के पास कुल 74 दिनों के चिप्स और कच्चे तेल के भंडार की क्षमता है, जिसमें लगभग 60 दिनों का स्टॉक उपलब्ध है। इसमें कच्चा तेल, पेट्रोल-डीजल और भंडारगृह शामिल हैं। मंत्रालय ने बताया कि देश अब 27वें दिन भी मध्य पूर्व तनाव के बावजूद पूरी तरह सुरक्षित है। इसके अलावा बाकी दो महीने के लिए कच्चे तेल की खरीद पहले से तय कर दी गई है, ताकि किसी भी समय वैश्विक संकट का असर न हो।

    क्वांटम नेटवर्क में पर्याप्त स्टॉक

    सरकार ने कहा कि देश के सभी पेट्रोल पंपों में पर्याप्त मात्रा में कोयला मौजूद है। ऑयल कंपनी ने क्रेडिट अवधि मिलाकर तीन दिन कर दी है, जिससे किसी भी पंप पर काम करने वाले की कमी के कारण जंगल की कमी न हो। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बावजूद भारत अब 41 से अधिक देशों से कच्चा तेल मंगा रहा है और सभी रिफाइनरी 100 प्रतिशत से अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं।

    लाभ की स्थिति और घरेलू उत्पाद

    ईसाई धर्म का इतिहास भी पूरी तरह से सुरक्षित है। घरेलू उत्पादन में प्रतिदिन 40 प्रतिशत की वृद्धि कर 50 टी का उत्पादन किया जा रहा है, जबकि कुल आवश्यकता लगभग 80 टी की है। इसके अलावा, अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से 800 टिकट पहले ही भारत के 22 तीर्थ टर्मिनलों पर पहुंच चुके हैं। सरकार ने निर्देश दिया है कि कम से कम एक महीने की कीमत पर स्टॉक पूरी तरह से सुनिश्चित है और वितरण स्थिर है।

    ब्लैक मार्केटिंग निषेध का उपाय

    तेल उद्योग प्रतिदिन 50 लाख से अधिक की कमाई कर रहे हैं। साथ ही, 50 प्रतिशत तक की कमाई के साथ अर्नेस्ट गैस स्टूडियो की मार्केटिंग ब्लैक को छोड़ी जा रही है। सरकारी पाइप्ड सिलिकॉन गैस (पीएनजी) को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो सस्ता, सुरक्षित और पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प है। देश में वीडियो नेटवर्क तेजी से बढ़ा है, और घरेलू कनेक्शन 25 लाख से बढ़कर 1.5 करोड़ हो गया है।

    सरकारी आधिकारिक संपत्ति पर भरोसा करें

    मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे जल और गैस से जुड़ी जानकारी के लिए केवल सरकारी और आधिकारिक संपत्ति पर भरोसा करें। अफवाहों और सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही हंसी-मजाक वाली खबरों से डरने की कोई जरूरत नहीं है। भारत आने वाले कई महीनों तक पूरी तरह से सुरक्षित है, और हर नागरिक को पेट्रोल, डीजल और सुपरमार्केट की निरंतरता सुनिश्चित है।

  • लिथियम से लेकर टाइटेनियम तक भारत की नई खनिज नीति से आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल

    लिथियम से लेकर टाइटेनियम तक भारत की नई खनिज नीति से आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल


    नई दिल्ली:
    देश की आर्थिक उन्नति और भविष्य की ऊर्जा परियोजनाओं को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है सोमवार से खनिज ब्लॉकों की नीलामी के सातवें चरण की शुरुआत होगी इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया का शुभारंभ केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी और राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे द्वारा किया जाएगा। भारत के खान मंत्रालय के अनुसार यह नीलामी देश की खनिज सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए बेहद अहम मानी जा रही है
    आज के समय में जब दुनिया स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत तकनीकों की ओर तेजी से बढ़ रही है तब लिथियम ग्रेफाइट दुर्लभ पृथ्वी तत्व टंगस्टन वैनेडियम और धातुओं जैसे खनिजों की मांग लगातार बढ़ रही है हालांकि इन खनिजों की उपलब्धता सीमित है और कुछ ही क्षेत्रों में केंद्रित होने के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बना रहता है।
    46 खनिज ब्लॉकों की नीलामी कर चुकी है जिसे उद्योग जगत से पॉजिटिव रिएक्शन मिला है इससे यह संकेत मिलता है कि भारत के खनिज क्षेत्र में निवेश और भागीदारी बढ़ रही है सातवें चरण में इस रेट को जारी रखते हुए कई राज्यों में 19 नए ब्लॉक नीलामी के लिए पेश किए जाएंगे जिनमें स्वच्छ ऊर्जा उर्वरक और खनिज उद्योगों के लिए जरूरी खनिज शामिल हैं

    नीलामी प्रक्रिया को ज्यादा उचित और असरदार बनाने के लिए सरकार ने नियमों में भी कई सुधार किए हैं 2025 और 2026 के संशोधनों के तहत प्रदर्शन सुरक्षा अग्रिम भुगतान और अन्य गतिविधियों को सरल बनाया गया है साथ ही बैंक गारंटी के विकल्प के रूप में बीमा गारंटी बॉन्ड की सुविधा भी दी गई है जिससे भारतीयों को आसानी होगी

    यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन दो चरणों वाली उचित नीलामी प्रणाली के तहत आयोजित की जाएगी जिसमें उच्चतम बोली लगाने वाले को खनन का अधिकार मिलेगा इस पहल से न केवल देश की खनिज आपूर्ति मजबूत होगी बल्कि भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता भी वहीं

    आने वाले समय में यह कदम भारत को स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत तकनीकों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है

  • भारत की ऊर्जा सुरक्षा: होर्मुज स्ट्रेट और तेल-एलएनजी आयात की चुनौतियां

    भारत की ऊर्जा सुरक्षा: होर्मुज स्ट्रेट और तेल-एलएनजी आयात की चुनौतियां


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अर्थव्यवस्था पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। भारत अपनी सीक्रेट डिप्लोमेसी और रणनीतिक कदमों के माध्यम से ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने की कोशिशों में लगा है। हालात ऐसे हैं कि अमेरिका को नाटो देशों से अपील करनी पड़ रही है कि होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने के लिए युद्धपोत भेजें।

    भारत ने इस चुनौती के बीच भी अपने दो तेल टैंकर शिप्स को होर्मुज स्ट्रेट से निकालकर भारतीय समुद्री तट पर पहुंचा दिया है जबकि कई अन्य शिप्स की वापसी की संभावना बनी हुई है। भारत लगभग 85-89 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है और इसमें से पहले लगभग 55 फीसदी तेल होर्मुज स्ट्रेट से होकर आता था। अब यह आंकड़ा लगभग 70 फीसदी तक बढ़ गया है। भारत की दैनिक तेल खपत लगभग 55 लाख बैरल है और यह तेल लगभग 40 देशों से आयात किया जाता है।

    भारत का कच्चा तेल मुख्य रूप से रूस इराक सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से आता है। इसके अलावा अमेरिका से तेल आयात बढ़ा है। खाड़ी और मिडिल ईस्ट में कुवैत कतर ओमान और मिस्र; अफ्रीका में नाइजीरिया अंगोला लीबिया और अल्जीरिया; अमेरिका महाद्वीप में कनाडा मेक्सिको और ब्राजील; मिडिल एशिया में कजाकिस्तान और अजरबैजान भारत के तेल आपूर्तिकर्ता हैं।

    प्राकृतिक गैस की बात करें तो भारत की कुल खपत लगभग 189 मिलियन घन मीटर प्रतिदिन है जिसमें से घरेलू उत्पादन 97.5 मिलियन घन मीटर प्रतिदिन है। अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण लगभग 47.4 मिलियन घन मीटर की आपूर्ति प्रभावित हुई है।

    रसोई गैस में भारत लगभग 60 फीसदी आयात पर निर्भर है। इस आयात का करीब 90 फीसदी हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर आता है। हालात प्रभावित होने के बावजूद घरेलू एलपीजी उत्पादन में 25 फीसदी की वृद्धि कर इसे संतुलित किया गया है। भारत मुख्य रूप से कतर सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से एलपीजी आयात करता है जबकि अमेरिका भी इस सूची में शामिल हो गया है।

    एलएनजी में भारत का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता कतर है जिससे कुल एलएनजी का 47-50 फीसदी आता है। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात ओमान नाइजीरिया अंगोला ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका से भी एलएनजी आती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार होर्मुज स्ट्रेट इसलिए इतना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दुनिया के तेल और गैस व्यापार का मुख्य मार्ग है। यदि यहां किसी तरह की बाधा आती है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और तेल व गैस की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।

    भारत ने रणनीतिक भंडार और वैकल्पिक मार्गों के माध्यम से ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय और द्विपक्षीय सहयोग के जरिए भारतीय समुद्री शिप्स को सुरक्षित मार्ग मुहैया कराया जा रहा है।

  • एलपीजी संकट पर लोकसभा में हंगामा: राहुल गांधी ने उठाया मुद्दा, पेट्रोलियम मंत्री पुरी ने दी पूरी स्थिति की जानकारी

    एलपीजी संकट पर लोकसभा में हंगामा: राहुल गांधी ने उठाया मुद्दा, पेट्रोलियम मंत्री पुरी ने दी पूरी स्थिति की जानकारी



    नई दिल्ली। गुरुवार को लोकसभा में एलपीजी संकट और देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भारी हंगामा देखने को मिला। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने संसद में ऊर्जा संकट को लेकर चर्चा शुरू की और कहा कि अभी तो केवल “दर्द की शुरुआत” हुई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार समय रहते उपाय नहीं करेगी, तो छोटे व्यापारी, रेस्टोरेंट और आम नागरिक गंभीर रूप से प्रभावित होंगे। राहुल ने कहा कि किसी भी देश की बुनियाद उसकी ऊर्जा सुरक्षा होती है और वर्तमान वैश्विक हालात में अमेरिका और अन्य देशों के निर्णय से भारत की ऊर्जा नीति प्रभावित हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि पेट्रोलियम मंत्री ने एक निजी बातचीत में एपस्टीन को अपना दोस्त बताया था, जिससे सदन में विवाद पैदा हो गया।

    राहुल गांधी के बयान के तुरंत बाद विपक्षी सांसदों ने संसद वेल में नारेबाजी शुरू कर दी। स्पीकर ओम बिरला ने राहुल को टोका और कहा कि केवल नोटिस दिए गए विषय पर ही चर्चा करें। इस दौरान विपक्ष के सांसदों ने ‘देखो-देखो कौन आया, एपस्टीन का दोस्त आया’ जैसे नारे लगाए। भारी हंगामा बढ़ते देख स्पीकर ने कार्यवाही को शाम 5 बजे तक स्थगित कर दिया।

    केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सदन में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि देश में एलपीजी और पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी नहीं है। उन्होंने बताया कि रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं और एलपीजी उत्पादन में 28% की वृद्धि की गई है। पुरी ने कहा कि मोदी सरकार की प्राथमिकता है कि 33 करोड़ परिवारों की रसोई में किसी तरह की कमी न हो। उन्होंने सभी को आश्वस्त किया कि घरेलू गैस सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है और डिलीवरी चेन में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

    पुरी ने बताया कि होर्मुज स्ट्रेट से भारत को मिलने वाला क्रूड ऑयल सुरक्षित स्तर पर उपलब्ध है। संघर्ष के कारण होर्मुज से 20% आवाजाही प्रभावित हुई थी, लेकिन सरकार ने इसके लिए रणनीति तैयार की है। वर्तमान में भारत 40 देशों से कच्चा तेल आयात करता है, जबकि 2006-07 में यह संख्या केवल 27 थी। उन्होंने कहा कि लंबे समय से अपनाई गई विविधीकरण नीति ने भारत को विकल्प दिए हैं, जो कई अन्य देशों के पास नहीं हैं।

    पेट्रोलियम मंत्री ने सदन में स्पष्ट किया कि यह समय अफवाह फैलाने या फेक नैरेटिव बनाने का नहीं है। उन्होंने कहा कि वैश्विक ऊर्जा संकट के बावजूद देश में पेट्रोल, डीजल, केरोसीन, एटीएफ और फ्यूल ऑयल की सप्लाई सामान्य रूप से जारी है। उन्होंने जनता और उद्योग को भरोसा दिलाया कि भारत संकट का प्रबंधन कर रहा है और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है।

    लोकसभा में पुरी के बोलने के दौरान विपक्ष ने लगातार नारेबाजी की, जिससे कार्यवाही बाधित हुई। स्पीकर ने दोबारा हिदायत दी कि संसद के नियमों का पालन किया जाए और केवल नोटिस किए गए मुद्दे पर ही चर्चा हो। इस हंगामे के बीच संसद की कार्यवाही स्थगित कर दी गई और विपक्षी सांसदों से वेल खाली करने का आदेश दिया गया।

    कुल मिलाकर संसद में एलपीजी और ऊर्जा सुरक्षा पर हुई यह बहस दर्शाती है कि देश में ऊर्जा आपूर्ति पर सभी की निगाहें हैं। विपक्ष ने सरकार की तैयारी पर सवाल उठाए, जबकि केंद्रीय मंत्री ने भरोसा दिलाया कि देश की ऊर्जा जरूरतों की पूर्ति पूरी तरह सुनिश्चित है। एलपीजी संकट को लेकर लगातार अफवाहें फैल रही हैं, लेकिन सरकार की रणनीति और उत्पादन वृद्धि ने स्थिति नियंत्रण में रखने का काम किया है।

  • वैश्विक तेल संकट के बीच बड़ा फैसला: IEA के 40 करोड़ बैरल आपात भंडार जारी करने के कदम का भारत ने किया स्वागत

    वैश्विक तेल संकट के बीच बड़ा फैसला: IEA के 40 करोड़ बैरल आपात भंडार जारी करने के कदम का भारत ने किया स्वागत


    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और तेल की कीमतों में तेज उछाल की आशंका के बीच अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। एजेंसी ने अपने सदस्य देशों के साथ मिलकर बाजार में 40 करोड़ बैरल आपातकालीन तेल भंडार जारी करने का फैसला किया है। इस निर्णय का भारत ने खुले तौर पर स्वागत करते हुए कहा है कि यह कदम वैश्विक तेल आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने और कीमतों को बेकाबू होने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    दरअसल पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और क्षेत्रीय तनाव के कारण कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसी को ध्यान में रखते हुए अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के 32 सदस्य देशों ने समन्वित रूप से यह निर्णय लिया है कि वे अपने रणनीतिक तेल भंडार का एक बड़ा हिस्सा बाजार में जारी करेंगे। भारत, जो IEA का एक महत्वपूर्ण सहयोगी सदस्य है, ने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा है कि वह ऊर्जा बाजार की स्थिति और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है।

    भारत सरकार का मानना है कि इस तरह का समन्वित अंतरराष्ट्रीय कदम मौजूदा संकट की स्थिति में बेहद आवश्यक है। सरकार ने कहा है कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने के लिए भारत अंतरराष्ट्रीय समुदाय और सहयोगी देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बाजार में अचानक आपूर्ति कम हो जाती है तो तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है।

    इस संकट की सबसे बड़ी वजह रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में आई भारी बाधा है। 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद इस मार्ग से होने वाला तेल निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है और अब यह पहले की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत तक ही रह गया है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा संभालता है, इसलिए यहां की स्थिति पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार को सीधे प्रभावित करती है।

    साल 2025 के आंकड़ों के अनुसार रोजाना करीब 2 करोड़ बैरल तेल इसी मार्ग से होकर गुजरता था, लेकिन युद्ध और अस्थिरता के कारण यह आपूर्ति गंभीर संकट में फंस गई है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार इस मार्ग का कोई प्रभावी वैकल्पिक रास्ता नहीं है, जिसके कारण ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है।

    IEA का यह कदम इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि 1974 में एजेंसी के गठन के बाद यह केवल छठा मौका है जब सदस्य देशों ने मिलकर इस तरह का समन्वित आपातकालीन तेल भंडार जारी करने का निर्णय लिया है। इससे पहले 1991 के खाड़ी युद्ध, 2005 के ऊर्जा संकट, 2011 के लीबिया संकट और 2022 के वैश्विक ऊर्जा संकट के दौरान भी ऐसे कदम उठाए गए थे।

    फिलहाल IEA सदस्य देशों के पास कुल मिलाकर 1.2 अरब बैरल से अधिक का रणनीतिक तेल भंडार सुरक्षित है, जिसे केवल आपातकालीन परिस्थितियों में ही बाजार में उतारा जाता है। इसके अलावा उद्योगों के पास भी लगभग 60 करोड़ बैरल का अतिरिक्त स्टॉक मौजूद है, जिसे सरकारी नियमों के तहत सुरक्षित रखना अनिवार्य होता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह भंडार धीरे-धीरे बाजार में उतारा जाता है तो इससे वैश्विक तेल कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है। भारत जैसे विकासशील देशों के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि तेल की कीमतों में तेजी सीधे तौर पर महंगाई, परिवहन लागत और आम जनता की जेब पर असर डालती है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में इस कदम से वैश्विक ऊर्जा बाजार में कुछ हद तक स्थिरता लौट सकेगी।

  • अमेरिका ने भारत को दी 30 दिन की रूसी तेल खरीदने की छूट, कहा मुश्किल समय में जिम्मेदार साथी

    अमेरिका ने भारत को दी 30 दिन की रूसी तेल खरीदने की छूट, कहा मुश्किल समय में जिम्मेदार साथी


    नई दिल्ली । पश्चिमी एशिया में ईरान और इजराइल के बीच जारी संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संकट पैदा कर दिया है। इस समय अमेरिकी प्रशासन ने भारत के लिए एक राहत भरा फैसला लिया है। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलीन लैविट ने मंगलवार को घोषणा की कि भारत को 30 दिनों के लिए रूस से कच्चा तेल खरीदने की अनुमति दी गई है।

    कैरोलाइन लैविट ने बताया कि भारत एक भरोसेमंद सहयोगी रहा है और मुश्किल समय में हमेशा जिम्मेदारी से कदम उठाता है। इस शॉर्ट टर्म फैसले का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि युद्ध के कारण बढ़ती वैश्विक तेल कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर न डालें।

    व्हाइट हाउस ने यह भी स्पष्ट किया कि इस छूट से रूस को कोई बड़ा आर्थिक लाभ नहीं होगा क्योंकि यह तेल पहले से समुद्र में मौजूद जहाजों में था। नेशनल सिक्योरिटी टीम और ट्रेजरी सेक्रेटरी की जांच के बाद ही यह निर्णय भारत की ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया।

    28 फरवरी से बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज की खाड़ी में युद्ध की घटनाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार उतार-चढ़ाव का सामना कर रही हैं। ऐसे कठिन दौर में अमेरिका का यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और घरेलू तेल आपूर्ति बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय वैश्विक तेल संकट और तेल निर्यातकों की बदलती स्थिति के बीच भारत के लिए समयबद्ध राहत साबित होगा। भारत ने पहले रूसी तेल की खरीद पर रोक लगाई थी लेकिन यह छूट अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति संकट के मद्देनजर अस्थायी उपाय के रूप में दी गई है।

  • घरेलू LPG आपूर्ति को बनाए रखने रिलायंस ने बढ़ाया उत्पादन, सरकार के साथ मिलकर कर रही काम

    घरेलू LPG आपूर्ति को बनाए रखने रिलायंस ने बढ़ाया उत्पादन, सरकार के साथ मिलकर कर रही काम


    नई दिल्ली। वैश्विक ऊर्जा बाजारों में चल रही उथल-पुथल को देखते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने घरेलू ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। कंपनी ने कहा है कि घरेलू बाजार में जरूरी ईंधन की लगातार और भरोसेमंद आपूर्ति उनकी प्राथमिकता है। इस दिशा में जामनगर स्थित रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स में एलपीजी उत्पादन बढ़ाया जा रहा है। जामनगर को दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनिंग हब माना जाता है और यहां की टीम दिन-रात काम कर रही है ताकि घरेलू गैस आपूर्ति स्थिर बनी रहे। यह कदम भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार उठाया गया है।

    केजी-डी6 बेसिन की गैस प्राथमिक क्षेत्रों को जाएगी
    रिलायंस ने यह भी घोषणा की कि केजी-डी6 बेसिन से निकलने वाली प्राकृतिक गैस अब प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की ओर भेजी जाएगी। यह फैसला राष्ट्रीय ऊर्जा प्राथमिकताओं और देश के नागरिकों के हित को ध्यान में रखकर लिया गया है। कंपनी ने स्पष्ट किया कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और करोड़ों भारतीय परिवारों की भलाई उनकी सबसे बड़ी चिंता है।

    सरकार के साथ सहयोग और नियमों का पालन
    रिलायंस ने बताया कि वह भारत सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है और सभी राष्ट्रीय नियमों तथा आवंटन प्राथमिकताओं का पूरा पालन कर रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ऊर्जा की आपूर्ति उन क्षेत्रों और समुदायों तक पहुंचे जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।

    वैश्विक अनिश्चितता के बीच भरोसेमंद कदम
    कंपनी ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा संकट और अनिश्चितता के इस समय में वे देश के साथ मजबूती से खड़े हैं। रिलायंस हर संभव प्रयास कर रही है ताकि देश के लिए आवश्यक ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके और घरेलू बाजार में LPG आपूर्ति में कोई कमी न आए।

  • होर्मुज जलडमरूमध्य पर ट्रंप की ईरान को सख्त चेतावनी: तेल आपूर्ति रोकने की कोशिश पर 20 गुना जवाबी कार्रवाई की धमकी

    होर्मुज जलडमरूमध्य पर ट्रंप की ईरान को सख्त चेतावनी: तेल आपूर्ति रोकने की कोशिश पर 20 गुना जवाबी कार्रवाई की धमकी


    वाशिंगटन । अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य  में तेल आपूर्ति को रोकने या बाधित करने की कोई भी कोशिश की गई तो अमेरिका इसका बेहद सख्त जवाब देगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में अमेरिका अब तक हुए हमलों से बीस गुना ज्यादा जोरदार कार्रवाई कर सकता है।

    ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सत्य सामाजिक पर पोस्ट किए गए संदेश में कहा कि यदि ईरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बंद करने की कोशिश करता है तो अमेरिका उसके बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका आसानी से निशाना बनाए जा सकने वाले ठिकानों को नष्ट कर सकता है जिससे ईरान के लिए दोबारा व्यवस्थित होना मुश्किल हो जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि हालात इस स्तर तक नहीं पहुंचेंगे।

    इससे पहले ट्रंप ने ट्रम्प नेशनल डोरल में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि अमेरिका दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक को खतरे में डालने की अनुमति किसी भी देश को नहीं देगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए लगातार कदम उठा रहा है और किसी भी आतंकी सरकार को दुनिया की तेल आपूर्ति को बंधक बनाने की इजाजत नहीं देगा।

    ट्रंप ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की मजबूत मौजूदगी है और जरूरत पड़ने पर समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए माइन-क्लियरिंग ऑपरेशन और सैन्य एस्कॉर्ट जैसी व्यवस्थाएं भी लागू की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नौसेना के पास दुनिया की सबसे आधुनिक तकनीक और उपकरण हैं जिनकी मदद से समुद्री मार्ग को सुरक्षित रखा जा सकता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका खाड़ी क्षेत्र में काम कर रहे तेल टैंकरों को राजनीतिक जोखिम बीमा देने पर भी विचार कर रहा है ताकि समुद्री व्यापार बाधित न हो। ट्रंप के अनुसार यदि खतरा बढ़ता है तो अमेरिका और उसके सहयोगी देश जहाजों को इस संकरे समुद्री मार्ग से सुरक्षित एस्कॉर्ट भी कर सकते हैं।

    ट्रंप ने यह भी कहा कि इस मार्ग का खुला रहना अमेरिका से ज्यादा एशिया और अन्य ऊर्जा आयात करने वाले देशों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने खास तौर पर चीन का जिक्र करते हुए कहा कि यह रास्ता कई देशों के लिए बेहद जरूरी है क्योंकि उनकी बड़ी ऊर्जा जरूरतें इसी मार्ग से पूरी होती हैं।

    दरअसल होर्मुज जलडमरूमध्य  फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एक संकरा लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। दुनिया के कुल समुद्री तेल परिवहन का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव या सैन्य गतिविधि वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल कीमतों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप का यह बयान वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार को लेकर नई चिंता पैदा कर रहा है।