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  • मोहन सरकार ने मध्य प्रदेश में 1.24 लाख पदों को दी मंजूरी, ऊर्जा और स्वास्थ्य विभाग में सबसे ज्यादा पद

    मोहन सरकार ने मध्य प्रदेश में 1.24 लाख पदों को दी मंजूरी, ऊर्जा और स्वास्थ्य विभाग में सबसे ज्यादा पद

    मध्य प्रदेश: में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए राज्य सरकार ने विभिन्न विभागों में बड़े पैमाने पर पदों को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने कैबिनेट के माध्यम से कुल 1.24 लाख पद स्वीकृत किए हैं। इनमें ऊर्जा, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, गृह और परिवहन विभाग सहित अन्य पद शामिल हैं। इस फैसले से प्रदेश में सरकारी क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाने की योजना सामने आई है।

    स्वीकृत पदों की संख्या के लिहाज से ऊर्जा और स्वास्थ्य विभाग सबसे आगे हैं। हालांकि, पदों को मंजूरी मिलने का अर्थ यह नहीं है कि सभी पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया एक साथ शुरू हो जाएगी। उम्मीदवारों को संबंधित विभागों की आधिकारिक भर्ती अधिसूचनाओं और नियुक्ति कार्यक्रम का इंतजार करना होगा।

    उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, ऊर्जा विभाग में 52 हजार पदों को मंजूरी दी गई है। वहीं, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में 47 हजार पद स्वीकृत किए गए हैं। इन दोनों विभागों में पदों की संख्या सबसे अधिक है। भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ने पर इन क्षेत्रों में विभिन्न योग्यताओं वाले अभ्यर्थियों के लिए अवसर सामने आ सकते हैं। हालांकि, पदों के अनुसार शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और अन्य पात्रता शर्तों की जानकारी संबंधित भर्ती विज्ञापन जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

    महिला एवं बाल विकास विभाग में 13,200 पदों को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा गृह विभाग में 9,662 और परिवहन विभाग में 1,800 पद स्वीकृत किए गए हैं। राज्य में तीन नए जिलों के लिए भी 1,240 पदों को मंजूरी मिली है। इन विभागों और नए जिलों से जुड़े पदों पर नियुक्तियों की प्रक्रिया किस चरण में और कब शुरू होगी, इसकी जानकारी आगे जारी होने वाले सरकारी आदेशों और भर्ती सूचनाओं से मिलेगी।

    पुलिस में नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए भी भर्ती बोर्ड से जुड़ा प्रस्ताव महत्वपूर्ण है। मध्य प्रदेश में पुलिस भर्ती के लिए अलग बोर्ड गठित करने की योजना है। फिलहाल इसका गठन प्रस्तावित है और प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार है। बोर्ड के गठन के बाद पुलिस भर्ती से संबंधित व्यवस्था को स्वतंत्र रूप से संचालित करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। हालांकि, भर्ती बोर्ड के गठन, पदों की संख्या और आवेदन की तारीख को लेकर आधिकारिक घोषणा के बिना किसी निश्चित समयसीमा का अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।

    सरकार की योजना में नियमित नियुक्तियों के साथ संविदा और आउटसोर्स पद भी शामिल हैं। इसलिए मंजूर किए गए 1.24 लाख पदों को एक साथ निकलने वाली सरकारी नौकरियों की संख्या समझना सही नहीं होगा। स्वीकृत पदों में से किस विभाग में कितनी नियुक्तियां होंगी और भर्ती किस चरण में आगे बढ़ेगी, यह संबंधित विभागों की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

    सरकारी नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए अब विभागवार भर्ती विज्ञापनों पर नजर रखना अहम होगा। आवेदन करने से पहले पद का विवरण, शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा, चयन प्रक्रिया और आवेदन की अंतिम तारीख की जानकारी आधिकारिक अधिसूचना से जांचनी चाहिए। पदों को मंजूरी मिलना भर्ती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन वास्तविक अवसरों की स्थिति भर्ती प्रक्रिया शुरू होने और अधिसूचनाएं जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

  • मध्य पूर्व में युद्ध का खतरा बढ़ने से कच्चा तेल छह महीने के उच्चतम स्तर पर, ब्रेंट 116 डॉलर पार

    मध्य पूर्व में युद्ध का खतरा बढ़ने से कच्चा तेल छह महीने के उच्चतम स्तर पर, ब्रेंट 116 डॉलर पार

    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका तथा ईरान के बीच संभावित सैन्य टकराव की आशंकाओं ने अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार में हलचल बढ़ा दी है। शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को कच्चे तेल की कीमतें छह महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। ब्रेंट क्रूड का भाव 116 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया, जबकि अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत भी 102 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई। क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और तेल आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता को कीमतों में तेजी की प्रमुख वजह माना जा रहा है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स की कीमत 2.60 प्रतिशत बढ़कर 116.13 डॉलर प्रति बैरल हो गई। यह 30 अप्रैल के बाद इसका सबसे ऊंचा स्तर रहा। वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड का भाव लगभग 2.90 प्रतिशत बढ़कर 102.56 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। दोनों प्रमुख मानकों में तेजी ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ते दबाव को रेखांकित किया।

    साप्ताहिक प्रदर्शन के लिहाज से भी कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती दिखाई दी। ब्रेंट क्रूड में सप्ताह के दौरान लगभग छह प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इसके साथ ही इसमें लगातार तीसरे सप्ताह तेजी बनी रही। दूसरी ओर, डब्ल्यूटीआई क्रूड के वायदा भाव में साप्ताहिक आधार पर करीब 3.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के पीछे भू-राजनीतिक परिस्थितियों और संभावित आपूर्ति व्यवधानों को महत्वपूर्ण कारक माना जा रहा है।

    बाजार में तेजी की एक प्रमुख वजह अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा युद्ध शुरू होने की आशंका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि अमेरिका फिलहाल ईरान के साथ बातचीत नहीं कर रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि जल्द ही कुछ बड़ा हो सकता है। उनके बयान के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

    इसी बीच, अमेरिका और इजरायल की सैन्य तैयारियों को लेकर सामने आई रिपोर्टों ने भी बाजार की चिंताएं बढ़ाई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों ने एक सीमित लेकिन सघन सैन्य अभियान की तैयारी के तहत अभ्यास तेज किए हैं। इसमें ईरान के पश्चिमी पड़ोसी इराक के ऊपर से उड़ान भरने जैसी गतिविधियां भी शामिल बताई गई हैं। इन अभ्यासों का उद्देश्य संभावित हमले की रणनीतियों का पूर्वाभ्यास करना बताया गया है।

    रिपोर्ट में संभावित लक्ष्यों के रूप में ईरान के ऊर्जा केंद्रों, परमाणु सुविधाओं तथा मिसाइलों और ड्रोन के भंडार का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन संभावित लक्ष्यों को लेकर किसी वास्तविक सैन्य कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी, ऐसी परिस्थितियों में तेल उत्पादक क्षेत्र से आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बाजार में कीमतों को ऊपर ले जा सकती है।

    दूसरी ओर, ईरान की सेना की ओर से भी कड़ा रुख सामने आया है। ईरान के सेना प्रमुख ने कहा है कि अपनी क्षमताओं को मजबूत करने के बाद देश की सेना युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है। इस बयान ने क्षेत्रीय तनाव की गंभीरता को और उजागर किया है।

    इसके अतिरिक्त, सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों के कारण भी तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। मध्य पूर्व वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां सैन्य संघर्ष बढ़ने या तेल परिवहन में बाधा आने की आशंका से बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई दोनों के भाव में तेजी के बीच निवेशकों की नजर क्षेत्र के घटनाक्रम और संभावित आपूर्ति प्रभावों पर बनी हुई है।

  • अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस का दूसरी तिमाही में मुनाफा 145 प्रतिशत उछला, आय 51 प्रतिशत बढ़कर 10,239 करोड़ रुपये पहुंची

    अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस का दूसरी तिमाही में मुनाफा 145 प्रतिशत उछला, आय 51 प्रतिशत बढ़कर 10,239 करोड़ रुपये पहुंची

    नई दिल्ली । अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है। जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान कंपनी का मुनाफा पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 145 प्रतिशत बढ़कर 1,364 करोड़ रुपये हो गया। इस दौरान कंपनी की कुल आय 51 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 10,239 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। ट्रांसमिशन और ऊर्जा समाधान कारोबार में बेहतर प्रदर्शन को कंपनी की वृद्धि का प्रमुख आधार बताया गया है।

    कंपनी के परिचालन से प्राप्त आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। दूसरी तिमाही में यह सालाना आधार पर 51 प्रतिशत बढ़कर 7,167 करोड़ रुपये रही। इसी अवधि में कंपनी का एबिटडा 67 प्रतिशत बढ़कर 3,548 करोड़ रुपये हो गया, जबकि ऑपरेशनल एबिटडा में 68 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 3,070 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। ये आंकड़े कंपनी के परिचालन प्रदर्शन में सुधार को दर्शाते हैं।

    वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में भी कंपनी ने मुनाफे और आय के मोर्चे पर बढ़त दर्ज की। अप्रैल से सितंबर की अवधि में कंपनी का समेकित मुनाफा सालाना आधार पर 137 प्रतिशत बढ़कर 2,600 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, इस दौरान कुल आय 46 प्रतिशत बढ़कर 20,092 करोड़ रुपये दर्ज की गई। कंपनी के प्रबंधन ने पहली छमाही के वित्तीय और परिचालन प्रदर्शन को भविष्य की वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण बताया है।

    कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कंदर्प पटेल के अनुसार, पहली छमाही के दौरान वित्तीय प्रदर्शन के साथ परिचालन गतिविधियों में भी मजबूती रही। उन्होंने बताया कि विजाग और सतारा में रणनीतिक ट्रांसमिशन परिसंपत्तियों का अधिग्रहण कंपनी की विस्तार योजना का हिस्सा है। इन परिसंपत्तियों के जुड़ने से कंपनी की सक्रिय ऑर्डर बुक लगभग 87,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह ऑर्डर बुक भविष्य में परियोजनाओं के क्रियान्वयन और कारोबार के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    मुंबई के बिजली वितरण कारोबार में भी कंपनी ने वृद्धि दर्ज की। प्रबंधन के अनुसार, इस कारोबार में बेची गई बिजली की इकाइयों में लगभग 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वहीं, स्मार्ट मीटरिंग कारोबार के तहत लगाए गए मीटरों की कुल संख्या बढ़कर लगभग 1.5 करोड़ हो गई है। स्मार्ट मीटरिंग कंपनी के ऊर्जा समाधान कारोबार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसमें बढ़ती गतिविधियां आय में योगदान दे रही हैं।

    कंपनी ने महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड यानी एमएसईडीसीएल के साथ 2.5 गीगावाट की चौबीसों घंटे बिजली आपूर्ति से संबंधित एक बड़ा अनुबंध भी हासिल किया है। प्रबंधन के मुताबिक, यह समझौता विभिन्न स्रोतों से ऊर्जा जुटाने और ग्राहकों को बिजली आपूर्ति बेहतर बनाने की कंपनी की क्षमता को मजबूत करता है। हालांकि, इस अनुबंध से होने वाली अतिरिक्त आय का विस्तृत ब्योरा जारी आंकड़ों में नहीं दिया गया है।

    कारोबार के अलग-अलग क्षेत्रों में दूसरी तिमाही के नतीजे भी सामने आए। ट्रांसमिशन कारोबार की परिचालन आय सालाना आधार पर 17 प्रतिशत बढ़कर 1,521 करोड़ रुपये रही। बिजली वितरण कारोबार, जिसमें एईएमएल और एमयूएल शामिल हैं, की आय दो प्रतिशत बढ़कर 3,181 करोड़ रुपये हो गई। स्मार्ट मीटरिंग से आय 129 प्रतिशत की तेज वृद्धि के साथ 267 करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जबकि ऊर्जा समाधान कारोबार से आय 2,197 करोड़ रुपये दर्ज की गई।

    शेयर बाजार में अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस का शेयर बीएसई पर 1,293 रुपये के भाव पर बंद हुआ। उपलब्ध एक्सचेंज आंकड़ों के मुताबिक, शेयर का पिछले 52 सप्ताह का उच्चतम स्तर 1,789 रुपये और न्यूनतम स्तर 804.70 रुपये रहा है। कंपनी के तिमाही नतीजों में मुनाफे, आय और परिचालन लाभ में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि भविष्य का प्रदर्शन परियोजनाओं के क्रियान्वयन और कारोबार के विस्तार पर निर्भर करेगा।

  • रूसी तेल खरीदने वाले भारत समेत पांच देशों को ट्रंप ने टैरिफ से दी छूट, अमेरिकी राष्ट्रपति ने फैसले की बताई वजह

    रूसी तेल खरीदने वाले भारत समेत पांच देशों को ट्रंप ने टैरिफ से दी छूट, अमेरिकी राष्ट्रपति ने फैसले की बताई वजह

    नई दिल्ली । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले भारत समेत पांच देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने से जुड़े प्रावधानों को लागू नहीं किया है। इस फैसले के बाद अमेरिकी राजनीति में बहस शुरू हो गई है। रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के कई नेताओं ने इस निर्णय पर सवाल उठाए हैं। वहीं, ट्रंप ने अपने कदम का बचाव करते हुए कहा कि यह अमेरिका के हित में है और इससे दुनिया को भी फायदा हो सकता है। उन्होंने कहा कि अभी कई लोगों को उनके फैसले का वास्तविक अर्थ समझ नहीं आया है।

    जिन पांच देशों को इस टैरिफ से छूट मिली है, उनमें भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं। ये देश रूस से तेल और गैस खरीदते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के फैसले के तहत इन देशों पर प्रस्तावित 100 प्रतिशत टैरिफ फिलहाल लागू नहीं होगा। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने और उसकी ऊर्जा खरीद से जुड़े व्यापारिक संबंधों को लेकर अमेरिका में चर्चा जारी है।

    ट्रंप ने रविवार को मियामी में मीडिया से बातचीत के दौरान अपने निर्णय का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि बहुत से लोगों को अभी यह जानकारी नहीं है कि उनके फैसले का वास्तविक मतलब क्या है। उनके मुताबिक, समय के साथ इस निर्णय के पीछे का उद्देश्य समझ में आएगा। उन्होंने यह भी कहा कि उनका कदम अमेरिका के हित में होगा और वैश्विक स्तर पर भी इसका लाभ देखने को मिल सकता है। हालांकि, उन्होंने अपने बयान में इस फैसले से होने वाले संभावित लाभों का विस्तृत विवरण नहीं दिया।

    इससे पहले शुक्रवार को ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत रूस से संबंधित नए प्रतिबंध कानून के कुछ प्रावधानों को लागू करने से छूट दी गई। अमेरिकी कांग्रेस ने सितंबर में इस कानून को पारित किया था। इसमें रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रावधान शामिल था। भारत और चीन समेत पांच देशों को इस कार्रवाई से फिलहाल राहत मिलने के बाद कानून के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

    आदेश के अनुसार, यह छूट तब तक लागू रहेगी, जब तक राष्ट्रपति या विदेश मंत्री और वित्त मंत्री यह तय नहीं कर लेते कि आगे क्या कार्रवाई आवश्यक है। इस व्यवस्था के कारण संबंधित देशों पर टैरिफ लगाने का निर्णय तत्काल लागू नहीं हुआ है। हालांकि, इससे भविष्य में टैरिफ लगाने की संभावना पूरी तरह समाप्त नहीं होती। आगे की कार्रवाई अमेरिकी प्रशासन के निर्णय पर निर्भर करेगी।

    ट्रंप के इस कदम की आलोचना उनकी अपनी रिपब्लिकन पार्टी के साथ-साथ डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने भी की है। दोनों दलों के नेताओं ने पिछले महीने इस कानून को भारी बहुमत से पारित किया था। ऐसे में राष्ट्रपति के फैसले को लेकर अमेरिकी राजनीतिक हलकों में मतभेद सामने आए हैं। आलोचकों का मानना है कि रूस पर आर्थिक दबाव बनाने के लिए इस कानून का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

    दक्षिण कैरोलिना की रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वह रूस पर दबाव बनाने का विकल्प चुनतीं, ताकि युद्ध समाप्त करने की दिशा में कदम उठाया जा सके और गैस की कीमतें कम हों। उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर भरोसा नहीं होने की बात भी कही। इस कानून का नाम ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट’ रखा गया है। यह घटनाक्रम दिखाता है कि रूस से ऊर्जा खरीद और उस पर प्रतिबंधों को लेकर अमेरिकी प्रशासन तथा कांग्रेस के कुछ नेताओं के बीच मतभेद बने हुए हैं।

  • जेड प्लांट की पत्तियां पीली पड़ना माना जाता है अशुभ, जानिए वजह और तुरंत करने वाले जरूरी उपाय

    जेड प्लांट की पत्तियां पीली पड़ना माना जाता है अशुभ, जानिए वजह और तुरंत करने वाले जरूरी उपाय

    नई दिल्ली । घर में पौधे रखना वास्तु शास्त्र में शुभ माना जाता है। इनसे घर की सुंदरता बढ़ने के साथ वातावरण को सकारात्मक बनाए रखने की भी मान्यता है। जेड प्लांट भी ऐसे पौधों में शामिल है, जिसे वास्तु और फेंगशुई में शुभ तथा समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि घर में हरा-भरा जेड प्लांट सुख-समृद्धि और संपन्नता का प्रतीक होता है। वहीं, इसके अचानक पीले पड़ने या खराब होने को कुछ वास्तु मान्यताओं में शुभ संकेत नहीं माना जाता।

    जेड प्लांट की पत्तियों का पीला पड़ना धन से जुड़ी परेशानियों का संकेत माना जाता है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, अगर पौधा अपनी हरियाली खोने लगे तो इसे घर में आर्थिक स्थिति से जुड़ी बाधाओं के संकेत के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि, पौधे की पत्तियों का पीला होना उसके रखरखाव से जुड़ी वजहों से भी हो सकता है, इसलिए पौधे की देखभाल पर भी ध्यान देना जरूरी है।

    वास्तु मान्यताओं में जेड प्लांट के पीले पड़ने को घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ने से भी जोड़ा जाता है। ऐसी मान्यता है कि नकारात्मक वातावरण बढ़ने पर घर में तनाव और आपसी कलह की स्थिति बन सकती है। इसलिए पौधे के खराब होने पर घर की साफ-सफाई और आसपास के वातावरण पर भी ध्यान देने की सलाह दी जाती है।

    अगर जेड प्लांट को घर की पूर्व दिशा में रखा गया है और उसकी पत्तियां पीली पड़ने लगी हैं, तो इसे परिवार से जुड़ी परिस्थितियों के लिहाज से भी सतर्क रहने का संकेत माना जाता है। कुछ वास्तु मान्यताओं के अनुसार, ऐसी स्थिति परिवार के किसी सदस्य के स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानी या रिश्तों में मनमुटाव की ओर संकेत कर सकती है।

    जेड प्लांट की सही जगह और देखभाल को लेकर भी कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। वास्तु के अनुसार इसे पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में रखना शुभ माना जाता है। अगर पौधे को मुख्य द्वार के पास रखा गया है तो वहां साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। मुख्य द्वार के आसपास गंदगी या जूते-चप्पल रखने से बचने की सलाह दी जाती है।

    जेड प्लांट को तेज और सीधी धूप में रखने से भी बचना चाहिए। इसे हल्की धूप में करीब तीन से चार घंटे रखने की सलाह दी जाती है। पौधे में पानी डालते समय भी सावधानी जरूरी है। जब गमले की ऊपर की मिट्टी सूखी दिखाई दे, तभी पानी देना चाहिए। जरूरत से ज्यादा पानी पौधे के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

    अगर पौधे की कुछ पत्तियां पूरी तरह पीली या खराब हो चुकी हैं, तो उन्हें धीरे से काटकर हटा देना चाहिए। साथ ही पौधे की मिट्टी, रोशनी और पानी देने की व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए। इस तरह जेड प्लांट की नियमित देखभाल करके उसे स्वस्थ और हरा-भरा रखने की कोशिश की जा सकती है।

  • बिजली संकट से जूझता एमपी अब सरप्लस राज्य, 32 हजार मेगावॉट क्षमता के बीच ग्रीन एनर्जी पर बड़ा जोर

    बिजली संकट से जूझता एमपी अब सरप्लस राज्य, 32 हजार मेगावॉट क्षमता के बीच ग्रीन एनर्जी पर बड़ा जोर

    मध्यप्रदेश: अब बिजली के मामले में सरप्लस राज्य बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी लगातार नए आयाम स्थापित किए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य प्रदेशवासियों को सस्ती दरों पर पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराना है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 22 सितंबर को भोपाल में आयोजित नवीकरणीय ऊर्जा एवं ऊर्जा भंडारण की किफायती विद्युत खरीद विषयक कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित किया और एसोसिएशन की पुस्तक का विमोचन भी किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा समय में बिजली हर क्षेत्र की अनिवार्य जरूरत बन चुकी है। राज्य सरकार बढ़ती खपत को ध्यान में रखते हुए बिजली उत्पादन, वितरण और संधारण की क्षमता पर लगातार काम कर रही है। नई तकनीक के साथ बिजली उत्पादन की नई इकाइयां भी शुरू की गई हैं।

    उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने बिजली संकट और लंबे समय तक पावर कट का दौर देखा है, लेकिन अब स्थिति काफी बदल गई है। प्रदेश नवीकरणीय ऊर्जा के उत्पादन में लगातार अपनी क्षमता बढ़ा रहा है और अपने ही पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

    मुख्यमंत्री के अनुसार, मध्यप्रदेश की बिजली उत्पादन क्षमता राज्य गठन से लेकर वर्ष 2002-03 तक लगभग 5 हजार मेगावॉट थी। वर्तमान में यह क्षमता बढ़कर करीब 32 हजार मेगावॉट हो चुकी है। इसमें लगभग 30 प्रतिशत हिस्सेदारी ग्रीन एनर्जी की है।

    नीमच-मंदसौर क्षेत्र में 2 हजार मेगावॉट क्षमता की परियोजना का भी उल्लेख किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतनी बड़ी परियोजनाओं को सामान्य तौर पर पूरा होने में चार से छह वर्ष तक लग सकते हैं, लेकिन मध्यप्रदेश में इसे करीब दो से ढाई वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

    प्रदेश में पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के साथ सौर, पवन और पंप स्टोरेज के माध्यम से बिजली उत्पादन पर भी जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब पानी से ही नहीं, बल्कि पानी के ऊपर भी बिजली उत्पादन की दिशा में काम हो रहा है।

    ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के मुरैना में स्थापित सोलर इलेक्ट्रिसिटी स्टोरेज परियोजना से करीब 2.70 रुपये प्रति यूनिट की दर पर बिजली उपलब्ध होने की बात कही गई। सरकार का कहना है कि ऊर्जा क्षेत्र की योजनाओं को तेज गति से लागू करने के कारण उत्पादन क्षमता में लगातार वृद्धि हुई है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में लगभग 42 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश चौबीसों घंटे अक्षय ऊर्जा उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बिजली कंपनियों को अपनी क्षमता बढ़ाने के साथ घाटा कम करने पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

    कार्यशाला में ऊर्जा भंडारण और किफायती विद्युत खरीद से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि कार्यशाला में होने वाला मंथन बिजली कंपनियों की कार्यप्रणाली और भविष्य की ऊर्जा योजनाओं के लिए उपयोगी साबित होगा।

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने वर्चुअल संबोधन में कहा कि कार्यशाला से विद्युत वितरण कंपनियों को अधिक सक्षम और मजबूत बनाने के लिए उपयोगी निष्कर्ष सामने आएंगे। सरकार का जोर बिजली की बढ़ती जरूरत के साथ उत्पादन और वितरण व्यवस्था को मजबूत करने पर है।

  • उत्तर प्रदेश में देर रात बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 10 वरिष्ठ IAS अधिकारियों के विभाग बदले, रणवीर प्रसाद को ऊर्जा विभाग की जिम्मेदारी

    उत्तर प्रदेश में देर रात बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 10 वरिष्ठ IAS अधिकारियों के विभाग बदले, रणवीर प्रसाद को ऊर्जा विभाग की जिम्मेदारी

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश सरकार ने देर रात 10 वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के विभागों में बड़ा फेरबदल किया है। प्रशासनिक बदलाव के तहत कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी नए अधिकारियों को सौंपी गई है। इस फेरबदल में ऊर्जा, परिवहन, चिकित्सा, उच्च शिक्षा, कृषि, पंचायती राज, खाद्य एवं रसद और वन एवं पर्यावरण जैसे विभाग शामिल हैं।

    सबसे महत्वपूर्ण बदलाव ऊर्जा विभाग में किया गया है। डॉ. आशीष कुमार गोयल को ऊर्जा विभाग से हटाकर श्रम एवं सेवायोजन विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। उनकी जगह रणवीर प्रसाद को प्रमुख सचिव ऊर्जा और अतिरिक्त ऊर्जा की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    रणवीर प्रसाद को ऊर्जा विभाग के साथ उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन, पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन, राज्य विद्युत उत्पादन निगम और यूपीएसएलडीसी के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी दी गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली से जुड़ी शिकायतों के बीच ऊर्जा विभाग में हुआ यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    परिवहन विभाग में भी नई जिम्मेदारी दी गई है। अमृत अभिजात को उनके मौजूदा विभागों के साथ परिवहन विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। उनके पास पहले से पर्यटन, संस्कृति और धर्मार्थ कार्य विभाग की जिम्मेदारी है। अब परिवहन विभाग भी उनके कार्यक्षेत्र में शामिल हो गया है।

    चिकित्सा और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली गई हैं। अमित कुमार घोष को चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग से हटाकर उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।

    वी हेकाली झिमोमी को चिकित्सा शिक्षा विभाग सौंपा गया है। इससे पहले उनके पास वन एवं पर्यावरण विभाग की जिम्मेदारी थी। इस बदलाव के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग का प्रशासनिक दायित्व भी नए अधिकारी के पास चला गया है।

    प्रशासनिक फेरबदल के तहत डॉ. एमकेएस सुंदरम को कृषि से जुड़े कई विभागों की जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार और निर्यात प्रोत्साहन विभाग का प्रमुख सचिव बनाया गया है।

    रविंद्र को पंचायती राज विभाग का प्रमुख सचिव बनाया गया है। वहीं अनिल कुमार को पंचायती राज विभाग से हटाकर खाद्य एवं रसद तथा उपभोक्ता मामले विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें आयुक्त खाद्य एवं रसद का अतिरिक्त दायित्व भी सौंपा गया है।

    महेंद्र प्रसाद अग्रवाल को उच्च शिक्षा विभाग से हटाकर वन एवं पर्यावरण तथा जलवायु परिवर्तन विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही अमित गुप्ता को स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के साथ प्राविधिक शिक्षा विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

    इस फेरबदल के साथ राज्य सरकार ने कई प्रमुख विभागों की प्रशासनिक जिम्मेदारियों में बदलाव किया है। खास तौर पर ऊर्जा और बिजली से जुड़े विभागों में हुए परिवर्तन पर ध्यान केंद्रित किया गया है। नई जिम्मेदारियों के तहत अधिकारियों को संबंधित विभागों के कामकाज को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संभालनी होगी।

    ऊर्जा विभाग में बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब ग्रामीण इलाकों में बिजली आपूर्ति और उससे जुड़ी शिकायतों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर लगातार काम किया जा रहा है। रणवीर प्रसाद को ऊर्जा विभाग के साथ बिजली क्षेत्र की प्रमुख संस्थाओं की जिम्मेदारी मिलने से विभागीय कामकाज में उनके अधिकार क्षेत्र का विस्तार हुआ है।

    वहीं परिवहन, चिकित्सा शिक्षा और उच्च शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी नए अधिकारियों की तैनाती की गई है। कृषि, पंचायती राज, खाद्य एवं रसद तथा पर्यावरण से जुड़े विभागों में बदलाव के जरिए सरकार ने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारियों का पुनर्विन्यास किया है।

  • रूस से तेल खरीद पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ का प्रावधान, भारत ने राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी

    रूस से तेल खरीद पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ का प्रावधान, भारत ने राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी

    नई दिल्ली । अमेरिकी संसद में रूस और ईरान से जुड़े प्रतिबंधों वाले विधेयक के पारित होने के बाद भारत ने अपनी ऊर्जा नीति को लेकर स्पष्ट रुख सामने रखा है। भारत सरकार ने कहा है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और करीब 1.4 अरब लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तेल और गैस की खरीद जारी रखी जाएगी। सरकार के मुताबिक ऊर्जा खरीद से जुड़े फैसले बदलती बाजार परिस्थितियों और उपलब्ध विकल्पों के आधार पर लिए जाएंगे।

    अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने 16 सितंबर को लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 को 262 के मुकाबले 159 वोट से पारित किया। इससे पहले यह विधेयक अमेरिकी सीनेट से भी पारित हो चुका था। अब इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेजा गया है। विधेयक राष्ट्रपति को रूस से तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत पर 100 प्रतिशत शुल्क अपने आप लागू हो गया है। इसके लिए आगे राष्ट्रपति स्तर पर निर्णय और कानून में दिए गए प्रावधानों के तहत कार्रवाई जरूरी होगी।

    भारत ने कहा है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग स्रोतों से तेल और गैस खरीदता रहेगा। सरकार का जोर ऊर्जा आपूर्ति में विविधता बनाए रखने और बाजार की परिस्थितियों के अनुसार फैसले लेने पर है। इस रुख का उद्देश्य घरेलू जरूरतों के लिए पर्याप्त और किफायती ऊर्जा उपलब्धता बनाए रखना है।

    भारत सरकार ने यह भी कहा कि हाल के महीनों में इस मुद्दे पर अमेरिकी अधिकारियों के साथ उच्च स्तर पर बातचीत हुई है। भारत ने अपनी चिंताओं से अमेरिका को अवगत कराया है और कहा है कि प्रतिबंधों तथा संभावित टैरिफ का असर केवल द्विपक्षीय व्यापार संबंधों तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

    विधेयक में रूस के ऊर्जा क्षेत्र के अलावा उससे जुड़े अन्य क्षेत्रों पर भी प्रतिबंधात्मक प्रावधान शामिल हैं। इसका एक प्रमुख हिस्सा उन देशों को निशाना बनाने से जुड़ा है जो रूस से बड़ी मात्रा में तेल और गैस खरीदते हैं। भारत और चीन ऐसे प्रमुख खरीदारों में शामिल हैं, इसलिए विधेयक के प्रावधानों को लेकर दोनों देशों पर विशेष ध्यान है।

    अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में विधेयक पारित होने के बाद अब अगला महत्वपूर्ण चरण राष्ट्रपति की मंजूरी है। राष्ट्रपति की ओर से हस्ताक्षर किए जाने के बाद ही विधेयक कानून का रूप लेगा। इसके बाद इसमें दिए गए टैरिफ संबंधी अधिकारों के इस्तेमाल का रास्ता खुलेगा। कानून के तहत कुछ परिस्थितियों में छूट या अन्य प्रावधानों की भी गुंजाइश रखी गई है।

    भारत ने अपने रुख में यह भी स्पष्ट किया है कि वह अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा। संभावित प्रभावों से निपटने के लिए सरकार व्यापार और उद्योग जगत के साथ मिलकर स्थिति पर नजर रखेगी। फिलहाल भारत का मुख्य जोर ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने और अलग-अलग स्रोतों से खरीद के विकल्प बनाए रखने पर है।

  • अमेरिकी टैरिफ दबाव के बीच भारत का रुख स्पष्ट, ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं, जरूरत के मुताबिक तेल-गैस खरीद जारी

    अमेरिकी टैरिफ दबाव के बीच भारत का रुख स्पष्ट, ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं, जरूरत के मुताबिक तेल-गैस खरीद जारी

    नई दिल्ली ।अमेरिकी संसद में रूस और ईरान से जुड़े प्रतिबंधों वाले विधेयक के पारित होने के बाद भारत ने अपनी ऊर्जा नीति को लेकर स्पष्ट रुख सामने रखा है। भारत सरकार ने कहा है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और करीब 1.4 अरब लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तेल और गैस की खरीद जारी रखी जाएगी। सरकार के मुताबिक ऊर्जा खरीद से जुड़े फैसले बदलती बाजार परिस्थितियों और उपलब्ध विकल्पों के आधार पर लिए जाएंगे।

    अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने 16 सितंबर को लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 को 262 के मुकाबले 159 वोट से पारित किया। इससे पहले यह विधेयक अमेरिकी सीनेट से भी पारित हो चुका था। अब इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेजा गया है। विधेयक राष्ट्रपति को रूस से तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत पर 100 प्रतिशत शुल्क अपने आप लागू हो गया है। इसके लिए आगे राष्ट्रपति स्तर पर निर्णय और कानून में दिए गए प्रावधानों के तहत कार्रवाई जरूरी होगी।

    भारत ने कहा है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग स्रोतों से तेल और गैस खरीदता रहेगा। सरकार का जोर ऊर्जा आपूर्ति में विविधता बनाए रखने और बाजार की परिस्थितियों के अनुसार फैसले लेने पर है। इस रुख का उद्देश्य घरेलू जरूरतों के लिए पर्याप्त और किफायती ऊर्जा उपलब्धता बनाए रखना है।

    भारत सरकार ने यह भी कहा कि हाल के महीनों में इस मुद्दे पर अमेरिकी अधिकारियों के साथ उच्च स्तर पर बातचीत हुई है। भारत ने अपनी चिंताओं से अमेरिका को अवगत कराया है और कहा है कि प्रतिबंधों तथा संभावित टैरिफ का असर केवल द्विपक्षीय व्यापार संबंधों तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

    विधेयक में रूस के ऊर्जा क्षेत्र के अलावा उससे जुड़े अन्य क्षेत्रों पर भी प्रतिबंधात्मक प्रावधान शामिल हैं। इसका एक प्रमुख हिस्सा उन देशों को निशाना बनाने से जुड़ा है जो रूस से बड़ी मात्रा में तेल और गैस खरीदते हैं। भारत और चीन ऐसे प्रमुख खरीदारों में शामिल हैं, इसलिए विधेयक के प्रावधानों को लेकर दोनों देशों पर विशेष ध्यान है।

    अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में विधेयक पारित होने के बाद अब अगला महत्वपूर्ण चरण राष्ट्रपति की मंजूरी है। राष्ट्रपति की ओर से हस्ताक्षर किए जाने के बाद ही विधेयक कानून का रूप लेगा। इसके बाद इसमें दिए गए टैरिफ संबंधी अधिकारों के इस्तेमाल का रास्ता खुलेगा। कानून के तहत कुछ परिस्थितियों में छूट या अन्य प्रावधानों की भी गुंजाइश रखी गई है।

    भारत ने अपने रुख में यह भी स्पष्ट किया है कि वह अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा। संभावित प्रभावों से निपटने के लिए सरकार व्यापार और उद्योग जगत के साथ मिलकर स्थिति पर नजर रखेगी। फिलहाल भारत का मुख्य जोर ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने और अलग-अलग स्रोतों से खरीद के विकल्प बनाए रखने पर है।

  • भारत में एथेनॉल आपूर्ति 895 करोड़ लीटर पहुंची, कुल मात्रा में अनाज आधारित स्रोतों की हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत दर्ज हुई

    भारत में एथेनॉल आपूर्ति 895 करोड़ लीटर पहुंची, कुल मात्रा में अनाज आधारित स्रोतों की हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत दर्ज हुई

    नई दिल्ली ।भारत में एथेनॉल सप्लाई ईयर 2025-26 के दौरान एथेनॉल की आपूर्ति में अनाज आधारित कच्चे माल की भूमिका लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। अगस्त 2026 के अंत तक देश में कुल 895 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति हुई। यह मात्रा इस अवधि के लिए अनुबंधित 1,048 करोड़ लीटर एथेनॉल का करीब 85 प्रतिशत है।

    उपलब्ध उद्योग आंकड़ों के अनुसार, कुल 895 करोड़ लीटर आपूर्ति में अनाज आधारित फीडस्टॉक से 624 करोड़ लीटर एथेनॉल उपलब्ध कराया गया। वहीं, चीनी आधारित स्रोतों से 271 करोड़ लीटर की आपूर्ति हुई। इस तरह कुल एथेनॉल आपूर्ति में अनाज आधारित स्रोतों की हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत रही।

    अनाज आधारित स्रोतों में मक्का सबसे बड़ा योगदानकर्ता रहा। अगस्त के अंत तक मक्का से 345 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति की गई। इसके बाद भारतीय खाद्य निगम से प्राप्त अधिशेष चावल का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिससे 214 करोड़ लीटर एथेनॉल तैयार किया गया। इसके अलावा क्षतिग्रस्त खाद्यान्नों से 64 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन हुआ।

    उद्योग संगठन के अनुसार, एथेनॉल उत्पादन में मक्का और अधिशेष चावल के बढ़ते इस्तेमाल से उत्पादन व्यवस्था को अधिक स्थिरता मिल रही है। इससे ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलने के साथ किसानों के लिए कृषि उपज के नए उपयोग के अवसर भी बन रहे हैं।

    चीनी आधारित स्रोतों की भी एथेनॉल आपूर्ति में अहम भूमिका बनी हुई है। इस श्रेणी में गन्ने के रस से सबसे अधिक 149 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति हुई। बी-हेवी शीरे से 107 करोड़ लीटर और सी-हेवी शीरे से 15 करोड़ लीटर एथेनॉल उपलब्ध कराया गया।

    उद्योग के अनुसार, अलग-अलग फीडस्टॉक से एथेनॉल उत्पादन बढ़ने से देश की आपूर्ति शृंखला अधिक लचीली हो रही है। इससे किसी एक फसल या कच्चे माल पर निर्भरता कम करने में मदद मिलती है। एथेनॉल उत्पादन के लिए कई स्रोतों के इस्तेमाल को देश के कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन की उपमहानिदेशक भारती बालाजी ने कहा कि अब तक आपूर्ति किए गए 895 करोड़ लीटर एथेनॉल में करीब 70 प्रतिशत हिस्सा अनाज आधारित स्रोतों का है। इसमें मक्का और भारतीय खाद्य निगम का अधिशेष चावल प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि, चीनी आधारित स्रोत भी आपूर्ति में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि विभिन्न फीडस्टॉक के इस्तेमाल से भारत के एथेनॉल कार्यक्रम को मजबूती मिलती है। इससे कृषि उपज का बेहतर इस्तेमाल संभव होता है और उत्पादन से जुड़े जोखिम को कम करने में मदद मिलती है।

    हालांकि, उद्योग ने एथेनॉल उत्पादन क्षमता और आपूर्ति बढ़ने के साथ स्थिर और अनुमानित मांग सुनिश्चित करने की जरूरत पर भी जोर दिया है। उद्योग का मानना है कि आने वाले वर्षों में मांग की स्थिरता का मुद्दा और महत्वपूर्ण हो सकता है।

    भारत की एथेनॉल खपत का दायरा भी केवल पेट्रोल में मिश्रण तक सीमित नहीं रखने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों, कंप्रेस्ड बायोगैस, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल और अन्य औद्योगिक उपयोगों में एथेनॉल की खपत बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है। ऐसे में उत्पादन के साथ विभिन्न क्षेत्रों में मांग बढ़ाना भी एथेनॉल व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।