Tag: Energy

  • वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाकर 300 एमएमटीपीए करेगा, इंडो-पैसिफिक में मजबूत होगी ऊर्जा आपूर्ति

    वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाकर 300 एमएमटीपीए करेगा, इंडो-पैसिफिक में मजबूत होगी ऊर्जा आपूर्ति

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ने के बीच भारत ने अपनी तेल रिफाइनिंग क्षमता को और विस्तार देने की तैयारी तेज कर दी है। देश की मौजूदा रिफाइनिंग क्षमता करीब 272 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष है, जिसे बढ़ाकर 300 एमएमटीपीए करने का लक्ष्य रखा गया है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

    भारत वर्तमान में दुनिया के सबसे बड़े तेल रिफाइनिंग देशों में शामिल है और उसकी रिफाइनरियां घरेलू मांग पूरी करने के साथ पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। क्षमता में प्रस्तावित वृद्धि से देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की क्षमता बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति संबंधी अनिश्चितताओं के बीच रणनीतिक मजबूती हासिल करने में मदद मिलेगी।

    केंद्रीय मंत्री के अनुसार भारत दुनिया के प्रमुख रिफाइनिंग केंद्रों में अपनी स्थिति मजबूत कर चुका है। देश में 23 रिफाइनरियां सालाना करीब 270 मिलियन मीट्रिक टन कच्चे तेल को संसाधित करने की क्षमता रखती हैं। रिफाइनिंग क्षेत्र के विस्तार को भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा बाजार में भूमिका बढ़ाने से जोड़कर देखा जा रहा है।

    भारत पेट्रोलियम उत्पादों का शुद्ध निर्यातक भी है। ऐसे में अतिरिक्त रिफाइनिंग क्षमता देश को घरेलू खपत के साथ-साथ मित्र देशों को भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्ति उपलब्ध कराने में सक्षम बनाएगी। विशेष रूप से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बढ़ती चुनौतियों के बीच भारत अपनी रिफाइनिंग और आपूर्ति क्षमता को रणनीतिक संपत्ति के रूप में विकसित कर रहा है।

    इसी व्यापक ऊर्जा सहयोग के तहत भारत और मॉरिशस के बीच तेल और गैस क्षेत्र में महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। दोनों देशों ने ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके साथ ही इंडियनऑयल और मॉरिशस की स्टेट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन के बीच पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति को लेकर पांच साल का समझौता भी हुआ है।

    समझौते के तहत मॉरिशस को पेट्रोलियम उत्पादों की नियमित और भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया जाएगा। इससे द्वीपीय देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए स्थिर आपूर्ति व्यवस्था विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। भारत के लिए यह समझौता क्षेत्रीय ऊर्जा सहयोग को मजबूत करने और अपने रिफाइनिंग नेटवर्क की उपयोगिता बढ़ाने का अवसर भी है।

    भारत और मॉरिशस के बीच ऊर्जा साझेदारी को दोनों देशों की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार से सरकार और कारोबार से कारोबार स्तर पर हुए समझौतों से ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है। इससे पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति, व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों के संबंध और मजबूत हो सकते हैं।

    वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और रिफाइंड उत्पादों की कीमतों तथा आपूर्ति पर बाहरी घटनाओं का प्रभाव लगातार दिखाई देता है। ऐसे माहौल में घरेलू रिफाइनिंग क्षमता का विस्तार भारत को ऊर्जा क्षेत्र में अधिक लचीलापन प्रदान कर सकता है। 300 एमएमटीपीए का लक्ष्य हासिल होने पर भारत की उत्पादन और निर्यात क्षमता में भी महत्वपूर्ण विस्तार की संभावना बनेगी।

    सरकार का जोर केवल रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत को एक भरोसेमंद और स्थिर ऊर्जा भागीदार के रूप में स्थापित करने पर भी है। मॉरिशस के साथ हुआ समझौता इसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में रिफाइनिंग क्षमता और क्षेत्रीय ऊर्जा साझेदारियों का विस्तार भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

  • कचरे से ऊर्जा तक बड़ा बदलाव, गोबरधन योजना से सीबीजी उत्पादन दस गुना बढ़ाने और आयात निर्भरता घटाने की तैयारी

    कचरे से ऊर्जा तक बड़ा बदलाव, गोबरधन योजना से सीबीजी उत्पादन दस गुना बढ़ाने और आयात निर्भरता घटाने की तैयारी


    नई दिल्ली ।
    केंद्र सरकार की नई गोबरधन यानी राष्ट्रीय सर्कुलर बायो-एनर्जी योजना को भारत के ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने वाली पहल के तौर पर देखा जा रहा है। सरकार के अनुसार, योजना के जरिए देश में कंप्रेस्ड बायोगैस यानी सीबीजी का उत्पादन तेजी से बढ़ाया जाएगा। इससे जीवाश्म ईंधन के आयात पर निर्भरता कम करने के साथ 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बचाने का अनुमान है।

    सरकार का कहना है कि योजना अगले दस वर्षों में सीबीजी उत्पादन को करीब दस गुना बढ़ाने में मदद करेगी। इसके साथ ही निजी निवेश को आकर्षित करने, जैविक कचरे के बेहतर इस्तेमाल और सर्कुलर बायोइकोनॉमी को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। इस क्षेत्र से राष्ट्रीय जीडीपी में 75 हजार करोड़ रुपये से अधिक के योगदान की उम्मीद जताई गई है।

    योजना का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य रोजगार सृजन भी है। सरकार के अनुमान के मुताबिक, गोबर, कृषि अवशेष और अन्य जैविक कचरे से सीबीजी उत्पादन बढ़ने पर लगभग 1.5 लाख नए रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। संयंत्रों के संचालन के अलावा कच्चे माल की आपूर्ति, परिवहन, जैविक खाद उत्पादन और कचरा प्रबंधन से जुड़े क्षेत्रों में भी रोजगार बढ़ने की संभावना है।

    गोबरधन योजना के तहत तैयार होने वाली स्वदेशी गैस जीवाश्म ईंधन की जगह इस्तेमाल की जा सकेगी। अनुमान है कि इसके जरिए करीब एक करोड़ मीट्रिक टन जीवाश्म ईंधन की खपत को प्रतिस्थापित किया जा सकता है। इससे ऊर्जा आयात पर दबाव कम होने के साथ देश की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिल सकती है।

    जैविक कचरे के इस्तेमाल से पर्यावरण को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। सरकार के मुताबिक, कचरे को लैंडफिल में जाने से रोकने पर 40 मिलियन टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आ सकती है। इसके अलावा करीब 250 मिलियन मीट्रिक टन जैविक उर्वरक के उत्पादन का अनुमान है, जिससे कृषि क्षेत्र को भी लाभ मिल सकता है।

    सीबीजी उत्पादकों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने गैस खरीद की गारंटी से जुड़ा ढांचा तैयार किया है। सीबीजी के लिए 2,110 रुपये प्रति एमएमबीटीयू की प्रशासित कीमत निर्धारित की गई है। परियोजनाओं को क्षमता के आधार पर प्रति टन प्रतिदिन 2 करोड़ रुपये तक की पूंजीगत सहायता देने का प्रावधान है। एमएसएमई इकाइयों को 85 प्रतिशत तक क्रेडिट गारंटी का लाभ भी दिया जाएगा।

    सीबीजी रासायनिक रूप से प्राकृतिक गैस के समान होती है और इसे मौजूदा गैस वितरण नेटवर्क में बड़े बदलाव के बिना शामिल किया जा सकता है। इससे परिवहन, घरेलू उपयोग, उद्योग और वाणिज्यिक क्षेत्रों में बढ़ती गैस मांग को घरेलू उत्पादन से पूरा करने में मदद मिल सकती है।

    योजना के तहत सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के जरिए सीबीजी मिश्रण बढ़ाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है। वित्त वर्ष 2027 में 3 प्रतिशत, वित्त वर्ष 2028 में 4 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2029 से 5 प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य रखा गया है। ये लक्ष्य परिवहन में सीएनजी और घरेलू उपयोग में पीएनजी श्रेणियों पर लागू होंगे।

    देश में सीबीजी क्षेत्र का मौजूदा आधार भी तेजी से बढ़ रहा है। अब तक 1,908 सीबीजी और बायो-सीएनजी संयंत्र पंजीकृत किए जा चुके हैं। इनमें 217 संयंत्र चालू हैं, जबकि 339 निर्माणाधीन हैं। चालू संयंत्र प्रतिदिन करीब 0.4 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर गैस का उत्पादन कर रहे हैं।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में 23,731 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय वाली गोबरधन योजना को मंजूरी दी गई है। यह योजना वित्त वर्ष 2027 से 2036 तक लागू रहेगी। इसका उद्देश्य सीबीजी को देश के भविष्य के ऊर्जा मिश्रण का प्रमुख हिस्सा बनाना है। सरकार की योजना कचरे को संसाधन में बदलकर ऊर्जा सुरक्षा, रोजगार, निवेश और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ आगे बढ़ाने की है।

  • ऊर्जा संकट से जूझ रहे बांग्लादेश ने भारत से मांगी अतिरिक्त डीजल आपूर्ति, पाइपलाइन के जरिए बढ़ेगा ईंधन सहयोग

    ऊर्जा संकट से जूझ रहे बांग्लादेश ने भारत से मांगी अतिरिक्त डीजल आपूर्ति, पाइपलाइन के जरिए बढ़ेगा ईंधन सहयोग


    नई दिल्ली । बांग्लादेश में बिजली और गैस की कमी के बीच ऊर्जा संकट लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। इस स्थिति से निपटने के लिए बांग्लादेश ने भारत से सीमा पार पाइपलाइन के जरिए डीजल की अतिरिक्त आपूर्ति करने की अपील की है। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच हुई बैठक में बिजली और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के साथ ईंधन सुरक्षा को मजबूत करने पर चर्चा हुई।

    बांग्लादेश के पावर, एनर्जी और मिनरल रिसोर्सेज मंत्री इकबाल हसन महमूद ने भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी के साथ बैठक के बाद ऊर्जा सहयोग को चर्चा के प्रमुख मुद्दों में शामिल बताया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश पहले से ही पाइपलाइन के माध्यम से भारत से डीजल आयात करता है और मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए उसने भारत से इसकी आपूर्ति बढ़ाने का अनुरोध किया है।

    बांग्लादेश इस समय बिजली उत्पादन के लिए जरूरी ईंधन और गैस की उपलब्धता को लेकर दबाव का सामना कर रहा है। ऊर्जा की मांग पूरी करने के लिए डीजल की पर्याप्त आपूर्ति महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे में भारत से अतिरिक्त ईंधन मिलने पर बांग्लादेश की घरेलू ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है और बिजली उत्पादन से जुड़ी चुनौतियों को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

    भारत और बांग्लादेश के बीच ऊर्जा सहयोग पिछले कुछ वर्षों में लगातार महत्वपूर्ण हुआ है। दोनों देशों के बीच बिजली के आदान-प्रदान के साथ ईंधन आपूर्ति और सीमा पार ऊर्जा संपर्क से जुड़ी व्यवस्थाएं भी विकसित हुई हैं। इसी सहयोग के तहत भारत से बांग्लादेश तक डीजल पहुंचाने के लिए सीमा पार पाइपलाइन का इस्तेमाल किया जाता है।

    बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने बिजली और ऊर्जा क्षेत्र में आपसी सहयोग को और मजबूत करने की संभावनाओं पर विचार किया। बांग्लादेश की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि भारत के साथ ऊर्जा संबंध दोनों देशों के साझा हितों से जुड़े हैं। पड़ोसी देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने के लिए सहयोग को आगे बढ़ाना दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    भारत-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन के जरिए डीजल आपूर्ति ने बांग्लादेश की ईंधन जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाई है। अप्रैल की शुरुआत में इस पाइपलाइन के माध्यम से भारत से बांग्लादेश को करीब 5,000 टन अतिरिक्त डीजल की आपूर्ति शुरू हुई थी। उस समय पश्चिम एशिया में समुद्री मार्गों को लेकर बढ़ी अनिश्चितता के बीच ईंधन आयात पर दबाव बढ़ने की आशंका थी। ऐसे माहौल में पाइपलाइन के जरिए आपूर्ति को बांग्लादेश की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना गया।

    मौजूदा बिजली और गैस संकट के बीच बांग्लादेश की अतिरिक्त डीजल मांग से दोनों देशों के ऊर्जा संबंधों का महत्व और बढ़ गया है। यदि भारत की ओर से अतिरिक्त आपूर्ति उपलब्ध कराई जाती है, तो इससे बांग्लादेश को बिजली उत्पादन और परिवहन समेत कई क्षेत्रों में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।

    ऊर्जा सहयोग के साथ दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध भी इस समय चर्चा के केंद्र में हैं। सीमा पार बिजली और ऊर्जा संपर्क को मजबूत करने से क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों को गति देने की संभावना है। बांग्लादेश की ताजा अपील ऐसे समय आई है जब वह अपनी तत्काल ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए भरोसेमंद ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करना चाहता है।

  • शेयर बाजार में तेजी का माहौल, जूनिपर ग्रीन एनर्जी की दमदार लिस्टिंग ने निवेशकों का बढ़ाया उत्साह

    शेयर बाजार में तेजी का माहौल, जूनिपर ग्रीन एनर्जी की दमदार लिस्टिंग ने निवेशकों का बढ़ाया उत्साह

    नई दिल्ली । घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को शुरुआती कारोबार के दौरान सकारात्मक रुख देखने को मिला। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 250 अंकों की बढ़त के साथ 78,850 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि निफ्टी भी मामूली तेजी के साथ 24,650 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में शुरुआती घंटे में निवेशकों की ओर से बैंकिंग और एनर्जी सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली, जिससे प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली। कारोबार के दौरान निवेशकों का रुझान चुनिंदा बड़े शेयरों की ओर अधिक दिखाई दिया, जिससे बाजार का माहौल सकारात्मक बना रहा।

    आज के कारोबार में बैंकिंग कंपनियों के शेयरों ने बाजार को सहारा दिया। इसके साथ ही ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों में भी निवेशकों ने भरोसा दिखाया। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू स्तर पर मजबूत निवेश गतिविधियों और चुनिंदा सेक्टरों में खरीदारी के कारण बाजार में तेजी का माहौल बना हुआ है। हालांकि वैश्विक बाजारों से मिले मिश्रित संकेतों के चलते निवेशक सतर्क भी नजर आए और सीमित दायरे में कारोबार जारी रहा।

    इसी बीच रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र की कंपनी जूनिपर ग्रीन एनर्जी ने शेयर बाजार में शानदार शुरुआत की। कंपनी का शेयर राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज पर 245 रुपये और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर 242 रुपये के स्तर पर सूचीबद्ध हुआ। यह कंपनी के 225 रुपये प्रति शेयर के इश्यू प्राइस की तुलना में लगभग 9 प्रतिशत अधिक रहा। मजबूत लिस्टिंग ने उन निवेशकों को शुरुआती दिन ही लाभ दिया जिन्होंने कंपनी के सार्वजनिक निर्गम में निवेश किया था।

    कंपनी का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम 30 जुलाई से 3 अगस्त के बीच निवेशकों के लिए खुला था। इस इश्यू का प्राइस बैंड 214 से 225 रुपये प्रति शेयर तय किया गया था। निवेशकों की अच्छी भागीदारी के चलते इस निर्गम को लगभग 7.97 गुना सब्सक्रिप्शन प्राप्त हुआ। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं और निवेशकों के सकारात्मक रुख का लाभ कंपनी को सूचीबद्ध होने के पहले ही दिन मिला।

    दूसरी ओर एशियाई बाजारों में कमजोरी का माहौल देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंगसेंग सभी प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। वैश्विक स्तर पर निवेशकों की सतर्कता और विभिन्न आर्थिक संकेतकों का असर एशियाई बाजारों पर स्पष्ट रूप से नजर आया। वहीं अमेरिकी बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान मिला-जुला प्रदर्शन दर्ज किया गया, जहां डाउ जोन्स बढ़त के साथ बंद हुआ जबकि नैस्डैक और एसएंडपी 500 में हल्की गिरावट रही।

    विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर नजर डालें तो हाल के सात कारोबारी दिनों में उन्होंने कुल 2,703 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की है। हालांकि ताजा कारोबारी सत्र में विदेशी निवेशकों की ओर से सीमित बिकवाली दर्ज की गई, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों की लगातार खरीदारी ने बाजार को संतुलित बनाए रखा। पिछले कारोबारी दिन भी सेंसेक्स 152 अंकों की बढ़त के साथ 78,581 के स्तर पर बंद हुआ था। लगातार दूसरे दिन शुरुआती तेजी ने यह संकेत दिया कि निवेशकों का भरोसा अभी भी घरेलू बाजार में बना हुआ है और आगामी कारोबारी सत्रों में वैश्विक संकेतों के साथ-साथ कॉर्पोरेट गतिविधियों पर भी बाजार की नजर रहेगी।

  • ऊर्जा सुरक्षा पर भारत का बड़ा विजन BRICS 2026 की अध्यक्षता में ग्लोबल साउथ को नई दिशा देगा भारत पीएम मोदी का ऐलान

    ऊर्जा सुरक्षा पर भारत का बड़ा विजन BRICS 2026 की अध्यक्षता में ग्लोबल साउथ को नई दिशा देगा भारत पीएम मोदी का ऐलान


    नई दिल्ली । नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालने के दौरान भारत की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाना और ग्लोबल साउथ के देशों को वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था के केंद्र में स्थापित करना शामिल होगा। उनका कहना है कि तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों में केवल घरेलू नीतियां ही पर्याप्त नहीं हैं बल्कि मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग और साझा प्रयासों के माध्यम से ही सुरक्षित विश्वसनीय और टिकाऊ ऊर्जा व्यवस्था का निर्माण किया जा सकता है। भारत इसी सोच के साथ आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में ब्रिक्स मंच के जरिए विकासशील देशों की आवाज को और अधिक मजबूती देने का प्रयास करेगा।

    प्रधानमंत्री ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर के विचारों का समर्थन करते हुए कहा कि भारत का लक्ष्य ऐसी वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था तैयार करना है जो सभी देशों के लिए समान अवसर उपलब्ध कराए और ऊर्जा सुरक्षा के साथ आर्थिक विकास तथा पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करे। उनका मानना है कि ग्लोबल साउथ के देशों के सामने ऊर्जा उपलब्धता स्वच्छ तकनीक और वित्तीय संसाधनों जैसी कई चुनौतियां हैं जिनका समाधान सामूहिक सहयोग से ही संभव है।

    मनोहर लाल खट्टर ने भी अपने विचारों में कहा कि दुनिया का ऊर्जा क्षेत्र तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को नई तकनीकों नवाचार और मजबूत साझेदारी की सबसे अधिक आवश्यकता है। भारत ब्रिक्स की अध्यक्षता के दौरान इसी दिशा में ठोस पहल करेगा ताकि स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति मिले और सदस्य देशों के बीच तकनीकी सहयोग तथा निवेश को बढ़ावा मिल सके।

    उन्होंने बताया कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। देश ने गैर जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता में तेजी से वृद्धि की है और राष्ट्रीय लक्ष्य से पहले ही कुल स्थापित बिजली क्षमता का आधे से अधिक हिस्सा स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त करने में सफलता हासिल की है। यह उपलब्धि भारत की ऊर्जा नीति और हरित विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

    भारत ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए ग्रीन हाइड्रोजन कोयला गैसीकरण इलेक्ट्रिक मोबिलिटी आधुनिक ट्रांसमिशन नेटवर्क और डिजिटल तकनीकों पर लगातार निवेश कर रहा है। स्मार्ट मीटर और इंडिया एनर्जी स्टैक जैसी पहल बिजली क्षेत्र को अधिक पारदर्शी सक्षम और आधुनिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। सरकार का मानना है कि भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था डिजिटल तकनीक और स्वच्छ संसाधनों के बेहतर समन्वय पर आधारित होगी।

    प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर भी जोर दिया कि ब्रिक्स देशों की अलग अलग क्षमताएं एक दूसरे की ताकत बन सकती हैं। यदि सदस्य देश मिलकर अनुसंधान तकनीक निवेश और ऊर्जा अवसंरचना के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाते हैं तो न केवल ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी बल्कि जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों का भी प्रभावी समाधान निकाला जा सकेगा। भारत इसी साझा सोच को आगे बढ़ाते हुए ब्रिक्स 2026 के दौरान ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएगा।

  • अदाणी पावर और एईएसएल में निवेश के लिए बुलिश संकेत, क्षमता विस्तार और मजबूत पीपीए की वजह

    अदाणी पावर और एईएसएल में निवेश के लिए बुलिश संकेत, क्षमता विस्तार और मजबूत पीपीए की वजह

    अहमदाबाद । ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने अदाणी ग्रुप की तीन प्रमुख कंपनियों – अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड, अदाणी पावर लिमिटेड और अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड – पर बुलिश रुख अपनाया है। जेफरीज का कहना है कि इन कंपनियों में क्षमता में तेज विस्तार, मजबूत क्रियान्वयन और बढ़ती मांग की वजह से निवेश के लिए आकर्षक अवसर मौजूद हैं।

    अदाणी ग्रीन एनर्जी को जेफरीज ने “बाय” रेटिंग के साथ 1,435 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। ब्रोकरेज फर्म के अनुसार कंपनी वित्त वर्ष 2026 में 19.3 गीगावाट रिन्यूएबल ऊर्जा क्षमता से वित्त वर्ष 2030 तक 50 गीगावाट तक पहुंचने का लक्ष्य रखती है। इसमें 5 गीगावाट की पंप स्टोरेज परियोजना और बैटरी स्टोरेज सिस्टम में 10 गीगावाट से अधिक की वृद्धि शामिल है। गुजरात के खावड़ा में 30 गीगावाट रिन्यूएबल ऊर्जा क्षमता का निर्माण चल रहा है, जो ग्रोथ का प्रमुख ड्राइवर है।

    अदाणी पावर पर जेफरीज ने अपनी “बाय” रेटिंग बनाए रखते हुए 255 रुपये का टारगेट प्राइस निर्धारित किया है। कंपनी वित्त वर्ष 2032 तक अपनी क्षमता 42 गीगावॉट तक बढ़ाने की योजना रखती है। इसके अलावा दीर्घकालिक बिजली खरीद समझौतों (PPA) की मजबूत पाइपलाइन से आय में सुधार की संभावना है। वर्तमान में आगामी क्षमता का लगभग 56 प्रतिशत पीपीए पहले से ही सुनिश्चित किया जा चुका है।

    अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड (एईएसएल) के लिए जेफरीज ने 1,665 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ “बाय” रेटिंग बरकरार रखी है। एईएसएल भारत की एकमात्र सूचीबद्ध प्योर प्ले ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी है। कंपनी वर्तमान में 718 अरब रुपये के ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स क्रियान्वित कर रही है और स्मार्ट मीटरिंग व्यवसाय तेजी से बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2026 तक 11 मिलियन से अधिक मीटर स्थापित किए जा चुके हैं।

    जेफरीज का अनुमान है कि मध्यम अवधि में एबिटा और कर के बाद मुनाफे में मजबूत दोहरे अंकों की वृद्धि होगी। यह क्रियान्वयन की गति, डेटा सेंटर, वाणिज्यिक और औद्योगिक ऊर्जा समाधानों में बढ़ते अवसरों और स्मार्ट मीटरिंग के व्यापक विस्तार से प्रेरित होगी।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अदाणी ग्रुप की ये कंपनियां भारत में बढ़ती ऊर्जा मांग और ट्रांसमिशन इन्फ्रास्ट्रक्चर में तेजी से बढ़ते निवेश का लाभ उठा रही हैं। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि ग्रुप की लंबी अवधि की रणनीति और क्षमता विस्तार योजनाएं उनके पोर्टफोलियो के लिए आकर्षक साबित हो सकती हैं।

  • वैश्विक तेल बाजार में गिरावट का दबाव, अमेरिका-ईरान कूटनीति से क्रूड प्राइस में बड़ी नरमी दर्ज

    वैश्विक तेल बाजार में गिरावट का दबाव, अमेरिका-ईरान कूटनीति से क्रूड प्राइस में बड़ी नरमी दर्ज

    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच संभावित कूटनीतिक समझौते की उम्मीदों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा बदलाव पैदा कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है और क्रूड छह सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया है। बाजार में यह गिरावट उस समय देखने को मिली है जब होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल आपूर्ति सामान्य होने की संभावनाएं मजबूत हो रही हैं और भू-राजनीतिक तनाव में कुछ नरमी के संकेत मिले हैं। इस घटनाक्रम का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर पड़ा है, जिससे निवेशकों की धारणा में बदलाव देखा जा रहा है।

    वैश्विक बाजार में अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड और अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड दोनों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह गिरावट मुख्य रूप से उस जोखिम प्रीमियम में कमी के कारण हुई है, जो लंबे समय से मध्य पूर्व में तनाव की वजह से तेल कीमतों में शामिल था। जैसे ही कूटनीतिक समाधान की संभावना बढ़ी, बाजार ने भविष्य की आपूर्ति को अधिक स्थिर मानते हुए कीमतों में कटौती शुरू कर दी।

    अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा जारी है, जिसमें सीजफायर को आगे बढ़ाने और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने जैसे मुद्दे शामिल हैं। हालांकि दोनों पक्षों की ओर से अभी अंतिम सहमति की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन संवाद की प्रक्रिया जारी रहने से बाजार में सकारात्मक संकेत बने हैं। इसी उम्मीद के चलते तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका कम हुई है और कीमतों पर दबाव बढ़ गया है।

    ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यदि यह मार्ग पूरी तरह सुरक्षित और सुचारु रूप से कार्य करने लगे, तो वैश्विक बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतों में और नरमी आ सकती है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि स्थिति पूरी तरह सामान्य होने में अभी समय लग सकता है क्योंकि कई तकनीकी और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बनी हुई हैं।

    इस बीच भारत सहित कई देशों में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर स्थिति सामान्य बनी हुई है। रिफाइनरियां पूरी क्षमता पर काम कर रही हैं और सरकार की ओर से पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के पर्याप्त भंडार बनाए रखने का दावा किया गया है। साथ ही आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाए रखने के लिए निगरानी और प्रवर्तन तंत्र को भी सक्रिय किया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की कमी या असंतुलन की स्थिति न बने।

    विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों की दिशा पूरी तरह अमेरिका-ईरान वार्ता के परिणाम और वैश्विक आपूर्ति स्थिरता पर निर्भर करेगी। यदि समझौते की दिशा में प्रगति होती है तो कीमतों में और गिरावट संभव है, जबकि किसी भी प्रकार की रुकावट या तनाव बढ़ने पर बाजार फिर से अस्थिर हो सकता है। फिलहाल बाजार कूटनीतिक संकेतों पर नजर बनाए हुए है और निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।

  • पेट्रोल-डीजल से लेकर गैस तक पर जैकी श्रॉफ का बड़ा बयान, सोशल मीडिया पर छिड़ी नई बहस

    पेट्रोल-डीजल से लेकर गैस तक पर जैकी श्रॉफ का बड़ा बयान, सोशल मीडिया पर छिड़ी नई बहस


    नई दिल्ली। अभिनेता Jackie Shroff एक बार फिर अपने अलग अंदाज और बेबाक बयान की वजह से चर्चा में आ गए हैं। इस बार उन्होंने पेट्रोल, डीजल और गैस जैसे जरूरी संसाधनों को लेकर अपनी राय जाहिर की है। वैश्विक स्तर पर बढ़ती चुनौतियों और ऊर्जा संकट को देखते हुए अभिनेता ने लोगों से ईंधन के जिम्मेदारीपूर्ण इस्तेमाल की अपील की है। उनके बयान के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं और यह चर्चा का विषय बन गया है।

    हाल के दिनों में दुनियाभर में ऊर्जा संसाधनों को लेकर चिंता लगातार बढ़ी है। कई देशों में ईंधन की उपलब्धता और कीमतों से जुड़ी चुनौतियां सामने आ रही हैं। इसी बीच जैकी श्रॉफ ने लोगों को संदेश देते हुए कहा कि परिस्थितियों को समझने की जरूरत है और संसाधनों का इस्तेमाल सोच-समझकर किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि जब जरूरी चीजें उपलब्ध हैं तो उन्हें अनावश्यक रूप से बर्बाद करने के बजाय जिम्मेदारी के साथ उपयोग करना अधिक जरूरी है।

    उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi की उस अपील का समर्थन भी किया, जिसमें ईंधन की बचत और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर दिया गया था। अभिनेता ने अपने अंदाज में यह संदेश देने की कोशिश की कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में हर व्यक्ति की छोटी जिम्मेदारी भी बड़ा असर पैदा कर सकती है। उनका यह बयान अब तेजी से लोगों के बीच चर्चा का हिस्सा बन चुका है।

    सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के बाद लोगों की प्रतिक्रियाएं भी अलग-अलग नजर आ रही हैं। कुछ लोग उनके विचारों का समर्थन कर रहे हैं और इसे जिम्मेदार सोच बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे लेकर अपनी अलग राय भी रख रहे हैं। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब जैकी श्रॉफ किसी सामाजिक मुद्दे पर खुलकर सामने आए हों। इससे पहले भी वह पर्यावरण, प्रकृति और सामाजिक विषयों पर अपने विचार व्यक्त करते रहे हैं।

    वर्कफ्रंट की बात करें तो जैकी श्रॉफ जल्द ही अपनी नई फिल्म के जरिए दर्शकों के बीच दिखाई देने वाले हैं। उनकी आगामी फिल्म को लेकर भी दर्शकों में उत्सुकता बनी हुई है। लंबे समय से अपनी अलग शैली और अभिनय के लिए पहचान बनाने वाले जैकी श्रॉफ आज भी दर्शकों के बीच खास लोकप्रियता रखते हैं। इस बार उनका बयान मनोरंजन जगत से बाहर निकलकर सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है और ईंधन बचत जैसे मुद्दे पर नई बहस को जन्म देता दिखाई दे रहा है।

  • एलपीजी और पेट्रोल-डीजल की सप्लाई स्थिर, घबराने की जरूरत नहीं

    नई दिल्ली। सरकार ने बताया है कि देश में सभी गैस रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं और एलपीजी की सप्लाई लगातार सुचारू बनी हुई है। अब तक 18,700 टन कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति की जा चुकी है, जिससे बाजार में स्थिरता बनी हुई है

    अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने जानकारी दी कि देश में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और 1 लाख से अधिक पेट्रोल पंप सामान्य रूप से काम कर रहे हैं

    सरकार सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) नेटवर्क के विस्तार पर भी जोर दे रही है। इसके तहत स्कूलों, कॉलेजों और आंगनवाड़ी किचन में पीएनजी कनेक्शन तेजी से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिल सके

    देशभर में पीएनजी कनेक्शन बढ़ाने के प्रयासों के चलते केवल एक दिन में हजारों नए कनेक्शन दिए गए हैं, जबकि मार्च के पहले तीन हफ्तों में 3.5 लाख से अधिक कनेक्शन जोड़े गए हैं

    सरकार का कहना है कि एलपीजी की सप्लाई को लेकर किसी तरह की कमी नहीं है और सप्लाई चैन को मजबूत बनाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। साथ ही, घबराहट में खरीदारी न करने की अपील भी की गई है, क्योंकि पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है

    वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भी सरकार ने भरोसा दिलाया है कि घरेलू और आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि आम जनता को किसी तरह की असुविधा न हो सरकार का दावा है कि देश में ईंधन और गैस की आपूर्ति स्थिर है और आने वाले समय में भी इसे और मजबूत किया जाएगा

  • नवरात्रि व्रत में मखाना: हल्का, पौष्टिक और ऊर्जा से भरपूर, व्रत का सर्वोत्तम आहार

    नवरात्रि व्रत में मखाना: हल्का, पौष्टिक और ऊर्जा से भरपूर, व्रत का सर्वोत्तम आहार


    नई दिल्ली । नवरात्रि के नौ दिवसीय व्रत में आहार का चुनाव बहुत मायने रखता है। आयुर्वेद और पोषण विशेषज्ञ मानते हैं कि मखाना व्रत के लिए सबसे अच्छा और सात्विक आहार है। यह हल्का आसानी से पचने वाला और पोषक तत्वों से भरपूर होता है। मखाने का सेवन शरीर को ऊर्जा देता है थकान दूर करता है और व्रत के दौरान कमजोरी नहीं होने देता। उत्तर प्रदेश कल्चरल डिपार्टमेंट के अनुसार व्रत का असली सार है आस्था अनुशासन और स्वास्थ्य का संतुलन। मखाना इस संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है।

    मखाने के स्वास्थ्य लाभ

    ऊर्जा और ताकत: मखाना में प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट पर्याप्त मात्रा में होते हैं जिससे लंबे समय तक ऊर्जा मिलती है और व्रत के दौरान भूख और कमजोरी कम लगती है। पाचन स्वास्थ्य: इसमें हाई फाइबर पाया जाता है जिससे पाचन सुधरता है कब्ज नहीं होती और पेट हल्का रहता है।

    ब्लड शुगर नियंत्रण: मखाने में कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है इसलिए यह डायबिटीज में भी फायदेमंद है। दिल और हड्डियां: पोटैशियम और मैग्नीशियम ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखते हैं जबकि कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाता है। इम्यूनिटी और त्वचा: एंटीऑक्सीडेंट से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है सूजन कम होती है और त्वचा स्वस्थ रहती है। वजन नियंत्रण: कम कैलोरी और हाई फाइबर होने के कारण यह वजन बढ़ने नहीं देता।

    व्रत में मखाने का सेवन

    मखाना को कई तरीकों से खाया जा सकता है: घी में भूनकर: कुरकुरे और स्वादिष्ट स्नैक के रूप में।
     दूध में डालकर खीर: मीठा और पौष्टिक विकल्प। सादा स्नैक: हल्का और आसानी से पचने वाला।
    इस प्रकार मखाना न सिर्फ व्रत को सात्विक और पौष्टिक बनाता है बल्कि शरीर और मन को हल्का ऊर्जा से भरपूर और स्वस्थ रखता है।