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  • रात को सोने गए अनुज ठाकुर फिर नहीं उठे, सुबह मां ने जगाया तो पता चला निधन, 30 साल की उम्र में थम गई जिंदगी

    रात को सोने गए अनुज ठाकुर फिर नहीं उठे, सुबह मां ने जगाया तो पता चला निधन, 30 साल की उम्र में थम गई जिंदगी


    नई दिल्ली। टीवी इंडस्ट्री से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। कई चर्चित धारावाहिकों में नजर आ चुके अभिनेता अनुज ठाकुर का महज 30 साल की उम्र में निधन हो गया है। उनके अचानक चले जाने से परिवार और करीबी दोस्तों के साथ टीवी जगत में भी शोक का माहौल है। रिपोर्ट के मुताबिक अनुज की मौत दौरे पड़ने के कारण हुई। सबसे दुखद बात यह रही कि रात में सोने के बाद वह दोबारा नहीं उठे। सुबह जब उनकी मां उन्हें जगाने के लिए कमरे में पहुंचीं तो परिवार को उनके निधन की जानकारी मिली।

    अनुज ठाकुर धूम मचाओ धूम बंधन साथ जनमों का बींद बनूंगा घोड़ी चढ़ूंगा और महिसागर जैसे टीवी शोज में काम कर चुके थे। कम उम्र में ही उन्होंने अभिनय की दुनिया में अपनी पहचान बनाई थी। उनके निधन की पुष्टि उनके करीबी दोस्त और कास्टिंग डायरेक्टर रूपेश सोनार ने की है। रूपेश ने सोशल मीडिया पर अनुज को याद करते हुए भावुक संदेश साझा किया और उनके साथ बिताए पुराने दिनों को याद किया।

    रूपेश सोनार के मुताबिक अनुज के निधन की खबर उन्हें 30 अक्टूबर की रात मिली थी। शुक्रवार रात करीब 8:30 बजे एक साझा दोस्त ने फोन करके उन्हें यह दुखद जानकारी दी। शुरुआत में उन्हें इस खबर पर भरोसा ही नहीं हुआ क्योंकि वह महज 10 दिन पहले अनुज से मिले थे। उस मुलाकात में अनुज काफी खुश नजर आ रहे थे और अभिनय की दुनिया में दोबारा वापसी करने की तैयारी कर रहे थे। रूपेश ने बताया कि अनुज के चेहरे पर वही उत्साह था जो उनके शुरुआती दिनों में दिखाई देता था।

    खबर मिलने के बाद रूपेश ने अनुज के भाई से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उस समय परिवार गहरे सदमे में था। इसके बाद वह शनिवार को अनुज के घर पहुंचे और परिवार से मुलाकात की। वहीं उन्हें पता चला कि अनुज को रात में दौरे पड़े थे और इसी दौरान उनका निधन हो गया। रूपेश ने बताया कि अनुज रोज सुबह जल्दी उठते थे और अपने तय रूटीन का पालन करते थे। वह सुबह करीब 4:30 बजे उठकर दिन की शुरुआत करते थे।

    घटना वाली सुबह भी उनका अलार्म करीब 4:30 बजे बजा था। जब उनकी मां उन्हें जगाने के लिए कमरे में पहुंचीं तो अनुज ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इसके बाद परिवार को पता चला कि वह अब इस दुनिया में नहीं रहे। एक सामान्य सुबह की शुरुआत होने से पहले ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। अनुज के अचानक निधन ने उनके परिजनों को गहरे सदमे में डाल दिया।

    रूपेश सोनार और अनुज ठाकुर की दोस्ती करीब 18 साल पुरानी थी। दोनों की मुलाकात बंधन साथ जनमों का शो के सेट पर हुई थी। इसके बाद उन्होंने कई अन्य धारावाहिकों में भी साथ काम किया। रूपेश अनुज को अपने छोटे भाई की तरह मानते थे। उन्होंने बताया कि अनुज हमेशा खुशमिजाज रहते थे और हर किसी से प्यार से बात करते थे। वह लोगों की मदद करने में भी आगे रहते थे। रूपेश के लिए यह स्वीकार करना बेहद मुश्किल है कि जिस दोस्त से कुछ दिन पहले मुलाकात हुई थी वह अब उनके बीच नहीं है।

    अनुज के निधन की खबर इसलिए भी ज्यादा भावुक कर रही है क्योंकि वह अपने करियर को दोबारा आगे बढ़ाने के सपने देख रहे थे। 10 दिन पहले हुई मुलाकात में उन्होंने वापसी की योजनाओं को लेकर उत्साह दिखाया था। लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि इतनी कम उम्र में उनकी जिंदगी अचानक खत्म हो जाएगी। उनके परिवार और दोस्तों के लिए यह अपूरणीय क्षति है।

  • सच बोलने की कीमत चुकानी पड़ी प्रकाश राज को, विज्ञापन बंद हुए और फिल्मों से भी हुए बाहर, पत्नी ने बयां किया दर्द

    सच बोलने की कीमत चुकानी पड़ी प्रकाश राज को, विज्ञापन बंद हुए और फिल्मों से भी हुए बाहर, पत्नी ने बयां किया दर्द


    नई दिल्ली। फिल्मी दुनिया में प्रकाश राज अपनी दमदार अदाकारी के साथ-साथ सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर बेबाक राय रखने के लिए भी पहचाने जाते हैं। वह कई बार ऐसे विषयों पर खुलकर बोल चुके हैं जिन पर मनोरंजन जगत के दूसरे कलाकार सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करने से बचते हैं। उनकी इसी स्पष्टवादिता का असर उनके पेशेवर जीवन पर भी पड़ा। अब उनकी पत्नी और कोरियोग्राफर पोनी वर्मा ने एक इंटरव्यू में प्रकाश राज के संघर्ष और उनके फैसलों से जुड़ी कई बातें साझा की हैं। पोनी के मुताबिक प्रकाश राज को अपनी बात रखने की कीमत चुकानी पड़ी। उन्हें काम मिलने में परेशानियों का सामना करना पड़ा और कई विज्ञापन तथा फिल्में भी उनके हाथ से निकल गईं। इसके बावजूद उन्होंने अपने विचारों से पीछे हटना स्वीकार नहीं किया।

    यूट्यूब चैनल प्रेमा को दिए इंटरव्यू में पोनी वर्मा ने बताया कि शुरुआत में वह प्रकाश राज की राजनीतिक और सामाजिक टिप्पणियों को लेकर काफी चिंतित रहती थीं। उन्हें डर लगता था कि लगातार खुलकर बोलने की वजह से उनके पति को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। लेकिन साल 2017 में पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता गौरी लंकेश की हत्या ने प्रकाश राज को अंदर तक झकझोर दिया। पोनी के अनुसार गौरी लंकेश प्रकाश राज की बेहद करीबी दोस्त थीं और दोनों की दोस्ती 35 साल से भी अधिक पुरानी थी। उनकी हत्या की खबर मिलने के बाद प्रकाश राज पूरी तरह टूट गए थे। हालांकि इस घटना ने उन्हें चुप रहने के बजाय अपनी आवाज और मजबूती से उठाने के लिए प्रेरित किया।

    पोनी वर्मा ने बताया कि गौरी की हत्या के बाद प्रकाश राज के मन में यह सवाल था कि आखिर कब तक डरकर रहा जा सकता है। पोनी खुद उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहती थीं। उन्हें लगता था कि लगातार राजनीतिक मुद्दों पर बोलना उनके लिए खतरा पैदा कर सकता है। लेकिन प्रकाश राज का मानना था कि गलत के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है। पोनी के मुताबिक गौरी लंकेश भी अपने विचारों पर मजबूती से खड़ी रहती थीं और उनकी हत्या ने प्रकाश राज को इस बात का अहसास कराया कि डर के कारण अपनी बात कहना बंद नहीं किया जा सकता।

    पोनी ने यह भी बताया कि प्रकाश राज की बेबाकी का असर उनके फिल्मी करियर पर पड़ा। उनके मुताबिक इंडस्ट्री में कुछ ऐसे लोग भी थे जिन्हें प्रकाश राज की राजनीतिक राय पसंद नहीं थी। उन्होंने दावा किया कि उनके विज्ञापन बंद हो गए और कुछ फिल्में भी उनसे छीन ली गईं। पोनी ने कहा कि मनोरंजन जगत में कई कलाकार अपने काम और कमाई को सुरक्षित रखने के लिए विवादित मुद्दों पर बोलने से बचते हैं। लेकिन प्रकाश राज ने अपने जमीर की आवाज को प्राथमिकता दी। उनके अनुसार प्रकाश राज का मानना है कि जब उन्हें कोई बात गलत लगती है तो उस पर चुप रहना सही नहीं है।

    गौरी लंकेश की हत्या ने उस समय पूरे देश में अभिव्यक्ति की आजादी और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर बहस छेड़ दी थी। बेंगलुरु में 2017 में उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वह अपनी निडर पत्रकारिता और सामाजिक मुद्दों पर मुखर विचारों के लिए जानी जाती थीं। उनकी मौत से प्रकाश राज भी गहरे प्रभावित हुए थे।

    पोनी वर्मा की बातों से साफ है कि प्रकाश राज के लिए सामाजिक मुद्दों पर बोलना केवल सार्वजनिक छवि का हिस्सा नहीं बल्कि उनके व्यक्तिगत विश्वास से जुड़ा फैसला है। पेशेवर नुकसान और आलोचनाओं के बावजूद उन्होंने अपनी राय रखना जारी रखा। उनके इस सफर में गौरी लंकेश की हत्या एक ऐसा मोड़ बनी जिसने उन्हें और मजबूती से अपनी बात रखने का हौसला दिया।

  • नीति टेलर का चौंकाने वाला खुलासा, फिल्म के बदले डायरेक्टर ने की गलत मांग, मां को फोन कर बयां किया दर्द

    नीति टेलर का चौंकाने वाला खुलासा, फिल्म के बदले डायरेक्टर ने की गलत मांग, मां को फोन कर बयां किया दर्द


    नई दिल्ली । टीवी की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाली एक्ट्रेस नीति टेलर ने अपने करियर से जुड़े एक परेशान करने वाले अनुभव का खुलासा किया है। अभिनेत्री ने बताया कि तेलुगू फिल्म इंडस्ट्री में काम करने के दौरान उन्हें कास्टिंग काउच जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा था। उनके मुताबिक एक फिल्म के डायरेक्टर ने अगली फिल्म में काम देने के बदले उनसे अपने साथ सोने की मांग की थी। इस बात को सुनकर नीति हैरान रह गईं और उन्हें समझ नहीं आया कि उस समय किस तरह प्रतिक्रिया दें। आखिरकार उन्होंने फोन काट दिया और डायरेक्टर का नंबर ब्लॉक कर दिया। इस घटना ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि उन्होंने फिल्मों से दूरी बनाने का फैसला कर लिया।
    नीति टेलर ने अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया कि जिस डायरेक्टर के साथ उन्होंने पहले काम किया था उसी ने उन्हें अपनी अगली फिल्म के लिए फोन किया। बातचीत के दौरान डायरेक्टर ने कथित तौर पर उनसे कहा कि इस बार फिल्म में काम करने के लिए उन्हें उसके साथ सोना होगा। नीति के लिए यह बात बेहद चौंकाने वाली थी। उन्होंने बताया कि ऐसी स्थिति में इंसान अचानक सन्न रह जाता है और उसे समझ नहीं आता कि क्या जवाब दिया जाए। उन्होंने बिना किसी बहस के फोन काट दिया और उस व्यक्ति का नंबर ब्लॉक कर दिया। इसके बाद उन्होंने अपनी मां को फोन किया और उन्हें इस घटना के बारे में बताया।
    अभिनेत्री के अनुसार इस अनुभव ने उनके मन पर गहरा असर डाला। उन्होंने कहा कि उन्हें पहले से कुछ ऐसी बातें नजर आई थीं जिनसे उन्हें संदेह हुआ था कि संबंधित डायरेक्टर दूसरी अभिनेत्रियों के साथ भी इस तरह का व्यवहार करने की कोशिश करता था। हालांकि उन्हें यह समझ नहीं आया कि वह उनके साथ ऐसी मांग करने की स्थिति तक कब पहुंच गया। नीति ने बताया कि उस समय वह इतनी हैरान और परेशान थीं कि उन्होंने इस घटना के बारे में किसी और को बताना भी उचित नहीं समझा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने संबंधित डायरेक्टर का नाम सार्वजनिक नहीं किया है।
    इस घटना के बाद नीति ने फिल्मों में काम नहीं करने का फैसला लिया। उनके खुलासे से यह बात सामने आती है कि मनोरंजन जगत में काम करने के अवसर तलाश रहे कलाकारों के लिए अनुचित मांगों का सामना करना कितना मुश्किल हो सकता है। किसी कलाकार के लिए फिल्म में भूमिका पाने की उम्मीद के बीच इस तरह की स्थिति मानसिक तनाव और असुरक्षा पैदा कर सकती है। नीति के मुताबिक उस अनुभव ने उनके फिल्मी करियर को लेकर सोच बदल दी और उन्होंने टेलीविजन के काम पर अधिक ध्यान दिया।
    नीति टेलर ने वर्ष 2012 में तेलुगू फिल्म मेम वयसुकू वाचम से फिल्मों में कदम रखा था। इस फिल्म का निर्देशन त्रिनाध राव नक्किना ने किया था और इसमें तनिष उनके साथ नजर आए थे। फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर अच्छा रिस्पॉन्स मिला था। इसके बाद वर्ष 2014 में वह लव डॉट कॉम में दिखाई दीं। इस फिल्म का निर्देशन राजा वन्नेम रेड्डी ने किया था। हालांकि फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर सफलता नहीं मिली।
    नीति ने कम उम्र में अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने टीवी शो प्यार का बंधन में काम किया और बाद में कैसी ये यारियां से काफी लोकप्रियता हासिल की। इसके अलावा वह बड़े अच्छे लगते हैं 2 और झलक दिखला जा जैसे कार्यक्रमों का हिस्सा भी रहीं। हाल के वर्षों में भी वह मनोरंजन जगत में सक्रिय रही हैं। उनका यह खुलासा एक बार फिर फिल्म इंडस्ट्री में कलाकारों की सुरक्षा और कार्यस्थल पर सम्मानजनक व्यवहार की जरूरत को चर्चा में ले आया है।
  • रातोंरात मिली शोहरत ने रजनीकांत को पहुंचाया अस्पताल, फिर फिल्मों से बनाई दूरी, शादी कर बदली जिंदगी

    रातोंरात मिली शोहरत ने रजनीकांत को पहुंचाया अस्पताल, फिर फिल्मों से बनाई दूरी, शादी कर बदली जिंदगी


    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा में सुपरस्टार का दर्जा हासिल करने वाले रजनीकांत की जिंदगी जितनी शानदार दिखाई देती है उसके पीछे संघर्ष और दबाव की एक लंबी कहानी भी है। आज करोड़ों प्रशंसकों के दिलों पर राज करने वाले रजनीकांत ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1975 में फिल्म अपूर्व रागंगल से की थी। उनका फिल्मी दुनिया से कोई पारिवारिक जुड़ाव नहीं था। उन्होंने अपनी मेहनत और अभिनय के दम पर पहचान बनाई और देखते ही देखते इंडस्ट्री के बड़े सितारों में शामिल हो गए। हालांकि तेजी से मिली सफलता और स्टारडम को संभालना उनके लिए आसान नहीं रहा। एक समय ऐसा भी आया जब काम के अत्यधिक दबाव ने उन्हें अस्पताल पहुंचा दिया।
    करियर के शुरुआती दौर में रजनीकांत ने सफलता हासिल करने के लिए दिन-रात मेहनत की। उस समय वह एक साल में 10 से 15 फिल्मों तक में काम कर रहे थे। लगातार शूटिंग और व्यस्त कार्यक्रम के बीच उन्हें आराम करने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता था। वह फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाना चाहते थे और इसके लिए लगातार काम कर रहे थे। लेकिन इतनी कम उम्र में मिली शोहरत और बड़ी जिम्मेदारियों का दबाव धीरे-धीरे बढ़ता गया। एक ओर उनका करियर तेजी से आगे बढ़ रहा था तो दूसरी ओर उनके लिए इस नई जिंदगी के साथ तालमेल बैठाना मुश्किल होता जा रहा था।
    रजनीकांत ने खुद एक इंटरव्यू में इस दौर के बारे में खुलकर बात की थी। लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 1988 में इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि वह स्टारडम का दबाव झेल नहीं पाए थे। उन्होंने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा था कि कुछ साल पहले तक वह बस कंडक्टर के तौर पर 320 रुपये कमाते थे और फिर अचानक एक फिल्म के लिए उन्हें पांच लाख रुपये मिलने लगे। कम समय में जिंदगी में आया यह बड़ा बदलाव उनके लिए आसान नहीं था। पैसा शोहरत और लगातार काम के दबाव ने उन्हें मानसिक रूप से बेहद परेशान कर दिया था।
    रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 1981 में मानसिक दबाव के कारण उनकी तबीयत इतनी बिगड़ गई कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। यह घटना उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। इस अनुभव ने उन्हें अपनी व्यस्त दिनचर्या और काम करने के तरीके पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर किया। उन्होंने महसूस किया कि सफलता हासिल करने के साथ-साथ अपनी सेहत और निजी जिंदगी पर ध्यान देना भी जरूरी है।
    अस्पताल में भर्ती होने के बाद रजनीकांत ने अपने काम करने के तरीके में बदलाव करना शुरू किया। उन्होंने पहले की तुलना में कम फिल्में करनी शुरू कर दीं ताकि काम का दबाव कम हो सके। इसके साथ ही उनकी निजी जिंदगी में भी बड़ा बदलाव आया। कुछ समय बाद उन्होंने लता रंगाचारी से शादी कर घर बसाया। दोनों की पहली मुलाकात एक इंटरव्यू के दौरान हुई थी। लता अपनी कॉलेज मैगजीन के लिए रजनीकांत का इंटरव्यू लेने पहुंची थीं। यह मुलाकात आगे चलकर रिश्ते में बदल गई।
    फिल्मों की संख्या कम करने के बावजूद रजनीकांत की लोकप्रियता पर कोई खास असर नहीं पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 1980 के आसपास वह एक फिल्म के लिए करीब 25 लाख रुपये तक फीस लेने लगे थे। यह उस समय के लिहाज से बड़ी रकम थी। उनकी कहानी बताती है कि तेजी से मिलने वाली सफलता के साथ जिम्मेदारियां और दबाव भी बढ़ सकते हैं। रजनीकांत ने अपने अनुभव से काम और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाने की जरूरत को समझा और अपनी जिंदगी की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव किए।
  • शाहरुख-काजोल से शुरू हुआ कॉफी विद करण का सफर, गोविंदा को नहीं मिला न्योता तो रेखा को बुलाने से क्यों झिझके करण

    शाहरुख-काजोल से शुरू हुआ कॉफी विद करण का सफर, गोविंदा को नहीं मिला न्योता तो रेखा को बुलाने से क्यों झिझके करण


    नई दिल्ली। करण जौहर का चर्चित टॉक शो कॉफी विद करण एक बार फिर मनोरंजन जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। फिल्मी सितारों की निजी जिंदगी से जुड़े सवालों उनके रिश्तों और करियर के अनसुने किस्सों के साथ इस शो ने टेलीविजन की दुनिया में अलग पहचान बनाई है। शो में कई बड़े कलाकार अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुके हैं लेकिन कुछ ऐसे चर्चित सितारे भी हैं जो कभी इसके मेहमान नहीं बने। गोविंदा से लेकर रेखा और श्रीदेवी तक कई नाम ऐसे हैं जिनकी गैरमौजूदगी को लेकर दर्शकों के मन में सवाल उठते रहे हैं। इस बीच शो की शुरुआत से जुड़ी कहानी भी काफी दिलचस्प है।
    कॉफी विद करण शुरू करने का विचार करण जौहर के मन में उस समय आया जब सेलिब्रिटी इंटरव्यू का अंदाज काफी औपचारिक हुआ करता था। करण चाहते थे कि सितारों से बातचीत का तरीका थोड़ा अलग हो और दर्शकों को उनके व्यक्तित्व का एक नया पहलू देखने को मिले। उनका विचार था कि दो फिल्मी सितारों को एक साथ बैठाकर उनसे दोस्ती रिश्तों और फिल्मी करियर से जुड़े दिलचस्प सवाल पूछे जाएं। इस तरह दर्शकों को मनोरंजन के साथ सितारों की जिंदगी के ऐसे किस्से जानने का मौका मिल सकता था जो आमतौर पर सामने नहीं आते।
    बताया जाता है कि जून 2004 में करण ने अपने पिता और मशहूर फिल्म निर्माता यश जौहर के सामने इस शो का विचार रखा था। शुरुआत में उनके पिता इस प्रस्ताव को लेकर बहुत उत्साहित नहीं थे। उन्होंने मजाकिया अंदाज में सवाल किया था कि जब करण अपने दोस्तों से पहले ही बातचीत करते हैं तो उसी बातचीत के लिए कोई पैसे क्यों देगा। इसके बावजूद करण ने अपने विचार पर काम जारी रखा। इसी दौरान 26 जून 2004 को यश जौहर का निधन हो गया। पिता को खोने के दुख के बीच भी करण ने अपने सपने को पूरा करने का फैसला किया।
    करण ने 16 अगस्त 2004 को शो की शूटिंग शुरू की और 19 नवंबर 2004 को इसका पहला एपिसोड स्टार वर्ल्ड इंडिया पर प्रसारित हुआ। पहले एपिसोड में शाहरुख खान और काजोल मेहमान बनकर पहुंचे थे। दोनों की दोस्ती और बेबाक बातचीत ने शो को खास शुरुआत दी। इसके बाद रैपिड फायर राउंड शो की पहचान बन गया। इस दौर में सितारों से तेजी से सवाल पूछे जाते थे और उनके जवाब कई बार मनोरंजक होने के साथ चर्चा और विवाद की वजह भी बन जाते थे।
    शो में शामिल नहीं होने वाले सितारों की बात करें तो गोविंदा का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहा है। खबरों के मुताबिक गोविंदा ने एक बार नाराजगी जताई थी कि उन्हें शो में आमंत्रित नहीं किया गया। बाद में करण जौहर ने उनसे माफी भी मांगी थी। वहीं रेखा को लेकर करण ने कहा था कि वह उनके रहस्यमयी व्यक्तित्व को बरकरार रखना चाहते हैं और उन्हें शो में बुलाने को लेकर झिझकते रहे। इससे रेखा की गैरमौजूदगी के पीछे की वजह को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ गई।
    दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी भी कभी इस शो में मेहमान बनकर नहीं आईं। करण जौहर उनके प्रशंसक रहे हैं लेकिन उनका शो में शामिल होना संभव नहीं हो पाया। इसी तरह अभिनेता इरफान खान और नवाजुद्दीन सिद्दीकी भी इस कार्यक्रम में नजर नहीं आए। फिल्म निर्माता आदित्य चोपड़ा को लेकर भी करण जौहर कह चुके हैं कि उन्हें शो में आमंत्रित करने की हिम्मत नहीं हुई। दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत भी इस शो का हिस्सा नहीं बने। हालांकि इन सभी कलाकारों के शो में न आने के पीछे एक जैसी वजह नहीं थी और हर मामले में व्यक्तिगत कारणों या आधिकारिक पुष्टि के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं होगा।
    कॉफी विद करण ने मनोरंजन के साथ विवादों के कारण भी सुर्खियां बटोरी हैं। शो में क्रिकेटर हार्दिक पंड्या और केएल राहुल की टिप्पणी के बाद बड़ा विवाद हुआ था और दोनों को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। इस घटना ने दिखाया कि मनोरंजन के मंच पर कही गई बातें भी व्यापक सार्वजनिक बहस का रूप ले सकती हैं। यही बेबाक अंदाज शो को लोकप्रिय बनाने के साथ विवादों में भी रखता आया है। करण जौहर का यह कार्यक्रम फिल्मी सितारों की दुनिया को करीब से देखने का मंच बना और इसकी शुरुआत से लेकर मेहमानों की सूची तक आज भी दर्शकों की दिलचस्पी का विषय बनी हुई है।
  • नाना पाटेकर के निधन से टूट गईं हेमा मालिनी, बोलीं एक हफ्ते पहले आया था फोन, उस वक्त बात नहीं कर पाने का रहेगा मलाल

    नाना पाटेकर के निधन से टूट गईं हेमा मालिनी, बोलीं एक हफ्ते पहले आया था फोन, उस वक्त बात नहीं कर पाने का रहेगा मलाल


    नई दिल्ली । हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर ने फिल्म इंडस्ट्री को गहरे सदमे में डाल दिया है। अपने दमदार अभिनय और अलग अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले नाना पाटेकर के जाने से उनके प्रशंसक और फिल्मी दुनिया की कई हस्तियां भावुक हैं। इस बीच दिग्गज अभिनेत्री और सांसद हेमा मालिनी ने नाना से जुड़ी एक ऐसी याद साझा की है जिसने उनके दुख को और गहरा कर दिया। हेमा मालिनी ने बताया कि नाना पाटेकर ने निधन से करीब एक सप्ताह पहले उन्हें फोन किया था लेकिन उस समय वह यात्रा कर रही थीं और कॉल नहीं उठा सकीं। अब अभिनेता के निधन के बाद उन्हें इस बात का अफसोस है कि वह उनसे उस समय बात नहीं कर पाईं।
    हेमा मालिनी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में नाना पाटेकर को याद करते हुए बताया कि कुछ दिन पहले उनकी नाना से बातचीत हुई थी। इसके बाद करीब एक सप्ताह पहले भी उनका फोन आया था लेकिन यात्रा में व्यस्त होने के कारण वह कॉल रिसीव नहीं कर सकीं। हेमा ने कहा कि जब उन्होंने नाना के निधन की खबर सुनी तो उन्हें गहरा सदमा लगा। किसी परिचित और सहकर्मी से आखिरी बार बात करने का मौका हाथ से निकल जाना अक्सर मन में कसक छोड़ जाता है। हेमा मालिनी के लिए भी यह याद अब भावुक कर देने वाली बन गई है।
    नाना पाटेकर हिंदी और मराठी फिल्मों के उन कलाकारों में शामिल रहे जिन्होंने अपनी अभिनय क्षमता से अलग पहचान बनाई। उन्होंने अपने करियर में कई तरह के किरदार निभाए और गंभीर भूमिकाओं से लेकर प्रभावशाली संवाद अदायगी तक दर्शकों के दिलों पर छाप छोड़ी। उनका अभिनय केवल लोकप्रियता तक सीमित नहीं रहा बल्कि उन्हें फिल्म जगत में एक विशिष्ट कलाकार के रूप में सम्मान मिला। हेमा मालिनी ने भी उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि हिंदी और मराठी फिल्म इंडस्ट्री ने एक बहुत बड़े अभिनेता को खो दिया है। उनके मुताबिक नाना खुद अभिनय की एक संस्था जैसे थे।
    नाना पाटेकर की पहचान सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं थी। सामाजिक कार्यों में उनकी सक्रियता भी उन्हें दूसरे कलाकारों से अलग बनाती थी। खास तौर पर किसानों और जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए किए गए उनके प्रयासों की चर्चा होती रही है। नाना पाटेकर नाम फाउंडेशन के माध्यम से किसानों की सहायता और ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरतमंद परिवारों के लिए काम करने से जुड़े रहे। हेमा मालिनी ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उनके अभिनय के साथ समाज के लिए किए गए कामों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि नाना ने अपनी प्रतिभा से फिल्म इंडस्ट्री में अलग मुकाम बनाया और जरूरतमंदों की मदद के लिए भी लगातार प्रयास किए।
    नाना पाटेकर के निधन की खबर सामने आने के बाद फिल्म जगत की कई हस्तियां उन्हें अपने तरीके से याद कर रही हैं। उनके साथ काम कर चुके कलाकारों और प्रशंसकों के लिए यह केवल एक अभिनेता को खोने का दुख नहीं बल्कि एक ऐसी शख्सियत के जाने का दर्द है जिसने अपने काम से गहरी छाप छोड़ी। हेमा मालिनी की याद ने इस दुख को एक निजी भावनात्मक पहलू भी दिया है। एक फोन कॉल जिसे उस समय सामान्य व्यस्तता के कारण नहीं उठाया जा सका अब एक अधूरी बातचीत की याद बन गया है। नाना पाटेकर का अभिनय और सामाजिक योगदान उनके प्रशंसकों के बीच लंबे समय तक याद किया जाएगा।

  • नाना पाटेकर के निधन की खबर से फिर चर्चा में आया मीटू विवाद, तनुश्री दत्ता ने तोड़ी चुप्पी, मीडिया कवरेज पर दिया बयान

    नाना पाटेकर के निधन की खबर से फिर चर्चा में आया मीटू विवाद, तनुश्री दत्ता ने तोड़ी चुप्पी, मीडिया कवरेज पर दिया बयान


    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर के बाद फिल्म इंडस्ट्री में शोक का माहौल है। इसी बीच अभिनेत्री तनुश्री दत्ता की एक सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा में आ गई है। दोनों कलाकारों के बीच साल 2018 में सामने आए विवाद के कारण तनुश्री की प्रतिक्रिया पर लोगों की नजरें टिक गई हैं। अभिनेत्री ने अपनी पोस्ट में नाना पाटेकर के निधन की खबर का जिक्र करते हुए लखनऊ में होने वाले अपने कार्यक्रम को लेकर चिंता जाहिर की। उन्होंने संकेत दिया कि इस खबर के बाद मीडिया का ध्यान उनके कार्यक्रम से हटकर उनके बयान पर केंद्रित हो सकता है। हालांकि उनकी पोस्ट को ही इस मामले पर उनकी अंतिम प्रतिक्रिया मानना जल्दबाजी होगी।

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तनुश्री दत्ता ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए नाना पाटेकर के निधन की खबर पर अपनी बात रखी। अभिनेत्री ने बताया कि उनके लिए उस दिन का कार्यक्रम काफी महत्वपूर्ण था और वह लखनऊ में एक बड़े आयोजन में हिस्सा लेने की तैयारी कर रही थीं। उन्होंने अपने दिन की योजना पहले से बना रखी थी। वह कार्यक्रम पर ध्यान देने के साथ सोशल मीडिया पर लाइव आने और अपने कंटेंट को साझा करने की तैयारी में थीं। लेकिन नाना पाटेकर के निधन की खबर सामने आने के बाद उन्हें आशंका हुई कि शाम तक मीडिया का ध्यान उनके कार्यक्रम के बजाय इस खबर और उनकी प्रतिक्रिया पर केंद्रित हो जाएगा।

    तनुश्री ने यह भी कहा कि वह इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया तभी देंगी जब उन्हें खुद समझ आएगा कि उन्हें क्या कहना चाहिए। उन्होंने नाना पाटेकर के परिवार के प्रति संवेदनाएं भी व्यक्त कीं। उनकी पोस्ट में इस्तेमाल किए गए शब्दों और पुराने विवाद की पृष्ठभूमि के कारण सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई। हालांकि अभिनेत्री के बयान को संदर्भ के साथ समझना जरूरी है क्योंकि उन्होंने अपनी ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया देने की बात बाद के लिए छोड़ी थी।

    तनुश्री दत्ता और नाना पाटेकर के बीच विवाद साल 2018 में देशभर में चर्चा का विषय बना था। उस समय तनुश्री ने आरोप लगाया था कि साल 2008 में फिल्म हॉर्न ओके प्लीज की शूटिंग के दौरान नाना पाटेकर ने उनके साथ अनुचित व्यवहार किया था। अभिनेत्री ने यह भी दावा किया था कि उन्होंने इस मामले में सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन यानी CINTAA से शिकायत की थी। इन आरोपों के सामने आने के बाद बॉलीवुड में मीटू अभियान को लेकर व्यापक बहस शुरू हो गई थी। कई महिलाओं ने अपने साथ हुए कथित उत्पीड़न के अनुभव सार्वजनिक किए थे और फिल्म इंडस्ट्री में कामकाज के माहौल पर सवाल उठे थे।

    नाना पाटेकर ने तनुश्री के आरोपों को खारिज किया था। मामले में पुलिस जांच हुई और वर्ष 2019 में सबूतों की कमी के चलते पुलिस ने इसे बंद करने की रिपोर्ट दी थी। बाद में शिकायत से संबंधित आपराधिक कार्यवाही भी अदालत में खारिज कर दी गई थी। इसलिए इस विवाद का उल्लेख करते समय आरोपों और कानूनी घटनाक्रम के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।

    नाना पाटेकर हिंदी और मराठी सिनेमा के चर्चित अभिनेताओं में शामिल रहे हैं। अपने लंबे फिल्मी करियर में उन्होंने कई यादगार भूमिकाएं निभाईं और अभिनय के दम पर अलग पहचान बनाई। उनके निधन की खबर के बीच तनुश्री दत्ता की पोस्ट ने पुराने विवाद को फिर सुर्खियों में ला दिया है। फिलहाल अभिनेत्री की टिप्पणी में अपने कार्यक्रम और मीडिया कवरेज को लेकर चिंता प्रमुख रूप से दिखाई देती है। अब आगे उनकी ओर से कोई विस्तृत बयान आता है या नहीं इस पर लोगों की नजर बनी हुई है।

  • नाना पाटेकर और मनीषा कोइराला के रिश्ते का सच, अग्नि साक्षी के राइटर ने बताया दोनों के बीच कैसी थी नजदीकी

    नाना पाटेकर और मनीषा कोइराला के रिश्ते का सच, अग्नि साक्षी के राइटर ने बताया दोनों के बीच कैसी थी नजदीकी


    नई दिल्ली। 90 के दशक में बॉलीवुड की कई जोड़ियां अपने काम के साथ साथ निजी रिश्तों को लेकर भी सुर्खियों में रही थीं। इन्हीं में अभिनेता नाना पाटेकर और अभिनेत्री मनीषा कोइराला का नाम भी अक्सर चर्चा में आता था। दोनों ने फिल्म अग्नि साक्षी में साथ काम किया था और इसी दौरान उनकी नजदीकियों को लेकर तरह तरह की चर्चाएं सामने आने लगी थीं। लंबे समय तक दोनों के कथित अफेयर की खबरें फिल्मी गलियारों में चर्चा का विषय बनी रहीं। हालांकि इन चर्चाओं की कभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई। अब अग्नि साक्षी के लेखक रणबीर पुष्प के पुराने बयान ने एक बार फिर इस किस्से को चर्चा में ला दिया है।

    रणबीर पुष्प ने नाना पाटेकर और मनीषा कोइराला के साथ काम करने के अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया था कि दोनों के बीच अच्छी दोस्ती थी। सेट पर दोनों की आपसी समझ भी काफी मजबूत थी। वे अपने किरदारों और दृश्यों को लेकर आपस में चर्चा करते थे और उनकी यह समझ पर्दे पर भी दिखाई देती थी। रणबीर के मुताबिक उन्होंने दोनों को करीब जरूर देखा लेकिन उनके रिश्ते को उन्होंने कभी रोमांटिक नजरिए से नहीं देखा था।

    जब रणबीर से सीधे पूछा गया कि क्या नाना पाटेकर और मनीषा कोइराला के बीच दोस्ती से आगे भी कोई रिश्ता था तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उन्हें ऐसा कभी महसूस नहीं हुआ। उन्होंने माना कि दोनों के बीच करीबी और गहरी समझ थी लेकिन इसे प्यार या रोमांस कहना उनके लिए सही नहीं था। रणबीर ने बताया कि दोनों कलाकार साथ काम करते समय अपने सीन को लेकर बातचीत करते थे और इसी वजह से उनकी स्क्रीन केमिस्ट्री भी काफी प्रभावी नजर आती थी।

    रणबीर ने यह भी बताया कि उस समय बाद में अखबारों और मीडिया में नाना और मनीषा के रिश्ते को लेकर कई तरह की बातें सामने आई थीं। उन्होंने उन खबरों को पढ़ा भी था लेकिन अपने अनुभव के आधार पर उन्होंने कभी दोनों के रिश्ते को उस नजरिए से नहीं देखा। उनका कहना था कि सेट पर उनका मुख्य ध्यान अपने काम पर रहता था। वह काम से जुड़े मामलों पर ध्यान देते थे और कलाकारों के निजी रिश्तों को लेकर ज्यादा गौर नहीं करते थे।

    फिल्म अग्नि साक्षी साल 1996 में रिलीज हुई थी। पार्थो घोष के निर्देशन में बनी इस साइकोलॉजिकल थ्रिलर में नाना पाटेकर मनीषा कोइराला और जैकी श्रॉफ प्रमुख भूमिकाओं में नजर आए थे। फिल्म में नाना और मनीषा की जोड़ी को दर्शकों ने देखा और इसी दौरान दोनों की ऑफस्क्रीन बॉन्डिंग को लेकर भी चर्चाएं तेज हुई थीं। वर्षों बाद भी दोनों के कथित रिश्ते का किस्सा बॉलीवुड की चर्चित कहानियों में शामिल रहा है।

    हालांकि रणबीर पुष्प का बयान यह साफ करता है कि उन्होंने दोनों के बीच मजबूत दोस्ती और अच्छी अंडरस्टैंडिंग जरूर देखी थी लेकिन उनके सामने ऐसा कोई अनुभव नहीं आया जिससे वह इसे रोमांटिक रिश्ता मान सकें। ऐसे में नाना पाटेकर और मनीषा कोइराला के बीच प्रेम संबंध की पुरानी चर्चाएं आज भी अफवाहों और अटकलों तक ही सीमित नजर आती हैं।

  • पाप का हिस्सा बनने से बचिए… हाथ जोड़कर शोभिनव सत्य ने की थी अपील अब इसी बयान पर जमकर हो रहे ट्रोल

    पाप का हिस्सा बनने से बचिए… हाथ जोड़कर शोभिनव सत्य ने की थी अपील अब इसी बयान पर जमकर हो रहे ट्रोल


    नई दिल्ली। ‘हनुमान अंश’ इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन को लेकर लगातार चर्चा में बनी हुई है। महज 2 करोड़ रुपये के बजट में तैयार हुई इस फिल्म की कमाई 300 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुकी है। फिल्म को दर्शकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है लेकिन इसी बीच फिल्म के लीड एक्टर शोभिनव सत्य का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर फिर से वायरल हो गया है। इस वीडियो में अभिनेता दर्शकों से फिल्म का पाइरेटेड वर्जन ऑनलाइन नहीं देखने की अपील करते नजर आ रहे हैं। हालांकि उनकी इस अपील में इस्तेमाल की गई पाप वाली बात कुछ यूजर्स को पसंद नहीं आई और इसके बाद सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल किया जाने लगा।

    दरअसल शोभिनव सत्य ने इसी साल अगस्त में अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर यह वीडियो शेयर किया था। वीडियो में उन्होंने सबसे पहले फिल्म को मिल रहे प्यार के लिए दर्शकों का शुक्रिया अदा किया। इसके बाद उन्होंने फिल्म की पाइरेसी को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। अभिनेता ने बताया कि फिल्म के पाइरेटेड वर्जन को बड़ी संख्या में लोग मोबाइल फोन और टीवी पर देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि मेकर्स ने फिल्म को इंटरनेट पर रिलीज नहीं किया है। इसके बावजूद कुछ लोग चोरी छिपे फिल्म को ऑनलाइन उपलब्ध करा रहे हैं और दर्शक उसे देख रहे हैं।

    शोभिनव ने अपनी बात समझाते हुए कहा था कि अगर कोई व्यक्ति इस तरह चोरी से फिल्म देखता है तो वह अनजाने में किसी दूसरे के पाप का हिस्सा बन रहा है। अभिनेता ने हाथ जोड़कर लोगों से पाइरेटेड कॉपी नहीं देखने की अपील की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर किसी ने मोबाइल पर फिल्म देख भी ली है तो उसे यह समझ आ गया होगा कि यह ऐसी फिल्म नहीं है जिसे अकेले मोबाइल की छोटी स्क्रीन पर देखने का वही अनुभव मिले जो थिएटर में मिलता है। उनके मुताबिक फिल्म को पूरे परिवार के साथ सिनेमाघर में देखने का अनुभव अलग है।

    वीडियो में शोभिनव ने यह भी जानकारी दी थी कि फिल्म की टीम अब तक करीब 600 से 700 पाइरेटेड लिंक हटवा चुकी है। रिलीज के बाद से ही मेकर्स ऑनलाइन लीक को रोकने के लिए लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। हालांकि अब जब यह पुराना वीडियो दोबारा वायरल हुआ तो फिल्म की पाइरेसी से ज्यादा अभिनेता के बयान पर चर्चा शुरू हो गई।

    सोशल मीडिया और रेडिट पर कुछ यूजर्स ने शोभिनव के पाप वाले बयान को लेकर सवाल उठाए। एक यूजर ने धार्मिक भावनाओं और फिल्म से जुड़े बिजनेस को लेकर अपनी नाराजगी जताई। वहीं दूसरे यूजर ने कहा कि पाइरेसी के खिलाफ अपील करना सही है लेकिन इसे पाप से जोड़ना उसे समझ नहीं आया। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि फिल्म की पाइरेसी रोकने की बात अपनी जगह ठीक है लेकिन धार्मिक शब्दों के इस्तेमाल से मामला अनावश्यक रूप से विवादित हो गया।

    हालांकि शोभिनव की मूल अपील का केंद्र फिल्म की पाइरेसी रोकना ही था। फिल्म की टीम का कहना है कि ऑनलाइन लीक से फिल्म के आधिकारिक कारोबार पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि टीम लगातार ऐसे लिंक हटाने की कोशिश कर रही है। दूसरी तरफ फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 60 दिनों में ‘हनुमान अंश’ ने भारत में करीब 325.48 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया है जबकि इसका वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन करीब 424.24 करोड़ रुपये बताया गया है। ऐसे में फिल्म की कमाई के साथ अब शोभिनव सत्य का पुराना वीडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा का बड़ा कारण बन गया है।

  • भारत में शांति नहीं वाले बयान पर घिरे संजय दत्त, ट्रोलिंग के बाद दी सफाई, मुन्नाभाई और गांधीगिरी से जोड़ा कनेक्शन

    भारत में शांति नहीं वाले बयान पर घिरे संजय दत्त, ट्रोलिंग के बाद दी सफाई, मुन्नाभाई और गांधीगिरी से जोड़ा कनेक्शन


    नई दिल्ली। अभिनेता संजय दत्त इन दिनों अपने एक बयान को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में वह शेखर सुमन के टॉक शो में पहुंचे थे जहां बातचीत के दौरान उन्होंने भारत में शांति और भाईचारे को लेकर अपनी बात रखी। उनकी टिप्पणी का एक हिस्सा सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आया और इसके बाद कुछ यूजर्स ने अभिनेता की आलोचना शुरू कर दी। विवाद बढ़ने के बाद अब संजय दत्त ने सोशल मीडिया के जरिए अपने बयान पर सफाई पेश की है।

    संजय दत्त ने अपनी सफाई में कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी व्यक्ति समुदाय या संस्था की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि शो में हुई बातचीत एक तय स्क्रिप्ट के संदर्भ में थी और इसका मकसद हल्का फुल्का तथा हास्यपूर्ण संवाद करना था। अभिनेता के मुताबिक उनकी बात को जिस संदर्भ में समझा गया वह उनके मूल इरादे से अलग था।

    संजय दत्त ने अपनी सफाई में अपनी चर्चित फिल्म मुन्नाभाई का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उनके बयान के पीछे वही हास्य और व्यंग्य वाली शैली थी जो मुन्नाभाई जैसी फिल्मों में दिखाई गई है। उन्होंने विशेष तौर पर गांधीगिरी की सोच का उल्लेख किया। उनके अनुसार गांधीगिरी का संदेश प्रेम एकजुटता और सद्भावना से जुड़ा हुआ है और उनकी बातचीत को भी इसी भावना के साथ समझा जाना चाहिए था।

    दरअसल शेखर सुमन के शो में संजय दत्त से देश के मौजूदा माहौल को लेकर बातचीत हुई थी। इसी दौरान अभिनेता ने कहा था कि भारत के लोग बहुत प्यारे हैं और देश में शांति होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें अब देश में पहले जैसी शांति महसूस नहीं होती। इसके साथ ही उन्होंने भारतीयों को बड़े दिल वाला और मेहमाननवाज बताया था।

    संजय दत्त ने बातचीत के दौरान यह भी कहा था कि भारत ने दुनिया को बहुत कुछ दिया है और भारतीयों को आगे भी अपनी इसी भावना को बनाए रखना चाहिए। उन्होंने भगवान शिव से प्रार्थना करते हुए उम्मीद जताई थी कि देश में शांति और भाईचारे का माहौल फिर से लौटेगा। हालांकि उनके बयान के एक हिस्से को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।

    विवाद के बाद अभिनेता ने अपनी बात का संदर्भ समझाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणी का उद्देश्य किसी का अपमान करना या किसी समुदाय के प्रति अनादर दिखाना नहीं था। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बातचीत के हास्यपूर्ण संदर्भ को अलग करके देखने की वजह से उनकी बात का अर्थ बदल गया।

    संजय दत्त के लिए मुन्नाभाई फ्रेंचाइजी से जुड़ा गांधीगिरी वाला किरदार और संदेश काफी महत्वपूर्ण रहा है। फिल्मों में उनके किरदार के जरिए हिंसा और टकराव के बजाय प्रेम और शांति से समस्याओं का सामना करने की बात दिखाई गई थी। यही वजह है कि अभिनेता ने अपने हालिया बयान की सफाई देते समय इसी फिल्म और उसके संदेश का उदाहरण दिया।

    इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह दिखाया है कि सार्वजनिक मंच पर कही गई किसी बात का छोटा सा हिस्सा भी सोशल मीडिया पर अलग संदर्भ में तेजी से फैल सकता है। संजय दत्त ने विवाद बढ़ने के बाद अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी मंशा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने की नहीं थी। अब उनकी सफाई के बाद इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा किस दिशा में जाती है यह देखने वाली बात होगी।