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  • ‘धुरंधर’ को लेकर कमल जैन ने की तारीफ बोले यह फिल्म दर्शकों को खींचने वाला सिनेमाई अनुभव

    ‘धुरंधर’ को लेकर कमल जैन ने की तारीफ बोले यह फिल्म दर्शकों को खींचने वाला सिनेमाई अनुभव


    फिल्म ‘मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी’ के निर्माता कमल जैन ने अपनी नई फिल्म ‘धुरंधर’ को लेकर बेहद सकारात्मक राय व्यक्त की है। उनके अनुसार ‘धुरंधर’ केवल एक फिल्म नहीं बल्कि एक ऐसा सिनेमाई अनुभव है जो दर्शकों को न सिर्फ जोड़ता है बल्कि उन्हें पूरी तरह से अपनी कहानी में खींच लेता है। उन्होंने इसे एक ऐसा प्रोजेक्ट बताया है जो दर्शकों के देखने के नजरिए को बदलने की क्षमता रखता है।

    कमल जैन का मानना है कि असली सफलता सिर्फ एक अच्छी कहानी से नहीं आती, बल्कि उसमें मौजूद उस खास जादू से आती है जो दर्शकों को बांधकर रखता है। उन्होंने कहा कि ‘मैजिक ही असल में बिकता है’ और यही वह तत्व है जो किसी फिल्म को सामान्य से अलग बनाता है। उनके अनुसार ‘धुरंधर’ में वही दुर्लभ जादू मौजूद है, जिसे हमने पहले भी ‘दीवार’, ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’, ‘भाग मिल्खा भाग’, ‘एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’, ‘विकी डोनर’ और ‘संजू’ जैसी फिल्मों में देखा है।

    उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि इस तरह के जादू के लिए जरूरी है कि फिल्म के क्रिएटर्स की सोच और इरादे मजबूत हों। जब प्रोड्यूसर की व्यावसायिक दृष्टि और निर्देशक की रचनात्मक सोच एक साथ मिलकर काम करती हैं, तब एक बेहतरीन सिनेमाई अनुभव तैयार होता है। ‘धुरंधर’ इसी तरह की मजबूत सिनर्जी का उदाहरण है, जहां कहानी, निर्देशन और प्रस्तुति एक दूसरे के साथ तालमेल बनाते हैं।

    कमल जैन ने यह भी कहा कि आज के दौर में जब दुनिया पूरी तरह से कनेक्टेड है, तब फिल्में सिर्फ दर्शकों तक पहुंचती नहीं बल्कि उन्हें सिनेमाघरों तक खींचने की क्षमता भी रखती हैं। ‘धुरंधर’ भी इसी तरह का प्रभाव छोड़ने में सक्षम दिखाई देती है, जो दर्शकों को थिएटर तक आकर्षित करने का दम रखती है।

    उन्होंने फिल्म की टीम की भी सराहना की और कहा कि इसमें मेकर्स की स्पष्टता और मजबूत सोच साफ दिखाई देती है। आदित्य की लेखनी, निर्देशन, संगीत और कलाकारों का प्रदर्शन कहानी को और गहराई प्रदान करता है। साथ ही ज्योति देशपांडे की मजबूत मार्केटिंग और वितरण रणनीति ने इसे एक बड़े सिनेमाई प्रोजेक्ट में बदल दिया है।

    कमल जैन के अनुसार जब कंटेंट खुद बोलने लगता है और दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बन जाता है, तब वह केवल एक फिल्म नहीं रहता बल्कि एक प्रभावशाली अनुभव बन जाता है। यही ‘धुरंधर’ की खासियत है, जो कहानी कहने की कला को एक नई ऊंचाई पर ले जाती है।

     कमल जैन की राय के अनुसार ‘धुरंधर’ एक ऐसी फिल्म है जो सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि दर्शकों के दिल और दिमाग दोनों को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। यह फिल्म उस स्तर पर खड़ी दिखाई देती है जहां कला, कहानी और प्रस्तुति का संगम एक यादगार अनुभव तैयार करता है
  • अश्लीलता के आरोप में ‘सरके चुनर’ गाना घिरा विवाद में महिला आयोग ने जारी किया समन

    अश्लीलता के आरोप में ‘सरके चुनर’ गाना घिरा विवाद में महिला आयोग ने जारी किया समन


    नई दिल्ली: फिल्म ‘KD The Devil’ के आइटम नंबर ‘सरके चुनर तेरी सरके’ को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। यह गाना अब सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसकी गूंज अब राजनीतिक और कानूनी गलियारों तक पहुंच चुकी है। गाने की सामग्री को लेकर उठे सवालों के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त कदम उठाया है।

    रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय महिला आयोग ने गाने को उत्तेजक और आपत्तिजनक करार देते हुए कहा है कि इसकी सामग्री भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करती प्रतीत होती है। आयोग का कहना है कि इस तरह की सामग्री समाज में गलत संदेश देती है और विशेषकर महिलाओं की गरिमा को प्रभावित करती है।

    इसी के चलते आयोग ने फिल्म से जुड़े प्रमुख लोगों को नोटिस जारी किया है। इसमें अभिनेता संजय दत्त, अभिनेत्री नोरा फतेही और फिल्म के निर्देशक को आयोग के समक्ष पेश होने के लिए कहा गया है। सभी को 24 मार्च को दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर संबंधित व्यक्ति निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं होते हैं तो उनके खिलाफ कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

    इस पूरे मामले में गाने को लेकर सोशल मीडिया पर भी काफी विरोध देखने को मिला है। आलोचकों का कहना है कि गाने के बोल और प्रस्तुति अश्लीलता की सीमा को पार करते हैं। बढ़ते विवाद के बाद फिल्म के हिंदी वर्जन को कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाया भी जा चुका है।

    वहीं अभिनेत्री नोरा फतेही ने इस मामले पर अपनी सफाई देते हुए कहा है कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि हिंदी वर्जन में गाना इस तरह से पेश किया जाएगा। उनके अनुसार गाने की शूटिंग कन्नड़ वर्जन के लिए की गई थी और हिंदी वर्जन के कंटेंट की जानकारी उन्हें पहले से नहीं दी गई थी। उन्होंने यह भी कहा है कि वह इस गाने का प्रचार नहीं करेंगी।

    इससे पहले यह मामला संसद तक भी पहुंच चुका है, जहां केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री ने स्पष्ट किया था कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर अश्लील या आपत्तिजनक सामग्री को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी के तहत संबंधित गाने पर कार्रवाई करते हुए इसे प्रतिबंधित भी किया गया है।

    कुल मिलाकर ‘सरके चुनर’ गाना अब एक बड़े विवाद का केंद्र बन चुका है, जहां एक ओर रचनात्मक स्वतंत्रता और दूसरी ओर सामाजिक जिम्मेदारी के बीच बहस तेज हो गई है। आने वाले दिनों में इस मामले में क्या निर्णय सामने आता है, यह देखना अहम होगा और यह तय करेगा कि इस तरह के कंटेंट पर आगे किस तरह की सख्ती बरती जाएगी

  • ऐपल का 2026 मेगा प्लान: 50वें जन्मदिन पर 20 से ज्यादा नए प्रोडक्ट्स, फोल्डेबल आईफोन से Apple Glasses तक रिपोर्ट

    ऐपल का 2026 मेगा प्लान: 50वें जन्मदिन पर 20 से ज्यादा नए प्रोडक्ट्स, फोल्डेबल आईफोन से Apple Glasses तक रिपोर्ट

    नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर अपने बेबाक और विवादित बयानों के लिए पहचाने जाने वाले हिंदुस्तानी भाऊ उर्फ विकास पाठक एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अभिनेत्री जया बच्चन के पपराजी को लेकर दिए गए बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। हिंदुस्तानी भाऊ ने जया बच्चन की टिप्पणी को अपमानजनक बताते हुए पपराजी से अपील की है कि वे उन जगहों पर कवरेज न करें, जहां उन्हें सम्मान नहीं दिया जाता।दरअसल, हाल ही में जया बच्चन ने वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त के चर्चित शो वी द वुमन में पपराजी को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि मीडिया से उनके संबंध अच्छे हैं, लेकिन पपराजी से नहीं। जया बच्चन ने पपराजी के व्यवहार और पहनावे पर सवाल उठाते हुए कहा था कि सिर्फ मोबाइल फोन होने का मतलब यह नहीं कि कोई भी किसी की तस्वीर खींच सकता है या मनचाहे कमेंट कर सकता है।जया बच्चन के इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। कुछ लोगों ने उनके बयान को निजता से जोड़कर सही ठहराया, तो वहीं कई यूजर्स ने इसे पपराजी का अपमान बताया। इसी बीच हिंदुस्तानी भाऊ ने इस मुद्दे पर खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की।

    एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान हिंदुस्तानी भाऊ ने जया बच्चन के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पपराजी की वजह से ही कई कलाकार और सार्वजनिक हस्तियां चर्चा में बनी रहती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पपराजी ही पहचान दिलाते हैं, तो फिर उनके साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जाता है।हिंदुस्तानी भाऊ ने कहा,उन्होंने कपड़ों पर कमेंट किया। अमिताभ बच्चन की पत्नी जया बच्चन खुद सस्ती साड़ी पहनती हैं और दूसरों को गरीब बोलती हैं। ऐसे लोगों के पीछे क्यों जाते हो, जहां आपकी इज्जत नहीं होती।

    उन्होंने पपराजी से हाथ जोड़कर अपील करते हुए कहा कि आत्मसम्मान सबसे जरूरी है और जहां सम्मान न मिले, वहां जाना ही नहीं चाहिए। भाऊ ने कहा कि पपराजी की मेहनत से ही कई सेलिब्रिटीज जनता के बीच बने रहते हैं।उन्होंने आगे कहा,आप लोगों की वजह से ही ये लोग दिखते हैं। अगर आप इन्हें दिखाना बंद कर दो, तो कोई इन्हें जानता भी नहीं। जहां इज्जत न मिले, वहां मत जाओ। आप लोग ही इन्हें बनाते हो।हिंदुस्तानी भाऊ ने यह भी कहा कि अगर पपराजी एकजुट होकर ऐसे लोगों को कवरेज देना बंद कर दें, तो उन्हें अपनी गलती का एहसास जरूर होगा। उन्होंने इसे सिर्फ पेशे का नहीं, बल्कि आत्मसम्मान का सवाल बताया।

    दूसरी ओर, जया बच्चन के बयान को लेकर सोशल मीडिया पर पहले से ही तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ यूजर्स का कहना है कि सेलिब्रिटीज को भी निजता का अधिकार है, जबकि कई लोगों का मानना है कि सार्वजनिक जीवन में रहने वालों को आलोचना और कैमरों का सामना करना पड़ता है।जया बच्चन ने शो में कहा था,पपराजी को लगता है कि मोबाइल कैमरा होने से वे किसी के घर में चूहे की तरह घुस सकते हैं। वे जैसे कपड़े पहनते हैं और जैसे कमेंट करते हैं, वह मुझे बिल्कुल पसंद नहीं।इस पूरे विवाद के बाद एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि सेलिब्रिटीज और पपराजी के बीच रिश्तों की सीमाएं क्या होनी चाहिए और सम्मान दोनों पक्षों से कितना जरूरी है। फिलहाल, हिंदुस्तानी भाऊ का बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस मुद्दे पर खुलकर अपनी-अपनी राय रख रहे हैं।

  • पाकिस्तान में बढ़ता फर्जी शादियों का ट्रेंड, युवाओं के लिए सिर्फ मनोरंजन का जरिया..

    पाकिस्तान में बढ़ता फर्जी शादियों का ट्रेंड, युवाओं के लिए सिर्फ मनोरंजन का जरिया..


    नई दिल्ली /पाकिस्तान में हाल ही में एक नया ट्रेंड उभरकर सामने आया है-फर्जी शादियां। इन शादियों में हिस्सा लेने वाले युवा केवल मनोरंजन और सामाजिक अनुभव के लिए शादी करते हैं। इसमें कोई भी पारिवारिक दबाव या जीवन भर की जिम्मेदारी नहीं होती। यह ट्रेंड खासकर शहरों और विश्वविद्यालयों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

    शादी दक्षिण एशियाई समाज में हमेशा से एक बड़ा उत्सव रही है। भारत और पाकिस्तान में शादी का आयोजन कई दिनों तक चलता है, जिसमें हल्दी, मेहंदी, संगीत और विदाई जैसी रस्में शामिल होती हैं। पारंपरिक शादियों में दूल्हा-दुल्हन के अलावा परिवार और समाज की जिम्मेदारियां भी बड़ी होती हैं। लेकिन फर्जी शादियों में इसका उल्टा माहौल होता है-युवाओं को केवल अनुभव और मनोरंजन का अवसर मिलता है।पाकिस्तान में इस ट्रेंड की शुरुआत लाहौर यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज से हुई। वहां दो छात्राओं ने एक फर्जी शादी का आयोजन किया, जिसमें शादी की सारी रस्में और सजावट वही थी जो असली शादी में होती हैं। सोशल मीडिया पर इस शादी के वीडियो वायरल होने के बाद पूरे देश में ध्यान खींचा गया। युवाओं में इसे लेकर उत्सुकता और उत्साह बढ़ा।

    हालांकि, इस घटना ने विरोध भी खड़ा किया। कुछ लोगों ने इसे समलैंगिक विवाह समझकर आपत्ति जताई। वीडियो वायरल होने के बाद दुल्हन बनने वाली छात्रा को ऑनलाइन ट्रोलिंग और आलोचना का सामना करना पड़ा। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्रों की सुरक्षा और निजता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए। सबसे पहले वीडियो और फोटो को ऑनलाइन पोस्ट करने पर रोक लगा दी गई। साथ ही केवल उन लोगों को ही इस आयोजन में आने की अनुमति दी जाने लगी, जो इसे केवल मनोरंजन के रूप में लेते हों।

    फर्जी शादी में दुल्हन बनने वाली छात्रा के परिवार को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसके विपरीत, दूल्हा बनी छात्रा का परिवार इस पूरे मामले में अपेक्षाकृत शांत रहा। इस अनुभव के बावजूद, इस ट्रेंड ने युवाओं में लोकप्रियता हासिल की और कई समूहों ने इसे व्यवस्थित रूप से आयोजित करना शुरू कर दिया।एक ऐसा ही समूहहुनर क्रिएटिव मार्केट है, जिसकी संस्थापक रिदा इमरान ने महिलाओं के लिए विशेष फर्जी शादियों और मेहंदी पार्टियों का आयोजन किया। इसमें कारीगरों, कलाकारों, कंटेंट क्रिएटर्स और इवेंट मैनेजर्स ने हिस्सा लिया। इस तरह की घटनाएं खासतौर पर उन लोगों के लिए वरदान साबित हुईं जो पारंपरिक शादियों की थकावट और सामाजिक दबाव के कारण शादी का असली आनंद नहीं ले पाते।

    फर्जी शादियों का यह ट्रेंड युवा पीढ़ी में खुद को व्यक्त करने और सामाजिक अनुभव का मज़ा लेने का एक नया तरीका बन गया है। इसमें विवाह के वास्तविक दायित्वों की कमी होने के बावजूद लोग शादी की रस्मों, उत्सव और उत्साह का आनंद ले सकते हैं।पाकिस्तान में फर्जी शादियों का यह चलन यह दिखाता है कि समाज में नई पीढ़ी पारंपरिक धारणाओं और सामाजिक दबावों से हटकर, स्वतंत्र और रचनात्मक तरीके से अपनी खुशियों का अनुभव करना चाहती है। यह केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि युवाओं के लिए सामाजिक और सांस्कृतिक प्रयोग का एक नया रूप बन चुका है।