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  • चर्चा में सांसद हनुमान बेनीवाल का परिवार, सरपंच चुनाव में छोटी भाभी ने बड़ी भाभी को हराया

    चर्चा में सांसद हनुमान बेनीवाल का परिवार, सरपंच चुनाव में छोटी भाभी ने बड़ी भाभी को हराया


    नागौर। राजस्थान के पंचायती राज चुनाव में नागौर जिले के बरण गांव का सरपंच चुनाव चर्चा का विषय बन गया है। यहां राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के परिवार से जुड़ी दो महिला प्रत्याशियों के बीच मुकाबला हुआ। सांसद की छोटी भाभी राजबाला पत्नी प्रेमसुख बेनीवाल ने 982 वोट हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि बड़ी भाभी मीरा पत्नी स्वर्गीय रामप्रसाद बेनीवाल को महज 21 वोट मिले। चुनाव परिणाम के साथ ही हनुमान बेनीवाल के मतदान करने नहीं पहुंचने की बात भी चर्चा में है।

    छोटी भाभी को 982 वोट, बड़ी भाभी को मिले 21

    बरण गांव में सरपंच पद के लिए छह महिला प्रत्याशी मैदान में थीं। इनमें राजबाला और मीरा के बीच मुकाबले को लेकर खास चर्चा रही। घोषित नतीजों के मुताबिक, राजबाला ने 982 वोट हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि मीरा को केवल 21 वोट मिले। दोनों प्रत्याशियों को मिले मतों का बड़ा अंतर गांव की चुनावी चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।

    राजबाला की जीत के बाद सांसद के परिवार में छोटी भाभी की चुनावी सफलता सुर्खियों में आ गई, वहीं मीरा को मिले बेहद कम वोटों ने भी लोगों का ध्यान खींचा। हालांकि, परिणाम से मतदाताओं के फैसले के पीछे के कारणों का अपने आप निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

    राजनीतिक विरासत के बावजूद मीरा को मिले सिर्फ 21 वोट

    इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा मीरा को मिले 21 वोटों की हो रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनके पति स्वर्गीय रामप्रसाद बेनीवाल लंबे समय तक राजनीति में सक्रिय रहे थे। इसके बावजूद सरपंच पद के चुनाव में मीरा को बहुत कम मत मिले।

    दूसरी ओर, राजबाला को 982 वोट मिले। दोनों प्रत्याशियों के बीच मतों का यह अंतर स्थानीय चुनावी समीकरणों और मतदाताओं की पसंद को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, इस अंतर के पीछे क्या वजह रही, इसे लेकर कोई पुष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

    हनुमान बेनीवाल ने नहीं किया मतदान, नाराजगी की चर्चा

    चुनाव के दौरान सांसद हनुमान बेनीवाल के मतदान नहीं करने की बात भी चर्चा में रही। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि परिवार के सदस्यों के चुनाव लड़ने से वह नाराज थे और पारिवारिक राजनीति से दूरी बनाए रखना चाहते थे। यह भी चर्चा है कि उनकी इच्छा थी कि परिवार के सदस्यों के बजाय गांव के अन्य लोग चुनाव मैदान में उतरें।

    हालांकि, बेनीवाल के मतदान नहीं करने के पीछे नाराजगी को वजह बताए जाने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इस मामले में उनका आधिकारिक बयान सामने आने पर ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    सरपंच चुनाव के नतीजे से बढ़ी चर्चा

    बरण गांव का यह चुनाव सरपंच पद की जीत-हार से आगे बढ़कर सांसद हनुमान बेनीवाल के परिवार से जुड़े घटनाक्रम के कारण चर्चा में आ गया है। एक ही परिवार की दो महिला प्रत्याशियों के अलग-अलग नतीजों और सांसद के मतदान नहीं करने की बात ने राजनीतिक हलकों में लोगों का ध्यान खींचा है।

    राजबाला की जीत के साथ गांव को नई सरपंच मिली है, जबकि मीरा की हार और दोनों को मिले वोटों के बड़े अंतर पर चर्चा जारी है। राजस्थान में शनिवार को पहले चरण के तहत सरपंच पद के चुनाव हुए थे। मतदान के बाद शाम को मतगणना की गई और नतीजे घोषित कर दिए गए।

  • अनिरुद्ध रविचंदर और काव्या मारन की शादी की चर्चाओं के बीच जानिए संगीतकार के परिवार, माता-पिता और रजनीकांत से खास रिश्ते की पूरी जानकारी

    अनिरुद्ध रविचंदर और काव्या मारन की शादी की चर्चाओं के बीच जानिए संगीतकार के परिवार, माता-पिता और रजनीकांत से खास रिश्ते की पूरी जानकारी

    नई दिल्ली । तमिल फिल्म इंडस्ट्री के लोकप्रिय संगीतकार अनिरुद्ध रविचंदर इन दिनों काव्या मारन के साथ अपनी शादी को लेकर चर्चा में हैं। काव्या मारन सनराइजर्स हैदराबाद की मालकिन के रूप में जानी जाती हैं। दोनों की शादी को लेकर सामने आ रही खबरों के बीच अनिरुद्ध के परिवार को लेकर भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई है। अनिरुद्ध का परिवार दक्षिण भारतीय सिनेमा से गहराई से जुड़ा हुआ है। उनके पिता अभिनेता हैं, मां शास्त्रीय नृत्य से जुड़ी हैं और परिवार का संबंध सुपरस्टार रजनीकांत से भी है।

    शादी को लेकर क्या है चर्चा?

    सामने आई जानकारी के मुताबिक, अनिरुद्ध रविचंदर और काव्या मारन की शादी 11 नवंबर 2026 को ग्रीस में होने की चर्चा है। यह भी दावा किया गया है कि शादी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय को निमंत्रण भेजा गया है। हालांकि, शादी से जुड़ी इन जानकारियों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। ऐसे में समारोह की तारीख और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार करना जरूरी है। फिलहाल इस संभावित शादी को लेकर प्रशंसकों के बीच उत्सुकता बनी हुई है।

    रवि राघवेंद्र हैं अनिरुद्ध के पिता

    अनिरुद्ध रविचंदर के पिता रवि राघवेंद्र तमिल फिल्मों और टेलीविजन की दुनिया के जाने-पहचाने अभिनेता हैं। अभिनय के क्षेत्र में उनकी अपनी पहचान है। मनोरंजन जगत से जुड़े परिवार में पले-बढ़े अनिरुद्ध ने संगीत की दुनिया में अलग मुकाम बनाया है। उनके पिता का अभिनय से जुड़ा अनुभव परिवार की उस पृष्ठभूमि को दर्शाता है, जिसका संबंध लंबे समय से दक्षिण भारतीय मनोरंजन उद्योग से रहा है।

    मां लक्ष्मी रविचंदर हैं शास्त्रीय नृत्यांग
    ना
    अनिरुद्ध की मां लक्ष्मी रविचंदर पेशे से शास्त्रीय नृत्यांगना हैं। इस तरह उनके परिवार में अभिनय के साथ-साथ कला और संगीत से जुड़ी परंपरा भी मौजूद है। अनिरुद्ध ने फिल्म संगीत के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। उनके परिवार के सदस्यों की अलग-अलग कलात्मक गतिविधियां उन्हें दक्षिण भारतीय मनोरंजन जगत से जोड़ती हैं।

    बहन वैष्णवी और परिवार के दूसरे सदस्य
    अनिरुद्ध रविचंदर की एक बहन भी हैं, जिनका नाम वैष्णवी है। उनके परिवार में अन्य सदस्य भी फिल्म जगत से जुड़े हुए हैं। अनिरुद्ध की बुआ लता रजनीकांत हैं, जिनकी शादी सुपरस्टार रजनीकांत से हुई है। इस रिश्ते के कारण रजनीकांत अनिरुद्ध के फूफा लगते हैं। रजनीकांत दक्षिण भारतीय सिनेमा के सबसे चर्चित अभिनेताओं में शामिल हैं और उनका परिवार भी फिल्म निर्माण से जुड़ा रहा है।

    ऐश्वर्या और सौंदर्या रजनीकांत हैं चचेरी बहनें
    रजनीकांत और लता रजनीकांत की बेटियां ऐश्वर्या रजनीकांत और सौंदर्या रजनीकांत अनिरुद्ध की चचेरी बहनें हैं। दोनों फिल्म निर्माण और निर्देशन के क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं। इस तरह अनिरुद्ध का पारिवारिक संबंध अभिनय, निर्देशन, नृत्य और संगीत जैसे मनोरंजन जगत के विभिन्न क्षेत्रों से है। हालांकि, अनिरुद्ध ने अपनी पहचान मुख्य रूप से संगीतकार के रूप में बनाई है।

    काव्या मारन से रिश्ते को लेकर भी चर्चा
    अनिरुद्ध और काव्या मारन के रिश्ते को लेकर यह भी चर्चा है कि दोनों के बीच संबंध आगे बढ़ने में रजनीकांत की भूमिका रही है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। काव्या मारन क्रिकेट जगत में अपनी भूमिका के कारण जानी जाती हैं, जबकि अनिरुद्ध तमिल फिल्मों के संगीतकार के तौर पर लोकप्रिय हैं। दोनों की संभावित शादी को लेकर प्रशंसकों की निगाहें अब आगे आने वाली आधिकारिक जानकारी पर टिकी हैं।

  • अगले 33 दिन 6 राशियों के लिए खास, गुरु की कृपा से धन, करियर और परिवार में बदलाव के संकेत

    अगले 33 दिन 6 राशियों के लिए खास, गुरु की कृपा से धन, करियर और परिवार में बदलाव के संकेत


    नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष में देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान, सौभाग्य, धर्म, विस्तार और धन का कारक माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, गुरु की स्थिति में बदलाव का असर सभी 12 राशियों पर पड़ता है। वर्तमान में गुरु चंद्रमा की राशि में विराजमान हैं, जिससे अगले 33 दिनों का समय वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक, धनु और मीन राशि के जातकों के लिए खास माना जा रहा है।

    ज्योतिषीय गणनाओं के मुताबिक, चंद्रमा की राशि में गुरु का संचरण मानसिक शांति, आर्थिक मजबूती और विचारों में बदलाव से जुड़ा माना जाता है। इस अवधि में अटके काम आगे बढ़ने और जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव के योग बताए जा रहे हैं।

    वृषभ राशि: आर्थिक स्थिति में सुधार
    वृषभ राशि के जातकों के लिए अगले 33 दिन आर्थिक लिहाज से अनुकूल माने जा रहे हैं। आय के नए रास्ते खुल सकते हैं और कहीं पैसा अटका हुआ है तो उसके वापस मिलने की संभावना बन सकती है। परिवार के साथ धार्मिक यात्रा का योग भी बन सकता है।

    कर्क राशि: नौकरी में नई जिम्मेदारी
    कर्क राशि वालों पर गुरु की विशेष कृपा रहने की ज्योतिषीय मान्यता है। इस दौरान आत्मविश्वास बढ़ सकता है और सामाजिक प्रतिष्ठा में भी वृद्धि के संकेत हैं। नौकरीपेशा लोगों को कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारी या प्रमोशन मिल सकता है। कारोबार करने वालों को भी लाभ के अवसर मिल सकते हैं।

    कन्या राशि: करियर और पढ़ाई में प्रगति
    कन्या राशि के जातकों के लिए यह अवधि करियर और शिक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को सफलता मिलने के योग बताए जा रहे हैं। निवेश के लिए भी यह समय अनुकूल माना गया है और इससे भविष्य में लाभ मिलने की संभावना जताई गई है।

    वृश्चिक राशि: अटके काम होंगे पूरे
    वृश्चिक राशि के जातकों के जीवन में चल रही परेशानियां और उथल-पुथल कम होने के संकेत हैं। गुरु की कृपा से लंबे समय से अटके कामों में गति आ सकती है। वैवाहिक जीवन में मधुरता बढ़ सकती है और जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। स्वास्थ्य के लिहाज से भी सुधार के संकेत बताए जा रहे हैं।

    धनु राशि: कारोबार में विस्तार के योग
    धनु राशि के स्वामी स्वयं बृहस्पति हैं। इसलिए ज्योतिषीय मान्यता में गुरु का यह गोचर इस राशि के लिए विशेष माना जाता है। कारोबार में विस्तार के नए अवसर मिल सकते हैं। भाग्य का साथ मिलने से आर्थिक स्थिति मजबूत होने और मानसिक शांति मिलने के योग हैं।

    मीन राशि: सफलता और पारिवारिक सुख
    मीन राशि के जातकों के लिए अगले 33 दिन शुभ परिणाम देने वाले माने जा रहे हैं। नौकरी और व्यवसाय में सफलता के अवसर बन सकते हैं। पारिवारिक जीवन में खुशहाली आने के साथ घर-परिवार के लोगों के साथ अच्छा समय बिताने का मौका मिलेगा।

    ज्योतिषीय मान्यता क्या कहती है?
    ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति को शुभ ग्रहों में प्रमुख स्थान दिया गया है और इसे ज्ञान, धन, शिक्षा, संतान, धर्म तथा विस्तार से जोड़ा जाता है। इसी आधार पर गुरु की अनुकूल स्थिति को इन छह राशियों के लिए आर्थिक, करियर और पारिवारिक मामलों में सकारात्मक बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, ये ज्योतिषीय मान्यताएं हैं; इनके आधार पर होने वाले परिणामों को निश्चित भविष्यवाणी नहीं माना जा सकता।

  • छतरपुर में अंतिम संस्कार में जा रहे परिवार की बोलेरो ट्रक से टकराई, पांच लोगों की मौत, बच्चों के सिर से उठा माता-पिता का साया

    छतरपुर में अंतिम संस्कार में जा रहे परिवार की बोलेरो ट्रक से टकराई, पांच लोगों की मौत, बच्चों के सिर से उठा माता-पिता का साया

    मध्य प्रदेश: के छतरपुर जिले में शनिवार शाम एक भीषण सड़क हादसे में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की मौत हो गई। चौका गांव के पास बोलेरो और ट्रक के बीच जोरदार टक्कर हो गई। दुर्घटना में तीन महिलाओं समेत पांच लोगों की जान चली गई, जबकि बोलेरो चालक गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। परिवार के पांच सदस्यों की एक साथ मौत से क्षेत्र में शोक का माहौल है।

    जानकारी के अनुसार, बोलेरो में चालक समेत कुल छह लोग सवार थे। सभी लोग एक पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जा रहे थे। इसी दौरान चौका गांव के नजदीक बोलेरो की ट्रक से टक्कर हो गई। टक्कर इतनी तेज थी कि बोलेरो बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें सवार लोग वाहन के भीतर फंस गए। दुर्घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय लोगों ने तत्काल राहत और बचाव का प्रयास शुरू किया।

    हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान बिजावर निवासी दौलत रैकवार, उनकी पत्नी बीना रैकवार, श्याम बाई रैकवार, संजय रैकवार और कौशल्या रैकवार के रूप में हुई है। दुर्घटना में बोलेरो चालक छोटू रैकवार की जान बच गई, लेकिन उसे गंभीर चोटें आई हैं। घायल चालक को तत्काल उपचार के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया गया। हालत गंभीर होने के कारण चिकित्सकों ने उसे आगे के इलाज के लिए ग्वालियर रेफर कर दिया।

    घटना की सूचना मिलते ही मातगुवां पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच गई। इसके बाद दुर्घटनाग्रस्त वाहन में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया। पुलिस ने मृतकों के शवों को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। हादसे के बाद घटनास्थल पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग एकत्र हो गए। दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है।

    बताया जा रहा है कि परिवार के लोग एक अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए जा रहे थे। मृतक दौलत रैकवार की बेटी अलका का विवाह पिछले वर्ष छतरपुर जिले के बगौता गांव में हुआ था। हाल ही में अलका के ससुर का निधन हो गया था। इसी वजह से परिवार के सदस्य अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए जा रहे थे। लेकिन रास्ते में चौका गांव के पास हुए हादसे ने परिवार की खुशियों और उम्मीदों को गहरे दुख में बदल दिया।

    दुर्घटना में जान गंवाने वाले पांचों लोग एक ही परिवार से जुड़े थे। हादसे की खबर मिलते ही उनके परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिवार के सदस्य राजू रैकवार ने बताया कि दुर्घटना में उनकी मां श्यामबाई, भाई दौलत, भाभी बीना, बहू कौशल्या और भतीजे संजय की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि इस हादसे के बाद उनके भाई और भाभी के बच्चे अनाथ हो गए हैं।

    परिवार के पांच सदस्यों को एक साथ खोने का दर्द बयान करते हुए राजू रैकवार फूट-फूटकर रो पड़े। हादसे में बच्चों के माता-पिता और अन्य परिजनों की मौत से परिवार के सामने अब उनके पालन-पोषण और भविष्य की चुनौती भी खड़ी हो गई है।

    छतरपुर में हुई इस दुर्घटना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। अंतिम संस्कार में शामिल होने जा रहे परिजनों को रास्ते में ही अपनी जान गंवानी पड़ी। स्थानीय प्रशासन और पुलिस घटना से जुड़े तथ्यों की जांच में जुटे हैं।

  • जया बच्चन की डांट से बचने के लिए अमिताभ बच्चन अपनाते हैं खास ट्रिक, KBC में बताया फैमिली ग्रुप का मजेदार राज

    जया बच्चन की डांट से बचने के लिए अमिताभ बच्चन अपनाते हैं खास ट्रिक, KBC में बताया फैमिली ग्रुप का मजेदार राज

    नई दिल्ली । ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (KBC) में अमिताभ बच्चन अक्सर अपनी निजी जिंदगी और जया बच्चन से जुड़े मजेदार किस्से साझा करते रहते हैं। हाल ही में शो के एक प्रोमो में उन्होंने खुलासा किया कि जब उन्हें अपनी पत्नी के साथ किसी शादी या कार्यक्रम में जाना होता है, तो वह लेट होने से बचने के लिए एक खास ट्रिक अपनाते हैं।

    अमिताभ बच्चन की समय पर पहुंचने की खास ट्रिक

    केबीसी 18 के मंच पर जब एक महिला कंटेस्टेंट ने बिग बी से पूछा कि क्या उन्हें भी कभी जया जी का इंतजार करना पड़ता है, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, ‘मैं आपको अपनी ट्रिक बताता हूं। जब भी हमें कहीं जाना होता है, तो मैं उन्हें (जया बच्चन) असल समय से 1 घंटा पहले का टाइम बताता हूं। अगर शादी का समय शाम 6 बजे का है, तो मैं उन्हें 5 बजे का समय बताता हूं। इससे वह 3:30 से 4 बजे के बीच तैयारी शुरू कर देती हैं और हम बिल्कुल सही समय पर पहुंच जाते हैं!’

    डांट से बचने के लिए ‘फैमिली ग्रुप’ का सहारा

    कुछ दिन पहले केबीसी में ही एक कंटेस्टेंट ने बिग बी से पूछा था कि क्या उन्हें घर लेट आने पर डांट पड़ती है। इस पर अमिताभ ने कहा था, ‘मुझे पता होता है कि क्या होने वाला है इसलिए मैं जैसे ही उठता हूं, हमारे परिवार के सभी सदस्यों का एक ग्रुप बनाया हुआ है, उस ग्रुप में मैं हाथ जोड़कर ‘नमस्कार’ का मैसेज भेजता हूं। फिर मैं उन्हें बताता हूं कि मुझे कहीं शूट पर जाना है और देर हो जाएगी, इसलिए वे रात के खाने के लिए मेरा इंतजार न करें। मैं सभी को पहले ही बता देता हूं, और इस तरह मैं डांट से बच जाता हूं।’

    जब लेट होने की खबर नहीं दे पाते बिग बी तब क्या होता है?

    अमिताभ ने आगे कहा, ‘लेकिन मान लीजिए कि मैंने उन्हें (जया बच्चन को) नहीं बताया, तो मुझे डांट पड़ती है और मुझसे पूछा जाता है, ‘आप कहां थे? आपने हमें बताया नहीं। क्या यह घर आने का समय है?’ इसलिए, अगर मुझे बहुत देर हो जाती है, तो वह अपना खाना खाकर खुद सो जाती हैं।’

    अमिताभ और जया बच्चन की लव स्टोरी

    दोनों की मुलाकात 1971 में फिल्म ‘गुड्डी’ के सेट पर हुई थी। फिर 1972 में आई फिल्म ‘एक नजर’ की शूटिंग के दौरान अमिताभ बच्चन, जया बच्चन के प्रति आकर्षित होने लगे। 1973 में जब उनकी फिल्म ‘जंजीर’ हिट हुई तब उन्होंने दोस्तों के साथ लंदन घूमने जाने का प्लान बनाया। लंदन जाने की परमिशन लेते जब अमिताभ अपने पिता हरिवंश राय बच्चन के पास गए तो उन्होंने साफ कहा कि अगर साथ जाना है, तो पहले शादी करनी होगी।

    हुआ था चट मंगनी पट ब्याह

    पिता की बात मानकर 3 जून 1973 को एक निजी समारोह में दोनों ने शादी की और उसी दिन लंदन के लिए रवाना हो गए। बता दें, अमिताभ और जया के दो बच्चे हैं – श्वेता बच्चन नंदा और अभिषेक बच्चन। वहीं तीन नाती नातिन/पोती हैं- नव्या नवेली नंदा, अगस्त्य नंदा और आराध्या बच्चन।

  • आईफोन नहीं, माता-पिता को फिर साथ देखना चाहता था कुनाल, पुणे पहाड़ी हादसे में पारिवारिक विवाद का नया पहलू सामने आया

    आईफोन नहीं, माता-पिता को फिर साथ देखना चाहता था कुनाल, पुणे पहाड़ी हादसे में पारिवारिक विवाद का नया पहलू सामने आया

    नई दिल्ली । पुणे के पहाड़ी हादसे में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। शुरुआती जानकारी में इस घटना को 19 वर्षीय कुनाल और उसके माता-पिता के बीच आईफोन तथा उसकी ईएमआई को लेकर हुए विवाद से जोड़कर देखा जा रहा था, लेकिन अब जांच और परिवार से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद मामले का एक अलग पहलू सामने आया है। बताया जा रहा है कि कुनाल की सबसे बड़ी चिंता आईफोन नहीं बल्कि अपने माता-पिता के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव को खत्म करना था। वह चाहता था कि उसके पिता मुरलीधर और मां संगीता फिर सामान्य तरीके से साथ रहें और परिवार में चल रही परेशानियां खत्म हों।

    घटना से जुड़े लोगों के अनुसार कुनाल के माता-पिता के रिश्ते पिछले कई वर्षों से तनावपूर्ण थे। संपत्ति से जुड़े विवाद और कथित वैवाहिक मतभेदों ने परिवार के माहौल को प्रभावित किया था। हालांकि आसपास रहने वाले लोगों ने उनके बीच किसी बड़े विवाद की जानकारी से इनकार किया है। परिवार के परिचितों के मुताबिक दोनों सामान्य व्यवहार करते दिखाई देते थे, लेकिन घर के भीतर की परिस्थितियां अलग थीं।

    परिवार के लिए यह पहला बड़ा सदमा नहीं था। कुनाल के एक भाई की करीब आठ वर्ष पहले मौत हो चुकी थी। इसके बाद परिवार पर मानसिक दबाव और तनाव बढ़ गया था। कुनाल पढ़ाई में अच्छा था। उसने दसवीं कक्षा में 82 प्रतिशत अंक हासिल किए थे और आगे चलकर एमबीबीएस की पढ़ाई करना चाहता था। परिवार से जुड़ी परेशानियों के बीच उसके व्यवहार और मानसिक स्थिति को लेकर भी अब कई सवाल उठ रहे हैं।

    घटना वाले दिन कुनाल पहाड़ी क्षेत्र में पहुंच गया था। बताया गया कि आईफोन को लेकर घर में विवाद हुआ था और इसके बाद वह खुद को नुकसान पहुंचाने के इरादे से पहाड़ी की ओर चला गया। उसके माता-पिता उसे समझाने के लिए वहां पहुंचे। पुलिस और दमकल कर्मियों ने भी मौके पर पहुंचकर उसे बचाने का प्रयास किया। खाई में सुरक्षा के लिए जाल भी लगाया गया था, लेकिन कुनाल लगातार अपनी जगह बदल रहा था।

    इसी दौरान उसके पिता ने उसे पकड़कर सुरक्षित स्थान पर खींचने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि इसी प्रयास में संतुलन बिगड़ गया और दोनों गहरी खाई में जा गिरे। इसके बाद मां संगीता ने भी खाई में छलांग लगा दी। इस तरह परिवार के तीनों सदस्यों की मौत हो गई। घटना के बाद सामने आए विवरणों ने इसे केवल एक पारिवारिक विवाद या आईफोन से जुड़ा मामला मानने पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    मुरलीधर की बहन के अनुसार उन्होंने और संगीता ने करीब 22 वर्ष पहले प्रेम विवाह किया था। परिवार के कुछ सदस्य इस विवाह के पक्ष में नहीं थे और शादी के समय भी उनके शामिल नहीं होने की बात सामने आई है। शादी के बाद दोनों परिवारों के बीच तनाव बना रहा। हालांकि मुरलीधर के परिचित उन्हें अनुशासित और शांत स्वभाव का व्यक्ति बताते हैं। वह करीब दस वर्षों से ड्राइवर के रूप में काम कर रहे थे।

    परिवार कुछ महीने पहले ही किराए के मकान में रहने आया था। घटना के बाद घर में पालतू कुत्ता शेरू अकेला रह गया, जिसे बाद में एक पशु कल्याण समूह अपने साथ ले गया। अब पुलिस और संबंधित अधिकारी पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों की जांच कर रहे हैं। परिवार के रिश्तों, घटना से पहले की स्थिति और उस दिन हुए घटनाक्रम को जोड़कर देखा जा रहा है। नए तथ्यों ने यह संकेत जरूर दिया है कि इस दुखद घटना के पीछे केवल आईफोन का विवाद नहीं, बल्कि परिवार के भीतर लंबे समय से चल रहा भावनात्मक और वैवाहिक तनाव भी महत्वपूर्ण भूमिका में हो सकता है।

  • राज कुंद्रा ने मां के जन्मदिन पर जताया आभार, शिल्पा शेट्टी ने सास को बताया सबसे अच्छी दोस्त और चीयरलीडर

    राज कुंद्रा ने मां के जन्मदिन पर जताया आभार, शिल्पा शेट्टी ने सास को बताया सबसे अच्छी दोस्त और चीयरलीडर

    नई दिल्ली । अभिनेता और बिजनेसमैन राज कुंद्रा ने अपनी मां के 75वें जन्मदिन के अवसर पर भावुक संदेश साझा कर उनके प्रति अपना प्यार, सम्मान और आभार व्यक्त किया। इस खास मौके पर उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें मां के साथ बिताए गए कई यादगार और भावनात्मक पल दिखाई दिए। वीडियो के साथ लिखे संदेश में राज ने कहा कि उनकी मां ने जीवनभर जो त्याग, संघर्ष और निस्वार्थ प्रेम दिया है, उसका कर्ज वह कभी नहीं चुका सकते।

    राज कुंद्रा ने अपने संदेश में कहा कि उनकी मां ने हर कठिन समय में उनका साथ दिया और हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने लिखा कि आज वह जीवन में जिस मुकाम पर हैं, उसमें उनकी मां का सबसे बड़ा योगदान है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी मां की दुआएं, मार्गदर्शन और विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रहे हैं। राज ने अपनी मां के अच्छे स्वास्थ्य, लंबी उम्र और खुशहाल जीवन की कामना करते हुए उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं।

    इस अवसर पर साझा किए गए वीडियो में परिवार के साथ बिताए गए कई खूबसूरत पल भी देखने को मिले। वीडियो में मां-बेटे के बीच का स्नेह, पारिवारिक समारोहों की झलक और कई यादगार क्षण शामिल थे। राज के इस भावुक संदेश को सोशल मीडिया पर प्रशंसकों ने खूब पसंद किया और बड़ी संख्या में लोगों ने उनकी मां को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। कई प्रशंसकों ने मां के प्रति उनके सम्मान और भावनाओं की सराहना भी की।

    अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी ने भी अपनी सास के 75वें जन्मदिन को खास अंदाज में मनाया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए उन्हें अपनी सबसे अच्छी दोस्त और सबसे बड़ी चीयरलीडर बताया। शिल्पा ने लिखा कि उनकी सास हमेशा सकारात्मक सोच और उत्साह से भरपूर रहती हैं तथा परिवार के हर सदस्य को प्रेरित करती हैं। उन्होंने उनके अच्छे स्वास्थ्य, खुशियों और लंबी उम्र की कामना करते हुए जन्मदिन की बधाई दी।

    शिल्पा ने अपने संदेश में यह भी कहा कि उन्हें दुनिया की सबसे अच्छी सास मिली हैं, जो हमेशा परिवार के साथ खड़ी रहती हैं और हर परिस्थिति में उनका उत्साह बढ़ाती हैं। उन्होंने सास के प्यार, मार्गदर्शन और आशीर्वाद के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पूरा परिवार उनसे बेहद प्यार करता है और उनके साथ बिताया हर पल बेहद खास होता है।

    राज कुंद्रा और शिल्पा शेट्टी की इन भावनात्मक पोस्टों ने एक बार फिर पारिवारिक रिश्तों की अहमियत को उजागर किया है। दोनों के संदेशों को सोशल मीडिया पर लोगों का भरपूर प्यार मिला और प्रशंसकों ने भी मां और सास के प्रति उनके सम्मान की सराहना की। जन्मदिन के इस खास अवसर पर साझा की गई पारिवारिक यादों ने कई लोगों को भावुक कर दिया और यह पोस्ट तेजी से चर्चा का विषय बन गई।

  • जैकी भगनानी ने भांजी दिवियाना के जन्मदिन पर लिखा भावुक संदेश, बोले- जिंदगी के हर कदम पर हमेशा साथ खड़ा रहूंगा

    जैकी भगनानी ने भांजी दिवियाना के जन्मदिन पर लिखा भावुक संदेश, बोले- जिंदगी के हर कदम पर हमेशा साथ खड़ा रहूंगा


    नई दिल्ली ।
    अभिनेता से निर्माता बने जैकी भगनानी ने अपनी भांजी दिवियाना के जन्मदिन के मौके पर एक भावुक और खास संदेश साझा किया है। जैकी ने सोशल मीडिया पर दिवियाना के साथ बिताए खूबसूरत पलों का वीडियो कोलाज पोस्ट करते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि जीवन में दिवियाना जो भी कदम उठाएगी, वह हर समय उसके साथ खड़े रहेंगे और उसका हाथ थामे रहेंगे।

    जैकी भगनानी द्वारा साझा किए गए वीडियो में दिवियाना के बचपन से लेकर अब तक के कई यादगार पल शामिल थे। तस्वीरों और छोटी-छोटी वीडियो क्लिप्स में दिवियाना को परिवार के साथ हंसते, खेलते और खुशहाल पलों को जीते हुए देखा गया। इस खास वीडियो के जरिए जैकी ने अपने और दिवियाना के बीच के मजबूत पारिवारिक रिश्ते को जाहिर किया।

    दिवियाना जैकी भगनानी की बहन दीपशिखा देशमुख की बेटी हैं। दीपशिखा देशमुख की शादी अभिनेता रितेश देशमुख के भाई धीरज देशमुख से हुई है। फिल्मी परिवार से ताल्लुक रखने वाली दिवियाना अक्सर पारिवारिक आयोजनों और खास मौकों पर नजर आती हैं। जैकी ने अपने संदेश के जरिए परिवार के बीच मौजूद प्यार और अपनापन दिखाया।

    अपने पोस्ट में जैकी ने दिवियाना को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए लिखा कि वह जीवन में जो भी रास्ता चुनेगी, वह हर परिस्थिति में उसका साथ देंगे। उन्होंने कहा कि उसकी खुशियों को मनाना और उसे एक बेहतर इंसान बनते देखना उनके जीवन की सबसे बड़ी खुशियों में से एक है।

    जैकी ने अपने संदेश में यह भी कहा कि दिवियाना को कभी अकेले आगे नहीं बढ़ना पड़ेगा, क्योंकि उसके मामा हमेशा उसके साथ मौजूद रहेंगे। उन्होंने अपने प्यार और आशीर्वाद के साथ दिवियाना के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। जैकी का यह संदेश सोशल मीडिया पर परिवार और प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय बना।

    जैकी भगनानी फिल्म जगत में अभिनेता और निर्माता दोनों भूमिकाओं के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने साल 2009 में फिल्म ‘कल किसने देखा’ से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद वह ‘फालतू’, ‘अजब गजब लव’, ‘रंगरेज’, ‘यंगिस्तान’ और ‘वेलकम टू कराची’ जैसी फिल्मों में नजर आए।

    अभिनय के अलावा जैकी ने निर्माण के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बनाई। उन्होंने अपनी बहन दीपशिखा देशमुख के साथ मिलकर कई फिल्मों का निर्माण किया। साल 2016 में आई फिल्म ‘सरबजीत’ उनके प्रोडक्शन सफर की महत्वपूर्ण फिल्मों में शामिल रही। इस फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली थी।

    अभिनेता के तौर पर जैकी भगनानी आखिरी बार साल 2018 में रिलीज हुई फिल्म ‘मित्रों’ में दिखाई दिए थे। इसके बाद उन्होंने फिल्म निर्माण और मनोरंजन क्षेत्र से जुड़े अन्य कामों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया। वर्तमान में भी वह फिल्म इंडस्ट्री में निर्माता के रूप में सक्रिय हैं और नए प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं।

    दिवियाना के जन्मदिन पर जैकी का यह संदेश परिवार के प्रति उनके लगाव और जिम्मेदारी को दर्शाता है। सोशल मीडिया पर साझा की गई इस पोस्ट के जरिए उन्होंने यह संदेश दिया कि जीवन में सफलता के साथ-साथ रिश्तों को मजबूत बनाए रखना भी बेहद जरूरी है।

  • 'परिवार होते हुए भी खुद को अनाथ महसूस किया', Lock Upp 2 में शिल्पा शिंदे ने सुनाई निजी संघर्ष की कहानी

    'परिवार होते हुए भी खुद को अनाथ महसूस किया', Lock Upp 2 में शिल्पा शिंदे ने सुनाई निजी संघर्ष की कहानी

    नई दिल्ली । रियलिटी शो Lock Upp 2 के एक हालिया एपिसोड में टीवी अभिनेत्री शिल्पा शिंदे ने अपनी निजी जिंदगी से जुड़े ऐसे अनुभव साझा किए, जिन्होंने शो के अन्य प्रतिभागियों और दर्शकों को भावुक कर दिया। अपने बेबाक अंदाज के लिए पहचानी जाने वाली अभिनेत्री ने बताया कि जीवन में एक समय ऐसा भी आया जब परिवार होने के बावजूद वह खुद को पूरी तरह अकेला और असहाय महसूस करने लगी थीं। उन्होंने कहा कि कई रिश्ते केवल नाम के रह जाते हैं और व्यक्ति भावनात्मक रूप से खुद को बिल्कुल अलग-थलग महसूस करने लगता है।

    शिल्पा शिंदे ने बताया कि उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव उस समय आया जब कंधे की सर्जरी के बाद परिस्थितियां तेजी से बदल गईं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी कठिन दौर के बाद घर का माहौल भी उनके लिए पहले जैसा नहीं रहा। हालात ऐसे बन गए कि उन्हें आत्मसम्मान को प्राथमिकता देते हुए अपना घर छोड़ने का कठिन निर्णय लेना पड़ा। उनके अनुसार यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन उस समय उन्हें लगा कि अपनी गरिमा और स्वाभिमान से समझौता करना उनके लिए संभव नहीं है।

    अभिनेत्री ने भावुक होते हुए कहा कि जिस परिवार के लिए उन्होंने हमेशा अपना पूरा योगदान दिया, वहीं एक समय उन्हें यह महसूस होने लगा कि उनकी भावनाओं और मौजूदगी की कोई अहमियत नहीं रह गई है। उन्होंने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि उन्हें ऐसा लगता था मानो वह अपने ही घर में केवल जिम्मेदारियां निभाने तक सीमित होकर रह गई थीं। इसी एहसास ने उन्हें मानसिक रूप से काफी प्रभावित किया और अंततः उन्होंने घर छोड़ने का निर्णय लिया।

    शिल्पा ने अपने परिवार के साथ वर्तमान रिश्तों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि समय के साथ उनके और परिवार के सदस्यों के बीच दूरियां बढ़ती चली गईं। उन्होंने स्वीकार किया कि लंबे समय से उनकी मां से मुलाकात नहीं हुई है और इस स्थिति ने उन्हें भीतर तक प्रभावित किया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अब उन्होंने अपनी जिंदगी को नए नजरिए से आगे बढ़ाने का फैसला किया है और वह भविष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहती हैं।

    उन्होंने यह भी साझा किया कि उनकी सबसे बड़ी इच्छा एक ऐसा शेल्टर होम तैयार करने की है, जहां जरूरतमंद और बेसहारा लोगों को सुरक्षित आश्रय मिल सके। उनके अनुसार इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए उन्होंने इस शो में हिस्सा लेने का निर्णय लिया। उनका मानना है कि यदि वह इस मंच के माध्यम से अपने लक्ष्य के करीब पहुंच सकें तो यह उनके जीवन का सबसे बड़ा संतोष होगा।

    शिल्पा शिंदे ने स्पष्ट किया कि वह अपनी निजी कहानी किसी की सहानुभूति हासिल करने के लिए नहीं सुना रहीं, बल्कि यह उनके जीवन की सच्चाई है, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा कि जीवन में कई बार लोगों ने उन्हें गलत समझा और उनके व्यवहार को लेकर अलग-अलग धारणाएं बनाई, लेकिन अब वह इन बातों से प्रभावित नहीं होतीं। उनका कहना था कि हर व्यक्ति का संघर्ष अलग होता है और उसे समझने के लिए केवल बाहरी परिस्थितियों को नहीं, बल्कि उसके अनुभवों को भी जानना जरूरी होता है।

    अभिनेत्री ने कहा कि कठिन परिस्थितियों ने उन्हें पहले से अधिक मजबूत बनाया है। उनका मानना है कि जीवन में आने वाली चुनौतियां व्यक्ति को टूटने के बजाय आगे बढ़ने की प्रेरणा भी दे सकती हैं। Lock Upp 2 में साझा की गई उनकी यह कहानी दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है और कई लोग इसे आत्मसम्मान, संघर्ष और आत्मनिर्भरता की मिसाल के रूप में देख रहे हैं।

  • लॉक अप 2 में राम कपूर का भावुक खुलासा, पिता की आखिरी इच्छा पूरी करने के फैसले ने बदल दिए पारिवारिक रिश्ते

    लॉक अप 2 में राम कपूर का भावुक खुलासा, पिता की आखिरी इच्छा पूरी करने के फैसले ने बदल दिए पारिवारिक रिश्ते

    नई दिल्ली । अभिनेता राम कपूर ने रियलिटी शो ‘लॉक अप 2’ में अपनी निजी जिंदगी से जुड़ा एक बेहद भावुक और संवेदनशील अनुभव साझा किया, जिसने शो के अन्य प्रतिभागियों के साथ दर्शकों को भी भावुक कर दिया। उन्होंने अपने पिता के अंतिम दिनों को याद करते हुए बताया कि जीवन के सबसे कठिन फैसलों में से एक में उन्होंने अपने पिता का साथ दिया। इस अनुभव ने न केवल उन्हें भावनात्मक रूप से प्रभावित किया, बल्कि परिवार के कुछ रिश्तों पर भी गहरा असर डाला।

    शो के दौरान एक विशेष टास्क में प्रतिभागियों को अपने जीवन से जुड़ा ऐसा राज साझा करना था, जिसे अब तक बहुत कम लोग जानते थे। इसी दौरान राम कपूर ने बताया कि उन्होंने अपने पिता की आखिरी इच्छा को पूरा करने में उनकी मदद की थी। उनका यह बयान सुनकर वहां मौजूद सभी लोग कुछ देर के लिए भावुक हो गए और पूरे माहौल में गंभीरता छा गई।

    राम कपूर ने बताया कि उनके पिता को 63 वर्ष की उम्र में पैंक्रियाटिक कैंसर का पता चला था। उस समय डॉक्टरों ने बीमारी को गंभीर बताया था और शल्य चिकित्सा की संभावना भी बहुत कम थी। इसके बाद उन्होंने इलाज और कीमोथेरेपी के कई चरण पूरे किए, जिससे उनकी सेहत में कुछ समय के लिए सुधार भी आया। परिवार को लगा कि स्थिति पहले से बेहतर हो रही है और उन्होंने कई साल सामान्य जीवन भी बिताया।

    हालांकि कुछ समय बाद बीमारी फिर से लौट आई। राम कपूर के अनुसार, यह दौर पूरे परिवार के लिए बेहद कठिन था। उस समय उनके पिता विदेश में रह रहे थे और लगातार बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति से मानसिक रूप से भी परेशान थे। इसी दौरान उन्होंने अपने बेटे से अपनी भावनाएं साझा कीं और जीवन के अंतिम चरण को लेकर अपनी इच्छा बताई।

    अभिनेता ने बताया कि पिता नहीं चाहते थे कि वे अपने अंतिम समय में अकेले रहें। उन्होंने अपने बेटे से साथ रहने की इच्छा जताई थी। राम कपूर ने कहा कि उनके लिए यह फैसला बेहद भावनात्मक और कठिन था, लेकिन उन्होंने अपने पिता का साथ निभाने का निर्णय लिया। उन्होंने आखिरी समय तक उनके साथ रहकर उनकी इच्छाओं का सम्मान किया और उन्हें भावनात्मक सहारा दिया।

    राम कपूर ने यह भी बताया कि उनके पिता ने अपनी विदाई को लेकर कुछ व्यक्तिगत इच्छाएं व्यक्त की थीं। उनका मानना था कि परिवार को उनके जाने के बाद लंबे समय तक दुख में नहीं डूबना चाहिए। अभिनेता ने कहा कि उन्होंने परिस्थितियों को समझते हुए वही किया, जो उन्हें उस समय अपने पिता के लिए सही और मानवीय लगा।

    इस पूरे घटनाक्रम का असर उनके पारिवारिक रिश्तों पर भी पड़ा। राम कपूर ने खुलासा किया कि इस निर्णय के बाद उनकी मां और बहन के साथ संबंधों में दूरी आ गई। उन्होंने बताया कि पिछले कई वर्षों से दोनों के बीच बातचीत नहीं हुई है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने अपने फैसले को लेकर कभी पछतावा महसूस नहीं किया, क्योंकि उस समय उनका उद्देश्य केवल अपने पिता की इच्छा और सम्मान को प्राथमिकता देना था।

    राम कपूर का यह भावुक अनुभव दर्शाता है कि गंभीर बीमारी और जीवन के अंतिम दौर से जुड़े निर्णय अक्सर पूरे परिवार के लिए बेहद कठिन होते हैं। ऐसे समय में भावनाएं, रिश्ते और व्यक्तिगत विश्वास एक साथ सामने आते हैं। अभिनेता ने अपने अनुभव के माध्यम से यह बताया कि कई बार जीवन में ऐसे फैसले लेने पड़ते हैं, जिनका प्रभाव लंबे समय तक रिश्तों पर बना रहता है, लेकिन परिस्थितियों के अनुसार लिया गया निर्णय व्यक्ति के लिए सही भी हो सकता है।