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  • पीएम-आशा से किसानों को उपज का बेहतर मूल्य, डिजिटल खरीद व्यवस्था ने बढ़ाई पारदर्शिता और भुगतान प्रक्रिया की रफ्तार

    पीएम-आशा से किसानों को उपज का बेहतर मूल्य, डिजिटल खरीद व्यवस्था ने बढ़ाई पारदर्शिता और भुगतान प्रक्रिया की रफ्तार

    नई दिल्ली ।केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान यानी पीएम-आशा योजना किसानों को उनकी कृषि उपज का बेहतर मूल्य दिलाने और मजबूरी में कम कीमत पर बिक्री रोकने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। योजना के तहत खरीद व्यवस्था, मूल्य स्थिरीकरण और बाजार हस्तक्षेप को मजबूत करने के साथ किसानों तक सरकारी समर्थन पहुंचाने पर जोर दिया गया है।

    पीएम-आशा के अंतर्गत दलहन, तिलहन और खोपरा जैसी प्रमुख कृषि उपज की समय पर खरीद सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न स्तरों पर व्यवस्थाओं का विस्तार किया गया है। किसानों को स्थानीय स्तर पर अपनी उपज बेचने में सुविधा मिले, इसके लिए अतिरिक्त खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं। इससे बाजार तक पहुंच बढ़ाने और बिक्री प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद मिली है।

    योजना की खरीद व्यवस्था में नाफेड और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ जैसी संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। इन संस्थाओं के माध्यम से किसानों से निर्धारित व्यवस्था के तहत उपज खरीदी जाती है। इसका उद्देश्य बाजार में कीमतों के दबाव के समय किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ उपलब्ध कराना और उन्हें तत्काल कम कीमत पर उपज बेचने से बचाना है।

    सरकार ने पीएम-आशा की खरीद प्रक्रिया में तकनीक के इस्तेमाल को भी बढ़ाया है। आधार आधारित प्रमाणीकरण के साथ ई-एनएएम, ई-समृद्धि और ई-सम्युक्ति जैसे डिजिटल मंचों का उपयोग खरीद और भुगतान व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए किया जा रहा है। डिजिटल प्रणाली से किसानों की पहचान, खरीद संबंधी रिकॉर्ड और भुगतान प्रक्रिया को व्यवस्थित करने में सहायता मिल रही है।

    कृषि क्षेत्र में भंडारण और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए कृषि अवसंरचना कोष का समर्थन भी योजना की प्रभावशीलता बढ़ाने में उपयोगी माना गया है। खरीद केंद्रों और कृषि ढांचे के विस्तार से किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर बाजार विकल्प उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।

    पीएम-आशा के लिए बजटीय प्रावधान में भी वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2024-25 में योजना के तहत वास्तविक व्यय 5,437.99 करोड़ रुपये रहा। वर्ष 2025-26 में इसका बजट बढ़ाकर 6,941.36 करोड़ रुपये किया गया, जबकि 2026-27 के लिए 7,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। बढ़ता आवंटन किसानों की आय सुरक्षा और कृषि मूल्य समर्थन व्यवस्था को मजबूत करने की प्राथमिकता को दर्शाता है।

    फसल उत्पादन लागत और न्यूनतम समर्थन मूल्य के बीच अंतर भी किसानों के लिए मूल्य सुरक्षा के महत्व को स्पष्ट करता है। वर्ष 2026-27 में सामान्य धान की उत्पादन लागत 1,627 रुपये प्रति क्विंटल बताई गई है, जबकि एमएसपी 2,441 रुपये प्रति क्विंटल है। इस तरह दोनों के बीच 814 रुपये प्रति क्विंटल का अंतर है।

    पीली सोयाबीन के मामले में उत्पादन लागत 3,805 रुपये प्रति क्विंटल और एमएसपी 5,708 रुपये प्रति क्विंटल है। इसके अलावा गेहूं की उत्पादन लागत 1,239 रुपये प्रति क्विंटल के मुकाबले एमएसपी 2,585 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है।

    जूट के लिए उत्पादन लागत 3,662 रुपये प्रति क्विंटल बताई गई है, जबकि एमएसपी 5,925 रुपये प्रति क्विंटल है। इस आधार पर दोनों के बीच 2,293 रुपये प्रति क्विंटल का अंतर बनता है। सरकार की कोशिश है कि खरीद व्यवस्था, डिजिटल निगरानी और बाजार हस्तक्षेप के माध्यम से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले तथा कृषि बाजार में पारदर्शिता और स्थिरता को और मजबूत किया जा सके।

  • मखाने की खेती को मिल रहा तकनीक और निर्यात का सहारा, उत्पादन बढ़ने से बिहार सहित किसानों को मिलेगा बड़ा बाजार

    मखाने की खेती को मिल रहा तकनीक और निर्यात का सहारा, उत्पादन बढ़ने से बिहार सहित किसानों को मिलेगा बड़ा बाजार

    नई दिल्ली ।भारत का मखाना क्षेत्र आने वाले वर्षों में तेजी से विस्तार करने की दिशा में बढ़ रहा है। बढ़ती घरेलू मांग, बेहतर बाजार कीमत, उत्पादन में वृद्धि और निर्यात के विस्तार के कारण वर्ष 2029-30 तक देश का मखाना बाजार 11 हजार से 12 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। केंद्र सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, मखाना अब केवल पारंपरिक खाद्य उत्पाद नहीं रह गया है, बल्कि स्वास्थ्यवर्धक और प्रीमियम स्नैक के रूप में घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी जगह बना रहा है।

    वित्त वर्ष 2021-22 से 2024-25 के बीच मखाना उत्पादन में करीब 4 से 5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, लेकिन इसी अवधि में इसकी औसत कीमत लगभग 500 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 1,250 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। कीमतों में यह वृद्धि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं की बढ़ती मांग, प्रीमियम उत्पादों की लोकप्रियता और सीमित आपूर्ति जैसे कारणों से जुड़ी है।

    मखाने को कम वसा और पोषण से भरपूर खाद्य पदार्थ के रूप में देखा जाता है। पौध-आधारित भोजन और क्लीन-लेबल उत्पादों की ओर बढ़ते वैश्विक रुझान ने भी इसकी मांग को मजबूत किया है। घरेलू बाजार के साथ विदेशों में भी भारतीय मखाने की खपत बढ़ रही है, जिससे किसानों और प्रसंस्करण से जुड़े कारोबार के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

    वर्ष 2024-25 में देश में मखाने का कुल उत्पादन 63,910 मीट्रिक टन रहा था। इस दौरान औसत उत्पादकता 2.03 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई। वर्ष 2025-26 के दूसरे अग्रिम अनुमान में उत्पादन बढ़कर 80,590 मीट्रिक टन और उत्पादकता 2.34 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर पहुंचने की संभावना है। उत्पादन और उत्पादकता में यह बढ़ोतरी खेती के आधुनिक तरीकों के बढ़ते इस्तेमाल को दर्शाती है।

    मखाना उत्पादन में बिहार देश का प्रमुख राज्य है। वर्ष 2025-26 में बिहार का उत्पादन लगभग 60 हजार मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। राज्य में औसत उत्पादकता करीब 2 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर है। देश के कुल उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी सबसे बड़ी होने के कारण मखाना क्षेत्र के विस्तार का सीधा लाभ राज्य के किसानों को मिलने की संभावना है।

    पारंपरिक तौर पर मखाने की खेती तालाबों और जलाशयों में की जाती रही है, लेकिन अब फील्ड सिस्टम खेती और उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। स्वर्ण वैदेही और सबौर मखाना-1 जैसी उन्नत किस्मों से पैदावार बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। इससे खेती के दायरे का विस्तार करने और उत्पादन से जुड़े जोखिम कम करने में भी मदद मिल रही है।

    भारत हर साल 60 हजार मीट्रिक टन से अधिक मखाने का उत्पादन करता है। इसमें करीब 40 प्रतिशत हिस्सा निर्यात होता है, जो लगभग 23 हजार से 25 हजार मीट्रिक टन के बराबर है। शेष उत्पादन की खपत घरेलू बाजार में होती है। घरेलू मखाना बाजार ने 2021-22 से 2024-25 के बीच करीब 17 से 18 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की है।

    सरकार ने इस क्षेत्र की संभावनाओं को देखते हुए केंद्रीय बजट 2025-26 में राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की स्थापना की घोषणा की थी। इसके अलावा 2025-26 से 2030-31 के लिए 476.03 करोड़ रुपये की मखाना विकास केंद्रीय क्षेत्र योजना को मंजूरी दी गई है। इसके तहत अनुसंधान, गुणवत्तापूर्ण बीज, किसानों का कौशल विकास, कटाई के बाद प्रबंधन, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, विपणन और निर्यात को बढ़ावा दिया जाएगा।

    मखाना क्षेत्र में उत्पादन और बाजार दोनों के विस्तार से किसानों को बेहतर कीमत और नए बाजार मिलने की संभावना है। यदि उत्पादकता, गुणवत्ता और प्रसंस्करण क्षमता में लगातार सुधार होता है, तो भारतीय मखाना वैश्विक प्रीमियम स्नैक बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।

  • दिल्ली कूच पर अड़े किसानों ने ठुकराया सीएम का न्योता, 29 अगस्त तक खनौरी बॉर्डर पर मोर्चा जारी

    दिल्ली कूच पर अड़े किसानों ने ठुकराया सीएम का न्योता, 29 अगस्त तक खनौरी बॉर्डर पर मोर्चा जारी


    नई दिल्ली ।
    विभिन्न मांगों को लेकर दिल्ली की ओर बढ़ने पर अड़े किसान संगठनों ने एक बार फिर अपना रुख कड़ा कर लिया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रशासनिक तथा पुलिस अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें आयोजित की गईं, परंतु बॉर्डर खोलने और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने की अनुमति देने को लेकर दोनों पक्षों के बीच कोई सहमति नहीं बन सकी। सहमति न बन पाने की स्थिति में किसानों ने राजमार्ग के एक हिस्से में तंबू गाड़ दिए हैं और वहां अपना मोर्चा स्थापित कर लिया है।

    किसान नेताओं ने स्पष्ट किया है कि वे 29 अगस्त तक खनौरी सीमा पर ही बने रहेंगे। संगठन की ओर से यह भी साफ किया गया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग के यातायात को पूरी तरह बाधित नहीं किया जाएगा। किसान केवल सड़क के एक किनारे बैठकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे ताकि आम जनता को अत्यधिक असुविधा का सामना न करना पड़े। इस पूरे घटनाक्रम के बीच राज्य प्रशासन की ओर से मुख्यमंत्री स्तर की वार्ता का न्योता दिया गया था, जिसे किसान प्रतिनिधियों ने स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

    किसान प्रतिनिधियों का तर्क है कि उनकी प्रमुख मांगें केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र से संबंधित हैं, इसलिए राज्य स्तर की बैठकों से समाधान निकलना संभव नहीं है। उन्होंने मांग रखी है कि केंद्रीय कृषि मंत्री अथवा केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों के साथ उनकी सीधी वार्ता आयोजित कराई जाए। उनका कहना है कि पिछले आंदोलनों के दौरान जिन बिंदुओं पर बातचीत रुक गई थी, वहीं से पुनः नए सिरे से आधिकारिक चर्चा शुरू की जानी चाहिए।

    दूसरी ओर, सीमावर्ती क्षेत्रों पर लगातार दूसरे दिन भी पुलिस और सुरक्षा बलों की भारी तैनाती देखने को मिली। सुरक्षा के दृष्टिकोण से कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई है और मुख्य रास्तों को सील कर दिया गया है। इसके चलते दिल्ली और पंजाब को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर भारी वाहनों के साथ-साथ यात्री वाहनों की आवाजाही पर व्यापक प्रभाव पड़ा है। यातायात को सुचारू रखने के लिए प्रशासन ने विभिन्न वैकल्पिक मार्गों से गाड़ियों को डाइवर्ट किया है।

    मध्य प्रदेश जैसे कृषि प्रधान राज्यों के किसान संगठन भी देश के विभिन्न हिस्सों में चल रहे किसान आंदोलनों और उनकी मांगों पर लगातार नजर बनाए रखते हैं। कृषि नीतियों, न्यूनतम समर्थन मूल्य तथा अन्य वित्तीय राहत से जुड़े मुद्दे देश भर के किसान समुदायों के लिए अत्यंत संवेदनशील और प्रासंगिक माने जाते हैं।

    वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी स्वयं बॉर्डर पर पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था तथा कंक्रीट बैरिकेडिंग का जायजा ले रहे हैं। गश्त बढ़ा दी गई है और सभी संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। पंजाब और हरियाणा दोनों पक्षों के पुलिस अधिकारी लगातार प्रदर्शनकारियों से संवाद स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे और किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

    किसान प्रतिनिधियों का कहना है कि वे किसी भी स्थिति में कानून और व्यवस्था को अपने हाथ में नहीं लेंगे और उनका यह प्रदर्शन पूरी तरह से अनुशासित तथा शांतिपूर्ण रहेगा। हालांकि जब तक केंद्रीय स्तर पर उनकी वार्ता की मांग पूरी नहीं हो जाती, तब तक वे खनौरी बॉर्डर पर ही अपना ठहराव जारी रखेंगे।

    फिलहाल, सुरक्षा बल पूरी तरह से अलर्ट मोड पर हैं और पुलिस प्रशासन स्थिति की लगातार समीक्षा कर रहा है। सीमा से सटे ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस बलों की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात की गई हैं। अब यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में केंद्रीय स्तर से संवाद की प्रक्रिया शुरू होती है या प्रदर्शन स्थल पर गतिरोध इसी प्रकार बरकरार रहता है।

  • किसानों से भूमि अधिग्रहण पर उन्हें दिया जाएगा चार गुना मुआवजा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    किसानों से भूमि अधिग्रहण पर उन्हें दिया जाएगा चार गुना मुआवजा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारी सरकार खेती और किसान के हितों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। उन्होंने किसानों को भरोसा देते हुए कहा कि किन्हीं भी शासकीय योजनाओं के निर्माण के लिए कृषि भूमि का अधिग्रहण करने पर किसानों को एक-दो नहीं, पूरे चार गुना मुआवजा दिया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार शाम को मंत्रालय से भोपाल की करौंद कृषि उपज मंडी परिसर में हुए बलराम कृषि महोत्सव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने किसानों से अपनी जमीन हर हाल में सुरक्षित रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि भूमि हमारी माता है। यह हमारा उदर-पोषण करती है। इसे किसी को न बेचें।

    मुख्यमंत्री ने किसानों से कहा कि आपके खेत सरकार के लिए देवस्थल है और आपका एक-एक दाना हमारे लिए प्रसाद के समान है। आपके पसीने की हरेक बूंद के सम्मान के लिए हमारी सरकार हमेशा आपके साथ है। उन्होंने कहा कि बलराम कृषि महोत्सव किसानों की मेहनत, समर्पण और कृषि क्षेत्र में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को सम्मान देने का माध्यम है।

    मुख्यमंत्री ने वीसी से बलराम कृषि महोत्सव में मौजूद किसानों से संवाद भी किया। उन्होंने कहा कि आपकी खुशी हमारे लिए होली और सबसे बड़ी दिवाली है। उन्होंने किसानों से पूरे उत्साह के साथ बलराम कृषि महोत्सव में सहभागी बनने का आह्वान किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी जिलों में बलराम कृषि महोत्सव आयोजित किए जा रहे हैं। बीते 26 दिनों में यह प्रदेश का 14वां बलराम कृषि महोत्सव आयोजन है। उन्होंने कहा कि बहुत जल्द भोपाल मुख्यालय में भी एक बड़ा कृषि महोत्सव आयोजित किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से “कवच” योजना शुरू की है। इससे सहकारी खातों की पुरानी गड़बड़ियां दूर कर पांच हजार किसानों को ऋण और विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाया गया है। किसानों को बिना ब्याज के ऋण और ऋण चुकाने के लिए पूरे 12 महीने का समय देने की व्यवस्था भी इस योजना में की गई है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश का किसान अपने परिश्रम से प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। मध्य प्रदेश दलहन में पहले अन्न उत्पादन में देश में दूसरे, , तिलहन में दूसरे और दुग्ध उत्पादन में तीसरे स्थान पर है। जैविक खेती और जैविक कपास उत्पादन में प्रदेश पूरे देश में अव्वल है।

    उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय के साधन बढ़ाने, खेती की लागत घटाने तथा तकनीक और नवाचार के माध्यम से उत्पादन एवं आमदनी बढ़ाने पर विशेष जोर दे रही है। हमने प्रदेश में सिंचाई क्षमता को 100 लाख हैक्टेयर तक बढ़ाने, उद्यानिकी का रकबा 30 लाख हैक्टेयर करने तथा 10 हजार नई सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य रखा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से फसल विविधीकरण अपनाने, उद्यानिकी और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा पशुपालन एवं मछली पालन से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खेती को सिर्फ अन्न उत्पादन का जरिया होने तक सीमित न रखकर इसे प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग से जोड़कर किसानों की आय के नए रास्ते खोले जा रहे है।

    बलराम कृषि महोत्सव में स्थानीय विधायक विष्णु खत्री, तीरथ सिंह मीणा, गोपाल सिंह मीणा, कलेक्टर प्रियंक मिश्रा सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ जिलाधिकारीगण सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय किसान बंधु उपस्थित थे। विधायक रामेश्वर शर्मा और अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने मंत्रालय से ही बलराम कृषि महोत्सव में सहभागिता की।

  • MP के 48 जिलों में सूखे जैसे हालात, 46% तक कम बारिश, जबलपुर में धान के खेतों में पड़ी दरारें

    MP के 48 जिलों में सूखे जैसे हालात, 46% तक कम बारिश, जबलपुर में धान के खेतों में पड़ी दरारें


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसूनी सीजन में कम बारिश होने से किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। प्रदेश के 55 में से 48 जिलों में सूखे जैसे हालात बने हुए हैं। इन जिलों में सामान्य से 1 से 46 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है। बारिश की कमी का असर जलस्रोतों के साथ-साथ खरीफ फसलों पर भी दिखाई देने लगा है। जबलपुर में धान के खेतों में दरारें पड़ गई हैं, जबकि उज्जैन संभाग में सोयाबीन की फसल पर इल्ली का असर देखा जा रहा है।

    हालांकि, मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों में प्रदेश के कुछ हिस्सों में तेज बारिश की संभावना जताई है। इससे बारिश की कमी कुछ हद तक दूर होने की उम्मीद है।

    पूर्वी MP में 23% कम बारिश
    मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश के पूर्वी हिस्से के जबलपुर, शहडोल, रीवा और सागर संभाग में सामान्य से 23 प्रतिशत कम बारिश हुई है। अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़ और उमरिया में बारिश की कमी 1 से 46 प्रतिशत तक है।

    वहीं, पश्चिमी मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभाग में औसत से 16 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, भोपाल, दतिया, धार, गुना, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में भी बारिश सामान्य से कम रही है।

    सिर्फ 7 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
    प्रदेश में केवल बड़वानी, ग्वालियर, भिंड, बुरहानपुर, देवास, खंडवा और खरगोन ऐसे जिले हैं, जहां सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। प्रदेश में सामान्य बारिश का आंकड़ा 37.3 इंच है। वहीं भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में सामान्य बारिश करीब 39 इंच तक मानी जाती है।

    धान और सोयाबीन की फसल पर असर
    कम बारिश वाले क्षेत्रों में खरीफ सीजन की प्रमुख फसल सोयाबीन, धान और मक्का है। सब्जियों की खेती भी होती है, लेकिन बारिश की कमी से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

    जबलपुर के पाटन क्षेत्र में धान के खेतों में नमी की कमी के कारण दरारें पड़ने लगी हैं। यहां अब तक करीब 16.3 इंच बारिश हुई है, जबकि इस अवधि तक 23.6 इंच बारिश होनी चाहिए थी।

    उज्जैन संभाग में भी सोयाबीन की फसल पर इल्ली का असर सामने आने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। कम बारिश के बीच फसल में कीट प्रकोप ने परेशानी और बढ़ा दी है।

    अगले 3 दिन बारिश की उम्मीद
    मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों में प्रदेश के उत्तरी हिस्से के कुछ जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई है। शुक्रवार को श्योपुर, मुरैना, शिवपुरी, गुना, टीकमगढ़, छतरपुर और सागर में भारी बारिश का अलर्ट है।

    इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, दतिया, अशोकनगर, भिंड, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, पन्ना, दमोह और निवाड़ी में हल्की बारिश होने की संभावना है।

    अब तक 19% बारिश कम
    मौसम विभाग के अनुसार, मध्य प्रदेश में अब तक औसतन 16.3 इंच (419.5 मिमी) बारिश हुई है, जबकि इस अवधि तक 20.5 इंच (519.8 मिमी) पानी गिरना चाहिए था। इस लिहाज से प्रदेश में करीब 4.2 इंच यानी 19 प्रतिशत बारिश कम हुई है। बारिश की यह कमी अब जलस्रोतों के साथ खेती पर भी साफ दिखाई देने लगी है।

  • मुरैना में खाद संकट गहराया, टोकन व्यवस्था के बीच घंटों लाइन में इंतजार को मजबूर किसान

    मुरैना में खाद संकट गहराया, टोकन व्यवस्था के बीच घंटों लाइन में इंतजार को मजबूर किसान

    मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में खाद की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था को लेकर किसानों की परेशानियां लगातार बढ़ती दिखाई दे रही हैं। गल्ला मंडी स्थित वितरण केंद्र पर बड़ी संख्या में किसान खाद लेने के लिए पहुंच रहे हैं, लेकिन सीमित उपलब्धता और टोकन प्रणाली के कारण उन्हें कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। इससे खेती के महत्वपूर्ण समय में किसानों की चिंता और बढ़ गई है।

    किसानों का कहना है कि उनकी फसल खेतों में तैयार खड़ी है और समय पर खाद नहीं मिलने से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। उनका आरोप है कि खाद प्राप्त करने के लिए पहले पंजीकरण कराना पड़ता है, उसके बाद टोकन मिलने का इंतजार करना होता है और निर्धारित तिथि पर भी घंटों लंबी कतार में खड़े रहने के बावजूद कई बार खाद नहीं मिल पाती। इस पूरी प्रक्रिया ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

    ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले किसानों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई किसानों का कहना है कि उन्हें अपने गांव से काफी दूर स्थित गोदामों के लिए टोकन आवंटित किए जा रहे हैं। ऐसे में उन्हें बार-बार लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे समय और आर्थिक दोनों तरह का अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है। कई किसान लगातार कई दिनों तक वितरण केंद्रों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।

    वितरण केंद्रों पर सुबह से ही लंबी कतारें लग रही हैं। किसानों का कहना है कि कई घंटे इंतजार करने के बाद भी सभी को खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इससे खेती के कार्य प्रभावित हो रहे हैं और खरीफ सीजन के दौरान आवश्यक उर्वरक समय पर नहीं मिलने की चिंता लगातार बढ़ रही है। किसानों का मानना है कि वितरण व्यवस्था में सुधार किए बिना समस्या का समाधान संभव नहीं होगा।

    प्रदेश सरकार समय-समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध होने का दावा करती रही है, लेकिन मुरैना के वितरण केंद्रों पर दिखाई दे रही स्थिति अलग तस्वीर पेश कर रही है। बड़ी संख्या में किसानों की भीड़, सीमित वितरण और लंबा इंतजार यह संकेत दे रहे हैं कि जमीनी स्तर पर व्यवस्था अभी भी पूरी तरह सुचारु नहीं हो सकी है। किसानों का कहना है कि यदि समय पर खाद नहीं मिली तो इसका सीधा असर फसल की गुणवत्ता और उत्पादन पर पड़ेगा।

    कुछ किसानों ने खाद की कालाबाजारी और वितरण में अनियमितताओं की आशंका भी जताई है। उनका कहना है कि प्रशासन को वितरण प्रक्रिया की नियमित निगरानी करनी चाहिए ताकि सभी पात्र किसानों को निर्धारित समय पर उर्वरक उपलब्ध कराया जा सके। साथ ही ई-टोकन प्रणाली को अधिक प्रभावी और सरल बनाने की भी मांग उठ रही है।

    हाल के समय में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में खाद की उपलब्धता को लेकर किसानों का असंतोष सामने आता रहा है। इससे पहले भी उर्वरक वितरण व्यवस्था को लेकर विरोध प्रदर्शन और आंदोलन देखने को मिले थे। किसानों का कहना है कि खेती के सबसे महत्वपूर्ण समय में यदि खाद की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं हुई तो इसका व्यापक असर कृषि उत्पादन पर पड़ सकता है।

    फिलहाल मुरैना में प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने सबसे बड़ी चुनौती किसानों तक समय पर खाद पहुंचाने और वितरण व्यवस्था को सुचारु बनाने की है। किसान उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा और टोकन प्रणाली में आवश्यक सुधार कर उनकी परेशानियों को कम किया जाएगा।

  • सतना से किसान कांग्रेस का बड़ा ऐलान, MSP और बिजली समेत मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने की तैयारी

    सतना से किसान कांग्रेस का बड़ा ऐलान, MSP और बिजली समेत मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने की तैयारी

    मध्य प्रदेश : में किसानों की विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर किसान कांग्रेस ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सतना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह चौहान ने किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार पर निशाना साधा और जल्द समाधान नहीं होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि किसानों की मांगों पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो संगठन सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करेगा और विधानसभा का घेराव भी किया जाएगा।

    किसान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान किसानों से जुड़ी कई मांगें उठाईं। उन्होंने भारत-अमेरिका कृषि ट्रेड डील को किसानों के हितों के खिलाफ बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की। उनका कहना था कि कृषि क्षेत्र से जुड़े फैसलों में किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और ऐसे समझौतों से पहले किसानों की चिंताओं को ध्यान में रखना जरूरी है।

    उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी को लेकर भी सरकार से ठोस कानून बनाने की मांग की। धर्मेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि किसानों की उपज को तय समर्थन मूल्य से कम कीमत पर खरीदने और बेचने की स्थिति को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने एमएसपी सुरक्षा कानून लागू करने की मांग को प्रमुख मुद्दा बताया।

    किसान कांग्रेस ने प्रदेश में मूंग खरीदी को लेकर भी सवाल उठाए। संगठन की मांग है कि सरकार किसानों से मूंग की शत-प्रतिशत खरीदी सुनिश्चित करे, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही खेती के लिए पर्याप्त बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई। किसान कांग्रेस ने कृषि कार्यों के लिए 24 घंटे थ्री-फेज बिजली देने की मांग की।

    इसके अलावा कृषि उपज मंडी और सहकारिता चुनावों को लेकर भी संगठन ने सरकार को घेरा। किसान कांग्रेस का कहना है कि पिछले कई वर्षों से लंबित इन चुनावों को जल्द कराया जाना चाहिए, ताकि किसानों से जुड़े संस्थानों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया मजबूत हो सके।

    धर्मेंद्र सिंह चौहान ने भाजपा सरकार पर किसानों से किए गए चुनावी वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान धान और गेहूं की खरीदी को लेकर जो घोषणाएं की गई थीं, सरकार अब उनसे पीछे हट रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसान महंगे डीजल, खाद की बढ़ती कीमतों, बिजली बिल और कर्ज जैसी समस्याओं से परेशान हैं।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसानों को मंडियों में उचित मूल्य नहीं मिल रहा है और सरकार की नीतियां किसानों की परेशानियां कम करने में सफल नहीं हो रही हैं। किसान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार पर किसान कल्याण के दावों और जमीनी स्थिति के बीच अंतर होने का आरोप लगाया।

    किसान कांग्रेस ने साफ किया है कि यदि किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो संगठन प्रदेशभर में किसानों को एकजुट कर आंदोलन करेगा। इसके तहत राजधानी भोपाल में विधानसभा घेराव की चेतावनी भी दी गई है। फिलहाल किसान कांग्रेस के इस ऐलान के बाद प्रदेश में किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है।

  • कैबिनेट का बड़ा फैसला… किसानों को 2031 तक मिलती रहेगी सम्मान निधि… सूर्य सरोवर योजना भी स्वीकृति

    कैबिनेट का बड़ा फैसला… किसानों को 2031 तक मिलती रहेगी सम्मान निधि… सूर्य सरोवर योजना भी स्वीकृति


    नई दिल्ली।
    केंद्र सरकार (Central Government) ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान-Pradhan Mantri Kisan Samman Nidhi) योजना को वित्त वर्ष 2030-31 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। इस योजना के लिए 3.15 लाख करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने कहा कि किसानों की समृद्धि ही देश की समृद्धि की आधारशिला है और इसी उद्देश्य से पात्र किसान परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। यह योजना फरवरी, 2019 में शुरू की गई थी, जिसके तहत पात्र भू-स्वामी किसान परिवारों को प्रति वर्ष 6,000 रुपये की वित्तीय सहायता तीन समान किस्तों में दी जाती है।

    योजना के तहत अब तक 23 किस्तों में किसानों के खातों में 4.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि भेजी जा चुकी है। सरकार ने कहा कि योजना को वर्ष 2030-31 तक जारी रखने से कृषि निवेश, उत्पादकता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलेगी। विकसित भारत की यात्रा में करोड़ों किसानों की भूमिका और सशक्त होगी।


    पानी पर तैरेंगे सोलर प्लांट

    पीएम सूर्य घर योजना के बाद अब सरकार ने प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत बांध, जलाशय और पोखर में बिजली उत्पादन के लिए सोलर पैनल लगाए जाएंगे। पांच वर्ष तक चलने वाली इस योजना पर करीब 5,070 करोड़ रुपये खर्च होंगे। केंद्रीय मंत्री अश्वनी वैष्णव ने कहा, देश में जलाशयों के जरिये 102.18 गीगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता है। बिजली की अधिकतम मांग को पूरा करने के लिए दो घंटे का स्टोरेज भी रखा जाएगा।


    ‘खेलो इंडिया’ पर 36 हजार करोड़ खर्च होंगे

    केंद्रीय मंत्रिमंडल ने खेलो इंडिया योजना के विस्तारित स्वरूप और राष्ट्रीय खेल महासंघों (एएनएसएफ) को मिलने वाली वित्तीय सहायता को मंजूरी दे दी है। सरकार वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक के लिए कुल 36,441 करोड़ रुपये खर्च करेगी। सरकार ने पहली बार खेलो इंडिया फीडर स्कूल और खेलो इंडिया उत्कृष्ट विद्यालय शुरू करने का फैसला किया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि नई खेलो इंडिया योजना का बजट करीब आठ गुना बढ़ाया गया है। इसके लिए 29,054 करोड़ रुपये खर्च करने की मंजूरी दी है। राष्ट्रीय खेल महासंघ सहायता योजना के लिए 7,387 करोड़ को मंजूरी दी है। इससे भारत में 2030 में राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी और ओलंपिक की दावेदारी को मजबूती मिलेगी।


    सभी केंद्रों को एकीकृत करने की योजना

    सरकार ने कहा कि राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (एनसीओई), खेलो इंडिया उत्कृष्टता केंद्र, साई प्रशिक्षण केंद्र, खेलो इंडिया मान्यता प्राप्त अकादमी, खेलो इंडिया केंद्र और सशस्त्र बलों की युवा खेल कंपनियों को एकीकृत किया जाएगा। इन सभी संस्थानों में खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय कोचिंग, खेल विज्ञान की सुविधा मिलेगी।

  • लोक सेवा गारंटी से बाहर हुई मिट्टी और बीज जांच, देरी होने पर किसान नहीं कर सकेंगे अपील

    लोक सेवा गारंटी से बाहर हुई मिट्टी और बीज जांच, देरी होने पर किसान नहीं कर सकेंगे अपील


    भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों से जुड़ी दो महत्वपूर्ण सेवाओं को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। राज्य सरकार ने खेतों की मिट्टी परीक्षण और प्रमाणित बीज नमूना परीक्षण को मध्यप्रदेश लोक सेवा गारंटी अधिनियम के दायरे से बाहर कर दिया है। इस फैसले के बाद किसानों को इन सेवाओं के लिए समयबद्ध रिपोर्ट मिलने की कानूनी गारंटी समाप्त हो गई है। साथ ही यदि रिपोर्ट मिलने में देरी होती है तो अब किसान लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत अपील भी नहीं कर सकेंगे। ऐसे समय में यह निर्णय सामने आया है जब प्रदेश में किसानों से जुड़े मुद्दे लगातार चर्चा में बने हुए हैं।

    लोक सेवा प्रबंधन विभाग ने 29 जुलाई को अधिसूचना जारी कर वर्ष 2017 में अधिसूचित दोनों सेवाओं को डी नोटिफाई कर दिया। इसके साथ ही मिट्टी नमूना परीक्षण और प्रमाणित बीज नमूना परीक्षण अब लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2010 के तहत मिलने वाली सेवाओं की सूची से बाहर हो गए हैं। इसका सीधा असर उन किसानों पर पड़ेगा जो खेती से पहले मिट्टी की गुणवत्ता और बीज की प्रमाणिकता की जांच के लिए सरकारी प्रयोगशालाओं पर निर्भर रहते हैं।

    वर्ष 2017 में राज्य सरकार ने किसानों को समयबद्ध और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इन दोनों सेवाओं को लोक सेवा गारंटी अधिनियम में शामिल किया था। इसके तहत मिट्टी परीक्षण की रिपोर्ट 30 कार्य दिवस के भीतर उपलब्ध कराने का प्रावधान था। इसके लिए सहायक मिट्टी परीक्षण अधिकारी सहायक मृदा सर्वेक्षण अधिकारी और संबंधित प्रयोगशाला प्रभारी को जिम्मेदार बनाया गया था। वहीं प्रमाणित बीज नमूना परीक्षण की रिपोर्ट 60 कार्य दिवस के भीतर देने की व्यवस्था थी जिसकी जिम्मेदारी संभागीय राज्य बीज परीक्षण प्रयोगशाला के बीज परीक्षण अधिकारी पर निर्धारित की गई थी।

    यदि निर्धारित समय सीमा में रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई जाती थी तो किसानों को कानूनी रूप से अपील करने का अधिकार प्राप्त था। मिट्टी परीक्षण के मामलों में किसान पहले जिले के उप संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास के समक्ष प्रथम अपील कर सकते थे। यदि वहां भी समाधान नहीं मिलता था तो संभागीय संयुक्त संचालक के पास द्वितीय अपील का विकल्प मौजूद था। इसी तरह बीज परीक्षण के मामलों में भी दो स्तर की अपील व्यवस्था लागू थी जिससे किसानों को समय पर सेवा सुनिश्चित कराने का अधिकार मिलता था।

    नई अधिसूचना लागू होने के बाद अब यह पूरी व्यवस्था समाप्त हो गई है। यानी अब मिट्टी और बीज परीक्षण की रिपोर्ट देने के लिए कोई वैधानिक समय सीमा लागू नहीं होगी। यदि रिपोर्ट में देरी होती है तो किसान लोक सेवा गारंटी कानून के तहत जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ शिकायत या अपील भी नहीं कर पाएंगे। इससे समयबद्ध सेवा की कानूनी बाध्यता खत्म हो गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि मिट्टी परीक्षण खेती की उत्पादकता बढ़ाने और सही उर्वरक प्रबंधन के लिए बेहद जरूरी प्रक्रिया है जबकि प्रमाणित बीज परीक्षण किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में इन सेवाओं के लिए समयबद्ध व्यवस्था समाप्त होने से किसानों को रिपोर्ट मिलने में देरी का सामना करना पड़ सकता है जिसका असर बुवाई और फसल प्रबंधन पर भी पड़ सकता है।

    सरकार की ओर से इस बदलाव के पीछे प्रशासनिक कारण बताए जा सकते हैं लेकिन किसानों के लिए यह फैसला कई सवाल भी खड़े करता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि लोक सेवा गारंटी से बाहर होने के बावजूद कृषि विभाग इन सेवाओं को कितनी पारदर्शिता और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध करा पाता है।

  • अपनी मांगों को लेकर भोपाल पहुंचे किसान, सड़क पर बनाई दाल-बाटी, सीएम हाउस का घेराव करने पर अड़े

    अपनी मांगों को लेकर भोपाल पहुंचे किसान, सड़क पर बनाई दाल-बाटी, सीएम हाउस का घेराव करने पर अड़े


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मूंग की फसल की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर पूरी खरीदी की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन तेज हो गया है। नर्मदापुरम, हरदा, सीहोर, रायसेन, विदिशा समेत मालवा और नर्मदापुरम संभाग के 19 किसान संगठनों के बैनर तले हजारों किसान भोपाल पहुंच गए हैं। प्रदर्शनकारी वीर सावरकर सेतु पर डटे हुए हैं, जहां उन्होंने सड़क किनारे कंडों पर दाल-बाटी बनाकर अपना विरोध दर्ज कराया।

    किसानों का कहना है कि लंबा आंदोलन जारी रखने के लिए वे अपने साथ भोजन की पूरी व्यवस्था लेकर आए हैं। सड़क किनारे कंडों पर बाटियां सेंकी जा रही हैं और दाल तैयार की जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan और मुख्यमंत्री Mohan Yadav को भी दाल-बाटी खाने का आमंत्रण दिया है।

    किसानों के आंदोलन को देखते हुए कलेक्टर ने नर्मदापुरम रोड स्थित सभी सरकारी और निजी स्कूलों में आज अवकाश घोषित किया है। कलेक्टर के आदेश के बाद क्षेत्र के सभी स्कूल आज बंद रहेंगे। किसानों का बुधवार को मुख्यमंत्री निवास की ओर कूच करने का दावा है। किसान मूंग की 100% सरकारी खरीद और खाद वितरण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर भोपाल पहुंचे हैं। किसान नेताओं का कहना है कि वे मुख्यमंत्री निवास के सामने धरना देंगे और मांगें पूरी होने तक वापस नहीं लौटेंगे।

    ट्रैक्टर-ट्रॉली ही बना ठिकाना
    आंदोलन में शामिल किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में ही भोजन, बिस्तर और जरूरी सामान लेकर आए हैं। उनका कहना है कि पुलिस जहां रोकेगी या रात जहां होगी, वहीं ट्रॉली में रुक जाएंगे, लेकिन मांगें पूरी होने तक वापस नहीं लौटेंगे। आंदोलन के चलते भोपाल-नागपुर मार्ग पर यातायात भी प्रभावित हुआ है।

    सरकार ने बातचीत का दिया भरोसा
    किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री ऐदल सिंह कंसाना ने मंत्रालय में किसान प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी मांगों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि मूंग खरीदी सहित किसानों के सभी मुद्दों पर सकारात्मक विचार किया जा रहा है और सरकार किसानों के हितों के प्रति प्रतिबद्ध है।

    क्या है किसानों की मुख्य मांग?
    किसान संगठनों का आरोप है कि सरकार की मौजूदा नीति के तहत प्रति एकड़ केवल 1 क्विंटल 20 किलो मूंग ही समर्थन मूल्य पर खरीदी जा रही है, जबकि एक एकड़ में औसतन 4 से 5 क्विंटल उत्पादन होता है। सरकार ने मूंग का MSP ₹8,668 प्रति क्विंटल तय किया है।

    खुले बाजार में भारी नुकसान
    खरीदी की सीमा तय होने के कारण किसानों को बची हुई उपज खुले बाजार में ₹4,000 से ₹5,500 प्रति क्विंटल के भाव पर बेचनी पड़ रही है। किसानों का दावा है कि इससे उन्हें हर क्विंटल पर ₹3,000 से ₹4,000 तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

    हनुमान चालीसा के साथ शुरू हुआ मार्च
    संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में आंदोलन की शुरुआत नर्मदापुरम के सेठानी घाट पर धरना और हनुमान चालीसा के पाठ से हुई। तिरंगा हाथ में लेकर और “जय जवान, जय किसान” के नारे लगाते हुए किसान बुधनी होते हुए भोपाल पहुंचे। रास्ते में प्रशासन ने किसानों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन बातचीत से कोई समाधान नहीं निकल सका।