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  • कैबिनेट का बड़ा फैसला… किसानों को 2031 तक मिलती रहेगी सम्मान निधि… सूर्य सरोवर योजना भी स्वीकृति

    कैबिनेट का बड़ा फैसला… किसानों को 2031 तक मिलती रहेगी सम्मान निधि… सूर्य सरोवर योजना भी स्वीकृति


    नई दिल्ली।
    केंद्र सरकार (Central Government) ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान-Pradhan Mantri Kisan Samman Nidhi) योजना को वित्त वर्ष 2030-31 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। इस योजना के लिए 3.15 लाख करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने कहा कि किसानों की समृद्धि ही देश की समृद्धि की आधारशिला है और इसी उद्देश्य से पात्र किसान परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। यह योजना फरवरी, 2019 में शुरू की गई थी, जिसके तहत पात्र भू-स्वामी किसान परिवारों को प्रति वर्ष 6,000 रुपये की वित्तीय सहायता तीन समान किस्तों में दी जाती है।

    योजना के तहत अब तक 23 किस्तों में किसानों के खातों में 4.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि भेजी जा चुकी है। सरकार ने कहा कि योजना को वर्ष 2030-31 तक जारी रखने से कृषि निवेश, उत्पादकता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलेगी। विकसित भारत की यात्रा में करोड़ों किसानों की भूमिका और सशक्त होगी।


    पानी पर तैरेंगे सोलर प्लांट

    पीएम सूर्य घर योजना के बाद अब सरकार ने प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत बांध, जलाशय और पोखर में बिजली उत्पादन के लिए सोलर पैनल लगाए जाएंगे। पांच वर्ष तक चलने वाली इस योजना पर करीब 5,070 करोड़ रुपये खर्च होंगे। केंद्रीय मंत्री अश्वनी वैष्णव ने कहा, देश में जलाशयों के जरिये 102.18 गीगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता है। बिजली की अधिकतम मांग को पूरा करने के लिए दो घंटे का स्टोरेज भी रखा जाएगा।


    ‘खेलो इंडिया’ पर 36 हजार करोड़ खर्च होंगे

    केंद्रीय मंत्रिमंडल ने खेलो इंडिया योजना के विस्तारित स्वरूप और राष्ट्रीय खेल महासंघों (एएनएसएफ) को मिलने वाली वित्तीय सहायता को मंजूरी दे दी है। सरकार वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक के लिए कुल 36,441 करोड़ रुपये खर्च करेगी। सरकार ने पहली बार खेलो इंडिया फीडर स्कूल और खेलो इंडिया उत्कृष्ट विद्यालय शुरू करने का फैसला किया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि नई खेलो इंडिया योजना का बजट करीब आठ गुना बढ़ाया गया है। इसके लिए 29,054 करोड़ रुपये खर्च करने की मंजूरी दी है। राष्ट्रीय खेल महासंघ सहायता योजना के लिए 7,387 करोड़ को मंजूरी दी है। इससे भारत में 2030 में राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी और ओलंपिक की दावेदारी को मजबूती मिलेगी।


    सभी केंद्रों को एकीकृत करने की योजना

    सरकार ने कहा कि राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (एनसीओई), खेलो इंडिया उत्कृष्टता केंद्र, साई प्रशिक्षण केंद्र, खेलो इंडिया मान्यता प्राप्त अकादमी, खेलो इंडिया केंद्र और सशस्त्र बलों की युवा खेल कंपनियों को एकीकृत किया जाएगा। इन सभी संस्थानों में खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय कोचिंग, खेल विज्ञान की सुविधा मिलेगी।

  • लोक सेवा गारंटी से बाहर हुई मिट्टी और बीज जांच, देरी होने पर किसान नहीं कर सकेंगे अपील

    लोक सेवा गारंटी से बाहर हुई मिट्टी और बीज जांच, देरी होने पर किसान नहीं कर सकेंगे अपील


    भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों से जुड़ी दो महत्वपूर्ण सेवाओं को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। राज्य सरकार ने खेतों की मिट्टी परीक्षण और प्रमाणित बीज नमूना परीक्षण को मध्यप्रदेश लोक सेवा गारंटी अधिनियम के दायरे से बाहर कर दिया है। इस फैसले के बाद किसानों को इन सेवाओं के लिए समयबद्ध रिपोर्ट मिलने की कानूनी गारंटी समाप्त हो गई है। साथ ही यदि रिपोर्ट मिलने में देरी होती है तो अब किसान लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत अपील भी नहीं कर सकेंगे। ऐसे समय में यह निर्णय सामने आया है जब प्रदेश में किसानों से जुड़े मुद्दे लगातार चर्चा में बने हुए हैं।

    लोक सेवा प्रबंधन विभाग ने 29 जुलाई को अधिसूचना जारी कर वर्ष 2017 में अधिसूचित दोनों सेवाओं को डी नोटिफाई कर दिया। इसके साथ ही मिट्टी नमूना परीक्षण और प्रमाणित बीज नमूना परीक्षण अब लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2010 के तहत मिलने वाली सेवाओं की सूची से बाहर हो गए हैं। इसका सीधा असर उन किसानों पर पड़ेगा जो खेती से पहले मिट्टी की गुणवत्ता और बीज की प्रमाणिकता की जांच के लिए सरकारी प्रयोगशालाओं पर निर्भर रहते हैं।

    वर्ष 2017 में राज्य सरकार ने किसानों को समयबद्ध और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इन दोनों सेवाओं को लोक सेवा गारंटी अधिनियम में शामिल किया था। इसके तहत मिट्टी परीक्षण की रिपोर्ट 30 कार्य दिवस के भीतर उपलब्ध कराने का प्रावधान था। इसके लिए सहायक मिट्टी परीक्षण अधिकारी सहायक मृदा सर्वेक्षण अधिकारी और संबंधित प्रयोगशाला प्रभारी को जिम्मेदार बनाया गया था। वहीं प्रमाणित बीज नमूना परीक्षण की रिपोर्ट 60 कार्य दिवस के भीतर देने की व्यवस्था थी जिसकी जिम्मेदारी संभागीय राज्य बीज परीक्षण प्रयोगशाला के बीज परीक्षण अधिकारी पर निर्धारित की गई थी।

    यदि निर्धारित समय सीमा में रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई जाती थी तो किसानों को कानूनी रूप से अपील करने का अधिकार प्राप्त था। मिट्टी परीक्षण के मामलों में किसान पहले जिले के उप संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास के समक्ष प्रथम अपील कर सकते थे। यदि वहां भी समाधान नहीं मिलता था तो संभागीय संयुक्त संचालक के पास द्वितीय अपील का विकल्प मौजूद था। इसी तरह बीज परीक्षण के मामलों में भी दो स्तर की अपील व्यवस्था लागू थी जिससे किसानों को समय पर सेवा सुनिश्चित कराने का अधिकार मिलता था।

    नई अधिसूचना लागू होने के बाद अब यह पूरी व्यवस्था समाप्त हो गई है। यानी अब मिट्टी और बीज परीक्षण की रिपोर्ट देने के लिए कोई वैधानिक समय सीमा लागू नहीं होगी। यदि रिपोर्ट में देरी होती है तो किसान लोक सेवा गारंटी कानून के तहत जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ शिकायत या अपील भी नहीं कर पाएंगे। इससे समयबद्ध सेवा की कानूनी बाध्यता खत्म हो गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि मिट्टी परीक्षण खेती की उत्पादकता बढ़ाने और सही उर्वरक प्रबंधन के लिए बेहद जरूरी प्रक्रिया है जबकि प्रमाणित बीज परीक्षण किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में इन सेवाओं के लिए समयबद्ध व्यवस्था समाप्त होने से किसानों को रिपोर्ट मिलने में देरी का सामना करना पड़ सकता है जिसका असर बुवाई और फसल प्रबंधन पर भी पड़ सकता है।

    सरकार की ओर से इस बदलाव के पीछे प्रशासनिक कारण बताए जा सकते हैं लेकिन किसानों के लिए यह फैसला कई सवाल भी खड़े करता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि लोक सेवा गारंटी से बाहर होने के बावजूद कृषि विभाग इन सेवाओं को कितनी पारदर्शिता और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध करा पाता है।

  • अपनी मांगों को लेकर भोपाल पहुंचे किसान, सड़क पर बनाई दाल-बाटी, सीएम हाउस का घेराव करने पर अड़े

    अपनी मांगों को लेकर भोपाल पहुंचे किसान, सड़क पर बनाई दाल-बाटी, सीएम हाउस का घेराव करने पर अड़े


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मूंग की फसल की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर पूरी खरीदी की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन तेज हो गया है। नर्मदापुरम, हरदा, सीहोर, रायसेन, विदिशा समेत मालवा और नर्मदापुरम संभाग के 19 किसान संगठनों के बैनर तले हजारों किसान भोपाल पहुंच गए हैं। प्रदर्शनकारी वीर सावरकर सेतु पर डटे हुए हैं, जहां उन्होंने सड़क किनारे कंडों पर दाल-बाटी बनाकर अपना विरोध दर्ज कराया।

    किसानों का कहना है कि लंबा आंदोलन जारी रखने के लिए वे अपने साथ भोजन की पूरी व्यवस्था लेकर आए हैं। सड़क किनारे कंडों पर बाटियां सेंकी जा रही हैं और दाल तैयार की जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan और मुख्यमंत्री Mohan Yadav को भी दाल-बाटी खाने का आमंत्रण दिया है।

    किसानों के आंदोलन को देखते हुए कलेक्टर ने नर्मदापुरम रोड स्थित सभी सरकारी और निजी स्कूलों में आज अवकाश घोषित किया है। कलेक्टर के आदेश के बाद क्षेत्र के सभी स्कूल आज बंद रहेंगे। किसानों का बुधवार को मुख्यमंत्री निवास की ओर कूच करने का दावा है। किसान मूंग की 100% सरकारी खरीद और खाद वितरण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर भोपाल पहुंचे हैं। किसान नेताओं का कहना है कि वे मुख्यमंत्री निवास के सामने धरना देंगे और मांगें पूरी होने तक वापस नहीं लौटेंगे।

    ट्रैक्टर-ट्रॉली ही बना ठिकाना
    आंदोलन में शामिल किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में ही भोजन, बिस्तर और जरूरी सामान लेकर आए हैं। उनका कहना है कि पुलिस जहां रोकेगी या रात जहां होगी, वहीं ट्रॉली में रुक जाएंगे, लेकिन मांगें पूरी होने तक वापस नहीं लौटेंगे। आंदोलन के चलते भोपाल-नागपुर मार्ग पर यातायात भी प्रभावित हुआ है।

    सरकार ने बातचीत का दिया भरोसा
    किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री ऐदल सिंह कंसाना ने मंत्रालय में किसान प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी मांगों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि मूंग खरीदी सहित किसानों के सभी मुद्दों पर सकारात्मक विचार किया जा रहा है और सरकार किसानों के हितों के प्रति प्रतिबद्ध है।

    क्या है किसानों की मुख्य मांग?
    किसान संगठनों का आरोप है कि सरकार की मौजूदा नीति के तहत प्रति एकड़ केवल 1 क्विंटल 20 किलो मूंग ही समर्थन मूल्य पर खरीदी जा रही है, जबकि एक एकड़ में औसतन 4 से 5 क्विंटल उत्पादन होता है। सरकार ने मूंग का MSP ₹8,668 प्रति क्विंटल तय किया है।

    खुले बाजार में भारी नुकसान
    खरीदी की सीमा तय होने के कारण किसानों को बची हुई उपज खुले बाजार में ₹4,000 से ₹5,500 प्रति क्विंटल के भाव पर बेचनी पड़ रही है। किसानों का दावा है कि इससे उन्हें हर क्विंटल पर ₹3,000 से ₹4,000 तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

    हनुमान चालीसा के साथ शुरू हुआ मार्च
    संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में आंदोलन की शुरुआत नर्मदापुरम के सेठानी घाट पर धरना और हनुमान चालीसा के पाठ से हुई। तिरंगा हाथ में लेकर और “जय जवान, जय किसान” के नारे लगाते हुए किसान बुधनी होते हुए भोपाल पहुंचे। रास्ते में प्रशासन ने किसानों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन बातचीत से कोई समाधान नहीं निकल सका।

  • MP: मंदसौर में फसल बीमा राशि बहुत कम मिलने से किसानों में आक्रोश… किया प्रदर्शन

    MP: मंदसौर में फसल बीमा राशि बहुत कम मिलने से किसानों में आक्रोश… किया प्रदर्शन


    मंदसौर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मंदसौर जिले (Mandsaur district) की दलौदा तहसील में सोमवार शाम खरीफ 2025 की फसल बीमा राशि (Crop Insurance Amount) को लेकर किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया। किसानों का आरोप है कि उन्हें फसल नुकसान के बदले मात्र 55 से 60 रुपए प्रति बीघा तक की बीमा राशि मिली है, जो बेहद कम है। सैकड़ों किसानों ने तहसील कार्यालय पहुंचकर बीमा कंपनी के खिलाफ नारेबाजी की और मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।

    किसानों ने बताया कि उन्हें फसल नुकसान के बाद उचित मुआवजे की उम्मीद थी, लेकिन इतनी कम राशि मिलने से वे ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उन्होंने बीमा कंपनी के अधिकारियों के प्रति नाराजगी व्यक्त करते हुए बीमा राशि का दोबारा मूल्यांकन कर उचित भुगतान करने की मांग की।

    प्रदर्शन के दौरान ग्राम बेहपुर के किसानों ने एक अलग ज्ञापन सौंपा। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदसौर जिले के अधिकांश गांवों में खरीफ 2025 की फसल बीमा राशि वितरित हो चुकी है, लेकिन बेहपुर के किसानों को अब तक कोई राशि नहीं मिली है।

    बेहपुर के किसानों के अनुसार, वर्ष 2025 में उनके गांव में खरीफ फसल को भारी नुकसान हुआ था। उनके आसपास के गांवों के किसानों को बीमा राशि मिल गई है, लेकिन बेहपुर के किसानों को इस लाभ से वंचित रखा गया है, जिससे उनमें गहरा आक्रोश है।

    मुख्यमंत्री के नाम दिए गए ज्ञापन में किसानों ने मांग की है कि बीमा कंपनी को निर्देश दिए जाएं कि ग्राम बेहपुर सहित जिन किसानों को अब तक फसल बीमा राशि नहीं मिली है, उन्हें जल्द से जल्द पात्रता के अनुसार भुगतान किया जाए। साथ ही, जिन किसानों को बेहद कम राशि मिली है, उनके मामलों की पुनः जांच कर उचित मुआवजा दिया जाए। इस संबंध में तहसीलदार बृजेश मालवीय ने किसानों को आश्वासन दिया कि उनके ज्ञापन को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा।

  • SAIL की जमीन पर बने कथित अवैध दफ्तर पर प्रशासन की कार्रवाई, बर्नपुर में चार कार्यालय हटाए गए

    SAIL की जमीन पर बने कथित अवैध दफ्तर पर प्रशासन की कार्रवाई, बर्नपुर में चार कार्यालय हटाए गए

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में इन दिनों डीजल आपूर्ति को लेकर स्थिति गंभीर चर्चा का विषय बनी हुई है। भीषण गर्मी और खरीफ सीजन की तैयारियों के बीच किसानों को पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों का सामना करना पड़ रहा है। कई ग्रामीण इलाकों में स्थिति ऐसी बन गई है कि किसान 50 से 80 किलोमीटर दूर तक डीजल लेने के लिए यात्रा करने को मजबूर हैं। इससे खेती की तैयारियों पर असर पड़ने की आशंका गहराने लगी है।

    बुलढाणा, वाशिम और आसपास के जिलों में पेट्रोल पंपों पर ट्रैक्टरों और डीजल कैनों की लंबी लाइनें देखी जा रही हैं। किसान सुबह से ही पंपों पर पहुंचकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन कई जगहों पर उन्हें पर्याप्त मात्रा में डीजल नहीं मिल पा रहा। इस स्थिति ने किसानों के बीच चिंता और असंतोष दोनों को बढ़ा दिया है।

    वाशिम जिले के कई किसान बताते हैं कि उन्हें अपने ही क्षेत्र में डीजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा, जिसके चलते उन्हें अकोला जैसे जिलों का रुख करना पड़ रहा है। एक किसान के अनुसार, उन्होंने कई पेट्रोल पंपों के चक्कर लगाए, लेकिन अंततः बहुत कम मात्रा में डीजल मिल पाया, जिससे उनकी खेती की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही।

    इस बीच अकोला जिले की स्थिति थोड़ी अलग बताई जा रही है। यहां बड़े डिपो होने के कारण डीजल उपलब्ध तो है, लेकिन आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में किसानों के पहुंचने के कारण पंपों पर दबाव काफी बढ़ गया है। पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि वास्तविक कमी की बजाय यह स्थिति अचानक बढ़ी मांग और घबराहट के कारण बनी है।

    अधिकारियों और पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन के अनुसार पिछले कुछ दिनों में डीजल की बिक्री में 30 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। उनका कहना है कि ट्रांसपोर्टेशन में देरी के कारण सप्लाई समय पर नहीं पहुंच पा रही, जिससे कुछ पंपों पर अस्थायी रूप से स्टॉक कम हो जाता है और लोगों में डर बढ़ जाता है।

    अकोला के एक पेट्रोल पंप संचालक का कहना है कि उनके पास डीजल की पर्याप्त उपलब्धता है, लेकिन भीड़ बढ़ने से दबाव जरूर महसूस किया जा रहा है। उनका यह भी कहना है कि किसान जरूरत से ज्यादा डीजल खरीदने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे स्थिति और बिगड़ रही है।

    हालांकि किसानों का तर्क है कि खरीफ सीजन की तैयारी के लिए समय पर जुताई और बुवाई जरूरी है, और डीजल की अनुपलब्धता से उनकी खेती प्रभावित हो सकती है। तेज धूप और 45 से 46 डिग्री तक पहुंचते तापमान में किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

    इस पूरे मामले में दो अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। एक ओर किसान डीजल की कमी और लंबी कतारों की शिकायत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पेट्रोल पंप संचालक इसे पैनिक और अफवाह का परिणाम बता रहे हैं।

    फिलहाल स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन इतना तय है कि अगर सप्लाई और वितरण व्यवस्था समय पर दुरुस्त नहीं हुई, तो खरीफ सीजन की खेती पर इसका सीधा असर पड़ सकता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।

  • MP सरकार का किसानों के हित में बड़ा फैसला… गेहूं खरीदी के लिए स्लॉट बुकिंग की डेडलाइन बढ़ाई

    MP सरकार का किसानों के हित में बड़ा फैसला… गेहूं खरीदी के लिए स्लॉट बुकिंग की डेडलाइन बढ़ाई


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) ने किसानों के हित में गेहूं खरीद (Purchasing wheat) के लिए स्लॉट बुकिंग (Slot Booking) की समय-सीमा बढ़ाकर 23 मई 2026 कर दी है ताकि कोई भी किसान एमएसपी के लाभ से वंचित न रहे। मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने सोमवार को यह घोषणा की। पहले इसकी अंतिम तिथि नौ मई थी। एक अधिकारी ने बताया कि यह फैसला इस उद्देश्य से लिया गया है कि समर्थन मूल्य योजना से कोई भी किसान वंचित न रह जाए।

    चना और मसूर की खरीद की डेडलाइन
    अधिकारी के अनुसार, दो मई तक राज्य में किसानों से 34.73 टन गेहूं की खरीद की जा चुकी है। साल 2026 के लिए मूल्य समर्थन योजना के तहत लगभग 600 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। चना और मसूर की खरीद की डेडलाइन 30 मार्च से 28 मई तक निर्धारित की गई है।

    सरकार ने चना के लिए 6.49 लाख टन और मसूर के लिए 6.01 लाख टन खरीद का लक्ष्य तय किया है, जबकि अरहर की 1.31 लाख टन खरीद का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि खरीदी गई उपज का भुगतान सीधे किसानों के खातों में किया जा रहा है।

    अधिकारी ने बताया कि किसानों की उपज की सुरक्षा के लिए खाद्यान्न भंडारण योजना के तहत लगभग 3.55 लाख टन क्षमता का भंडारण तैयार किया गया है। सामग्री भंडारण योजना के अंतर्गत 1.5 लाख टन क्षमता के आधुनिक गोदाम बनाए जा रहे हैं, जिनमें से 1.1 लाख टन क्षमता वाले गोदामों का पंजीकरण पूरा हो चुका है।


    भूमि और फसल का होगा पूरा डिजिटल रिकॉर्ड

    सीएम मोहन यादव ने बताया कि ‘ई-विकास’ और ‘ई-किसान’ प्रणाली के जरिए किसानों को योजनाओं, बाजार भाव, मौसम और तकनीकी जानकारी मोबाइल पर उपलब्ध कराई जा रही है। एक अप्रैल से राज्य के सभी जिलों में लागू ई-किसान प्रणाली के तहत हर किसान को एक विशिष्ट आईडी दी जा रही है, जिसमें उसकी भूमि और फसल का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड होगा।


    हर खेत का किया जा रहा भू-टैगिंग

    किसान रजिस्ट्री के माध्यम से प्रत्येक खेत का भू-टैगिंग किया जा रहा है, जिससे फसल बीमा, नुकसान का आकलन और ड्रोन से छिड़काव में सुविधा होगी।


    1,000 से अधिक कृषि ड्रोन आपरेटरों को ट्रेनिंग

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में मध्य प्रदेश देश और दुनिया में अग्रणी है, जहां 53 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में खेती हो रही है और 6,000 से अधिक संकुल बनाए गए हैं। उन्होंने बताया कि आधुनिक कृषि प्रणाली के तहत 1,000 से अधिक कृषि ड्रोन ऑपरेटरों को जैविक कीटनाशकों के छिड़काव के लिए प्रशिक्षित किया गया है।

  • किसानों के लिए अलर्ट: PM Kisan योजना में सख्ती, 23वीं किस्त पाने से पहले पूरे करने होंगे ये नियम

    किसानों के लिए अलर्ट: PM Kisan योजना में सख्ती, 23वीं किस्त पाने से पहले पूरे करने होंगे ये नियम

    नई दिल्ली । देश के करोड़ों किसानों के लिए राहत देने वाली प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना एक बार फिर चर्चा में है। 23वीं किस्त जारी होने से पहले किसानों के लिए एक अहम संदेश सामने आया है, जिसमें साफ किया गया है कि यदि जरूरी प्रक्रियाएं पूरी नहीं की गईं तो आर्थिक सहायता मिलने में बाधा आ सकती है।

    इस योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल छह हजार रुपये की सहायता दी जाती है, जो तीन किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाती है। हाल ही में 22वीं किस्त जारी होने के बाद अब सभी लाभार्थी अगली किस्त का इंतजार कर रहे हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि 23वीं किस्त गर्मियों के बाद यानी जून के अंत या जुलाई 2026 की शुरुआत में जारी हो सकती है।

    लेकिन इस बार किस्त जारी होने से पहले प्रशासनिक स्तर पर निगरानी और सख्ती दोनों बढ़ा दी गई है। कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां अपात्र लोग भी इस योजना का लाभ ले रहे थे। इसी को देखते हुए अब पात्रता की जांच को और गहराई से किया जा रहा है। अगर किसी लाभार्थी की जानकारी गलत पाई जाती है, तो उसका नाम सूची से हटाया जा सकता है और पहले दी गई राशि की वसूली भी संभव है।

    किसानों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि तीन प्रमुख प्रक्रियाएं पूरी करना अब अनिवार्य कर दिया गया है। सबसे पहले ई-केवाईसी को अपडेट करना जरूरी है, क्योंकि इसके बिना भुगतान संभव नहीं होगा। इसके अलावा भूमि रिकॉर्ड का सत्यापन भी अनिवार्य है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लाभार्थी वास्तव में कृषि भूमि का मालिक है। तीसरी महत्वपूर्ण शर्त यह है कि बैंक खाते को आधार से लिंक होना चाहिए और डीबीटी सुविधा सक्रिय होनी चाहिए, तभी राशि सीधे खाते में पहुंच सकेगी।

    कई किसान इन औपचारिकताओं को हल्के में ले रहे हैं, लेकिन इसका सीधा असर उनकी अगली किस्त पर पड़ सकता है। सरकार की ओर से यह स्पष्ट संकेत दिए गए हैं कि अब किसी भी तरह की लापरवाही को स्वीकार नहीं किया जाएगा। योजना का उद्देश्य केवल वास्तविक और पात्र किसानों को लाभ पहुंचाना है, इसलिए सभी रिकॉर्ड का मिलान और सत्यापन लगातार किया जा रहा है।

    ग्रामीण इलाकों में इस समय किसान अपने दस्तावेजों की जांच में जुटे हैं ताकि किसी भी तरह की गलती सुधार ली जाए। कई लोग अपने स्टेटस को भी समय-समय पर देख रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनका नाम लाभार्थी सूची में बना हुआ है या नहीं।

  • गेहूं खरीदी में नया रिकॉर्ड संभव एमपी सरकार ने केंद्र से बढ़ाया कोटा मांग

    गेहूं खरीदी में नया रिकॉर्ड संभव एमपी सरकार ने केंद्र से बढ़ाया कोटा मांग


    भोपाल । भोपाल में मध्य प्रदेश सरकार ने गेहूं खरीदी को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार से निर्धारित लक्ष्य बढ़ाने की मांग की है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने जानकारी देते हुए कहा कि प्रदेश में इस बार गेहूं का उत्पादन काफी अच्छा हुआ है और मौजूदा लक्ष्य से अधिक खरीदी होने की पूरी संभावना है। ऐसे में किसानों को पूरा लाभ दिलाने के लिए केंद्र से कोटा बढ़ाने को लेकर लगातार संवाद किया जा रहा है।

    रबी विपणन वर्ष 2026 27 के लिए केंद्र सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी का लक्ष्य तय किया गया है। लेकिन प्रदेश में बंपर पैदावार और किसानों की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए यह लक्ष्य कम पड़ता नजर आ रहा है। राज्य सरकार का मानना है कि यदि लक्ष्य नहीं बढ़ाया गया तो कई किसानों को समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेचने का अवसर नहीं मिल पाएगा।

    मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार किसानों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और खरीदी प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से संचालित किया जा रहा है। पहले छोटे किसानों से गेहूं खरीदा जा रहा है इसके बाद मध्यम और अंत में बड़े किसानों की बारी आएगी ताकि सभी वर्गों को समान अवसर मिल सके।

    इस वर्ष गेहूं उपार्जन के लिए किसानों की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। करीब 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 3 लाख अधिक है। अब तक 2 लाख 21 हजार 455 किसानों से 95 लाख 17 हजार 550 क्विंटल गेहूं की खरीदी की जा चुकी है। इसमें से 75 लाख 57 हजार 580 क्विंटल गेहूं का परिवहन भी किया जा चुका है जिससे भंडारण व्यवस्था पर दबाव कम हुआ है।

    सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने वाले किसानों को तेजी से भुगतान भी किया जा रहा है। अब तक 1 लाख 6 हजार 55 किसानों को 1091 करोड़ रुपये से अधिक की राशि उनके खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है। यह पहल किसानों के विश्वास को मजबूत करने और खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर भी इस प्रक्रिया पर पड़ा है। पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी स्थितियों के कारण शुरुआती दौर में बारदानों की उपलब्धता चुनौती बनी रही लेकिन सरकार ने समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था कर स्थिति को संभाल लिया। जूट के नए बारदानों के साथ साथ पीपी बैग और पुनः उपयोग योग्य बारदानों का उपयोग किया गया जिससे खरीदी प्रक्रिया प्रभावित नहीं हुई।

    वर्तमान में किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य के साथ 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस जोड़कर कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदा जा रहा है। यह दर किसानों को बेहतर आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने में मददगार साबित हो रही है।

    प्रदेश सरकार का यह कदम न केवल किसानों को आर्थिक मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण है बल्कि यह भी दर्शाता है कि बेहतर उत्पादन के साथ नीति स्तर पर त्वरित निर्णय कितने जरूरी होते हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार राज्य की इस मांग पर क्या निर्णय लेती है और क्या वास्तव में गेहूं खरीदी का लक्ष्य बढ़ाया जाता है

  • उन्नत कृषि महोत्सव 2026 में जाफराबादी भैंस बनी पशुपालकों, किसानों का मुख्य आकर्षण

    उन्नत कृषि महोत्सव 2026 में जाफराबादी भैंस बनी पशुपालकों, किसानों का मुख्य आकर्षण


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के रायसेन जिला मुख्यालय पर आयोजित उन्नत कृषि महोत्सव 2026 में विशेष रूप से ऊंची कद-काठी और अधिक दूध उत्पादन के लिए प्रसिद्ध जाफराबादी भैंस आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। बड़ी संख्या में किसान इस भैंस की जानकारी ले रहे हैं।

    दरअसल, रायसेन के दशहरा मैदान में पशुपालकों और किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने तथा खेती में आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘कृषि कल्याण महोत्सव’ के अंतर्गत ‘उन्नत कृषि महोत्सव 2026’ प्रदर्शनी एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। तीन दिवसीय इस महोत्सव का शुभारंभ शनिवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान, पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार लखन पटेल सहित अन्य मंत्रीगण उपस्थित रहे।

    महोत्सव में केंद्र और राज्य सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं की जानकारी देने के लिए आकर्षक स्टॉल लगाए गए हैं। इन्हीं में एक स्टाल में जाफराबादी भैंस भी प्रदर्शन के लिए लाई गई हैं, जो आकर्षण का केंद्र बन गई है। इसके अलावा कुक्कुट विकास निगम, नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा महाविद्यालय जबलपुर, गो संवर्धन बोर्ड, नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड और सांची बोर्ड द्वारा भी स्टॉल लगाकर किसानों को उन्नत तकनीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है।

    महोत्सव में मध्य प्रदेश की पहचान बन चुका कड़कनाथ सहित विभिन्न उन्नत नस्लों की मुर्गियों का प्रदर्शन किया गया है। साथ ही गिर और साहीवाल नस्ल की गायों तथा मुर्रा भैंस का जीवंत प्रदर्शन कर पशुपालन के आधुनिक स्वरूप से किसानों को अवगत कराया जा रहा है। महोत्सव में संचालनालय पशुपालन एवं डेयरी विभाग डॉ. पी.एस. पटेल, नोडल अधिकारी अतिरिक्त उप संचालक अनुपम अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

  • कृषि बजट में 90 हजार करोड़ का प्रावधान, किसानों के कल्याण के लिए समर्पित है सरकार : उप मुख्यमंत्री देवड़ा

    कृषि बजट में 90 हजार करोड़ का प्रावधान, किसानों के कल्याण के लिए समर्पित है सरकार : उप मुख्यमंत्री देवड़ा


    भोपाल ।
    मध्य प्रदेश में वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाते हुए राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में कृषि क्षेत्र के लिए 90 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जो किसानों के कल्याण और कृषि विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

    उपमुख्यमंत्री देवड़ा मंगलवार को नीमच जिले के जावद में मंडी प्रांगण में आयोजित चार दिवसीय जहर मुक्त जीरो बजट कृषि प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार पूरे वर्ष कृषि और किसानों से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीकों और नई पद्धतियों से जोड़ने का प्रयास कर रही है।उपमुख्यमंत्रीदेवड़ा ने किसानों से आह्वान किया कि प्रशिक्षण शिविर में उन्होंने जो भी नई तकनीकें और अनुभव प्राप्त किए हैं, उन्हें अपनी खेती में लागू करें ताकि उत्पादन बढ़ाने के साथ लागत को कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक और कम लागत वाली खेती की दिशा में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं।

    उपमुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार किसानों के हित में अनेक योजनाएं संचालित कर रही हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि आयुष्मान भारत के माध्यम से गरीब परिवारों को 5 लाख रुपये तक के नि:शुल्क उपचार की सुविधा मिल रही है, वहीं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के जरिए किसानों के खातों में सीधे आर्थिक सहायता पहुंचाई जा रही है।

    देवड़ा ने कहा कि यदि हर व्यक्ति अपने-अपने क्षेत्र में पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करे तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का वर्ष 2047 तक विकसित भारत का सपना अवश्य साकार होगा। उन्होंने प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल आयोजन की सराहना करते हुए किसानों को आधुनिक तकनीक और ज्ञान के साथ खेती को और अधिक समृद्ध बनाने का संदेश दिया। समारोह में बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। इस अवसर पर विधायक ओमप्रकाश सखलेचा, दिलीप सिंह परिहार, अनिरूद्ध मारू सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।