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  • आज रंग पंचमी पर लगाएं लड्डू गोपाल को ये प्रिय भोग, घर में बनी रहेगी सुख, समृद्धि और खुशहाली

    आज रंग पंचमी पर लगाएं लड्डू गोपाल को ये प्रिय भोग, घर में बनी रहेगी सुख, समृद्धि और खुशहाली


    नई दिल्ली । रंग पंचमी का त्योहार भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और उनकी लीलाओं से जुड़ा हुआ माना जाता है। होली के पांच दिन बाद आने वाला यह पर्व भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है और इस दिन कई घरों और मंदिरों में लड्डू गोपाल का श्रृंगार और पूजा होती है। माना जाता है कि जिस घर में लड्डू गोपाल की सेवा होती है वहां हमेशा सुख समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है।

    भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल को बच्चे की तरह ही समझा जाता है। उनकी देखभाल और पूजा भी उसी तरह की जाती है जैसे घर के छोटे बच्चों की। त्योहारों के समय उनके लिए विशेष मिठाइयाँ और व्यंजन बनाना एक परंपरा रही है। रंग पंचमी पर भी भक्त लड्डू गोपाल का श्रृंगार करते हैं और उन्हें स्वादिष्ट भोग अर्पित करते हैं।

    इस दिन लड्डू गोपाल को भोग लगाना बेहद शुभ माना जाता है। सबसे प्रिय माना जाने वाला भोग गुजिया है। होली के समय बनने वाली यह मिठाई भगवान को बहुत प्रिय मानी जाती है। कई घरों और मंदिरों में रंग पंचमी पर सबसे पहले गुजिया लड्डू गोपाल को अर्पित की जाती है। माना जाता है कि इससे भगवान प्रसन्न होते हैं और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। गुजिया के अलावा चंद्रकला और अन्य पारंपरिक मिठाइयाँ भी भोग में लगाई जाती हैं।

    भगवान श्रीकृष्ण को दही बहुत प्रिय है इसलिए इस दिन लड्डू गोपाल को दही या मीठी दही का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है। अगर घर में दही से कोई व्यंजन उपलब्ध हो तो उसे भी अर्पित किया जा सकता है। केवल दही और चीनी मिलाकर भोग लगाना भी भगवान को प्रिय होता है और इससे परिवार में प्रेम और आपसी सद्भाव बना रहता है।

    जलेबी और मालपुए का भोग भी इस दिन लगाना विशेष लाभकारी माना जाता है। कई मंदिरों में रंग पंचमी पर जलेबी और मालपुए का भोग विशेष रूप से लगाया जाता है। मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और भगवान की कृपा से घर में खुशहाली आती है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान को भोग लगाने में सबसे महत्वपूर्ण तत्व श्रद्धा और भक्ति है। अगर भक्त सच्चे मन से भोग अर्पित करता है तो भगवान प्रसन्न होते हैं। इसलिए रंग पंचमी पर लड्डू गोपाल की सेवा करते समय प्रेम और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। भोग लगाने के बाद भगवान की आरती करना और प्रसाद को परिवार में बाँटना भी शुभ माना जाता है।

    रंग पंचमी का त्योहार ब्रज क्षेत्र की परंपराओं से जुड़ा है जहां इस दिन रंगों और गुलाल के साथ भगवान कृष्ण की पूजा होती है। मंदिरों में भजन-कीर्तन और उत्सव का आयोजन किया जाता है। यह पर्व प्रेम भक्ति और आनंद का प्रतीक है और भक्त इस दिन भगवान श्रीकृष्ण से सुख समृद्धि और शांति की कामना करते हैं।

    घर में लड्डू गोपाल की पूजा सुबह स्नान के बाद करें। सबसे पहले उनका श्रृंगार करें उन्हें नए वस्त्र पहनाएं और फूलों से सजाएं। इसके बाद मिठाइयाँ और दही का भोग लगाएं भगवान की आरती करें और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करें। छोटे बच्चों को पूजा में शामिल करना भी शुभ माना जाता है क्योंकि इससे उनमें भगवान के प्रति श्रद्धा और भक्ति बढ़ती है।

  • आज का पंचांग और होलिका दहन: राहुकाल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक आयोजन

    आज का पंचांग और होलिका दहन: राहुकाल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक आयोजन

     
    नई दिल्ली :आज 3 मार्च 2026 मंगलवार को फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि है और पूरे देश में होलिका दहन का पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि आज शाम 5:07 बजे तक रहेगी और इसके बाद प्रतिपदा तिथि प्रारंभ होगी। सूर्योदय आज प्रातः 6:44 बजे होगा और सूर्यास्त सायं 6:22 बजे होगा।

    चंद्रमा आज सिंह राशि में मघा नक्षत्र में विराजमान हैं और यह नक्षत्र प्रातः 7:31 बजे तक रहेगा। मघा नक्षत्र के देवता पितृ माने गए हैं, इसलिए आज का दिन पूर्वजों के स्मरण, आशीर्वाद और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत फलदायी है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि इस दिन की पूजा और धार्मिक अनुष्ठान विशेष फलदायक होते हैं। चंद्रोदय सायं 6:21 बजे होगा और चंद्रास्त नहीं होगा, जिससे पूर्णिमा की रात विशेष महत्व रखती है।

    ग्रहों की स्थिति पर नजर डालें तो सूर्य, मंगल, बुध और राहु कुंभ राशि में स्थित हैं। गुरु बृहस्पति मिथुन राशि में, जबकि शुक्र और शनि मीन राशि में विराजमान हैं और केतु सिंह राशि में हैं। इन ग्रहों की स्थिति सामाजिक सक्रियता और धार्मिक आयोजनों को बल देने वाली मानी जाती है।

    आज का योग ‘सुकर्मा’ है, जो प्रातः 10:25 बजे तक रहेगा। यह योग नए कार्यों की शुरुआत और प्रतिष्ठा में वृद्धि के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। करण बव आज सायं 5:07 बजे तक रहेगा और इसके बाद अगले दिन प्रातः 4:54 बजे तक अन्य करण प्रभावी रहेगा।

    शुभ मुहूर्त की बात करें तो अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:10 बजे से 12:56 बजे तक है। इस दौरान महत्वपूर्ण निर्णय लेना, पूजा-अर्चना करना और नए कार्य की शुरुआत करना लाभकारी माना जाता है। अमृत काल 4 मार्च की प्रातः 1:13 बजे से 2:49 बजे तक रहेगा।

    अशुभ समय में राहुकाल दोपहर 3:28 बजे से 4:55 बजे तक रहेगा, इस दौरान किसी भी महत्वपूर्ण कार्य से बचना चाहिए। गुलिकाल दोपहर 12:33 बजे से 2:00 बजे तक है और यमगण्ड प्रातः 9:39 बजे से 11:06 बजे तक रहेगा। धार्मिक विशेषज्ञों का कहना है कि राहुकाल के समय किसी भी निर्णय या पूजा से बचना चाहिए और शुभ मुहूर्त का ही पालन करना चाहिए।

    देशभर में होलिका दहन की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। पूर्णिमा तिथि पर विधिपूर्वक पूजा-अर्चना और रात्रि में होलिका दहन का आयोजन किया जाएगा। धार्मिक आस्थावानों को सलाह दी गई है कि इस दिन दान-पुण्य करें, पारिवारिक एकता बनाए रखें और आध्यात्मिक साधना में समय दें।

    पूर्णिमा और मघा नक्षत्र का यह संयोजन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी है। यह दिन न केवल धार्मिक अनुष्ठानों के लिए उपयुक्त है बल्कि सामाजिक और पारिवारिक मेल-जोल के लिए भी महत्वपूर्ण है। पंचांग के जानकारों के अनुसार इस दिन पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान करने से मनोकामना पूरी होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    आज का दिन आध्यात्मिक जागरूकता और धार्मिक गतिविधियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। राहुकाल में सतर्क रहने और शुभ मुहूर्त का लाभ उठाने से सभी कार्य सफल और फलदायी होंगे। होलिका दहन के साथ यह पूर्णिमा तिथि जीवन में अच्छाई और समृद्धि का संदेश लेकर आती है।

  • होली पर चंद्र ग्रहण का साया, सूतक काल ने बदला होलिका दहन का समय, जानें पूजा का सही मुहूर्त

    होली पर चंद्र ग्रहण का साया, सूतक काल ने बदला होलिका दहन का समय, जानें पूजा का सही मुहूर्त


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में होलिका दहन का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, लेकिन इस साल 3 मार्च 2026 को होलिका दहन पर भद्रा और चंद्र ग्रहण का एक साथ होना चिंता का विषय बना हुआ है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, भद्रा काल और ग्रहण का सूतक काल दोनों ही समय किसी भी मांगलिक या शुभ कार्य के लिए वर्जित माने जाते हैं।

    ऐसे में भक्तों के मन में यह सवाल है कि दोष से बचने के लिए होलिका कब जलाई जाए। पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 3 मार्च को शाम 05:07 बजे समाप्त हो जाएगी, लेकिन शास्त्रों के नियम और ग्रहण की शुद्धि के अनुसार ही दहन का समय तय करना उचित रहेगा।

    सूतक काल और चंद्र ग्रहण का प्रभाव

    भारतीय के समय के अनुसार, 3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण का प्रभाव शाम 06:26 बजे चंद्रोदय के साथ ही दिखने लगेगा और यह शाम 06:46 बजे समाप्त होगा। हालांकि, ग्रहण की विभिन्न अवस्थाएं दोपहर 02:16 बजे से ही शुरू हो जाएंगी, लेकिन सूतक काल का विशेष महत्व होता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सूतक काल सुबह 09:39 बजे से ही प्रारंभ हो जाएगा, जो शाम 06:46 बजे ग्रहण की समाप्ति तक रहेगा। सूतक काल के दौरान किसी भी प्रकार की पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठान की मनाही होती है, इसलिए होलिका दहन की रस्में शाम 06:46 बजे के बाद ही की जानी चाहिए।

    भद्रा का समय और दहन का मुहूर्त

    होलिका दहन के लिए भद्रा का विचार करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि भद्रा मुख में किया गया दहन अशुभ फल दे सकता है। इस वर्ष 3 मार्च को भद्रा देर रात यानी 4 मार्च की सुबह 01:25 बजे से शुरू होगी। इसलिए शाम के समय भद्रा का कोई दोष नहीं रहेगा।

    होलिका दहन का सबसे सटीक और शुभ मुहूर्त शाम 06:47 बजे (ग्रहण समाप्ति) के बाद से लेकर रात 08:50 बजे तक रहेगा। यह वह समय है जब आप बिना किसी भय या दोष के होलिका दहन कर सकते हैं। ग्रहण के तुरंत बाद किया गया यह दहन नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने की प्रबल संभावना रखता है।

    दोष से मुक्ति के सरल नियम

    भद्रा और सूतक के दोष से बचने के लिए सहजता के साथ कुछ नियमों का पालन करना चाहिए। ग्रहण काल के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का निरंतर मानसिक जाप करते रहें, जिससे वातावरण की नकारात्मकता का आप पर प्रभाव न पड़े। शाम को ग्रहण समाप्त होने के बाद पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें और फिर शुद्ध मुहूर्त में होलिका पूजन करें।

    होलिका की अग्नि में अनाज और नारियल अर्पित करना घर में सुख-शांति लाता है। माना जाता है कि इन नियमों का पालन करने से किसी भी प्रकार के ग्रहों की उग्रता शांत होती है और घर के संचालन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।

  • क्रिसमस 2025 का सुपर स्पेशल संयोग: 25/12/25, 100 साल में सिर्फ एक बार

    क्रिसमस 2025 का सुपर स्पेशल संयोग: 25/12/25, 100 साल में सिर्फ एक बार


    नई दिल्ली: 25 दिसंबर 2025 का क्रिसमस इस बार सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि एक दुर्लभ कैलेंडर संयोग लेकर आ रहा है। तारीख 25/12/25 में दिन (25), महीना (12) और साल (25) का अद्भुत मेल देखने को मिलेगा। यह पैटर्न पूरे 100 साल में सिर्फ एक बार बनता है, जिससे यह क्रिसमस और भी ऐतिहासिक और यादगार बन गया है।

    100 साल में एक बार बनता है यह संयोग

    ऐसे दुर्लभ पैटर्न का पिछला उदाहरण 1925 में देखा गया था और अगली बार यह 2125 में ही बनेगा। जब यह संयोग किसी बड़े वैश्विक त्योहार जैसे क्रिसमस से जुड़ता है, तो इसकी अहमियत और बढ़ जाती है। कैलेंडर प्रेमियों और न्यूमेरोलॉजी फॉलोअर्स इसे ‘वन्स इन अ सेंचुरी डेट’ भी कहते हैं।

    सोशल मीडिया पर उत्साह

    25/12/25 के इस खास संयोग को लेकर सोशल मीडिया पर 251225 तेजी से ट्रेंड कर रहा है। लोग डिजिटल कार्ड, पोस्ट, डिजाइन और खास कलेक्शन बनाने में जुट गए हैं। कई लोग इस दिन शादी, सगाई और अन्य खास आयोजनों की योजना भी बना रहे हैं, ताकि यह दिन जीवनभर यादगार बन सके।

    क्या बनाता है यह तारीख खास?

    क्रिसमस की धार्मिक परंपराएं हर साल की तरह रहेंगी-चर्च में प्रार्थना, परिवार के साथ समय बिताना, उपहारों का आदान-प्रदान और जश्न। लेकिन इस बार तारीख की दुर्लभता इसे और रोमांचक और यादगार बना रही है। कई लोग इसे शुभ संयोग मान रहे हैं और इसे विशेष तरीके से मनाने की तैयारी कर रहे हैं।

    क्रिसमस 25 दिसंबर क्यों मनाया जाता है?

    क्रिसमस, यीशु मसीह के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। हालांकि बाइबिल में उनकी सटीक जन्मतिथि दर्ज नहीं है, लेकिन ईस्वी 350 में पोप जूलियस प्रथम ने 25 दिसंबर को आधिकारिक रूप से क्रिसमस की तिथि घोषित की। यह तारीख रोमन साम्राज्य के विंटर सोल्सटिस और ‘सोल इन्विक्टस’ उत्सव के आसपास आती थी, जिससे ईसाई परंपराओं को आम लोगों में लोकप्रिय बनाना आसान हुआ।

    आज क्रिसमस कैसे मनाया जाता है

    आज क्रिसमस केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि एक वैश्विक सांस्कृतिक उत्सव बन चुका है। लोग इस दिन चर्च में प्रार्थना करते हैं, परिवार और मित्रों के साथ खुशियां बांटते हैं, उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं और घरों को रंग-बिरंगी लाइटों और क्रिसमस ट्री से सजाते हैं।

    25/12/25 का क्रिसमस भी यही सब होगा, लेकिन इस दुर्लभ तारीख की वजह से यह दिन इतिहास में और भी विशेष और यादगार बन जाएगा।