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  • काहिरा हवाई अड्डे पर जब उमड़ा था 'महानायक' के प्रशंसकों का जनसैलाब: खुद अमिताभ बच्चन ने 1991 के उस दौर को बताया था 'राष्ट्रीय संकट'

    काहिरा हवाई अड्डे पर जब उमड़ा था 'महानायक' के प्रशंसकों का जनसैलाब: खुद अमिताभ बच्चन ने 1991 के उस दौर को बताया था 'राष्ट्रीय संकट'

    नई दिल्ली । बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन की लोकप्रियता केवल भारत की सीमाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनके प्रशंसकों की संख्या करोड़ों में है। अस्सी के दशक में जब इंटरनेट और सोशल मीडिया का नामोनिशान नहीं था, तब भी सात समंदर पार मिडिल ईस्ट के देशों में उनकी दीवानगी चरम पर थी। विशेष रूप से मिस्र यानी इजिप्ट में अमिताभ बच्चन को लेकर ऐसा असाधारण क्रेज देखा गया कि वहां की तात्कालिक सरकार के लिए यह चिंता का विषय बन गया था और अंततः उन्हें एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाना पड़ा था।

    साल 1980 के दौर में मिस्र के सिनेमाघरों में जब भी अमिताभ बच्चन की कोई फिल्म लगती थी, तो टिकट खिड़कियों पर मील लंबी लाइनें लग जाती थीं। इस अभूतपूर्व दीवानगी का सीधा नुकसान मिस्र के स्थानीय फिल्म उद्योग को उठाना पड़ रहा था क्योंकि वहां के क्षेत्रीय सिनेमाघरों में दर्शकों की भारी कमी हो गई थी और सन्नाटा पसरने लगा था। अपनी घरेलू फिल्म इंडस्ट्री को मंदी से उबारने और उसे संरक्षण देने के उद्देश्य से मिस्र की सरकार ने एक कड़ा आर्थिक और सांस्कृतिक फैसला लेते हुए अमिताभ बच्चन की फिल्मों के प्रदर्शन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था।

    इस सरकारी प्रतिबंध के बावजूद वहां के आम नागरिकों के दिलों से अमिताभ बच्चन का जादू कम नहीं किया जा सका। मिस्र के लोग उनकी फिल्में देखने के लिए नए-नए रास्ते निकालने लगे और वहां के छोटे-छोटे निजी थिएटरों व बंद कमरों में चोरी-छिपे इन फिल्मों का प्रदर्शन किया जाने लगा। उस दौर में जिन लोगों के पास फिल्में देखने के साधन या टेप रिकॉर्डर उपलब्ध नहीं थे, वे हर गुरुवार को स्थानीय कैफे में बड़ी संख्या में एकत्र होते थे और केवल अमिताभ बच्चन की फिल्मों के ऑडियो गाने सुनकर ही अपनी दीवानगी पूरी किया करते थे। उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि मिस्र की एक स्थानीय फिल्म में अमिताभ बच्चन की सुपरहिट फिल्म ‘गिरफ्तार’ के एक मुख्य दृश्य को हूबहू कॉपी किया गया था।

    मिस्र में अमिताभ बच्चन के इस दबदबे का सबसे बड़ा नजारा साल 1991 में देखने को मिला जब वे काहिरा इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हिस्सा लेने के लिए अफ्रीकी महाद्वीप पहुंचे थे। काहिरा हवाई अड्डे पर उनके स्वागत और एक झलक पाने के लिए इतनी विशाल और बेकाबू भीड़ उमड़ पड़ी कि वहां की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई थी। हवाई अड्डे से लेकर शहर की सड़कों तक हालात इस कदर बेकाबू हो गए थे कि खुद अमिताभ बच्चन ने बाद में अपने एक साक्षात्कार में उस माहौल को एक ‘राष्ट्रीय संकट’ जैसी स्थिति के रूप में याद किया था।

    जिस देश की सरकार ने कभी अपनी स्थानीय फिल्म इंडस्ट्री के अस्तित्व को बचाने के लिए अमिताभ बच्चन की फिल्मों को प्रतिबंधित कर दिया था, उसी देश को आखिरकार वैश्विक कला और उनके अभिनय के सामने नतमस्तक होना पड़ा। इस ऐतिहासिक दीवानगी और सांस्कृतिक प्रभाव को स्वीकार करते हुए मिस्र सरकार ने साल 2001 में अमिताभ बच्चन को आधिकारिक तौर पर आमंत्रित किया। वहां उन्हें सिनेमा जगत के सर्वोच्च सम्मानों में से एक ‘एक्टर ऑफ द सेंचुरी’ के खिताब से नवाजा गया, जो यह साबित करता है कि कला को किसी भी देश की भौगोलिक और प्रशासनिक सीमाओं में कैद नहीं किया जा सकता।

  • श्रद्धा और आस्था के साथ बरेली में मनाया गया वट सावित्री पर्व, सुहागिन महिलाओं ने की पूजा-अर्चना

    श्रद्धा और आस्था के साथ बरेली में मनाया गया वट सावित्री पर्व, सुहागिन महिलाओं ने की पूजा-अर्चना




    बरेली । बरेली में शनिवार को वट सावित्री व्रत पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना करते हुए व्रत रखा और पारंपरिक विधि-विधान से वट वृक्ष की पूजा की। सुबह से ही शहर के मंदिरों और बरगद के पेड़ों के पास महिलाओं की भीड़ देखने को मिली।

    शहर के अलखनाथ मंदिर, त्रिवटीनाथ मंदिर, धोपेश्वरनाथ मंदिर और तपेश्वरनाथ मंदिर सहित कई धार्मिक स्थलों पर महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा की। इसके अलावा बन्नूवाल नगर, मॉडल टाउन और अन्य कॉलोनियों में भी सामूहिक रूप से वट सावित्री पूजन किया गया। 16 श्रृंगार में सजी महिलाओं ने वट वृक्ष की परिक्रमा कर परंपराओं का पालन किया और अपने वैवाहिक जीवन की खुशहाली की कामना की।

  • अयोध्या में कब मनेगी राम नवमी जानिए तिथि मुहूर्त और सूर्य तिलक का समय

    अयोध्या में कब मनेगी राम नवमी जानिए तिथि मुहूर्त और सूर्य तिलक का समय


    नई दिल्ली । पूरे देश में राम नवमी को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं लेकिन इस वर्ष तिथि को लेकर लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। विशेष रूप से अयोध्या में इस पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में काफी उत्साह देखा जा रहा है क्योंकि यह भगवान श्रीराम की जन्मस्थली है और यहां राम नवमी का उत्सव अत्यंत भव्य रूप में मनाया जाता है।

    पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 26 मार्च 2026 को सुबह 11 बजकर 46 मिनट पर प्रारंभ हो रही है और 27 मार्च 2026 को सुबह 10 बजकर 7 मिनट पर समाप्त होगी। भगवान श्रीराम का जन्म मध्याह्न काल में हुआ था इसलिए कई श्रद्धालु 26 मार्च को भी राम नवमी मना रहे हैं। वहीं उदया तिथि के आधार पर 27 मार्च को भी इस पर्व का आयोजन किया जा रहा है जिससे लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

    धार्मिक मान्यताओं और स्थानीय परंपराओं के अनुसार अयोध्या में राम नवमी 27 मार्च 2026 शुक्रवार को मनाई जाएगी। इसी दिन राम मंदिर में रामलला का भव्य जन्मोत्सव आयोजित किया जाएगा। दोपहर 12 बजकर 27 मिनट पर मध्याह्न मुहूर्त में भगवान श्रीराम का जन्म उत्सव मनाया जाएगा जो इस पर्व का सबसे महत्वपूर्ण क्षण माना जाता है।

    राम नवमी के अवसर पर अयोध्या में एक विशेष आकर्षण सूर्य तिलक होता है। इस बार भी वैज्ञानिक तकनीक के माध्यम से सूर्य की किरणें सीधे भगवान राम के मस्तक पर पड़ेंगी और यह अद्भुत दृश्य लगभग चार से पांच मिनट तक दिखाई देगा। यह नजारा लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था और विज्ञान का अनूठा संगम होता है जिसे देखने के लिए दूर दूर से लोग अयोध्या पहुंचते हैं।

    राम नवमी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। यह दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्म का प्रतीक है जो धर्म सत्य और मर्यादा के आदर्श माने जाते हैं। यह पर्व हमें सिखाता है कि जीवन में सत्य और धर्म का मार्ग ही सर्वोपरि है और अंततः अच्छाई की ही जीत होती है।

    अयोध्या में इस अवसर पर मंदिरों को भव्य रूप से सजाया जाता है और विशेष पूजा अर्चना भजन कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। श्रद्धालु बड़ी संख्या में सरयू नदी में स्नान कर भगवान राम के दर्शन करते हैं और अपने जीवन में सुख समृद्धि और शांति की कामना करते हैं।

    इस प्रकार राम नवमी 2026 का पर्व अयोध्या में 27 मार्च को अत्यंत श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाया जाएगा। यह दिन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि आस्था और संस्कृति का भी प्रतीक है जो हर भक्त के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और प्रेरणा लेकर आता है।

  • भूटान का पारो फेस्टिवल संस्कृति आस्था और रंगों का अद्भुत उत्सव..

    भूटान का पारो फेस्टिवल संस्कृति आस्था और रंगों का अद्भुत उत्सव..

    नई दिल्ली:  भूटान अपनी प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध संस्कृति के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। यहां मनाए जाने वाले विभिन्न त्योहार लोगों को अपनी परंपराओं से जोड़ते हैं और सामाजिक एकता को मजबूत करते हैं। इन्हीं में से सबसे प्रमुख और प्रसिद्ध उत्सव है पारो त्शेचू फेस्टिवल

    यह उत्सव हर साल वसंत ऋतु में मनाया जाता है, आमतौर पर अप्रैल के शुरुआती दिनों में। इस वर्ष यह फेस्टिवल 29 मार्च से 2 अप्रैल तक आयोजित किया जा रहा है। यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भूटान की आस्था, संस्कृति और इतिहास का जीवंत प्रदर्शन है

    पारो त्शेचू के दौरान भिक्षु और स्थानीय लोग पारंपरिक मुखौटे पहनकर नृत्य करते हैं और बौद्ध मंत्रों का जाप करते हैं। यह नृत्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि गहरी धार्मिक मान्यताओं और कहानियों को दर्शाता है

    इस उत्सव में लोग रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में शामिल होते हैं, जिससे पूरा वातावरण जीवंत और आकर्षक बन जाता है। यहां होने वाले मुखौटा नृत्य प्राचीन बौद्ध कथाओं और ऐतिहासिक घटनाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत करते हैं

    इस फेस्टिवल में गुरु पद्मसंभव की कहानियों को भी दर्शाया जाता है, जिन्होंने भूटान में बौद्ध धर्म के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। माना जाता है कि उन्होंने भूटान के सम्राट को ठीक करने में मदद की थी और इसी से तिब्बती बौद्ध धर्म की शुरुआत हुई
     पारो त्शेचू फेस्टिवल केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भूटान की संस्कृति, आस्था और विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने वाला एक भव्य उत्सव है

  • Eid 2026: भारत में ईद-उल-फितर 21 मार्च को, पूरे 30 रोजे रखे गए

    Eid 2026: भारत में ईद-उल-फितर 21 मार्च को, पूरे 30 रोजे रखे गए


    नई दिल्ली। भारत में ईद उल फितर 2026 की तारीख तय हो गई है। इस बार रमजान के पूरे 30 रोजे रखे गए हैं। 20 मार्च को 30वां रोजा रखा गया और अगले दिन यानी 21 मार्च शनिवार को देशभर में ईद मनाई जाएगी। यह घोषणा धार्मिक कमेटी और जामा मस्जिद दिल्ली के नायब इमाम सैयद उसामा शाबान बुखारी ने की।

    भारत में ईद की तारीख चांद दिखने पर निर्भर करती है। इस बार 19 मार्च को शव्वाल का चांद नजर नहीं आया जिससे रमजान का आखिरी रोजा बढ़ गया। इसके बाद 20 मार्च को चांद देखने के बाद ईद 21 मार्च को मनाने का फैसला लिया गया। वहीं सऊदी अरब में 20 मार्च को ही ईद उल फितर मनाई जा रही है।

    ईद उल फितर का महत्व 

    ईद उल फितर इस्लाम धर्म का एक प्रमुख त्योहार है। इसका मतलब है रोजा खोलने का त्योहार । यह रमजान के पूरे महीने रोजे रखने के बाद मनाया जाता है और अल्लाह का धन्यवाद अदा करने का अवसर होता है। यह पर्व खुशियों और भाईचारे का प्रतीक है।

    इतिहास में ईद उल फितर की शुरुआत 624 ईस्वी में पैगंबर हजरत मुहम्मद ने मदीना में की थी। हिजरत के बाद मुसलमानों ने पहला रमजान पूरा किया और तब ईद उल फितर और ईद उल अजहा दो पर्व तय किए गए। इस बार के ईद समारोह के लिए तैयारियां जोरों पर हैं। मस्जिदों और सार्वजनिक स्थानों पर नमाज़ की व्यवस्था की जा रही है। लोग अपने घरों में भी सजावट और ईद की मिठाइयों की तैयारी में जुटे हैं।

  • आज तीन पर्वों का संगम: गुड़ी पड़वा, नवरात्रि और उगादी से शुभारंभ होगा हिंदू नववर्ष

    आज तीन पर्वों का संगम: गुड़ी पड़वा, नवरात्रि और उगादी से शुभारंभ होगा हिंदू नववर्ष


    नई दिल्ली । आज हिंदू धर्म के लिए बेहद खास दिन है क्योंकि तीन महत्वपूर्ण पर्व गुड़ी पड़वा नवरात्रि और उगादी एक साथ मनाए जा रहे हैं। उत्तर भारत में यह दिन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के रूप में नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है जबकि दक्षिण भारत में आंध्र प्रदेश तेलंगाना और कर्नाटक में इसे उगादी के रूप में मनाया जाता है। महाराष्ट्र में यह दिन गुड़ी पड़वा के रूप में नववर्ष की शुरुआत का पर्व है।

    उगादी का महत्व

    उगादी का अर्थ है युग की शुरुआत और इसे प्रकृति के श्रृंगार और नए जीवन का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी और समय की गणना भी इसी दिन से शुरू हुई थी। यह पर्व नए अवसर समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक है।

    शुभ मुहूर्त

    चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि आज यानी 19 मार्च को सुबह 6:52 से शुरू होकर कल 20 मार्च को शाम 5:52 तक रहेगी। नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना का विशेष महत्व है। घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:52 से 8:08 बजे तक है जबकि अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:22 से 1:11 बजे तक रहेगा।

    गुड़ी बांधने का समय

    महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा के अवसर पर गुड़ी बांधने और ध्वज फहराने का शुभ मुहूर्त सुबह 5:15 से 7:57 बजे तक है। इस दिन लोग अपने घरों को सजाते हैं रंगोली बनाते हैं और विशेष पकवान तैयार करते हैं। गुड़ी पड़वा नई शुरुआत समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। आज का दिन तीनों पर्वों के संगम और नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है जो पूरे देश में उल्लास और उत्साह के साथ मनाया जाएगा।

  • शादी और त्योहार के लिए 5 शानदार बैंगल डिज़ाइन, साधारण सूट को बनाएं रॉयल

    शादी और त्योहार के लिए 5 शानदार बैंगल डिज़ाइन, साधारण सूट को बनाएं रॉयल


    नई दिल्ली । पारंपरिक लुक को खास बनाने में ज्वेलरी का हमेशा अहम रोल रहा है और खासकर बैंगल्स यानी चूड़ियां। ये न केवल हाथों की खूबसूरती बढ़ाती हैं बल्कि साधारण सूट या कुर्ती को भी एक डिजाइनर टच देती हैं। फैशन की दुनिया में नए ट्रेंड्स आते रहते हैं लेकिन पारंपरिक एथनिक स्टाइल का क्रेज कभी कम नहीं होता। आइए जानते हैं 5 लेटेस्ट बैंगल डिज़ाइन जो आपके लुक को रॉयल बना देंगे।

    ऑक्सीडाइज्ड सिल्वर बैंगल्स

    ऑक्सीडाइज्ड ज्वेलरी आजकल काफी ट्रेंड में है। अगर आप कॉटन कुर्ती या इंडो वेस्टर्न सूट पहन रही हैं तो चांदी जैसी दिखने वाली ऑक्सीडाइज्ड चूड़ियां बेस्ट ऑप्शन हैं। इन्हें आप जींस कुर्ती के साथ भी पहन सकती हैं। ये स्टाइलिश होने के साथ साथ आपको बोहेमियन और एथनिक लुक भी देती हैं।

    सिल्क थ्रेड बैंगल्स

    रेशमी धागों से बनी सिल्क थ्रेड बैंगल्स इन दिनों खासा ट्रेंड में हैं। इन्हें सूट के रंग के अनुसार कस्टमाइज कराना आसान है। मोती स्टोन और मिरर वर्क इन्हें हैवी सूट या छोटे फंक्शन के लिए परफेक्ट बनाता है। ये त्योहारों और हल्के समारोहों के लिए एक बेहतरीन चॉइस हैं।

    कश्मीरी बैंगल्स

    अगर आप कुछ यूनिक और कलात्मक पहनना पसंद करती हैं तो कश्मीरी बैंगल्स आपके लिए परफेक्ट हैं। इन पर की गई हैंड पेंटिंग और फ्लोरल डिज़ाइन इन्हें बाकी चूड़ियों से अलग बनाती हैं। अक्सर इन्हें स्टेटमेंट ज्वेलरी के तौर पर ही पहना जाता है।

    वेलवेट बैंगल्स

    सर्दियों और रात की शादियों के लिए वेलवेट बैंगल्स बेस्ट हैं। मखमली टेक्सचर और गहरा रंग साधारण सूट को भी रॉयल और महंगा लुक देता है। आजकल इन्हें पूरी कलाई भरकर पहनने के बजाय गोल्ड या कुंदन के कड़ों के बीच में सेट करके पहनना ट्रेंड में है।

    कुंदन और स्टोन वर्क वाले कड़े

    शादी या बड़ी पार्टी के लिए कुंदन और स्टोन वर्क वाले कड़े सबसे शानदार विकल्प हैं। इन्हें पूरी चूड़ियों के सेट के बजाय एक एक चौड़ा कड़ा दोनों हाथों में पहनना आजकल पसंद किया जाता है। अगर आपकी कुर्ती पर हैवी एम्ब्रॉयडरी है तो ये कड़े आपको रॉयल और क्लासी लुक देंगे।बैंगल्स सही डिजाइन और सेटिंग के साथ किसी भी लुक को हाई फैशन और रॉयल बना सकते हैं। चाहे त्योहार हो या शादी इन 5 बैंगल डिज़ाइनों से आपका सूट भी एथनिक और स्टाइलिश लगेगा।

  • आज रंग पंचमी पर लगाएं लड्डू गोपाल को ये प्रिय भोग, घर में बनी रहेगी सुख, समृद्धि और खुशहाली

    आज रंग पंचमी पर लगाएं लड्डू गोपाल को ये प्रिय भोग, घर में बनी रहेगी सुख, समृद्धि और खुशहाली


    नई दिल्ली । रंग पंचमी का त्योहार भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और उनकी लीलाओं से जुड़ा हुआ माना जाता है। होली के पांच दिन बाद आने वाला यह पर्व भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है और इस दिन कई घरों और मंदिरों में लड्डू गोपाल का श्रृंगार और पूजा होती है। माना जाता है कि जिस घर में लड्डू गोपाल की सेवा होती है वहां हमेशा सुख समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है।

    भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल को बच्चे की तरह ही समझा जाता है। उनकी देखभाल और पूजा भी उसी तरह की जाती है जैसे घर के छोटे बच्चों की। त्योहारों के समय उनके लिए विशेष मिठाइयाँ और व्यंजन बनाना एक परंपरा रही है। रंग पंचमी पर भी भक्त लड्डू गोपाल का श्रृंगार करते हैं और उन्हें स्वादिष्ट भोग अर्पित करते हैं।

    इस दिन लड्डू गोपाल को भोग लगाना बेहद शुभ माना जाता है। सबसे प्रिय माना जाने वाला भोग गुजिया है। होली के समय बनने वाली यह मिठाई भगवान को बहुत प्रिय मानी जाती है। कई घरों और मंदिरों में रंग पंचमी पर सबसे पहले गुजिया लड्डू गोपाल को अर्पित की जाती है। माना जाता है कि इससे भगवान प्रसन्न होते हैं और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। गुजिया के अलावा चंद्रकला और अन्य पारंपरिक मिठाइयाँ भी भोग में लगाई जाती हैं।

    भगवान श्रीकृष्ण को दही बहुत प्रिय है इसलिए इस दिन लड्डू गोपाल को दही या मीठी दही का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है। अगर घर में दही से कोई व्यंजन उपलब्ध हो तो उसे भी अर्पित किया जा सकता है। केवल दही और चीनी मिलाकर भोग लगाना भी भगवान को प्रिय होता है और इससे परिवार में प्रेम और आपसी सद्भाव बना रहता है।

    जलेबी और मालपुए का भोग भी इस दिन लगाना विशेष लाभकारी माना जाता है। कई मंदिरों में रंग पंचमी पर जलेबी और मालपुए का भोग विशेष रूप से लगाया जाता है। मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और भगवान की कृपा से घर में खुशहाली आती है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान को भोग लगाने में सबसे महत्वपूर्ण तत्व श्रद्धा और भक्ति है। अगर भक्त सच्चे मन से भोग अर्पित करता है तो भगवान प्रसन्न होते हैं। इसलिए रंग पंचमी पर लड्डू गोपाल की सेवा करते समय प्रेम और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। भोग लगाने के बाद भगवान की आरती करना और प्रसाद को परिवार में बाँटना भी शुभ माना जाता है।

    रंग पंचमी का त्योहार ब्रज क्षेत्र की परंपराओं से जुड़ा है जहां इस दिन रंगों और गुलाल के साथ भगवान कृष्ण की पूजा होती है। मंदिरों में भजन-कीर्तन और उत्सव का आयोजन किया जाता है। यह पर्व प्रेम भक्ति और आनंद का प्रतीक है और भक्त इस दिन भगवान श्रीकृष्ण से सुख समृद्धि और शांति की कामना करते हैं।

    घर में लड्डू गोपाल की पूजा सुबह स्नान के बाद करें। सबसे पहले उनका श्रृंगार करें उन्हें नए वस्त्र पहनाएं और फूलों से सजाएं। इसके बाद मिठाइयाँ और दही का भोग लगाएं भगवान की आरती करें और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करें। छोटे बच्चों को पूजा में शामिल करना भी शुभ माना जाता है क्योंकि इससे उनमें भगवान के प्रति श्रद्धा और भक्ति बढ़ती है।

  • आज का पंचांग और होलिका दहन: राहुकाल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक आयोजन

    आज का पंचांग और होलिका दहन: राहुकाल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक आयोजन

     
    नई दिल्ली :आज 3 मार्च 2026 मंगलवार को फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि है और पूरे देश में होलिका दहन का पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि आज शाम 5:07 बजे तक रहेगी और इसके बाद प्रतिपदा तिथि प्रारंभ होगी। सूर्योदय आज प्रातः 6:44 बजे होगा और सूर्यास्त सायं 6:22 बजे होगा।

    चंद्रमा आज सिंह राशि में मघा नक्षत्र में विराजमान हैं और यह नक्षत्र प्रातः 7:31 बजे तक रहेगा। मघा नक्षत्र के देवता पितृ माने गए हैं, इसलिए आज का दिन पूर्वजों के स्मरण, आशीर्वाद और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत फलदायी है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि इस दिन की पूजा और धार्मिक अनुष्ठान विशेष फलदायक होते हैं। चंद्रोदय सायं 6:21 बजे होगा और चंद्रास्त नहीं होगा, जिससे पूर्णिमा की रात विशेष महत्व रखती है।

    ग्रहों की स्थिति पर नजर डालें तो सूर्य, मंगल, बुध और राहु कुंभ राशि में स्थित हैं। गुरु बृहस्पति मिथुन राशि में, जबकि शुक्र और शनि मीन राशि में विराजमान हैं और केतु सिंह राशि में हैं। इन ग्रहों की स्थिति सामाजिक सक्रियता और धार्मिक आयोजनों को बल देने वाली मानी जाती है।

    आज का योग ‘सुकर्मा’ है, जो प्रातः 10:25 बजे तक रहेगा। यह योग नए कार्यों की शुरुआत और प्रतिष्ठा में वृद्धि के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। करण बव आज सायं 5:07 बजे तक रहेगा और इसके बाद अगले दिन प्रातः 4:54 बजे तक अन्य करण प्रभावी रहेगा।

    शुभ मुहूर्त की बात करें तो अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:10 बजे से 12:56 बजे तक है। इस दौरान महत्वपूर्ण निर्णय लेना, पूजा-अर्चना करना और नए कार्य की शुरुआत करना लाभकारी माना जाता है। अमृत काल 4 मार्च की प्रातः 1:13 बजे से 2:49 बजे तक रहेगा।

    अशुभ समय में राहुकाल दोपहर 3:28 बजे से 4:55 बजे तक रहेगा, इस दौरान किसी भी महत्वपूर्ण कार्य से बचना चाहिए। गुलिकाल दोपहर 12:33 बजे से 2:00 बजे तक है और यमगण्ड प्रातः 9:39 बजे से 11:06 बजे तक रहेगा। धार्मिक विशेषज्ञों का कहना है कि राहुकाल के समय किसी भी निर्णय या पूजा से बचना चाहिए और शुभ मुहूर्त का ही पालन करना चाहिए।

    देशभर में होलिका दहन की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। पूर्णिमा तिथि पर विधिपूर्वक पूजा-अर्चना और रात्रि में होलिका दहन का आयोजन किया जाएगा। धार्मिक आस्थावानों को सलाह दी गई है कि इस दिन दान-पुण्य करें, पारिवारिक एकता बनाए रखें और आध्यात्मिक साधना में समय दें।

    पूर्णिमा और मघा नक्षत्र का यह संयोजन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी है। यह दिन न केवल धार्मिक अनुष्ठानों के लिए उपयुक्त है बल्कि सामाजिक और पारिवारिक मेल-जोल के लिए भी महत्वपूर्ण है। पंचांग के जानकारों के अनुसार इस दिन पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान करने से मनोकामना पूरी होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    आज का दिन आध्यात्मिक जागरूकता और धार्मिक गतिविधियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। राहुकाल में सतर्क रहने और शुभ मुहूर्त का लाभ उठाने से सभी कार्य सफल और फलदायी होंगे। होलिका दहन के साथ यह पूर्णिमा तिथि जीवन में अच्छाई और समृद्धि का संदेश लेकर आती है।

  • होली पर चंद्र ग्रहण का साया, सूतक काल ने बदला होलिका दहन का समय, जानें पूजा का सही मुहूर्त

    होली पर चंद्र ग्रहण का साया, सूतक काल ने बदला होलिका दहन का समय, जानें पूजा का सही मुहूर्त


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में होलिका दहन का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, लेकिन इस साल 3 मार्च 2026 को होलिका दहन पर भद्रा और चंद्र ग्रहण का एक साथ होना चिंता का विषय बना हुआ है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, भद्रा काल और ग्रहण का सूतक काल दोनों ही समय किसी भी मांगलिक या शुभ कार्य के लिए वर्जित माने जाते हैं।

    ऐसे में भक्तों के मन में यह सवाल है कि दोष से बचने के लिए होलिका कब जलाई जाए। पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 3 मार्च को शाम 05:07 बजे समाप्त हो जाएगी, लेकिन शास्त्रों के नियम और ग्रहण की शुद्धि के अनुसार ही दहन का समय तय करना उचित रहेगा।

    सूतक काल और चंद्र ग्रहण का प्रभाव

    भारतीय के समय के अनुसार, 3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण का प्रभाव शाम 06:26 बजे चंद्रोदय के साथ ही दिखने लगेगा और यह शाम 06:46 बजे समाप्त होगा। हालांकि, ग्रहण की विभिन्न अवस्थाएं दोपहर 02:16 बजे से ही शुरू हो जाएंगी, लेकिन सूतक काल का विशेष महत्व होता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सूतक काल सुबह 09:39 बजे से ही प्रारंभ हो जाएगा, जो शाम 06:46 बजे ग्रहण की समाप्ति तक रहेगा। सूतक काल के दौरान किसी भी प्रकार की पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठान की मनाही होती है, इसलिए होलिका दहन की रस्में शाम 06:46 बजे के बाद ही की जानी चाहिए।

    भद्रा का समय और दहन का मुहूर्त

    होलिका दहन के लिए भद्रा का विचार करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि भद्रा मुख में किया गया दहन अशुभ फल दे सकता है। इस वर्ष 3 मार्च को भद्रा देर रात यानी 4 मार्च की सुबह 01:25 बजे से शुरू होगी। इसलिए शाम के समय भद्रा का कोई दोष नहीं रहेगा।

    होलिका दहन का सबसे सटीक और शुभ मुहूर्त शाम 06:47 बजे (ग्रहण समाप्ति) के बाद से लेकर रात 08:50 बजे तक रहेगा। यह वह समय है जब आप बिना किसी भय या दोष के होलिका दहन कर सकते हैं। ग्रहण के तुरंत बाद किया गया यह दहन नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने की प्रबल संभावना रखता है।

    दोष से मुक्ति के सरल नियम

    भद्रा और सूतक के दोष से बचने के लिए सहजता के साथ कुछ नियमों का पालन करना चाहिए। ग्रहण काल के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का निरंतर मानसिक जाप करते रहें, जिससे वातावरण की नकारात्मकता का आप पर प्रभाव न पड़े। शाम को ग्रहण समाप्त होने के बाद पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें और फिर शुद्ध मुहूर्त में होलिका पूजन करें।

    होलिका की अग्नि में अनाज और नारियल अर्पित करना घर में सुख-शांति लाता है। माना जाता है कि इन नियमों का पालन करने से किसी भी प्रकार के ग्रहों की उग्रता शांत होती है और घर के संचालन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।