Tag: FIFA World Cup 2026

  • इंजरी टाइम में कप्तान का गोल बना इतिहास कनाडा ने साउथ अफ्रीका को हराकर राउंड ऑफ 16 का टिकट कटाया

    इंजरी टाइम में कप्तान का गोल बना इतिहास कनाडा ने साउथ अफ्रीका को हराकर राउंड ऑफ 16 का टिकट कटाया


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 में सह मेजबान कनाडा ने अपने फुटबॉल इतिहास का सबसे यादगार अध्याय लिखते हुए पहली बार विश्व कप के अंतिम 16 में जगह बना ली है। लॉस एंजिलिस स्टेडियम में खेले गए राउंड ऑफ 32 के मुकाबले में कनाडा ने साउथ अफ्रीका को 1 0 से हराकर न केवल ऐतिहासिक जीत दर्ज की बल्कि अपने घरेलू प्रशंसकों को भी जश्न मनाने का बड़ा मौका दिया। इस हार के साथ साउथ अफ्रीका का टूर्नामेंट में सफर समाप्त हो गया।

    मुकाबले की शुरुआत में साउथ अफ्रीका ने आक्रामक खेल दिखाया और लगातार कनाडा के डिफेंस पर दबाव बनाया। शुरुआती मिनटों में अफ्रीकी टीम ने कई अच्छे मूव तैयार किए लेकिन अंतिम क्षणों में फिनिशिंग की कमी के कारण गोल नहीं कर सकी। कनाडा की रक्षापंक्ति ने धैर्य के साथ खेलते हुए सभी हमलों को नाकाम कर दिया।

    पहले हाफ के अंतिम चरण में कनाडा ने भी जवाबी हमला बोला और गोल करने के दो शानदार मौके बनाए। मोइज बॉम्बिटो का दमदार हेडर लगभग गोल में तब्दील होने ही वाला था लेकिन साउथ अफ्रीका के डिफेंडर ऑब्रे मॉडिबा ने गोललाइन से शानदार क्लियरेंस कर अपनी टीम को बचा लिया। इसके बाद ताजोन बुकानन ने जोरदार शॉट लगाया लेकिन गोलकीपर रोनवेन विलियम्स ने बेहतरीन बचाव करते हुए स्कोर बराबर बनाए रखा। पहले हाफ की समाप्ति तक दोनों टीमें गोल करने में असफल रहीं।

    दूसरे हाफ में कनाडा ने अपने खेल की रफ्तार बढ़ा दी और लगातार साउथ अफ्रीका के गोल पर हमले किए। हालांकि मजबूत डिफेंस और शानदार गोलकीपिंग की बदौलत साउथ अफ्रीका लंबे समय तक मुकाबले में बना रहा। मैच के 75वें मिनट में कनाडा ने बड़ा दांव खेलते हुए अपने स्टार खिलाड़ी अल्फोंसो डेविस को मैदान पर उतारा। डेविस के आने के बाद कनाडा के आक्रमण में नई जान आ गई। उनकी तेज रफ्तार और शानदार ड्रिब्लिंग ने विरोधी टीम की रक्षापंक्ति को लगातार दबाव में रखा।

    जब मुकाबला अतिरिक्त समय की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा था तब इंजरी टाइम के दूसरे मिनट में कनाडा को वह पल मिला जिसका पूरे देश को इंतजार था। कप्तान स्टीफन यूस्टाक्वियो ने बॉक्स के बाहर से शानदार शॉट लगाया जो सीधे गोलपोस्ट में जाकर समा गया। इस शानदार गोल ने स्टेडियम में मौजूद हजारों दर्शकों को खुशी से झूमने पर मजबूर कर दिया और कनाडा ने 1 0 की यादगार जीत अपने नाम कर ली।

    यह जीत कनाडा के फुटबॉल इतिहास में मील का पत्थर साबित हुई। इससे पहले टीम 1986 और 2022 के फीफा विश्व कप में हिस्सा ले चुकी थी लेकिन दोनों बार ग्रुप चरण से आगे नहीं बढ़ सकी थी। इस बार टीम ने इतिहास बदलते हुए पहली बार अंतिम 16 में प्रवेश किया और विश्व फुटबॉल में अपनी नई पहचान दर्ज कराई।

    अब कनाडा की नजर अगले मुकाबले में जीत हासिल कर क्वार्टर फाइनल में पहुंचने पर होगी जबकि साउथ अफ्रीका को टूर्नामेंट से बाहर होने की निराशा के साथ घर लौटना पड़ेगा। इस ऐतिहासिक जीत ने साबित कर दिया कि कनाडा अब विश्व फुटबॉल में उभरती हुई ताकत बन चुका है।

  • विश्व कप से शर्मनाक विदाई के बाद साउथ कोरिया में बड़ा फैसला हेड कोच होंग म्युंगबो ने दिया इस्तीफा

    विश्व कप से शर्मनाक विदाई के बाद साउथ कोरिया में बड़ा फैसला हेड कोच होंग म्युंगबो ने दिया इस्तीफा


    नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 में ग्रुप स्टेज से बाहर होने के बाद साउथ कोरिया की फुटबॉल टीम में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। टीम के अनुभवी हेड कोच होंग म्युंगबो ने अपने पद से इस्तीफा देकर विश्व कप में मिली निराशाजनक हार की पूरी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली। उन्होंने साफ कहा कि राष्ट्रीय टीम के मुख्य कोच के रूप में अंतिम परिणाम ही सबसे महत्वपूर्ण होता है और जब वह देश की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके तो पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं है।

    साउथ कोरिया ने टूर्नामेंट की शुरुआत शानदार अंदाज में की थी। पहले मुकाबले में टीम ने चेकिया को 2 1 से हराकर अपने अभियान की बेहतरीन शुरुआत की थी। इस जीत के बाद माना जा रहा था कि टीम आसानी से नॉकआउट चरण में पहुंच जाएगी। लेकिन अगले दो मुकाबलों में पूरी तस्वीर बदल गई। मेक्सिको और साउथ अफ्रीका के खिलाफ लगातार 1 0 से मिली हार ने टीम की मुश्किलें बढ़ा दीं। अंक तालिका में तीसरे स्थान पर रहने के बावजूद साउथ कोरिया सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान वाली आठ टीमों में भी जगह नहीं बना सका और ग्रुप चरण से ही टूर्नामेंट से बाहर हो गया।

    विश्व कप से बाहर होने के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में 57 वर्षीय होंग म्युंगबो भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि देश के लाखों फुटबॉल प्रशंसकों ने टीम पर भरोसा जताया था लेकिन वह उनकी उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके। उन्होंने कहा कि उन्होंने पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ जिम्मेदारी निभाने की कोशिश की लेकिन टीम को अपेक्षित सफलता नहीं दिला पाए। इसी कारण उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देने का फैसला लिया है।

    होंग म्युंगबो ने अपने सहयोगी कोचों और सपोर्ट स्टाफ का भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि पूरी टीम ने कठिन परिस्थितियों में भी पूरी मेहनत और समर्पण के साथ काम किया लेकिन कई बार प्रयासों के बावजूद परिणाम आपके पक्ष में नहीं आते। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय टीम का नेतृत्व करना उनके लिए हमेशा गर्व की बात रही है।

    होंग म्युंगबो ने वर्ष 2024 में दूसरी बार साउथ कोरिया की राष्ट्रीय टीम की कमान संभाली थी। उनके दूसरे कार्यकाल में टीम ने कुल 26 मुकाबले खेले जिनमें 15 मैच जीते जबकि 6 में हार का सामना करना पड़ा और 5 मुकाबले ड्रॉ रहे। इससे पहले भी वह 2013 और 2014 के दौरान राष्ट्रीय टीम के मुख्य कोच रह चुके हैं।

    कोच बनने से पहले होंग म्युंगबो साउथ कोरिया के सबसे सफल फुटबॉल खिलाड़ियों में गिने जाते थे। उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में देश के लिए 136 मुकाबले खेले और लंबे समय तक टीम के प्रमुख डिफेंडर रहे। वर्ष 2009 में उन्होंने अपने कोचिंग करियर की शुरुआत की और बाद में राष्ट्रीय टीम के साथ कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

    अपने विदाई संदेश में होंग म्युंगबो ने कहा कि भले ही वह मुख्य कोच का पद छोड़ रहे हों लेकिन साउथ कोरिया के फुटबॉल के प्रति उनका समर्पण और प्यार कभी कम नहीं होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि मौजूदा टीम भविष्य में मजबूत वापसी करेगी और आने वाले बड़े टूर्नामेंटों में बेहतर प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि अब वह एक समर्थक के रूप में हमेशा अपनी राष्ट्रीय टीम का हौसला बढ़ाते रहेंगे और उम्मीद करेंगे कि कोरियाई फुटबॉल फिर नई ऊंचाइयों को छुए।

  • ट्रॉसार्ड का डबल अटैक, डी ब्रूने का जलवा: बेल्जियम ने न्यूजीलैंड को 5-1 से हराकर कटाया नॉकआउट टिकट

    ट्रॉसार्ड का डबल अटैक, डी ब्रूने का जलवा: बेल्जियम ने न्यूजीलैंड को 5-1 से हराकर कटाया नॉकआउट टिकट


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप जी में बेल्जियम ने दमदार प्रदर्शन करते हुए न्यूजीलैंड को 5-1 से करारी शिकस्त दी और शानदार अंदाज में राउंड ऑफ 32 का टिकट पक्का कर लिया। बीसी प्लेस स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में बेल्जियम ने शुरुआत से अंत तक पूरी तरह दबदबा बनाए रखा। स्टार विंगर लिएंड्रो ट्रॉसार्ड ने दो गोल दागकर जीत के हीरो की भूमिका निभाई, जबकि केविन डी ब्रूने ने शानदार खेल दिखाते हुए एक गोल और दो असिस्ट अपने नाम किए।

    इस बड़ी जीत के साथ बेल्जियम ने ग्रुप जी में पांच अंक हासिल किए। मिस्र के भी पांच अंक रहे, लेकिन बेहतर गोल अंतर के आधार पर बेल्जियम ग्रुप विजेता बना। वहीं मिस्र ने दूसरे स्थान पर रहते हुए नॉकआउट चरण में जगह बनाई। ईरान तीन अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा और उसकी उम्मीदें अन्य नतीजों पर टिकी हैं, जबकि न्यूजीलैंड सिर्फ एक अंक के साथ टूर्नामेंट से बाहर हो गया।

    मैच की शुरुआत से ही बेल्जियम ने आक्रामक रुख अपनाया और गेंद पर लगातार नियंत्रण बनाए रखा। 11वें मिनट में ट्रॉसार्ड गोल करने के बेहद करीब पहुंचे, लेकिन उनका शॉट गोलपोस्ट से टकरा गया। कुछ देर बाद बेल्जियम को पेनल्टी भी मिली, लेकिन वीएआर समीक्षा के बाद रेफरी ने फैसला बदल दिया और पेनल्टी रद्द कर दी। इसके बावजूद बेल्जियम का दबाव कम नहीं हुआ।

    आखिरकार 28वें मिनट में केविन डी ब्रूने के शानदार क्रॉस पर लिएंड्रो ट्रॉसार्ड ने बेहतरीन फिनिश करते हुए टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई। दूसरे हाफ की शुरुआत में दोनों खिलाड़ियों की यह जोड़ी फिर चमकी। 49वें मिनट में डी ब्रूने के सटीक पास पर ट्रॉसार्ड ने अपना दूसरा गोल दागते हुए स्कोर 2-0 कर दिया।

    इसके बाद बेल्जियम ने न्यूजीलैंड को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। गोलकीपर थिबो कोर्टोइस ने विपक्ष के कुछ अच्छे प्रयासों को शानदार बचाव से नाकाम किया। 66वें मिनट में केविन डी ब्रूने ने खुद गोल दागकर बढ़त 3-0 कर दी। इस गोल के साथ 34 वर्षीय डी ब्रूने फीफा वर्ल्ड कप में बेल्जियम के लिए गोल करने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी भी बन गए।

    मैच के अंतिम चरण में न्यूजीलैंड ने 84वें मिनट में एलिजा जस्ट के गोल से सम्मान बचाने की कोशिश की, लेकिन बेल्जियम ने तुरंत जवाब दिया। अगले ही मिनट रोमेलु लुकाकू ने शानदार हेडर के जरिए चौथा गोल कर मुकाबला पूरी तरह अपने नाम कर लिया। स्टॉपेज टाइम में एलेक्सिस सालेमेकर्स ने पांचवां गोल दागकर बेल्जियम की 5-1 की धमाकेदार जीत पर मुहर लगा दी।

    इस शानदार प्रदर्शन के साथ बेल्जियम ने न केवल नॉकआउट चरण में जगह बनाई बल्कि खिताब की मजबूत दावेदारी भी पेश कर दी। टीम का संतुलित आक्रमण, मजबूत मिडफील्ड और अनुभवी खिलाड़ियों का प्रदर्शन आने वाले मुकाबलों में विरोधी टीमों के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

  • फ्रांस से भिड़ंत से पहले स्वीडन को तगड़ा झटका: डिफेंस की दीवार इसाक हिएन टूर्नामेंट से बाहर

    फ्रांस से भिड़ंत से पहले स्वीडन को तगड़ा झटका: डिफेंस की दीवार इसाक हिएन टूर्नामेंट से बाहर


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 के नॉकआउट मुकाबलों से पहले स्वीडन को बड़ा झटका लगा है। टीम के स्टार डिफेंडर इसाक हिएन हैमस्ट्रिंग चोट के कारण पूरे टूर्नामेंट से बाहर हो गए हैं। फ्रांस के खिलाफ होने वाले राउंड ऑफ 32 के अहम मुकाबले से पहले यह खबर स्वीडिश टीम के लिए बड़ी चिंता लेकर आई है, क्योंकि हिएन टीम की रक्षापंक्ति के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल थे।

    27 वर्षीय इसाक हिएन को गुरुवार को जापान के खिलाफ खेले गए ग्रुप मुकाबले के दौरान चोट लगी थी। यह मैच 1-1 की बराबरी पर समाप्त हुआ था और इसी नतीजे के साथ स्वीडन ने तीसरे स्थान की सर्वश्रेष्ठ आठ टीमों में जगह बनाते हुए नॉकआउट चरण के लिए क्वालिफाई किया था। हालांकि मैच के दौरान लगी चोट अब इतनी गंभीर साबित हुई कि उन्हें पूरे टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा।

    स्वीडिश फुटबॉल एसोसिएशन ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि हिएन अब विश्व कप में आगे हिस्सा नहीं ले पाएंगे। मेडिकल जांच में उनके बाएं पैर की हैमस्ट्रिंग में गंभीर चोट पाई गई है। टीम के डॉक्टर जोनास वर्नर ने बताया कि खिलाड़ी को तुरंत रिहैबिलिटेशन के लिए अपने क्लब लौटना होगा और पूरी तरह फिट होने में कुछ समय लगेगा। उन्होंने कहा कि इस चोट के कारण हिएन फिलहाल फुटबॉल से दूर रहेंगे।

    स्वीडन के मुख्य कोच ग्राहम पॉटर ने भी इसाक हिएन के बाहर होने पर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि विश्व कप जैसे बड़े मंच पर किसी खिलाड़ी का चोट के कारण सफर खत्म होना बेहद दुखद होता है। टीम हिएन के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और उन्हें विश्वास है कि वह पूरी तरह फिट होकर पहले से अधिक मजबूत वापसी करेंगे। कोच ने यह भी संकेत दिया कि फ्रांस के खिलाफ मुकाबले के लिए टीम को अपनी रक्षापंक्ति में बदलाव करना पड़ेगा।

    जापान के खिलाफ मैच में हिएन को चोट उस समय लगी थी जब उन्होंने पेनल्टी बॉक्स के अंदर युकिनारी सुगावारा के क्रॉस को रोकने के लिए लंबा स्ट्रेच किया। इसी प्रयास में उनकी हैमस्ट्रिंग खिंच गई और उन्हें मैदान छोड़ना पड़ा। उनकी जगह युवा मिडफील्डर लुकास बर्गवैल को उतारा गया, जबकि कप्तान विक्टर लिंडेलोफ ने सेंटर बैक की जिम्मेदारी संभाली।

    अब स्वीडन के सामने सबसे बड़ी चुनौती फ्रांस जैसी मजबूत टीम के खिलाफ अपनी रक्षापंक्ति को संतुलित रखना होगी। हिएन की गैरमौजूदगी निश्चित रूप से टीम की रणनीति और डिफेंस पर असर डालेगी। ऐसे में बाकी खिलाड़ियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी होगी कि वे इस कमी को पूरा करते हुए टीम को नॉकआउट मुकाबले में जीत दिलाने का प्रयास करें।

  • फीफा वर्ल्ड कप 2026: स्पेन ने उरुग्वे को हराकर नॉकआउट में बनाई जगह, उरुग्वे बाहर

    फीफा वर्ल्ड कप 2026: स्पेन ने उरुग्वे को हराकर नॉकआउट में बनाई जगह, उरुग्वे बाहर


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 में स्पेन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए उरुग्वे को 1-0 से हराकर नॉकआउट चरण में अपनी जगह पक्की कर ली। ग्रुप एच के इस अहम मुकाबले में स्पेन ने पूरे मैच के दौरान संतुलित खेल दिखाया और एकमात्र गोल के दम पर जीत दर्ज की। इस हार के साथ ही दो बार की विश्व चैंपियन उरुग्वे का टूर्नामेंट में सफर समाप्त हो गया।

    गुआडालाहारा में खेले गए मुकाबले में दोनों टीमों ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया। उरुग्वे ने शुरुआती मिनटों में स्पेन पर दबाव बनाने की कोशिश की जबकि स्पेन ने भी लगातार आक्रमण किए और सेट पीस के जरिए गोल करने के अवसर बनाए। स्पेन के डिफेंडर पाउ क्यूबार्सी को पहले हाफ में गोल करने के कुछ अच्छे मौके मिले लेकिन वे उन्हें भुना नहीं सके।

    उरुग्वे की ओर से फेडेरिको वाल्वरडे और डार्विन नुनेज ने भी स्पेनिश रक्षा पंक्ति को चुनौती दी लेकिन दोनों खिलाड़ी अपने अवसरों को गोल में नहीं बदल पाए। दोनों टीमों के गोलकीपरों ने पहले हाफ में कई शानदार बचाव किए जिससे मुकाबला लंबे समय तक बराबरी पर बना रहा।

    मैच का निर्णायक पल 42वें मिनट में आया जब स्पेन के मिडफील्डर एलेक्स बेना ने बॉक्स के बाहर से शानदार शॉट लगाकर गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। उनका यह गोल उरुग्वे के अनुभवी गोलकीपर फर्नांडो मुस्लेरा को चकमा देता हुआ जाल में समा गया। खास बात यह रही कि उस समय मैदान पर दोनों टीमों के खिलाड़ी उपचार ले रहे थे लेकिन खेल जारी था और बेना ने मिले मौके का पूरा फायदा उठाया।

    दूसरे हाफ में उरुग्वे ने वापसी की भरपूर कोशिश की और गेंद पर अधिक नियंत्रण भी रखा लेकिन स्पेन का मजबूत डिफेंस उसके सामने दीवार बनकर खड़ा रहा। सब्स्टीट्यूट फेडेरिको विनास को बराबरी का बेहतरीन मौका मिला लेकिन उनका शॉट गोलपोस्ट के ऊपर से निकल गया।

    स्पेन की ओर से डैनी ओल्मो और फेरान टोरेस ने भी बढ़त दोगुनी करने के लिए कई प्रयास किए लेकिन उरुग्वे के गोलकीपर और डिफेंडरों ने उन्हें सफल नहीं होने दिया। मुकाबले के अंतिम मिनटों में उरुग्वे ने लगातार हमले किए लेकिन स्पेन के गोलकीपर उनाई सिमोन ने शानदार बचाव करते हुए अपनी टीम की बढ़त सुरक्षित रखी।

    स्टॉपेज टाइम में उरुग्वे की मुश्किलें और बढ़ गईं जब अगस्टिन कैनोबियो को रेड कार्ड दिखाया गया। इसके बाद टीम के लिए वापसी की सभी उम्मीदें लगभग खत्म हो गईं और अंतिम सीटी के साथ स्पेन ने 1-0 की महत्वपूर्ण जीत दर्ज कर ली।

    इस जीत के साथ स्पेन ने दो जीत और एक ड्रॉ के दम पर सात अंक हासिल करते हुए ग्रुप एच में शीर्ष स्थान पर कब्जा किया। वहीं विश्व कप में पदार्पण करने वाली केप वर्डे तीन ड्रॉ के साथ दूसरे स्थान पर रहकर नॉकआउट चरण में पहुंच गई। उरुग्वे केवल दो अंक ही जुटा सका और ग्रुप चरण से ही बाहर हो गया।

  • सऊदी अरब को रोककर चमका केप वर्डे, वर्ल्ड कप डेब्यू में नॉकआउट का ऐतिहासिक सफर

    सऊदी अरब को रोककर चमका केप वर्डे, वर्ल्ड कप डेब्यू में नॉकआउट का ऐतिहासिक सफर


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 में केप वर्डे ने अपने पहले ही विश्व कप अभियान में इतिहास रच दिया है। ग्रुप एच के आखिरी मुकाबले में सऊदी अरब के खिलाफ गोलरहित ड्रॉ खेलकर टीम ने राउंड ऑफ 32 में जगह बना ली। इस उपलब्धि के साथ केप वर्डे अपने वर्ल्ड कप डेब्यू में बिना कोई मैच गंवाए नॉकआउट चरण में पहुंचने वाली तीसरी अफ्रीकी टीम बन गई है। टीम के शानदार प्रदर्शन ने दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

    ग्रुप चरण में केप वर्डे ने तीन अंक हासिल कर दूसरा स्थान अपने नाम किया। इस प्रदर्शन के दम पर उसने दो बार की विश्व चैंपियन उरुग्वे और 2034 विश्व कप के मेजबान सऊदी अरब को पीछे छोड़ दिया। अब राउंड ऑफ 32 में उसका मुकाबला गत चैंपियन अर्जेंटीना से होगा। यह मैच 3 जुलाई को मियामी में खेला जाएगा और इसे केप वर्डे के फुटबॉल इतिहास का सबसे बड़ा मुकाबला माना जा रहा है।

    सऊदी अरब के खिलाफ खेले गए मुकाबले में केप वर्डे ने शुरुआत से ही आक्रामक रणनीति अपनाई। टीम ने लगातार हमले किए और कई बार गोल करने के करीब पहुंची। विली सेमेडो ने विपक्षी गोलपोस्ट पर कई खतरनाक प्रयास किए लेकिन सऊदी गोलकीपर मोहम्मद अल ओवैस ने शानदार बचाव करते हुए अपनी टीम को बढ़त लेने से रोक दिया। पहले हाफ में केप वर्डे का एक लंबी दूरी का दमदार शॉट भी गोलपोस्ट के बेहद करीब से बाहर निकल गया।

    दूसरी ओर सऊदी अरब को मैच के दौरान बड़ा झटका तब लगा जब डिफेंडर हसन अल तंबकती बिना किसी टक्कर के मैदान पर गिर पड़े। चोट गंभीर होने के कारण उन्हें स्ट्रेचर के जरिए मैदान से बाहर ले जाना पड़ा। उनके बाहर होने के बाद सऊदी रक्षा पंक्ति कमजोर नजर आई लेकिन टीम ने संयम बनाए रखा और केप वर्डे को गोल करने का मौका नहीं दिया।

    मैच के अंतिम मिनटों में दोनों टीमों ने जीत के लिए प्रयास किए लेकिन कोई भी गोल नहीं कर सकी। सऊदी गोलकीपर अल ओवैस ने कई महत्वपूर्ण सेव कर अपनी टीम को हार से बचाया जबकि केप वर्डे का मजबूत डिफेंस भी पूरे मुकाबले में अडिग रहा। आखिरकार मैच 0-0 की बराबरी पर समाप्त हुआ।

    अंतिम सीटी बजते ही केप वर्डे के खिलाड़ियों और समर्थकों में जश्न का माहौल बन गया। एक अंक ने टीम को ऐतिहासिक सफलता दिला दी और पहली बार विश्व कप के नॉकआउट चरण में पहुंचने का सपना साकार हो गया। अब पूरी दुनिया की नजरें अर्जेंटीना के खिलाफ होने वाले मुकाबले पर होंगी जहां केप वर्डे अपने सुनहरे सफर को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगा।

  • फीफा वर्ल्ड कप में सेनेगल का दमदार प्रदर्शन इराक को 5-0 से हराकर नॉकआउट की उम्मीदें जिंदा

    फीफा वर्ल्ड कप में सेनेगल का दमदार प्रदर्शन इराक को 5-0 से हराकर नॉकआउट की उम्मीदें जिंदा


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप आई मुकाबले में सेनेगल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इराक को 5-0 से करारी शिकस्त दी और नॉकआउट चरण में पहुंचने की अपनी उम्मीदों को बरकरार रखा। टोरंटो में खेले गए इस मुकाबले में सेनेगल ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और पूरे मैच में इराक को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। इस हार के साथ इराक का विश्व कप अभियान बिना एक भी अंक हासिल किए समाप्त हो गया जबकि सेनेगल तीन अंकों के साथ ग्रुप में तीसरे स्थान पर पहुंच गया और अब उसकी नजर सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान वाली टीमों में जगह बनाने पर है।

    मैच की शुरुआत से ही सेनेगल ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और लगातार इराकी रक्षा पंक्ति पर दबाव बनाया। शुरुआती बढ़त टीम को हबीब दियारा ने दिलाई जिनका शॉट डिफ्लेक्शन के बाद गोल में चला गया और सेनेगल 1-0 से आगे हो गया। गोल के बाद भी सेनेगल का दबदबा जारी रहा जबकि इराक के लिए मुश्किलें लगातार बढ़ती चली गईं।

    मुकाबले का अहम मोड़ 13वें मिनट में आया जब सादियो माने पर हुए फाउल की वीडियो असिस्टेंट रेफरी से समीक्षा की गई। जांच के बाद इराक के डिफेंडर रेबिन सुलाका को रेड कार्ड दिखाकर मैदान से बाहर भेज दिया गया। एक खिलाड़ी कम होने के कारण इराक की टीम पर अतिरिक्त दबाव आ गया। इसके बावजूद इराक ने पहले हाफ में संयम बनाए रखा और सेनेगल को दूसरा गोल करने से रोकने में सफल रहा। पहले 45 मिनट तक मुकाबला 1-0 पर ही बना रहा।

    दूसरे हाफ में सेनेगल ने अपनी रफ्तार और तेज कर दी। इस्माइला सार ने शानदार गोल कर टीम की बढ़त 2-0 कर दी। यह उनके विश्व कप करियर का चौथा गोल रहा और इसके साथ ही वह सेनेगल के लिए विश्व कप इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए। इसके बाद मैदान पर उतरे स्थानापन्न खिलाड़ी पेपे गुएये ने कुछ ही मिनटों में मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने दो जबरदस्त लंबी दूरी के शॉट लगाए जिन्हें इराक का गोलकीपर रोक नहीं सका। उनके पहले शॉट की रफ्तार 84 किलोमीटर प्रति घंटा और दूसरे शॉट की गति 103 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई। इन दोनों गोलों ने सेनेगल की बढ़त 4-0 कर दी।

    मैच के 82वें मिनट में इलिमन नडियाये ने शानदार फिनिशिंग करते हुए टीम का पांचवां गोल दागा और सेनेगल की बड़ी जीत पर मुहर लगा दी। इस जीत ने न केवल टीम का मनोबल बढ़ाया बल्कि नॉकआउट चरण में पहुंचने की उम्मीदों को भी जीवित रखा। अब सेनेगल की नजर अन्य ग्रुपों के परिणामों पर रहेगी ताकि वह सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान वाली टीमों में जगह बनाकर राउंड ऑफ 32 में प्रवेश कर सके।

  • मिस्र का ऐतिहासिक सफर जारी ईरान का आखिरी मिनट का गोल रद्द दोनों टीमों के लिए अहम रहा मुकाबला

    मिस्र का ऐतिहासिक सफर जारी ईरान का आखिरी मिनट का गोल रद्द दोनों टीमों के लिए अहम रहा मुकाबला

     
    नई दिल्ली  । फीफा वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप जी में मिस्र और ईरान के बीच खेला गया मुकाबला 1-1 की बराबरी पर समाप्त हुआ लेकिन यह ड्रॉ दोनों टीमों के लिए अलग-अलग मायने लेकर आया। इस नतीजे के साथ मिस्र ने विश्व कप इतिहास में पहली बार राउंड ऑफ 32 में जगह बनाकर नया इतिहास रच दिया जबकि ईरान की नॉकआउट दौर में पहुंचने की उम्मीदें भी अभी कायम हैं। ग्रुप चरण समाप्त होने के बाद मिस्र दूसरे स्थान पर रहा जबकि ईरान तीसरे स्थान पर पहुंचा। टूर्नामेंट के प्रारूप के अनुसार तीसरे स्थान पर रहने वाली सर्वश्रेष्ठ आठ टीमें भी अगले दौर में पहुंचेंगी और फिलहाल ईरान इस सूची में छठे स्थान पर बना हुआ है।

    मुकाबले की शुरुआत मिस्र के शानदार प्रदर्शन से हुई। टीम ने पहले ही मिनटों से आक्रामक खेल दिखाया और पांचवें मिनट में महमूद साबेर ने बेहतरीन गोल कर मिस्र को 1-0 की बढ़त दिला दी। शुरुआती झटके के बावजूद ईरान ने जल्द ही वापसी करते हुए 14वें मिनट में रमिन रेजाइएन के गोल की बदौलत स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। इसके बाद दोनों टीमों ने लगातार आक्रमण किए लेकिन पहले हाफ में कोई भी टीम बढ़त हासिल नहीं कर सकी और मुकाबला बराबरी पर पहुंच गया।

    दूसरे हाफ में मिस्र ने अपनी रणनीति बदलते हुए रक्षात्मक खेल अपनाया। टीम का फोकस ड्रॉ बचाकर अगले दौर में जगह पक्की करने पर रहा। दूसरी ओर ईरान ने गेंद पर अधिक नियंत्रण बनाए रखा और लगातार मिस्र के गोल पर दबाव बनाया। कई अच्छे मौके मिलने के बावजूद ईरानी खिलाड़ी गोल करने में सफल नहीं हो सके। मिस्र की मजबूत रक्षापंक्ति और गोलकीपर ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए ईरान को बढ़त लेने से रोके रखा।

    मुकाबले के अंतिम क्षण बेहद रोमांचक रहे। पहले मेहदी तारेमी का शानदार हेडर क्रॉसबार से टकरा गया जिससे ईरान बढ़त लेने से चूक गया। इसके बाद स्टॉपेज टाइम के तीसरे मिनट में शोजा खलीलजादेह ने गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचाकर ईरानी खेमे में खुशी की लहर दौड़ा दी। खिलाड़ी और टीम स्टाफ जीत का जश्न मनाने मैदान में पहुंच गए लेकिन यह खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी। वीडियो असिस्टेंट रेफरी ने गोल की समीक्षा की और खलीलजादेह को ऑफसाइड करार देते हुए गोल रद्द कर दिया। इसके साथ ही मुकाबला 1-1 की बराबरी पर समाप्त हुआ।

    इस ड्रॉ ने मिस्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि सुनिश्चित कर दी क्योंकि टीम पहली बार विश्व कप के नॉकआउट चरण में पहुंचने में सफल रही। वहीं ईरान को अब अन्य ग्रुपों के परिणामों का इंतजार रहेगा ताकि वह सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान वाली टीमों में शामिल होकर राउंड ऑफ 32 का टिकट हासिल कर सके।

  • फीफा वर्ल्ड कप 2026 बना सबसे धमाकेदार टूर्नामेंट 59वें मैच में टूटा सर्वाधिक गोल का रिकॉर्ड अभी कई मुकाबले बाकी

    फीफा वर्ल्ड कप 2026 बना सबसे धमाकेदार टूर्नामेंट 59वें मैच में टूटा सर्वाधिक गोल का रिकॉर्ड अभी कई मुकाबले बाकी


    नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 ने गोलों के मामले में नया इतिहास रच दिया है। अमेरिका कनाडा और मेक्सिको की संयुक्त मेजबानी में खेले जा रहे इस टूर्नामेंट ने अभी आधा सफर भी पूरा नहीं किया है लेकिन एक संस्करण में सबसे ज्यादा गोल होने का रिकॉर्ड पहले ही टूट चुका है। नए 48 टीमों वाले प्रारूप ने विश्व कप को पहले से अधिक रोमांचक बना दिया है और मैदान पर गोलों की लगातार बारिश देखने को मिल रही है।

    टूर्नामेंट के 59वें मुकाबले में अमेरिका और तुर्किये के बीच खेले गए मैच के दौरान विश्व कप का 173वां गोल दर्ज हुआ। इसके साथ ही कतर में आयोजित 2022 विश्व कप में बने 172 गोल के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया गया। इसके बाद गोलों की संख्या लगातार बढ़ती रही और अब तक कुल 177 गोल हो चुके हैं। खास बात यह है कि नॉकआउट चरण के कई बड़े मुकाबले अभी बाकी हैं जिससे यह आंकड़ा और आगे जाने की पूरी संभावना है।

    इस रिकॉर्ड के पीछे सबसे बड़ा कारण विश्व कप का नया प्रारूप माना जा रहा है। पहली बार टूर्नामेंट में 48 टीमों को शामिल किया गया है। इससे पहले 1930 से 2022 तक विश्व कप में 32 टीमें हिस्सा लेती थीं और कुल 64 मुकाबले खेले जाते थे। अब मैचों की संख्या बढ़कर 104 हो गई है जिससे खिलाड़ियों को गोल करने के अधिक अवसर मिल रहे हैं और दर्शकों को अधिक रोमांचक मुकाबले देखने को मिल रहे हैं।

    इस विश्व कप में कई स्टार खिलाड़ियों ने भी नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। पुर्तगाल के दिग्गज क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने उज्बेकिस्तान के खिलाफ गोल कर लगातार छह अलग अलग विश्व कप में गोल करने वाले पहले पुरुष फुटबॉलर बनने का गौरव हासिल किया। 41 वर्ष की उम्र में भी उनका शानदार प्रदर्शन जारी है।

    फ्रांस के स्टार खिलाड़ी किलियन एम्बाप्पे ने भी अपनी शानदार फॉर्म बरकरार रखते हुए विश्व कप इतिहास में सबसे अधिक छह बार किसी मैच में दो या उससे अधिक गोल करने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। उनके कुल विश्व कप गोलों की संख्या 16 तक पहुंच गई है। वहीं अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी भी 18 गोल के साथ बेहतरीन लय में बने हुए हैं।

    ब्राजील के विनिसियस जूनियर भी गोल्डन बूट की दौड़ में मजबूती से शामिल हो गए हैं। स्कॉटलैंड के खिलाफ उनके दो गोलों ने ब्राजील को अगले दौर में पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नए प्रारूप के तहत हर टीम को ग्रुप चरण में कम से कम तीन मैच मिलने से खिलाड़ियों के पास बेहतर प्रदर्शन और अधिक गोल करने के अवसर भी बढ़ गए हैं।

    विश्व कप के इतिहास पर नजर डालें तो 1930 के पहले टूर्नामेंट में कुल 70 गोल हुए थे। इसके बाद 1998 और 2014 में 171 गोल तथा 2022 में 172 गोल का रिकॉर्ड बना था। अब 2026 विश्व कप ने इन सभी उपलब्धियों को पीछे छोड़ दिया है। फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा रफ्तार जारी रही तो फाइनल तक कुल गोलों की संख्या 200 के आंकड़े को भी पार कर सकती है। इससे यह विश्व कप गोलों और रोमांच दोनों के लिहाज से अब तक का सबसे यादगार संस्करण बनने की ओर बढ़ रहा है।

  • पुर्तगाल की पांच सितारा जीत रोनाल्डो के डबल अटैक ,से उज्बेकिस्तान पस्त

    पुर्तगाल की पांच सितारा जीत रोनाल्डो के डबल अटैक ,से उज्बेकिस्तान पस्त


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 में पुर्तगाल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए उज्बेकिस्तान को 5-0 से हराकर अपने इरादे साफ कर दिए हैं। इस जीत के सबसे बड़े नायक रहे दिग्गज फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो जिन्होंने दो शानदार गोल दागकर न सिर्फ टीम को बड़ी जीत दिलाई बल्कि विश्व फुटबॉल के इतिहास में एक नया अध्याय भी जोड़ दिया। उनके शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।

    41 वर्षीय रोनाल्डो ने इस मुकाबले में ऐसा रिकॉर्ड बनाया जो अब तक कोई खिलाड़ी नहीं बना सका था। वह दुनिया के पहले फुटबॉलर बन गए हैं जिन्होंने छह अलग-अलग फीफा वर्ल्ड कप टूर्नामेंट में गोल करने का कारनामा किया है। यह उपलब्धि उनके लंबे और शानदार करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानी जा रही है।

    मैच की शुरुआत से ही पुर्तगाल ने आक्रामक खेल दिखाया। टीम ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और लगातार उज्बेकिस्तान के डिफेंस पर दबाव बनाया। रोनाल्डो ने अपने अनुभव और बेहतरीन फिनिशिंग का प्रदर्शन करते हुए दो गोल दागे। उनके गोलों ने मैच का रुख पूरी तरह पुर्तगाल के पक्ष में मोड़ दिया। टीम के अन्य खिलाड़ियों ने भी शानदार तालमेल दिखाते हुए कुल पांच गोल किए और उज्बेकिस्तान को मुकाबले में वापसी का कोई मौका नहीं दिया।

    रोनाल्डो के लिए यह मुकाबला बेहद खास रहा क्योंकि पिछले मैच में वह अपनी छाप छोड़ने में सफल नहीं रहे थे। कांगो के खिलाफ खेले गए मुकाबले में पुर्तगाल को 1-1 की बराबरी से संतोष करना पड़ा था और उस मैच में रोनाल्डो गोल नहीं कर सके थे। इसके बाद कई फुटबॉल विशेषज्ञों और प्रशंसकों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए थे कि क्या उन्हें अब भी शुरुआती एकादश में जगह मिलनी चाहिए। हालांकि उज्बेकिस्तान के खिलाफ उनके प्रदर्शन ने सभी आलोचनाओं का जवाब दे दिया।

    गोल करने के बाद रोनाल्डो ने अपना मशहूर SIUUU सेलिब्रेशन किया जिसे देखकर स्टेडियम में मौजूद हजारों प्रशंसक उत्साह से झूम उठे। इसके बाद वह अपने साथियों के साथ बेंच की ओर दौड़े और जीत का जश्न मनाया। यह दृश्य मैच के सबसे यादगार पलों में शामिल रहा।

    इस जीत के साथ पुर्तगाल के ग्रुप चरण में चार अंक हो गए हैं और टीम की नॉकआउट दौर में पहुंचने की उम्मीदें काफी मजबूत हो गई हैं। अब पुर्तगाल का अगला और अंतिम ग्रुप मुकाबला कोलंबिया के खिलाफ होगा जो काफी अहम माना जा रहा है। दूसरी ओर उज्बेकिस्तान की टीम अटलांटा में कांगो से भिड़ेगी और टूर्नामेंट में बने रहने के लिए उसे हर हाल में जीत दर्ज करनी होगी।इस बीच अर्जेंटीना के स्टार खिलाड़ी लियोनेल मेसी भी टूर्नामेंट में शानदार फॉर्म में नजर आ रहे हैं।

    मेसी अब तक सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बने हुए हैं और गोल्डन बूट की दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं। ऐसे में फुटबॉल प्रेमियों को रोनाल्डो और मेसी के बीच एक और यादगार मुकाबले जैसी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। फिलहाल पूरे फुटबॉल जगत की नजरें रोनाल्डो पर टिकी हैं जिन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उम्र सिर्फ एक संख्या है और महान खिलाड़ी अपने प्रदर्शन से इतिहास लिखते हैं।