Tag: Finance

  • नतालियो व्हीटली ने निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर भारत और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के बीच वित्तीय सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की

    नतालियो व्हीटली ने निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर भारत और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के बीच वित्तीय सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की

    नई दिल्ली ।केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के प्रीमियर और वित्त मंत्री नतालियो डी. व्हीटली से मुलाकात की। बैठक के दौरान भारत और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के बीच वित्तीय एवं आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने के विभिन्न अवसरों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने वित्तीय सेवाओं, डिजिटल परिवर्तन, निवेश प्रोत्साहन और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विचार किया।

    नतालियो व्हीटली भारत की यात्रा पर वित्तीय सेवाओं से जुड़े विशेषज्ञों के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। उनकी यात्रा का उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच मौजूदा संबंधों को मजबूत करने के साथ आर्थिक सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करना है। प्रतिनिधिमंडल के कार्यक्रम में नई दिल्ली के अलावा गिफ्ट सिटी, मुंबई और बेंगलुरु का दौरा भी शामिल है।

    बैठक के दौरान व्हीटली ने भारत और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के बीच साझेदारी को व्यापक बनाने में रुचि व्यक्त की। उन्होंने वित्तीय सेवाओं के साथ फिनटेक, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, व्यापार, निवेश संवर्धन और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर जोर दिया।

    वित्तीय तकनीक के क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमता और डिजिटल माध्यमों के व्यापक इस्तेमाल को देखते हुए फिनटेक सहयोग को दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। डिजिटल परिवर्तन के साथ वित्तीय सेवाओं में नवाचार और निवेश के नए रास्ते विकसित हो सकते हैं। क्षमता निर्माण के जरिए विशेषज्ञता और अनुभव साझा करने की संभावनाएं भी इस साझेदारी को मजबूत कर सकती हैं।

    निर्मला सीतारमण ने भारत को वित्तीय सेवाओं और निवेश के लिए दुनिया के सबसे बड़े तथा तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक बताया। उन्होंने साझा हित वाले क्षेत्रों में ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के साथ सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं का स्वागत किया। बैठक में दोनों पक्षों के आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए संभावित क्षेत्रों पर विचार-विमर्श हुआ।

    गिफ्ट सिटी और इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर से जुड़े अवसर भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं। ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के प्रतिनिधिमंडल का गिफ्ट सिटी दौरा वित्तीय सेवाओं और निवेश से जुड़े संभावित सहयोग को समझने का अवसर प्रदान कर सकता है। मुंबई और बेंगलुरु में होने वाली बातचीत से वित्तीय क्षेत्र और तकनीकी क्षमताओं से जुड़े अन्य अवसरों पर भी चर्चा आगे बढ़ सकती है।

    इस बीच, निर्मला सीतारमण 25 अगस्त से 2 सितंबर तक कनाडा और अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगी। इस यात्रा का उद्देश्य भारत के साथ दोनों देशों की आर्थिक और वित्तीय साझेदारी को मजबूत करना, निवेश संबंधों को गहरा करना तथा वैश्विक आर्थिक प्राथमिकताओं पर सहयोग बढ़ाना है।

    कनाडा के टोरंटो में सीतारमण कनाडा के वित्त एवं राष्ट्रीय राजस्व मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैम्पेन के साथ पहले आर्थिक एवं वित्तीय संवाद में हिस्सा लेंगी। इस दौरान व्यापक आर्थिक विकास, वित्तीय क्षेत्र में सहयोग, द्विपक्षीय निवेश अवसरों और वैश्विक आर्थिक मुद्दों पर चर्चा होगी।

    कनाडा यात्रा के दौरान वित्त मंत्री एक विशेष निवेश राउंडटेबल में भी शामिल होंगी। इसमें ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्रिटिकल मिनरल्स क्षेत्रों से जुड़े उद्योगपति, मुख्य कार्यकारी अधिकारी और वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। बातचीत का उद्देश्य नए निवेश अवसरों की पहचान करना और दीर्घकालिक कारोबारी साझेदारियों को बढ़ावा देना है।

    भारत और कनाडा के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के साथ गिफ्ट सिटी-आईएफएससी में निवेश की संभावनाएं भी चर्चा का हिस्सा रहेंगी। इस तरह ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के साथ हुई बैठक और आगामी विदेश यात्रा, दोनों ही वित्तीय सेवाओं, निवेश और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग को विस्तार देने की व्यापक दिशा से जुड़ी हैं।

  • शहजाद पूनावाला ने बीजेपी छोड़ने की बताई वजह, आर्थिक तंगी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच लिया बड़ा फैसला

    शहजाद पूनावाला ने बीजेपी छोड़ने की बताई वजह, आर्थिक तंगी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच लिया बड़ा फैसला

    नई दिल्ली । बीजेपी के चर्चित प्रवक्ताओं में शामिल रहे शहजाद पूनावाला ने पार्टी की जिम्मेदारी से अलग होने के बाद अपने फैसले की वजह स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि इस्तीफे के पीछे केवल राजनीतिक कारण नहीं थे, बल्कि आर्थिक परिस्थितियों और परिवार से जुड़ी जिम्मेदारियों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लंबे समय तक पार्टी के लिए पूर्णकालिक भूमिका निभाने के कारण उनके लिए आय का कोई दूसरा नियमित माध्यम बनाए रखना मुश्किल हो गया था। अब उन्होंने प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करने की दिशा में आगे बढ़ने का फैसला किया है।

    शहजाद पूनावाला ने बताया कि राजनीति में सक्रिय रहते हुए घर चलाने से जुड़ी चुनौतियां लगातार बढ़ रही थीं। किराया, रोजमर्रा के खर्च और परिवार की अन्य आवश्यकताओं को पूरा करना उनके लिए कठिन होता जा रहा था। पार्टी के काम को पूरा समय देने के कारण वह किसी अन्य नौकरी या पेशेवर गतिविधि में नियमित रूप से शामिल नहीं हो पा रहे थे। उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में बचत के सहारे खर्च चलाया गया, लेकिन समय के साथ बचत भी समाप्त होने लगी।

    परिवार से जुड़ी परिस्थितियों ने भी उनके फैसले को प्रभावित किया। शहजाद पूनावाला के अनुसार, उनकी मां कुछ समय पहले एक दुर्घटना का शिकार हुई थीं। ऐसे समय में उनके साथ रहना और उनकी देखभाल करना उनके लिए प्राथमिकता बन गया। राजनीतिक गतिविधियों में लगातार व्यस्त रहने के साथ पारिवारिक जिम्मेदारियों को संतुलित करना मुश्किल हो रहा था। इसी पृष्ठभूमि में उन्होंने 30 जुलाई को अपना इस्तीफा दिया, जिसे बातचीत के बाद पार्टी ने स्वीकार कर लिया।

    पार्टी से अलग होने के बावजूद शहजाद पूनावाला ने स्पष्ट किया कि उनके वैचारिक रुख में बदलाव नहीं आया है। उन्होंने कहा कि वह बीजेपी की विचारधारा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थक बने हुए हैं। उनके मुताबिक, पार्टी की जिम्मेदारी छोड़ना उनके राजनीतिक विचारों से दूरी बनाने का संकेत नहीं है। उन्होंने अपने फैसले को मुख्य रूप से व्यक्तिगत, आर्थिक और पारिवारिक परिस्थितियों से जुड़ा बताया है।

    अब शहजाद पूनावाला निजी क्षेत्र में नौकरी तलाशने की तैयारी कर रहे हैं। वह पहले भी कॉरपोरेट क्षेत्र में काम कर चुके हैं, इसलिए उनका मानना है कि पेशेवर जीवन में वापस लौटना उनके लिए नया अनुभव नहीं होगा। हालांकि उन्होंने अभी किसी विशेष कंपनी या पद को लेकर अंतिम निर्णय नहीं किया है। उनका अगला कदम प्राइवेट सेक्टर में रोजगार हासिल करने की दिशा में होगा।

    बीजेपी की जिम्मेदारी से मुक्त होने के बाद शहजाद ने मीडिया और सोशल मीडिया पर अपनी सक्रियता बढ़ाने की भी बात कही है। उनका कहना है कि पार्टी पद से जुड़े दायित्वों के कारण जिन सीमाओं और जिम्मेदारियों का पालन करना पड़ता था, अब उनमें बदलाव आएगा। वह सार्वजनिक मुद्दों और राजनीतिक विषयों पर अपनी राय पहले की तुलना में अधिक स्वतंत्रता के साथ रखने की कोशिश करेंगे।

    शहजाद पूनावाला ने बीजेपी को युवाओं से जुड़ने को लेकर भी सुझाव दिया है। उनके अनुसार, बदलते दौर में राजनीतिक दलों को युवाओं की भाषा, उनकी प्राथमिकताओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका को अधिक गंभीरता से समझना चाहिए। उनका मानना है कि सोशल मीडिया और नए डिजिटल माध्यमों के जरिए युवा वर्ग से संवाद मजबूत किया जा सकता है। बीजेपी से उनकी औपचारिक जिम्मेदारी समाप्त होने के बावजूद पार्टी के प्रति उनका समर्थन कायम रहने की बात उन्होंने दोहराई है। इस्तीफे के बाद उनका फोकस अब आर्थिक स्थिरता, परिवार की जिम्मेदारियों और पेशेवर जीवन में वापसी पर रहेगा।

  • Gen Z में बढ़ा Buy Now Pay Later का चलन, शौक और लाइफस्टाइल के लिए बढ़ती उधारी बना रही आर्थिक दबाव का नया कारण

    Gen Z में बढ़ा Buy Now Pay Later का चलन, शौक और लाइफस्टाइल के लिए बढ़ती उधारी बना रही आर्थिक दबाव का नया कारण

    नई दिल्ली । बदलती डिजिटल लाइफस्टाइल के साथ युवाओं के खर्च करने और भुगतान करने के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव आया है। खासकर Gen Z के बीच Buy Now Pay Later यानी अभी खरीदें और बाद में भुगतान करें जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। महंगे मोबाइल फोन, ब्रांडेड कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, यात्रा, खान-पान और मनोरंजन जैसी जरूरतों या इच्छाओं को पूरा करने के लिए अब हमेशा खाते में पर्याप्त रकम होने का इंतजार नहीं किया जाता। आसान किस्त और तत्काल क्रेडिट की सुविधा ने खरीदारी को पहले की तुलना में काफी सरल बना दिया है।

    पहले कर्ज को मुख्य रूप से घर खरीदने, शिक्षा, कारोबार या किसी बड़ी आपात जरूरत से जोड़कर देखा जाता था। अब डिजिटल भुगतान व्यवस्था और ऑनलाइन शॉपिंग के विस्तार के साथ छोटे और रोजमर्रा के खर्चों के लिए भी क्रेडिट का इस्तेमाल बढ़ा है। क्रेडिट कार्ड, Buy Now Pay Later और छोटे व्यक्तिगत ऋण युवाओं को तत्काल खर्च करने की सुविधा देते हैं। खरीदारी के समय पूरी रकम चुकाने के बजाय कम मासिक किस्त दिखाई देती है, जिससे महंगा सामान भी आसानी से खरीदने योग्य नजर आने लगता है।

    क्रेडिट व्यवहार से जुड़े आंकड़ों और विश्लेषणों से यह संकेत मिलता है कि अलग-अलग पीढ़ियों में पहली बार उधार लेने की उम्र कम हुई है। युवा वर्ग कम उम्र में ही क्रेडिट सिस्टम से जुड़ रहा है। इसका एक बड़ा कारण डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कुछ ही चरणों में उपलब्ध होने वाली ऋण और किस्त की सुविधा है। कई बार खरीदारी करते समय ही ग्राहक को EMI या Pay Later का विकल्प मिल जाता है। इससे खरीदारी का फैसला बचत और आय के आधार पर करने के बजाय तत्काल उपलब्ध किस्त के आधार पर होने लगता है।

    इस बदलाव का सबसे बड़ा जोखिम तब सामने आता है, जब एक व्यक्ति एक साथ कई क्रेडिट सुविधाओं का इस्तेमाल करने लगता है। उदाहरण के लिए किसी युवा की मासिक आय 40 हजार रुपये है और वह मोबाइल, कपड़े, यात्रा तथा अन्य खर्चों के लिए अलग-अलग किस्त ले लेता है। प्रत्येक खरीदारी की EMI अकेले देखने पर छोटी लग सकती है, लेकिन महीने के अंत में सभी किस्तों का कुल भुगतान काफी बड़ा हो सकता है। इसके बाद जरूरी घरेलू खर्चों और बचत के लिए उपलब्ध रकम कम हो जाती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार क्रेडिट सुविधा अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन इसे अतिरिक्त आय समझना वित्तीय गलती हो सकती है। किसी बैंक या वित्तीय संस्था की ओर से दी गई क्रेडिट लिमिट का अर्थ यह नहीं है कि उतनी पूरी राशि खर्च करना सुरक्षित है। खर्च करने से पहले अपनी आय, मौजूदा कर्ज, मासिक किस्तों और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है।

    समय पर भुगतान नहीं होने की स्थिति में ब्याज, लेट फीस और अन्य शुल्क आर्थिक बोझ बढ़ा सकते हैं। लगातार भुगतान में देरी से क्रेडिट रिकॉर्ड पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए युवाओं के लिए जरूरी है कि केवल कम EMI देखकर खरीदारी का फैसला न करें। कुल भुगतान राशि, ब्याज, प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्कों को समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

    बढ़ती डिजिटल क्रेडिट सुविधाओं के बीच वित्तीय अनुशासन ही सबसे बड़ा बचाव है। शौक और लाइफस्टाइल को पूरा करने के लिए लिया गया छोटा कर्ज अगर लगातार बढ़ता जाए तो वह भविष्य की बचत और आर्थिक स्वतंत्रता पर असर डाल सकता है। जरूरत और इच्छा के बीच अंतर समझकर खर्च करना तथा आय के अनुरूप ही उधारी लेना युवाओं को इस बढ़ते कर्ज के दबाव से बचा सकता है।

  • 18 अगस्त 2026 करियर राशिफल: चंद्रमा तुला राशि में, नौकरी और कारोबार में मिलेंगे नए अवसर, धन संबंधी फैसलों में बरतें सावधानी

    18 अगस्त 2026 करियर राशिफल: चंद्रमा तुला राशि में, नौकरी और कारोबार में मिलेंगे नए अवसर, धन संबंधी फैसलों में बरतें सावधानी

    नई दिल्ली । 18 अगस्त 2026 का दिन करियर और आर्थिक मामलों में संतुलन बनाकर चलने का संकेत दे रहा है। तुला राशि में चंद्रमा का प्रभाव बातचीत, साझेदारी और टीमवर्क को मजबूत कर सकता है। वहीं सिंह राशि में सूर्य आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता बढ़ाने वाला रहेगा। मिथुन राशि में मंगल सक्रियता बढ़ाएगा, लेकिन जल्दबाजी में फैसला लेने से बचना जरूरी होगा। कर्क राशि में बुध और गुरु की स्थिति बचत तथा पारिवारिक वित्तीय योजना पर ध्यान देने का संकेत दे रही है। कन्या राशि वालों को फिजूलखर्ची से बचना होगा, जबकि मीन राशि वालों के लिए धैर्य और अनुशासन महत्वपूर्ण रहेगा।

    मेष राशि के जातकों के लिए आज बातचीत के जरिए काम आसान होने के योग हैं। अटका हुआ धन शांतिपूर्वक बातचीत करने से वापस मिलने की संभावना बन सकती है। कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारी लेने का अवसर मिलेगा और सहकर्मियों के साथ नरमी से पेश आना लाभ देगा। वृष राशि वालों को बचत पर ध्यान देना चाहिए। दफ्तर में अनुभवी अधिकारियों से बातचीत अच्छी रह सकती है और आपके काम की सराहना हो सकती है। नौकरी बदलने का विचार है तो जल्दबाजी के बजाय सभी पहलुओं की जांच करें।

    मिथुन राशि के लिए आज बातचीत और संपर्क महत्वपूर्ण रहेंगे। मीटिंग, लेखन और नए लोगों से जुड़ने वाले कामों में सफलता मिल सकती है। हालांकि निवेश या किसी को पैसा देने से पहले पूरी जानकारी लेना जरूरी है। कर्क राशि वालों की आर्थिक योजना मजबूत रह सकती है। परिवार और भविष्य से जुड़े खर्चों पर ध्यान रहेगा। कार्यक्षेत्र में सहयोग मिलेगा और लगातार मेहनत का सकारात्मक परिणाम सामने आ सकता है।

    सिंह राशि वालों में नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास बढ़ेगा। कार्यस्थल पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल सकती है, लेकिन केवल अपनी बात मनवाने के बजाय दूसरों की राय सुनना बेहतर रहेगा। धन के मामले में दिखावे पर खर्च करने से बचें। कन्या राशि वालों को बजट पर विशेष नजर रखनी होगी। सुख-सुविधाओं से जुड़ी खरीदारी का मन बन सकता है, लेकिन आज बचत करना अधिक उपयोगी रहेगा। कार्यक्षेत्र में छोटी गलतियां पकड़ने की क्षमता मजबूत रहेगी, फिर भी दूसरों की कमियां निकालने के बजाय समाधान पर ध्यान दें।

    तुला राशि वालों के लिए दिन संतुलित फैसलों और टीम के साथ बेहतर तालमेल का रहेगा। पैसों से जुड़े निर्णयों में किसी भरोसेमंद व्यक्ति की सलाह उपयोगी हो सकती है। कार्यस्थल पर मतभेद होने की स्थिति में आपकी समझदारी समस्या को सुलझाने में मदद करेगी। वृश्चिक राशि वालों को अपनी आर्थिक योजनाओं को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए। अनावश्यक खर्च से बचें और किसी बड़े वादे से पहले सभी तथ्यों की जांच करें। काम में एकाग्रता बनाए रखने से लाभ होगा।

    धनु राशि वालों के लिए नए विचार कमाई के अवसर खोल सकते हैं, लेकिन हर प्रस्ताव में निवेश करना उचित नहीं होगा। नेटवर्किंग और नए लोगों से संपर्क करियर में मददगार साबित हो सकता है। मकर राशि वालों को पुरानी योजनाओं और जिम्मेदारियों की समीक्षा करनी चाहिए। कोई रुका हुआ काम सुधार के बाद आगे बढ़ सकता है। कुंभ राशि वालों की अलग सोच कार्यक्षेत्र में ध्यान आकर्षित करेगी, लेकिन नए विचारों को लागू करने से पहले बजट और जोखिम की जांच जरूरी है।

    मीन राशि वालों के लिए दिन धैर्य और लगातार प्रयास का संदेश दे रहा है। रुका हुआ आर्थिक मामला धीरे-धीरे सुलझ सकता है। कार्यक्षेत्र में गति अपेक्षाकृत धीमी महसूस हो सकती है, लेकिन मेहनत बेकार नहीं जाएगी। अपनी कुशलता बढ़ाने और अधूरे काम पूरे करने पर ध्यान देना बेहतर रहेगा। कुल मिलाकर 18 अगस्त का दिन करियर में संवाद, सहयोग और संतुलन को महत्व देने वाला है। आर्थिक मामलों में भावनात्मक फैसलों से बचकर योजना के अनुसार आगे बढ़ने से बेहतर परिणाम मिलने की संभावना रहेगी।

  • निर्मला सीतारमण आज जयपुर में BRICS वित्त मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगी, वैश्विक आर्थिक चुनौतियों पर होगा मंथन

    निर्मला सीतारमण आज जयपुर में BRICS वित्त मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगी, वैश्विक आर्थिक चुनौतियों पर होगा मंथन

    नई दिल्ली ।केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बुधवार को जयपुर में आयोजित BRICS देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की दो दिवसीय बैठक में शामिल होंगी। भारत की BRICS अध्यक्षता के तहत हो रही यह बैठक वैश्विक आर्थिक और वित्तीय चुनौतियों पर सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक में समूह के सभी 11 सदस्य देशों के वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक के गवर्नर हिस्सा लेंगे।

    जयपुर के रामबाग पैलेस में आयोजित होने वाली बैठक का उद्घाटन सत्र बुधवार सुबह 11:15 बजे शुरू होगा। इसमें वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। आर्थिक विकास, वित्तीय उदारीकरण, जोखिम प्रबंधन और वैश्विक वित्तीय स्थिरता जैसे मुद्दे चर्चा के प्रमुख केंद्र में रहेंगे।

    भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा भी बैठक में हिस्सा लेने के लिए जयपुर पहुंच चुके हैं। उद्घाटन सत्र के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और आरबीआई गवर्नर सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं तथा केंद्रीय बैंकिंग से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार साझा करेंगे।

    बैठक में प्रतिनिधि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में सामने आ रही चुनौतियों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के सामने मौजूद अवसरों पर भी चर्चा करेंगे। निवेश बढ़ाने, वित्तीय सहयोग मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था को अधिक स्थिर बनाने से जुड़े विषयों पर सदस्य देशों के बीच विचारों का आदान-प्रदान होगा।

    जयपुर पहुंचने पर वित्त मंत्री का स्वागत राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने किया। बैठक के आयोजन को देखते हुए जयपुर में विदेशी प्रतिनिधियों के लिए विशेष कार्यक्रम भी तैयार किए गए हैं।

    दो दिवसीय बैठक गुरुवार दोपहर 12:30 बजे तक चलेगी। इस दौरान BRICS सदस्य देशों के प्रतिनिधि आर्थिक और वित्तीय क्षेत्र में आपसी सहयोग के संभावित रास्तों पर चर्चा करेंगे। बदलते वैश्विक आर्थिक माहौल में निवेश, वित्तीय जोखिम और आर्थिक स्थिरता जैसे विषयों का महत्व लगातार बढ़ा है, ऐसे में बैठक को महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा जा रहा है।

    विदेशी प्रतिनिधियों को राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने के लिए भी विशेष कार्यक्रम रखा गया है। बुधवार शाम पांच बजे सभी प्रतिनिधि जयपुर सिटी पैलेस का दौरा करेंगे। इस दौरान राजस्थान की संस्कृति, परंपराओं और विरासत को प्रदर्शित करने वाला सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

    BRICS वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की वार्षिक बैठक की शुरुआत करीब 18 वर्ष पहले वैश्विक वित्तीय संकट के दौर में हुई थी। समय के साथ यह बैठक वैश्विक आर्थिक और वित्तीय मामलों पर सदस्य देशों के बीच संवाद और सहयोग का महत्वपूर्ण मंच बन गई है।

    जयपुर दूसरी बार इस बैठक की मेजबानी कर रहा है। इससे पहले वर्ष 2021 में कोविड-19 महामारी के दौरान भी जयपुर में इस बैठक का आयोजन हुआ था। उस समय आर्थिक पुनरुद्धार, टीकाकरण, डिजिटल स्वास्थ्य, सामाजिक अवसंरचना और वित्तीय समावेशन जैसे मुद्दे प्रमुख चर्चा में रहे थे।

    2021 की बैठक में यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म से जुड़े विषय पर भी विचार-विमर्श हुआ था। इस बार बदलती वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के बीच वित्तीय स्थिरता, निवेश और सहयोग से जुड़े मुद्दों पर सदस्य देशों की प्राथमिकताएं चर्चा के केंद्र में रहने की उम्मीद है।

    भारत की अध्यक्षता में हो रही यह बैठक ऐसे समय आयोजित हो रही है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई तरह की अनिश्चितताओं से गुजर रही है। ऐसे में BRICS देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों के बीच समन्वय बढ़ाने की कोशिशों पर बैठक का विशेष ध्यान रहेगा।

  • मंगल के नक्षत्र में राहु का बड़ा गोचर, जानिए किन 3 राशियों को साल के अंत तक मिलेगा अचानक धन लाभ

    मंगल के नक्षत्र में राहु का बड़ा गोचर, जानिए किन 3 राशियों को साल के अंत तक मिलेगा अचानक धन लाभ

    नई दिल्ली ।ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों और नक्षत्रों के परिवर्तन को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इनका सीधा प्रभाव सभी राशियों के जीवन पर पड़ता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, राहु ग्रह ने मंगल के स्वामित्व वाले धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश कर लिया है। ज्योतिष में धनिष्ठा नक्षत्र को धन, पद, प्रतिष्ठा, समृद्धि और सफलता का प्रतीक माना गया है, जबकि राहु को अचानक शुभ या अशुभ परिणाम देने वाले ग्रह के रूप में देखा जाता है। राहु के इस नक्षत्र परिवर्तन से राशि चक्र की तीन विशेष राशियों मेष, सिंह और कन्या को साल के अंत तक जबरदस्त आर्थिक लाभ और करियर में प्रगति मिलने के संकेत दिखाई दे रहे हैं।

    मेष राशि के जातकों के लिए राहु का यह गोचर बेहद अनुकूल रहने की संभावना है। मेष राशि का स्वामी ग्रह स्वयं मंगल है और धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामित्व भी मंगल के ही पास है। इस शुभ संयोग के प्रभाव से मेष राशि के जातकों के आत्मविश्वास में अप्रत्याशित वृद्धि देखने को मिलेगी। लंबे समय से अटके हुए कार्य गति पकड़ेंगे और सफलतापूर्वक पूरे होंगे। कार्यक्षेत्र में पदोन्नति या कोई बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है, वहीं व्यापारियों को भी अच्छा वित्तीय मुनाफा होने की संभावना है। हालांकि, ज्योतिषविदों ने किसी भी बड़े निर्णय को जल्दबाजी में न लेने की सलाह दी है।

    सिंह राशि के जातकों के लिए भी राहु का यह नक्षत्र परिवर्तन अत्यधिक शुभ एवं लाभकारी सिद्ध हो सकता है। इस दौरान जातकों की कई पुरानी इच्छाएं पूरी होने के योग बन रहे हैं। आय के नए स्रोत विकसित होंगे और आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा। अचल संपत्ति या पैतृक संपत्ति से जुड़े मामलों में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। अचानक किसी बड़े वित्तीय लाभ के अवसर प्राप्त हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त, सरकारी क्षेत्र या प्रशासनिक सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों को पदोन्नति और उच्च पद मिलने के प्रबल संकेत हैं।

    कन्या राशि के लोगों के लिए राहु का मंगल के नक्षत्र में जाना करियर और व्यापार में नए अवसर लेकर आएगा। नौकरीपेशा लोगों को मनपसंद स्थान या विभाग में काम करने का मौका मिल सकता है। जो लोग नई नौकरी की तलाश में हैं या नौकरी छोड़कर अपना स्वयं का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए यह समय बेहद अनुकूल रहेगा। अतिरिक्त आय के साधन बनने से बैंक बैलेंस में बढ़ोतरी होगी। कुल मिलाकर यह अवधि तीनों राशियों के जातकों के लिए प्रगतिशील और लाभदायक सिद्ध होगी।

  • आय सीमा नहीं तय करती ITR की जरूरत, इन वित्तीय गतिविधियों में टैक्स रिटर्न भरना बन जाता है अनिवार्य

    आय सीमा नहीं तय करती ITR की जरूरत, इन वित्तीय गतिविधियों में टैक्स रिटर्न भरना बन जाता है अनिवार्य

    नई दिल्ली । इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) को लेकर अक्सर लोगों के मन में यह भ्रम रहता है कि अगर उनकी सालाना आय टैक्स छूट की सीमा से कम है तो उन्हें रिटर्न दाखिल करने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि आयकर नियमों के अनुसार कुछ ऐसी परिस्थितियां भी हैं, जहां व्यक्ति की आय पर टैक्स देनदारी न होने के बावजूद ITR भरना कानूनी रूप से जरूरी हो जाता है।

    आयकर विभाग ने ऐसी कई स्थितियां तय की हैं, जिनमें केवल आय की सीमा ही नहीं बल्कि व्यक्ति के वित्तीय लेन-देन और आर्थिक गतिविधियों के आधार पर भी ITR दाखिल करने की बाध्यता बन सकती है। ऐसे में टैक्स फ्री इनकम वाले लोगों को भी अपने वित्तीय रिकॉर्ड और लेन-देन की स्थिति के आधार पर रिटर्न भरने की जरूरत पड़ सकती है।

    अगर किसी व्यक्ति ने एक वित्तीय वर्ष में बिजली बिल के रूप में 1 लाख रुपये या उससे अधिक का भुगतान किया है, तो उसके लिए ITR दाखिल करना जरूरी हो सकता है। यह नियम उन लोगों पर लागू होता है जिनके बड़े खर्च उनकी आर्थिक स्थिति को दर्शाते हैं।

    इसी तरह अगर किसी व्यक्ति ने खुद या अपने परिवार के किसी सदस्य के विदेश दौरे पर 2 लाख रुपये या उससे अधिक खर्च किए हैं, तो उसे भी आयकर रिटर्न दाखिल करना आवश्यक हो सकता है। विदेश यात्रा पर होने वाले बड़े खर्च को आयकर नियमों के तहत रिपोर्टिंग की श्रेणी में रखा गया है।

    यदि किसी व्यक्ति के एक या एक से अधिक सेविंग बैंक खातों में एक वित्तीय वर्ष के दौरान कुल जमा राशि 50 लाख रुपये या उससे अधिक पहुंच जाती है, तो भी ITR दाखिल करना अनिवार्य हो सकता है। इसी तरह करंट अकाउंट में 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक जमा करने वाले व्यक्तियों को भी रिटर्न दाखिल करना पड़ता है।

    टैक्स कटौती से जुड़ा नियम भी महत्वपूर्ण है। अगर किसी व्यक्ति की आय से निर्धारित सीमा से अधिक TDS या TCS काटा गया है, तो उसे ITR दाखिल करना जरूरी हो सकता है। हालांकि वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा अलग निर्धारित की गई है।

    इसके अलावा जिन लोगों की कुल आय लागू बेसिक छूट सीमा से अधिक है, उनके लिए भी ITR दाखिल करना अनिवार्य है। अलग-अलग टैक्स व्यवस्था के अनुसार छूट सीमा अलग हो सकती है, इसलिए करदाताओं को अपनी आय और लागू नियमों के आधार पर निर्णय लेना चाहिए।

    अगर किसी व्यक्ति को शेयर बाजार, क्रिप्टो निवेश या संपत्ति बिक्री से नुकसान हुआ है और वह उस नुकसान को भविष्य के वर्षों में होने वाले लाभ के साथ समायोजित करना चाहता है, तो उसे नुकसान को आगे ले जाने के लिए ITR दाखिल करना जरूरी होता है।

    विदेश में संपत्ति रखने वाले भारतीय निवासियों के लिए भी टैक्स रिटर्न दाखिल करना आवश्यक हो सकता है। अगर किसी व्यक्ति के नाम विदेश में बैंक खाता, शेयर या कोई संपत्ति है, तो उसे इसकी जानकारी आयकर रिटर्न में देनी होती है।

    फ्रीलांसर, डॉक्टर, वकील, आईटी प्रोफेशनल या अन्य सलाहकारों जैसे पेशेवरों के लिए भी कुछ परिस्थितियों में ITR जरूरी हो जाता है। अगर उनकी पेशेवर आय निर्धारित सीमा से अधिक है, तो उन्हें रिटर्न दाखिल करना पड़ता है।

    इसी तरह कारोबार करने वाले लोगों के लिए भी टर्नओवर के आधार पर ITR दाखिल करने की आवश्यकता हो सकती है। यदि किसी व्यवसाय का सालाना कारोबार तय सीमा से अधिक है, तो मुनाफा कम होने या न होने की स्थिति में भी रिटर्न दाखिल करना जरूरी हो सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि ITR केवल टैक्स भुगतान का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति की वित्तीय पहचान और रिकॉर्ड का महत्वपूर्ण दस्तावेज भी होता है। लोन लेने, वीजा प्रक्रिया, निवेश और कई अन्य वित्तीय कार्यों में भी ITR की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए करदाताओं को केवल आय सीमा देखकर निर्णय लेने के बजाय अपनी पूरी वित्तीय स्थिति और नियमों को ध्यान में रखकर रिटर्न दाखिल करना चाहिए।

  • कोविड महामारी के दौरान मिले केंद्रीय कोष और उपकरणों के अप्रयुक्त रहने तथा वित्तीय अनियमितताओं पर विपक्षी दल ने जताई आपत्ति

    कोविड महामारी के दौरान मिले केंद्रीय कोष और उपकरणों के अप्रयुक्त रहने तथा वित्तीय अनियमितताओं पर विपक्षी दल ने जताई आपत्ति

    नई दिल्ली । राज्य विधानमंडल में प्रस्तुत की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की नवीनतम रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद प्रशासनिक और वित्तीय प्रबंधन को लेकर राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। प्रतिवेदन में स्वास्थ्य सेवाओं, प्राकृतिक आपदा राहत वितरण तथा बजटीय आवंटन के निष्पादन में कई स्तरों पर पाई गई कमियों को रेखांकित किया गया है। महामारी के संवेदनशील दौर में उपलब्ध कराए गए संसाधनों के पूर्ण उपयोग न होने और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं में अनुपालन की अनिमितताओं पर विपक्षी दलों ने कड़ा रुख अपनाते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की है।

    लेखा परीक्षा रिपोर्ट के मुख्य अंशों के अनुसार स्वास्थ्य क्षेत्र में आवंटित बजट का एक बड़ा हिस्सा निर्धारित समय सीमा तक अप्रयुक्त पड़ा रहा। वैश्विक महामारी के समय उपलब्ध कराए गए महत्वपूर्ण चिकित्सा संसाधनों, जैसे ऑक्सीजन संयंत्रों और सघन चिकित्सा इकाई उपकरणों के कई केंद्रों पर चालू न होने का उल्लेख किया गया है। इसके अतिरिक्त, गंभीर प्राकृतिक आपदाओं के उपरांत राहत राशि के पुनरावृत्त वितरण के मामले भी सामने आए हैं, जिससे राज्य के खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ा। इन निष्कर्षों ने आपदा प्रबंधन और लाभार्थी सत्यापन प्रणालियों की दक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    प्रतिवेदन में औद्योगिक विकास हेतु भूमि आवंटन और विभिन्न राज्य स्तरीय कल्याणकारी योजनाओं के संचालन में भी प्रक्रियागत त्रुटियों की ओर संकेत किया गया है। निर्धारित नियमों का पूरी तरह पालन न होने से हुए वित्तीय नुकसान के साथ-साथ राज्य के समग्र राजकोषीय घाटे और बढ़ते ऋण भार को लेकर चिंता जताई गई है। बजट के एक बड़े हिस्से का वर्ष के अंत तक बिना खर्च हुए रह जाना और अतिरिक्त व्यय के लिए आवश्यक विधायी स्वीकृतियों के लंबित रहने को वित्तीय अनुशासन के दृष्टिकोण से गंभीर माना जा रहा है।

    संसदीय पटल पर रिपोर्ट की प्रति रखे जाने के उपरांत मुख्य विपक्षी दल ने इन निष्कर्षों को प्रशासनिक विफलता करार देते हुए कड़े दंडात्मक कदमों की मांग की है। विपक्षी प्रतिनिधियों का कहना है कि जनकल्याणकारी योजनाओं में पाई गई यह ढिलाई राज्य के दीर्घकालिक आर्थिक विकास को प्रभावित करती है। दूसरी ओर, प्रशासनिक सूत्रों का तर्क है कि ऑडिट रिपोर्ट में उठाए गए अधिकांश बिंदु प्रक्रियागत और तकनीकी प्रकृति के हैं, जिन पर विभागीय समीक्षा के माध्यम से स्थिति स्पष्ट की जाएगी। फिलहाल, इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद राज्य के प्रशासनिक तंत्र में जवाबदेही को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

  • 28 जुलाई का करियर राशिफल: चंद्रमा के राशि परिवर्तन से करियर और धन के नए अवसर, कई राशियों को मिलेगा लाभ

    28 जुलाई का करियर राशिफल: चंद्रमा के राशि परिवर्तन से करियर और धन के नए अवसर, कई राशियों को मिलेगा लाभ

    नई दिल्ली । 28 जुलाई का दिन ग्रह-नक्षत्रों की चाल के अनुसार करियर, व्यापार और आर्थिक मामलों में संतुलित निर्णय लेने का संकेत दे रहा है। दिन की शुरुआत में चंद्रमा धनु राशि में रहेंगे, जिससे नई योजनाओं पर काम करने का उत्साह बढ़ेगा। शाम के समय चंद्रमा मकर राशि में प्रवेश करेंगे, जिसके बाद कार्यों में अनुशासन, जिम्मेदारी और व्यावहारिक सोच का प्रभाव अधिक दिखाई देगा। सूर्य और बृहस्पति की स्थिति भी निर्णय क्षमता को मजबूत करने में सहायक मानी जा रही है, जबकि शनि धैर्य और नियमित प्रयासों का महत्व बढ़ाएंगे।

    मेष राशि के लोगों के लिए दिन आर्थिक स्थिरता का संकेत दे रहा है। पुराने वित्तीय मामलों में प्रगति हो सकती है और कार्यस्थल पर योजनाबद्ध तरीके से काम करने से लाभ मिलेगा। वृष राशि के जातकों को अपने प्रयासों का सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है। बजट पर नियंत्रण और नियमित कार्यशैली उनके लिए लाभदायक साबित हो सकती है।

    मिथुन राशि के लोगों के लिए संवाद और संपर्क सबसे बड़ी ताकत बनेंगे। मीटिंग, इंटरव्यू और व्यावसायिक बातचीत में सफलता मिलने के योग हैं। हालांकि किसी भी वित्तीय दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से पहले पूरी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। कर्क राशि के लिए आय के नए अवसर बन सकते हैं और कार्यस्थल पर जिम्मेदारी निभाने की क्षमता की सराहना हो सकती है।

    सिंह राशि के जातकों को अनावश्यक खर्चों से बचने और बजट पर ध्यान देने की आवश्यकता रहेगी। व्यापार और साझेदारी से जुड़े मामलों में स्थिरता बनी रह सकती है। कन्या राशि के लिए दिन योजनाबद्ध निवेश और कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारियों का संकेत दे रहा है। बारीकियों पर ध्यान देने से महत्वपूर्ण कार्य सफलतापूर्वक पूरे हो सकते हैं।

    तुला राशि के लोगों को आर्थिक मामलों में संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी गई है। टीमवर्क और सहयोग के माध्यम से कार्यक्षेत्र में बेहतर परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। वृश्चिक राशि के लिए पुराने निवेश और आर्थिक योजनाओं की समीक्षा लाभदायक रहेगी। धैर्य और संयम के साथ लिए गए निर्णय भविष्य में सकारात्मक परिणाम दे सकते हैं।

    धनु राशि के जातकों में दिन के शुरुआती हिस्से में आत्मविश्वास और नई योजनाओं पर काम करने की ऊर्जा बनी रहेगी। शाम के बाद बचत और लंबी अवधि की वित्तीय योजना पर ध्यान देना अधिक उपयोगी रहेगा। मकर राशि के लिए चंद्रमा का गोचर विशेष महत्व रखता है। कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं और आर्थिक अनुशासन बनाए रखने से भविष्य मजबूत होगा।

    कुंभ राशि के लोगों को नियमित आय और पुराने आर्थिक मामलों की समीक्षा पर ध्यान देना चाहिए। जल्दबाजी में बड़े खर्च से बचना बेहतर रहेगा। वहीं मीन राशि के लिए दिन पुराने निवेश, बचत और वित्तीय योजनाओं का मूल्यांकन करने के लिए अनुकूल माना गया है। कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं, लेकिन धैर्य और अनुभव के बल पर उन्हें सफलतापूर्वक पूरा किया जा सकेगा।

    ज्योतिषीय संकेतों के अनुसार 28 जुलाई का दिन अधिकांश राशियों के लिए अनुशासन, योजनाबद्ध कार्यशैली और सोच-समझकर लिए गए आर्थिक निर्णयों पर केंद्रित रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि जल्दबाजी से बचकर और दीर्घकालिक लक्ष्यों को ध्यान में रखकर किए गए प्रयास आने वाले समय में बेहतर परिणाम दे सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों के साथ-साथ व्यापारियों और निवेश से जुड़े लोगों के लिए भी यह दिन संतुलित रणनीति अपनाने का संदेश देता है।

  • कड़े परिश्रम के बाद भी घर में नहीं टिक रहा है पैसा? उत्तर दिशा की स्वच्छता और तिजोरी का सही मुख बदल सकता है वित्तीय स्थिति

    कड़े परिश्रम के बाद भी घर में नहीं टिक रहा है पैसा? उत्तर दिशा की स्वच्छता और तिजोरी का सही मुख बदल सकता है वित्तीय स्थिति

    नई दिल्ली । मानव जीवन में कठिन परिश्रम और निरंतर प्रयासों के बाद भी कई बार अपेक्षित आर्थिक प्रगति प्राप्त नहीं हो पाती है। ज्योतिष एवं प्राचीन भारतीय वास्तुकला विज्ञान के विशेषज्ञों के अनुसार, इसका एक मुख्य कारण आवासीय परिसर के भीतर मौजूद विभिन्न प्रकार के वास्तु दोष हो सकते हैं। वास्तु शास्त्र मूल रूप से मानव के रहने के स्थान और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के मध्य एक गहरा एवं संतुलित संबंध स्थापित करने का कार्य करता है। यदि किसी भवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बाधित हो जाता है, तो वहां संचित धन की आवक रुक जाती है और अवांछित व्यय में अचानक अप्रत्याशित वृद्धि होने लगती है। मध्य प्रदेश सहित देश भर के वास्तुविदों का मानना है कि घर की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए प्राचीन ग्रंथों में कुछ अत्यंत प्रभावशाली सिद्धांत बताए गए हैं, जिनका अनुसरण कर वित्तीय बाधाओं को दूर किया जा सकता है।

    वास्तु सिद्धांतों के अंतर्गत घर की उत्तर दिशा को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि यह दिशा धन के अधिपति भगवान कुबेर से संबद्ध होती है। आर्थिक विकास की निरंतरता को सुनिश्चित करने के लिए इस दिशा को सदैव भार रहित, खुला और पूरी तरह स्वच्छ रखना अनिवार्य माना गया है। उत्तर दिशा में किसी भी प्रकार का भारी निर्माण कार्य, सीढ़ियां, भारी फर्नीचर अथवा कबाड़ रखने का स्टोर रूम नहीं होना चाहिए। इसके अतिरिक्त, संचित धन को सुरक्षित रखने वाली अलमारी या तिजोरी को सदैव भवन के दक्षिणी हिस्से की दीवार से सटाकर इस प्रकार स्थापित करना चाहिए कि उसका मुख खुलते समय हमेशा उत्तर दिशा की ओर रहे। इस विशिष्ट व्यवस्था को धन को आकर्षित करने और उसे स्थायी बनाए रखने में सबसे अधिक फलदायी माना गया है।

    भवन का मुख्य प्रवेश द्वार केवल निवासियों के आने-जाने का मार्ग नहीं होता, बल्कि यह सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि के प्रवेश का भी प्राथमिक माध्यम माना जाता है। मुख्य द्वार के सामने किसी भी प्रकार का अवरोध, गंदगी, सीलन या अंधकार नहीं होना चाहिए। प्रवेश द्वार पर स्पष्ट और सुंदर नामपट्टिका के साथ पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे शुभ शक्तियों का घर में आगमन सुगम हो सके। इसके साथ ही, घर के भीतर जल के निकास की दिशा भी वित्तीय स्थिति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जल प्रवाह को सीधे तौर पर धन के प्रवाह का प्रतीक माना जाता है, इसलिए पानी की निकासी हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा की ओर ही होनी चाहिए। घर के किसी भी हिस्से में नल का लगातार टपकना भारी आर्थिक क्षति और अपव्यय का कारण बनता है।

    घर का उत्तर-पूर्व कोना जिसे सामान्य भाषा में ईशान कोण कहा जाता है, उसे सबसे पवित्र और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। इस संवेदनशील स्थान पर किसी भी प्रकार का कचरा, झाड़ू, भारी लोहा या खराब पड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरण रखने से गंभीर वास्तु दोष उत्पन्न होता है, जो धन के मार्ग में स्थायी रुकावटें पैदा करता है। इस क्षेत्र को जितना पवित्र और खाली रखा जाएगा, मानसिक शांति और समृद्धि उतनी ही तीव्र गति से बढ़ेगी। इसके साथ ही, एक अत्यंत प्रभावी पारंपरिक उपाय के रूप में तिजोरी या धन रखने के स्थान के ठीक सामने एक स्वच्छ दर्पण स्थापित किया जा सकता है। दर्पण में धन का प्रतिबिंब दिखना प्रतीकात्मक रूप से समृद्धि को दोगुना करने और सकारात्मक तरंगों को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होता है।