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  • चार दिन की तेजी पर लगा ब्रेक, सेंसेक्स 330 अंक टूटा और निफ्टी गिरा, जानिए बाजार में दबाव की बड़ी वजहें

    चार दिन की तेजी पर लगा ब्रेक, सेंसेक्स 330 अंक टूटा और निफ्टी गिरा, जानिए बाजार में दबाव की बड़ी वजहें

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में पिछले कारोबारी सत्र की तेजी के बाद मंगलवार को एक बार फिर गिरावट देखने को मिली। सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में बंद हुए। आईटी और वित्तीय शेयरों में दबाव के चलते बाजार की चार दिन से जारी तेजी का सिलसिला भी टूट गया।

    कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 329.91 अंक यानी 0.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,529.08 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी50 में 85.30 अंक यानी 0.36 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 23,329.00 के स्तर पर पहुंच गया।

    व्यापक बाजार में भी दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.08 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.23 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। इससे बाजार के बड़े शेयरों के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी सीमित कमजोरी दर्ज हुई।

    सेक्टरवार कारोबार की बात करें तो निफ्टी आईटी, निफ्टी सीमेंट, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी फार्मा में गिरावट रही। दूसरी ओर निफ्टी मीडिया, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी मेटल में तेजी दर्ज की गई।

    निफ्टी50 के शेयरों में कोल इंडिया सबसे अधिक बढ़ने वाले शेयरों में रहा। कंपनी के शेयर में 3.2 प्रतिशत की तेजी दर्ज हुई। इसके अलावा इटरनल, इंडिगो, टाइटन और डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज भी बढ़त वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे।

    दूसरी तरफ टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, नेस्ले इंडिया, बजाज फिनसर्व, बजाज फाइनेंस, सन फार्मा, ग्रासिम, ट्रेंट, आयशर मोटर्स और टीसीएस में दबाव रहा। इन शेयरों में गिरावट ने प्रमुख सूचकांकों पर भी असर डाला।

    बाजार के जानकारों के मुताबिक, लगातार चार कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत दोबारा 99 से 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ विदेशी निवेश की निकासी और भू-राजनीतिक अनिश्चितता भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर रही है।

    इन परिस्थितियों में महंगाई और आयात लागत को लेकर चिंता बनी हुई है। रुपये की स्थिति भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है। मंगलवार को रुपया करीब 95.8 रुपये प्रति डॉलर के स्तर के आसपास रहा।

    वैश्विक ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों के बीच सोने और चांदी की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव जारी रहा। इन अंतरराष्ट्रीय संकेतकों का असर घरेलू बाजार के निवेशकों की धारणा पर देखने को मिल रहा है।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार निफ्टी के 23,300 से 23,350 के दायरे में रहने के कारण निवेशकों को अल्पकालिक तेजी का पीछा करने के बजाय सावधानी बरतने की जरूरत है। निवेश को अलग-अलग हिस्सों में बांटने, मजबूत कंपनियों पर ध्यान देने और पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखने की सलाह दी गई है।

    इसके साथ ही बाजार में बड़ी गिरावट की स्थिति में अवसरों का इस्तेमाल करने के लिए पर्याप्त नकदी बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है। मंगलवार की गिरावट के बाद अब निवेशकों की नजर आगामी कारोबारी सत्रों में वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेश के रुख पर रहेगी।

  • एनएसई आईपीओ के सब्सक्रिप्शन का आज आखिरी दिन, ग्रे मार्केट प्रीमियम गिरकर 59 रुपये पर पहुंचा

    एनएसई आईपीओ के सब्सक्रिप्शन का आज आखिरी दिन, ग्रे मार्केट प्रीमियम गिरकर 59 रुपये पर पहुंचा

    नई दिल्ली ।नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई के आईपीओ में निवेश के लिए सोमवार को आखिरी मौका है। सब्सक्रिप्शन के अंतिम दिन इश्यू के ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी जीएमपी में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। मौजूदा स्थिति में जीएमपी 60 रुपये के स्तर से नीचे फिसलकर 59 रुपये प्रति शेयर पर आ गया है। यह इश्यू प्राइस के मुकाबले करीब 3.31 प्रतिशत का प्रीमियम दर्शाता है।

    एनएसई के आईपीओ के ग्रे मार्केट प्रीमियम में पिछले कुछ दिनों के दौरान लगातार कमजोरी देखने को मिली है। 11 सितंबर को प्राइस बैंड की घोषणा के बाद जीएमपी करीब 218 रुपये प्रति शेयर के स्तर पर था। इसके बाद इसमें लगातार गिरावट दर्ज की गई। 17 सितंबर को जब आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था, तब ग्रे मार्केट प्रीमियम 142 रुपये प्रति शेयर या करीब 7.96 प्रतिशत था।

    अब अंतिम दिन तक जीएमपी घटकर 59 रुपये रह गया है। हालांकि, ग्रे मार्केट प्रीमियम को आधिकारिक बाजार संकेतक नहीं माना जाता है। यह आईपीओ के इश्यू प्राइस से ऊपर अनौपचारिक बाजार में मिलने वाले प्रीमियम को दर्शाता है। इसलिए जीएमपी का मौजूदा स्तर शेयर की वास्तविक लिस्टिंग कीमत की गारंटी नहीं देता।

    एनएसई ने आईपीओ के लिए 1,700 रुपये से 1,785 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। ऊपरी प्राइस बैंड के आधार पर इश्यू का आकार 22,561.57 करोड़ रुपये है। इस आईपीओ में कुल 12.64 करोड़ शेयर पेश किए जा रहे हैं।

    यह आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस है। इसका मतलब है कि शेयरों की बिक्री से जुटाई जाने वाली रकम कंपनी के पास नहीं जाएगी, बल्कि मौजूदा निवेशकों को प्राप्त होगी। ऐसे में आईपीओ के जरिए कंपनी के कारोबार में सीधे नई पूंजी का प्रवेश नहीं होगा।

    निवेशकों के बीच एनएसई के वित्तीय प्रदर्शन को लेकर भी चर्चा है। वित्त वर्ष 2026 में ऑपरेशन से कंपनी की आय 16,601.31 करोड़ रुपये रही। यह वित्त वर्ष 2025 में दर्ज 17,140.67 करोड़ रुपये की आय से कम है। इस तरह सालाना आधार पर ऑपरेशन से आय में तीन प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज हुई।

    कंपनी की आय के प्रमुख स्रोतों में शामिल ट्रांजैक्शन चार्जेज में भी कमी आई है। समीक्षा अवधि के दौरान ट्रांजैक्शन चार्जेज से प्राप्त आय 13,635.76 करोड़ रुपये से घटकर 13,057.01 करोड़ रुपये रह गई। यह सालाना आधार पर करीब चार प्रतिशत की गिरावट है।

    आईपीओ के अंतिम दिन जीएमपी में आई कमी और कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन में दर्ज गिरावट निवेशकों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है। इश्यू की अंतिम स्थिति और आगे शेयर की बाजार में लिस्टिंग का प्रदर्शन निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

  • एनएसई आईपीओ की ग्रे मार्केट चमक फीकी, एक हफ्ते में जीएमपी करीब 32 प्रतिशत गिरा, निवेशकों की नजर वित्तीय प्रदर्शन पर

    एनएसई आईपीओ की ग्रे मार्केट चमक फीकी, एक हफ्ते में जीएमपी करीब 32 प्रतिशत गिरा, निवेशकों की नजर वित्तीय प्रदर्शन पर


    नई दिल्ली ।लंबे समय से प्रतीक्षित नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई का आईपीओ गुरुवार से आम निवेशकों के लिए खुल गया। हालांकि, आईपीओ के बाजार में आने के साथ ही इसके ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी जीएमपी में लगातार कमजोरी देखने को मिल रही है। पिछले एक सप्ताह के दौरान एनएसई के जीएमपी में करीब 32 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इससे आईपीओ को लेकर निवेशकों की नजर अब केवल संभावित लिस्टिंग पर ही नहीं, बल्कि कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर भी बनी हुई है।

    उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 11 सितंबर को एनएसई के आईपीओ का जीएमपी 218 रुपये प्रति शेयर था। इसके बाद 12 सितंबर को यह 208 रुपये, 13 सितंबर को 210 रुपये और 14 सितंबर को 208 रुपये रहा। 15 सितंबर को जीएमपी घटकर 160 रुपये और 16 सितंबर को 145 रुपये पर आ गया। 17 सितंबर को यह 125 रुपये बताया गया, जबकि दोपहर तीन बजे के आसपास यह 148 रुपये प्रति शेयर के स्तर पर पहुंच गया। एक सप्ताह के दौरान इस स्तर पर कुल मिलाकर करीब 32 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

    ग्रे मार्केट प्रीमियम किसी आईपीओ के शेयरों के लिए अनौपचारिक बाजार में इश्यू प्राइस के ऊपर चल रहे प्रीमियम को दर्शाता है। हालांकि, जीएमपी आधिकारिक बाजार मूल्य नहीं होता और इसके आधार पर शेयर की वास्तविक लिस्टिंग कीमत की गारंटी नहीं दी जा सकती। आईपीओ की लिस्टिंग के समय बाजार की परिस्थितियां, निवेशकों की मांग और अन्य कारक वास्तविक कीमत को प्रभावित कर सकते हैं।

    एनएसई का आईपीओ 17 सितंबर से 21 सितंबर तक आम निवेशकों के लिए खुला रहेगा। कंपनी ने इसके लिए 1,700 रुपये से 1,785 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। ऊपरी मूल्य सीमा के आधार पर इश्यू का आकार 22,561.57 करोड़ रुपये है। आईपीओ में कुल 12.64 करोड़ शेयर पेश किए जा रहे हैं।

    यह पूरा इश्यू ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस के रूप में है। इसका मतलब है कि आईपीओ के तहत पेश किए जा रहे शेयर मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी से संबंधित हैं। इसलिए इश्यू से मिलने वाली राशि कंपनी के कारोबार में नई पूंजी के रूप में सीधे नहीं जाएगी, बल्कि मौजूदा निवेशकों को प्राप्त होगी।

    एनएसई के आईपीओ को लेकर निवेशकों के लिए कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन भी एक महत्वपूर्ण पहलू है। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी की ऑपरेशन से आय 16,601.31 करोड़ रुपये रही। यह वित्त वर्ष 2025 में दर्ज 17,140.67 करोड़ रुपये की आय से कम है। इस तरह सालाना आधार पर ऑपरेशन से आय में तीन प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज हुई।

    कंपनी की आय के प्रमुख स्रोतों में शामिल ट्रांजैक्शन चार्जेज में भी कमी आई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार समीक्षा अवधि में यह आय 13,635.76 करोड़ रुपये से घटकर 13,057.01 करोड़ रुपये रह गई। यानी इसमें सालाना आधार पर करीब चार प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।

    आईपीओ खुलने के साथ अब निवेशकों के सामने कंपनी के मूल्यांकन, वित्तीय प्रदर्शन, इश्यू प्राइस और बाजार में संभावित मांग जैसे कई पहलू हैं। वहीं जीएमपी में आई हालिया गिरावट ने संभावित लिस्टिंग प्रीमियम को लेकर बाजार की उम्मीदों में बदलाव का संकेत दिया है। हालांकि अंतिम लिस्टिंग कीमत का निर्धारण आधिकारिक बाजार में कारोबार शुरू होने के बाद ही होगा।

  • उंगलियां मिलाने पर भी गैप दिखे तो हस्तरेखा शास्त्र में इसे आर्थिक स्थिति और स्वभाव से जोड़कर देखा जाता है

    उंगलियां मिलाने पर भी गैप दिखे तो हस्तरेखा शास्त्र में इसे आर्थिक स्थिति और स्वभाव से जोड़कर देखा जाता है

    नई दिल्ली ।हस्तरेखा शास्त्र में हथेली की रेखाओं के अलावा उंगलियों की बनावट और उनके बीच दिखाई देने वाले अंतर को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि जब हथेली की सभी उंगलियों को एक साथ मिलाने के बाद भी उनके बीच गैप दिखाई देता है, तो इससे व्यक्ति के स्वभाव और आर्थिक स्थिति से जुड़े कुछ संकेत मिल सकते हैं। अलग-अलग उंगलियों के बीच बने गैप का अलग अर्थ बताया गया है।

    तर्जनी और मध्यमा उंगली के बीच गैप को हस्तरेखा शास्त्र में स्वतंत्र विचारों से जोड़कर देखा जाता है। ऐसी मान्यता है कि जिन लोगों की इन दोनों उंगलियों के बीच अंतर दिखाई देता है, वे किसी के दबाव में रहकर काम करना पसंद नहीं करते। वे अपने तरीके से निर्णय लेना और स्वतंत्र होकर काम करना पसंद कर सकते हैं।

    ऐसे लोगों को मेहनती भी माना जाता है। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, ये लोग अपनी मेहनत के दम पर धन और मान-सम्मान हासिल करने की कोशिश करते हैं। हालांकि, कमाई के साथ खर्च करने की प्रवृत्ति भी अधिक हो सकती है। इसलिए इन्हें आर्थिक मामलों में अनुशासन और खर्च पर नियंत्रण रखने की सलाह दी जाती है। मान्यता के अनुसार, यदि ऐसे लोग अपनी योजनाओं और खर्च को व्यवस्थित तरीके से संभालें, तो जीवन में अच्छी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।

    मध्यमा और अनामिका उंगली के बीच गैप को आर्थिक स्थिति और करियर से जोड़कर देखा जाता है। हस्तरेखा शास्त्र की मान्यता के अनुसार, ऐसे लोगों को जीवन के शुरुआती वर्षों में आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। खासतौर पर 25 वर्ष की उम्र तक आर्थिक स्थिति में उतार-चढ़ाव रहने की बात कही जाती है। करियर में भी स्थिरता आने में समय लग सकता है।

    इसके बावजूद ऐसे लोगों के स्वभाव को उदार माना जाता है। मान्यता है कि इनके पास धन सीमित होने के बावजूद ये दूसरों की मदद करने की कोशिश करते हैं। भविष्य को लेकर ज्यादा चिंता न करने के कारण ये लोग कई बार आर्थिक योजना और बजट बनाने पर पर्याप्त ध्यान नहीं देते। इससे उन्हें वित्तीय परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। सही योजना और बजट के साथ जीवन आगे बढ़ाने पर परिस्थितियों में सुधार की संभावना मानी जाती है।

    अनामिका और कनिष्ठा यानी छोटी उंगली के बीच दिखाई देने वाले गैप को हस्तरेखा शास्त्र में व्यक्ति की वृद्धावस्था की आर्थिक स्थिति से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता के अनुसार, यदि इन दोनों उंगलियों के बीच अंतर हो तो बुढ़ापे में आर्थिक परेशानी की स्थिति बन सकती है। ऐसे लोगों को जीवन के शुरुआती चरण से ही भविष्य के लिए आर्थिक योजना बनाने की सलाह दी जाती है।

    वहीं, अगर अनामिका और कनिष्ठा के बीच गैप नहीं होता है, तो हस्तरेखा शास्त्र में इसे वृद्धावस्था में बेहतर आर्थिक स्थिति का संकेत माना जाता है। इस तरह उंगलियों के बीच का अंतर व्यक्ति के स्वभाव, खर्च करने की आदत, आर्थिक योजना और जीवन के अलग-अलग चरणों से जुड़ी मान्यताओं के आधार पर देखा जाता है।

    हालांकि, ये सभी बातें हस्तरेखा शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित भविष्यवाणी या आर्थिक स्थिति का निश्चित आकलन नहीं माना जाना चाहिए। उंगलियों की बनावट और उनके बीच का अंतर व्यक्ति की शारीरिक संरचना से भी संबंधित हो सकता है। इसलिए इन संकेतों को केवल पारंपरिक हस्तरेखा मान्यताओं के संदर्भ में ही देखना उचित है।

  • नतालियो व्हीटली ने निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर भारत और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के बीच वित्तीय सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की

    नतालियो व्हीटली ने निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर भारत और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के बीच वित्तीय सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की

    नई दिल्ली ।केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के प्रीमियर और वित्त मंत्री नतालियो डी. व्हीटली से मुलाकात की। बैठक के दौरान भारत और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के बीच वित्तीय एवं आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने के विभिन्न अवसरों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने वित्तीय सेवाओं, डिजिटल परिवर्तन, निवेश प्रोत्साहन और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विचार किया।

    नतालियो व्हीटली भारत की यात्रा पर वित्तीय सेवाओं से जुड़े विशेषज्ञों के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। उनकी यात्रा का उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच मौजूदा संबंधों को मजबूत करने के साथ आर्थिक सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करना है। प्रतिनिधिमंडल के कार्यक्रम में नई दिल्ली के अलावा गिफ्ट सिटी, मुंबई और बेंगलुरु का दौरा भी शामिल है।

    बैठक के दौरान व्हीटली ने भारत और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के बीच साझेदारी को व्यापक बनाने में रुचि व्यक्त की। उन्होंने वित्तीय सेवाओं के साथ फिनटेक, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, व्यापार, निवेश संवर्धन और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर जोर दिया।

    वित्तीय तकनीक के क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमता और डिजिटल माध्यमों के व्यापक इस्तेमाल को देखते हुए फिनटेक सहयोग को दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। डिजिटल परिवर्तन के साथ वित्तीय सेवाओं में नवाचार और निवेश के नए रास्ते विकसित हो सकते हैं। क्षमता निर्माण के जरिए विशेषज्ञता और अनुभव साझा करने की संभावनाएं भी इस साझेदारी को मजबूत कर सकती हैं।

    निर्मला सीतारमण ने भारत को वित्तीय सेवाओं और निवेश के लिए दुनिया के सबसे बड़े तथा तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक बताया। उन्होंने साझा हित वाले क्षेत्रों में ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के साथ सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं का स्वागत किया। बैठक में दोनों पक्षों के आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए संभावित क्षेत्रों पर विचार-विमर्श हुआ।

    गिफ्ट सिटी और इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर से जुड़े अवसर भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं। ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के प्रतिनिधिमंडल का गिफ्ट सिटी दौरा वित्तीय सेवाओं और निवेश से जुड़े संभावित सहयोग को समझने का अवसर प्रदान कर सकता है। मुंबई और बेंगलुरु में होने वाली बातचीत से वित्तीय क्षेत्र और तकनीकी क्षमताओं से जुड़े अन्य अवसरों पर भी चर्चा आगे बढ़ सकती है।

    इस बीच, निर्मला सीतारमण 25 अगस्त से 2 सितंबर तक कनाडा और अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगी। इस यात्रा का उद्देश्य भारत के साथ दोनों देशों की आर्थिक और वित्तीय साझेदारी को मजबूत करना, निवेश संबंधों को गहरा करना तथा वैश्विक आर्थिक प्राथमिकताओं पर सहयोग बढ़ाना है।

    कनाडा के टोरंटो में सीतारमण कनाडा के वित्त एवं राष्ट्रीय राजस्व मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैम्पेन के साथ पहले आर्थिक एवं वित्तीय संवाद में हिस्सा लेंगी। इस दौरान व्यापक आर्थिक विकास, वित्तीय क्षेत्र में सहयोग, द्विपक्षीय निवेश अवसरों और वैश्विक आर्थिक मुद्दों पर चर्चा होगी।

    कनाडा यात्रा के दौरान वित्त मंत्री एक विशेष निवेश राउंडटेबल में भी शामिल होंगी। इसमें ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्रिटिकल मिनरल्स क्षेत्रों से जुड़े उद्योगपति, मुख्य कार्यकारी अधिकारी और वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। बातचीत का उद्देश्य नए निवेश अवसरों की पहचान करना और दीर्घकालिक कारोबारी साझेदारियों को बढ़ावा देना है।

    भारत और कनाडा के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के साथ गिफ्ट सिटी-आईएफएससी में निवेश की संभावनाएं भी चर्चा का हिस्सा रहेंगी। इस तरह ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के साथ हुई बैठक और आगामी विदेश यात्रा, दोनों ही वित्तीय सेवाओं, निवेश और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग को विस्तार देने की व्यापक दिशा से जुड़ी हैं।

  • शहजाद पूनावाला ने बीजेपी छोड़ने की बताई वजह, आर्थिक तंगी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच लिया बड़ा फैसला

    शहजाद पूनावाला ने बीजेपी छोड़ने की बताई वजह, आर्थिक तंगी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच लिया बड़ा फैसला

    नई दिल्ली । बीजेपी के चर्चित प्रवक्ताओं में शामिल रहे शहजाद पूनावाला ने पार्टी की जिम्मेदारी से अलग होने के बाद अपने फैसले की वजह स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि इस्तीफे के पीछे केवल राजनीतिक कारण नहीं थे, बल्कि आर्थिक परिस्थितियों और परिवार से जुड़ी जिम्मेदारियों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लंबे समय तक पार्टी के लिए पूर्णकालिक भूमिका निभाने के कारण उनके लिए आय का कोई दूसरा नियमित माध्यम बनाए रखना मुश्किल हो गया था। अब उन्होंने प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करने की दिशा में आगे बढ़ने का फैसला किया है।

    शहजाद पूनावाला ने बताया कि राजनीति में सक्रिय रहते हुए घर चलाने से जुड़ी चुनौतियां लगातार बढ़ रही थीं। किराया, रोजमर्रा के खर्च और परिवार की अन्य आवश्यकताओं को पूरा करना उनके लिए कठिन होता जा रहा था। पार्टी के काम को पूरा समय देने के कारण वह किसी अन्य नौकरी या पेशेवर गतिविधि में नियमित रूप से शामिल नहीं हो पा रहे थे। उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में बचत के सहारे खर्च चलाया गया, लेकिन समय के साथ बचत भी समाप्त होने लगी।

    परिवार से जुड़ी परिस्थितियों ने भी उनके फैसले को प्रभावित किया। शहजाद पूनावाला के अनुसार, उनकी मां कुछ समय पहले एक दुर्घटना का शिकार हुई थीं। ऐसे समय में उनके साथ रहना और उनकी देखभाल करना उनके लिए प्राथमिकता बन गया। राजनीतिक गतिविधियों में लगातार व्यस्त रहने के साथ पारिवारिक जिम्मेदारियों को संतुलित करना मुश्किल हो रहा था। इसी पृष्ठभूमि में उन्होंने 30 जुलाई को अपना इस्तीफा दिया, जिसे बातचीत के बाद पार्टी ने स्वीकार कर लिया।

    पार्टी से अलग होने के बावजूद शहजाद पूनावाला ने स्पष्ट किया कि उनके वैचारिक रुख में बदलाव नहीं आया है। उन्होंने कहा कि वह बीजेपी की विचारधारा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थक बने हुए हैं। उनके मुताबिक, पार्टी की जिम्मेदारी छोड़ना उनके राजनीतिक विचारों से दूरी बनाने का संकेत नहीं है। उन्होंने अपने फैसले को मुख्य रूप से व्यक्तिगत, आर्थिक और पारिवारिक परिस्थितियों से जुड़ा बताया है।

    अब शहजाद पूनावाला निजी क्षेत्र में नौकरी तलाशने की तैयारी कर रहे हैं। वह पहले भी कॉरपोरेट क्षेत्र में काम कर चुके हैं, इसलिए उनका मानना है कि पेशेवर जीवन में वापस लौटना उनके लिए नया अनुभव नहीं होगा। हालांकि उन्होंने अभी किसी विशेष कंपनी या पद को लेकर अंतिम निर्णय नहीं किया है। उनका अगला कदम प्राइवेट सेक्टर में रोजगार हासिल करने की दिशा में होगा।

    बीजेपी की जिम्मेदारी से मुक्त होने के बाद शहजाद ने मीडिया और सोशल मीडिया पर अपनी सक्रियता बढ़ाने की भी बात कही है। उनका कहना है कि पार्टी पद से जुड़े दायित्वों के कारण जिन सीमाओं और जिम्मेदारियों का पालन करना पड़ता था, अब उनमें बदलाव आएगा। वह सार्वजनिक मुद्दों और राजनीतिक विषयों पर अपनी राय पहले की तुलना में अधिक स्वतंत्रता के साथ रखने की कोशिश करेंगे।

    शहजाद पूनावाला ने बीजेपी को युवाओं से जुड़ने को लेकर भी सुझाव दिया है। उनके अनुसार, बदलते दौर में राजनीतिक दलों को युवाओं की भाषा, उनकी प्राथमिकताओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका को अधिक गंभीरता से समझना चाहिए। उनका मानना है कि सोशल मीडिया और नए डिजिटल माध्यमों के जरिए युवा वर्ग से संवाद मजबूत किया जा सकता है। बीजेपी से उनकी औपचारिक जिम्मेदारी समाप्त होने के बावजूद पार्टी के प्रति उनका समर्थन कायम रहने की बात उन्होंने दोहराई है। इस्तीफे के बाद उनका फोकस अब आर्थिक स्थिरता, परिवार की जिम्मेदारियों और पेशेवर जीवन में वापसी पर रहेगा।

  • Gen Z में बढ़ा Buy Now Pay Later का चलन, शौक और लाइफस्टाइल के लिए बढ़ती उधारी बना रही आर्थिक दबाव का नया कारण

    Gen Z में बढ़ा Buy Now Pay Later का चलन, शौक और लाइफस्टाइल के लिए बढ़ती उधारी बना रही आर्थिक दबाव का नया कारण

    नई दिल्ली । बदलती डिजिटल लाइफस्टाइल के साथ युवाओं के खर्च करने और भुगतान करने के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव आया है। खासकर Gen Z के बीच Buy Now Pay Later यानी अभी खरीदें और बाद में भुगतान करें जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। महंगे मोबाइल फोन, ब्रांडेड कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, यात्रा, खान-पान और मनोरंजन जैसी जरूरतों या इच्छाओं को पूरा करने के लिए अब हमेशा खाते में पर्याप्त रकम होने का इंतजार नहीं किया जाता। आसान किस्त और तत्काल क्रेडिट की सुविधा ने खरीदारी को पहले की तुलना में काफी सरल बना दिया है।

    पहले कर्ज को मुख्य रूप से घर खरीदने, शिक्षा, कारोबार या किसी बड़ी आपात जरूरत से जोड़कर देखा जाता था। अब डिजिटल भुगतान व्यवस्था और ऑनलाइन शॉपिंग के विस्तार के साथ छोटे और रोजमर्रा के खर्चों के लिए भी क्रेडिट का इस्तेमाल बढ़ा है। क्रेडिट कार्ड, Buy Now Pay Later और छोटे व्यक्तिगत ऋण युवाओं को तत्काल खर्च करने की सुविधा देते हैं। खरीदारी के समय पूरी रकम चुकाने के बजाय कम मासिक किस्त दिखाई देती है, जिससे महंगा सामान भी आसानी से खरीदने योग्य नजर आने लगता है।

    क्रेडिट व्यवहार से जुड़े आंकड़ों और विश्लेषणों से यह संकेत मिलता है कि अलग-अलग पीढ़ियों में पहली बार उधार लेने की उम्र कम हुई है। युवा वर्ग कम उम्र में ही क्रेडिट सिस्टम से जुड़ रहा है। इसका एक बड़ा कारण डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कुछ ही चरणों में उपलब्ध होने वाली ऋण और किस्त की सुविधा है। कई बार खरीदारी करते समय ही ग्राहक को EMI या Pay Later का विकल्प मिल जाता है। इससे खरीदारी का फैसला बचत और आय के आधार पर करने के बजाय तत्काल उपलब्ध किस्त के आधार पर होने लगता है।

    इस बदलाव का सबसे बड़ा जोखिम तब सामने आता है, जब एक व्यक्ति एक साथ कई क्रेडिट सुविधाओं का इस्तेमाल करने लगता है। उदाहरण के लिए किसी युवा की मासिक आय 40 हजार रुपये है और वह मोबाइल, कपड़े, यात्रा तथा अन्य खर्चों के लिए अलग-अलग किस्त ले लेता है। प्रत्येक खरीदारी की EMI अकेले देखने पर छोटी लग सकती है, लेकिन महीने के अंत में सभी किस्तों का कुल भुगतान काफी बड़ा हो सकता है। इसके बाद जरूरी घरेलू खर्चों और बचत के लिए उपलब्ध रकम कम हो जाती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार क्रेडिट सुविधा अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन इसे अतिरिक्त आय समझना वित्तीय गलती हो सकती है। किसी बैंक या वित्तीय संस्था की ओर से दी गई क्रेडिट लिमिट का अर्थ यह नहीं है कि उतनी पूरी राशि खर्च करना सुरक्षित है। खर्च करने से पहले अपनी आय, मौजूदा कर्ज, मासिक किस्तों और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है।

    समय पर भुगतान नहीं होने की स्थिति में ब्याज, लेट फीस और अन्य शुल्क आर्थिक बोझ बढ़ा सकते हैं। लगातार भुगतान में देरी से क्रेडिट रिकॉर्ड पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए युवाओं के लिए जरूरी है कि केवल कम EMI देखकर खरीदारी का फैसला न करें। कुल भुगतान राशि, ब्याज, प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्कों को समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

    बढ़ती डिजिटल क्रेडिट सुविधाओं के बीच वित्तीय अनुशासन ही सबसे बड़ा बचाव है। शौक और लाइफस्टाइल को पूरा करने के लिए लिया गया छोटा कर्ज अगर लगातार बढ़ता जाए तो वह भविष्य की बचत और आर्थिक स्वतंत्रता पर असर डाल सकता है। जरूरत और इच्छा के बीच अंतर समझकर खर्च करना तथा आय के अनुरूप ही उधारी लेना युवाओं को इस बढ़ते कर्ज के दबाव से बचा सकता है।

  • 18 अगस्त 2026 करियर राशिफल: चंद्रमा तुला राशि में, नौकरी और कारोबार में मिलेंगे नए अवसर, धन संबंधी फैसलों में बरतें सावधानी

    18 अगस्त 2026 करियर राशिफल: चंद्रमा तुला राशि में, नौकरी और कारोबार में मिलेंगे नए अवसर, धन संबंधी फैसलों में बरतें सावधानी

    नई दिल्ली । 18 अगस्त 2026 का दिन करियर और आर्थिक मामलों में संतुलन बनाकर चलने का संकेत दे रहा है। तुला राशि में चंद्रमा का प्रभाव बातचीत, साझेदारी और टीमवर्क को मजबूत कर सकता है। वहीं सिंह राशि में सूर्य आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता बढ़ाने वाला रहेगा। मिथुन राशि में मंगल सक्रियता बढ़ाएगा, लेकिन जल्दबाजी में फैसला लेने से बचना जरूरी होगा। कर्क राशि में बुध और गुरु की स्थिति बचत तथा पारिवारिक वित्तीय योजना पर ध्यान देने का संकेत दे रही है। कन्या राशि वालों को फिजूलखर्ची से बचना होगा, जबकि मीन राशि वालों के लिए धैर्य और अनुशासन महत्वपूर्ण रहेगा।

    मेष राशि के जातकों के लिए आज बातचीत के जरिए काम आसान होने के योग हैं। अटका हुआ धन शांतिपूर्वक बातचीत करने से वापस मिलने की संभावना बन सकती है। कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारी लेने का अवसर मिलेगा और सहकर्मियों के साथ नरमी से पेश आना लाभ देगा। वृष राशि वालों को बचत पर ध्यान देना चाहिए। दफ्तर में अनुभवी अधिकारियों से बातचीत अच्छी रह सकती है और आपके काम की सराहना हो सकती है। नौकरी बदलने का विचार है तो जल्दबाजी के बजाय सभी पहलुओं की जांच करें।

    मिथुन राशि के लिए आज बातचीत और संपर्क महत्वपूर्ण रहेंगे। मीटिंग, लेखन और नए लोगों से जुड़ने वाले कामों में सफलता मिल सकती है। हालांकि निवेश या किसी को पैसा देने से पहले पूरी जानकारी लेना जरूरी है। कर्क राशि वालों की आर्थिक योजना मजबूत रह सकती है। परिवार और भविष्य से जुड़े खर्चों पर ध्यान रहेगा। कार्यक्षेत्र में सहयोग मिलेगा और लगातार मेहनत का सकारात्मक परिणाम सामने आ सकता है।

    सिंह राशि वालों में नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास बढ़ेगा। कार्यस्थल पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल सकती है, लेकिन केवल अपनी बात मनवाने के बजाय दूसरों की राय सुनना बेहतर रहेगा। धन के मामले में दिखावे पर खर्च करने से बचें। कन्या राशि वालों को बजट पर विशेष नजर रखनी होगी। सुख-सुविधाओं से जुड़ी खरीदारी का मन बन सकता है, लेकिन आज बचत करना अधिक उपयोगी रहेगा। कार्यक्षेत्र में छोटी गलतियां पकड़ने की क्षमता मजबूत रहेगी, फिर भी दूसरों की कमियां निकालने के बजाय समाधान पर ध्यान दें।

    तुला राशि वालों के लिए दिन संतुलित फैसलों और टीम के साथ बेहतर तालमेल का रहेगा। पैसों से जुड़े निर्णयों में किसी भरोसेमंद व्यक्ति की सलाह उपयोगी हो सकती है। कार्यस्थल पर मतभेद होने की स्थिति में आपकी समझदारी समस्या को सुलझाने में मदद करेगी। वृश्चिक राशि वालों को अपनी आर्थिक योजनाओं को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए। अनावश्यक खर्च से बचें और किसी बड़े वादे से पहले सभी तथ्यों की जांच करें। काम में एकाग्रता बनाए रखने से लाभ होगा।

    धनु राशि वालों के लिए नए विचार कमाई के अवसर खोल सकते हैं, लेकिन हर प्रस्ताव में निवेश करना उचित नहीं होगा। नेटवर्किंग और नए लोगों से संपर्क करियर में मददगार साबित हो सकता है। मकर राशि वालों को पुरानी योजनाओं और जिम्मेदारियों की समीक्षा करनी चाहिए। कोई रुका हुआ काम सुधार के बाद आगे बढ़ सकता है। कुंभ राशि वालों की अलग सोच कार्यक्षेत्र में ध्यान आकर्षित करेगी, लेकिन नए विचारों को लागू करने से पहले बजट और जोखिम की जांच जरूरी है।

    मीन राशि वालों के लिए दिन धैर्य और लगातार प्रयास का संदेश दे रहा है। रुका हुआ आर्थिक मामला धीरे-धीरे सुलझ सकता है। कार्यक्षेत्र में गति अपेक्षाकृत धीमी महसूस हो सकती है, लेकिन मेहनत बेकार नहीं जाएगी। अपनी कुशलता बढ़ाने और अधूरे काम पूरे करने पर ध्यान देना बेहतर रहेगा। कुल मिलाकर 18 अगस्त का दिन करियर में संवाद, सहयोग और संतुलन को महत्व देने वाला है। आर्थिक मामलों में भावनात्मक फैसलों से बचकर योजना के अनुसार आगे बढ़ने से बेहतर परिणाम मिलने की संभावना रहेगी।

  • निर्मला सीतारमण आज जयपुर में BRICS वित्त मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगी, वैश्विक आर्थिक चुनौतियों पर होगा मंथन

    निर्मला सीतारमण आज जयपुर में BRICS वित्त मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगी, वैश्विक आर्थिक चुनौतियों पर होगा मंथन

    नई दिल्ली ।केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बुधवार को जयपुर में आयोजित BRICS देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की दो दिवसीय बैठक में शामिल होंगी। भारत की BRICS अध्यक्षता के तहत हो रही यह बैठक वैश्विक आर्थिक और वित्तीय चुनौतियों पर सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक में समूह के सभी 11 सदस्य देशों के वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक के गवर्नर हिस्सा लेंगे।

    जयपुर के रामबाग पैलेस में आयोजित होने वाली बैठक का उद्घाटन सत्र बुधवार सुबह 11:15 बजे शुरू होगा। इसमें वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। आर्थिक विकास, वित्तीय उदारीकरण, जोखिम प्रबंधन और वैश्विक वित्तीय स्थिरता जैसे मुद्दे चर्चा के प्रमुख केंद्र में रहेंगे।

    भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा भी बैठक में हिस्सा लेने के लिए जयपुर पहुंच चुके हैं। उद्घाटन सत्र के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और आरबीआई गवर्नर सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं तथा केंद्रीय बैंकिंग से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार साझा करेंगे।

    बैठक में प्रतिनिधि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में सामने आ रही चुनौतियों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के सामने मौजूद अवसरों पर भी चर्चा करेंगे। निवेश बढ़ाने, वित्तीय सहयोग मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था को अधिक स्थिर बनाने से जुड़े विषयों पर सदस्य देशों के बीच विचारों का आदान-प्रदान होगा।

    जयपुर पहुंचने पर वित्त मंत्री का स्वागत राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने किया। बैठक के आयोजन को देखते हुए जयपुर में विदेशी प्रतिनिधियों के लिए विशेष कार्यक्रम भी तैयार किए गए हैं।

    दो दिवसीय बैठक गुरुवार दोपहर 12:30 बजे तक चलेगी। इस दौरान BRICS सदस्य देशों के प्रतिनिधि आर्थिक और वित्तीय क्षेत्र में आपसी सहयोग के संभावित रास्तों पर चर्चा करेंगे। बदलते वैश्विक आर्थिक माहौल में निवेश, वित्तीय जोखिम और आर्थिक स्थिरता जैसे विषयों का महत्व लगातार बढ़ा है, ऐसे में बैठक को महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा जा रहा है।

    विदेशी प्रतिनिधियों को राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने के लिए भी विशेष कार्यक्रम रखा गया है। बुधवार शाम पांच बजे सभी प्रतिनिधि जयपुर सिटी पैलेस का दौरा करेंगे। इस दौरान राजस्थान की संस्कृति, परंपराओं और विरासत को प्रदर्शित करने वाला सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

    BRICS वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की वार्षिक बैठक की शुरुआत करीब 18 वर्ष पहले वैश्विक वित्तीय संकट के दौर में हुई थी। समय के साथ यह बैठक वैश्विक आर्थिक और वित्तीय मामलों पर सदस्य देशों के बीच संवाद और सहयोग का महत्वपूर्ण मंच बन गई है।

    जयपुर दूसरी बार इस बैठक की मेजबानी कर रहा है। इससे पहले वर्ष 2021 में कोविड-19 महामारी के दौरान भी जयपुर में इस बैठक का आयोजन हुआ था। उस समय आर्थिक पुनरुद्धार, टीकाकरण, डिजिटल स्वास्थ्य, सामाजिक अवसंरचना और वित्तीय समावेशन जैसे मुद्दे प्रमुख चर्चा में रहे थे।

    2021 की बैठक में यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म से जुड़े विषय पर भी विचार-विमर्श हुआ था। इस बार बदलती वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के बीच वित्तीय स्थिरता, निवेश और सहयोग से जुड़े मुद्दों पर सदस्य देशों की प्राथमिकताएं चर्चा के केंद्र में रहने की उम्मीद है।

    भारत की अध्यक्षता में हो रही यह बैठक ऐसे समय आयोजित हो रही है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई तरह की अनिश्चितताओं से गुजर रही है। ऐसे में BRICS देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों के बीच समन्वय बढ़ाने की कोशिशों पर बैठक का विशेष ध्यान रहेगा।

  • मंगल के नक्षत्र में राहु का बड़ा गोचर, जानिए किन 3 राशियों को साल के अंत तक मिलेगा अचानक धन लाभ

    मंगल के नक्षत्र में राहु का बड़ा गोचर, जानिए किन 3 राशियों को साल के अंत तक मिलेगा अचानक धन लाभ

    नई दिल्ली ।ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों और नक्षत्रों के परिवर्तन को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इनका सीधा प्रभाव सभी राशियों के जीवन पर पड़ता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, राहु ग्रह ने मंगल के स्वामित्व वाले धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश कर लिया है। ज्योतिष में धनिष्ठा नक्षत्र को धन, पद, प्रतिष्ठा, समृद्धि और सफलता का प्रतीक माना गया है, जबकि राहु को अचानक शुभ या अशुभ परिणाम देने वाले ग्रह के रूप में देखा जाता है। राहु के इस नक्षत्र परिवर्तन से राशि चक्र की तीन विशेष राशियों मेष, सिंह और कन्या को साल के अंत तक जबरदस्त आर्थिक लाभ और करियर में प्रगति मिलने के संकेत दिखाई दे रहे हैं।

    मेष राशि के जातकों के लिए राहु का यह गोचर बेहद अनुकूल रहने की संभावना है। मेष राशि का स्वामी ग्रह स्वयं मंगल है और धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामित्व भी मंगल के ही पास है। इस शुभ संयोग के प्रभाव से मेष राशि के जातकों के आत्मविश्वास में अप्रत्याशित वृद्धि देखने को मिलेगी। लंबे समय से अटके हुए कार्य गति पकड़ेंगे और सफलतापूर्वक पूरे होंगे। कार्यक्षेत्र में पदोन्नति या कोई बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है, वहीं व्यापारियों को भी अच्छा वित्तीय मुनाफा होने की संभावना है। हालांकि, ज्योतिषविदों ने किसी भी बड़े निर्णय को जल्दबाजी में न लेने की सलाह दी है।

    सिंह राशि के जातकों के लिए भी राहु का यह नक्षत्र परिवर्तन अत्यधिक शुभ एवं लाभकारी सिद्ध हो सकता है। इस दौरान जातकों की कई पुरानी इच्छाएं पूरी होने के योग बन रहे हैं। आय के नए स्रोत विकसित होंगे और आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा। अचल संपत्ति या पैतृक संपत्ति से जुड़े मामलों में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। अचानक किसी बड़े वित्तीय लाभ के अवसर प्राप्त हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त, सरकारी क्षेत्र या प्रशासनिक सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों को पदोन्नति और उच्च पद मिलने के प्रबल संकेत हैं।

    कन्या राशि के लोगों के लिए राहु का मंगल के नक्षत्र में जाना करियर और व्यापार में नए अवसर लेकर आएगा। नौकरीपेशा लोगों को मनपसंद स्थान या विभाग में काम करने का मौका मिल सकता है। जो लोग नई नौकरी की तलाश में हैं या नौकरी छोड़कर अपना स्वयं का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए यह समय बेहद अनुकूल रहेगा। अतिरिक्त आय के साधन बनने से बैंक बैलेंस में बढ़ोतरी होगी। कुल मिलाकर यह अवधि तीनों राशियों के जातकों के लिए प्रगतिशील और लाभदायक सिद्ध होगी।