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  • रतिंद्र बोस ने रचा इतिहास…. पहली बार उत्तर बंगाल से कोई MLA बना विधानसभा अध्यक्ष

    रतिंद्र बोस ने रचा इतिहास…. पहली बार उत्तर बंगाल से कोई MLA बना विधानसभा अध्यक्ष


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal.) की नवगठित 18वीं विधानसभा ने शुक्रवार को एक नया इतिहास रच दिया। भारतीय जनता पार्टी के विधायक (Bharatiya Janata Party MLA) रतिंद्र बोस (Ratindra Bose.) को निर्विरोध विधानसभा अध्यक्ष (Speaker Assembly ) चुना गया। आजादी के बाद यह पहली बार है जब उत्तर बंगाल के किसी विधायक को विधानसभा अध्यक्ष जैसे अहम और प्रतिष्ठित पद की जिम्मेदारी मिली है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Chief Minister Suvendu Adhikari) ने रतिंद्र बोसे के नाम का प्रस्ताव रखा। इसके बाद प्रोटेम स्पीकर तापस रॉय ने ध्वनि मत के माध्यम से प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। सदन में मौजूद सभी 207 भाजपा विधायकों ने एकमत होकर बोस के पक्ष में समर्थन दिया।

    विपक्ष की भूमिका में बैठी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस पद के लिए अपना कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा था, जिससे बोस के निर्वाचन का मार्ग पूरी तरह साफ हो गया और वे निर्विरोध चुन लिए गए।

    विधानसभा में पत्रकारों से बात करते हुए रतिंद्र बोस ने कहा कि पार्टी ने उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी है, उसे वे पूरी ईमानदारी से निभाएंगे और जरूरत पड़ने पर अनुभवी विधायकों से मार्गदर्शन लेंगे। स्पीकर की कुर्सी संभालने से पहले उन्होंने कहा, “अगर मैं चुना जाता हूं तो मैं ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना के साथ अपनी जिम्मेदारियों को निभाऊंगा।”

    294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में हालिया चुनावों में मिली भारी जीत के बाद भाजपा के पास 207 विधायकों का प्रचंड बहुमत है। ऐसे में रतिंद्र बोस का चयन महज एक औपचारिकता माना जा रहा था। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने गुरुवार को ही कूचबिहार दक्षिण से विधायक बोस के नाम की घोषणा पार्टी के उम्मीदवार के रूप में कर दी थी।

    उत्तर बंगाल को बड़ा राजनीतिक संदेश
    रतिंद्र बोस का अध्यक्ष चुना जाना केवल एक प्रशासनिक नियुक्ति नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। वह उत्तर बंगाल के पहले ऐसे विधायक हैं जो विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी संभालेंगे। पिछले एक दशक में उत्तर बंगाल भाजपा के सबसे मजबूत गढ़ के रूप में उभरा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस नियुक्ति के जरिए भाजपा सरकार ने इस क्षेत्र के मतदाताओं और नेतृत्व के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का एक रणनीतिक संदेश दिया है।

  • कुवैत ने अप्रैल माह में नहीं किया तेल का निर्यात…. 35 साल में पहली बार हुआ ऐसा

    कुवैत ने अप्रैल माह में नहीं किया तेल का निर्यात…. 35 साल में पहली बार हुआ ऐसा


    दुबई।
    एक रिपोर्ट में दावा (Report Claim) किया गया है कि अप्रैल माह (April) में कुवैत (Kuwait) ने तेल (Crude oil) का निर्यात नहीं (Not Export ) किया है। तीन दशकों में पहली बार ऐसा हुआ है, जब कुवैत ने किसी माह में तेल निर्यात नहीं किया। इससे पहले खाड़ी युद्ध के समय ऐसा हुआ था। टैंकर ट्रैकर वेबसाइट ने अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया है।

    दुनिया के बड़े तेल प्रोड्यूसर में से एक कुवैत ने 35 बरस में पहली बार ऐसा फैसला लिया है, जिससे पूरी दुनिया हैरान हर रह गई है. इस फैसले से दुनिया में कच्चे तेल की कीमतों में और इजाफा देखने को मिल सकता है। TankerTrackers वेबसाइट के अनुसार, कुवैत ने अप्रैल के दौरान कच्चे तेल का निर्यात नहीं किया. यह तीन दशकों से भी ज़्यादा समय में पहली बार है जब इस खाड़ी उत्पादक देश ने शून्य मासिक कच्चे तेल के निर्यात का रिकॉर्ड बनाया है. X पर एक पोस्ट में, इस मॉनिटरिंग ग्रुप ने कहा कि ब्रेकिंग: अप्रैल 2026 के दौरान, कुवैत ने खाड़ी युद्ध I की समाप्ति के बाद पहली बार शून्य बैरल कच्चे तेल का निर्यात किया।


    1991 के बाद पहली बार

    अगर इस बात की पुष्टि हो जाती है, तो यह 1991 के खाड़ी युद्ध की समाप्ति के बाद कुवैत का पहला ऐसा महीना होगा जिसमें उसने कच्चे तेल का निर्यात नहीं किया है. TankerTrackers ने कहा कि जहां एक ओर कुवैत तेल का उत्पादन जारी रखे हुए है, वहीं दूसरी ओर कच्चे तेल का निर्यात पूरी तरह से रुक गया है. फर्म ने आगे कहा कि यह रुकावट क्षेत्रीय शिपिंग रूट्स को प्रभावित करने वाली स्थितियों से जुड़ी हुई प्रतीत होती है, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट में मौजूद बाधाएं भी शामिल हैं. यह देश OPEC का एक प्रमुख उत्पादक बना हुआ है, और इसका तेल निर्यात ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन में एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. इस देश का तेल विशेष रूप से एशिया और यूरोप में एक्सपोर्ट होता है।


    कतर ने ईरान से किया आग्रह

    इस बीच, शनिवार को कतर ने ईरान से आग्रह किया कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के प्रावधानों का पालन करे, और पश्चिम एशिया में मौजूदा सुरक्षा स्थिति के मद्देनज़र क्षेत्र के हितों को प्राथमिकता दे. साथ ही तनाव को कम करने के प्रयासों का समर्थन करने की आवश्यकता पर भी जोरर दिया. X पर एक पोस्ट में इन विवरणों को साझा करते हुए, कतर के विदेश मंत्रालय ने बताया कि प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान बिन जसीम अल-थानी को इस्लामिक गणराज्य ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का फोन आया था. प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि नेविगेशन की आजादी एक स्थापित और गैर-समझौता योग्य सिद्धांत है, और होर्मुज स्ट्रेट को बंद करना या इसे सौदेबाजी के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना संकट को और बढ़ाएगा और इस क्षेत्र के देशों के अहम हितों को खतरे में डाल देगा।


    कतर की ईरान को सलाह

    बयान में कहा गया कि उन्होंने इस बात का जिक्र किया कि ग्लोबल एनर्जी और फूड सप्लाई पर, साथ ही बाजार और सप्लाई चेन की स्थिरता पर इसके क्या संभावित नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं. इसमें आगे कहा गया कि प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के प्रावधानों का पालन करने की जरूरत पर जोर दिया, और क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करने में योगदान देने के लिए, तथा तनाव कम करने के प्रयासों का समर्थन करने के लिए क्षेत्र और वहां के लोगों के हितों को प्राथमिकता देने की बात कही।


    कच्चे तेल की कीमत

    शुक्रवार को इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें करीब 3 फीसदी तक की गिरावट के साथ बंद हुई. आंकड़ों को देखें तो अमेरिकी क्रूड ऑयल डब्ल्यूटीआई के दाम करीब 3 फीसदी की गिरावट के साथ 101.94 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुए. जबकि खाड़ी देशों का कच्चा तेल अब भी काफी हाई बना हुआ है. आंकड़ों के अनुसार ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम 2 फीसदी की गिरावट के साथ 108.17 डॉलर प्रति बैरल पर बना हुआ है. जानकारों की मानें तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें अमेरिका और ईरान के फैसले तय करेंगे. क्या दोनों देश शांति की ओर बढ़ना चाहते हैं या नहीं।

  • सम्राट चौधरी आज दिल्ली प्रवास पर…. CM बनने के बाद पहली बार PM मोदी से मिलेंगे

    सम्राट चौधरी आज दिल्ली प्रवास पर…. CM बनने के बाद पहली बार PM मोदी से मिलेंगे


    पटना।
    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (Chief Minister Samrat Chaudhary) आज दिल्ली जाने वाले हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) से मिलने दिल्ली जा रहे हैं। सीएम बनने के बाद वे पहली बार पीएम से मिलने वाले हैं। 15 अप्रैल को सम्राट चौधरी ने सीएम पद की शपथ ली थी। उनके साथ जदयू के विजय कुमार चौधरी (Vijay Kumar Chaudhary) और बिजेंद्र यादव (Bijendra Yadav) ने भी मंत्री पद की शपथ ली। पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सम्राट चौधरी आज दिन में दिल्ली के लिए रवाना होने वाले हैं।

    बिहार में भाजपा के नेतृत्व में पहली बार सरकार बनी है। सम्राट चौधरी के शपथ ग्रहण समारोह में पीएम के शामिल होने की चर्चा चली थी। लेकिन, पीएम नहीं आए। माना जा रहा है कि सीएम के रूप में औपचारिक मुकालात और प्रदेश के विकास कार्यों की रणनीति को लेकर मुख्यमंत्री पीएम से मिलने जा रहे हैं। राजनैतिक और सरकार के दृष्टिकोण से दोनों नेताओं की मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है।

    संसद में महिला आरक्षण बिल गिर जाने के कारण बीजेपी और एनडीए के सभी दल विपक्षी कांग्रेस, राजद, सपा, टीएमसी पर हमलावर हैं। विपक्ष को महिला विरोधी साबित करने के अभियान में बिहार एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जा रहा है। सोमवार को पटना में जन आक्रोश महिला सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें सम्राट चौधरी ने महिलाओं को संबोधित किया। माना जा रहा है कि इस मामले में आगे की रणनीति पर पीएम सीएम मीटिंग में चर्चा होगी।

  • भारत-चीन के बीच सुधरते रिश्ते….दोनों देशों के बीच पहली बार हुई SCO द्विपक्षीय वार्ता

    भारत-चीन के बीच सुधरते रिश्ते….दोनों देशों के बीच पहली बार हुई SCO द्विपक्षीय वार्ता


    शांघाई।
    द्विपक्षीय सहयोग (Bilateral Cooperation) को बढ़ावा देने के प्रयासों और हाल ही में दोनों देशों के बीच सुधरे संबंधों के बीच, भारत और चीन (India and China) ने 16-17 अप्रैल को अपनी पहली शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organization- SCO) द्विपक्षीय वार्ता आयोजित की। साल 2024 में पूर्वी लद्दाख में हुए सैन्य गतिरोध के सुलझने के बाद से यह कदम दोनों देशों के बीच सुधरते कूटनीतिक रिश्तों की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।


    बैठक के मुख्य विषय और चर्चा

    विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी बयान के अनुसार दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने SCO नेताओं द्वारा लिए गए निर्णयों को लागू करने और संगठन की भविष्य की रूपरेखा को लेकर अपने-अपने विचार साझा किए। भारत और चीन ने SCO से जुड़े मामलों में आपसी विचार-विमर्श और सहयोग को लगातार जारी रखने और उसे और अधिक मजबूत करने पर सहमति जताई है।

    दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने संयुक्त रूप से विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज से मुलाकात की। इस दौरान सुरक्षा, व्यापार, कनेक्टिविटी (संपर्क) और दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संबंधों सहित SCO ढांचे के भीतर सहयोग की व्यापक समीक्षा की गई।


    बहुपक्षीय मंचों (BRICS और SCO) पर बढ़ता सहयोग

    साल 2024 में सीमा विवाद सुलझने के बाद से दोनों देश ब्रिक्स (BRICS) और SCO जैसे अंतरराष्ट्रीय और बहुपक्षीय मंचों पर साथ मिलकर काम कर रहे हैं। पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीन गए थे।


    आगामी उच्च स्तरीय दौरे

    बीजिंग ने भारत की मौजूदा ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए अपना पूर्ण समर्थन जताया है। इसके तहत, चीनी विदेश मंत्री वांग यी 14-15 मई को ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए भारत का दौरा कर सकते हैं। इसके अलावा, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी सितंबर में होने वाले मुख्य ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत आने की उम्मीद है।


    SCO को लेकर भारत का स्पष्ट रुख

    भारत इस यूरेशियन समूह (SCO) में अपनी सदस्यता को अत्यधिक महत्व देता है और इसके उद्देश्यों को लेकर उसका रुख बिल्कुल स्पष्ट है। भारत का मानना है कि SCO का प्राथमिक और मूल उद्देश्य क्षेत्र में आतंकवाद, कट्टरपंथ और उग्रवाद का डटकर मुकाबला करना है।

    भारत क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए SCO को एक महत्वपूर्ण मंच मानता है। लेकिन भारत की स्पष्ट शर्त है कि इस तरह की कोई भी पहल सदस्य देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सिद्धांतों का पालन करे, जो कि SCO चार्टर का भी मुख्य हिस्सा है।


    पीएम मोदी का कड़ा संदेश

    भारत के इसी रुख को दोहराते हुए पिछले साल तियानजिन में SCO शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा था कि जो कनेक्टिविटी संप्रभुता को दरकिनार करती है, वह अंततः अपना भरोसा और अर्थ दोनों खो देती है।

  • पहली बार भारत दौरे पर आएंगे ऑस्ट्रिया के चांसलर, पीएम मोदी से करेंगे मुलाकात

    पहली बार भारत दौरे पर आएंगे ऑस्ट्रिया के चांसलर, पीएम मोदी से करेंगे मुलाकात

    नई दिल्‍ली। भारत और ऑस्ट्रिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती देने के उद्देश्य से ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिस्टियन स्टॉकर अगले सप्ताह भारत की पहली आधिकारिक यात्रा पर आ रहे हैं। वह 14 से 17 अप्रैल तक भारत में रहेंगे और इस दौरान कई अहम बैठकों में हिस्सा लेंगे।

    यात्रा के दौरान स्टॉकर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात करेंगे। उनके साथ ऑस्ट्रिया के कई मंत्री और कारोबारी प्रतिनिधि भी आएंगे।

    यात्रा का उद्देश्य

    विदेश मंत्रालय के अनुसार यह स्टॉकर की पहली एशिया यात्रा होगी। इस दौरान दोनों देश विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श करने तथा बहुपक्षीय मंचों पर साझेदारी मजबूत करने पर चर्चा करेंगे।

    पहले भी हुई उच्चस्तरीय मुलाकात

    साल 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रिया का दौरा किया था। उस दौरान दोनों देशों ने संबंधों को नई दिशा देने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई थी।

    भारत-ऑस्ट्रिया संबंधों का इतिहास

    दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध 1949 में स्थापित हुए थे। 1970 के दशक में ऑस्ट्रिया के नेता ब्रूनो कैरिस्की की भारत यात्रा के बाद रिश्तों में नई गति आई। हाल के वर्षों में मशीनरी, इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल, स्टील, मेटल और केमिकल क्षेत्र में सहयोग बढ़ा है।

    इसके अलावा दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों में भी साथ काम करने पर सहमत हो चुके हैं। यह यात्रा इन सहयोगों को और आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

  • Census 2027 : पहली बार डिजिटल डेटा कैप्चर के साथ स्व-गणना की सुविधा, PM ने दर्ज किए अपने विवरण

    Census 2027 : पहली बार डिजिटल डेटा कैप्चर के साथ स्व-गणना की सुविधा, PM ने दर्ज किए अपने विवरण


    नई दिल्ली।
    विश्व के सबसे बड़े जनगणना अभियान (World’s Largest Census Campaign) ‘जनगणना-2027’ (Census 2027 first Phase) के प्रथम चरण की 1 अप्रैल से शुरुआत हो गई। इस चरण में मकान सूचीकरण और मकानों की गणना हो रही है। यह पूरी तरह डिजिटल डेटा कैप्चर (Digital Data Capture) के साथ स्व-गणना (Self-calculation) की सुविधा वाली भारत की पहली जनगणना है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने अपने आवास पर अपने अपने विवरण दर्ज किए। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर यह जानकारी साझा करते हुए फॉर्म में विवरण दर्ज करने के फोटो भी साझा किए।

    पीएम मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर फोटो साझा करते हुए लिखा, “मैंने अपनी स्व-गणना पूरी कर ली है। आज जनगणना 2027 के पहले चरण की शुरुआत हो रही है, जो मकानों की सूची बनाने और आवास संबंधी कार्यों से जुड़ा है। यह पहली बार है जब जनगणना के लिए डेटा संग्रह डिजिटल माध्यमों से किया जा रहा है। यह भारत के लोगों को अपने घर-परिवार का विवरण स्वयं दर्ज करने का अधिकार भी देता है। मैं भारत के लोगों से अपील करता हूँ कि वे अपने घर-परिवार का विवरण स्वयं दर्ज करें और जनगणना की प्रक्रिया में भाग लें।”


    राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति ने भी लिया हिस्सा

    प्रधानमंत्री के अलावा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने भी जनगणना 2027 के लिए आज ‘स्व-गणना’ पहल में भाग लिया और अपने अपने आवास संबंधी जानकारी दर्ज की। बाद में मुर्मु ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में लिखा कि उन्होंने राष्ट्रपति भवन में जनगणना 2027 के लिए सरकार की ‘स्व-गणना’ पहल में भाग लिया। राष्ट्रपति ने गृह सचिव गोविंद मोहन, भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में पोर्टल पर अपने आवास का विवरण स्वयं दर्ज किया। उप राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भी अपने आवास पर अपने अपने विवरण दर्ज किए। उन्होंने सोशल मीडिया पर यह जानकारी साझा करते हुए फॉर्म में विवरण दर्ज करने के फोटो भी साझा किए।


    आज से स्व-गणना प्रक्रिया 08 राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों में शुरू

    जनगणना की इस राष्ट्रीय प्रक्रिया में जनभागीदारी के महत्व को रेखांकित करते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने भी पोर्टल के माध्यम से स्व-गणना की। बता दें कि प्रारंभिक चरण में आज से स्व-गणना प्रक्रिया 08 राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों में शुरू की गई है, जिनमें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा, सिक्किम और राजधानी दिल्ली के नई दिल्ली नगरपालिका परिषद एवं दिल्ली छावनी बोर्ड क्षेत्र शामिल हैं। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार पहले दिन इन स्थानों से लगभग 55,000 परिवारों ने पहले ही दिन इस सुविधा का लाभ उठाया।


    16 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध

    स्व-गणना एक सुरक्षित और वेब आधारित सुविधा है, जो 16 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है। पहली बार उत्तरदाताओं को प्रगणकों के आने से पहले अपनी सुविधानुसार ऑनलाइन विवरण भरने का विकल्प उपलब्ध है। प्रगणक पिछली जनगणनाओं की तरह सभी आवंटित हाउस लिस्टिंग ब्लॉकों में घर-घर जाएंगे, जबकि उसके पूर्व स्व-गणना एक अतिरिक्त सुविधा के रूप में काम करेगी। स्व-गणना में भाग लेने के लिए व्यक्ति अपने मोबाइल नंबर और बुनियादी क्रेडेंशियल्स का उपयोग करके एसई.सीईएनएसयूएस.जीओवी.इन पोर्टल पर लॉग इन कर सकते हैं। सफलतापूर्वक फॉर्म सबमिट करने पर एक यूनीक सेल्फ-एनुमरेशन आईडी जनरेट हो जाती है, जिसे बाद में प्रगणक के फील्ड विजिट के दौरान उनसे पुष्टि करने के लिए साझा किया जाएगा।


    कुल 33 प्रश्न अधिसूचित किए गए

    मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना के चरण के दौरान आवास की स्थिति, घरेलू सुविधाओं और उपलब्ध परिसंपत्तियों से संबंधित विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी। इन महत्वपूर्ण संकेतकों को दर्ज करने के लिए जनवरी 2026 में प्रथम चरण के लिए कुल 33 प्रश्न अधिसूचित किए गए हैं, जो साक्ष्य-आधारित योजना निर्माण, नीति निर्धारण और लक्षित कल्याणकारी योजनाओं के लिए आधार प्रदान करते हैं।


    01 अप्रैल से 30 सितंबर तक मकान गणना

    मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का चरण 01 अप्रैल से 30 सितंबर, 2026 के बीच पूरे देश में संचालित किया जाएगा। इस छह माह की अवधि में प्रत्येक राज्य और संघ राज्य क्षेत्र, राज्य/संघ राज्य क्षेत्र सरकार द्वारा अधिसूचित 30 दिनों की अवधि में इस क्षेत्रीय कार्य को पूरा करेंगे। पहली बार, घर-घर सर्वेक्षण से पहले 15 दिनों की अतिरिक्त अवधि स्व-गणना के लिए प्रदान की गई है, जिससे लोग प्रगणक के आने से पहले अपने विवरण डिजिटल रूप से स्वयं दर्ज कर सकते हैं।

    जनगणना शासन के लिए एक महत्वपूर्ण साधन है, जो अगले दशक के लिए भारत की विकास योजना का आधार प्रदान करती है। जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत एकत्रित सभी आंकड़े पूरी तरह गोपनीय रखे जाते हैं। जनगणना 2027 के लिए उपयोग किए जा रहे डिजिटल उपकरण उच्च स्तरीय डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मजबूत एन्क्रिप्शन और बहु-स्तरीय प्रमाणीकरण से युक्त हैं।

  • मिडिल ईस्ट तनाव के चलते रुपये में भारी गिरावट… पहली बार ₹93 प्रति डॉलर के पार

    मिडिल ईस्ट तनाव के चलते रुपये में भारी गिरावट… पहली बार ₹93 प्रति डॉलर के पार


    नई दिल्ली।
    भारतीय रुपया (Indian Rupee.) शुक्रवार, 20 मार्च को पहली बार 93 प्रति अमेरिकी डॉलर (93 Per US Dollar) के स्तर को पार गया। शुरुआती कारोबार (Initial business) में रुपया 3 पैसे गिरकर 92.92 पर खुला और बाद में 93.08 तक फिसल गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। इससे पहले 18 मार्च को रुपया 92.63 के स्तर तक गिरा था, जिसे अब पार कर लिया गया है।


    क्यों टूट रहा है रुपया?

    1. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल: मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड करीब $120 प्रति बैरल तक पहुंच गया। हालांकि शुक्रवार को यह घटकर $107 के आसपास आ गया, लेकिन अभी भी ऊंचे स्तर पर है। तेल महंगा होने से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ता है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर होता है।


    2. डॉलर की बढ़ती मांग:
    ऊंचे इंपोर्ट बिल के कारण कंपनियां ज्यादा डॉलर खरीद रही हैं, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ रहा है।


    3. विदेशी निवेशकों की बिकवाली:
    मार्च में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से $8 अरब से ज्यादा निकाल लिए हैं। यह जनवरी 2025 के बाद सबसे बड़ा आउटफ्लो है।

    4. मजबूत होता अमेरिकी डॉलर: वैश्विक अनिश्चितता के बीच निवेशक सुरक्षित विकल्प के तौर पर डॉलर की ओर जा रहे हैं, जिससे डॉलर मजबूत हो रहा है और अन्य मुद्राएं कमजोर।


    डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट: आपकी जेब पर कैसे पड़ता है असर?

    डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि आम लोगों की मुश्किलें भी बढ़ा देती है। जब रुपया कमजोर होता है, तो इसका सीधा असर महंगाई और आपके महीने के बजट पर पड़ता है। आइए समझते हैं कि रुपये में गिरावट क्यों होती है और इसका असर आप पर कैसे पड़ता है।


    महंगाई बढ़ती है

    भारत अपनी जरूरत का 75% से 80% कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। जब रुपया कमजोर होता है, तो तेल आयात महंगा हो जाता है। अनुमान के मुताबिक, डॉलर के मुकाबले रुपये में 1 रुपये की गिरावट से तेल कंपनियों पर करीब 8,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ता है। इस वजह से पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ जाते हैं, जिससे महंगाई बढ़ती है। पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में 10% बढ़ोतरी से महंगाई लगभग 0.8% तक बढ़ सकती है। इसका असर खाने-पीने की चीजों और ट्रांसपोर्ट खर्च पर साफ दिखता है।


    दवाएं और पढ़ाई महंगी

    कई जरूरी दवाएं भारत में विदेशों से आती हैं। रुपये के कमजोर होने से इन दवाओं की कीमत बढ़ जाती है। इसके अलावा विदेश में पढ़ाई महंगी हो जाती है। विदेश यात्रा का खर्च बढ़ जाता है। होटल और खाने-पीने पर ज्यादा खर्च करना पड़ता है।


    विकास योजनाओं पर असर

    सरकार तेल कंपनियों को सब्सिडी देती है ताकि जनता को राहत मिल सके, लेकिन जब डॉलर महंगा होता है, तो सरकार का खर्च बढ़ जाता है। ऐसे में सरकार को विकास योजनाओं (जैसे सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा) पर खर्च कम करना पड़ सकता है। इसका असर आम लोगों को मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ता है।


    सरकारी खजाने पर दबाव

    देश में आने और जाने वाली विदेशी मुद्रा के अंतर को चालू खाता घाटा (CAD) कहते हैं। जब आयात ज्यादा होता है, तो देश से ज्यादा डॉलर बाहर जाता है और CAD बढ़ जाता है। भारत में सबसे ज्यादा विदेशी मुद्रा तेल और सोने के आयात पर खर्च होती है।

    गिरावट थामने के लिए RBI क्या कर रहा है?
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मार्च में अब तक 15 अरब डॉलर से ज्यादा बेचकर रुपये को संभालने की कोशिश की है। वित्तीय वर्ष के अंत (मार्च) में RBI का हस्तक्षेप आमतौर पर बढ़ जाता है, जिससे थोड़ी राहत मिल सकती है।


    आगे क्या?

    विश्लेषकों के अनुसार जब तक तेल कीमतें ऊंची रहेंगी, रुपये पर दबाव बना रहेगा, विदेशी निवेश का आउटफ्लो जारी रह सकता है। RBI का हस्तक्षेप ही फिलहाल बड़ा सपोर्ट है। शॉर्ट टर्म में रुपया कमजोर रह सकता है।

  • पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर EC का बड़ा फैसला…. पहली बार रिटर्निंग अफसर तैनात

    पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर EC का बड़ा फैसला…. पहली बार रिटर्निंग अफसर तैनात


    नई दिल्ली।
    चुनाव आयोग (Election Commission) ने पश्चिम बंगाल (West Bengal) में पहली बार देश के अन्य हिस्सों की तरह 152 चुनाव क्षेत्रों में SDM या उसके बराबर या उससे ऊंचे लेवल के अधिकारियों को को रिटर्निंग ऑफिसर्स (Returning Officers) यानी निर्वाचन अधिकारी के पद पर अपग्रेड कर तैनाती को मंजूरी दी है। चुनाव आयोग की तरफ से आज (गुरुवार, 12 मार्च को) जारी एक नोटिफिकेशन में राज्य के सभी 294 विधानसभा क्षेत्रों में SDM या उसके बराबर या उससे ऊंचे लेवल के रिटर्निंग ऑफिसर्स की लिस्ट जारी किए गए हैं।

    अधिकारियों के अनुसार, यह कदम तब उठाया गया, जब चुनाव आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य सरकार निर्वाचन अधिकारी के रूप में कार्य करने के लिए उचित रैंक के अधिकारियों को नामित करे, जो चुनाव कराने के लिए एक अनिवार्य शर्त है। इसके बाद, राज्य प्रशासन ने पात्र अधिकारियों की एक संशोधित सूची सौंपी, जिससे आयोग के लिए इन नियुक्तियों का रास्ता साफ हो गया।


    निर्वाचन अधिकारी के क्या काम?

    निर्वाचन अधिकारी चुनाव प्रक्रिया में मुख्य भूमिका निभाते हैं। अपने निर्वाचन क्षेत्रों में नामांकन प्रक्रिया की निगरानी, उम्मीदवारों के दस्तावेजों की जांच, मतदान की व्यवस्था, वोटों की गिनती और परिणामों की घोषणा जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निर्वाचन अधिकारी के कंधों पर ही होती हैं। चुनाव नियमों के तहत, चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता और कुशल प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए आमतौर पर इन अधिकारियों को वरिष्ठ प्रशासनिक संवर्गों से चुना जाता है।


    आयोग ने अधिकारियों की लिस्ट पर जताई थी चिंता

    अधिकारियों ने बताया कि आयोग ने पहले राज्य सरकार के प्रस्तावित अधिकारियों की वरिष्ठता के स्तर पर चिंता जताई थी और निर्धारित मानदंडों को पूरा करने वाले अधिकारियों की मांग की थी। राज्य के इस आवश्यकता को पूरा करने और उचित रैंक के अधिकारी उपलब्ध कराने के बाद ही आयोग ने निर्वाचन अधिकारियों की नियुक्ति की औपचारिक अधिसूचना जारी की।


    चुनाव से पहले की तैयारी

    यह कदम पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तैयारियों में एक महत्वपूर्ण चरण है, जहां चुनाव आयोग संविधान के तहत अपनी देखरेख में राज्य प्रशासन के साथ तालमेल बिठाकर चुनाव कराता है। चुनाव की औपचारिक तारीखों की घोषणा से पहले निर्वाचन अधिकारियों की नियुक्ति शुरुआती प्रशासनिक उपायों में से एक है, ताकि नामांकन, मतदान और मतगणना के प्रबंधन के लिए आवश्यक ढांचा चुनाव से काफी पहले तैयार हो सके।

  • कूनो राष्ट्रीय उद्यान में पहली बार दिखा दुर्लभ प्रजाति का फॉरेस्ट आउलेट

    कूनो राष्ट्रीय उद्यान में पहली बार दिखा दुर्लभ प्रजाति का फॉरेस्ट आउलेट


    भोपाल।
    जैव विविधता संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा की दिशा में सतत एवं सुनियोजित प्रयास कर रही मध्य प्रदेश सरकार को एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है। श्योपुर जिले में स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान में पहली बार दुर्लभ प्रजाति का फॉरेस्ट ऑउलेट(एथिन ब्लेविटी) को देखा गया है।

    पक्षी विज्ञान के क्षेत्र में यह एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। स्थानिक और लुप्त प्राय फॉरेस्ट ऑउलेट(एथिन ब्लेविटी) को पहली बार कूनो राष्ट्रीय उद्यान में देखा गया है, जो इस प्रजाति के ज्ञात वितरण क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार का संकेत है। कूनो राष्ट्रीय उद्यान में फॉरेस्ट ऑउलेट की खोज भारत में जैव विविधता संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पक्षी विश्व के सबसे दुर्लभ शिकारी पक्षियों में से एक है और चीता परियोजना से जुड़े पर्यावास प्रबंधन के साथ इसके संभावित पारिस्थितिक संबंध हैं।

    फॉरेस्ट आउलेट मध्य भारत का एक स्थानिक (endemic) पक्षी है, जिसे 1872 में पहली बार खोजा गया था, लेकिन 1884 के बाद इसे विलुप्त मान लिया गया था। लगभग 113 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद, 1997 में इसे महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले में फिर से खोजा गया, जिसने पक्षी विज्ञान की दुनिया में सनसनी फैला दी थी। वर्तमान में यह मध्य भारत के खंडित वन क्षेत्रों में पाया जाता है, जिसमें मध्य प्रदेश (खकनार, पीपलोद), महाराष्ट्र (तोरणमाल, मेलघाट) और गुजरात (डांग, पूर्णा वन्य जीव अभयारण्य) के हिस्से शामिल हैं।

    मध्य प्रदेश में फॉरेस्ट ऑउलेट पहले केवल पूर्वी खंडवा, बुरहानपुर और बैतूल जिलों में ही पाया जाता था। इस दुर्लभ पक्षी को सबसे पहले कूनो में स्थानीय पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लाभ यादव ने पारोंद बीट में क्षेत्र भ्रमण के दौरान देखा था, जिससे प्रजाति के अत्यधिक सीमित वितरण और संरक्षण स्थिति के कारण वन विभाग का ध्यान तुरंत आकर्षित हुआ। प्रमुख पहचान लक्षणों के आधार पर,वाइल्ड लाइफ रिसर्च एण्ड कंजर्वेशन सोसायटी, पुणे के विवेक पटेल ने मौके पर ही इसकी पुष्टि की, जिससे यह कूनो राष्ट्रीय उद्यान से प्रजाति का पहला प्रामाणिक रिकॉर्ड बन गया।

    अधिकांश उल्लुओं के व्यवहार के विपरीत, फॉरेस्ट ऑउलेट मुख्य रूप से दिन में सक्रिय रहने वाला पक्षी है। यह सुबह 6:00 से 10:00 बजे के बीच सबसे अधिक सक्रिय रहता है और कड़ी धूप में भी ऊंचे पेड़ों की टहनियों पर बैठा देखा जा सकता है। फॉरेस्ट ऑउलेट को वर्तमान में अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ द्वारा ‘लुप्त प्राय’ श्रेणी में रखा गया है। इसकी कुल वैश्विक वयस्क संख्या 250 से 999 के बीच होने का अनुमान है।

    मध्य प्रदेश में इसके वितरण को समझने के लिए और सर्वेक्षण किए जाने की आवश्यकता है। फॉरेस्ट ऑउलेट, जिसे कभी विलुप्त माना जाता था और 1997 में पुनः खोजा गया था, वर्तमान में मध्य भारत के सीमित क्षेत्रों में पाया जाता है और पर्यावास के क्षरण और विखंडन से लगातार खतरे का सामना कर रहा है। यह नया रिकॉर्ड कूनो राष्ट्रीय उद्यान के जंगलों के पारिस्थितिक महत्व को उजागर करता है।

    फॉरेस्ट आउलेट का दिखाई देना संकेत दे रहा है कि चीता के लिये किये जा रहे संरक्षण प्रयासों से पारिस्थितिकीय तंत्र में सुधार होने से अन्य लुप्तप्राय प्रजातियों की भी वापसी हो रही है। मध्य प्रदेश के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में इस प्रजाति के मिलने से पक्षी संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों में उत्साह की लहर है।

  • देश का विदेशी मुद्रा भंडार उच्चतम स्तर पर पहुंचा… खजाने में पहली बार आए 725 अरब डॉलर

    देश का विदेशी मुद्रा भंडार उच्चतम स्तर पर पहुंचा… खजाने में पहली बार आए 725 अरब डॉलर


    नई दिल्ली।
    इकोनॉमी के मोर्चे पर एक अच्छी खबर है। दरअसल, देश का विदेशी मुद्रा भंडार (Country’s Foreign Exchange Reserves) 13 फरवरी को समाप्त सप्ताह में 8.66 अरब डॉलर बढ़कर 725.72 अरब डॉलर के अपने उच्चतम स्तर (Highest Level) पर पहुंच गया। यह विदेशी मुद्रा भंडार का ऑल टाइम हाई है। इससे पहले का सर्वोच्च स्तर जनवरी में 723.774 अरब डॉलर का रहा था। छह फरवरी को समाप्त सप्ताह में कुल विदेशी मुद्रा भंडार 6.71 अरब डॉलर घटकर 717.06 अरब डॉलर रह गया था।

    क्या कहते हैं आंकड़े?
    भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) (Reserve Bank of India – RBI) की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक 13 फरवरी को समाप्त सप्ताह में मुद्रा भंडार का अहम हिस्सा माने जाने वाली विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 3.55 अरब डॉलर बढ़कर 573.60 अरब डॉलर हो गईं। डॉलर के रूप में व्यक्त की जाने वाली विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में विदेशी मुद्रा भंडार में रखे गए यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर अमेरिकी मुद्राओं के मूल्य में घट-बढ़ के प्रभाव शामिल होते हैं। रिजर्व बैंक ने कहा कि समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान स्वर्ण भंडार यानी गोल्ड रिजर्व का मूल्य 4.99 अरब डॉलर बढ़कर 128.46 अरब डॉलर हो गया। केंद्रीय बैंक ने बताया कि विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 10.3 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.92 अरब डॉलर हो गया। आंकड़ों के अनुसार, समीक्षाधीन सप्ताह में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास भारत का आरक्षित भंडार भी 1.9 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.734 अरब डॉलर हो गया।


    रुपया हुआ कमजोर

    विदेशी मुद्रा भंडार के ये आंकड़े ऐसे समय में आए हैं जब रुपया एक बार फिर कमजोर होता नजर आ रहा है। अमेरिका-ईरान के परस्पर बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी मुद्रा के मजबूत होने और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की वजह से शुक्रवार को अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 26 पैसे टूटकर 90.94 पर बंद हुआ। बाजार विश्लेषकों ने कहा कि घरेलू शेयर बाजार में तेजी का रुख भी रुपये को समर्थन देने में विफल रहा। इस पर अमेरिका और ईरान के बीच आने वाले दिनों में जंग छिड़ने की बनती स्थिति का विशेष प्रभाव रहा। बता दें कि बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपया चार पैसे बढ़कर 90.68 पर बंद हुआ था। वहीं, गुरुवार को छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती के कारण विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार बंद था। इस बीच, विश्व की छह प्रमुख प्रतिस्पर्धी मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर सूचकांक 0.01 प्रतिशत बढ़कर 97.86 पर कारोबार कर रहा था।


    क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

    मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव और मजबूत डॉलर के कारण रुपये में गिरावट आई। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने भी घरेलू मुद्रा पर दबाव डाला। हालांकि, घरेलू बाजारों की तेजी ने गिरावट को कम किया। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और डॉलर के मजबूत होने के कारण रुपया थोड़े नकारात्मक रुख के साथ कारोबार करेगा।