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  • देश का विदेशी मुद्रा भंडार उच्चतम स्तर पर पहुंचा… खजाने में पहली बार आए 725 अरब डॉलर

    देश का विदेशी मुद्रा भंडार उच्चतम स्तर पर पहुंचा… खजाने में पहली बार आए 725 अरब डॉलर


    नई दिल्ली।
    इकोनॉमी के मोर्चे पर एक अच्छी खबर है। दरअसल, देश का विदेशी मुद्रा भंडार (Country’s Foreign Exchange Reserves) 13 फरवरी को समाप्त सप्ताह में 8.66 अरब डॉलर बढ़कर 725.72 अरब डॉलर के अपने उच्चतम स्तर (Highest Level) पर पहुंच गया। यह विदेशी मुद्रा भंडार का ऑल टाइम हाई है। इससे पहले का सर्वोच्च स्तर जनवरी में 723.774 अरब डॉलर का रहा था। छह फरवरी को समाप्त सप्ताह में कुल विदेशी मुद्रा भंडार 6.71 अरब डॉलर घटकर 717.06 अरब डॉलर रह गया था।

    क्या कहते हैं आंकड़े?
    भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) (Reserve Bank of India – RBI) की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक 13 फरवरी को समाप्त सप्ताह में मुद्रा भंडार का अहम हिस्सा माने जाने वाली विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 3.55 अरब डॉलर बढ़कर 573.60 अरब डॉलर हो गईं। डॉलर के रूप में व्यक्त की जाने वाली विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में विदेशी मुद्रा भंडार में रखे गए यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर अमेरिकी मुद्राओं के मूल्य में घट-बढ़ के प्रभाव शामिल होते हैं। रिजर्व बैंक ने कहा कि समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान स्वर्ण भंडार यानी गोल्ड रिजर्व का मूल्य 4.99 अरब डॉलर बढ़कर 128.46 अरब डॉलर हो गया। केंद्रीय बैंक ने बताया कि विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 10.3 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.92 अरब डॉलर हो गया। आंकड़ों के अनुसार, समीक्षाधीन सप्ताह में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास भारत का आरक्षित भंडार भी 1.9 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.734 अरब डॉलर हो गया।


    रुपया हुआ कमजोर

    विदेशी मुद्रा भंडार के ये आंकड़े ऐसे समय में आए हैं जब रुपया एक बार फिर कमजोर होता नजर आ रहा है। अमेरिका-ईरान के परस्पर बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी मुद्रा के मजबूत होने और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की वजह से शुक्रवार को अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 26 पैसे टूटकर 90.94 पर बंद हुआ। बाजार विश्लेषकों ने कहा कि घरेलू शेयर बाजार में तेजी का रुख भी रुपये को समर्थन देने में विफल रहा। इस पर अमेरिका और ईरान के बीच आने वाले दिनों में जंग छिड़ने की बनती स्थिति का विशेष प्रभाव रहा। बता दें कि बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपया चार पैसे बढ़कर 90.68 पर बंद हुआ था। वहीं, गुरुवार को छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती के कारण विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार बंद था। इस बीच, विश्व की छह प्रमुख प्रतिस्पर्धी मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर सूचकांक 0.01 प्रतिशत बढ़कर 97.86 पर कारोबार कर रहा था।


    क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

    मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव और मजबूत डॉलर के कारण रुपये में गिरावट आई। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने भी घरेलू मुद्रा पर दबाव डाला। हालांकि, घरेलू बाजारों की तेजी ने गिरावट को कम किया। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और डॉलर के मजबूत होने के कारण रुपया थोड़े नकारात्मक रुख के साथ कारोबार करेगा।

  • BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव: आडवाणी और जोशी पहली बार नहीं कर पाएंगे वोटिंग,,, जानें वजह?

    BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव: आडवाणी और जोशी पहली बार नहीं कर पाएंगे वोटिंग,,, जानें वजह?


    नई दिल्ली।
    भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) (Bharatiya Janata Party – BJP) के इतिहास में 20 जनवरी 2026 का दिन एक बड़े बदलाव का गवाह बनने जा रहा है। 45 साल के नितिन नवीन (Nitin Naveen) का पार्टी के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष (National President) के रूप में निर्विरोध चुना जाना लगभग तय है। हालांकि, इस चुनाव में एक चौंकाने वाली बात यह है कि पार्टी के संस्थापक सदस्य लाल कृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) और मुरली मनोहर जोशी (Murali Manohar Joshi) पहली बार मतदान नहीं कर पाएंगे।

    दिसंबर 2025 से पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे नितिन नवीन अब पूर्णकालिक अध्यक्ष बनने जा रहे हैं। बिहार के बांकीपुर से विधायक और पूर्व मंत्री नितिन नवीन भाजपा के दिग्गज नेता दिवंगत नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के पुत्र हैं। आरएसएस (RSS) की पृष्ठभूमि वाले नवीन को संगठन में गहरी पैठ और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में पार्टी की चुनावी जीत में बड़ी भूमिका के लिए जाना जाता है।

    19 जनवरी को उनका नामांकन होगा और 20 जनवरी को उनकी जीत की औपचारिक घोषणा की जाएगी। उनके नामांकन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिंह प्रस्तावक बनेंगे।


    आडवाणी और जोशी मतदाता सूची से बाहर क्यों?

    1980 में भाजपा की स्थापना के बाद यह पहला मौका है जब इन दोनों दिग्गजों का नाम अध्यक्ष चुनाव की मतदाता सूची में नहीं है। इसके पीछे कोई राजनीतिक नाराजगी नहीं, बल्कि तकनीकी कारण हैं। पार्टी के संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय परिषद का सदस्य बनने के लिए संबंधित राज्य में संगठनात्मक चुनाव पूरा होना अनिवार्य है। आडवाणी और जोशी फिलहाल दिल्ली से राष्ट्रीय परिषद के सदस्य हैं, लेकिन दिल्ली प्रदेश भाजपा में चुनाव अभी लंबित हैं। जब तक दिल्ली में मंडल, जिला और प्रदेश स्तर के चुनाव नहीं हो जाते वहां से राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों का चयन नहीं हो सकता। इसी कारण दोनों नेताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके।

    आपको बता दें कि इससे पहले आडवाणी गुजरात (गांधीनगर) और जोशी उत्तर प्रदेश (कानपुर) से परिषद सदस्य हुआ करते थे। सक्रिय राजनीति से हटने के बाद वे दिल्ली से सदस्य बने थे। भाजपा के राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी के. लक्ष्मण ने चुनावी कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। 19 जनवरी को दोपहर 2 से 4 बजे तक नामांकन होगा। 19 जनवरी को ही शाम तक नामांकन पत्रों की जांच और वापसी का समय है। 20 जनवरी को यदि आवश्यक हुआ तो मतदान होगा, अन्यथा निर्विरोध चुनाव की घोषणा।

    जेपी नड्डा का स्थान लेने वाले नितिन नवीन के सामने सबसे बड़ी चुनौती 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए संगठन को तैयार करना और आगामी विधानसभा चुनावों (पश्चिम बंगाल, असम, केरल आदि) में पार्टी के प्रदर्शन को सुधारना होगी। युवा नेतृत्व के माध्यम से भाजपा अब अपनी अगली पीढ़ी की टीम तैयार करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।