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  • गुल्की जोशी ने बताया फिटनेस और खूबसूरती का राज, डाइट-वर्कआउट के साथ मी टाइम को भी दिया महत्व

    गुल्की जोशी ने बताया फिटनेस और खूबसूरती का राज, डाइट-वर्कआउट के साथ मी टाइम को भी दिया महत्व

    नई दिल्ली । अभिनेत्री गुल्की जोशी इन दिनों एक शो में डॉ. सृष्टि अग्रवाल का किरदार निभा रही हैं। अपने फिट और आकर्षक लुक को बनाए रखने के लिए वह केवल एक्सरसाइज पर निर्भर नहीं रहतीं, बल्कि खान-पान, नींद, हाइड्रेशन और मानसिक सुकून को भी अपनी दिनचर्या का अहम हिस्सा मानती हैं। उनके मुताबिक फिटनेस और खूबसूरती के लिए किसी बेहद सख्त रूटीन की बजाय ऐसा संतुलित तरीका अपनाना जरूरी है, जिसे लंबे समय तक आसानी से जारी रखा जा सके।

    गुल्की जोशी सख्त डाइट के बजाय बैलेंस्ड और सस्टेनेबल डाइट को प्राथमिकता देती हैं। वह अपने खाने में पर्याप्त प्रोटीन, सब्जियां और फल शामिल करने की कोशिश करती हैं। घर का बना भोजन उनकी डाइट का महत्वपूर्ण हिस्सा है। शूटिंग के व्यस्त शेड्यूल के कारण कभी-कभी खाने का समय प्रभावित हो जाता है, लेकिन वह अपनी दिनचर्या को संतुलित रखने की कोशिश करती हैं।

    हाइड्रेशन पर भी वह खास ध्यान देती हैं। उनका मानना है कि किसी भी तरह के भोजन को पूरी तरह छोड़ने के बजाय संतुलन बनाए रखना बेहतर है। जंक और बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड फूड को सीमित मात्रा में लेना उनकी प्राथमिकता है। उनके अनुसार डाइट ऐसी होनी चाहिए, जिसे बिना परेशानी और दबाव के लंबे समय तक फॉलो किया जा सके।

    वर्कआउट की बात करें तो गुल्की नियमित रूप से एक्सरसाइज करने की कोशिश करती हैं। हालांकि शूटिंग शेड्यूल के कारण उनके वर्कआउट रूटीन में बदलाव आता रहता है। वह ऐसे व्यायाम पसंद करती हैं, जिनमें स्ट्रेंथ, मोबिलिटी और कार्डियो का संतुलन बना रहे।

    गुल्की के लिए वॉकिंग भी फिटनेस रूटीन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अगर किसी दिन जिम जाना संभव नहीं हो पाता, तो वह पूरे दिन खुद को शारीरिक रूप से सक्रिय रखने की कोशिश करती हैं। उनके मुताबिक फिटनेस में सबसे महत्वपूर्ण चीज निरंतरता है। यानी किसी एक दिन बहुत ज्यादा एक्सरसाइज करने के बजाय नियमित रूप से एक्टिव रहना ज्यादा जरूरी है।

    मानसिक स्वास्थ्य और सुकून के लिए वह अपने लिए मी टाइम निकालना भी जरूरी मानती हैं। कभी कुछ समय शांत बैठना, फोन से दूरी बनाना या पसंदीदा लोगों के साथ वक्त बिताना उन्हें मानसिक रूप से बेहतर महसूस कराता है। वह कोशिश करती हैं कि तनाव को खुद पर हावी न होने दें और उन चीजों को लेकर ज्यादा परेशान न हों, जो उनके नियंत्रण में नहीं हैं।

    गुल्की के अनुसार सकारात्मक सोच एक दिन में विकसित होने वाली आदत नहीं है। इसके लिए रोज खुद को समझने और बेहतर महसूस करने की कोशिश करनी पड़ती है। उनके लिए मानसिक शांति भी फिटनेस और अच्छी लाइफस्टाइल का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    नींद को वह अपनी फिटनेस और ब्यूटी रूटीन का सबसे जरूरी हिस्सा मानती हैं। उनके मुताबिक पर्याप्त और अच्छी नींद का असर चेहरे की खूबसूरती पर भी दिखाई देता है। इसके साथ वह शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा बनाए रखने और बेसिक स्किन केयर में नियमितता पर ध्यान देती हैं।

    शूटिंग के दौरान लगातार मेकअप करना पड़ता है, इसलिए मेकअप को अच्छी तरह हटाना और त्वचा को साफ व मॉयश्चराइज रखना उनकी स्किन केयर रूटीन का हिस्सा है। वह जरूरत से ज्यादा नए प्रोडक्ट्स आजमाने के बजाय अपनी त्वचा के अनुकूल बेसिक प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना पसंद करती हैं। उनका मानना है कि जब व्यक्ति अंदर से स्वस्थ और खुश महसूस करता है, तो उसका सकारात्मक असर चेहरे पर भी नजर आता है।

  • एक्सरसाइज के बावजूद क्यों नहीं घट रहा फैट, विशेषज्ञों ने ओवरट्रेनिंग और हार्मोनल असंतुलन पर जताई चिंता

    एक्सरसाइज के बावजूद क्यों नहीं घट रहा फैट, विशेषज्ञों ने ओवरट्रेनिंग और हार्मोनल असंतुलन पर जताई चिंता

    नई दिल्ली ।नियमित रूप से कड़ा व्यायाम करने और खानपान पर ध्यान देने के बावजूद वजन नियंत्रित न होना एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, वजन घटाने के प्रयास में अक्सर लोग अत्यधिक पसीना बहाते हैं, लेकिन परिणाम उम्मीद के विपरीत मिलते हैं। इस स्थिति के पीछे केवल आहार ही मुख्य वजह नहीं होती, बल्कि शरीर को पर्याप्त आराम न देना, खराब नींद और जरूरत से ज्यादा वर्कआउट करना भी एक बड़ा कारण हो सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि व्यायाम के बाद मांसपेशियों की रिकवरी के लिए शरीर को पर्याप्त समय मिलना अत्यंत आवश्यक है। जब कोई व्यक्ति लगातार भारी वर्कआउट करता है और रात में गहरी नींद नहीं ले पाता, तो शरीर में अंदरूनी तनाव बढ़ने लगता है। यह स्थिति ऊर्जा स्तर, पाचन क्रिया और दैनिक कार्यक्षमता को प्रभावित करती है। अत्यधिक शारीरिक परिश्रम के कारण शरीर का मेटाबॉलिज्म सुस्त हो सकता है और हार्मोनल संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे फैट घटने के बजाय जमा होने लगता है।

    क्रॉनिक डिजीज विशेषज्ञों के मुताबिक, बिना किसी विश्राम दिवस के रोज कड़ा व्यायाम करने से शरीर में क्रॉनिक लो-ग्रेड इंफ्लेमेशन यानी अंदरूनी सूजन और तनाव उत्पन्न होता है। यह अंदरूनी तनाव हार्मोनल बैलेंस को प्रभावित करता है, जिससे विशेष रूप से पेट के आसपास फैट जमा होने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। इसके अलावा, ओवरट्रेनिंग के कारण महिलाओं में मासिक धर्म की अनियमतिता जैसी समस्याएं भी देखने को मिल सकती हैं, जो कि शरीर द्वारा अत्यधिक थकान का स्पष्ट संकेत है।

    व्यायाम से शरीर पूरी तरह थक जाने के बाद भी यदि रात में नींद न आने की समस्या हो रही है, तो यह ओवरट्रेनिंग और एड्रिनल ग्लैंड पर पड़ रहे अत्यधिक दबाव को दर्शाता है। ऐसी स्थिति में शरीर थायरॉइड और चयापचय दर को धीमा कर देता है, जिससे वजन घटाने की प्रक्रिया पूरी तरह रुक जाती है। मध्य प्रदेश सहित देश भर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि फिटनेस के लिए हमेशा अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही कसरत करनी चाहिए।

    एक स्वस्थ जीवन शैली और प्रभावी वजन नियंत्रण के लिए केवल कठिन वर्कआउट ही पर्याप्त नहीं है। इसके साथ संतुलित आहार, समय पर पर्याप्त आराम और प्रतिदिन कम से कम सात से आठ घंटे की नींद लेना अनिवार्य है। शरीर को अत्यधिक थका देने के बजाय संयमित दिनचर्या अपनाकर ही टिकाऊ फिटनेस और सही वजन प्राप्त किया जा सकता है।

  • सुनील गावस्कर ने भारतीय क्रिकेट खिलाड़ियों की फिटनेस और ट्रेनिंग पर उठाए सवाल, हैमस्ट्रिंग की चोटों पर जताई चिंता

    सुनील गावस्कर ने भारतीय क्रिकेट खिलाड़ियों की फिटनेस और ट्रेनिंग पर उठाए सवाल, हैमस्ट्रिंग की चोटों पर जताई चिंता

    नई दिल्ली ।भारतीय क्रिकेट टीम में खिलाड़ियों की लगातार चोटों ने फिटनेस और प्रशिक्षण के मौजूदा तरीकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जसप्रीत बुमराह, हार्दिक पंड्या, वॉशिंगटन सुंदर, साई सुदर्शन, नीतीश कुमार रेड्डी और हर्षित राणा जैसे कई प्रमुख खिलाड़ी अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याओं के कारण टीम से बाहर चल रहे हैं। इस बीच पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का बचाव करते हुए खिलाड़ियों की मूल ट्रेनिंग प्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

    सुनील गावस्कर का मानना है कि भारतीय खिलाड़ियों में बार-बार सामने आ रही हैमस्ट्रिंग की समस्या को सामान्य मानकर खारिज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि इसके पीछे के मूल कारणों को समझने के लिए खिलाड़ियों के नियमित प्रशिक्षण और वर्कलोड मैनेजमेंट की गहराई से समीक्षा की जानी बेहद जरूरी है। अधिकतर खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम के लिए खेलते समय चोटिल होते हैं, लेकिन बाद में दोष बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के फिजियो और मेडिकल स्टाफ पर मढ़ दिया जाता है।

    आधुनिक क्रिकेट में अपनाए जा रहे वर्कलोड मैनेजमेंट पर टिप्पणी करते हुए पूर्व कप्तान ने कहा कि अभ्यास सत्र के दौरान गेंदबाजों पर लगाई जाने वाली गेंदें फेंकने की सीमा हमेशा लाभदायक नहीं होती। उन्होंने उदाहरण देते हुए स्पष्ट किया कि जब एक टी20 मुकाबले में गेंदबाज को कम से कम चार ओवर यानी 24 गेंदें फेंकनी होती हैं, तो अभ्यास में उसे 20 से कम गेंदें फेंकने तक सीमित रखना व्यावहारिक नहीं है। इससे खिलाड़ी मैदान की वास्तविक परिस्थितियों के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हो पाते।

    फिटनेस के तय पैमानों पर बात करते हुए गावस्कर ने स्पष्ट किया कि केवल जिम में पसीना बहाकर हासिल की गई शारीरिक क्षमता पर्याप्त नहीं है। मैदान की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप शरीर को ढालना और मैच फिट होना अधिक आवश्यक है। बार-बार लगने वाली चोटों से टीम का संतुलन भी प्रभावित होता है, जिस पर कप्तान शुभमन गिल भी पूर्व में चिंता जाहिर कर चुके हैं। मध्य प्रदेश सहित देश भर के क्रिकेट प्रशंसकों और विशेषज्ञों के बीच अब इस विषय पर गंभीर बहस छिड़ गई है।

    आगामी बड़े टूर्नामेंटों और विश्व कप जैसी प्रतियोगिताओं को ध्यान में रखते हुए खिलाड़ियों का लगातार स्वस्थ और उपलब्ध रहना बेहद आवश्यक माना जा रहा है। यदि वर्कलोड और ट्रेनिंग के तरीकों में समय रहते सुधार नहीं किया गया तो इसका असर टीम के समग्र प्रदर्शन पर पड़ सकता है। फिलहाल बीसीसीआई और प्रबंधन द्वारा इस दिशा में उठाए जाने वाले आगामी कदमों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

  • दुबलेपन को न समझें अच्छी सेहत की निशानी, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया असली फिटनेस का वास्तविक पैमाना

    दुबलेपन को न समझें अच्छी सेहत की निशानी, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया असली फिटनेस का वास्तविक पैमाना

    नई दिल्ली :आधुनिक दौर में सोशल मीडिया के प्रभाव के कारण अधिकांश लोग पतले दिखने को ही अच्छी फिटनेस का पर्याय मानने लगे हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि केवल वजन कम होना या दुबला दिखना किसी व्यक्ति के पूर्ण स्वस्थ होने का प्रमाण नहीं है। वास्तविक फिटनेस का सीधा संबंध इस बात से है कि आपका शरीर दैनिक जीवन के कार्यों को कितनी सहजता और ऊर्जा के साथ पूरा करता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, केवल बाहरी शारीरिक बनावट के आधार पर किसी के स्वास्थ्य का सही आकलन नहीं किया जा सकता। यदि कोई व्यक्ति दिखने में सामान्य या पतला है, लेकिन दिनभर सुस्ती महसूस करता है, सीढ़ियां चढ़ने में हांफने लगता है या उसकी नींद पूरी नहीं होती, तो उसे पूर्णतः स्वस्थ नहीं माना जा सकता। असली फिटनेस शरीर को क्रियाशील, ऊर्जावान और बीमारियों से मुक्त बनाए रखने में निहित है।

    शारीरिक क्षमता का परीक्षण दैनिक गतिविधियों से होता है। थोड़ा सा चलने, वजन उठाने या सामान्य मेहनत के काम करने पर अत्यधिक थकान या सांस फूलना खराब कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस का संकेत हो सकता है। यदि पहले की तुलना में सामान्य काम करने में भी परेशानी होने लगे, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय अपनी जीवनशैली और आहार में आवश्यक सुधार करना चाहिए।

    एक स्वस्थ शरीर के लिए लचीलापन और शारीरिक संतुलन भी बेहद महत्वपूर्ण घटक हैं। बिना किसी कठिनाई के झुकना, मुड़ना और दैनिक गतिविधियों के दौरान संतुलन बनाए रखना अच्छी शारीरिक स्थिति को दर्शाता है। बढ़ती उम्र के साथ शरीर की स्थिरता बनाए रखने के लिए नियमित रूप से हल्का व्यायाम और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करना बेहद लाभकारी सिद्ध होता है।

    शारीरिक संकेतकों की बात करें तो रेस्टिंग हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण पैमाना हैं। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, सामान्य स्थिति में नियंत्रित ब्लड प्रेशर और स्थिर हृदय गति अंदरूनी रूप से मजबूत शरीर का संकेत देती है। बाहर से फिट दिखने वाले व्यक्ति भी उच्च रक्तचाप या अन्य आंतरिक स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त हो सकते हैं, इसलिए नियमित जांच आवश्यक है।

    शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य का संतुलन भी उतना ही अनिवार्य है। अत्यधिक तनाव, चिड़चिड़ापन या उदासी व्यक्ति की कार्यक्षमता को प्रभावित करती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित शारीरिक गतिविधि न केवल मांसपेशियों को मजबूत करती है, बल्कि मानसिक तनाव को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करती है।

    मध्य प्रदेश सहित देशभर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सुझाव है कि लोग केवल वजन घटाने वाले भ्रामक पैमानों के पीछे न भागें। संतुलित पोषण, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और तनावमुक्त दिनचर्या को अपनाकर ही वास्तविक फिटनेस हासिल की जा सकती है। अपने शरीर के संकेतों को समझना और आंतरिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना ही लंबे समय तक स्वस्थ रहने का सबसे कारगर तरीका है।

  • शीजान खान ने अपनाई शाकाहारी डाइट, बोले- सही पोषण से बिना नॉनवेज भी बनाए रखी जा सकती है फिटनेस

    शीजान खान ने अपनाई शाकाहारी डाइट, बोले- सही पोषण से बिना नॉनवेज भी बनाए रखी जा सकती है फिटनेस

    नई दिल्ली । टेलीविजन अभिनेता शीजान खान ने अपनी फिटनेस और खान-पान से जुड़ा एक अहम बदलाव साझा करते हुए बताया है कि उन्होंने पूरी तरह शाकाहारी जीवनशैली अपना ली है। उनका कहना है कि लंबे समय से प्रचलित इस धारणा को उन्होंने अपने अनुभव से गलत साबित किया है कि बेहतर फिटनेस और मसल्स बनाने के लिए नॉनवेज भोजन अनिवार्य होता है। अभिनेता के अनुसार, संतुलित पोषण और सही डाइट प्लानिंग के जरिए शाकाहारी भोजन के साथ भी शरीर को आवश्यक पोषक तत्व मिल सकते हैं।

    इन दिनों अपने टीवी शो ‘गंगा मैया की बेटियां’ में नजर आ रहे शीजान खान ने बताया कि शूटिंग के दौरान लंबे और व्यस्त कार्य घंटे होने के कारण ऊर्जा बनाए रखना उनके लिए बेहद जरूरी होता है। इसी वजह से वह अपनी डाइट को लेकर विशेष सतर्क रहते हैं और हर भोजन में पोषण का संतुलन बनाए रखने की कोशिश करते हैं। उनका मानना है कि फिटनेस केवल अधिक भोजन करने से नहीं, बल्कि सही पोषक तत्वों का उचित मात्रा में सेवन करने से हासिल होती है।

    अभिनेता ने बताया कि वह अपनी रोजमर्रा की डाइट में प्रोटीन और फाइबर पर विशेष ध्यान देते हैं। उनके अनुसार, पनीर शाकाहारी भोजन में प्रोटीन का अच्छा स्रोत है, जबकि प्रोटीन शेक उनकी दैनिक पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद करता है। उनका कहना है कि संतुलित भोजन और नियमित दिनचर्या ही फिटनेस बनाए रखने का सबसे प्रभावी तरीका है।

    शीजान खान ने यह भी स्वीकार किया कि पहले उन्हें लगता था कि यदि वह चिकन और अंडे जैसे खाद्य पदार्थ छोड़ देंगे तो उनकी मांसपेशियों की मजबूती और फिटनेस प्रभावित होगी। हालांकि, शाकाहारी जीवनशैली अपनाने के बाद उनका अनुभव इससे बिल्कुल अलग रहा। उन्होंने बताया कि उचित योजना के साथ तैयार की गई डाइट ने उन्हें यह महसूस कराया कि शरीर को आवश्यक पोषण केवल नॉनवेज से ही नहीं, बल्कि शाकाहारी स्रोतों से भी मिल सकता है।

    उन्होंने कहा कि उन्हें पूरी तरह शाकाहारी बने लगभग छह महीने हो चुके हैं और यह पहली बार है जब उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपने इस बदलाव के बारे में विस्तार से बात की है। उनके अनुसार, इस दौरान उन्होंने अपनी फिटनेस, ऊर्जा और मसल्स में कोई नकारात्मक बदलाव महसूस नहीं किया। इसके विपरीत, सही खान-पान और अनुशासित जीवनशैली ने उन्हें पहले की तरह सक्रिय बनाए रखा है।

    डाइट और फिटनेस के अलावा शीजान खान ने अपने एक अन्य शौक का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उन्हें खाना बनाना बेहद पसंद है। हालांकि, व्यस्त शूटिंग शेड्यूल के कारण उन्हें रसोई में अधिक समय बिताने का अवसर नहीं मिल पाता, लेकिन जब भी समय मिलता है, वह अपने लिए और दोस्तों के लिए खाना बनाना पसंद करते हैं। उनका मानना है कि घर का संतुलित और पौष्टिक भोजन स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    शीजान खान का कहना है कि फिटनेस का मूल आधार केवल किसी एक प्रकार के भोजन पर निर्भर नहीं करता, बल्कि संतुलित पोषण, नियमित व्यायाम और अनुशासित दिनचर्या पर आधारित होता है। उनका अनुभव उन लोगों के लिए भी प्रेरणादायक हो सकता है, जो शाकाहारी भोजन अपनाने के बाद फिटनेस को लेकर संदेह रखते हैं। अभिनेता का मानना है कि यदि भोजन की योजना वैज्ञानिक और संतुलित तरीके से बनाई जाए, तो शाकाहारी आहार के साथ भी बेहतर स्वास्थ्य और मजबूत फिटनेस हासिल की जा सकती है।

  • रीढ़ को मजबूत और मन को शांत रखने का आसान मंत्र है सरल धनुरासन जानिए सही तरीका और जबरदस्त फायदे

    रीढ़ को मजबूत और मन को शांत रखने का आसान मंत्र है सरल धनुरासन जानिए सही तरीका और जबरदस्त फायदे


    नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करना मोबाइल और लैपटॉप का लगातार उपयोग तथा शारीरिक गतिविधियों की कमी लोगों को कम उम्र में ही पीठ दर्द गर्दन की अकड़न और रीढ़ से जुड़ी समस्याओं की ओर धकेल रही है। ऐसे समय में योग केवल व्यायाम नहीं बल्कि स्वस्थ जीवन जीने का प्रभावी माध्यम बनकर सामने आया है। योग विशेषज्ञों के अनुसार सरल धनुरासन ऐसा योगासन है जो पूरे शरीर को सक्रिय करने के साथ रीढ़ की हड्डी को मजबूत और लचीला बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही कारण है कि आयुष मंत्रालय भी लोगों को नियमित रूप से इस योगासन का अभ्यास करने के लिए प्रेरित कर रहा है।

    सरल धनुरासन शरीर को धनुष के आकार में लाने वाला आसन है। यह पीठ कंधों कमर और पैरों की मांसपेशियों पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। नियमित अभ्यास से शरीर की जकड़न धीरे धीरे कम होने लगती है और रीढ़ में लचीलापन बढ़ता है। यह आसन केवल शारीरिक मजबूती ही नहीं देता बल्कि मानसिक तनाव को कम करने और मन को शांत रखने में भी सहायक माना जाता है। दिनभर की थकान और तनाव के बाद इसका अभ्यास शरीर में नई ऊर्जा का संचार करता है।

    योग विशेषज्ञ बताते हैं कि सरल धनुरासन करने के लिए सबसे पहले समतल स्थान पर योगा मैट बिछाकर पेट के बल लेट जाएं। इसके बाद दोनों पैरों को घुटनों से मोड़ें और हाथों से टखनों को पकड़ लें। अब गहरी सांस लेते हुए धीरे धीरे सिर छाती और घुटनों को ऊपर उठाएं। पैरों को पीछे की ओर खींचते हुए शरीर को धनुष जैसी आकृति में लाएं। इस स्थिति में कुछ सेकंड तक सामान्य सांस लेते हुए बने रहें। इसके बाद धीरे धीरे सांस छोड़ते हुए सामान्य अवस्था में लौट आएं और शरीर को आराम दें। शुरुआत में इस आसन को कम समय तक करें और धीरे धीरे अभ्यास की अवधि बढ़ाएं।

    इस योगासन के नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है शरीर का लचीलापन बढ़ता है पीठ और कंधों की मांसपेशियां मजबूत बनती हैं तथा रक्त संचार बेहतर होता है। यह पाचन तंत्र को सक्रिय करने में भी मदद करता है और शरीर में ऊर्जा का स्तर बढ़ाता है। मानसिक रूप से भी यह आसन तनाव चिंता और थकान को कम करने में उपयोगी माना जाता है जिससे व्यक्ति अधिक शांत और सकारात्मक महसूस करता है।

    हालांकि किसी भी योगासन की तरह सरल धनुरासन करते समय सावधानी रखना भी जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति को गंभीर कमर दर्द रीढ़ की गंभीर समस्या हर्निया उच्च रक्तचाप हाल ही में हुई सर्जरी या गर्भावस्था जैसी स्थिति हो तो बिना विशेषज्ञ की सलाह के इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए। अभ्यास के दौरान शरीर पर अनावश्यक दबाव डालने या झटके से ऊपर उठने की कोशिश नहीं करनी चाहिए क्योंकि इससे चोट लगने का खतरा बढ़ सकता है।

    योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरल धनुरासन को नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाया जाए और संतुलित खानपान तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाई जाए तो यह शरीर और मन दोनों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकता है। रोजाना कुछ मिनट का यह अभ्यास न केवल रीढ़ को मजबूत बनाता है बल्कि व्यक्ति को तनावमुक्त ऊर्जावान और अधिक सक्रिय जीवन जीने में भी मदद करता है।

  • थकान को कहें अलविदा! घर पर बनाएं नेचुरल एनर्जी बूस्टर ड्रिंक, दिनभर रहेंगे एक्टिव और फ्रेश

    थकान को कहें अलविदा! घर पर बनाएं नेचुरल एनर्जी बूस्टर ड्रिंक, दिनभर रहेंगे एक्टिव और फ्रेश


    नई दिल्ली । आज की व्यस्त जीवनशैली में थकान, कमजोरी और ऊर्जा की कमी एक आम समस्या बन गई है। लंबे समय तक काम करना, पर्याप्त नींद न लेना, अनियमित भोजन और तनाव शरीर की ऊर्जा को प्रभावित करते हैं। ऐसे में अधिकांश लोग बाजार में मिलने वाले एनर्जी ड्रिंक्स का सहारा लेते हैं, लेकिन इनमें मौजूद अधिक चीनी और कृत्रिम तत्व स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक और घर पर तैयार किए गए एनर्जी बूस्टर ड्रिंक शरीर के लिए अधिक सुरक्षित और लाभकारी होते हैं।

    प्राकृतिक एनर्जी ड्रिंक शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करने के साथ-साथ आवश्यक पोषक तत्व भी उपलब्ध कराते हैं। नींबू, शहद और पानी से तैयार किया गया पेय सबसे लोकप्रिय प्राकृतिक एनर्जी ड्रिंक्स में से एक माना जाता है। एक गिलास गुनगुने या सामान्य पानी में आधा नींबू और एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से शरीर को ताजगी और ऊर्जा मिलती है। इसमें मौजूद विटामिन-सी और प्राकृतिक शर्करा शरीर को सक्रिय बनाए रखने में मदद करती है।

    नारियल पानी भी एक बेहतरीन प्राकृतिक एनर्जी बूस्टर माना जाता है। इसमें पोटैशियम, मैग्नीशियम और इलेक्ट्रोलाइट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर में पानी की कमी को दूर कर ऊर्जा बनाए रखते हैं। गर्मियों के मौसम में इसका सेवन विशेष रूप से लाभदायक माना जाता है।

    इसके अलावा केला और दूध से तैयार स्मूदी भी ऊर्जा का अच्छा स्रोत है। केले में प्राकृतिक कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और पोटैशियम मौजूद होता है, जो शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा प्रदान करता है। व्यायाम करने वाले लोगों और खिलाड़ियों के लिए यह एक प्रभावी विकल्प माना जाता है।

    सूखे मेवे और खजूर से तैयार ड्रिंक भी शरीर को ताकत देने का काम करता है। रातभर भिगोए हुए बादाम, खजूर और दूध को मिलाकर तैयार किया गया पेय पोषण से भरपूर होता है। यह न केवल ऊर्जा बढ़ाता है, बल्कि मानसिक एकाग्रता और शारीरिक क्षमता को भी बेहतर बनाने में सहायक माना जाता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि केवल एनर्जी ड्रिंक पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, नियमित व्यायाम और अच्छी नींद भी आवश्यक है। यदि शरीर लगातार थकान महसूस कर रहा हो, तो इसके पीछे किसी स्वास्थ्य समस्या की संभावना भी हो सकती है, इसलिए चिकित्सकीय सलाह लेना उचित रहेगा।

    कुल मिलाकर, प्राकृतिक एनर्जी बूस्टर ड्रिंक शरीर को स्वस्थ तरीके से ऊर्जा प्रदान करने का बेहतर विकल्प हैं। इनका नियमित और संतुलित सेवन न केवल दिनभर ताजगी बनाए रखता है, बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य को भी लाभ पहुंचाता है। बाजार के कृत्रिम पेयों की बजाय घर पर तैयार प्राकृतिक पेय अपनाकर आप अपनी सेहत और ऊर्जा दोनों को बेहतर बना सकते हैं।

  • Type-2 Diabetes से बचाव है संभव: अपनाएं ये 4 आसान आदतें और रहें स्वस्थ

    Type-2 Diabetes से बचाव है संभव: अपनाएं ये 4 आसान आदतें और रहें स्वस्थ


    नई दिल्ली। आज के समय में तेजी से बढ़ती लाइफस्टाइल बीमारियों में Type 2 Diabetes एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। खराब खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी और बढ़ता तनाव इस बीमारी के प्रमुख कारण माने जाते हैं। हालांकि, अच्छी बात यह है कि World Health Organization (WHO) का मानना है कि कुछ आसान और नियमित आदतों को अपनाकर इस बीमारी से बचाव संभव है।

    WHO के अनुसार, सबसे जरूरी है अपने शरीर के वजन को संतुलित रखना। बढ़ता हुआ वजन डायबिटीज के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है। ऐसे में नियमित रूप से वजन पर नजर रखना और जरूरत पड़ने पर उसे नियंत्रित करना बेहद जरूरी है। संतुलित वजन न सिर्फ डायबिटीज बल्कि कई अन्य बीमारियों से भी बचाता है।

    दूसरा महत्वपूर्ण उपाय है शारीरिक रूप से सक्रिय रहना। विशेषज्ञों की सलाह है कि रोजाना कम से कम 20 से 30 मिनट तक व्यायाम जरूर करना चाहिए। इसमें तेज चलना, साइकिल चलाना या हल्का-फुल्का खेलकूद शामिल हो सकता है। नियमित शारीरिक गतिविधि शरीर में इंसुलिन के प्रभाव को बेहतर बनाती है और ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखने में मदद करती है।

    तीसरा अहम पहलू है संतुलित और पौष्टिक आहार। WHO के अनुसार, अपनी डाइट में फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए। वहीं, ज्यादा चीनी, प्रोसेस्ड फूड और सैचुरेटेड फैट से दूरी बनाना बेहद जरूरी है। सही खानपान न केवल डायबिटीज के खतरे को कम करता है, बल्कि शरीर को ऊर्जा और पोषण भी देता है।

    चौथा और बेहद जरूरी उपाय है तंबाकू से दूरी बनाना। तंबाकू का सेवन न केवल डायबिटीज बल्कि दिल और फेफड़ों से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाता है। WHO का स्पष्ट कहना है कि तंबाकू छोड़ने से शरीर की ओवरऑल हेल्थ बेहतर होती है और कई बीमारियों से बचाव संभव होता है।

    आज के व्यस्त जीवन में छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करना ही सबसे बड़ा उपाय है। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, वजन नियंत्रण और तंबाकू से दूरी बनाकर न केवल Type 2 Diabetes बल्कि कई अन्य गंभीर बीमारियों से भी बचा जा सकता है।

    कुल मिलाकर, अगर समय रहते जागरूकता दिखाई जाए और सही जीवनशैली अपनाई जाए, तो डायबिटीज जैसी बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है।

  • फिल्म डिमांड पर जबरदस्त बदलाव, हर्षवर्धन राणे का फिटनेस ट्रांसफॉर्मेशन चर्चा में..

    फिल्म डिमांड पर जबरदस्त बदलाव, हर्षवर्धन राणे का फिटनेस ट्रांसफॉर्मेशन चर्चा में..

    नई दिल्ली।
    बॉलीवुड अभिनेता हर्षवर्धन राणे इन दिनों अपनी आने वाली एक्शन फिल्म ‘फोर्स 3’ को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। इस फिल्म में अपने किरदार को पूरी तरह वास्तविक और दमदार बनाने के लिए उन्होंने अपने शारीरिक रूप में बड़ा बदलाव किया है। निर्देशक की मांग के अनुसार उन्होंने कड़ी मेहनत करते हुए महज 6 महीनों में अपना वजन लगभग 12 किलो बढ़ा लिया है, जिससे उनका लुक पूरी तरह बदल गया है।

    इस बदलाव के बाद उनका वजन अब करीब 93 किलो तक पहुंच चुका है, जो उनके एक्शन रोल की जरूरतों के हिसाब से तैयार किया गया है। इस पूरी प्रक्रिया में उन्होंने सख्त डाइट प्लान और भारी वर्कआउट रूटीन अपनाया, ताकि स्क्रीन पर उनका किरदार और भी प्रभावशाली दिख सके। उनका यह ट्रांसफॉर्मेशन फिल्म की तैयारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

    हर्षवर्धन राणे ने इस बदलाव की जानकारी सोशल मीडिया के जरिए साझा की, जहां उन्होंने अपनी फिटनेस जर्नी और मेहनत की झलक दिखाई। उन्होंने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया आसान नहीं थी और इसके लिए उन्हें लगातार अनुशासन और समर्पण बनाए रखना पड़ा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उन्हें अभी भी अपने किरदार के अनुसार कुछ और शारीरिक बदलाव करने हैं।

    इस फिल्म में उनके साथ जॉन अब्राहम भी मुख्य भूमिका में नजर आएंगे। यह एक्शन फिल्म अपने दमदार स्टंट और कहानी को लेकर पहले से ही चर्चा में है। शूटिंग की शुरुआत इसी साल मार्च में हो चुकी है और इसका पहला शेड्यूल गुजरात में पूरा किया गया था। फिल्म की टीम लगातार इसके निर्माण पर काम कर रही है ताकि इसे बड़े स्तर पर पेश किया जा सके।

    हर्षवर्धन राणे ने अपने अनुभव साझा करते हुए यह भी बताया कि इस प्रोजेक्ट ने उन्हें शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से मजबूत बनाया है। उन्होंने अपने पुराने अनुभवों को याद करते हुए यह कहा कि मेहनत और अनुशासन ही किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल करने की कुंजी होती है।

    फिल्म ‘फोर्स 3’ को एक बड़े एक्शन प्रोजेक्ट के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें कहानी, एक्शन और किरदारों का गहरा प्रभाव देखने को मिलेगा। हर्षवर्धन का यह ट्रांसफॉर्मेशन न केवल फिल्म के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह उनके करियर के लिए भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

  • भागदौड़ भरी जिंदगी में फिट रहने का मंत्र ये योगासन देंगे सेहत संतुलन और सुकून

    भागदौड़ भरी जिंदगी में फिट रहने का मंत्र ये योगासन देंगे सेहत संतुलन और सुकून


    नई दिल्ली । हर साल 7 अप्रैल को मनाया जाने वाला विश्व स्वास्थ्य दिवस हमें यह याद दिलाता है कि स्वस्थ जीवन ही सबसे बड़ी पूंजी है। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में जहां तनाव और अनियमित दिनचर्या आम हो चुकी है वहीं दिल और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखना बेहद जरूरी हो गया है। ऐसे में योग एक ऐसा सरल और प्रभावी उपाय है जो शरीर और मन दोनों को संतुलित रखने में मदद करता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित योगाभ्यास न केवल हृदय को मजबूत बनाता है बल्कि पाचन क्रिया को भी बेहतर करता है। साथ ही यह मानसिक शांति और एकाग्रता को बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाता है। कुछ ऐसे खास योगासन हैं जिन्हें अपनाकर आप अपनी सेहत को बेहतर बना सकते हैं।

    सबसे पहले बात करें सूर्य नमस्कार की जिसे सभी योगासनों का राजा कहा जाता है। यह पूरे शरीर का व्यायाम है जो पेट की मांसपेशियों को मजबूत करता है और हृदय की धड़कन को संतुलित बनाए रखता है। सुबह खाली पेट इसका अभ्यास करना सबसे अधिक लाभकारी माना जाता है और यह तनाव को कम करने में भी मदद करता है।

    इसके बाद भुजंगासन आता है जो रीढ़ और हृदय के लिए बेहद फायदेमंद है। इस आसन में शरीर के ऊपरी हिस्से को उठाने से पीठ और पेट की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और हृदय स्वास्थ्य बेहतर होता है। हालांकि इसे करते समय शरीर पर अनावश्यक दबाव डालने से बचना चाहिए।

    वृक्षासन संतुलन और मानसिक शांति के लिए एक बेहतरीन आसन है। एक पैर पर खड़े होकर किया जाने वाला यह अभ्यास न केवल शरीर को स्थिरता देता है बल्कि मन को भी शांत और एकाग्र बनाता है। यह जोड़ों की मजबूती के लिए भी लाभकारी है।

    पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने के लिए अर्ध मत्स्येन्द्रासन बेहद उपयोगी माना जाता है। यह पेट की मांसपेशियों को सक्रिय करता है जिससे भोजन का पाचन बेहतर होता है। इसे भोजन के कुछ समय बाद करना चाहिए ताकि शरीर को अधिक लाभ मिल सके।

    अंत में मार्जार्यासन उन लोगों के लिए खास है जो लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं। यह रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है और पीठ तथा गर्दन के दर्द को कम करने में मदद करता है। साथ ही शरीर के पोश्चर को सुधारने में भी यह काफी कारगर है।

    कुल मिलाकर ये पांच योगासन न केवल आपके दिल और पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं बल्कि मानसिक शांति और संतुलन भी प्रदान करते हैं। यदि इन्हें नियमित रूप से सही तरीके से किया जाए तो यह आपको स्वस्थ जीवन के साथ लंबी उम्र का भी वरदान दे सकते हैं।