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  • मध्यप्रदेश में घी की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल, 50 से ज्यादा नमूने जांच में फेल, 42 उत्पाद वापस मंगाने के निर्देश और 8 पर बिक्री रोक

    मध्यप्रदेश में घी की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल, 50 से ज्यादा नमूने जांच में फेल, 42 उत्पाद वापस मंगाने के निर्देश और 8 पर बिक्री रोक


    मध्यप्रदेश:
    में घी की गुणवत्ता को लेकर खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चिंता बढ़ गई है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन की जांच में घी के 50 से ज्यादा नमूने निर्धारित गुणवत्ता जांच में फेल पाए गए हैं। इसके बाद विभाग ने 42 उत्पादों को बाजार से वापस मंगाने के निर्देश दिए हैं, जबकि आठ उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाई गई है। उपभोक्ताओं से संबंधित उत्पाद नहीं खरीदने और यदि पहले खरीद चुके हैं तो उन्हें वापस करने की अपील की गई है।

    घी भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाला प्रमुख खाद्य पदार्थ है। ऐसे में बड़ी संख्या में नमूनों का जांच में असुरक्षित पाया जाना उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण मामला है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में सभी नमूनों के फेल होने के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं की गई है। इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि प्रत्येक उत्पाद में मिलावट ही पाई गई है। गुणवत्ता संबंधी खामी का वास्तविक कारण विस्तृत जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

    जांच में इन ब्रांडों के नाम आए सामने

    जांच में जिन घी उत्पादों के नमूने असुरक्षित बताए गए हैं, उनमें अनिक घी, सात्विक केश देसी घी, श्रीमूल एगमार्क शुद्ध घी और एसआरएमएआई मिल्क क्रीम एगमार्क घी शामिल हैं। इसके अलावा अमृत शुद्ध घी, नंद कृष्ण घी और मधुसूदन देसी घी के नमूने भी जांच में फेल बताए गए हैं।

    सूची में देसी गाय का घी संगठन, जवासी काउ देशी घी, संगठन काउ घी, डेयरी सरस घी और जेबीएस ऑर्गेनिक गाय का घी भी शामिल हैं। खुशबू ब्रांड घी, गसांता प्रीमियम काउ घी, गुमर योर काउ घी, श्री शुद्ध एगमार्क घी और वास्तु एगमार्क घी के नमूने भी असुरक्षित पाए जाने की जानकारी दी गई है।

    जिलों में उत्पादों की बिक्री पर कार्रवाई
    जांच के बाद प्रदेश के अलग-अलग जिलों में कुछ उत्पादों की बिक्री रोकने के आदेश जारी किए गए हैं। छिंदवाड़ा में पतंजलि काउ घी के पैक की बिक्री पर रोक लगाई गई है। कटनी में अनिक घी और नर्मदापुरम में संगठन काउ घी की बिक्री रोकने के निर्देश दिए गए हैं।

    धार जिले में चार घी उत्पादों की बिक्री रोकने की जानकारी सामने आई है। इनमें अनिक देसी घी, श्रीमूल घी, एसआरएमएआई मिल्क क्रीम एगमार्क घी और अमृत शुद्ध घी शामिल हैं। वहीं, इंदौर में पीवर इंदौरी लाल मिर्च पाउडर की बिक्री पर रोक लगाई गई है। इससे स्पष्ट होता है कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच केवल घी तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य खाद्य उत्पाद भी जांच के दायरे में हैं।

    उपभोक्ता क्या सावधानी बरतें
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    विभाग ने जिन उत्पादों को लेकर निर्देश जारी किए हैं, उन्हें खरीदने से बचने और पहले से खरीदे गए संबंधित उत्पादों को वापस करने की अपील की है। उपभोक्ताओं को पैकेट पर लिखे ब्रांड, उत्पाद का नाम और बैच संबंधी जानकारी ध्यान से देखनी चाहिए। किसी उत्पाद के असुरक्षित पाए जाने की सूचना मिलने पर उसे इस्तेमाल करने के बजाय संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग से मार्गदर्शन लेना उचित है।

    जांच में नमूना फेल होने का अर्थ यह है कि संबंधित उत्पाद निर्धारित जांच मानकों पर खरा नहीं उतरा। हालांकि, इससे अपने आप यह साबित नहीं होता कि उसे खा चुके प्रत्येक व्यक्ति की सेहत को नुकसान हुआ है। उपलब्ध जानकारी में ऐसे उपभोक्ताओं पर स्वास्थ्य प्रभाव को लेकर कोई निश्चित निष्कर्ष नहीं दिया गया है।

    तेज जांच और पारदर्शिता की जरूरत
    इस मामले ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच की गति और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों ने जांच प्रक्रिया तेज करने और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया है। समय पर जांच और कार्रवाई होने से असुरक्षित उत्पादों की बिक्री रोकने में मदद मिल सकती है।

    घी के 50 से ज्यादा नमूनों का असुरक्षित पाया जाना उपभोक्ताओं के लिए सतर्क रहने का संकेत है। अब जांच के निष्कर्षों, उत्पादों की वापसी और बिक्री पर लगाई गई रोक के प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान देना जरूरी होगा।

  • भोपाल की कॉलेज कैंटीन में खाद्य सुरक्षा की खुली पोल सड़ी सब्जियों से लेकर एक्सपायर्ड ब्रेड तक मिलीं कई गंभीर खामियां

    भोपाल की कॉलेज कैंटीन में खाद्य सुरक्षा की खुली पोल सड़ी सब्जियों से लेकर एक्सपायर्ड ब्रेड तक मिलीं कई गंभीर खामियां


    भोपाल । भोपाल के पं. खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेदिक कॉलेज परिसर में विद्यार्थियों के लिए संचालित कैंटीन में खाद्य सुरक्षा और साफ सफाई को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान कैंटीन में सड़ी हुई प्याज मिली जबकि सैंडविच तैयार करने के लिए ऐसी ब्रेड का इस्तेमाल किया जा रहा था जिसकी बेस्ट बिफोर अवधि करीब 10 दिन पहले ही समाप्त हो चुकी थी। कॉलेज परिसर में विद्यार्थियों के लिए भोजन तैयार करने वाली कैंटीन में इस तरह की अनियमितताएं मिलने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने संचालकों को सुधार सूचना पत्र जारी कर व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं।

    जानकारी के मुताबिक खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने कॉलेज परिसर में संचालित नवीन कैंटीन का निरीक्षण किया था। इस दौरान खाद्य पदार्थों के निर्माण और उनके भंडारण से जुड़ी व्यवस्थाओं को बारीकी से देखा गया। जांच के दौरान कैंटीन में साफ सफाई और हाइजीन की स्थिति संतोषजनक नहीं मिली। खाद्य सामग्री को सुरक्षित तरीके से रखने की उचित व्यवस्था भी नहीं थी। इसके अलावा भोजन तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता और उसके भंडारण को लेकर भी कई कमियां सामने आईं।

    निरीक्षण के दौरान सबसे गंभीर मामला सैंडविच ब्रेड से जुड़ा सामने आया। कैंटीन में ऐसी ब्रेड का इस्तेमाल किया जा रहा था जिसकी बेस्ट बिफोर अवधि लगभग 10 दिन पहले समाप्त हो चुकी थी। इसके बावजूद उससे विद्यार्थियों के लिए सैंडविच तैयार किए जा रहे थे। कैंटीन में सड़ी हुई प्याज भी रखी मिली। खाद्य सामग्री की ऐसी स्थिति विद्यार्थियों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है क्योंकि कॉलेज कैंटीन में रोजाना बड़ी संख्या में छात्र भोजन और नाश्ता करते हैं।

    अधिकारियों ने कैंटीन में इस्तेमाल होने वाले पेयजल की व्यवस्था की भी जांच की। इसके लिए आरओ और वॉटर फिल्ट्रेशन सिस्टम तथा पानी की गुणवत्ता से संबंधित व्यवस्थाओं को देखा गया। निरीक्षण के दौरान कॉलेज परिसर में संचालित एक अन्य कैंटीन में भी स्वच्छता और खाद्य सामग्री के भंडारण से जुड़ी कमियां सामने आईं। यहां भोजन तैयार करने वाले कर्मचारियों की वेशभूषा भी निर्धारित स्वच्छता मानकों के अनुरूप नहीं मिली।

    खाद्य सुरक्षा विभाग ने दोनों कैंटीन संचालकों को कमियों को गंभीरता से लेते हुए सुधार सूचना पत्र जारी किया है। अधिकारियों ने खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता से संबंधित व्यवस्थाओं को नियमानुसार सुधारने के निर्देश दिए हैं। साथ ही खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच के लिए दोनों कैंटीन से भोजन तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के नमूने भी लिए गए हैं।

    जांच के दौरान मटर का आटा और रिफाइंड सोयाबीन तेल के नमूने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत लिए गए हैं। इन नमूनों को खाद्य विश्लेषण प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जाएगा। प्रयोगशाला से रिपोर्ट आने के बाद उसमें सामने आने वाले निष्कर्षों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इस पूरी कार्रवाई के बाद अब कैंटीन संचालकों पर निगरानी बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही विद्यार्थियों की सेहत से जुड़े खाद्य मानकों को लेकर कॉलेज परिसर में व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की जरूरत भी सामने आई है।

  • खाना पूरी तरह ठंडा होने का इंतजार न करें 2 घंटे वाला ये नियम जरूर जानें

    खाना पूरी तरह ठंडा होने का इंतजार न करें 2 घंटे वाला ये नियम जरूर जानें


    नई दिल्ली। घर में खाना बच जाना आम बात है। कई बार रात के खाने का कुछ हिस्सा सुबह के लिए रख दिया जाता है। ऐसे में ज्यादातर लोग बचे हुए भोजन को ढककर किचन में रख देते हैं और अगले दिन गर्म करके खाने की सोचते हैं। कुछ लोगों को लगता है कि खाना अगर ढका हुआ है तो वह पूरी रात सुरक्षित रहेगा। लेकिन खाद्य सुरक्षा के लिहाज से ऐसा करना हमेशा सही नहीं माना जाता। खासकर पका हुआ खाना कमरे के तापमान पर लंबे समय तक रहने पर खराब हो सकता है और इसे खाने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है।

    खाद्य सुरक्षा से जुड़े सामान्य नियम के मुताबिक जल्दी खराब होने वाले भोजन को कमरे के तापमान पर दो घंटे से ज्यादा नहीं छोड़ना चाहिए। अगर वातावरण का तापमान 32 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा है तो यह समय और कम होकर करीब एक घंटे का रह जाता है। इसलिए गर्म मौसम में रात का खाना सुबह तक बाहर छोड़ना विशेष रूप से जोखिम भरा हो सकता है।

    इसका मुख्य कारण बैक्टीरिया की तेजी से बढ़ने की क्षमता है। करीब 4 डिग्री सेल्सियस से 60 डिग्री सेल्सियस के बीच का तापमान बैक्टीरिया के विकास के लिए अनुकूल माना जाता है। इस तापमान सीमा को अक्सर डेंजर जोन कहा जाता है। पका हुआ भोजन इस दायरे में जितनी देर रहता है उसमें हानिकारक सूक्ष्मजीवों के बढ़ने की संभावना उतनी ही बढ़ सकती है। मांस चिकन अंडे डेयरी उत्पाद और अन्य जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थों के मामले में खास सावधानी बरतना जरूरी है।

    यहां एक और आम गलती सामने आती है। कई लोग गर्म खाना फ्रिज में रखने से बचते हैं और उसे पूरी तरह ठंडा होने तक किचन में ही छोड़ देते हैं। लेकिन खाना ठंडा करने के लिए घंटों इंतजार करना भी सुरक्षित तरीका नहीं है। खासकर जब खाना बड़ी मात्रा में किसी गहरे बर्तन में रखा हो तो उसका अंदरूनी हिस्सा लंबे समय तक गर्म रह सकता है और बैक्टीरिया के लिए अनुकूल वातावरण बन सकता है।

    अगर खाना ज्यादा मात्रा में बचा है तो उसे छोटे और उथले बर्तनों में बांटना बेहतर तरीका हो सकता है। इससे भोजन जल्दी ठंडा होता है और उसे समय पर फ्रिज में रखा जा सकता है। भोजन को सुरक्षित रखने में समय के साथ तापमान का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है। इसलिए सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं है कि खाना देखने या सूंघने में ठीक लग रहा है।

    गर्मियों में विशेष सावधानी जरूरी है क्योंकि अधिक तापमान में भोजन जल्दी खराब हो सकता है। अगर कमरे का तापमान 32 डिग्री सेल्सियस से ऊपर है तो जल्दी खराब होने वाले भोजन को एक घंटे से ज्यादा बाहर रखना उचित नहीं माना जाता। ऐसे में रात का बचा खाना अगर लंबे समय तक बाहर पड़ा रहा है तो उसे अगले दिन खाने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए।

    इसलिए घर में भोजन बचने पर सबसे जरूरी बात है कि उसे समय रहते सुरक्षित तापमान पर रखा जाए। खाने को लंबे समय तक बाहर छोड़ने के बजाय उचित तरीके से ठंडा करके फ्रिज में रखना बेहतर है। खासकर गर्म मौसम में दो घंटे वाला नियम याद रखना भोजन को सुरक्षित रखने की दिशा में एक आसान और जरूरी आदत हो सकती है।

  • लो भई! ‘ब्रश से रंगे जा रहे समोसे’ वाले वीडियो ने मचाई हलचल, लेकिन सच निकला कुछ और

    लो भई! ‘ब्रश से रंगे जा रहे समोसे’ वाले वीडियो ने मचाई हलचल, लेकिन सच निकला कुछ और

     
    नई दिल्ली। भारत में समोसा सिर्फ एक स्नैक नहीं, बल्कि लोगों की पसंद और स्वाद का हिस्सा है। ऐसे में जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एक व्यक्ति समोसे जैसी दिखने वाली वस्तुओं पर ब्रश से रंग लगाता नजर आया, तो लोगों के बीच हड़कंप मच गया। वीडियो शेयर करने वालों ने दावा किया कि बाजार में बेचने से पहले समोसों को रंगा जा रहा है। वीडियो देखते ही कई लोगों ने खाद्य पदार्थों में मिलावट और गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई। कुछ यूजर्स ने इसे फूड सेफ्टी का गंभीर मामला बताया, जबकि कई लोगों ने मजाकिया अंदाज में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अब समोसे पर भी भरोसा करना मुश्किल हो गया है।

    वीडियो में आखिर दिखा क्या?
    वायरल क्लिप में एक व्यक्ति जमीन पर बैठा दिखाई देता है। उसके आसपास बड़ी संख्या में त्रिकोण आकार की वस्तुएं रखी होती हैं, जो पहली नजर में समोसे जैसी लगती हैं। कुछ का रंग हल्का होता है, जबकि कुछ बिल्कुल तले हुए सुनहरे समोसे जैसे दिखाई देते हैं। व्यक्ति हाथ में ब्रश लेकर उन पर रंग लगाता नजर आता है। पास में अलग-अलग रंगों से भरे छोटे बर्तन भी दिखाई देते हैं। यही दृश्य देखकर लोगों ने मान लिया कि ये खाने वाले समोसे हैं और उन्हें आकर्षक बनाने के लिए रंगा जा रहा है।

    सोशल मीडिया पर शुरू हुई बहस
    वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। एक वर्ग ने इसे मिलावट का उदाहरण बताया, जबकि दूसरे वर्ग ने इस दावे पर सवाल उठाए। कई लोगों ने कहा कि बिना पूरी जानकारी के किसी वीडियो पर विश्वास करना सही नहीं है। कुछ यूजर्स ने ध्यान दिलाया कि जिस तरीके से रंग भरा जा रहा है, वह किसी कलाकार के काम जैसा लग रहा है, न कि खाद्य सामग्री तैयार करने जैसा।

    क्या थे ये असली समोसे?
    बाद में कई सोशल मीडिया यूजर्स ने स्पष्ट किया कि वीडियो में दिखाई दे रही वस्तुएं खाने के लिए नहीं थीं। उनका दावा था कि ये मिट्टी, क्ले, प्लास्टर या अन्य सामग्री से बने सजावटी मॉडल थे, जिन्हें वास्तविक समोसे जैसा रूप देने के लिए रंगा जा रहा था। कई लोगों ने बताया कि बाजार में सजावट, विज्ञापन, फोटोशूट और डिस्प्ले के लिए नकली खाद्य मॉडल बनाए जाते हैं। वीडियो में दिखाई गई वस्तुएं भी संभवतः उसी प्रकार की थीं।

    वायरल कंटेंट से सीख
    यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाला हर वीडियो पूरी सच्चाई नहीं बताता। कई बार अधूरी जानकारी या गलत दावों के साथ साझा किए गए वीडियो लोगों में भ्रम पैदा कर देते हैं।

    विशेषज्ञों का भी मानना है कि किसी वायरल वीडियो को देखकर तुरंत निष्कर्ष निकालने के बजाय उसके स्रोत और तथ्यों की जांच करना जरूरी है। डिजिटल युग में जागरूकता और तथ्य जांच (फैक्ट चेक) पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

  • जंग लगे चाकू और ब्लेड के इस्तेमाल पर एफएसएसएआई सख्त, खाद्य कारोबारियों को जारी किए नए निर्देश

    जंग लगे चाकू और ब्लेड के इस्तेमाल पर एफएसएसएआई सख्त, खाद्य कारोबारियों को जारी किए नए निर्देश


    नई दिल्ली । देशभर में खाद्य सुरक्षा मानकों को और अधिक मजबूत बनाने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने खाद्य कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि अब खाद्य पदार्थों की तैयारी, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और अन्य संबंधित कार्यों में केवल फूड-ग्रेड तथा जंग-रोधी चाकू, ब्लेड और अन्य कटिंग उपकरणों का ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए। जंग लगे, टूटे-फूटे या क्षतिग्रस्त उपकरणों के उपयोग को खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताते हुए इसे तत्काल बंद करने के निर्देश दिए गए हैं।

    एफएसएसएआई के अनुसार हाल के दिनों में ऐसी कई रिपोर्टें सामने आई थीं, जिनमें कुछ खाद्य कारोबारी जंग लगे, खराब, टूटे हुए, पेंट किए गए या अनुपयोगी हो चुके कटिंग टूल्स का उपयोग करते पाए गए। इन उपकरणों के इस्तेमाल से खाद्य पदार्थों में भौतिक, रासायनिक और सूक्ष्मजीव संबंधी दूषण (कंटैमिनेशन) का खतरा बढ़ जाता है, जो उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।

    प्राधिकरण ने कहा कि खाद्य व्यवसायों में उपयोग होने वाले सभी उपकरण, बर्तन और खाद्य संपर्क सतहें फूड-ग्रेड, विषमुक्त और जंग-रोधी सामग्री से निर्मित होना अनिवार्य है। यह व्यवस्था न केवल खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आवश्यक है, बल्कि उपभोक्ताओं को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।

    एफएसएसएआई ने अपने निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया है कि सभी चाकू, ब्लेड और अन्य कटिंग उपकरणों की नियमित जांच की जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि उनमें जंग, दरार, टूट-फूट, पेंट उखड़ना या किसी प्रकार की क्षति न हो। यदि किसी उपकरण में ऐसी कोई खराबी पाई जाती है, जिससे खाद्य पदार्थ दूषित होने की आशंका हो, तो उसे तुरंत उपयोग से हटाया जाए और उसकी जगह नया उपकरण लगाया जाए।

    खाद्य सुरक्षा मानकों के तहत उपकरणों की नियमित सफाई, सैनिटाइजेशन और आवश्यकता पड़ने पर स्टरलाइजेशन भी अनिवार्य बताया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य उद्योग में स्वच्छ उपकरणों का उपयोग खाद्य जनित बीमारियों की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए यह केवल नियमों का पालन नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा से जुड़ा विषय है।

    एफएसएसएआई ने यह भी कहा कि यह निर्देश ‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (लाइसेंसिंग एंड रजिस्ट्रेशन ऑफ फूड बिजनेस) रेगुलेशंस, 2011’ के तहत निर्धारित स्वच्छता और हाइजीन मानकों के अनुरूप हैं। इन नियमों का पालन सभी खाद्य कारोबारियों के लिए अनिवार्य है।

    प्राधिकरण ने कारोबारियों को चेतावनी दी है कि यदि किसी प्रतिष्ठान में जंग लगे या अनुपयुक्त उपकरणों का उपयोग पाया जाता है तो उसके खिलाफ ‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006’ के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसमें जुर्माना सहित अन्य कानूनी प्रावधान भी लागू किए जा सकते हैं।

    एफएसएसएआई का मानना है कि इन निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन से खाद्य सुरक्षा के स्तर में सुधार होगा और उपभोक्ताओं को अधिक सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पाद उपलब्ध हो सकेंगे।

  • भोपाल के रेस्टोरेंट में सेंडविच से निकली मरी हुई मक्खी, ग्राहक ने की शिकायत; फूड सेफ्टी विभाग करेगा जांच

    भोपाल के रेस्टोरेंट में सेंडविच से निकली मरी हुई मक्खी, ग्राहक ने की शिकायत; फूड सेफ्टी विभाग करेगा जांच


    भोपाल । राजधानी भोपाल में खाद्य सुरक्षा को लेकर एक चिंताजनक मामला सामने आया है। शहर के प्लेटिनम प्लाजा स्थित एक रेस्टोरेंट में परोसे गए चीज सेंडविच में मरी हुई मक्खी मिलने की शिकायत ने ग्राहकों के बीच चिंता बढ़ा दी है। मामले की शिकायत फूड सेफ्टी विभाग तक पहुंच चुकी है और विभाग द्वारा जांच की तैयारी की जा रही है।

    जानकारी के अनुसार अशोका गार्डन निवासी शोभा अहिरवार 15 जून को दोपहर करीब 12:30 बजे प्लेटिनम प्लाजा स्थित शर्मा चाइनिज फास्ट फूड रेस्टोरेंट पहुंची थीं। यहां उन्होंने चीज सेंडविच ऑर्डर किया। शोभा का आरोप है कि सेंडविच खाते समय उन्हें उसमें कोई कीड़ा दिखाई दिया। जब उन्होंने उसे ध्यान से देखा तो वह मरी हुई मक्खी निकली। इस घटना के बाद उन्होंने तत्काल रेस्टोरेंट के कर्मचारियों को इसकी जानकारी दी।

    ग्राहक का कहना है कि खाने जैसी संवेदनशील चीज में इस तरह की लापरवाही सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है। उनका आरोप है कि शिकायत के बावजूद रेस्टोरेंट प्रबंधन ने मामले को अपेक्षित गंभीरता से नहीं लिया। इसके बाद उन्होंने पूरे मामले की शिकायत फूड एंड सेफ्टी विभाग को ई-मेल के माध्यम से भेजी और कार्रवाई की मांग की।

    शोभा अहिरवार ने बताया कि उन्होंने सेंडविच के लिए 219 रुपए का भुगतान किया था। हालांकि उनका कहना है कि मुद्दा पैसों का नहीं बल्कि खाद्य गुणवत्ता और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य का है। उन्होंने सेंडविच में मिली मक्खी के फोटो और वीडियो भी रिकॉर्ड किए, जिन्हें शिकायत के साथ विभाग को उपलब्ध कराया गया है।

    दूसरी ओर, मामले पर रेस्टोरेंट की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। बिल पर दर्ज मोबाइल नंबर पर संपर्क करने पर कैशियर सौरभ भीमरे ने बताया कि सोमवार को ग्राहक की शिकायत प्राप्त हुई थी। उन्होंने कहा कि रेस्टोरेंट में खाद्य सामग्री तैयार करने के दौरान साफ-सफाई और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाता है। उनके अनुसार मक्खी सेंडविच तक कैसे पहुंची, इसकी जानकारी फिलहाल नहीं है। हालांकि ग्राहक की शिकायत को गंभीरता से सुना गया और उनकी बात पर ध्यान दिया गया है।

    अब इस पूरे मामले में फूड सेफ्टी विभाग की भूमिका अहम हो गई है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच की जाएगी। जांच के दौरान रेस्टोरेंट की स्वच्छता व्यवस्था, खाद्य सामग्री के रखरखाव, किचन की स्थिति और खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन की पड़ताल की जा सकती है। यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई भी की जा सकती है।

    यह घटना एक बार फिर खाद्य प्रतिष्ठानों में स्वच्छता और गुणवत्ता नियंत्रण की आवश्यकता को उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि खाने-पीने की वस्तुओं में इस प्रकार की गड़बड़ी उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। ऐसे मामलों में त्वरित जांच और प्रभावी कार्रवाई से ही लोगों का भरोसा कायम रखा जा सकता है। फिलहाल सभी की नजरें फूड सेफ्टी विभाग की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेगी।

  • नोएडा में पिज्जा शॉप पर बड़ा बवाल: थूककर खाना बनाने का आरोप, मालिक गिरफ्तार; वायरल वीडियो से मचा हड़कंप

    नोएडा में पिज्जा शॉप पर बड़ा बवाल: थूककर खाना बनाने का आरोप, मालिक गिरफ्तार; वायरल वीडियो से मचा हड़कंप



    नई दिल्ली। नोएडा के सेक्टर-22 स्थित चौड़ा गांव में एक पिज्जा शॉप को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में दुकान पर काम करने वाले शख्स मुजम्मिल पर पिज्जा तैयार करने के दौरान कथित तौर पर अनुचित व्यवहार करने का आरोप लगा है। वीडियो सामने आने के बाद इलाके में गुस्सा भड़क गया और लोगों ने मौके पर पहुंचकर हंगामा किया।

    जानकारी के मुताबिक, वायरल वीडियो में मुजम्मिल नाम का व्यक्ति पिज्जा तैयार करते समय संदिग्ध हरकत करता दिखाई दे रहा है। हालांकि आरोपी का दावा है कि वह आटे से धूल हटाने के लिए फूंक मार रहा था, लेकिन वीडियो के आधार पर स्थानीय लोगों और कुछ संगठनों ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कार्रवाई की मांग की।

    मामला बढ़ने पर पुलिस ने तत्काल संज्ञान लेते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया और उससे पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि वीडियो की फॉरेंसिक जांच और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    घटना के बाद स्थानीय लोगों में रोष है और वे खाद्य सुरक्षा व स्वच्छता नियमों के सख्त पालन की मांग कर रहे हैं। वहीं प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और अगर कोई दोषी पाया गया तो कड़ी कार्रवाई होगी।

  • राजगढ़ में मिलावट और स्वास्थ्य संकट पर सांसद की चेतावनी, 27 बच्चों में गंभीर बीमारी का दावा

    राजगढ़ में मिलावट और स्वास्थ्य संकट पर सांसद की चेतावनी, 27 बच्चों में गंभीर बीमारी का दावा

    राजगढ़ में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान सामने आए बयान ने पूरे क्षेत्र में स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को लेकर गंभीर चर्चा छेड़ दी है। इस कार्यक्रम में सांसद रोडमल नागर ने अपने संबोधन के दौरान मिलावटी खाद्य पदार्थों, नकली दूध और खेती में बढ़ते रासायनिक उपयोग को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। उनके अनुसार, यह स्थिति केवल एक सामाजिक समस्या नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ गंभीर संकट बनती जा रही है।

    सांसद ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में गांव और शहर दोनों ही क्षेत्रों में मिलावट का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने विशेष रूप से दूध और दैनिक उपयोग की सब्जियों में हो रही कथित मिलावट का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रवृत्ति लोगों के स्वास्थ्य पर सीधा असर डाल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ स्थानों पर फसलों को जल्दी तैयार करने और उत्पादन बढ़ाने के लिए अनावश्यक रसायनों का उपयोग किया जा रहा है, जो लंबे समय में मिट्टी और मानव शरीर दोनों के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।

    अपने संबोधन के दौरान उन्होंने एक गंभीर दावा करते हुए बताया कि उनकी कॉलोनी में पिछले चार वर्षों में 27 बच्चों को ब्लड कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का सामना करना पड़ा है। इस बयान ने वहां मौजूद लोगों को चिंतित कर दिया और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया। हालांकि इस दावे को लेकर किसी भी प्रकार की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है, लेकिन इसने स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सुरक्षा और पर्यावरणीय कारणों पर बहस को जरूर तेज कर दिया है।

    सांसद ने आगे कहा कि मिलावट का यह बढ़ता कारोबार केवल आर्थिक लालच का परिणाम है, जो समाज के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि कहीं भी नकली दूध या मिलावटी खाद्य पदार्थ बनाए जाने की जानकारी मिले तो उसे तुरंत प्रशासन तक पहुंचाया जाए ताकि इस पर रोक लगाई जा सके। उन्होंने कहा कि इस समस्या को केवल सरकार के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता, बल्कि समाज को भी जिम्मेदारी निभानी होगी।

    उन्होंने सब्जियों और दालों में होने वाली कथित मिलावट पर भी चिंता जताई। उनके अनुसार, आज के समय में कुछ उत्पादों को तेजी से बढ़ाने के लिए असामान्य तरीकों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे आम जनता के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि बाजार में उपलब्ध कई खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर अब सवाल उठने लगे हैं, जो एक गंभीर स्थिति को दर्शाता है।

    कृषि क्षेत्र पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि किसान अधिक उत्पादन की होड़ में रासायनिक खाद और यूरिया का अत्यधिक उपयोग कर रहे हैं, जिससे भूमि की गुणवत्ता धीरे-धीरे खराब हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यही स्थिति जारी रही तो आने वाले वर्षों में खेती की जमीन की उत्पादकता और स्वास्थ्य दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता है।

    पूरे बयान के बाद क्षेत्र में मिलावट, स्वास्थ्य और कृषि पद्धतियों को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है। एक ओर जहां लोग इन मुद्दों पर चिंता जता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि इन दावों की वास्तविकता और वैज्ञानिक आधार पर आगे क्या स्थिति सामने आती है।

  • MP में मिलावट का डर: दूध, घी, मसाले समेत रोजमर्रा के खाद्य पदार्थ फेल, ग्वालियर नंबर वन

    MP में मिलावट का डर: दूध, घी, मसाले समेत रोजमर्रा के खाद्य पदार्थ फेल, ग्वालियर नंबर वन


    भोपाल । मध्य प्रदेश में खाद्य सुरक्षा का अलर्ट जारी हो गया है। राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन की जांच में खुलासा हुआ है कि पिछले तीन सालों में लगभग 2000 से ज्यादा फूड सैंपल फेल पाए गए हैं। इनमें दूध, मावा, पनीर, घी, मिठाई, मसाले और तेल जैसे रोजमर्रा के इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थ शामिल हैं।

    मिली जानकारी के अनुसार, मोबाइल वैन के जरिए एक लाख सैंपल लिए गए, जिनमें डेयरी उत्पाद सबसे ज्यादा मिलावटी पाए गए। मिठाइयों जैसे जलेबी, लड्डू, बर्फी, गजक और नमकीन में भी मिलावट पाई गई। मसालों में लाल मिर्च, धनिया पाउडर, हल्दी और सोयाबीन तेल के कई सैंपल फेल हुए हैं।

    मिलावट में ग्वालियर जिला सबसे ऊपर है। यहां दो हजार सैंपल में से लगभग 420 सैंपल फेल पाए गए। अन्य जिलों में स्थिति इस प्रकार है: गुना 110, उज्जैन 95, भिंड 90, बुरहानपुर और जबलपुर 75-75, शाजापुर 70, खरगोन 65, सीहोर 55, धार 40, राजगढ़ 35, नीमच 30, नरसिंहपुर 28 और अन्य जिले भी इस सूची में शामिल हैं।

    कहां कौन से सैंपल फेल हुए हैं, इसका विवरण भी सामने आया है। ग्वालियर में दूध, दही, पनीर, घी, मिक्स्ड मिल्क, गजक, मावा बर्फी, मालाई बर्फी, चावल और आटा फेल पाए गए। इंदौर में लस्सी, मिल्क केक, मावा कतली, पनीर, इडली और सांभर फेल हुए। शाजापुर में दूध, घी, पनीर, मावा, बेसन, लाल मिर्च पाउडर और कुकिंग ऑयल फेल पाए गए।

    दमोह में जलेबी, बेसन लड्डू, आलू मटर, चाउमीन, घी, पनीर और दही, भिंड में मालाई बर्फी, मावा पेड़ा, सौंफ और काली मिर्च, मुरैना में मावा, घी, पनीर, बेसन लड्डू, बूंदी लड्डू, धार में मावा, पनीर, धनिया पाउडर और पताशे, सागर में मोतीचूर लड्डू, रीवा में तुअर दाल और मिठाई, सिवनी में गुजिया, सेव और पनीर, नरसिंहपुर में दूध, खंडवा में गुड़ चिक्की, बैतूल में दही और काली मिर्च, सीहोर में खाने का तेल फेल पाया गया।

    खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने कहा है कि यह रिपोर्ट स्वास्थ्य के लिए गंभीर चेतावनी है। आम जनता को ऐसे उत्पादों से बचने और केवल प्रमाणित और सुरक्षित ब्रांड के खाद्य पदार्थ खरीदने की सलाह दी गई है।

  • काले प्लास्टिक के डिब्बों में रखा खाना कितना सुरक्षित? जानिए क्‍या कहते हैं एक्सपर्ट

    काले प्लास्टिक के डिब्बों में रखा खाना कितना सुरक्षित? जानिए क्‍या कहते हैं एक्सपर्ट


    नई दिल्ली। बीते 25 मार्च 2026 को राज्यसभा में जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के दौरान भारतीय जनता पार्टी के सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने ढाबों, होटलों और अन्य जगहों पर इस्तेमाल होने वाले काले प्लास्टिक कंटेनरों को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ये सामान्य प्लास्टिक नहीं होते, बल्कि इन्हें इलेक्ट्रॉनिक कचरे और अन्य बचे हुए प्लास्टिक से बनाया जाता है। उनका कहना था कि ऐसे डिब्बों में गर्म खाना रखने से माइक्रोप्लास्टिक कण भोजन में मिल सकते हैं। आइए जानते हैं इस पर विशेषज्ञों की राय।

    कैसे तैयार होता है यह प्लास्टिक

    रिपोर्ट्स के अनुसार, काले प्लास्टिक को बनाने में अक्सर ई-वेस्ट और इंडस्ट्रियल प्लास्टिक का इस्तेमाल किया जाता है। इसे आग से सुरक्षित बनाने के लिए डेकाबीडीई जैसे फ्लेम रिटार्डेंट केमिकल मिलाए जाते हैं। समस्या यह है कि ये केमिकल पूरी तरह प्लास्टिक में स्थिर नहीं रहते और गर्म होने पर खाने में घुल सकते हैं, खासकर जब भोजन गरम या तैलीय हो। इसके अलावा, इसमें BPA और फ्थेलेट्स जैसे रसायन भी पाए जाते हैं, जिन्हें हार्मोन प्रभावित करने वाले तत्व माना जाता है। बार-बार इस्तेमाल या गर्म करने पर ये रसायन शरीर में जमा हो सकते हैं और लंबे समय में नुकसान पहुंचा सकते हैं।

    क्या कहते हैं विशेषज्ञ

    2024 में हुई एक स्टडी में 200 से अधिक ब्लैक प्लास्टिक प्रोडक्ट्स का परीक्षण किया गया, जिसमें करीब 85 प्रतिशत में टॉक्सिक फ्लेम रिटार्डेंट पाए गए। एक रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्‍टरों का कहना है कि लंबे समय तक इन रसायनों के संपर्क में रहने से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। वहीं BPA और फ्थेलेट्स हार्मोनल असंतुलन के साथ-साथ दिल की बीमारी, डायबिटीज और प्रजनन संबंधी समस्याओं का भी जोखिम है। इसके अलावा ब्लैक प्लास्टिक से निकलने वाले माइक्रोप्लास्टिक शरीर में पहुंचकर टॉक्सिक लोड बढ़ा सकते हैं, जिससे भविष्य में कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

    किन लोगों को अधिक खतरा

    विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों पर इसका प्रभाव ज्यादा गंभीर हो सकता है। हालांकि अभी तक इसका कैंसर से सीधा संबंध पूरी तरह साबित नहीं हुआ है, लेकिन इसके केमिकल्स को देखते हुए सावधानी बरतना जरूरी है। एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि काले प्लास्टिक की जगह कांच, स्टील या लकड़ी के बर्तनों का इस्तेमाल करें। खासतौर पर गर्म भोजन रखने के लिए प्लास्टिक से बचना सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।