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  • जरूरत की खबर: क्या आपकी सेहत के लिए सही है फ्रोजन मटर? जानें इसे खरीदने के 6 गोल्डन रूल्स और सही इस्तेमाल का तरीका

    जरूरत की खबर: क्या आपकी सेहत के लिए सही है फ्रोजन मटर? जानें इसे खरीदने के 6 गोल्डन रूल्स और सही इस्तेमाल का तरीका


    नई दिल्ली। सर्दियों के खत्म होते ही ताजी मटर बाजार से गायब होने लगती है, ऐसे में फ्रोजन मटर ही एकमात्र विकल्प बचती है। ‘रेडी-टू-यूज’ होने के कारण यह न केवल समय बचाती है, बल्कि छीलने के झंझट से भी मुक्ति दिलाती है। लेकिन क्या यह उतनी ही पौष्टिक है जितनी ताजी मटर? एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि सही तरीके से चुनी और इस्तेमाल की जाए, तो फ्रोजन मटर ताजी मटर का एक बेहतरीन और सुरक्षित विकल्प साबित हो सकती है।

    फ्रोजन मटर: ताजी मटर से कितनी अलग?
    अक्सर लोग इसे ‘प्रोसेस्ड फूड’ मानकर घबराते हैं, लेकिन डॉ. अनु अग्रवाल बताती हैं कि फ्रोजन मटर को ‘ब्लांचिंग’ प्रक्रिया से गुजारा जाता है। इसमें मटर को पहले उबलते पानी में डाला जाता है और फिर तुरंत ठंडा कर फ्रीज किया जाता है। यह प्रक्रिया मटर के प्राकृतिक रंग, स्वाद और पोषक तत्वों को ‘लॉक’ कर देती है। कई मामलों में, फ्रोजन मटर उन ताजी मटर से बेहतर हो सकती है जो कई दिनों तक ट्रांसपोर्टेशन या धूप में रखी रहती हैं।

    खरीदते समय बरतें ये 6 सावधानियां
    बाजार से फ्रोजन मटर का पैकेट उठाते समय इन बातों का खास ख्याल रखें:पैकेट को हिलाकर देखें: मटर के दाने अलग-अलग महसूस होने चाहिए। यदि वे एक बड़े बर्फ के गोले की तरह जमे हुए हैं, तो इसका मतलब है कि पैकेट को पहले पिघलाया गया और फिर दोबारा फ्रीज किया गया है । ऐसे पैकेट न खरीदें। बर्फ की परत: अगर पैकेट के अंदर बहुत अधिक बर्फ जमी है, तो यह नमी और खराब स्टोरेज की निशानी है।

    एक्सपायरी डेट: हमेशा मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट चेक करें। फ्रोजन मटर आमतौर पर 6-12 महीने तक अच्छी रहती है। पैकेट की बनावट: पैकेट कहीं से फटा या ढीला नहीं होना चाहिए। सीलबंद पैकेट ही लें। रंग: दानों का रंग गहरा हरा होना चाहिए। यदि रंग हल्का पीला या सफेद पड़ रहा हो, तो मटर पुरानी हो सकती है। पिक-अप टाइम: ग्रोसरी शॉपिंग के दौरान फ्रोजन मटर सबसे अंत में उठाएं ताकि वह घर पहुँचने तक ज्यादा न पिघले।

    इस्तेमाल करने का सही तरीका

    डायरेक्ट कुकिंग न करें: फ्रोजन मटर को फ्रीजर से निकालकर सीधे गरम तेल या तड़के में न डालें।गुनगुना पानी: इस्तेमाल से 5-10 मिनट पहले मटर को सामान्य या गुनगुने पानी में भिगोकर रखें। इससे इसकी बर्फ पिघल जाएगी और यह अपनी प्राकृतिक कोमलता में आ जाएगी। ओवरकुकिंग से बचें: चूंकि फ्रोजन मटर पहले से ही ‘ब्लांच’ होती है, इसलिए इसे ताजी मटर की तुलना में बहुत कम पकाने की जरूरत होती है। ज्यादा पकाने से इसके विटामिन सी और बी-कॉम्प्लेक्स नष्ट हो सकते हैं।

  • सेहत से खिलवाड़ का खुलासा कोल्ड स्टोरेज से 46 बोरी नकली जीरा जब्त…

    सेहत से खिलवाड़ का खुलासा कोल्ड स्टोरेज से 46 बोरी नकली जीरा जब्त…


    ग्वालियर में खाद्य सुरक्षा और आम जनता की सेहत से जुड़ा एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शहर के बहोड़ापुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ट्रांसपोर्ट नगर स्थित एक कोल्ड स्टोरेज से पुलिस ने 46 बोरियां नकली जीरा जब्त किया है। जांच में सामने आया है कि सौंफ के बीजों पर सीमेंट और खतरनाक रासायनिक पदार्थों की परत चढ़ाकर उन्हें जीरे का रूप दिया जा रहा था और फिर ब्रांडेड पैकिंग में भरकर बाजारों में सप्लाई किया जा रहा था।

    इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब गुजरात के मेहसाना जिले के ऊंझा निवासी और शिव पुजारी ब्रांड के कारोबारी विमल कुमार पटेल को अपने ब्रांड नाम से घटिया जीरा बिकने की शिकायतें मिलने लगीं। बाजार से लगातार मिल रही सूचनाओं के बाद उन्होंने निजी स्तर पर जांच करवाई। जांच की कड़ियां ग्वालियर से जुड़ती चली गईं जिसके बाद वे स्वयं ग्वालियर पहुंचे और बहोड़ापुर थाने में शिकायत दर्ज कराई।पुलिस जांच में सामने आया है कि ग्वालियर निवासी हितेश सिंघल उर्फ चपक इस नकली जीरे के कारोबार का मुख्य संचालक था। इस नेटवर्क में झांसी का व्यापारी टीटू अग्रवाल भी शामिल बताया जा रहा है। नकली जीरे की बड़ी खेप मां शीतला कोल्ड स्टोरेज में स्टोर की गई थी जहां से इसे अलग अलग शहरों और मंडियों में भेजने की तैयारी थी।

    शिकायत मिलते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कोल्ड स्टोरेज पर छापा मारा। जब बोरियों को खोलकर जांच की गई तो सभी 46 बोरियों में नकली जीरा पाया गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार सौंफ के दानों पर सीमेंट और केमिकल का ऐसा लेप चढ़ाया गया था कि वह देखने में बिल्कुल असली जीरे जैसा लगे। यह तरीका न केवल उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी है बल्कि सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा भी है।

    पुलिस ने इस मामले में कोल्ड स्टोरेज के मैनेजर सहित तीन आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोपियों पर धोखाधड़ी मिलावट और कॉपीराइट उल्लंघन से संबंधित धाराएं लगाई गई हैं। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि नकली जीरे की कितनी खेप पहले ही बाजार में पहुंच चुकी है और किन किन इलाकों में इसकी सप्लाई की गई।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की मिलावट से लंबे समय में लोगों को गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। नकली मसालों में उपयोग किए गए रसायन और सीमेंट शरीर के लिए बेहद घातक हैं। इसलिए पूरे सप्लाई नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है और अन्य संलिप्त लोगों को भी चिन्हित किया जाएगा।

    शिकायतकर्ता विमल कुमार पटेल ने यह भी आरोप लगाया है कि जब उन्होंने कोल्ड स्टोरेज मैनेजर से सवाल किए तो उन्हें धमकाया गया। इसके बाद उन्होंने पुलिस की शरण ली। पुलिस का कहना है कि पूछताछ जारी है और आवश्यकता पड़ने पर खाद्य सुरक्षा विभाग को भी जांच में शामिल किया जाएगा।