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  • खजुराहो में आकार ले रहा ‘विरासत वन’, 17 एकड़ में प्रकृति-संस्कृति का अनूठा संगम; बंगाल के कलाकार गढ़ रहे जीवंत मूर्तियां

    खजुराहो में आकार ले रहा ‘विरासत वन’, 17 एकड़ में प्रकृति-संस्कृति का अनूठा संगम; बंगाल के कलाकार गढ़ रहे जीवंत मूर्तियां


    खजुराहो /पर्यटन नगरी खजुराहो अब केवल अपने विश्वप्रसिद्ध मंदिरों के लिए ही नहीं बल्कि प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण की एक अनूठी पहल के लिए भी पहचानी जाने वाली है। खजुराहो के खर्रोही क्षेत्र में 17 एकड़ भूमि पर विरासत वन विकसित किया जा रहा है जो हरियाली जैव विविधता और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण बनेगा। यह वन खास तौर पर बच्चों और युवाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है ताकि वे घूमते-घूमते जंगल पर्यावरण और प्रकृति के महत्व को खुद समझ सकें।

    विरासत वन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे पारंपरिक उद्यान की तरह नहीं बल्कि एक लिविंग क्लासरूम के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां लगाए गए पेड़-पौधे वन्यजीवों की आकृतियां और थीम आधारित वन क्षेत्र बच्चों को किताबों से बाहर निकलकर सीखने का अवसर देंगे। वन विभाग की इस पहल के तहत एक समय के बंजर भू-भाग को हरित स्वरूप में बदल दिया गया है जो अब पर्यावरण संरक्षण का मिसाल बन रहा है।विरासत वन में आधुनिक तकनीक का भी खास इस्तेमाल किया गया है। यहां पेड़ों और प्रमुख स्थलों पर क्यूआर कोड लगाए गए हैं। जैसे ही कोई बच्चा या पर्यटक क्यूआर कोड स्कैन करेगा उससे जुड़ी जानकारी सीधे मोबाइल स्क्रीन पर आ जाएगी। इसमें उस पेड़ या पौधे का नाम उसकी प्रजाति औषधीय गुण पर्यावरण में भूमिका और उससे जुड़े रोचक तथ्य डिजिटल रूप में उपलब्ध होंगे। इससे बच्चों में तकनीक के माध्यम से सीखने की रुचि भी बढ़ेगी।

    इस वन को और आकर्षक बनाने के लिए जंगल के जानवरों की जीवंत मूर्तियां भी स्थापित की जा रही हैं। खास बात यह है कि इन मूर्तियों को अंतिम रूप देने के लिए बंगाल से आए अनुभवी कलाकार काम कर रहे हैं। कलाकारों द्वारा बनाई जा रही ये मूर्तियां इतनी वास्तविक होंगी कि देखने वालों को जंगल में होने का अहसास कराएंगी। अधिकारियों के अनुसार इस मूर्तिकला का लगभग 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और जल्द ही यह वन पूरी तरह तैयार होकर लोगों के लिए खोल दिया जाएगा।विरासत वन में 200 से अधिक प्रजातियों के 25 हजार से ज्यादा पौधे लगाए गए हैं। यहां अलग-अलग विषयों पर आधारित वन विकसित किए गए हैं जिनमें नवग्रह वन नक्षत्र वन सप्तऋषि वन लक्ष्मी वन औषधीय वन और जैव विविधता वन शामिल हैं। हर वन का अपना अलग महत्व और उद्देश्य है जिससे भारतीय संस्कृति ज्योतिष आयुर्वेद और प्रकृति के गहरे संबंध को समझा जा सके।

    वन विभाग का मानना है कि विरासत वन न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद करेगा बल्कि पर्यटन को भी नया आयाम देगा। खजुराहो आने वाले पर्यटक अब मंदिरों के साथ-साथ प्रकृति और पर्यावरण से जुड़े इस विशेष केंद्र का भी अनुभव ले सकेंगे। यह पहल आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने में अहम भूमिका निभाएगी।

  • खैर-सागौन तस्करी पर वन विभाग का मास्टर स्ट्रोक: देशभर में तस्करी के नेटवर्क का खुलासा, लाखों की लकड़ी जब्त

    खैर-सागौन तस्करी पर वन विभाग का मास्टर स्ट्रोक: देशभर में तस्करी के नेटवर्क का खुलासा, लाखों की लकड़ी जब्त


    शहडोल । देशभर में खैर लकड़ी की बढ़ती मांग ने इसे तस्करी का नया हॉटस्पॉट बना दिया है, और इस स्थिति का लाभ उठाते हुए तस्कर दिन-ब-दिन अपनी गतिविधियों को बढ़ा रहे हैं। लेकिन शहडोल वन विभाग ने अब एक जबरदस्त कार्रवाई की है, जिससे तस्करी के इस गहरे नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है और वन संपदा की लूट में संलिप्त तत्वों को कड़ा संदेश दिया गया है। शहडोल जिले के विभिन्न क्षेत्रों में किए गए छापे में खैर और सागौन की लाखों रुपये मूल्य की लकड़ी जब्त की गई है।

    वन विभाग की यह कार्रवाई बुढ़ार वन परिक्षेत्र के ग्राम बुगरा में शुरू हुई, जहां एक घर से 104 नग सागौन लकड़ी 3.109 घनमीटर बरामद हुई। पूछताछ में यह जानकारी सामने आई कि यह लकड़ी रात के समय पिकअप वाहन से लाई गई थी। वन अपराध के तहत मामला दर्ज कर लिया गया। इसके बाद, ब्यौहारी वन परिक्षेत्र के कोलमी वार्ड में अशोक कुमार अवस्थी के घर से सागौन लकड़ी के छिलके, बोरे और लकड़ी के टुकड़े, साथ ही 13 चेन-सॉ मशीनें और एक बैटरी चालित चेन-सॉ मशीन बरामद की गई।

    इसके साथ ही, ग्राम पटदई में एक ढाबे से 130 नग सागौन लकड़ी 2.079 घनमीटर भी जब्त की गई। इन कार्रवाईयों के दौरान, लगभग 5 से 6 घन मीटर लकड़ी की तस्करी के प्रमाण मिले, जिससे तस्करों की गतिविधियों का जाल साफ तौर पर उजागर हुआ।खैर और सागौन लकड़ी की बढ़ती तस्करी की वजह से इनकी मांग बढ़ गई है, और यही कारण है कि अब इनकी जड़ें और छिलके भी तस्करी के शिकार हो रहे हैं। इस पर वन विभाग की डीएफओ श्रद्धा पेंद्रे ने बताया कि तस्करी की इस समस्या को लेकर विभाग ने एक सख्त रणनीति अपनाई है।
    जिसमें लगातार निगरानी रखी जा रही है और तस्करों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जंगल की संपदा की लूट किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी, और तस्करी के नेटवर्क के खिलाफ और भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वन विभाग की इस तरह की कार्रवाई से यह स्पष्ट हो गया है कि किसी भी कीमत पर अवैध तस्करी और जंगल की लूट को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। विभाग अब आने वाले दिनों में इस नेटवर्क को पूरी तरह से खत्म करने के लिए और भी प्रभावी कदम उठाएगा।

  • भिंड में चंबल नदी किनारे ऊंट सफारी की शुरुआत सस्ती कीमतों में ऐतिहासिक व प्राकृतिक स्थल होंगे दिखाए

    भिंड में चंबल नदी किनारे ऊंट सफारी की शुरुआत सस्ती कीमतों में ऐतिहासिक व प्राकृतिक स्थल होंगे दिखाए


    भिंड । भिंड जिले के अटेर में वन विभाग ने चंबल नदी के किनारे ऊंट सफारी की शुरुआत की है। इस सफारी के जरिए पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक स्थलों की सैर कर सकेंगे। सफारी का ट्रैक करीब 10 किमी लंबा है और इसमें अटेर किला चामुंडा देवी मंदिर और वन्य जीवों को दिखाया जा रहा है। इस सफारी के लिए पर्यटकों को 200 रुपये और 500 रुपये के टिकट मिल रहे हैं और यह सफारी सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक चलेगी।

    वन विभाग ने सफारी के संचालन के लिए एक विस्तृत योजना बनाई है। पर्यटक अटेर स्थित वन विभाग कार्यालय से आफलाइन टिकट प्राप्त कर सकते हैं। चंबल क्षेत्र प्राकृतिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है और यह इको-टूरिज्म गतिविधियां क्षेत्र की जैव विविधता और पर्यावरणीय संरक्षण में योगदान करेंगी। इस पहल के तहत वन विभाग स्थानीय लोगों के लिए रोजगार सृजन के अवसर भी पैदा कर रहा है जिससे क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।

    वन विभाग की रेंजर कृतिका शुक्ला ने बताया कि सफारी में स्थानीय व्यंजन पेश करने की योजना भी बनाई जा रही है। इसके जरिए स्थानीय समुदाय को आर्थिक लाभ मिलेगा। वर्तमान में 11 ऊंटों का उपयोग सफारी में किया जा रहा है और जैसे-जैसे सफारी की लोकप्रियता बढ़ेगी इस में और भी ऊंटों को शामिल किया जाएगा।

    सुरक्षा और पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए वन विभाग ने सफारी के मार्ग को विशेष रूप से तैयार किया है। सफारी में आने वाले पर्यटकों को चंबल क्षेत्र के इतिहास और वन्य जीवन के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा विभाग उत्तराखंड के ऋषिकेश की तर्ज पर यहां कैंपिंग की सुविधा भी शुरू करने की योजना बना रहा है। इससे पर्यटकों को एक अलग अनुभव मिलेगा जो स्थानीय पर्यटन को और आकर्षक बना देगा।

    यह सफारी क्षेत्र में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति और कारीगरी को भी प्रदर्शित करने का एक अवसर है। इसे वन्य जीवों की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है जो आने वाले समय में स्थानीय वन्य जीवन और पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने में मदद करेगा।

  • पत्थर और धनुष-बाण से बेकाबू भीड़ ने गुजरात में 47 अधिकारियों पर किया हमला, जानिए क्या है मामला?

    पत्थर और धनुष-बाण से बेकाबू भीड़ ने गुजरात में 47 अधिकारियों पर किया हमला, जानिए क्या है मामला?


    नई दिल्‍ली । कभी-कभी ऐसे मामले सामने आते हैं जो लोगों के होश उड़ा देते हैं. गुजरात (Gujarat)के बनासकांठा (Banaskantha)जिले के पडालिया गांव(Padalia village) से भी ऐसा ही मामला सामने आया है. यहां पर दोपहर करीब 500 लोगों की भीड़ ने पुलिस, फॉरेस्ट और रेवेन्यू डिपार्टमेंट(Revenue Department) के कम से कम 47 अधिकारियों पर हमला कर दिया. इसमें करीब 36 अधिकारियों को अंबाजी सिविल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया. जानिए आखिर भीड़ कैसे उग्र हो गई?

    क्या है मामला
    मामले को लेकर बनासकांठा कलेक्टर मिहिर पटेल ने बताया कि यह घटना तब हुई जब पुलिस, फॉरेस्ट और रेवेन्यू अधिकारियों की एक जॉइंट टीम फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के सर्वे नंबर 9 एरिया में नर्सरी और प्लांटेशन का काम कर रही थी. उन्होंने बताया कि अचानक करीब 500 लोगों की भीड़ ने उन पर हमला कर दिया, पत्थर फेंके और तीर-कमान का इस्तेमाल किया. इस हमले की वजह से कई अधिकारी घायल हो गए हैं हालांकि उनकी हालत स्थिर है.

    घायल हुए 36 अधिकारियों को अंबाजी सिविल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जबकि 11 को आगे के इलाज के लिए पालनपुर सिविल हॉस्पिटल रेफर किया गया, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि हमला किस वजह से हुआ. यह जगह दांता तालुका में है, जो अंबाजी तीर्थस्थल से 14 km दूर है. इस वारदात के बाद लोगों में अफरा-तफरी का माहौल है.