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  • इंदौर के उमरिया खुर्द में तेंदुआ पकड़ाया, आबादी से दूर जंगल में छोड़ा जाएगा; ग्रामीणों को अब भी घायल तेंदुए का डर

    इंदौर के उमरिया खुर्द में तेंदुआ पकड़ाया, आबादी से दूर जंगल में छोड़ा जाएगा; ग्रामीणों को अब भी घायल तेंदुए का डर


    इंदौर । इंदौर में क्रिसेंट वॉटर पार्क के पास तेंदुए की मौजूदगी से दहशत के बीच वन विभाग को शनिवार को बड़ी सफलता मिली है। उमरिया खुर्द गांव के पास विभाग की ओर से लगाए गए पिंजरे में एक नर तेंदुआ कैद हो गया। वन विभाग के अधिकारिइंदौर के उमरिया खुर्द में तेंदुआ पकड़ाया, आबादी से दूर जंगल में छोड़ा जाएगा; ग्रामीणों को अब भी घायल तेंदुए का डरयों ने जांच के बाद उसे पूरी तरह स्वस्थ बताया है। अब उसे आबादी से दूर जंगल में छोड़ने की तैयारी की जा रही है। तेंदुए के पकड़े जाने से आसपास के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है लेकिन इलाके में चिंता अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। इसकी वजह दो दिन पहले दिखाई दिया वह तेंदुआ है जिसके सिर और चेहरे पर चोट के निशान नजर आए थे। ग्रामीणों को आशंका है कि पिंजरे में पकड़ा गया तेंदुआ घायल तेंदुए से अलग हो सकता है। ऐसे में वन विभाग के सामने अब घायल तेंदुए का पता लगाने की चुनौती बनी हुई है।

    जानकारी के मुताबिक क्रिसेंट वॉटर पार्क के पास स्थित उमरिया खुर्द गांव में गुरुवार को तेंदुआ दिखाई देने के बाद इलाके में सतर्कता बढ़ा दी गई थी। तेंदुए की गतिविधियों को देखते हुए वन विभाग की टीम ने उसकी तलाश शुरू की और उसे सुरक्षित पकड़ने के लिए पिंजरे लगाए। शनिवार को भोजन की तलाश में एक तेंदुआ पिंजरे के पास पहुंचा और उसमें फंस गया। इसके बाद वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। जांच में पकड़ा गया तेंदुआ नर पाया गया और अधिकारियों के मुताबिक उसकी सेहत सामान्य है। विभाग अब उसे सुरक्षित तरीके से आबादी से दूर जंगल में छोड़ने की तैयारी कर रहा है।

    तेंदुए के पकड़े जाने से स्थानीय लोगों को कुछ राहत जरूर मिली है लेकिन ग्रामीणों की चिंता का कारण गुरुवार को सामने आया मामला है। उस दिन एक ग्रामीण के घर के पास तेंदुआ दिखाई दिया था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक उसके सिर और चेहरे पर चोट के निशान थे और खून भी नजर आ रहा था। इस घटना के बाद से आसपास के लोगों में डर का माहौल बना हुआ था। ग्रामीणों को आशंका है कि घायल तेंदुआ अब भी क्षेत्र में कहीं मौजूद हो सकता है। हालांकि वन विभाग ने अभी इस बात की पुष्टि नहीं की है कि पहले दिखाई दिया घायल तेंदुआ और पिंजरे में पकड़ा गया तेंदुआ एक ही है या दोनों अलग-अलग हैं।

    इस अनिश्चितता के चलते वन विभाग की टीमें आसपास के इलाकों में निगरानी बनाए हुए हैं। अधिकारियों की प्राथमिकता पकड़े गए तेंदुए को सुरक्षित जंगल में पहुंचाने के साथ ही घायल तेंदुए की संभावित मौजूदगी का पता लगाना है। जब तक घायल तेंदुए की स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती तब तक ग्रामीणों की चिंता पूरी तरह दूर होना मुश्किल है।

    डीएफओ लाल सुधाकर सिंह के मुताबिक पिंजरे में पकड़ा गया तेंदुआ पूरी तरह स्वस्थ है और उसे दूरस्थ जंगल में छोड़ा जाएगा। वन विभाग का प्रयास है कि वन्यजीव को सुरक्षित प्राकृतिक आवास में पहुंचाया जाए और आबादी वाले क्षेत्रों में किसी तरह की अनहोनी की आशंका को कम किया जा सके। इस घटना ने एक बार फिर इंदौर के आसपास के इलाकों में वन्यजीवों की आवाजाही और ग्रामीणों की सुरक्षा का मुद्दा सामने ला दिया है। फिलहाल लोगों को सतर्क रहने और तेंदुआ दिखाई देने पर उसके करीब जाने या उसे घेरने के बजाय वन विभाग को सूचना देने की जरूरत है।

  • इंदौर में आबादी के करीब पहुंचा घायल तेंदुआ, सिर-मुंह पर चोट देखकर ग्रामीणों में चिंता, रालामंडल की पहाड़ियों से आने की आशंका

    इंदौर में आबादी के करीब पहुंचा घायल तेंदुआ, सिर-मुंह पर चोट देखकर ग्रामीणों में चिंता, रालामंडल की पहाड़ियों से आने की आशंका


    इंदौर इंदौर के पास खुड़ैल थाना क्षेत्र में क्रिसेंट वॉटर पार्क के नजदीक बुधवार सुबह घायल हालत में तेंदुआ दिखाई देने से आसपास के इलाके में चिंता का माहौल बन गया। तेंदुआ एक रहवासी मकान के पास बैठा नजर आया। ग्रामीणों के मुताबिक उसके सिर और मुंह पर चोट के निशान थे और वह सुस्त हालत में दिखाई दे रहा था। सूचना मिलने के बाद पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और इलाके में तेंदुए की तलाश शुरू कर दी। हालांकि वन विभाग के अधिकारियों की ओर से अब तक तेंदुए की मौजूदगी और उसके घायल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

    जानकारी के मुताबिक बुधवार सुबह क्रिसेंट वॉटर पार्क के पास हरिओम ठाकुर के मकान के नजदीक लोगों ने तेंदुए को बैठे देखा। ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुआ सामान्य रूप से सक्रिय नहीं दिख रहा था। उसके चेहरे और सिर पर चोट के निशान नजर आ रहे थे। इस स्थिति को देखते हुए आशंका जताई गई कि वह किसी दूसरे वन्यजीव के साथ संघर्ष के दौरान घायल हुआ होगा। हालांकि चोट लगने की वास्तविक वजह की पुष्टि नहीं हुई है। तेंदुए को आबादी के नजदीक देखने के बाद आसपास के लोगों में चिंता बढ़ गई और पुलिस तथा वन विभाग को इसकी सूचना दी गई।

    सूचना मिलते ही संबंधित टीमें मौके पर पहुंचीं और आसपास के क्षेत्र में उसकी तलाश शुरू की। तेंदुआ कुछ समय बाद वहां से भाग गया था। ऐसे में वन विभाग की टीम उसकी मौजूदगी का पता लगाने के लिए सर्चिंग कर रही है। ग्रामीणों को आशंका है कि घायल होने के कारण तेंदुआ किसी खेत या झाड़ियों में छिपा हो सकता है। यदि वह आसपास के रहवासी क्षेत्र में मौजूद है तो लोगों और मवेशियों के लिए खतरा पैदा हो सकता है। इसलिए उसकी लोकेशन का पता लगाना और स्थिति की पुष्टि करना जरूरी माना जा रहा है।

    हरिओम ठाकुर के मुताबिक यह पहली बार नहीं है जब उनके फार्म हाउस के आसपास तेंदुआ दिखाई दिया हो। उन्होंने बताया कि 8 अक्टूबर को भी एक तेंदुआ उनके फार्म हाउस में घुस आया था और वहां मवेशियों का शिकार किया था। उस समय ग्रामीणों ने उसे भगाया था। अब दोबारा मकान के पास तेंदुआ दिखाई देने से लोगों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में तेंदुए की आवाजाही को देखते हुए वन विभाग को सतर्कता बढ़ाने और लोगों को जरूरी जानकारी देने की आवश्यकता है।

    ठाकुर के अनुसार उनके मकान के पास रालामंडल की पहाड़ियां स्थित हैं। उनका मानना है कि पहाड़ियों से तेंदुआ आसपास के खेतों और आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि पहाड़ी क्षेत्र और आसपास के इलाके के बीच पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण वन्यजीवों की आवाजाही बनी रहती है। फिलहाल खेतों में पानी देने का समय है और किसान सुबह तथा देर शाम तक खेतों में काम करते हैं। ऐसे में ग्रामीणों को डर है कि यदि घायल तेंदुआ खेतों या रास्तों के आसपास मौजूद रहा तो किसी अप्रिय घटना की आशंका बढ़ सकती है।

    इस घटना के बाद अब वन विभाग की सर्चिंग पर नजर है। सबसे जरूरी है कि तेंदुए की वास्तविक स्थिति और उसके घायल होने की पुष्टि की जाए। तब तक स्थानीय लोगों को सतर्क रहने और तेंदुए के नजदीक जाने या उसे घेरने की कोशिश नहीं करने की जरूरत है। वन विभाग की टीम के सामने चुनौती तेंदुए का पता लगाने के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी है।

  • शिवपुरी में हरियाणा जा रहा लकड़ी से भरा ट्रक पकड़ा गया डामरौन में वन विभाग ने घेराबंदी कर की कार्रवाई

    शिवपुरी में हरियाणा जा रहा लकड़ी से भरा ट्रक पकड़ा गया डामरौन में वन विभाग ने घेराबंदी कर की कार्रवाई


    शिवपुरी। शिवपुरी जिले के करैरा क्षेत्र में वन विभाग ने लकड़ी के अवैध परिवहन की आशंका के मामले में कार्रवाई करते हुए एक ट्रक को जब्त किया है। यह ट्रक लकड़ी लेकर हरियाणा की ओर जा रहा था। वन विभाग की टीम ने मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर दिनारा पिछोर मार्ग पर डामरौन के पास घेराबंदी की और संदिग्ध ट्रक को रोक लिया। तलाशी के दौरान ट्रक में लकड़ी भरी हुई मिली जिसके बाद विभाग ने वाहन को अपने कब्जे में ले लिया। मामले में अब लकड़ी के स्रोत और उसके परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

    जानकारी के अनुसार वन विभाग के अधिकारियों को सूचना मिली थी कि करैरा क्षेत्र से लकड़ी से भरा एक ट्रक हरियाणा की तरफ रवाना होने वाला है। सूचना मिलने के बाद रेंजर लक्ष्मण मीणा और डिप्टी रेंजर कुलदीप गौर के नेतृत्व में टीम ने डामरौन के आसपास निगरानी शुरू की। टीम ट्रक के आने का इंतजार कर रही थी। जैसे ही बताए गए हुलिए और नंबर का ट्रक वहां पहुंचा वन विभाग के कर्मचारियों ने उसे रोक लिया।

    ट्रक की जांच की गई तो उसमें लकड़ी लदी हुई मिली। इसके बाद वाहन को जब्त कर लिया गया। वन विभाग की ओर से अब यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि ट्रक में लदी लकड़ी आखिर कहां से लाई गई थी। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि लकड़ी के परिवहन के लिए चालक के पास आवश्यक अनुमति और दस्तावेज मौजूद थे या नहीं।

    शुरुआती जानकारी में यह बात सामने आई है कि ट्रक बालाघाट से करैरा पहुंचा था। बताया जा रहा है कि वहां ट्रक में पहले प्लाईबोर्ड से जुड़ा सामान छोड़ा गया था। इसके बाद ट्रक करैरा क्षेत्र में पहुंचा जहां उसमें लकड़ी लोड की गई। लकड़ी भरने के बाद वाहन को हरियाणा की ओर ले जाया जा रहा था। इसी दौरान वन विभाग की टीम ने उसे डामरौन के पास रोक लिया।

    लकड़ी के इस्तेमाल को लेकर भी वन विभाग जांच कर रहा है। प्रारंभिक तौर पर माना जा रहा है कि जब्त की गई लकड़ी का इस्तेमाल प्लाईबोर्ड तैयार करने में किया जा सकता है। इसी वजह से विभाग यह भी पता लगाने में जुटा है कि लकड़ी करैरा क्षेत्र की किसी आरा मशीन से तो नहीं लाई गई थी। अधिकारियों की जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि यदि लकड़ी स्थानीय स्तर पर लोड की गई थी तो इसके लिए किस स्थान का इस्तेमाल किया गया और उसके परिवहन की वैध अनुमति थी या नहीं।

    करैरा क्षेत्र में इससे पहले भी वन विभाग की ओर से आरा मशीनों को लेकर कार्रवाई की जा चुकी है। ऐसे में जब्त ट्रक में मिली लकड़ी और क्षेत्र की आरा मशीनों के बीच किसी तरह का संबंध है या नहीं इसकी भी पड़ताल की जा रही है। वन विभाग दस्तावेजों और लकड़ी के स्रोत की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय करेगा। फिलहाल ट्रक विभाग के कब्जे में है और मामले की जांच जारी है।

  • गुजरात के जूनागढ़ में लोहे के गेट में फंसा शेर, उल्टा लटका, वन विभाग ने ऐसे किया रेस्क्यू

    गुजरात के जूनागढ़ में लोहे के गेट में फंसा शेर, उल्टा लटका, वन विभाग ने ऐसे किया रेस्क्यू


    जूनागढ़। गुजरात के जूनागढ़ शहर में एक एशियाई शेर लोहे के गेट को पार करने के प्रयास में फंस गया। पिछला पैर सलाखों के बीच अटकने से वह खुद को छुड़ा नहीं सका और कुछ समय तक गेट पर उल्टा लटका रहा। सूचना मिलने पर वन विभाग और सक्करबाग जू की रेस्क्यू टीम ने मौके पर पहुंचकर उसे सुरक्षित बाहर निकाला।

    वन विभाग के अनुसार, ग्रोफेड क्षेत्र में स्थित एक पुरानी मिल के परिसर के पास तड़के करीब 1 से 2 वर्ष का नर शेर घूम रहा था। गेट लांघने की कोशिश के दौरान उसका पिछला पैर लोहे की सलाखों के बीच फंस गया। बाहर निकलने के लिए उसने काफी प्रयास किए, लेकिन हर कोशिश के साथ उसकी स्थिति और कठिन होती गई।

    वन विभाग ने संभाला मोर्चा
    घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग और सक्करबाग जू की विशेषज्ञ रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। सबसे पहले आसपास का क्षेत्र खाली कराया गया, ताकि बचाव अभियान के दौरान किसी प्रकार का खतरा न रहे। इसके बाद निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए शेर को सावधानीपूर्वक सलाखों से मुक्त कराया गया।

    घायल शेर का कराया गया उपचार
    रेस्क्यू के बाद शेर को सक्करबाग जू ले जाया गया, जहां पशु चिकित्सकों ने उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया। वन विभाग के मुताबिक, शेर के पिछले पैर में चोट आई है, लेकिन उसकी स्थिति फिलहाल स्थिर है। उसे डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है और लगातार उपचार किया जा रहा है।

    वन अधिकारियों का कहना है कि यदि सूचना समय पर नहीं मिलती और रेस्क्यू में देरी होती, तो शेर की चोट गंभीर हो सकती थी। समय रहते बचाव अभियान शुरू होने से बड़ा हादसा टल गया।

    आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच जाते हैं शेर
    गिर और जूनागढ़ क्षेत्र एशियाई शेरों का प्राकृतिक आवास है। भोजन की तलाश या अपने क्षेत्र से भटकने के कारण कई बार शेर आबादी वाले इलाकों तक पहुंच जाते हैं। ऐसे में पुराने ढांचे, लोहे के गेट, तार और गड्ढे जैसे अवरोध वन्यजीवों के लिए खतरा बन जाते हैं। फिलहाल घायल शेर का इलाज जारी है और वन विभाग उसकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

  • सतना टाइगर शिकार केस में बड़ा मोड़, फरार मुख्य आरोपी की मौत; वन विभाग की जांच को बड़ा झटका

    सतना टाइगर शिकार केस में बड़ा मोड़, फरार मुख्य आरोपी की मौत; वन विभाग की जांच को बड़ा झटका


    सतना । मध्य प्रदेश के सतना जिले में सामने आए चर्चित बाघ शिकार मामले की जांच को बड़ा झटका लगा है। करंट लगाकर बाघ का शिकार करने और उसके नाखून तथा केनाइन निकालने के मामले में फरार चल रहे मुख्य आरोपी मुन्ना कोल की गिरफ्तारी से पहले ही मौत हो गई। वन विभाग को उम्मीद थी कि उसकी गिरफ्तारी के बाद बाघ के लापता 14 नाखूनों और अन्य वन्यजीव अंगों की बरामदगी हो सकेगी लेकिन उसकी मौत के साथ ही जांच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी टूट गई है। अब वन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती गायब नाखूनों का पता लगाना और यह जानना है कि आखिर उन्हें कहां और किसके पास पहुंचाया गया।

    जानकारी के अनुसार मझगवां वन परिक्षेत्र में करीब ढाई महीने पहले शिकारियों ने जंगल में बिजली का करंट बिछाकर बाघ का शिकार किया था। बाघ की मौत के बाद आरोपियों ने उसके शव से नाखून और केनाइन निकाल लिए तथा सबूत मिटाने के उद्देश्य से शव को गड्ढा खोदकर जंगल में दफना दिया। इस सनसनीखेज घटना की भनक वन विभाग को लगभग दो महीने बाद लगी। इसके बाद तीन जुलाई को मुखबिर की सूचना पर विभाग ने जेसीबी की मदद से शव बाहर निकलवाया। जांच में पुष्टि हुई कि बाघ की मौत करंट लगने से हुई थी।

    पूरे मामले की जांच के दौरान वन विभाग ने 11 आरोपियों की पहचान की थी। इनमें से 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया जबकि मुख्य आरोपी मुन्ना कोल लगातार फरार था। पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपियों ने बार-बार यही बताया कि बाघ के नाखूनों और उनके ठिकाने की पूरी जानकारी केवल मुन्ना कोल के पास थी। ऐसे में विभाग उसकी गिरफ्तारी को इस मामले की सबसे अहम कड़ी मान रहा था।

    जांच में यह भी सामने आया कि बाघ की मौत के बाद मुन्ना कोल ने उसके चारों पैर काटकर अलग-अलग स्थानों पर जमीन में दबा दिए थे। वहीं गिरोह के अन्य दो आरोपी सत्यम और शुभम ने बाघ के केनाइन निकाल लिए थे। बाद में जब अन्य साथियों ने नाखून मांगे तो मुन्ना ने दावा किया कि जमीन में दबे पैर किसी जंगली जानवर ने खोदकर निकाल लिए जिसके कारण केवल चार नाखून ही बरामद हो सके। इसी वजह से अब तक बाघ के 14 नाखूनों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

    वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार घटना उजागर होने के बाद से मुन्ना कोल गंभीर बीमारी से जूझ रहा था और गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अलग-अलग स्थानों पर इलाज कराता रहा। विभाग उसकी तलाश में जुटा था लेकिन 18 जुलाई को उसकी मौत हो गई। इससे अब जांच का सबसे महत्वपूर्ण सिरा समाप्त हो गया है और वन्यजीव तस्करी के संभावित नेटवर्क तक पहुंचना भी कठिन हो गया है।

    मझगवां रेंजर रंजन सिंह परिहार ने मुख्य आरोपी की मौत की पुष्टि करते हुए बताया कि अन्य आरोपियों ने भी पूछताछ में नाखूनों की जानकारी केवल मुन्ना कोल के पास होने की बात कही थी। वन विभाग अब उपलब्ध साक्ष्यों और गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ा रहा है। साथ ही यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि गायब नाखून कहीं वन्यजीव तस्करों के नेटवर्क तक तो नहीं पहुंचा दिए गए।

  • देवास में अतिक्रमण हटाने पहुंची फॉरेस्ट टीम पर हमला, पथराव में 6 कर्मचारी घायल; ड्रोन और वाहनों में भी तोड़फोड़

    देवास में अतिक्रमण हटाने पहुंची फॉरेस्ट टीम पर हमला, पथराव में 6 कर्मचारी घायल; ड्रोन और वाहनों में भी तोड़फोड़


    मध्‍य प्रदेश । मध्य प्रदेश के Dewas जिले में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने पहुंची वन विभाग की टीम पर कथित रूप से ग्रामीणों द्वारा हमला किए जाने का मामला सामने आया है। घटना जिनवाणी वन परिक्षेत्र के कमलापुर बीट क्षेत्र की बताई जा रही है, जहां वन विभाग की कार्रवाई के दौरान जमकर पथराव हुआ। इस घटना में छह वनकर्मी घायल हो गए, जबकि विभागीय वाहनों और ड्रोन को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी मिली है। घटना का एक ड्रोन वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वनकर्मी और पुलिसकर्मी खेतों की ओर भागते दिखाई दे रहे हैं।

    वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार शनिवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के लिए विभिन्न वन परिक्षेत्रों का स्टाफ और स्थानीय पुलिस बल मौके पर पहुंचा था। कार्रवाई का उद्देश्य कथित रूप से सरकारी वन भूमि पर किए गए अतिक्रमण को हटाना था। इसी दौरान क्षेत्र के कुछ ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जो बाद में पथराव में बदल गया।

    घटना में घायल होने वालों में वनरक्षक मोहन पंचोनिया, ज्योति जाट, कमल राणा, देवकरण मालवीय, सूरज तथा परिक्षेत्र सहायक K K Parmar शामिल हैं। घायलों को पहले कमलापुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और बाद में चापड़ा के अस्पताल में भर्ती कराया गया। अधिकारियों के अनुसार दो कर्मचारियों की स्थिति गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें आगे उपचार के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया है।

    घायल वनकर्मी ज्योति जाट ने बताया कि कार्रवाई के दौरान अचानक चारों ओर से पत्थरबाजी शुरू हो गई। उनके अनुसार कर्मचारियों को संभलने का अवसर तक नहीं मिला और लगातार पत्थर बरसाए जाते रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि कई कर्मचारियों के सिर में गंभीर चोटें आईं और उन्हें किसी तरह मौके से सुरक्षित बाहर निकलना पड़ा।

    वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पथराव करीब आधे घंटे तक चलता रहा। विभागीय टीम के अनुसार ग्रामीणों की संख्या काफी अधिक थी और उन्होंने कार्रवाई का विरोध करते हुए वाहनों तथा उपकरणों को भी निशाना बनाया। विभाग का दावा है कि ड्रोन को भी क्षति पहुंचाई गई है।

    Vikas Mahore ने बताया कि भीलआमला क्षेत्र में वन भूमि पर खेती किए जाने की शिकायतें थीं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही थी। अधिकारियों के अनुसार संबंधित भूमि वन विभाग के अधिकार क्षेत्र में आती है और उस पर अवैध कब्जे की जांच लंबे समय से चल रही थी।

    वन विभाग के मुताबिक कार्रवाई का नेतृत्व Ankit Jamod कर रहे थे। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि स्थिति बिगड़ने के बाद टीम को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करनी पड़ी। वहीं स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।

    अधिकारियों ने कहा है कि घटना में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और उपलब्ध वीडियो फुटेज तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर ग्रामीणों की ओर से भी मामले में अपना पक्ष रखे जाने की संभावना है। फिलहाल पुलिस और वन विभाग संयुक्त रूप से पूरे घटनाक्रम की जांच कर रहे हैं।

  • MP के वन विभाग ने रचा इतिहास… भोपाल से उड़ा गिद्ध 3000KM का सफर कर पहुंचा उज्बेकिस्तान

    MP के वन विभाग ने रचा इतिहास… भोपाल से उड़ा गिद्ध 3000KM का सफर कर पहुंचा उज्बेकिस्तान


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) का वन विभाग (Forest Department) अब सिर्फ बाघों (Tigers) के ही नहीं, बल्कि गिद्धों (Vultures) के संरक्षण में भी दुनिया के लिए मिसाल पेश कर रहा है. हाल ही में राज्य के गिद्ध संरक्षण प्रजनन केंद्र (VCBC) केरवा में इलाज पाकर ठीक हुए दो सिनेरियस गिद्धों (Two Cinereous Vultures) ने अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पार कर वैज्ञानिक जगत को हैरान कर दिया है.

    दरअसल, दिसंबर 2025 में विदिशा के सिरोंज से एक घायल सिनेरियस गिद्ध को बचाया गया था. भोपााल के वन विहार में और BNHS संचालित VCBC में इलाज के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे 23 फरवरी को हलाली बांध क्षेत्र में आजाद किया।

    WWF-India के सहयोग से इस पर GPS लगाया गया था. डेटा के अनुसार, 10 अप्रैल को इसने उड़ान भरी और राजस्थान, पाकिस्तान और अफगानिस्तान को पार करते हुए 4 मई को उज्बेकिस्तान पहुंच गया. विदिशा से उज्बेकिस्तान तक गिद्ध का 3000 किमी का सफर देख हर कोई हैरान है।


    पाकिस्तान में फंसी मादा गिद्ध का रेस्क्यू

    एक अन्य मामला शाजापुर के सुसनेर से रेस्क्यू की गई मादा सिनेरियस गिद्ध का है. 25 मार्च को रिहा होने के बाद यह गिद्ध पाकिस्तान पहुंच गई. 7 अप्रैल को वहां आए भीषण ओलावृष्टि तूफान के कारण यह उड़ने में असमर्थ हो गई और जमीन पर गिर पड़ी।


    इंटरनेशनल कॉर्डिनेशन

    सिग्नल गायब होने पर WWF-India ने तुरंत WWF-पाकिस्तान से संपर्क किया. पाकिस्तानी अधिकारियों ने इसे पंजाब प्रांत के खानेवाल जिले से सुरक्षित बरामद कर लिया. फिलहाल वह स्थानीय वल्चर सेंटर में स्वस्थ हो रही है।


    GPS से रीयल-टाइम निगरानी

    अधिकारियों का कहना है कि यह लंबी यात्राएं गिद्धों की अद्भुत दिशा-ज्ञान क्षमता और सहनशक्ति का प्रमाण हैं. माइक्रोचिप और GPS-GSM टेलीमेट्री डिवाइस की मदद से वन विभाग इनकी रीयल-टाइम निगरानी कर पा रहा है. इससे पहले साल 2025 में भी एक यूरेशियन ग्रिफॉन गिद्ध कजाकिस्तान तक 4300 किमी की यात्रा कर वापस भारत लौटा था.


    गिद्धों का महत्व

    सिनेरियस गिद्ध एशिया और यूरोप की सबसे बड़ी पक्षी प्रजातियों में से एक है. ये वन ईकोसिस्टम की सफाई में अहम भूमिका निभाते हैं।

  • सतना के देवलहा बीट में आग का तांडव वनकर्मी बेहोश सैकड़ों पेड़ पौधे जलकर नष्ट

    सतना के देवलहा बीट में आग का तांडव वनकर्मी बेहोश सैकड़ों पेड़ पौधे जलकर नष्ट

    सतना । सतना जिले के वन मंडल अंतर्गत मझगवां रेंज के रोहनिया गांव के पास स्थित देवलहा बीट में अचानक भड़की भीषण आग ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया आग कक्ष क्रमांक पी 839 और पी 840 के जंगल में अज्ञात कारणों से शुरू हुई और देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया तेज हवाओं और सूखी झाड़ियों के कारण आग ने इतनी तेजी पकड़ी कि लगभग पंद्रह से बीस हेक्टेयर वन क्षेत्र इसकी चपेट में आ गया

    आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लपटें दस से बारह फीट तक ऊंची उठ रही थीं और दूर से ही धुएं का गुबार आसमान में फैलता नजर आ रहा था आसपास के ग्रामीणों में भी दहशत का माहौल बन गया वहीं वन विभाग को जैसे ही सूचना मिली पूरा अमला तत्काल मौके पर पहुंचा और आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया

    प्रभारी रेंजर अभिषेक मिश्रा के अनुसार आग मुख्य रूप से लेंटाना और सूखी झाड़ियों में लगी थी लेकिन हवा की तेज रफ्तार और तुलसा की सूखी वनस्पतियों ने इसे और भड़काने का काम किया जिससे आग पर नियंत्रण पाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि आग तेजी से फैलते हुए बड़े हिस्से को अपनी चपेट में लेती चली गई

    आग बुझाने के लिए वन विभाग के करीब पच्चीस सुरक्षा श्रमिकों की टीम को मैदान में उतारा गया जिन्होंने फायर बीटर्स और लीफ ब्लोअर जैसे उपकरणों की मदद से लगातार सात घंटे तक संघर्ष किया यह एक कठिन और जोखिम भरा अभियान था जिसमें हर पल सतर्कता और साहस की जरूरत थी आखिरकार लंबी मशक्कत के बाद रात करीब आठ बजे आग पर काबू पाया जा सका

    इस दौरान आग की भीषण गर्मी और धुएं के कारण दो वनकर्मी रामकृष्ण पांडेय और गोविंद यादव बेहोश हो गए दोनों को तत्काल मझगवां के शासकीय चिकित्सालय ले जाया गया जहां उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया डॉक्टरों के अनुसार दोनों की हालत अब स्थिर है और लगभग तीन घंटे बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई

    इस घटना ने एक बार फिर जंगलों में बढ़ते आग के खतरे और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं गर्मी के मौसम में सूखी वनस्पतियां और तेज हवाएं ऐसी घटनाओं को और खतरनाक बना देती हैं वन विभाग के लिए यह एक चेतावनी भी है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए और अधिक सतर्कता और मजबूत इंतजाम किए जाएं

    देवलहा का यह अग्निकांड न केवल वन संपदा के नुकसान की कहानी कहता है बल्कि यह भी दर्शाता है कि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए कितनी बड़ी चुनौती सामने खड़ी है समय रहते ठोस कदम उठाना अब बेहद जरूरी हो गया है

  • MP के वन विभाग की बड़ी उपलब्धि… वन विहार से उड़ा गिद्ध को पाकिस्तान में मिली नई जिंदगी

    MP के वन विभाग की बड़ी उपलब्धि… वन विहार से उड़ा गिद्ध को पाकिस्तान में मिली नई जिंदगी


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के वन विभाग (Forest Department) ने वन्यजीव संरक्षण में टेक्नोलॉजी और इंटरनेशनल कॉर्डिनेशन (Technology and International Coordination in Conservation) का एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है. 2 साल की एक मादा सिनेरेयस गिद्ध जिसे भोपाल वन विहार में इलाज के बाद रिहा किया गया था, अब पाकिस्तानी सहयोग के चलते सुरक्षित है।

    इस गिद्ध को इसी साल 22 जनवरी को शाजापुर के सुसनेर से घायल अवस्था में रेस्क्यू किया गया था. वन विहार नेशनल पार्क के वल्चर कंजर्वेशन ब्रीडिंग सेंटर (VCBC) में इसका इलाज हुआ.

    इसे ‘फिट फॉर रिलीज’ घोषित करने के बाद माइक्रोचिप और GPS-GSM टेलीमेट्री डिवाइस से लैस किया गया. 25 मार्च को इसे रायसेन के हलाली डैम क्षेत्र में छोड़ा गया, जिससे इसकी रीयल-टाइम निगरानी संभव हो सकी. यह काम WWF-इंडिया और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी (BNHS) के सहयोग से किया गया।


    पाकिस्तान में रेस्क्यू

    रिहाई के बाद निगरानी में पाया गया कि यह मादा गिद्ध राजस्थान होते हुए इंटरनेशनल बॉर्डर पार कर 6 अप्रैल तक पाकिस्तान पहुंच गई. 7 अप्रैल को सिग्नल नहीं मिले तो WWF-इंडिया ने तत्परता दिखाते हुए WWF-पाकिस्तान से संपर्क किया. पाकिस्तान वन विभाग और WWF-पाकिस्तान के सहयोग से इस गिद्ध को खानेवाल जिले में स्थानीय निवासियों से सुरक्षित बरामद कर लिया गया।

    मादा गिद्ध 7 अप्रैल को खानेवाल और मुल्तान क्षेत्रों में आए भीषण ओलावृष्टि तूफान के कारण उड़ान भरने में असमर्थ हो गई और जमीन पर पाई गई। वन्यजीव अधिकारियों ने इसे रेस्क्यू कर प्राथमिक इलाज दिया. WWF-पाकिस्तान की देखरेख में इसे स्थानीय वल्चर कैप्टिव ब्रीडिंग सेंटर में शिफ्ट किया गया. गिद्ध को हल्की चोटें आई थीं और अब वह स्वस्थ हो रहा है।

    वन विहार, WWF-इंडिया के माध्यम से WWF-पाकिस्तान के साथ लगातार संपर्क में है और गिद्ध के स्वास्थ्य की निगरानी की जा रही है. पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद इसे दोबारा प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा।


    भोपाल की मादा गिद्ध को पाकिस्तान के खानेवाल जिले में मिली नई जिंदगी.

    इससे पहले, साल 2025 में एक यूरेशियन ग्रिफॉन गिद्ध कजाकिस्तान तक 4300 किमी की यात्रा कर वापस भारत लौटा था. 23 फरवरी 2026 को भी 5 गिद्धों का सफल पुनर्वास और टैगिंग की गई।

  • 230 अधिकारियों की कार्रवाई बेअसर! हटाए गए कब्जे के बाद फिर बस गई टपरियां, वन भूमि पर दोबारा अतिक्रमण

    230 अधिकारियों की कार्रवाई बेअसर! हटाए गए कब्जे के बाद फिर बस गई टपरियां, वन भूमि पर दोबारा अतिक्रमण


    नई दिल्ली। तीन साल से जारी अतिक्रमण के खिलाफ 27 फरवरी को प्रशासन ने 230 कर्मचारियों की मौजूदगी में कार्रवाई कर टपरियां हटाईं और जमीन पर गड्ढे खोदे थे। बावजूद इसके, कुछ ही दिनों में फिर से उसी जगह पर टपरियां बनाकर दोबारा कब्जा कर लिया गया।

    तीन साल से वन भूमि पर जारी अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन ने 27 फरवरी को बड़ी कार्रवाई करते हुए सख्त संदेश देने की कोशिश की थी, लेकिन हालात फिर वहीं के वहीं नजर आ रहे हैं। वन विभाग, राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम ने उस दिन मौके पर पहुंचकर कब्जा हटाया था। कार्रवाई में वन विभाग के एसडीओ अनिल विश्वकर्मा, तहसीलदार कीर्ति प्रधान, एसडीओपी महेंद्र चौहान और थाना प्रभारी सुधाकर बारस्कर मौजूद रहे। करीब 230 वनकर्मी, पुलिस जवान और राजस्व अमले ने मिलकर अवैध कब्जे हटाए थे।

    कार्रवाई के दौरान अतिक्रमणकारियों द्वारा बनाई गई अस्थायी टपरियों को तोड़ा गया और जमीन को दोबारा खेती या कब्जे से बचाने के लिए बड़े-बड़े गड्ढे भी खोदे गए थे। प्रशासन का मकसद साफ था—वन भूमि को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कर भविष्य में दोबारा कब्जा न होने देना। उस समय अधिकारियों ने दावा किया था कि अब दोबारा यहां कब्जा नहीं होने दिया जाएगा और क्षेत्र की नियमित निगरानी की जाएगी।

    लेकिन कार्रवाई के कुछ ही दिनों बाद तस्वीर बदलती दिख रही है। उसी जमीन पर फिर से टपरियां खड़ी कर दी गई हैं। इससे साफ है कि अतिक्रमणकारियों के हौसले अब भी बुलंद हैं और प्रशासनिक सख्ती का असर लंबे समय तक नहीं टिक पाया। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर लगातार निगरानी और ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वन भूमि पर कब्जे का सिलसिला फिर से बढ़ सकता है।

    यह सवाल भी उठ रहा है कि जब इतनी बड़ी संयुक्त कार्रवाई की गई थी, तो उसके बाद क्षेत्र की निगरानी क्यों कमजोर पड़ गई। वन भूमि पर बार-बार कब्जा होना न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन दोबारा सख्ती दिखाता है या अतिक्रमण का यह खेल यूं ही चलता रहेगा।