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  • ब्रिटेन, फ्रांस समेत छह देश होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा में मदद को तैयार, कतर ने ईरान से की युद्ध रोकने की अपील

    ब्रिटेन, फ्रांस समेत छह देश होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा में मदद को तैयार, कतर ने ईरान से की युद्ध रोकने की अपील


    लंदन/मस्कट।
    पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड्स और जापान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के लिए मदद की पेशकश की है। इन देशों ने एक संयुक्त बयान में कहा कि वे क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही में शामिल होने को तैयार हैं।

    साथ ही बयान में इन देशों ने ईरान के हालिया हमलों की निंदा की और उसे तुरंत रोकने की अपील की। उन्होंने कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए तेल और गैस उत्पादन बढ़ाने वाले देशों के साथ मिलकर काम किया जाएगा। बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि जरूरत पड़ने पर अन्य कदम भी उठाए जाएंगे, ताकि तेल सप्लाई पर असर कम किया जा सके।

    होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते खतरे के कारण वैश्विक ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हो रही है और तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है।

    कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने भी युद्ध तुरंत खत्म करने की अपील की। उन्होंने ईरान से अनुरोध किया कि वह अपने हमले रोके और संघर्ष को और न बढ़ाए।

    अल थानी ने विशेष रूप से रास लफ्फान गैस प्लांट पर हुए हमले का जिक्र किया और कहा कि इससे स्पष्ट है कि ईरान अब ऊर्जा ठिकानों को निशाना बना रहा है, जो न केवल कतर बल्कि पूरी दुनिया के लिए अहम हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे हमलों का असर दुनियाभर के लाखों लोगों पर पड़ेगा, क्योंकि इससे ऊर्जा सप्लाई प्रभावित होगी।

    उल्लेखनीय है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा की कमजोरी से अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। संयुक्त बयान और कतर की चेतावनी इस बात का संकेत हैं कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर सुरक्षा और कूटनीतिक प्रयासों की जरूरत बढ़ गई है।

    इस पहल से उम्मीद जताई जा रही है कि बड़े देशों की मदद और कतर की चेतावनी मिलकर क्षेत्रीय तनाव को कम कर सकती है और वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने में योगदान दे सकती है।

  • होर्मुज खुलवाने पर अलग-थलग पड़े अमेरिकी राष्ट्रपति…. फ्रांस-ब्रिटेन के रूख पर जताया असंतोष

    होर्मुज खुलवाने पर अलग-थलग पड़े अमेरिकी राष्ट्रपति…. फ्रांस-ब्रिटेन के रूख पर जताया असंतोष


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (French President Emmanuel Macron) के होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने के लिए प्रस्तावित गठबंधन में शामिल न होने के रुख पर असंतोष जताया है। ट्रंप ने कहा कि वे इस मुद्दे पर मैक्रों से बात कर चुके हैं और उन्हें 0 से 10 के पैमाने पर 8 अंक देते हैं। उन्होंने कहा कि फ्रांस पूरी तरह सही नहीं है, लेकिन मुझे लगता है कि वे मदद करेंगे। ट्रंप ने ट्रंप कैनेडी सेंटर बोर्ड सदस्यों के साथ दोपहर के भोजन के दौरान अमेरिकी सेना को दुनिया की सबसे मजबूत सेना करार देते हुए कहा कि अमेरिका को किसी की जरूरत नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हम दुनिया का सबसे शक्तिशाली राष्ट्र हैं और हमारी सेना सबसे मजबूत है।

    इस दौरान ट्रंप ने ब्रिटेन पर भी नाराजगी जाहिर की और कहा कि वे ब्रिटेन से खुश नहीं हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि ब्रिटेन पूरे उत्साह से गठबंधन में शामिल होगा। ट्रंप ने कहा कि हम वर्षों से नाटो के जरिए इन देशों की रक्षा कर रहे हैं। पुतिन हमसे डरते हैं, यूरोप से नहीं। ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के संदर्भ में ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित स्थिति में रखा है। उन्होंने कहा कि ईरान ने हमेशा इस जलडमरूमध्य को आर्थिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है, लेकिन अब यह लंबे समय तक नहीं चलेगा।

    ट्रंप ने खार्ग द्वीप पर अमेरिकी हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि सैन्य ठिकानों को नष्ट किया गया है, लेकिन तेल ढांचे को बरकरार रखा गया है। उन्होंने ईरान के रक्षा आधार, मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को लगभग समाप्त करने का दावा किया। ट्रंप के अनुसार, 30 से अधिक बारूदी सुरंग बिछाने वाले जहाजों को नष्ट कर दिया गया है और ईरान भर में 7000 से अधिक ठिकानों पर हमले किए गए हैं, जिससे बैलिस्टिक मिसाइल प्रक्षेपणों में 90 प्रतिशत और ड्रोन हमलों में 95 प्रतिशत की कमी आई है।

    उन्होंने कहा कि युद्ध शुरू होने से अभी तक 00 से अधिक ईरानी नौसैनिक पोत डुबोए या नष्ट किए गए हैं। ट्रंप ने ईरानी वायुसेना, नौसेना और नेतृत्व को लगभग पूरी तरह नष्ट होने का दावा किया। वहीं, वाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने पत्रकारों से कहा कि ट्रंप इस महीने के अंत में चीनी नेता शी जिनपिंग से मुलाकात के लिए उत्सुक हैं, लेकिन तारीखों में बदलाव संभव है। उनकी प्राथमिकता ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की सफलता है। लीविट ने ब्रिटेन से होर्मुज में मदद के लिए पहले और तेज कदम उठाने की अपेक्षा जताई और कहा कि ट्रंप यूरोपीय सहयोगियों से समर्थन मांगना जारी रखेंगे।

  • US-Iran संघर्ष के बीच PM मोदी ने की फ्रांस के राष्ट्रपति से चर्चा, जानें किन मुद्दों पर हुई बात

    US-Iran संघर्ष के बीच PM मोदी ने की फ्रांस के राष्ट्रपति से चर्चा, जानें किन मुद्दों पर हुई बात


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में तेजी से बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष (US-Iran conflict) के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने गुरुवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (French President Emmanuel Macron) से टेलीफोन पर बातचीत की। इस बातचीत में पश्चिम एशिया की बिगड़ती स्थिति पर भारत और फ्रांस की साझा चिंताओं पर विस्तार से चर्चा हुई, साथ ही संवाद और कूटनीति के माध्यम से शांति बहाल करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी ने संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक पश्चिम एशिया के कई नेताओं से बात की है। भारत क्षेत्र में शांति और स्थिरता की बहाली के लिए कूटनीतिक प्रयासों को मजबूती से समर्थन दे रहा है, ताकि यह संघर्ष और व्यापक न हो सके।

    प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि आज मैंने अपने मित्र राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से बात की। हमने पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति पर अपनी साझा चिंताओं और संवाद एवं कूटनीति की ओर लौटने की आवश्यकता पर चर्चा की। हम क्षेत्र में शांति और स्थिरता की शीघ्र बहाली के लिए घनिष्ठ रूप से जुड़े रहेंगे और प्रयासों का समन्वय करेंगे।

    दरअसल, यह फोन कॉल ऐसे समय में हुई है जब मध्य पूर्व का संघर्ष तेजी से फैल रहा है और अब यह भारत के निकटवर्ती क्षेत्रों तक पहुंच गया है। बुधवार को श्रीलंका के तट से कुछ दूर अंतरराष्ट्रीय जल में अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस डेना को टॉरपीडो से नष्ट कर दिया। इस हमले में कम से कम 80 से अधिक नाविकों की मौत हो गई, जबकि श्रीलंका की नौसेना ने 32 लोगों को बचाया। जहाज में कुल 180 लोग सवार थे। बता दें कि यह ईरानी फ्रिगेट कुछ दिन पहले ही भारत में हुए अंतरराष्ट्रीय नौसेना अभ्यास में हिस्सा लेने के बाद लौट रहा था।

    बता दें कि ईरान इजरायल और अमेरिका संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर संयुक्त सैन्य हमलों से हुई, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई। इसके बाद ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी और इजरायली ठिकानों पर जवाबी हमलों की शुरूआत की, जिससे स्थिति और भयावह हो गई। पिछले कुछ दिनों में दोनों पक्षों के बीच मिसाइल और ड्रोन हमलों का दौर जारी है। इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने श्रीलंका तट पर हुए हमले की कड़ी निंदा की और इसे ‘बिना किसी चेतावनी के अत्याचार’ करार दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका को इस मिसाल पर गहरा अफसोस होगा।

  • ईरान से तनाव कम करने जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ने बातचीत बहाल करने पर दिया जोर

    ईरान से तनाव कम करने जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ने बातचीत बहाल करने पर दिया जोर

    बर्लिन। जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ने मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को लेकर ईरान से हमले रोकने और कूटनीतिक बातचीत फिर से शुरू करने की अपील की है। तीनों देशों ने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि हालिया घटनाएं हालात को और गंभीर बना सकती हैं।
    संयुक्त बयान में हमलों की निंदा
    तीनों देशों के नेताओं—फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर—ने संयुक्त बयान जारी कर क्षेत्र के अन्य देशों पर ईरानी हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की। बयान में कहा गया कि हालात को बिगाड़ने वाले कदमों से बचना जरूरी है और संवाद ही समाधान का रास्ता है।
    परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम पर भी चिंता
    नेताओं ने ईरान से उसके परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने, बैलिस्टिक मिसाइल गतिविधियों पर रोक लगाने और अपने नागरिकों के खिलाफ कथित दमन व हिंसा बंद करने की अपील की।
    उनका कहना है कि क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए विश्वास बहाली के कदम आवश्यक हैं।
    सैन्य भागीदारी से किया इनकार
    तीनों देशों ने स्पष्ट किया कि वे हालिया हमलों में किसी भी तरह शामिल नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वे अमेरिका, इजरायल और क्षेत्र के अन्य साझेदारों के साथ लगातार संपर्क में हैं, ताकि स्थिति को नियंत्रण में रखा जा सके।

    क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर
    बयान में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्राथमिकता मध्य पूर्व में स्थिरता बनाए रखना और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। साथ ही इस बात पर बल दिया गया कि अंततः ईरान की जनता को अपना भविष्य स्वयं तय करने का अवसर मिलना चाहिए।