Tag: FSSAI

  • खाने की चीजों में गंदगी मिलने पर दो कंपनियों के लाइसेंस सस्पेंड, FSSAI ने लिया सख्त एक्शन

    खाने की चीजों में गंदगी मिलने पर दो कंपनियों के लाइसेंस सस्पेंड, FSSAI ने लिया सख्त एक्शन

    नई दिल्ली ।देश में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की दो खाद्य कंपनियों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं। जांच के दौरान खाद्य पदार्थों में जिंदा कीड़े, फंगस, चूहे की बीट और गंदगी जैसी गंभीर खामियां मिलने की बात सामने आई है। खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन को देखते हुए दोनों कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

    जिन कंपनियों पर कार्रवाई हुई है, उनमें उत्तर प्रदेश की वीकेसी नट्स प्राइवेट लिमिटेड और महाराष्ट्र की छेड़ा स्पेशियलिटीज फूड्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। संबंधित इकाइयों में खाद्य पदार्थों के उत्पादन और रखरखाव से जुड़े मानकों की जांच की गई थी। निरीक्षण के दौरान ऐसी परिस्थितियां सामने आईं, जिन्हें खाद्य सुरक्षा के लिहाज से गंभीर माना गया।

    जांच के दौरान पिस्ता समेत कुछ खाद्य सामग्री में जिंदा कीड़े पाए जाने की जानकारी सामने आई। इसके अलावा फंगस और चूहे की बीट मिलने की बात भी कही गई है। खाद्य पदार्थों के आसपास गंदगी की स्थिति भी निरीक्षण के दौरान सामने आई। ऐसे हालात में तैयार या संग्रहित खाद्य सामग्री की स्वच्छता और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

    खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण ने इन खामियों को उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए संभावित खतरा माना है। खाद्य पदार्थों में कीड़े, फंगस या चूहों से जुड़ी गंदगी की मौजूदगी खाद्य स्वच्छता के बुनियादी मानकों के विपरीत है। इसी वजह से संबंधित कंपनियों के खिलाफ लाइसेंस निलंबन जैसी कार्रवाई की गई।

    खाद्य कारोबार करने वाली कंपनियों के लिए उत्पादन परिसर की साफ-सफाई, कच्चे माल का सुरक्षित भंडारण, कीट नियंत्रण और तैयार उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखना जरूरी होता है। निरीक्षण के दौरान इन क्षेत्रों में गंभीर कमियां मिलने पर नियामकीय कार्रवाई की जा सकती है। मौजूदा मामले में भी खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुपालन में कमी को कार्रवाई का आधार बनाया गया है।

    उत्तर प्रदेश की वीकेसी नट्स प्राइवेट लिमिटेड के परिसर में सूखे मेवों और अन्य खाद्य सामग्री से संबंधित जांच के दौरान गंभीर कमियां सामने आईं। पिस्ता में कीड़े और अन्य संदूषण से जुड़ी स्थिति को लेकर खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन पर सवाल उठे। इसके बाद कंपनी के लाइसेंस को निलंबित करने का फैसला लिया गया।

    महाराष्ट्र की छेड़ा स्पेशियलिटीज फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई की गई। जांच के दौरान खाद्य सामग्री और परिसर में स्वच्छता से जुड़ी खामियों की जानकारी सामने आई। जिंदा कीड़े, फंगस और चूहे की बीट जैसी स्थितियां मिलने के बाद खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुपालन को लेकर गंभीर चिंता जताई गई।

    प्राधिकरण की इस कार्रवाई को खाद्य कारोबारियों के लिए नियमों के पालन का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है। खाद्य पदार्थों के उत्पादन से लेकर पैकेजिंग और भंडारण तक हर स्तर पर स्वच्छता और सुरक्षा मानकों को बनाए रखना जरूरी है। लापरवाही मिलने पर लाइसेंस निलंबन सहित अन्य नियामकीय कदम उठाए जा सकते हैं।

    खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों में नियमित निरीक्षण का उद्देश्य उपभोक्ताओं तक सुरक्षित और मानक के अनुरूप खाद्य सामग्री पहुंचाना है। दो कंपनियों के लाइसेंस निलंबित किए जाने की कार्रवाई इसी निगरानी प्रक्रिया का हिस्सा है। आने वाले समय में जांच के आधार पर संबंधित कंपनियों के खिलाफ आगे की नियामकीय कार्रवाई भी हो सकती है।

  • बेंगलुरु के 5-स्टार होटलों में फूड सेफ्टी जांच का बड़ा खुलासा, फंगस लगी सब्जियां और एक्सपायर्ड मीट मिलने से हड़कंप

    बेंगलुरु के 5-स्टार होटलों में फूड सेफ्टी जांच का बड़ा खुलासा, फंगस लगी सब्जियां और एक्सपायर्ड मीट मिलने से हड़कंप


    नई दिल्ली
    । बेंगलुरु के कई नामी थ्री-स्टार और फाइव-स्टार होटलों में खाद्य सुरक्षा को लेकर हुई जांच में गंभीर खामियां सामने आई हैं। अधिकारियों की जांच के दौरान कुछ होटलों में फंगस लगी सब्जियां, एक्सपायर्ड दूध और डेयरी उत्पाद, खराब हालत में रखा चिकन, मटन और मछली तथा नियमों के अनुरूप नहीं रखे गए खाद्य पदार्थ मिले। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से 7 अगस्त को चलाए गए इस विशेष निरीक्षण अभियान में शहर के सभी जोन को शामिल किया गया।

    इस अभियान के तहत 30 टीमों ने बेंगलुरु के कुल 26 थ्री-स्टार और फाइव-स्टार होटलों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने होटलों की रसोई, खाद्य भंडारण व्यवस्था, लेबलिंग और साफ-सफाई समेत कई मानकों की जांच की। इस दौरान कुछ जगहों पर खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग और लेबलिंग में भी नियमों का पालन नहीं किया गया था। अधिकारियों को कई ऐसे उत्पाद मिले जिनकी निर्धारित उपयोग अवधि समाप्त हो चुकी थी। कुछ किचन में साफ-सफाई की स्थिति भी संतोषजनक नहीं पाई गई।

    जांच के दौरान कुछ होटलों में वेज और नॉन-वेज खाद्य पदार्थों को अलग-अलग रखने के नियमों का भी पालन नहीं मिला। अधिकारियों ने बताया कि कुछ जगहों पर खाद्य पदार्थों की सही जानकारी उपलब्ध नहीं थी और जरूरी लेबलिंग नियमों का पालन नहीं किया गया था। इसके अलावा स्टोरेज में एक्सपायर्ड दूध, डेयरी और बेकरी उत्पाद पाए गए। सब्जियों में फफूंदी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों के अनुचित भंडारण से जुड़ी खामियां भी सामने आईं।

    कार्रवाई के दौरान द ललित अशोक के एनेक्स साउथ परिसर से 76 किलो मीट और 200 किलो सब्जियां जब्त की गईं। इसके अलावा 32 लीटर एक्सपायर्ड दूध भी जब्त कर नष्ट किया गया। शांग्री-ला बेंगलुरु से 15 किलो मीट और फोर सीजन्स होटल बेंगलुरु से 19 किलो मीट जब्त किया गया। विवांता बैंगलोर व्हाइटफील्ड में तीन किलो एक्सपायर्ड बेकरी उत्पाद पाए गए, जबकि ताज यशवंतपुर से 72 किलो मीट और मछली जब्त की गई।

    सबसे बड़ी कार्रवाई रेडिसन ब्लू के द एट्रिया परिसर में सामने आई, जहां कुल 105 किलो एक्सपायर्ड खाद्य उत्पाद जब्त किए गए। इनमें 50 किलो चिकन, 23 किलो मीट, 23 किलो मछली और सात किलो सब्जियां शामिल थीं। अधिकारियों ने नियमों के उल्लंघन वाले होटलों को नोटिस भी जारी किए हैं। अब आगे की कार्रवाई जांच और संबंधित कानूनी प्रावधानों के आधार पर की जाएगी।

    पूरे अभियान के दौरान खाद्य पदार्थों के 35 सैंपल भी लिए गए हैं। इनमें चाय पाउडर, चिकन, मटन, मछली, खाद्य तेल, लाल मिर्च पाउडर, हल्दी, टोमैटो सॉस, नींबू का रस, चीज, पापड़, काजू, अदरक, काली मिर्च, मसाले और दूध जैसे उत्पाद शामिल हैं। इन नमूनों को खाद्य प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया है। फिलहाल संबंधित होटलों से लिए गए सैंपल की लैब रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट आने के बाद खाद्य गुणवत्ता और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की स्थिति और स्पष्ट होगी तथा उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

  • FSSAI के शराब लेबलिंग नियमों पर कंपनियों की हाईकोर्ट में चुनौती, अचानक बिक्री रोकने से नुकसान की चिंता

    FSSAI के शराब लेबलिंग नियमों पर कंपनियों की हाईकोर्ट में चुनौती, अचानक बिक्री रोकने से नुकसान की चिंता

    नई दिल्ली । भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी FSSAI के शराब से जुड़े लेबलिंग और उत्पाद मानकों को लेकर विवाद अब बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंच गया है। कुछ बड़ी शराब कंपनियों ने नियामक के उन आदेशों को चुनौती दी है, जिनके तहत कुछ प्रकार के भारतीय निर्मित विदेशी मदिरा उत्पादों की बिक्री पर आपत्ति जताई गई है। मामले में अदालत में अगली सुनवाई सोमवार को होने वाली है, जिस पर कंपनियों और नियामक दोनों की नजर बनी हुई है।

    विवाद का केंद्र शराब की लेबलिंग, फ्लेवर और उत्पाद की उम्र से जुड़े दावे हैं। FSSAI का कहना है कि कुछ कंपनियां ऐसे उत्पादों को रम या व्हिस्की के रूप में बाजार में पेश कर रही हैं, जिनमें अतिरिक्त या कृत्रिम फ्लेवर का इस्तेमाल किया गया है। नियामक के अनुसार, यदि किसी स्पिरिट में अलग से फ्लेवर मिलाया गया है, तो उपभोक्ताओं को इसकी स्पष्ट जानकारी लेबल पर दी जानी चाहिए।

    नियामकीय आपत्ति के अनुसार ऐसे उत्पादों की पैकेजिंग पर रम या व्हिस्की के बजाय संबंधित उत्पाद की वास्तविक प्रकृति को स्पष्ट करने वाले शब्दों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को उत्पाद के बारे में सही और पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराना बताया गया है। इसी बिंदु को लेकर शराब कंपनियों और नियामक के बीच कानूनी विवाद गहराया है।

    विवाद का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू शराब की उम्र से संबंधित दावों का है। कुछ उत्पादों पर उन्हें कैस्क में पुरानी या परिपक्व स्पिरिट के तौर पर प्रस्तुत किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। नियामक का तर्क है कि किसी ब्लेंड में इस्तेमाल की गई सबसे कम उम्र वाली स्पिरिट को ध्यान में रखकर ही उम्र संबंधी दावा किया जाना चाहिए। इससे उन उत्पादों की लेबलिंग प्रभावित हो सकती है, जिनमें अलग-अलग उम्र की स्पिरिट का मिश्रण किया गया है।

    इस मामले में United Spirits और Mohan Meakin समेत कई कंपनियों ने अदालत का रुख किया है। कंपनियों की ओर से दलील दी गई है कि अचानक बिक्री रोकने या लेबल बदलने के निर्देश से कारोबार पर गंभीर आर्थिक असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि इन उत्पादों का निर्माण लंबे समय से निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत किया जा रहा है और अचानक बदलाव लागू करना व्यावहारिक रूप से कठिन होगा।

    कंपनियों का एक प्रमुख तर्क यह भी है कि शराब की बोतलों के लेबल में बदलाव केवल प्रिंटिंग तक सीमित प्रक्रिया नहीं है। इसके लिए कई मामलों में राज्य आबकारी विभागों से आवश्यक मंजूरी लेनी पड़ती है। इसलिए कंपनियों के मुताबिक यदि उन्हें तुरंत नए नियमों के अनुसार लेबल बदलने और मौजूदा स्टॉक की बिक्री रोकने के लिए कहा जाता है, तो इससे तैयार माल और वितरण व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है।

    सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी अचानक पूरे उद्योग की गतिविधियों पर असर पड़ने की संभावना को लेकर चिंता जताई। अदालत ने संकेत दिया कि किसी पूरे उद्योग को रातोंरात बंद करने से व्यावहारिक और आर्थिक समस्याएं पैदा हो सकती हैं। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि शराब के निर्माण, जांच और मार्केटिंग के तकनीकी मानक तय करना न्यायपालिका का काम नहीं है।

    अदालत ने केंद्र सरकार के वकील और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से FSSAI से इस मामले से जुड़ी पूरी जानकारी हासिल कर अगली सुनवाई में स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। अब सोमवार को होने वाली सुनवाई में यह महत्वपूर्ण होगा कि अदालत कंपनियों की बिक्री संबंधी मांग और नियामक के खाद्य सुरक्षा तथा लेबलिंग मानकों के बीच किस तरह संतुलन स्थापित करती है।

    इस विवाद का असर केवल संबंधित कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि शराब उद्योग में उत्पादों की लेबलिंग और नियामकीय अनुपालन को लेकर आगे की दिशा भी इससे तय हो सकती है। फिलहाल अंतिम स्थिति अदालत की आगामी सुनवाई और संबंधित पक्षों की दलीलों के बाद ही स्पष्ट होगी।

  • ओल्ड मॉन्क, रॉयल चैलेंज और मैकडॉवेल्स समेत कई शराब उत्पादों की बिक्री पर रोक, एफएसएसएआई की बड़ी कार्रवाई

    ओल्ड मॉन्क, रॉयल चैलेंज और मैकडॉवेल्स समेत कई शराब उत्पादों की बिक्री पर रोक, एफएसएसएआई की बड़ी कार्रवाई

    नई दिल्ली । खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों को लेकर देश में नियामकीय सख्ती के बीच भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने कई लोकप्रिय शराब उत्पादों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। प्राधिकरण ने नियमों के कथित उल्लंघन, भ्रामक दावों और बिना अनुमति वाले फ्लेवर के इस्तेमाल से जुड़े मामलों में कई प्रसिद्ध शराब उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। इस कार्रवाई के बाद शराब उद्योग में हलचल तेज हो गई है और संबंधित कंपनियों से जवाब भी मांगा जा रहा है।

    एफएसएसएआई के अनुसार जांच और प्रयोगशाला परीक्षण के दौरान यह पाया गया कि कुछ उत्पादों में ऐसे बाहरी फ्लेवर का उपयोग किया गया, जिनकी अनुमति निर्धारित मानकों के तहत नहीं थी। नियामक का कहना है कि रम और व्हिस्की जैसे उत्पादों में स्वाद और खुशबू का विकास उत्पादन की प्राकृतिक प्रक्रिया, जैसे फर्मेंटेशन, डिस्टिलेशन और मैच्योरेशन के माध्यम से होना चाहिए। यदि किसी उत्पाद में कृत्रिम या बाहरी फ्लेवर मिलाए जाते हैं, तो उसे उसी श्रेणी के अनुरूप स्पष्ट रूप से लेबल किया जाना आवश्यक है।

    जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ उत्पाद मुख्य रूप से एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल या न्यूट्रल स्पिरिट से तैयार किए गए थे और बाद में उनमें स्वाद तथा खुशबू के लिए अतिरिक्त फ्लेवर मिलाए गए। नियामक का मानना है कि ऐसे उत्पादों को सामान्य रम या व्हिस्की के रूप में प्रस्तुत करना उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकता है। इसलिए ऐसे उत्पादों की वास्तविक प्रकृति को स्पष्ट करने के लिए उचित लेबलिंग अनिवार्य है, ताकि उपभोक्ताओं को सही जानकारी मिल सके।

    कार्रवाई के दौरान जिन उत्पादों पर रोक लगाई गई है उनमें ओल्ड मॉन्क के कुछ वेरिएंट, मैकडॉवेल्स नंबर 1 रम, एंटीक्विटी ब्लू व्हिस्की, रॉयल चैलेंज व्हिस्की, बैगपाइपर डीलक्स व्हिस्की, ओल्ड कास्क डीलक्स XXX रम, सेंट्रल प्रोविंस व्हिस्की और मैकडॉवेल्स नंबर 1 सेलिब्रेशन मैच्योर XXX रम सहित अन्य उत्पाद शामिल हैं। नियामक का कहना है कि इन उत्पादों की बिक्री तब तक प्रतिबंधित रहेगी, जब तक संबंधित नियमों और मानकों का पूर्ण पालन सुनिश्चित नहीं किया जाता।

    एफएसएसएआई ने यह भी कहा कि कुछ उत्पादों पर किए गए आयु और गुणवत्ता संबंधी दावे उपलब्ध तथ्यों से मेल नहीं खाते थे। ऐसे दावों को उपभोक्ताओं के लिए भ्रामक माना गया है। नियामक ने स्पष्ट किया कि खाद्य और पेय पदार्थों की पैकेजिंग पर दी जाने वाली प्रत्येक जानकारी सत्य, प्रमाणित और निर्धारित मानकों के अनुरूप होनी चाहिए। यदि किसी उत्पाद में फ्लेवर आधारित विशेषताएं हैं तो उन्हें उसी रूप में प्रदर्शित किया जाना चाहिए, न कि मानक श्रेणी के उत्पाद के रूप में।

    इस कार्रवाई को खाद्य सुरक्षा मानकों के प्रभावी पालन और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे शराब उद्योग में गुणवत्ता नियंत्रण, पारदर्शी लेबलिंग और नियामकीय अनुपालन पर अधिक जोर दिया जाएगा। आने वाले समय में संबंधित कंपनियां नियामकीय निर्देशों का पालन करते हुए आवश्यक सुधार कर सकती हैं, जबकि उपभोक्ताओं को भी उत्पाद खरीदते समय लेबल और गुणवत्ता संबंधी जानकारी पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।

  • नैचुरल ऑर्गेनिक और हेल्दी के दावों की खुल रही पोल, FSSAI ने कंपनियों को भेजे नोटिस उपभोक्ताओं को किया सतर्क

    नैचुरल ऑर्गेनिक और हेल्दी के दावों की खुल रही पोल, FSSAI ने कंपनियों को भेजे नोटिस उपभोक्ताओं को किया सतर्क


    नई दिल्ली । आज के समय में पैकेज्ड फूड हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। सुपरमार्केट की शेल्फ से लेकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक हर जगह ऐसे उत्पाद दिखाई देते हैं जिन पर बड़े अक्षरों में नैचुरल हेल्दी ऑर्गेनिक प्योर फ्रेश हार्ट हेल्दी और जीरो मैदा जैसे आकर्षक दावे लिखे होते हैं। इन शब्दों को देखकर ज्यादातर लोग बिना ज्यादा जांच पड़ताल किए ही उत्पाद खरीद लेते हैं। लेकिन अब भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने ऐसे दावों को लेकर सख्त रुख अपनाया है और कई बड़ी कंपनियों से जवाब मांगा है कि क्या उनके पैकेट पर लिखे दावे वास्तव में सही हैं।

    FSSAI का कहना है कि किसी भी खाद्य उत्पाद पर किया गया दावा वैज्ञानिक तथ्यों और निर्धारित मानकों के अनुरूप होना चाहिए। केवल ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए हेल्दी या नैचुरल जैसे शब्द लिखना स्वीकार्य नहीं है। यदि कोई कंपनी ऐसा करती है तो उसे अपने दावों के समर्थन में पर्याप्त प्रमाण भी देने होंगे।

    हाल के दिनों में FSSAI ने ब्रेड नूडल्स चॉकलेट जूस कुकिंग ऑयल सप्लीमेंट्स पैकेज्ड पानी और कैफीन युक्त पेय पदार्थ बनाने वाली कई कंपनियों को नोटिस जारी किए हैं। इनमें खास तौर पर 100 प्रतिशत नैचुरल प्योर फ्रेश ऑर्गेनिक हेल्दी हार्ट हेल्दी डिटॉक्स एंटी कैंसर और जीरो मैदा जैसे दावों पर सवाल उठाए गए हैं। नियामक संस्था यह जानना चाहती है कि क्या इन उत्पादों की सामग्री और निर्माण प्रक्रिया वास्तव में इन दावों के अनुरूप है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश उपभोक्ता पैकेट के सामने लिखी बातों पर भरोसा कर लेते हैं लेकिन पीछे दिए गए पोषण संबंधी विवरण और सामग्री सूची को पढ़ने की जहमत नहीं उठाते। इसी का फायदा कई कंपनियां उठाती हैं। न्यूट्रिशन एक्सपर्ट इसे हेल्थ हेलो इफेक्ट कहते हैं जिसमें किसी एक आकर्षक शब्द के कारण पूरा उत्पाद स्वास्थ्यवर्धक दिखाई देने लगता है जबकि वास्तविकता अलग हो सकती है।

    डाइट विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी पैकेज्ड फूड को खरीदने से पहले उसकी सामग्री सूची अवश्य पढ़नी चाहिए। पैकेट पर सबसे पहले जिस सामग्री का नाम लिखा होता है उसकी मात्रा सबसे अधिक होती है। इसके अलावा शुगर नमक सैचुरेटेड फैट ट्रांस फैट प्रोटीन और कैलोरी की जानकारी भी ध्यान से देखनी चाहिए। यदि किसी उत्पाद के सामने बड़े बड़े दावे लिखे हों लेकिन पीछे उनका कोई वैज्ञानिक आधार या प्रमाण न दिया गया हो तो ऐसे उत्पाद से सावधान रहना चाहिए।

    अगर किसी उत्पाद पर ऑर्गेनिक लिखा है तो उसके पास मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र होना जरूरी है। इसी तरह हेल्दी या हार्ट हेल्दी जैसे दावे भी तभी किए जा सकते हैं जब उत्पाद निर्धारित पोषण मानकों पर खरा उतरता हो। इसलिए केवल विज्ञापन या पैकेजिंग देखकर निर्णय लेना समझदारी नहीं है।

    विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि उपभोक्ता खरीदारी करते समय केवल कीमत या ऑफर पर ध्यान न दें बल्कि लेबल को पढ़ने की आदत भी विकसित करें। इससे न केवल सही उत्पाद चुनने में मदद मिलेगी बल्कि भ्रामक दावों से भी बचा जा सकेगा। बच्चों बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह और भी जरूरी हो जाता है क्योंकि गलत जानकारी के आधार पर चुना गया खाद्य पदार्थ उनकी सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकता है।

    FSSAI की यह कार्रवाई केवल कंपनियों पर निगरानी रखने के लिए नहीं बल्कि उपभोक्ताओं को जागरूक बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। अब समय आ गया है कि खरीदारी करते समय चमकदार पैकेजिंग और बड़े बड़े दावों से प्रभावित होने के बजाय उत्पाद की वास्तविक गुणवत्ता और पोषण संबंधी जानकारी को प्राथमिकता दी जाए। जागरूक ग्राहक ही सही और सुरक्षित भोजन का चुनाव कर सकता है।

  • FSSAI की बड़ी कार्रवाई… डाबर के कई उत्पादों की बिक्री पर 100% प्योर वाले दावों के साथ रोक

    FSSAI की बड़ी कार्रवाई… डाबर के कई उत्पादों की बिक्री पर 100% प्योर वाले दावों के साथ रोक


    नई दिल्ली।
    भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (Food Safety and Standards Authority of India- FSSAI) ने डाबर इंडिया लिमिटेड (Dabur India Limited) के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है. FSSAI ने डाबर के कई प्रोडक्ट्स पर ‘100 प्रतिशत’ वाले भ्रामक दावों (Misleading claims) के साथ बिक्री करने पर रोक लगा दी है.

    FSSAI ने जांच में पाया कि वेबसाइट पर प्रोडक्ट्स के लिए ‘100% नेचुरल’, ‘100% प्योर’, ‘100% प्योरिटी गारंटेड’, ‘100% ऑर्गेनिक’ और ‘100% टेंडर कोकोनट वॉटर’ जैसे दावों का खुलकर इस्तेमाल किया जा रहा था।

    ऑथोरिटी ने बताया कि इस तरह के दावे फूड सिक्योरिटी लॉ का उल्लंघन करते हैं. ऐसे दावे ‘खाद्य सुरक्षा एवं मानक (विज्ञापन और दावे) विनियम, 2018’ के खिलाफ हैं. ये दावे अस्पष्ट और असत्यापित हैं, जो सीधे तौर पर ग्राहकों को गुमराह करते हैं।
    .

    किन प्रोडक्ट्स पर लगा ये बैन?

    FSSAI ने सोशल मीडिया पर बताया कि ‘100 प्रतिशत’ वाले भ्रामक दावों के साथ बिक्री करने वाले इस रोक के दायरे में डाबर का शहद, गाय का घी, सेब का सिरका, वर्जिन कोकोनट ऑयल, तिल का तेल, नारियल पानी और नारियल दूध जैसे प्रोडक्ट्स शामिल हैं. इसके अलावा, ‘डाबर हिमालयन ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर’ और ‘डाबर ऑर्गेनिक हनी’ पर बिना वैध अनुमति के ‘जैविक भारत’ लोगो लगाया गया था।

    वहीं ‘डाबर होममेड कोकोनट मिल्क’ पर ‘100% शुद्धता’ का दावा किया गया था, जो कंपाउंड फूड्स के लिए नियम के मुताबिक पूरी तरह बैन है.


    15 दिनों के भीतर मांगी रिपोर्ट

    FSSAI ने बताया कि उसने डाबर को पहले भी नोटिस जारी कर इन भ्रामक दावों को हटाने का निर्देश दिया था. लेकिन कंपनी की ओर से कोई ठोस सुधार नहीं किया गया. अब FSSAI ने डाबर इंडिया को इन सभी प्रोडक्ट्स की बिक्री तुरंत रोकने के आदेश दिए हैं. साथ ही, कंपनी को 15 दिनों के भीतर अपनी एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) सौंपने को कहा है।

    बता दें कि FSSAI फूड सिक्योरिटी को लेकर काफी सख्ती बरत रहा है. ऐसे में कई बड़ी कंपनियां उसके रडार पर हैं।

  • एफएसएसएआई का स्विट्ज फूड्स पर बड़ा एक्शन, फूड सेफ्टी नियमों के उल्लंघन पर लाइसेंस सस्पेंड

    एफएसएसएआई का स्विट्ज फूड्स पर बड़ा एक्शन, फूड सेफ्टी नियमों के उल्लंघन पर लाइसेंस सस्पेंड

    नई दिल्ली। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए स्विट्ज फूड्स प्राइवेट लिमिटेड का फूड बिजनेस लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। एफएसएसएआई ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जब तक कंपनी सभी कमियों को दूर कर खाद्य सुरक्षा एवं स्वच्छता मानकों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित नहीं करती तब तक वह किसी भी प्रकार की खाद्य उत्पादन या व्यावसायिक गतिविधि संचालित नहीं कर सकेगी। यह कार्रवाई उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    एफएसएसएआई के अनुसार कंपनी के विनिर्माण संयंत्र के निरीक्षण के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। जांच में पाया गया कि खाद्य पदार्थों का निर्माण पैकेजिंग और भंडारण बेहद अस्वच्छ परिस्थितियों में किया जा रहा था जिससे खाद्य सामग्री के दूषित होने का गंभीर खतरा बना हुआ था। फैक्ट्री परिसर में साफ सफाई और सैनिटेशन की स्थिति भी बेहद खराब मिली। विशेष रूप से क्रेट वॉशिंग एरिया नॉन वेज रिसीविंग एरिया और गाजर काटने वाली मशीन के आसपास अत्यधिक गंदगी पाई गई।

    निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली मशीनों ट्रॉलियों ट्रे मोल्ड एचडीपीई क्रेट और अन्य उपकरणों की नियमित सफाई और रखरखाव नहीं किया जा रहा था। उत्पाद भंडारण क्षेत्र के ऊपर से एयर कंडीशनिंग पाइपलाइन का पानी रिस रहा था जबकि क्रेट साफ करने वाली मशीन भी खराब स्थिति में मिली। इन कमियों को खाद्य सुरक्षा मानकों के लिए गंभीर खतरा माना गया।

    एफएसएसएआई ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि खाद्य प्रसंस्करण उपकरणों वेंटिलेशन सिस्टम और भोजन के संपर्क में आने वाले कई बर्तनों पर जंग और क्षरण पाया गया। एग्जॉस्ट फैन पर कीट रोकने वाली जालियां नहीं लगी थीं जिससे मक्खियों और अन्य कीड़ों के प्रवेश का खतरा बना हुआ था। निरीक्षण के दौरान परिसर में मक्खियां मच्छर फ्रूट फ्लाई मकड़ी के जाले और अन्य कीटों का भारी प्रकोप भी पाया गया।

    जांच में दीवारों पर सीलन उखड़ता पेंट टूटी हुई फर्श की टाइलें और कई स्थानों पर तेल तथा ग्रीस की मोटी परत भी देखी गई। अर्धनिर्मित और तैयार खाद्य उत्पादों को अलग अलग रखने के नियमों का पालन नहीं किया गया था। इसी तरह शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों को भी निर्धारित मानकों के अनुसार अलग नहीं रखा गया। कई कच्चे और अर्धनिर्मित उत्पादों पर निर्माण तिथि या उपयोग की अंतिम तिथि का उल्लेख भी नहीं था। तैयार खाद्य पदार्थ गंदी ट्रे में बिना किसी सुरक्षात्मक लाइनर के रखे गए थे जबकि कोल्ड स्टोरेज में खाद्य सामग्री के साथ कबाड़ भी रखा मिला।

    एफएसएसएआई ने यह भी पाया कि कटे हुए चिकन को सामान्य कमरे के तापमान पर डीफ्रॉस्ट किया जा रहा था जो खाद्य सुरक्षा मानकों का स्पष्ट उल्लंघन है। तापमान नियंत्रण की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं थी और निरीक्षण के दौरान एक तैयार चिकन सैंडविच बिना अनिवार्य लेबलिंग के पाया गया।

    इन सभी गंभीर कमियों को देखते हुए प्राधिकरण ने कंपनी का लाइसेंस निलंबित कर दिया और निर्देश दिया कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट 2006 के सभी प्रावधानों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित होने तक कोई भी खाद्य व्यावसायिक गतिविधि संचालित नहीं की जाएगी। एफएसएसएआई ने दोहराया है कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ आगे भी सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई जारी रहेगी।

  • 16 राज्यों में फूड पॉइजनिंग से हड़कंप क्या भारत की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर मंडरा रहा है बड़ा संकट जानिए पूरी सच्चाई

    16 राज्यों में फूड पॉइजनिंग से हड़कंप क्या भारत की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर मंडरा रहा है बड़ा संकट जानिए पूरी सच्चाई


    नई दिल्ली । देश में लगातार सामने आ रहे फूड पॉइजनिंग के मामलों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में 16 राज्यों में भोजन से जुड़ी बीमारियों के मामले दर्ज होने और 11 कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की खबर ने खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। यह घटना केवल किसी एक राज्य या एक कंपनी तक सीमित नहीं है बल्कि यह संकेत देती है कि खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और उनकी निगरानी को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है।

    फूड पॉइजनिंग तब होती है जब दूषित भोजन या पेय पदार्थ शरीर में पहुंचकर बैक्टीरिया वायरस परजीवी या हानिकारक रसायनों के माध्यम से संक्रमण फैला देते हैं। इसके कारण उल्टी दस्त पेट दर्द बुखार कमजोरी और कई बार गंभीर स्थिति तक पैदा हो सकती है। छोटे बच्चों बुजुर्गों गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों में इसका खतरा और अधिक बढ़ जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि खराब गुणवत्ता वाले कच्चे पदार्थों का उपयोग स्वच्छता की अनदेखी निर्माण प्रक्रिया में लापरवाही गलत तरीके से पैकेजिंग और खाद्य पदार्थों का अनुचित भंडारण फूड पॉइजनिंग की प्रमुख वजह बनते हैं। यदि किसी कंपनी द्वारा तय मानकों का पालन नहीं किया जाता तो बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं का स्वास्थ्य खतरे में पड़ सकता है।

    भारत में खाद्य सुरक्षा की जिम्मेदारी भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई पर है। यह संस्था खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता तय करती है और नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करती है। समय समय पर खाद्य नमूनों की जांच भी की जाती है लेकिन देश की विशाल आबादी और तेजी से बढ़ते खाद्य बाजार को देखते हुए निगरानी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

    उपभोक्ताओं की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होती है। पैक्ड फूड खरीदते समय निर्माण तिथि समाप्ति तिथि एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर और पैकेज की स्थिति जरूर जांचनी चाहिए। खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों को खरीदते समय स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। लंबे समय तक खुले में रखा भोजन खाने से बचना चाहिए और हमेशा साफ पानी का ही उपयोग करना चाहिए।

    यदि किसी व्यक्ति को भोजन करने के कुछ समय बाद लगातार उल्टी दस्त तेज बुखार या पेट में असहनीय दर्द जैसी परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज मिलने से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।

    16 राज्यों में सामने आए मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि खाद्य सुरक्षा केवल सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि कंपनियों विक्रेताओं और उपभोक्ताओं सभी को अपनी भूमिका ईमानदारी से निभानी होगी। सुरक्षित भोजन हर नागरिक का अधिकार है और इसके लिए गुणवत्ता नियंत्रण सख्त निगरानी तथा जनजागरूकता तीनों का मजबूत होना बेहद जरूरी है। यदि सभी स्तरों पर जिम्मेदारी के साथ काम किया जाए तो फूड पॉइजनिंग जैसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है और लोगों का स्वास्थ्य बेहतर तरीके से सुरक्षित रखा जा सकता है।

  • उपभोक्ता शिकायतों पर एफएसएसएआई की बड़ी कार्रवाई, स्विगी इंस्टामार्ट को 9 नोटिस जारी, एक्सपायर्ड और असुरक्षित खाद्य उत्पादों की सप्लाई पर मांगा जवाब

    उपभोक्ता शिकायतों पर एफएसएसएआई की बड़ी कार्रवाई, स्विगी इंस्टामार्ट को 9 नोटिस जारी, एक्सपायर्ड और असुरक्षित खाद्य उत्पादों की सप्लाई पर मांगा जवाब

    नई दिल्ली । उपभोक्ताओं से प्राप्त शिकायतों के आधार पर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म स्विगी इंस्टामार्ट के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए नौ अलग-अलग नोटिस जारी किए हैं। इन शिकायतों में ग्राहकों को एक्सपायर्ड, खराब, दूषित और मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त खाद्य उत्पादों की आपूर्ति किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। नियामक ने इन मामलों को गंभीर मानते हुए कंपनी से निर्धारित समय सीमा के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण और अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।

    जांच के दौरान खाद्य सुरक्षा से जुड़ी कई कथित अनियमितताएं सामने आने का दावा किया गया है। इनमें एक प्रमुख मामला ऐसे अंडों की बिक्री का बताया गया है, जिन्हें उस ब्रांड नाम के तहत बेचा जा रहा था जो कंपनी के मौजूदा खाद्य लाइसेंस में स्वीकृत उत्पाद श्रेणी के अंतर्गत शामिल नहीं था। नियामक ने निर्देश दिया है कि वैध अनुमति प्राप्त होने तक ऐसे उत्पादों की बिक्री तत्काल प्रभाव से रोकी जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर लाइसेंस में संशोधन के लिए आवेदन किया जाए।

    शिकायतों में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ पैक्ड खाद्य उत्पाद एक्सपायरी तिथि समाप्त होने के बाद भी ग्राहकों तक पहुंचाए गए। इनमें प्रोटीन सप्लीमेंट और नमकीन जैसे उत्पाद शामिल बताए गए हैं। खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार एक्सपायर्ड उत्पादों की बिक्री या आपूर्ति उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है। इसी कारण नियामक ने इस मामले को विशेष रूप से गंभीरता से लिया है।

    एक अन्य शिकायत में ऑर्गेनिक अंडों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि ग्राहकों को ऐसे अंडे उपलब्ध कराए गए जिनमें सड़न, दुर्गंध और संक्रमण जैसे संकेत मौजूद थे, जिससे वे मानव उपभोग के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त हो गए थे। इसी प्रकार एक तैयार खाद्य उत्पाद के खराब और बदबूदार होने की भी शिकायत दर्ज की गई, जिसके बाद उसकी गुणवत्ता और भंडारण व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे हैं।

    जांच के दौरान यह आरोप भी सामने आया कि शिकायत दर्ज होने और संबंधित मामले की जानकारी दिए जाने के बावजूद प्रभावी सुधारात्मक कदम समय पर नहीं उठाए गए। इसके अतिरिक्त शिशुओं के लिए तैयार एक खाद्य उत्पाद के खराब और असुरक्षित स्थिति में मिलने की शिकायत भी दर्ज हुई। इतना ही नहीं, एक मामले में ग्राहक द्वारा दोषपूर्ण उत्पाद लौटाने के बाद वही उत्पाद दोबारा आपूर्ति किए जाने का भी आरोप लगाया गया है, जिसे नियामक ने गंभीर लापरवाही की श्रेणी में माना है।

    एफएसएसएआई ने कंपनी से उसके खाद्य सुरक्षा प्रबंधन तंत्र, गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रिया, शिकायत निवारण व्यवस्था और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अपनाए जाने वाले उपायों की विस्तृत जानकारी मांगी है। साथ ही प्रत्येक शिकायत पर की गई कार्रवाई और सुधारात्मक कदमों का पूरा विवरण भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    नियामक ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब और अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की जाती है तो खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। यह कार्रवाई उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य उत्पाद उपलब्ध कराने और खाद्य सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

  • 'एनर्जी ड्रिंक' दावों पर सख्त हुआ एफएसएसएआई, रेड बुल, स्टिंग, कैम्पा समेत कई ब्रांड्स को जारी किए नोटिस

    'एनर्जी ड्रिंक' दावों पर सख्त हुआ एफएसएसएआई, रेड बुल, स्टिंग, कैम्पा समेत कई ब्रांड्स को जारी किए नोटिस


    नई दिल्ली । भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने ‘एनर्जी ड्रिंक’ शब्द के उपयोग और उत्पादों पर किए जा रहे कथित भ्रामक दावों को लेकर कई प्रमुख पेय पदार्थ ब्रांड्स को नोटिस जारी किए हैं। यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने और उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाले प्रचार-प्रसार पर रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    नियामक के अनुसार, मौजूदा खाद्य सुरक्षा कानून और संबंधित नियमों में ‘एनर्जी ड्रिंक’ श्रेणी के लिए कोई अलग मानक निर्धारित नहीं किया गया है। ऐसे में किसी उत्पाद को इस नाम से प्रस्तुत करना या उसकी पैकेजिंग एवं प्रचार सामग्री में ऐसे शब्दों का उपयोग करना नियामकीय जांच के दायरे में आता है। इसी आधार पर संबंधित कंपनियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है।

    नोटिस में यह भी कहा गया है कि उत्पादों की ब्रांडिंग और लेबलिंग के दौरान ऐसे दावों से बचना आवश्यक है, जिनसे यह संकेत मिले कि संबंधित पेय शरीर या मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ाता है, ऊर्जा स्तर में वृद्धि करता है, ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है या सामान्य कमजोरी दूर करने जैसे चिकित्सीय अथवा कार्यात्मक लाभ प्रदान करता है। खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत इस प्रकार के दावों को स्वीकृति प्राप्त नहीं है।

    खाद्य नियामक का कहना है कि उत्पादों की पैकेजिंग, विज्ञापन और प्रचार सामग्री उपभोक्ताओं को स्पष्ट, तथ्यात्मक और नियमों के अनुरूप जानकारी उपलब्ध कराए। यदि किसी उत्पाद के बारे में ऐसे दावे किए जाते हैं जो निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं, तो उन्हें भ्रामक माना जा सकता है। इसी कारण संबंधित कंपनियों से जवाब तलब किया गया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य एवं पेय उद्योग में ब्रांडिंग और मार्केटिंग के दौरान किए जाने वाले दावों की पारदर्शिता उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। किसी भी उत्पाद की वास्तविक प्रकृति और उसके संभावित प्रभावों के बारे में सही जानकारी उपलब्ध होना उपभोक्ताओं के सूचित निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    हाल के समय में खाद्य उत्पादों की लेबलिंग, प्रचार और गुणवत्ता को लेकर नियामकीय निगरानी लगातार बढ़ी है। इससे पहले भी विभिन्न खाद्य कारोबार संचालकों को उत्पादों के दावों, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और उपभोक्ता शिकायतों से जुड़े नियमों के कथित उल्लंघन के मामलों में नोटिस जारी किए जा चुके हैं। साथ ही उन्हें निर्धारित नियमों के अनुरूप आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश भी दिए गए थे।

    विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार की कार्रवाई का उद्देश्य उद्योग में पारदर्शिता बढ़ाना, उपभोक्ताओं का विश्वास मजबूत करना और यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में उपलब्ध खाद्य एवं पेय उत्पाद निर्धारित कानूनी मानकों और लेबलिंग नियमों का पूरी तरह पालन करें। इससे भविष्य में उत्पादों की प्रस्तुति और विपणन के तौर-तरीकों में भी अधिक जवाबदेही देखने को मिल सकती है।