Tag: Funding

  • जंतर-मंतर आंदोलन के बाद होटल पार्टी का दावा चर्चा में, वायरल वीडियो पर राजनीतिक बहस तेज

    जंतर-मंतर आंदोलन के बाद होटल पार्टी का दावा चर्चा में, वायरल वीडियो पर राजनीतिक बहस तेज


    नई दिल्ली ।
    राजधानी दिल्ली में हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़ा एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कुछ लोगों को एक होटल में नाच-गाने और जश्न के माहौल में देखा जा रहा है। इस वीडियो के सामने आने के बाद संगठन की गतिविधियों, आंदोलन के दौरान हुए खर्च और उसकी फंडिंग को लेकर नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों की पहचान तथा घटना की परिस्थितियों पर कोई आधिकारिक पुष्टि भी सामने नहीं आई है।

    यह वीडियो सोशल मीडिया पर वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी द्वारा साझा किए जाने के बाद अधिक चर्चा में आया। वीडियो साझा करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि क्या वास्तव में CJP की नेतृत्व टीम दिल्ली के एक होटल में जश्न मना रही है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि राजधानी में कई दिनों तक चले विरोध प्रदर्शन के दौरान यात्रा, भोजन और ठहरने जैसी व्यवस्थाओं का खर्च किसने वहन किया और इसके लिए धन किस स्रोत से उपलब्ध कराया गया।

    वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर पक्ष और विपक्ष दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने आंदोलन के बाद जश्न मनाने को सामान्य बताया, जबकि अन्य ने प्रदर्शन से जुड़े आर्थिक पहलुओं पर पारदर्शिता की मांग उठाई। हालांकि, अब तक किसी सक्षम सरकारी एजेंसी या संबंधित संगठन की ओर से वीडियो में किए गए दावों की आधिकारिक पुष्टि या खंडन नहीं किया गया है।

    कॉकरोच जनता पार्टी पिछले कुछ समय से परीक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर चल रहे आंदोलन के कारण चर्चा में रही है। जंतर-मंतर पर कई दिनों तक चले विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे। इस आंदोलन को समय के साथ विभिन्न सामाजिक समूहों और कुछ प्रमुख हस्तियों का भी समर्थन मिला, जिससे इसकी राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा हुई।

    हाल के घटनाक्रम में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलन से जुड़े समर्थकों ने इसे अपनी मांगों की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। विरोध प्रदर्शन के समाप्त होने के बाद विभिन्न स्थानों पर समर्थकों के बीच खुशी का माहौल भी देखने को मिला। इसी बीच सामने आए इस कथित होटल वीडियो ने पूरे घटनाक्रम को नई राजनीतिक दिशा दे दी है और आंदोलन की कार्यशैली पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

    उधर, शिक्षा मंत्रालय में नेतृत्व परिवर्तन के बाद नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने पदभार ग्रहण करते ही वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। मंत्रालय के विभिन्न लंबित मामलों के अलावा राष्ट्रीय परीक्षा व्यवस्था और उससे जुड़े विषयों पर भी अधिकारियों के साथ चर्चा की गई। संबंधित संस्थानों के अधिकारियों से वर्तमान स्थिति और आगे की कार्ययोजना पर विस्तृत जानकारी ली गई।

    फिलहाल वायरल वीडियो को लेकर कोई आधिकारिक जांच या निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है। ऐसे में वीडियो से जुड़े दावों, उसमें दिखाई गई गतिविधियों और लगाए जा रहे आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है। आने वाले दिनों में यदि संबंधित पक्षों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया या किसी जांच एजेंसी की रिपोर्ट सामने आती है, तो पूरे मामले की स्थिति और अधिक स्पष्ट हो सकेगी। तब तक यह मामला मुख्य रूप से सोशल मीडिया पर प्रसारित दावों और उन पर उठ रहे सार्वजनिक व राजनीतिक सवालों के केंद्र में बना हुआ है।

  • इजरायल को फंडिंग करने पर अमेरिका में बवाल… सांसदों ने की कटौती की मांग

    इजरायल को फंडिंग करने पर अमेरिका में बवाल… सांसदों ने की कटौती की मांग


    वाशिंगटन।
    इजरायल (Israel) की मदद करना अमेरिकी सरकार (American Government) को भारी पड़ता दिख रहा है. इस मुद्दे को लेकर अमेरिका (America) की राजनीति में हंगामा शुरू हो गया है. हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (House of Representatives) के आधे से ज्यादा डेमोक्रेटिक सांसदों (Democratic lawmakers) ने इजरायल को दी जाने वाली 3.3 अरब डॉलर की सहायता राशि में कटौती करने के पक्ष में मतदान किया है।

    बुधवार को सदन में इस संशोधन प्रस्ताव पर मतदान हुआ. प्रस्ताव के पक्ष में 104 और विरोध में 314 वोट पड़े. हालांकि, ये राष्ट्रीय सुरक्षा खर्च विधेयक में इस संशोधन को जोड़ने के लिए काफी नहीं था। इस मतदान से ये साफ हो गया है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Prime Minister Benjamin Netanyahu) की युद्ध रणनीति को लेकर अमेरिकी संसद और डेमोक्रेटिक पार्टी में गहरी दरार है।


    चुनाव से ठीक पहले पार्टी में मतभेद

    ये मतदान अमेरिक में होने वाले मिड-टर्म चुनावों से ठीक पहले हुआ है, जो ये तय करेंगे कि अमेरिकी कांग्रेस पर किसका कंट्रोल होगा. इस वोटिंग में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व के बीच भी मतभेद खुलकर सामने आए. 100 से ज्यादा डेमोक्रेट्स ने विदेशी सैन्य सहायता राशि को पूरी तरह खत्म करने वाले इस संशोधन के पक्ष में वोट दिया, जबकि लगभग इतने ही डेमोक्रेट्स ने इसके खिलाफ मतदान किया।

    वहीं, जबकि रिपब्लिकन सांसदों ने इजरायल को दी जाने वाली सहायता को बनाए रखने के पक्ष में वोट डाला. सदन में डेमोक्रेटिक नेता हकीम जेफ्रीस ने इस प्रस्ताव का विरोध किया. हालांकि, उन्होंने अपने सहयोगियों को लिखे पत्र में इस बात पर जोर दिया कि इजरायल और फिलिस्तीनी लोगों की भलाई के लिए मिडिल-ईस्ट में अमेरिकी नीति को बदलना होगा। जेफ्रीस ने कहा कि नेतन्याहू सरकार के रवैये में जरूरी बदलाव लाने के लिए और भी सही तरीके मौजूद हैं।


    पार्टी में बढ़ता आंतरिक दबाव

    इजरायल को लेकर बढ़ती विरोध डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है. पार्टी को अपने ही भीतर लेफ्ट विंग के बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि, रिपब्लिकन पार्टी इस फूट का फायदा उठाकर डेमोक्रेट्स को ‘कट्टर वामपंथी’ साबित करने की कोशिश कर रही है।

    इस बीच, डेमोक्रेटिक व्हिप और मैसाचुसेट्स की प्रतिनिधि कैथरीन क्लार्क ने फंड रोकने का समर्थन किया. एक हालिया AP-NORC पोल के मुताबिक, लगभग एक-तिहाई अमेरिकी एडल्ट- जिनमें करीब आधे डेमोक्रेट शामिल हैं, उनका मानना है कि इजरायल ने गाजा में फिलिस्तीनियों के खिलाफ नरसंहार किया है. हालांकि, इजरायल और अमेरिकी सरकार इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते रहे हैं।

  • ब्रिटेन द्वारा IRGC को 'सुरक्षा के लिए खतरा' बताने पर भड़का ईरान, राजदूत को किया तलब

    ब्रिटेन द्वारा IRGC को 'सुरक्षा के लिए खतरा' बताने पर भड़का ईरान, राजदूत को किया तलब


    लंदन।
    ईरान-अमेरिका (Iran-America) के बीच जंग नए मोड़ पर पहुंच चुकी है. दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. इस बीच, ईरान (Iran) ने तेहरान में ब्रिटेन (Britain) के राजदूत को तलब किया. यह कदम लंदन द्वारा यूके के ‘काउंटरिंग स्टेट थ्रेट्स एक्ट’ (‘Countering State Threats Act’) के तहत इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (Islamic Revolutionary Guard Corps- IRGC) को नामित करने के बाद उठाया गया. एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी कि इस कदम का जवाब दिया जाएगा।

    यह घटनाक्रम ब्रिटेन द्वारा लंदन में ईरान के चार्ज डी’अफेयर्स अली नसीमफार को तलब किए जाने के एक दिन बाद हुआ. ब्रिटेन सरकार का आरोप था कि हाल के महीनों में पूरे यूरोप में हमले करने के लिए प्रॉक्सी समूहों को निर्देशित करने में ईरान की भूमिका रही है।

    बता दें, ब्रिटेन ने सोमवार को IRGC और उससे जुड़े एक समूह को सुरक्षा के लिए खतरा घोषित किया. यह कदम उन नए अधिकारों के तहत उठाया गया जिनका मकसद विदेशी देशों को निगरानी और तोड़फोड़ जैसी गतिविधियों के लिए प्रॉक्सी का इस्तेमाल करने से रोकना है।


    होर्मुज को लेकर बढ़ी चिंताएं

    ईरान-अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर चिंताएं फिर बढ़ गई हैं. रॉयटर्स के मुताबिक, समुद्री सुरक्षा और शिपिंग इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों ने बताया कि जहाजों पर ईरानी हमलों के सिलसिले के बाद सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं, जिसके चलते शिपिंग कंपनियां स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने के लिए अमेरिकी सेना की निगरानी वाली योजना का इस्तेमाल करने से बच रही हैं।

    28 फरवरी को ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से ईरानी सेना ने इस इलाके में माइंस बिछा दी हैं, जिससे जहाजों को ईरान या ओमान के तट के करीब बने दो वैकल्पिक रास्तों में से किसी एक का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

  • बर्गर किंग इंडिया में बड़ी हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी, अजन्ता फार्मा प्रमोटर्स की कंपनी जुटाएगी 1,800 करोड़ रुपये, QSR सेक्टर में बढ़ेगी पकड़

    बर्गर किंग इंडिया में बड़ी हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी, अजन्ता फार्मा प्रमोटर्स की कंपनी जुटाएगी 1,800 करोड़ रुपये, QSR सेक्टर में बढ़ेगी पकड़


    नई दिल्ली। देश के क्विक सर्विस रेस्टोरेंट (QSR) सेक्टर में एक बड़ा कॉर्पोरेट सौदा आकार ले सकता है। अजन्ता फार्मा के प्रमोटर्स की कंपनी इंस्पिरा ग्लोबल बर्गर किंग इंडिया के कारोबार में नियंत्रणकारी हिस्सेदारी हासिल करने की तैयारी कर रही है। इस संभावित अधिग्रहण के लिए कंपनी लगभग 1,800 करोड़ रुपये की प्राइवेट क्रेडिट फंडिंग जुटा रही है। यदि यह सौदा पूरा होता है तो भारतीय फूड सर्विस उद्योग में प्रतिस्पर्धा का नया दौर देखने को मिल सकता है।

    जानकारी के अनुसार, इस प्रस्तावित अधिग्रहण को इंस्पिरा ग्लोबल अपनी फूड एंड बेवरेज इकाई लेनेक्सिस फूडवर्क्स के माध्यम से आगे बढ़ा रही है। लेनेक्सिस पहले से ही क्विक सर्विस रेस्टोरेंट कारोबार में सक्रिय है और कई लोकप्रिय खाद्य ब्रांडों का संचालन करती है। कंपनी का उद्देश्य इस अधिग्रहण के जरिए अपने पोर्टफोलियो का विस्तार करना और संगठित फूड सर्विस बाजार में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराना है।

    सूत्रों के मुताबिक, अधिग्रहण के लिए आवश्यक फंडिंग का बड़ा हिस्सा नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) के माध्यम से जुटाया जा रहा है। अब तक लगभग 1,050 करोड़ रुपये की राशि एकत्र की जा चुकी है, जबकि शेष लगभग 800 करोड़ रुपये भी जल्द जुटाने की तैयारी चल रही है। पूरी फंडिंग उपलब्ध होने के बाद अधिग्रहण प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

    भारत में बर्गर किंग ब्रांड का संचालन रेस्टोरेंट ब्रांड्स एशिया के माध्यम से किया जाता है। प्रस्तावित सौदे के तहत इसी कंपनी में नियंत्रणकारी हिस्सेदारी हासिल करने की योजना बनाई जा रही है। हालांकि, इस संभावित अधिग्रहण को अंतिम रूप देने के लिए नियामकीय प्रक्रियाओं और अन्य व्यावसायिक औपचारिकताओं को पूरा किया जाना आवश्यक होगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सौदा सफल रहता है तो भारतीय क्विक सर्विस रेस्टोरेंट बाजार में प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है। पिछले कुछ वर्षों में संगठित फूड चेन, ऑनलाइन फूड डिलीवरी और उपभोक्ताओं की बदलती खानपान की आदतों के कारण इस क्षेत्र में निवेश लगातार बढ़ा है। ऐसे माहौल में बड़े ब्रांडों में हिस्सेदारी हासिल करना कंपनियों के लिए दीर्घकालिक रणनीतिक निवेश माना जा रहा है।

    इंस्पिरा ग्लोबल का स्वामित्व अजन्ता फार्मा के प्रमोटर परिवार से जुड़े आयुष मधुसूदन अग्रवाल और मधुसूदन अग्रवाल के पास है। समूह पिछले कुछ वर्षों से फूड एवं बेवरेज कारोबार में विस्तार की रणनीति पर काम कर रहा है। लेनेक्सिस फूडवर्क्स के माध्यम से कंपनी पहले ही कई लोकप्रिय फूड ब्रांड संचालित कर रही है और अब वैश्विक फास्ट फूड ब्रांड के भारतीय कारोबार में हिस्सेदारी हासिल कर अपने विस्तार को नई गति देना चाहती है।

    बाजार विश्लेषकों के अनुसार, यदि यह अधिग्रहण पूरा होता है तो इससे केवल संबंधित कंपनियों की कारोबारी रणनीति ही नहीं बदलेगी, बल्कि भारतीय QSR उद्योग में निवेश, विस्तार और प्रतिस्पर्धा का नया परिदृश्य भी सामने आ सकता है। फिलहाल निवेशकों और बाजार की नजर इस संभावित सौदे की प्रगति, फंडिंग प्रक्रिया और अंतिम समझौते पर बनी हुई है।

  • युद्ध के लिए फंडिंग…. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से एक जहाज निकालने के 20 लाख डॉलर वसूल रहा ईरान

    युद्ध के लिए फंडिंग…. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से एक जहाज निकालने के 20 लाख डॉलर वसूल रहा ईरान


    तेहरान।
    अमेरिका और इजरायल (America and Israel) से युद्ध लड़ रहा ईरान (Iran) स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर जहाजों से वसूली (Recovery Ships) कर रहा है। खबर है कि कुछ जहाजों को गुजरने देने के लिए लाखों डॉलर लिए जा रहे हैं। ईरान के एक सांसद ने ही ऐसा दावा किया है। इससे पहले ईरान ने धमकी दी थी कि अगर अमेरिका की तरफ से हमले किए जाते हैं, तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा।

    ईरान इंटरनेशनल के अनुसार, ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्य, अलादीन ब्रूजेर्दी ने कहा कि यह कदम पहले ही लागू किया जा चुका है। उन्होंने कहा, ‘अब, चूंकि युद्ध की अपनी लागत होती है, इसलिए स्वाभाविक रूप से हमें यह करना चाहिए और Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों से ट्रांजिट शुल्क लेना चाहिए।’

    ब्रूजेर्दी ने डोनाल्ड ट्रंप की उस चेतावनी का भी जिक्र किया, जिसमें ट्रंप ने कहा था कि यदि 48 घंटों के भीतर स्ट्रेट को नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के बिजली और ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बना सकता है। इसके जवाब में ब्रूजेर्दी ने कहा कि इजरायल का ऊर्जा ढांचा भी ईरान की पहुंच में है और उसे ‘एक दिन के भीतर’ पूरी तरह तबाह किया जा सकता है।


    अमेरिका अलर्ट

    संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने रविवार को कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ अपनी ‘रेड लाइन्स’ पर अडिग हैं। उन्होंने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की लगभग नाकेबंदी का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान को दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति को बंधक नहीं बनाने देंगे।


    ट्रंप ने कहा था 48 घंटे में होर्मुज खोले ईरान

    अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने रविवार को अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि अगर ईरान ने 48 घंटों के अंदर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से फिर नहीं खोला तो ईरान के बिजली संयंत्रों को पूरी तरह तबाह कर देंगे। ट्रंप का यह बयान शनिवार को दिए उनके बयान से उलट था। उन्होंने कहा था कि वह युद्ध को खत्म करने पर विचार कर रहे हैं। लेकिन रविवार तड़के उन्होंने ईरान को नई धमकी दे डाली। ट्रंप की यह धमकी ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी नौसैनिक और भारी लैंडिंग क्राफ्ट क्षेत्र की ओर बढ़ रहे हैं।

    आईजी मार्केट विश्लेषक टोनी साइकैमोर ने कहा, राष्ट्रपति ट्रंप की धमकी ने अब बाजारों पर 48 घंटे की अनिश्चितता का टिक टिक करता हुआ टाइम बम रख दिया है। यदि इस अल्टीमेटम को वापस नहीं लिया गया, तो हम सोमवार को दुनियाभर के शेयर बाजारों को ‘ब्लैक मंडे’ के रूप में गिरते हुए और तेल की कीमतों को काफी ऊंचे स्तर पर जाते हुए देखेंगे।


    बंद कर सकता है ईरान

    ईरान की सेना ने चेतावनी दी कि यदि ट्रंप देश के बिजली संयंत्रों को निशाना बनाते हैं, तो वे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से बंद कर देंगे। सेना की ऑपरेशनल कमांड ‘खातम अल-अंबिया’ ने सरकारी टीवी द्वारा प्रसारित बयान में कहा, यदि ईरान के बिजली संयंत्रों के संबंध में अमेरिका की धमकियों पर अमल किया गया, तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा, और इसे तब तक नहीं खोला जाएगा जब तक कि हमारे नष्ट किए गए बिजली संयंत्रों का पुनर्निर्माण नहीं हो जाता।