Tag: Ganesh Chaturthi

  • देवास में गणेश विसर्जन का भव्य नजारा देर रात तक उमड़ी भीड़ ऑपरेशन सिंदूर की झांकी रही खास आकर्षण

    देवास में गणेश विसर्जन का भव्य नजारा देर रात तक उमड़ी भीड़ ऑपरेशन सिंदूर की झांकी रही खास आकर्षण


    देवास । देवास में अनंत चतुर्दशी के अवसर पर शुक्रवार रात गणेश विसर्जन चल समारोह निकाला गया। शहर की सड़कों पर देर रात तक गणपति बप्पा की भक्ति और देशभक्ति का अनोखा संगम देखने को मिला। अलग अलग क्षेत्रों से निकली गणेश प्रतिमाओं और झांकियों ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। समारोह में धार्मिक और सामाजिक संदेशों के साथ देशभक्ति से जुड़ी झांकियां भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं।

    इस बार गणेश विसर्जन चल समारोह में ऑपरेशन सिंदूर और भारतीय सेना के शौर्य पर आधारित झांकी विशेष रूप से चर्चा में रही। झांकी के जरिए सेना के साहस और देश के प्रति समर्पण को दर्शाने का प्रयास किया गया। इसे देखने के लिए रास्ते के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग जमा हुए। जैसे ही झांकी जुलूस के बीच से गुजरी लोगों ने उत्सुकता के साथ इसे देखा।

    समारोह में 80 से ज्यादा गणेश प्रतिमाएं और झांकियां शामिल हुईं। इनमें अलग अलग सामाजिक धार्मिक और देशभक्ति से जुड़े विषयों को प्रदर्शित किया गया। कई प्रतिमाओं को आकर्षक रोशनी और विशेष सजावट से तैयार किया गया था। रंग बिरंगी लाइटों से सजी झांकियां रात के अंधेरे में और भी आकर्षक नजर आ रही थीं।

    गणेश विसर्जन चल समारोह को देखने के लिए शहर के विभिन्न हिस्सों से लोग पहुंचे। जुलूस जिस मार्ग से गुजर रहा था वहां श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई दी। परिवारों के साथ लोग प्रतिमाओं के दर्शन करने के लिए देर रात तक सड़कों पर मौजूद रहे। कई स्थानों पर स्थानीय लोगों ने जुलूस का स्वागत किया और गणेश प्रतिमाओं पर फूल बरसाए।

    धार्मिक आस्था के इस आयोजन में देशभक्ति से जुड़ी झांकियों ने समारोह को अलग पहचान दी। ऑपरेशन सिंदूर की झांकी में भारतीय सेना के शौर्य और पराक्रम को प्रदर्शित किया गया। बड़ी संख्या में लोगों ने रुककर झांकी को देखा और इसके जरिए दिए जा रहे संदेश को समझने की कोशिश की।

    गणेश विसर्जन के दौरान प्रशासन ने भी व्यवस्थाओं पर नजर बनाए रखी। कलेक्टर ऋतुराज सिंह और पुलिस अधीक्षक पुनीत गेहलोत ने जुलूस मार्ग का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था के साथ यातायात और भीड़ नियंत्रण की स्थिति का जायजा लिया। जुलूस के दौरान पुलिस बल को अलग अलग स्थानों पर तैनात किया गया था।

    प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही गई। भीड़ वाले स्थानों पर व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अमला सक्रिय रहा। जुलूस के दौरान लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो इसके लिए मार्ग और यातायात व्यवस्था पर भी नजर रखी गई।

    देर रात तक देवास की सड़कों पर गणेश प्रतिमाओं और झांकियों का सिलसिला चलता रहा। श्रद्धालु गणपति बप्पा के दर्शन करते रहे और विसर्जन के लिए आगे बढ़ती प्रतिमाओं को देखते रहे। धार्मिक उत्साह के साथ सेना के शौर्य को दर्शाती झांकी ने इस बार के गणेश विसर्जन समारोह को खास बना दिया।

  • भोपाल में गणेश विसर्जन के लिए प्रशासन तैयार 13 क्रेन 12 पोकलेन और 184 गोताखोर तैनात घाटों पर भक्तों की सुरक्षा का खास प्लान

    भोपाल में गणेश विसर्जन के लिए प्रशासन तैयार 13 क्रेन 12 पोकलेन और 184 गोताखोर तैनात घाटों पर भक्तों की सुरक्षा का खास प्लान


    भोपाल। भोपाल में गणेश उत्सव के बाद अब प्रथम पूज्य भगवान गणेश की विदाई का सिलसिला शुरू हो गया है। डोल ग्यारस से गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन का क्रम शुरू हो चुका है जो अनंत चतुर्दशी तक जारी रहेगा। शहर के अलग अलग इलाकों से गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन जुलूस निकलेंगे और बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रमुख घाटों तक पहुंचेंगे। इसे देखते हुए जिला प्रशासन पुलिस और नगर निगम ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक तैयारियां की हैं। खासतौर पर विसर्जन घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए कई स्तरों पर इंतजाम किए गए हैं।

    भोपाल के प्रमुख सात विसर्जन घाटों पर 13 क्रेन और 12 पोकलेन मशीनें तैनात की गई हैं। इनके जरिए गणेश प्रतिमाओं को सुरक्षित तरीके से पानी में विसर्जित करने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही 184 गोताखोरों की तैनाती की गई है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल मदद पहुंचाई जा सके। घाटों पर श्रद्धालुओं के पानी में उतरने पर रोक रहेगी। नगर निगम के कर्मचारी लोगों को सुरक्षित दूरी पर रखने के साथ विसर्जन प्रक्रिया में सहयोग करेंगे।

    विसर्जन के दौरान सुरक्षा के लिए घाटों पर लाइफ जैकेट लाइफ बॉय ट्यूब रस्सी बंडल और पीए सिस्टम जैसे संसाधन उपलब्ध रहेंगे। तैराकों की भी ड्यूटी लगाई गई है। पुलिस और प्रशासन की टीमें घाटों पर लगातार निगरानी रखेंगी। इसके अलावा पुलिस कंट्रोल रूम से भी प्रमुख घाटों की स्थिति पर नजर रखी जाएगी। खटलापुरा प्रेमपुरा संत हिरदाराम नगर बैरागढ़ हथाईखेड़ा डैम शाहपुरा और आर्च ब्रिज क्षेत्र के घाटों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई है। इन घाटों पर पिछले दो दिनों में ही डेढ़ हजार से ज्यादा गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन हो चुका है।

    नगर निगम ने प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए शहर के अलग अलग इलाकों में दो दर्जन से ज्यादा स्टॉल भी लगाए हैं। लालघाटी चौराहा गांधी नगर करोंद चौराहा कोलार रायसेन रोड और अवधपुरी समेत कई स्थानों पर श्रद्धालु पूजा के बाद गणेश प्रतिमाएं इन स्टॉल पर जमा कर सकेंगे। इसके बाद नगर निगम की टीम इन प्रतिमाओं का सामूहिक रूप से विसर्जन करेगी। इससे घाटों पर भीड़ और प्रत्यक्ष रूप से पानी में उतरने वाले लोगों की संख्या कम करने में मदद मिलेगी।

    विसर्जन जुलूस और चल समारोह को देखते हुए शहर के रास्तों पर प्रकाश व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। नगर निगम के अनुसार प्रेमपुरा रानी कमलापति शाहपुरा खटलापुरा हथाईखेड़ा मालीखेड़ी और बैरागढ़ विसर्जन घाटों पर 1090 एलईडी फ्लड लाइट लगाई गई हैं। इसके अलावा चल समारोह वाले मार्गों पर 575 अतिरिक्त फ्लड लाइट लगाई गई हैं। इस तरह घाटों और विसर्जन मार्गों पर कुल 1665 लाइटों की व्यवस्था की गई है।

    गणेश विसर्जन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के सड़कों पर उतरने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन के सामने भीड़ नियंत्रण यातायात व्यवस्था और घाटों पर सुरक्षा बनाए रखने की चुनौती रहेगी। नगर निगम पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें मिलकर व्यवस्थाओं को संभालेंगी। प्रशासन का प्रयास है कि श्रद्धालु भगवान गणेश की प्रतिमाओं को श्रद्धा के साथ विदाई दें और विसर्जन प्रक्रिया सुरक्षित तरीके से पूरी हो।

  • विसर्जन के बड़े जुलूसों से पहले घाटों के रास्ते बदहाल: कहीं गड्ढे तो कहीं उखड़ी गिट्टी बारिश ने रोका पक्का पैचवर्क

    विसर्जन के बड़े जुलूसों से पहले घाटों के रास्ते बदहाल: कहीं गड्ढे तो कहीं उखड़ी गिट्टी बारिश ने रोका पक्का पैचवर्क


    भोपाल। भोपाल में गणपति विसर्जन का दौर शुरू होने वाला है लेकिन विसर्जन घाटों तक पहुंचने वाले कई प्रमुख रास्ते अभी भी बदहाल हैं। 22 सितंबर से गणपति विसर्जन शुरू होगा जबकि 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के मौके पर बड़े चल समारोह निकलेंगे। 26 सितंबर तक विसर्जन का सिलसिला जारी रहेगा। ऐसे में बड़ी झांकियों ट्रकों और जुलूसों की आवाजाही के दौरान सड़कों पर मौजूद गड्ढे और उखड़ी गिट्टी परेशानी बढ़ा सकती है। लोक निर्माण विभाग ने सड़कों के मेंटेनेंस के लिए 30 सितंबर की डेडलाइन तय की है लेकिन लगातार हो रही बारिश के कारण स्थायी पैचवर्क का काम प्रभावित हो रहा है।

    भोपाल में पीडब्ल्यूडी की करीब 174 किलोमीटर सड़कों का मेंटेनेंस परफॉर्मेंस गारंटी के तहत संबंधित ठेकेदारों को करना है। फिलहाल बड़े गड्ढों में गिट्टी और छोटे गड्ढों में कोल्ड मिक्स डालकर अस्थायी सुधार किया जा रहा है। हालांकि बारिश और लगातार वाहनों की आवाजाही के कारण यह सामग्री ज्यादा समय तक टिक नहीं पा रही है। स्थायी पैचवर्क के लिए हॉट मिक्स प्लांट से काम कराने की जरूरत है जिसके लिए करीब एक सप्ताह तक मौसम साफ रहना जरूरी बताया जा रहा है।

    पुराने शहर से कमलापति घाट की ओर जाने वाले मार्ग पर भी कई जगह सड़क की हालत खराब है। जिंसी से मोती मस्जिद के बीच करीब 3 किलोमीटर के हिस्से में दर्जनों बड़े गड्ढे बताए जा रहे हैं। वहीं प्रोफेसर कॉलोनी से गायत्री मंदिर तक करीब 6.50 किलोमीटर के रास्ते पर भी सड़क सुधार का काम बाकी है। भदभदा घाट की ओर जाने वाले लिंक रोड 3 मुख्य मार्ग 2 नेहरू नगर तुलसी नगर और भदभदा नीलबड़ सीहोर मार्ग पर कई जगह गिट्टी उखड़ चुकी है।

    शाहपुरा और कलियासोत क्षेत्र के विसर्जन रूट पर भी अरेरा हिल्स गुलमोहर इकोसिटी दानिशकुंज बावड़ियाकलां और कलियासोत से चेतक ब्रिज तक सड़क सुधार की जरूरत है। अयोध्या बायपास करोंद पलासी बंगरसिया और बावड़ियाकलां मार्ग पर फिलहाल गड्ढों में गिट्टी डाली जा रही है।

    इधर प्रेमपुरा घाट के विसर्जन मार्ग पर मेट्रो निर्माण की बैरिकेडिंग भी चुनौती बनी हुई है। सड़क के एक हिस्से में बैरिकेडिंग होने के कारण करीब 4.5 मीटर चौड़ा रास्ता ही बचा है। गुरुवार शाम एसीपी ट्रैफिक अजय बाजपेयी ने डिपो से भदभदा चौराहे के बीच सड़क की चौड़ाई इंचीटेप से नापी। बड़ी झांकियों और ट्रकों की आवाजाही के लिए दोनों तरफ करीब 6-6 मीटर जगह की जरूरत बताई गई है। इसके बाद मेट्रो से बैरिकेड्स पीछे करने के निर्देश दिए गए।

    बारिश ने समस्या और बढ़ा दी है। गुरुवार शाम हुई बारिश के बाद बैरागढ़ मेन रोड स्थित विसर्जन घाट के पहुंच मार्ग पर पानी और कीचड़ जमा हो गया। ऐसे में प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती विसर्जन से पहले प्रमुख रास्तों को सुरक्षित और सुगम बनाने की है। पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर एससी वर्मा के अनुसार मेंटेनेंस का काम शुरू है और प्रमुख सड़कों के गड्ढे भरे जा रहे हैं। हालांकि स्थायी सुधार के लिए मौसम साफ होना जरूरी है।

  • रणबीर कपूर के पुराने वीडियो ने छेड़ी नई बहस प्रसाद ठुकराने पर यूजर्स बोले इनको राम बना दिया

    रणबीर कपूर के पुराने वीडियो ने छेड़ी नई बहस प्रसाद ठुकराने पर यूजर्स बोले इनको राम बना दिया


    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता रणबीर कपूर इन दिनों एक पुराने वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। गणपति बप्पा के दर्शन से जुड़ा उनका यह वीडियो साल 2023 का बताया जा रहा है लेकिन गणेश चतुर्थी के मौजूदा माहौल के बीच एक बार फिर तेजी से वायरल हो गया है। वीडियो में रणबीर कपूर गणपति दर्शन करने के बाद वहां मौजूद लोगों और पैपराजी से बातचीत करते नजर आते हैं। इसी दौरान एक पैपराजी उन्हें प्रसाद देने की कोशिश करता है लेकिन रणबीर उसे लेने से इनकार कर देते हैं। अभिनेता इसकी वजह बताते हुए कहते हैं कि वह डाइट पर हैं और प्रसाद किसी दूसरे व्यक्ति को खाने के लिए कह देते हैं।

    रणबीर कपूर का इतना कहना ही सोशल मीडिया पर बहस की वजह बन गया। वीडियो वायरल होने के बाद कुछ यूजर्स ने अभिनेता के इस फैसले पर सवाल उठाए। कई लोगों ने कहा कि गणपति के प्रसाद के रूप में मिठाई का एक छोटा सा टुकड़ा लेने से उनकी डाइट पर कोई खास असर नहीं पड़ता। वहीं कुछ लोगों ने इस घटना को रणबीर कपूर की आने वाली फिल्म रामायण में भगवान राम की भूमिका से जोड़कर भी टिप्पणी की।

    सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने रणबीर कपूर को ट्रोल करते हुए कहा कि उन्हें प्रसाद स्वीकार कर लेना चाहिए था। कुछ टिप्पणियों में अभिनेता के खानपान से जुड़े पुराने विवादों का भी जिक्र किया गया। इसी दौरान कुछ लोगों ने उनकी राम की भूमिका पर भी सवाल उठाए और टिप्पणी की कि जब अभिनेता पर्दे पर भगवान राम का किरदार निभा रहे हैं तो उनसे ऐसी उम्मीद नहीं थी। हालांकि सोशल मीडिया पर की गई इन टिप्पणियों में कई तरह के दावे और व्यक्तिगत राय शामिल हैं जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस वीडियो से नहीं होती।

    इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वायरल हो रहा वीडियो नया नहीं है। यह साल 2023 का पुराना वीडियो है और इसका 2026 के गणेश चतुर्थी समारोह से सीधा संबंध नहीं है। मौजूदा समय में रणबीर कपूर अपनी पत्नी और अभिनेत्री आलिया भट्ट के साथ गणेश चतुर्थी समारोह में शामिल होने को लेकर भी चर्चा में हैं। इसी वजह से उनका पुराना वीडियो दोबारा सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहा है।

    रणबीर कपूर की मौजूदा चर्चा उनकी फिल्म रामायण को लेकर भी काफी ज्यादा है। नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही इस फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म को बड़े स्तर पर तैयार किया जा रहा है और इसे दो हिस्सों में रिलीज किए जाने की बात सामने आई है। फिल्म में यश रावण की भूमिका में दिखाई देंगे जबकि साई पल्लवी सीता और रवि दुबे लक्ष्मण के किरदार में नजर आएंगे। सनी देओल फिल्म में हनुमान की भूमिका निभा रहे हैं।

    रामायण में कई चर्चित कलाकार भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। अरुण गोविल दशरथ की भूमिका में दिखाई देंगे जबकि लारा दत्ता कैकेयी का किरदार निभा रही हैं। शीबा चड्ढा मंथरा और रकुल प्रीत सिंह शूर्पणखा की भूमिका में नजर आएंगी। फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच पहले से ही काफी उत्सुकता है और रणबीर के राम के रूप को लेकर लगातार चर्चा होती रही है।

    रणबीर कपूर के पास रामायण के अलावा भी कई बड़े प्रोजेक्ट हैं। वह एनिमल पार्क में नजर आएंगे जो उनकी चर्चित फिल्म एनिमल का सीक्वल है। इसके साथ ही वह आलिया भट्ट और विक्की कौशल के साथ संजय लीला भंसाली की फिल्म लव एंड वॉर में भी दिखाई देंगे। ऐसे में गणपति के पुराने वीडियो के वायरल होने के साथ रणबीर एक बार फिर सोशल मीडिया की चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।

  • देर रात तक घरों और पंडालों में पहुंचे गणपति जबलपुर से आई मीरानी के राजा की निकली भव्य यात्रा

    देर रात तक घरों और पंडालों में पहुंचे गणपति जबलपुर से आई मीरानी के राजा की निकली भव्य यात्रा


    सतना । सतना में सोमवार को गणेश चतुर्थी के साथ दस दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुआत हो गई। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी पर शहर का माहौल पूरी तरह भक्तिमय नजर आया। सुबह से ही घरों और सार्वजनिक पंडालों में भगवान श्री गणेश की स्थापना की तैयारियां चलती रहीं। रविवार को गणेश प्रतिमाओं की खरीदारी के लिए बाजारों में दिनभर भीड़ रही। अलग अलग आकार और स्वरूप में तैयार गणेश प्रतिमाओं को श्रद्धालु अपने घरों प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक पंडालों तक लेकर पहुंचे। देर रात तक प्रतिमाओं को पहुंचाने का सिलसिला जारी रहा।

    सिंधी कैंप स्थित मीरानी कॉलोनी में गणेशोत्सव को लेकर इस बार भी विशेष उत्साह देखने को मिला। यहां स्थापित होने वाली प्रसिद्ध गणेश प्रतिमा मीरानी के राजा रविवार देर रात जबलपुर से सतना पहुंची। प्रतिमा के सतना पहुंचते ही श्रद्धालुओं में उत्साह की लहर दौड़ गई। भक्तों ने ढोल नगाड़ों की धुन पर जयकारे लगाए और गणपति की अगवानी की। इसके बाद प्रतिमा को जुलूस के रूप में मीरानी कॉलोनी तक ले जाया गया। रास्ते में भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था। सोमवार को शुभ मुहूर्त में विधि विधान के साथ मीरानी के राजा की स्थापना की गई।

    गणेश चतुर्थी के पर्व को लेकर शहर के अलग अलग हिस्सों में कई सार्वजनिक पंडाल तैयार किए गए हैं। रविवार देर रात तक इन पंडालों में सजावट का काम चलता रहा। कई स्थानों पर आकर्षक झांकियां और विशेष सजावट की गई है। घरों में भी श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश की स्थापना के लिए विशेष तैयारियां की हैं। गणपति स्थापना के साथ ही अगले दस दिनों तक शहर में धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा और अलग अलग क्षेत्रों में गणपति बप्पा के जयकारों की गूंज सुनाई देगी।

    ज्योतिषाचार्य पं. प्रमोद मिश्रा के अनुसार इस बार गणेश चतुर्थी पर ब्रह्म योग और चित्रा नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं में ब्रह्म योग को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। ऐसे में इस संयोग में भगवान गणेश की स्थापना और पूजन को विशेष महत्व दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को सुबह करीब 7 बजकर 6 मिनट से शुरू होकर 15 सितंबर को सुबह 7 बजकर 44 मिनट तक रहेगी। गणपति स्थापना और पूजन के लिए दोपहर का समय विशेष शुभ माना गया है।

    गणेशोत्सव की शुरुआत के साथ ही सतना में धार्मिक उल्लास का माहौल बन गया है। बाजारों से लेकर कॉलोनियों और सार्वजनिक पंडालों तक हर जगह गणपति उत्सव की तैयारियां दिखाई दे रही हैं। श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ भगवान गणेश की पूजा अर्चना में जुटे हैं। अगले दस दिनों तक शहर में धार्मिक आयोजनों के साथ भक्ति और उत्सव का माहौल बना रहने की उम्मीद है।

  • गणेश चतुर्थी पर भव्य होंगे बप्पा के दरबार खजराना में स्वर्ण आभूषण तो बड़ा गणपति में 101 किलो का भोग

    गणेश चतुर्थी पर भव्य होंगे बप्पा के दरबार खजराना में स्वर्ण आभूषण तो बड़ा गणपति में 101 किलो का भोग


    इंदौर । गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर आज मध्य प्रदेश में घर घर गणपति बप्पा विराजेंगे। शहरों से लेकर गांवों तक भगवान गणेश की स्थापना को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिल रहा है। इंदौर उज्जैन और प्रदेश के दूसरे प्रमुख गणेश मंदिरों में भी विशेष पूजा अर्चना और आकर्षक श्रृंगार की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। मंदिरों में सुबह से ही भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है और पूरे माहौल में गणपति बप्पा के जयकारे गूंज रहे हैं।

    इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर में गणेश चतुर्थी के मौके पर भगवान का बेहद भव्य श्रृंगार किया जाएगा। बप्पा को करीब 7 करोड़ रुपये के स्वर्ण आभूषण धारण कराए जाएंगे। इससे पहले ब्रह्म मुहूर्त में भगवान गणेश को हीरे जड़ित नेत्र धारण कराए गए। मंदिर में हर दिन अलग और आकर्षक श्रृंगार किया जाएगा। गणेश चतुर्थी पर विशेष पूजा के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

    खजराना गणेश मंदिर में गणेशोत्सव को लेकर प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की ओर से भी विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। गणेश चतुर्थी के मौके पर इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा और नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल ने मंदिर पहुंचकर ध्वज पूजन किया। अधिकारियों ने विधि विधान से पूजा अर्चना कर प्रदेश की सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

    इंदौर के ही पश्चिम क्षेत्र में स्थित बड़ा गणपति मंदिर भी इस बार विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा। मंदिर की विशाल गणेश प्रतिमा करीब 25 फीट ऊंची और 14 फीट चौड़ी है। इस वर्ष मंदिर के 125 वर्ष पूरे होने के कारण गणेशोत्सव का उत्साह और भी खास है। गणेश चतुर्थी पर भगवान को करीब 101 किलो लड्डुओं का भोग लगाया जाएगा। यह भोग शुद्ध गाय के घी से तैयार किया गया है। इसमें अलग अलग आकार के लड्डू शामिल होंगे।

    बड़ा गणपति मंदिर में रोजाना रात 9 बजे एक घंटे की संगीतमय आरती होगी। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिर में आने और जाने के लिए अलग अलग प्रवेश द्वार बनाए गए हैं। भक्तों को निर्धारित समय के अनुसार भगवान के दर्शन कराए जाएंगे ताकि व्यवस्था सुचारू बनी रहे।

    उज्जैन के प्रसिद्ध चिंतामन गणेश मंदिर की परंपरा भी गणेश चतुर्थी पर श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहती है। यहां भगवान की पीठ की ओर उल्टा स्वास्तिक बनाने की मान्यता है। श्रद्धालु मनोकामना लेकर मंदिर के पीछे उल्टा स्वास्तिक बनाते हैं। खासतौर पर संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले लोग इस परंपरा का पालन करते हैं। मान्यता पूरी होने के बाद श्रद्धालु दोबारा मंदिर पहुंचकर सीधा स्वास्तिक बनाते हैं।

    चिंतामन गणेश मंदिर में श्रद्धालु रक्षा सूत्र भी बांधते हैं और मनोकामना पूरी होने के बाद उसे खोलने के लिए वापस आते हैं। मंदिर परिसर में तुलादान की भी परंपरा है। कई श्रद्धालु मनोकामना पूरी होने पर अनाज लड्डू या अन्य प्रसाद से तुलादान करते हैं। कुछ परिवार संतान प्राप्ति के बाद बच्चे के वजन के बराबर लड्डुओं का तुलादान कर प्रसाद भक्तों में बांटते हैं।

    इस तरह गणेश चतुर्थी पर मध्य प्रदेश के प्रमुख गणेश मंदिरों में आस्था और भव्यता का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। घरों से लेकर मंदिरों तक हर जगह बप्पा के स्वागत की तैयारियां पूरी हैं और श्रद्धालु गणपति से सुख समृद्धि और मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना कर रहे हैं।

  • गणेश चतुर्थी से जुड़े बॉलीवुड के वो सीन जो आज भी याद हैं गणपति उत्सव के बीच आया कहानी में बड़ा मोड़

    गणेश चतुर्थी से जुड़े बॉलीवुड के वो सीन जो आज भी याद हैं गणपति उत्सव के बीच आया कहानी में बड़ा मोड़


    नई दिल्ली। गणेश चतुर्थी का त्योहार देशभर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। खासकर मुंबई में गणपति उत्सव का नजारा देखते ही बनता है। गलियों में गूंजते गणपति बप्पा मोरया के जयकारे और ढोल नगाड़ों की आवाज इस त्योहार को खास बना देती है। बॉलीवुड भी लंबे समय से गणेश उत्सव की इसी भव्यता को अपनी फिल्मों में दिखाता आया है। कई फिल्मों में गणपति पूजा और विसर्जन केवल धार्मिक आयोजन या गीतों तक सीमित नहीं रहे बल्कि इनका इस्तेमाल कहानी को नया मोड़ देने के लिए किया गया।

    बॉलीवुड की चर्चित फिल्म डॉन इसका बेहतरीन उदाहरण है। साल 2006 में रिलीज हुई इस फिल्म में शाह रुख खान ने डॉन का किरदार निभाया था। फिल्म के गणपति विसर्जन वाले दृश्य में जबरदस्त भीड़ और उत्सव के बीच पुलिस डॉन का पीछा करती है। इसी अफरा तफरी में डॉन घायल होकर कोमा में चला जाता है। इसके बाद कहानी पूरी तरह बदल जाती है। डॉन की जगह उसके हमशक्ल विजय को गैंग में भेजा जाता है। गणपति विसर्जन के बीच घटने वाली यह घटना फिल्म के सस्पेंस और पहचान से जुड़े सबसे बड़े मोड़ों में से एक बन जाती है।

    संजय दत्त की फिल्म वास्तव द रियलिटी में भी गणपति विसर्जन कहानी के बेहद भावुक और निर्णायक हिस्से के रूप में सामने आता है। रघु परिस्थितियों के कारण अपराध की दुनिया में पहुंच जाता है और धीरे धीरे एक खतरनाक गैंगस्टर बन जाता है। फिल्म के अंत में गणपति विसर्जन का जुलूस चल रहा होता है। चारों तरफ भीड़ और बप्पा के जयकारों के बीच रघु अपनी मां तक पहुंचता है। मां समझ जाती है कि उसका बेटा अपराध की दुनिया से वापस नहीं लौट सकता। इसके बाद वह ऐसा फैसला लेती है जो हिंदी सिनेमा के सबसे दर्दनाक क्लाइमेक्स में गिना जाता है। गणपति विसर्जन के बीच मां अपने ही बेटे को गोली मार देती है।

    ऋतिक रोशन की अग्निपथ में भी गणपति उत्सव कहानी के महत्वपूर्ण हिस्से से जुड़ा है। देवा श्री गणेशा गीत के दौरान विजय गणपति पूजा करता है और इसके बाद अपने दुश्मन सूर्या को खत्म करने के लिए आगे बढ़ता है। सूर्या की हत्या के बाद कांचा चीना विजय और उसके परिवार को खत्म करने की कसम खाता है। इस तरह गणपति उत्सव के दौरान लिया गया फैसला आगे की कहानी में बड़े संघर्ष की नींव रखता है।

    राम गोपाल वर्मा की सरकार 3 में भी गणपति आरती के दौरान कहानी में बड़ा मोड़ आता है। अमिताभ बच्चन का किरदार सुभाष नागरे गणपति आरती कर रहा होता है तभी उस पर गोलीबारी होती है। यह हमला फिल्म में चल रही राजनीतिक साजिशों और सत्ता संघर्ष को नया मोड़ देता है।

    इन फिल्मों को देखकर साफ समझ आता है कि बॉलीवुड ने गणेश चतुर्थी को सिर्फ आस्था और उत्सव के दृश्य के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया। कई बार बप्पा की मौजूदगी कहानी के सबसे अहम मोड़ का कारण बनी। कहीं पहचान बदली तो कहीं रिश्तों की परीक्षा हुई और कहीं दुश्मनी ने नया रूप लिया। यही वजह है कि गणपति उत्सव से जुड़े ये फिल्मी दृश्य आज भी दर्शकों की यादों में खास जगह बनाए हुए हैं।

  • हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी आज एक साथ बना खास संयोग सुबह निर्जला व्रत तो दोपहर में होगी बप्पा की स्थापना

    हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी आज एक साथ बना खास संयोग सुबह निर्जला व्रत तो दोपहर में होगी बप्पा की स्थापना


    भोपाल। भोपाल में आज धार्मिक आस्था का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन पड़ने से शहर में सुबह से लेकर रात तक धार्मिक आयोजनों की रौनक बनी रहेगी। दिन की शुरुआत महिलाओं के निर्जला व्रत से होगी। इसके बाद दोपहर में शुभ मुहूर्त में घरों और सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश की स्थापना की जाएगी। शाम को प्रदोष काल में महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती का विधि-विधान से पूजन करेंगी। इसके बाद रातभर जागरण और आराधना का सिलसिला चलेगा।

    तिथि भेद के कारण इस बार हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का यह विशेष संयोग बना है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 14 सितंबर की सुबह 7 बजकर 6 मिनट तक तृतीया तिथि रहेगी। इसके बाद चतुर्थी तिथि का आरंभ होगा। गणेश प्रतिमा स्थापना के लिए सुबह 11 बजकर 2 मिनट से दोपहर 1 बजकर 30 मिनट तक का समय शुभ बताया गया है। इसी अवधि में घरों और गणेश पंडालों में विधि-विधान से भगवान गणेश की स्थापना की जाएगी।

    हरतालिका तीज के अवसर पर महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखेंगी। शाम को प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाएगी। मान्यता के अनुसार महिलाएं इस दौरान सुखी दांपत्य जीवन और पति की दीर्घायु की कामना करती हैं। पूजन के बाद रातभर जागरण कर तीज की पूजा और आराधना की जाएगी। इस वजह से आज शहर के कई इलाकों में देर रात तक धार्मिक गतिविधियां जारी रहने की संभावना है।

    गणेश उत्सव को लेकर भी भोपाल में तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। शहर में 300 से अधिक बड़े गणेश पंडाल सजकर तैयार हैं जबकि 700 से ज्यादा छोटी झांकियां और अन्य धार्मिक आयोजन भी बनाए गए हैं। रविवार सुबह से ही कई स्थानों पर गणपति बप्पा की अगवानी शुरू हो गई थी। सोमवार को शुभ मुहूर्त में गणेश प्रतिमाओं की स्थापना के साथ उत्सव का विधिवत आगाज होगा।

    टीटी नगर जहांगीराबाद जवाहर चौक कोलार मंगलवारा और बरखेड़ा पठानी सहित कई इलाकों में गणेश प्रतिमाओं की दुकानें सजी हुई हैं। रविवार को बड़ी संख्या में लोग अपने घरों और पंडालों के लिए भगवान गणेश की प्रतिमाएं खरीदते नजर आए। बाजारों में गणेश प्रतिमाओं के साथ पूजा सामग्री और सजावट की वस्तुओं की भी मांग रही।

    वहीं हरतालिका तीज को लेकर भी शहर के प्रमुख बाजारों में महिलाओं की भीड़ दिखाई दी। न्यू मार्केट और दस नंबर समेत कई बाजारों में महिलाओं ने चूड़ी मेहंदी साड़ी और साज-श्रृंगार की सामग्री खरीदी। पूजन सामग्री की दुकानों पर भी दिनभर ग्राहकों की आवाजाही रही।

    तीज और गणेश चतुर्थी के बाद धार्मिक पर्वों का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। 15 सितंबर को ऋषि पंचमी मनाई जाएगी। इस दिन सप्त ऋषियों और अरुंधती का पूजन किया जाएगा। इसके बाद 19 सितंबर को राधा अष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। ऐसे में आने वाले दिनों में भी भोपाल में धार्मिक आयोजनों और आस्था से जुड़े कार्यक्रमों की रौनक बनी रहेगी

  • गणपति के कितने रूप कहीं पत्नी नहीं तो कहीं रिद्धि-सिद्धि का साथ जानिए देशभर में क्यों अलग है बप्पा का स्वरूप

    गणपति के कितने रूप कहीं पत्नी नहीं तो कहीं रिद्धि-सिद्धि का साथ जानिए देशभर में क्यों अलग है बप्पा का स्वरूप


    नई दिल्ली। गणेश चतुर्थी का पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है लेकिन इस त्योहार की खासियत केवल इसकी भव्यता नहीं बल्कि भगवान गणेश को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचलित मान्यताएं भी हैं। देश के एक हिस्से में गणपति को ब्रह्मचारी माना जाता है तो दूसरे हिस्से में उन्हें रिद्धि-सिद्धि के पति के रूप में पूजा जाता है। कहीं वे बाल गणपति हैं तो कहीं सिद्धि-विनायक और महागणपति के रूप में उनकी आराधना होती है। यही विविधता गणेश उपासना को बेहद व्यापक और रोचक बनाती है।

    भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। महाराष्ट्र में इस पर्व का विशेष महत्व है जहां बड़े-बड़े पंडालों में गणपति की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। पिछले कुछ दशकों में गणेशोत्सव महाराष्ट्र और दक्षिण तथा पश्चिम भारत से निकलकर उत्तर भारत के कई हिस्सों तक पहुंचा है। अब यह किसी एक क्षेत्र तक सीमित त्योहार नहीं रह गया है। अलग-अलग स्थानों पर गणपति के स्वरूप और उनसे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं भी अपने स्थानीय इतिहास और परंपराओं के अनुसार विकसित हुई हैं।

    दक्षिण भारत की कई धार्मिक परंपराओं में भगवान गणेश को अविवाहित और ब्रह्मचारी माना जाता है। यहां उनका ब्रह्मचर्य संयम ज्ञान और आध्यात्मिक शक्ति से जोड़ा जाता है। इससे जुड़ी लोककथाओं में कहा जाता है कि गणेश अपनी माता पार्वती को आदर्श स्त्री मानते थे और उनके समान गुणों वाली स्त्री मिलने पर ही विवाह करना चाहते थे। एक अन्य कथा में यह विचार मिलता है कि संसार की सभी स्त्रियां आदिशक्ति और माता पार्वती का ही अंश हैं इसलिए गणेश ने विवाह न करने का निर्णय लिया। तमिलनाडु के सुचिंद्रम में गणेश के स्त्री रूप विनायकी की प्राचीन प्रतिमा भी इस परंपरा की विशिष्टता को दर्शाती है।

    वहीं उत्तर भारत में गणपति की छवि काफी अलग दिखाई देती है। यहां उन्हें रिद्धि-सिद्धि दाता और सिद्धि-बुद्धि के पति के रूप में पूजा जाता है। कई चित्रों और प्रतिमाओं में गणेशजी के साथ दो स्त्री आकृतियां दिखाई देती हैं। शिव पुराण से जुड़ी कथा में प्रजापति विश्वरूप की पुत्रियों सिद्धि और बुद्धि का विवाह गणेशजी से बताया गया है। इसी परंपरा से क्षेम और लाभ जैसे पुत्रों का उल्लेख मिलता है जो बाद में लोकप्रिय मान्यताओं में शुभ-लाभ के रूप में अधिक प्रसिद्ध हुए।

    इन मान्यताओं का प्रतीकात्मक अर्थ भी काफी महत्वपूर्ण है। बुद्धि विवेक और ज्ञान का प्रतीक है जबकि सिद्धि सफलता या आध्यात्मिक उपलब्धि का संकेत देती है। रिद्धि समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है। यानी गणपति के साथ इन शक्तियों का जुड़ाव यह संदेश देता है कि जहां विवेक और बुद्धि है वहां सफलता और समृद्धि का मार्ग भी खुलता है।

    महाराष्ट्र में गणपति लोकजीवन का अहम हिस्सा हैं। अष्टविनायक की परंपरा से लेकर सार्वजनिक गणेशोत्सव तक यहां गणपति के अनेक स्वरूप देखने को मिलते हैं। वहीं बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान गणेशजी के पास साड़ी में लिपटा केले का पौधा दिखाई देता है जिसे कोला बऊ कहा जाता है। लोकमान्यता में इसे गणेश की पत्नी माना जाता है लेकिन धार्मिक परंपरा में कोला बऊ वास्तव में नवपत्रिका पूजा का हिस्सा है।

    तांत्रिक और शाक्त परंपराओं में भी गणपति के अलग स्वरूप मिलते हैं। उच्छिष्ट गणपति महागणपति ऊर्ध्व गणपति पिंगल गणपति और लक्ष्मी गणपति जैसे रूपों में वे शक्ति के साथ दिखाई देते हैं। इन स्वरूपों को सामान्य वैवाहिक अर्थ में नहीं बल्कि शक्ति और सृजनात्मक ऊर्जा के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

    इस तरह भगवान गणेश के अलग-अलग रूप और उनसे जुड़ी मान्यताएं एक-दूसरे के विरोधी नहीं बल्कि भारतीय धार्मिक परंपराओं की विविधता को दर्शाती हैं। क्षेत्र बदलने के साथ पूजा की शैली और मान्यता बदल सकती है लेकिन गणपति का मूल भाव वही रहता है। वे बुद्धि विवेक और विघ्नों को दूर करने वाली शक्ति के देवता हैं। यही कारण है कि किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेशजी का स्मरण करने की परंपरा आज भी पूरे देश में कायम है।

  • गणेश चतुर्थी पर क्यों खास मानी जाती है गणपति पूजा जानिए बप्पा की स्थापना से लेकर विसर्जन तक की पूरी जानकारी

    गणेश चतुर्थी पर क्यों खास मानी जाती है गणपति पूजा जानिए बप्पा की स्थापना से लेकर विसर्जन तक की पूरी जानकारी


    नई दिल्ली। गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है जिसे भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। भगवान गणेश को बुद्धि विवेक सुख समृद्धि और शुभता का देवता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले गणपति का स्मरण करने की परंपरा है। यही वजह है कि गणेश चतुर्थी के अवसर पर घरों और सार्वजनिक स्थानों पर गणपति की प्रतिमा स्थापित करके विधि विधान से पूजा की जाती है। इस पर्व के दौरान भक्त भगवान गणेश से परिवार की सुख शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
    गणेश चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद घर और पूजा स्थल की साफ सफाई करनी चाहिए। पूजा के स्थान को स्वच्छ करके वहां गणपति की प्रतिमा स्थापित की जाती है। मान्यता के अनुसार भगवान गणेश की प्रतिमा को स्थापित करते समय श्रद्धा और शुद्ध भावना का विशेष महत्व होता है। पूजा के दौरान गणेश जी को दूर्वा अर्पित की जाती है। दूर्वा को भगवान गणेश का प्रिय माना जाता है। इसके साथ ही मोदक और अन्य मिठाइयों का भोग लगाया जाता है।

    गणपति पूजा में सिंदूर और लाल फूल अर्पित करने की भी परंपरा है। भक्त भगवान गणेश का ध्यान करते हुए मंत्रों का जाप करते हैं और आरती करते हैं। पूजा के दौरान परिवार के सभी सदस्य एक साथ शामिल होकर भगवान गणेश से अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की प्रार्थना कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं में गणेश जी को विघ्नहर्ता कहा गया है इसलिए भक्त उनसे जीवन में आने वाली परेशानियों को दूर करने की कामना करते हैं।

    गणेश चतुर्थी केवल पूजा का पर्व नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सव भी है। कई स्थानों पर बड़े पंडाल लगाए जाते हैं जहां श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। घरों में भी कई परिवार अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार गणपति की स्थापना करते हैं। गणेश उत्सव के दौरान भजन कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इस दौरान पर्यावरण का ध्यान रखना भी जरूरी है। गणपति की प्रतिमा और सजावट के लिए पर्यावरण के अनुकूल सामग्री का इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प माना जाता है।

    गणेश प्रतिमा का विसर्जन भी इस पर्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अलग अलग परिवार और परंपराएं अपनी मान्यता के अनुसार गणपति विसर्जन का दिन तय करती हैं। विसर्जन से पहले भगवान गणेश की विधिवत पूजा और आरती की जाती है। भक्त गणपति से अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना करते हुए श्रद्धा के साथ प्रतिमा का विसर्जन करते हैं। पर्यावरण की सुरक्षा के लिए प्रशासन द्वारा निर्धारित स्थानों और कृत्रिम विसर्जन कुंडों का इस्तेमाल करना बेहतर होता है।

    गणेश चतुर्थी का संदेश केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है बल्कि यह जीवन में बुद्धि विवेक अनुशासन और सकारात्मक सोच को अपनाने की प्रेरणा भी देता है। भगवान गणेश की पूजा करते समय दिखावे से अधिक श्रद्धा और स्वच्छ भावना को महत्व देना चाहिए। यही इस पावन पर्व की सबसे बड़ी भावना मानी जाती है।