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  • गणेश जी ने तुलसी को क्यों दिया असुर से विवाह का श्राप? जानिए गणेश चतुर्थी पर तुलसी न चढ़ाने की वजह

    गणेश जी ने तुलसी को क्यों दिया असुर से विवाह का श्राप? जानिए गणेश चतुर्थी पर तुलसी न चढ़ाने की वजह


    नई दिल्ली। गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश की आराधना और उनके स्वागत का विशेष अवसर माना जाता है। इस दिन घरों और पंडालों में गणपति बप्पा की स्थापना की जाती है और विधि विधान से पूजा अर्चना की जाती है। इस वर्ष गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 14 सितंबर की सुबह 7 बजकर 6 मिनट से शुरू होकर 15 सितंबर की सुबह 7 बजकर 44 मिनट तक रहेगी। भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल में माना जाता है इसलिए 14 सितंबर को ही गणेश चतुर्थी का मुख्य पर्व मनाया जाएगा।

    भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा घास मोदक लाल फूल और कई तरह की पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। लेकिन एक ऐसी पवित्र मानी जाने वाली चीज भी है जिसे गणेश जी को चढ़ाना वर्जित माना गया है और वह है तुलसी। तुलसी को हिंदू धर्म में बेहद पवित्र पौधा माना जाता है और भगवान विष्णु की पूजा में इसका विशेष महत्व है। इसके बावजूद गणेश जी की पूजा में तुलसी पत्र नहीं चढ़ाया जाता। इसके पीछे एक रोचक पौराणिक कथा बताई जाती है।

    पौराणिक कथा के अनुसार एक बार भगवान गणेश नदी के किनारे गहरे ध्यान में लीन होकर तपस्या कर रहे थे। उसी दौरान देवी तुलसी वहां से गुजरीं। उन्होंने तपस्या में लीन गणेश जी के तेजस्वी और आकर्षक स्वरूप को देखा तो उनके मन में गणेश जी से विवाह करने की इच्छा उत्पन्न हो गई। देवी तुलसी ने गणेश जी के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा। उस समय गणेश जी ने स्वयं को ब्रह्मचारी बताते हुए उनके प्रस्ताव को स्वीकार करने से विनम्रता से इनकार कर दिया।

    गणेश जी के इनकार से देवी तुलसी नाराज हो गईं। क्रोध में उन्होंने गणेश जी को श्राप दे दिया कि उनकी इच्छा के विरुद्ध उनका विवाह होगा। देवी तुलसी के श्राप से गणेश जी भी क्रोधित हो गए और उन्होंने तुलसी को जवाब में श्राप दिया कि उनका विवाह किसी देवता से नहीं बल्कि एक असुर से होगा। यह सुनकर तुलसी जी को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने गणेश जी से क्षमा मांगी।

    देवी तुलसी की प्रार्थना सुनकर गणेश जी ने उन्हें क्षमा कर दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि भविष्य में तुलसी भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय होंगी और उनकी पूजा में तुलसी का विशेष महत्व होगा। हालांकि गणेश जी की पूजा में तुलसी का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी कथा के कारण आज भी गणेश जी को तुलसी पत्र अर्पित करना वर्जित माना जाता है।

    गणेश चतुर्थी पर भक्त भगवान गणेश की कृपा पाने के लिए उनकी पूजा में विशेष रूप से दूर्वा अर्पित करते हैं। मान्यता है कि दूर्वा गणेश जी को अत्यंत प्रिय है और इसे अर्पित करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। ऐसे में गणेश चतुर्थी के दिन पूजा करते समय तुलसी की जगह दूर्वा लाल फूल मोदक और अन्य प्रिय सामग्री अर्पित करने की परंपरा निभाई जाती है। हालांकि ये बातें धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं पर आधारित हैं।

  • गणेश चतुर्थी पर होगा India-Afghanistan T20 का महामुकाबला? ACB ने BCCI से मांगी 14 सितंबर की तारीख

    गणेश चतुर्थी पर होगा India-Afghanistan T20 का महामुकाबला? ACB ने BCCI से मांगी 14 सितंबर की तारीख


    नई दिल्ली। भारत और अफगानिस्तान के बीच सितंबर में होने वाली तीन मैचों की T20 इंटरनेशनल सीरीज को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। दोनों टीमों के बीच मुकाबलों का कार्यक्रम पहले ही तय हो चुका है लेकिन अब अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड यानी ACB इसमें एक बदलाव चाहता है। ACB ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी BCCI से संपर्क कर सीरीज के एक मुकाबले को 14 सितंबर को कराने का प्रस्ताव रखा है। खास बात यह है कि 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी है। फिलहाल दोनों बोर्ड के बीच इस प्रस्ताव पर बातचीत चल रही है और अंतिम फैसला BCCI की मंजूरी के बाद ही होगा।

    मौजूदा कार्यक्रम के मुताबिक भारत और अफगानिस्तान के बीच तीनों T20 मुकाबले दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेले जाने हैं। पहला मैच 13 सितंबर को दूसरा 15 सितंबर और तीसरा मुकाबला 17 सितंबर को निर्धारित है। BCCI ने भी इस कार्यक्रम की पुष्टि की है। अब ACB चाहता है कि 13 या 15 सितंबर को होने वाले मुकाबलों में से किसी एक को 14 सितंबर को आयोजित किया जाए। यानी मैचों की संख्या में कोई बदलाव नहीं होगा बल्कि सिर्फ एक मुकाबले की तारीख बदली जाएगी।

    सवाल यह है कि आखिर ACB सोमवार यानी 14 सितंबर को ही मुकाबला क्यों कराना चाहता है। दरअसल 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी का त्योहार है और इस मौके पर दिल्ली में आंशिक छुट्टी रहने की उम्मीद है। आमतौर पर सोमवार को क्रिकेट मैच कराने पर कामकाजी दिन होने के कारण स्टेडियम में दर्शकों की संख्या कम रहने की आशंका रहती है। लेकिन गणेश चतुर्थी के कारण छुट्टी और त्योहार का माहौल होने से ACB को उम्मीद है कि मैच के लिए बड़ी संख्या में दर्शक स्टेडियम पहुंच सकते हैं। इससे मुकाबले की दर्शक उपस्थिति और फैन एंगेजमेंट बेहतर होने की संभावना है।

    अगर BCCI इस प्रस्ताव पर सहमत हो जाता है तो भारत और अफगानिस्तान के बीच होने वाली सीरीज का एक मुकाबला गणेश चतुर्थी के दिन खेला जाएगा। हालांकि अभी इसे अंतिम कार्यक्रम नहीं माना जा सकता। जब तक BCCI की मंजूरी नहीं मिलती तब तक आधिकारिक शेड्यूल 13 15 और 17 सितंबर का ही रहेगा।

    इस सीरीज की एक और खास बात यह है कि मुकाबले भारत में होने के बावजूद इसे अफगानिस्तान की घरेलू सीरीज माना जा रहा है। सुरक्षा परिस्थितियों के कारण अफगानिस्तान लंबे समय से अपने कई अंतरराष्ट्रीय घरेलू मुकाबले विदेशों में आयोजित करता रहा है। इस बार दिल्ली को उसके होम मैचों के लिए चुना गया है। Reuters के मुताबिक भारत ने अफगानिस्तान को इस महत्वपूर्ण सीरीज की मेजबानी के लिए अपनी सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं।

    भारत और अफगानिस्तान के लिए यह सीरीज एशियन गेम्स की तैयारियों के लिहाज से भी अहम होगी। दोनों टीमें आगामी बड़े मुकाबलों से पहले T20 फॉर्मेट में अपनी तैयारियों को परखना चाहेंगी। दिल्ली में लगातार तीन मुकाबले होने से खिलाड़ियों को परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने का मौका भी मिलेगा।

    इस बीच भारत के बांग्लादेश दौरे को लेकर भी स्थिति बदलती नजर आ रही है। पहले सितंबर में भारतीय टीम के बांग्लादेश दौरे का कार्यक्रम सामने आया था लेकिन अब अफगानिस्तान के खिलाफ T20 सीरीज की पुष्टि के बाद उस दौरे की संभावना कम बताई जा रही है। ऐसे में सितंबर में भारतीय टीम के लिए अफगानिस्तान के खिलाफ दिल्ली में होने वाली T20 सीरीज महत्वपूर्ण मुकाबलों में से एक हो सकती है।

    फिलहाल क्रिकेट फैंस की नजर BCCI के फैसले पर है। अगर भारतीय बोर्ड ACB के प्रस्ताव को मंजूरी दे देता है तो 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के दिन दिल्ली में भारत और अफगानिस्तान के बीच T20 मुकाबला देखने को मिल सकता है। यानी अभी मैच की तारीख बदली नहीं है लेकिन ACB की मांग ने सीरीज के कार्यक्रम में एक दिलचस्प ट्विस्ट जरूर ला दिया है।