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  • Gold Price Today: 19 अक्टूबर को सोने के भाव में तेजी, दिल्ली, मुंबई, भोपाल और इंदौर समेत जानें 24K, 22K और 18K के ताजा रेट

    Gold Price Today: 19 अक्टूबर को सोने के भाव में तेजी, दिल्ली, मुंबई, भोपाल और इंदौर समेत जानें 24K, 22K और 18K के ताजा रेट


    नई दिल्ली ।
    19 अक्टूबर 2026 को सोने की कीमतों में तेजी देखने को मिली। दो दिन के अंतराल के बाद बाजार खुलते ही सोने के वायदा भाव में बढ़त दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में 24 कैरेट सोने का वायदा मूल्य 421 रुपये यानी 0.28 प्रतिशत बढ़कर 1,48,339 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया। पिछले कारोबारी सत्र में यह 1,47,918 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।

    सोने की कीमतों में अलग-अलग बाजार दरों के अनुसार अंतर भी देखने को मिला। एक दर के मुताबिक 24 कैरेट सोने की कीमत 1,48,610 रुपये प्रति 10 ग्राम रही, जबकि दूसरी दर के अनुसार इसका भाव 1,47,810 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 4,199.60 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। ऐसे में सोना खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए अपने शहर का ताजा भाव जानना जरूरी है।

    देश के प्रमुख शहरों में सोने की कीमतें

    19 अक्टूबर को दिल्ली में 24 कैरेट सोने का भाव 1,47,810 रुपये, 22 कैरेट का 1,35,500 रुपये और 18 कैरेट का 1,10,890 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। मुंबई और कोलकाता में 24 कैरेट सोना 1,47,660 रुपये, 22 कैरेट 1,35,350 रुपये और 18 कैरेट 1,10,740 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया।

    पटना में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,47,710 रुपये, 22 कैरेट की 1,35,400 रुपये और 18 कैरेट की 1,10,790 रुपये प्रति 10 ग्राम रही। भोपाल, इंदौर, अहमदाबाद, वडोदरा और सूरत में भी यही दरें दर्ज की गईं। वहीं, लखनऊ, मेरठ, अयोध्या, कानपुर, आगरा, वाराणसी, प्रयागराज, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, जयपुर और चंडीगढ़ में 24 कैरेट सोने का भाव 1,47,810 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा।

    चेन्नई में 24 कैरेट सोना 1,47,660 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,35,350 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। यहां 18 कैरेट सोने की कीमत 1,11,250 रुपये रही। पुणे, नागपुर, बेंगलुरु, हैदराबाद और भुवनेश्वर सहित कई अन्य शहरों में 24 कैरेट सोने का भाव 1,47,660 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। नासिक और वसई-विरार में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,47,690 रुपये दर्ज की गई।

    पिछले कारोबारी सत्र में सोने का हाल
    पिछले कारोबारी सत्र में दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोने की कीमतें स्थिर रही थीं। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने का भाव सभी करों सहित 1,49,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बना रहा। हालांकि, सप्ताह के दौरान कीमतों में कुल 4,500 रुपये यानी लगभग तीन प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 0.30 प्रतिशत बढ़कर 4,183.34 डॉलर प्रति औंस पहुंच गया था।

    वायदा बाजार में दिसंबर में आपूर्ति वाले सोने के अनुबंध की कीमत 876 रुपये यानी 0.59 प्रतिशत बढ़कर 1,48,365 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई थी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर न्यूयॉर्क में सोने का भाव 4,171.84 डॉलर प्रति औंस दर्ज किया गया था। मजबूत हाजिर मांग और कारोबारियों की नई खरीदारी से वायदा कीमतों को सहारा मिला।

    रुपये की मजबूती का सोने पर असर
    भारतीय रुपये की मजबूती भी घरेलू सोने की कीमतों को प्रभावित कर रही है। पिछले कारोबारी सत्र में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया सात पैसे मजबूत होकर 94.92 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। रुपये में लगातार छठे कारोबारी सत्र में मजबूती दर्ज की गई।

    भारत अपनी सोने की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में रुपये की मजबूती से आयात लागत कम हो सकती है और घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में तेजी सीमित रह सकती है। बाजार के जानकारों के अनुसार, सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट के बाद कुछ सुधार देखने को मिला है। सोना 1.49 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से नीचे आने के बाद नुकसान की भरपाई करने की कोशिश कर रहा है।

    आने वाले समय में सोने का कारोबार सीमित दायरे में रहने के साथ हल्की तेजी दिखा सकता है। बाजार की दिशा पर कच्चे तेल की कीमतों का असर भी महत्वपूर्ण रह सकता है। हालांकि, सोने के भाव में शहर, शुद्धता और स्थानीय बाजार के अनुसार अंतर हो सकता है। खरीदारी से पहले संबंधित शहर के ताजा भाव और आभूषणों पर लागू अतिरिक्त शुल्क की जानकारी लेना उपयोगी रहेगा।

  • सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट, इस सप्ताह सोना 2,800 रुपये और चांदी 5,000 रुपये तक सस्ती

    सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट, इस सप्ताह सोना 2,800 रुपये और चांदी 5,000 रुपये तक सस्ती


    नई दिल्ली:
    त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले भारतीय सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। वैश्विक और घरेलू बाजारों के मिले-जुले रुख के बीच पूरे सप्ताह दोनों कीमती धातुओं के भाव में उतार-चढ़ाव रहा। सप्ताह के दौरान सोने की कीमत में कुल मिलाकर 2,800 रुपये प्रति 10 ग्राम यानी करीब 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर, चांदी के भाव में भी सप्ताह के आखिरी कारोबारी सत्रों में करीब 5,000 रुपये तक की बड़ी गिरावट दर्ज हुई। ऐसे में दोनों धातुओं की खरीदारी की योजना बना रहे लोगों के लिए इस सप्ताह के भाव महत्वपूर्ण रहे हैं।

    आज 22 कैरेट सोने की कीमत कई प्रमुख शहरों में 1,38,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से अधिक है, जबकि 24 कैरेट सोने का भाव 1,50,500 रुपये प्रति 10 ग्राम से ज्यादा बना हुआ है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के अलावा नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ और जयपुर जैसे शहरों में भी 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 1,38,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से अधिक है। 24 कैरेट सोने का भाव इन शहरों में 1,50,500 रुपये प्रति 10 ग्राम से ऊपर है। सप्ताह के दौरान गिरावट के बावजूद सोने की कीमतें इन स्तरों पर बनी हुई हैं।

    दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,50,550 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोने का भाव 1,38,004 रुपये प्रति 10 ग्राम है। मुंबई में 24 कैरेट सोना 1,50,400 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,37,854 रुपये प्रति 10 ग्राम है। अहमदाबाद में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,50,450 रुपये और 22 कैरेट की कीमत 1,37,904 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है। कोलकाता में 24 कैरेट सोने का भाव 1,50,400 रुपये और 22 कैरेट का भाव 1,37,854 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

    जयपुर में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,50,550 रुपये और 22 कैरेट की कीमत 1,38,004 रुपये प्रति 10 ग्राम है। बेंगलुरु में 24 कैरेट सोना 1,50,400 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,37,854 रुपये प्रति 10 ग्राम है। लखनऊ में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,50,550 रुपये और 22 कैरेट सोने का भाव 1,38,004 रुपये प्रति 10 ग्राम है। भोपाल में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,50,450 रुपये और 22 कैरेट सोने का भाव 1,37,904 रुपये प्रति 10 ग्राम है। इस तरह अलग-अलग शहरों में सोने के भाव में मामूली अंतर बना हुआ है।

    चांदी की कीमत की बात करें तो आज इसके भाव में कोई बदलाव नहीं हुआ है। हालांकि, पिछले कारोबारी सत्रों में हुई गिरावट के कारण अधिकांश शहरों में चांदी का भाव 2,26,570 रुपये प्रति किलोग्राम बना हुआ है। सप्ताह के आखिरी कारोबारी सत्रों में चांदी की कीमत में करीब 5,000 रुपये तक की गिरावट दर्ज की गई थी। इस तरह सप्ताह के दौरान सोने और चांदी दोनों के भाव में कमी देखने को मिली है। त्योहारों से पहले खरीदारी की योजना बना रहे लोगों के लिए मौजूदा बाजार भाव इसी स्तर पर बने हुए हैं।

  • 1 अक्टूबर को सोना महंगा, 24 कैरेट ₹1.48 लाख के पार; चांदी ₹2,21,954 प्रति किलो हुई सस्ती

    1 अक्टूबर को सोना महंगा, 24 कैरेट ₹1.48 लाख के पार; चांदी ₹2,21,954 प्रति किलो हुई सस्ती

    नई दिल्ली। 1 अक्टूबर 2026 को सोने की कीमतों में हल्की तेजी दर्ज की गई, जबकि चांदी के भाव में गिरावट आई। 24 कैरेट सोने का भाव 308 रुपये बढ़कर 1,48,687 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गया। इससे पहले बुधवार को 24 कैरेट सोने की कीमत 1,48,379 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। इसी तरह 22 कैरेट सोना भी महंगा हुआ। इसका भाव 282 रुपये बढ़कर 1,36,197 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया, जबकि बुधवार को यह 1,35,915 रुपये प्रति 10 ग्राम था। दूसरी ओर, चांदी की कीमत में 319 रुपये प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई। 1 अक्टूबर को एक किलो चांदी 2,21,954 रुपये पर आ गई, जबकि बुधवार को इसका भाव 2,22,273 रुपये प्रति किलो था।

    देश के प्रमुख शहरों में 22 कैरेट सोने के भाव में भी मामूली अंतर देखने को मिला। दिल्ली और लखनऊ में 22 कैरेट सोने की कीमत 1,36,950 रुपये प्रति 10 ग्राम रही। मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और रायपुर में यह भाव 1,36,800 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। भोपाल और अहमदाबाद में 22 कैरेट सोने की कीमत 1,36,850 रुपये प्रति 10 ग्राम रही। इन शहरों में आभूषणों की वास्तविक कीमत स्थानीय कर, मेकिंग चार्ज और बाजार की स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है। 24 कैरेट सोने के मानक बुलियन भाव और आभूषणों के खुदरा भाव में भी अंतर हो सकता है।

    सोना खरीदते समय उसकी शुद्धता और कीमत की जांच करना जरूरी है। खरीदारी के दौरान बीआईएस हॉलमार्क वाला सोना लेने पर ध्यान देना चाहिए। हॉलमार्क से सोने की शुद्धता और कैरेट की जानकारी मिलती है। सोने की कीमत 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होती है, इसलिए खरीदारी से पहले संबंधित दिन के भाव की जांच करना जरूरी है। आभूषण खरीदते समय केवल सोने की मूल कीमत ही नहीं, बल्कि उस पर लागू अन्य शुल्कों को भी ध्यान में रखना होता है।

    चांदी खरीदने वालों के लिए भी उसकी शुद्धता की जांच महत्वपूर्ण है। चांदी की वस्तु को चुंबक के पास ले जाकर शुरुआती तौर पर जांच की जा सकती है, क्योंकि शुद्ध चांदी चुंबक की ओर आकर्षित नहीं होती। हालांकि, केवल इस परीक्षण से शुद्धता की पक्की पुष्टि नहीं की जा सकती। बर्फ के जरिए भी एक शुरुआती जांच की जा सकती है, क्योंकि चांदी गर्मी को तेजी से स्थानांतरित करती है और उसकी सतह पर रखी बर्फ सामान्य धातुओं की तुलना में तेजी से पिघल सकती है। चांदी में तेज या असामान्य धातु जैसी गंध होना भी दूसरी धातु की मौजूदगी का संकेत हो सकता है।

    चांदी की सतह को साफ सफेद कपड़े से रगड़ने पर कभी-कभी कपड़े पर काला या गहरा निशान दिखाई दे सकता है। यह चांदी की सतह पर होने वाली ऑक्सीकरण प्रक्रिया के कारण हो सकता है, लेकिन इस तरीके से भी शुद्धता की अंतिम पुष्टि नहीं की जा सकती। घरेलू परीक्षण केवल शुरुआती अंदाजा लगाने में मदद करते हैं। चांदी की शुद्धता की सही पुष्टि के लिए हॉलमार्क, 925 स्टैम्प या पेशेवर शुद्धता जांच अधिक भरोसेमंद तरीका है। सोने और चांदी की कीमतों में बदलाव को देखते हुए खरीदारी से पहले संबंधित दिन के ताजा भाव और आभूषण की शुद्धता की जानकारी जांचना जरूरी है।

  • सोने की कीमतों में उछाल फिर भी चीन नहीं रुका! अगस्त में खरीदा 20 टन से ज्यादा गोल्ड लगातार 22 महीने की खरीदारी ने बढ़ाई दुनिया की चिंता

    सोने की कीमतों में उछाल फिर भी चीन नहीं रुका! अगस्त में खरीदा 20 टन से ज्यादा गोल्ड लगातार 22 महीने की खरीदारी ने बढ़ाई दुनिया की चिंता


    नई दिल्ली । चीन एक बार फिर अपने गोल्ड रिजर्व को लेकर पूरी दुनिया का ध्यान खींच रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं और इसके बावजूद चीन ने सोने की खरीदारी रोकने के बजाय इसे और तेज कर दिया है। अगस्त 2026 में चीन के केंद्रीय बैंक ने अपने गोल्ड रिजर्व में 20 टन से ज्यादा सोना जोड़ा है। खास बात यह है कि चीन की यह खरीदारी लगातार 22वें महीने भी जारी रही है। यानी करीब दो साल से ड्रैगन लगातार अपने सोने के भंडार को बढ़ाने में जुटा है।

    चीन के इस कदम को सामान्य निवेश की तरह नहीं देखा जा रहा है क्योंकि सोने की कीमतों में तेजी के बावजूद उसकी खरीदारी जारी है। ताजा खरीदारी के बाद चीन का गोल्ड रिजर्व बढ़कर करीब 2387 टन हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार अगस्त में चीन के गोल्ड रिजर्व में जुलाई के मुकाबले करीब 650000 औंस की बढ़ोतरी हुई है। यह अक्टूबर 2023 के बाद किसी एक महीने में चीन की सबसे बड़ी सोने की खरीदारी बताई गई है। अक्टूबर 2023 में चीन के रिजर्व में करीब 740000 औंस का इजाफा हुआ था।

    चीन की लगातार जारी गोल्ड खरीदारी के पीछे उसकी लंबी अवधि की आर्थिक रणनीति को अहम वजह माना जा रहा है। चीन अपने विदेशी मुद्रा भंडार को ज्यादा मजबूत और संतुलित बनाना चाहता है। इसके लिए वह केवल अमेरिकी डॉलर पर निर्भर रहने के बजाय सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों में भी अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहा है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में लगातार बदलते हालात के बीच सोने को एक सुरक्षित संपत्ति माना जाता है और चीन इसी वजह से अपने रिजर्व में इसकी मात्रा बढ़ाता दिखाई दे रहा है।

    चीन का यह कदम उसकी आर्थिक रणनीति का बड़ा हिस्सा माना जा सकता है। लगातार 22 महीने तक गोल्ड खरीदना बताता है कि यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है बल्कि इसके पीछे लंबी अवधि की योजना काम कर रही है। चीन अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ ही वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में अपनी स्थिति को मजबूत करना चाहता है। सोने के बढ़ते भंडार से उसे विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने का मौका मिलता है और किसी एक मुद्रा या संपत्ति पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

    चीन की यह खरीदारी साल 2015 के बाद सबसे लंबे गोल्ड खरीदारी अभियान के रूप में भी सामने आई है। 22 महीने से लगातार जारी यह सिलसिला इस बात का संकेत है कि बीजिंग सोने को अपने आर्थिक सुरक्षा कवच के तौर पर देख रहा है। दुनिया में आर्थिक और भू राजनीतिक अनिश्चितता के बीच चीन का यह कदम अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में अगर चीन इसी रफ्तार से सोना खरीदता रहा तो उसके गोल्ड रिजर्व में और बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

  • मुनाफावसूली के बाद भी सोने में तेजी के संकेत, एक्सपर्ट बोले- इस रेंज में खरीदारी का मौका न गंवाएं

    मुनाफावसूली के बाद भी सोने में तेजी के संकेत, एक्सपर्ट बोले- इस रेंज में खरीदारी का मौका न गंवाएं


    नई दिल्ली । सोने की चमक फिलहाल फीकी पड़ने के संकेत नहीं दे रही है। पिछले चार वर्षों में जिस रफ्तार से सोने की कीमतों ने ऊंचाई हासिल की है उसने निवेशकों और खरीदारों दोनों को हैरान कर दिया है। सितंबर 2022 में करीब 50 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास रहने वाला 24 कैरेट सोना अब सितंबर 2026 में करीब 1.55 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। यानी चार साल में सोने ने करीब 210 फीसदी का जबरदस्त रिटर्न दिया है। हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में मुनाफावसूली जरूर देखने को मिली है लेकिन बाजार विशेषज्ञ इसे तेजी के दौर का अंत नहीं बल्कि लंबे बुल रन के बीच सामान्य करेक्शन मान रहे हैं।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 29 जनवरी को 5608 डॉलर प्रति औंस के ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच गया था। इसके बाद कीमतों में करीब 20 फीसदी की गिरावट आई और फिलहाल सोना लगभग 4500 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है। हालांकि बाजार जानकारों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 4400 डॉलर प्रति औंस का महत्वपूर्ण स्तर बना रहता है तब तक सोने की तेजी को मजबूत समर्थन मिलता रहेगा। घरेलू बाजार में भी करीब 1.49 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार अगर वैश्विक बाजार में बड़ी गिरावट नहीं आती है तो दीपावली तक सोने का भाव 1.60 लाख से 1.62 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है।

    सोने की तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की लगातार बढ़ती खरीदारी है। वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच कई देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। इसे डी डॉलराइजेशन की रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। कई देशों को अब यह चिंता है कि विदेशी मुद्रा या दूसरे देशों के वित्तीय साधनों पर पूरी तरह निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है जबकि अपने पास रखा सोना अधिक सुरक्षित संपत्ति माना जाता है। यही वजह है कि चीन जैसे देश लगातार अपने स्वर्ण भंडार में इजाफा कर रहे हैं और अन्य केंद्रीय बैंक भी बड़ी मात्रा में खरीदारी कर रहे हैं।

    सोने की मजबूती की दूसरी बड़ी वजह इसकी मौद्रिक परिसंपत्ति के रूप में बढ़ती अहमियत है। पहले सोने को मुख्य रूप से महंगाई और आर्थिक संकट से बचाव के साधन के तौर पर देखा जाता था लेकिन अब वैश्विक स्तर पर इसे करेंसी के अवमूल्यन और वित्तीय जोखिमों के खिलाफ मजबूत सुरक्षा कवच माना जा रहा है। बदलती वैश्विक परिस्थितियों में निवेशकों और देशों दोनों के लिए सोना भरोसेमंद संपत्ति बनकर उभरा है।

    इसके अलावा भारत और चीन जैसे बड़े बाजारों में त्योहारों और शादी के सीजन के दौरान बढ़ने वाली भौतिक मांग भी कीमतों को मजबूत आधार दे रही है। आपूर्ति की सीमित स्थिति और संस्थागत खरीदारी के कारण सोने पर दबाव कम दिखाई दे रहा है। हालांकि कीमतों में बीच बीच में गिरावट संभव है लेकिन लंबी अवधि का रुझान अभी भी मजबूत माना जा रहा है।

    खरीदारी को लेकर विशेषज्ञों की सलाह है कि शादी या अन्य जरूरी जरूरतों के लिए सोना खरीदने वालों को बहुत बड़ी गिरावट का इंतजार नहीं करना चाहिए। यदि कीमत 1.45 लाख से 1.52 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में नीचे आती है तो चरणबद्ध तरीके से खरीदारी की जा सकती है। एक साथ पूरी रकम लगाने के बजाय जरूरत और बजट के हिसाब से 40 से 50 फीसदी खरीदारी पहले की जा सकती है। हालांकि निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि सोने की कीमतें वैश्विक बाजार और रुपये की चाल से प्रभावित होती हैं इसलिए तेजी की उम्मीद के बावजूद निवेश से पहले अपनी वित्तीय जरूरत और जोखिम क्षमता का आकलन जरूर करना चाहिए।

  • कीमती धातुओं में जबरदस्त तेजी, गोल्ड-सिल्वर मार्केट ने बनाया नया रिकॉर्ड; क्या है वजह?

    कीमती धातुओं में जबरदस्त तेजी, गोल्ड-सिल्वर मार्केट ने बनाया नया रिकॉर्ड; क्या है वजह?


    नई दिल्ली। पिछले 48 घंटों में सोना और चांदी की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है जिसने निवेशकों और खरीदारों दोनों को हैरान कर दिया है। घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक कीमती धातुओं में तेज खरीदारी देखने को मिली है। महज दो दिनों के भीतर सोने की कीमत में 5750 रुपये प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई जबकि चांदी ने 11000 रुपये से अधिक की छलांग लगाकर बाजार में नई हलचल पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और भू राजनीतिक घटनाक्रमों ने निवेशकों का रुख एक बार फिर सुरक्षित निवेश की ओर मोड़ दिया है।

    एमसीएक्स के ताजा आंकड़ों के अनुसार बुधवार रात सोना लगभग 148650 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ जबकि सोमवार को यह 142900 रुपये के स्तर पर था। यानी केवल 48 घंटे में सोने की कीमत 5750 रुपये बढ़ गई। इसी अवधि में चांदी 216506 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर करीब 227590 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई। इस तरह चांदी में भी 11084 रुपये की तेज बढ़त दर्ज की गई।

    हालांकि इतनी तेज रिकवरी के बावजूद दोनों कीमती धातुएं अभी भी अपने ऑल टाइम हाई से नीचे कारोबार कर रही हैं। सोना जनवरी में बने अपने रिकॉर्ड स्तर 193096 रुपये प्रति 10 ग्राम से अभी भी लगभग 44446 रुपये सस्ता है। वहीं चांदी भी अपने रिकॉर्ड स्तर 420048 रुपये प्रति किलोग्राम से करीब 192458 रुपये नीचे बनी हुई है। इसका मतलब है कि हालिया तेजी के बावजूद लंबी अवधि के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने में अभी काफी दूरी बाकी है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। सोना 4300 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार कर गया जो पिछले कई महीनों की सबसे बड़ी तेजी मानी जा रही है। चांदी में भी लगातार मजबूती दर्ज की गई और निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के तौर पर इन दोनों धातुओं में दिलचस्पी दिखाई। वैश्विक बाजार में आई इस तेजी का सीधा असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला।

    विशेषज्ञों के अनुसार इस उछाल की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया से आई सकारात्मक खबरें हैं। ईरान और ओमान के बीच संभावित समझौते तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा सुचारु रूप से खोलने की उम्मीद ने वैश्विक बाजार की धारणा बदल दी है। इससे कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम हुआ और महंगाई को लेकर निवेशकों की चिंता भी कुछ हद तक घटी। इसी कारण वित्तीय बाजारों में स्थिरता लौटने लगी और सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों में निवेश बढ़ गया।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के साथ बातचीत को लेकर दिए गए सकारात्मक बयान ने भी बाजार को मजबूती दी है। निवेशकों को उम्मीद है कि तनाव कम होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत मिलेगी। इसके साथ ही अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों को लेकर भी बाजार की उम्मीदें बदली हैं। अब माना जा रहा है कि इस वर्ष ब्याज दरों में अपेक्षाकृत कम बढ़ोतरी होगी। कम ब्याज दरों का माहौल आमतौर पर सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं के लिए सकारात्मक माना जाता है क्योंकि इन पर ब्याज नहीं मिलता और निवेशक इन्हें सुरक्षित विकल्प के रूप में चुनते हैं।

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में सोने और चांदी की चाल पूरी तरह वैश्विक घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी मौद्रिक नीति पर निर्भर करेगी। यदि भू राजनीतिक तनाव कम होता है और वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनी रहती है तो कीमतों में उतार चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी के बजाय बाजार की दिशा पर नजर रखते हुए सोच समझकर निवेश करना चाहिए।

  • सोने पर बढ़ा दुनिया का भरोसा: केंद्रीय बैंक बढ़ा रहे गोल्ड रिजर्व, कीमतों में बड़ी तेजी के संकेत

    सोने पर बढ़ा दुनिया का भरोसा: केंद्रीय बैंक बढ़ा रहे गोल्ड रिजर्व, कीमतों में बड़ी तेजी के संकेत

    नई दिल्ली । वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच सोना एक बार फिर सबसे भरोसेमंद निवेश विकल्प के रूप में उभर रहा है। दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी लगातार बढ़ा रहे हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के ताजा वार्षिक सर्वेक्षण ने यह संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में यह रुझान और तेज हो सकता है। इससे न केवल गोल्ड रिजर्व का महत्व बढ़ेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

    सर्वेक्षण में 76 केंद्रीय बैंकों ने हिस्सा लिया, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है। इसमें शामिल 84 प्रतिशत केंद्रीय बैंकों का मानना है कि अगले पांच वर्षों में वैश्विक भंडार में सोने की हिस्सेदारी मौजूदा स्तर की तुलना में काफी अधिक होगी। दिलचस्प बात यह है कि विकसित देशों के साथ-साथ उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों के केंद्रीय बैंक भी इस मुद्दे पर लगभग एक जैसी राय रखते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक वित्तीय प्रणाली में हो रहे बदलावों के कारण केंद्रीय बैंक अपनी आरक्षित संपत्तियों में विविधता लाने की कोशिश कर रहे हैं। लंबे समय तक अमेरिकी डॉलर को सबसे सुरक्षित रिजर्व मुद्रा माना जाता रहा, लेकिन हाल के वर्षों में भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक प्रतिबंधों और वैश्विक व्यापार में बदलावों के चलते कई देशों ने वैकल्पिक सुरक्षित संपत्तियों की तलाश शुरू कर दी है। सोना इस रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर सामने आया है।

    अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के आंकड़े भी इस बदलाव की पुष्टि करते हैं। वैश्विक विदेशी मुद्रा भंडार में अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी लगातार घट रही है। सर्वेक्षण में शामिल 74 प्रतिशत रिजर्व प्रबंधकों का अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में डॉलर की हिस्सेदारी और कम हो सकती है। ऐसे में सोना केंद्रीय बैंकों के लिए सुरक्षा कवच की भूमिका निभा सकता है।

    बाजार विशेषज्ञ और केडिया एडवाइजरी के निदेशक अजय केडिया का कहना है कि दीर्घकालिक दृष्टि से सोने का रुख बेहद मजबूत बना हुआ है। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और महंगाई के दबाव के कारण निकट भविष्य में सोने पर कुछ दबाव देखने को मिल सकता है, लेकिन लंबी अवधि में इसकी संभावनाएं सकारात्मक हैं। उनका अनुमान है कि अगले एक वर्ष के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना नई ऊंचाइयों को छू सकता है।

    सोने की बढ़ती मांग केवल निवेशकों तक सीमित नहीं है। केंद्रीय बैंकों की खरीदारी भी बाजार को मजबूत आधार प्रदान कर रही है। जब दुनिया के सबसे बड़े वित्तीय संस्थान अपनी संपत्तियों का बड़ा हिस्सा सोने में स्थानांतरित करते हैं, तो यह निवेशकों के लिए भी एक मजबूत संकेत माना जाता है। यही कारण है कि आर्थिक संकट, युद्ध, महंगाई और मुद्रा अवमूल्यन जैसी परिस्थितियों में सोने की मांग तेजी से बढ़ जाती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक अनिश्चितता बनी रहती है और केंद्रीय बैंक इसी तरह सोना खरीदते रहते हैं, तो आने वाले वर्षों में गोल्ड मार्केट में नई तेजी देखने को मिल सकती है। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि सोना केवल आभूषण नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा और दीर्घकालिक निवेश का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी बनता जा रहा है।

  • सोने की कीमतों में उछाल से ज्वेलरी बाजार पर दबाव, बिक्री घटी लेकिन कंपनियों की कमाई में जोरदार बढ़ोतरी का अनुमान

    सोने की कीमतों में उछाल से ज्वेलरी बाजार पर दबाव, बिक्री घटी लेकिन कंपनियों की कमाई में जोरदार बढ़ोतरी का अनुमान

    नई दिल्ली । देश में लगातार बढ़ती सोने की कीमतों ने ज्वेलरी बाजार की दिशा और दशा दोनों को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। एक ओर जहां ग्राहकों की खरीदारी क्षमता पर दबाव बढ़ा है, वहीं दूसरी ओर ज्वेलरी कंपनियों की आय में वृद्धि के संकेत भी सामने आए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सोने की कीमतों में तेज उछाल और हाल ही में आयात शुल्क में की गई बढ़ोतरी का सीधा असर बाजार की मांग पर पड़ रहा है, जिससे आने वाले समय में बिक्री मात्रा में उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिल सकती है।

    बाजार विश्लेषण के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में संगठित गोल्ड ज्वेलरी सेक्टर की बिक्री मात्रा में लगभग 13 से 15 प्रतिशत तक की कमी आने का अनुमान है। पिछले वित्त वर्ष में भी ज्वेलरी बिक्री में करीब 8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन इस बार परिस्थितियां और अधिक चुनौतीपूर्ण मानी जा रही हैं। सोने की ऊंची कीमतों के कारण उपभोक्ता अपनी खरीदारी योजनाओं में बदलाव कर रहे हैं और भारी तथा महंगे गहनों की बजाय हल्के वजन और कम कैरेट वाले विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    इसके बावजूद, कंपनियों के लिए राहत की बात यह है कि बिक्री मात्रा में गिरावट के बावजूद कुल राजस्व में वृद्धि की संभावना बनी हुई है। अनुमान है कि ज्वेलरी कंपनियों की आय में लगभग 20 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इसका मुख्य कारण सोने की ऊंची कीमतें हैं, जिनकी वजह से प्रति यूनिट बिक्री मूल्य बढ़ गया है। यानी ग्राहक कम मात्रा में सोना खरीद रहे हैं, लेकिन कीमत अधिक होने के कारण कंपनियों की कुल कमाई बढ़ सकती है।

    सरकारी स्तर पर हाल ही में सोने पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत किए जाने का भी बाजार पर प्रभाव पड़ा है। इसका उद्देश्य न केवल आयात को नियंत्रित करना है, बल्कि देश के व्यापार घाटे को कम करना और रुपये को स्थिर बनाए रखना भी है। इस कदम से घरेलू बाजार में सोने की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिल रहा है, जिससे मांग और प्रभावित हो रही है।

    रिपोर्टों के अनुसार, देश में गोल्ड की कुल मांग इस वित्त वर्ष में 620 से 640 टन के बीच रहने का अनुमान है, जो पिछले कई वर्षों में सबसे कमजोर स्तरों में से एक माना जा सकता है। कोविड काल को छोड़ दिया जाए तो यह आंकड़ा पिछले एक दशक में सबसे निचले स्तर पर पहुंच सकता है।

    सोने की बढ़ती कीमतों ने उपभोक्ताओं के व्यवहार में भी बड़ा बदलाव किया है। अब लोग निवेश और गहनों दोनों के लिए सोने की खरीद में अधिक सतर्क हो गए हैं। बीते वर्षों में जहां निवेश के लिए गोल्ड बार और सिक्कों की मांग में तेजी देखी गई थी, वहीं अब बाजार में हल्के और डिजाइनर ज्वेलरी की ओर झुकाव बढ़ा है। 16 से 22 कैरेट ज्वेलरी की मांग में वृद्धि दर्ज की जा रही है क्योंकि ये अपेक्षाकृत सस्ती और उपयोगी विकल्प मानी जा रही हैं।

    कुल मिलाकर, मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि सोने की कीमतों का यह उछाल बाजार के स्वरूप को बदल रहा है। जहां एक ओर मांग में कमी चिंता का विषय है, वहीं दूसरी ओर कीमतों के सहारे कंपनियों की आय में बढ़ोतरी एक नया संतुलन बना रही है, जो आने वाले महीनों में और स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है।

  • ग्लोबल मार्केट का असर: डॉलर मजबूत होते ही सोना और चांदी धराशाई, कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज

    ग्लोबल मार्केट का असर: डॉलर मजबूत होते ही सोना और चांदी धराशाई, कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज

    नई दिल्ली । वैश्विक बाजार में डॉलर की मजबूती का सीधा असर कीमती धातुओं पर देखने को मिला है, जहां सोना और चांदी दोनों की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। बुधवार को शुरुआती कारोबार में ही इन दोनों धातुओं पर दबाव बढ़ गया और दाम एक प्रतिशत से अधिक फिसल गए। निवेशकों की नजरें अब अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संकेतों और डॉलर इंडेक्स की चाल पर टिकी हुई हैं, जो फिलहाल मजबूत स्थिति में बना हुआ है।

    घरेलू वायदा बाजार में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने के जून अनुबंध की शुरुआत हल्की गिरावट के साथ हुई, लेकिन कुछ ही समय में गिरावट और गहरी हो गई। कारोबार के दौरान सोने के दाम में उतार-चढ़ाव देखने को मिला और यह दिन के निचले स्तर की ओर खिसकता नजर आया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार डॉलर में मजबूती के कारण निवेशक सोने से दूरी बना रहे हैं, जिससे इसकी मांग पर दबाव बढ़ा है।

    इसी तरह चांदी के दामों में भी कमजोर रुख देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में ही चांदी में गिरावट दर्ज की गई और इसका असर पूरे सत्र में दिखाई दिया। चांदी भी एक प्रतिशत से अधिक कमजोर होकर कारोबार करती रही, जिससे कमोडिटी बाजार में अस्थिरता का माहौल बन गया।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी यही रुझान देखने को मिला, जहां सोना और चांदी दोनों दबाव में रहे। डॉलर इंडेक्स में तेजी के चलते अन्य मुद्राओं में सोने की कीमतें महंगी हो गईं, जिससे वैश्विक मांग पर असर पड़ा। डॉलर इंडेक्स प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा की ताकत को दर्शाता है और जब यह मजबूत होता है तो सोने जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों पर दबाव बढ़ जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में वैश्विक आर्थिक संकेत और अमेरिकी मुद्रा की स्थिति ही कीमती धातुओं की दिशा तय कर रहे हैं। निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और बाजार में बड़ी खरीदारी से बच रहे हैं। इसी कारण सोना और चांदी में कमजोरी का रुझान बना हुआ है।

    भारतीय शेयर बाजार में भी इस दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला और शुरुआती कारोबार में गिरावट दर्ज की गई। बैंकिंग और रियल्टी सेक्टर में दबाव के कारण प्रमुख सूचकांकों में कमजोरी आई, जिससे समग्र बाजार धारणा प्रभावित हुई।

    फिलहाल बाजार की नजर डॉलर की आगे की चाल और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर टिकी हुई है, जो आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों की दिशा तय कर सकते हैं।

  • सोने में हल्की हलचल, चांदी फिसली, वैश्विक हालात से कीमती धातुओं पर दबाव बरकरार

    सोने में हल्की हलचल, चांदी फिसली, वैश्विक हालात से कीमती धातुओं पर दबाव बरकरार


    नई दिल्ली ।
    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी अनिश्चितता और राजनीतिक तनाव के बीच कीमती धातुओं के बाजार में हल्की स्थिरता का माहौल देखा जा रहा है। वैश्विक घटनाक्रमों के असर से सोने की कीमतों में सीमित दायरे में कारोबार हो रहा है, जबकि चांदी पर दबाव बना हुआ है। निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और बाजार में कोई बड़ी दिशा स्पष्ट नहीं दिख रही है।

    घरेलू वायदा बाजार में सोने की शुरुआत सपाट रही और शुरुआती कारोबार में इसमें हल्की तेजी और गिरावट दोनों का असर देखने को मिला। कीमतें एक सीमित दायरे में ऊपर-नीचे होती रहीं, जिससे यह संकेत मिला कि बाजार फिलहाल किसी बड़े ट्रेंड की प्रतीक्षा कर रहा है। दिन के दौरान सोने ने न्यूनतम और अधिकतम स्तर के बीच सीमित अंतर में ही कारोबार किया, जिससे अस्थिरता के बावजूद स्थिरता का माहौल बना रहा।

    चांदी के बाजार में इसके उलट कमजोरी का रुख देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में ही कीमतों में गिरावट दर्ज की गई और पूरे सत्र में दबाव बना रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी की कीमतों में नरमी का असर घरेलू बाजार पर साफ दिखाई दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक मांग और वैश्विक आर्थिक संकेतों के कारण चांदी में अस्थिरता अधिक बनी हुई है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कीमती धातुओं पर दबाव देखा गया, जहां सोना और चांदी दोनों में हल्की कमजोरी दर्ज की गई। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और प्रमुख देशों की नीतियों को लेकर बनी स्थिति ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। हालांकि सोने को आमतौर पर सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन मौजूदा समय में इसमें भी सीमित दायरे की गतिविधि देखी जा रही है।

    वैश्विक तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम यह भी रहा कि कुछ सैन्य और राजनीतिक फैसलों में नरमी के संकेत मिले हैं, जिससे कच्चे तेल और अन्य कमोडिटी बाजारों पर भी हल्का असर पड़ा है। इस स्थिति ने सोने की तेज रफ्तार को फिलहाल रोक दिया है और बाजार को एक संतुलित दायरे में ला दिया है।

    पिछले एक वर्ष के आंकड़ों पर नजर डालें तो सोने और चांदी दोनों ने निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिया है। सोने में लगभग 40 प्रतिशत और चांदी में इससे भी अधिक तेजी देखी गई है, जिससे लंबे समय के निवेशकों को अच्छा फायदा हुआ है। हालांकि मौजूदा समय में बाजार की चाल धीमी पड़ गई है और निवेशक अगली बड़ी दिशा के संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, डॉलर की स्थिति और भू-राजनीतिक तनाव की दिशा ही तय करेगी कि सोना और चांदी किस ओर रुख करेंगे। फिलहाल बाजार में सावधानी और इंतजार का माहौल बना हुआ है, जहां बड़ी तेजी या गिरावट की बजाय सीमित दायरे में कारोबार जारी रहने की संभावना अधिक दिखाई दे रही है।