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  • भारत के घरों में रखा ₹315 लाख करोड़ का सोना बनेगा अर्थव्यवस्था की ताकत, गोल्ड मार्केट में Gen Z का बड़ा रोल

    भारत के घरों में रखा ₹315 लाख करोड़ का सोना बनेगा अर्थव्यवस्था की ताकत, गोल्ड मार्केट में Gen Z का बड़ा रोल


    नई दिल्ली। भारत में सोने को लेकर निवेश का नजरिया तेजी से बदल रहा है। कभी परंपरा और आर्थिक सुरक्षा का प्रतीक माना जाने वाला सोना अब डिजिटल निवेश और वित्तीय संपत्ति के रूप में भी देखा जाने लगा है। इस बदलाव में देश की Gen Z पीढ़ी की भूमिका अहम मानी जा रही है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की रिपोर्ट ‘स्वर्णिम उड़ान 2047’ के मुताबिक, युवा पीढ़ी पारंपरिक आभूषणों की तुलना में डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ETF जैसे विकल्पों की ओर तेजी से बढ़ रही है।

    Gen Z बदल रही गोल्ड में निवेश की परंपरा
    नई पीढ़ी सोने को केवल विरासत के तौर पर संभालकर रखने के बजाय इसे एक एसेट के रूप में देख रही है। डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ETF में निवेश के पीछे आसान खरीदारी, कम मात्रा में निवेश और जरूरत पड़ने पर उसे कैश में बदलने जैसी सुविधाएं प्रमुख वजह हैं।

    WGC के मुताबिक, वर्ष 2035 तक भारत की Gen Z की कुल खरीद क्षमता 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। ऐसे में इस पीढ़ी की निवेश आदतों में बदलाव का असर देश के गोल्ड मार्केट के साथ-साथ व्यापक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

    घरों में 31 हजार टन से ज्यादा सोना
    भारत के घरों में 31 हजार टन से अधिक सोना मौजूद होने का अनुमान है। इसकी कीमत 315 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा बताई गई है। इसके मुकाबले भारत के पास करीब 880 टन का आधिकारिक गोल्ड रिजर्व है। बड़ी मात्रा में घरेलू सोना अभी वित्तीय व्यवस्था का सक्रिय हिस्सा नहीं है।

    ASSOCHAM की एक रिपोर्ट में भी भारतीय परिवारों के पास मौजूद सोने की विशाल मात्रा का जिक्र किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, अगर घरेलू सोने का एक छोटा हिस्सा भी वित्तीय साधनों में लगाया जाता है तो इससे देश की अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त पूंजी मिल सकती है।

    सिर्फ 2% सोना अर्थव्यवस्था से जुड़ा तो बड़ा फायदा
    रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि घरेलू सोने का सिर्फ 2 प्रतिशत हिस्सा भी वित्तीय साधनों में स्थानांतरित होने पर वर्ष 2047 तक भारत की GDP में 7.5 ट्रिलियन डॉलर तक का अतिरिक्त योगदान हो सकता है। वहीं, अगर घरों में रखा 5 प्रतिशत सोना अर्थव्यवस्था से जुड़ता है तो भारत का आयात बिल करीब 90 अरब डॉलर तक कम हो सकता है।

    गोल्ड को उत्पादक संपत्ति में बदलने की तैयारी
    विशेषज्ञों के मुताबिक, घरेलू सोने को वित्तीय व्यवस्था से जोड़ने पर मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और कृषि जैसे क्षेत्रों के लिए पूंजी उपलब्ध हो सकती है। गोल्ड मॉनिटाइजेशन, गोल्ड-लिंक्ड सेविंग स्कीम और गोल्ड लोन जैसे विकल्प इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। गोल्ड लोन के बढ़ते आंकड़े भी इस बदलाव की ओर संकेत करते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में नवंबर 2025 तक गोल्ड लोन का आंकड़ा 24.34 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का दावा किया गया है।

    अर्थव्यवस्था के लिए रणनीतिक संपत्ति बन सकता है सोना
    देश में 38 करोड़ से अधिक Gen Z की बड़ी आबादी है। इस पीढ़ी की बदलती निवेश प्राथमिकताएं गोल्ड मार्केट का स्वरूप बदल सकती हैं। अगर घरेलू सोना बड़ी मात्रा में वित्तीय प्रणाली में आता है तो बाजार में पूंजी की उपलब्धता बढ़ सकती है, निवेश के लिए अधिक संसाधन मिल सकते हैं और सोने के आयात पर निर्भरता घट सकती है। इससे विदेशी मुद्रा की बचत और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की भी संभावना है। ऐसे में भारत के घरों में पड़ा पुस्तैनी सोना आने वाले वर्षों में सिर्फ आभूषण या विरासत नहीं, बल्कि देश की आर्थिक ताकत का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।

  • सोना-चांदी की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी, अगस्त के छह दिनों में निवेशकों को मिला मजबूत तेजी का संकेत

    सोना-चांदी की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी, अगस्त के छह दिनों में निवेशकों को मिला मजबूत तेजी का संकेत


    नई दिल्ली ।
    घरेलू सर्राफा बाजार में गुरुवार को सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर जोरदार तेजी दर्ज की गई। 24 कैरेट सोने का भाव प्रति 10 ग्राम ₹2,735 बढ़कर ₹1,48,361 पर पहुंच गया, जबकि चांदी की कीमत ₹931 की बढ़त के साथ ₹2,25,493 प्रति किलोग्राम दर्ज की गई। अगस्त महीने की शुरुआत से अब तक केवल छह दिनों के भीतर सोना ₹5,501 और चांदी ₹7,198 महंगी हो चुकी है। लगातार बढ़ती कीमतों ने एक बार फिर निवेशकों और आभूषण खरीदारों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

    देश के प्रमुख शहरों में भी सोने के दाम ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं। दिल्ली, जयपुर और लखनऊ जैसे शहरों में 24 कैरेट सोना लगभग ₹1.49 लाख प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच गया है। भोपाल, पटना और अहमदाबाद में भी कीमतें लगभग इसी स्तर पर बनी हुई हैं, जबकि मुंबई, कोलकाता और रायपुर में भाव कुछ कम रहने के बावजूद रिकॉर्ड ऊंचाई के आसपास बने हुए हैं। इससे स्पष्ट है कि पूरे देश में सर्राफा बाजार में तेजी का माहौल कायम है।

    कैरेट के आधार पर भी सोने की कीमतों में उल्लेखनीय अंतर देखने को मिला। 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,48,361, 22 कैरेट का ₹1,35,899, 18 कैरेट का ₹1,11,271 और 14 कैरेट सोने का भाव ₹86,791 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। शुद्धता के अनुसार कीमतों में यह अंतर उपभोक्ताओं को अपनी जरूरत और बजट के अनुरूप विकल्प चुनने का अवसर देता है।

    यदि पूरे वर्ष के प्रदर्शन पर नजर डालें तो वर्ष 2026 में अब तक सोने की कीमत में लगभग ₹15 हजार की बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है। वर्ष 2025 के अंतिम कारोबारी दिन सोने का भाव करीब ₹1.33 लाख प्रति 10 ग्राम था, जो अब बढ़कर ₹1.48 लाख के स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि चांदी की कीमत साल की शुरुआत की तुलना में अभी भी कुछ नीचे बनी हुई है। वर्ष के दौरान दोनों धातुओं ने अपने उच्चतम स्तर भी छुए थे, जिसके बाद कीमतों में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहा।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्तर पर भी सोना और चांदी लंबी अवधि के निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बने हुए हैं। उनका सुझाव है कि निवेश एकमुश्त करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से किया जाए, जिससे कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का जोखिम कम किया जा सके। उनका अनुमान है कि यदि वैश्विक और घरेलू परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो वर्ष के अंत तक सोना ₹1.60 लाख प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2.80 लाख प्रति किलोग्राम तक पहुंच सकती है।

    जो निवेशक भौतिक सोना या चांदी खरीदने के बजाय बाजार आधारित विकल्प चाहते हैं, उनके लिए गोल्ड और सिल्वर ETF भी एक प्रभावी माध्यम माने जा रहे हैं। इन योजनाओं में निवेश शेयर बाजार की तरह डीमैट खाते के माध्यम से किया जा सकता है। इसमें वास्तविक धातु की डिलीवरी नहीं मिलती, बल्कि निवेशक को उस समय के बाजार मूल्य के अनुसार लाभ या हानि प्राप्त होती है। कम राशि से निवेश शुरू करने की सुविधा के कारण यह विकल्प छोटे निवेशकों के बीच भी लगातार लोकप्रिय हो रहा है।

  • गोल्ड मेडल की असली सच्चाई आई सामने, जानें किस धातु से बनता है स्वर्ण पदक और क्यों चढ़ाई जाती है सोने की परत

    गोल्ड मेडल की असली सच्चाई आई सामने, जानें किस धातु से बनता है स्वर्ण पदक और क्यों चढ़ाई जाती है सोने की परत

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में जब कोई एथलीट स्वर्ण पदक जीतता है, तो उसकी चमक पूरे देश को गौरवान्वित करती है। आम तौर पर लोगों की धारणा यही रहती है कि यह पदक पूरी तरह से ठोस सोने का बना होता है। हालांकि वास्तविक सच इससे काफी अलग है। आधुनिक ओलंपिक और बड़ी वैश्विक खेल प्रतियोगिताओं में दिए जाने वाले गोल्ड मेडल पूरी तरह सोने के नहीं होते, बल्कि इन्हें खास अंतरराष्ट्रीय मानकों और वैज्ञानिक प्रक्रियाओं के तहत तैयार किया जाता है।

    खेल नियमों के अनुसार एक स्वर्ण पदक का मुख्य हिस्सा चांदी का बना होता है। किसी भी मानक गोल्ड मेडल में कम से कम 92.5 प्रतिशत शुद्ध चांदी का उपयोग किया जाता है। इसके ऊपरी हिस्से पर ही केवल असली सोने की एक पतली परत चढ़ाई जाती है। यही परत पदक को उसकी खास सुनहरी चमक और पहचान प्रदान करती है, जिससे यह देखने में पूरी तरह सोने का प्रतीत होता है।

    अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के नियमों के तहत एक स्वर्ण पदक का कुल वजन सामान्यतः 500 ग्राम के आसपास रखा जाता है। इतने वजन वाले पदक में मात्र 6 ग्राम शुद्ध सोना होना अनिवार्य होता है, जो ऊपर से कोटेड होता है। बाकी का पूरा हिस्सा उच्च गुणवत्ता वाली चांदी से ही निर्मित होता है। यदि पूरा पदक शुद्ध सोने से तैयार किया जाए, तो इसकी लागत काफी अधिक बढ़ जाएगी और यह व्यावहारिक नहीं रहेगा।

    शुद्ध सोना एक बेहद मुलायम धातु मानी जाती है, जिससे यदि पूरा मेडल बनाया जाए तो उसके आसानी से मुड़ने या खराब होने का जोखिम बना रहता है। चांदी अधिक मजबूत, टिकाऊ और लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाली धातु है। इसी कारण चांदी के आधार पर सोने की कोटिंग करना सबसे उपयुक्त और टिकाऊ विकल्प माना जाता है।

    अगर इतिहास की बात करें तो वर्ष 1912 के स्टॉकहोम ओलंपिक तक खिलाड़ियों को पूरी तरह सोने के बने मेडल ही दिए जाते थे। इसके बाद प्रथम विश्व युद्ध के दौरान और बढ़ती लागत के चलते नियमों में बदलाव किया गया। वर्तमान व्यवस्था में केवल सोने की परत चढ़ाने का नियम लागू है, जिससे पदकों की गुणवत्ता और मजबूती दोनों बनी रहती है।

    किसी भी खिलाड़ी के लिए स्वर्ण पदक की असली कीमत उसकी धातु की बाजार दर से नहीं तय होती। यह पदक वर्षों की कड़ी मेहनत, त्याग, अनुशासन और अपने देश को शीर्ष पर पहुंचाने के गौरव का प्रतीक होता है। यही ऐतिहासिक और भावनात्मक सम्मान इस पदक को दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित खेल पुरस्कार बनाता है।

  • रिकॉर्ड स्तर से नरम पड़े सोने के दाम, छोटे निवेशकों में नियमित डिजिटल गोल्ड खरीदारी का बढ़ा रुझान

    रिकॉर्ड स्तर से नरम पड़े सोने के दाम, छोटे निवेशकों में नियमित डिजिटल गोल्ड खरीदारी का बढ़ा रुझान

    नई दिल्ली । सोने की कीमतें अपने सर्वकालिक उच्च स्तर से नीचे आने के बावजूद लगातार उतार-चढ़ाव का सामना कर रही हैं। इसी कारण बड़ी राशि एकमुश्त निवेश करने के बजाय अब बड़ी संख्या में खुदरा निवेशक छोटी-छोटी रकम के नियमित निवेश की रणनीति अपना रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सोने में निवेश का चलन तेजी से बढ़ रहा है और इसे बदलते बाजार माहौल में अपेक्षाकृत संतुलित विकल्प माना जा रहा है।

    घरेलू बाजार में 24 कैरेट सोने का भाव मंगलवार को करीब 1.43 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास बना हुआ है। यह कीमत इस वर्ष जनवरी के अंत में दर्ज हुए लगभग 1.78 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे है। उस समय वैश्विक अनिश्चितताओं और सुरक्षित निवेश की बढ़ी मांग के कारण सोने ने ऐतिहासिक ऊंचाई हासिल की थी। इसके बाद बाजार में कई बार तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतों पर अमेरिकी ब्याज दरों की संभावित दिशा, डॉलर की मजबूती और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक परिस्थितियों का सीधा प्रभाव पड़ता है। हाल ही में अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किए जाने के बाद भी निवेशकों की नजर आगामी मौद्रिक नीति पर बनी हुई है। इसी वजह से सोने के बाजार में अनिश्चितता का माहौल कायम है।

    बाजार विश्लेषकों ने भले ही निकट अवधि के लिए अपने अनुमान में कुछ संशोधन किया हो, लेकिन मध्यम अवधि में सोने को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण अभी भी बरकरार है। इसका प्रमुख कारण विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार सोने की खरीद और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश की मांग को माना जा रहा है। हालांकि मजबूत डॉलर और बढ़ती बॉन्ड यील्ड समय-समय पर कीमतों पर दबाव भी बना सकती हैं।

    ऐसे वातावरण में निवेशकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सही समय पर खरीदारी की रहती है। यदि कोई निवेशक एक साथ बड़ी राशि लगाता है तो ऊंचे भाव पर खरीदारी का जोखिम रहता है, जबकि अधिक इंतजार करने पर कीमतें फिर बढ़ सकती हैं। इस स्थिति में नियमित अंतराल पर छोटी राशि का निवेश अलग-अलग कीमतों पर खरीदारी का अवसर देता है और औसत लागत को संतुलित करने में मदद करता है।

    डिजिटल गोल्ड प्लेटफॉर्म इसी रणनीति को आसान बना रहे हैं। निवेशक बेहद कम राशि से भी 24 कैरेट डिजिटल गोल्ड खरीद सकते हैं और नियमित निवेश के लिए स्वचालित योजना का लाभ उठा सकते हैं। इससे छोटे निवेशकों को अपनी आय और बचत के अनुसार धीरे-धीरे सोने में निवेश बढ़ाने की सुविधा मिल रही है।

    डिजिटल गोल्ड में खरीदे गए सोने के बराबर भौतिक सोना सुरक्षित वॉल्ट में संरक्षित रखा जाता है। निवेशक जरूरत पड़ने पर अपनी होल्डिंग बाजार भाव पर बेच सकते हैं या निर्धारित शर्तों के अनुसार उसे प्रमाणित भौतिक सोने में बदलकर घर भी मंगवा सकते हैं। इस सुविधा ने डिजिटल माध्यम से सोने में निवेश को पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक बना दिया है।

    हालांकि विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि सोने को पूरे निवेश का आधार नहीं बल्कि विविधीकृत निवेश पोर्टफोलियो का हिस्सा माना जाना चाहिए। बाजार में उतार-चढ़ाव आगे भी जारी रह सकता है, लेकिन नियमित और छोटी राशि के निवेश की रणनीति जोखिम को संतुलित करने का एक व्यावहारिक विकल्प बनकर उभर रही है। इसी कारण बड़ी संख्या में खुदरा निवेशक अब सही समय का इंतजार करने के बजाय अनुशासित और नियमित निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।

  • सप्ताह की शुरुआत में चमके सोना-चांदी के भाव, गिरावट के बाद लौटी तेजी, जानें 24 कैरेट गोल्ड और सिल्वर का नया रेट

    सप्ताह की शुरुआत में चमके सोना-चांदी के भाव, गिरावट के बाद लौटी तेजी, जानें 24 कैरेट गोल्ड और सिल्वर का नया रेट

    नई दिल्ली । कारोबारी सप्ताह के पहले दिन घरेलू वायदा बाजार में सोना और चांदी की कीमतों में शानदार तेजी दर्ज की गई है। पिछले कारोबारी सत्रों में लगातार दर्ज की जा रही गिरावट के बाद दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में सोमवार को सुधार देखने को मिला। बाजार में आई इस नई तेजी से निवेशकों और कारोबारियों के चेहरे खिल उठे हैं। हालांकि ताजा रिकवरी के बावजूद चांदी अभी भी अपने सर्वकालिक उच्च स्तर से काफी निचले स्तर पर बनी हुई है, जबकि सोने में भी सकारात्मक गति दर्ज की गई है।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में सितंबर एक्सपायरी वाले चांदी के अनुबंध ने सोमवार को बढ़त के साथ व्यापार की शुरुआत की। पिछले सत्र में चांदी का भाव 2,17,198 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ था, जो नए सत्र की शुरुआत में उछलकर 2,18,709 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गया। इस प्रकार चांदी की कीमत में प्रति किलोग्राम 1,511 रुपये की सीधी बढ़ोतरी दर्ज की गई। बाजार में आई इस उछाल ने पिछले सप्ताह की सुस्ती को दूर करते हुए कारोबारियों में नया उत्साह भरा है।

    बीते कारोबारी सप्ताह के दौरान चांदी की दरों में काफी दबाव देखा गया था। 24 जुलाई को चांदी का भाव 2,22,138 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया था, जो सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन तक गिरकर 2,17,198 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया था। महज पांच कारोबारी दिनों के भीतर चांदी करीब 4,940 रुपये प्रति किलोग्राम तक सस्ती हो गई थी। सोमवार को दर्ज की गई तेजी से इस बड़ी गिरावट की आंशिक भरपाई संभव हो सकी है, लेकिन बाजार को पूरी तरह उबरने में अभी समय लग सकता है।

    यदि चांदी के लंबे समय के आंकड़ों और ऐतिहासिक प्रदर्शन का आकलन किया जाए तो इस धातु ने चालू वर्ष के जनवरी महीने में एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया था। उस दौरान चांदी की कीमत इतिहास में पहली बार 4 लाख रुपये के आंकड़े को पार करते हुए 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम के उच्चतम स्तर तक जा पहुंची थी। वर्तमान बाजार मूल्य की तुलना करें तो चांदी अभी भी अपने उस रिकॉर्ड स्तर से लगभग 2,01,339 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती बिक रही है। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में रिकवरी की बड़ी संभावना मौजूद है।

    सोने के बाजार में भी सप्ताह के पहले दिन मजबूती का रुख देखा गया। अगस्त एक्सपायरी वाले 24 कैरेट सोने का वायदा भाव पिछले कारोबारी दिन 1,41,511 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। सोमवार को बाजार खुलते ही यह बढ़त के साथ 1,41,820 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इस तरह सोने में प्रति 10 ग्राम 309 रुपये की वृद्धि दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के सकारात्मक संकेतों और स्थानीय मांग के कारण सोने को यह समर्थन प्राप्त हुआ है।

    पिछला हफ्ता सोने के लिए भी सुस्ती भरा साबित हुआ था। 24 जुलाई को सोने की कीमत 1,43,106 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर थी, जो सप्ताहांत तक घटकर 1,41,511 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई थी। इस अवधि में सोने के दाम में करीब 1,595 रुपये प्रति 10 ग्राम की नरमी दर्ज की गई थी। मध्य प्रदेश समेत देशभर के सर्राफा बाजारों में कारोबारी अब वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और मुद्रास्फीति के संकेतों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं, जिससे आने वाले दिनों में सराफा बाजार की आगे की दिशा तय होगी।

  • आज कितना बदला सोने-चांदी का रेट? खरीदारी से पहले 24K, 22K, 18K के ताजा भाव जरूर देखें

    आज कितना बदला सोने-चांदी का रेट? खरीदारी से पहले 24K, 22K, 18K के ताजा भाव जरूर देखें

    नई दिल्ली । 3 अगस्त को सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में सीमित बदलाव देखने को मिला। पिछले कारोबारी दिन की तुलना में सोने के विभिन्न कैरेट की कीमतों में मामूली अंतर दर्ज किया गया, जबकि चांदी के भाव में भी हल्की गिरावट देखने को मिली। हालांकि कीमतों में बड़ा बदलाव नहीं होने से बाजार में स्थिरता का माहौल बना हुआ है और खरीदारी की योजना बना रहे उपभोक्ताओं के लिए यह स्थिति महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    आज 24 कैरेट सोने का भाव 1,44,210 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। वहीं 22 कैरेट सोना 1,32,190 रुपये प्रति 10 ग्राम और 18 कैरेट सोना 1,08,150 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। पिछले दिन की तुलना में इन कीमतों में केवल मामूली बदलाव हुआ है, जिससे यह साफ है कि फिलहाल बाजार में तेज उतार-चढ़ाव नहीं देखा जा रहा है।

    चांदी की बात करें तो आज एक किलोग्राम चांदी का भाव 2,34,900 रुपये दर्ज किया गया। पिछले कारोबारी दिन के मुकाबले इसमें करीब 100 रुपये की कमी देखने को मिली। हालांकि यह गिरावट बहुत बड़ी नहीं मानी जा रही, लेकिन लगातार कीमतों पर नजर रखने वाले निवेशकों और खरीदारों के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण हो सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां और निवेशकों की मांग जैसे कई कारक सोने और चांदी की कीमतों को प्रभावित करते हैं। यही वजह है कि घरेलू बाजार में भी समय-समय पर कीमतों में बदलाव देखने को मिलता है। फिलहाल बाजार में स्थिरता बनी हुई है, जिससे उपभोक्ताओं को अचानक बढ़ी कीमतों का सामना नहीं करना पड़ रहा।

    ज्वेलरी खरीदने की योजना बना रहे लोगों को केवल कीमत पर ही नहीं, बल्कि सोने की शुद्धता पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। आभूषण खरीदते समय बीआईएस हॉलमार्क और छह अंकों वाला एचयूआईडी कोड अवश्य जांचना चाहिए। इससे आभूषण की प्रमाणिकता सुनिश्चित होती है और भविष्य में किसी भी प्रकार की परेशानी की संभावना कम हो जाती है।

    चांदी खरीदते समय भी गुणवत्ता की जांच आवश्यक मानी जाती है। बाजार में उपलब्ध चांदी पर बीआईएस हॉलमार्क और उसकी शुद्धता का प्रमाण देखना उपभोक्ताओं के हित में होता है। विशेष रूप से 925 स्टर्लिंग सिल्वर को बेहतर गुणवत्ता का मानक माना जाता है, इसलिए खरीदारी से पहले इसकी पुष्टि करना उचित रहता है।

    ध्यान देने वाली बात यह भी है कि बाजार में बताए जाने वाले सोने के मूल भाव में मेकिंग चार्ज, जीएसटी और अन्य शुल्क शामिल नहीं होते। आभूषण खरीदते समय अंतिम बिल इन अतिरिक्त शुल्कों के कारण अधिक हो सकता है। इसलिए ग्राहकों को खरीदारी से पहले कुल भुगतान की जानकारी लेना और बिल अवश्य प्राप्त करना चाहिए।

    त्योहारी सीजन और शादी-विवाह के समय सोने-चांदी की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में नियमित रूप से बाजार भाव की जानकारी लेकर और प्रमाणित गुणवत्ता वाले आभूषण खरीदकर उपभोक्ता बेहतर निर्णय ले सकते हैं। वर्तमान में कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव नहीं होने से खरीदारी की योजना बनाने वालों के लिए स्थिति अपेक्षाकृत संतुलित बनी हुई है।

  • सोने-चांदी में सीमित उतार-चढ़ाव, अमेरिकी फेड के फैसले से पहले निवेशकों की बढ़ी सतर्कता..

    सोने-चांदी में सीमित उतार-चढ़ाव, अमेरिकी फेड के फैसले से पहले निवेशकों की बढ़ी सतर्कता..

    नई दिल्ली । घरेलू सर्राफा और वायदा बाजार में बुधवार को सोने और चांदी की कीमतों में मिलाजुला रुख देखने को मिला। कारोबार की शुरुआत से ही दोनों कीमती धातुएं सीमित दायरे में बनी रहीं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक फिलहाल अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक के फैसले का इंतजार कर रहे हैं, जिसके कारण बड़े दांव लगाने से बचा जा रहा है। यही वजह है कि कीमतों में केवल मामूली उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर 5 अगस्त 2026 डिलीवरी वाला सोने का वायदा अनुबंध पिछले बंद भाव 1,41,623 रुपये प्रति 10 ग्राम की तुलना में लगभग स्थिर स्तर पर 1,41,519 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला। शुरुआती कारोबार के दौरान इसमें हल्की कमजोरी देखने को मिली और भाव 228 रुपये यानी 0.16 प्रतिशत गिरकर 1,41,395 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। कारोबार के दौरान सोने ने 1,41,311 रुपये प्रति 10 ग्राम का निचला स्तर और 1,41,591 रुपये प्रति 10 ग्राम का उच्चतम स्तर भी दर्ज किया।

    वहीं चांदी के बाजार में अपेक्षाकृत सकारात्मक रुख दिखाई दिया। एमसीएक्स पर 4 सितंबर 2026 डिलीवरी वाले चांदी के अनुबंध की शुरुआत पिछले बंद भाव 2,15,840 रुपये प्रति किलोग्राम के मुकाबले लगभग स्थिर स्तर पर 2,16,834 रुपये प्रति किलोग्राम पर हुई। इसके बाद चांदी में हल्की खरीदारी देखने को मिली और कीमत 608 रुपये यानी 0.28 प्रतिशत बढ़कर 2,16,448 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। कारोबार के दौरान चांदी ने 2,16,369 रुपये प्रति किलोग्राम का न्यूनतम और 2,16,943 रुपये प्रति किलोग्राम का उच्चतम स्तर छुआ।

    अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी दोनों कीमती धातुओं का प्रदर्शन अलग-अलग रहा। कॉमेक्स बाजार में सोने की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई, जबकि चांदी में मामूली मजबूती बनी रही। इससे स्पष्ट संकेत मिला कि वैश्विक निवेशक भी फिलहाल किसी बड़े रुख के बजाय प्रमुख आर्थिक घटनाक्रमों का इंतजार कर रहे हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति समिति की बैठक का परिणाम फिलहाल बाजार की सबसे बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। व्यापक अनुमान है कि इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। हालांकि निवेशकों की वास्तविक नजर फेड की भविष्य की नीति संबंधी टिप्पणियों पर रहेगी। यदि आने वाले महीनों में ब्याज दरों के संबंध में नरम या सख्त संकेत मिलते हैं तो उसका सीधा असर सोने और चांदी सहित वैश्विक कमोडिटी बाजारों पर पड़ सकता है।

    सोने को पारंपरिक रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है। ऐसे में ब्याज दरों, महंगाई और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों से जुड़ी किसी भी महत्वपूर्ण घोषणा का प्रभाव इसकी कीमतों पर तेजी से दिखाई देता है। चांदी भी औद्योगिक और निवेश दोनों मांग से जुड़ी होने के कारण वैश्विक आर्थिक संकेतकों के प्रति संवेदनशील रहती है।

    इस बीच भारतीय शेयर बाजार ने सकारात्मक शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी में लगभग एक प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। आईटी शेयरों में मजबूत खरीदारी के चलते निफ्टी आईटी सूचकांक करीब 1.5 प्रतिशत तक चढ़ गया। इक्विटी बाजार की इस मजबूती के बावजूद कीमती धातुओं में निवेशकों का रुख सतर्क बना रहा और बाजार ने फेड के फैसले से पहले सीमित दायरे में कारोबार जारी रखा।

  • कीमती धातुओं के बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट, निवेशकों के लिए नए अवसर और चुनौतियां

    कीमती धातुओं के बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट, निवेशकों के लिए नए अवसर और चुनौतियां

    नई दिल्ली । भारतीय बुलियन और सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में लगातार आ रही गिरावट ने निवेशकों और खरीदारों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। वर्ष की शुरुआत में सर्वकालिक उच्च स्तर को छूने के बाद अब सोने के दामों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। रिकॉर्ड स्तर से करीब 37 हजार रुपये प्रति दस ग्राम की गिरावट के बाद बाजार में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि क्या यह नए निवेश का सही समय है या अभी कीमतों में और सुधार देखने को मिल सकता है।

    वैश्विक बाजार के रुझानों का सीधा असर घरेलू सर्राफा बाजार पर देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनावों, कच्चे तेल की अनिश्चित कीमतों और अमेरिकी केंद्रीय बैंक की सख्त मौद्रिक नीतियों के कारण सोने की वैश्विक दरों पर लगातार दबाव बना हुआ है। जनवरी महीने में अंतरराष्ट्रीय बाजार में 5,602 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने वाला सोना अब घटकर करीब 4,040 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है। इसी के प्रभाव से भारतीय बाजार में भी कीमतें एक लाख अस्सी हजार रुपये के पीक स्तर से गिरकर एक लाख तैंतालीस हजार रुपये प्रति दस ग्राम के स्तर पर आ गई हैं।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार सोने की कीमतों में इस नरमी का मुख्य कारण केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर नीतियां हैं। अमेरिका में महंगाई पर नियंत्रण के लिए अपनाई जा रही कड़ी मौद्रिक नीतियों और ब्याज दरों में कटौती की संभावना न के बराबर होने के कारण निवेशक फिक्स्ड रिटर्न देने वाले अन्य वित्तीय साधनों की ओर रुख कर रहे हैं। चूंकि सोना कोई प्रत्यक्ष ब्याज या लाभांश प्रदान नहीं करता, इसलिए उच्च ब्याज दर के दौर में इसकी मांग पर नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है।

    बाजार के दीर्घकालिक आंकड़ों का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि सोने ने ऐतिहासिक रूप से निवेशकों को सुरक्षित और आकर्षक रिटर्न दिया है। पिछले तीन दशकों के दौरान इस पीली धातु के मूल्यों में व्यापक वृद्धि दर्ज की गई है। यद्यपि अल्पकालिक अवधि में भू-राजनीतिक बदलावों और आर्थिक नीतियों के कारण इसमें बड़े उतार-चढ़ाव आते रहे हैं, लेकिन दीर्घकालिक नजरिए से इसे हमेशा से एक मजबूत परिसंपत्ति माना जाता रहा है।

    बाजार विश्लेषकों का सुझाव है कि जो निवेशक अपने पोर्टफोलियो में सोने को शामिल करना चाहते हैं, उनके लिए एकमुश्त निवेश के बजाय व्यवस्थित तरीके से किस्तों में खरीदारी करना अधिक जोखिम-रहित रणनीति हो सकती है। आने वाले समय में वैश्विक बाजार के रुझानों और नीतिगत निर्णयों के आधार पर कीमतों में सीमित दायरे का उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना जताई जा रही है।

  • सोना-चांदी लगातार दूसरे दिन फिसले, मजबूत डॉलर के दबाव में कीमती धातुओं में 0.6% तक की गिरावट

    सोना-चांदी लगातार दूसरे दिन फिसले, मजबूत डॉलर के दबाव में कीमती धातुओं में 0.6% तक की गिरावट

    नई दिल्ली । घरेलू सर्राफा और वायदा बाजार में शुक्रवार को लगातार दूसरे कारोबारी दिन सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। मजबूत अमेरिकी डॉलर और वैश्विक बाजारों में बने दबाव के कारण दोनों कीमती धातुओं में कमजोरी देखने को मिली। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियों और विदेशी मुद्रा बाजार में आए बदलाव का सीधा असर कीमती धातुओं की कीमतों पर पड़ रहा है। निवेशकों की सतर्कता और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहने की संभावना जताई जा रही है।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने के अगस्त डिलीवरी वाले वायदा अनुबंध की शुरुआत पिछले बंद भाव की तुलना में कमजोर स्तर पर हुई। कारोबार के दौरान सोने की कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की गई और यह करीब 0.61 प्रतिशत टूटकर 1.42 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे कारोबार करता दिखाई दिया। कारोबार के दौरान सोने ने दिन का निचला और ऊपरी स्तर भी दर्ज किया, जिससे बाजार में अस्थिरता का संकेत मिला। लगातार दूसरे दिन आई इस गिरावट ने अल्पकालिक निवेशकों को सतर्क कर दिया है।

    सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी कमजोरी बनी रही। एमसीएक्स पर सितंबर डिलीवरी वाले चांदी के वायदा अनुबंध में शुरुआती कारोबार से ही दबाव देखा गया। कारोबार के दौरान चांदी की कीमत करीब 0.40 प्रतिशत तक फिसल गई। बाजार में खरीदारी सीमित रहने और वैश्विक संकेत कमजोर होने के कारण चांदी में भी गिरावट का रुख बना रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि औद्योगिक मांग और निवेशकों की रणनीति दोनों का प्रभाव चांदी की कीमतों पर लगातार पड़ रहा है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोना और चांदी दबाव में रहे। कॉमैक्स पर सोने और चांदी दोनों में गिरावट दर्ज की गई, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया। वैश्विक निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों को लेकर नई रणनीति अपनाई, जिससे कीमती धातुओं की कीमतों में नरमी बनी रही। विदेशी बाजारों की चाल का असर भारतीय वायदा बाजार पर तेजी से देखने को मिला और घरेलू कीमतें भी उसी दिशा में आगे बढ़ीं।

    विशेषज्ञों के अनुसार डॉलर इंडेक्स में मजबूती इस गिरावट की प्रमुख वजहों में शामिल है। अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने पर सोने और चांदी जैसी धातुएं विदेशी निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत महंगी हो जाती हैं, जिससे उनकी मांग प्रभावित होती है। हाल के दिनों में वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक घटनाक्रमों के कारण डॉलर में मजबूती देखने को मिली है। इसी का असर कीमती धातुओं के बाजार पर भी पड़ा है।

    बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, डॉलर की चाल और वैश्विक आर्थिक संकेतक सोने और चांदी की कीमतों की दिशा तय करेंगे। यदि डॉलर मजबूत बना रहता है तो कीमती धातुओं पर दबाव जारी रह सकता है, जबकि वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित निवेश की मांग फिर से बढ़ सकती है। फिलहाल निवेशकों को बाजार की बदलती परिस्थितियों पर नजर रखते हुए सोच-समझकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है।

  • सोना-चांदी की कीमतों में सप्ताह की शुरुआत से बड़ा उछाल, गोल्ड ₹1,150 और सिल्वर ₹3,159 महंगी, नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे भाव

    सोना-चांदी की कीमतों में सप्ताह की शुरुआत से बड़ा उछाल, गोल्ड ₹1,150 और सिल्वर ₹3,159 महंगी, नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे भाव

    नई दिल्ली । सप्ताह की शुरुआत घरेलू सर्राफा बाजार के लिए तेज़ी भरी रही। सोने और चांदी की कीमतों में एक दिन के भीतर उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे कीमती धातुओं के बाजार में फिर से हलचल बढ़ गई है। ताजा कारोबार में 24 कैरेट सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम ₹1,43,404 तक पहुंच गई, जबकि चांदी का भाव बढ़कर ₹2,23,000 प्रति किलोग्राम हो गया। कीमतों में आई इस तेजी का असर देश के प्रमुख शहरों के खुदरा बाजारों में भी देखने को मिला, जहां सोना पहले की तुलना में अधिक कीमत पर बिक रहा है।

    बाजार के आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोने में ₹1,150 प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं चांदी की कीमत ₹3,159 प्रति किलोग्राम बढ़ने के बाद नए स्तर पर पहुंच गई। विभिन्न शुद्धता वाले सोने के दामों में भी समान रूप से तेजी देखने को मिली। 22 कैरेट, 18 कैरेट और 14 कैरेट सोने की कीमतों में भी वृद्धि दर्ज होने से आभूषण बाजार और निवेशकों की गतिविधियां तेज हो गई हैं।

    देश के प्रमुख शहरों में भी सोने की कीमतों में अंतर देखने को मिला। दिल्ली और लखनऊ में 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,44,370 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया, जबकि मुंबई, कोलकाता और रायपुर में इसकी कीमत ₹1,44,220 रही। भोपाल, पटना और अहमदाबाद में सोना ₹1,44,270 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। अलग-अलग शहरों में कीमतों का यह अंतर स्थानीय बाजार की परिस्थितियों और व्यावसायिक लागत पर निर्भर करता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार देशभर में सोने की कीमतें एक समान नहीं होतीं। इसका पहला कारण परिवहन और सुरक्षा से जुड़ी लागत है। सोने को एक स्थान से दूसरे स्थान तक सुरक्षित पहुंचाने में आने वाला खर्च अंतिम बिक्री मूल्य को प्रभावित करता है। इसके अलावा स्थानीय मांग और आपूर्ति का संतुलन भी कीमतों में बदलाव का प्रमुख कारण माना जाता है। जिन क्षेत्रों में सोने की खरीद अधिक होती है, वहां बाजार की स्थिति के अनुसार दरों में अंतर देखने को मिल सकता है।

    स्थानीय ज्वेलरी एसोसिएशन भी अपने-अपने क्षेत्रों की बाजार परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए दैनिक दरें निर्धारित करते हैं। इसके साथ ही ज्वेलर्स द्वारा पहले खरीदे गए स्टॉक की लागत भी बिक्री मूल्य तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि पुराना स्टॉक अधिक कीमत पर खरीदा गया है तो उसका प्रभाव खुदरा बाजार की कीमतों पर भी दिखाई देता है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोना खरीदते समय केवल कीमत पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। ग्राहकों को हमेशा भारतीय मानक ब्यूरो की हॉलमार्क प्रमाणित ज्वेलरी ही खरीदनी चाहिए ताकि शुद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके। इसके साथ ही खरीदारी से पहले विभिन्न आधिकारिक बाजार दरों का मिलान करना भी जरूरी माना जाता है, क्योंकि 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने की कीमतों में स्पष्ट अंतर होता है।

    बुलियन बाजार में आई इस नई तेजी ने निवेशकों और आभूषण खरीदारों दोनों का ध्यान आकर्षित किया है। आगामी दिनों में वैश्विक बाजार के रुझान, घरेलू मांग और आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में बाजार विशेषज्ञ निवेशकों और ग्राहकों को खरीदारी से पहले ताजा दरों की जानकारी लेकर ही निर्णय लेने की सलाह दे रहे हैं।