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  • सोने-चांदी में गिरावट के बीच तांबे की कीमतों में तेजी, सप्लाई संकट से बढ़ी बाजार की चिंता..

    सोने-चांदी में गिरावट के बीच तांबे की कीमतों में तेजी, सप्लाई संकट से बढ़ी बाजार की चिंता..

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में 23 अक्टूबर 2026 को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट के बीच तांबे में तेजी दर्ज की गई। घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स तक तांबे की कीमतों में बढ़त देखने को मिली। वैश्विक स्तर पर औद्योगिक जरूरतों के लिए तांबे की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है, जबकि इसकी आपूर्ति को लेकर चुनौतियां बढ़ रही हैं। मांग और उपलब्धता के बीच इसी अंतर का असर कीमतों पर दिखाई दे रहा है।

    घरेलू बाजार में एमसीएक्स पर तांबे का भाव 0.53 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,369.90 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स में इसकी कीमत 0.95 प्रतिशत बढ़कर 6.4590 डॉलर प्रति औंस दर्ज की गई। दोनों बाजारों में तेजी के बीच तांबा निवेशकों और औद्योगिक क्षेत्र की नजर में बना हुआ है। दूसरी ओर, इसी दिन सोने का भाव एमसीएक्स पर 1,42,871 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी का भाव 1,95,999 रुपये प्रति किलोग्राम रहा।

    तांबे की कीमतों में तेजी के पीछे सबसे प्रमुख कारण वैश्विक मांग में बढ़ोतरी और आपूर्ति का सीमित होना है। आधुनिक उद्योगों में इस धातु का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण, बिजली के पावर ग्रिड, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे के विकास में तांबे की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके अलावा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े डाटा सेंटरों के विस्तार के कारण भी तांबे की जरूरत बढ़ रही है। इन क्षेत्रों में बिजली के तारों, विद्युत प्रणालियों और अन्य उपकरणों के लिए तांबे की आवश्यकता होती है।

    मांग में इस बढ़ोतरी के बावजूद उत्पादन में कई बाधाएं सामने आ रही हैं। दुनिया की विभिन्न तांबा खदानों में उत्पादन प्रभावित होने से बाजार में उपलब्धता पर दबाव बना हुआ है। चिली जैसे प्रमुख तांबा उत्पादक क्षेत्र में खनन गतिविधियों पर असर पड़ने की जानकारी है। कुछ खदानों में हड़तालों के कारण कामकाज बाधित हुआ है, जबकि दूसरी जगहों पर अयस्क की गुणवत्ता घटने से उत्पादन संबंधी चुनौतियां बढ़ रही हैं। इससे मौजूदा खदानों से तांबे की आपूर्ति बनाए रखना कठिन हो रहा है।

    नई खदानें विकसित करना भी आसान नहीं है। इसके लिए लंबा समय और बड़ी पूंजी की जरूरत होती है। दूरदराज के क्षेत्रों में खनन परियोजनाएं शुरू करने पर लागत बढ़ जाती है। नई परियोजनाओं से उत्पादन शुरू होने में देरी होने के कारण बढ़ती वैश्विक मांग के अनुरूप आपूर्ति बढ़ाना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में तांबे के बाजार में उपलब्धता को लेकर चिंता बनी हुई है।

    अमेरिका की टैरिफ नीतियों को लेकर बनी आशंकाएं भी बाजार की परिस्थितियों को प्रभावित कर रही हैं। संभावित शुल्क संबंधी बदलावों के मद्देनजर अमेरिका में तांबे का भंडार बढ़ाए जाने से वैश्विक आपूर्ति के प्रवाह पर असर पड़ सकता है। इससे विभिन्न बाजारों में उपलब्ध धातु की मात्रा और कीमतों पर दबाव की स्थिति बन सकती है।

    बाजार में तांबे की भविष्य की कीमतों को लेकर भी चर्चा तेज है। मजबूत औद्योगिक मांग, सीमित उत्पादन और नई खदानों के विकास में लगने वाला समय इसकी कीमतों के लिए महत्वपूर्ण कारक बने हुए हैं। हालांकि, भविष्य में कीमतें किस दिशा में जाएंगी, यह मांग, आपूर्ति, उत्पादन और व्यापार नीतियों में होने वाले बदलावों पर निर्भर करेगा। फिलहाल, सोने-चांदी में गिरावट के विपरीत तांबे में दर्ज तेजी ने कमोडिटी बाजार में इस धातु की अलग स्थिति को रेखांकित किया है।

  • सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, एक सप्ताह में सोना 3.5 प्रतिशत और चांदी 7.8 प्रतिशत फिसली

    सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, एक सप्ताह में सोना 3.5 प्रतिशत और चांदी 7.8 प्रतिशत फिसली


    नई दिल्ली ।
    वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और ब्याज दरों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच सोने और चांदी की कीमतों में इस सप्ताह तेज गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार से लेकर घरेलू वायदा कारोबार तक दोनों कीमती धातुओं पर बिकवाली का दबाव बना रहा। सोने की कीमतों में साप्ताहिक आधार पर करीब 3.5 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि चांदी 7.8 प्रतिशत फिसल गई। सोने का यह जून के बाद सबसे कमजोर साप्ताहिक प्रदर्शन बताया जा रहा है। वहीं, चांदी की कीमत नवंबर 2025 के बाद के निचले स्तर तक पहुंच गई।

    विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रखने की आशंका ने कीमती धातुओं के बाजार को प्रभावित किया है। आम तौर पर सोने को आर्थिक अनिश्चितता के दौरान सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में महंगाई और मौद्रिक नीति से जुड़े जोखिमों ने इसकी कीमतों पर दबाव बढ़ाया है। सोना निवेशकों को नियमित ब्याज नहीं देता, इसलिए ऊंची ब्याज दरों के माहौल में अन्य ब्याज देने वाले निवेश विकल्प अपेक्षाकृत आकर्षक हो सकते हैं।

    घरेलू बाजार में भी गिरावट का असर साफ दिखाई दिया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर दिसंबर वायदा सोने का भाव गिरकर करीब 1,42,150 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान इसकी कीमत 1,42,079 रुपये प्रति 10 ग्राम तक फिसल गई। यह पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में लगभग 1,230 रुपये यानी 0.86 प्रतिशत की गिरावट थी।

    चांदी की कीमतों में इससे भी अधिक कमजोरी दर्ज की गई। दिसंबर वायदा चांदी का भाव करीब 1,95,408 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया। इसमें 4,191 रुपये यानी लगभग 2.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। लगातार बिकवाली के कारण चांदी का भाव दो लाख रुपये प्रति किलोग्राम के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे बना रहा।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दोनों धातुओं की कीमतें नीचे आईं। कॉमेक्स पर सोना करीब 1.24 प्रतिशत गिरकर 4,010 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया। कारोबार के दौरान यह 3,989.10 डॉलर प्रति औंस तक फिसल गया, जो 20 जुलाई के बाद का सबसे निचला स्तर बताया गया। इसी तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी लगभग 1.9 प्रतिशत गिरकर 53.96 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।

    कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को इस गिरावट की प्रमुख वजहों में शामिल किया जा रहा है। पश्चिम एशिया में तनाव और हूती विद्रोहियों के हमलों के बीच ब्रेंट क्रूड का भाव 116.7 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। तेल महंगा होने से वैश्विक महंगाई बढ़ने की आशंका रहती है। ऐसी स्थिति में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकते हैं, जिससे सोने और चांदी जैसी ब्याज नहीं देने वाली संपत्तियों की मांग प्रभावित हो सकती है।

    इसके अलावा, मजबूत अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड पर बढ़ती यील्ड ने भी सोने की मांग को कमजोर किया है। बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक और दिसंबर में संभावित ब्याज दरों से जुड़े फैसलों पर बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, दिसंबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना को लेकर बाजार में चिंता बनी हुई है, हालांकि मौद्रिक नीति के वास्तविक फैसले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेंगे।

    आने वाले दिनों में अमेरिकी व्यक्तिगत उपभोग व्यय यानी पीसीई मुद्रास्फीति के आंकड़े महत्वपूर्ण रहेंगे। फेडरल रिजर्व महंगाई के आकलन में इस सूचकांक पर विशेष ध्यान देता है। इसके साथ यूरोपीय केंद्रीय बैंक की बैठक, चीन के आर्थिक आंकड़े और वैश्विक ऊर्जा बाजार की परिस्थितियां भी कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं। यदि महंगाई ऊंची रहती है और ब्याज दरें लंबे समय तक सख्त बनी रहती हैं, तो सोने-चांदी पर दबाव जारी रह सकता है। हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव या बड़ी आर्थिक अनिश्चितता बढ़ने पर सोने को सुरक्षित निवेश की मांग से दोबारा समर्थन मिल सकता है।

  • एशियन पैरा गेम्स में भारत का ऐतिहासिक प्रदर्शन, 114 पदक जीतकर तोड़ा अपना पुराना रिकॉर्ड, खाते में आए 30 गोल्ड

    एशियन पैरा गेम्स में भारत का ऐतिहासिक प्रदर्शन, 114 पदक जीतकर तोड़ा अपना पुराना रिकॉर्ड, खाते में आए 30 गोल्ड


    नई दिल्ली ।
    एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए नया इतिहास रच दिया है। भारतीय दल ने प्रतियोगिता में कुल 114 पदक जीतकर अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया। इन पदकों में 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य शामिल हैं। इसके साथ ही भारत ने 2023 में हांगझोऊ में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में जीते गए 108 पदकों के अपने पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। प्रतियोगिता के अंतिम दिन शुक्रवार को भारतीय खिलाड़ियों ने नौ स्वर्ण पदक अपने नाम किए और देश के कुल पदकों की संख्या को नई ऊंचाई तक पहुंचा दिया।

    इस बार भारत ने 168 खिलाड़ियों का दल प्रतियोगिता में उतारा था, जो 2023 में भेजे गए दल के आकार का लगभग आधा था। इसके बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने पिछले प्रदर्शन से बेहतर परिणाम हासिल किए। प्रतियोगिता के दौरान एथलेटिक्स, बैडमिंटन, तीरंदाजी और निशानेबाजी में खिलाड़ियों ने पदक जीतकर भारत की स्थिति मजबूत की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर था। शनिवार को कुछ अन्य स्पर्धाओं के फाइनल होने थे, जिनमें भारतीय खिलाड़ियों की भागीदारी नहीं थी। ऐसे में अंतिम पदक तालिका में स्थान बदलने की संभावना बनी हुई थी।

    एथलेटिक्स में भारत को मिले सबसे ज्यादा पदक

    भारतीय दल की कुल पदक संख्या बढ़ाने में एथलेटिक्स की सबसे बड़ी भूमिका रही। इस खेल में भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 65 पदक जीते, जो 2023 के एशियन पैरा गेम्स की तुलना में 12 अधिक थे। एथलेटिक्स में मिले इन पदकों ने भारत के अभियान को मजबूती दी। इसके अलावा बैडमिंटन खिलाड़ियों और निशानेबाज मोना अग्रवाल ने भी अपने प्रदर्शन से पदक तालिका में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    बैडमिंटन में नितेश और नवीन ने जीते स्वर्ण
    बैडमिंटन में भारतीय खिलाड़ियों ने तीन स्वर्ण पदक हासिल किए। पेरिस पैरालंपिक चैंपियन नितेश कुमार ने पुरुष एकल एसएल3 वर्ग के फाइनल में हमवतन प्रमोद भगत को हराकर स्वर्ण पदक जीता। नितेश ने यह मुकाबला 21-18, 21-16 से अपने नाम किया। प्रमोद भगत टोक्यो पैरालंपिक के स्वर्ण पदक विजेता हैं। नितेश ने मिश्रित युगल एसएल3-एसयू5 वर्ग में थुलासिमथी मुरुगेसन के साथ मिलकर रजत पदक भी जीता।

    पहली बार एशियन पैरा गेम्स में हिस्सा ले रहे नवीन शिवकुमार ने पुरुष एकल एसएल4 वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। फाइनल में उन्होंने इंडोनेशिया के फ्रेडी सेतियावान को 21-9, 21-17 से हराया। नवीन का यह प्रदर्शन भारतीय बैडमिंटन दल के लिए एक बड़ी उपलब्धि रहा।

    थुलासिमथी मुरुगेसन ने जीते तीन पदक

    24 वर्षीय थुलासिमथी मुरुगेसन ने प्रतियोगिता में प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए एक स्वर्ण और दो रजत पदक हासिल किए। महिला युगल एसएल3-एसयू5 वर्ग में उन्होंने मानसी जोशी के साथ मिलकर स्वर्ण पदक जीता। भारतीय जोड़ी ने फाइनल में चीन की यांग क्यूशिया और शियाओ जूजियान को 21-16, 21-13 से पराजित किया।

    थुलासिमथी ने महिला एकल एसयू5 वर्ग में रजत पदक भी जीता। फाइनल में उन्हें चीन की यांग क्यूशिया के खिलाफ 18-21, 11-21 से हार का सामना करना पड़ा। मिश्रित युगल में नितेश कुमार के साथ जीते रजत पदक के साथ उनका अभियान तीन पदकों पर समाप्त हुआ।

    भारतीय खिलाड़ियों के इस सामूहिक प्रदर्शन ने एशियन पैरा गेम्स में देश के लिए नया मानक स्थापित किया। 114 पदकों की उपलब्धि ने 2023 के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए भारत के पैरा खेलों में बढ़ते प्रदर्शन को रेखांकित किया।

  • सोना-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट, चांदी 6,799 रुपये टूटी, दो लाख के नीचे पहुंचा भाव

    सोना-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट, चांदी 6,799 रुपये टूटी, दो लाख के नीचे पहुंचा भाव

    नई दिल्ली । कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है। शुक्रवार, 23 अक्टूबर को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी के भाव में एक बार फिर बड़ी कमजोरी देखने को मिली। वैश्विक शेयर बाजारों में बिकवाली, कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने रहना और ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहने की आशंका ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। इसका सीधा असर कीमती धातुओं पर पड़ा। घरेलू वायदा बाजार में चांदी की कीमत गिरकर दो लाख रुपये प्रति किलोग्राम के नीचे आ गई, जबकि सोना भी अपने पिछले बंद स्तर से काफी नीचे कारोबार करता दिखाई दिया।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर दिसंबर में डिलीवरी वाला सोना पिछले कारोबारी सत्र में 1,43,309 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। शुक्रवार को यह 1,251 रुपये यानी 0.87 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,42,058 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला। कारोबार के दौरान बिकवाली बढ़ने से इसका भाव 1,41,806 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। इस स्तर पर सोने में पिछले बंद भाव के मुकाबले 1,503 रुपये यानी 1.04 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, बाद में कीमतों में कुछ सुधार हुआ। कारोबार के दौरान सोना 629 रुपये यानी 0.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,42,680 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बना हुआ था।

    चांदी की कीमतों में इससे भी अधिक गिरावट दर्ज की गई। दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी पिछले कारोबारी सत्र में 1,99,599 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। शुक्रवार को यह 3,012 रुपये यानी 1.50 प्रतिशत टूटकर 1,96,587 रुपये प्रति किलोग्राम पर खुली। दिन के कारोबार में गिरावट तेज हुई और इसका भाव 6,799 रुपये यानी 3.40 प्रतिशत फिसलकर 1,92,800 रुपये प्रति किलोग्राम के निचले स्तर तक पहुंच गया। इस गिरावट के साथ चांदी दो लाख रुपये प्रति किलोग्राम के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे आ गई। हालांकि, बाद में कुछ खरीदारी लौटने से कीमत में आंशिक सुधार हुआ और चांदी 1.66 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,96,276 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती नजर आई।

    बाजार में कमजोरी की प्रमुख वजहों में महंगी ऊर्जा और उससे बढ़ने वाली महंगाई की चिंता शामिल है। कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहने के कारण निवेशकों को आशंका है कि महंगाई पर नियंत्रण पाना मुश्किल हो सकता है। ऐसी स्थिति में प्रमुख केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकते हैं। ऊंची ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड से सोने जैसी ऐसी संपत्तियों पर दबाव पड़ता है, जिनसे नियमित ब्याज नहीं मिलता। ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर होने से भी निवेशकों का रुझान प्रभावित हुआ है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। कॉमेक्स पर सोना लगभग 0.65 प्रतिशत टूटकर 4,034 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं, चांदी करीब 1.30 प्रतिशत गिरकर 54.29 डॉलर प्रति औंस के आसपास रही। वैश्विक बाजार में सोने का भाव 4,000 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंचने से कीमती धातुओं में कमजोरी का माहौल बना हुआ है।

    हालांकि, डॉलर में कमजोरी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी आने पर सोने-चांदी को कुछ समर्थन मिल सकता है। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, महंगाई के रुझान, केंद्रीय बैंकों की नीतियों, चीन की अर्थव्यवस्था, भू-राजनीतिक परिस्थितियों और कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगी।

    इस साल सोने ने घरेलू वायदा बाजार में 1,80,779 रुपये प्रति 10 ग्राम का रिकॉर्ड स्तर छुआ था, जबकि चांदी 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम के ऐतिहासिक उच्च स्तर तक पहुंची थी। मौजूदा भाव की तुलना में दोनों धातुएं अपने रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे आ चुकी हैं। विशेष रूप से चांदी की कीमत अपने ऐतिहासिक उच्च स्तर के मुकाबले लगभग आधी रह गई है। आगे कीमतों की दिशा वैश्विक आर्थिक संकेतों और निवेशकों की धारणा पर निर्भर करेगी।

  • एशियन पैरा गेम्स : शीतल-तोमन की जोड़ी ने तीरंदाजी में जीता स्वर्ण, सुवर्णा को डिस्कस थ्रो में मिला गोल्ड

    एशियन पैरा गेम्स : शीतल-तोमन की जोड़ी ने तीरंदाजी में जीता स्वर्ण, सुवर्णा को डिस्कस थ्रो में मिला गोल्ड


    आइची नागोया।
    एशियन पैरा गेम्स 2026 (Asian Para Games 2026) के चौथे दिन भारत (India) ने सुवर्णा राज (Suvarna Raj) के स्वर्ण और स्वाति चौधरी (Swati Chaudhary) के ऐतिहासिक रजत के साथ शानदार शुरुआत की। सुवर्णा ने महिला डिस्कस थ्रो एफ54 में 15.66 मीटर के थ्रो से स्वर्ण जीता। वहीं, स्वाति महिला डब्ल्यू1 तीरंदाजी में भारत का पहला पदक जीतने वाली खिलाड़ी बनीं। पैरा बैडमिंटन में भी भारत ने दो कांस्य पदक जीते और एक जोड़ी फाइनल में पहुंची। इसके साथ ही शीतल देवी और तोमन कुमार ने पैरा कंपाउंड मिक्स्ड टीम में स्वर्ण जीता।

    शीतल देवी और तोमन कुमार ने भारत को स्वर्ण पदक दिलाया। भारतीय जोड़ी ने पैरा कंपाउंड मिक्स्ड टीम के फाइनल में इंडोनेशिया को 151-148 से हराकर खिताब अपने नाम किया। कड़े मुकाबले में दोनों ने संयम बनाए रखा और भारत को स्वर्ण पदक दिलाया। नागोया में भारत के खाते में एक और स्वर्ण पदक जुड़ गया। शीतल देवी ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी सफलता में नया अध्याय जोड़ा। इस स्वर्ण पदक के साथ दोनों का ऐतिहासिक अभियान पूरा हुआ। इससे पहले भारतीय जोड़ी ने रैंकिंग राउंड में 1,402 अंक का शानदार संयुक्त स्कोर बनाकर विश्व रिकॉर्ड तोड़ा था। फाइनल में जीत के साथ दोनों ने अपने दमदार प्रदर्शन पर स्वर्णिम मुहर लगा दी।

    सुवर्णा राज ने महिला डिस्कस थ्रो एफ54 स्पर्धा में 15.66 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो करके स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने अपने पहले प्रयास में 13.68 मीटर की दूरी हासिल की, जबकि दूसरे प्रयास में 15.09 मीटर तक डिस्कस फेंका। इसके बाद पांचवें प्रयास में उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। ईरान की शाहिद हबीबी ने 15.45 मीटर के थ्रो के साथ रजत पदक जीता। वह सुवर्णा से महज 21 सेंटीमीटर पीछे रहीं। वियतनाम की गुयेन थी न्गोक थuy ने 14.65 मीटर के थ्रो के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया।

    सुवर्णा राज भारत की अनुभवी पैरा एथलीट हैं और व्हीलचेयर का इस्तेमाल करती हैं। वह तीन एशियन पैरा गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और 2017 से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। जनवरी 2026 में कैनबरा ट्रैक मीट में उन्होंने डिस्कस थ्रो में स्वर्ण और शॉट पुट में रजत पदक जीता था। इसके बाद दुबई वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में भी उन्होंने कांस्य पदक हासिल किया।

    खेल के अलावा सुवर्णा दिव्यांगजनों के अधिकारों और सुगम्यता के लिए भी काम करती हैं। वह भारत में 1,000 से अधिक सुगम्यता ऑडिट कर चुकी हैं और उन्हें 2015 में राष्ट्रीय युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

    भारत ने पैरा बैडमिंटन में दो और कांस्य पदक अपने नाम किए। पुरुष एकल एसएल4 स्पर्धा में सुहास यथिराज और अभिजीत सुखुजा ने कांस्य पदक जीते। सुहास ने इंडोनेशिया के पैरालंपिक पदक विजेता फ्रेडी सेतियावान को कड़ी टक्कर दी, लेकिन तीन गेम तक चले मुकाबले में उन्हें 21-23, 21-8, 15-21 से हार का सामना करना पड़ा। वहीं, अभिजीत को हमवतन नवीन शिवकुमार के खिलाफ 13-21, 15-21 से शिकस्त मिली। अब नवीन और सेतियावान फाइनल में आमने-सामने होंगे। इस तरह स्वर्ण पदक के मुकाबले में भारत का एक खिलाड़ी जरूर पहुंचेगा।

    भारत के खाते में बैडमिंटन का एक और कांस्य पदक जुड़ गया। संजना कुमारी ने महिला एकल एसएल3 स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। उन्हें सेमीफाइनल में जापान की शिनो कावाई के खिलाफ 7-21, 9-21 से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के साथ संजना का स्वर्ण पदक जीतने का सपना टूट गया, लेकिन उन्होंने कांस्य पदक के साथ प्रतियोगिता का समापन किया। नागोया में बैडमिंटन में भारत के पदकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।


    भारत के 70 पदक, छठे स्थान पर देश

    एशियन पैरा गेम्स 2026 की पदक तालिका में भारत 15 स्वर्ण, 22 रजत और 33 कांस्य सहित कुल 70 पदक जीतकर छठे स्थान पर है। भारत को सबसे ज्यादा 43 पदक पैरा एथलेटिक्स में मिले हैं, जिनमें 14 स्वर्ण, 13 रजत और 16 कांस्य शामिल हैं। पैरा बैडमिंटन और पैरा तैराकी में छह-छह, पैरा टेबल टेनिस में पांच और पैरा शूटिंग में चार पदक मिले हैं। वहीं, पैरा तीरंदाजी, पैरा जूडो और पैरा पावरलिफ्टिंग में भारत ने दो-दो पदक जीते हैं। पदक तालिका में चीन 249 पदकों (116 स्वर्ण) के साथ शीर्ष पर है, जबकि उज्बेकिस्तान 98 पदकों के साथ दूसरे और मेजबान जापान 106 पदकों के साथ तीसरे स्थान पर है। दक्षिण कोरिया 52 पदकों के साथ चौथे और ईरान 66 पदकों के साथ पांचवें स्थान पर है। भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या ईरान के बराबर 15 है, लेकिन रजत पदक एक कम होने के कारण भारत छठे स्थान पर है।

  • दशहरे पर सोने की कीमतों में गिरावट, 24 कैरेट का भाव 1.48 लाख रुपये के करीब, जानें अपने शहर के रेट

    दशहरे पर सोने की कीमतों में गिरावट, 24 कैरेट का भाव 1.48 लाख रुपये के करीब, जानें अपने शहर के रेट

    नई दिल्ली । दशहरे के अवसर पर मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को देश के सर्राफा बाजार बंद हैं। ऐसे में सोने की खरीदारी करने वाले लोगों को पिछले कारोबारी सत्र के भाव और उपलब्ध शहरवार दरों के आधार पर कीमतों का अंदाजा लगाना होगा। सोने की कीमतों में हाल के दिनों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। घरेलू वायदा बाजार में गिरावट दर्ज की गई, जबकि दिल्ली के सर्राफा बाजार में पिछले कारोबारी दिन सोने की कीमतों में तेजी आई थी। अलग-अलग शहरों में 24, 22 और 18 कैरेट सोने के भाव में भी अंतर देखने को मिल रहा है।

    उपलब्ध दरों के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत दिल्ली और लखनऊ जैसे शहरों में 1,48,190 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है। मुंबई और कोलकाता में इसका भाव 1,48,040 रुपये प्रति 10 ग्राम है। इंदौर, भोपाल, पटना और अहमदाबाद में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,48,090 रुपये प्रति 10 ग्राम बताई गई है। ये दरें शहरवार उपलब्ध कीमतों पर आधारित हैं। स्थानीय दुकानों पर कर, मेकिंग चार्ज और अन्य शुल्क के कारण अंतिम कीमत अलग हो सकती है।

    22 कैरेट सोने की बात करें तो दिल्ली, लखनऊ, कानपुर, जयपुर, चंडीगढ़ और कई अन्य शहरों में इसकी कीमत 1,35,850 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है। मुंबई, कोलकाता, पुणे और बेंगलुरु में 22 कैरेट सोने का भाव 1,35,700 रुपये प्रति 10 ग्राम है। वहीं, इंदौर, भोपाल, पटना और अहमदाबाद में इसकी कीमत 1,35,750 रुपये प्रति 10 ग्राम बताई गई है। आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों के लिए 22 कैरेट सोना महत्वपूर्ण विकल्प होता है, क्योंकि इसका इस्तेमाल सामान्य तौर पर गहने बनाने में किया जाता है।

    18 कैरेट सोने की कीमत भी शहर के अनुसार अलग-अलग है। दिल्ली में इसका भाव 1,11,180 रुपये प्रति 10 ग्राम है, जबकि मुंबई और कोलकाता में यह 1,11,030 रुपये दर्ज किया गया है। इंदौर, भोपाल और पटना में 18 कैरेट सोने की कीमत 1,11,080 रुपये प्रति 10 ग्राम बताई गई है। चेन्नई में इसका भाव 1,11,550 रुपये प्रति 10 ग्राम है। खरीदारी से पहले स्थानीय सर्राफा कारोबारी से ताजा दर की पुष्टि करना जरूरी है।

    वायदा बाजार में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने का भाव 618 रुपये यानी 0.42 प्रतिशत गिरकर करीब 1,47,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। इससे पहले यह 1,47,918 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। हालांकि, पिछले सोमवार के कारोबार के अन्य आंकड़ों में दिसंबर आपूर्ति वाले सोने के वायदा अनुबंध में 436 रुपये की तेजी दर्ज की गई थी और इसका भाव 1,48,354 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था। अलग-अलग समय के आंकड़ों में यह अंतर बाजार के उतार-चढ़ाव को दर्शाता है।

    दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोमवार को 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 400 रुपये बढ़कर 1,50,300 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई थी। इससे पहले इसका भाव 1,49,900 रुपये था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमतों में बदलाव दर्ज किया गया। उपलब्ध आंकड़ों में हाजिर सोने का भाव करीब 4,175.57 डॉलर प्रति औंस और एक अन्य कारोबारी अपडेट में 4,145 डॉलर प्रति औंस बताया गया।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, त्योहारी मौसम में खुदरा मांग बढ़ने से घरेलू सोने की कीमतों को समर्थन मिल सकता है। दिवाली और शादी-विवाह के मौसम में आभूषणों की खरीदारी बढ़ने की संभावना रहती है। हालांकि, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से जुड़े फैसले, कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिकी बॉण्ड प्रतिफल जैसे कारक अंतरराष्ट्रीय बाजार की दिशा प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए दशहरे के दिन खरीदारी की योजना बना रहे लोगों को बाजार खुलने पर ताजा भाव की जानकारी लेनी चाहिए।

  • गुजरात के राजकोट में अहीर गरबा महोत्सव की भव्यता, सोने के आभूषण पहनकर हजारों महिलाओं ने किया पारंपरिक रास-गरबा

    गुजरात के राजकोट में अहीर गरबा महोत्सव की भव्यता, सोने के आभूषण पहनकर हजारों महिलाओं ने किया पारंपरिक रास-गरबा


    नई दिल्ली ।
    गुजरात में शारदीय नवरात्र के दौरान भक्ति, शक्ति और सांस्कृतिक परंपराओं के विविध रंग देखने को मिल रहे हैं। कहीं पारंपरिक गरबा लोगों को आकर्षित कर रहा है, तो कहीं समाज की पुरानी परंपराएं विशेष आयोजनों के माध्यम से जीवंत नजर आ रही हैं। इसी बीच राजकोट में आयोजित अहीर गरबा महोत्सव ने अपने भव्य आयोजन और पारंपरिक अंदाज के कारण लोगों का ध्यान खींचा। यहां 15 हजार से ज्यादा महिलाओं ने करीब 900 किलो सोने के आभूषण पहनकर पारंपरिक रास-गरबा में हिस्सा लिया। इन आभूषणों की अनुमानित कीमत 1300 करोड़ रुपये से भी अधिक बताई गई है।

    सोने के आभूषणों से सजी महिलाओं की बड़ी संख्या और पारंपरिक नृत्य ने गरबा मैदान को विशेष रूप दे दिया। इस आयोजन में महिलाओं ने अपने पारंपरिक परिधानों के साथ सोने के हार, कंगन और अन्य आभूषण पहने। एक साथ बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी ने अहीर समाज की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक उत्सव की भव्यता को प्रदर्शित किया।

    राजकोट में अहीर गरबा महोत्सव का आयोजन
    राजकोट में अहीर सेना की ओर से अहीर गरबा महोत्सव आयोजित किया गया है। इस महोत्सव में अहीर समाज के भाई-बहन लगातार नौ दिनों तक पारंपरिक अंदाज में गरबा कर रहे हैं। नवरात्र के दौरान अपनी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक पहचान को उत्सव के माध्यम से प्रदर्शित करना इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य है। इसी वजह से महोत्सव में समाज के लोगों का खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

    आयोजन में पारंपरिक रास-गरबा के साथ अहीर समाज की सांस्कृतिक विरासत को भी प्रमुखता दी गई। नवरात्र के सातवें दिन बड़ी संख्या में महिलाएं अपने पारंपरिक परिधानों और सोने के आभूषणों से सजकर गरबा मैदान में पहुंचीं। इसके बाद सामूहिक रूप से पारंपरिक रास-गरबा किया गया। हजारों महिलाओं की एक साथ भागीदारी इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण रही।

    900 किलो सोने के आभूषणों ने खींचा ध्यान
    इस महोत्सव की सबसे खास बात महिलाओं द्वारा पहने गए सोने के आभूषण रहे। करीब 900 किलो सोने के गहनों की अनुमानित कीमत 1300 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों के साथ सोने के हार, कंगन और अन्य आभूषण पहने, जिससे आयोजन की भव्यता और बढ़ गई।

    करीब 15 हजार अहीराणियों की एक साथ मौजूदगी ने इस सांस्कृतिक आयोजन को विशेष पहचान दी। आभूषणों की चमक के साथ पारंपरिक वेशभूषा ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। इस आयोजन में सोने के गहने केवल सजावट का हिस्सा नहीं रहे, बल्कि अहीर समाज की पारंपरिक संस्कृति और उत्सव की विशिष्टता को प्रदर्शित करने का माध्यम भी बने।

    सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बना गरबा
    अहीर गरबा महोत्सव में पारंपरिक रास खेलने की शैली भी आकर्षण का केंद्र रही। यहां गरबा केवल नृत्य तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज की एकता, सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं से जुड़े रहने का प्रतीक बनकर सामने आया। नौ दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में समाज के भाई-बहन पारंपरिक तरीके से भाग ले रहे हैं।

    शारदीय नवरात्र के दौरान आयोजित यह महोत्सव गुजरात की सांस्कृतिक विविधता और पारंपरिक उत्सवों की विशेषता को सामने लाता है। बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी, पारंपरिक परिधान, सोने के आभूषण और सामूहिक रास-गरबा ने राजकोट के इस आयोजन को खास बना दिया।

  • सोने की कीमत में 3,004 रुपये और चांदी में 10,191 रुपये की गिरावट, जानें अब 10 ग्राम गोल्ड और किलो सिल्वर के भाव

    सोने की कीमत में 3,004 रुपये और चांदी में 10,191 रुपये की गिरावट, जानें अब 10 ग्राम गोल्ड और किलो सिल्वर के भाव


    नई दिल्ली ।
    सोने और चांदी की कीमतों में इस सप्ताह बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। दोनों कीमती धातुओं के भाव में कमी आने से खरीदारों और निवेशकों का ध्यान बाजार के नए रुख पर है। सप्ताह के दौरान सोने की कीमत 3,000 रुपये से अधिक और चांदी का भाव 10,000 रुपये से ज्यादा नीचे आया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम घटकर 1,46,426 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया, जबकि चांदी की कीमत कम होकर 2,10,918 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दोनों धातुओं के भाव दबाव में रहे।

    बुलियन बाजार के आंकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत इस सप्ताह 3,004 रुपये घट गई। सप्ताह की शुरुआत में इसका भाव 1,49,430 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो गिरकर 1,46,426 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। इस बदलाव के साथ सोने की कीमत में उल्लेखनीय साप्ताहिक कमी दर्ज की गई है।

    अन्य शुद्धता वाले सोने के भाव में भी गिरावट देखने को मिली। 22 कैरेट सोने की कीमत पहले 1,36,878 रुपये प्रति 10 ग्राम थी, जो घटकर 1,34,126 रुपये रह गई। इसी तरह 18 कैरेट सोने का भाव 1,12,073 रुपये से कम होकर 1,09,820 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इस तरह अलग-अलग श्रेणियों में सोने की कीमतों में कमी दर्ज की गई है।

    सप्ताह के दौरान 24 कैरेट सोने का सबसे ऊंचा भाव 12 अक्टूबर को सुबह के सत्र में 1,48,425 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया था। वहीं, सबसे कम भाव 15 अक्टूबर को सुबह के सत्र में 1,45,564 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। इन आंकड़ों से पता चलता है कि सप्ताह के भीतर सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहा और कुल मिलाकर भाव नीचे आए।

    चांदी की कीमत में भी सोने के मुकाबले बड़ी रकम की गिरावट दर्ज की गई। सप्ताह के दौरान चांदी 10,191 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती हुई। इसका भाव पहले 2,21,109 रुपये प्रति किलो था, जो घटकर 2,10,918 रुपये प्रति किलो रह गया। चांदी का उच्चतम भाव 12 अक्टूबर को सुबह के सत्र में 2,20,874 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया था। इसके बाद कीमत में गिरावट आई और 15 अक्टूबर को सुबह के सत्र में भाव घटकर 2,07,098 रुपये प्रति किलो के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया।

    सोने और चांदी की कीमतें जारी करने वाली व्यवस्था के तहत दिन में दो बार, सुबह और शाम के सत्र में भाव घोषित किए जाते हैं। इससे बाजार में कीमतों के बदलाव पर नजर रखने में मदद मिलती है। हालांकि, ग्राहकों को ध्यान रखना चाहिए कि आभूषण खरीदते समय अंतिम कीमत में शुद्धता, स्थानीय बाजार के भाव, मेकिंग चार्ज और लागू करों के कारण अंतर हो सकता है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 4,186 डॉलर प्रति औंस और चांदी लगभग 57 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार कर रही थी। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण डॉलर मजबूत होने से कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ा है। इसके अलावा, महंगाई बढ़ने की आशंका से ब्याज दरों में इजाफे की संभावना भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर रही है।

    ब्याज दरें बढ़ने की आशंका के बीच कुछ निवेशक सोने और चांदी में बिकवाली कर रहे हैं। इससे दोनों धातुओं की कीमतों में गिरावट को बल मिला है। आने वाले दिनों में इनके भाव पर डॉलर की चाल, कच्चे तेल की कीमतों और ब्याज दरों से जुड़े संकेतों का असर बना रह सकता है।

  • सोने में 4,500 रुपये और चांदी में 13,500 रुपये की गिरावट, जानिए सर्राफा और वायदा बाजार में ताजा भाव

    सोने में 4,500 रुपये और चांदी में 13,500 रुपये की गिरावट, जानिए सर्राफा और वायदा बाजार में ताजा भाव


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सर्राफा बाजार में इस सप्ताह सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सप्ताह के दौरान सोना प्रति 10 ग्राम 4,500 रुपये सस्ता हुआ, जबकि चांदी की कीमत प्रति किलोग्राम 13,500 रुपये तक गिर गई। हालांकि, शुक्रवार को दिल्ली के हाजिर सर्राफा बाजार में दोनों कीमती धातुओं के भाव स्थिर रहे। दूसरी ओर, वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली। रुपये की मजबूती और अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव का असर भी घरेलू कीमतों पर पड़ा।

    दिल्ली के सर्राफा बाजार में शुक्रवार को 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने का भाव सभी करों सहित 1,49,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर स्थिर रहा। पूरे सप्ताह के हिसाब से इसकी कीमत में 4,500 रुपये यानी करीब 3 प्रतिशत की कमी आई। अंतरराष्ट्रीय हाजिर बाजार में सोने की कीमत में मामूली सुधार हुआ और यह 0.30 प्रतिशत बढ़कर 4,183.34 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।

    वायदा बाजार में सोने की कीमतों का रुख हाजिर बाजार से अलग रहा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर दिसंबर में डिलीवरी वाले सोने का अनुबंध शुक्रवार को 876 रुपये या 0.59 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,48,365 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान ताजा खरीदारी और हाजिर मांग में सुधार को इस तेजी से जोड़कर देखा गया। न्यूयॉर्क के वायदा बाजार में भी सोने की कीमत 0.01 प्रतिशत बढ़कर 4,171.84 डॉलर प्रति औंस दर्ज की गई।

    चांदी की कीमतों में भी सप्ताह के दौरान उल्लेखनीय गिरावट रही। दिल्ली के सर्राफा बाजार में शुक्रवार को चांदी का भाव 2.15 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर रहा। हालांकि, साप्ताहिक आधार पर इसकी कीमत 13,500 रुपये यानी करीब 6 प्रतिशत कम हुई। अंतरराष्ट्रीय हाजिर बाजार में चांदी 1 प्रतिशत की तेजी के साथ 57.80 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

    एमसीएक्स पर दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी का वायदा अनुबंध शुक्रवार को 2,217 रुपये या 1.05 प्रतिशत बढ़कर 2,12,877 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ। कारोबारियों की ओर से सौदों का आकार बढ़ाए जाने के बीच कीमतों में मजबूती दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय वायदा बाजार में भी चांदी 0.31 प्रतिशत चढ़कर 57.58 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

    घरेलू बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी सीमित रहने की एक प्रमुख वजह भारतीय रुपये की मजबूती रही। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार छठे कारोबारी सत्र में मजबूत हुआ और सात पैसे की बढ़त के साथ 94.92 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। भारतीय रिजर्व बैंक के कदमों से मिले समर्थन के बीच रुपये की मजबूती का असर आयात लागत पर भी पड़ता है। डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत होने से विदेशों से खरीदे जाने वाले सोने और चांदी की लागत कम हो सकती है, जिससे घरेलू कीमतों में तेजी सीमित रह सकती है।

    बाजार के जानकारों के अनुसार, सोना 1.49 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2.15 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर तक फिसलने के बाद दोनों धातुओं में नुकसान की भरपाई करने की कोशिश दिखाई दी। हालांकि, रुपये की लगातार मजबूती ने इस सुधार को सीमित रखा।

    आगे के रुझान को लेकर कच्चे तेल की कीमतों पर भी नजर रखी जा रही है। बाजार विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक, आने वाले समय में सोने की कीमतों में हल्की तेजी के साथ सीमित दायरे में कारोबार हो सकता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार, रुपये की चाल और कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव के अनुसार सोने-चांदी के भाव में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

  • सोने-चांदी के आभूषण निर्यात पर घटा ड्यूटी ड्रॉबैक, गोल्ड पर 3.1 प्रतिशत और सिल्वर पर करीब 9 प्रतिशत की कटौती

    सोने-चांदी के आभूषण निर्यात पर घटा ड्यूटी ड्रॉबैक, गोल्ड पर 3.1 प्रतिशत और सिल्वर पर करीब 9 प्रतिशत की कटौती

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने सोने और चांदी के आभूषणों सहित कीमती धातुओं से बने उत्पादों के निर्यात पर मिलने वाली ड्यूटी ड्रॉबैक दरों में कटौती की है। नए संशोधन के तहत सोने के आभूषणों पर मिलने वाला रिफंड करीब 3.1 प्रतिशत और चांदी के आभूषणों तथा अन्य संबंधित उत्पादों पर मिलने वाला रिफंड लगभग 9 प्रतिशत घटा दिया गया है। इस बदलाव से भारतीय आभूषण निर्यातकों को पहले की तुलना में कम वित्तीय राहत मिलेगी। इसका असर कारोबार की लागत, लाभ के मार्जिन और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा पर पड़ सकता है।
    वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, सोने के आभूषणों के निर्यात पर ड्यूटी ड्रॉबैक की दर 1,851.99 रुपये प्रति ग्राम से घटाकर 1,794.11 रुपये प्रति ग्राम कर दी गई है। इस तरह निर्यातकों को अब प्रत्येक ग्राम सोने के आभूषण पर पहले के मुकाबले 57.88 रुपये कम रिफंड मिलेगा। बड़ी मात्रा में आभूषणों का निर्यात करने वाली कंपनियों के लिए यह अंतर महत्वपूर्ण हो सकता है।
    चांदी के उत्पादों के मामले में कटौती अधिक है। चांदी के आभूषणों और अन्य संबंधित वस्तुओं के निर्यात पर मिलने वाली ड्यूटी ड्रॉबैक दर 29,501.09 रुपये प्रति किलोग्राम से घटाकर 26,859.02 रुपये प्रति किलोग्राम कर दी गई है। यानी निर्यातकों को अब प्रति किलोग्राम 2,642.07 रुपये कम रिफंड मिलेगा। इस बदलाव से चांदी के आभूषणों का कारोबार करने वाली कंपनियों की वित्तीय गणना प्रभावित हो सकती है।
    ड्यूटी ड्रॉबैक एक ऐसी व्यवस्था है, जिसके तहत निर्यातकों को निर्यात किए जाने वाले उत्पादों में इस्तेमाल हुए कच्चे माल और अन्य इनपुट पर चुकाए गए पात्र सीमा शुल्क तथा संबंधित शुल्कों का निर्धारित दरों के अनुसार रिफंड मिलता है। इसका उद्देश्य उत्पादन पर पड़ने वाले शुल्क के बोझ को कम करना और घरेलू उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाए रखने में सहायता देना है। दरों में बदलाव होने से निर्यातकों को मिलने वाली इस वित्तीय राहत की मात्रा भी बदल जाती है।
    गौरतलब है कि इसी वर्ष जुलाई में सरकार ने सोने और चांदी के आभूषणों के लिए ड्यूटी ड्रॉबैक दरों में बड़ी बढ़ोतरी की थी। उस समय सोने के आभूषणों पर रिफंड की दर 773.17 रुपये प्रति ग्राम से बढ़ाकर 1,851.99 रुपये प्रति ग्राम की गई थी। इसी तरह चांदी के उत्पादों पर मिलने वाला रिफंड 14,990.66 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 29,501.09 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया गया था। उस समय इस कदम से निर्यातकों को अधिक राहत मिलने की उम्मीद जताई गई थी।
    अब दरों में की गई कटौती से ज्वैलरी निर्यातकों, बुलियन कारोबारियों और विदेशों में सोने-चांदी के आभूषणों की बड़ी खेप भेजने वाली कंपनियों पर असर पड़ सकता है। कम रिफंड मिलने के कारण कारोबार की प्रभावी लागत बढ़ सकती है। यदि कंपनियां इस अतिरिक्त बोझ को अपने स्तर पर वहन करती हैं, तो उनके लाभ का मार्जिन कम हो सकता है। वहीं, यदि वे कीमतों में बदलाव करती हैं, तो अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ प्रतिस्पर्धा पर भी असर पड़ने की आशंका रहेगी।
    हालांकि, निर्यात पर वास्तविक प्रभाव वैश्विक बाजार में मांग, कीमती धातुओं की कीमतों और कारोबारियों की लागत संरचना जैसे कारकों पर भी निर्भर करेगा। यदि विदेशी बाजारों में भारतीय आभूषणों की मांग मजबूत रहती है, तो कंपनियां इस बदलाव के प्रभाव को कुछ हद तक संभाल सकती हैं। इसके बावजूद, नई दरों के लागू होने के बाद निर्यातकों को अपने खर्च और कारोबार की रणनीति का दोबारा आकलन करना पड़ सकता है।