इस साल अब तक महंगा ही रहा सोना-चांदी
ऊंचाई से नीचे आए दाम
वैश्विक संकेतों का असर, बाजार में उतार-चढ़ाव

ऊंचाई से नीचे आए दाम

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय हालात के बीच कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के ताजा बयान के बाद सोने की कीमतों में एक बार फिर नरमी देखने को मिली है। वहीं चांदी में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है और यह अपने उच्चतम स्तर से करीब 1.87 लाख रुपये तक सस्ती हो चुकी है।
दरअसल, मध्य पूर्व में जारी तनाव के चलते बाजार लगातार प्रभावित हो रहा है। अमेरिका और Iran के बीच टकराव खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। ट्रंप ने साफ कहा है कि जब तक ईरान के साथ समझौता नहीं होता, तब तक ब्लॉकेड हटाने का सवाल ही नहीं है। दूसरी ओर ईरान ने भी संकेत दिया है कि यदि ब्लॉकेड जारी रहा, तो वह Strait of Hormuz को नहीं खोलेगा। इस तनातनी ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है।
इसी माहौल का असर सोने पर दिखा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में 21 अप्रैल, मंगलवार को कॉमैक्स गोल्ड करीब 4 डॉलर टूटकर 4,816.77 डॉलर प्रति औंस पर आ गया।
घरेलू वायदा बाजार Multi Commodity Exchange of India (MCX) पर भी कमजोरी देखने को मिली। 5 जून डिलीवरी वाला सोना 41 रुपये फिसलकर 1,52,799 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया।
चांदी में गिरावट और ज्यादा तेज रही। MCX पर चांदी 4,568 रुपये टूटकर 2,52,574 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखी। सोमवार को बाजार खुलते ही चांदी में भारी बिकवाली देखने को मिली थी। अगर इसके ऑल टाइम हाई से तुलना करें, तो कीमत करीब 1,87,552 रुपये तक नीचे आ चुकी है। उल्लेखनीय है कि MCX पर चांदी इससे पहले 4.20 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी।
विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक तनाव और अमेरिकी नीति संकेतों के चलते आने वाले दिनों में सोना-चांदी की कीमतों में इसी तरह उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

चांदी के रेट में पिछले 10 साल में तेज इजाफा (Silver price histroy)
2016 में अक्षय तृतीया के त्योहार के समय पर 1 किलोग्राम चांदी का रेट 41200 रुपये था। जोकि शुक्रवार यानी 17 अप्रैल की शाम को 247930 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गया। यानी 10 साल में चांदी की कीमतों में 2,06,730 रुपये बढ़ोतरी देखने को मिली है।
पिछले एक साल में 50% बढ़ा सोने का रेट (Gold price surged 50 percent in one year)
2025 में अक्षय तृतीया के समय पर गोल्ड का रेट 95500 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर था। जोकि अब 151000 रुपये के लेवल पर पहुंच गया है। यानी बीते साल अक्षय तृतीया की तुलना में इस बार सोने का रेट 50% से अधिक बढ़ चुका है।
आज क्या है 24 से 14 कैरेट गोल्ड का रेट (Gold Price Today)
इंडियन बुलियंस ज्वैलर्स एसोसिएशन की रिपोर्ट के अनुसार 24 कैरेट गोल्ड का रेट शुक्रवार यानी 17 अप्रैल की शाम को 151358 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं, 23 कैरेट गोल्ड का रेट 150752 रुपये प्रति 10 ग्राम, 22 कैरेट गोल्ड का रेट 138644 रुपये, 18 कैरेट गोल्ड का रेट 113519 रुपये और 14 कैरेट गोल्ड का रेट 88544 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर है।
इससे पहले 16 अप्रैल को गोल्ड का रेट 153305 रुपये प्रति 10 ग्राम था। यानी महज दो दिन में गोल्ड की कीमतों में करीब 2000 रुपये की गिरावट देखने को मिली है। बता दें, अप्रैल के महीने में गोल्ड का रेट लगभग स्थिर ही बना हुआ है।
रिकॉर्ड हाई से क्यों गिरा गोल्ड का रेट? (Why Gold get cheaper)
इसी साल एक समय पर गोल्ड का रेट 175000 रुपये को पार कर गया था। लेकिन वहां से गोल्ड की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिली। इसके पीछे की वजह डॉलर का मजबूत होना माना जा रहा है। वहीं, निवेशकों की तरफ से मुनाफावसूली भी जमकर देखने को मिली है।

सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन वैश्विक संकेतों के बीच घरेलू कमोडिटी बाजार में अस्थिरता साफ दिखाई दी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में जून डिलीवरी वाला सोना कारोबार की शुरुआत में मजबूती के साथ खुला लेकिन दिन बढ़ने के साथ इसमें गिरावट देखने को मिली सोने ने कारोबार के दौरान एक सीमित दायरे में उतार चढ़ाव दिखाया और निवेशकों की सतर्कता के कारण इसमें बड़ी तेजी नहीं बन सकी शुरुआती कारोबार में जहां सोने को वैश्विक मांग और सुरक्षित निवेश के रुझान से समर्थन मिला वहीं बाद में डॉलर की मजबूती और मुनाफावसूली के चलते इसमें दबाव बढ़ गया
दूसरी ओर चांदी ने दिनभर अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया और इसमें हल्की तेजी दर्ज की गई चांदी की कीमतों को औद्योगिक मांग से समर्थन मिला हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार इसमें स्थायी तेजी के लिए अभी और मजबूत संकेतों की आवश्यकता बनी हुई है बाजार प्रतिभागियों का मानना है कि जब तक प्रमुख स्तरों को निर्णायक रूप से पार नहीं किया जाता तब तक इसमें सीमित दायरे में कारोबार जारी रह सकता है
मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले हल्की मजबूती दिखाई शुरुआती कारोबार में रुपया पिछले सत्र की तुलना में मजबूत खुला जिसका प्रमुख कारण घरेलू शेयर बाजार में स्थिरता और विदेशी बाजारों में जोखिम भावना में सुधार रहा साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भी रुपये को समर्थन मिला हालांकि वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती ने रुपये की बढ़त पर दबाव बनाए रखा और इसका प्रभाव दिनभर देखने को मिला
कच्चे तेल के बाजार में भी नरमी का रुख रहा ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी कच्चे तेल दोनों में गिरावट दर्ज की गई जिसका कारण वैश्विक मांग को लेकर अनिश्चितता और भू राजनीतिक घटनाक्रम में अपेक्षाकृत स्थिरता माना जा रहा है मध्य पूर्व में तनाव में कमी और संघर्ष विराम की खबरों ने भी ऊर्जा बाजार की धारणा को प्रभावित किया जिससे तेल की कीमतों में नरमी आई
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू राजनीतिक घटनाक्रमों ने बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाई इजरायल और लेबनान के बीच संघर्ष विराम की घोषणा और अमेरिका ईरान वार्ता में प्रगति की उम्मीदों ने वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को बढ़ाया है हालांकि इसके बावजूद निवेशक पूरी तरह आश्वस्त नहीं दिखे और उन्होंने सुरक्षित निवेश विकल्पों में संतुलित रुख बनाए रखा
घरेलू शेयर बाजार में भी सीमित दायरे में हल्की बढ़त देखने को मिली जिससे रुपये को कुछ समर्थन मिला लेकिन समग्र बाजार माहौल सतर्क ही बना रहा कमोडिटी विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल बाजार में स्पष्ट दिशा का अभाव है और यह स्थिति वैश्विक आर्थिक संकेतों तथा भू राजनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी
इस पूरे परिदृश्य में निवेशकों की नजर आगामी आर्थिक आंकड़ों और केंद्रीय बैंकों की नीतिगत टिप्पणियों पर टिकी हुई है जो आने वाले समय में बाजार की दिशा तय कर सकती हैं फिलहाल बाजार में सतर्कता और अवसर दोनों का मिश्रण बना हुआ है और हर बदलाव पर निवेशक नजर बनाए हुए हैं

इंटरनेशनल मार्केट में भी स्पॉट गोल्ड 2.3% चढ़कर 4,811.66 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 3.3% की तेजी के साथ 4,840 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर बंद हुए।
बाजार में ‘रिलीफ रैली’, आगे भी दिख सकता है उतार-चढ़ाव
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह तेजी फिलहाल “रिलीफ रैली” है। ब्लूमबर्ग ने एक्सपर्ट ताई वोंग के हवाले से बताया है कि सोने के लिए 4,930 डॉलर और 5,000 डॉलर के स्तर अहम रेजिस्टेंस बने रहेंगे। हालांकि, आगे की चाल इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान इस युद्धविराम का पालन करता है या नहीं।
पाकिस्तान की मध्यस्थता से बातचीत की उम्मीद
पाकिस्तान की मध्यस्थता से अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता खुलता दिख रहा है। खबरों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में बातचीत शुरू हो सकती है। हालांकि, ईरान ने साफ किया है कि बातचीत का मतलब यह नहीं है कि तनाव पूरी तरह खत्म हो गया है।
सोने के लिए ऊर्जा कीमतें और महंगाई बनी बड़ी चिंता
ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव अब भी बाजार के लिए बड़ा जोखिम बना हुआ है। अगर तेल की कीमतें फिर बढ़ती हैं, तो इससे वैश्विक महंगाई बढ़ सकती है और केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों पर फैसला लेना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे माहौल में सोना पारंपरिक रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन ऊंची ब्याज दरें इसकी तेजी को सीमित भी कर सकती हैं।
चांदी और अन्य धातुओं में भी तेजी
सोने के साथ-साथ अन्य कीमती धातुओं में भी उछाल देखने को मिला। स्पॉट सिल्वर 4.3% बढ़कर 76.08 डॉलर प्रति औंस पहुंच गई। प्लैटिनम 2.4% चढ़ा, जबकि पैलेडियम में 2.1% की बढ़त दर्ज की गई।
राहत के संकेत, लेकिन अनिश्चितता बरकरार
ट्रंप के फैसले से फिलहाल बाजार को राहत जरूर मिली है, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। सोने की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, क्योंकि बाजार अब अमेरिका-ईरान वार्ता और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर नजर रखे हुए है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों ने ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को कमजोर किया है, जिससे डॉलर मजबूत हुआ और सोने पर दबाव बढ़ गया। ब्लूमबर्ग के अनुसार सिंगापुर में सुबह 8:05 बजे सोने की कीमत 0.9% गिरकर $5,132.76 प्रति औंस और चांदी 1.5% गिरकर $84.44 प्रति औंस पर आ गई। इसी दौरान प्लैटिनम में 1% और पैलेडियम में 0.8% की गिरावट दर्ज की गई।
विशेषज्ञ हेबे चेन के मुताबिक, सोने की गिरावट को “हार मानने” की तरह नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि यह एक “अस्थायी ठहराव” है। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई और मजबूत डॉलर ने फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में कटौती की संभावनाओं को टाल दिया है, जिसके चलते निवेशक फिलहाल सोने से किनारा कर रहे हैं।
सोने का यह गिरना निवेशकों के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि यह अभी भी सुरक्षित निवेश के रूप में लोकप्रिय है। हालांकि, ब्याज दरों की बढ़ोतरी और वैश्विक तनाव के कारण सोने में तत्काल लाभ की संभावना कम हो गई है। एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETF) में भी युद्ध के बाद सोने की मात्रा में गिरावट आई है, हालांकि पिछले सप्ताह इसमें कुछ निवेश दर्ज किए गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि सोने का सुरक्षित निवेश का दौर खत्म नहीं हुआ है। इस साल अब तक सोने की कीमतों में लगभग 20% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के समय यह निवेशकों को भरोसा देता रहा है। चेन का कहना है कि फिलहाल सोने की रफ्तार थमी हुई है, लेकिन यह सिर्फ एक “सांस लेने” का दौर है, और लंबी अवधि में इसका महत्व बरकरार रहेगा।
कीवर्ड्स: सोना, चांदी, महंगाई, डॉलर मजबूती, युद्ध

विशेषज्ञों का कहना है कि सोने और चांदी की इस तेजी के पीछे वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक तनाव मुख्य कारण हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती अनिश्चितता, अमेरिकी टैरिफ को लेकर निवेशकों की चिंताएं और वैश्विक बाजार में सॉलिडिटी की तलाश ने कीमती धातुओं में मांग बढ़ा दी है। निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ते हुए सोने-चांदी को प्राथमिकता दे रहे हैं।
विशेष रूप से चांदी की कीमत में इतनी तेज बढ़ोतरी देखी गई है कि यह फिर से 2.75 लाख रुपये प्रति किलो के पार चली गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव और बढ़ता रहा तो यह रुझान आगे भी जारी रह सकता है। सोने में निवेशकों की मजबूत रुचि के कारण एमसीएक्स पर सोने के कारोबार में भी जोरदार तेजी बनी रही।
इस तेजी का असर सिर्फ निवेशकों तक सीमित नहीं रहा बल्कि ज्वेलरी मार्केट और स्थानीय सोने-चांदी व्यापारियों के भाव में भी असर दिखा। व्यापारियों ने कहा कि खरीदारी में तेजी के चलते कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। विशेषकर त्योहार और शादी के सीजन में सोने-चांदी की कीमतों में इतनी तेज बढ़ोतरी आम लोगों के बजट को प्रभावित कर सकती है।
विशेषज्ञ यह भी सलाह दे रहे हैं कि निवेशक भावों में अचानक उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए सोच-समझकर निवेश करें। हालांकि सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में सोना और चांदी हमेशा आकर्षक रहे हैं, लेकिन मौजूदा समय में वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के कारण उतार-चढ़ाव अधिक देखने को मिल रहा है।
इस बीच, घरेलू वायदा बाजार में एमसीएक्स के आंकड़े बताते हैं कि सोना और चांदी में तेजी की शुरुआत सुबह के शुरुआती कारोबार से ही हुई थी और निवेशकों ने इसी लहर का फायदा उठाया। अप्रैल डिलीवरी वाले सोने का भाव लगातार बढ़कर 1,60,234 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया जबकि मई डिलीवरी वाली चांदी ने 2,77,500 रुपये प्रति किलो का स्तर छू लिया।
वैश्विक निवेशकों की नजरों में बढ़ते तनाव और टैरिफ अस्थिरता ने सोने-चांदी को सुरक्षित निवेश का प्रमुख साधन बना दिया है। इसलिए घरेलू बाजार में भी तेजी की यह लहर मजबूत बनी हुई है। निवेशक और व्यापारी इस उछाल का लाभ उठाने की रणनीति बना रहे हैं।

इसके अलावा निफ्टी मेटल, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी ऑयलएंडगैस, निफ्टी पीएसई, निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी मीडिया, निफ्टी इंडिया डिफेंस और निफ्टी एनर्जी के सूचकांक भी हरे निशान में थे।
लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी मजबूती रही। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 235 अंक या 0.43 प्रतिशत की तेजी के साथ 59,307 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 98 अंक या 0.59 प्रतिशत मजबूत होकर 17,058 पर कारोबार कर रहा था।
सेंसेक्स में टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, टीसीएस, पावर ग्रिड, इंडिगो, टाटा स्टील, एनटीपीसी, एलएंडटी, सन फार्मा, अदाणी पोर्ट्स, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक और बीईएल प्रमुख गेनर्स रहे। वहीं, एसबीआई, बजाज फाइनेंस और एशियन पेंट्स लूजर्स थे।
वैश्विक बाजारों में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला। शंघाई, टोक्यो, हांगकांग, बैंकॉक, जकार्ता और सोल में कारोबार हरे निशान में था। अमेरिकी बाजार मंगलवार को हरे निशान में बंद हुए थे।
विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में तेजी का प्रमुख कारण एफआईआई की ओर से बिकवाली का कम होना है। मंगलवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों एफआईआई ने केवल 102.53 करोड़ रुपए की बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों डीआईआई ने 3,161.22 करोड़ रुपए की खरीदारी की।
सोने और चांदी में भी तेजी देखी गई। खबर लिखे जाने तक सोना 0.44 प्रतिशत की मजबूती के साथ 5,199 डॉलर प्रति औंस और चांदी 2 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 89 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी।

यह सर्वे 18 से 39 साल के 5,000 से अधिक युवाओं से बीच किया गया। रिपोर्ट बताती है कि सोने पर भरोसा अब भी कायम है, लेकिन खरीदने का तरीका बदल रहा है। अब युवा पारंपरिक पारिवारिक फैसलों के बजाय खुद छोटी-छोटी रकम से सोना खरीद रहे हैं। यह रुझान दर्शाता है कि आर्थिक अनिश्चितता और बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच युवा वर्ग सोने को सुरक्षित ठिकाना मान रहा है।
क्या दिखा सर्वे में
सर्वे के मुताबिक, अगर आज 25,000 रुपये निवेश करने हों, तो 61.9% युवा सोना चुनेंगे। इसके मुकाबले म्यूचुअल फंड को 16.6%, एफडी को 13%, शेयर बाजार को 6.6% और क्रिप्टो को सिर्फ 1.9% लोगों ने प्राथमिकता दी। लोगों का कहना है कि बैंक बचत, म्यूचुअल फंड या इक्विटी की तुलना में सोना उन्हें सबसे सुरक्षित विकल्प लगता है। सर्वे में यह भी सामने आया कि करीब 65 प्रतिशत युवाओं का मानना है कि जब अर्थव्यवस्था में अस्थिरता होती है, तब सोना सबसे सुरक्षित निवेश साबित होता है।
खरीदने का तरीका बदला
खास बात यह है कि अब सोना खरीदने का तरीका भी बदल रहा है। अधिकांश युवाओं ने बताया कि उन्होंने हाल में पांच ग्राम से कम सोना खरीदा। इससे संकेत मिलता है कि युवा छोटी-छोटी मात्रा में नियमित निवेश की ओर बढ़ रहे हैं, न कि एकमुश्त बड़ी खरीदारी की ओर। इसका मतलब है कि सोना अब सिर्फ शादी-ब्याह तक सीमित नहीं रह गया है। यह शुरुआती कमाई से जुड़ा एक लचीला बचत विकल्प बन गया है।
खुद फैसले लेने का ट्रेंड बढ़ा
एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह रहा कि लगभग दो-तिहाई युवाओं ने कहा कि सोना खरीदने का फैसला वे खुद लेते हैं। सर्वे में शामिल 42.3% लोगों ने कहा कि घर में हालिया सोना खरीदने की शुरुआत उन्होंने खुद की, जबकि 40% ने माना कि माता-पिता या बड़े सदस्यों की भूमिका रही। जेन जी में ज्यादा आत्मनिर्भरता दिखी है। वहीं मिलेनियल अब भी सोने को परिवार की लंबी सुरक्षा से जोड़कर देखते हैं।
पहला वेतन मिलते ही खरीदा सोना
सर्वे के परिणाम बताते हैं कि पहला वेतन या शुरुआती आय मिलने के बाद बहुत से युवा इसे सोने में निवेश के रूप में खरीदते हैं। लगभग 24.3% ने कहा कि पहला वेतन मिलते ही उन्होंने सोना खरीदा। जबकि 23.9% ने इसे निवेश विकल्प के रूप में लिया। इससे यह भी पता चलता है कि युवा अब सोने को केवल आभूषण की तरह नहीं देखते, बल्कि निवेश का बेहतरीन विकल्प मान रहे हैं।
सोना पहली पसंद
सोना — 61.9%
म्यूचुअल फंड — 16.6%
फिक्स्ड डिपॉजिट — 13%
इक्विटी शेयर — 6.6%
क्रिप्टो — 1.9%

सोने की चमक ने बढ़ाई व्यापार घाटे की टेंशन
सोने का आयात भारत के व्यापार घाटे में उतार-चढ़ाव की एक अहम वजह बनकर उभरा है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों से साफ होता है कि बढ़ती सोने की कीमतों ने आयात बिल को काफी प्रभावित किया है। पिछले छह वर्षों में सोने के आयात मूल्य में 76 प्रतिशत की जबरदस्त वृद्धि हुई है, जो वित्त वर्ष 2018-19 में 32.9 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 58.0 अरब डॉलर हो गया।
आयात की मात्रा घटी, बिल बढ़ा
हैरानी की बात यह है कि इस दौरान आयात की मात्रा में 23 प्रतिशत की गिरावट आई है, जो 982.7 टन से घटकर 757.1 टन रह गई। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह एक संरचनात्मक बदलाव को दर्शाता है, जहां कीमतों में बढ़ोतरी आयात बिल बढ़ाने की मुख्य वजह है, न कि ज्यादा खपत।
चालू वित्त वर्ष के अप्रैल-दिसंबर के दौरान ही सोने का आयात बिल 49.39 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि इस दौरान सिर्फ 474.99 टन सोना आयात किया गया। अप्रैल-जनवरी की अवधि में यह आंकड़ा 61.46 अरब डॉलर हो गया। नवंबर में सोने के आयात के आंकड़ों में भी भारी संशोधन देखने को मिला था, जो शुरुआती 14.8 अरब डॉलर से घटाकर 9.84 अरब डॉलर कर दिया गया था, जो इसकी अस्थिरता को रेखांकित करता है।
चांदी के आयात में भी जोरदार उछाल
सोने के साथ-साथ चांदी के आयात ने भी रफ्तार पकड़ी है। चालू वित्त वर्ष के अप्रैल-दिसंबर के दौरान चांदी के आयात मूल्य में 128.95 प्रतिशत का उछाल आया है। यह 3.39 अरब डॉलर से बढ़कर 7.77 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इसकी वजह आयात की मात्रा में 56.07 प्रतिशत और कीमतों में 46.69 प्रतिशत की बढ़ोतरी बताई जा रही है।
अमेरिका और चीन के साथ व्यापारिक रिश्ते
टैरिफ के दबाव के बावजूद, अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात स्थल बना हुआ है। अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के दौरान अमेरिका को निर्यात लगभग 6 प्रतिशत बढ़कर 72.46 अरब डॉलर रहा। हालांकि, दिसंबर की तुलना में जनवरी में अमेरिका को निर्यात में 4.5 प्रतिशत की गिरावट जरूर आई है। वहीं, चीन भारत का सबसे बड़ा आयात स्रोत बना हुआ है। अप्रैल-जनवरी के दौरान चीन से आयात 13 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 108.18 अरब डॉलर हो गया। सकारात्मक पहलू यह है कि इसी अवधि में चीन को निर्यात में भी 38 प्रतिशत से अधिक की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और यह 15.88 अरब डॉलर तक पहुंच गया।