Tag: Gold

  • अब घरों में रखा सोना आएगा अर्थव्यवस्था के काम, सरकार 'गोल्ड मोनेटाइजेशन 2.0' प्रस्ताव पर कर रही विचार

    अब घरों में रखा सोना आएगा अर्थव्यवस्था के काम, सरकार 'गोल्ड मोनेटाइजेशन 2.0' प्रस्ताव पर कर रही विचार


    नई दिल्ली। भारतीय परिवारों के घरों और लॉकरों में वर्षों से सुरक्षित रखे सोने को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में केंद्र सरकार एक नए प्रस्ताव पर विचार कर रही है। सराफा कारोबारियों की ओर से तैयार किए गए इस प्रस्ताव को ‘गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम 2.0’ नाम दिया गया है। यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो घरेलू स्तर पर मौजूद सोने का बड़ा हिस्सा बाजार में वापस आ सकता है, जिससे सोने के आयात पर निर्भरता कम होने के साथ अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    शुरुआती लक्ष्य 200 टन सोना बाजार में लाने का
    सराफा संगठनों द्वारा सरकार को सौंपे गए प्रस्ताव के अनुसार, योजना के पहले चरण में देशभर के घरों में रखा करीब 200 टन सोना औपचारिक व्यवस्था में लाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे घरेलू मांग का कुछ हिस्सा देश के भीतर उपलब्ध सोने से पूरा किया जा सकेगा और विदेशों से सोना आयात करने की आवश्यकता कम हो सकती है। इसके परिणामस्वरूप विदेशी मुद्रा की बचत होने की संभावना भी जताई गई है।

    पुरानी योजना से कैसे होगी अलग?
    इससे पहले लागू की गई गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम को अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई थी, क्योंकि लोग सीधे बैंकों के माध्यम से प्रक्रिया अपनाने में सहज महसूस नहीं करते थे।

    नए प्रस्ताव में व्यवस्था को अधिक आसान बनाने की बात कही गई है। इसके तहत ग्राहक अपने पुराने या अनुपयोगी आभूषण लेकर सीधे बैंक जाने के बजाय पंजीकृत ज्वेलर्स के पास पहुंच सकेंगे। ज्वेलर गहनों को गलाकर उनकी शुद्धता का आकलन करेगा और निर्धारित प्रक्रिया के तहत उन्हें बैंक में जमा कराया जाएगा।

    ग्राहकों को मिल सकती हैं गोल्ड यूनिट्स
    प्रस्ताव के मुताबिक, जमा किए गए सोने के बदले ग्राहक के बैंक खाते में उसी मूल्य के बराबर गोल्ड यूनिट्स क्रेडिट की जा सकती हैं। इससे लोग पुराने डिजाइनों के गहनों का बेहतर उपयोग कर सकेंगे और अपनी पसंद के नए आभूषण खरीदने का विकल्प भी मिलेगा। वहीं ज्वेलरी उद्योग को अपेक्षाकृत कम लागत पर कच्चे माल के रूप में सोना उपलब्ध होने की संभावना है।

    टैक्स नियमों को लेकर भी राहत की उम्मीद
    योजना के मसौदे में प्रक्रिया को पारदर्शी रखने और लोगों की टैक्स संबंधी आशंकाओं को कम करने पर भी जोर दिया गया है। मौजूदा आयकर नियमों के अनुसार, विवाहित महिला के पास 500 ग्राम, अविवाहित महिला के पास 250 ग्राम और पुरुष के पास 100 ग्राम तक सोना रखने पर सामान्य परिस्थितियों में राहत का प्रावधान है। हालांकि, अंतिम स्थिति संबंधित नियमों और प्रत्येक मामले के तथ्यों पर निर्भर करती है।

    सरकार की मंजूरी का इंतजार
    फिलहाल केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। हालांकि, सराफा बाजार इस पहल को सकारात्मक मान रहा है। कारोबारियों का मानना है कि यदि यह योजना लागू होती है तो घरों में निष्क्रिय पड़े सोने को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा जा सकेगा। इससे न केवल गोल्ड मार्केट को नई गति मिल सकती है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलने की संभावना है।

  • मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच सोना-चांदी पर दबाव, एमसीएक्स में दोनों कीमती धातुओं के दाम गिरे, कच्चा तेल हुआ महंगा

    मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच सोना-चांदी पर दबाव, एमसीएक्स में दोनों कीमती धातुओं के दाम गिरे, कच्चा तेल हुआ महंगा

    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर वैश्विक कमोडिटी बाजार पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। बुधवार को घरेलू वायदा बाजार में सोना और चांदी दोनों गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। निवेशकों की ओर से मुनाफावसूली और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच बदले निवेश रुझान के कारण कीमती धातुओं पर दबाव बना रहा। दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया, जिससे वैश्विक आर्थिक चिंताएं और बढ़ गई हैं।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने के अगस्त डिलीवरी अनुबंध की शुरुआत पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में गिरावट के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में सोने की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला और कारोबार के दौरान यह अपने शुरुआती स्तर से भी नीचे फिसल गया। इससे संकेत मिला कि निवेशक फिलहाल सतर्क रणनीति अपनाते हुए बड़े निवेश से बच रहे हैं।

    चांदी के वायदा अनुबंध में भी कमजोरी का रुख देखने को मिला। कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ होने के बाद इसकी कीमत दो लाख तीस हजार रुपये प्रति किलोग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे पहुंच गई। कारोबार के दौरान चांदी में बिकवाली का दबाव बना रहा, जिससे इसकी कीमतों में और नरमी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और निवेशकों की बदलती रणनीति का असर चांदी की कीमतों पर भी पड़ा है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोना और चांदी दोनों पर दबाव बना रहा। वैश्विक निवेशकों ने जोखिम से जुड़े परिसंपत्तियों के साथ-साथ कीमती धातुओं में भी सतर्क रुख अपनाया। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा हालात में निवेशकों की प्राथमिकता लगातार बदल रही है, जिससे कमोडिटी बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। ऐसे समय में विभिन्न वैश्विक घटनाक्रम निवेश निर्णयों को सीधे प्रभावित कर रहे हैं।

    बाजार पर सबसे बड़ा प्रभाव मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का माना जा रहा है। क्षेत्र में हालिया घटनाओं के बाद ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं, जिसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। ऊर्जा कीमतों में यह तेजी वैश्विक महंगाई और उत्पादन लागत को प्रभावित कर सकती है, जिससे वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बनी रहने की संभावना है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, भू-राजनीतिक घटनाओं के दौरान कमोडिटी बाजार में तेज उतार-चढ़ाव सामान्य माना जाता है। निवेशक लगातार बदलती परिस्थितियों के अनुसार अपनी निवेश रणनीति में बदलाव करते हैं। यही कारण है कि एक ओर ऊर्जा बाजार में तेजी देखने को मिल रही है, जबकि दूसरी ओर कीमती धातुओं में मुनाफावसूली और बिकवाली का दबाव बना हुआ है।

    आने वाले दिनों में सोना, चांदी और कच्चे तेल की कीमतों की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। यदि मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ता है तो वैश्विक बाजारों में अस्थिरता जारी रह सकती है। वहीं स्थिति सामान्य होने पर कमोडिटी बाजार में भी स्थिरता लौटने की संभावना है। फिलहाल निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक संकेतों, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाओं पर बनी हुई है, जो आने वाले कारोबारी सत्रों की दिशा तय करेंगे।

  • सोने की कीमतों में उछाल का फायदा: भारत में गोल्ड लोन 200% तक बढ़ा, कारोबार तीन गुना हुआ

    सोने की कीमतों में उछाल का फायदा: भारत में गोल्ड लोन 200% तक बढ़ा, कारोबार तीन गुना हुआ


    नई दिल्ली। सोने की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी का भारतीयों ने बड़े पैमाने पर लाभ उठाया है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सोना गिरवी रखकर लिए जाने वाले कर्ज की प्रति व्यक्ति औसत राशि में 39 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो बढ़कर 1.96 लाख रुपये तक पहुंच गई है। तीन साल पहले यानी वित्त वर्ष 2022-23 में यह आंकड़ा केवल 98,000 रुपये था। इस तरह लोगों द्वारा लिए जा रहे गोल्ड लोन की औसत राशि लगभग दोगुनी हो गई है।

    क्रेडिट सूचना प्रदाता कंपनी एक्सपेरियन इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2024 से मार्च 2026 के बीच सोने की कीमतों के सूचकांक में 144 प्रतिशत की तेज वृद्धि दर्ज की गई है। इसी बढ़ोतरी के कारण ग्राहकों के पास मौजूद सोने का मूल्य काफी बढ़ गया, जिसके चलते बैंक और वित्तीय संस्थान उसी सोने के बदले 200 प्रतिशत तक अधिक लोन राशि स्वीकृत कर रहे हैं।

    गोल्ड लोन की हिस्सेदारी में तेज उछाल
    रिपोर्ट के मुताबिक, रिटेल लोन बाजार में गोल्ड लोन की हिस्सेदारी पिछले दो वर्षों में 20 प्रतिशत से बढ़कर 41 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसमें पर्सनल लोन और कार लोन जैसे अन्य खुदरा ऋण भी शामिल हैं। यह वृद्धि बताती है कि लोग अब अपनी पारंपरिक संपत्ति सोने को नकदी में बदलने के लिए अधिक सक्रिय हो गए हैं।

    कारोबार तीन गुना तक पहुंचा
    देश में गोल्ड लोन का कुल कारोबार भी तेज गति से बढ़ा है। यह मार्च 2023 में 6.3 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर मार्च 2026 तक 19.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसके साथ ही तीन लाख रुपये से अधिक के बड़े गोल्ड लोन की हिस्सेदारी में भी लगातार वृद्धि देखी जा रही है।

    देशभर में बढ़ी मांग
    गोल्ड लोन अब केवल दक्षिण भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उत्तर और पश्चिम भारत में भी इसकी मांग तेजी से बढ़ी है। वित्त वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश में गोल्ड लोन में 138 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल में 112 प्रतिशत, राजस्थान में 105 प्रतिशत और महाराष्ट्र में 102 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

    बार-बार गोल्ड लोन लेने की प्रवृत्ति
    रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि गोल्ड लोन लेने वाले ग्राहक अब इसे एक नियमित वित्तीय विकल्प की तरह उपयोग कर रहे हैं। वर्ष 2026 की अंतिम तिमाही में लगभग 75 प्रतिशत ग्राहक ऐसे थे, जिन्होंने पहले भी गोल्ड लोन लिया था और फिर से इसके लिए आवेदन किया। इसके साथ ही अब लोग लंबी अवधि की बजाय कम समय के लिए लोन लेकर उसे जल्दी चुकाने की प्रवृत्ति अपना रहे हैं।

    चुकौती में सुधार, डिफॉल्ट में कमी
    तेजी से बढ़ते गोल्ड लोन बाजार के बावजूद ऋण चुकौती की स्थिति में सुधार देखा गया है। 90 दिनों से अधिक डिफॉल्ट के मामले मार्च 2023 में 0.4 प्रतिशत थे, जो मार्च 2026 तक घटकर 0.2 प्रतिशत रह गए हैं। यह संकेत देता है कि लोन बाजार का विस्तार सुरक्षित और अनुशासित तरीके से हो रहा है।

    खुदरा ऋण में बढ़ती हिस्सेदारी
    वित्त वर्ष 2023-24: 20%
    वित्त वर्ष 2024-25: 30%
    वित्त वर्ष 2025-26: 41%

  • सोने में 3 हफ्ते की सबसे बड़ी तेजी, 4,151 डॉलर के पार पहुंचा भाव, चांदी में भी जोरदार उछाल

    सोने में 3 हफ्ते की सबसे बड़ी तेजी, 4,151 डॉलर के पार पहुंचा भाव, चांदी में भी जोरदार उछाल


    नई दिल्ली। कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में तेजी का रुख जारी है। पिछले दो दिनों में लगातार बढ़त दर्ज करते हुए सोना पिछले तीन हफ्तों की सबसे बड़ी छलांग के साथ नए स्तर पर पहुंच गया है। इससे फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना भी कमजोर पड़ गई है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,150 डॉलर के पार
    सिंगापुर स्पॉट मार्केट में सोना 0.7 प्रतिशत की बढ़त के साथ 4,151.48 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता देखा गया। इससे पहले पिछले सत्र में सोने में 2.3 प्रतिशत की तेज बढ़त दर्ज की गई थी, जो पिछले तीन हफ्तों में सबसे बड़ी दैनिक बढ़त मानी जा रही है।

    चांदी भी मजबूत रुख के साथ 1 प्रतिशत बढ़कर 61.50 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। इससे पहले यह लगातार तीन सत्रों में करीब 5 प्रतिशत तक चढ़ चुकी है। ब्लूमबर्ग डॉलर स्पॉट इंडेक्स में पिछले सत्र की 0.5 प्रतिशत गिरावट के बाद हल्की मजबूती देखने को मिली है।

    घरेलू बाजार में भी उतार-चढ़ाव
    घरेलू वायदा बाजार (MCX) में गुरुवार रात करीब 11:30 बजे सोना मामूली गिरावट के साथ 1,45,723 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। वहीं चांदी भी कमजोर होकर 2,33,200 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई। सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना 1,43,003 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2,28,850 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर बंद हुई।

    अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों का असर
    गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में जून महीने में रोजगार वृद्धि की रफ्तार में तेज गिरावट दर्ज की गई है। इससे संकेत मिला है कि मजबूत दिखने के बावजूद अमेरिकी श्रम बाजार अब भी दबाव में है।

    इन आंकड़ों के बाद जुलाई में होने वाली फेडरल रिजर्व की बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना काफी कम हो गई है। पहले जहां दर बढ़ोतरी की उम्मीद अधिक थी, वहीं अब स्वैप मार्केट में इसकी संभावना घटकर लगभग 18 प्रतिशत रह गई है, जो सप्ताह की शुरुआत में करीब 33 प्रतिशत थी।

    तेल और भू-राजनीतिक कारकों का भी असर
    हाल के महीनों में महंगाई को बढ़ाने वाला एक प्रमुख कारण रहे कच्चे तेल की कीमतों में भी नरमी देखी जा रही है। होर्मुज जलमार्ग से टैंकरों की आवाजाही बढ़ने और अमेरिका-ईरान के बीच कतर में हुई सकारात्मक वार्ता के बाद तेल की कीमतें युद्ध-पूर्व स्तर के करीब आ गई हैं। इन घटनाक्रमों का असर वैश्विक महंगाई के दबाव को कम करने की दिशा में देखा जा रहा है।

    आगे और तेजी की संभावना सीमित
    टीडी सिक्योरिटीज में कमोडिटी रणनीति प्रमुख बार्ट मेलेक के अनुसार, कम ऊर्जा कीमतें और कमजोर रोजगार वृद्धि आने वाले समय में मुद्रास्फीति के दबाव को घटा सकती हैं। उनका कहना है कि इससे सोने में शॉर्ट पोजीशन कवरिंग बढ़ी है, जबकि नई बिकवाली का दबाव कम हुआ है।

    हालांकि, उनका मानना है कि सोने में तेजी फिलहाल 4,280 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक सीमित रह सकती है। वहीं, लंबे समय में 5,300 डॉलर के लक्ष्य तक पहुंचने की उम्मीद फिलहाल अगले साल तक टल सकती है।

  • सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट, चेन्नई में तेजी का रुख, चांदी के दाम में जोरदार उछाल

    सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट, चेन्नई में तेजी का रुख, चांदी के दाम में जोरदार उछाल


    नई दिल्ली। घरेलू सर्राफा बाजार में गुरुवार को सोने की कीमतों में मिलाजुला रुख देखने को मिला। चेन्नई को छोड़कर देश के अधिकांश प्रमुख बाजारों में सोने के दाम घटे, जबकि चेन्नई में सोना महंगा हुआ। वहीं चांदी की कीमतों में भी उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई।

    बाजार में आई गिरावट के चलते अधिकांश शहरों में सोना 1,170 से 1,280 रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो गया। इसके विपरीत चेन्नई में 24 और 22 कैरेट सोने के दाम 520 से 570 रुपये प्रति 10 ग्राम तक बढ़ गए। चांदी की कीमत में भी उछाल आया और यह 5,200 रुपये प्रति किलोग्राम तक महंगी हो गई।

    कीमतों में बदलाव के बाद देश के अधिकांश सर्राफा बाजारों में 24 कैरेट सोना 1,40,770 रुपये से 1,44,560 रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच बिक रहा है। वहीं 22 कैरेट सोने की कीमत 1,29,040 रुपये से 1,32,510 रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच दर्ज की गई। दिल्ली सर्राफा बाजार में चांदी का भाव बढ़कर 2,40,100 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गया।

    राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट सोना 1,40,920 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,29,190 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर कारोबार कर रहा है। मुंबई में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,40,770 रुपये और 22 कैरेट सोने का भाव 1,29,040 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। अहमदाबाद में 24 कैरेट सोना 1,40,820 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,29,090 रुपये प्रति 10 ग्राम पर उपलब्ध है।

    चेन्नई में 24 कैरेट सोना 1,44,560 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,32,510 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया। वहीं कोलकाता में 24 कैरेट सोने का भाव 1,40,770 रुपये और 22 कैरेट का भाव 1,29,040 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। भोपाल में 24 कैरेट सोना 1,40,820 रुपये तथा 22 कैरेट सोना 1,29,090 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है।

    जयपुर और लखनऊ में 24 कैरेट सोने का भाव 1,40,920 रुपये, जबकि 22 कैरेट सोना 1,29,190 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। पटना में 24 कैरेट सोना 1,40,820 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,29,090 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर बिक रहा है।

    दक्षिण और पूर्वी भारत के प्रमुख बाजारों में भी सोने की कीमतों में नरमी देखने को मिली। बेंगलुरु, हैदराबाद और भुवनेश्वर में 24 कैरेट सोना 1,40,770 रुपये तथा 22 कैरेट सोना 1,29,040 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है।

  • दो दिनों की तेजी के बाद सोने-चांदी में बड़ी मुनाफावसूली, घरेलू और वैश्विक बाजारों में दबाव बढ़ा, निवेशकों की सतर्कता से कीमतों में आई तेज गिरावट

    दो दिनों की तेजी के बाद सोने-चांदी में बड़ी मुनाफावसूली, घरेलू और वैश्विक बाजारों में दबाव बढ़ा, निवेशकों की सतर्कता से कीमतों में आई तेज गिरावट

    नई दिल्ली । लगातार दो कारोबारी सत्रों तक मजबूत बढ़त दर्ज करने के बाद मंगलवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। घरेलू वायदा बाजार से लेकर हाजिर बाजार और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक कीमती धातुओं पर बिकवाली का दबाव दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में कीमतों में आई तेज बढ़त के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी, जिसके चलते दोनों धातुओं के भाव कमजोर पड़े।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में सोने के अगस्त 2026 वायदा अनुबंध की शुरुआत मामूली कमजोरी के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में स्थिरता दिखाई देने के बावजूद बाद के सत्रों में दबाव बढ़ता गया और कीमतें लाल निशान में कारोबार करती रहीं। दोपहर तक सोने के भाव में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई, जिससे हालिया तेजी का कुछ हिस्सा कम हो गया। कारोबार के दौरान सोने ने ऊपरी और निचले दोनों स्तरों को छुआ, जो बाजार में उतार-चढ़ाव और निवेशकों की सतर्कता को दर्शाता है।

    चांदी के बाजार में भी इसी तरह का रुझान देखने को मिला। जुलाई वायदा अनुबंध में शुरुआत से ही कमजोरी दिखाई दी और दिन चढ़ने के साथ बिकवाली का दबाव और बढ़ गया। चांदी की कीमतों में सोने की तुलना में अधिक गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि निवेशकों ने हालिया तेजी के बाद लाभ सुरक्षित करने को प्राथमिकता दी। कारोबार के दौरान चांदी के भाव में उल्लेखनीय उतार-चढ़ाव भी दर्ज किया गया।

    हाजिर बाजार में भी दोनों धातुओं की कीमतों में नरमी देखने को मिली। 24 कैरेट सोने की कीमत में प्रति 10 ग्राम आधार पर महत्वपूर्ण कमी दर्ज की गई। इसी प्रकार 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने के भाव भी नीचे आए। ज्वेलरी कारोबार और खुदरा बाजार पर इसका सीधा प्रभाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि कीमतों में गिरावट से उपभोक्ताओं के लिए खरीदारी अपेक्षाकृत सस्ती हो जाती है।

    चांदी के हाजिर भाव में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। प्रति किलोग्राम के आधार पर कीमतों में हजारों रुपये की कमी देखने को मिली, जिससे औद्योगिक और निवेश दोनों श्रेणियों के खरीदारों की गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। चांदी का उपयोग निवेश के साथ-साथ विभिन्न उद्योगों में भी व्यापक रूप से किया जाता है, इसलिए इसकी कीमतों में बदलाव का प्रभाव कई क्षेत्रों तक पहुंचता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक बाजारों में कमजोरी का असर भी घरेलू कीमतों पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने और चांदी दोनों के दाम दबाव में रहे, जिससे भारतीय बाजार में भी नकारात्मक संकेत मिले। वैश्विक निवेशकों द्वारा सुरक्षित निवेश साधनों में नई रणनीति अपनाने और हालिया तेजी के बाद लाभ बुक करने की प्रवृत्ति ने कीमतों को प्रभावित किया है।

    बाजार विश्लेषकों का कहना है कि कीमती धातुओं में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशक अब वैश्विक आर्थिक संकेतकों, प्रमुख केंद्रीय बैंकों की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए हैं। ऐसे माहौल में सोने और चांदी की कीमतें आने वाले दिनों में नई दिशा तय कर सकती हैं। फिलहाल मंगलवार का कारोबारी सत्र यह संकेत देता है कि हालिया रिकॉर्ड स्तरों के बाद बाजार में संतुलन स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है और निवेशक सावधानीपूर्वक अपने निवेश निर्णय ले रहे हैं।

  • डॉलर पर निर्भरता घटाने और आर्थिक सुरक्षा के लिए भारत समेत कई देश बढ़ा रहे सोने का भंडार

    डॉलर पर निर्भरता घटाने और आर्थिक सुरक्षा के लिए भारत समेत कई देश बढ़ा रहे सोने का भंडार


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की है, जिससे घरेलू खपत और आयात बिल पर नियंत्रण रखा जा सके। वहीं दूसरी ओर सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) लगातार अपने सोने के भंडार को बढ़ा रहे हैं, जिससे सवाल उठ रहा है कि एक तरफ आम लोगों को सोना खरीदने से क्यों रोका जा रहा है और दूसरी तरफ सरकारी स्तर पर इसकी खरीद क्यों जारी है।

    आंकड़ों के अनुसार,भारतीय रिजर्व बैंक के पास वर्तमान में करीब 880 टन से अधिक सोना भंडार है, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने लगातार सोने की खरीद बढ़ाई है और वैश्विक गोल्ड रिजर्व रैंकिंग में भी अपनी स्थिति मजबूत की है। इसका उद्देश्य विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर पर निर्भरता कम करना और आर्थिक स्थिरता को मजबूत बनाना है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर भी कई देश जैसे चीन, तुर्किये और पोलैंड अपने गोल्ड रिजर्व को तेजी से बढ़ा रहे हैं। इसकी एक बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर पर घटता भरोसा माना जा रहा है। खासकर 2022 में रूस के विदेशी मुद्रा भंडार पर अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के बाद कई देशों ने डॉलर की निर्भरता कम करने की रणनीति अपनाई है।

    सोने को सुरक्षित संपत्ति माना जाता है क्योंकि यह किसी एक देश की मुद्रा या नीतियों पर निर्भर नहीं होता। इसी कारण केंद्रीय बैंक इसे अपने रिजर्व में बढ़ा रहे हैं। भारत भी इसी रणनीति के तहत अपने विदेशी मुद्रा भंडार को संतुलित करने और आर्थिक जोखिम कम करने के लिए सोना खरीद रहा है।

    हालांकि, दूसरी तरफ भारत में सोने का आयात भारी मात्रा में डॉलर खर्च करता है। भारत अपनी जरूरत का लगभग पूरा सोना आयात करता है, जिससे देश का आयात बिल बढ़ता है और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है। यही कारण है कि सरकार आम लोगों से सोने की खरीद सीमित करने की अपील कर रही है ताकि घरेलू मांग नियंत्रित रहे और विदेशी मुद्रा पर दबाव कम हो।

    आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष भारत ने सोने पर भारी खर्च किया है, लेकिन ऊंची कीमतों के कारण खपत में गिरावट भी देखी गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में अगर सोने की कीमतें और बढ़ती हैं तो आयात और भी महंगा हो जाएगा।

    कुल मिलाकर, एक तरफ सरकार वैश्विक आर्थिक सुरक्षा और डॉलर जोखिम से बचाव के लिए सोना जमा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ घरेलू अर्थव्यवस्था और आयात बिल को नियंत्रित रखने के लिए जनता से सोने की खरीद कम करने की अपील की जा रही है।

  • फर्जी 1967 अखबार कटिंग से सियासी बवाल: सोना अपील पर इंदिरा गांधी का नाम जोड़कर सोशल मीडिया में फैलाया जा रहा दावा, फैक्ट-चेक में खुली पोल

    फर्जी 1967 अखबार कटिंग से सियासी बवाल: सोना अपील पर इंदिरा गांधी का नाम जोड़कर सोशल मीडिया में फैलाया जा रहा दावा, फैक्ट-चेक में खुली पोल




    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया “सोना न खरीदने” जैसी अपील के बाद सोशल मीडिया पर एक पुराना राजनीतिक दावा फिर से चर्चा में आ गया है, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से जुड़ी एक कथित 1967 की अखबार कटिंग शेयर की जा रही है। इस दावे के जरिए कहा जा रहा है कि इंदिरा गांधी ने भी आर्थिक संकट के दौरान लोगों से सोना न खरीदने की अपील की थी, लेकिन जांच में यह दावा फर्जी पाया गया है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार सोशल मीडिया पर वायरल हो रही यह कथित “द हिंदू” अखबार की कटिंग 6 जून 1967 की बताई जा रही है, जिसमें इंदिरा गांधी के नाम से “सोना न खरीदने” की अपील का दावा किया गया है। लेकिन खुद अखबार “द हिंदू” ने इस कटिंग को पूरी तरह फर्जी और डिजिटल रूप से एडिटेड बताया है और स्पष्ट किया है कि ऐसा कोई पेज उनके आर्काइव में मौजूद नहीं है।

    अखबार ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी वायरल कंटेंट को शेयर करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें। तथ्य यह है कि 1960 के दशक में भारत विदेशी मुद्रा संकट और आर्थिक दबाव से गुजर रहा था, लेकिन उस समय सोना खरीदने पर ऐसी कोई राष्ट्रीय स्तर की औपचारिक रोक या सार्वजनिक अपील नहीं की गई थी।

    इस विवाद के बीच बीजेपी नेताओं द्वारा भी इस कथित कटिंग को शेयर किए जाने पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने इस दावे का हवाला देते हुए पीएम मोदी की अपील का समर्थन किया, जबकि विपक्ष ने इसे गलत और भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप लगाया है।

    कांग्रेस का कहना है कि आज की आर्थिक अपील को ऐतिहासिक रूप से गलत तरीके से पेश किया जा रहा है, जबकि बीजेपी का तर्क है कि अतीत में भी आर्थिक अनुशासन की बातें होती रही हैं। इस पूरे मामले ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर फैक्ट-चेक और राजनीतिक दावों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • अर्थव्यवस्था को बचाने की कवायद… जानें सोना और तेल के इस्तेमाल में कटौती की अपील का क्या है मकसद?

    अर्थव्यवस्था को बचाने की कवायद… जानें सोना और तेल के इस्तेमाल में कटौती की अपील का क्या है मकसद?


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया (West Asia) में संघर्ष से वैश्विक आपूर्ति शृंखला (Global Supply Chain) में आई रुकावट और विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) सुरक्षित रखने के लिए सोने, पेट्रोल-डीजल और खाने के तेल के इस्तेमाल में कटौती की पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की अपील पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, अपील का मुख्य मकसद डॉलर की मांग कम करना, रुपये को मजबूत करना और अर्थव्यवस्था को संभावित झटकों से बचाना है। विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ती आयात लागत और वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव से दबाव लगातार बढ़ रहा है। भारत तेल का शुद्ध आयातक है और तेल की 89 फीसदी जरूरतें बाहरी स्रोतों से पूरी करता है और इसके लिए उसे अब ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है।


    6 अरब डॉलर का सोना हर माह खरीदता है भारत

    भारत सोने का उत्पादक नहीं है। पिछले वर्ष अकेले सोने पर करीब 72 अरब डॉलर खर्च किए गए। यानी, हर माह छह अरब डॉलर। उपभोक्ता आयात और एक आरक्षित संपत्ति के रूप में सोने की दोहरी भूमिका स्थिति को और जटिल बना देती है। आरबीआई तेजी से सोना जमा कर रहा है। एक साल में उसने लंदन से 168 टन सोना खरीदा है, जिससे मार्च तक उसके पास 880 टन सोना हो गया है। भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की 16% हिस्सेदारी है, जो पिछले वर्ष के 10% से अधिक है। हालांकि, घरेलू सोने की खरीद का आर्थिक असर अलग होता है।

    आरबीआई के रिजर्व प्रबंधन कार्यों के विपरीत आयातित सोने की उपभोक्ता मांग अर्थव्यवस्था में डॉलर के प्रवाह को सीधे तौर पर बढ़ा देती है। इसलिए, बड़े पैमाने पर सोने के आयात से चालू खाता घाटे पर दबाव बढ़ सकता है और डॉलर की मांग बढ़ सकती है। इससे समय के साथ रुपया कमजोर पड़ सकता है। जैसे-जैसे डॉलर बाहर जाता है, रुपया कमजोर होता जाता है, सोना और भी महंगा हो जाता है। इससे दुष्चक्र पैदा हो जाता है, जिसमें भारतीय उपभोक्ता सोने के लिए अधिक रुपये चुकाता है, क्योंकि सोने की पिछली खरीद ने रुपये पर दबाव बढ़ा दिया होता है।


    आयात में बढ़ोतरी से बढ़ रहा दबाव

    थिंक टैंक वैश्विक व्यापार अनुसंधान पहल (जीटीआरआई) ने पीएम की अपील का समर्थन करते हुए कहा कि सोने के आयात में हो रही भारी बढ़ोतरी विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव डाल रही है और व्यापार असंतुलन को बढ़ा रही है। जीटीआरआई के अनुसार, भारत के गोल्ड बार का आयात 2022 में 36.5 अरब डॉलर था, जो 2025 में बढ़कर 58.9 अरब डॉलर हो गया। थिंक टैंक ने सरकार से आग्रह किया है कि विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित रखने के लिए, भारत-यूएई मुक्त व्यापार समझौते के तहत कीमती धातुओं पर दी जाने वाली रियायतों की समीक्षा करे। हाल में सोने के आयात में हुई बढ़ोतरी में इसकी बड़ी भूमिका रही है। अमीरात से 2022 में जहां गोल्ड बार का आयात 2.9 अरब डॉलर था, वहीं 2025 में यह बढ़कर 16.5 अरब डॉलर हो गया।


    89% तेल का आयात करता है भारत

    तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर भी डॉलर के बाहर जाने में वृद्धि के रूप में सामने आता है। हालांकि पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतें स्थिर रखी गई हैं, पर इसकी भरपाई सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने की है। इन कंपनियों को खुदरा कीमत और आयात कीमत के बीच के अंतर का सामना करना पड़ा है और अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में उछाल के कारण इन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) को एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर भी नुकसान हो रहा है, जिससे उन पर दबाव और बढ़ गया है। इसे देखते हुए कि सरकार ने ओएमसी को इन नुकसानों की भरपाई करने की कोई योजना नहीं होने का संकेत दिया है, कीमतों में बढ़ोतरी की उम्मीद है और कंपनियां खुद भी इस तरह के बदलाव के लिए जोर दे रही हैं। हालांकि, ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी कुछ ही दिनों में पूरी आपूर्ति शृंखला में फैल जाती है।


    खाद्य तेल : विकल्प सीमित थाली की बढ़ती जा रही लागत

    भारत खाने के तेल की जरूरतों के लिए आयात पर बहुत निर्भर है, खासकर इंडोनेशिया और मलयेशिया से पाम तेल तथा रूस और यूक्रेन से सूरजमुखी का तेल मंगाता है। पीएम मोदी ने कहा था कि यदि हर घर खाने के तेल का इस्तेमाल कम कर दे, तो राष्ट्रीय खजाने के साथ परिवार की सेहत भी सुधरेगी। सोने की खरीद टाला जा सकता है या सैद्धांतिक रूप से ईंधन की बचत की जा सकती है, लेकिन खाने के तेल के विकल्प सीमित हैं। यह रोजमर्रा की आवश्यक चीज है। रुपये की गिरावट से यह समस्या और भी बढ़ गई है। कमजोर रुपया आयातित तेल के हर लीटर की कीमत बढ़ा देता है और खाने के तेल की कीमतों में हुई यह बढ़ोतरी आपूर्ति शृंखला के जरिये तेजी से उपभोक्ता की थाली तक पहुंच जाती है। घरेलू स्तर पर उपलब्ध सरसों के तेल जैसे विकल्प मौजूद हैं, लेकिन इनका उत्पादन इतनी तेजी से नहीं बढ़ाया जा सकता कि ये आयात की जगह ले सकें।


    रासायनिक उर्वरक : बढ़ रहीं कीमतें, खाने-पीने की वस्तुओं पर असर

    प. एशिया आपूर्ति मार्गों में भारी रुकावट की वजह से आयात किए गए यूरिया की कीमत फरवरी में 508 डॉलर से बढ़कर 935 डॉलर प्रति टन हो गई है। इसी तरह, डीएपी (डाई-अमोनियम फॉस्फेट) की कीमत पिछले साल के 680 डॉलर से बढ़कर 925 डॉलर प्रति टन होने की उम्मीद है। अमोनिया की कीमतें भी 435 डॉलर से बढ़कर 850–900 डॉलर प्रति टन हो गई हैं, जो दोगुनी से भी अधिक हैं। यूरिया आयात का लगभग 75% हिस्सा खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के देशों से आता है।

    खाद के घरेलू उत्पादन को भी झटका लगा है। खाड़ी से एलएनजी की आपूर्ति में रुकावटों के कारण मार्च में यूरिया का उत्पादन 25 लाख टन की सामान्य मासिक दर के मुकाबले घटकर 15 लाख टन रह गया। जून में स्टॉक की पर्याप्त भरपाई नहीं हुई, तो खेती में इस्तेमाल चीजों की बढ़ी लागत का असर खाद्य वस्तुओं पर पड़ेगा।


    यूरिया आयात का 75% हिस्सा जीसीसी से आता है

    घरेलू यूरिया प्लांट फीडस्टॉक के तौर पर एलएनजी पर निर्भर रहते हैं, जिसका 60% से अधिक हिस्सा कतर, यूएई व ओमान से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आयात किया जाता है। इस मार्ग में बाधा ने उर्वरक आयात को प्रभावित किया। खरीफ मौसम के लिए 194 लाख टन यूरिया की जरूरत है, जबकि अप्रैल में स्टॉक केवल 55 लाख टन था।

  • गोल्ड-सिल्वर में मिला-जुला रुख, अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता से निवेशक सतर्क..

    गोल्ड-सिल्वर में मिला-जुला रुख, अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता से निवेशक सतर्क..


    नई दिल्ली । 
    वैश्विक स्तर पर जारी राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताओं का असर एक बार फिर कमोडिटी बाजार में साफ दिखाई दिया है। सप्ताह की शुरुआत में सोने और चांदी दोनों की कीमतों ने निवेशकों को मिश्रित संकेत दिए, जहां एक ओर सोना दबाव में रहा तो दूसरी ओर चांदी में हल्की मजबूती देखने को मिली।

    घरेलू वायदा बाजार में Gold की शुरुआत कमजोर रुख के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में इसमें मामूली गिरावट दर्ज की गई और इसके बाद पूरे सत्र में कीमतें उतार-चढ़ाव के बीच सीमित दायरे में घूमती रहीं। बाजार में स्पष्ट दिशा की कमी के कारण निवेशक सतर्क नजर आए और बड़ी खरीदारी से बचते दिखे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सोने में यह दबाव मुख्य रूप से वैश्विक घटनाक्रमों और निवेशकों की बदलती रणनीति के कारण देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अस्थिरता के चलते सुरक्षित निवेश की मांग तो बनी हुई है, लेकिन साथ ही अनिश्चितता ने बाजार को अस्थिर भी कर दिया है, जिससे कीमतों में स्थिरता नहीं बन पा रही है।

    इसके विपरीत Silver ने शुरुआती कारोबार में हल्की मजबूती दिखाई। चांदी की कीमतों में दिनभर सकारात्मक रुझान बना रहा, हालांकि इसमें तेज उछाल नहीं देखा गया। सीमित बढ़त के बावजूद निवेशकों की रुचि बनी रही और खरीदारी का माहौल थोड़ा बेहतर नजर आया।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दोनों धातुओं का रुख समान रूप से अस्थिर रहा। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और राजनीतिक तनाव के कारण निवेशक फिलहाल बड़े जोखिम लेने से बच रहे हैं। यही कारण है कि सोने और चांदी दोनों में स्पष्ट ट्रेंड के बजाय सीमित दायरे में कारोबार देखने को मिल रहा है।

    बाजार विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा समय में कमोडिटी बाजार पूरी तरह से खबरों और वैश्विक घटनाओं पर निर्भर हो गया है। किसी भी बड़े राजनीतिक या आर्थिक संकेत का सीधा असर कीमतों पर देखने को मिल रहा है, जिससे बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।

    इस बीच वैश्विक स्तर पर चल रहे तनावपूर्ण हालात ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है। विभिन्न देशों के बीच जारी मतभेद और कूटनीतिक अस्थिरता का असर सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग पर पड़ रहा है, लेकिन साथ ही बाजार की दिशा स्पष्ट नहीं हो पा रही है।

    कुल मिलाकर, मौजूदा परिस्थितियों में सोने और चांदी का बाजार संतुलन की तलाश में नजर आ रहा है। दोनों धातुएं सीमित दायरे में कारोबार कर रही हैं और निवेशक फिलहाल स्पष्ट संकेतों का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम ही इस बाजार की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।