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  • सरकार अगले महीने एआई नियमों पर जारी करेगी परामर्श पत्र, डीपफेक और सुरक्षित तकनीकी इस्तेमाल पर रहेगा मुख्य फोकस

    सरकार अगले महीने एआई नियमों पर जारी करेगी परामर्श पत्र, डीपफेक और सुरक्षित तकनीकी इस्तेमाल पर रहेगा मुख्य फोकस

    नई दिल्ली ।केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि सरकार अगले महीने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई से जुड़े नियमों पर एक परामर्श पत्र जारी करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य एआई के सुरक्षित इस्तेमाल को सुनिश्चित करना और तेजी से बढ़ रहे डीपफेक के खतरे से निपटना होगा। सरकार की ओर से एआई के इस्तेमाल से जुड़े जोखिमों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा को नियमन का प्रमुख आधार बनाने की बात कही गई है।

    एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वैष्णव ने कहा कि वह विभाग से एआई नियमन को लेकर एक चर्चा पत्र तैयार करने का अनुरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि इस दस्तावेज का प्रमुख फोकस सुरक्षा पर होना चाहिए। उनके मुताबिक, एआई के इस्तेमाल से जुड़ा सबसे बड़ा मुद्दा सुरक्षा है और इसे गंभीरता से संबोधित करने की जरूरत है। उन्होंने डीपफेक को बड़ी समस्या बताते हुए कहा कि इससे समाज में गंभीर दुष्प्रभाव पैदा हो सकते हैं।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लोग कई बार डीपफेक सामग्री को वास्तविक मान लेते हैं। इससे गलत धारणाएं बन सकती हैं और लोग भ्रामक जानकारी के आधार पर फैसले ले सकते हैं। प्रस्तावित परामर्श पत्र केवल एआई के नियमन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें कौशल विकास और सुरक्षा जैसे पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाएगा। साथ ही यह सुनिश्चित करने पर जोर होगा कि एआई तकनीक के विस्तार के दौरान कोई भी पीछे न छूटे।

    वैष्णव ने कहा कि एआई से जुड़े नियामक ढांचे में मानव हित सबसे महत्वपूर्ण होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई को केवल कानून बनाकर नियंत्रित नहीं किया जा सकता। इसके लिए तकनीक और नियमन दोनों को साथ लेकर चलना जरूरी होगा। उन्होंने इसे टेक्नो-लीगल समाधान की जरूरत बताया और कहा कि इस प्रक्रिया में उद्योग, विशेषज्ञों तथा अन्य हितधारकों की भागीदारी भी आवश्यक है।

    मंत्री ने एआई से जुड़े जोखिमों, साइबर हमलों और डीपफेक जैसी चुनौतियों से निपटने में उद्योग जगत की जिम्मेदारी पर भी जोर दिया। सरकार पहले ही इंडिया एआई गवर्नेंस गाइडलाइन्स जारी कर चुकी है, जिसमें सुरक्षित, जिम्मेदार और मानव-केंद्रित एआई इस्तेमाल के लिए ढांचा दिया गया है। इन दिशा-निर्देशों में भ्रामक सूचना, डीपफेक, एल्गोरिदमिक पक्षपात और एआई से होने वाले संभावित सामाजिक नुकसान को प्रमुख जोखिमों में शामिल किया गया है।

    दिशा-निर्देशों में एआई से जुड़ी कानूनी खामियों की पहचान, जवाबदेही, डेटा संरक्षण, कॉपीराइट, कंटेंट प्रमाणीकरण और जनरेटिव एआई के दुरुपयोग जैसे मुद्दों की समीक्षा की सिफारिश की गई है। इसके अलावा एआई गवर्नेंस और इकोनॉमिक ग्रुप, टेक्नोलॉजी एंड पॉलिसी एक्सपर्ट कमिटी तथा एआई सेफ्टी इंस्टीट्यूट जैसी संस्थागत व्यवस्थाओं का प्रावधान किया गया है। सरकार इंडिया एआई मिशन के तहत सेफ एंड ट्रस्टेड एआई पहल पर भी काम कर रही है, जिसमें डीपफेक पहचान, गोपनीयता-सुरक्षित एआई, एल्गोरिदमिक पक्षपात कम करने और एआई जोखिम मूल्यांकन से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं।

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसेवा के 25 साल पूरे होने पर अपने राजनीतिक सफर और सुशासन की सोच साझा की।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसेवा के 25 साल पूरे होने पर अपने राजनीतिक सफर और सुशासन की सोच साझा की।

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार 7 अक्टूबर को सरकार के प्रमुख के रूप में लोकसेवा के 25 साल पूरे होने के मौके पर जनता से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक सफर को याद करते हुए कहा कि जब उन्होंने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी, तब उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन वह इस मुकाम तक पहुंचेंगे। उन्होंने इस पूरे सफर के लिए देश के लोकतंत्र और संविधान के प्रति आभार व्यक्त किया।

    दिल्ली में आयोजित ‘सेवा ज्योति’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 25 वर्षों तक सरकार का हिस्सा बने रहना उनके लिए केवल एक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह जनता की सेवा से जुड़ी एक लंबी यात्रा है। उन्होंने अपने शुरुआती राजनीतिक दिनों से लेकर सरकार के प्रमुख के रूप में जिम्मेदारियां संभालने तक के सफर का उल्लेख किया। इस दौरान उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी बड़े पद को लक्ष्य बनाकर राजनीति में कदम नहीं रखा था।

    प्रधानमंत्री ने अच्छे शासन की अपनी सोच पर बात करते हुए ‘सबका साथ, सबका विकास’ को इसका आधार बताया। उन्होंने कहा कि समाज को राजनीति के लिए वोट-बैंक के आधार पर बांटने से कई समस्याएं पैदा हुईं। इसी संदर्भ में उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी खेत तक पानी नहीं पहुंचता है तो उसका नुकसान केवल किसी एक जाति के किसान को नहीं होता। इसी तरह बिजली की कमी से पैदा होने वाला अंधेरा किसी एक समुदाय के घर तक सीमित नहीं रहता।

    उन्होंने कहा कि जब किसी समस्या का असर समाज के सभी वर्गों पर पड़ता है तो उसके समाधान का लाभ भी सभी को मिलना चाहिए। इसी सोच के तहत उन्होंने अच्छे शासन को ‘सैचुरेशन’ से जोड़ने की बात कही। उनके अनुसार सैचुरेशन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकार की योजनाओं और सुविधाओं के लिए पात्र प्रत्येक लाभार्थी तक उनका लाभ पहुंचे। कोई पात्र व्यक्ति छूटे नहीं और किसी हकदार को उसके अधिकार से वंचित न होना पड़े, यही इस व्यवस्था का लक्ष्य है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने राजनीति में आने से पहले के अनुभवों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने आदिवासी इलाकों में काम किया और पहाड़ों में भी समय बिताया। इन अनुभवों के बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी में संगठन से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालीं। उन्होंने अपने शुरुआती दौर को याद करते हुए कहा कि उस समय उन्होंने खुद चुनाव लड़ने या किसी बड़े पद पर पहुंचने की योजना नहीं बनाई थी।

    उन्होंने कहा कि जीवन को निजी लाभ के लिए नहीं, बल्कि किसी उद्देश्य के लिए जीना चाहिए। इसी विचार को उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की दिशा से जोड़ा। 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद शुरू हुआ उनका सरकार से जुड़ा सफर अब 25 वर्ष पूरे कर चुका है। इस अवसर पर उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता तथा जनता के प्रति जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया।

    ‘सेवा ज्योति’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के संबोधन का प्रमुख केंद्र सुशासन, समान रूप से विकास का लाभ पहुंचाने और सार्वजनिक जीवन में सेवा की भावना रहा। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर के विभिन्न पड़ावों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने कभी इस मुकाम तक पहुंचने की कल्पना नहीं की थी। उनके अनुसार, सार्वजनिक जीवन में उद्देश्य व्यक्तिगत लाभ से ऊपर होना चाहिए और शासन का लक्ष्य सभी तक सुविधाओं और योजनाओं का लाभ पहुंचाना होना चाहिए।

  • आरबीआई ने एनबीएफसी की टिकाऊ वृद्धि के लिए सुशासन, लिक्विडिटी, जोखिम प्रबंधन, ग्राहक भरोसे और साइबर सुरक्षा पर जोर दिया

    आरबीआई ने एनबीएफसी की टिकाऊ वृद्धि के लिए सुशासन, लिक्विडिटी, जोखिम प्रबंधन, ग्राहक भरोसे और साइबर सुरक्षा पर जोर दिया

    नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू ने कहा है कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां अब केवल वैकल्पिक ऋणदाता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विशेषीकृत वित्तीय साझेदार के रूप में अपनी भूमिका मजबूत कर रही हैं। ऐसे में एनबीएफसी क्षेत्र की दीर्घकालिक और टिकाऊ वृद्धि के लिए संस्थानों को पांच प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

    सितंबर बुलेटिन में दिए गए उनके विचारों के अनुसार, देश में एनबीएफसी क्षेत्र लगातार विस्तार कर रहा है। वर्तमान में एनबीएफसी ऋण सकल नॉमिनल जीडीपी के 16.7 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जबकि एक साल पहले यह 15.9 प्रतिशत था। इसी तरह अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के कुल ऋण में एनबीएफसी क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़कर 27 प्रतिशत हो गई है, जो पहले 26 प्रतिशत थी।

    मुर्मू ने सबसे पहले सुशासन को मजबूत संस्थान की बुनियाद बताया। उनके अनुसार, निदेशक मंडल और शीर्ष प्रबंधन को संगठन के स्तर पर अनुपालन और नैतिक मूल्यों की मजबूत संस्कृति विकसित करनी चाहिए। एनबीएफसी का आकार बढ़ने के साथ उसके प्रशासनिक और संस्थागत ढांचे को भी उसी अनुरूप मजबूत करने की जरूरत है।

    दूसरे महत्वपूर्ण क्षेत्र के तौर पर उन्होंने लिक्विडिटी प्रबंधन को रेखांकित किया। उनके अनुसार, बाजार की धारणा में बदलाव और सीमित फंडिंग स्रोतों के कारण एनबीएफसी तथा हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों पर दबाव बन सकता है। इसलिए कंपनियों को अपने फंडिंग स्रोतों में विविधता लाने की जरूरत है। उन्होंने गहरे और तरल कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार को इस दिशा में मददगार बताया।

    मुर्मू ने सिक्योरिटाइजेशन को भी केवल लिक्विडिटी जुटाने के साधन के तौर पर नहीं देखने की बात कही। इसे जोखिम हस्तांतरण और पूंजी मुक्त करने के प्रभावी माध्यम के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया। इसके लिए पारदर्शिता और उचित नियामकीय मानकों का पालन जरूरी बताया गया।

    तीसरे क्षेत्र में संपत्ति गुणवत्ता और जोखिम प्रबंधन शामिल हैं। ऋण वृद्धि की रफ्तार बढ़ने के साथ खराब ऋण और परिसंपत्ति गुणवत्ता से जुड़े जोखिम भी बढ़ सकते हैं। ऐसे में नियमित स्ट्रेस टेस्टिंग, शुरुआती चेतावनी प्रणाली और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप प्रावधान व्यवस्था विकसित करने की जरूरत बताई गई।

    इस दिशा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकों के इस्तेमाल को भी बढ़ाने पर जोर दिया गया। इन तकनीकों की मदद से उधारकर्ताओं में वित्तीय तनाव के शुरुआती संकेतों की पहचान की जा सकती है। साथ ही ऋण मंजूरी के मानकों से समझौता नहीं करने की बात कही गई।

    चौथे क्षेत्र के रूप में ग्राहक विश्वास को महत्वपूर्ण संपत्ति बताया गया। वित्तीय नवाचार की गति उपभोक्ता संरक्षण से आगे नहीं निकलनी चाहिए, विशेषकर कमजोर और संवेदनशील ग्राहकों के मामले में। आचरण-आधारित विनियमन, प्रभावी शिकायत निवारण और जिम्मेदार ऋण वितरण को प्राथमिकता देने की बात कही गई।

    पांचवें क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन और साइबर सुरक्षा को रखा गया। सप्लाई चेन फाइनेंस में ब्लॉकचेन और धोखाधड़ी की पहचान में एआई के इस्तेमाल को बढ़ाने की जरूरत बताई गई। हालांकि तकनीकी विस्तार के साथ साइबर जोखिम भी बढ़ते हैं। इसलिए ग्राहक डेटा की सुरक्षा और संस्थानों पर भरोसा बनाए रखने के लिए साइबर सुरक्षा में निवेश को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। तकनीकी नवाचार का उद्देश्य केवल दक्षता बढ़ाना नहीं, बल्कि निष्पक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित करना भी होना चाहिए।

  • मंत्रियों की प्रस्तुतियों से तय होगी आगे की प्राथमिकताएं, विकसित भारत 2047 पर रहेगा फोकस

    मंत्रियों की प्रस्तुतियों से तय होगी आगे की प्राथमिकताएं, विकसित भारत 2047 पर रहेगा फोकस


    नई दिल्ली ।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट मंत्रियों का दो दिवसीय चिंतन शिविर 23 और 24 सितंबर को आयोजित हो रहा है। इस उच्चस्तरीय बैठक का मुख्य विषय विकसित भारत 2047 है। इसमें सरकार के अब तक के कामकाज की समीक्षा के साथ आगे की योजनाओं, सुधारों और प्राथमिकताओं पर विचार किया जा रहा है।

    चिंतन शिविर के पहले दिन कैबिनेट मंत्रियों की ओर से अपने-अपने मंत्रालयों के कामकाज से संबंधित प्रस्तुतियां रखी जा रही हैं। इन प्रस्तुतियों में अब तक किए गए कार्यों, प्रमुख योजनाओं की स्थिति, उपलब्धियों और आगे की कार्ययोजना से जुड़े विषय शामिल हैं।

    दूसरे दिन मंत्रियों और मंत्रालयों के कामकाज की समीक्षा की जाएगी। मूल जानकारी के अनुसार, इस समीक्षा के बाद मंत्रियों के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाना है। हालांकि, कैबिनेट में फेरबदल को लेकर अंतिम निर्णय के संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।

    इस बार का चिंतन शिविर कैबिनेट मंत्रियों पर केंद्रित है। इससे पहले राज्य मंत्रियों और स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों के साथ अलग-अलग स्तर पर समीक्षा बैठकें हो चुकी हैं। इसके बाद कैबिनेट मंत्रियों के लिए अलग से दो दिवसीय मंथन रखा गया है।

    बैठक में युवाओं से जुड़े मुद्दों को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। खासतौर पर जेन जी के साथ बेहतर तालमेल, उनके प्रमुख मुद्दों और सरकार की योजनाओं के साथ उनके जुड़ाव को लेकर मंत्रियों से जानकारी मांगी जा रही है।

    मंत्रियों को अपने-अपने क्षेत्रों में युवाओं की प्राथमिकताओं को समझने और उनके साथ संवाद के लिए किए गए प्रयासों के बारे में भी प्रस्तुति देनी है। रोजगार से जुड़े विषयों पर युवाओं की सोच, उनकी संतुष्टि और असंतुष्टि को समझने के लिए किए गए प्रयास भी चर्चा का हिस्सा हैं।

    महिला आरक्षण से संबंधित संविधान के 131वें संशोधन विधेयक को लेकर भी मंथन किया जाना है। दिए गए विवरण के अनुसार, अप्रैल में यह विधेयक पारित नहीं हो पाया था। अब इसे आगे बढ़ाने के तरीकों और इससे जुड़े सुझावों पर मंत्रियों के विचार लिए जाने हैं।

    विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी से जुड़े मुद्दे को भी प्रस्तुतियों में शामिल किया गया है। इस विषय को लेकर जेन जी की सोच, संबंधित क्षेत्र में इसके प्रभाव और आगे की कार्ययोजना पर मंत्रियों से जानकारी रखने को कहा गया है।

    चिंतन शिविर का व्यापक उद्देश्य सरकार के कामकाज का जायजा लेने के साथ अगले चरण के लिए सुधारों और प्राथमिकताओं की पहचान करना है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप विभिन्न मंत्रालयों के काम को आगे बढ़ाने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी चर्चा हो रही है।

    सरकार की यह समीक्षा प्रक्रिया केवल वर्तमान बैठक तक सीमित नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विकसित भारत 2047 से जुड़ी चर्चाओं और प्रस्तुतियों का क्रम पहले से जारी है। आने वाले समय में भी इस विषय पर आगे के मंथन के दौर आयोजित किए जाने की योजना है।

    वर्ष 2021 में भी केंद्रीय मंत्रिपरिषद के साथ पांच चिंतन शिविर आयोजित किए गए थे। पहला शिविर 14 सितंबर को हुआ था, जबकि अंतिम बैठक नवंबर में हुई थी। प्रत्येक सत्र करीब पांच घंटे चला था। इनमें मंत्रियों के कामकाज, कार्यकुशलता, समय और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल, योजनाओं की निगरानी और शासन सुधार जैसे विषयों पर चर्चा हुई थी।

    नवंबर 2021 में 77 मंत्रियों को आठ समूहों में बांटकर अलग-अलग प्रशासनिक विषयों पर काम आगे बढ़ाने की कवायद भी की गई थी। वर्तमान चिंतन शिविर में भी सरकार के मौजूदा कामकाज की समीक्षा के साथ भविष्य की योजनाओं और सुधारों की दिशा तय करने पर जोर है।

  • 2027 चुनाव के बाद क्या होगी योगी आदित्यनाथ की भूमिका, PM पद की अटकलों पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया रुख

    2027 चुनाव के बाद क्या होगी योगी आदित्यनाथ की भूमिका, PM पद की अटकलों पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया रुख


    नई दिल्ली ।
    उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भविष्य की भूमिका को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। खास तौर पर यह सवाल उठ रहा है कि 2027 के चुनाव के बाद योगी आदित्यनाथ की भूमिका क्या होगी और क्या वह राष्ट्रीय राजनीति में कोई बड़ी जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। प्रधानमंत्री पद को लेकर चल रही अटकलों के बीच मुख्यमंत्री ने अपनी प्राथमिकता स्पष्ट की है।

    एक इंटरव्यू में योगी आदित्यनाथ से पूछा गया कि 2027 के बाद वह खुद को राष्ट्रीय राजनीति में कहां देखते हैं और क्या प्रधानमंत्री पद की दौड़ में शामिल होना चाहते हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके लिए जिम्मेदारी और देशहित सबसे महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी ने उन्हें उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी दी है, जिसे वह बड़ी जिम्मेदारी मानते हैं।

    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान उत्तर प्रदेश को आगे बढ़ाने पर है। उन्होंने राज्य के आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक विकास को अपनी प्राथमिकता बताया। उनके जवाब में प्रधानमंत्री पद के लिए किसी तरह की दावेदारी सामने नहीं आई। मुख्यमंत्री ने अपनी मौजूदा जिम्मेदारी को ही केंद्र में रखते हुए उत्तर प्रदेश की सेवा और बेहतर शासन पर जोर दिया।

    2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच सीट बंटवारे पर भी उनसे सवाल किया गया। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सहयोगी दलों के साथ सीट शेयरिंग का फैसला संगठन से जुड़ा विषय है। मुख्यमंत्री के तौर पर उनकी जिम्मेदारी सरकार की योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचाना है।

    उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का फायदा समाज के हर वर्ग, जिले और परिवार तक पहुंचना जरूरी है। उनके अनुसार प्रदेश के प्रत्येक वर्ग का विकास होना चाहिए और लोग राज्य के विकास में अपना योगदान दे सकें, यह भी महत्वपूर्ण है।

    इंटरव्यू के दौरान अयोध्या के बाद काशी और मथुरा पर ध्यान केंद्रित किए जाने को लेकर भी सवाल पूछा गया। इस पर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या, काशी और मथुरा उत्तर प्रदेश की विरासत का हिस्सा हैं। उनके मुताबिक विरासत का संरक्षण और विकास एक साथ आगे बढ़ सकते हैं।

    मुख्यमंत्री ने काशी विश्वनाथ धाम का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 2021 में इसके उद्घाटन के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु वहां पहुंचे। उनके अनुसार इससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला। नाव चलाने वालों, दुकानदारों, पुजारियों, ऑटो चालकों, होटल संचालकों और होम स्टे से जुड़े लोगों को इससे काम मिलने की बात उन्होंने कही।

    योगी आदित्यनाथ ने धार्मिक स्थलों के विकास को केवल आस्था से जोड़कर नहीं देखा, बल्कि स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों से भी जोड़ा। उनका कहना था कि विरासत को संरक्षित करने के साथ विकास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है।

    2027 के चुनाव से पहले योगी की भूमिका को लेकर अलग-अलग राजनीतिक चर्चाएं सामने आ रही हैं, लेकिन प्रधानमंत्री पद को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने भविष्य की किसी भूमिका का दावा नहीं किया। उन्होंने फिलहाल उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी, विकास और शासन व्यवस्था को ही अपनी प्राथमिकता बताया।

    इस तरह 2027 के बाद उनकी भूमिका को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच योगी आदित्यनाथ का मौजूदा रुख उत्तर प्रदेश की सेवा और राज्य को आर्थिक, सामाजिक तथा प्रशासनिक स्तर पर आगे बढ़ाने पर केंद्रित है।

  • भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 में नई दिल्ली का फोकस, समावेशी वैश्विक व्यवस्था और ग्लोबल साउथ की आवाज पर जोर

    भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 में नई दिल्ली का फोकस, समावेशी वैश्विक व्यवस्था और ग्लोबल साउथ की आवाज पर जोर

    नई दिल्ली ।कभी चार उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए इस्तेमाल होने वाले आर्थिक शब्द के रूप में सामने आया ब्रिक्स अब चार महाद्वीपों तक फैले प्रभावशाली भू-राजनीतिक समूह का रूप ले चुका है। नए सदस्य देशों के जुड़ने के साथ इसकी आर्थिक और रणनीतिक ताकत में लगातार विस्तार हुआ है। वर्ष 2026 में संगठन की अध्यक्षता भारत के पास है और नई दिल्ली इसे अधिक समावेशी, प्रभावी तथा समाधान-केंद्रित मंच बनाने की दिशा में काम कर रही है।

    ब्रिक्स प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक नीतियों के समन्वय का महत्वपूर्ण मंच बन गया है। सदस्य देश यहां वैश्विक शासन, विकास, व्यापार और आर्थिक सुधारों से जुड़े मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण विकसित करते हैं। लगातार संवाद और सहयोग के जरिए संगठन ने वैश्विक दक्षिण की आवाज को अंतरराष्ट्रीय संस्थानों तक पहुंचाने में भी भूमिका निभाई है।

    भारत की 2026 की अध्यक्षता “बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी” विषय पर केंद्रित है। इसी थीम के तहत 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी की जाएगी। भारत का लक्ष्य संगठन की संस्थागत क्षमता को मजबूत करना, विकास और नवाचार को प्राथमिकता देना तथा वैश्विक दक्षिण की आकांक्षाओं को अंतरराष्ट्रीय विमर्श में प्रमुख स्थान दिलाना है।

    वर्तमान में ब्रिक्स में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात सहित 11 सदस्य देश हैं। ये देश मिलकर दुनिया की करीब 49.5 प्रतिशत आबादी, लगभग 40 प्रतिशत वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद और करीब 26 प्रतिशत वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं। इससे संगठन की आर्थिक और जनसांख्यिकीय पहुंच का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    ब्रिक्स के विस्तार का बड़ा चरण जनवरी 2024 में आया, जब मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात पूर्ण सदस्य बने। इसके बाद जनवरी 2025 में इंडोनेशिया 11वां पूर्ण सदस्य बना। इन देशों के शामिल होने से संगठन का प्रभाव एशिया, अफ्रीका, मध्य पूर्व और लैटिन अमेरिका तक और व्यापक हुआ।

    विस्तार के साथ ब्रिक्स में पार्टनर कंट्री श्रेणी भी बनाई गई। वर्ष 2025 के दौरान बेलारूस, बोलिविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम इस ढांचे से जुड़े। इससे संगठन की पहुंच और प्रभाव क्षेत्र में और विस्तार हुआ।

    समय के साथ ब्रिक्स का एजेंडा केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रहा। आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, कृषि, श्रम एवं रोजगार, दूरसंचार, वैश्विक वित्तीय व्यवस्था तथा अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियां भी इसके प्रमुख विषयों में शामिल हैं।

    ब्रिक्स विश्व व्यापार संगठन और वैश्विक वित्तीय संस्थानों में अधिक प्रतिनिधित्व तथा संतुलित भागीदारी की वकालत करता है। इसके प्रयासों का उद्देश्य वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक समावेशी और प्रभावी बनाना तथा बदलती वैश्विक चुनौतियों के प्रति उसे अधिक उत्तरदायी बनाना है।

  • अदाणी पावर का ईएसजी स्कोर बढ़कर 66 अंक हुआ, एनएसई सस्टेनेबिलिटी ने कंपनी की ‘एस्पायरिंग’ रेटिंग बरकरार रखी

    अदाणी पावर का ईएसजी स्कोर बढ़कर 66 अंक हुआ, एनएसई सस्टेनेबिलिटी ने कंपनी की ‘एस्पायरिंग’ रेटिंग बरकरार रखी

    नई दिल्ली । देश की सबसे बड़ी निजी ताप विद्युत उत्पादक कंपनी अदाणी पावर लिमिटेड ने सोमवार को बताया कि उसके पर्यावरण, सामाजिक और सुशासन यानी ईएसजी प्रदर्शन में सुधार दर्ज किया गया है। कंपनी का ईएसजी स्कोर पिछले मूल्यांकन के 65 अंक से बढ़कर 66 अंक हो गया है। कंपनी के अनुसार, इस सुधार के साथ उसने भारतीय ताप विद्युत, मिश्रित ईंधन और एकीकृत ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के बीच अपनी अग्रणी स्थिति बनाए रखी है।

    कंपनी को एनएसई सस्टेनेबिलिटी के नवीनतम आकलन में एक बार फिर ‘एस्पायरिंग’ श्रेणी में रखा गया है। एनएसई सस्टेनेबिलिटी सेबी-पंजीकृत ईएसजी रेटिंग प्रदाता और एनएसई इंडिसीज की सहायक कंपनी है। यह सूचीबद्ध कंपनियों के पर्यावरणीय, सामाजिक और प्रशासनिक प्रदर्शन का मूल्यांकन करती है।

    अदाणी पावर के अनुसार, ईएसजी स्कोर में हुआ सुधार स्थिरता से जुड़ी पहलों और परिचालन दक्षता बढ़ाने के प्रयासों का परिणाम है। कंपनी ने बताया कि उसने अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल तकनीक वाले कम उत्सर्जन संयंत्रों के उपयोग को बढ़ाया है। इसके साथ लगातार उत्सर्जन की निगरानी करने वाली प्रणालियों, ऊर्जा दक्षता कार्यक्रमों, जल संरक्षण उपायों और अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी पहलों को भी मजबूत किया गया है।

    सामाजिक क्षेत्र में कंपनी ने शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास पर केंद्रित कई कार्यक्रम चलाए हैं। इनमें आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य शिविर और स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका बढ़ाने वाली परियोजनाएं शामिल हैं। कंपनी के मुताबिक इन पहलों का उद्देश्य उसके परिचालन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले समुदायों के जीवन स्तर में सुधार करना है।

    एनएसई सस्टेनेबिलिटी हर वर्ष भारत की 500 सूचीबद्ध कंपनियों का मूल्यांकन करता है। इसके माध्यम से निवेशकों और अन्य हितधारकों को कंपनियों की दीर्घकालिक मूल्य सृजन क्षमता तथा ईएसजी प्रदर्शन का स्वतंत्र आकलन उपलब्ध कराया जाता है।

    सुशासन के क्षेत्र में अदाणी पावर ने बताया कि उसकी विभिन्न बोर्ड समितियों में स्वतंत्र निदेशकों का प्रतिनिधित्व नियामकीय आवश्यकताओं से अधिक है। कंपनी ने अपनी आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े आपूर्तिकर्ताओं और ठेकेदारों के लिए भी ईएसजी मानकों को अपनाने की बात कही है। इसके पीछे पूरे कारोबारी तंत्र में जिम्मेदार कारोबारी प्रथाओं को बढ़ावा देने का उद्देश्य बताया गया है।

    कंपनी को हाल के वर्षों में कई अन्य वैश्विक और घरेलू स्थिरता रेटिंग्स भी मिली हैं। अदाणी पावर को एसएंडपी ग्लोबल कॉरपोरेट सस्टेनेबिलिटी असेसमेंट में 100 में से 71 अंक मिले हैं। वहीं एफटीएसई रसेल ने कंपनी को 5 में से 4.3 अंक की रेटिंग दी है।

    इसके अलावा वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केयरएज ईएसजी रेटिंग्स ने अदाणी पावर को 100 में से 80 अंक दिए हैं। इस स्कोर के आधार पर कंपनी को एजेंसी की ‘लीडरशिप’ श्रेणी में रखा गया है, जिसे उद्योग के औसत स्तर से ऊपर माना जाता है।

    अदाणी पावर के अनुसार ये रेटिंग्स उसके कारोबार और दीर्घकालिक विकास रणनीति में स्थिरता संबंधी सिद्धांतों को शामिल करने की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। वहीं शेयर बाजार में सोमवार को एनएसई पर अदाणी पावर का शेयर 204.40 रुपये पर बंद हुआ।

  • पीएम मोदी के जन्मदिन से भाजपा का सेवा संकल्प अभियान, एक महीने में 13 कार्यक्रमों के जरिए देशभर में जनसंपर्क की तैयारी

    पीएम मोदी के जन्मदिन से भाजपा का सेवा संकल्प अभियान, एक महीने में 13 कार्यक्रमों के जरिए देशभर में जनसंपर्क की तैयारी

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर से भारतीय जनता पार्टी देशभर में एक महीने का सेवा संकल्प अभियान शुरू करने जा रही है। यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलाने की योजना है। पार्टी के अनुसार, इसके जरिए सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण, विकास और विकसित भारत से जुड़े संदेशों को जनता तक पहुंचाया जाएगा। अभियान को प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने से भी जोड़ा गया है।

    भाजपा सामान्य तौर पर प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर सेवा पखवाड़े का आयोजन करती रही है, लेकिन इस बार कार्यक्रम का विस्तार एक महीने तक किया गया है। नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार शपथ ली थी। इस आधार पर अक्टूबर 2026 में उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। पार्टी इस अवसर को भी व्यापक जनसंपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से रेखांकित करने की तैयारी कर रही है।

    अभियान के तहत करीब 13 प्रमुख कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। इसकी शुरुआत 17 सितंबर को आशीर्वाद का दीया कार्यक्रम से होगी। इसके माध्यम से देशभर में विभिन्न स्थानों और घरों में दीप प्रज्वलन किया जाएगा। बच्चों के लिए चित्रकला और भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन भी प्रस्तावित है, जिनका विषय देश के भविष्य और सपनों से जुड़ा होगा।

    नमो सेवा गाथा के तहत नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से लोगों तक विभिन्न संदेश पहुंचाने की योजना है। वहीं कहानी बदलाव की कार्यक्रम में सरकारी योजनाओं से लाभ पाने वाले लोगों की सफलता की कहानियां सामने रखी जाएंगी। इसका उद्देश्य कल्याणकारी योजनाओं के असर को सीधे लाभार्थियों के अनुभवों के माध्यम से लोगों तक पहुंचाना है।

    अभियान में आंगन का उत्सव भी शामिल किया गया है। इसके तहत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और लाभार्थी माताओं को सम्मानित करने के साथ पोषण तथा मातृ कल्याण से जुड़े विषयों पर संवाद की योजना है। भाजपा का लक्ष्य देशभर में करीब 14 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं तक पहुंच बनाने का है।

    प्रधानमंत्री मोदी की जन्मभूमि गुजरात के वडनगर और उनकी संसदीय कर्मभूमि वाराणसी को भी अभियान में विशेष स्थान दिया गया है। जल, जन और सेवा संकल्प यात्रा के जरिए दोनों स्थानों से जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। गुजरात में वडनगर से वाराणसी और फिर वापस वडनगर तक बाइक यात्राओं की भी योजना है। इन यात्राओं के दौरान जनसंवाद के साथ सेवा और सांस्कृतिक गतिविधियां होंगी।

    सेवा मेरा योगदान कार्यक्रम के तहत रक्तदान शिविर, स्वच्छता अभियान, पौधरोपण और डिजिटल साक्षरता जैसी गतिविधियां प्रस्तावित हैं। सेवा सेतु अभियान के जरिए ब्लॉक और विधानसभा स्तर पर शिविर लगाए जाएंगे, जहां लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में सहायता दी जाएगी। संबंधित विभागों के अधिकारियों की मौजूदगी में पात्र लोगों के दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी कराने की योजना है।

    अभियान के दौरान 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी जयंती और 7 अक्टूबर को प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विशेष कार्यक्रम होंगे। अंतिम चरण में जनसेवा महाकुंभ आयोजित करने की योजना है, जिसमें जनप्रतिनिधियों और पार्टी कार्यकर्ताओं की भागीदारी होगी।

    भाजपा इस अभियान को केवल सेवा गतिविधियों तक सीमित नहीं रखना चाहती। पार्टी सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के साथ विपक्ष के राजनीतिक मुद्दों का जवाब देने के लिए भी इसका इस्तेमाल कर सकती है। इस तरह अभियान को संगठनात्मक जनसंपर्क, लाभार्थी संपर्क और राजनीतिक संवाद के संयुक्त कार्यक्रम के रूप में देखा जा रहा है।

  • सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने के लिए कॉजपा संस्थापक का सुझाव, जनप्रतिनिधि सरकारी स्कूलों में पढ़ाएं अपने बच्चे

    सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने के लिए कॉजपा संस्थापक का सुझाव, जनप्रतिनिधि सरकारी स्कूलों में पढ़ाएं अपने बच्चे

    नई दिल्ली । देश में सरकारी शिक्षा प्रणाली की स्थिति और उसमें आवश्यक सुधारों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक बयान जारी कर मांग की है कि शिक्षा विभाग से जुड़े सभी मंत्रियों, प्रशासनिक अधिकारियों, प्राचार्यों और शिक्षकों को अपने बच्चों का दाखिला अनिवार्य रूप से सरकारी स्कूलों में ही कराना चाहिए। उनका मानना है कि यदि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग अपने बच्चों को इन संस्थानों में भेजेंगे, तो सरकारी स्कूलों की व्यवस्था में बहुत जल्द सकारात्मक और व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा।

    अभिजीत दीपके ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब तक सरकारी नीतियों को लागू करने वाले अधिकारी और जनप्रतिनिधि स्वयं इन सेवाओं का उपयोग नहीं करेंगे, तब तक वास्तविक सुधार संभव नहीं है। उन्होंने पूछा कि आखिर क्यों अधिकारी और मंत्री अपने बच्चों को निजी शिक्षण संस्थानों में पढ़ाना पसंद करते हैं। क्या उन्हें अपने ही विभाग और सरकारी नीतियों की कार्यप्रणाली पर भरोसा नहीं है। उनका यह बयान देश भर में सरकारी स्कूलों के कायाकल्प के लिए चलाए जा रहे विभिन्न अभियानों के संदर्भ में आया है।

    इस विचार को धरातल पर उतारने और व्यवस्था की कमियों को उजागर करने के उद्देश्य से उन्होंने महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में स्थित अपने पैतृक गांव संतुक पिंपरी का दौरा किया था। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जिला परिषद द्वारा संचालित स्थानीय स्कूल में पहुंचे दीपके ने वहां की बुनियादी सुविधाओं का जायजा लिया था। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि कक्षाओं में खिड़कियों के शीशे टूटे हुए थे, सीसीटीवी कैमरे निष्क्रिय थे और स्वच्छता से जुड़ी कई मूलभूत सुविधाएं बदहाल स्थिति में थीं।

    उनके द्वारा उजागर की गई कमियों के बाद स्थानीय प्रशासन और ग्राम पंचायत तुरंत हरकत में आई। संतुक पिंपरी के स्थानीय सरपंच विजय पुरी ने जानकारी दी है कि अभिजीत दीपके द्वारा चिन्हित की गई सभी समस्याओं को दूर करने का कार्य प्राथमिकता के आधार पर शुरू कर दिया गया है। स्कूल में क्षतिग्रस्त खिड़कियों और उनके फ्रेम को बदला जा रहा है, नए सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, तथा शौचालयों में पानी की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं।

    शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए स्कूल प्रबंधन को मरम्मत कार्य जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश जारी किए हैं। इस घटनाक्रम के बाद स्थानीय स्तर पर स्कूल की ढांचागत स्थिति में तेजी से सुधार देखने को मिल रहा है।

    मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में भी सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता और सुविधाओं को लेकर समय-समय पर इस तरह की मांगें उठती रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सार्वजनिक सेवाओं के उपयोग को अनिवार्य या प्रोत्साहित किया जाए, तो इससे प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ती है। अभिजीत दीपके की इस पहल और उनके सुझाव ने एक बार फिर शिक्षा के अधिकार और सरकारी शैक्षणिक संस्थानों के स्तर को ऊंचा उठाने की दिशा में गंभीर मंथन शुरू कर दिया है।

  • मध्य प्रदेश के गुना में भतीजे की करतूत की सजा मिलने और अपमानजनक होने से पीड़ित की मौत

    मध्य प्रदेश के गुना में भतीजे की करतूत की सजा मिलने और अपमानजनक होने से पीड़ित की मौत

    मध्य प्रदेश।  के गुना जिले से इंसानियत और सामाजिक ताने-बाने को तार-तार कर देने वाली एक दुखद घटना सामने आई है। जिले के राघौगढ़ क्षेत्र में एक युवक द्वारा शादीशुदा महिला को भगा ले जाने के बाद पीड़ित परिवार और गांव के लोगों ने आरोपी युवक के चाचा को बंधक बनाकर अमानवीय यातनाएं दीं। करीब सवा महीने पुराने इस घटनाक्रम का वीडियो हाल ही में सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद पीड़ित व्यक्ति गहरे मानसिक सदमे में चला गया, जिससे उसकी दुखद मृत्यु हो गई।

    घटना के संदर्भ में प्राप्त जानकारी के अनुसार, अमरपुरा गांव निवासी 45 वर्षीय अजोड़ सिंह बंजारा के भतीजे पर आरोप था कि वह पड़ोसी गांव की एक विवाहित महिला को अपने साथ ले गया था। इस बात से आक्रोशित होकर महिला के ससुराल पक्ष के लोगों ने अजोड़ सिंह को धोखे से पकड़ लिया और उन्हें बंधक बना लिया। आरोपियों ने पीड़ित के हाथ-पैर बांधकर उनके साथ जमकर मारपीट की और सार्वजनिक रूप से अपमानित करने के लिए उनके गले में जूते-चप्पलों की माला डालकर गांव में घुमाया।

    उस समय घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पीड़ित व्यक्ति को आरोपियों के चंगुल से मुक्त कराया था। पीड़ित परिजनों का कहना है कि इस गंभीर और अपमानजनक घटना के संबंध में पुलिस प्रशासन और जनसुनवाई के माध्यम से उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायतें दी गई थीं। परिजनों का आरोप है कि यदि समय रहते प्रशासनिक स्तर पर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की गई होती, तो यह अनहोनी टाली जा सकती थी।

    घटनाक्रम में नया मोड़ तब आया जब शुक्रवार को पीड़ित किसी कार्यवश समीपस्थ कस्बे में गए थे। वहां एक परिचित व्यक्ति ने उनके मोबाइल पर उसी पुरानी घटना का वायरल वीडियो दिखा दिया। वीडियो में खुद को बंधा हुआ और गले में जूतों की माला पहने देखकर पीड़ित बेहद आहत हुए। घर लौटने के बाद उन्होंने परिजनों से अपनी पीड़ा व्यक्त की कि लोग अब इस वीडियो के जरिए उनका उपहास उड़ा रहे हैं। इसके तुरंत बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और अस्पताल ले जाते समय रास्ते में उन्होंने दम तोड़ दिया।

    मृतक अपने पीछे पत्नी, पांच बेटियों और एक मासूम बेटे का रोता-बिलखता परिवार छोड़ गए हैं। इस घटना के बाद से पूरे अमरपुरा और आसपास के ग्रामीण इलाकों में मातम का माहौल है। घटना की भयावहता को देखते हुए स्थानीय पुलिस चौकी और वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया है। पुलिस प्रशासन अब वायरल वीडियो, पूर्व में हुई मारपीट और पीड़ित की मृत्यु के कारणों की व्यापक स्तर पर जांच कर रहा है।

    कानूनी विशेषज्ञों और सामाजिक विचारकों का मानना है कि किसी अन्य व्यक्ति के अपराध की सजा किसी रिश्तेदार को देना और फिर सोशल मीडिया पर अपमानजनक सामग्री प्रसारित करना एक गंभीर अपराध है। गुना जिले की इस घटना ने एक बार फिर साबित किया है कि साइबर अपराध और सामाजिक लिंचिंग के बढ़ते मामले किस प्रकार बेकसूर लोगों की जान ले रहे हैं।