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  • ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर केंद्र का बड़ा फोकस, सभी मंत्रालयों को सुधार लागू करने के निर्देश

    ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर केंद्र का बड़ा फोकस, सभी मंत्रालयों को सुधार लागू करने के निर्देश

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने आम नागरिकों के लिए ‘ईज ऑफ लिविंग’ और उद्योगों के लिए ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को और बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को सुधारों की पहचान कर उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना, सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना और उद्योगों के लिए अधिक अनुकूल कारोबारी वातावरण तैयार करना है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सुधारों की निगरानी और प्रगति के मूल्यांकन के लिए पीएमरेफ पोर्टल पर नया ‘रिफॉर्म’ मॉड्यूल भी शुरू किया है।

    सरकार के अनुसार नया मॉड्यूल मंगलवार से कार्य करना शुरू कर चुका है और यह सभी मंत्रालयों एवं विभागों के लिए एक केंद्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करेगा। इस पोर्टल पर विभिन्न मंत्रालय अपने-अपने क्षेत्रों में किए जा रहे नीतिगत सुधारों, प्रशासनिक उपायों और सुशासन से जुड़ी पहलों का विस्तृत विवरण अपलोड करेंगे। इससे सभी सुधारात्मक प्रयासों का एकीकृत रिकॉर्ड तैयार होगा और उनकी प्रगति की नियमित समीक्षा करना आसान होगा।

    केंद्र सरकार ने निर्देश दिया है कि प्रत्येक मंत्रालय ऐसे सुधारों की पहचान करे जो आम नागरिकों के लिए सरकारी सेवाओं तक पहुंच को सरल बनाएं, प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाएं तथा उद्योगों के लिए कारोबार करना अधिक सुगम बनाएं। ये सुधार उच्च स्तरीय समिति (एचएलसी) की सिफारिशों, अनौपचारिक मंत्रिसमूह (आईजीओएम) के सुझावों अथवा संबंधित मंत्रालयों द्वारा स्वयं तैयार किए गए प्रस्तावों पर आधारित हो सकते हैं। सरकार का मानना है कि विभागीय स्तर पर नवाचार और सुधारों को बढ़ावा देने से प्रशासनिक दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

    नई व्यवस्था के तहत सभी मंत्रालयों और विभागों के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे अपनी सभी सुधार संबंधी पहलों का विवरण पीएमरेफ पोर्टल पर अपलोड करें और समय-समय पर उनकी प्रगति को अपडेट करते रहें। जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक मंत्रालय को हर सप्ताह शुक्रवार दोपहर 12 बजे तक अपनी साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट पोर्टल पर दर्ज करनी होगी। इससे विभिन्न योजनाओं और सुधारों की वास्तविक स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सकेगी तथा आवश्यक होने पर समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे।

    सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य सुधार प्रक्रिया को एक व्यवस्थित और संस्थागत ढांचे के तहत संचालित करना है, ताकि विभिन्न मंत्रालयों में लागू किए जा रहे नीतिगत और प्रशासनिक सुधारों की प्रभावी निगरानी और मूल्यांकन किया जा सके। इससे मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा, निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी और सुधार संबंधी पहलों के क्रियान्वयन में भी गति आएगी। साथ ही विभिन्न विभागों के सफल अनुभवों को साझा कर अन्य क्षेत्रों में भी लागू करने का अवसर मिलेगा।

    पीएमरेफ (प्रधानमंत्री रिफरेंस/रिफॉर्म्स) पोर्टल प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय मंत्रालयों और सरकारी विभागों द्वारा उपयोग किया जाने वाला एक सुरक्षित डिजिटल गवर्नेंस प्लेटफॉर्म है। यह नीतिगत सुधारों, प्रशासनिक पहलों और प्रमुख आधारभूत संरचना परियोजनाओं की निगरानी के साथ-साथ अन्य सरकारी निगरानी प्रणालियों से भी जुड़ा हुआ है। इसके माध्यम से प्रधानमंत्री कार्यालय और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा जारी निर्देशों, निर्णयों और विभिन्न संदर्भों की प्रगति पर भी नजर रखी जाती है। सरकार को उम्मीद है कि नया ‘रिफॉर्म’ मॉड्यूल प्रशासनिक सुधारों को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • 'कर वसूली ही नहीं, नागरिक सुविधा भी प्राथमिकता बने', आयकर विभाग को निर्मला सीतारमण का स्पष्ट संदेश

    'कर वसूली ही नहीं, नागरिक सुविधा भी प्राथमिकता बने', आयकर विभाग को निर्मला सीतारमण का स्पष्ट संदेश


    नई दिल्ली ।
    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आयकर विभाग को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि उसकी जिम्मेदारी केवल कर संग्रह तक सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिकों को बिना अनावश्यक परेशानी के समय पर और प्रभावी सेवाएं उपलब्ध कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण दायित्व है। उन्होंने कहा कि सरकारी व्यवस्था का उद्देश्य लोगों के काम को आसान बनाना होना चाहिए, ताकि उन्हें अपने वैध अधिकारों के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

    मुंबई के नरीमन पॉइंट स्थित आयकर विभाग की नई 13 मंजिला इमारत ‘आयकर सिंधु’ के उद्घाटन के अवसर पर वित्त मंत्री ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सरकारी विभागों को नागरिकों की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ समझना चाहिए और ऐसी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए, जिसमें सेवाएं समय पर और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध हों। उनके अनुसार, प्रभावी प्रशासन वही है जो नियमों का पालन करते हुए लोगों की कठिनाइयों को कम करे।

    वित्त मंत्री ने सरकारी भूमि और संपत्तियों के संरक्षण के विषय पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि जिस भूमि पर नई इमारत का निर्माण हुआ है, वह कई दशक पहले विभाग को आवंटित की गई थी, लेकिन लंबे समय तक उपयोग नहीं होने के कारण वहां अवैध कब्जे की स्थिति उत्पन्न हो गई। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा और उनका समय पर उपयोग सुनिश्चित करना उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, ताकि राष्ट्रीय संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके।

    अपने संबोधन में उन्होंने भवन निर्माण से जुड़ी प्रशासनिक और मंजूरी संबंधी प्रक्रियाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि एक बड़े सरकारी विभाग को विभिन्न अनुमतियां प्राप्त करने में लंबा समय और कई स्तरों की जटिलताओं का सामना करना पड़ता है, तो आम नागरिकों को होने वाली परेशानियों का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। इसलिए विभागों को प्रक्रियाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की दिशा में लगातार प्रयास करना चाहिए।

    सीतारमण ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य नियमों में ढील देने का नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि नियमों का पालन करते हुए भी लोगों के कार्य अनावश्यक रूप से लंबित न रहें। उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक को अपने वैध अधिकार या सरकारी सेवा प्राप्त करने के लिए अत्यधिक प्रयास करने की स्थिति नहीं आनी चाहिए। प्रशासन की कार्यशैली ऐसी होनी चाहिए, जिसमें जवाबदेही और दक्षता दोनों दिखाई दें।

    उन्होंने आयकर विभाग के अधिकारियों के आवास से जुड़ी समस्याओं का भी उल्लेख किया। वित्त मंत्री ने कहा कि मुंबई और नवी मुंबई क्षेत्र में अनेक अधिकारियों को सरकारी आवास उपलब्ध नहीं हो पाता, जिसके कारण उन्हें लंबी दूरी तय करके कार्यालय पहुंचना पड़ता है। इससे उनके कार्य और व्यक्तिगत जीवन दोनों पर प्रभाव पड़ता है। उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए आवश्यक सरकारी भूमि के हस्तांतरण को प्राथमिकता देने का आश्वासन दिया।

    वित्त मंत्री ने कहा कि भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया को गति देने के लिए केंद्र स्तर पर आवश्यक सहयोग दिया जाएगा। इसके बाद भवन निर्माण, स्वीकृतियां, निविदाएं और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को संबंधित विभागों द्वारा समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बेहतर बुनियादी ढांचे, पारदर्शी कार्यप्रणाली और नागरिक-केंद्रित सोच के साथ आयकर विभाग अधिक प्रभावी सेवाएं प्रदान कर सकेगा और प्रशासनिक व्यवस्था पर लोगों का विश्वास भी और मजबूत होगा।

  • तिमाही नतीजों के बाद इंडसइंड बैंक के शेयरों में बड़ी गिरावट, मजबूत मुनाफे के बावजूद निवेशकों ने दिखाई सतर्कता

    तिमाही नतीजों के बाद इंडसइंड बैंक के शेयरों में बड़ी गिरावट, मजबूत मुनाफे के बावजूद निवेशकों ने दिखाई सतर्कता

    नई दिल्ली । पहली तिमाही के वित्तीय नतीजों के बाद निजी क्षेत्र के इंडसइंड बैंक के शेयरों में गुरुवार को शुरुआती कारोबार के दौरान छह प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। बैंक ने मुनाफे और परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार के आंकड़े पेश किए, लेकिन इसके बावजूद बाजार की प्रतिक्रिया नकारात्मक रही। निवेशकों ने बैंक से जुड़े व्यापक जोखिमों और भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए सतर्क रुख अपनाया, जिसका असर शेयर की कीमत पर साफ दिखाई दिया।

    कारोबार के दौरान बैंक का शेयर तेज दबाव में आ गया और छह प्रतिशत से अधिक गिरकर दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया। शुरुआती सत्र में ही स्टॉक में लगातार बिकवाली देखी गई, जिससे यह प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में शामिल हो गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि केवल वित्तीय नतीजे ही नहीं, बल्कि निवेशकों की धारणा और बैंक से जुड़े अन्य मुद्दों ने भी इस गिरावट में भूमिका निभाई।

    वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में बैंक का समेकित शुद्ध लाभ पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में उल्लेखनीय रूप से बढ़ा। प्रावधान और आकस्मिक खर्चों में कमी आने से बैंक के मुनाफे को मजबूती मिली। इसके साथ ही बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम में भी मामूली वृद्धि दर्ज की गई, जो मुख्य बैंकिंग कारोबार की स्थिरता का संकेत देती है।

    परिसंपत्ति गुणवत्ता के मोर्चे पर भी बैंक ने सुधार दिखाया। सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति अनुपात में कमी दर्ज की गई, जबकि नए फंसे हुए ऋणों की मात्रा भी पिछले वर्ष की तुलना में घटी। आम तौर पर ऐसे संकेत बैंक की वित्तीय स्थिति को बेहतर मानने के लिए सकारात्मक माने जाते हैं, लेकिन इस बार निवेशकों ने इन आंकड़ों के बावजूद सतर्कता बनाए रखी।

    बाजार विश्लेषकों का कहना है कि हाल के महीनों में बैंक से जुड़ी कुछ घटनाओं ने निवेशकों के भरोसे को प्रभावित किया है। जून में बैंक को लेकर विभिन्न स्तरों पर कथित कॉरपोरेट गवर्नेंस संबंधी शिकायतों की खबरें सामने आई थीं। इन रिपोर्टों में इनसाइडर ट्रेडिंग, वित्तीय रिकॉर्ड में कथित अनियमितताओं, ऑडिट प्रक्रियाओं और प्रबंधन से जुड़े कुछ आरोपों का उल्लेख किया गया था। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है, लेकिन ऐसी खबरों का असर निवेशकों की धारणा पर पड़ता है।

    इसी कारण बेहतर वित्तीय प्रदर्शन के बावजूद बाजार ने अपेक्षित सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी। निवेशक केवल तिमाही लाभ पर नहीं, बल्कि बैंक की दीर्घकालिक विश्वसनीयता, प्रबंधन की पारदर्शिता और नियामकीय स्थिति पर भी नजर बनाए हुए हैं। आने वाले समय में इन पहलुओं पर स्पष्टता मिलने के बाद ही बाजार का रुख अधिक स्थिर हो सकता है।

    शेयर बाजार में किसी भी बैंक के मूल्यांकन पर वित्तीय नतीजों के साथ-साथ निवेशकों का भरोसा, जोखिम प्रबंधन और कॉरपोरेट गवर्नेंस का भी बड़ा प्रभाव होता है। इंडसइंड बैंक के मामले में पहली तिमाही के नतीजों ने परिचालन प्रदर्शन में सुधार का संकेत जरूर दिया है, लेकिन बाजार फिलहाल व्यापक तस्वीर को देखते हुए सावधानी बरत रहा है। अब निवेशकों की निगाह बैंक के आगामी तिमाही प्रदर्शन, नियामकीय घटनाक्रम और प्रबंधन की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर रहेगी, जो आगे शेयर की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • इंजीनियर से HCLTech के शीर्ष पद तक का सफर, रिकॉर्ड 176 करोड़ के पैकेज के साथ चर्चा में आए C. विजयकुमार

    इंजीनियर से HCLTech के शीर्ष पद तक का सफर, रिकॉर्ड 176 करोड़ के पैकेज के साथ चर्चा में आए C. विजयकुमार

    नई दिल्ली । भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग में HCLTech के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक C. विजयकुमार इन दिनों अपने रिकॉर्ड वेतन पैकेज को लेकर चर्चा में हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए उन्हें लगभग 176.47 करोड़ रुपये का कुल पारिश्रमिक मिला है, जिसके साथ वह देश के आईटी क्षेत्र के सबसे अधिक वेतन पाने वाले CEO बन गए हैं। यह पैकेज पिछले वित्त वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय रूप से अधिक है और कॉर्पोरेट जगत में नेतृत्व, प्रदर्शन और पारिश्रमिक को लेकर नई चर्चा का विषय बन गया है।

    C. विजयकुमार का पेशेवर सफर एक इंजीनियर के रूप में शुरू हुआ था। उन्होंने अपने करियर के शुरुआती वर्षों में तकनीकी और प्रबंधन से जुड़ी विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं और धीरे-धीरे कंपनी के नेतृत्व तक पहुंचे। लंबे समय तक संगठन में अलग-अलग भूमिकाओं में काम करने के बाद उन्हें वर्ष 2016 में HCLTech का CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया गया। उनके नेतृत्व में कंपनी ने वैश्विक स्तर पर अपनी मौजूदगी को मजबूत किया और नई तकनीकों पर केंद्रित रणनीति अपनाई।

    पिछले कुछ वर्षों में HCLTech ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और इंजीनियरिंग सेवाओं जैसे क्षेत्रों में लगातार विस्तार किया है। कंपनी ने दुनिया के कई बड़े ग्राहकों के साथ अपने कारोबारी संबंध मजबूत किए हैं और नई तकनीकों में निवेश बढ़ाया है। इसी रणनीति का असर कंपनी की व्यावसायिक वृद्धि और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में उसकी स्थिति पर भी देखने को मिला है।

    विजयकुमार के कुल पारिश्रमिक में केवल मासिक वेतन ही शामिल नहीं है। इसमें मूल वेतन, प्रदर्शन आधारित बोनस, विभिन्न भत्ते और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा शेयर आधारित प्रोत्साहन का है। बड़ी आईटी कंपनियां वरिष्ठ अधिकारियों को लंबे समय तक संगठन से जोड़कर रखने और उनके प्रदर्शन को प्रोत्साहित करने के लिए स्टॉक आधारित इंसेंटिव देती हैं। इसी कारण उनका कुल पैकेज 176 करोड़ रुपये से अधिक पहुंचा है।

    कंपनी के निदेशक मंडल ने उनके नेतृत्व में प्राप्त व्यावसायिक उपलब्धियों और भविष्य की विकास रणनीति को ध्यान में रखते हुए पारिश्रमिक में वृद्धि को मंजूरी दी। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक तकनीकी उद्योग में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है और ऐसे माहौल में अनुभवी नेतृत्व को बनाए रखने के लिए कंपनियां आकर्षक वेतन और दीर्घकालिक प्रोत्साहन योजनाओं का सहारा लेती हैं। यही वजह है कि बड़े कॉर्पोरेट समूहों में CEO के वेतन पैकेज में स्टॉक इंसेंटिव का हिस्सा लगातार बढ़ रहा है।

    HCLTech आज दुनिया के 60 से अधिक देशों में अपनी सेवाएं प्रदान कर रही है और विभिन्न उद्योगों के ग्राहकों के साथ काम कर रही है। कंपनी की डिजिटल सेवाओं, क्लाउड समाधान और AI आधारित तकनीकों पर बढ़ती पकड़ ने उसे वैश्विक आईटी उद्योग में मजबूत पहचान दिलाई है। C. विजयकुमार के नेतृत्व में कंपनी ने नवाचार और तकनीकी निवेश पर विशेष जोर दिया, जिससे उसकी प्रतिस्पर्धी क्षमता और कारोबारी विस्तार को नई गति मिली। उनके रिकॉर्ड वेतन पैकेज ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि वैश्विक स्तर पर सफल नेतृत्व, कारोबारी प्रदर्शन और शेयरधारकों के हितों के बीच संतुलन बनाते हुए शीर्ष प्रबंधन के पारिश्रमिक का निर्धारण किस प्रकार किया जाता है।

  • ई-बस से मंत्री परिषद बैठक के लिए रवाना हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, सादगी, मितव्ययिता और सुशासन का दिया व्यवहारिक संदेश

    ई-बस से मंत्री परिषद बैठक के लिए रवाना हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, सादगी, मितव्ययिता और सुशासन का दिया व्यवहारिक संदेश


    मध्य प्रदेश।
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मंत्री परिषद की बैठक के लिए एक अलग और संदेशात्मक पहल करते हुए मंत्रियों तथा वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इलेक्ट्रिक बस से जगदीशपुर की यात्रा की। इस दौरान उन्होंने अपना शासकीय वाहन और सुरक्षा काफिला मुख्यमंत्री निवास पर ही छोड़ दिया। मुख्यमंत्री के साथ मंत्रिपरिषद के सदस्य भी अपने व्यक्तिगत वाहनों का उपयोग किए बिना सामूहिक रूप से ई-बसों में बैठक स्थल पहुंचे। इस पहल को शासन में सादगी, मितव्ययिता और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    मुख्यमंत्री निवास से सुबह निर्धारित समय पर तीन इलेक्ट्रिक बसों के माध्यम से मुख्यमंत्री, सभी मंत्री और उनका स्टाफ बैठक के लिए रवाना हुए। यात्रा के दौरान किसी भी मंत्री के व्यक्तिगत वाहन, पायलट वाहन या फॉलो वाहन का उपयोग नहीं किया गया। सरकार का उद्देश्य यह संदेश देना था कि शासकीय कार्यों में आवश्यकता के अनुरूप संसाधनों का उपयोग किया जाए और अनावश्यक खर्च से बचा जाए।

    मंत्री परिषद की बैठक में शामिल होने वाले वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस पहल में भागीदारी निभाई। अधिकारियों ने अपने वाहनों को कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में ही पार्क किया और वहां से इलेक्ट्रिक बसों के जरिए सामूहिक रूप से जगदीशपुर पहुंचे। शासन स्तर पर इस सामूहिक व्यवस्था को प्रशासनिक सादगी और बेहतर समन्वय का उदाहरण माना जा रहा है।

    मुख्यमंत्री की इस यात्रा के दौरान राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों ने उत्साह के साथ उनका स्वागत किया। पातरा पुल, लांबाखेड़ा और जगदीशपुर सहित कई स्थानों पर ई-बसों पर पुष्पवर्षा की गई। स्थानीय नागरिकों ने इस पहल को पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक संसाधनों के बेहतर उपयोग से जोड़ते हुए सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की। जगदीशपुर पहुंचने पर मुख्यमंत्री का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया और जनप्रतिनिधियों ने उनका अभिनंदन किया।

    बैठक स्थल पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जगदीशपुर दुर्ग में आयोजित धरोहर प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए जनजातीय कलाकारों से संवाद किया और उनके कार्यों की सराहना की। प्रदर्शनी में प्रदेश के जनजातीय नायकों, राष्ट्रभक्तों, ऐतिहासिक शासकों तथा सुशासन और शौर्य से जुड़े महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों के चित्र और विरासत को प्रदर्शित किया गया था। इसका उद्देश्य प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर से लोगों को जोड़ना बताया गया।

    राज्य सरकार का मानना है कि प्रशासनिक कार्यों में पर्यावरण अनुकूल साधनों को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग न केवल ईंधन की बचत में सहायक है, बल्कि कार्बन उत्सर्जन कम करने और स्वच्छ वातावरण बनाने की दिशा में भी प्रभावी कदम माना जाता है। मुख्यमंत्री की यह पहल इसी व्यापक सोच का हिस्सा है, जिसमें शासन व्यवस्था को अधिक जिम्मेदार, पारदर्शी और संसाधन-संवेदनशील बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

    मंत्री परिषद की बैठक के लिए अपनाई गई यह व्यवस्था केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि शासन की कार्यशैली का सार्वजनिक संदेश भी मानी जा रही है। सरकार ने संकेत दिया है कि यदि शासकीय स्तर पर सादगी, सामूहिकता और संसाधनों के संतुलित उपयोग की संस्कृति विकसित होती है, तो इसका सकारात्मक प्रभाव प्रशासनिक व्यवस्था के साथ-साथ समाज में भी देखने को मिल सकता है।

  • मुख्यमंत्री के पास पहुंचा पशुपालन विभाग, जीतू पटवारी ने पत्र लिखकर गौशालाओं और पशुपालकों की स्थिति पर उठाए गंभीर सवाल

    मुख्यमंत्री के पास पहुंचा पशुपालन विभाग, जीतू पटवारी ने पत्र लिखकर गौशालाओं और पशुपालकों की स्थिति पर उठाए गंभीर सवाल

    मध्य प्रदेश में पशुपालन विभाग की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री के पास आने के बाद प्रदेश की राजनीति में इस मुद्दे पर नई बहस शुरू हो गई है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर विभाग की कार्यप्रणाली, गौशालाओं की स्थिति, पशुपालकों की समस्याओं और बेसहारा गोवंश के मुद्दे पर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि केवल विभाग का प्रभार बदलना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जनता अब व्यवस्था में वास्तविक सुधार और प्रभावी परिणाम देखना चाहती है।

    अपने पत्र में पटवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री पहले से कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ऐसे में पशुपालन विभाग को भी अपने पास रखने के फैसले के बाद प्रदेश के किसानों, पशुपालकों और गौ-सेवा से जुड़े लोगों की अपेक्षाएं और बढ़ गई हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि विभाग में सुधार के लिए कौन-से नए कदम उठाए जाएंगे और किस प्रकार समस्याओं का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

    कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि प्रदेश में गौशालाओं की स्थिति लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई है। कई स्थानों पर चारे, पानी, उपचार और अन्य आवश्यक संसाधनों की कमी की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। उनका कहना है कि पशुपालन किसानों की आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन बढ़ती लागत, महंगे चारे और सीमित सरकारी सहायता के कारण यह क्षेत्र आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है।

    पत्र में बेसहारा गोवंश से जुड़ी समस्या का भी उल्लेख किया गया है। पटवारी ने कहा कि सरकार द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार पिछले दो वर्षों में बेसहारा गोवंश से जुड़े 237 सड़क हादसे दर्ज हुए, जिनमें 94 लोगों की मृत्यु हुई और 133 लोग घायल हुए। उन्होंने कहा कि यह केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि व्यवस्था की चुनौतियों को सामने रखने वाले तथ्य हैं, जिन पर प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि सरकार स्वयं स्वीकार कर चुकी है कि एक गौशाला में एक गोवंश के पालन-पोषण पर प्रतिदिन लगभग 70 रुपये का खर्च आता है, जबकि उपलब्ध अनुदान इससे काफी कम है। ऐसे में गौशालाओं के संचालन और गोवंश की समुचित देखभाल दोनों प्रभावित हो रही हैं। उनका कहना है कि यदि आर्थिक सहायता पर्याप्त नहीं होगी तो इस व्यवस्था में सुधार की उम्मीद करना कठिन होगा।

    मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र में पटवारी ने आग्रह किया कि यदि सरकार ने वास्तव में पशुपालन विभाग की जिम्मेदारी गंभीरता से स्वीकार की है तो प्रदेश की गौशालाओं की वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखी जाए। इसके साथ ही पशुपालकों के लिए राहत पैकेज घोषित किया जाए, छुट्टा गोवंश की समस्या के स्थायी समाधान के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए तथा किसानों की फसलों और सड़क दुर्घटनाओं में हुए नुकसान के लिए प्रभावी मुआवजा व्यवस्था लागू की जाए।

    उन्होंने यह भी कहा कि शासन की प्राथमिकता केवल विभागों का पुनर्वितरण नहीं, बल्कि नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन और जनता को मिलने वाले परिणाम होने चाहिए। उनके अनुसार प्रदेश के किसान, पशुपालक और गौ-सेवा से जुड़े लोग अब ठोस फैसलों और जमीन पर दिखाई देने वाले बदलाव की अपेक्षा कर रहे हैं।

    इस घटनाक्रम के बाद पशुपालन विभाग को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। विपक्ष सरकार से जवाबदेही और स्पष्ट कार्ययोजना की मांग कर रहा है, जबकि अब सभी की नजर इस बात पर है कि विभाग का प्रभार संभालने के बाद सरकार पशुपालन, गौशालाओं और बेसहारा गोवंश से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।

  • मध्य प्रदेश कैबिनेट की अहम बैठक में कई बड़े निर्णय, युवाओं, किसानों, कारोबारियों और पंचायतों के लिए नई योजनाओं का खुला रास्ता

    मध्य प्रदेश कैबिनेट की अहम बैठक में कई बड़े निर्णय, युवाओं, किसानों, कारोबारियों और पंचायतों के लिए नई योजनाओं का खुला रास्ता

    मध्य प्रदेश: सरकार ने राज्य के विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से मंगलवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णयों को मंजूरी दी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में युवाओं, किसानों, कारोबारियों, पंचायतों और सामाजिक कल्याण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। सरकार ने वर्ष 2027 को प्रदेश में ‘युवा वर्ष’ के रूप में मनाने का ऐलान करते हुए स्पष्ट किया कि आने वाले समय में युवाओं को रोजगार, कौशल विकास, नवाचार और उद्यमिता के अधिक अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही प्रशासनिक सुधार, डिजिटल सेवाओं के विस्तार और जनकल्याण योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में भी कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।

    सरकार ने बताया कि वर्ष 2025 को उद्योग एवं रोजगार वर्ष और वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में आगे बढ़ाने के बाद अब वर्ष 2027 पूरी तरह युवाओं को समर्पित रहेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की विकास यात्रा में युवाओं की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से सभी विभागों से सुझाव मांगे जाएंगे ताकि युवा वर्ष के दौरान रोजगार, शिक्षा, स्टार्टअप, खेल, कौशल प्रशिक्षण और नवाचार से जुड़े कार्यक्रम व्यापक स्तर पर संचालित किए जा सकें। सरकार आम नागरिकों और युवाओं से भी सुझाव लेकर अंतिम कार्ययोजना तैयार करेगी।

    कैबिनेट बैठक में डिजिटल माध्यम से रचनात्मक कार्य करने वाले युवाओं को प्रोत्साहित करने का भी निर्णय लिया गया। हाल ही में आयोजित ‘मेरा युवा मेरा गौरव’ कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए सरकार ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सकारात्मक और रचनात्मक योगदान देने वाले युवाओं को सम्मानित करने के लिए विशेष डिजिटल पुरस्कार शुरू किए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी को तकनीक के माध्यम से समाज और प्रदेश के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित करना है।

    बैठक में सार्वजनिक वितरण प्रणाली और आंगनबाड़ी सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया। सरकार ने घर-घर पोषण आहार वितरण व्यवस्था में आवश्यक सुधारों को मंजूरी दी है, ताकि पात्र हितग्राहियों तक पोषण सामग्री समय पर और बेहतर गुणवत्ता के साथ पहुंच सके। इसके साथ ही योजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नई व्यवस्थाओं को भी स्वीकृति दी गई। सरकार का मानना है कि इन सुधारों से महिलाओं और बच्चों को मिलने वाली पोषण सेवाएं अधिक प्रभावी होंगी।

    ग्रामीण विकास और स्थानीय प्रशासन को मजबूत बनाने के उद्देश्य से पंचायतों के लिए नए डिजिटल पोर्टल को भी मंजूरी दी गई। इस पोर्टल के माध्यम से पंचायतों के प्रशासनिक कार्यों, विकास योजनाओं और वित्तीय प्रबंधन को अधिक पारदर्शी तथा तकनीक आधारित बनाया जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी आसान होगी और आम नागरिकों को भी विभिन्न सेवाओं का लाभ अधिक व्यवस्थित तरीके से मिल सकेगा।

    बैठक में कारोबार और कर व्यवस्था से जुड़े विषयों पर भी विचार किया गया। सरकार ने जीएसटी से संबंधित आवश्यक बदलावों और व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत दिया। साथ ही किसानों के हितों, कृषि क्षेत्र के विकास और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर भी चर्चा हुई। सरकार का कहना है कि इन निर्णयों का उद्देश्य विकास की गति को तेज करना और सभी वर्गों को योजनाओं का बेहतर लाभ उपलब्ध कराना है।

    कैबिनेट बैठक के बाद सरकार ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में विकास, सुशासन और जनभागीदारी को केंद्र में रखकर आगे की नीतियां तैयार की जाएंगी। युवा वर्ष की घोषणा को राज्य के दीर्घकालिक विकास एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। सरकार का विश्वास है कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी, डिजिटल तकनीक के व्यापक उपयोग और प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से मध्य प्रदेश को विकास के नए चरण में पहुंचाने का लक्ष्य अधिक प्रभावी ढंग से हासिल किया जा सकेगा।

  • योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, जलालाबाद का नाम बदलेगा परशुरामपुरी; स्टार्टअप नीति, होमगार्ड स्वास्थ्य योजना समेत 28 प्रस्तावों को मंजूरी

    योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, जलालाबाद का नाम बदलेगा परशुरामपुरी; स्टार्टअप नीति, होमगार्ड स्वास्थ्य योजना समेत 28 प्रस्तावों को मंजूरी

    लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य सरकार ने विकास, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी। बैठक में कुल 29 प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए, जिनमें से 28 को स्वीकृति मिल गई, जबकि मदरसा शिक्षा से संबंधित एक प्रस्ताव को फिलहाल स्थगित रखा गया। सबसे चर्चित निर्णय शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद का नाम बदलकर परशुरामपुरी किए जाने का रहा, जिसे मंत्रिमंडल ने अंतिम मंजूरी प्रदान कर दी।

    सरकार के अनुसार जलालाबाद को भगवान परशुराम की जन्मस्थली के रूप में धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यता प्राप्त है। केंद्र सरकार से आवश्यक अनापत्ति मिलने के बाद राज्य मंत्रिमंडल ने नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को स्वीकृति दी। सरकार का कहना है कि यह निर्णय स्थानीय ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को अधिक स्पष्ट रूप से स्थापित करने की दिशा में उठाया गया कदम है।

    बैठक में प्रदेश में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 और उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन को भी मंजूरी दी गई। नई व्यवस्था के तहत स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए एक हजार करोड़ रुपये का विशेष फंड बनाया जाएगा। इसके अलावा नए उद्यमों को प्रोटोटाइप विकसित करने, शुरुआती पूंजी उपलब्ध कराने तथा इनक्यूबेशन केंद्रों को वार्षिक वित्तीय सहायता देने का प्रावधान किया गया है। सरकार ने समाप्त हो चुकी डेटा सेंटर नीति को भी दोबारा लागू करने का निर्णय लिया है।

    मंत्रिमंडल ने प्रदेश के लगभग 1.60 लाख होमगार्डों और उनके आश्रितों के लिए पांच लाख रुपये तक की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा को भी मंजूरी दी। इस योजना का उद्देश्य सेवा के दौरान स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों में आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना को भी स्वीकृति दी गई, जिसके तहत पशुओं के बीमा प्रीमियम का अधिकांश हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी। प्राकृतिक आपदा, बीमारी अथवा दुर्घटना से पशुओं की मृत्यु होने पर पशुपालकों को बीमा का लाभ मिलेगा।

    स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई प्रस्ताव भी कैबिनेट की मंजूरी प्राप्त करने में सफल रहे। वाराणसी में ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए भूमि उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि गोरखपुर और मुरादाबाद में 100-100 बेड वाले ईएसआईसी अस्पताल स्थापित किए जाएंगे। मेडिकल कॉलेज में श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए आधी सीटें आरक्षित रखने का भी निर्णय लिया गया है।

    बैठक में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों की सीधी भर्ती संबंधी नियमों में संशोधन को भी मंजूरी दी गई। संशोधित व्यवस्था के तहत पात्र खिलाड़ियों को समूह ‘ख’ और ‘ग’ के विभिन्न सरकारी पदों पर सीधे नियुक्ति का अवसर मिलेगा।

    इसके अलावा राज्य सरकार ने तीन निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना, रायबरेली में उद्यान महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र की स्थापना, लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की पेंशन संबंधी संशोधन, गोरखपुर और मुरादाबाद नगर निगम के लिए म्यूनिसिपल बॉन्ड जारी करने सहित कई प्रशासनिक और विकासात्मक प्रस्तावों को भी स्वीकृति प्रदान की। सरकार का कहना है कि इन फैसलों से राज्य में निवेश, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक व्यवस्था को नई गति मिलेगी।

  • एचडीएफसी बैंक में नेतृत्व परिवर्तन के बीच बाजार सतर्क, नए चेयरमैन की तैनाती के बाद शेयर फिसले, सीईओ चयन प्रक्रिया का इंतजार

    एचडीएफसी बैंक में नेतृत्व परिवर्तन के बीच बाजार सतर्क, नए चेयरमैन की तैनाती के बाद शेयर फिसले, सीईओ चयन प्रक्रिया का इंतजार

    नई दिल्ली । देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंक एचडीएफसी बैंक में नेतृत्व परिवर्तन के बीच मंगलवार को शेयर बाजार में निवेशकों का रुख सतर्क दिखाई दिया। बैंक द्वारा पूर्व वित्त सचिव राजीव कुमार को तीन वर्ष के लिए नया पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त किए जाने के बाद शुरुआती कारोबार में बैंक के शेयरों पर दबाव देखने को मिला। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों की निगाह अब बैंक की शीर्ष प्रबंधन टीम से जुड़े अगले महत्वपूर्ण फैसलों, विशेष रूप से मुख्य कार्यकारी अधिकारी की पुनर्नियुक्ति प्रक्रिया पर टिकी हुई है।

    मंगलवार के शुरुआती कारोबार में एचडीएफसी बैंक का शेयर गिरावट के साथ खुला और कारोबार के दौरान यह 794 रुपये के इंट्रा-डे स्तर तक पहुंच गया। बाद में इसमें कुछ सुधार जरूर देखने को मिला, लेकिन शेयर पूरे कारोबार के दौरान दबाव में बना रहा। निवेशकों ने नए नेतृत्व की घोषणा का स्वागत करने के साथ-साथ बैंक की भविष्य की प्रबंधन रणनीति को लेकर सतर्क रुख अपनाया।

    बैंक ने हाल ही में शेयर बाजार को दी गई सूचना में बताया कि पूर्व वित्त सचिव राजीव कुमार को तीन वर्षों के लिए पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त किया गया है। इस नियुक्ति के साथ बैंक को स्थायी नेतृत्व मिल गया है, जिससे बोर्ड स्तर पर लंबे समय से बनी अस्थायी व्यवस्था समाप्त हो गई है। राजीव कुमार ऐसे समय में यह जिम्मेदारी संभाल रहे हैं जब बैंक कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक और रणनीतिक निर्णयों की प्रक्रिया से गुजर रहा है।

    राजीव कुमार ने पूर्व चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती का स्थान लिया है। चक्रवर्ती ने इस वर्ष अपने पद से इस्तीफा देते समय बैंक की कुछ कार्यप्रणालियों को अपने व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं बताया था। उनके इस्तीफे के बाद बैंक ने संचालन में निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से केकी मिस्त्री को अंतरिम पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त किया था। अब स्थायी नियुक्ति होने से बैंक के निदेशक मंडल को स्थिरता मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    इस बीच बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की पुनर्नियुक्ति प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, गवर्नेंस, नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी की हालिया बैठक में इस विषय पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया। माना जा रहा है कि बैंक पहले नए चेयरमैन को पूरी तरह कार्यभार संभालने का अवसर देगा, जिसके बाद सीईओ की पुनर्नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। यही कारण है कि बाजार फिलहाल नेतृत्व से जुड़े अगले फैसलों पर विशेष नजर बनाए हुए है।

    शेयर बाजार के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले 52 सप्ताह के दौरान एचडीएफसी बैंक के शेयर ने 1,020.35 रुपये का उच्चतम और 726.75 रुपये का न्यूनतम स्तर दर्ज किया है। पिछले एक वर्ष में बैंक के शेयर में 20 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है, जबकि बीते छह महीनों में भी इसमें लगभग 20 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई है। इससे स्पष्ट है कि बैंक का शेयर हाल के महीनों में लगातार दबाव का सामना कर रहा है।

    पूर्व चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती ने अपने इस्तीफे से जुड़ी कानूनी समीक्षा प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि समीक्षा के दौरान मुख्य रूप से नियामकीय अनुपालन पर ध्यान दिया गया, जबकि बैंक की कारोबारी कार्यप्रणालियों को लेकर उनकी व्यापक चिंताओं पर अपेक्षित गंभीरता से विचार नहीं किया गया। ऐसे में निवेशकों की नजर अब इस बात पर भी रहेगी कि नया नेतृत्व बैंक की गवर्नेंस व्यवस्था, प्रबंधन निर्णयों और भविष्य की रणनीति को किस दिशा में आगे बढ़ाता है।

  • मध्य प्रदेश में आज रहेगा सियासी और प्रशासनिक हलचल का दिन, सीएम के कार्यक्रम, बीजेपी की ऑनलाइन परीक्षा और राज्यपाल के कार्यकाल पर रहेगी नजर

    मध्य प्रदेश में आज रहेगा सियासी और प्रशासनिक हलचल का दिन, सीएम के कार्यक्रम, बीजेपी की ऑनलाइन परीक्षा और राज्यपाल के कार्यकाल पर रहेगी नजर


    मध्य प्रदेश:  में शुक्रवार का दिन राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दिनभर राजधानी भोपाल में आयोजित विभिन्न सरकारी और सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। वहीं लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान समारोह, भारतीय जनता पार्टी के डिजिटल प्रशिक्षण अभियान, राज्यपाल के कार्यकाल को लेकर संभावित चर्चाओं और प्रशासनिक समीक्षा बैठकों से जुड़े मुद्दों पर भी पूरे प्रदेश की नजर बनी रहेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का दिन दोपहर से शुरू होने वाले कई सार्वजनिक कार्यक्रमों से व्यस्त रहेगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार वह दोपहर 12 बजे रविंद्र भवन पहुंचकर लोकतंत्र सेनानी सम्मेलन में शामिल होंगे। इसके बाद शाम साढ़े चार बजे अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के सम्मान समारोह में भाग लेंगे। शाम पांच बजे आयोजित अभिनंदन कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी रहेगी, जबकि शाम छह बजे मानस भवन में आयोजित एक स्थानीय कार्यक्रम में भी मुख्यमंत्री सहभागिता करेंगे।

    आपातकाल दिवस के अवसर पर राजधानी भोपाल में लोकतंत्र सेनानियों और मीसाबंदी परिवारों के सम्मान के लिए विशेष समारोह आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में करीब दो हजार मीसाबंदी परिवारों के सदस्य शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले मीसाबंदियों और उनके परिजनों का सम्मान करेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में योगदान देने वाले लोगों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करना है।

    भारतीय जनता पार्टी भी शुक्रवार को अपने संगठनात्मक अभियान के तहत बड़े स्तर पर डिजिटल प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करेगी। बूथ और मंडल स्तर के लगभग सात लाख कार्यकर्ताओं की ऑनलाइन परीक्षा संगठन के डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से आयोजित की जाएगी। इस प्रशिक्षण में पार्टी की विचारधारा, संगठन का विकास, केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाएं और नेतृत्व से जुड़े विषय शामिल किए गए हैं। पार्टी का लक्ष्य छह जुलाई तक पूरे प्रदेश में डिजिटल प्रशिक्षण अभियान को सफलतापूर्वक पूरा करना है।

    प्रदेश की राजनीति में राज्यपाल के पद को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। वर्तमान राज्यपाल मंगूभाई पटेल का कार्यकाल छह जुलाई को पूरा होने जा रहा है। करीब डेढ़ दशक बाद ऐसा अवसर आया है जब मध्य प्रदेश का कोई राज्यपाल अपना निर्धारित पांच वर्षीय कार्यकाल पूरा करेगा। अब यह निर्णय राष्ट्रपति स्तर पर लिया जाएगा कि मंगूभाई पटेल को दूसरा कार्यकाल दिया जाएगा या राज्य को नया राज्यपाल मिलेगा। इस विषय पर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों की नजर बनी हुई है।

    इधर प्रशासनिक स्तर पर भी हाल ही में आयोजित कलेक्टर-कमिश्नर सम्मेलन की चर्चा जारी है। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा के दौरान कई जिलों के प्रदर्शन पर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने स्वास्थ्य संकेतकों में अपेक्षित सुधार नहीं होने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में कमी पर अधिकारियों को गंभीरता से काम करने के निर्देश दिए। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को लेकर अधिकारियों से जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

    कुल मिलाकर शुक्रवार को मध्य प्रदेश में शासन, प्रशासन और राजनीति से जुड़े कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आने वाले हैं। मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों से लेकर संगठनात्मक गतिविधियों, प्रशासनिक समीक्षा और संवैधानिक पदों से जुड़े संभावित निर्णयों तक, पूरे दिन प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गतिविधियां सुर्खियों में बनी रहने की संभावना है।