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  • बगैर SIM के नहीं चलेगा WhatsApp… 1 मार्च से लागू होगा सरकार का ये नया नियम

    बगैर SIM के नहीं चलेगा WhatsApp… 1 मार्च से लागू होगा सरकार का ये नया नियम


    नई दिल्ली।
    अगर आप वाट्सएप (WhatsApp) यूजर हैं, तो यह खबर आपके काम की है। दरअसल केंद्र सरकार ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि SIM-Binding नियम में कोई बदलाव या ढील नहीं दी जाएगी। यह नियम WhatsApp, Telegram, Signal मैसेजिंग ऐप्स लागू होते हैं, और इसका लक्ष्य डिजिटल सुरक्षा को मजबूत बनाना है। यानी 1 मार्च से यह नियम लागू रहेगा और कंपनियों को इसे मानना ही होगा। सरकार के अनुसार, इन ऐप्स को एक्टिव SIM कार्ड से लगातार जुड़े रहना होगा, जिससे यह कन्फर्म किया जा सके कि व्हाट्सऐप उपयोग होने वाला नंबर असली और एक्टिव है। अगर SIM हटाई जाती है या इनएक्टिव होती है, तो ऐप की सेवाएं उस डिवाइस पर काम नहीं करेंगी।


    SIM-Binding क्या है?

    जिस मोबाइल नंबर से आपने WhatsApp अकाउंट बनाया है, वही SIM आपके फोन में एक्टिव रहनी चाहिए। अगर वह SIM आपके फोन में नहीं है या बंद हो गई है, तो WhatsApp ठीक से काम नहीं करेगा। अब तक मैसेजिंग ऐप्स में 6-डिजिट OTP डालकर एक बार लॉगिन होने के बाद SIM की मौजूदगी लगातार नहीं चेक होती थी। नया नियम यह बदलने वाला है अब हर समय SIM को एक्टिव और फोन में मौजूद होना जरूरी होगा। सरकार ने यह बदलाव इसलिए किया है क्योंकि वह डिजिटल धोखाधड़ी, फर्जी नंबरों का दुरुपयोग और साइबर अपराध को रोकने पर जोर दे रही है। जब हर अकाउंट एक वेरिफाइड SIM से जुड़ा होगा, तो फ्रॉड और फेक अकाउंट्स को पहचानना आसान हो जाएगा।


    1 मार्च 2026 के बाद कोई ढील नहीं

    डिपार्टमेंट ऑफ़ टेलीकम्यूनिकेशंस (DoT) ने SIM-Binding नियम को 28 नवंबर 2025 को जारी किया था और कंपनियों को इसे पूरा करने के लिए 90 दिन का समय दिया गया है। इसका मतलब है कि 1 मार्च 2026 तक सभी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को इस सिस्टम को लागू करना पड़ेगा। सरकार ने यह भी साफ किया है कि अलग-अलग डिवाइस पर लॉगिन किए गए Web या Desktop के लिए भी छह घंटे का ऑटो लॉग-आउट नियम भी लागू रहेगा। इसका यह मतलब है कि अगर आप कंप्यूटर या वेब पर WhatsApp चला रहे हैं, तो हर छह घंटे में आपको QR कोड से फिर से लॉगिन करना पड़ेगा।


    आम लोगों पर पड़ेगा ये असर

    अगर आपका नंबर एक्टिव है और वही SIM आपके फोन में लगी है, तो आपको ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है। आपका WhatsApp सामान्य तरीके से चलता रहेगा।लेकिन अगर आपने फोन से SIM निकाल दी या वहीं SIM दूसरे फोन में डाल दी तो आपका व्हट्सऐप टेम्पररी इनएक्टिव हो जाएगा। साथ ही आपका नंबर बंद हो गया (रिचार्ज न होने की वजह से) तो WhatsApp दोबारा वेरिफिकेशन मांग सकता है या बंद भी हो सकता है। दरअसल केंद्र सरकार का मानना है कि अगर हर अकाउंट एक एक्टिव SIM से जुड़ा होगा, तो फर्जी नंबर, स्कैम और साइबर अपराधों के खिलाफ लड़ाई और मजबूती से लड़ी जा सकती है।

  • वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा – सरकार के पास बैंकों के विलय की फिलहाल कोई रूपरेखा नहीं

    वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा – सरकार के पास बैंकों के विलय की फिलहाल कोई रूपरेखा नहीं


    नई दिल्ली।
    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने सोमवार को कहा कि सरकार के पास सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (Banks) के विलय की कोई रूपरेखा नहीं है। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट (Union Budget) में प्रस्तावित विकसित भारत के लिए बैंकिंग पर एक उच्च-स्तरीय समिति इस विषय और अन्य पहलुओं पर गौर करेगी।

    वित्त मंत्री ने क्या कहा
    आरबीआई (RBI) के केंद्रीय निदेशक मंडल को बजट के बाद संबोधित करने के उपरांत पत्रकारों से बातचीत में सीतारमण ने कहा, ”मैं किसी भी रूपरेखा से परिचित नहीं हूं… ऐसी कोई योजना अभी मौजूद नहीं है। बैंकों का विलय यहां चर्चा का विषय नहीं था, न ही बजट से पहले था। लेकिन अब जो समिति बनाई जा रही है, उसके कार्यक्षेत्र तय होने के बाद, वह भारतीय बैंकिंग को मजबूत बनाने के हर पहलू पर ध्यान देंगी।”

    बजट में सीतारमण ने भारत के बैंकिंग क्षेत्र की व्यापक समीक्षा करने और इसे देश के विकास लक्ष्यों के अनुरूप ढालने के लिए उच्च स्तरीय बैंकिंग समिति’ स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि बैंक बेहतर तरीके से पूंजीकृत हैं और वे अगले चार-पांच साल तक ऋण वृद्धि को संभाल सकते हैं।


    बैंकों को दिए ये आदेश

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकों द्वारा बीमा सहित वित्तीय उत्पादों की गलत तरीके से बिक्री पर कड़ा रुख अपनाते हुए सोमवार को कहा कि उन्हें (बैंकों को) अपने मुख्य कारोबार पर ध्यान देना चाहिए। पत्रकारों से बातचीत में सीतारमण ने कहा, ” बैंकों को अपने मुख्य कारोबार पर ध्यान देना चाहिए…। मैंने हमेशा से इस बात पर आपत्ति जतायी है कि आप उस बीमा को बेचने में अधिक समय लगा रहे हैं जिसकी आवश्यकता ही नहीं है और यह मामला आरबीआई और बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) के बीच फंसा रहा।”

    आरबीआई ने ग्राहक को भ्रामक जानकारी देकर उत्पाद की बिक्री पर दिशानिर्देशों का मसौदा 11 फरवरी को जारी किया था। इसमें कहा गया है कि यदि किसी ग्राहक को गलत तरीके से उत्पाद या सेवा दी जाती है, तो बैंक को ग्राहक द्वारा चुकाई गई पूरी राशि लौटानी होगी और स्वीकृत नीति के अनुसार हुए नुकसान की भरपाई भी करनी होगी। इस पर चार मार्च तक सार्वजनिक टिप्पणियां मांगी गई हैं।

    आरबीआई ने कहा कि गलत तरीके से बिक्री पर कड़े नियम एक जुलाई से लागू होंगे। सीतारमण ने कहा, ”मुझे खुशी है कि आरबीआई यह स्पष्ट मार्गदर्शन दे रहा है कि गलत तरीके से बिक्री क्यों बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संदेश, बैंकों तक जाना चाहिए कि आप गलत बिक्री नहीं कर सकते। यह शब्द ‘गलत बिक्री’, किसी को ठेस पहुंचाने के बजाय, शब्दकोश में एक और शब्द बनकर रह गया है।”

  • निवेशकों को बड़ा तोहफा देने की तैयारी में सरकार … पेंशन के साथ हेल्थ इंश्योरेंस भी…डबल बेनेफिट

    निवेशकों को बड़ा तोहफा देने की तैयारी में सरकार … पेंशन के साथ हेल्थ इंश्योरेंस भी…डबल बेनेफिट


    नई दिल्ली।
    केंद्र सरकार (Central Government) अब निवेशकों (Investors) को पेंशन के साथ-साथ हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) कवर भी देने की तैयारी में है। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) के चेयरमैन एस. रमन ने शुक्रवार को इस बात की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तीन प्रमुख पेंशन फंड इस समय हेल्थ इंश्योरेंस कवर देने वाली पेंशन योजनाओं पर काम कर रहे हैं।

    यह नई पेंशन योजना या तो हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों के साथ साझेदारी में, या फिर सीधे हेल्थ सर्विस प्रोवाइडर्स के सहयोग से पेश की जा सकती है। रमन ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य ‘स्वास्थ्य पेंशन योजना’ के तहत लोगों को चिकित्सा खर्चों के लिए अलग से बचत करने के लिए प्रेरित करना है, जिससे वे भविष्य में किसी भी आकस्मिक स्वास्थ्य स्थिति का सामना बेहतर तरीके से कर सकें।

    यह पहल निवेशकों के लिए एक बड़ा तोहफा साबित हो सकती है, जो अब अपनी पेंशन के साथ-साथ अपनी स्वास्थ्य सुरक्षा को भी सुनिश्चित कर सकेंगे।

    पीएफआरडीए के चेयरमैन ने कहा- हम चाहते हैं कि लोग खुद को सुरक्षित रखने की अहमियत को समझें। हम चाहते हैं कि लोग मेडिकल पेंशन योजना में पैसा बचत करें। यह राशि केवल चिकित्सा उद्देश्यों के भुगतान के लिए समर्पित होगी। बता दें कि PFRDA ने इस साल जनवरी में ‘स्वास्थ्य’ प्लेटफॉर्म की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत निवेशक की पेंशन राशि का अधिकतम 30 प्रतिशत हिस्सा चिकित्सा खर्चों के लिए अलग रखा जा सकता है।


    स्वास्थ्य बीमा कंपनियों से सस्ते टॉप-अप कवर

    पेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) के प्रमुख ने कहा कि राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के तहत बड़ी संख्या में निवेशकों का एकसाथ आना पेंशन फंड को बेहतर सौदे तय करने में मदद करता है। इससे हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों से सस्ते टॉप-अप कवर और अस्पतालों से उपचार पर रियायतें मिल सकती हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना में अस्पतालों को मरीज के इलाज के तुरंत बाद ही भुगतान मिल सकेगा जबकि केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजना के तहत भुगतान में कई महीने लग जाते हैं। रमन ने बताया कि आईसीआईसीआई, एक्सिस और टाटा की तरफ से प्रायोजित पेंशन फंड इस तरह की हेल्थ कवरेज योजनाएं पेश करने को लेकर प्रयोग कर रहे हैं और आईसीआईसीआई जल्द ही अपना उत्पाद पेश कर देगा।

    सोना-चांदी ईटीएफ में निवेश की योजना
    उन्होंने कहा कि रिटर्न को लंबे समय तक दहाई अंकों में बनाए रखने के उपायों का अध्ययन किया जा रहा है। इसके लिए परियोजना वित्त, रियल एस्टेट, वैकल्पिक निवेश फंड (एआईएफ) के साथ सोना और चांदी ईटीएफ में सीमित निवेश की भी योजना है। उन्होंने एनपीएस के कम कवरेज (करीब एक करोड़ रुपये) को स्वीकार करते हुए कहा कि निवेशक आधार बढ़ाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) से बातचीत जारी है ताकि डिजिटल माध्यम से लोगों को जोड़ने में तेजी लाई जा सके। इसके साथ ही रमन ने कहा कि कम-से-कम चार बैंकों या बैंकों के समूह ने पेंशन कोष कारोबार में उतरने की इच्छा जताई है। इनमें एक्सिस बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक एवं स्टार डायची का समूह शामिल हैं।

  • PMO का पता बदला… 'तीर्थ भवन परिसर का अनावरण', अब यहीं से चलेगी सरकार

    PMO का पता बदला… 'तीर्थ भवन परिसर का अनावरण', अब यहीं से चलेगी सरकार


    नई दिल्ली।
    दशकों तक केंद्रीय सरकार (Central Government) के अहम फैसलों का गवाह रहा साउथ ब्लॉक (South Block) अब इतिहास बनने जा रहा है। आज यानी शुक्रवार 13 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) नए सरकारी कार्यालयों के एरिया ‘तीर्थ भवन परिसर’ (‘Tirtha Bhavan Complex’) का अनावरण करेंगे। इस एरिया में प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय स्थित हैं, जो पहले अलग-अलग भवनों में थे। बाद में प्रधानमंत्री सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन-1 तथा कर्तव्य भवन-2 का औपचारिक उद्घाटन करेंगे और शाम को सेवा तीर्थ में एक जनसभा को संबोधित भी करेंगे।

    प्रधानमंत्री कार्यालय से सामने आई जानकारी के मुताबिक इन भवनों के उद्घाटन से देश की प्रशासनिक शासन संरचना में बदलाव होगा। यह परिसर आधुनिक, कुशल, सुलभ और नागरिक-केंद्रित शासन प्रणाली के निर्माण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

    आज होने वाले उद्घाटन कार्यक्रम की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी बात रखी। उन्होंने सेवा तीर्थ के उद्घाटन की तारीख को दिल्ली के इतिहास से भी जोड़ा। उन्होंने लिखा, “आज यानी 13 फरवरी 2026 को, स्वतंत्र भारत का इतिहास एक नया मोड़ लेगा। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ब्रिटिश काल के साउथ ब्लॉक से अपने नए पते,सेवातीर्थ में स्थानांतरित हो रहा है। संयोगवश, ठीक इसी दिन 13 फरवरी 1931 को अंग्रेजों ने नई दिल्ली को औपनिवेशिक भारत की राजधानी घोषित किया था। उस औपनिवेशिक घोषणा से लेकर इस निर्णायक परिवर्तन तक का सफर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के औपनिवेशिक विरासत को त्यागने और वास्तव में आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी नए भारत के निर्माण के संकल्प को दर्शाता है।”

    आपको बता दें, सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत सरकारी कार्यालयों का विकास किया जा रहा था। इस प्रोजेक्ट के पहले यह कार्यालय दशकों तक इस क्षेत्र में कई जगहों पर फैले हुए थे। प्रमुख कार्यालयों के इस फैलाव के कारण संचालन में अक्षमताएं, समन्वय संबंधी चुनौतियां, रखरखाव की बढ़ती लागत और काम करने के लिए अनुपयुक्त वातावरण जैसी समस्याएं उत्पन्न होती थीं, इसी के चलते सरकार ने इन्हें एक जगह पर करने का फैसला लिया।

    कर्तव्य भवन-1 और कर्तव्य भवन-2 में वित्त मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय, विधि एवं न्याय मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय और जनजातीय कार्य मंत्रालय सहित कई प्रमुख मंत्रालय स्थित हैं।

    दोनों भवन परिसरों में डिजिटल रूप से एकीकृत कार्यालय, सुव्यवस्थित सार्वजनिक संपर्क क्षेत्र और केंद्रीकृत स्वागत सुविधाएं मौजूद हैं। ये सुविधाएं सहयोग, दक्षता, सुचारू संचालन, नागरिकों की बेहतर भागीदारी और कर्मचारियों के कल्याण को बढ़ावा देंगी। चार-स्टार जीआरआईएचए मानकों के अनुसार डिज़ाइन किए गए इन परिसरों में नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियां, जल संरक्षण उपाय, अपशिष्ट प्रबंधन समाधान और उच्च-प्रदर्शन वाली भवन संरचनाएं शामिल हैं। इन उपायों से परिचालन दक्षता बढ़ेगी और पर्यावरणीय प्रभाव को काफी हद तक कम किया जाएगा। भवन परिसरों में स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल सिस्टम, निगरानी नेटवर्क और उन्नत आपातकालीन प्रतिक्रिया अवसंरचना जैसी व्यापक सुरक्षा व्यवस्थाएं भी शामिल हैं, जिनसे अधिकारियों और आगंतुकों के लिए एक सुरक्षित और सुलभ वातावरण सुनिश्चित होगा।

  • मध्य प्रदेश में ऐतिहासिक बदलाव: अब अविवाहित, विधवा और तलाकशुदा बेटियां भी माता-पिता की पेंशन की पात्र

    मध्य प्रदेश में ऐतिहासिक बदलाव: अब अविवाहित, विधवा और तलाकशुदा बेटियां भी माता-पिता की पेंशन की पात्र




    नई दिल्ली।
    मध्य प्रदेश सरकार ने परिवार पेंशन के नियमों में ऐतिहासिक बदलाव किया है। अब राज्य में अविवाहित, विधवा और तलाकशुदा बेटियां भी माता-पिता की पारिवारिक पेंशन की पात्र सूची में शामिल होंगी। यह बड़ा फैसला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया।

    कैबिनेट ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम 2026 और सिविल सेवा नियमावली में संशोधन को मंजूरी दी। नए नियमों के तहत अब परिवार पेंशन से जुड़े मामलों का निपटारा सरल और समयबद्ध होगा। इसके अलावा, NPS के तहत ग्रेच्युटी भुगतान, स्वेच्छिक सेवानिवृति, केंद्र और राज्य सरकार की पूर्व सेवा का संयोजन, निलंबन अवधि में अंशदान और देरी की स्थिति में जिम्मेदारी, तथा सेवानिवृत्ति या त्यागपत्र के बाद ग्रेच्युटी की पात्रता और भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। यह नियम 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे।

    इस ऐतिहासिक बदलाव से राज्य की हजारों बेटियों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी। अब पेंशन का लाभ माता-पिता पर आश्रित महिलाओं तक भी पहुंच सकेगा। सरकार ने बताया कि परिवार पेंशन के लिए आवेदन करना अब और भी आसान होगा। इच्छुक बेटियों को संबंधित विभाग या कोषालय कार्यालय में आवेदन करना होगा। आवश्यक दस्तावेज़ों में पहचान पत्र, तलाक या विधवा प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी कागजात शामिल होंगे।

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियमों के प्रकाशन के बाद विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। यह कदम विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए राहत साबित होगा, जो तलाक या विधवा होने के बाद अपने माता-पिता पर निर्भर हैं और जिनके पास स्थायी आय का साधन नहीं है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव मध्य प्रदेश में महिला सशक्तिकरण और समानता को बढ़ावा देगा और राज्य की बेटियों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। नए नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे और इसके लागू होने के तुरंत बाद बेटियां पारिवारिक पेंशन का लाभ प्राप्त कर सकेंगी।

  • मप्र में अब सरकारी बंगलों में नहीं चलेगा कब्जा: कई को बंगला खाली करने का नोटिस

    मप्र में अब सरकारी बंगलों में नहीं चलेगा कब्जा: कई को बंगला खाली करने का नोटिस


    भोपाल। मध्यप्रदेश में कई पूर्व मंत्री और अधिकारी सरकारी आवास खाली करने को तैयार नहीं हैं। इसे देखते हुए संपदा संचालनालय ने अब सख्ती शुरू कर दी है। सरकार ने साफ कर दिया है कि नियम सबके लिए बराबर हैं, चाहे वे अपनी ही पार्टी के बड़े नेता क्यों न हों। बिना पात्रता के सरकारी बंगलों का आनंद ले रहे पूर्व मंत्रियों, पूर्व सांसदों और आईएएस अधिकारियों को अब ‘बेदखली’ का डर सताने लगा है।
    अब सरकार ने पात्रता खत्म होने के बावजूद सरकारी बंगलों में जमे पूर्व मंत्रियों और आईएएस अफसरों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्व. प्रभात झा के परिवार को 13 जनवरी तक बंगला खाली करने का आखिरी अल्टीमेटम दिया गया है, अन्यथा बलपूर्वक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही 4 आईएएस और कई पूर्व मंत्रियों को भी नोटिस जारी कर भारी जुर्माने की चेतावनी दी गई है।

    सरकारी बंगलों से कब्जा हटाने के लिए एक्शन
    राजधानी भोपाल के पॉश इलाकों में स्थित सरकारी बंगलों पर अवैध रूप से काबिज रसूखदारों के खिलाफ मोहन सरकार ने मोर्चा खोल दिया है। 2023 के विधानसभा चुनाव में हारने वाले पूर्व मंत्रियों और कार्यकाल पूरा कर चुके पूर्व सांसदों ने अभी तक अपने सरकारी आवास नहीं छोड़े हैं। अब सरकार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तय समय पर बंगले खाली नहीं हुए, तो पुलिस बल का प्रयोग कर सामान बाहर कर दिया जाएगा।

    प्रभात झा के परिवार को 13 जनवरी तक का अल्टीमेटम
    बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्व. प्रभात झा के परिवार को 74 बंगले स्थित बी-टाइप आवास खाली करने के लिए 13 जनवरी तक का समय दिया गया है।

    नोटिस में साफ कहा गया है कि इस तारीख के बाद प्रशासन ‘बल प्रयोग’ करेगा। हालांकि, उनके बेटे तुशमुल झा का कहना है कि वे खुद ही बंगला खाली करने की प्रक्रिया में हैं और यह एक सहज प्रक्रिया है।

    पूर्व मंत्री रामपाल सिंह को नोटिस
    इधर, पूर्व मंत्री रामपाल सिंह 2023 में चुनाव हार गए थे, लेकिन 2 साल बाद भी उन्होंने लिंक रोड-1 स्थित अपना सरकारी बंगला (C-15) खाली नहीं किया है। इस मामले में उनका कहना है कि उन्होंने सरकार से थोड़ा समय और मांगा है।

    पद नहीं फिर भी सरकारी आवास पर डेरा
    मध्यप्रदेश में नेताओं की कुर्सी तो चली गई, लेकिन नेता सरकारी बंगलों का मोह नहीं त्याग पा रहे हैं। पूर्व राजस्व मंत्री रामपाल सिंह, पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा और पूर्व सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया जैसे दिग्गज नेता 2023 का विधानसभा चुनाव हार चुके हैं, लेकिन करीब दो साल बीत जाने के बाद भी इन्होंने सरकारी बंगलों पर अपना कब्जा बरकरार रखा है। यही हाल पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया का है, जो वर्तमान में विधायक भी नहीं हैं, फिर भी मंत्री रहते आवंटित हुए आवास में रह रही हैं। भोपाल की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की स्थिति भी अलग नहीं है; संसद की सदस्यता खत्म होने के बाद भी उन्होंने सरकारी बंगला खाली नहीं किया है।

    सरकार सख्त, कब्जेदारों को नोटिस
    संपदा संचालनालय के मुताबिक, कार्रवाई की सुगबुगाहट तेज हो चुकी है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्व. प्रभात झा के परिवार को 6 जनवरी को ही नोटिस थमाया जा चुका है, वहीं रामपाल सिंह को भी पहले ही चेतावनी दी जा चुकी है।

    मोहन सरकार ने अब कड़ा रुख अख्तियार करते हुए साफ कर दिया है कि पात्रता खत्म होने के बाद सरकारी आवास पर किसी भी तरह का ‘अवैध कब्जा’ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नियम स्पष्ट हैं—पद गया, तो बंगला भी छोड़ना होगा।

    30 गुना तक किराया वसूलने को मंजूरी
    विधि विभाग ने सख्त नियम लागू करते हुए भारी-भरकम किराए की वसूली को मंजूरी दे दी है। नियमों के मुताबिक, पात्रता खत्म होने के शुरुआती तीन महीनों तक तो सामान्य किराया लगेगा, लेकिन इसके बाद भी बंगला खाली नहीं हुआ तो अगले तीन महीनों के लिए 10 गुना किराया वसूला जाएगा। जब छह महीने बाद भी कब्जा बरकरार रहा, ऐसी स्थिति में रसूखदारों को 30 गुना ज्यादा हर्जाना भरना होगा। सरकार के मकसद साफ है—या तो समय से बंगला खाली कर दें, वरना लाखों के जुर्माने के लिए तैयार रहें।

    IAS अफसरों पर भी गिरी गाज
    प्रशासन ने सुधीर कोचर, अदिति गर्ग, रत्नाकर झा और निधि सिंह समेत 4 आईएएस और 3 अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी बेदखली का नोटिस थमाया है।

    विधायक रह रहे मंत्रियों वाले बंगलों में
    सांची विधायक डॉ. प्रभुराम चौधरी, भूपेंद्र सिंह, गोपाल भार्गव और मीना सिंह जैसे विधायक पात्रता से ऊपर की श्रेणी (B और C टाइप) के बंगलों में रह रहे हैं।

  • माओवादी संगठन को बड़ा झटका ‘पूना मार्गेम’ अभियान से प्रभावित होकर 26 नक्सलियों ने किया सरेंडर, 64 लाख था इनाम

    माओवादी संगठन को बड़ा झटका ‘पूना मार्गेम’ अभियान से प्रभावित होकर 26 नक्सलियों ने किया सरेंडर, 64 लाख था इनाम


    सुकमा । छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में चलाए जा रहे पूना मार्गेम पुनर्वास से पुनर्जीवन अभियान के तहत सुरक्षा बलों को एक बड़ी सफलता प्राप्त हुई है। इस अभियान के तहत 26 माओवादी जिनमें 07 महिला कैडर भी शामिल हैं ने आत्मसमर्पण किया है। इस आत्मसमर्पण को माओवादी नेटवर्क के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि ये माओवादी लंबे समय से विभिन्न नक्सली गतिविधियों में सक्रिय रहे थे। इन माओवादियों पर कुल ₹64 लाख का इनाम घोषित था।

    आत्मसमर्पण करने वालों की पहचान और उनका योगदान

    आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी पीएलजीए बटालियन दक्षिण बस्तर माड़ डिवीजन और आंध्र-ओडिशा बॉर्डर क्षेत्र में सक्रिय रहे थे। इनमें से कुछ माओवादी सुकमा माड़ क्षेत्र और ओडिशा की सीमाओं पर हुई कई बड़ी नक्सली घटनाओं में शामिल रहे हैं। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में विभिन्न रैंक के लोग शामिल हैं जैसे CYPCM – 01,DVCM – 01, PPCM – 03,ACM – 03 पार्टी सदस्य 18 यह माओवादी आत्मसमर्पण अभियान न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन में बदलाव ला रहा है बल्कि यह माओवादी संगठन के खिलाफ सुरक्षा बलों की एक बड़ी रणनीतिक सफलता भी है।

    पूना मार्गेम अभियान का उद्देश्य

    पूना मार्गेम अभियान का मुख्य उद्देश्य भटके हुए युवाओं को हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति सम्मानजनक और समाज में स्वीकार्य जीवन की ओर लौटने का अवसर देना है। इस अभियान के तहत आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति के तहत विशेष लाभ मिलेंगे जिसमें आर्थिक सहायता सुरक्षा आवास शिक्षा और रोजगार जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

    एसपी की अपील
    सुकमा पुलिस अधीक्षक किरण चह्वाण ने शेष माओवादियों से अपील करते हुए कहा हिंसा का रास्ता छोड़ें शांति और विकास का मार्ग अपनाएं। सरकार आत्मसमर्पण करने वालों के पुनर्वास और सुरक्षित भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने नक्सलियों से अपील की कि वे सरकार द्वारा प्रदान किए जा रहे इस अवसर का लाभ उठाएं और समाज में अपना स्थान बनाएं।

    नक्सलवाद के खिलाफ एक और कदम

    पूना मार्गेम अभियान को नक्सलवाद के खिलाफ छत्तीसगढ़ सरकार का एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस अभियान ने न केवल सुरक्षा बलों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की है बल्कि यह नक्सलियों के भीतर यह संदेश भी भेज रहा है कि अगर वे हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटते हैं तो उनके लिए बेहतर भविष्य की संभावना है।

  • सरकार की तैयारी… EV वाहनों से होगी लंबी दूरी की यात्रा, नहीं रहेगा रास्ते में बैटरी खत्म होने का डर

    सरकार की तैयारी… EV वाहनों से होगी लंबी दूरी की यात्रा, नहीं रहेगा रास्ते में बैटरी खत्म होने का डर


    नई दिल्ली।
    भारत (India) में इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric vehicles) को लंबी दूरी की यात्रा के लिए ज्यादा भरोसेमंद बनाने की दिशा में सरकार एक नई पहल पर काम कर रही है। इसके तहत देश के प्रमुख एक्सप्रेसवे (Major Expressways) और हाईवे (Highway) पर ईवी कमांड सेंटर (EV Command Center) और रास्ते पर सहायता पहुंचाने वाला नेटवर्क विकसित करने की योजना है। इस कदम का मकसद इलेक्ट्रिक वाहन चालकों की सबसे बड़ी चिंता मानी जाने वाली ‘रेंज एंग्जायटी’, यानी रास्ते में बैटरी खत्म होने के डर को कम करना है।

    सरकारी स्तर पर इस बात पर सहमति बन रही है कि केवल चार्जिंग स्टेशन बनाना ही काफी नहीं है। जब तक इलेक्ट्रिक वाहनों को यात्रा के दौरान तकनीकी सहायता, आपात मदद और रियल-टाइम सपोर्ट नहीं मिलेगा, तब तक लंबी दूरी की ईवी यात्रा को लेकर लोगों का भरोसा पूरी तरह नहीं बन पाएगा। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए एक्सप्रेसवे-आधारित ईवी सपोर्ट सिस्टम तैयार करने की योजना बनाई जा रही है।


    संकट में आते ही तुरंत मदद मिलेगी

    प्रस्तावित योजना के तहत एक्सप्रेसवे पर ईवी-आधारित कमांड और कंट्रोल सेंटर स्थापित किए जाएंगे। ये सेंटर इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए एयर ट्रैफिक कंट्रोल की तरह काम करेंगे। यहां से यात्रा कर रहे इलेक्ट्रिक वाहनों की स्थिति पर नजर रखी जा सकेगी और जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद पहुंचाई जाएगी।

    इन कमांड सेंटरों से तुरंत रास्ते में ही सहायता, बैटरी से जुड़ी समस्याओं में सहायता, चार्जिंग से संबंधित मार्गदर्शन और वाहन की बेसिक जांच जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। इससे अगर कोई वाहन रास्ते में तकनीकी खराबी या बैटरी समस्या के कारण रुक जाता है, तो उसे तुरंत सहायता मिल सकेगी।


    दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे होगा पहला ईवी कॉरिडोर

    इस योजना के तहत दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में विकसित करने पर विचार किया जा रहा है। करीब 1,300 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे पर संपूर्ण सहायता प्रणाली तैयार की जी सकती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इस पूरे मार्ग पर चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्जिंग के साथ-साथ तकनीकी और आपात सहायता भी मिलती रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो इसे देश के अन्य प्रमुख एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी लागू किया जा सकता है।


    सार्वजनिक-निजी भागीदारी पर होगा जोर

    सरकार इस पूरे ढांचे को सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल पर विकसित करने पर विचार कर रही है। इसमें वाहन निर्माता कंपनियां, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदाता और निजी रोडसाइड असिस्टेंस कंपनियां शामिल हो सकती हैं। इससे सरकार पर वित्तीय बोझ कम होगा और सेवाओं की गुणवत्ता भी बेहतर होने की उम्मीद है।


    ईवी अपनाने को मिलेगा बढ़ावा

    भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन यह बढ़त अभी मुख्य रूप से शहरों तक सीमित है। लंबी दूरी की यात्रा में भरोसे की कमी अब भी एक बड़ी बाधा है। एक्सप्रेसवे पर ईवी-अनुकूल इंफ्रास्ट्रक्चर और कमांड सेंटर की व्यवस्था होने से ईवी को पेट्रोल-डीजल वाहनों का व्यावहारिक विकल्प बनाने में मदद मिलेगी। सरकार का मानना है कि इस पहल से न सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग बढ़ेगा, बल्कि देश के स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी।

  • महिलाओं की अश्लील फोटोज बना रहा AI, सरकार ने चेतावनी

    महिलाओं की अश्लील फोटोज बना रहा AI, सरकार ने चेतावनी


    नई दिल्‍ली। केंद्र सरकार ने एक्स को सख्त चेतावनी दी है। केंद्र ने कहा है कि ग्रोक एआई महिलाओं की अश्लील फोटो बना रहा है। इसलिए इन्हें तुरंत हटाया जाए। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने एलन मस्क के स्वामित्व वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के मुख्य अनुपालन अधिकारी को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में कहा है कि ग्रोक की तत्काल व्यापक समीक्षा करें और अवैध सामग्री तक पहुंच को हटा दें या डिसेबल कर दें।

    क्यों जताई चिंता
    सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के पत्र में कहा गया कि आपके द्वारा विकसित और एक्स प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई गई सेवा ग्रोक का इस्तेमाल महिलाओं की अश्लील या अपमानजनक तस्वीरें और वीडियो बनाने में हो रहा है। इसके अलावा इसका इस्तेमाल गलत चीजों को प्रकाशित करने या साझा करने के लिए किया जा रहा है। इससे महिलाओं आ अभद्र ढंग से अपमान हो रहा है।

    पत्र में आगे कहा गया है कि ऐसा व्यवहार प्लेटफॉर्म-स्तरीय सुरक्षा उपायों और सिस्टम की गंभीर विफलता को दर्शाता है। यह प्रासंगिक कानूनों के उल्लंघन में एआई तकनीक के गंभीर दुरुपयोग की तरह है।

    रिपोर्ट देने के लिए भी कहा
    मंत्रालय ने एक्स से तत्काल अनुपालन सुनिश्चित करने और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट देने के लिए भी कहा है। नोटिस में खासकर ‘ग्रोक’ के दुरुपयोग से तैयार अश्लील, नग्न, आपत्तिजनक एवं यौन गतिविधियों को स्पष्ट रूप से दर्शाने वाली सामग्री के होस्टिंग, निर्माण, प्रकाशन, प्रसारण, साझा करने या अपलोड करने पर लगाम लगाने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा गया है।

    हो सकती है कानूनी कार्रवाई
    मंत्रालय ने चेतावनी देते हुए कहा है कि निर्धारित वैधानिक प्रावधानों का पालन न करने को गंभीरता से लिया जाएगा और ऐसा होने पर मंच, उसके जिम्मेदार अधिकारियों तथा कानून का उल्लंघन करने वाले उपयोगकर्ताओं के खिलाफ बिना किसी अतिरिक्त नोटिस के सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

    आदेश के मुताबिक, ऐसी स्थिति में कार्रवाई सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, आईटी नियमों, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और अन्य लागू कानूनों के तहत की जाएगी.

  • गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए सरकार का बड़ा कदम… 90 दिनों तक काम… पेंशन की भी व्यवस्था

    गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए सरकार का बड़ा कदम… 90 दिनों तक काम… पेंशन की भी व्यवस्था


    नई दिल्ली।
    भारत सरकार (Government of India) ने सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Social Security Code, 2020) के तहत गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों (Gig and platform workers) के लिए सामाजिक सुरक्षा लाभों को ध्यान में रखते हुए नए मसौदा नियमों का प्रस्ताव दिया है। ये नियम 1 जनवरी, 2026 से प्रभावी होने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य जोमैटो, स्विगी, ओला और उबर जैसे एग्रीगेटर्स के साथ काम करने वाले लाखों श्रमिकों को स्वास्थ्य, जीवन बीमा और दुर्घटना बीमा जैसी सुरक्षा प्रदान करना है।

    मसौदा नियमों के अनुसार, लाभ प्राप्त करने के लिए श्रमिकों को एक विशिष्ट अवधि के लिए कार्य करना अनिवार्य होगा। यदि कोई श्रमिक केवल एक ही प्लेटफॉर्म के साथ जुड़ा है, तो उसे एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 90 दिनों तक काम करना होगा। यदि श्रमिक एक से अधिक प्लेटफॉर्म (जैसे सुबह ओला और शाम को स्विगी) पर काम करता है, तो कुल कार्य अवधि कम से कम 120 दिन होनी चाहिए।

    काम की गिनती उस दिन से शुरू होगी जब श्रमिक पहली बार आय अर्जित करता है, चाहे राशि कितनी भी हो। यदि कोई व्यक्ति एक ही दिन में तीन अलग-अलग एग्रीगेटर्स के साथ काम करता है, तो उसे नियमों के अनुसार तीन दिन का काम माना जाएगा।

    रजिस्ट्रेशन और पहचान
    सरकार ने इन लाभों को सुव्यवस्थित करने के लिए डिजिटल बुनियादी ढांचे पर जोर दिया है। 16 वर्ष से अधिक आयु के सभी गिग श्रमिक पंजीकरण के पात्र हैं। लाभ प्राप्त करने की अधिकतम आयु 60 वर्ष तय की गई है। ई-श्रम पोर्टल के जरिए सभी श्रमिकों का आधार-लिंक्ड रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। सरकार प्रत्येक पात्र श्रमिक को एक यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) और एक डिजिटल पहचान पत्र जारी करेगी। आधार-लिंक्ड UAN होने के कारण श्रमिक यदि प्लेटफॉर्म बदलते हैं, तो भी उनके लाभ निरंतर बने रहेंगे।


    पेंशन से बीमा तक की व्यवस्था

    श्रमिकों के स्वास्थ्य और चिकित्सा के लिए ‘आयुष्मान भारत’ योजना के साथ एकीकरण किया जाएगा। जीवन बीमा और व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा की भी सुविधा होगा। भविष्य में एक ऐसी पेंशन योजना का प्रस्ताव है जिसमें प्लेटफॉर्म और श्रमिक दोनों का अंशदान शामिल होगा। मातृत्व लाभ (Maternity Benefits) और बच्चों के लिए क्रेच की भी सुविधा होगी।


    राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड

    नियमों में एक ‘राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड’ के गठन का भी प्रावधान है। केंद्र और राज्य सरकारों के नामित अधिकारी इसमें शामिल होंगे। असंगठित क्षेत्र के श्रमिक संघों से 5 प्रतिनिधि शामिल होंगे। एग्रीगेटर संघों से भी 5 प्रतिनिधि को जगह दी जाएगी। लोकसभा, राज्यसभा और अनुसूचित जाति/जनजाति के प्रतिनिधि को भी जगह।


    बोर्ड के मुख्य कार्य

    गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों की संख्या का आकलन करना। नए प्रकार के एग्रीगेटर्स की पहचान करना। इसके अलावा, कल्याणकारी नीतियों की निगरानी और सिफारिश करना। यदि कोई श्रमिक पिछले वित्तीय वर्ष में निर्धारित 90/120 दिनों की कार्य अवधि पूरी नहीं कर पाता है, तो वह लाभ के लिए अपात्र हो जाएगा। 60 वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद सामाजिक सुरक्षा लाभ समाप्त हो जाएंगे। इन मसौदा नियमों पर वर्तमान में जनता से राय मांगी गई है, जिसके बाद मार्च 2026 तक अंतिम अधिसूचना जारी होने की उम्मीद है।